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बिजली संकट से राहत की दिशा में बड़ा कदम, ऊंचाहार प्लांट में जुड़ेगी नई NTPC यूनिट

 रायबरेली  बिजली उत्पादन बढ़ेगा एनटीपीसी में नई यूनिट लगाने तैयारी जारी हो गई है। 800 मेगावाट की नई यूनिट लगाई जाने से बिजली की मांग को पूरा करने में आसानी होगी। ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना में बिजली उत्पादन बढ़ाने की तैयारी है। यहां पर 800 मेगावाट की नई यूनिट लगाई जाएगी। उच्च स्तर पर इसके कवायद शुरू हो गई है। ऊंचाहार परियोजना में यह सबसे बड़ी यूनिट होगी। इसके बनने से बिजली की मांग को पूरा करने में आसानी होगी। बिजली की मांग दिनों दिन बढ़ रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए तमाम प्रयास हो रहे हैं इसके लिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। एनटीपीसी परियोजना की अभी 1550 मेगावाट क्षमता है। इसकी क्षमता में और वृद्धि की जाएगी। उच्च स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। यहां 800 मेगावाट की इकाई लगाई जाएगी नई इकाई लगाने के लिए परियोजना में पर्याप्त जगह है। नई यूनिट लगने के यहां पर सारे पैरामीटर भी दुरुस्त आए नई इकाई लगाने के लिए जल्द ही प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इन यूनिट के लगने से बिजली उत्पादन और बढ़ जाएगा लोगों को बेहतर बिजली मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। अभी 6 यूनिट कर रही हैं काम वर्तमान में एनटीपीसी परियोजना में 6 इकाइयां हैं। इसमें यूनिट संख्या 1 से लेकर 5 तक प्रत्येक के उत्पादन क्षमता 210- 210 मेगावाट है। छठवीं यूनिट का उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट है। इस परियोजना से 1550 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। अब इसकी क्षमता में वृद्धि की तैयारी है। नौ राज्यों को मिलती है बिजली ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना में विद्युत आपूर्ति उत्तरी ग्रिड के माध्यम से की जाती है। इस परियोजना में से 9 राज्यों दिल्ली हरियाणा ,उत्तराखंड ,उत्तर प्रदेश, राजस्थान ,पंजाब, जम्मू- कश्मीर हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ को बिजली मिलती है। इन राज्यों में भी बिजली की मांग दिनों दिन बढ़ रही है ।क्षमता बढ़ाने से मांग को काम किया जा सकेगा। ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना के मानव संसाधन विभाग के अपर महाप्रबंधक पंकज कुमार का कहना है कि ऊंचाहार एनटीपीसी परियोजना की क्षमता बढ़ेगी अब जहां भी नहीं यूनिट लगती है। उसकी क्षमता 800 मेगावाट की होती है। यहां भी 800 मेगावाट की यूनिट लगेगी अभी कर योजना प्रारंभिक स्तर पर चल रहा है।

