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Twisha Death Case पर SC सख्त, युवती की मौत को लेकर कही बड़ी बात

भोपाल  मध्यप्रदेश के चर्चित मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान मामले पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी एम पंचोली की बेंच ने अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने मीडिया से इस मामले में आरोपियों के इंटरव्यू न चलाने का आग्रह किया. साथ ही कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो इस मामले की पूरी जांच को आज ही अपने हाथों में ले रही है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया है।  चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि सीबीआई तुरंत जांच अपने पास लेकर इस पर कड़े स्तर की सुनवाई शुरू करेगी. कोर्ट ने कहा कि एक मासूम युवती की जान गई है, वजह चाहे जो हो ,उसका पता चलना चाहिए. उसके स्वतंत्र निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी जरूरी है. क्योंकि मामले में अपराधिक साजिश का भी एंगल शुरुआती जांच और आरोपों से सामने आ रहा है।  CBI को सौंपी जा रही है जांच सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम मीडिया और जनता की अटकलें नहीं चाहते हैं. सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि जांच आज सीबीआई को सौंपी जा रही है. सुनवाई के दौरान अदालत को ये भी बताया गया कि एक मृत बेटी होने की तुलना में समाज में एक तलाकशुदा बेटी होना कहीं ज्यादा बेहतर है।  इस पर अदालत ने सुनवाई के दौरान दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उसे एक युवा बेटी को असमय खोने पर पीड़ित परिवार की असीम पीड़ा के साथ पूरी मानवीय सहानुभूति है।  ट्विशा के पति और सास के खिलाफ FIR दर्ज ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पति समर्थ सिंह और उनकी सास जो कि एक पूर्व जिला न्यायाधीश हैं, गिरिबाला सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि रसूख के कारण स्थानीय स्तर पर जांच प्रभावित हो रही थी. सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि इसी प्रक्रियागत अनियमितता को दूर करने के लिए आज ही जांच सीबीआई को सौंपी जा रही है।  वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच को लेकर भी टिप्पणी की. कोर्ट ने ऐसे मामलों में जांच के संचालन पर दु:ख व्यक्त किया और जांच को लेकर चल रही प्रक्रियागत अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच का निर्देश दिया है।  12 दिन बाद हुआ अंतिम संस्कार राज्य सरकार की निगरानी में भोपाल में हुए पहले शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) पर जब पीड़ित परिवार ने गंभीर सवाल उठाए, तब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कड़े आदेश पर दिल्ली एम्स (AIIMS) की चार सदस्यीय विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मृतका का दूसरा पोस्टमार्टम किया. इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के कारण घटना के 12 दिन बीत जाने के बाद आखिरकार ट्विशा का अंतिम संस्कार किया जा सका।  आपको बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. 33 साल की मॉडल-एक्टर के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं. जबकि  ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा नशे की लत से जूझ रही थीं. उसके परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना, सबूतों से छेड़छाड़ और जांच में लापरवाही का आरोप लगाया है। 

रायपुर के कुटरु समाधान शिविर में उमड़ा जनसैलाब, तपती धूप में भी दिखा ग्रामीणों का उत्साह

