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कान्स में ऐश्वर्या राय को लेकर वायरल दावा कितना सच? जानिए पूरा मामला

ऐश्वर्या राय बच्चन कान्स की रियल क्वीन हैं. वो बीते कई सालों से कान्स फिल्म फेस्टिवल में जलवे बिखेर रही हैं. ऐश्वर्या के रेड कार्पेट लुक्स पर दुनियाभर की नजरें टिकी रहती हैं और एक्ट्रेस भी हमेशा अपने ग्लैमरस लुक से हर किसी को वाह…कहने पर मजबूर कर देती हैं. ऐश्वर्या जब भी रेड कार्पेट पर उतरती हैं तो हर कैमरा सिर्फ उनपर होता है. एक्ट्रेस को अपने कैमरों में कैद करने के लिए इंटरनेशनल फोटोग्राफर्स बेकरार रहते हैं. लेकिन क्या इस साल ऐश्वर्या को इग्नोर किया गया है? इस सवाल पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. क्या है वायरल पोस्ट की सच्चाई? ऐश्वर्या राय इस साल इलेक्ट्रिक ब्लू मर्मेड गाउन में कान्स रेड कार्पेट पर जलवे बिखेरती नजर आईं. ब्लू गाउन में एक्ट्रेस का ग्लैमरस अंदाज दिखा. उन्होंने रेड कार्पेट पर फोटोग्राफर्स को फ्लाइंग Kiss करते हुए कई पोज भी दिए. एक्ट्रेस की खूबसूरती पर हर कोई दिल हार बैठा. ब्लू गाउन में ऐश्वर्या के कई फोटोज और वीडियोज इंटरनेट पर वायरल हो रहे हैं. इस साल भी ऐश्वर्या ने अपने गॉर्जियस लुक्स से फैंस का दिल जीत लिया. ऐश्वर्या के हुस्न की तारीफ करते फैंस थक नहीं रहे हैं. लेकिन इसी बीच X पर वायरल एक पोस्ट ने ऐश्वर्या राय के फैंस को नाराज और निराश कर दिया. वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि कान्स में ऐश्वर्या राय को इग्नोर किया गया. पोस्ट में लिखा है-  कोई ऐश्वर्या राय की तस्वीरें क्यों नहीं खींच रहा है? (मैं उनके फैंस की तरह बेवकूफ नहीं हूं, मैं बस उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब दे रही हूं.) इस पोस्ट पर ऐश्वर्या राय के फैंस उनके सपोर्ट में आगे आ रहे हैं. फैंस वायरल पोस्ट पर गुस्से में रिएक्शन दे रहे हैं. एक फैन ने ऐश्वर्या के सपोर्ट में लिखा- मुझे नहीं लगता कि दर्शक या कैमरे इतने अंधे हैं जो ऐश्वर्या राय को नजरअंदाज कर दें. जरा कैमरों के फ्लैश तो देखो. सोशल मीडिया पर पोस्ट पर बहस छिड़ रही हैं. वायरल पोस्ट पर एक्ट्रेस के फैंस का गुस्सा फूट पड़ा है. फैंस का कहना है कि निगेटिव पीआर के जरिए ऐश्वर्या के खिलाफ ऐसे पोस्ट शेयर किए जा रहे हैं. वैसे इस मामले में आपका क्या कहना है?

