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खेल और तकनीक से नौनिहालों को नई उड़ान, डिजिटल दीदी पूनम की अनोखी पहल

डिजिटल दीदी पूनम खेल-खेल में संवार रही नौनिहालों का भविष्य भोपाल  डिजिटल प्लेटफॉर्म का सही इस्तेमाल अगर समाज को बदलने के लिए किया जाए, तो परिणाम कितने सुखद हो सकते हैं, इसकी मिसाल पेश की है मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने। परासिया परियोजना के वार्ड क्रमांक 12 की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूनम चौरसिया आज सोशल मीडिया पर एक चर्चित नाम बन चुकी हैं। पूनम अपनी आंगनवाड़ी के बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने और उनके संपूर्ण विकास के लिए अनूठे प्रयोग कर रही हैं। पूनम चौरसिया के यूट्यूब चैनल '@parasiawalipoonam' की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस चैनल पर 71 हजार 600 से अधिक सब्सक्राइबर्स जुड़ चुके हैं। खेल-खेल में प्रारंभिक बाल्याव्यस्था, देखभाल और शिक्षा गतिविधियों को सिखाते हुए पूनम अब तक 6 हजार 800 से ज्यादा वीडियो अपलोड कर चुकी हैं, जिन्हें 7 करोड़ 48 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। यूट्यूब ही नहीं, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी उनकी वीडियो खूब पसंद किए जा रहे हैं। स्थानीय संसाधनों से शिक्षा को बनाया मजेदार एम.कॉम (M.Com) शिक्षित पूनम साल 2020 से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं दे रही हैं। वे भारत सरकार के 48 सप्ताह के 'आधारशिला पाठ्यक्रम' को रटाने के बजाय बेहद मनोरंजक तरीके से बच्चों को सिखाती हैं। पूनम बच्चों के लिये पाठ्यक्रम को इतना आसान और मजेदार बना देती हैं कि बच्चे खुद व खुद पढ़ाई की ओर खिचें चले आते है। खास बात यह है कि इन गतिविधियों के लिए वे किसी महंगे सामान का इस्तेमाल नहीं करतीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों जैसे कंकड़, पत्थर, रंग-बिरंगे कागज और घरेलू वस्तुओं के जरिए बच्चों को अक्षर ज्ञान, रंगों की पहचान, शेप और शैडो (आकृतियां और परछाईं) जैसी पेचीदा चीजें सहजता से सिखा देती हैं। पढ़ाई भी और पोषण भी: आंगनवाड़ी बनी 'स्मार्ट क्लास' मध्यप्रदेश के 98 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में 30 लाख से अधिक बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और शाला पूर्व शिक्षा दी जा रही है। आंगनवाड़ी देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है जहां पोषण के साथ पढ़ाई भी होती है। पूनम ने इस अवधारणा को पूरी तरह धरातल पर उतारा है। उन्होंने भारत सरकार के 'पोषण भी-पढ़ाई भी' (PBPB) अभियान के तहत प्रथम चरण का प्रशिक्षण लिया और उत्कृष्ट कार्य के चलते दूसरे चरण में वे 'स्टार चैंपियन कार्यकर्ता' के रूप में चुनी गईं। इसके बाद उन्होंने 'निपसिड' (NIPCCD) से मास्टर ट्रेनर के रूप में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में उनके केंद्र में 3 से 6 आयु वर्ग के 43 बच्चे दर्ज हैं, जिनमें से 22 बच्चे नियमित रूप से शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अभिभावकों में बढ़ा भरोसा, निजी स्कूलों को मिल रही टक्कर पूनम के इस अभिनव प्रयास का सबसे बड़ा असर स्थानीय समाज पर पड़ा है। क्षेत्र के अभिभावक निजी स्कूलों को छोड़कर अपने बच्चों को पूनम की आंगनवाड़ी केंद्र में भेज रहे हैं। माता-पिता स्वयं बच्चों को केंद्र पर छोड़ने और लेने आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूनम ने आंगनवाड़ी के पारंपरिक ढर्रे को बदलकर उसे एक आधुनिक शिक्षा केंद्र का रूप दे दिया है। स्थिति यह है कि जब यहां के बच्चे आगे चलकर प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश लेते हैं, तो अभिभावक गर्व से कहते हैं कि 'ये पूनम की आंगनवाड़ी से पढ़कर आए हैं।' अन्य कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्त्रोत पूनम चौरसिया की यह अनूठी पहल अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिये प्रेरणा है। डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग कर सरल गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से बच्चों को शिक्षा के प्रति आकर्षित किया जा सकता है।  

