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MP सरकार में बदलाव की आहट, किन मंत्रियों पर गिरेगी गाज और कौन बनेगा नया चेहरा?

भोपाल  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) की तस्वीर बदलने जा रही है। जून के अंत तक कैबिनेट में बड़ा फेरबदल (Major Cabinet Reshuffle) होना लगभग तय है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कम से कम 5-6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है तो 7-8 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 2023 में मोहन यादव के नेतृत्व में बनी सरकार के कैबिनेट में पहली बार बदलाव होने जा रहा है। कैबिनेट में इस समय मोहन यादव समेत कुल 31 सदस्य हैं। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) कई बार दिल्ली पहुंचे हैं और शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकातों के दौरान कैबिनेट में फेरबदल की रूपरेखा पर सहमति बन चुकी है। 19 मई को मोहन यादव की मुलाकात जगदलपुर में गृहमंत्री अमित शाह के साथ हुई थी। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय भी बुलाए गए थे। मुख्यमंत्री की दिल्ली में भी शाह से मुलाकात हुई। वह पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से भी मिले। सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में कैबिनेट के नए स्वरूप पर विस्तार से बातचीत हुई है। बताया जा रहा है कि 20 से 30 जून के बीच कभी भी पुराने मंत्रियों से इस्तीफा लिया जा सकता है और इसके तुरंत बाद शपथग्रहण होगा। कैलाश विजयवर्गीय का क्या होगा? कैबिनेट फेरबदल में जिन मंत्रियों पर सबसे ज्यादा नजरे हैं उनमें कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हैं। कैबिनेट में सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल कैलाश विजयवर्गीय को लेकर अटकलें हैं कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है। वहीं प्रह्लाद सिंह को केंद्रीय संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। बताया जाता है कि वरिष्ठता की वजह से ये मंत्री कैबिनेट में सहज नहीं हैं। भाजपा के पूर्व महासचिव रह चुके कैलाश विजयवर्गीय को जब विधनसभा चुनाव में उतारा गया था तो उन्हें संभावित मुख्यमंत्रियों की सूची में भी प्रमुखता से गिना जा रहा था, लेकिन बाजी मोहन यादव की लगी जो कहीं रेस में नहीं दिख रहे थे। और किन मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी मोहन यादव कैबिनेट से जिन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, उनमें सबसे प्रबल नाम विजय शाह का है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री को लेकर पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार तीखी टिप्पणियां की हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, पंचायती राज्य मंत्री राधा सिंह, शहरी प्रबंधन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी, वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार शामिल हो सकते हैं। नए चेहरों को मिल सकता है मौका कैबिनेट विस्तार में कई नए विधायकों और नेताओं को अवसर मिलने की चर्चा है. पार्टी क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए नामों का चयन कर सकती है. सागर और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से कुछ नेताओं के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. इसके अलावा महिला, युवा और आदिवासी वर्ग को बेहतर प्रतिनिधित्व देने पर भी भाजपा विचार कर सकती है. माना जा रहा है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाने के लिए नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।  