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जल संरक्षण एवं कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही ‘खेत तालाब योजना

किसानों की समृद्धि का आधार बनी योगी सरकार की योजना, डिजिटल पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ जल संरक्षण एवं कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही  ‘खेत तालाब योजना योजना के तहत सरकार दे रही ₹52,500 का अनुदान, ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर किसानों का चयन    खेत तालाब से किसान कर रहे मत्स्य पालन, मोती, सिंघाड़ा उत्पादन एवं अन्य जलीय खेती ‘खेत तालाब योजना’ से जल संरक्षण को मिला बढ़ावा, किसानों को मिल रहे सिंचाई के साथ अतिरिक्त आय के स्रोत  लखनऊ  योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए महत्वकांक्षी योजनाएं चला रही है। सरकार का प्रयास है कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि समृद्ध और आत्मनिर्भर उद्यमी भी बनें। साथ ही योगी सरकार किसान को खेती तक सीमित नहीं, बल्कि उनको आधुनिक तकनीक, जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं और अतिरिक्त आय के स्रोतों से भी जोड़ रही है। इसी क्रम में ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। यह योजना जल संरक्षण और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ‘खेत तालाब योजना’ से जल संरक्षण को मिल रहा बढ़ावा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित ‘खेत तालाब योजना’ का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संचयन कर किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी सुविधा उपलब्ध कराना है। आज के समय में भूगर्भ जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, ऐसे में खेत तालाब योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। खेतों में बनाए जाने वाले तालाब वर्षा के पानी को संरक्षित करते हैं, जिससे सूखे के समय भी किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहता है। आधी लागत सरकार वहन कर रही  इस योजना के तहत 22 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर आकार का तालाब बनाया जाता है। इसकी कुल लागत ₹1,05,000 निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार द्वारा ₹52,500 का अनुदान दिया जाता है। यानी किसान को आधी लागत सरकार वहन कर रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी इस योजना का लाभ आसानी से मिल पा रहा है। सिंचाई के साथ अतिरिक्त आय के अवसर यह योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय के नए अवसर भी प्रदान कर रही है। खेत तालाब में किसान मत्स्य पालन, मोती उत्पादन, सिंघाड़ा उत्पादन और अन्य जलीय खेती कर सकते हैं। इससे किसानों की आय के कई स्रोत विकसित हो रहे हैं। प्रदेश सरकार आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही है। योजना के अंतर्गत स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं पम्पसेट पर ₹15,000 अथवा 50 प्रतिशत तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो रही है और जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ सरकार ने इस योजना में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की है। किसानों का चयन ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर ‘प्रथम आवक प्रथम पावक’ यानी पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत पर किया जाएगा। इससे किसी प्रकार की सिफारिश या भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो रही है और पात्र किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। इससे किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उन्हें सुविधा मिल रही है। आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बड़ा कदम- आर.पी. कुशवाहा कानपुर नगर के भूमि संरक्षण अधिकारी, आर.पी. कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार कृषि को आत्मनिर्भर और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। जल संरक्षण के माध्यम से खेती को सुरक्षित बनाना, किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली से जोड़ना और खेती के साथ मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार की दूरदर्शी नीति को दर्शाता है। आज प्रदेश के हजारों किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। खेत तालाब बनने से फसलों की उत्पादकता बढ़ रही है और किसानों को मौसम पर निर्भरता कम करनी पड़ रही है।  अनुदान दो चरणों में मिलेगाः 1. पहली किस्तः तालाब की खुदाई का काम पूरा होने पर। 2. दूसरी किस्तः पानी आने का रास्ता (इनलेट) और डिस्प्ले बोर्ड लगने के बाद। 3. जरूरी दस्तावेज: आवेदन के लिए किसान की 'फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है। 4. टोकन मनीः ऑनलाइन आवेदन के साथ 1000 रुपये की टोकन राशि जमा करनी होगी, जो वापस मिलेगी। 5. वेबसाइटः इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल Agri darshan पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। 6. समय सीमाः बुकिंग के 15 दिन के भीतर सत्यापन होगा और 30 दिन के भीतर तालाब तैयार करना होगा।