EV Buyers Alert: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सब्सिडी में होने जा रहा बड़ा बदलाव

नई दिल्ली देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और विदेशी तेल पर निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार PM ई-ड्राइव स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक पर मिलने वाली सब्सिडी को और बढ़ा सकती है। भारी उद्योग मंत्रालय इस योजना के लिए अतिरिक्त फंड की डिमांड करने की तैयारी में है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पेट्रोल वाहनों की जगह EV टू-व्हीलर अपनाएं। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना आम लोगों के लिए पहले से कहीं ज्यादा सस्ता हो सकता है। यही वजह है कि EV कंपनियों के शेयरों में भी उत्साह देखा जा रहा है। सरकार पहले ही PM ई-ड्राइव स्कीम के तहत FY2026 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सब्सिडी के लिए करीब ₹10,900 करोड़ आवंटित कर चुकी है। ऑटो इंडस्ट्री की मांग के बाद इस योजना को जुलाई तक बढ़ा दिया गया था। अब नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार इस योजना को और मजबूत बनाना चाहती है। हालांकि, अतिरिक्त फंड कितना होगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार, पिछले दो महीनों से मंत्रालय इस पर चर्चा कर रहा है कि किन योजनाओं को आगे बढ़ाया जाए और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर इस सूची में सबसे ऊपर है। दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है, इसलिए तेल महंगा होते ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि लोग धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हों, ताकि तेल आयात पर दबाव कम किया जा सके। खास बात यह है कि अब EV केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि जरूरत बनते जा रहे हैं। हाल के आंकड़े भी यही कहानी बताते हैं। मई के पहले आधे हिस्से में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन में 13.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि कुल टू-व्हीलर बिक्री में 5.5% की गिरावट रही। इसका मतलब साफ है कि लोग अब पेट्रोल स्कूटर की जगह इलेक्ट्रिक स्कूटर को प्राथमिकता देने लगे हैं। एथर (Ather Energy) के चीफ बिजनेस ऑफिसर रवनीत सिंह फोकेला ने कहा कि पहले हर घर में पेट्रोल वाहन जरूरी माना जाता था, लेकिन अब हर परिवार कम से कम एक EV रखना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि EV अब घर की दूसरी गाड़ी के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ऑफिस जाने, बच्चों को स्कूल छोड़ने या रोजमर्रा के छोटे कामों के लिए लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कम रनिंग कॉस्ट है। जहां पेट्रोल स्कूटर चलाने में प्रति किलोमीटर कई रुपये खर्च होते हैं, वहीं EV स्कूटर की लागत करीब 30 से 50 पैसे प्रति किलोमीटर तक आ जाती है। रात में घर पर चार्जिंग कर लेना और पेट्रोल पंप की लाइन से बचना लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है। अगर सरकार सब्सिडी और बढ़ाती है, तो इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमतों में और कमी आ सकती है। इससे ओला (Ola Electric), एथर (Ather Energy), TVS iQube, बजाज चेतक (Bajaj Chetak) जैसे ब्रांड्स को बड़ा फायदा मिल सकता है। साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी टेक्नोलॉजी में भी तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है। भारत की EV क्रांति अब अगले बड़े चरण में प्रवेश करती दिख रही है, जहां सरकार, कंपनियां और ग्राहक तीनों मिलकर क्लीन मोबिलिटी को नई रफ्तार देने की तैयारी में हैं।

फार्मर रजिस्ट्री में 2.28 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण, लक्ष्य का 79.10 प्रतिशत कार्य पूरा

