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अमित शाह के बस्तर आगमन से पहले हाई अलर्ट, विजय शर्मा ने संभाली तैयारियों की कमान

जगदलपुर. बस्तर एक बार फिर देश की सियासत और सुरक्षा रणनीति के केंद्र में है. केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह 18 और 19 मई को अपने दो दिवसीय दौरे पर बस्तर पहुंच रहे हैं. यह उनका 2019 के बाद दसवां दौरा होगा, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इस बार दौरे का फोकस सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि विकास और जनसुविधाओं पर भी रहेगा. आसना स्थित बादल अकादमी और नेतानार में प्रस्तावित कार्यक्रम इसकी झलक देंगे. प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने तैयारियों का जायजा लिया. अधिकारियों के साथ सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है. शाह का हर दौरा बस्तर में एक नई पहल या संदेश लेकर आता रहा है. तर्रेम हमले के बाद संवेदनशील दौरे से लेकर बस्तर दशहरा में शामिल होने तक, उनका जुड़ाव लगातार बढ़ा है. अब नक्सल उन्मूलन अभियान की सफलता के बाद यह दौरा और भी अहम माना जा रहा है. दो दिनों के प्रवास में सुरक्षा समीक्षा बैठक भी प्रस्तावित है. जहां नक्सल मुक्त बस्तर की स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी. बस्तर में यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि विश्वास और बदलाव का संकेत बन चुका है.

महाविस्फोट से दहला इजरायल! सैन्य ठिकाने से उठता रहा धुएं का गुबार, सीक्रेट अटैक की अटकलें तेज

यरूशलम.  इजरायल के यरूशलम के पास स्थित बेट शेमेश शहर में शनिवार देर रात एक भीषण विस्फोट हुआ। इस धमाके ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सोशल मीडिया पर इसके जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। ब्लास्ट इतना जोरदार था कि आसमान में कई मील दूर तक आग का एक विशाल गोला और मशरूम क्लाउड बनता दिखाई दिया। यह धमाका इजरायल की सरकारी डिफेंस कंपनी 'तोमर' के टेस्टिंग ग्राउंड में हुआ है, जो इजरायल के बेहद सीक्रेट रॉकेट और मिसाइल इंजन बनाती है। इजरायली प्रशासन इसे 'पहले से तय एक्सपेरिमेंट' बता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय डिफेंस एक्सपर्ट्स इस थ्योरी को पचा नहीं पा रहे हैं। रात के 12:30 बजे कौन करता है प्री-प्लान टेस्ट? अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के पूर्व विश्लेषक लैरी जॉनसन ने इजरायल के आधिकारिक दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक्स पर मारियो नॉफाल को दिए एक इंटरव्यू में जॉनसन ने तीन अहम बातें कहीं, जो इजरायली दावे को संदिग्ध बनाती हैं। धमाके के तुरंत बाद एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को उस संवेदनशील इलाके में जाने से रोक दिया गया। अगर यह सामान्य टेस्ट था, तो रेस्क्यू टीमों को क्यों रोका गया? यह धमाका शनिवार की आधी रात (12:30 AM) को हुआ। इजरायल में शनिवार के दिन कोई भी रूटीन या सरकारी काम नहीं किया जाता है, जब तक कि वह कोई बेहद जरूरी सैन्य ऑपरेशन न हो। आधी रात को बिना किसी पूर्व चेतावनी के कोई देश अपनी आबादी के पास ऐसा खतरनाक ब्लास्ट नहीं करता। जॉनसन के मुताबिक, इस घटना के पीछे के सभी परिदृश्य इशारा कर रहे हैं कि मिडिल ईस्ट में एक बड़ा युद्ध बेहद करीब है और यह पूरी दुनिया के लिए बहुत बुरा संकेत है। क्या तबाह हो गई इजरायल की सबसे घातक मिसाइल बैटरी? इब्रानी (Hebrew) मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि धमाके का असर पास के 'सदोट मीचा' (Sdot Micha) एयरबेस तक भी हो सकता है, जो इजरायल का सबसे संवेदनशील मिसाइल ठिकाना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस विस्फोट में इजरायल के सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम 'एरो-3' (Arrow-3) का एक बड़ा स्टॉक तबाह हो गया है। एरो-3 अंतरिक्ष की सीमा पर ही दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। रिपोर्ट के मुताबिक, रॉकेट मोटरों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले 'सोडियम परक्लोरेट' केमिकल के स्टॉक में लापरवाही की वजह से आग लगी, जो इस महाविस्फोट में बदल गई। अगर दावों में सच्चाई है, तो इजरायल की दो प्रमुख एरो-3 बैटरियों में से एक को भारी नुकसान पहुंचा है। 2021 की घटना की यादें हुई ताजा लैरी जॉनसन ने याद दिलाया कि अप्रैल 2021 में भी इसी तोमर डिफेंस फैसिलिटी में ठीक ऐसा ही एक 'रहस्यमयी' धमाका हुआ था, जिसे तब भी इजरायल ने एक रुटीन टेस्ट बताया था। वीडियो में दिख रहा मशरूम क्लाउड इतना बड़ा था कि शुरुआत में चश्मदीदों को लगा कि यह कोई टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन का धमाका है। इजरायली सरकार अपने दावे पर कायम तमाम अटकलों और सोशल मीडिया पर चल रही दावों के बीच, इजरायली रक्षा मंत्रालय और तोमर कंपनी अपने रुख पर अडिग हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह एक नियंत्रित और तयशुदा प्रयोग था, इसमें किसी बाहरी ताकत का हाथ नहीं है। इस घटना में किसी के हताहत होने या सुरक्षा में सेंधमारी की खबर नहीं है।

नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का खुलासा, मुख्य आरोपी कोरबा से गिरफ्तार

सक्ती  नौकरी लगाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले मुख्य आरोपित को मालखरौदा पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपित लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपित ने प्रार्थी एवं अन्य पीड़ितों से कुल 12 लाख रुपये की ठगी की थी तथा ठगी की रकम में से पांच लाख 75 हजार रुपये से बोलेरो वाहन खरीदा था। पुलिस के अनुसार प्रार्थी डालेश्वर प्रसाद चंद्रा, निवासी ग्राम सकर्रा ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने एसईसीएल गेवरा प्रोजेक्ट में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे रुपये लिए हैं। जांच के दौरान यह सामने आया कि वर्ष 2011 में आरोपित सुरेश कुमार दुबे (57 वर्ष), ग्राम नुनेरा (भेलवाभांटा), थाना पाली, जिला कोरबा ने प्रार्थी एवं अन्य लोगों से नौकरी लगाने के नाम पर करीब 12 लाख रुपये वसूल किए थे।  

साजिश की कड़ियों को जोड़ने में जुटी पुलिस: सात दिन की रिमांड पर आरोपियों से मिनट-टू-मिनट पड़ताल

जालंधर.  जालंधर में सुरक्षा बल के मुख्यालय के समीप हुए विस्फोट मामले में पुलिस ने आरोपियों की मौजूदगी में दूसरी बार घटनाक्रम को दोहराकर साक्ष्य जुटाए हैं। सात दिनों की हिरासत के दौरान सुरक्षा एजेंसियां सीमा पार बैठे हैंडलर्स और इस बड़ी साजिश के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने का प्रयास कर रही हैं। घटना स्थल पर सुरक्षा एजेंसियों का कड़ा एक्शन सुरक्षा बल के क्षेत्रीय मुख्यालय के मुख्य द्वार के समीप हुए विस्फोट मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस टीम ने एक बड़ा कदम उठाया है। कानून व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े इस अत्यंत संवेदनशील मामले में पुलिस अधिकारियों ने हिरासत में लिए गए दोनों आरोपियों को साथ लेकर घटना स्थल का गहन निरीक्षण किया। जांच टीम ने इस दौरान पूरे घटनाक्रम को दोबारा दोहराया ताकि विस्फोट को अंजाम देने की सटीक टाइमिंग, दिशा और विस्फोटक रखने के तरीके को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझा जा सके। यह कवायद इसलिए की गई ताकि न्यायालय के समक्ष पुख्ता और अकाट्य तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें। सात दिन की हिरासत और मिनट-दर-मिनट जांच गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी फिलहाल सात दिनों की लंबी पुलिस हिरासत में हैं, जिससे जांच एजेंसियों को उनसे गहन पूछताछ करने का पर्याप्त समय मिल गया है। इस समय अवधि का उपयोग करते हुए अधिकारी घटना के ठीक पहले और बाद की प्रत्येक गतिविधि का मिलान कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में आरोपियों के मोबाइल फोन की लोकेशन, इंटरनेट डेटा का उपयोग और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले दृश्यों का आमने-सामने मिलान किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि विस्फोटक सामग्री को लाने और उसे वहां सक्रिय करने में किन-किन रास्तों का उपयोग किया गया था। सीमा पार आतंकी नेटवर्क और वीडियो साक्ष्य की पड़ताल शुरुआती जांच और पूछताछ में इस पूरे मामले के पीछे एक बेहद खतरनाक नेटवर्क का संकेत मिला है, जिसकी कड़ियां सीमा पार बैठे देश विरोधी तत्वों से जुड़ती दिख रही हैं। मुख्य आरोपी के बारे में यह बात सामने आई है कि वह पड़ोसी देश के एक कुख्यात हैंडलर के साथ सीधे संपर्क में था और विस्फोट को अंजाम देने के तुरंत बाद उसे इस बात की पुष्टि भी भेजी गई थी। इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियां उस डिजिटल साक्ष्य की भी बारीकी से जांच कर रही हैं जिसके तहत घटना स्थल का वीडियो बनाकर आगे भेजा गया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह वीडियो क्लिप और किन लोगों को साझा की गई थी ताकि इस पूरी साजिश में शामिल स्लीपर सेल और मददगारों का पर्दाफाश किया जा सके।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, निवेशकों के लिए अहम होगा आने वाला सप्ताह

