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ऑनलाइन मेडिसिन सेल के विरोध में उतरे दवा व्यापारी, CG में 20 हजार मेडिकल स्टोर बंद

रायपुर. ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ ऑफलाइन दवा विक्रताओं ने हल्ला बोल दिया है. छत्तीसगढ़ सहित देशभर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में दवा विक्रेताओं ने 20 मई को राष्ट्रव्यापी बंद का ऐलान किया है. इस बंद के समर्थन में छत्तीसगढ़ के करीब 20 हजार मेडिकल स्टोर एक दिन के लिए बंद रहेंगे. दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बिना पर्याप्त निगरानी और नियमों के दवाइयों की बिक्री की जा रही है, जिससे मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो सकता है और छोटे दवा व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है. छत्तीसगढ़ के दवा व्यापारियों ने कहा कि ऑनलाइन दवा कंपनियों को लेकर लंबे समय से सरकार से शिकायत की जा रही है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसी के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) के आह्वान पर यह राष्ट्रव्यापी बंद बुलाया गया है. बंद के दौरान प्रदेशभर में मेडिकल स्टोर संचालक अपना कारोबार बंद रखेंगे और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी करेंगे. संवेदनशील दवाओं का हो रहा गलत इस्तेमाल दवा विक्रेताओं के संगठन का आरोप है कि कई ऑनलाइन कंपनियां डॉक्टर की पर्ची के बिना भी दवाइयां उपलब्ध करा रही हैं. इससे एंटीबायोटिक और अन्य संवेदनशील दवाओं का गलत इस्तेमाल बढ़ रहा है. व्यापारियों का कहना है कि दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं है, बल्कि यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है, इसलिए इसकी बिक्री पर सख्त नियंत्रण जरूरी है. हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया है कि आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कुछ मेडिकल स्टोर खुले रह सकते हैं, ताकि मरीजों को जरूरी दवाओं की परेशानी न हो. वहीं, बंद को लेकर आम लोगों से पहले ही जरूरी दवाइयां खरीद लेने की अपील की गई है. दवा व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू नहीं किए, तो आगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

नई शिक्षा नीति 2020 का असर, आंगनवाड़ी और स्कूलों के तालमेल से मजबूत होगी बच्चों की बुनियाद

राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020: आंगनवाड़ी और स्कूलों के समन्वय से सुदृढ़ होगी प्रारंभिक शिक्षा की नींव महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के को -लोकेशन के दिशा-निर्देशों से शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत भोपाल  छोटे बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत अक्सर एक अनजान जगह से होती है, जहां उनको नया माहौल मिलता है। इस माहौल के डर और झिझक को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी और प्राथमिक विद्यालय को अब एक ही परिसर में लाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और 'मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0' के विज़न को धरातल पर उतारने के लिए केन्द्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। अब आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों का को-लोकेट किया जा रहा है। इस व्यावहारिक रणनीति का उद्देश्य बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और देखभाल की एक ऐसी मजबूत नींव रखना है, जो उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल दो संस्थानों को एक परिसर में लाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह महिला एवं बाल विकास और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर बच्चों के लिए एक सुरक्षित, प्रेरक और उत्कृष्ट शैक्षणिक माहौल तैयार करने का महाअभियान है। क्या बदलेगा इस व्यवस्था से यह को-लोकेशन मॉडल मुख्य रूप से उन आंगनवाड़ी केंद्रों पर लागू किया जा रहा है जो प्राथमिक विद्यालयों के समीप स्थित हैं और जहाँ बच्चों के लिए सुरक्षित पहुँच उपलब्ध है। इसमें अस्थायी या सीमित संसाधनों वाले परिसरों में चल रहे आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राथमिक विद्यालयों में स्थानांतरित कर अधिक सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे विद्यालय जहॉ अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध हैं, वहाँ आंगनवाड़ी केंद्रों को को-लोकेट किया जा रहा है जिससे शासकीय परिसंपत्तियों और संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। भौगोलिक कारणों से जिन क्षेत्रों में भौतिक रूप से को- लोकेशन संभव नहीं है, वहाँ समीपस्थ प्राथमिक विद्यालयों के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों की डिजिटल मैपिंग की जा रही है जिससे दोनों संस्थानों के बीच समन्वय और संसाधनों का साझा उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इस एकीकृत मॉडल से बच्चों का आंगनवाड़ी केन्द्रों से पहली कक्षा में स्थानांतरण बेहद सुचारू और सहज हो जाएगा। विद्यालय परिसर से पहले से परिचित होने के कारण बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे शुरुआती कक्षाओं में होने वाले ड्रॉप आउट की दर में भारी कमी आएगी। इस नई व्यवस्था से आंगनवाड़ी के बच्चों को स्कूलों की आधुनिक अधोसंरचना, खेल के मैदानों और उन्नत शैक्षणिक संसाधनों तक समान पहुँच मिलेगी। बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होने के साथ-साथ खेल-आधारित पाठ्यक्रमों जैसे 'आधारशिला' और 'जादुई पिटारा' के साझा उपयोग से शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा। आंगनवाड़ी एवं विद्यालीन समन्वय से बच्चों के डेटा का मिलान आसान होगा, जिससे सेवाओं के दोहराव से बचा जा सकेगा और प्रत्येक बच्चे तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुँचना सुनिश्चित हो। 'विद्यारंभ'- म.प्र. ने रचा इतिहास आंगनवाड़ी और प्राथमिक स्कूलों के इस को-लोकेशन मॉडल को प्रभावी बनाने में 'विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम' एक ऐतिहासिक कड़ी साबित हो रहा है, जो बच्चों की औपचारिक शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय चिंतन शिविर के निर्णयों के अनुरूप बाल चौपाल अर्ली चाइल्ड हूड केयर एंड एजुकेशन -डे) के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के 94 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ "विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण समारोह" संपन्न हुआ। पूरे प्रदेश में एक साथ इस गरिमामयी अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने वाला मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य बना है। इस महाअभियान में 5 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के 9.28 लाख से अधिक बच्चों को उनके जीवन की पहली औपचारिक शिक्षा यात्रा के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस प्रदेशव्यापी आयोजन की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें राज्य स्तर पर 1, जिला स्तर पर 65, परियोजना स्तर पर 445, सेक्टर स्तर पर 3,358 तथा आंगनवाड़ी स्तर पर 94,482 सफल कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन सभी स्तरों पर आयोजित कार्यक्रमों में मंत्रियों, विधायकों, कलेक्टर्स, मुख्य कार्यपालन अधिकारियों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। भविष्य की कार्ययोजना को सुदृढ़ करने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को पात्र बच्चों की सूची भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे आगामी सत्र में शालाओं में उनका शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जा सके।  

