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ऐप-बेस्ड कैब और डिलीवरी सेवाओं के लिए नया सख्त नियम, सुरक्षा और बीमा व्यवस्था अनिवार्य

चंडीगढ़ हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में अहम फैसले लिए गए. कैबिनेट की मीटिंग में हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1993 में बदलाव को मंजूरी दी गई.  इसमें मिनिस्ट्री ऑफ़ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज़ की ओर से जारी दिशानिर्देश के तहत बदलाव किया गया और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के निर्देशों के चलते भी एग्रीगेटर लाइसेंस देने के लिए नियमों को मंज़ूरी दी गई. हरियाणा कैबिनेट ने यह फैसला राज्य के एनसीआर जिलों में बेहतर परिवहन को बढ़ावा देने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने और वायु गुणवता को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है. संशोधित नियमों के तहत 1 जनवरी, 2026 से राष्ट्रीय राजधानी इलाकों में एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के बेड़े में शामिल सभी गाड़ियां आवश्यक तौर पर सीएनजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी से चलने वाली गाड़ियां या किसी दूसरे स्वछ्तम ईंधन पर आधारित होंगी. इसके अलावा,  एनसीआर इलाकों में मौजूदा बेड़े में सिर्फ़ सीएनजी या इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर, ऑटो-रिक्शा को ही शामिल करने की अनुमति सरकार की तरफ से दी जाएगी. कैबिनेट ने राज्य में चल रहे ऐप-बेस्ड पैसेंजर एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एक बड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने के लिए हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1993 के रूल 86 ए में बदलाव की भी मंज़ूरी दी. नए नियमों में एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए आवश्यक लाइसेंसिंग, ड्राइवरों और गाड़ियों के लिए ऑनबोर्डिंग नियम, पैसेंजर सुरक्षा के उपाय, शिकायत सुलझाने के तरीके, प्रेरणा और पुनरावलोकन प्रशिक्षण कार्यक्रम, ड्राइवरों और पैसेंजर के लिए इंश्योरेंस कवरेज, ऐप्स के लिए साइबर सिक्योरिटी का पालन और किराए का रेगुलेशन शामिल हैं. नियमों अनुसार, एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स को यात्रियों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का बीमा कवरेज, ड्राइवरों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का स्वास्थय बीमा और ऑनबोर्डेड ड्राइवरों के लिए कम से कम 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस करवाना अनिवार्य होगा. इन नियमों के तहत गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, पैनिक बटन, फर्स्ट-एड किट और फायर एक्सटिंग्विशर लगाना भी ज़रूरी है. एग्रीगेटर्स को पैसेंजर की मदद और शिकायत दूर करने के लिए 24×7 घण्टे कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर भी बनाने होंगे. कैबिनेट ने तय किया है कि पारदर्शी और जिम्मेवारी को मज़बूत करने के लिए नियमों में वाहन और सारथी पोर्टल के ज़रिए गाड़ी और ड्राइवर की डिटेल्स के वाहन का डिजिटल प्रमाणीकरण का प्रबंध करना है. एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स को ऑनबोर्डेड ड्राइवरों और गाड़ियों का डिटेल्ड डिजिटल रिकॉर्ड भी रखना होगा. यहां करना होगा रजिस्ट्रेशन बैठक में मंत्रिपरषद को अवगत करवाया गया कि एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रोसेस निर्धारित पोर्टल cleanmobility.haryanatransport.gov.in. के ज़रिए संचालन किया जाएगा. नए फ्रेमवर्क में ड्राइवर वेलफेयर, किराया शेयरिंग, सेफ्टी स्टैंडर्ड, दिव्यांगजन-फ्रेंडली गाड़ियों को शामिल करने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने से जुड़े नियम भी शामिल किए हैं. कितना है एनसीआर का इलाका गौरतलब है कि दिल्ली और एनसीआर में हरियाणा के 14 जिले आते हैं. इसमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, सोनीपत, जींद, पानीपत और करनाल के कुछ हिस्से शामिल हैं. ऐसे में इस फैसले का असर इन जिलों पर होगा.