रायपुर : समाधान शिविर कुटरु में उमड़ा जनसैलाब- तपती धूप में भी दिखा शासकीय योजनाओं के प्रति ग्रामीणों का भारी उत्साह ’बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का आह्वान’ ’सुशासन तिहार भीषण गर्मी के बावजूद हजारों ग्रामीणों ने उठाया कल्याणकारी योजनाओं का लाभ’ रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन तिहार के अंतर्गत बीजापुर जिले के कुटरु में आयोजित समाधान शिविर में ग्रामीणों का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप की परवाह न करते हुए हजारों की संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं के त्वरित निराकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने शिविर पहुंचे। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने संबोधित करते हुए शासन की विभिन्न योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और तेंदूपत्ता संग्रहण जैसी जन-हितैषी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। ’सुशासन तिहार भीषण गर्मी के बावजूद हजारों ग्रामीणों ने उठाया कल्याणकारी योजनाओं का लाभ’            इस वृहद् शिविर में ग्राम पंचायत गुदमा, कोमपल्ली, केतुलनार, सकनापल्ली, अड़ावली, अम्बेली, कुटरु, मंगापेठा, दरभा, उसकापटनम, करकेली, हुर्रागुबाली, फरसेगढ़, रानीबोदली, सागमेटा, पेंकरम, सोमनपल्ली और मण्डेम सहित आस-पास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण बड़ी तादाद में सम्मिलित हुए। ’बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का आह्वान’           मुख्य अतिथि का संदेश बस्तर मुन्ने (बस्तर के बच्चे/आगे) कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना हमारा संकल्प है। इसके लिए ग्रामीण अपने आवश्यक दस्तावेज समय पर तैयार रखें और शिविरों में तैनात शासकीय अमले का पूरा सहयोग करें। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में शासन की अधिकांश योजनाओं का लाभ डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जिसके लिए बैंक खाता और आधार कार्ड का लिंक होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उन्होंने आयुष्मान कार्ड की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके जरिए पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। ’भावनात्मक और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम’         शिविर में उस समय एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती माताओं की गोद भराई और छह माह पूर्ण कर चुके शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया गया। इस पहल ने प्रशासनिक शिविर को एक पारिवारिक और आत्मीय उत्सव में बदल दिया। ’24 से अधिक विभागों ने दी अपनी सेवाएं’          ग्रामीणों की सुविधा के लिए शिविर में 24 से अधिक शासकीय विभागों ने अपने स्टॉल लगाए थे, जहाँ पात्र हितग्राहियों को ऑन-द-स्पॉट लाभान्वित किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नव-निर्मित पक्के मकानों की चाबियाँ हितग्राहियों को सौंपी गईं। समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सहायक उपकरणों का वितरण किया गया। कृषि, मत्स्य, राजस्व सहित अन्य प्रमुख विभागों द्वारा कृषि इनपुट और संबंधित सामग्रियों का वितरण किया गया। जनसंपर्क विभाग द्वारा राज्य शासन की उपलब्धियों और योजनाओं पर आधारित विभिन्न मार्गदर्शिका, शासकीय प्रकाशनों और सूचना सामग्रियों का निःशुल्क वितरण किया गया। ’जन-समस्याओं के त्वरित निराकरण का भरोसा’         सुशासन तिहार के इस मंच पर ग्रामीणों ने अपनी व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं से संबंधित आवेदन भी प्रस्तुत किए। शिविर में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी आवेदनों को संवेदनशीलता से दर्ज करते हुए उनके शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निराकरण का ठोस आश्वासन दिया। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष श्रीमती दशरी कोरसा, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रीति आरकी, जनपद उपाध्यक्ष जितेंद्र लेकाम सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, एसडीएम भैरमगढ़, जनपद पंचायत सीईओ और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सड़क हादसे रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाएं: मुख्य सचिव का सख्त निर्देश

रायपुर : सड़क दुर्घटनाएं नहीं हों, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाएं : मुख्य सचिव ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश, प्रदेश में 150 स्थानों पर लगे ईव्ही चार्जिंग स्टेशन रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए सभी समुचित और ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव आज मंत्रालय में सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।   ब्लैक स्पॉट सुधारने पर विशेष जोर मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के लिए चिन्हित ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और वहां आवश्यक सुधार कार्य तत्काल किए जाएं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय से सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए ताकि हादसों की आशंका खत्म हो सके।    सुप्रीम कोर्ट और केंद्र की योजनाओं की समीक्षा बैठक में राज्य सड़क सुरक्षा कोष, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा फलोदी एवं रंगा रेड्डी सड़क दुर्घटना मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। साथ ही पीएम राहत योजना और पीएम ई-ड्राईव योजना की प्रगति की जानकारी ली गई।  मुख्य सचिव ने सर्वाेच्च न्यायालय की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने को कहा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सड़क दुर्घटना रेस्क्यू से संबंधित एसओपी के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।   ईव्ही चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने के निर्देश मुख्य सचिव ने पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की स्थापना में तेजी लाने को कहा। उन्होंने परिवहन विभाग को निर्धारित स्थलों पर तत्काल ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 150 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इन स्टेशनों पर पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सब्सिडी भी दी जाती है।  घायलों को मिलेगा कैशलेस इलाज मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित उपचार मिलना सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत घायलों का अस्पताल में कैशलेस उपचार किया जाता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, गृह-पुलिस, परिवहन तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत अब तक 282 सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार के लिए पंजीकरण किया गया है। मुख्य सचिव ने इस योजना के क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की और इसे और प्रभावी बनाने को कहा।   बैठक में परिवहन विभाग के सचिव एवं आयुक्त एस. प्रकाश, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुआर. शंगीता सहित पुलिस, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कॉमेडियन कपिल शर्मा के घर पर गोलीबारी की खबर, पहले कनाडा में भी हुआ था हमला