बुरहानपुर में विकास की बड़ी उड़ान, औद्योगिक हब बनाने सरकार की मेगा तैयारी

 बुरहानपुर बुरहानपुर शहर ऐतिहासिक और यहां सभी धर्मों के संगम के रूप में जाना जाता है। 400 साल पहले मुगल समय से यहां कपड़े की सबसे बड़ी मंडी रही। जिस तरह यहां कपड़े का ताना बाना बुना जाता था, उसी तरह यहां की गंगा-जमुनी तहजीब रही। यहां का कपड़ा दुनियाभर में प्रसिद्ध था, समय के साथ बाजार की चमक जरूर फीकी पड़ी, लेकिन अब बदलते समय यहां का कपड़ा फिर देशभर में सप्लाइ होने लगा। आने वाले पांच सालों में इसे और उड़ान मिलने जा रही है। साथ ही केले के लिए प्रसिद्ध बुरहानपुर में एक्सपोर्ट जोन से लेकर इस पर आधारित कृषि उद्योग की भी रफ्तार बढ़ी है। टेक्सटाइल उद्योग से ही बुरहानपुर की पहचान प्रदेश के सबसे बड़े टेक्सटाइल उद्योग के रूप में बुरहानपुर की एक अलग ही पहचान है। आने वाले सालों में इस उद्योग की एक और नई तस्वीर उभरेगी। यहां पर एक हजार करोड़ से अधिक का निवेश होने जा रहा है, जिससे 12 हजार से अधिक नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।  अभी जो तेजी से प्रयास हो रहे हैं इससे एक नए शहर का भविष्य देखने को मिल रहा है। यहां उद्योग के लिए जो माहौल और जमीन तैयार हुई उसमें स्थानीय ही नहीं बल्कि गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र तक उद्योगपति निवेश में रुचि दिखा रहे हैं। यही वजह है कि 2015-16 तक जो बुरहानपुर का कपड़ा उद्योग 770 करोड़ का था, वह अब 1 हजार करोड़ का होगा। इससे जिले की तस्वीर ही बदल जाएगी। जानें यहां उद्योग की इकॉनोमी -211 करोड़ का जीएसटी टैक्स 4 साल में दे चुका है बुरहानपुर -04 साल पहले तक 60 करोड़ का जाता था टैक्स -04 हजार रजिस्टर्ड औद्योगिक प्रतिष्ठान यहां -45 हजार पावरलूम -05 हजार आधुनिक लूम यहां -01 लाख लोग कपड़ा उद्योग से जुड़े -01 लाख लोग केला उद्योग से जुड़े हुए भविष्य में निवेश की तैयारी -200 करोड़ रेहटा में निवेश की तैयारी -400 करोड़ सुखपुरी में निवेश -200 करोड़ फेयर डील में निवेश -400 करोड़ चार नई स्पीनिंग मिल प्रस्तावित – 12 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा एफॉर्डेबल हाउसिंग पर पड़ सकता है असर नए नियमों से छोटे और मझोले डेवलपर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असरभोपाल और इंदौर जैसे शहरों में होगा। यहां 10 हेक्टेयर क्षेत्र जुटाना छोटे डेवलपर्स के लिए आसान नहीं होगा। वहीं पॉलिसी के तहत डेवलपर के लिए न्यूनतम 5 करोड़ की नेटवर्थ और 6 करोड़ रुपए का औसत वार्षिक टर्नओवर भी प्रभाव डालेगा। साथ ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में पंजीयन के लिए 50 हजार रुपए खर्च करने होंगे, वहीं पांच साल बाद नवीनीकरण के लिए भी 25 हजार देना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और मझोले डेवलपर्स मध्यमवर्गीय और किफायती आवासीय योजनाएं विकसित करते हैं। ऐसे डेवलपर्स बाजार से बाहर होंगे तो, एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या घटने की आशंका है। नई साधिकार समितियां गठित होंगी अब टाउनशिप संबंधी प्रस्तावों पर संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अध्यक्षता वाली समिति विचार नहीं करेगी। इसके स्थान पर नई साधिकार समितियां गठित की गई हैं। 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सचिव नगरीय विकास की अध्यक्षता में समिति प्रस्तावों का परीक्षण-अनुमोदन करेगी। वहीं जिलों में अधिकार कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति को है। ये क्षेत्र देंगे ऊंची उड़ान टैक्सटाइल टैक्सटाइल में बुरहानपुर शहर में विकास की खासी संभावनाएं हैं। यहां का कपड़ा देशभर में सप्लाय होता है, लेकिन इसमें वेल्यू एडिशन के लिए डाइंग, प्रिंटिंग, गारमेंटस, अपेरल मेकिंग को बढ़ावा देना होगा। अभी निम्न गुणवत्ता कपड़ा यहां बन रहा है। टूरिज्म यहां का पर्यटन अनछुआ पहलू है। टूरिज्म सर्किट में आना चाहिए। यहां पर टूरिज्म की उद्योग में बढ़ोतरी हुई है। रेस्टोरेंट, होटल, एऊयूजमेंट पार्क भी बढऩा शुरू हो गई, लेकिन अभी इसमें और काम करने जरूरत है। सरकार के साथ हमारा प्रतिनिधित्व करेंगे तो अच्छा लाभ मिल सकते हैं। ट्रांसपोर्टेशन देश के मध्य भाग में होने से सेंट्रल लाइन मुख्य रेल मार्ग, सड़क मार्ग बुरहानपुर से जुड़ चुके हैं। फोरलेन बुरहानपुर में पहुंच चुका है। अभी नया हाईवे लगभग बन चुका है। आगे महाराष्ट्र को जोड़ने का काम बाकी है। जबकि नई रेलवे लाइन भी शहर के विकास में उपयोगी होगी। बुरहानपुर बड़ा केंद्र, बड़े शहर में उभरेगा बुरहानपुर उद्योग का बहुत बड़ा केंद्र है। यहां आगे टूरिज्म, कृषि और टेक्सटाइल के रूप में अच्छे परिणाम सामने आएंगे। स्वरोजगार यहां अच्छा मिलेगा। अब हाइवे और रेलवे से कनेक्टिविटी भी बहुत अच्छी बन रही है। बुरहानपुर आगे जाकर बड़े शहर के रूप में उभरेगा। – हर्षसिंह, कलेक्टर, बुरहानपुर पर्यटन को मिले उड़ान यहां के उद्योग को उड़ान मिलना चाहिए। बुरहानपुर में मिनी एयरपोर्ट की तैयारी चल रही है, अच्छा है, लेकिन इसे और गति मिलने की जरूरत है। यहां के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यहां हवाई अड्डे की सुविधा हो जाए तो बुरहानपुर से 105 किमी अजंता, 110 पर ओंकारेश्वर, 165 किमी महेश्वर है। -होशंग हवलदार, पुरातत्वविद्