नई दिल्ली  भारतीय शेयर बाजार (Stock Market Outlook) के लिए अगला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की कीमत, एफआईआई की चाल और घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार की चाल निर्धारित करेंगे। आने वाले सत्रों में निवेशकों की निगाहें अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर होंगी। दोनों देशों के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। वहीं, ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक नया प्लान पेश करने वाला है। दूसरी तरफ अमेरिका भी ईरान के लेकर आक्रामक बना हुआ है। कच्चे तेल पर निवेशकों की निगाहें बनी हुई हैं। तेल के दाम उछले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्री के बयानों के बाद शुक्रवार को तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास जहाजों पर हमलों और जब्ती को रोकने के लिए संभावित समझौते की उम्मीदें कमजोर हो गई हैं। इस सप्ताह के दौरान, ईरान-अमेरिका संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के चलते ब्रेंट क्रूड में 7.84 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि डब्ल्यूटीआई में 10.48 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विदेशी निवेशक भी खफा विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भी भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी अहम होने वाले हैं। एफआईआई ने इस महीने में अब तक (16 मई तक) 27,177 करोड़ रुपए की बिकवाली की है। वहीं, 2026 में अब तक 2,31,486 करोड़ रुपए सेकेंडरी इक्विटी बाजार से निकाल चुके हैं। वहीं, प्राइमरी बाजार के माध्यम से वर्ष के दौरान कुल निवेश 12,468 करोड़ रुपए रहा है। इस वर्ष एफपीआई द्वारा की गई कुल बिक्री पिछले वर्ष दर्ज की गई कुल निकासी को पार कर चुकी है। दूसरी तरफ घरेलू आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। 21 मई को एचएसबीसी पीएमआई का डेटा जारी होगा। वहीं, 22 मई को बैंक लोन, बैंक डिपॉजिट और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे आंकड़े जारी होंगे। भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता हफ्ता नुकसान वाला रहा। कैसा रहा पिछला हफ्ता? पिछले हफ्ते सेंसेक्स 2,090 अंक या 2.70 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75,237 और निफ्टी 532 अंक या 2.20 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,643 पर बंद हुआ। इस दौरान सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी 8.17 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप गेनर था। निफ्टी आईटी 5.71 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 4.71 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 4.36 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 4.16 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 4.12 प्रतिशत, निफ्टी ऑयलएंडगैस 3 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 2.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ। दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा 2.18 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 2.17 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 1.91 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।  