झारखंड में 60 लाख महिलाओं को मंईयां सम्मान योजना से मिल रही आर्थिक मदद

रांची झारखंड मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आधी आबादी को मुख्यधारा में शामिल किए बिना राज्य का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। वर्तमान में राज्य की लगभग 60 लाख महिलाओं को झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत प्रति माह वित्तीय सहायता प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा हो सकता है कि इस योजना का पांच से दस प्रतिशत लोग गलत तरीके से लाभ ले रहे हों, लेकिन ऐसे लोगों को रोकने के लिए 90 प्रतिशत लोगों को प्रभावित नहीं किया जा सकता। हेमंत सोरेन सोमवार को झारखंड मंत्रालय में आयोजित नवनियुक्त इंटर एवं स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों का नियुक्ति-पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह अवसर न केवल नवनियुक्त अभ्यर्थियों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि राज्य के समग्र और समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें यह देखकर प्रसन्नता होती है कि इस योजना का लाभ लेने वाली बेटियां आज कलेक्टर जैसे पदों तक पहुंच रही हैं। महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का कार्य भी निरंतर हो रहा है। अब वह समय बीत चुका है, जब महिलाओं को चाहरदीवारी के भीतर सीमित रखा जाता था। आज उन्हें आगे आना है और समाज को भी उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेना है। इस अवसर पर राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता सचिव उमा शंकर सिंह, प्राथमिक शिक्षा निदेशक मनोज कुमार रंजन सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। महिलाओं-बच्चों का तैयार करना है भविष्य राज्य सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी, दलित और पिछड़ा वर्ग बाहुल्य है, जो कई कारणों से विकास की गति में पीछे छूट गया था। नवनियुक्त कर्मी गांव-गांव और घर-घर जाकर सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करें। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं है, बल्कि आपके माध्यम से सरकार गांव-गांव, घर-घर और हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहती है। खासकर महिलाओं और बच्चों तक, जिन्हें हमें आने वाले भविष्य के लिए तैयार करना है। सीमित दायरे में जीवन जीने वाले इन लोगों को बदलते परिवेश के अनुरूप आगे बढ़ाना, उनका सशक्तिकरण करना, यह बड़ी चुनौती आपके कंधों पर होगी। सरकार निष्पक्ष तरीके से रोजगार देने को प्रतिबद्ध नियुक्ति पत्र वितरण समारोह सभागार उत्साह, उमंग एवं गौरवपूर्ण माहौल से सराबोर रहा। मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज और राज्य के विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं, वहीं महिला पर्यवेक्षकाएं समाज में महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने तथा महिला एवं बाल विकास योजना को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लगातार नियुक्तियां की जा रही हैं।

पश्चिमी सिंहभूम में बड़ा एनकाउंटर, कोबरा 209 बटालियन और नक्सलियों में मुठभेड़

 चक्रधरपुर  पश्चिमी सिंहभूम जिले के पोड़ाहाट जंगल में केड़ाबीर के पास मंगलवार तड़के पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में हुई है। सूचना है कि मुठभेड़ के दौरान नक्सली मारे गए हैं। हालांकि अभी तक अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि कितने नक्सली मारे गए हैं। घटना सोनुवा थाना क्षेत्र के केड़ाबीर इलाके में हुई। तड़के साढ़े छह बजे हुई मुठभेड़ पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोबरा 209 बटालियन के जवान पिछले दो दिनों से सोनुवा, गोइलकेरा थाना क्षेत्र के घने जंगलों में सर्च अभियान चला रहे थे। तड़के करीब छह बजे कॉम्बिंग ऑपरेशन के दौरान जवानों का नक्सलियों से आमना-सामना हो गया। इसके बाद दोनों ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। रुक-रुक कर चली गोलीबारी में एक या दो नक्सली मारे गए हैं। सूचना है कि पुलिस ने उसके पास से हथियार समेत अन्य सामान बरामद किया है। एसपी ने की पुष्टि, हाई अलर्ट जारी पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इलाके में ऑपरेशन जारी है। मुठभेड़ के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षाबलों की सतर्कता बढ़ा दी गई है और सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। पूरे सारंडा क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। मिसिर बेसरा के नेतृत्व में सक्रिय नक्सली सूत्रों के अनुसार इलाके में माओवादी नेता मिसिर बेसरा के नेतृत्व में नक्सली अब भी सक्रिय हैं। हाल ही में गोईलकेरा थाना क्षेत्र में एक पूर्व नक्सली रमेश चांपिया की हत्या के बाद संकेत मिल रहे थे कि नक्सली सारंडा से निकलकर कोल्हान और पोड़ाहाट जंगल में आसपास के इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। इसके बाद 29 अप्रैल को सुरक्षा बल के साथ मुठभेड़ में मारे गए 1 लाख के इनामी नक्सली इसराइल पूर्ति उर्फ अमृत को मार गिराया था। इसके बाद से सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि नक्सलियों के खिलाफ जल्द बड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जंगल क्षेत्रों में पुलिस और नक्सलियों के बीच लुकाछिपी का खेल जारी है। सुरक्षाबल हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रयासों से एक वर्षीय बालिका बनी प्रेरणा