अमृतसर  मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा के अमृतसर स्थित घर के बाहर कथित फायरिंग की सूचना सामने आई है। बताया जा रहा है कि सोमवार देर रात बाइक सवार कुछ बदमाशों ने घर के बाहर गोलियां चलाईं। घटना के समय कपिल शर्मा का परिवार घर के अंदर मौजूद था, जबकि कपिल शर्मा शूटिंग के सिलसिले में मुंबई में बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार घटना अमृतसर के होली सिटी इलाके में स्थित कपिल शर्मा के घर के बाहर हुई। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि इस पूरे मामले को लेकर पुलिस अधिकारी फिलहाल खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर और सहायक पुलिस आयुक्त कमलप्रीत सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन अधिकारियों ने घटना की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। रंगदारी की जताई गई आशंका इस घटना को कनाडा में हाल ही में हुई फायरिंग से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार कनाडा स्थित कप्स कैफे के बाहर भी कुछ समय पहले फायरिंग हुई थी। बताया जाता है कि वह संपत्ति भी कपिल शर्मा से जुड़ी हुई है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बदमाश कपिल शर्मा से रंगदारी मांग रहे हो सकते हैं। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। कनाडा में चार बार हुआ हमला कनाडा के सरे इलाके में स्थित कॉमेडियन कपिल शर्मा के 'कैप्स कैफे' और उसके बिल्कुल नजदीक अब तक कुल 4 बार फायरिंग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कनाडा पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, ये हमले मुख्य रूप से जबरन वसूली और भारतीय मूल के व्यापारियों को डराने के मकसद से किए गए हैं। जानें कब-कब हुआ हमला- 10 जुलाई 2025- कैफे की शुरुआत (लॉन्च) के कुछ ही समय बाद इसे पहली बार निशाना बनाया गया। अज्ञात हमलावरों ने कैफे की खिड़कियों और बाहरी दीवारों पर कई राउंड फायरिंग की थी। इस हमले की जिम्मेदारी बाद में जर्मनी में मौजूद बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के चरमपंथी हरजीत सिंह लाड्डी से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट द्वारा ली गई थी। 7 अगस्त 2025- कैफे पर करीब 25 राउंड गोलियां चलाई गईं, जिससे कैफे के कांच के शीशे पूरी तरह चकनाचूर हो गए। जांच के दौरान कनाडाई पुलिस को घटनास्थल से एक ज्वलनशील पदार्थ भी बरामद हुआ था। 16 अक्टूबर 2025- देर रात करीब 3:45 बजे कैफे पर तीसरी बार फायरिंग हुई। चलती गाड़ी से कैफे की तरफ हाथ निकालकर आधा दर्जन से अधिक गोलियां चलाई गईं, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस घटना के समय कुछ स्टाफ सदस्य अंदर मौजूद थे, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ। इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गोल्डी ढिल्लों और कुलवीर सिद्धू ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ली थी। 2 मई 2026- यह घटना 'कैप्स कैफे' के ठीक बगल में स्थित 'चाय सुट्टा बार' के बाहर हुई। हालांकि फायरिंग पड़ोसी आउटलेट के बाहर हुई, लेकिन इसके तुरंत बाद लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट ने सीधे तौर पर कपिल शर्मा और कैफे मालिक को धमकी दी गई।

योगी सरकार में सशक्त हुईं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, सम्मान और सुरक्षा से बदली तस्वीर

योगी सरकार में सशक्त हुईं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, सम्मान और सुरक्षा से बदली तस्वीर  3.44 लाख महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का आधार, गांव-गांव तक मजबूत हुआ महिला नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग लगातार ऊंचाई पर पोषण, स्वास्थ्य और तकनीक के संगम से आंगनबाड़ी व्यवस्था को मिला नया स्वरूप लखनऊ   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी व्यवस्था लगातार मजबूत और आधुनिक होती जा रही है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की योजनाओं ने प्रदेश की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को नई पहचान, सम्मान और आर्थिक मजबूती दी है। कभी सीमित संसाधनों और कम सुविधाओं में काम करने वाली महिलाएं योगी सरकार में गांव-गांव में महिला सशक्तीकरण और सामाजिक जागरूकता की मजबूत मिसाल बनकर उभरी हैं। प्रदेश में वर्तमान समय में 1,83,049 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और 1,61,491 सहायिकाएं कार्यरत हैं। यानी करीब 3.44 लाख महिलाएं बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल की जिम्मेदारी निभा रही हैं। योगी सरकार ने इन महिलाओं को केवल मानदेय आधारित कर्मचारी मानने के बजाय समाज परिवर्तन की अहम कड़ी के रूप में स्थापित करने का कार्य किया है। योगी सरकार में मिल रही प्रोत्साहन राशि    योगी सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए मानदेय और प्रोत्साहन राशि में सुधार किया है। वर्तमान में कार्यकत्रियों को 8 हजार रुपये और सहायिकाओं को 4 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। जिसमें कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था भी लागू है। पूरक पोषण का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करने पर कार्यकत्रियों को 500 रुपये और सहायिकाओं को 400 रुपये अतिरिक्त दिए जाते हैं। इसके अलावा पोषण ट्रैकर पर लाभार्थियों की पूरी फीडिंग करने पर कार्यकत्रियों को 1,000 रुपये और सहायिकाओं को 350 रुपये अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।  3,16,724 आयुष्मान कार्ड बनाए गए  बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि योगी सरकार ने आंगनबाड़ी व्यवस्था को तकनीक से जोड़कर आधुनिक स्वरूप दिया है। पोषण ट्रैकर प्रणाली लागू होने से लाभार्थियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन हो रहा है और योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी बनी है। निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए 98.76 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा किया जा चुका है। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगी है और योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंच रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। प्रदेश में 3,16,724 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। इससे लाखों महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार मिला है।