ऐतिहासिक इलाके के नीचे से गुजरेगी मेट्रो, अंडरग्राउंड टनल प्रोजेक्ट को हरी झंडी

इंदौर  इंदौर में मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट का काम अब तेजी पकड़ने जा रहा है. सुपर कॉरिडोर से रेडिसन तक के हिस्से को सीएमआरएस (कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी) से हरी झंडी मिल चुकी है, जिसके बाद अब टनल निर्माण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. इस प्रोजेक्ट के लिए 4 बड़ी टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) जल्द ही इंदौर पहुंचेंगी. ये मशीनें लगभग 20 मीटर गहराई तक खुदाई करने में सक्षम होंगी. इन मशीनों के कुछ अहम हिस्से जर्मनी में बनाए गए हैं और उनका अंतिम असेंबलिंग कार्य थाईलैंड में किया जा रहा है।  इन मशीनों को खास तौर पर इंदौर की जमीन और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. शहर के मध्य हिस्से में मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, जहां 100 साल से भी पुराने मकान मौजूद हैं. ऐसे में खुदाई के दौरान किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए स्पेशल टेक्निक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इंदौर की मिट्टी में हार्ड रॉक, सॉफ्ट सॉइल और मुरम जैसी परतें हैं, इसलिए ‘मिक्स लेयर’ तकनीक वाली मशीनें चुनी गई हैं. हाल ही में मेट्रो कॉर्पोरेशन, कंसल्टेंट और ठेकेदारों की टीम ने जर्मनी और थाईलैंड जाकर मशीनों का अंतिम निरीक्षण भी किया है।  टनल खुदाई का काम शुरू भास्कर की रिपोर्ट के हवाले से जुलाई 2026 से टनल खुदाई का काम शुरू करने की योजना है. ये चारों मशीनें शहर के अलग-अलग हिस्सों में काम करेंगी, जिसमें एयरपोर्ट और नगर निगम क्षेत्र से जुड़े स्टेशन और ट्रैक का निर्माण शामिल है. मशीनें जमीन के नीचे जाकर सुरक्षित तरीके से टनल तैयार करेंगी. वहीं, छोटा गणपति स्टेशन पर ‘नेटाम’ तकनीक से निर्माण कार्य पहले से जारी है और वहां खुदाई का काम चल रहा है।  इसके अलावा शहीद पार्क से खजराना तक मेट्रो ट्रैक और स्टेशन का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. पहले इस रूट को एलिवेटेड बनाने की योजना थी, लेकिन अब इसे अंडरग्राउंड कर दिया गया है. इस बदलाव के चलते टेंडर प्रोसेस में संशोधन किया जा रहा है. फिलहाल, शहीद पार्क से खजराना तक कई स्टेशन और ट्रैक का ढांचा आकार ले रहा है. रेडिसन तक 17 किलोमीटर का मेट्रो कॉरिडोर तैयार हो चुका है और यहां लगातार ट्रायल रन चल रहा है. हालांकि, इसे आम जनता के लिए शुरू करने के लिए अभी पीएम ऑफिस की अंतिम मंजूरी का इंतजार है. इसकी मंजूरी मिलते ही इंदौर में  मेट्रो सेवाएं और व्यापक स्तर पर शुरू हो जाएंगी। 