वास्तु टिप्स: अलमारी में रखी ये 4 खराब चीजें रोक सकती हैं धन का प्रवाह

वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर की हर एक वस्तु में खास ऊर्जा होती है, जो हमारे जीवन और आर्थिक स्थिति पर असर डालती है.  खासकर हमारी अलमारी, जिसे हम धन और कीमती चीजें रखने के लिए इस्तेमाल करते हैं, वहां सकारात्मक ऊर्जा का होना बेहद जरूरी है.  कई बार हम अनजाने में अपनी वॉर्डरोब में कुछ ऐसी पुरानी या खराब चीजें छोड़ देते हैं, जो नकारात्मकता बढ़ाती हैं और सीधे हमारे बैंक बैलेंस पर असर डालती हैं. अगर लाख कोशिशों के बाद भी आपके पास पैसा नहीं टिक रहा है, तो तुरंत अपनी अलमारी चेक करें.  वास्तु के अनुसार, वॉर्डरोब में रखी ये 4 पर्सनल चीजें आपका मनी फ्लो ब्लॉक कर सकती हैं: 1. फटा या टूटा हुआ पर्स (Wallet) वास्तु में पर्स को सीधे लक्ष्मी और बरकत से जोड़कर देखा जाता है. अगर आपकी अलमारी या लॉकर में कोई ऐसा पर्स रखा है जो फट गया है, जिसकी सिलाई उधड़ गई है या ज़िप खराब है, तो उसे तुरंत हटा दें. ऐसा माना जाता है कि फटा हुआ वॉलेट पैसों की आवक को रोकता है और जमा पूंजी को भी खर्च करा देता है. 2. खराब या फटे हुए इनरवियर कपड़ों का संबंध ज्योतिष में सीधे शुक्र ग्रह से माना गया है, जो सुख-समृद्धि और वैभव के कारक हैं. अक्सर लोग पुराने या हल्के फटे हुए इनरवियर को अलमारी के कोने में पड़ा रहने देते हैं. वास्तु के अनुसार, शरीर के सबसे करीब रहने वाले इन कपड़ों का खराब होना पर्सनल एनर्जी को बिगाड़ता है. यह आपकी आर्थिक स्थिति के साथ-साथ आपके रिश्तों पर भी बुरा असर डाल सकता है. 3. बंद या टूटी हुई हाथ की घड़ी कलाई घड़ी को वास्तु शास्त्र में हमारे समय, प्रगति और करियर के ग्राफ का प्रतीक माना जाता है. अगर अलमारी में कोई ऐसी घड़ी रखी है जो बंद है, जिसका शीशा चटक गया है या स्ट्रैप (बेल्ट) टूट चुकी है, तो यह जीवन में ठहराव लाती है.  खराब घड़ी को वॉर्डरोब में रखने से करियर में रुकावटें आती हैं, इससे धन लाभ के नए अवसर मिलना बंद हो जाते हैं. 4. टूटे और घिसे हुए जूते-चप्पल कई लोग महंगे लेकिन टूट चुके या घिस चुके फुटवियर को अलमारी के निचले हिस्से या शू-रैक वॉर्डरोब में सहेज कर रख देते हैं.  वास्तु के अनुसार, जूते-चप्पल हमारी जिंदगी की दिशा और रफ्तार तय करते हैं. टूटे-फूटे फुटवियर घर में दरिद्रता और आर्थिक तंगी को बढ़ाते हैं.  तरक्की के रास्ते खोलने के लिए इन्हें तुरंत बाहर करना ही बेहतर है.

कच्चे तेल की कीमतों का असर, यूपी में पेट्रोल 99 रुपये के पार

लखनऊ पश्चिम एशिया संकट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने फिर पेट्रोल, डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। मंगलवार के बाद अब एक बार फिर आज पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दामों में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। एक सप्ताह में कीमतों में लगातार दूसरी वृद्धि के बाद राजधानी लखनऊ में पेट्रोल की कीमत 99.31 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 92.70 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इससे पहले मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में 87 पैसे और 91 पैसे प्रति लीटर का ही इजाफा किया गया था। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा था कि तेल कंपनियों को रोज 750 करोड़ रुपये नुकसान हो रहा है। यूपी के शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट एचपीसीएल (HPCL) की साइट पर दिख रहे दामों के मुताबिक, लखनऊ में शनिवार को पेट्रोल 99.31 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.70 रुपये प्रति लीटर है। वाराणसी में पेट्रोल 99.62 और डीजल 93 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है तो आगरा में पेट्रोल 99.05 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.40 रुपये प्रति लीटर है। इसके अलावा, मेरठ में पेट्रोल 99.15 रुपये और डीजल 92.53 रुपये प्रति लीटर है। कानपुर में सोमवार को पेट्रोल 99.33 रुपये और डीजल 92.70 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। वहीं, गोरखपुर में पेट्रोल प्रति लीटर 99.49 रुपये और डीजल प्रति लीटर 92.86 रुपये है। इनके अलावा बरेली में पेट्रोल 98.95 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.34 रुपये प्रति लीटर है। प्रयागराज में पेट्रोल 99.22 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.62 रुपये प्रति लीटर है। दोपहिया वाहन चालकों पर सालाना बोझ तेल एवं गैस विपणन कंपनियों ने एक सप्ताह में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। शनिवार को पेट्रोल के दाम में 87 पैसे और डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसका आम आदमी की जेब पर तगड़ा असर पड़ेगा। हाल ही में आज से पहले भी दो बार बढ़ी दरों को जोड़ें तो कुल पांच रुपये के करीब कीमत बढ़ गई है। ऐसे में सालाना अतिरिक्त खर्च का बोझ दो पहिया सवार पर बढ़ेगा। ऑटो एक्सपर्ट बता रहे हैं औसत रूप से एक बाइक या स्कूटर में एक माह के दौरान 30 लीटर पेट्रोल की खपत रहती है। इसी तरह चार पहिया वाहनों में एक माह में 80 से 100 लीटर तक की खपत होती है। चार पहिया वाहन चालकों की जेब पर तीन बार हुई बढ़ोतरी से सालाना बोझ बढ़ जाएगा।

