samacharsecretary.com

वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव आयोग एक्शन में, 16 राज्यों समेत 3 UT में चलेगा SIR अभियान

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने देशभर में मतदाता सूचियों को और ज्यादा पारदर्शी व सटीक बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। आयोग ने 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से यह अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया के तहत करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। चुनाव आयोग के मुताबिक, इस चरण में उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना और पंजाब जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है।  किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा SIR? आयोग ने बताया कि यह कार्यक्रम जनगणना के तहत चल रहे हाउस लिस्टिंग अभियान को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है, ताकि दोनों कार्यों में तालमेल बना रहे। SIR फेज-III में निम्नलिखित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं: राज्य     ओडिशा     मिजोरम     सिक्किम     मणिपुर     उत्तराखंड     आंध्र प्रदेश     अरुणाचल प्रदेश     हरियाणा     तेलंगाना     पंजाब     कर्नाटक     मेघालय     महाराष्ट्र     झारखंड     नागालैंड     त्रिपुरा केंद्र शासित प्रदेश     दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव (DNH & DD)     चंडीगढ़     दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) आयोग ने स्पष्ट किया कि इस तीसरे चरण के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इन तीनों क्षेत्रों में जनगणना के दूसरे चरण और बर्फबारी वाले इलाकों की परिस्थितियों को देखते हुए बाद में अलग कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 9.86 करोड़ मतदाता आंकड़ों के अनुसार, इस फेज में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 9.86 करोड़ मतदाता हैं, जहां 97,924 BLO और 96,949 BLA तैनात किए जाएंगे। कर्नाटक में 5.55 करोड़, आंध्र प्रदेश में 4.16 करोड़ और तेलंगाना में 3.39 करोड़ मतदाता इस अभियान के दायरे में आएंगे। दिल्ली में करीब 1.48 करोड़ मतदाताओं के लिए 13,026 BLO और 28,881 BLA नियुक्त किए गए हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना, फर्जी या दोहराए गए नाम हटाना और सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया और अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बन सके। पहले दो चरणों में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 59 करोड़ मतदाताओं का पुनरीक्षण पूरा किया जा चुका है। अब तीसरे चरण के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर देशभर में यह विशेष पुनरीक्षण अभियान लगभग पूरा हो जाएगा। इन क्षेत्रों में बाद में कार्यक्रम जारी किया जाएगा, क्योंकि वहां जनगणना प्रक्रिया और मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जा रहा है। तीसरे चरण के तहत अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तारीखों पर प्रक्रिया पूरी की जाएगी और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन निर्धारित समयानुसार किया जाएगा। इस चरण में शामिल प्रमुख राज्यों में Haryana, Karnataka, Maharashtra, Punjab, Odisha और Jharkhand सहित कई राज्य शामिल हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को और अधिक सटीक बनाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना है। चुनाव आयोग ने जारी किया पूरा कार्यक्रम जारी कार्यक्रम के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया मई से सितंबर 2026 के बीच चलेगी। इसमें घर-घर सत्यापन, मतदान केंद्रों का पुनर्गठन, ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन, दावे और आपत्तियां लेने की प्रक्रिया तथा अंतिम मतदाता सूची जारी करना शामिल है। सबसे पहले ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में 30 मई से 28 जून तक घर-घर सत्यापन अभियान चलेगा और 6 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड, मेघालय और दिल्ली में यह प्रक्रिया जून के अंत से शुरू होकर 7 अक्टूबर 2026 तक पूरी होगी।  आयोग ने बताया कितने BLO और BLA होंगे शामिल आयोग ने बताया कि SIR के तहत करीब 3.94 लाख बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाताओं के घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। उनके साथ राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी सहयोग करेंगे। चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे हर मतदान केंद्र पर अपने BLA नियुक्त करें, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सभी की भागीदारी वाली बन सके। आयोग के मुताबिक, इससे पहले पहले और दूसरे चरण में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 59 करोड़ मतदाताओं के लिए SIR हुआ था। उस दौरान 6.3 लाख से ज्यादा BLO और 9.2 लाख से अधिक BLA इस प्रक्रिया में शामिल हुए थे।