रायपुर महिला एवं बाल विकास विभाग की सतत निगरानी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मेहनत और परिवार के सहयोग से बीजापुर जिले के विकासखंड भोपालपटनम के ग्राम पीलूर की एक वर्षीय बालिका शान्वी मड़े ने गंभीर कुपोषण को मात देकर सामान्य श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। शान्वी की यह सफलता क्षेत्र के अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणादायक बन गई है। शान्वी की माता  सरिता मड़े ने बताया कि बच्ची का स्वास्थ्य काफी कमजोर था और उसका वजन उम्र के अनुसार बहुत कम था। जांच में शान्वी गंभीर कुपोषण से पीड़ित पाई गई। उस समय उसका वजन 7.900 किलोग्राम था। स्थिति को गंभीर देखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने लगातार घर-घर जाकर परिवार को संतुलित आहार, स्तनपान, पूरक पोषण और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में समझाया। प्रारंभ में परिवार बच्ची को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) ले जाने के लिए तैयार नहीं था, लेकिन लगातार समझाइश और मार्गदर्शन से परिवार सहमत हुआ। परियोजना अधिकारी  कल्पना रथ और सेक्टर सुपरवाइजर कु. उजाला बंजारे ने भी परिवार से मुलाकात कर आवश्यक परामर्श दिया। इसके बाद  विगत 2 अप्रैल को शान्वी को एनआरसी में भर्ती कराया गया, जहां उसे चिकित्सकीय देखरेख, विशेष पोषण आहार और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया। एनआरसी में उपचार और घर लौटने के बाद नियमित देखभाल तथा सही पोषण मिलने से शान्वी के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ। वर्तमान में उसका वजन बढ़कर 9.200 किलोग्राम हो गया है तथा उसकी ऊंचाई 70.2 सेंटीमीटर दर्ज की गई है। अब शान्वी पूरी तरह सामान्य श्रेणी में पहुंच चुकी है। शान्वी की यह कहानी बताती है कि समय पर पहचान, सही उपचार, पोषण संबंधी जागरूकता और परिवार के सहयोग से कुपोषण जैसी समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। स्वस्थ बचपन, खुशहाल भविष्य शान्वी की सफलता आज पूरे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश बन गई है कि सही देखभाल और पौष्टिक आहार से हर बच्चा स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सकता है।