PM मोदी का वैश्विक संदेश: नया भारत सीमाओं में नहीं बंधता

द हेग नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आज का भारत अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रहा है और उसकी आकांक्षाएं अब केवल अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब वैश्विक स्तर पर नेतृत्व की भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत अब बड़े सपने देख रहा है करीब 40 मिनट के संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “आज भारत कह रहा है कि हमें केवल परिवर्तन नहीं चाहिए, हमें सर्वश्रेष्ठ चाहिए और सबसे तेज गति चाहिए। जब आकांक्षाएं असीमित होती हैं तो प्रयास भी असीमित हो जाते हैं।” उन्होंने कहा कि भारत अब ओलंपिक की मेजबानी करना चाहता है, वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनना चाहता है, हरित ऊर्जा में नेतृत्व करना चाहता है और दुनिया की विकास शक्ति बनना चाहता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल ही में भारत ने दुनिया के सबसे बड़े और सफल एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। इससे पहले G20 Summit का सफल आयोजन भी भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का उदाहरण है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम   उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में भारत में केवल चार यूनिकॉर्न कंपनियां थीं, जबकि अब लगभग 125 सक्रिय यूनिकॉर्न कंपनियां काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप अब एआई, रक्षा, अंतरिक्ष और नवाचार के क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने हालिया विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में 80 से 90 प्रतिशत तक मतदान हुआ, जबकि महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। वैश्विक संकटों पर PM मोदी की चेतावनी अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक हालात पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय युद्ध, आतंकवाद, आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के दौर से गुजर रही है। Vienna को “सिटी ऑफ पीस” बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यदि दुनिया ने समय रहते हालात नहीं संभाले तो पिछले कई दशकों की उपलब्धियां व्यर्थ हो सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और दुनिया को “विकास बनाम विनाश” के बीच चुनाव करना होगा। विपक्ष पर कटाक्ष प्रधानमंत्री ने हल्के अंदाज में विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या “झालमुड़ी” अब हेग तक पहुंच गई है। इसे राजनीतिक हलकों में विपक्षी दलों पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है।  नीदरलैंड के ट्यूलिप फूल का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत कमल के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा, ट्यूलिप और कमल दोनों हमें सिखाते हैं कि जड़ें चाहे पानी में हों या धरती में, सुंदरता और शक्ति दोनों प्राप्त की जा सकती हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि India और Netherlands वैश्विक मंचों पर मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