भारत को बिना भरोसे में लिए बांग्लादेश ने गंगा पर शुरू किया नया प्रोजेक्ट

ढाका  बांग्लादेश ने  पद्मा नदी पर एक बड़ी बांध निर्माण परियोजना को मंजूरी दी। बांग्लादेश का कहना है कि इससे भारत के फरक्का बांध के 'नकारात्मक प्रभाव' को कम करने में मदद मिलेगी। यह घटनाक्रम 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि की अवधि दिसंबर में समाप्त होने से कुछ महीने पहले सामने आया है। भारत में पद्मा नदी को गंगा कहा जाता है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट में पूरी तरह से बांग्लादेश सरकार का धन लगा है। साथ ही संभावनाएं जताई हैं कि प्रोजेक्ट 2033 तक पूरा हो सकता है। इसके जरिए राजशाही, ढाका और बरीसाल डिवीजन के जिले कवर किए जाएंगे। कितना आएगा खर्च अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अध्यक्षता वाली ECNEC यानी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद कार्यकारी समिति ने परियोजना के पहले चरण को मंजूरी दी। इसकी अनुमानित लागत 34,497.25 करोड़ टका है। 'भारत से बात करने की जरूरत नहीं' जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने पत्रकारों को बताया कि इस परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य बांग्लादेश की ओर पानी का भंडारण कर गंगा पर फरक्का बैराज के प्रभाव को कम करना है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और बांग्लादेश के बीच साझा 54 नदियों से जुड़े मुद्दों का इस परियोजना से संबंध नहीं है। बांग्लादेश के मंत्री ने कहा, 'पद्मा बांध बांग्लादेश के अपने हित का मामला है और इस मुद्दे पर भारत से किसी भी प्रकार की चर्चा की आवश्यकता नहीं है।' हालांकि, अनी ने कहा कि गंगा के जल को लेकर भारत के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा, 'गंगा के संबंध में चर्चा आवश्यक है और वह जारी है।' भारत के लिए क्यों अहम है यह बैराज भारत ने 1975 में पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के पानी को हुगली नदी की तरफ मोड़ना था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि हुगली नदी में जमी मिट्टी और गंदगी साफ हो सके और कोलकाता बंदरगाह तक जहाजों का आना-जाना आसान बना रहे। भारत का हमेशा से यही कहना है कि इस बैराज को केवल कोलकाता बंदरगाह को बचाने के लिए बनाया गया था। वहीं पानी के बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच इसे सुलझाने के लिए कई समझौते हुए हैं। इसमें 1996 की गंगा जल संधि सबसे अहम है, जिसके जरिए दोनों देश मिल-जुलकर पानी की समस्या का हल निकालते हैं। क्यों पेचीदा हुआ मुद्दा बांग्लादेश के लिए फरक्का का मुद्दा हमेशा से ही बहुत संवेदनशील रहा है। वहां की सरकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि सूखे के मौसम में पानी कम मिलने की वजह से उन्हें काफी नुकसान होता है। उनका कहना है कि कम पानी मिलने से नदियों का जलस्तर गिर जाता है और खेती पर असर होता है। इसके अलावा, बांग्लादेश की एक बड़ी चिंता यह भी है कि पानी का बहाव कम होने से समुद्र का खारा पानी नदियों के मीठे पानी में मिल रहा है। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है।

चिचिरदा समाधान शिविर में उमड़ी भारी भीड़, 450 आवेदनों का मौके पर हुआ समाधान

चिचिरदा समाधान शिविर में उमड़ा जनसैलाब, 450 आवेदनों का मौके पर ही निपटारा 17 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण हुए लाभान्वित, जनप्रतिनिधियों ने हितग्राहियों को बांटे चेक और जरूरी सामग्री रायपुर राज्य शासन के सुशासन तिहार अभियान के तहत बलौदाबाजार- भाटापारा जिले के बलौदाबाजार विकासखंड के ग्राम पंचायत चिचिरदा में विशाल समाधान शिविर का आयोजन किया गया। शासन की जनता के द्वार पर दस्तक पहल के तहत आयोजित इस शिविर में चिचिरदा सहित आसपास की 17 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। शिविर के दौरान कुल 1145 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 450 आवेदनों का त्वरित निराकरण कर हितग्राहियों को तत्काल राहत प्रदान की गई। जनप्रतिनिधियों ने वितरित की सहायता सामग्री           शिविर में जनपद अध्यक्ष सुलोचना यादव एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत पात्र हितग्राहियों को सामग्री, चेक और प्रशस्ति पत्र सौंपे। वितरण की मुख्य झलकियां इस प्रकार रहीं। नए राशन कार्ड और आयुष्मान कार्डों का वितरण, मनरेगा जॉब कार्ड और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों को नए घर की चाबियां सौंपी गईं। कृषि एवं संबद्ध विभाग के द्वारा मछली पालन विभाग द्वारा महाजाल व आइस बॉक्स और उद्यानिकी विभाग द्वारा फलदार पौधों का वितरण किया गया।खेल एवं युवा कल्याण द्वारा स्थानीय बच्चों और खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स किट प्रदान की गई। विभागीय स्टॉल्स के माध्यम से दी गई जानकारी          शिविर स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी और स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की बारीकियों से अवगत कराया गया। मंच के माध्यम से अधिकारियों ने विभागीय गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की, ताकि अधिक से अधिक लोग इनका लाभ उठा सकें।          सुशासन की यह लहर केवल चिचिरदा तक सीमित नहीं रही। सिमगा विकासखंड के ग्राम जांगड़ा में भी समाधान शिविर का सफल आयोजन हुआ। जिले के 7 नगरीय निकायों में विशेष शिविर लगाकर आम जनता की समस्याओं को सुना गया और उनका समाधान किया गया। इस पहल से न केवल ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान हो रहा है, बल्कि शासन-प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है।