नई नवेली दुल्हन का बड़ा खेल! शादी के दो दिन बाद सामने आया चौंकाने वाला सच

छतरपुर  छतरपुर जिले में एक बार फिर “लुटेरी दुल्हन” का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शादी की चाह में बिजावर का एक युवक कथित दलालों के जाल में फंस गया और डेढ़ लाख रुपए गंवाने के बाद अब पुलिस के चक्कर काट रहा है। मामला बिजावर निवासी 35 वर्षीय सोनू पाठक से जुड़ा है, जिसकी शादी उड़ीसा की रहने वाली मनीषा नाम की युवती बताकर कराई गई थी। आरोप है कि उड़ीसा के सम्बलपुर निवासी दलाल काशीराम पल्लवी ने यह पूरा सौदा कराया। पीड़ित युवक के मुताबिक दलाल ने उसे तीन लड़कियां दिखाई थीं, जिनमें से उसने मनीषा को पसंद किया। इसके बाद 13 मई 2026 को मुंह दिखाई की रस्म कराई गई। अगले दिन 14 मई को छतरपुर स्थित नरसिंह मंदिर में दोनों ने वरमाला पहनाकर शादी की। शादी के बाद परिवार में खुशी का माहौल था और नवविवाहिता का गृह प्रवेश भी धूमधाम से कराया गया। परिजनों का कहना है कि 16 मई को सुहागरात के बाद अगले दिन सुबह नवविवाहिता ने अचानक तबीयत खराब होने की शिकायत की। 18 मई को उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल छतरपुर में भर्ती कराया गया। आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान वह बाथरूम जाने का बहाना बनाकर फरार हो गई। जाते समय वह सोने-चांदी के जेवर और नकदी भी अपने साथ ले गई। घटना के बाद दूल्हा सोनू पाठक अपने परिजनों के साथ देर रात सिटी कोतवाली पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कथित दलालों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। यह पहला मामला नहीं हैं छतरपुर जिले में इससे पहले भी शादी के नाम पर युवकों को ठगने वाली “लुटेरी दुल्हन गैंग” के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में पुलिस कई बार गिरोह का खुलासा कर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद शादी के नाम पर ठगी का नेटवर्क लगातार सक्रिय दिखाई दे रहा है।

बालेन सरकार की कार्रवाई का भारत पर असर? नेपाल सीमा पर बढ़ाई गई निगरानी

गोरखपुर  नेपाल में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और सरकारी जमीनों पर कब्जे के खिलाफ चल रहे बुलडोजर अभियान के बाद भारत-नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।  उत्तर प्रदेश पुलिस की अभिसूचना इकाई नेपाल बार्डर (एनबी) शाखा की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि नेपाल में बढ़ते दबाव और कार्रवाई के चलते वहां रह रहे रोहिंग्या मुसलमान रोजगार और शरण के लिए अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल सरकार पूरे देश में अवैध निर्माण, झुग्गी-झोपड़ियों और सरकारी जमीनों पर कब्जों के खिलाफ अभियान चला रही है। इस कार्रवाई के तहत बुलडोजर से ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। नेपाली सेना ने भी संबंधित निकायों से अवैध बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों का विस्तृत आंकड़ा मांगा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि काठमांडू के कपन क्षेत्र समेत नेपाल के विभिन्न हिस्सों में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हिंदूवादी संगठनों द्वारा नेपाल में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की बस्तियों को हटाने की मांग की जा रही है। नेपाल सरकार की कार्रवाई, सेना के डाटा संकलन और हिंदूवादी संगठनों के विरोध के कारण रोहिंग्या के सामने रोजगार, आवास और आजीविका का संकट गहराने लगा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश रोहिंग्या मुसलमान उर्दू के साथ नेपाली भाषा भी सीख चुके हैं। कई लोगों द्वारा अवैध तरीके से पहचान पत्र बनवाने की जानकारी भी सामने आई है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यही वजह है कि सीमावर्ती इलाकों में उनकी पहचान कर पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। नेपाल में बलरामपुर जिले की सीमा से सटे गढ़वा गांव पालिका के कोईलावास वार्ड नंबर-8 में अवैध बस्तियों का चिन्हांकन भी शुरू कर दिया गया है।वहां के वर्तमान प्रधान अब्दुल खालिक सिद्दीकी इस कार्रवाई का विरोध कर रहा है और अवैध रुप से रहने वालों को कानूनी अधिकार व जमीन के दस्तावेज देने की मांग कर रहा है। खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि नेपाल में प्रतिकूल हालात बनने पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी सीमावर्ती रास्तों का इस्तेमाल कर भारतीय सीमा में प्रवेश की कोशिश कर सकते हैं। इसी को देखते हुए सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और खुफिया नेटवर्क को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।  