नवजात शिशुओं की डिस्चार्ज दर 82.3 प्रतिशत पर पहुँची

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त एवं उन्नत बनाया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ ही उनकी सतत एवं सशक्त निगरानी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे आमजन को गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकें। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार द्वारा आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। इन प्रयासों से प्रदेश में नवजात एवं मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में सतत सुधार दर्ज किया जा रहा है। नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों का सशक्त संचालन राज्य में जन्म के समय कम वजन वाले, समय पूर्व जन्मे एवं जन्म के समय गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के बेहतर उपचार और नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयाँ (एसएनसीयू) प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। इन इकाइयों से नवजात शिशुओं को विशेषज्ञ उपचार, आधुनिक चिकित्सा उपकरण एवं प्रशिक्षित चिकित्सकीय देखरेख उपलब्ध कराई जा रही है। उपचार एवं डिस्चार्ज दर में उल्लेखनीय वृद्धि वर्ष 2024-25 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ 1 लाख 29 हजार 212 नवजात शिशुओं को उपचार प्रदान किया गया था, वहीं वर्ष 25-26 में यह संख्या बढ़कर 1 लाख 34 हजार 410 तक पहुँच गई है। साथ ही नवजात शिशुओं की सफलतापूर्वक डिस्चार्ज दर भी अब तक के सर्वोत्तम स्तर 82.3 प्रतिशत पर पहुँच गई है। राज्य में संचालित 62 एसएनसीयू में इस वर्ष 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक कुल 15 हजार 54 नवजात शिशुओं को उपचारित किया गया, जिनमें से 12 हजार 818 नवजात शिशुओं को सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया। एसएनसीयू में 85.2 प्रतिशत डिस्चार्ज दर राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की गई है। इसके साथ ही लामा दर मात्र 2.12 प्रतिशत, रेफरल दर 4.2 प्रतिशत एवं मृत्यु दर 8.29 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। यह उपलब्धि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण नवजात चिकित्सा सेवाओं एवं प्रभावी उपचार प्रबंधन को दर्शाती है। बिस्तरों की संख्या में वृद्धि से उपचार क्षमता बढ़ी राज्य शासन द्वारा नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों में उपलब्ध बिस्तरों की संख्या में भी वृद्धि की गई है। वर्ष 24-25 में जहाँ कुल 1654 बिस्तर उपलब्ध थे, वह अब बढ़कर 1770 हो गए हैं। इससे अधिक संख्या में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। आधुनिक उपकरणों एवं विशेषज्ञ उपचार की उपलब्धता राज्य सरकार गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये अत्याधुनिक एवं समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य की एसएनसीयू इकाइयों में जटिल एवं गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के उपचार के लिये वेंटिलेटर, सी-पैप, निर्बाध ऑक्सीजन, फोटोथेरेपी सहित आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही, फैसिलिटी बेस्ड न्यूबोर्न केयर (एफबीएनसी) में प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स द्वारा वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती नवजात शिशुओं को आवश्यकता अनुसार वेंटिलेटर सपोर्ट, सी-पैप, फोटोथेरेपी एवं ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध कराया जा रहा है तथा एंटीबायोटिक के तार्किक उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही सर्फ़ैक्टेंट एवं कैफीन साइट्रेट जैसी आधुनिक औषधियों के उपयोग से समय पूर्व जन्मे गंभीर नवजात शिशुओं का उपचार कर जीवन संरक्षित किया जा रहा है। इन इकाइयों में भर्ती लगभग 8 प्रतिशत नवजात शिशुओं को वेंटिलेटर सपोर्ट, 37 प्रतिशत को फोटोथेरेपी, 49 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक ऑक्सीजन तथा 47 प्रतिशत नवजात शिशुओं को तार्किक एंटीबायोटिक उपचार प्रदान किया गया। एनबीएसयू के माध्यम से उप जिला स्तर पर सशक्त नवजात उपचार सेवाएं राज्य में संचालित 200 एनबीएसयू (न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट) के माध्यम से भी नवजात शिशुओं को प्रभावी उपचार एवं स्थिरीकरण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष 1 अप्रैल से 15 मई 2026 तक 2 हजार 241 नवजात शिशुओं को उपचार कर सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया है। एनबीएसयू इकाइयों के माध्यम से उच्च जोखिम वाले नवजात शिशुओं को स्थिरीकरण सेवाओं के साथ-साथ ऑक्सीजन सपोर्ट एवं फोटोथेरेपी जैसी आवश्यक उपचार सुविधाएं उप जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को प्रारंभिक स्तर पर ही समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल रहा है, जिससे उनकी जीवन रक्षा एवं बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं। एमएनसीयू : “जीरो सेपरेशन” अवधारणा की अभिनव पहल माँ एवं नवजात शिशु को एक साथ गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में एमएनसीयू (मदर एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट) की अवधारणा को भी विस्तार दिया जा रहा है। यह व्यवस्था “जीरो सेपरेशन” सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें माँ और नवजात शिशु को अलग नहीं किया जाता। इससे स्तनपान, कंगारू मदर केयर तथा नवजात की समुचित देखभाल को बढ़ावा मिलता है। यह पहल विशेष रूप से कम वजन एवं समय पूर्व जन्मे शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रही है। प्रदेश में 23 एमएनसीयू संचालित प्रदेश में वर्तमान में 23 एमएनसीयू प्रारंभ किए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से माताओं एवं नवजात शिशुओं को संवेदनशील, सुरक्षित एवं समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित हो तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके। मातृ दुग्ध इकाई (सीएलएमसी) से नवजात शिशुओं को जीवनदायी पोषण प्रदेश सरकार नवजात शिशु को समय पर सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने के लिए सतत प्रयास कर रही है। कम वजन एवं बीमार नवजात शिशुओं को बेहतर पोषण एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने के लिए मातृ दुग्ध इकाई से नवजातों को जीवनदायी पोषण दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में इंदौर एवं भोपाल स्थित 2 क्रियाशील सीएलएमसी (कॉम्प्रहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर) इकाइयों के माध्यम से 1,031 स्वैच्छिक माताओं द्वारा 241.6 लीटर मातृ दुग्ध दान किया गया। दान किए गए इस मातृ दुग्ध को वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रूप से पाश्चुरीकृत कर 1,159 कमज़ोर एवं बीमार भर्ती नवजात शिशुओं को कुल 282.11 लीटर सुरक्षित … Read more