कई रोगों की अचूक दवा है फलों और सब्जियों का रस

प्रकृति ने ऐसी कई सब्जियां और फल हमें दिये हैं जिनके रस के निरन्तर प्रयोग से कैंसर, कुष्ठ रोग जैसे असाध्य रोगों से मुक्ति मिल जाती है बशर्ते हम उनका सेवन विशेषज्ञों के परामर्श से करें। हर व्यक्ति मौसमी फल और सब्जियों के रस से स्वस्थ रह सकता है। आंवले का रस आंवले में विटामिन सी सबसे अधिक पाया जाता है। आंवले का ताजा रस मूत्र संबंधी सभी शिकायतों में उपयोगी रहता है। दो-तीन महीनों तक आंवलों का ताजा रस पीने से दीर्घ की निर्बलता में लाभ मिलता है। आंखों की रोशनी बढ़ाने, बहरापन दूर करने में भी यह रस लाभप्रद है। साथ ही एसिडिटी कम करने, गठिया, सफेद बालों का बढना रोकने, रक्त विकार, पीलिया, एवं हृदय रोगों में भी आंवले का जूस बहुत फायदेमंद होता है। चुकन्दर का रस चुकन्दर में पाया जाने वाला बिटिन नामक खास तत्व टयूमर एवं कैंसर की प्रकृति को शरीर से नष्ट करता है। यह तत्व शरीर में रोगों से लडने की क्षमता बढ़ाता है। इसीलिए खून की कमी होने पर एक कप की मात्रा में दिन में तीन बार इसके रस को पीने से लाभ होता है। गुर्दे संबंधी रोगों को दूर करने के लिए एक कप चुकन्दर का रस पीने से फायदा होता है। यह दिमागी गर्मी में भी फायदा करता है। गाजर का रस गाजर में विटामिन ए बहुतायत से पाया जाता है। इसीलिए गाजर का रस आंखों हेतु काफी फायदेमंद होता है। दो किलो गाजर का जूस एक-एक कप करके दिन में कई बार पीने से प्राथमिक अवस्था का कैंसर ठीक हो जाता है। गाजर के पत्तों का चार-चार बूंद रस गरम करके कान एवं नाक में डालने से सिरदर्द ठीक हो जाता है। निम्न रक्तचाप वाले रोगों के लिए भी यह रस फायदेमंद होता है। टिंडे का रस उच्च रक्तचाप वाले रोगों के लिए टिंडे के रस का सेवन करने से रक्तचाप सामान्य रहता है। हरी सब्जियों का रस बथुवा, पालक, मैथी, चैलाई, मूली इत्यादि सब्जियों में आयरन के अलावा कैल्शियम के लिए कच्चा ही प्रयोग में लाना ठीक रहता है। मिक्सी में थोड़े पानी के साथ पीसकर रस निकाला जाता है। मूली का रस पीलिया, बथुए का रस पथरी, पालक का रस पित्त और मैथी का रस पेचिश रोगों में काफी लाभदायक होता है। पेट संबंधी रोग भी उक्त रसों से दूर होते हैं। टमाटर का रस पके हुए टमाटरों का रस सुबह और शाम 20 ग्राम ताजे और कुनकुने पानी के साथ पीने से फोड़े फुंसी, एवं खुजली इत्यादि में लाभ होता है। इस रस के सेवन से मधुमेह रोगी के मूत्र में शक्कर की मात्रा सामान्य हो जाती है। इसके रस का बुखार में सेवन करने से बुखार ठीक हो जाता है। मुंह के छालों तथा मसूड़ों से रक्त बहने पर टमाटर के रस को पानी में मिलाकर कुल्ला करते रहने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं और मसूड़ों से ख्ूान आना भी रूक जाता है। फूलगोभी का रस फूलगोभी के पत्तों को पकाकर खाने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है। इसके पत्तों को आंखों पर लगाने से आंखों की लाली ठीक हो जाती है। गला बैठ गया हो तो इसके पत्तों और डंठल को पानी में उबालकर गरारे करने से गला ठीक हो जाता है। प्याज का रस एक छोटे चम्मच प्याज के रस में बराबर पानी मिलाकर छोटे बच्चों को दिन में तीन बार पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। बीस ग्राम प्याज के रस में पचास ग्राम मिसरी मिलाकर प्रातः काल बीस दिन तक सेवन करने से पथरी गलकर निकल जाती है। प्याज के रस की दो बूंदें कान में डालते रहने से बहरापन दूर हो जाता है। पीलिया रोग में दस ग्राम सफेद प्याज का रस, पांच ग्राम हल्दी, दस ग्राम गुड़ मिलाकर सुबह-शाम खिलाने से लाभ होता है। सेब का रस सेब में विटामिन बी, फास्फोरस एवं लौह तत्व अधिक पाये जाते हैं। इसका रस पेट के रोगों में फायदा करता है। बुखार, अरूचि, अजीर्ण, हृदय एवं उदर रोगों में काफी लाभकारी होता है।  