फार्मर रजिस्ट्री में 2.28 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण, लक्ष्य का 79.10 प्रतिशत कार्य पूरा योगी सरकार के तेज प्रयासों से किसानों की डिजिटल पहचान की ओर तेजी से बढ़ रहा उत्तर प्रदेश यूपी में अंश निर्धारण का कार्य 87.19 प्रतिशत तक पूरा तय समयसीमा में लक्ष्य पूरा करने के लिए बढ़ाई गई रफ्तार लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किसानों को सरकारी योजनाओं का पारदर्शी और त्वरित लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में चल रहे फार्मर रजिस्ट्री अभियान ने अब बड़े स्तर पर परिणाम देना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार की सक्रिय पहल के चलते अब तक 2.28 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य का 79.10 प्रतिशत कार्य पूरा है। प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत 5 नवंबर 2024 से की गई थी। केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए 2,88,70,495 किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान प्रगति के अनुसार अब तक 2,28,36,658 किसानों का नामांकन किया जा चुका है, जबकि लगभग 60,33,837 किसानों का पंजीकरण अभी शेष है। वर्तमान प्रगति के आधार पर किसानों की आईडी निर्माण प्रक्रिया 20 अगस्त 2026 तक पूर्ण होने का अनुमान है।    योगी सरकार ने इस अभियान को मिशन मोड में संचालित करते हुए जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, कृषि विभाग और स्थानीय स्तर के कर्मचारियों को तेजी से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों का एकीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार करना है, जिससे उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि अनुदान, ऋण सुविधा और अन्य योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सके।  प्रदेश सरकार की प्राथमिकता केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि और किसानों के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना भी है। इसी क्रम में “अंश निर्धारण” का कार्य भी तेजी से चल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अंश निर्धारण का कार्य 87.19 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इससे भूमि रिकॉर्ड की शुद्धता बढ़ेगी और भविष्य में विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार फार्मर रजिस्ट्री उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे सरकार को वास्तविक किसानों की पहचान करने, योजनाओं की मॉनिटरिंग करने और कृषि आधारित नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। साथ ही किसानों को सरकारी सहायता प्राप्त करने में भी आसानी होगी। योगी सरकार लगातार तकनीक आधारित प्रशासन को बढ़ावा दे रही है। डिजिटल गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और डेटा आधारित योजना क्रियान्वयन के जरिए उत्तर प्रदेश को आधुनिक और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी इसी व्यापक परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

सोशल मीडिया पर लेखपाल परीक्षा को लेकर अफवाह फैलाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

सोशल मीडिया पर लेखपाल परीक्षा को लेकर अफवाह फैलाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई आयोग ने कहा- अभ्यर्थी भ्रामक प्रचार पर न दें ध्यान, परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रही लखनऊ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीपीएससी) ने लेखपाल मुख्य परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार और अफवाहों पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 21 मई 2026 को आयोजित लेखपाल मुख्य परीक्षा प्रदेश के 44 जनपदों के 861 परीक्षा केंद्रों पर पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और शुचितापूर्ण तरीके से संपन्न कराई गई थी। इसके बावजूद कुछ लोग गलत मंशा से प्रेरित होकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने और अभ्यर्थियों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। आयोग की ओर से जारी आधिकारिक बयान में परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि परीक्षा शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुई है और आयोग भर्ती प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आयोग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रामक विश्लेषण या अपुष्ट सूचनाओं पर ध्यान न दें तथा केवल आयोग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। परीक्षा नियंत्रक ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाने, अभ्यर्थियों को भड़काने अथवा भर्ती प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ आयोग और पुलिस प्रशासन द्वारा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।गौरतलब है कि प्रदेश सरकार लगातार भर्ती परीक्षाओं को नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी निगरानी, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता को प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में लेखपाल मुख्य परीक्षा भी व्यापक सुरक्षा प्रबंधों और निगरानी के बीच सम्पन्न कराई गई।

दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन केस में कांग्रेस नेता अलका लांबा पर कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली राऊज एवेन्यू कोर्ट से महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को बड़ा झटका लगा है. जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में कोर्ट ने महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को दोषी ठहराया. 5 जून को अलका लांबा की सजा पर राऊज एवेन्यू कोर्ट में बहस होगी. जुलाई 2024 में अलका लांबा के नेतृत्व में महिला कांग्रेस ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था।  अलका लांबा के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है- कोर्ट पिछ्ली सुनवाई में कोर्ट ने कांग्रेस नेता के खिलाफ आपराधिक आरोप तय किया था. राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कहा था कि अलका लांबा के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।  कांग्रेस की महिला नेता पर सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की, काम में बाधा डालने का आरोप , कानूनी आदेश की अवहेलना और सार्वजनिक रास्ता रोकने के आरोप, बीएनएस की धारा 132, 221, 223(a) और 285 के तहत केस चल रहा था. इसमें कोर्ट ने आज (25 मई 2026) दोषी करार दिया।  दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा का आदेश जारी करने के बावजूद अलका लांबा ने 29 जुलाई 2024 को जंतर-मंतर पर महिला कांग्रेस का महिला आरक्षण को लेकर प्रदर्शन किया था। अलका लांबा पर आरोप है कि उन्होंने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शनकारियों के साथ टालस्टाय मार्ग पर लगे बैरिकेड पर पहुंचीं और नारेबाजी की। लांबा संसद का घेराव करने पर आमादा थीं। मौके पर मौजूद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से निषेधाज्ञा के बारे में प्रदर्शनकारियों को जानकारी दी और प्रदर्शन खत्म करने की चेतावनी दी थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक अलका लांबा और उनके समर्थकों ने पुलिसकर्मियों को धक्का देकर बैरिकेड को पार किया और संसद मार्ग जाम कर दिया। पुलिस के काफी समझाने के बाद भी अलका लांबा और दूसरे समर्थक वहां से नहीं हटे, जिसके बाद गिरफ्तार कर लिया था। बाद में सब-इंस्पेक्टर अनीता सिंह के बयान पर अलका लांबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। 20 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने संबंधित घटना का वीडियो देखा था, जिसमें पाया गया कि अलका बलपूर्वक लोकसेवक को उसके काम में बाधा पहुंचा रही थीं। बिल्कुल स्वागत है, मैं डरने वाली नहीं हूं- अलका लांबा कोर्ट की तरफ से दोषी करार दिए जाने के बाद अलका लांबा ने कहा, "यही उम्मीद थी, यही होने वाला है. जुलाई 2024 का मामला है. मानसून सत्र चल रहा था. महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर मैं और मेरी सारी बहनें जंतर मंतर पर संवैधानिक अधिकार के तहत महिला आरक्षण लागू करो कि मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे. पुलिस पर दबाव कहूं या अपनी कुर्सी को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने मुझपर एफआईआर की. 2025 से 2026 इसी कोर्ट में मैं चक्कर काटती रही और आज पता लगता है कि मुझे दोषी पाया गया है. मेरा अपराध था कि मैंने महिला आरक्षण और महिला सुरक्षा के लिए जंतर मंतर पर पहुंचकर आवाज उठाई कैसे? मुझे 5 जून को सजा सुनाई जाएगी. बिल्कुल स्वागत है, डरने वाली नहीं हूं। 

उप्र. मदरसा बोर्ड रिजल्ट में बेटियों का दबदबा, 29 हजार से ज्यादा छात्राएं पास

