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दिल्ली हाई कोर्ट सख्त: 3 झुग्गी बस्तियों को हटाने के निर्देश, निवासियों को मिला 15 दिन का समय

नई दिल्ली दिल्ली में तीन झुग्गी बस्तियों को खाली कराने का रास्ता साफ हो गया है। प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास लोक कल्याण मार्ग और एयर फोर्स स्टेशन के नजदीक मौजूद इन बस्तियों को खाली कराने की हरी झंडी देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सरकारी जमीन से अवैध कब्जे को हटाना 'आश्रय और आजीविका के अधिकार' का उल्लंघन नहीं है, बशर्ते उनका पुनर्वास उचित तरीके से हो। दिल्ली हाई कोर्ट ने भाई राम कैंप, डीआईडी कैंप और मस्जिद कैंप के निवासियों को हटाए जाने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। हालांकि, एजेंसियों को आदेश दिया कि सवदा घेवर्रा के पुनर्वास स्थलों पर पानी, स्वच्छता, स्कूल जैसी सभी मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने इन बस्तियों के निवासियों को 15 दिन के भीतर जगह खाली करने को कहा। अदालत ने कहा कि उन्हें अक्टूबर 2025 में पहला नोटिस जारी किया गया था और तब से काफी समय बीत चुका है। सुरक्षा चिंता से अदालत सहमत अदालत ने सरकार की ओर से जाहिर की गई चिंताओं पर भी सहमति जताई। सरकार की ओर से कहा गया था कि संरक्षित क्षेत्र में अवैध कब्जा किया गया है। यह एक एयरफोर्स स्टेशन के साथ लगा हुआ है। अवैध निर्माणों को हटाने का फैसला रक्षा ढांचे को सुरक्षित करने और अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा उद्देश्य से लिया गया है। जस्टिस कौरव ने कहा, 'मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं याचिकाकर्ताओं को बेदखल करने के कारणों के रूप में पर्याप्त हैं।' क्यों दूसरी जगह नहीं जाना चाहते झुग्गीवासी याचिकाकर्ताओं ने सवदा घेवर्रा में पुनर्वास को चुनौती देते हुए कहा था कि नया स्थान उनके कार्यस्थलों और बच्चों के स्कूलों से दूर है। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकील सैयद अब्दुल हसीब ने तर्क दिया था कि आसपास के क्षेत्र में वैकल्पिक आवास की कमी के कारण वर्तमान मामले में यथास्थान पुनर्वास संभव नहीं है, और इसलिए, तीन झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 717 निवासियों को सावदा घेवरा में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया था। अदालत ने कहा- तुरंत लें फ्लैट नए स्थान पर प्रभावित लोगों को कम से कम समस्याएं हों, इसके लिए हाई कोर्ट ने कहा कि डीयूएसआईपी की नीति का पाल न किया जाए। अदालत ने कहा कि जिन्होंने वैकल्पिक आवंटन को स्वीकार नहीं किया है, वे तुरंत दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के बाद आवंटित फ्लैट लें। अदालत ने यह भी नोटिस किया कि 192 निवासियों ने आवंटन पत्र स्वीकार कर लिए थे और 136 ने आवंटित फ्लैट में शिफ्ट हो चुके हैं।

उज्जैन पहुंचीं तमन्ना भाटिया, महाकाल के दरबार में लिया आशीर्वाद; बोलीं- यह अनुभव अविस्मरणीय

उज्जैन साउथ और बॉलीवुड इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री तमन्ना भाटिया मंगलवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। उन्होंने भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर बाबा का आशीर्वाद लिया। तड़के करीब 3 बजे मंदिर पहुंचीं तमन्ना भाटिया नंदी हाल में बैठकर भक्ति भाव से भस्म आरती में शामिल हुईं। इस दौरान वे मस्तक पर चंदन लगाए पूरी तरह बाबा महाकाल की भक्ति में लीन नजर आईं। करीब दो घंटे तक उन्होंने भस्म आरती का दिव्य नजारा देखा। आरती के बाद अभिनेत्री ने नंदीजी का पूजन-अभिषेक किया और नंदी के कान में अपनी मनोकामना कही। इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को पुजारी के हाथों जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। भस्म आरती के बाद तमन्ना ने कहा, आज भगवान ने मुझे बुलाया था। बाबा महाकाल के बुलावे पर ही भक्त यहां आते हैं। यहां आकर बहुत अच्छा लगा। आज जो आरती देखने को मिली, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। आरती में शामिल होकर बहुत ऊर्जा मिलती है। सब लोग एक साथ बैठकर जिस तरह आरती देखते हैं, ऐसा दृश्य कहीं और देखने को नहीं मिलता। मंदिर परिसर में अभिनेत्री की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी विशेष रूप से बढ़ाई गई थी।