अब नानी भी मांग सकती हैं बच्चे का खर्च, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम निर्णय

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई नाबालिग बच्चा अपनी नानी की देखरेख में रह रहा है, तो नानी उसके भरण-पोषण के लिए अदालत में दावा कर सकती है, भले ही बच्चे की मां जीवित हो। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में तकनीकी आपत्तियों के आधार पर बच्चे के अधिकारों को समाप्त नहीं किया जा सकता। जस्टिस नीरजा के कल्सन ने अपने फैसले में कहा कि कानून केवल विवादों का निपटारा करने के लिए नहीं है, बल्कि उन लोगों की सुरक्षा के लिए भी है जो स्वयं अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं हैं। अदालत ने माना कि वैवाहिक रिश्तों के टूटने के बाद अक्सर नानी ही बच्चे की परवरिश, शिक्षा, दवाइयों और भावनात्मक सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाती है। मामला अंबाला की उस याचिका से जुड़ा था जिसमें पिता ने यह दलील दी थी कि बच्चे की मां जीवित है और वही उसकी प्राकृतिक अभिभावक है, इसलिए केवल मां ही बच्चे की ओर से भरण-पोषण की मांग कर सकती है। पिता ने यह भी कहा कि तलाक के समय एकमुश्त समझौता राशि दी जा चुकी है, जिससे उसकी जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है। हालांकि अदालत ने इन दोनों तर्कों को खारिज कर दिया। जस्टिस कल्सन ने कहा कि अदालत के सामने नानी या मां का अधिकार नहीं, बल्कि बच्चे का अधिकार सर्वोपरि है। बच्चे का भरण-पोषण उसका वैधानिक अधिकार है और उसे केवल तकनीकी आधार पर रोका नहीं जा सकता। अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 को सामाजिक न्याय का प्रावधान बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य जरूरतमंदों को उपेक्षा और अभाव से बचाता है। अदालत ने कहा कि “मेंटेनेंस” केवल जीवित रहने भर का साधन नहीं है, बल्कि इसमें भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा, चिकित्सा और सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं शामिल हैं।फैसले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पति-पत्नी के बीच हुए निजी समझौते बच्चे के स्वतंत्र अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकते। बच्चे की जरूरतें समय के साथ बदलती रहती हैं। शिक्षा का खर्च बढ़ता है, चिकित्सा आवश्यकताएं उत्पन्न होती हैं और महंगाई जीवन-यापन को प्रभावित करती है। ऐसे में तलाक के समय दी गई एकमुश्त राशि को भविष्य की सभी जिम्मेदारियों से मुक्ति नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि समाज की वास्तविकता यही है कि पारिवारिक अस्थिरता के दौरान कई बार नानी ही बच्चे के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा का आधार बनती है। वह केवल अस्थायी आश्रय नहीं देती, बल्कि बच्चे के भविष्य को संभालने का दायित्व भी निभाती है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में नानी को अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