नौतपा 2026: 25 मई से 2 जून तक चलेगा भीषण गर्मी का दौर, शास्त्रों में बताए गए दान के उपाय

इस बार नौतपा की शुरुआत 25 मई से होगी और समापन 2 जून को होगा. नौतपा के इन 9 दिनों में सूर्य देव अपने प्रचंड रूप में होते हैं, जिससे पृथ्वी पर अत्यधिक गर्मी बढ़ जाती है. शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान भीषण गर्मी से जूझ रहे इंसानों और बेजुबान पशु-पक्षियों को शीतलता प्रदान करने वाली चीजों का दान करना महा-पुण्य फलदायी माना गया है. इससे कुंडली में सूर्य और चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है. नौतपा के दौरान आपको मुख्य रूप से इन चीजों का दान जरूर करना चाहिए. 1. जल और शीतल पेय पानी का घड़ा या सुराही- किसी मंदिर, प्याऊ या जरूरतमंद को मिट्टी का नया घड़ा (मटका) या सुराही पानी भरकर दान करें. रास्ते में प्याऊ लगवाना- राहगीरों के लिए मीठे शरबत, शिकंजी या सादे पानी की व्यवस्था करना इस मौसम का सबसे बड़ा पुण्य है. 2. अनाज और खाने-पीने की चीजें सत्तू- जौ या चने का सत्तू पेट को ठंडक देता है. नौतपा में सत्तू का दान बेहद शुभ माना जाता है. मौसमी फल- गर्मी से राहत देने वाले फल जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और आम का दान करें. दही या छाछ- राहगीरों या ब्राह्मणों को ठंडी छाछ (मट्ठा) या दही का दान करने से कुंडली में चंद्र दोष दूर होता है. 3. गर्मी से राहत देने वाली वस्तुएं पंखे का दान- हाथ से झलने वाला बांस का पंखा (बिजना) या क्षमता अनुसार बिजली का पंखा किसी जरूरतमंद या धार्मिक स्थल पर दान करें. छाता – तेज धूप से बचने के लिए राहगीरों, बुजुर्गों या श्रमिकों को छाते का दान करना बहुत लाभकारी माना जाता है. चप्पल या जूते- इस जलती हुई धूप में किसी जरूरतमंद को चप्पल, जूते या मोज़े दान करने से राहु-केतु के दोष शांत होते हैं और पैर की सुरक्षा होती है. 4. बेजुबान जीवों के लिए दान (जीव सेवा) पक्षियों के लिए सकोरे- अपने घर की छत, बालकनी या आंगन में मिट्टी के बर्तनों (सकोरों) में पानी और दाना रखें. पशुओं के लिए नाद- लावारिस गायों और अन्य जानवरों के लिए सड़कों के किनारे पानी पीने की नाद (हौदी) की व्यवस्था करें या उसमें पानी भरें.