PF ट्रांसफर में 10 साल की देरी पड़ी भारी: सॉफ्टवेयर खराबी का बहाना बना EPFO, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

चंडीगढ़ क्या कोई 10 तक सॉफ्टवेयर में खराबी का बहाना बनाकर पीएफ का पैसा लटकाए रह सकता है? मामला चंडीगढ़ का है। एक कर्मचारी ने सितंबर 2010 में कर्मचारी पुराने पीएफ खाते की रकम नए खाते में ट्रांसफर करने के लिए अप्लाई किया, लेकिन उसका फंड ट्रांसफर नहीं किया गया। थक हारकर कर्मचारी ने उपभोक्ता आयोग का सहारा लिया। आयोग ने ईपीएफओ पर 50,000 रुपये का हर्जाना लगाया और मुकदमे का खर्च भी देने का आदेश दिया।  खबर के मुताबिक चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) लगभग एक दशक की देरी के लिए सॉफ्टवेयर में खराबी को बहाना नहीं बना सकता। क्या था मामला श्री गर्ग पुणे की कंपनी टेक महिंद्रा में काम करते थे। फरवरी 2009 में उन्होंने कंपनी छोड़ दी और जुलाई 2010 में इंफोसिस में जॉइन किया। सितंबर 2010 में उन्होंने टेक महिंद्रा वाले पुराने पीएफ खाते की रकम नए खाते में ट्रांसफर करने के लिए आवेदन किया। इसके बाद ईपीएफओ की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। श्री गर्ग ने आरटीआई भी दायर की। इसके बाद अप्रैल 2020 में जाकर ईपीएफओ ने सिर्फ 6.21 लाख रुपये ट्रांसफर किए, जबकि गर्ग के अनुसार उन्हें 11.07 लाख रुपये मिलने चाहिए थे। ईपीएफओ ने ब्याज न देने की वजह खाते को इनऑपरेटिव हो जाने और सॉफ्टवेयर तकनीकी खामियों को बताया। ईपीएफओ को सॉफ्टवेयर की समस्या का बहाना नहीं चलेगा उपभोक्ता आयोग ने ईपीएफओ की इस दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि सिर्फ मौखिक दावे करने और बिना ठोस सबूत के सॉफ्टवेयर की समस्या को लगभग दस साल की देरी का वैध कारण नहीं माना जा सकता। देरी की इतनी लंबी अवधि अपने आप में सेवा में कमी और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है। सुनवाई के दौरान फंड ट्रांसफर, लेकिन… हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान ईपीएफओ ने गर्ग के खाते में अतिरिक्त 3.67 लाख रुपये और 64,841 रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन आयोग ने ईपीएफओ पर 50,000 रुपये का हर्जाना और मुकदमे का खर्च भी लगाया। आयोग ने साफ किया कि तकनीकी अड़चनों को देरी का सही कारण बताने के लिए ईपीएफओ को पर्याप्त दस्तावेज पेश करने चाहिए थे, जो उसने नहीं किए। यह फैसला उन लाखों कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है, जिन्हें नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर में लंबी देरी का सामना करना पड़ता है। आयोग ने ईपीएफओ को यह राशि 60 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया है, अन्यथा इस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