UK Politics Crisis: चुनावी हार के बाद पीएम कीर स्टारमर पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली ब्रिटेन में बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल की वजह से प्रधानंत्री कीर स्टारमर अपना पद छोड़ने को तैयार हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने अपने करीबियों से कहा है कि वह इस्तीफा देने को तैयार हैं। डेली मेलकी रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री कीर स्टारमर अपने हिसाब से आगे का कदम उठाएंगे। उन्हें इस्तीफा कब देना है, इसका विचार भी वह खुद ही करेंगे। क्यों खतरे में है कीर स्टारमर की सरकार जानकारी के मुताबिक यूके की लेबर सरकार संकटों से जूझ रही है। लोगों की इस सरकार में विश्वास कम हो गया है। लेबर पार्टी के पीटर मैंडलसन का नाम एपस्टीन फाइल्स में आने केबाद लोगों ने लेबर पार्टी पर अविश्वास जताया और स्थानीय चुनावों में इसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इसी वजह से कीर स्टारमर पर भी इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है। गुरुवार को ब्रिटेन में क्षेत्रीय चुनाव हुए। यह चुनाव 136 क्षेत्रों में आयोजित किए गए। अंतिम नतीजों के अनुसार लेबर पार्टी ने परिषद की उन 2,200 से ज़्यादा सीटों में से लगभग 1,200 सीटें गंवा दीं, जिन पर पहले उसका कब्ज़ा था। दक्षिणपंथी 'रिफॉर्म यूके ' पार्टी स्पष्ट विजेता के तौर पर उभरी और उसने लगभग 1,400 सीटें जीतीं। बता दें कि लेबर पार्टी के ही 80 से ज्यादा सांसदों ने उनसे पद छोड़ने की अपील की है। बीते दिनों सरकार के तीन सदस्यों के इस्तीफा देने की बात भी सामने आई थी। निगेल फराज के नेतृत्व वाली रिफॉर्म यूके को चुनावों का सबसे बड़ा विजेता माना जा रहा है। स्काई न्यूज के अनुसार, इसने अब तक 1,422 सीटें जीती हैं। लेबर पार्टी 980 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि लिबरल डेमोक्रेट्स और कंजरवेटिव पार्टी क्रमशः 834 और 754 सीटों के साथ तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।प्लाइड सिमरु, जो वेल्स की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध एक मध्य-वामपंथी पार्टी है, 43 सीटों के साथ वेल्स सेनेड में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। रिफॉर्म यूके 34 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि लेबर पार्टी नौ सीटों के साथ बहुत पीछे तीसरे स्थान पर है। वेल्स में 27 साल सत्ता में रहने के बाद लेबर पार्टी ने पहले ही हार स्वीकार कर ली थी। स्टारमर ने इस्तीफा देने से कर दिया था इनकार वहीं स्कॉटलैंड में, स्कॉटिश नेशनल पार्टी ने सबसे अधिक 58 सीटें जीतीं लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक 65 सीटों से पीछे रह गई। लेबर और रिफॉर्म यूके 17-17 सीटों पर बराबरी पर हैं जबकि कंजर्वेटिव पार्टी की सीटें घटकर 12 रह गईं। अपनी पार्टी के लिए निराशाजनक नतीजों के बावजूद, स्टारमर ने इस्तीफा देने से मना करते हुए कहा था कि वह पीछे नहीं हटेंगे और देश को अराजकता में नहीं धकेलेंगे।

इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2 रिव्य,क्राइम और एक्शन का धमाका