RERC के आदेश से राजस्थान को मिलेगी 24 घंटे स्थिर बिजली आपूर्ति की राह

जयपुर राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) के आदेश ने ऊर्जा नीति और भविष्य की बिजली व्यवस्था को लेकर रास्ता साफ कर दिया है. आयोग ने 15 मई को आदेश में दीर्घकालिक थर्मल पावर खरीद की अनुमति दे दी है. इसका मतलब है कि राजस्थान को अब सिर्फ सौलर या पवन ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहना होगा. बल्कि स्थायी और लगातार उपलब्ध रहने वाली बिजली के लिए कोयला आधारित उत्पादन भी जारी रहेगा. दरअसल, राजस्थान में बड़े स्तर पर सोलर और विंड प्रोजेक्ट विकसित हो रहे हैं. इन दोनों प्रोजेक्ट में चुनौती भी कम नहीं है. क्योंकि रात में सोलर बिजली उपलब्ध नहीं रहती और कई बार हवा की कमी से विंड एनर्जी उत्पादन भी प्रभावित होता है. ऐसे में ग्रिड को स्थिर बनाए रखने और चौबीस घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 'बेसलोड पावर' की जरूरत पड़ती है, जिसे थर्मल पावर प्लांट लगातार उपलब्ध कराते हैं. इससे क्या होगा फायदा, वो भी जानिए ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि राजस्थान में आने वाले वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ेगी. औद्योगिक विस्तार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डेटा सेंटर, शहरीकरण और कृषि क्षेत्र में बढ़ती बिजली जरूरतों के कारण राज्य को स्थायी बिजली स्रोतों की आवश्यकता होगी. ऐसे में यह आदेश सिर्फ थर्मल पावर खरीद की मंजूरी नहीं, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. इस ऑर्डर से राजस्थान आने वाले दशक में ऊर्जा सुरक्षा, ग्रिड स्थिरता और चौबीस घंटे बिजली उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए “हाइब्रिड पावर मॉडल” की दिशा में आगे बढ़ सकता है.   आयोग ने बिजली खरीद के लिए दिए ये विकल्प केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने वर्ष 2035-36 तक राजस्थान के लिए 4440 मेगावाट अतिरिक्त कोयला आधारित क्षमता की आवश्यकता बताई थी. इसी के आधार पर RERC ने  कहा कि राज्य की डिस्कॉम्स थर्मल पावर की खरीद कर सकती है. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और कंपनियां MoU, ज्वाइंट वेंचर या फिर बोली के जरिए बिजली खरीद कर सकती है.   बोली का टीबीसीबी ऑप्शन भी खुला बोली के लिए 'टैरिफ बेस्ड कम्पेटिटिव बिडिंग' (TBCB) मॉडल अपनाया जा सकता है. इसमें अलग-अलग कंपनियां बिजली सप्लाई के लिए बोली लगाएंगी. सबसे कम दर और बेहतर शर्तों पर बिजली उपलब्ध कराने वाली कंपनी को टेंडर दिया जाएगा. इससे बिजली खरीद की लागत कम रखने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी.

तेज चलने से बढ़ सकती है उम्र: लीसेस्टर स्टडी में बड़ा खुलासा

हेल्दी रहने के लिए पैदल चलना सबसे आसान तरीका है। यह आपके पूरे शरीर की फिटनेस को सही रखने में मदद करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके चलने की स्पीड से उम्र की लंबाई पर असर पड़ता है। लीसेस्टर बायोकेमिकल रिसर्च सेंटर की स्टडी ने पता लगाया कि तेज चलने वालों या धीमा चलने वालों में से कौन ज्यादा जीते हैं? इसी सेंटर की दूसरी रिसर्च इसके पीछे का कारण भी बताती है। तेज या धीमी गति, कैसे चलने वाले लोग जीते हैं लंबा? लीसेस्टर सेंटर की रिसर्च ने यूके बायोबैंक के 474,919 लोगों के चलने की आदत का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि तेज स्पीड से चलने की आदत वाले लोगों की संभावित उम्र (लाइफ एक्सपेक्टेंसी) धीमा चलने वालों के मुकाबले ज्यादा होती है। उन्होंने यह पता भी लगाया कि संभावित उम्र का शारीरिक वजन से ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी से गहरा नाता है। उन्होंने पाया कि जो अंडरवेट (जरूरत से ज्यादा पतले) लोग धीमी स्पीड से चलते हैं, उनकी उम्र सबसे कम देखी जाती है। धीमा चलने वाले अंडरवेट पुरुषों की संभावित उम्र औसतन 64.8 साल और ऐसी अंडरवेट महिलाओं की औसतन उम्र 72.4 साल होती है। शारीरिक वजन से बेहतर है ये इंडिकेटर इस रिसर्च के प्रमुख लेखक प्रोफेसर टॉम येट्स कहते हैं कि हमारा शोध यह साफतौर पर दिखाता कि संभावित उम्र को देखने के लिए बॉडीवेट स्टेटस से ज्यादा बेहतर इंडिकेटर फिजिकल एक्टिविटी स्टेटस है। हमारा शोध लोगों को तेज चलकर अपनी उम्र बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। आपको बता दें कि यह शोध साल 2019 में प्रकाशित हुआ था। दूसरा शोध: टेलोमेयर है कारण 2022 में कम्युनिकेशन बायोलॉजी पर प्रकाशित लीसेस्टर के दूसरे शोधकर्ताओं की रिसर्च तेज चलने और लंबी उम्र के कारण के बारे में बताती है। इसमें यूके बायोबैंक के 405,981 लोगों का अध्ययन किया गया। जिसमें पाया कि चलने की स्पीड हेल्थ के बारे में जानने का मजबूत संकेत है। अध्ययन में तेज गति से चलने वाले लोगों के ल्यूकोसाइट टेलोमेयर की लंबाई धीमा चलने वालों के मुकाबले ज्यादा मिली। इसी की वजह से उनकी संभावित उम्र में बढ़ोतरी का संबंध पाया गया। टेमोमेयर और लंबी उम्र का रिश्ता कई सारे शोधों के बाद टेलोमेयर को लाइफ एक्सपेक्टेंसी और उम्र संबंधी बीमारियों के साथ मजबूती से जोड़कर देखा गया। साइंस डायरेक्ट पर मौजूद शोध बताता है कि टेलोमेयर लीनियर क्रोमोजोमल डीएनए के आखिरी सिरे पर मौजूद कैप होती है। जो क्रोमोजोम को डैमेज होने से बचाती है और इनकी स्टेबिलिटी को बढ़ाती है। 100 साल से ज्यादा जीने वाले लोगों में टेलोमेयर की लंबाई कम उम्र में किसी बीमारी से मरने वाले लोगों की तुलना में अधिक पाई गई है।  