SOG की बड़ी कार्रवाई, 10 से ज्यादा गिरफ्तार, नौकरी तक पहुंचा फर्जीवाड़ा

चित्तौड़गढ़ चित्तौड़गढ़ की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री मामले की जांच में नए तथ्यों के खुलासे हुए हैं. राजस्थान सरकार ने अवैध पीएचडी डिग्रियों की लिस्ट तैयार करना शुरू कर दिया है. 425 अवैध पीएचडी डिग्रियों की जांच के बाद यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया है. एसओजी पूरे फर्जी डिग्री रैकेट और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है. एसओजी को संदेह है कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी के साथ-साथ कई अन्य विश्वविद्यालयों की  भी फर्जी डिग्री उपलब्ध करवाई गई है. 10 से ज्यादा लोग गिरफ्तार आरपीएससी की प्राध्यापक भर्ती-2022 में लगाई गई फर्जी डिग्री के सत्यापन के दौरान पूरे मामले का खुलासा हुआ. बताया जा रहा है कि कमला कुमारी नामक महिला अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत डिग्री जांच में फर्जी पाई गई थी. इसके बाद एसओजी ने कार्रवाई तेज करते हुए अब तक 10 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डीन और पूर्व प्रेसिडेंट भी शामिल हैं. सरकारी नौकरी में जमकर हुआ फर्जी डिग्री का इस्तेमाल पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यूनिवर्सिटी के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से सैकड़ों डिग्रियां बेची गईं. आरोपियों ने फर्जी पीएचडी, एमए और अन्य डिग्रियां तैयार कर उसे स्टूडेंट्स को बेचा. आशंका है कि इन डिग्रियों के जरिए कई अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी भी हासिल कर ली. मामले में मास्टरमाइंड आरोपी वीरेंद्र सिंह पवार से पूछताछ में अब यह खंगाला जा रहा है कि कितने फर्जी डिग्री होल्डर है और कितने लोग नौकरियां प्राप्त कर चुके हैं. इन सभी पहलुओं पर जांच जारी है. साथ ही ऐसी कितनी प्रिंटिंग प्रेस है, जहां पर फर्जी डिग्री छपवाई गई उसकी भी लिस्ट तैयार की जा रही है.   सीएम से शिकायत करने की बात कह चुके हैं किरोड़ीलाल मीणा पहली बार नहीं है, जब किरोड़ीलाल मीणा खफा नजर आ रहे हैं. पिछले साल, वो खुद अपनी टीम के साथ गए थे और जो 200 से अधिक अभ्यर्थियों की कॉपियां सीज करके ले गए. किरोड़ी लाल मीणा ने SOG की जांच पर सवाल खड़ा करते हुए कहा था कि एसओजी तमाशा कर रही है और यह अब तमाशा नहीं चलेगा. इसकी शिकायत सीएम से की जाएगी.