तकनीकी समस्या दूर, आयुष्मान योजना के अस्पतालों को फिर शुरू हुआ भुगतान

तकनीकी समस्या दूर, आयुष्मान योजना के अस्पतालों को फिर शुरू हुआ भुगतान – योगी सरकार की तत्परता से सुलझी बैंकिंग की तकनीकी समस्या, 14 मई से रुक गया था भुगतान  – तकनीकी समस्या के कारण रुक गया था अस्पतालों का 600 करोड़  रुपये का भुगतान  – 23 मई को जारी हुए 100 करोड़, अगले एक-दो दिन में 500 करोड़ रूपये का हो जाएगा भुगतान  लखनऊ  योगी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (ABPMJAY)को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के तहत आयुष्मान कार्ड धारकों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकता है। इसी का नतीजा है कि योजना के शुरू होने के बाद अब तक 50 लाख से अधिक मरीजों ने 91 लाख से अधिक बार अस्पतालों में अपना इलाज कराया। इसके लिए योगी सरकार द्वारा 15 हजार करोड़ से अधिक अस्पतालों को भुगतान किया जा चुका है। वहीं 14 मई से 22 मई तक बैंक में तकनीकी समस्या से अस्पतालों का भुगतान रुक गया था, जिसे ठीक करके 23 मई से दोबारा शुरू कर दिया गया है।  23 मई को अस्पतालों को किया गया 100 करोड़ रु. का भुगतान साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि 14 मई को नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) और संबंधित बैंकों के बीच भुगतान फाइलों के आदान-प्रदान के दौरान तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई थी। इसके चलते लगभग 633 करोड़ रुपये की राशि होल्ड पर चली गई थी। भुगतान प्रक्रिया बाधित होने के कारण योजना से जुड़े अस्पतालों को क्लेम राशि मिलने में देरी हो रही थी, जबकि अधिकांश दावों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा पहले ही स्वीकृति प्रदान की जा चुकी थी। तकनीकी बाधा के चलते अस्पतालों को समय से भुगतान नहीं मिल पा रहा था, जिससे निजी और सरकारी सूचीबद्ध अस्पतालों में चिंता की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू की। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एनएचए और संबंधित बैंकों के साथ कई दौर की बैठकें कर समस्या के समाधान के लिए लगातार समन्वय बनाए रखा। उन्होंने बताया कि 22 मई को बैंक स्तर पर आई तकनीकी समस्या का सफलतापूर्वक समाधान कर लिया गया। इसके बाद 23 मई को अस्पतालों को 100 करोड़ रुपये का भुगतान जारी कर दिया गया है। वहीं, अधिकारियों के अनुसार अगले एक से दो दिनों के भीतर शेष लगभग 500 करोड़ रुपये का भुगतान भी संबंधित अस्पतालों को कर दिया जाएगा। लगातार नए अस्पतालों को योजना से जोड़ा जा रहा साचीज की सीईओ ने बताया कि तकनीकी समस्या पूरी तरह दूर होने के बाद भुगतान प्रक्रिया सामान्य रूप से शुरू कर दी गई है। अब सूचीबद्ध अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से भुगतान भेजा जा रहा है ताकि मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी प्रकार का असर न पड़े। उन्होंने बताया कि योगी सरकार लगातार नए अस्पतालों को योजना से जोड़ रही है ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके। इसके अलावा गोल्डन कार्ड वितरण अभियान, ई-केवाईसी, हेल्प डेस्क और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अमित घोष ने भी योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों के भुगतान में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। साथ ही तकनीकी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो।

गो संरक्षण विशेष : यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में बजा यूपी का डंका