गर्मी से मिली राहत, लेकिन ज्यादा दिन नहीं! पंजाब में आज भी बारिश का अलर्ट, फिर बढ़ेगा पारा

लुधियाना  पंजाब में शुक्रवार को हीट वेव के प्रकोप के बीच कुछ जगहों पर हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। इससे तापमान में 3.4 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई और अब यह सामान्य के नजदीक हो गया है।  44 डिग्री के साथ बठिंडा सबसे गर्म रहा। इसी बीच मौसम विभाग ने शनिवार के लिए पंजाब के छह जिलों में 30 से 40 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। इनमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर, नवांशहर और रूपनगर जिले शामिल हैं। इसके साथ ही हीट वेव चलने की भी चेतावनी जारी हुई है।  विभाग के मुताबिक रविवार से पंजाब में मौसम शुष्क हो जाएगा और भीषण लू चलेगी। विभाग ने रविवार से चार दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और इस दौरान तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की वृद्धि दर्ज की जा सकती है। पंजाब के न्यूनतम तापमान में 0.8 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। यह सामान्य से 3.1 डिग्री ऊपर हो गया है। सबसे कम 22.3 डिग्री का न्यूनतम पारा पठानकोट का दर्ज किया गया। अमृतसर का अधिकतम पारा 39.1 डिग्री, लुधियाना का 42.0 डिग्री, पटियाला का 42.3 डिग्री, पठानकोट का 38.6 डिग्री, फाजिल्का का 39.9 डिग्री, फिरोजपुर का भी 39.9 डिग्री, एसबीएस नगर का 36.0 डिग्री और रूपनगर का 37.4 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 25.6 डिग्री, लुधियाना का 27.8 डिग्री, पटियाला का 29.0 डिग्री, बठिंडा का 28.2 डिग्री, फाजिल्का का 26.1 डिग्री, फिरोजपुर का 26.2 डिग्री, होशियारपुर का 23.5 डिग्री और रूपनगर का 27.0 डिग्री दर्ज किया गया। सबसे ज्यादा टेंपरेचर कहां पर 22 मई 2026 तक मध्य भारत, उससे सटे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पूर्वी और उत्तरी प्रायद्वीपीय भारत में दिन में अधिकतम तापमान 45-47 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, जबकि पूर्वोत्तर भारत, पश्चिमी हिमालय क्षेत्र और पश्चिमी दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों का तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया. सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 47.2 डिग्री सेल्सियस ब्रह्मपुरी (विदर्भ) में दर्ज हुआ।  दुनिया के 100 सबसे गर्म जगहों में नोएडा, गाजियाबाद एक्यूआई डॉट इन के आंकड़ों के मुताबिक, 22 मई को रात 10 बजे के आंकड़ों के  हिसाब से दुनिया की 50 सबसे गर्म जगहों में 35 भारत के शहर शामिल हैं.  इसमें रायपुर, दुर्ग, भिलाई, चंद्रपुर, नागपुर, बांदा, अकोला, बुरहानपुर, अमरावती, नोएडा, सोनीपत, गाजियाबाद और गुरुग्राम समेत कई शहर शामिल हैं. अगले एक हफ्ते तक तापमान में गिरावट की संभावना नहीं है. लेकिन पहाड़ी इलाकों में जल्द राहत मिल सकती है।   