प्रदर्शन के आधार पर होगा फैसला सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की है. इसी मूल्यांकन के आधार पर मंत्रिमंडल में बदलाव का फैसला लिया जा सकता है. पार्टी का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले सरकार की कार्यक्षमता और जनसंपर्क को और मजबूत बनाना है. ऐसे में जून का अंतिम सप्ताह मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए काफी अहम साबित हो सकता है, क्योंकि कैबिनेट फेरबदल से कई नए राजनीतिक संदेश और समीकरण सामने आने की संभावना है।  किन्हें मंत्री बनाए जाने की चर्चा सागर जिले से आने वाले विधायकों शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को पद मिलना लगभग तय माना जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले प्रमुराम चौधरी को भी मंत्री बनाया जा सकता है। पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा कुछ नए और युवा चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है। महिला और आदिवासी समुदाय को भी साधने की कोशिश होगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि पुराने कुछ मंत्रियों को हटाकर जहां नए चेहरों को जगह दी जाएगी, वहीं विभागों में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल होगा। कुछ मंत्रियों से मौजूदा विभाग लेकर नए मंत्रालय दिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों के कामकाज की गहन समीक्षा की है और इसी आधार पर बड़े और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

खुल सकता है होर्मुज का रास्ता, तेल बाजार में खुशी की लहर; डेढ़ महीने के निचले स्तर पर पहुंचा क्रूड

नई दिल्‍ली  खुशखबरी! ईंधन का संकट जल्‍द ही खत्‍म होने वाला है. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की संभावना तेजी से बढ़ रही है और माना जा रहा है कि जल्‍द ही दोनों किसी नतीजे पर पहुंचने वाले हैं. समझौते की यह खुशी कच्‍चे तेल की कीमतों पर भी दिख रही है, जो शनिवार सुबह फिसलकर 6 सप्‍ताह यानी डेढ़ महीने के निचले स्‍तर पर पहुंच गया है. माना जा रहा है कि अब होर्मुज का रास्‍ता दोबारा खोला जा सकता है और ईंधन से लदे भारतीय जहाज सरपट भागने लगेंगे. इससे देश में पैदा हुआ क्रूड व गैस का संकट भी जल्‍द ही खत्‍म हो जाएगा।  ग्‍लोबल मार्केट में कच्‍चे तेल की कीमतों में आज 2 फीसदी से भी ज्‍यादा की गिरावट दिख रही है. डब्‍ल्‍यूटीआई का भाव फिसलहर 87.36 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी 91.12 डॉलर प्रति बैरल के भाव चल रही हैं. यह 6 सप्‍ताह का सबसे निचला स्‍तर है. अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ शांति समझौते पर अंतिम बातचीत चल रही है. हालांकि, ईरान के विदेशी मंत्री का अब भी कहना है कि कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है. हालांकि, अमेरिका के तेवर देखकर लगता है कि वह ईरान के साथ न्‍यूक्लियर मुद्दे पर दोबारा नए सिरे से बातचीत शुरू कर सकता है।  फिर सस्‍ता हो जाएगा क्रूड ग्‍लोबल एनर्जी एजेंसियों का कहना है कि होर्मुज के रास्‍ते में सैकड़ों जहाज खड़े-खड़े इंतजार कर रहे हैं. इस पर ईरान और अमेरिका दोनों ही अपना दावा ठोक रहे हैं और किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दे रहे. अगर दोनों में समझौता होता है और होर्मुज से दोबारा कारोबार शुरू होता है तो जल्‍द ही कच्‍चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे जा सकती हैं. फिलहाल इस गतिरोध की वजह से ग्‍लोबल मार्केट में क्रूड का भंडार करीब 2 करोड़ बैरल नीचे आ चुका है. विश्‍व बैंक, आईएमएफ सहित तमाम ग्‍लोबल एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज संकट लंबा खिंचा तो गर्मी के महीने में ईंधन का संकट गहरा सकता है।  भारत को सबसे बड़ी राहत होर्मुज जलडमरूमध्‍य का रास्‍ता खुलता है तो सबसे ज्‍यादा लाभ भारत को होगा. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्‍सा ईंधन इसी रास्‍ते से मंगाता है. जहाजरानी मंत्रालय में निदेशक ओपेश कुमार शर्मा का कहना है कि भारत के लिए होर्मुज कितना महत्‍वपूर्ण इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हम अपनी कुल जरूरत का करीब 30 फीसदी क्रूड ऑयल इसी रास्‍ते से मंगाते हैं. इतना ही नहीं, कुल एलपीजी आयात का 70 फीसदी भी इसी रास्‍ते से आता है. लिहाजा अगर शांति वार्ता कामयाब होती है और होर्मुज खुलता है तो भारतीय जहाजों के लिए यह सबसे बड़ी राहत होगी।  होर्मुज में अभी हमारे कितने जहाज ओपेश शर्मा का कहना है कि होर्मुज से अभी भारतीय झंडे वाले 13 जहाजों को ऑपरेट किया जा रहा है. इसमें एक एलपीजी टैंकर से लदा जहाज है, जबकि 5 जहाजों पर कच्‍चे तेल के टैंकर लदे हुए हैं. एक शिप रसायनों से भरा है, जिसका इस्‍तेमाल यूरिया व अन्‍य उर्वरक बनाने में किया जाता है, जबकि 3 कंटेनर लादने वाले शिप हैं और 2 जहाज बल्‍क कैरियर जबकि एक ड्रेगर के रूप में इस रास्‍ते पर खड़ा अपनी बारी का इंतजार कर रहा है. उन्‍होंने बताया कि 2.70 लाख मीट्रिक टन कच्‍चा तेल लादे एक टैंकर निसोस केरोस ने 25-26 मई को सफलतापूर्वक होर्मुज का रास्‍ता पार कर लिया है और इसके 3 जून तक विशाखापत्‍तन बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है। 

MP का डिंडौरी बना जल संरक्षण का मॉडल, 55 जिलों को पछाड़ देश में हासिल किया दूसरा स्थान

 डिंडौरी मध्य प्रदेश का आदिवासी बहुल डिंडौरी जिला जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है. राष्ट्रीय स्तर पर जारी आंकड़ों के अनुसार डिंडौरी ने जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. साथ ही मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों में प्रथम स्थान हासिल कर जिले ने प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।  ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें जल संरक्षण का महत्व समझाया। उन्हें बताया गया कि पानी रोकने से ही बचेगा और फिर से उपलब्ध होगा। इस समझ के बाद, लोगों ने स्वयं प्रेरित होकर अपने घरों में जल संचय के कार्य शुरू कर दिए हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने दो गांवों का दौरा कर जमीनी हकीकत जानी। बजाग जनपद पंचायत की सिंहपुर ग्राम पंचायत में लगभग साढ़े तीन सौ मकान हैं। यहां हर घर में सोखता पिट और छतों से बारिश के पानी को रोकने के लिए पाइप के जरिए वाटर हार्वेस्टिंग की तैयारी की गई है। जिला प्रशासन की इस पहल को देशभर में जनभागीदारी आधारित जल प्रबंधन के प्रेरणादायक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है. डिंडौरी की यह उपलब्धि न केवल जल संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी मानी जा रही है. डिंडौरी जिले में शासन के निर्देशानुसार संचालित 'जल गंगा संवर्धन अभियान' एवं 'जन भागीदारी अभियान' के तहत जल संरक्षण और भूजल संवर्धन की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं. जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कुओं, नदियों, नालों, हैंडपंपों, ट्यूबवेल, बावड़ियों और तालाबों के आसपास व्यापक जल संरक्षण संरचनाएं विकसित की गई हैं, जिससे वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर बढ़ाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।  गांव की महिला मेकिन बाई ने बताया कि पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन सरपंच दीपचंद पूषाम और अधिकारियों ने उन्हें जल का महत्व समझाया। इसके बाद उन्होंने स्वयं मेहनत कर और थोड़ा पैसा खर्च कर पाइप खरीदे तथा घर के सामने सोखता पिट बनाया, जिसमें अब निस्तार का पानी जा रहा है। जमुना खैरवार ने बताया कि वे पहले पानी का महत्व नहीं जानते थे और सोचते थे कि पानी उपलब्ध कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। लेकिन सरपंच और अधिकारियों द्वारा यह समझाने पर कि थोड़ी मेहनत से पानी कैसे बचाया जा सकता है और धरती