खेत में तालाब बनाकर बढ़ाएं आय, सिंचाई से लेकर मत्स्य पालन तक मिलेगा फायदा

लखनऊ यूपी सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए महत्वकांक्षी योजनाएं चला रही है। सरकार का प्रयास है कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि समृद्ध और आत्मनिर्भर उद्यमी भी बनें। इसी क्रम में ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। यह योजना जल संरक्षण और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को सरकार 52500 रुपये का सीधा अनुदान दे रही है। इस योजना का लाभ पाने के लिए किसानों को ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग करानी होगी। उसी के आधार पर योजना के लिए किसानों का चयन किया जाएगा। इस योजना के तहत 22 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर आकार का तालाब बनाया जाता है। इसकी कुल लागत ₹1,05,000 निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार द्वारा 52,500 का अनुदान दिया जाता है। यानी किसान को आधी लागत सरकार वहन कर रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी इस योजना का लाभ आसानी से मिल पा रहा है। सिंचाई के साथ अतिरिक्त आय के अवसर यह योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय के नए अवसर भी प्रदान कर रही है। खेत तालाब में किसान मत्स्य पालन, मोती उत्पादन, सिंघाड़ा उत्पादन और अन्य जलीय खेती कर सकते हैं। इससे किसानों की आय के कई स्रोत विकसित हो रहे हैं। प्रदेश सरकार आधुनिक सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही है। योजना के अंतर्गत स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वहीं पम्पसेट पर 15,000 अथवा 50 प्रतिशत तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो रही है और जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। पारदर्शी व्यवस्था से किसानों को सीधा लाभ सरकार ने इस योजना में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की है। किसानों का चयन ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर ‘प्रथम आवक प्रथम पावक’ यानी पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत पर किया जाएगा। इससे किसी प्रकार की सिफारिश या भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो रही है और पात्र किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। इससे किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उन्हें सुविधा मिल रही है। आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बड़ा कदम कानपुर नगर के भूमि संरक्षण अधिकारी, आर.पी. कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार कृषि को आत्मनिर्भर और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। जल संरक्षण के माध्यम से खेती को सुरक्षित बनाना, किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली से जोड़ना और खेती के साथ मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार की दूरदर्शी नीति को दर्शाता है। आज प्रदेश के हजारों किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। खेत तालाब बनने से फसलों की उत्पादकता बढ़ रही है और किसानों को मौसम पर निर्भरता कम करनी पड़ रही है। अनुदान दो चरणों में मिलेगा 1. पहली किस्तः तालाब की खुदाई का काम पूरा होने पर। 2. दूसरी किस्तः पानी आने का रास्ता (इनलेट) और डिस्प्ले बोर्ड लगने के बाद। 3. जरूरी दस्तावेज: आवेदन के लिए किसान की 'फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है। 4. टोकन मनीः ऑनलाइन आवेदन के साथ 1000 रुपये की टोकन राशि जमा करनी होगी, जो वापस मिलेगी। 5. वेबसाइटः इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल Agri darshan पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। 6. समय सीमाः बुकिंग के 15 दिन के भीतर सत्यापन होगा और 30 दिन के भीतर तालाब तैयार करना होगा।

रेल फाटक पर खड़ी बस बनी आग का गोला, मालगाड़ी की टक्कर से 20 से ज्यादा घायल

बैंकॉक बैंकॉक में शनिवार को एक दर्दनाक रेल हादसे में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा शहर के मध्य क्षेत्र में स्थित एयरपोर्ट रेल लिंक स्टेशन के पास हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के मुताबिक, रेलवे क्रॉसिंग पर कई वाहन रुके हुए थे। इसी दौरान तेज रफ्तार मालगाड़ी सामने खड़ी नारंगी रंग की सार्वजनिक बस से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रेन बस को काफी दूर तक घसीटते हुए ले गई। इस दौरान आसपास खड़े कई अन्य वाहन भी ट्रेन की चपेट में आ गए।  हादसे के तुरंत बाद बस में आग लग गई और देखते ही देखते वह आग का गोला बन गई।  वीडियो में कई मोटरसाइकिल सवारों को सड़क पर गिरते और उछलते हुए देखा गया। घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों की चीख-पुकार सुनाई देने लगी। Erawan Medical Center के अनुसार, हादसे में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है और 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके बाद बचाव दल जली हुई बस के भीतर पहुंचे और घायलों को बाहर निकाला। हादसे के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें ट्रेन को बस से टकराते और फिर बस में आग लगते देखा जा सकता है।