822 रन का पहाड़, जिम्बाब्वे मैच में स्कॉर्पियन का ऐतिहासिक दबदबा

नई दिल्ली क्रिकेट में 300 रन कभी मैच जिताने वाला स्कोर माना जाता था. 400 पार पहुंचना आज भी बड़ी बात समझी जाती है. लेकिन जिम्बाब्वे की घरेलू क्रिकेट में जो हुआ, उसने सारे पैमाने ही तोड़ दिए. 2025-26 मसविंगो 50 ओवर फर्स्ट लीग में खेले गए मुकाबले में स्कॉर्पियन क्रिकेट क्लब ने 50 ओवरों में 822 रन ठोक डाले… और कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.सामने वाली टीम मेथेन लॉयन्स सिर्फ 28 रनों पर सिमट गई. नतीजा? स्कॉर्पियन ने मैच 794 रनों से जीत लिया. अगर यह आधिकारिक लिस्ट-ए मुकाबला होता, तो क्रिकेट इतिहास की किताबें दोबारा लिखनी पड़तीं. दरअसल, अगर यह आधिकारिक लिस्ट-ए मैच होता, तो क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बन जाता. हालांकि मेथेन लॉयन्स के गेंदबाजों के लिए राहत की बात यही रही कि इस मुकाबले को आधिकारिक लिस्ट-ए दर्जा हासिल नहीं था. ऐसा स्कोरकार्ड जिसे देखकर आंखें फटी रह जाएं … टॉस जीतकर स्कॉर्पियन के कप्तान प्रेज मकाजा ने बल्लेबाजी चुनी और फिर मैदान पर रन नहीं, तूफान बरसा. ओपनर विल्फ्रेड माटेंडे और ताकुंडा माडेम्बो ने शुरुआत से ही गेंदबाजों को निशाने पर ले लिया. चौकों-छक्कों की ऐसी बारिश हुई कि 21.3 ओवरों तक टीम का पहला विकेट गिरा, तब तक माटेंडे दोहरा शतक पूरा कर चुके थे. उन्होंने सिर्फ 75 गेंदों में 203 रन ठोक दिए, जिसमें 23 चौके और 13 छक्के शामिल थे. लेकिन राहत की सांस लेने का मौका लॉयन्स के गेंदबाजों को तब भी नहीं मिला. एक ने डबल सेंचुरी मारी… दूसरे ने ठोक दी ट्रिपल सेंचुरी दूसरे छोर पर ताकुंडा माडेम्बो लगातार तबाही मचाते रहे. जहां आम वनडे मैचों में 300 रन टीम का सुरक्षित स्कोर माना जाता है, वहां माडेम्बो अकेले ही 300 पार निकल गए. रिटायर्ड आउट होने से पहले उन्होंने 143 गेंदों में 302 रन बनाए. उनकी पारी में 50 चौके और 7 छक्के शामिल थे. यानी लगभग हर दूसरी गेंद बाउंड्री की तरफ जा रही थी. इसके बाद विन्सेंट मोयो ने 39 गेंदों में 78 रन उड़ाए, जबकि गैब्रियल जाया ने सिर्फ 49 गेंदों में नाबाद 110 रन ठोक दिए. कप्तान मकाजा जरूर इस ‘रन महोत्सव’ में ज्यादा योगदान नहीं दे सके और 5 गेंदों में सिर्फ 2 रन बना पाए. गेंदबाज नहीं… ‘एक्स्ट्रा’ भी बन गए विलेन स्कॉर्पियन के बल्लेबाजों ने जितना कहर बरपाया, मेथेन लायंस के गेंदबाजों ने भी उतनी ही मदद कर दी. टीम ने कुल 108 एक्स्ट्रा दे डाले, जिसमें 79 वाइड और 23 नो-बॉल शामिल थीं. हालत ऐसी रही कि हर गेंदबाज ने 100 से ज्यादा रन लुटाए. सबसे ‘किफायती’ गेंदबाज सिडनी शुम्बा रहे, जिनकी इकॉनमी भी 13.3 रन प्रति ओवर रही. पहली पारी में बल्लेबाजों का स्वर्ग… दूसरी में गेंदबाजों का जादू! पहली पारी देखकर लग रहा था कि पिच बल्लेबाजों के लिए किसी वीडियो गेम जैसी है. लेकिन दूसरी पारी शुरू होते ही कहानी पलट गई. मेथेन लॉयन्स की टीम सिर्फ 28/7 (7.5 ओवरों में) तक पहुंच पाई और मुकाबला वहीं रोका गया. मेथेन लॉयन्स 794 रनों से हार गई. क्रिकेट इतिहास में इतने बड़े अंतर से हार शायद ही कभी देखने को मिली हो. भारत का रिकॉर्ड भी चर्चा में फिलहाल आधिकारिक लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे बड़ा टीम स्कोर बिहार के नाम है, जिसने विजय हजारे ट्रॉफी में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 574 रन बनाए थे. उसी मैच में वैभव सूर्यवंशी ने 84 गेंदों में 190 रनों की विस्फोटक पारी खेली थी. लेकिन जिम्बाब्वे के इस मैच ने दिखा दिया कि क्रिकेट में ‘असंभव’ जैसा शब्द शायद अब बचा ही नहीं है.  

बिहार में दवा दुकानें रहेंगी बंद, ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ बड़ा आंदोलन

 पटना ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री और नई दवा नीति के विरोध में बिहार समेत देशभर के केमिस्ट संगठनों ने 20 मई को एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान थोक और खुदरा दोनों प्रकार की दवा दुकानें बंद रहेंगी। हड़ताल के कारण मरीजों और आम लोगों को दवाइयां खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन और पटना केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि आनलाइन दवा बिक्री से पारंपरिक दवा कारोबार प्रभावित हो रहा है। संगठनों की मांग है कि सरकार ऑनलाइन दवा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम लागू करें और छोटे दवा कारोबारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे। प्रदेश अध्यक्ष पीके सिंह और महासचिव राजेश आर्या ने बताया कि 19 मई की देर रात से ही दवा दुकानदार हड़ताल पर चले जाएंगे। 20 मई को दुकानें बंद रखकर प्रशासन के समक्ष रखेंगे मांग वहीं पटना इकाई के अध्यक्ष अर्जुन कुमार यादव ने सभी दवा विक्रेताओं से आंदोलन में एकजुट रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि 16 से 19 मई तक दवा दुकानदार काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे, जबकि 20 मई को दुकानें बंद रखकर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखेंगे। संगठनों ने आम लोगों से अपील की है कि वे जरूरत की दवाइयां पहले से खरीदकर रख लें, ताकि हड़ताल के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो। दवा कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