उप्र. मदरसा बोर्ड रिजल्ट में बेटियों का दबदबा, 29 हजार से ज्यादा छात्राएं पास 94.30% सफलता दर के साथ छात्राओं ने दिखाई शानदार प्रतिभा आलिम परीक्षा के टॉप-3 पर छात्राओं का कब्जा, वाराणसी की जुमी फरीन टॉपर गोरखपुर, कुशीनगर, लखनऊ समेत कई जिलों की बेटियों ने प्रदेश में बढ़ाया मान लखनऊ   उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित मदरसा शिक्षा परिषद के वर्ष 2026 की परीक्षा में बेटियों ने बाजी मारी है। इस वर्ष 29 हजार से अधिक छात्राएं पास हुई है। जिनका सफलता प्रतिशत 94.30 प्रतिशत रहा है। छात्राओं ने टॉप रैंकिंग में भी अपना दबदबा कायम किया है। यह उपलब्धि केवल छात्राओं की मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों और पारदर्शी व्यवस्था का भी सकारात्मक असर है। 29 हजार से अधिक छात्राएं हुई पास उप्र. मदरसा शिक्षा परिषद लखनऊ द्वारा वर्ष 2026 की मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) परीक्षा में कुल 55,788 छात्र-छात्राएं सफल हुए हैं, जिनमें 29,229 छात्राएं शामिल हैं। छात्राओं का कुल सफलता प्रतिशत 94.30 रहा है, जो इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में बेटियों को बेहतर शैक्षिक माहौल और अवसर मिल रहे हैं। सेकेंडरी (मुंशी/मौलवी) परीक्षा में 21,407 छात्राएं पास हुईं है। जिनका सफलता प्रतिशत 91.46 रहा है। वहीं सीनियर सेकेंडरी (आलिम) परीक्षा में 7,822 छात्राओं ने सफलता हासिल की, जिसका सफलता प्रतिशत 90.88 दर्ज किया गया है। सीनियर सेकेंडरी के टॉप-3 में छात्राओं का दबदबा सबसे खास बात यह रही कि सीनियर सेकेंडरी (आलिम) परीक्षा की टॉप तीन रैंक पर छात्राओं ने कब्जा जमाया है। वाराणसी जिले के मदरसा दैरातुल इस्लाह चिराग-ए-उलूम की छात्रा जुमी फरीन ने 82.60 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। इसी मदरसे की छात्रा शाइस्ता परवीन ने 82.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं अमरोहा जिले के मदरसा अलिया जफरिया की छात्रा उम्मुल खैर ने भी 82.40 प्रतिशत अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा वाराणसी की जैनबी हनिया ने 82 प्रतिशत अंक पाकर पांचवां स्थान हासिल किया। जबकि फर्रुखाबाद जिले के मदरसा इस्लामिया फैज-ए-आम लालबाघ हमीरपुर खास की छात्रा रेशमा ने 81.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर टॉप-10 में आठवां स्थान बनाया है। गोरखपुर, कुशीनगर और लखनऊ की छात्राओं ने नाम किया रोशन मदरसा बोर्ड की सेकेंडरी (मुंशी/मौलवी) परीक्षा में भी छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया है। गोरखपुर जिले के जामिया रिज्विया अहले सुन्नत की छात्रा शाइमा परवीन ने 89.33 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है। कुशीनगर जिले के मदरसा मुस्तफा दारुल उलूम की छात्रा सिद्दीका खातून ने 88.50 प्रतिशत अंक पाकर पांचवां स्थान प्राप्त किया है। वहीं गोरखपुर जिले के मदरसा अरबिया शम्सुल उलूम की छात्रा रुखसार बानो ने 88.17% अंक प्राप्त कर छठा, कुशीनगर जिले के जामिया उस्मानिया गर्ल्स हाई स्कूल उस्मान नगर दुदही कुशीनगर की शकिला खातून ने 87.83% अंक पाकर नौवां स्थान और लखनऊ जिले के जामिया इस्लाहुल बनत में पढ़ने वाली छात्रा सानिया ने 87.83% अंक के साथ दसवां स्थान प्राप्त कर प्रदेश में नाम रोशन किया है। योगी सरकार मदरसा शिक्षा की बेहतरी के लिए पूरी तरह से संजीदाः दानिश आजाद अंसारी अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि योगी सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से मुस्लिम बहनों को शिक्षित कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि मदरसा शिक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यहां गरीब मुस्लिम परिवारों के बच्चे पढ़ने आते हैं। ऐसे बच्चों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा मिलना उनका अधिकार है। योगी सरकार मदरसा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए पूरी तरह संजीदा है।