दंतेवाड़ा प्रशासन की अनूठी पहल “उजर 100” योजना से संवरेगा मेधावियों का भविष्य

रायपुर बस्तर अंचल के प्रतिभावान और जरूरतमंद युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने के लिए दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने एक बेहद संवेदनशील और अनूठी शैक्षणिक पहल की है। जिले के आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी विद्यार्थियों को देश-प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से “उजर 100” योजना शुरू की गई है। ​इस महत्वाकांक्षी योजना के सफल क्रियान्वयन, चयन प्रक्रिया और पात्रता नियमों को तय करने के लिए आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में दोपहर 3 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्ययोजना का खाका तैयार किया गया। ​100 सीटों का वर्गवार निर्धारण, स्थानीय को प्राथमिकता     ​योजना के तहत कुल 100 सीटों का कोटा निर्धारित किया गया है। सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए इसमें वर्गवार सीटें तय की गई हैं। जिसमे ​अनुसूचित जनजाति (ST) के 76,​अनुसूचित जाति (SC) के 06,​अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 14 और ​अनारक्षित (General) के 04 सीटें शामिल है। इसके साथ ही कुल सीटों में 6 प्रतिशत आरक्षण दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित रहेगा। योजना का लाभ केवल दंतेवाड़ा जिले के मूल निवासी छात्रों को ही मिलेगा, जिन्होंने प्रथम प्रयास में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की हो। ​5 लाख की आय सीमा, लेकिन 'सुपर टैलेंटेड' बच्चों को पूरी छूट  ​सामान्यतः योजना का लाभ उठाने के लिए परिवार की वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। लेकिन प्रशासन ने प्रतिभा को नियमों में नहीं बांधा है। छत्तीसगढ़ बोर्ड (CGBSE) की प्रावीण्य सूची में जिले के शीर्ष 10 स्थान पाने वाले छात्रों और IIT, NIT, NEET, JEE, NDA व AIIMS जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परीक्षाओं में चयन पाने वाले विद्यार्थियों पर आय की कोई सीमा लागू नहीं होगी। इसी तरह छत्तीसगढ़ बोर्ड के टॉप 100 या सीबीएसई के टॉप 20 छात्र, राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में चयनित विद्यार्थी, नक्सल प्रभावित परिवारों के बच्चे, खनन प्रभावित ग्रामों के छात्र और बीपीएल (BPL) कार्डधारी परिवारों के होनहार बच्चे इस योजना में पहली प्राथमिकता पर होंगे। ​पढ़ाई से लेकर रहने-खाने का खर्च उठाएगी सरकार; सीधे खाते में आएगा पैसा    ​"उजर 100" योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को कॉलेज की फीस, हॉस्टल, भोजन और अध्ययन सामग्री (किताबें-कॉपी) का पूरा खर्च दिया जाएगा। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों (Professional Courses) की पूरी फीस सीधे संबंधित शिक्षण संस्थान को भेजी जाएगी। वहीं, हॉस्टल और किताबों का खर्च डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सीधे छात्र के बैंक खाते में जमा किया जाएगा। ​काउंसिलिंग के लिए मिलेगी  हवाई यात्रा की सुविधा जिला प्रशासन ने मेधावियों के प्रोत्साहन के लिए बड़े कदम उठाए हैं। यदि जिले का कोई छात्र IIT, NIT, AIIMS, NEET या NDA जैसी परीक्षाओं में चुना जाता है, तो उसे संस्थान में रिपोर्टिंग या काउंसिलिंग के लिए जाने हेतु बस, रेल या हवाई यात्रा की मुफ्त सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा शानदार प्रदर्शन करने वाले छात्रों को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा। ड्रॉप लेकर तैयारी करने वाले छात्रों को विशेष परिस्थिति में कोचिंग सहायता भी मिलेगी। ​ऑफलाइन होंगे आवेदन, बनेगी वेटिंग लिस्ट   ​ चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखने के लिए आवेदन ऑफलाइन माध्यम से जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा में जमा किए जाएंगे। स्क्रूटनी, मेरिट लिस्ट और फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद जिला स्तरीय कमेटी अंतिम मुहर लगाएगी। मुख्य सूची के साथ 50 विद्यार्थियों की एक प्रतीक्षा सूची (Waiting List) भी बनाई जाएगी, ताकि कोई सीट खाली रहने पर दूसरे हकदार को मौका मिल सके। ​"उजर 100" योजना दंतेवाड़ा के युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगी। आर्थिक तंगी के कारण अब किसी भी होनहार का सपना नहीं टूटेगा। यहाँ के बच्चे अब राष्ट्रीय पटल पर जिले का नाम रोशन करेंगे।

दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक के साथ अन्य गतिविधियों में लिया हिस्सा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक के साथ अन्य गतिविधियों में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रवास के प्रथम दिन जगदलपुर में नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह और तीन राज्यों छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भेंट एवं चर्चा की। प्रवास के दूसरे दिन मंगलवार को मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भागीदारी की। छत्तीसगढ़ की कला की सराहना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बस्तर में पारम्परिक लोक नृत्यों और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने के साथ ही विभिन्न कला शिल्पों और वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छत्तीसगढ़ की कला की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक कलाएं और लोक कलाकार प्रतिभा के धनी हैं। मध्यप्रदेश की कलाओं का भी छत्तीसगढ़ की कलाओं से काफी साम्य है। दोनों राज्यों के शिल्पी भी अपने हुनर के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं। मां दंतेश्वरी देवी के दर्शन और विज्ञान केंद्र का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक के पश्चात दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी देवी मंदिर में दर्शन किए और सर्वकल्याण के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दर्शन और पूजन के दौरान अनेक श्रद्धालुओं से भेंट और चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को ही दंतेवाड़ा में विज्ञान केंद्र का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विज्ञान केंद्र में प्रदर्शित विभिन्न विज्ञान प्रादर्श देखे और जानकारी प्राप्त की। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विकास के सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में अपनी यात्रा को सुखद बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ कभी एक थे। उन्हें पूर्व में इस अंचल में आने का सौभाग्य नहीं मिला था। मध्य क्षेत्रीय बैठक के कारण बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ विकास के सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी की मंशा के अनुसार महिला, किसान, युवा, गरीब सभी वर्गों के कल्याण के लिए दोनों राज्य निरंतर कार्य करेंगे। श्रेष्ठ आतिथ्य के लिए दिया धन्यवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अमले के प्रति मध्य क्षेत्रीय परिषद बैठक के आयोजन और श्रेष्ठ आतिथ्य के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।  