को रिचार्ज किया जा सकता है। उन्होंने अपने घर में दो सोखता पिट बनवाए। अब वे गांव में जाकर अन्य लोगों को भी जागरूक कर रही हैं ताकि बारिश का पानी रोका जा सके और आने वाली पीढ़ी के लिए पानी बच सके। आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर ने बताया कि 'मां की बगिया' योजना के तहत पांच हितग्राही हैं। एक बगिया में 15 नींबू और 35 आम के पेड़ लगाए गए हैं, जिन्हें टपक पद्धति (ड्रिप इरिगेशन) से पानी दिया जा रहा है। पेड़ों को टपक पद्धति से पानी देना का काम शुरू किया आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर कहती है कि ‘मां की बगिया’ के पांच हितग्राही है। एक बगिया में 15 नींबू और 35,आम के पेड़ लगवाए है। पानी को बचाने और पेड़ो को सुरक्षित रखने के लिए हितग्राहियों को जागरूक किया। इसके बाद उनको टपकना, हांडी और स्लाइन की बोतल से पेड़ो को पानी देने के बारे में बताया। अब हितग्राही स्वयं पेड़ों की सुरक्षा और सिंचाई कर रहे हैं। जनभागीदारी से जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, अब पौधरोपण की तैयारी जनपद सदस्य धर्म सिंह धुर्वे, उपसरपंच रघु परस्ते बताते है कि गांव में चार तालाब, 12 स्टॉप डैम पहले से है। ग्रामीणों की मदद से इनका जीर्णोद्धार कराया है। 4पहाड़ियों मद लगभग साढ़े तीन सौ कंट्रूल ट्रेंच खुदवाए है। हैंड पंप के पास सोखता पिट और लीज फिट बनवाया गया ताकि निस्तार का पानी सीधे जमीन के नीचे जाए। अब बारिश में पहाड़ियों में भी जनभागीदारी से ही पौधरोपण करवाना है। पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी अब स्वयं हमको उठानी पड़ेगी। ग्रामीण खुद के खर्चे से बना रहे जल संरचनाएं, टीम कर रही निगरानी अमरपुर जनपद के भाखा मॉल ग्राम पंचायत में लगभग 928 आवास है। 55 ग्रामीणों ने रेन वाटर सोखता गढ्ढा, 262 कंट्रूल ट्रेंच, 8 तालाबों का जीर्णोद्धार, 13 लीज फिट, 7 हितग्राहियों ने ‘एक बगिया मां’ के नाम पर आम नीबू के पौधे लगाकर टपकना, हांडी और स्लाइन बोतल के जरिए पौधों को पानी दे रहे है। एसिस्टेंट इंजीनियर प्रियंका ने बताया कि शुरुआती दौर में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष नहीं समझ रहे थे। चौपाल लगाकर जल के महत्व को समझाया और उसे धरती के नीचे समाहित करने की नसीहत दी। अब धीरे धीरे ग्रामीण अपनी इच्छा से काम कर रहे हैं। भौगोलिक स्थिति ऐसी,वाटर टेबिल कम ,17 प्रतिशत सिंचित रकबा कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि जिले की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है, लोग पठार और छोटे छोटे टोले में रहते है। जल शक्ति मंत्रालय ने वीडियो कांफ्रेंस की बैठक में मार्च के महीने में जन सहयोग से जल संरचनाओं का निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए निर्देशित किया था। जिले के अधिकारियों की बैठक कर प्लानिंग की। इसके बाद गांव गांव जाकर पानी चौपाल, रात्रि चौपाल लगाकर प्रेरित किया। इस कार्य में सभी विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों का सहयोग मिला है। आंध्र प्रदेश का अल्लूरी सीताराम राजू जिला 6 लाख 89 हजार 113 जल संरचनाएं बनाकर पहले स्थान पर है। जबकि डिंडौरी दूसरे स्थान पर है। जल संरचनाओं के निर्माण से होगा फायदा, बड़ी संरचना बने तो बेहतर चंद्र विजय कालेज में भूगोल की प्रोफेसर डॉक्टर रश्मि गौतम कहती है कि जिले की भौगोलिक स्थिति पठारी और उबड़ खाबड़ है। पथरीला होने के चलते पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाता है। छोटी छोटी जल संरचनाओं के निर्माण से कुछ फायदा तो होगा। बारिश का पानी सीधे नदी नालों में न जाकर रुक रुक कर जाएगा। हालांकि जिले में बड़ी संरचना बनने पर ही पानी की समस्या से पूर्णत निजात मिल सकेगी। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित अभियान के अंतर्गत पहाड़ी एवं बंजर भूमि पर कंटूर ट्रेंच निर्माण, नदी-नालों में बोरी बंधान, ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर सोखता टैंक तथा शासकीय और अर्धशासकीय भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग … Read more