उत्तर प्रदेश के बैकग्राउंड पर बनी वेब सीरीज 'इंस्पेक्टर अविनाश' अपने दूसरे सीजन के साथ एक बार फिर कॉप-थ्रिलर की दुनिया में लौट आई है. नीरज पाठक के डायरेक्शन में बनी यह सीरीज अपराध, राजनीति और पर्सनल संघर्षों का एक ऐसा मेल है, जो दर्शकों को कुर्सी से बांधे रखने की कोशिश करती है. 10 एपिसोड की इस सीरीज में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अविनाश मिश्रा के उसी बेखौफ अंदाज को आगे बढ़ाया गया है, जिसे रणदीप हुड्डा ने अपनी दमदार अदाकारी से फिर जान फूंक दी है. हालांकि, कॉप ड्रामा में अक्सर देखी जाने वाली कुछ घिसी-पिटी बातें यहां भी मौजूद हैं, लेकिन कलाकारों की परफॉर्मेंस और कहानी में आने वाले जज्बाती मोड़ इसे एक बार देखने लायक जरूर बनाते हैं. सस्पेंस और एक्शन के शौकीनों के लिए यह सीजन काफी मसालेदार साबित होने वाला है. अपराध और परिवार के बीच फंसा 'अविनाश' सीरीज की कहानी इस बार सिर्फ अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंस्पेक्टर अविनाश के पर्सनल लाइफ में आए तूफान को भी दिखाती है. इस सीजन में अविनाश का मुकाबला 'शेख' (अमित सियाल) और 'देवी' (अभिमन्यु सिंह) के खतरनाक हथियारों के गिरोह से है. लेकिन कहानी तब गंभीर मोड़ लेती है जब अविनाश के खुद के बेटे पर हत्या का गलत आरोप लग जाता है. घर में पत्नी की नाराजगी और बाहर दुश्मनों की साजिशों के बीच अविनाश किस तरह कानून और अपने परिवार की गरिमा को बचाता है, यही इस सीजन का मेन अट्रैक्शन है. रणदीप हुड्डा का एक बार फिर चला जादू इस पूरी सीरीज की सबसे मजबूत कड़ी रणदीप हुड्डा हैं. उन्होंने अविनाश मिश्रा के किरदार में जान फूंक दी है. चाहे वह अपराधियों से टकराने वाला गुस्सा हो या अपने परिवार के लिए उनकी आंखों में दिखने वाला दर्द, रणदीप ने हर इमोशन को बखूबी जिया है. उनके वन-लाइनर्स और एक्शन करने का अंदाज इतना सहज है कि वह स्क्रीन पर पूरी तरह छा जाते हैं. रणदीप की यह खासियत है कि वह गंभीर दृश्यों के बीच में भी हल्के-फुल्के हास्य और रोमांस का तड़का लगाना जानते हैं, जो दर्शकों को बोरियत महसूस नहीं होने देता. इसके साथ ही अविनाश का कभी-कभी सीधे दर्शकों से बात करना, बहुत अच्छा असर डालता है. वहीं सीरीज में रणदीप के अलावा बाकी कलाकारों ने भी बेहतरीन काम किया है. उर्वशी रौतेला ने अविनाश की पत्नी पूनम के रूप में एक सेंसटिव परफॉर्मेंस दी है, जो अपने पति के खतरनाक पेशे और परिवार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं. उर्वशी रौतेला की एक्टिंग के लिए तो आपको ये सीरीज देखना ही चाहिए. विलेन के रूप में अभिमन्यु सिंह काफी खौफनाक नजर आते हैं, वहीं अमित सियाल ने 'शेख' के किरदार को अपनी चिर-परिचित खामोशी और क्रूरता के साथ निभाया है. शालिन भनोट दोस्ती और वफादारी के सीन में जंचते हैं, जबकि फ्रेडी दारूवाला और रजनीश दुग्गल जैसे कलाकारों ने भी कहानी के माहौल को और गंभीर बनाने में मदद की है. कहानी की कुछ कमजोर कड़ियां एक्टिंग के मामले में सीरीज जितनी मजबूत है, राइटिंग के मामले में कई मौकों पर उतनी ही कमजोर पड़ जाती है. कहानी के कुछ सब-प्लॉट्स, जैसे डॉ. सुमन का ट्रैक, थोड़े खींचे हुए और बनावटी लगते हैं. कुछ किरदारों के फैसले रियलिटी से परे नजर आते हैं, जो आपको थोड़ा खटक सकते हैं. साथ ही, बीच के एपिसोड में कहानी थोड़ी धीमी हो जाती है और कॉप-थ्रिलर की वही पुरानी घिसी-पिटी बातों का सहारा लेती है, जिससे सस्पेंस का ग्राफ थोड़ा नीचे गिर जाता है. डायलॉग भी कुछ खास असर नहीं छोड़ते, जिससे कई बार जरूरत से ज्यादा ये फिल्मी लगने लगती है. वहीं अविनाश के पंडित जी की कहानी को इस सीजन में भी नहीं बताया गया है यानी उस किरदार को जानने के लिए अगले सीजन का इंतजार करना पड़ सकता है. अब अगर आप रणदीप हुड्डा के फैन हैं और आपको कॉप-थ्रिलर फिल्में या सीरीज पसंद हैं, तो 'इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2' आपको निराश नहीं करेगी. हालांकि इसमें कुछ नयापन कम है, लेकिन दमदार एक्टिंग, यूपी का स्वैग और ढेर सारा ड्रामा इसे एक एंटरटेन बनाता है. आप इसे देखना शुरू करेंगे तो अंत तक इसके साथ जुड़ जाएंगे.