हरियाणा में VIP कल्चर पर लगाम, CM नायब सैनी ने घटाया अपने वाहनों का काफिला

चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री और मंत्रियों तथा भाजपा के सांसद-विधायकों के वाहनों का काफिला अब छोटा होगा। सप्ताह के एक दिन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बगैर वाहनों के काम चलाएंगे। अधिकतर सरकारी बैठकें वर्चुअल होंगी ताकि पेट्रोल-डीजल की बचत की जा सके। मुख्यमंत्री ने इंटरनेट मीडिया पर स्वयं यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर हरियाणा सरकार राष्ट्रहित में ईंधन की बचत और संसाधनों के उचित उपयोग के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में मैंने अपने फ्लीट में न्यूनतम वाहनों के उपयोग का निर्णय लिया है। अगले आदेश तक मेरे कारकेड में सुरक्षा की दृष्टि से केवल आवश्यक वाहन ही शामिल होंगे। साथ ही सप्ताह में एक दिन बिना किसी वाहन के कार्य करने का भी संकल्प लिया है। वाहनों का काफिला अब छोटा होगा इस फैसले के बाद अब मुख्यमंत्री और मंत्रियों तथा बीजेपी के सांसद-विधायकों के वाहनों का काफिला अब छोटा होगा। सप्ताह के एक दिन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बगैर वाहनों के काम चलाएंगे। अधिकतर सरकारी बैठकें वर्चुअल होंगी ताकि पेट्रोल-डीजल की बचत की जा सके। मुख्यमंत्री ने इसकी जानकारी कुध इंटरनेट मीडिया के जरिए साझा की है। ज्यादातर बैठकें ऑनलाइन माध्यम से आयोजित करें सीएम नायब सिंह सैनी ने यह भी कहा कि सभी विभागों के मंत्री और अधिकारी यात्रा के दौरान सीमित संख्या में वाहनों का उपयोग सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने सभी मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों से आग्रह किया कि वे बैठकें ज्यादातर ऑनलाइन माध्यम से आयोजित करें। उन्होंने कहा कि इस संबंध में, मैंने अपने काफिले में कम से कम वाहनों का उपयोग करने का निर्णय लिया है। अगले आदेश तक, मेरे काफिले में केवल सुरक्षा उद्देश्यों के लिए आवश्यक वाहन ही शामिल किए जाएंगे। हरियाणा की जनता से की अपील मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा की जनता से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि मैं सभी हरियाणा वासियों से भी निवेदन करता हूं कि अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। ईंधन बचत के इस अभियान में आप सभी सहभागी बनकर देशहित में अपना योगदान दें। मंत्रीगण और अधिकारी भी यात्रा करेंगे सीमित हरियाणा सरकार के सभी मंत्रीगण एवं सभी विभागों के अधिकारी भी यात्रा के दौरान सीमित वाहनों का उपयोग सुनिश्चित करेंगे। सभी मंत्रियों, विधायकों एवं अधिकारियों से आग्रह किया है कि अधिकतम बैठकों का आयोजन वर्चुअल माध्यम से करें तथा अत्यंत आवश्यक होने पर ही यात्रा या बैठक करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं प्रदेशवासियों से भी निवेदन करता हूं कि अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और ईंधन बचत के इस अभियान में सहभागी बनकर देशहित में अपना योगदान दें।  