बेसिक शिक्षा में यूपी ने बनाई नई पहचान, परिषदीय विद्यालयों का बदलता स्वरूप बना ‘योगी मॉडल’

बेसिक शिक्षा में यूपी ने बनाई नई पहचान, परिषदीय विद्यालयों का बदलता स्वरूप बना ‘योगी मॉडल’ – ऑपरेशन कायाकल्प से 1.32 लाख विद्यालयों की बदली तस्वीर, संतृप्तिकरण 36% से बढ़कर 96.30% हुआ – स्मार्ट स्कूल, मॉडल कम्पोजिट विद्यालय और आधुनिक सुविधाओं से बदल रही सरकारी स्कूलों की पहचान – 75 जिलों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों की स्थापना, 141 के लिए भूमि चयन का कार्य पूर्ण – बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नए आवासीय विद्यालयों की स्थापना का निर्णय लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा अब भवनों और नामांकन पर जोर देने के साथ-साथ परिषदीय विद्यालयों को आधुनिक, स्मार्ट और तकनीक आधारित शिक्षा केंद्रों में बदलने का व्यापक अभियान चल रहा है। कभी जर्जर भवनों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के लिए चर्चा में रहने वाले सरकारी स्कूल अब 'योगी मॉडल' के अंतर्गत नई पहचान बना रहे हैं। योगी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में शामिल 'ऑपरेशन कायाकल्प' ने प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदल दी है। अभियान के अंतर्गत अब तक 1.32 लाख विद्यालय आच्छादित किए जा चुके हैं। वर्ष 2017-18 में जहां विद्यालयों का संतृप्तिकरण केवल 36 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर 96.30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह बदलाव अब गांवों के सरकारी स्कूलों में साफ दिखाई दे रहा है। 3.42 लाख डेस्क-बेंच उपलब्ध कराने की कार्यवाही तेज विद्यालयों में बच्चों के लिए बेहतर बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु 3.42 लाख डेस्क-बेंच उपलब्ध कराने की कार्यवाही तेजी से की जा रही है। इसके साथ ही सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने की विशेष योजना पर काम चल रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी तकनीक आधारित शिक्षा से जुड़ सकें। मॉडल विद्यालयों से शिक्षा व्यवस्था को मिल रही नई दिशा योगी सरकार अब परिषदीय शिक्षा को आधुनिक और समग्र शिक्षा मॉडल से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी 75 जिलों में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित किए जाने का निर्णय लिया गया है। प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक संचालित होने वाले 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों में से 141 के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन विद्यालयों को आधुनिक कक्षाओं, डिजिटल शिक्षण संसाधनों, स्मार्ट क्लास, प्रयोगशालाओं और खेल सुविधाओं से लैस किया जाएगा, ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी निजी विद्यालयों जैसी सुविधाएं प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही 75 मुख्यमंत्री अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय भी विकसित किए जा रहे हैं, जहां प्री-प्राइमरी से कक्षा-8 तक के बच्चों को आधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। बालिका शिक्षा पर विशेष फोकस योगी सरकार ने बालिका शिक्षा को मजबूत करने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं हैं, वहां नए आवासीय बालिका विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इससे दूरदराज और वंचित क्षेत्रों की बेटियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सकेगा। राष्ट्रीय स्तर पर उभर रहा ‘योगी मॉडल’ उत्तर प्रदेश में जिस तेजी से परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प हुआ है, वह देश के लिए एक बड़े मॉडल के रूप में उभर रहा है। योगी सरकार की रणनीति अब केवल स्कूल खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विद्यालयों को आधुनिक, तकनीक आधारित और परिणामोन्मुखी शिक्षा केंद्रों में बदलने की दिशा में काम किया जा रहा है। डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट स्कूल, मॉडल कम्पोजिट विद्यालय और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से उत्तर प्रदेश अब बेसिक शिक्षा में नई राष्ट्रीय पहचान बनाने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कोर्ट में पूरी हुई मुराद, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने केजरीवाल और सिसोदिया ने कहा ‘हां’