रांची के BIT मेसरा में विकसित हुई AI तकनीक, चंद्रयान-2 डेटा से चंद्र सतह का विश्लेषण आसान

रांची  BIT मेसरा के शोधकर्ताओं ने चंद्रमा की सतह पर मौजूद क्रेटरों (गड्ढों) की पहचान और विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है। यह शोध भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चंद्रयान-2 अनाउंसमेंट आफ आर्पच्युनिटी (AO) प्रोग्राम के अंतर्गत प्रायोजित किया गया है। इस महत्वपूर्ण शोध कार्य का संचालन प्रमुख अन्वेषक डॉ. संचिता पाल, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग तथा सह-प्रमुख अन्वेषक डॉ. मिली घोष, एसोसिएट प्रोफेसर, रिमोट सेंसिंग एंड जियोइंफार्मेटिक्स विभाग के मार्गदर्शन में किया गया। इस परियोजना में मीमांसा सिन्हा, पीएचडी शोधार्थी, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चंद्रायन-2 के डेटा का हुआ इस्तेमाल शोधकर्ताओं ने चंद्रयान-2 के टीएमसी-2 डीईएम डेटा का उपयोग करते हुए चंद्र सतह के छोटे एवं जटिल क्रेटरों की पहचान के लिए एक अनुकूलित डीप लर्निंग फ्रेमवर्क विकसित किया। अध्ययन में विभिन्न डीप लर्निंग माडल का परीक्षण किया गया, जिसमें मास्क आर-सीएनएन विद रेसनेट-101 बैकबोन ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। शोध में पाया गया कि डिजिटल एलिवेशन माडल (डीईएम) आधारित तकनीक पारंपरिक इमेज आधारित पद्धतियों की तुलना में अधिक सटीक और भू-आकृतिक रूप से प्रभावी है। इससे क्रेटरों की सीमाओं, गहराई और क्षतिग्रस्त क्रेटरों की पहचान बेहतर तरीके से संभव हुई। हाई-रिजॉल्यूशन कैटलॉग तैयार इस परियोजना के अंतर्गत शोधकर्ताओं ने टीएमसी-2, लोला, सेलीन और एनएसी जैसे बहु-सेंसर डेटा का एकीकृत उपयोग कर क्रेटर डिटेक्शन की नई कार्यप्रणाली तैयार की। साथ ही, व्यास, गहराई, ढाल, वृत्ताकारता और सतही खुरदरापन जैसे मापदंडों के स्वचालित विश्लेषण के लिए एक विशेष मार्फोमेट्रिक एक्सट्रैक्शन फ्रेमवर्क विकसित किया गया। टीम ने क्रेटर मार्फो नामक एक विशेष आर्क जीआइएस प्रो-टूलबाक्स भी तैयार किया है, जो आटोमेटिक क्रेटर विश्लेषण में सहायक होगा। इसके माध्यम से एक किलोमीटर आकार के क्रेटरों का उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैटलाग तैयार किया गया है। डेटा कलेक्शन में मिलेगा मदद शोध में यह भी सामने आया कि केवल एक डेटा सेट पर निर्भर रहने से सेंसर रिजॉल्यूशन और कवरेज से संबंधित व्यवस्थित त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए बहु-स्रोत डेटा आधारित विश्लेषण को अधिक विश्वसनीय माना गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में चंद्र अन्वेषण, ग्रहों की भू-आकृतिक अध्ययन और आटोमेटिक ग्रह सतह मानचित्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आगामी दिनों इस प्रणाली को पूर्णतः स्वचालित रीयल-टाइम क्रेटर विश्लेषण पाइपलाइन के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि तकनीक का भरपूर उपयोग हो सके और डेटा संग्रहण की प्रक्रिया भी आसान हो पाए। यह तकनीक भविष्य में चंद्र अन्वेषण, ग्रहों की भू-आकृतिक अध्ययन और आटोमेटिक ग्रह सतह मानचित्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में इस प्रणाली को पूर्णतः स्वचालित रीयल-टाइम क्रेटर विश्लेषण पाइपलाइन के रूप में विकसित करने की योजना है। -डॉ. संचिता पाल, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग, बीआइटी मेसरा।  