केंद्रीय राज्य मंत्री पासवान ने सराहा छत्तीसगढ़ का आजीविका मॉडल, बोले- देशभर के लिए प्रेरणादायी

छत्तीसगढ़ का आजीविका मॉडल देशभर के लिए प्रेरणादायी-केंद्रीय राज्य मंत्री पासवान केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान सेरीखेड़ी में अजा परियोजना और पिंक दीदी नवाचारों का किया निरीक्षण महिला समूहों के आर्थिक स्वावलंबन की सराहना रायपुर केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने आज रायपुर जिले के सेरीखेड़ी स्थित मल्टी यूटिलिटी सेंटर का दौरा किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत संचालित इस केंद्र में उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे नवाचारों और आजीविका गतिविधियों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं द्वारा संचालित अजा (AJA) परियोजना और बेहतर बाजार लिंकेज की प्रशंसा करते हुए इसे देशभर के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बताया। अजा परियोजना वैज्ञानिक पशुपालन और सशक्त बाजार लिंकेज           मंत्री पासवान ने एकीकृत बकरी पालन मॉडल अजा के क्रियान्वयन को बारीकी से देखा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ा रही है, बल्कि वैज्ञानिक पशुपालन को भी नई दिशा दे रही है। आधुनिक शेड, नियमित टीकाकरण, पशु बीमा, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और जैविक खाद निर्माण जैसी व्यवस्थाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने समूहों द्वारा तैयार उत्पादों के लिए बाजार की सुलभ उपलब्धता को अन्य राज्यों के लिए भी सीखने योग्य बताया। पिंक दीदी और बिजनेस दीदी आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान           निरीक्षण के दौरान मंत्री ने नवा रायपुर में संचालित ई-ऑटो सेवा “प्रोजेक्ट पिंक दीदी” की सराहना की। उन्होंने हितग्राही महिलाओं से संवाद कर उनके अनुभव जाने और कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है। एकीकृत बकरी पालन परियोजना, कृषि आधारित आजीविका गतिविधियों, आजीविका सेवा केंद्र,  के अलावा उन्होंने बिजनेस दीदी, मशरूम उत्पादन और कृषि आधारित अन्य गतिविधियों का भी अवलोकन किया। घर संभालने वाली महिलाएं अब बनीं बोर्ड ऑफ डायरेक्टर        मंत्री पासवान ने कृषक उत्पादक समूह की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर महिलाओं से आत्मीय चर्चा की। इस दौरान दीदियों ने साझा किया कि कैसे वे घर की चारदीवारी से निकलकर आज एक संगठित व्यवसाय का नेतृत्व कर रही हैं। मंत्री ने महुआ कुकीज का स्वाद लिया और समूह की दीदियों के कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि असंगठित क्षेत्र को संगठित कर लाभ अर्जित करना ही वास्तविक सशक्तिकरण है। अधिकारियों को योजनाओं के विस्तार के निर्देश          केंद्रीय राज्य मंत्री ने छत्तीसगढ़ के आजीविका मॉडल को अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए अधिकारियों को इन योजनाओं के और अधिक विस्तार पर जोर देने को कहा।  केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आजीविका मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकते हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं महिला समूहों को बेहतर कार्य के लिए बधाई देते हुए योजनाओं के और विस्तार पर जोर दिया। निरीक्षण के दौरान पंचायत सचिव भीम सिंह, कलेक्टर गौरव सिंह, जिला पंचायत सीईओ कुमार बिस्वरांजन सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।         केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने मल्टी यूटिलिटी सेंटर, सेरीखेड़ी (रायपुर) अजा परियोजना, पिंक दीदी ई-ऑटो, बिजनेस दीदी, एफपीओ से संवाद की और कहा कि छत्तीसगढ़ का ग्रामीण आजीविका मॉडल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है।

हर उम्र में अलग होती है Vitamin-D की जरूरत, डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें

क्या आप जानते हैं कि भारत में लगभग 80% आबादी विटामिन-डी की कमी से जूझ रही है? हमारी भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल और धूप से बढ़ती दूरी इस समस्या का मुख्य कारण है। शरीर में विटामिन-डी की कमी से सिर्फ हड्डियां ही कमजोर नहीं होतीं, बल्कि बाल झड़ना, कमजोर इम्युनिटी और डिप्रेशन जैसी कई गंभीर बीमारियां भी घेरने लगती हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि एक दिन में हमारे शरीर को कितने विटामिन-डी की जरूरत होती है। आइए विटामिन-डी की सही मात्रा और इसकी कमी पूरी करने वाले फूड्स के बारे में जानें। रोज कितनी मात्रा में विटामिन-डी चाहिए? विटामिन-डी की जरूरत उम्र के हिसाब से हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है। इसकी मात्रा को आमतौर पर IU में मापा जाता है।     शिशु (0 से 1 वर्ष)- छोटे बच्चों को हर दिन लगभग 400 IU की जरूरत होती है।     बच्चे और वयस्क (1 से 70 वर्ष)- इस  उम्र के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को हर दिन लगभग 600 IU विटामिन-डी लेना चाहिए।     बुजुर्ग (70 वर्ष से ज्यादा)- उम्र बढ़ने के साथ शरीर की विटामिन अब्जॉर्ब करने की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए उन्हें ज्यादा विटामिन-डी, लगभग 800 IU की जरूरत होती है। शरीर में विटामिन-डी बढ़ाने के लिए डाइट हालांकि, विटामिन-डी का सबसे बेहतरीन सोर्स सूरज की रोशनी ही है, लेकिन कुछ फूड्स भी विटामिन-डी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं-     फैटी फिश- मछली विटामिन-डी के सबसे बेहतरी सोर्स में से एक है। ट्राउट और साल्मन न केवल ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर है, बल्कि विटामिन-डी का भी पावरहाउस है।     अंडे- अंडे का पीला भाग विटामिन-डी का अच्छा सोर्स है। शाकाहारी लोग जो अंडा खाते हैं, उनके लिए विटामिन-डी बढ़ाने का यह एक बेहतरीन तरीका है।     सफेद मशरूम- मशरूम एकमात्र ऐसा प्लांट बेस्ड सोर्स है, जिसमें प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी होता है। हालांकि, मशरूम खरीदते समय UV-treated या High in Vitamin D लेबल वाले मशरूम चुनें, क्योंकि ये सूरज की रोशनी या यूवी किरणों के संपर्क में आने के कारण ज्यादा पोषक होते हैं।     फोर्टिफाइड दूध- बहुत कम फूड आइटम्स में प्राकृतिक रूप से यह विटामिन होता है, इसलिए कई डेयरी और नॉन-डेयरी प्रोडक्ट्स को फोर्टिफाई किया जाता है यानी ऊपर से विटामिन-डी मिलाया जाता है। ऐसे डेयरी प्रोडक्ट्स चुनें, जिनपर फोर्टिफाइड होने का लेबल हो।     ग्रीक योगर्ट- दही या ग्रीक योगर्ट न केवल प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, बल्कि कई ब्रांड इसे विटामिन-डी के साथ फोर्टिफाई भी करते हैं। यह पाचन के साथ-साथ हड्डियों की मजबूती के लिए भी शानदार है।  

मोदी के ‘ईंधन बचाओ’ संदेश का असर, नेताओं ने छोड़ी लग्जरी गाड़ियां; साइकिल-ट्रेन से किया सफर