अफ्रीका में छिपा ISIS का खूंखार चेहरा खत्म, अबू बकर ढेर

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और नाइजीरिया की सेनाओं ने शुक्रवार को एक अभियान में इस्लामिक स्टेट समूह के एक कुख्यात आतंकी को मार गिराया। ट्रंप ने देर रात एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस संयुक्त अभियान की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अबू बक्र अल-मैनुकी वैश्विक स्तर पर इस्लामिक स्टेट समूह का दूसरा सबसे बड़ा आतंकी था और 'उसे लगा कि वह अफ्रीका में छिप सकता है लेकिन उसे यह नहीं पता था कि हमारे पास ऐसे सूत्र हैं, जो हमें उसकी गतिविधियों की जानकारी देते रहते थे'। नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका अल-मैनुकी को आईएस के संगठन और वित्तपोषण में प्रमुख व्यक्ति मानता था और वह अमेरिका और उसके हितों के खिलाफ हमले की साजिश रच रहा था। आतंकी समूहों पर नजर रखने वाली संस्था 'काउंटर एक्सट्रीमिज्म प्रोजेक्ट' के अनुसार, 1982 में नाइजीरिया के बोर्नो प्रांत में जन्मे अल-मैनुकी ने 2018 में मम्मन नूर के मारे जाने के बाद पश्चिम अफ्रीका में आईएस शाखा की बागडोर संभाली थी।

शिक्षा और विकास पर फोकस,हर प्रखंड में मॉडल स्कूल और नए डिग्री कॉलेज

पटना बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए की नई सरकार का गठन हुए एक महीना हो गया है। सम्राट चौधरी ने बीते 15 अप्रैल को उन्होंने लोक भवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अपने एक माह के कार्यक्रम में उन्होंने 7 बड़े फैसले लिए हैं। इनमें बिहार के 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप बनाना भी शामिल है। इन टाउनशिप में पूरे प्लान के साथ कॉलोनियां बसेंगी। इनमें एक तरफ बाजार होंगे तो दूसरी ओर लोगों के रहने के लिए आवास तय होंगे। कॉलोनियों में चौड़ी सड़कों का निर्माण होगा। कॉलोनियों को हरा-भरा रखने के लिए सड़कों के किनारे और पार्कों में बड़ी संख्या में पेड़ लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री का यह ड्रीम प्रोजेक्ट में एक है। इसमें सासाराम को जोड़ने का प्रस्ताव आया है। इससे शहरी दबाव में कमी आएगी, लोगों को सुविधायुक्त जीवन का लाभ मिल सकेगा। इन स्थानों पर बनेंगी टाउनशिप पटना में पाटलिपुत्र, सोनपुर में हरिहरनाथपुर, गया में मगध, दरभंगा में मिथिला, सहरसा में कोसी, पूर्णिया में पूर्णिया, मुंगेर में अंग, सीतामढ़ी में सीतापुरम, भागलपुर में विक्रमशिला, मुजफ्फरपुर में तिरहुत और छपरा में सारण नाम से टाउनशिप बनेगी। हर प्रखंड में मॉडल स्कूल और डिग्री कॉलेज सम्राट सरकार ने अपने दूसरी कैबिनेट की बैठक में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने सभी जिला स्कूलों और प्रत्येक प्रखंड के चयनित एक उच्च माध्यमिक विद्यालय को ‘मॉडल स्कूल’ के रूप में विकसित करने की योजना को मंजूरी दी। साथ ही इसके लिए मुख्यमंत्री ₹800 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी, ताकि इस योजना को धरातल पर उतारने में दिक्कत नहीं आए। वहीं, उन्होंने डिग्री कॉलेज रहित 211 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए ₹104 करोड़ (₹50 लाख प्रति कॉलेज) भी स्वीकृत किए। इसके लिए 9152 पदों का सृजन होगा। सहयोग पोर्टल और सहयोग शिविर लोगों की समस्याओं के त्वरित निष्पादन और सरकार के उत्तरदायित्व को ध्यान में रखकर सहयोग की त्रिवेणी को शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सहयोग हेल्पलाइन : 1100, सहयोग पोर्टल : sahyog.bihar.gov.in और पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाने का निर्णय लिया है। शिविर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को लगेंगे। शिविर में ब्लॉक, थाना और अंचल की तमाम शिकायतों की सुनवाई होगी। पोर्टल पर सरकारी योजना से जुड़ी शिकायत के निबटारे के लिए 30 दिन का लक्ष्य तय है। 30 में शिकायत का निबटारा नहीं होता है, तोदोषी अधिकारी या कर्मचारी का निलंबन तय है। निजी स्कूलों में मनमानी फीस पर लगाम निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर भी एक बड़ी पहल मुख्यमंत्री ने की। उन्होंने कहा है कि निजी विद्यालयों को फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। मनमानी फीस बढ़ोतरी और अनावश्यक शुल्क पर रोक रहेगी। छात्रों के परिजनों को किताबें और यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदने की स्वतंत्रता होगी। इसके लिए स्कूल प्रबंधन किसी को खास दुकान से खरीदने को बाध्य नहीं करेंगे। 50 करोड़ तक के ठेके बिहारियों को मिलेंगे छठे फैसले में 50 करोड़ रुपये तक के सिविल कार्यों में राज्य के ठेकेदारों (संवेदकों) को प्राथमिकता देने के लिए बिहार लोक निर्माण संहिता में संशोधन किया गया। अब से 50 करोड़ रुपये तक कार्यों के ठेके बिहारियों को मिलेंगे। इससे राज्य के लोगों को काम के अधिक मौके मिलेंगे। ‘पुलिस दीदी योजना’ की शुरुआत मुख्यमंत्री ने इसी प्रकार ‘पुलिस दीदी योजना’ की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा बढ़ाना तथा पुलिस और समाज के बीच भरोसे को मजबूत करना है। इसके लिए 1500 स्कूटी महिला पुलिस के लिए खरीदने का निर्णय लिया गया है। कॉलेज और स्कूल के सामने पुलिस दीदी की तैनाती होगी, ताकि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध पर नकेल कसी जा सके।