थाने पर पथराव केस में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 4 और आरोपी गिरफ्तार

अलवर अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी बाइक में मॉडिफाइड साइलेंसर लगवाकर सड़कों पर रौब झाड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन अलवर के गोविंदगढ़ में यही शौक अब कई परिवारों के लिए मुसीबत बन गया है. पिछले बुधवार को एक बाइक जप्त होने से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते थाने पर पथराव और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट तक पहुंच गया. इस घटना के बाद पुलिस ने जो एक्शन लिया उसने कोर्ट का सख्त रुख इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. ताजा अपडेट के मुताबिक, पुलिस ने सनी सिंह, दीपक सिंह, दलजीत सिंह और गुरदीप सिंह नाम के चार और आरोपियों को धर दबोचा है. इन चारों को जब अनुसूचित जाति-जनजाति विशेष न्यायालय (SC/ST Court) में पेश किया गया, तो कोर्ट ने उन्हें सीधा न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया. सरकारी वकील योगेंद्र खटाना ने कोर्ट को बताया कि इन लोगों ने न केवल सरकारी काम में बाधा डाली, बल्कि वर्दी का सम्मान न करते हुए पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला भी किया. जेल की सलाखों के पीछे अब तक 12 चेहरे गोविंदगढ़ थाने पर हुए इस हमले में शामिल चेहरों की पहचान पुलिस वीडियो फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर कर रही है. अब तक की कार्रवाई में कुल 12 बालिग आरोपी जेल की हवा खा रहे हैं, जबकि इस उपद्रव में शामिल एक नाबालिग को भी कानून के दायरे में लेते हुए किशोर न्यायालय बोर्ड के सामने पेश किया गया है. पुलिस का यह कड़ा रवैया उन लोगों के लिए एक बड़ी सीख है जो भीड़ का हिस्सा बनकर कानून तोड़ने की हिम्मत करते हैं. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शांति भंग करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा. एक छोटी सी गलती कैसे बन गई बड़ी आफत यह पूरा मामला महज एक मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइक को जप्त करने से शुरू हुआ था. उस वक्त भीड़ के आवेश में आकर थाने पर पत्थर फेंकना और पुलिसकर्मियों से उलझना इन युवकों के भविष्य पर भारी पड़ गया है. लोक अभियोजक योगेंद्र खटाना के अनुसार, पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों को भी कोर्ट ने जमानत न देकर सीधे जेल भेज दिया था.

भोपाल एयरपोर्ट से नई उड़ानों की तैयारी: श्रीनगर-चेन्नई समेत कई रूट्स के लिए मांगे गए प्रस्ताव