सीएम की दो टूक- सड़कों पर अव्यवस्था व अराजकता किसी कीमत पर स्वीकार नहीं, प्यार से माने तो ठीक नहीं तो दूसरा तरीका अपनाएंगे

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की बदली तस्वीर का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछली सरकारों में यह राज्य कट्टा-बम, दंगे और माफिया संस्कृति के लिए जाना जाता था, जबकि आज यूपी की पहचान ब्रह्मोस मिसाइल, डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेस-वे, इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स और निवेश डेस्टिनेशन के रूप में है। कानून व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और सकारात्मक शासन की बदौलत प्रदेश बॉटम-2 से निकलकर टॉप-2 राज्यों में पहुंचा है। राज्य में अराजकता व अव्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस है। राह चलती बेटी से छेड़खानी करने वाले की रावण व दुर्योधन जैसी दुर्गति होगी। सड़क पर नमाज पढ़ने के मुद्दे पर उन्होंने दो टूक कहा कि नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए, हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। मौजूदा दौर में पत्रकारिता पर अपने विचार रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सनसनी व फेक न्यूज समाज में अराजकता फैलाती हैं, जबकि सकारात्मक और संवेदनशील पत्रकारिता लोकतंत्र को मजबूत करती है। सीएम योगी सोमवार को ‘अमर उजाला’ के 78वें स्थापना दिवस पर आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सीएम योगी ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हिंदी पत्रकारिता को नई ऊंचाई दी थी। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की लेखनी ने आजादी को नई दिशा दी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पत्रकारिता को आंदोलन का आधार बनाया। कानपुर में गणेश शंकर विद्यार्थी ने पत्रकारिता को देश की स्वाधीनता और सामाजिक न्याय का आधार बनाने का कार्य किया। 1975 में जब लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास हुआ, तब मूर्धन्य संपादकों व रिपोर्टरों ने इसे नाकाम कर दिया। लोकतंत्र में केवल विधायिका, न्यायपालिका या कार्यपालिका ही नहीं, मीडिया की भी सशक्त भूमिका है। लेकिन,  डीप-फेक या फेक-न्यूज का खतरा हर जगह मंडरा रहा है। फेक-न्यूज पर कठघरे में खड़े होना पड़ता है सीएम ने कहा कि रिपोर्टिंग को सनसनी पैदा करने का आधार बनाने की बजाय संवेदनशील बनाया जाता तो बहुत सारी जगहों पर लॉ एंड ऑर्डर की समस्या नहीं खड़ी होती। सनसनी फैलाने वाली न्यूज से रिपोर्टर, समाचार पत्र या मीडिया ग्रुप को तात्कालिक लाभ हो सकता है, लेकिन जब वही न्यूज फेक निकलती है, तो कठघरे में भी खड़ा होना पड़ता है। हम लोग उसके लिए अलर्ट भी रहते हैं, क्योंकि किसी गलत खबर से एक बार आग लग गई तो फिर उसे बुझाने में समय लगता है। हम नहीं चाहते कि यूपी में फिर से दंगे-कर्फ्यू का माहौल बने। यूपी में किसी को अराजकता फैलाने की छूट नहीं है। लोग पूछते हैं कि यूपी में सचमुच सड़कों पर नमाज नहीं होती? मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग पूछते हैं कि आपके यहां यूपी में क्या सड़कों पर सचमुच नमाज नहीं होती? मैं कहता हूं कि कतई नहीं होती है। आप जाकर देख लो, नहीं होती है। सड़कें चलने के लिए हैं या कोई भी व्यक्ति चौराहे पर आकर तमाशा बना देगा? क्या अधिकार है उसको सड़क रोकने का, आवागमन बाधित करने का? जहां इसका स्थल है, वहां जाकर पढ़ो। लोगों ने मुझसे कहा, कैसे होगा, हमारी संख्या ज्यादा है? हमने कहा, शिफ्ट