नई स्टडी में खुलास,6–7 घंटे से कम या ज्यादा नींद लेने से बढ़ती है शरीर की उम्र तेजी से

 रात में बहुत कम या जरूरत से ज्यादा सोना सिर्फ थकान ही नहीं बढ़ाता, बल्कि ये बॉडी के कई जरूरी अंगों की उम्र भी तेजी से बढ़ा सकता है. नेचर जर्नल में 13 मई को पब्लिश हुई एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि कम और ज्यादा दोनों तरह की नींद ब्रेन, हार्ट, फेफड़ों और इम्यून सिस्टम पर बुरा असर डाल सकती है. रिसर्च के मुताबिक सबसे कम खतरा उन लोगों में देखा गया जो रोज करीब 6.4 से 7.8 घंटे की नींद लेते हैं. नींद क्यों है हमारे लिए जरूरी? इस स्टडी को कोलंबिया यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ रेडियोलॉजी जुनहाओ वेन ने लीड किया. उन्होंने कहा कि हमारी रिसर्च दिखाती है कि बहुत कम और बहुत ज्यादा दोनों तरह की नींद शरीर के लगभग हर अंग की उम्र बढ़ने की रफ्तार तेज कर सकती है. इससे ये साफ होता है कि अच्छी नींद ब्रेन और पूरी बॉडी को हेल्दी रखने में बेहद जरूरी है. रिसर्च में क्या पता लगाया गया? रिसर्चर्स ने एजिंग को मापने के लिए मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया. टीम ने 17 अलग-अलग ऑर्गन सिस्टम्स के लिए 23 बायोलॉजिकल क्लॉक्स तैयार किए. इन क्लॉक्स में मेडिकल स्कैन, ब्लड टेस्ट और बॉडी प्रोटीन से जुड़ी जानकारी शामिल की गई, जिससे पता लगाया गया कि किसी इंसान के अंग उसकी असली उम्र के मुकाबले कितनी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं. किन लोगों की उम्र तेजी से बढ़ती है? इस स्टडी में यूके बायोबैंक के करीब पांच लाख लोगों के हेल्थ डेटा का एनालिसिस किया गया. रिसर्च में एक यू-शेप पैटर्न सामने आया. यानी जो लोग रोज 6 घंटे से कम सोते थे और जो 8 घंटे से ज्यादा सोते थे, दोनों में एजिंग की स्पीड ज्यादा पाई गई. सबसे हेल्दी स्लीप रेंज करीब 7 घंटे मानी गई. कम नींद लेने वाले लोगों में डिप्रेशन, एंग्जायटी, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का खतरा ज्यादा देखा गया. वहीं कम और ज्यादा दोनों तरह की नींद फेफड़ों की बीमारियों जैसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अस्थमा से भी जुड़ी मिली. इसके अलावा एसिड रिफ्लक्स जैसी पेट की समस्याओं का रिस्क भी बढ़ता पाया गया. कम नींद लेने के क्या होते हैं नुकसान? जुनहाओ वेन के मुताबिक नींद सिर्फ दिमाग से जुड़ी चीज नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी बॉडी पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि स्लीप ड्यूरेशन हमारी पूरी फिजियोलॉजी से जुड़ी होती है और इसका असर शरीर के लगभग हर हिस्से पर दिखाई देता है. रिसर्च टीम ने बुजुर्ग लोगों में डिप्रेशन पर भी असर देखा. एनालिसिस में सामने आया कि कम नींद सीधे तौर पर डिप्रेशन को बढ़ा सकती है, जबकि ज्यादा नींद ब्रेन और बॉडी फैट में होने वाले बदलावों के जरिए इसका असर डाल सकती है. रिसर्चर्स का मानना है कि कम और ज्यादा सोने वाले लोगों के लिए अलग-अलग तरह की हेल्थ केयर की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि स्टडी ये साबित नहीं करती कि सिर्फ नींद ही तेजी से बूढ़ा होने की वजह है, लेकिन रिसर्चर्स का कहना है कि सही स्लीप हैबिट्स बढ़ती उम्र में हेल्थ को बेहतर बनाए रखने का अहम हिस्सा हो सकती हैं.