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एयरपोर्ट से जल्द ही कोलकाता, जयपुर, देहरादून, केरलम, चेन्नई सहित देश के बड़े शहरों सीधे हवाई कनेक्टिविटी से जुड़ने जा रहे हैं. बड़े शहरों के अलावा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू हो सकती हैं. इन उड़ानों के लिए प्रदेश सरकार ने एयरलाइंस ऑपरेटर्स से प्रपोजल मांगे हैं. इन उड़ानों के लिए कंपनियों को विशेष लाभ भी दिया जाएगा. एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इन उड़ानों के लिए कंपनियों से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल मांगे हैं. प्रपोजल के लिए 29 मई तक का समय दिया गया है। भोपाल से जुड़ेगा हर बड़ा शहर भोपाल के राजा भोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. आंकड़ों के मुताबिक एयरपोर्ट पर हर दिन करीबन 5 हजार से ज्यादा यात्री आवागमन कर रहे हैं. एयरपोर्ट से हर साल आवागमन करने वाले करीबन 8 लाख से ज्यादा यात्रियों की संख्या होती है. एयरपोर्ट से अभी देश के दिल्ली, हैदराबाद सहित चुनिंदा शहरों के लिए ही सीधी फ्लाइट उड़ान भरती है, लेकिन जल्द ही एयरपोर्ट से देश के सभी बड़े शहरों के बीच फ्लाइट उड़ान भरती दिखाई देगी। इसके लिए एयरपोर्ट प्रबंधन द्वारा प्रयास शुरू कर दिए गए हैं. राजा भोज एयरपोर्ट प्रबंधन ने श्रीनगर, चेन्नई, केरल, देहरादून, कोलकाता, जयपुर, चंडीगढ़ जम्मू सहित सभी बड़े शहरों के बीच हवाई सफर शुरू हो सकता है। सांसद भी ले चुके मीटिंग कुछ दिन पहले एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें सांसद एवं कमेटी अध्यक्ष आलोक शर्मा की मौजूदगी में सुविधाओं, यात्री अनुभव, एयर-कनेक्टिविटी, स्वच्छता, ट्रैफिक व्यवस्था और भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा की थी। इससे पहले कमेटी के सदस्य मीक ने ऑनलाइन सुझाव मांगे थे। जिनमें हरीश मूलचंदानी, रजत सिंह, संदीप शर्मा, समीर सबरवाल, संजीव ठाकुर, अरुणेश्वर सिंहदेव, अलका कुमार, राजेश बहुगुणा, सुनील मालवीय, अमित दाधीच आदि ने अपने सुझाव दिए थे। इसके बाद मीक ने बैठक में यह सुझाव रखें। इनमें एयरपोर्ट पर बड़े बैकलिट डिस्प्ले, बेहतर पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, रिक्लाइनर और चेन्नई के लिए नॉन-स्टॉप फ्लाइट का सुझाव भी शामिल हैं।साथ ही पार्किंग व्यवस्था, वार्षिक फायर सेफ्टी ऑडिट और आपात स्थितियों में स्टाफ ट्रेनिंग पर जोर दिया। कोलकाता, चंडीगढ़, गोवा, श्रीनगर, जम्मू, जयपुर, उदयपुर और चेन्नई के लिए नियमित उड़ानों की मांग रखी। फ्लाइट संख्या, शहरों की कनेक्टिविटी, टर्मिनल विस्तार और मेट्रो कनेक्टिविटी का सुझाव दिया गया था। भोपाल स्थित राजा भोज एयरपोर्ट। ये सुझाव भी आए मीटिंग में हैदराबाद होते हुए चेन्नई, कोलकाता होते हुए बागडोगरा, लखनऊ होते हुए देहरादून, जयपुर होते हुए जम्मू और वाराणसी होते हुए अयोध्या जैसे व्यवहारिक रूट सुझाए गए थे। वहीं, राजा भोज एयरपोर्ट को “हेल्दी एयरपोर्ट” बनाने के लिए फ्रूट्स बार, पोहा स्टॉल और स्थानीय स्वाद को बढ़ावा देने का सुझाव मिला था। आगमन क्षेत्र के बाहर शौचालयों की स्वच्छता पर ध्यान दिलाया। एविएशन फ्यूल में राहत, एयरपोर्ट से शहर तक एसी बस सेवा, स्थानीय इतिहास, व्यंजन और पारंपरिक कारीगरी के प्रदर्शन के सुझाव रखे थे। कई विषयों पर पहले से सुझाव भी हुआ था। एयरलाइंस ऑपरेटर्स को मिलेगी राहत एयरपोर्ट प्रबंधन ने इसके लिए सभी एयरलाइंस ऑपरेटर्स से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल मांगे हैं. इन उड़ानों के लिए ऑपरेटर्स को वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा. इसमें घरेलू उड़ान के लिए 1 हजार रुपए प्रति किलोमीटर प्रति राउंड ट्रिप पर दिया जाएगा. यह अधिकतम 10 लाख तक होगा. अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए 1 हजार रुपए प्रति किलोमीटर प्रति राउंड ट्रिप होगा, जो अधिकतम 15 लाख रुपए तक होगा. 6 माह का सपोर्ट अतिरिक्त 6 माह तक और बढ़ाया जा सकेगा. राज्य शासन ने एयरलाइंस ऑपरेटर्स से 29 मई तक प्रपोजल मांगे हैं। मिलेगी शहर के विकास को गति उधर सरकार के इस फैसले को राजा भोपाल विमानतल सलाहकार समिति के सदस्य मनोज सिंह मीक ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि "हाल ही में भोपाल सांसद आलोक शर्मा के नेतृत्व में हुई समिति की बैठक में बड़े शहरों के बीच उड़ान सेवाओं को जरूरी बताया गया था. शासन द्वारा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने की पहल से एयरलाइंस को भोपाल जैसे केन्द्र से जुड़ने का ठोस आधार मिलेगा. भोपाल मध्य भारत का स्वाभाविक कनेक्टिविटी सेंटर है. बेहतर उड़ान सेवाएं पर्यटन, निवेश, उद्योग, शिक्षा, मेडिकल यात्रा, रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक और नॉलेज एंड एआई सिटी की संभावनाओं को गति मिलेगी।