चंडीगढ़  हरियाणा में बृहस्स्पतिवार को सत्ता और सादगी की एक अलग तस्वीर देखने को मिली। आम दिनों में लंबी-लंबी गाड़ियों के काफिलों के बीच चलने वाले मंत्री और वीआईपी इस बार सीमित वाहनों के साथ नजर आए। कहीं मंत्री साइकिल से कार्यक्रम में पहुंचे तो कहीं विधायक ट्रेन में सफर करते दिखाई दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचत और सरकारी संसाधनों के सीमित उपयोग की अपील के बाद हरियाणा सरकार ने वीआईपी कल्चर में कटौती की शुरुआत कर दी है। इसका सबसे बड़ा असर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के काफिले में दिखाई दिया। जहां पहले मुख्यमंत्री के काफिले में 14 से 15 गाड़ियां चलती थीं, वहीं गुरुवार को उनका काफिला केवल चार वाहनों तक सीमित नजर आया। मुख्यमंत्री आवास से निकलते समय सुरक्षा और आवश्यक स्टाफ के वाहन ही साथ रखे गए। सीएम बोले – जरूरत भर वाहन ही चलेंगे मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सरकारी खर्च और ईंधन की बचत को लेकर बड़ा संदेश देते हुए घोषणा की है कि अगले आदेश तक उनके कारकेड में केवल जरूरी वाहन ही शामिल किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सप्ताह में एक दिन बिना सरकारी वाहन के काम करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही सभी मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों से भी सीमित वाहनों का उपयोग करने और अधिक से अधिक बैठकों को वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने की अपील की गई है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल सरकारी खर्च कम होगा, बल्कि ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। सरकार के इस संदेश का असर मंत्रियों और विधायकों के व्यवहार में भी दिखाई दिया। पंचकूला स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित निकाय चुनाव सम्मान समारोह में कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा साइकिल पर सवार होकर पहुंचे। उनके साथ कार्यकर्ताओं ने भी साइकिल यात्रा की। डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि भाजपा केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि जनहित के संदेशों को व्यवहार में लागू करके उदाहरण पेश करना चाहती है। वहीं पानीपत से विधायक प्रमोद विज भी अपनी निजी गाड़ी के बजाय ट्रेन से चंडीगढ़ पहुंचे। इसे भी सरकार के ‘कम खर्च, कम ईंधन’ अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारियों के वाहनों की भी होगी समीक्षा मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद रातोंरात विभिन्न विभागों में वीआईपी और वरिष्ठ अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए वाहनों की समीक्षा शुरू कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक, जिन अधिकारियों और विभागों के पास एक से ज्यादा वाहन हैं, वहां उनकी संख्या कम की जाएगी। कई विभागों में अतिरिक्त गाड़ियों को हटाने और सीमित उपयोग की नई व्यवस्था लागू करने पर काम शुरू हो चुका है। सरकार का फोकस यह संदेश देने पर है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही होना चाहिए। सुरक्षा से समझौता नहीं, फिजूलखर्ची पर रोक मुख्यमंत्री को जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है और प्रोटोकॉल के अनुसार उनके साथ बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं। इसके बावजूद सरकार ने सुरक्षा से समझौता किए बिना काफिले को छोटा करने का निर्णय लिया है। आमतौर पर मुख्यमंत्री के साथ सुरक्षा, स्टाफ और पायलट वाहनों सहित लंबा काफिला चलता था, लेकिन अब केवल आवश्यक गाड़ियों को ही शामिल किया जा रहा है। जानकार इसे सरकार की ‘लो-प्रोफाइल गवर्नेंस’ रणनीति के रूप में देख रहे हैं, जिसके जरिए जनता के बीच सादगी और जवाबदेही का संदेश देने की कोशिश की जा रही है।  

ज्येष्ठ अमावस्या 2026: 15 या 16 मई, जानिए इस दिन का धार्मिक महत्व और पापों से मुक्ति का रहस्य

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ महीने की अमावस्या का अपना एक अलग ही महत्व है. साल 2026 में यह पावन तिथि 16 मई, शनिवार के दिन पड़ रही है. वैसे तो अमावस्या की शुरुआत 15 मई की सुबह से ही हो जाएगी और यह 16 मई की दोपहर तक रहेगी, लेकिन उदया तिथि की परंपरा के अनुसार मुख्य पूजा-पाठ 16 मई को ही की जाएगी. यह दिन इसलिए भी खास होगा क्योंकि इसी दिन शनि जयंती और वट सावित्री का व्रत भी मनाया जाएगा, जिससे इस दिन की महिमा और भी बढ़ जायेगी. शास्त्रों में ज्येष्ठ अमावस्या को मन की शुद्धि और पूर्वजों को याद करने (तर्पण) के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है. असल में यह दिन हमें एक मौका देता है कि हम अपनी पुरानी गलतियों को सुधारें, जीवन में नई ऊर्जा का संचार करें और मन की शांति के लिए कुछ नेक संकल्प लें. स्नान और दान का शुभ मुहूर्त और विधि ज्येष्ठ अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान करने की अपना ही महत्व है. इससे शरीर की थकावट के साथ-साथ मन का भारीपन भी दूर हो जाता है. इस साल 16 मई को सूर्योदय के समय नहाना सबसे अच्छा रहेगा. अगर आप शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हैं, तो सुबह 4:05 से 5:20 के बीच का समय सबसे बढ़िया है. नहाने के बाद एक तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल चढ़ाएं और फिर अपनी श्रद्धा के अनुसार अनाज, कपड़े या काले तिल का दान करें. इस बार अमावस्या शनिवार को है, इसलिए शनि मंदिर में तेल चढ़ाना या किसी गरीब को खाना खिलाना बहुत सुकून देगा. दान सिर्फ पुण्य के लिए नहीं, बल्कि अपने अंदर की कड़वाहट को खत्म करके नई ऊर्जा भरने के लिए किया जाता है. पापों से मुक्ति और पितृ तर्पण का विशेष विधान ज्येष्ठ अमावस्या असल में खुद को मन से साफ करने और अपनी जड़ों से जुड़ने का दिन है. पुरानी परंपरा है कि पवित्र कुंड या गंगा में डुबकी लगाने से मन पर बोझ और अनजाने में हुई गलतियों का एहसास कम होता है. यह दिन हमारे पूर्वजों (पितरों) को याद करने का है. उनके नाम पर तर्पण करने या उन्हें याद करने से घर में शांति आती है और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद बना रहता है. जब पितर खुश होते हैं, तो घर के आपसी झगड़े भी कम होने लगते हैं और खुशहाली आती है. अमावस्या के दिन दान और संयम का महत्व अमावस्या के दिन अपनी इच्छाओं पर थोड़ा काबू रखने और दूसरों की मदद करने से बहुत शांति मिलती है. किसी जरूरतमंद को काले तिल, गरम खाना या कपड़ा दान करने से आपके जीवन की उलझनें कम हो सकती हैं. इस दिन कोशिश करें कि सादा भोजन करें और गुस्से से बचें, क्योंकि जब मन शांत होगा तभी पूजा-पाठ का असली फल मिलेगा. शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दिया जरूर जलाएं; इससे शनि देव और पितर दोनों की कृपा मिलेगी. संयम और सादगी से बिताया गया यह दिन हमें अंदर से मजबूत बनाएगा और जीवन में संतोष और खुशी भर देगा.