खनन माफिया पर प्रशासन की सख्ती, यमुना नगर में 100+ वाहन पकड़े गए

यमुना नगर. यमुनानगर में लगातार उजागर हो रहे अवैध खनन के नेटवर्क पर आखिरकार बड़ी कार्रवाई हुई है। दैनिक जागरण द्वारा लगातार प्रकाशित खबरों के बाद करनाल स्पेशल टास्क फोर्स और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने इंद्री और लाडवा क्षेत्र में अवैध खनन सामग्री से भरे 100 से अधिक वाहनों को पकड़कर खनन माफिया पर बड़ा शिकंजा कसा है। जांच में अब तक 25 से अधिक वाहनों के पास ई-रवन्ना, रॉयल्टी और परिवहन संबंधी वैध दस्तावेज नहीं मिले हैं। कार्रवाई की सूचना मिलते ही कई चालक हाईवे और ढाबों पर वाहन छोड़कर फरार हो गए। बेलगढ़ क्षेत्र, यमुना नदी और आसपास के इलाकों में अवैध खनन नेटवर्क चल रहे है। खबरों में बार-बार सामने लाया गया कि किस प्रकार यमुनानगर से प्रतिदिन भारी संख्या में खनन सामग्री से भरे वाहन प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक दावे केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे थे। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि जिले में 20 से अधिक माइनिंग नाके होने के बावजूद अवैध खनन सामग्री से भरे वाहन यमुनानगर से निकलकर करनाल तक कैसे पहुंच गए। यदि सीमाओं पर निगरानी और जांच व्यवस्था सक्रिय थी तो इतने बड़े स्तर पर वाहन पकड़े जाने से पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए अधिकांश वाहनों के पास वैध दस्तावेज नहीं मिले। कई वाहनों के नंबर, रजिस्ट्रेशन और परिवहन रिकॉर्ड की जांच भी की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि अवैध खनन का यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और इसमें बड़े स्तर पर मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वैध खनन कारोबारियों का कहना है कि एक ओर वे करोड़ों रुपये खर्च कर सरकार से खनन ब्लॉक लेते हैं और नियमित राजस्व जमा करते हैं, वहीं दूसरी ओर अवैध खनन माफिया सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। कारोबारियों के अनुसार अवैध खनन के कारण वैध एजेंसियों का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है। जानकारी के अनुसार जिले में 30 के करीब माइनिंग ब्लॉक समय पर भुगतान न होने और अन्य कारण से पहले ही बंद हो चुके हैं, जबकि कई अन्य ब्लॉक भी बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो वैध खनन उद्योग गंभीर संकट में आ सकता है। जिले में केवल दो ही साइट चल रही है। यमुना सेवा समिति के प्रधान किरण पाल राणा का कहना है कि करनाल में हुई इस बड़ी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि यमुनानगर से संचालित अवैध खनन का नेटवर्क केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा दूसरे जिलों तक फैला हुआ है। मामले की जांच होनी चाहिए। जिन नाको से वाहन निकले उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

तेज आंधी और बारिश से मिली राहत, लेकिन कल से फिर बढ़ेगी राजस्थान में गर्मी

जयपुर राजस्थान में गर्मी और आंधी-बारिश, सबकुछ देखने को मिल रहा है. प्रचंड गर्मी से तपते प्रदेश में कई जगहों पर पारा 45 डिग्री से नीचे चला गया. चित्तौड़गढ़ में सबसे ज्यादा 44.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. शनिवार (23 मई) को कुछ हिस्सों में तेज रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने का अलर्ट है. संभावना है कि इससे तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट हो सकती है.   कई हिस्सों में हो सकती है बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के उत्तर पश्चिमी और उत्तरी भागों में कल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ बना है. इससे कई जगहों पर 40 से 50 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने के साथ बारिश की संभावना है. इस पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से आज भी लोगों को गर्मी से राहत मिलने के आसार है. 3 डिग्री तक चढ़ेगा पारा हालांकि, गर्मी से ये राहत बस ज्यादा दिन नहीं रहेगी. अगले 24 घंटे के भीतर ही पारा एक बार फिर चढ़ने की संभावना है. रविवार (24 मई) से भीषण हीटवेव की चेतावनी जारी की गई है. पूर्वानुमान के मुताबिक, कल से कई शहरों के तापमान में 3 डिग्री तक की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी. इस दौरान कई जगह तापमान 47-48 डिग्री तक भी पहुंच सकता है. कोटा से जैसलमेर तक अलर्ट! चित्तौड़गढ़, कोटा, प्रतापगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, फलोदी और श्रीगंगानगर के लिए लू का येलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग की अपील है कि हीटवेव के इन दिनों में लोग सावधानी से रहे. दिन के समय कम से कम घर से बाहर निकले. अगर कोई जरूरी काम से बाहर निकालना पड़े तो चेहरे को सूती कपड़े से ढक कर निकले. अपने साथ पानी या अन्य पेय पदार्थ रखें, उसका सेवन करते रहे.