अयोध्या में बनेगा भव्य लव-कुश पार्क, 17.72 करोड़ की लागत से ‘कचरे से कला’ थीम पर होगा विकास

अयोध्या में बनेगा भव्य लव-कुश पार्क, 17.72 करोड़ की लागत से 'कचरे से कला' थीम पर होगा विकास -रामायण की कहानियों को स्क्रैप मूर्तियों के माध्यम से मिलेगा नया स्वरूप -मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्मार्ट सिटी सोच को मिलेगा नया आयाम -पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनेगा लव-कुश पार्क -सार्वजनिक कला, संस्कृति और सतत विकास का अनूठा संगम बनेगा पार्क -इंटरैक्टिव इंस्टालेशन और कलात्मक चित्रों से जीवंत होंगी पौराणिक कथाएं अयोध्या  रामनगरी अयोध्या में पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई देने के लिए एक अनूठी पहल शुरू होने जा रही है। राज्य स्मार्ट सिटी मिशन के तहत रायबरेली राजमार्ग पर स्थित मऊशिवाला एमआरएफ सेंटर के समीप 17.72 करोड़ रुपये की लागत से लव-कुश पार्क का निर्माण किया जाएगा। यह पार्क 'कचरे से कला' थीम पर आधारित होगा, जिसमें रामायण की पौराणिक कथाओं को स्क्रैप धातु की मूर्तियों, कलात्मक चित्रों और इंटरैक्टिव इंस्टालेशन्स के माध्यम से जीवंत किया जाएगा।      नगर निगम द्वारा विकसित किए जा रहे इस पार्क का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सांस्कृतिक संरक्षण को एक साथ जोड़ना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्मार्ट सिटी सोच को इस परियोजना से नया आयाम मिलेगा। नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने बताया कि पार्क विशेष रूप से भगवान राम के पुत्र लव और कुश की कहानियों पर केंद्रित होगा। रामायण काल की इन लोकप्रिय कथाओं को आधुनिक कला के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी पौराणिक इतिहास से जुड़ सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या को स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। पहले से ही अयोध्या में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छता और पर्यटन सुविधाओं का तेजी से विकास हो रहा है। लव-कुश पार्क इस विकास की कड़ी को और मजबूत करेगा। कचरे को कलाकृति में बदलने का अनूठा मॉडल 'कचरे से कला' थीम इस परियोजना की जान है। शहर के कचरे और स्क्रैप मटेरियल को इकट्ठा कर उससे भव्य मूर्तियां, मॉडल और इंस्टालेशन्स तैयार किए जाएंगे। राम-सीता, लव-कुश, अश्वमेध यज्ञ, वनवास की घटनाएं और अन्य महत्वपूर्ण प्रसंग स्क्रैप धातु की मूर्तियों के रूप में दर्शाए जाएंगे। इंटरैक्टिव इंस्टालेशन्स के जरिए पर्यटक स्वयं इन कथाओं का हिस्सा बन सकेंगे। उदाहरण के लिए, लव-कुश द्वारा घोड़े पकड़ने की घटना को 3D मॉडल और साउंड-लाइट शो के माध्यम से दिखाया जाएगा।  छात्रों के लिए विशेष टूर और वर्कशॉप का आयोजन  यह पार्क न केवल दर्शनीय होगा बल्कि शैक्षिक भी होगा। स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए विशेष टूर और वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन पर जागरूकता फैलाई जाएगी। साथ ही, यह साबित करेगा कि कचरा बोझ नहीं, बल्कि संसाधन हो सकता है। पार्क में होंगी आधुनिक सुविधाएं अयोध्या में राम मंदिर, हनुमान गढ़ी, कनक भवन जैसे धार्मिक स्थलों के बाद लव-कुश पार्क पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनेगा। रामायण की कथाओं से जुड़े श्रद्धालु यहां आकर न केवल आध्यात्मिक अनुभव करेंगे बल्कि पर्यावरण अनुकूल विकास का भी साक्षात्कार करेंगे। पार्क में वॉकवे, गार्डन, बैठने की व्यवस्था, रोशनी और सिक्योरिटी की आधुनिक सुविधाएं होंगी। राम भक्तों व पर्यटकों के लिए यह नया केंद्र बनेगा यह परियोजना सार्वजनिक कला, संस्कृति और सतत विकास का अनूठा संगम साबित होगी। आज के समय में जब प्लास्टिक और कचरे की समस्या बढ़ रही है, अयोध्या जैसे पवित्र शहर से 'कचरे से कला' का संदेश पूरे देश को प्रेरित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के पार्क न केवल पर्यटन को बढ़ाते हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। नगर निगम के मुताबिक निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा। पूरा पार्क पर्यावरण अनुकूल सामग्री से बनाया जाएगा। डिजाइन में रामायण की पारंपरिक शैली को आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ा गया है। लव-कुश पार्क अयोध्या को न केवल धार्मिक नगरी के रूप में बल्कि सांस्कृतिक और पर्यावरणीय उत्कृष्टता का प्रतीक भी बनाएगा। राम भक्तों, पर्यटकों, कलाकारों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह नया केंद्र बनेगा, जो 'कचरे से कला' का जादू दिखाते हुए भगवान राम की नगरी की गरिमा को और बढ़ाएगा।