नई दिल्ली  दिल्ली के कथित आबकारी नीति (शराब घोटाला) मामले से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी अपडेट सामने आई है। हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के इस केस से अलग होने के बाद, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आखिरकार कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने के लिए राजी हो गए हैं। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान जस्टिस मनोज जैन के हाथों में आ गई है, जिनकी बेंच के सामने इस केस की नियमित सुनवाई शुरू हो चुकी है। केजरीवाल के साथ-साथ आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और विधायक दुर्गेश पाठक ने भी इस नई बेंच के सामने सुनवाई में शामिल होने के लिए अपनी हामी भर दी है। क्या था विवाद और क्यों बदला वकालतनामा? न्यायिक गलियारों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले काफी समय से आम आदमी पार्टी के नेता इस केस की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में होने को लेकर हिचकिचा रहे थे। लेकिन अब जैसे ही यह मामला दूसरी बेंच में ट्रांसफर हुआ, वैसे ही तीनों नेताओं के रुख में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सोमवार को जब सीबीआई (CBI) द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती वाले मामले को जस्टिस मनोज जैन की बेंच के सामने लिस्ट किया गया, तो कोर्ट रूम में एक नई प्रगति देखने को मिली। अदालत का रिकॉर्ड सुनवाई के दौरान जस्टिस मनोज जैन ने आधिकारिक तौर पर नोट किया कि अदालत को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से तीन नए 'वकालतनामा' (सुनवाई में शामिल होने का कानूनी पत्र) प्राप्त हो चुके हैं। यह इस बात का सीधा संकेत है कि आरोपी पक्ष अब इस बेंच के सामने जिरह के लिए पूरी तरह तैयार है। CBI की चुनौती पर अब 16 जुलाई को होगी अगली जंग गौरतलब है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने निचली अदालत (Trial Court) के एक फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है। इस मामले की गंभीरता और आरोपियों की ओर से वकालतनामा मिलने के बाद जस्टिस मनोज जैन की कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी दलीलें तैयार करने का समय दिया है।

‘एक साल में गिर जाएगी मोदी सरकार’— राहुल गांधी के दावे में कितना दम? राहुल गांधी का बड़ा दावा: क्या सच में खतरे में है मोदी सरकार या सिर्फ सियासी बयानबाजी?

नई दिल्ली विपक्ष के नेता राहुल गांधी का यह दावा कि अगले एक साल में पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार गिर जाएगी, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. कांग्रेस की एक बैठक में दिए गए इस बयान को बीजेपी ने पूरी तरह हवा-हवाई और राजनीतिक निराशा से जुड़ा बयान बताया है. सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी के इस दावे के पीछे कोई ठोस राजनीतिक आधार है या फिर यह सिर्फ विपक्षी कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश है? अगर मौजूदा राजनीतिक हालात को देखें तो राहुल गांधी का दावा जमीन से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी जैसा नजर आता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि केंद्र में एनडीए सरकार अभी भी मजबूत संख्या बल के साथ सत्ता में बनी हुई है. बीजेपी भले अकेले दम पर पहले जैसा आंकड़ा न लाई हो, लेकिन गठबंधन के साथ सरकार पूरी तरह स्थिर दिखाई देती है. सरकार पर किसी तरह का तत्काल राजनीतिक संकट नजर नहीं आता।  