सुपरकॉप दमयंती सेन फिर पावर में, महिलाओं-बच्चों के अपराध जांच आयोग की बनीं मेंबर सेक्रेटरी

कलकत्ता सीनियर आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन की पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था में वापसी हो गई है. उन्होंने साल 2012 के पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस की जांच से खूब सुर्खियां बटोरी थीं. लेकिन तत्कालीन TMC सरकार में नो हाशिए पर धकेल दी गई थीं।  दमयंती सेन को शुभेंदु सरकार ने एक विशेष आयोग में नियुक्त किया है. ये आयोग महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की जांच के लिए बनाया है.  श्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद इस नियुक्ति का ऐलान किया।  सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि आईपीएस दमयंती सेन को उस जांच आयोग का 'मेंबर सेक्रेटरी' नियुक्त किया गया है, जो टीएमसी के 15 साल के शासनकाल के दौरान महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अत्याचारों की जांच करेगा. ये आयोग अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और बच्चों के साथ हुए अपराधों की जांच करेगा।  कौन हैं आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन? बता दें कि साल 1996 बैच की आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन कोलकाता पुलिस की पहली महिला ज्वाइंट कमिश्नर (क्राइम) थीं. 6 फरवरी 2012 को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में एक नाइट क्लब से निकली महिला के साथ चलती कार में सामूहिक बलात्कार हुआ था. तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को उनकी नई सरकार को बदनाम करने के लिए रचा गया एक 'सजायनो घटना' (मनगढ़ंत कहानी) करार दिया था।  सच का साथ देने पर हुआ था तबादला दमयंती सेन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच की और कुछ ही दिनों में आरोपियों को दबोच लिया. पुलिस जांच ने साबित कर दिया कि बलात्कार की घटना सच थी, जो सरकार के राजनीतिक दावों के बिल्कुल उलट था. केस सुलझने के तुरंत बाद ही दमयंती सेन का तबादला लालबाजार क्राइम ब्रांच से बैरकपुर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज कर दिया गया था।  सरकार ने इसे रूटीन ट्रांसफर बताया था, लेकिन विपक्ष और आलोचकों का मानना था कि सरकार के रुख के खिलाफ जाकर सच सामने लाने की वजह से उन्हें सजा दी गई. इसके बाद टीएमसी के पूरे कार्यकाल में उन्हें किसी बड़े की जिम्मेदारी नहीं दी गई।  हाईकोर्ट ने जताया था भरोसा प्रशासनिक हलकों में दमयंती सेन की ईमानदारी हमेशा चर्चा में रही. साल 2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने न्यायपालिका का भरोसा जताते हुए उन्हें राज्य के चार बलात्कार मामलों और चर्चित रसिका जैन मौत मामले की जांच सौंपी थी. इसके बाद 2023 में उन्हें एडीजी (ट्रेनिंग) बनाया गया था। 