में कर लो। घर में रहने की जगह नहीं है, तो संख्या नियंत्रित कर लो। और, सामर्थ्य नहीं है तो क्यों संख्या बढ़ाए जा रहे? आपको सिस्टम के साथ रहना है, तो नियम-कानून मानना शुरू करें। नमाज पढ़नी है, आप शिफ्ट में पढ़िए। हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नहीं। सामान्य नागरिक, बीमार व्यक्ति, कामगार, कर्मचारी सभी सड़कों पर चलते हैं, हम सड़क बाधित नहीं करने देंगे। प्यार से मानेंगे तो ठीक बात है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे। संवाद से मानेंगे तो ठीक नहीं तो संघर्ष से भी देख लें। बरेली में लोगों ने हाथ आजमाने का कार्य किया, देख ली सरकार की ताकत। सरकार हर सिस्टम के साथ पूरी व्यवस्था को जोड़ना चाहती है। ट्रेड यूनियन नेता सांसद, मंत्री बन गए, श्रमिक भुखमरी के कगार पर पहुंच गया सीएम ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्र का व्यक्ति, अलग-अलग क्षेत्र में कार्य करता है, लेकिन कभी-कभी उसके स्वर ट्रेड यूनियन जैसे हो जाते हैं। ट्रेड यूनियन की प्रवृत्ति कभी सकारात्मक नहीं रही। इसने सत्यानाश ही किया है। ये चंदा वसूली और ‘अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम’ की तर्ज पर पूरी व्यवस्था को खोखला बनाने का काम करती हैं। ट्रेड यूनियन के नेता कोई काम नहीं करते, कंधे पर झोला लटकाए घूम-घूम कर डिस्टरबेंस फैलाते हैं। चंदा वसूली से अपना घर भरते हैं और श्रमिकों को भुखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर देते हैं। कानपुर इसका स्पष्ट उदाहरण है। ट्रेड यूनियन के नेता सांसद व मंत्री बन गए, लेकिन श्रमिक भुखमरी के कगार पर पहुंच गया। कभी शिक्षक, चिकित्सक, व्यापारी भरते थे गुंडा टैक्स सीएम योगी ने कहा कि 9 वर्ष पहले मैं नहीं समझ पाया कि मुझे यूपी क्यों भेजा जा रहा है क्योंकि मैं एक सांसद था। मैंने तो एमएलए का चुनाव भी नहीं लड़ा था। लेकिन मैं यूपी की समस्या जानता था, यहां हर दूसरे दिन दंगे होते हैं। हर जिले में सत्ता का समानांतर माफिया सत्ता संचालित होती है। शिक्षक, चिकित्सक या  व्यापारी, सब गुंडा टैक्स देने के लिए मजबूर थे। बेटी सुरक्षित नहीं थी। न इंफ्रास्ट्रक्चर था। सड़कों पर गड्ढे या अंधेरा दिखाई देते ही यात्री मान लेते थे कि यूपी में प्रवेश कर चुके हैं। सरकार बनाने के बाद हमने कानून का राज स्थापित किया। आज राह चलती बेटी के साथ छेड़खानी करने वाले की दुर्गति रावण व दुर्योधन जैसी होना तय है। विकास की महागाथा रची उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में जितने भी एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें से 60 प्रतिशत एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश में बने हैं। इंटरस्टेट कनेक्टिविटी अब चार लेन की हो गई है। सभी सीमाओं पर सरकार ने भारत-नेपाल मैत्री द्वार, उत्तर प्रदेश-बिहार मैत्री द्वार, उत्तर प्रदेश-झारखंड मैत्री द्वार आदि बनाए हैं। राज्य में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं, पांच पर कार्य चल रहा है और पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू हो चुके हैं। भारत के सबसे बड़े नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की डोमेस्टिक सेवाएं 15 जून से शुरू हो रही हैं। देश का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे हाल ही में पीएम मोदी जी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया है। हमने प्रदेश को बीमारू राज्यों की श्रेणी में निकाल कर रेवेन्यू सरप्लास स्टेट बनाया है। अर्थव्यवस्था को तीन … Read more