पक्षियों से गुलजार हुई सुखना सेंचुरी, तेंदुओं की मौजूदगी ने बढ़ाई वन्यजीव समृद्धि

चंडीगढ़. सुखना वाइल्डलाइफ सेंचुरी पक्षी और जानवरों को पसंद आ रही है। यहां वन्यजीवों का कुनबा बढ़ा है। पक्षियों की संख्या दोगुनी हो गई है और तेंदुओं ने भी यहां अपना ठिकाना बना लिया है। प्रशासन के वन एवं वन्यजीव विभाग ने वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) के सहयोग से सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और आसपास के वन क्षेत्रों में कराए गए व्यापक वन्यजीव सर्वेक्षण में जैव विविधता की समृद्ध तस्वीर सामने आई है। नवंबर 2025 में किए गए इस सर्वे में पक्षियों, तितलियों, स्तनधारियों, वनस्पतियों और सरीसृपों की बड़ी संख्या दर्ज की गई है। 2021 के सर्वे की तुलना में इस बार जैव विविधता के आंकड़ों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्तनधारी प्रजातियां 14 से बढ़कर 16 और पक्षी प्रजातियां 67 से बढ़कर 132 हो गईं। पहली बार तितलियों और सरीसृपों को भी सर्वे में शामिल किया गया। वन एवं वन्यजीव विभाग ने कहा कि इस सर्वे के निष्कर्ष चंडीगढ़ के वन क्षेत्रों में जैव विविधता संरक्षण, आवास प्रबंधन और वन्यजीव निगरानी को और मजबूत करने में मददगार साबित होंगे। रात में कैद हुई तेंदुए की गतिविधियां कैमरा ट्रैप सर्वे के दौरान 18 कैमरा ट्रैप स्टेशनों से 466 स्वतंत्र वन्यजीव रिकार्डिंग मिलीं। खास बात यह रही कि सर्वे में दो वयस्क नर तेंदुओं की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिनकी पहचान उनके शरीर पर अलग-अलग रोसेट पैटर्न के आधार पर की गई। तेंदुओं की गतिविधियां मुख्य रूप से रात के समय दर्ज की गईं। 43 पेड़ के साथ 22 जड़ी बूटी प्रजाति मिली सर्वेक्षण में 79 पौधों की प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें 43 पेड़, 14 झाड़ियां और 22 जड़ी-बूटी प्रजातियां की शामिल हैं। वहीं सरीसृप और उभयचर वर्ग में 13 प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें मेंढक, कछुए, सांप और छिपकलियां शामिल हैं। 73 प्रजातियों की तितलियां मिलीं तितली सर्वेक्षण में पांच परिवारों की 73 प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें येलो आरेंज टिप सबसे अधिक संख्या में पाई गई, जबकि पी ब्लू, कामन ओनिक्स और इंडिगो फ्लैश जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां भी दर्ज की गईं। 132 प्रजाजितयों के पक्षी पक्षी सर्वे में 132 प्रजातियों की पहचान की गई, जिनमें 13 शेड्यूल-1 और 117 शेड्यूल-2 की प्रजातियां शामिल हैं। आइयूसीएन संरक्षण स्थिति के अनुसार इनमें दो संकटग्रस्त, एक संवेदनशील और तीन निकट संकटग्रस्त प्रजातियां भी दर्ज की गईं। ह्यूम्स वार्बलर सबसे अधिक संख्या में पाया गया पक्षी रहा। 16 तरह के स्तनधारी स्तनधारी सर्वे में 16 प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें सांभर, नीलगाय और जंगली सूअर प्रमुख रहे। सर्वे के अनुसार सांभर हिरण की घनत्व 22.34 ± 8.07 प्रति वर्ग किलोमीटर आंकी गई। सर्वे में यह एरिया रहे शामिल यह सर्वे 20 से 27 नवंबर 2025 के दौरान सुखना वाइल्डलाइफ सेंचुरी, लेक बीट, पटियाला की राव, सुखना चौ फाॅरेस्ट, बाॅटेनिकल गार्डन, बटरफ्लाई पार्क और सिटी बर्ड सेंचुरी जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया गया। इसमें वन विभाग के अधिकारियों, शोधकर्ताओं, स्वयंसेवकों, एनजीओ और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