गो संरक्षण विशेष : यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में बजा यूपी का डंका एक हजार से ज्यादा देशी गायों के सहारे 10 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार का एथिकल डेयरी मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की है इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय की आरती और गोपूजन सीएम योगी की प्रेरणा से अमेरिकी सॉफ्टवेयर इंजीनियर समेत टीम 100 ने संभाला देशी गायों के संरक्षण का जिम्मा देशी गायों से बने A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज, लड्डू, हर्बल चाय समेत 150 प्रकार के प्रोडक्ट की दुनिया में धूम लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘गो संरक्षण से समृद्धि’ मॉडल अब जमीन से उठकर ग्लोबल मंच पर अपनी ताकत दिखा रहा है। उत्तर प्रदेश में देशी गायों के सहारे न सिर्फ 10 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार खड़ा हुआ है, बल्कि यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में ‘मेड इन यूपी’ गो उत्पादों की धूम मच गई है। यह मॉडल सिर्फ गोसेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक सशक्त आर्थिक ताकत में बदल दिया गया है। ‘हेता’ (HETHA) के जरिए 1000 से ज्यादा देशी गायों पर आधारित एथिकल डेयरी सिस्टम खड़ा किया गया है, जिसने देशी नस्लों को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा लिख दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय की आरती और गोपूजन कर चुके हैं। सीएम योगी की प्रेरणा से सिकंदरपुर, गाजियाबाद के असीम रावत ने इस अभियान की शुरुआत की। असीम 14 साल तक लगातार अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियों में इंजीनियर रहे। फिर इन्होंने गो संरक्षण की राह चुनी। आज 100 लोगों की एक स्पेशल टीम के साथ वे इस मिशन को न सिर्फ चला रहे हैं, बल्कि इसे ग्लोबल ब्रांड बना दिया है। हेता का मॉडल देशी गायों के समग्र उपयोग पर आधारित है। यहां दूध से लेकर पंचगव्य, आयुर्वेदिक उत्पाद, ऑर्गेनिक फूड और वेलनेस प्रोडक्ट्स तक करीब 150 प्रकार के प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं। A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज, लड्डू, हर्बल चाय, स्किन-हेयर केयर और गोमूत्र अर्क जैसे उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई तक यूपी की पहचान इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि यहां वृद्ध गोवंश को भी बोझ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी माना गया है। उन्हें छोड़ा नहीं जाता, बल्कि संरक्षण का अभिन्न हिस्सा बनाया जाता है। हेता के उत्पाद आज भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर, दुबई और अन्य मध्य-पूर्व व एशियाई देशों तक पहुंच रहे हैं, जिससे यूपी की पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है। डेयरी मास्टर प्लान के तहत लाखों रुपये अनुदान पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार योगी सरकार इस मॉडल को व्यापक बनाने के लिए बड़े स्तर पर नीतिगत समर्थन भी दे रही है। ‘ऑपरेशन-4’ के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। डेयरी मास्टर प्लान के तहत 2 से 25 गायों तक पशु पालकों को लाखों रुपये का अनुदान मिल रहा है। योजना में 15 प्रतिशत स्वयं निवेश, 35 प्रतिशत बैंक ऋण और 50 प्रतिशत सब्सिडी का स्पष्ट फार्मूला लागू किया गया है।  ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विस्तार पर सरकार का विशेष फोकस है। प्रदेश में लागू चार बड़ी योजनाएं मिलकर डेयरी सेक्टर को नई रफ्तार दे रही हैं। इसका नतीजा यह है कि अब किसान देशी गायों के सहारे करोड़ों की आय अर्जित कर रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया उछाल देखने को मिल रहा है। योगी सरकार का यह ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति बनाने की दिशा में बड़ा कदम बन चुका है।

पेपर लीक गैंग की अफवाहबाजी फेल, लखनऊ में फैलाई गई पेपर लीक की झूठी सूचना जांच में निकली पूरी तरह फर्जी

पेपर लीक गैंग की अफवाहबाजी फेल, लखनऊ में फैलाई गई पेपर लीक की झूठी सूचना जांच में निकली पूरी तरह फर्जी जांच में साफ हुआ कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट पूरी तरह सीलबंद और सुरक्षित योगी सरकार की सख्ती और प्रशासन व यूपीएसएसएससी की सतर्कता से शांतिपूर्वक संपन्न हुई थी लेखपाल मुख्य परीक्षा एआई, बायोमैट्रिक और हाईटेक निगरानी ने नकल माफियाओं की तोड़ी कमर, 44 जिलों में सकुशल हुई परीक्षा लखनऊ, उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं को लेकर वर्षों तक सक्रिय रहे पेपर लीक और नकल माफियाओं के नेटवर्क पर योगी सरकार की सख्ती लगातार भारी पड़ रही है। इसका बड़ा उदाहरण विगत दिनों आयोजित लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 में देखने को मिला, जहां सोशल मीडिया के जरिए पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश हुई, लेकिन प्रशासन और आयोग की सतर्कता के आगे यह साजिश पूरी तरह नाकाम साबित हुई। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा आयोजित यह परीक्षा प्रदेश के 44 जिलों के 861 केंद्रों पर शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई। कुल 3,66,712 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 3,01,756 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। उपस्थिति प्रतिशत 82.29 रहा, जो अभ्यर्थियों के भरोसे को भी दर्शाता है। पेपर लीक का शोर, लेकिन हकीकत में निकली अफवाह परीक्षा शुरू होते ही लखनऊ के ऐशबाग स्थित गोपीनाथ लक्ष्मणदास रस्तोगी इंटर कॉलेज को लेकर कुछ लोगों ने पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश की। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, आयोग और निगरानी टीमों ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में साफ हुआ कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट पूरी तरह सीलबंद और सुरक्षित थीं। दरअसल, एक कक्ष के कुछ अभ्यर्थी भ्रम की स्थिति में बाहर आ गए थे, जिसे कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर पेपर लीक का रंग देने की कोशिश की। अधिकारियों ने मौके पर स्थिति स्पष्ट की, जिसके बाद अभ्यर्थी वापस परीक्षा कक्ष में पहुंचे और परीक्षा शांतिपूर्वक जारी रही। योगी सरकार का हाईटेक एग्जाम मॉडल बना ढाल इस बार परीक्षा की निगरानी पूरी तरह तकनीक आधारित रही। आयोग मुख्यालय से लेकर सभी परीक्षा केंद्रों तक कंट्रोल कमांड रूम के जरिए लाइव मॉनिटरिंग की गई। पूरे प्रदेश में 18,883 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इसके अलावा 7,683 बायोमैट्रिक ऑपरेटर और 6,297 फ्रिस्किंग गार्ड तैनात किए गए थे। एआई आधारित पहचान प्रणाली के जरिए प्रतिरूपण और फर्जीवाड़े पर नजर रखी गई। यही कारण रहा कि बुलंदशहर में एक संदिग्ध अभ्यर्थी तुरंत पकड़ लिया गया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। नकल माफिया पर लगातार कड़ा प्रहार उत्तर प्रदेश में एक समय भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के कारण सवालों में रहती थीं, लेकिन योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदलने की दिशा में सख्त कदम उठाए हैं। हाईटेक निगरानी, बायोमैट्रिक सत्यापन, एआई ट्रैकिंग और प्रशासनिक जवाबदेही ने नकल माफियाओं की कमर तोड़ दी है। लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 का शांतिपूर्ण आयोजन इस बात का संकेत है कि अब प्रदेश में भर्ती परीक्षाएं पारदर्शिता और सख्ती के नए मॉडल पर आगे बढ़ रही हैं।