पढ़ाई के सपनों के बीच मातम, UK में इकलौते बेटे की मौत से सदमे में परिवार

फाजिल्का. UK के एक पंजाबी युवक की मौत की दुखद खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार, गांव मम्मू खेड़ा के 24 साल के युवक की कल UK में मौत हो गई। मृतक की पहचान अर्शदीप पुत्र जगदेव सिंह निवासी गांव मम्मू खेड़ा के रूप में हुई है। परिवार वालों के अनुसार, अर्शदीप सिंह करीब 4 साल पहले स्टडी वीजा पर UK गया था। अब उसे वर्क परमिट मिल गया था और अर्शदीप सिंह वहां कंस्ट्रक्शन का काम कर रहा था। कल सुबह जब अर्शदीप सिंह नहीं उठा तो उसके रूममेट दोस्तों ने उसे जगाया। जब वह नहीं उठा तो उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। यहां आपको बता दें कि अर्शदीप सिंह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। जैसे ही उसकी मौत की खबर गांव में पहुंची तो मातम छा गया। परिवार वालों ने पंजाब सरकार और भारत सरकार से उनके शव को गांव वापस लाने में मदद की मांग की है।

धमतरी में बनने वाले दो फोरलेन सड़कों की जगह भी देखी, दोनों सड़कों का जल्द शुरू होगा काम

रायपुर  लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने आज धमतरी शहर में बनने वाले दो फोरलेन सड़कों की जगह देखी। लोक निर्माण विभाग द्वारा रत्नाबांधा चौक से कांकेर बायपास तक पांच किलोमीटर तथा सिहावा चौक से नगरी रोड में पांच किलोमीटर सड़क का फोरलेन के रूप में उन्नयन किया जा रहा है। इन दोनों सड़कों का काम जल्दी ही शुरू होगा।  बंसल ने अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए दोनों सड़कों के काम समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश कार्यपालन अभियंता को दिए। विभागीय सचिव ने धमतरी जिले में कुरुद-चरमुड़िया-गोबरा-सिवनी-चिंवरी-सिर्री सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण कार्य का निरीक्षण किया। लोक निर्माण विभाग द्वारा 30 करोड़ 38 लाख रुपए से अधिक की लागत से इस 9.3 किमी सड़क का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण किया जा रहा है। इसे फरवरी-2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।  बंसल ने सिर्री-फुसेरा-करगा-चटौद सड़क चौड़ीकरण के कार्यों को भी देखा। उन्होंने अच्छी गुणवत्ता के साथ सड़क का काम तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए। विभाग द्वारा 15 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत से 9.6 किमी सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। धमतरी के कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी भी दोनों सड़कों के निरीक्षण के दौरान मौजूद थे।  

केन्द्रीय गृह मंत्री ने सम्पूर्ण देश के नक्सलमुक्त होने के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक अभिनंदन एवं आभार प्रकट किया