किस मंत्री को मिला कौन सा विभाग? तमिलनाडु सरकार की पूरी लिस्ट जारी

चेन्नई तमिलनाडु में ऐतिहासिक जीत हासिल करके सत्ता में आए थलापति विजय ने अब मंत्रालयों का बंटवारा कर दिया है। सीएम विजय की सिफारिश पर तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शनिवार को इसका ऐलान किया। जारी आदेश के मुताबिक कुल नौ मंत्रियों में विभागों का बंटवारा किया गया है। मुख्यमंत्री विजय थलापति ने भी कई मंत्रालय अपने पास रखे हैं। राज्यपाल के आदेश के मुताबिक, मुख्यमंत्री विजय ने अपने पास गृह विभाग, लोक प्रशासन, सामान्य प्रशासन, विशेष कार्यक्रम कार्यान्वयन, महिला एवं युवा कल्याण, नगर प्रशासन और शहरी एवं जल आपूर्ति विभाग रखे हैं। गृह विभाग समेत अन्य प्रमुख विभागों को अपने पास रखकर विजय ने शपथ ग्रहण के दिन वाली अपनी बात को पूरा करने संकेत दिया है। शपथ के बाद विजय ने कहा था कि इस सरकार में सत्ता का केंद्र केवल वह स्वयं होंगे। हालांकि विजय ने कई अन्य मंत्रालयों का बंटवारा अपने मंत्रियों में भी किया है। विजय ने वरिष्ठ राजनेता और गोबीचेट्टिपालयम से विधायक के. ए. सेनगोत्तियान को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी है। वह वित्त और पेंशन भत्तों का कार्यभार संभालेंगे। किस मंत्री को किस मंत्रालय की जिम्मेदारी? मायलापुर से विधायक और पार्टी के कोषाध्यक्ष पी.वेंकटरामन को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। वह उपभोक्ता संरक्षण और मूल्य नियंत्रण विभाग को संभालेंगे। एक मात्र महिला मंत्री एस. कीर्तना को उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। वह उद्योग और निवेश प्रोत्साहन विभाग को संभालेंगी। इसके अलावा करैकुडी जिले के विधायक डॉ. टीके प्रभु को प्राकृतिक संसाधन मंत्री बनाया गया है। कानून मंत्रालय, उर्जा संसाधन मंत्रालय की जिम्मेदारी विजय ने अपने खास साथी और टीवीके के संयुक्त महासचिव सीटीआर निर्मल कुमार को सौंपी है। उनके पास बिजली, गैर-पारंपरिक ऊर्जा विकास, कानून, न्यायालय, जेल, भ्रष्टाचार निरोधक, विधानसभा, चुनाव और पासपोर्ट विभाग भी रहेंगे। वहीं, एग्मोर सीट से विधायक राजमोहन को स्कूल शिक्षा, तमिल विकास, सूचना एवं प्रचार मंत्री बनाया गया है। वे पुरातत्व, तमिल आधिकारिक भाषा एवं संस्कृति, सूचना एवं प्रचार, फिल्म प्रौद्योगिकी, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, न्यूजप्रिंट नियंत्रण, स्टेशनरी तथा सरकारी प्रेस विभाग संभालेंगे। इसके अलावा पूर्व आईआरएस अधिकारी डॉक्टर के जी अरुणराज को स्वास्थ्य, चिकित्सा, शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि लोक निर्माण, खेल विकास, भवन,राजमार्ग और लघु बंदरगाह मंत्रालय का प्रभार आधव अर्जुन को दिया गया है। इसके बाद ग्रामीण विकास, पंचायती राज और सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी टीवीके महासचिव एन आनंद को सौंपी गई है।