NEET-UG 2026 री-एग्जाम तय, NTA बोला परीक्षा की शुचिता जरूरी

नई दिल्ली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 एग्जाम को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया और दोबारा परीक्षा कराने का ऐलान किया. इस फैसले पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक (DG) अभिषेक सिंह ने माना कि यह फैसला छात्रों, अभिभावकों और खुद एनटीए के लिए बेहद कठिन और शर्मनाक है, लेकिन परीक्षा की पवित्रता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. अभिषेक सिंह ने आजतक को बताया कि 7 मई की देर रात हमें कुछ व्हाट्सएप मैसेज मिले थे, जिनमें ऐसे क्वेश्चन शेयर किए गए थे, जो नीट परीक्षा के क्वेश्चन पेपर से मिलते-जुलते पाए गए. इन व्हाट्सएप मैसेज को जांच के लिए तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेजा गया. उन्होंने कहा कि परीक्षा वाले दिन किसी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत नहीं मिली थी और परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई थी, लेकिन एनटीए ने पेपर लीक के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की. एनटीए के डायरेक्टर जनरल ने बताया कि 8 और 9 मई को एजेंसियों ने इन व्हाट्सएप मैसेज की जांच की और 10 व 11 मई को कुछ आरोप सही होने की जानकारी मिली. इसके बाद एनटीए ने फैसला लिया कि यदि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जरा भी सवाल उठता है तो इसे रद्द करना ही ठीक रहेगा. एनटीए प्रमुख ने कहा कि यह तय करना अभी जल्दबाजी होगी कि पेपर लीक कितने बड़े स्तर पर हुआ था और कितने लोगों तक क्वेश्चन पेपर पहुंचा था. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है. सीबीआई ही तय करेगी कि मामला किसी एक राज्य तक सीमित था या कई राज्यों तक फैला हुआ था. नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस का नाम सामने आने पर पूछे गए सवाल पर अभिषेक सिंह ने कहा कि वह जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहते. उन्होंने कहा कि सीबीआई सभी रिकॉर्ड, सबूत और आरोपों की जांच करेगी और दोषियों की पहचान करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि एनटीए परीक्षा से पहले लगातार सतर्क था और कई शिकायतों की जांच की गई थी. एजेंसी ने 120 टेलीग्राम चैनल भी ब्लॉक किए थे. छात्रों से अपील की गई थी कि यदि उन्हें किसी तरह की गड़बड़ी की जानकारी मिले तो तुरंत रिपोर्ट करें. पहले वाले रजिस्ट्रेशन से ही री-एग्जाम एनटीए के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने आजतक को बताया कि मई 2026 NEET-UG एग्जाम सेशन के लिए छात्रों द्वारा रजिस्ट्रेशन के वक्त दी गई जानकारी और उनके द्वारा चुने गए परीक्षा केंद्र दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए मान्य रहेंगे. छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने या किसी तरह की फीस देने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही एनटीए पहले भरे गए फॉर्म के दौरान जो फीस ली गई थी, उसे छात्रों को वापस करेगा. उन्होंने कहा कि भले ही इससे एनटीए पर आर्थिक बोझ पड़ेगा, लेकिन एजेंसी का लक्ष्य निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित परीक्षा कराना है. जल्द जारी होगा री-एग्जाम का शेड्यूल एनटीए प्रमुख ने कहा कि जल्द दोबारा परीक्षा आयोजित कराई जाएगी. इसकी तारीख और नए एडमिट कार्ड जारी करने सहित आगे की सभी जानकारियां एजेंसी के आधिकारिक चैनलों के जरिए अभ्यर्थियों के साथ साझा की जाएंगी. उन्होंने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों और अफवाहों पर ध्यान न दें. अभिषेक सिंह ने कहा, 'अगर कोई यह सोचता है कि वह छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ कर सकता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा. दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा, जेल भेजा जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी.'