हनी ट्रैप कांड में बड़ा अपडेट, निजी पलों के वीडियो से जुड़े राज फिर आए सामने

इंदौर   इंदौर में हनी ट्रैप कहे जा रहे ब्लैकमेलिंग मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार सभी सात आरोपियों को बालेबाले मजिस्ट्रेट के घर पर पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इसी बीच सामने आया कि हनी ट्रैप-2 के नाम से चर्चा में आए गैंग की मास्टरमाइंड रेशू और श्वेता ने पुराने हनी ट्रैप प्रकरण के वीडियो का इस्तेमाल कर पांच लोगों को टारगेट बनाया था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है। इंदौर में हनी ट्रैप कहे जा रहे ब्लैकमेलिंग मामले में कार्रवाई तेज कर दी गई है। क्राइम ब्रांच पुलिस ने घटना के लिए जिम्मेदार सभी सात आरोपियों को औपचारिक कार्यवाही के बाद सीधे बाले बाले मजिस्ट्रेट के घर ले जाकर पेश किया। सोमवार सुबह हुई इस पेशी में अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए, जिसके बाद सातों को जेल रवाना कर दिया गया। पुलिस के इस कदम को मामले की गंभीरता और सुरक्षा कारणों से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस बीच जांच में एक बड़ा खुलासा भी हुआ है। हनी ट्रैप-2 नाम से सामने आए इस नए जालसाजी नेटवर्क में मुख्य भूमिका रेशू और श्वेता बताई जा रही है। दोनों ने पुराने हनी ट्रैप कर कई अन्य मामले के संवेदनशील वीडियो हासिल कर लिए थे और इन्हीं के आधार पर पांच लोगों को ब्लैकमेल किया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी पहले भरोसा जीतते थे, फिर निजी पलों के वीडियो दिखाकर पैसों की मांग की जाती थी। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका भी इसी गिरोह के संचालन, तकनीकी काम और पैसे की वसूली से जुड़ी बताई जा रही है। क्राइम ब्रांच पिछले कुछ दिनों से लगातार इस गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद ही सभी सात आरोपियों श्वेता जैन, रेशु चौधरी, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन जितेंद्र पुरोहित और पुलिस कर्मी  विनोद शर्मा को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें मजिस्ट्रेट ने न्यायिक हिरासत में जेल दाखिल कर दिया है। डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक अब पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, लेन-देन और पुराने मामलों के लिंक की गहराई से जांच कर रही है साथ ही आरोपियों से जब्त मोबाइल फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं जिनका डेटा रिकवर किया जा रहा है। त्रिपाठी का कहना है कि यह गैंग संगठित रूप से काम कर रहा था और आगे और खुलासे संभव हैं।

रायपुर में खाद दुकानों पर कार्रवाई, लक्ष्मी ट्रेडर्स का लाइसेंस निलंबित; कई विक्रेताओं को नोटिस