कहीं तेज रफ्तार तो कहीं ट्रेन बनी मौत की वजह, CG में 7 लोगों ने गंवाई जान

रायपुर/कोरबा/सूरजपुर. छत्तीसगढ़ में अलग-अलग जिलों में हुई दुर्घटनाओं में 7 लोगों की मौत हो गई. कहीं तेज रफ्तार ने कहर बरपाया तो कहीं फैक्ट्री में लापरवाही ने महिला मजदूर की जान ले ली. वहीं ट्रेन की चपेट में आकर ग्रामीण की मौत हो गई. मृतकों में 6 पुरुष और 1 महिला की मौत हुई. यह हादसे रायपुर, कोरबा और सूरजपुर जिले से सामने आए हैं.  सड़क हादसे में दो की मौत: जवाली-चाकाबुड़ा मार्ग की पहली घटना है, जहां अज्ञात वाहन की टक्कर से दो ग्रामीणों की मौत हो गई. मृतकों की पहचान अरदा निवाी प्रकाश और चाकाबुड़ा निवासी बबलू के रूप में हुई है. घटना के बाद लोगों ने आधी रात तक चक्काजाम किया। जानकारी के मुताबिक, घटना मोंगरा थाना इलाके की है. अज्ञात वाहन की टक्कर से दो लोगों की मौत हो गई. स्थानीय लोगों को खबर मिलने पर वह मौके पर पहुंचे. आक्रोशित होकर उन्होंने आधी रात तक चक्काजाम किया. ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र में रात में अवैध रेत परिवहन के ट्रैक्टर तेज रफ्तार से दौड़ते हैं. सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर समझाइश दी, जिसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन खत्म किया. मातम में बदली खुशियां बालको थाना इलाके के अगजरबहार के पास तेज रफ़्तार का कहर देखने को मिला है. पिकनिक मना कर लौट रहे युवकों से भरा ऑटो का नियंत्रण बिगड़ने से हादसा हो गया. ऑटो पलटने से दो युवकों की मौत हो गई, जबकि अन्य घायल हुए हैं. घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है. जानकारी के अनुसार, लगभग खरमोरा से 10 युवक पिकनिक मनाने झोरघाट गए थे. वापस लौटने के दौरान उनकी ऑटो पलट गई. मौके पर दो युवक ने दम तोड़ दिया, मृतकों की पहचान सोनू यादव और सत्यम यादव के रूप में हुई है.  वहीं घायलों को राहगिरों ने मानवता दिखाते हुए अस्पातल भिजवाया. पुलिस सूचना पर मौके पर पहुंची और दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए रवाना कर दिया गया है. मशीन में दबकर मजदूर की मौत कोरबा में प्रेम एंटरप्राइजेज राखड़ ईंट फैक्ट्री में महिला मजदूर मशीन की सफाई कर रही थी. घटना के वक्त फैक्ट्री में चार से पांच मजदूर काम कर रहे थे. मृतका भी लंबे समय बाद उसी दिन काम पर लौटी थी. चालू हालत में मशीन साफ करने के दौरान अचानक लीवर नीचे गिर गया और महिला उसकी चपेट में आ गई. मशीन में दबने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई. मृतिका की पहचान 26 साल की बिछनी बाई के रूप में हुई है. मृतका का एक नाबालिग बेटा है. हादसे के बाद ग्रामीणों ने शव उठाने से मना कर दिया। उन्होंने मृतिका के परिवार को उचित मुआवजे की मांग की. वहीं घटना की जानकारी मिलती ही पुलिस भी मौके पर पहुंची. इधर रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया और स्थानीय जनप्रतिनिधि अरविंद भगत आंदोलन पर बैठ गए. लगभग 4 घंटे के बाद फैक्ट्री संचालक प्रदीप अग्रवाल, ग्रामीणों और पुलिस के बीच बातचीत चली. इसके बाद मुआवजे देने पर सहमति बनी. पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता के रूप में 75 हजार रुपये दिए गए. वहीं मृतका के पुत्र के नाम पर 2 लाख रुपये की एफडी कराने, 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 1500 रुपये भरण-पोषण राशि देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने पर सहमति बनी. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.  रायपुर-राजिम ट्रेन की चपेट आकर ग्रामीण की मौत अभनपुर में रायपुर-राजिम ट्रेन की चपेट में आने से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान ग्राम सिवनी निवासी के रूप में सामने आई है. शव से कुछ दूर पर पुलिस को एक बाइक भी बरामद हुई है, जो मृतक की बताई जा रही है. घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है. जानकारी के अनुसार, मंगलवार को रेलवे ट्रैक के पास एक शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने जांच शुरू की तो शव के सिर और अन्य हिस्सों में भी ट्रेन से टकराने के कारण गंभीर चोट नजर आई है.  घटना स्थल के सामने स्थित सोनी मल्टी अस्पताल में मृतक के परिवार का एक सदस्य भर्ती बताया जा रहा है। शव को पोस्टमार्टम के लिए रवाना कर दिया गया है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है. यह सुसाइड है या हादसा इसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है.  ट्रैक्टर पलटने से ड्राइवर की मौत  सूरजपुर जिले में भी मंगलवार को दर्दनाक हादसा साबित हुआ. सिंदरी नाले में ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया. घटना में ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई. मामला बसदेई चौकी क्षेत्र का है. जानकारी के मुताबिक, ट्रैक्टर केवरा से कुसमुसी रेत लेने जाने जा रहा था. इस दौरान सिंदरी नाला में ड्राइवर ने ट्रैक्टर से नियंत्रण खो दिया. ट्रैक्टर नाले के नीचे पलट गई. मृतक भैयाथान के दर्रीपारा का निवासी बताया जा रहा है. घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया है. पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.