दरअसल, हाल के महीनों में हुए कई चुनावों ने यह संकेत दिया है कि बीजेपी का जनाधार अभी भी बेहद मजबूत है. पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में पार्टी को जनता का शानदार समर्थन मिला है. खासतौर पर बंगाल में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक मौजूदगी को बेहद मजबूत किया है. असम में भी पार्टी और उसकी सरकार की पकड़ पहले से अधिक मजबूत नजर आ रही है. इन चुनावों ने यह संदेश दिया कि बीजेपी केवल हिंदी पट्टी तक सीमित पार्टी नहीं रह गई है, बल्कि पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भी उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता आज भी बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत है. राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का चेहरा अभी भी विपक्ष के मुकाबले कहीं ज्यादा प्रभावी माना जाता है. विपक्ष लगातार महंगाई, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दे उठा रहा है, लेकिन इसके बावजूद मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता में कोई कमी नहीं दिख रही. उनमें जनता का एक अटूट भरोसा दिखता है. यही वजह है कि बीजेपी लगातार चुनावी राजनीति में भी बढ़त बनाए हुए है।  राहुल गांधी अपने बयान में आर्थिक असंतोष और युवाओं की नाराजगी को सरकार के खिलाफ माहौल बनने का कारण बता रहे हैं. कांग्रेस नीट पेपर लीक और छात्रों की परेशानी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है. लेकिन, सरकार ने इन मुद्दों पर भी त्वरित कदम उठाते हुए परीक्षा रद्द कर दी. ऐसे में ये मुद्दे भी अब प्रभावी नहीं रहे. वैसे भी भारतीय राजनीति का अनुभव बताता है कि केवल मुद्दों के आधार पर सरकारें नहीं गिरतीं. इसके लिए सत्ता पक्ष के भीतर बड़ा विभाजन, गठबंधन में दरार या व्यापक राजनीतिक संकट होना चाहिए. फिलहाल ऐसी कोई स्थिति दिखाई नहीं देती. इसके बावजूद अगर राहुल गांधी एक मजबूत सरकार के गिरने की भविष्यवाणी कर रहे हैं तो इससे उनकी राजनीतिक समझ पर सवाल उठ सकते हैं।  विपक्ष की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं राहुल गांधी के बेतुके दावे के साथ विपक्ष की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं मानी जा रही. इंडिया गठबंधन के भीतर कई दलों के अपने-अपने क्षेत्रीय हित हैं और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष अब तक कोई स्पष्ट चेहरा या ठोस वैकल्पिक एजेंडा पेश नहीं कर पाया है. कई राज्यों में कांग्रेस का संगठन लगातार कमजोर हुआ है. ऐसे में बीजेपी के मुकाबले विपक्ष की चुनौती फिलहाल बिखरी हुई नजर आती है. बीजेपी नेताओं ने भी राहुल गांधी के बयान को इसी नजरिए से देखा है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और सांसद संबित पात्रा जैसे नेताओं ने कहा कि विपक्ष जनता के जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहा और इसलिए इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं।  असल में राहुल गांधी का बयान ज्यादा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश लगता है. कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों में यह भरोसा बनाए रखना चाहती है कि बीजेपी को चुनौती दी जा सकती है. लेकिन मौजूदा राजनीतिक समीकरण, मोदी की लोकप्रियता, एनडीए का संख्या बल और विपक्ष की कमजोरी को देखते हुए यह दावा फिलहाल वास्तविकता से ज्यादा राजनीतिक कल्पना जैसा दिखाई देता है। 