अब बाघा में हर गतिविधि होगी कैमरे में कैद, कई जगह लगाए गए निगरानी कैमरे

बाघा पुराना. शहर बाघापुराना में सुरक्षा प्रबंधों को और मजबूत करने के लिए अलग-अलग एंट्री प्वाइंटों तथा मुख्य सड़कों पर सी.सी.टी.वी. कैमरे लगने से न सिर्फ अपराधों पर लगाम लगेगी बल्कि पुलिस प्रशासन को भी कानून व्यवस्था कायम रखने में बड़ी मदद मिलेगी। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि कैमरे लगने से आपराधिक इरादे रखने वालों में डर का माहौल बनेगा। एंट्री प्वाइंट पर लगाए गए कैमरे गाड़ियों की आवाजाही पर नजर रखेंगे, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी नजर रखी जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सी.सी.टी.वी. कैमरे की मदद से सड़क हादसों के समय की फुटेज से पूरी घटना की सही जानकारी मिलती है, जिससे जिम्मेदारी तय करना आसान होता है और पीडि़तों को न्याय दिलाने में मदद मिलती है। कुल मिलाकर बाघापुराना शहर में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाना एक सकारात्मक और आगे की सोच वाला कदम माना जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार ये कैमरे एम.पी. सर्बजीत सिंह खालसा के विवेकाधीन कोटे से लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर पुलिस सी.सी.टी.वी. फुटेज का सही इस्तेमाल करे तो चोरी, डकैती और दूसरी गैर-कानूनी गतिविधियों पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