रायपुर : एक खाद दुकान का लाइसेंस निलंबित, कई विक्रेताओं को नोटिस मेसर्स लक्ष्मी ट्रेडर्स भखारा खाद की कालाबाजारी का मामला रायपुर धमतरी जिले में किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। औचक निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर एक उर्वरक विक्रेता का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि कई निजी और सहकारी विक्रय केन्द्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि कालाबाजारी, अधिक कीमत व अनियमित बिक्री किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग की टीम लगातार जिलेभर में निरीक्षण कर रही है। उप संचालक कृषि, उर्वरक, बीज एवं कीटनाशी निरीक्षकों सहित विभागीय अधिकारियों ने धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी विकासखंड के कई सहकारी एवं निजी उर्वरक विक्रय केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मेसर्स लक्ष्मी ट्रेडर्स भखारा में गंभीर अनियमितता सामने आई। यहां निर्धारित मात्रा से अधिक उर्वरक बिक्री और भूमिहीन व्यक्ति को उर्वरक बेचने की पुष्टि होने पर दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। वहीं मेसर्स काप केयर एण्ड ट्रेडिंग झिरिया, पारस कृषि केन्द्र सोनामगर, कर्मा ट्रेडर्स सेमरा, कृष्णा फर्टिलाईजर कुरूद और राज कृषि केन्द्र नगरी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। कृषि विभाग का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित केन्द्रों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। खरीफ सीजन को देखते हुए जिले में उर्वरक की उपलब्धता और बिक्री व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे डीएपी के विकल्प के रूप में अन्य अनुशंसित उर्वरकों का उपयोग करें और उर्वरक खरीदते समय निर्धारित मूल्य पर ही खरीदी कर बिल अवश्य लें। उर्वरकों की गुणवत्ता, कालाबाजारी या अधिक कीमत वसूली की शिकायत नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय में तत्काल दर्ज कराने को कहा गया है।

पीएम मोदी के मार्गदर्शन में योगी सरकार के विजन को मिलेगी नई उड़ान, नई दिशा देगा प्रस्तावित यूपी डिफेंस एंड एयरोस्पेस कॉन्क्लेव-2026

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर भारत का नया इंजन बनेगा यूपी, प्रस्तावित कॉन्क्लेव से निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा पीएम मोदी के मार्गदर्शन में योगी सरकार के विजन को मिलेगी नई उड़ान, नई दिशा देगा प्रस्तावित यूपी डिफेंस एंड एयरोस्पेस कॉन्क्लेव-2026 लखनऊ में प्रस्तावित कॉन्क्लेव के जरिए यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को मिलेगा नया विस्तार, निवेश और रोजगार पर रहेगा फोकस डिफेंस निर्माण, एयरोस्पेस निवेश, डीपीएसयू सहयोग और युवाओं के रोजगार को लेकर बनेगी महत्वपूर्ण रणनीति लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस सेक्टर को नई गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश रक्षा और एफडीआई कॉन्क्लेव-2026 आयोजित करने की तैयारी है। प्रस्तावित कॉन्क्लेव का आयोजन लखनऊ में किया जाएगा, जिसमें उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) में डिफेंस इंडस्ट्री की स्थापना, निवेश आकर्षण और औद्योगिक विस्तार पर विशेष फोकस रहेगा। कॉन्क्लेव का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है। इसके माध्यम से उद्योग जगत, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (डीपीएसयू), एयरोस्पेस कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। यूपी डिफेंस कॉरिडोर की ताकत का होगा प्रदर्शन प्रस्तावित एजेंडे के अनुसार कॉन्क्लेव में उत्तर प्रदेश की रक्षा निर्माण क्षमताओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें राज्य की रणनीतिक लोकेशन, मजबूत एक्सप्रेसवे नेटवर्क, औद्योगिक भूमि उपलब्धता, सिंगल विंडो सुविधा और बेहतर कानून व्यवस्था को निवेश के प्रमुख आधार के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। कॉन्क्लेव में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के साथ उद्घाटन सत्र आयोजित होगा। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएं भी प्रस्तावित हैं। इनमें प्रमुख रूप से “डिफेंस और एयरोस्पेस इन्वेस्टमेंट के लिए उत्तर प्रदेश क्यों?”, “यूपी एयरोस्पेस और रक्षा इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2024”, “रक्षा क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी” और “यूपी डिफेंस कॉरिडोर को बढ़ावा देने में डीपीएसयू और सरकारी संस्थानों की भूमिका” जैसे विषय शामिल हैं। रक्षा उत्पादन सचिव और मुख्यमंत्री का विजन रहेगा केंद्र में कॉन्क्लेव में भारत सरकार के रक्षा उत्पादन सचिव द्वारा रक्षा क्षेत्र के भविष्य को लेकर विजन और मार्गदर्शन दिए जाने का प्रस्ताव है। वहीं प्रस्ताव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन और एयरोस्पेस सेक्टर में अग्रणी राज्य बनाने की रणनीति प्रस्तुत किया जाना भी शामिल है। कार्यक्रम में स्टेकहोल्डर्स के बीच बी2जी और बी2बी इंटरैक्शन भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे उद्योग और सरकार के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सके। डिफेंस सेक्टर के लिए यूपी की बड़ी ताकतें होंगी हाईलाइट कॉन्क्लेव के दौरान जिन प्रमुख बिंदुओं को प्रस्तुत किया जाएगा, उनमें रणनीतिक स्थान, कनेक्टिविटी और औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, कुशल कार्यबल और परीक्षण सुविधाएं, राजकोषीय प्रोत्साहन एवं अनुसंधान एवं विकास सहयोग, सिंगल विंडो सिस्टम और सुव्यवस्थित अनुदान व्यवस्था, डीपीएसयू एवं अनुसंधान संस्थानों के साथ सहभागिता तथा रक्षा निर्माण क्षमताएं शामिल हैं। देश की बड़ी कंपनियां और संस्थान होंगे आमंत्रित प्रस्तावित सूची के अनुसार कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय एवं भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, एचएएल, बीईएल, बीईएमएल जैसी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां तथा टाटा, अडानी, बोइंग, एयरबस और लॉकहीड मार्टिन जैसी बड़ी इंडस्ट्री कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डीआरडीओ, एनएएल और बीआईएस जैसी इंडस्ट्री एसोसिएशंस एवं एजेंसियां भी सहभागिता करेंगी। एमएसएमई सेक्टर से एमकेयू लि., पीटीसी इंडस्ट्रीज, आइडियाफोर्ज और स्काईरूट जैसी कंपनियों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। निवेश, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर रहेगा फोकस कॉन्क्लेव से कई महत्वपूर्ण परिणामों की अपेक्षा की जा रही है। इनमें संभावित निवेशों के लिए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर, कॉरिडोर विस्तार के लिए रणनीतिक रोडमैप, परीक्षण एवं सर्टिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी, लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा, फिस्कल इंसेंटिव और पॉलिसी सपोर्ट की जानकारी तथा तकनीकी आधारित रोजगार अवसरों का सृजन प्रमुख हैं। योगी सरकार पहले ही उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को राज्य की ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बना चुकी है। ऐसे में प्रस्तावित डिफेंस एवं एफडीआई कॉन्क्लेव-2026 को प्रदेश में रक्षा उत्पादन, विदेशी निवेश और उच्च तकनीकी रोजगार के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