वास्तु शास्त्र: फिटकरी के ये उपाय बदल सकते हैं घर की नकारात्मक ऊर्जा और किस्मत

 भारतीय घरों में फिटकरी (Alum) का इस्तेमाल सालों से पानी साफ करने या शेविंग के बाद एंटीसेप्टिक के रूप में होता आ रहा है.  लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी सी चीज आपकी किस्मत भी बदल सकती है? वास्तु शास्त्र में फिटकरी को नेगेटिव एनर्जी को सोखने वाला सबसे शक्तिशाली तत्व माना गया है. अगर आपके घर में लगातार क्लेश रहता है, आर्थिक तंगी है या तरक्की रुकी हुई है, तो घर की इन 5 खास जगहों पर फिटकरी रखना आपकी सोई हुई किस्मत को जगा सकता है. 1. घर का मुख्य द्वार (Main Gate): घर का मुख्य द्वार वह जगह है जहां से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जा प्रवेश करती है. क्या करें: एक काले कपड़े में फिटकरी का एक बड़ा टुकड़ा बांधें और उसे अपने घर के मुख्य द्वार पर अंदर या बाहर की तरफ लटका दें. फायदा: यह घर में किसी भी तरह की बुरी नजर, नकारात्मक ऊर्जा या तंत्र-मंत्र के असर को प्रवेश नहीं करने देता. व्यापारिक प्रतिष्ठान या दुकान के शटर पर इसे लटकाने से ग्राहकों की संख्या बढ़ती है. 2. बाथरूम (Bathroom): वास्तु के अनुसार, घर में सबसे ज्यादा नकारात्मक ऊर्जा बाथरूम और टॉयलेट से पैदा होती है, क्योंकि यहां राहु का प्रभाव माना जाता है. क्या करें: बाथरूम के किसी सुरक्षित कोने में एक कांच की कटोरी (Glass Bowl) रखे,  उसमें फिटकरी के कुछ टुकड़े डाल दें. फायदा: कांच और फिटकरी का यह कॉम्बिनेशन बाथरूम के वास्तु दोष को पूरी तरह सोख लेता है. ध्यान रखें कि हर महीने इस फिटकरी को बदल दें. 3. तिजोरी या लॉकर (Locker): अगर आप मेहनत तो बहुत करते हैं लेकिन पैसा टिकता नहीं है या हर समय कर्ज की स्थिति बनी रहती है, तो यह उपाय आपके लिए है. क्या करें: एक लाल रंग के रेशमी कपड़े में फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा रखें, उस पर थोड़ा सा सिंदूर लगाएं, उसे बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रख दें. फायदा: यह उपाय बेवजह के खर्चों पर लगाम लगा कर धन आगमन के नए रास्ते खोलता है. 4. बेडरूम में तकिए के नीचे (Under the Pillow): अगर आपको रात में डरावने सपने आते हैं, ठीक से नींद नहीं आती या आप हर समय किसी अनजाने डर/तनाव में रहते हैं, तो इसका कारण बेडरूम का डिस्टर्ब वास्तु हो सकता है. क्या करें: रात को सोते समय अपने तकिए के नीचे या बेड के सिरहाने की तरफ फिटकरी का एक टुकड़ा रख लें. फायदा: वास्तु के अनुसार, यह आपके आसपास की नकारात्मक तरंगों को शांत करता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है, बुरे सपने आने बंद होते हैं और अनिद्रा की समस्या दूर होती है. 5. ऑफिस डेस्क या वर्क प्लेस (Office Desk): कार्यक्षेत्र में यदि सहकर्मियों से अनबन रहती है, प्रमोशन रुका हुआ है या बिजनेस में लगातार घाटा हो रहा है, तो फिटकरी आपकी मदद कर सकती है. क्या करें: अपने ऑफिस की डेस्क या दुकान के काउंटर के एक कोने में (जो सीधे सबको दिखाई न दे) फिटकरी का एक साफ टुकड़ा रख दें. फायदा: यह आपके आसपास एक पॉजिटिव ओरा (Aura) बनाता है, जिससे आपके निर्णय लेने की क्षमता सुधरती है और वर्क प्लेस पर आपका मान-सम्मान बढ़ता है. वास्तु टिप घर में पोछा लगाते समय हफ्ते में कम से कम एक बार पानी में एक चुटकी पिसी हुई फिटकरी और थोड़ा सा सेंधा नमक जरूर मिलाएं.  इससे पूरे घर की एनर्जी तुरंत फ्रेश और पॉजिटिव हो जाती है.