स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के बीच बड़ा फैसला, MP में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू

स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26: प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 प्रभावी : लापरवाही और नियमों के उल्लंघन पर होगी दंडात्मक कार्रवाई – आयुक्त भोंडवे भोपाल                  स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने सभी नगरीय निकायों को 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026' का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब शहर से कचरा केवल हटाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि 'वेस्ट टू वेल्थ' की परिकल्पना को साकार करते हुए रिसायकल के लिए इसका जिम्मेदारी से प्रबंधन करना आवश्यक है। इन नवीन नियमों के तहत अब प्रत्येक घर में कचरे का अलग-अलग संग्रहण अनिवार्य किया है, अब नागरिकों को गीला, सूखा और घरेलू हानिकारक कचरा पृथक डस्टबिन में देना होगा। इस सुव्यवस्थित प्रक्रिया के माध्यम से गीले कचरे से जैविक खाद का निर्माण किया जाएगा तथा सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रण होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ''स्वच्छता अब सिर्फ आदत नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जिम्मेदारी है।'' खुले में कचरा फेंकने, प्लास्टिक जलाने या सार्वजनिक स्थानों को गंदा करने जैसी गतिविधियों पर अब कड़ी कार्रवाई होगी तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में दंडात्मक प्रक्रिया के साथ जुर्माना भी वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त, थोक कचरा उत्पादकों (BWG) को भी अपने परिसर में ही कचरे का ऑन-साइट प्रसंस्करण करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।       स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के अंतर्गत सुरक्षित पर्यावरण और स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए राज्य के 406 नगरीय निकाय पूर्णतः कटिबद्ध हैं, जिनमें 28 नए निकाय पहली बार इस प्रतिस्पर्धा में शामिल हो रहे हैं। नागरिकों की छोटी पहल से बड़े बदलाव का लक्ष्य लेकर चल रहे इन निकायों द्वारा जमीनी स्तर पर की जा रही तैयारियों का मूल्यांकन विभिन्न श्रेणियों में किया जाएगा। सर्वेक्षण में मैदानी स्तर पर उत्कृष्ट व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा विभागीय अमले की दक्षता बढ़ाने के लिए प्रदेश में 51 क्षमता वर्धन कार्यशालाओं का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया है। इसके साथ ही, तीन वृहद राज्य स्तरीय कार्यशालाएं भी की गई। जिनके माध्यम से सभी 406 निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO), यंत्रियों और स्वच्छता नोडल अधिकारियों का प्रभावी क्षमतावर्धन किया गया है। मैदानी स्तर पर कार्य कर रहे अमले को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 874 महिला सफाई मित्रों को भी 15 विभिन्न बैचों में 'स्वास्थ्य एवं स्वच्छता' तथा 'कार्य के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों' पर विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। सुदृढ़ जन-भागीदारी और इन व्यापक प्रशासनिक तैयारियों के बल पर मध्यप्रदेश का लक्ष्य अपने शहरों को पूर्णतः स्वच्छ बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर अपना गौरव स्थापित करना है।