रायपुर   केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी सहित इन सदस्य राज्यों और केन्द्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह बैठक केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार की मेज़बानी में आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने कहा कि यह बहुत हर्ष का विषय है कि यह बैठक बस्तर में आयोजित की जा रही है और इससे पहले ही आज पूरा बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि आज भारत के नक्सल मुक्त होने का संपूर्ण श्रेय हमारे सुरक्षाबलों के जवानों के परिश्रम और बहादुरी को जाता है। हमारी एजेंसियों ने बहुत सटीकता के साथ इनपुट एकत्र किए, सभी राज्यों के पुलिसबलों और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के साथ मिलकर हर इनपुट पर सटीक कार्रवाई करने से संबंधित समयबद्ध निर्णय किए। इसके साथ ही Whole of the Government Approach के साथ सभी राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार के सभी विभागों ने नक्सलमुक्त हुए क्षेत्रों में विकास को पहुंचाने का काम किया।  अमित शाह ने कहा कि हमारी लड़ाई समाप्त नहीं हुई है क्योंकि नक्सल प्रभावित क्षेत्र लगभग पांच दशक से विकास की दौड़ में पिछड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इन क्षेत्रों को विकास के मामले में देश के बाकी क्षेत्रों के समकक्ष नहीं ले आते, तब तक हमारी लड़ाई समाप्त नहीं होगी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने पूरे देश के नक्सल मुक्त होने के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक अभिनंदन किया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार को नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में जो भी चीजें चाहिए थीं, उन्होंने भारत सरकार के गृह मंत्रालय के साथ समन्वय कर उन्हें प्राप्त किया और जहां नेतृत्व की जरूरत थी, वहां मुख्यमंत्री जी और उपमुख्यमंत्री जी ने नेतृत्व भी प्रदान किया और इसी का परिणाम है कि आज बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है।  अमित शाह ने कहा कि राज्यों के बीच के और राज्यों और केन्द्र के बीच के सभी विवादित मुद्दे समाप्त कर हम आज एक अच्छे वातावरण में यह बैठक कर रहे हैं।  शाह ने कहा कि आज की बैठक में सभी एजेंडा विकास की मॉनिटरिंग से संबंधित थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हमारा संघीय ढांचा मजबूत हुआ है और क्षेत्रीय परिषद की बैठकें निरंतर हो रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप बहुत बड़े भूभाग में चार राज्यों के बीच और चार राज्यों का केन्द्र के साथ कोई विवाद ही नहीं बचा है, यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्य हैं। उत्तर के हिमालय क्षेत्र से लेकर गंगा-यमुना के मैदानी भूभाग से लेकर मध्य भारत के पठारी, वन समृद्ध और खनिज समृद्ध क्षेत्र इस क्षेत्र में आते हैं, जो निश्चित रूप से देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होने कहा कि यह क्षेत्र हमें देश के अनाज के भंडारों को भरने में बड़ी मदद करता है। इस क्षेत्र के समृद्ध खनिज भंडार से देश के विकास को गति मिलती है और इसी क्षेत्र की समृद्ध विरासत और संस्कृति ने देश को आगे बढ़ाने में मदद की है। इसी क्षेत्र में देश के आस्था के सभी केंद्र करीब-करीब एक ही जगह पर आए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लगभग सात राज्यों को जोड़ता है और इस दृष्टि से पूरे मध्य क्षेत्र का बहुत महत्व है। गृह मंत्री ने कहा कि आज यह पूरा क्षेत्र ना केवल नक्सल मुक्त हुआ है, बल्कि विवादों से भी मुक्त हुआ है, जो हम सबके लिए बहुत हर्ष का विषय है।  अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषद बैठकों का एक मजबूत और जीवंत तंत्र बना है – हमने इसे निर्णायक, निरंतर और परिणामदायी बनाया है। 2004 से 2014 के 10 वर्षों में क्षेत्रीय परिषद की मात्र 11 बैठकें हुई थीं, जो 2014 से 2026 के बीच बढ़कर 32 हो गई हैं। पहले 10 वर्षों में स्टैंडिंग कमेटी की 14 बैठकें हुई थीं, जो इस अवधि में ढाई गुना बढ़कर 35 हुई हैं। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 में मात्र 569 मुद्दों पर चर्चा हुई थी, जबकि 2014 से 2026 में 1729 मुद्दों पर चर्चा हुई है, और उनमें से लगभग 80% मुद्दों का सफल निराकरण भी कर लिया गया है। लंबित मुद्दों में से अधिकांश मॉनिटरिंग से संबंधित हैं, जिनमें किसी भी प्रकार का विवाद शेष नहीं है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन -2 पर हमें अभी से फोकस करना चाहिए और हर घर में नल से जल पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण और समाज कल्याण बहुत संवेदनशील मुद्दे हैं। गृह मंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों और सभी मुख्य सचिवों से आह्वान किया कि कुपोषण के खिलाफ भारत सरकार की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ें। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल ड्रॉपआउट दर और स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी और अधिक कार्य हों। वित्तीय समावेशन और बिजली सुधार इस विकसित क्षेत्र को पूर्ण विकसित बनाने में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं।  अमित शाह ने कहा कि शहरी नियोजन, जन स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और बिजली सुधार के चारों क्षेत्र में भी और अधिक गति से कार्य करें। गृह मंत्री ने अपील की कि हमारा कम से कम 50% ध्यान ग्रामीण विकास और व्यक्ति को मजबूत बनाने वाली योजनाओं पर रहना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि हर 5 किलोमीटर के दायरे में बैंक की सुविधा उपलब्ध होना बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि हमारी सभी योजनाएं Direct Benefit Transfer (DBT) आधारित हैं, इसीलिए सभी राज्यों को इस दिशा में ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है। केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह ने कहा कि POCSO और बलात्कार के मामलों में अगर समय से DNA जांच हो जाए तो इनमें दोषसिद्धि की दर शत-प्रतिशत हो सकती है।  शाह ने कहा कि … Read more