डिविडेंड के साथ आया Power Grid का Q4 रिजल्ट, निवेशकों को राहत

नई दिल्ली  सरकारी कंपनी पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने तिमाही नतीजों का ऐलान कर दिया है। कंपनी ने दी जानकारी में कहा है कि सालाना आधार पर नेट प्रॉफिट 9.7 प्रतिशत बढ़ा है। जनवरी से मार्च 2026 के दौरान इस कंपनी का कुल नेट प्रॉफिट 4546 करोड़ रुपये रहा है। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 4143 करोड़ रुपये रहा था। बता दें, कंपनी ने तिमाही नतीजों के साथ-साथ डिविडेंड का भी ऐलान किया है। रेवन्यू में गिरावट पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के रेवन्यू में गिरावट दर्ज की गई है। मार्च तिमाही के दौरान कंपनी का कुल रेवन्यू 11666 करोड़ रुपये रहा था। एक साल पहले मार्च क्वार्टर में 12275 करोड़ रुपये कंपनी का रेवन्यू रहा था। कंपनी के EBITDA में भी मार्च तिमाही के दौरान 11.30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी का EBITDA जनवरी से मार्च क्वार्टर के दौरान 9066 करोड़ रुपये रहा था। साल भर पहले इसी तिमाही में यह 10224 करोड़ रुपये रहा था। तिमाही नतीजों के साथ-साथ कंपनी के बोर्ड ने 5000 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दे दी है। कितना डिविडेंड दे रही है कंपनी सरकारी कंपनी ने 10 रुपये के फेस वैल्यू वाले एक शेयर पर योग्य निवेशकों को 1.25 रुपये का डिविडेंड देने का ऐलान किया है। कंपनी इससे पहले फरवरी के महीने में एक्स-डिविडेंड ट्रेड की थी। तब योग्य निवेशकों को एक शेयर पर 3.25 रुपये का डिविडेंड मिला था शेयरों का प्रदर्शन कैसा? शुक्रवार को बाजार के बंद होने के समय पर पावर ग्रिड कारपोरेशन के शेयर 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 305.85 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। पिछले 6 महीने में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 12 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली है। वहीं, एक साल में यह स्टॉक पोजीशनल निवेशकों को 2 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बता दें, कंपनी का 52 वीक हाई 324.80 रुपये और 52 वीक लो लेवल 250.05 रुपये है। इस कंपनी का मार्केट कैप 2.84 लाख करोड़ रुपये का है। तीन साल में Power Grid के शेयरों की कीमतों में 67 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। वहीं, 5 साल में पीएसयू स्टॉक का भाव 137 प्रतिशत बढ़ा है। बता दें, बीते 10 साल में पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया के शेयरों का भाव 276 प्रतिशत बढ़ा है। कंपनी में सरकार की कितनी हिस्सेदारी? Trendlyne के डाटा के अनुसार इस कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 51.30 प्रतिशत थी। वहीं, सिंगापुर सरकार के पास 2.1 प्रतिशत हिस्सा है।