वक्फ संपत्तियों से अतिक्रमण हटाना ऐतिहासिक कदम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

वक्फ संपत्तियों से अतिक्रमण हटाने का कार्य ऐतिहासिक : मुख्यमंत्री डॉ.यादव मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड, देश का श्रेष्ठ वक्फ बोर्ड वक्फ सुधारों के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अग्रणी मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम में 849 बेटे-बेटियों को मिली स्कॉलरशिप मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने पूर्व राष्ट्रपति महान वैज्ञानिक डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम और भारत-पाक युद्ध में शौर्य के प्रतीक कैप्टन हमीद का किया स्मरण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड विभिन्न नवाचारों से देश में सबसे आगे है। प्रदेश में वक्फ बोर्ड के माध्यम से वक्फ संपत्तियां ऑनलाइन की गई, इसके लिए भारत सरकार से स्कॉच अवार्ड मिला। यह पारदर्शी व्यवस्था पूरे देश के लिए उदाहरण बनी है। म.प्र वक्फ बोर्ड देश का श्रेष्ठ वक्फ बोर्ड है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को रवीन्द्र भवन भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। रहीम और रसखान ने दिया समरसता का संदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा देश रहीम और रसखान की मेलजोल की संस्कृति में विश्वास रखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की जनता कानून में भरोसा रखती है, चाहे किसी भी समुदाय की हो। इसलिए भारत पूरे विश्व में आदर्श है। कश्मीर की जनता ने पड़ोसी दरिंदों को खदेड़ा, यह भारत की आदर्श संस्कृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब जम्मू कश्मीर में पड़ोसी राष्ट्र से दरिन्दे आए तब वहां की जनता ने उनका सीधा विरोध किया और उन्हें खदेड़ दिया। हमारे देश की जनता बुद्धि और विवेक का उपयोग करती है। भारत की यह सुदृढ़ परम्परा और आदर्श संस्कृति है। प्रधानमंत्री की पहल और मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नए वक्फ कानूनों से श्रेष्ठ कार्य को प्रोत्साहित किया है। जहां राज्यों के वक्फ बोर्ड की आय बढ़ रही है, वहीं सच्चाई के साथ कार्य करने का आनंद भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए वक्फ कानून से अनेक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा संभव हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने नए वक्फ कानून के माध्यम से सुशासन और पारदर्शिता की व्यवस्था लागू करवाई है। अतिक्रमण को रोकने में सफलता मिली है। मध्यप्रदेश इस कार्य में अग्रणी है। वक्फ सुधार के कार्य ऐतिहासिक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक वक्फ सुधार में इतना बड़ा कार्य नहीं हुआ है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड अभिनंदन का पात्र है। वक्फ संपत्तियों का संरक्षण और सुधार हो रहा है। नया वक्फ भवन भी बनाने की पहल हुई है, जिसका नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया। पोर्टल से पारदर्शिता आई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब पारदर्शी कार्य प्रणाली लागू है। उम्मीद पोर्टल के माध्यम से सभी वक्फ संपत्तियां ऑनलाइन हैं और रिकॉर्ड में दर्ज हुई हैं। वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमण हटाने का कार्य बोर्ड द्वारा किया जा रहा है जो प्रशंसनीय है। अब वक्फ संपत्तियां सुरक्षित, वक्फ बोर्ड के माध्यम से आय वृद्धि का अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए वक्फ कानून से अनेक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा संभव हुई है। मध्यप्रदेश में अतिक्रमण को रोकने में सफलता मिली है। बोर्ड को आय वृद्धि का अवसर भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने नए वक्फ कानूनों से श्रेष्ठ कार्य को प्रोत्साहित किया है। जहां राज्यों के वक्फ बोर्ड की आय बढ़ रही है, वहीं सच्चाई के साथ कार्य करने का आनंद भी मिल रहा है। बेटे बेटियां पढ़ें, आगे बढ़ें सरकार देगी पूरा सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के बेटे-बेटियां शिक्षा के माध्यम से प्रोत्साहित हों और भविष्य के सपनों को साकार करें। मध्यप्रदेश सरकार इनका पूरा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न तरह के दान से भी निर्धन बच्चों को पढ़ाने का कार्य हो रहा है। दान दाताओं की भूमिका प्रशंसनीय है। ऐसे कार्यों में राज्य सरकार भी पूरा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न धार्मिक प्रमुखों और अन्य सभी जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया। स्कॉलरशिप प्राप्त करने वाले 849 बेटे बेटियों को हार्दिक बधाई दी। कैप्टन हमीद के साहस और शौर्य का स्मरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत पाक युद्ध में कैप्टन हमीद ने साहसी कारनामा करते हुए पाकिस्तान के अनेक टैंक नष्ट कर दिखाए, इसे कौन भूल सकता है। कैप्टन हमीद शहीद हुए, उन्होंने राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा को सर्वोपरि माना। पढ़ो-पढ़ाओ और राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनो योजना में छात्रवृत्ति का लाभ लें विद्यार्थी – डॉ. सनवर पटेल मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि आज पढ़ो-पढ़ाओ- राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनो योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को विकसित और स्वर्णिम बनाने के लिए कार्य हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी वक्फ की चुनौतियों से निपटने के लिए नए कानून लेकर आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार नए कानूनों के माध्यम से आमजन की भलाई और बेटा-बेटियों की पढ़ाई के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में वक्फ माफियाओं पर अंकुश लगा है, मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्ति ऑनलाइन दर्ज हुई है। इस कार्य के लिए मध्यप्रदेश को देश में प्रथम स्थान मिला और प्रदेश को स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया। संपत्तियों के ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ी है, छुप कर मिली भगत से काम करने वाले बेनकाब हुए हैं। माफिया और भू-माफिया किसी धर्मस्थल का शोषण न कर पाएं, इस बात का वक्फ बोर्ड विशेष ध्यान रख रहा है। वक्फ की संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है। स्कूल-कॉलेजों में बेटियों के ड्राप आउट को रोकने में मिली सफलता डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के सभी मेधावी विद्यार्थियों के साथ खड़े हैं। इसी का परिणाम है कि आज 849 मेधावी विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप प्रदान कर उनका सम्मान किया जा रहा है। गरीब-जरूरतमंद बेटा-बेटियों को मेडिकल कॉलेज तक की पढ़ाई करने में मदद दी जा रही है। नए कानूनों के कारण वक्फ बोर्ड की आय बढ़ी है। हमारा वक्फ … Read more

गति शक्ति और आत्मनिर्भर भारत के विजन से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान

बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर, बढ़ता भारतः रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से खुलेगा तरक्की का द्वार गति शक्ति और आत्मनिर्भर भारत के विजन से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान रायपुर  भारत आज तीव्र गति से आधुनिक बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और सुदृढ़ आर्थिक नेटवर्क के निर्माण की दिशा में अग्रसर है। सड़क, रेल, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स को एकीकृत करते हुए देश को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास निरंतर जारी है। विकास के इसी दूरदर्शी दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर है। यह कॉरिडोर केवल दो शहरों को जोड़ने वाली सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह ष्नए भारत की नई रफ्तारष् का प्रतीक है, जो उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए क्षितिज खोलने जा रहा है। मध्य-पूर्वी समुद्री तट को जोड़ने वाला महामार्ग            रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर देश के मध्य भाग को पूर्वी समुद्री तट से जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक मार्ग है। यह छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी (संपर्क) स्थापित करेगा, जिससे सड़क परिवहन, लॉजिस्टिक नेटवर्क और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इस परियोजना को प्रधानमंत्री की “गति शक्ति” और “आत्मनिर्भर भारत” की सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विकास का मूलमंत्र           किसी भी राज्य या देश के विकास का सबसे मजबूत आधार उसका इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। जहां विश्वस्तरीय सड़कें, सुगम परिवहन और अत्याधुनिक लॉजिस्टिक सुविधाएं होती हैं, वहां उद्योगों का तेजी से विस्तार होता है और निवेश आकर्षित होता है। यह कॉरिडोर माल परिवहन को अधिक तीव्र, सुरक्षित और लागत प्रभावी (कम खर्चीला) बनाएगा। इसके परिणामस्वरूप उद्योगों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा और तैयार उत्पाद कम से कम समय में बाजार तक पहुंच सकेंगे।           चूंकि विशाखापट्टनम बंदरगाह देश के प्रमुख समुद्री द्वारों में से एक है, इसलिए इस कॉरिडोर के माध्यम से छत्तीसगढ़ को सीधे पोर्ट कनेक्टिविटी मिलेगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि राज्य के उद्योगों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच स्थापित होगी, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी। छत्तीसगढ़ को मिलने वाले प्रमुख लाभ           रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। छत्तीसगढ़ खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधनों, कृषि और वनोपज से समृद्ध राज्य है। यहाँ लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और स्टील उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं। पूर्व में बेहतर परिवहन और लॉजिस्टिक नेटवर्क के अभाव के कारण उद्योग अपनी पूरी क्षमता का लाभ नहीं उठा पाते थे, परंतु यह कॉरिडोर इन चुनौतियों को समूल समाप्त कर देगा। औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन           कॉरिडोर के निर्माण से रायपुर, दुर्ग, भिलाई, धमतरी, कांकेर और जगदलपुर जैसे क्षेत्रों में नए औद्योगिक क्लस्टर्स विकसित होंगे। स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) और एमएसएमई (लघु उद्योगों) को एक नई ऊर्जा मिलेगी, जिससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का रुझान इस क्षेत्र की ओर तेजी से बढ़ेगा। रोजगार के नए अवसरों का सृजन        इतनी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना के आने से रोजगार के अवसर भी आनुपातिक रूप से बढ़ते हैं। सड़क निर्माण, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क्स, नई औद्योगिक इकाइयों और परिवहन सेवाओं के माध्यम से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में जीविकोपार्जन के साधन मिलने से पलायन की समस्या पर काफी हद तक रोक लगेगी। बस्तर क्षेत्र का कायाकल्प          यह कॉरिडोर बस्तर संभाग के लिए विशेष रूप से परिवर्तनकारी सिद्ध होगा। लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से कटे क्षेत्रों में बेहतर सड़क और व्यापारिक संपर्क स्थापित होगा। बस्तर के बहुमूल्य वन उत्पाद, अनूठे हस्तशिल्प, कृषि उपज और लघु उद्योगों को बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी, जिससे आदिवासी समुदायों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। कृषि और वनोपज को सही मूल्य               छत्तीसगढ़ देश में धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त यहाँ मक्का, दलहन, फल और लघु वनोपज का भी प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है। बेहतर परिवहन व्यवस्था से किसानों और वनोपज संग्राहकों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में सुगमता होगी। परिवहन लागत घटने से सीधे तौर पर किसानों का मुनाफा बढ़ेगा। पर्यटन उद्योग को नई उड़ान            चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर और बस्तर के सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच सुगम होने से राज्य में पर्यटन उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा। इससे होटल, गाइड, स्थानीय परिवहन और हस्तशिल्प व्यवसायियों की आय दोगुनी होगी। व्यापार और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि            विशाखापट्टनम पोर्ट तक आसान और तेज पहुंच से छत्तीसगढ़ के उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता (कॉम्पिटिटिवनेस) बढ़ेगी। संक्षेप में कहें तो, रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर महज एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता का नया महामार्ग है। यह छत्तीसगढ़ को देश के एक प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक हब के रूप में स्थापित करने का सामर्थ्य रखता है।            मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही सशक्त अर्थव्यवस्था की नींव होता है, और यही परियोजना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। नए भारत की नई रफ्तार का यह कॉरिडोर देश के हर कोने को प्रगति की साझा मुख्यधारा से जोड़ने का एक जीवंत माध्यम है। मुख्यमंत्री का विजनः छत्तीसगढ़ की समृद्धि का महामार्ग          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर हमारे छत्तीसगढ़ की आर्थिक रीढ़ बनने जा रहा है। हमारा राज्य खनिज संपदा, कृषि और समृद्ध वनोपज से परिपूर्ण है, लेकिन वैश्विक बाजारों तक सीधी और तीव्र पहुंच न होने से हमारे उद्यमियों और किसानों को अपनी क्षमता का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। यह कॉरिडोर हमारी इस भौगोलिक चुनौती को अवसर में बदल देगा। विशाखापट्टनम बंदरगाह से सीधे जुड़ने के बाद छत्तीसगढ़ का स्टील, हस्तशिल्प और कृषि उत्पाद सीधे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपनी धाक जमाएंगे। हमारी सरकार का संकल्प है कि इस मार्ग के किनारे अत्याधुनिक औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जाएं, ताकि स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिले और बस्तर सहित पूरे राज्य में खुशहाली का एक नया … Read more