Heatwave से परेशान लोगों को राहत, IMD ने बताया कब और कहां होगी बारिश

नई दिल्ली इस समय पूरा उत्तर और मध्य भारत भीषण लू और टेम्परेचर का टॉर्चर झेल रहा है और फिलहाल इससे राहत मिलने के आसार दिखाई नदीं दे रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम पूर्वानुमानों के मुताबिक, उत्तर, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अगले 7 दिनों तक लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है। हालांकि, IMD ने इसी बीच मॉनसून पर बड़ी खुशखबरी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो-तीन दिन में मॉनसून भारत में यानी केरल तट पर दस्तक दे सकता है। इसके लिए अनुकूल मौसमी स्थितियां बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने ताजा बुलेटिन में कहा है कि अगले 2 से 3 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व तथा पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान, असम, मेघालय, लक्षद्वीप, अरुणाचल प्रदेश, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक तथा उत्तर आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। दिल्ली में पिछले 14 सालों सबसे गर्म रात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार (25 मई) को न्यूनतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य तापमान से 5.7 डिग्री अधिक है और लगभग 14 वर्षों में मई महीने की सबसे गर्म रात दर्ज की गई। IMD के अनुसार, इस महीने में न्यूनतम तापमान मई के महीने में इससे पूर्व आखिरी बार 26 मई, 2012 को न्यूनतम तापमान इससे अधिक 32.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। IMD के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में मई महीने की शुरुआत में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई थी, जब इस साल 21 मई को न्यूनतम तापमान 31.9 डिग्री सेल्सियस था। सोमवार को दिल्ली में आंधी-बरिश आईएमडी के अनुसार, पालम में न्यूनतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 3.4 डिग्री अधिक है, लोदी रोड में न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक है। वहीं, रिज में यह 30.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 4.4 डिग्री अधिक है और आयानगर में यह 32 डिग्री सेल्सियस बना रहा जो सामान्य से 5.3 डिग्री अधिक है। IMD के एक अधिकारी ने कहा, ''सफदरजंग, लोदी रोड और आयानगर में गर्म रात की स्थिति दर्ज की गई है।'' IMD ने 25 मई को शाम के समय बहुत हल्की बारिश या धूल भरी आंधी चलने की संभावना जताई है, जिससे मामूली राहत मिल सकती है। IMD का येलो अलर्ट आईएमडी के अनुसार, गर्म रात तब घोषित की जाती है जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहता है और न्यूनतम तापमान में सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस से लेकर 6.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होती है। आईएमडी ने सोमवार को लू चलने की आशंका जताते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया है जिसके कारण अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में भी अगले 3-5 दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी। IMD के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में विदर्भ के ब्रह्मपुरी में सबसे अधिक 47.1°C तापमान दर्ज किया गया। हालांकि, मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि 29 मई से अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। गर्मी के बीच राहत की खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आगे बढ़ रहा है। 24 मई तक मॉनसून की उत्तरी सीमा 7°N/60°E से लेकर 17°N/95°E तक पहुँच चुकी है। अगले 2-3 दिनों में इसके दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं। भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट एक तरफ जहाँ उत्तर भारत तप रहा है, वहीं पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटों में असम और मेघालय में अत्यधिक भारी वर्षा (21 सेमी या अधिक) दर्ज की गई है। इसके अलावा तटीय कर्नाटक में भी भारी से बहुत भारी बारिश हुई है। IMD ने केरल, माहे, लक्षद्वीप, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के लिए भी अगले 4-5 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने कहा है कि एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू और आसपास के क्षेत्रों पर समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में बना हुआ है।इसकी वजह से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का अनुमान जताया है। पंजाब-हरियाणा से लेकर पश्चिमी यूपी तक बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, 28 मई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, इससे कुछ राहत मिल सकती है। IMD के मुताबिक, 25 से 27 मई के दौरान उप-दहमालयी पश्चिम बंगाल, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा 25 मई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी वर्षा होने की भी संभावना है। इसके अलावा 28 से 30 मई के बीच, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गरज-बिजली के साथ मध्यम स्तर की बारिश होने का अनुमान है।

ग्रीष्मकाल में पानी की किल्लत रोकने सक्रिय हुआ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

ग्रीष्म काल में स्वच्छ और नियमित पेयजल पहुंचाने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सतर्क  दूरस्थ गांवों तक निर्बाध पेयजल पहुंचाने जुटी पीएचई की टीमें तकनीकी कर्मचारियों और हैंडपंप मैकेनिकों को खराब हैंडपंपों, पाइपलाइन संबंधी समस्याओं व पेयजल व्यवस्था में आने वाली बाधाओं के तत्काल निराकरण के निर्देश रायपुर  भीषण गर्मी, उमस और लगातार बढ़ते जल संकट के बीच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम ग्रामीण क्षेत्रों में सुचारू पेयजल व्यवस्था बनाए रखने पूरी प्रतिबद्धता के साथ मैदान में डटी हुई है। ग्रीष्म काल में ग्रामीणों तक स्वच्छ और नियमित पेयजल पहुंचाने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम सतर्कता से काम कर रही है। वनांचलों और दूरस्थ गांवों तक निर्बाध पेयजल पहुंचाने विभाग तत्परता से काम कर रहा है। राज्य शासन ने विभाग के सभी तकनीकी कर्मचारियों और हैंडपंप मैकेनिकों को खराब हैंडपंपों, पाइपलाइन संबंधी समस्याओं एवं पेयजल व्यवस्था में आने वाली बाधाओं के तत्काल निराकरण के निर्देश दिए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर विभागीय अधिकारी लगातार ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर पेयजल योजनाओं की जमीनी स्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं। विभाग की टीम भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीणों को पानी की समस्या से राहत दिलाने दिन-रात काम कर रही है। विभाग द्वारा दूरस्थ क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक शुद्ध और सुरक्षित पेयजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। ग्रीष्म काल में भी हर घर तक स्वच्छ, सुरक्षित और नियमित पेयजल की उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभागीय टीमें सक्रियता से काम कर रही हैं।   विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं के नियमित संचालन के साथ-साथ ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। लोगों से आवश्यकता न होने पर नल की टोटी बंद रखने, पानी का दुरुपयोग रोकने और जल बचाने की अपील की जा रही है। विभाग द्वारा यह संदेश भी दिया जा रहा है कि पानी केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य संसाधन है, इसलिए इसका संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम भ्रमण के दौरान ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के सदस्यों के साथ बैठक कर योजनाओं के सतत संचालन में जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। ग्रामीणों को जल कर के संग्रहण के महत्व से अवगत कराया जा रहा है, ताकि योजनाओं का रखरखाव एवं संचालन लंबे समय तक निर्बाध रूप से जारी रखा जा सके। विभाग द्वारा प्रत्येक घर के नल कनेक्शन के पास सोख्ता गड्ढा के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण के साथ स्वच्छता भी सुनिश्चित हो सके।