हाईकोर्ट जज की अनोखी पहल: कार नहीं, साइकिल से पहुंचे अदालत; हर तरफ हो रही चर्चा

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस डी.डी. बंसल ने अपनी सादगी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण पेश किया है। जस्टिस बंसल सरकारी वाहन छोड़ साइकिल से हाईकोर्ट पहुंचे, जिसे देखकर राहगीर से लेकर हाईकोर्ट परिसर तक हर कोई हैरान रह गया। आमतौर पर न्यायाधीशों के साथ प्रोटोकॉल और वाहनों का काफिला जुड़ा रहता है, लेकिन जस्टिस बंसल ने अलग संदेश देते हुए सादगीपूर्ण जीवनशैली को अपनाया। बताया जा रहा है कि जस्टिस बंसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण की अपील से प्रेरित हैं। पीएम मोदी लगातार ‘मिशन लाइफ’ के तहत पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की बात करते रहे हैं। जस्टिस बंसल ने उसी संदेश को व्यवहार में उतारते हुए साइकिल से अदालत पहुंचकर लोगों को प्रदूषण कम करने और फिट रहने का संदेश दिया है। उनकी इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। जस्टिस बंसल की साइकिल यात्रा की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी उनकी जमकर सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि समाज के उच्च पदों पर बैठे लोग यदि इस तरह की पहल करेंगे तो आम जनता भी प्रेरित होगी। उनकी यह पहल उन लोगों के लिए भी संदेश मानी जा रही है जो छोटी दूरी के लिए भी वाहनों का उपयोग करते हैं। जज के साथ सुरक्षाकर्मी भी साइकिल पर सामान्य तौर पर हाई कोर्ट के जस्टिस का काफिला जब भी निकलता है तो ट्रैफिक रोक दिया जाता है. काफिले में जज साहब की गाड़ी के साथ पायलट भी चलता है. जबलपुर के सिविल लाइन इलाके में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में काम करने वाले सभी जज रहते हैं और सभी लोग सामान्य तौर पर अपनी कार से ही बंगले से हाई कोर्ट तक आते हैं. लेकिन मंगलवार सुबह का नजारा कुछ अलग था. जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल अपनी साइकिल पर बंगले से निकले और साइकिल से ही वह हाई कोर्ट पहुंचे. उनके साथ में उनके सुरक्षाकर्मी भी थे। सुबह रोजाना करते हैं साइकिलिंग जस्टिस डीडी बंसल ने बताया "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि लोग पेट्रोल का कम इस्तेमाल करें. इसलिए उन्होंने तय किया कि वह साइकिल से ही अपने बंगले से हाई कोर्ट तक जाएंगे. साइकिल चलाना उनके लिए कोई नई बात नहीं है. बचपन में भी साइकिल से ही स्कूल जाते थे. अभी भी डुमना रोड पर वह रोजाना साइकलिंग करते हैं. इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के साथ उन्होंने शहर के भीतर भी कई बार साइकिलिंग की है। तेज गर्मी के बावजूद असुविधा नहीं हुई जस्टिस डीडी बंसल का कहना है "ऐसा नहीं है कि हाई कोर्ट जज साइकिल से नहीं चल सकते. भले ही गर्मी है, थोड़ी सी परेशानी होती है लेकिन साइकिलिंग करना अच्छी बात है और उन्हें सिविल लाइन से हाई कोर्ट तक लगभग 3 किलोमीटर गर्मी में साइकिल चलाने में कोई असुविधा नहीं हुई." मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल ने जो उदाहरण पेश किया है, उसे दूसरे लोगों को भी अमल करना चाहिए. खासतौर पर अधिकारी-कर्मचारियों और नेताओं को, क्योंकि उनके राजनीतिक प्रशासनिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा ईंधन की बर्बादी होती है।