रेवाडीह जंगल में पेड़ों का कत्लेआम! 116 एकड़ में रातभर गूंजती रहीं कुल्हाड़ियां

छुईखदान/ राजनांदगांव. छुईखदान के रेवाडीह जंगल मे इन दिनो हरियाली नही बल्कि कुल्हाड़ियो और कटर मशीनो की आवाज गूंज रही है क्षेत्र के फेफड़े कहे जाने वाले इस घने जंगल के बीचो बीच बड़े पैमाने पर पेड़ो की कटाई ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय सूत्रो की माने तो लगभग 116 एकड़ निजी भूमि की आड़ लेकर सैकड़ो हरे भरे और उखाड़ा जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस जगह पर इतनी बड़ी संख्या मे पेड़ो की कटाई की जा रही है वहा अब तक किसी भी प्रकार की विभागीय अनुमति या ट्रांजिट परमिट टीपी जारी होने की पुष्टि नही हुई है यही वजह है कि अब यह मामला केवल अवैध कटाई तक सीमित नही रहा बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। सीमांकन के तुरंत बाद शुरू हुआ जंगल सफाया जानकारी के मुताबिक कुछ दिन पहले ही राजस्व विभाग द्वारा इस इलाके मे सीमांकन की कार्रवाई पूरी की गई थी सीमांकन खत्म होते ही जंगल के भीतर अचानक भारी मशीने और मजदूर सक्रिय इसके बाद साजा बीजा तीनसा बांस हो गए और भीरा जैसे कीमती एवं संरक्षित पेड़ो की अंधाधुंध कटाई शुरू हो गई ग्रामीणो का कहना है कि जिस तेजी से जंगल उजाड़ा जा रहा है उससे पूरा क्षेत्र धूल और वीरानी मे बदलता जा रहा है। वन अमले को जानकारी फिर भी कार्रवाई नही सूत्र बताते है कि स्थानीय वन अमले को पूरे घटनाक्रम की जानकारी है मैदानी कर्मचारियो यानी बीट गार्डो ने भी इस मामले की सूचना अपने उच्च अधिकारियो तक पहुंचाने की बात कही है बावजूद इसके अब तक मौके पर न तो कोई बड़ी जांच टीम पहुंची और न ही कटाई रोकने की ठोस कार्रवाई दिखाई दी वही जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और सीमांकन प्रक्रिया के अहम किरदार हल्का पटवारी भी पूरे मामले पर खुलकर कुछ बोलने से बचते नजर आए ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी कटाई किसके संरक्षण मे चल रही है प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा संदेह । ग्रामीणो और पर्यावरण प्रेमियो का आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई नही हुई तो आने वाले दिनो मे पूरा इलाका बंजर होने की कगार पर पहुंच जाएगा जंगल खत्म होने से वन्यजीवो के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है। नहीं ली गई कोई अनुमति इस परे मामले में एसडीएम अविनाश ठाकुर ने कहा कि खमारडीही जंगल में हो रही पेड़ कटाई की जानकारी मिलते ही जांच के लिए आरआई पटवारी और वन विभाग की टीम भेजी गई है जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी उन्होने यह भी स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर बड़े पैमाने पर कटाई हो रही है वहा किसी भी प्रकार की विभागीय अनुमति नही ली गई। है । अब सबसे बड़ा सवाल यही है। यदि अनुमति नही ली गई तो आखिर जंगल में यह हरा कत्लेआम किसके इशारे पर चल रहा है।