गोबर, गोमूत्र पर आईआईटी कानपुर की खोज से बनेगी 15 गुना ज्यादा असरदार खाद

गोमाता के जरिए खेती में ‘जीन क्रांति’ की तैयारी गोबर, गोमूत्र पर आईआईटी कानपुर की खोज से बनेगी 15 गुना ज्यादा असरदार खाद योगी सरकार गो संरक्षण और खेती में करने जा रही बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग एंजाइम टेक्नोलॉजी से 10 गुना तेजी से तैयार होगी ऑर्गेनिक खाद, 5 गुना बढ़ेगा न्यूट्रिशन देश में पहली बार यूपी वाले करेंगे खेती में इस जेनेटिक इंजीनियरिंग का प्रयोग लखनऊ गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, वैज्ञानिक खेती और रोजगार से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक और बड़ा प्रयोग करने जा रहा है। पहली बार देश में खेती किसानी में गोबर, गोमूत्र और माइक्रोबियल रिसर्च आधारित जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों की खोज ने खेती में गो आधारित जीन क्रांति की नई जमीन तैयार कर दी है। इस तकनीक के जरिए तैयार होने वाली ऑर्गेनिक खाद पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगी। इतना ही नहीं, इसकी न्यूट्रिशन क्षमता लगभग 5 गुना अधिक होगी, जबकि इसे तैयार करने में लगने वाला समय भी 10 गुना तक कम हो जाएगा। योगी सरकार इसे खेती, गो संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के नए मॉडल के रूप में देख रही है। आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों की बड़ी खोज यह तकनीक आईआईटी कानपुर के पीएचडी शोधार्थी अक्षय श्रीवास्तव ने विकसित की है। उन्होंने जेनेटिक इंजीनियरिंग, एंजाइम एक्सट्रैक्शन, माइक्रोबियल आइसोलेशन और बायोपॉलिमर डेवलपमेंट को गोबर एवं गो मूत्र आधारित प्राकृतिक संसाधनों के साथ जोड़कर हाई क्वालिटी ऑर्गेनिक और नेचुरल फर्टिलाइजर तैयार किया है। शोधकर्ताओं ने फसल-विशिष्ट माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट तैयार किया है, जिसके जरिए केवल 1 किलोग्राम माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट से करीब 2000 किलोग्राम जैविक उर्वरक विकसित किया जा सकता है। यह तकनीक खेती की लागत घटाने के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाएगी। 15 गुना कम मात्रा ही रहेगी पर्याप्त, लागत भी घटेगी शुरुआत में 50 किलोग्राम वाले ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बैग तैयार करने की योजना है। खेतों में इसकी जरूरत लगभग 350 से 400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है, जो पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में बेहद कम है। इससे किसानों की परिवहन, श्रम और उपयोग लागत में बड़ी कमी आएगी। तकनीक से तैयार इस उर्वरक की लागत भी कम आएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस उत्पाद को इंडियन काउन्सिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च द्वारा 40 से अधिक गुणवत्ता एवं पोषण मानकों पर परीक्षण और प्रमाणित भी किया जा चुका है। गोबर और गो मूत्र से बनेगा साइंटिफिक फर्टिलाइजर यह उर्वरक मुख्य रूप से गोबर, गोमूत्र, कृषि अपशिष्ट और प्राकृतिक जैविक स्रोतों से तैयार किया जा रहा है। माइक्रोबियल प्रोसेसिंग और एंजाइम एक्सट्रैक्शन तकनीक की मदद से इसमें पोषक तत्वों की क्षमता कई गुना बढ़ाई गई है। अब गोबर आधारित बायोगैस उत्पादन के लिए भी विशेष माइक्रोबियल तकनीकों पर काम किया जा रहा है। बायोगैस निर्माण के बाद बचने वाली स्लरी और वेस्ट बायोमास से केवल 3 से 4 दिनों के भीतर हाई क्वालिटी कस्टमाइज्ड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर तैयार किए जा रहे हैं। गोशालाएं बनेंगी वेस्ट टू वेल्थ मॉडल योगी सरकार इस तकनीक को आत्म निर्भर गोशाला के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। इसके तहत गोशालाएं केवल पशु संरक्षण केंद्र नहीं रहेंगी, बल्कि जैविक खाद उत्पादन, बायोगैस निर्माण और अतिरिक्त आय का केंद्र बनेंगी। प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और स्थानीय किसानों के सहयोग से इस मॉडल को लागू किया जा रहा है। विभिन्न जिलों में गोबर संग्रहण एवं माइक्रोबियल प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही हैं, जहां गोबर, गोमूत्र और कृषि अपशिष्ट को वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरक में बदला जाएगा। महिला रोजगार और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल इस परियोजना में महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, उत्पादन और वितरण से जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर तैयार होंगे। इससे गांवों में आत्मनिर्भरता आधारित आर्थिक मॉडल मजबूत होगा। यह पहल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने, मिट्टी की उर्वरता सुधारने, कृषि अपशिष्ट प्रबंधन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। सीएम योगी की प्राथमिकता बना गो संरक्षण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पहले से ही गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। अब आईआईटी कानपुर की इस वैज्ञानिक खोज के जरिए प्रदेश में गो आधारित खेती, जैविक उर्वरक और ग्रामीण रोजगार का एक नया मॉडल तैयार होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल हुआ तो उत्तर प्रदेश देश में गो आधारित वैज्ञानिक खेती और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।