10 जून की मुख्यमंत्री परिषद बैठक से पहले बड़ा संकेत, मोदी सरकार में हो सकता है फेरबदल

नई दिल्ली मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले विस्तार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। नौ जून को इस कार्यकाल के दो साल पूरा होने और 10 जून को राजगशासित दलों के मुख्यमंत्री परिषद की बैठक के बाद पहला मंत्रिमंडल विस्तार होगा, उसके बाद भाजपा के केंद्रीय संगठन की नई टीम बनेगी। हाल ही में दिल्ली के अध्यक्ष बनाए गए हर्ष मल्होत्रा और चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पंकज चौधरी संगठन पर पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिए मंत्री पद से इस्तीफा देंगे। सूत्रों ने बताया कि विस्तार के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम पर साथ-साथ मंथन हो रहा है। संकेत हैं कि मुख्यमंत्री परिषद की बैठक के बाद 20 जून से पहले मंत्रिमंडल विस्तार को अमली जामा पहनाया जाएगा, इसके तत्काल बाद केंद्रीय संगठन की नई टीम घोषित कर दी जाएगी। संगठन को मजबूत करने के लिए मंत्रियों के इस्तीफे संभव राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, हाल ही में दिल्ली प्रदेश इकाई की कमान संभालने वाले हर्ष मल्होत्रा और आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्य उत्तर प्रदेश के संगठन प्रमुख पंकज चौधरी संगठनात्मक कार्यों पर अपना पूरा ध्यान लगाने के लिए जल्द ही केंद्रीय मंत्री पद से त्यागपत्र दे सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने के साथ-साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई सांगठनिक टीम के गठन पर भी शीर्ष नेतृत्व में गहन विचार-विमर्श चल रहा है। संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद 20 जून से पहले इस कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप दे दिया जाएगा, जिसके तुरंत बाद राष्ट्रीय संगठन के नए पदाधिकारियों की सूची भी जारी कर दी जाएगी। आगामी विधानसभा और आम चुनावों को देखते हुए गहन मंथन इस बार सरकार और संगठन दोनों के स्तर पर बनने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई टीम में आगामी लोकसभा चुनाव तक किसी बड़े बदलाव की गुंजाइश नहीं होगी। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी को अगले वर्ष के शुरुआती महीनों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के चुनावी दंगल में उतरना है, जबकि साल के अंत में गुजरात और मणिपुर जैसे राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसी स्थिति में सरकार और संगठन की नई टीमों के जरिए देश के सभी भौगोलिक क्षेत्रों और सामाजिक समीकरणों के बीच एक सटीक संतुलन साधना बेहद जरूरी है, यही वजह है कि दोनों सूचियों को अंतिम रूप देने से पहले शीर्ष स्तर पर काफी बारीकी से समीक्षा की जा रही है। ​हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी देंगे मंत्री पद से इस्तीफा ! इस बड़े फेरबदल और विस्तार के बीच सरकार के 2 कद्दावर मंत्रियों के इस्तीफे की खबर सबसे ज्यादा चर्चा में है। हाल ही में दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष बनाए गए हर्ष मल्होत्रा और उत्तर प्रदेश बीजेपी के नवनियुक्त अध्यक्ष पंकज चौधरी जल्द ही केंद्रीय मंत्री पद से अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंपेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 'एक व्यक्ति एक पद' के सिद्धांत के तहत इन दोनों नेताओं को पूरी तरह से चुनावी राज्यों और संगठन के काम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया है। इन