प्रदेशवासियों की सुरक्षा और जनसमस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री

जनता दर्शन  प्रदेशवासियों की सुरक्षा और जनसमस्याओं के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री ‘जनता दर्शन’ में आए हर फरियादी से मिल मुख्यमंत्री ने सुनीं समस्याएं   पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा आदि से जुड़े प्रकरणों का लिया संज्ञान, बोले-हम कराएंगे समस्याओं का समाधान  लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए फरियादियों से मिलकर सभी की समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा, सम्मान पर सरकार का पूरा जोर है। सरकार जनसमस्याओं के उचित समाधान के लिए प्रतिबद्ध भी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर समस्याओं के निस्तारण का भी निर्देश दिया।  शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार का विशेष जोर 'जनता दर्शन' में शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ मामले आए। मुख्यमंत्री ने सभी को आश्वस्त किया कि शिक्षा व स्वास्थ्य पर सरकार का विशेष जोर है। प्रदेश का हर व्यक्ति शिक्षित हो और हर जरूरतमंद को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसके लिए सरकार कृतसंकल्पित है। इन विभागों से जुड़े सभी मामले  संवेदनशीलता से हल किए जाएंगे।  बिना भेदभाव सभी को मिले न्याय मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जरूरतमंद की समस्या का समाधान हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने अफसरों को निर्देशित किया कि पूरी संवेदनशीलता से सुनिश्चित करें कि बिना भेदभाव सभी को न्याय मिले। हर पात्र को योजनाओं का लाभ मिले, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था हो। मुख्यमंत्री ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के भी शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। महिलाओं से बोले मुख्यमंत्री- गर्मी में अपना और परिवार का विशेष ध्यान रखिए मुख्यमंत्री ने 'जनता दर्शन' में आईं महिलाओं की समस्याएं सुनीं, उनका हालचाल जाना, फिर उनसे संवाद भी किया। उन्होंने महिलाओं से कहा कि गर्मी बहुत पड़ रही है। ऐसे में अपना और परिवार के बुजुर्गों, बच्चों, पुरुषों का ध्यान रखें। इस समय अकारण बाहर निकलने से बचें और खानपान पर विशेष ध्यान दें।