भोजशाला को मिलेगा नया स्वरूप, CM ने सरस्वती लोक निर्माण की घोषणा की

धार  स्‍थानीय मोतीबाग चौक में आयोजित विशाल आमसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोजशाला केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि मालवा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है. उन्होंने ऐलान किया कि आने वाले समय में भोजशाला परिसर को विकसित कर यहां ‘सरस्वती लोक’ बनाया जाएगा. सीएम ने कहा कि राजा भोज की परंपरा, विद्या और संस्कृति को दुनिया में नई पहचान दिलाने का समय आ गया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में वर्षों पुराना मुद्दा समाधान की दिशा में पहुंचा है और हाईकोर्ट का फैसला भी उसी परिवर्तन का परिणाम है. मुख्यमंत्री ने मंच से यह भी कहा कि धार का गौरव अब नई ऊंचाइयों तक जाएगा।  मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि पहले भोजशाला के नाम पर तनाव और दंगे का माहौल बनाया जाता था, लेकिन अब विकास और विरासत संरक्षण की राजनीति हो रही है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को सम्मान मिला है. सीएम ने धार में चल रहे विकास कार्यों, पीएम मित्रा पार्क, जल संरक्षण योजनाओं और रोजगार के नए अवसरों का जिक्र करते हुए कहा कि धार अब तेजी से विकसित होने वाला जिला बनेगा. उन्होंने यह भी कहा कि राजा भोज और विक्रमादित्य की भूमि होने के कारण मालवा की सांस्कृतिक पहचान पूरे देश के लिए गौरव का विषय है. मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान सभा में मौजूद लोगों ने कई बार जयकारे लगाए और भोजशाला को लेकर किए गए ऐलान का स्वागत किया।  भोजशाला को बताया मालवा की धरोहर मुख्यमंत्री ने कहा कि भोजशाला का नाम आते ही राजा भोज की विद्वता और मालवा की समृद्ध संस्कृति याद आती है. उन्होंने कहा कि यह केवल इतिहास नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की पहचान है. सीएम ने कहा कि धार की धरती ने दुनिया को ज्ञान और संस्कृति दी है. ऐसे में भोजशाला का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है।  ‘सरस्वती लोक’ बनाने का ऐलान मोहन यादव ने मंच से घोषणा की कि भोजशाला क्षेत्र को विकसित कर ‘सरस्वती लोक’ बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह परियोजना मालवा की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देगी. सरकार इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम करेगी. इससे पर्यटन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।  कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा- पहले समाज को बांटने की कोशिश होती थी मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पहले ऐसे मुद्दों पर समाज को बांटने की कोशिश होती थी. उन्होंने कहा कि आज विकास और विरासत संरक्षण साथ-साथ चल रहा है. हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह लंबे संघर्ष का परिणाम है।  पीएम मोदी का किया अभिनंदन सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सांस्कृतिक धरोहरों को सम्मान दिलाने का काम किया है. उन्होंने पीएम मित्रा पार्क का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपना जन्मदिन भी धार में मनाया था. इससे धार और मालवा को राष्ट्रीय पहचान मिली है।  जल संरक्षण पर भी बड़ा बयान मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण के मामले में देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है. उन्होंने बताया कि राज्य में ढाई हजार करोड़ रुपये से जल संरक्षण के काम किए जा रहे हैं. 105 अमृत सरोवरों का निर्माण भी कराया गया है. इससे गांवों और किसानों को लाभ मिलेगा।  करोड़ों के विकास कार्यों का लोकार्पण धार दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में धार में सड़क, उद्योग, सिंचाई और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव दिखाई देंगे. पीएम मित्रा पार्क के जरिए युवाओं को रोजगार मिलेगा और निवेश बढ़ेगा. सीएम ने अपने भाषण में राजा भोज और सम्राट विक्रमादित्य की वीरता और शासन का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि मालवा की यह ऐतिहासिक विरासत पूरे देश के लिए प्रेरणा है. राजा भोज का नाम आज भी सम्मान और गौरव के साथ लिया जाता है।