हज यात्रा पर निकले छत्तीसगढ़ के 391 श्रद्धालु, मुंबई एयरपोर्ट से उड़ान

रायपुर हज 2026 के लिए मुंबई के अंतराष्ट्रीय विमानतल से अब तक छत्तीसगढ़ राज्य के 391 हज यात्री हज-ए- बैतुल्लाह के लिए रवाना हो चुके हैं। हाजियों के मुंबई से प्रस्थान के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी द्वारा  हज हाउस में हाजियों की रिपोर्टिंग कराई गई एवं हज यात्रा के आवश्यक दस्तावेजों का वितरण हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज बेग द्वारा किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज बेग एवं सदस्य  मौलाना अमीर बेग, मौलाना महताब, गुलाम रहमान खान, ने  हज हाऊस से विशेष बसों को हरी झंडी दिखाकर एयरपोर्ट के लिए रवाना किया गया। एयरपोर्ट पर भी हज हाऊस यात्रियों के लिए छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी द्वारा सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जिससे हज यात्रियों का प्रस्थान सुगमता पूर्वक संपन्न हुआ। एंबारकेशन प्वाइंट से राज्य के हज यात्रियों की सुगमता पूर्वक प्रस्थान की समस्त व्यवस्थाओं का संपादन छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग के दिशा निर्देशों व मार्गदर्शन में  पूर्ण  किया गया।