दोनों इस्तीफों के बाद खाली हो रहे पदों और नए मंत्रियों को शामिल करने को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के साथ मंथन का दौर अंतिम चरण में पहुंच गया है। ​आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए साधा जाएगा सामाजिक संतुलन  बीजेपी के केंद्रीय संगठन और मंत्रिमंडल में होने जा रही इस बड़ी माथापच्ची के पीछे का मुख्य कारण आगामी राज्यों के चुनाव हैं। पार्टी को अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात और मणिपुर जैसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनावों का सामना करना है। इसके अतिरिक्त हाल ही में संपन्न हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद बंगाल, असम, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली में हाजिरी लगाई है। सरकार और संगठन की इस नई टीम के जरिए इन सभी राज्यों में क्षेत्रीय, सामाजिक और जातीय समीकरणों को पूरी तरह दुरुस्त करने का खाका खींचा गया है, ताकि आगामी आम चुनावों तक टीम में बार-बार बदलाव की जरूरत न पड़े। शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्रियों के बीच बैठकों का दौर जारी सत्ता और संगठन को नया रूप देने के लिए ही हालिया पांच राज्यों के चुनावी परिणाम घोषित होने के बाद से विभिन्न प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की केंद्रीय आलाकमान के साथ ताबड़तोड़ बैठकें हो रही हैं। नतीजों के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल, असम, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने देश की राजधानी पहुंचकर केंद्रीय नेताओं से संवाद किया है। इसके साथ ही, खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी लगातार राज्यों के दौरों पर हैं, जहां वे ओडिशा और कर्नाटक के संगठनात्मक दौरों को पूरा करने के बाद अब उत्तराखंड के प्रवास पर रणनीति बनाने में जुटे हैं। इसलिए ज्यादा माथापच्ची केंद्रीय संगठन की नई टीम और मंत्रिमंडल विस्तार से बनने वाली पीएम मोदी की नई टीम में आगामी आम चुनाव तक कोई बदलाव नहीं होना है। इसके अतिरिक्त पार्टी को अगले साल की शुरुआत में यूपी, उत्तराखंड, पंजाब और अंत में गुजरात और मणिपुर जैसे अहम राज्यों में विधानसभा चुनाव का सामना करना है। ऐसे में सरकार की नई टीम के जरिए सभी राज्यों से संतुलन बैठाना होगा। यही कारण है कि दोनों ही सूची के लिए गहन माथापच्ची हो रही है। मुख्यमंत्रियों के साथ ताबड़तोड़ बैठक दोनों स्तर पर नई टीम पर विचारविमर्श के लिए ही पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक हुई है। नतीजे के बाद बंगाल, असम, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने दिल्ली में हाजिरी लगाई है। खुद पार्टी अध्यक्ष ओडिशा, कर्नाटक के बाद अब उत्तराखंड के दौरे पर हैं। 

केंद्र सरकार के 12 साल पर भाजपा का बड़ा प्लान, देशभर में जनता तक पहुंचाएगी उपलब्धियां

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाएगी. इस अभियान का थीम 'विश्वास, विकास और जनकल्याण के 12 वर्ष' है, जो 5 जून से 21 जून 2026 तक चलेगा।  पार्टी इसे अपने सबसे महत्वाकांक्षी आउटरीच कार्यक्रमों में से एक बता रही है. भाजपा के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, अभियान के दौरान जनसंपर्क अभियान, जनकल्याण शिविर, योग दिवस समारोह और पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया जाएगा. इन कार्यक्रमों के जरिए सरकार की प्रमुख योजनाओं और उपलब्धियों को आम जनता तक पहुंचाने का पार्टी लक्ष्य रख रही है।  इस अभियान के तहत कार्यकर्ता घर-घर जाकर योजनाओं की जानकारी देंगे. इसके तहत पार्टी जनकल्याण शिविर स्वास्थ्य, बीमा, पेंशन और अन्य कल्याणकारी सेवाओं के लिए शिविर लगाएगी. इसके अलावा इसी दौरान योग दिवस यानी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर बड़े आयोजन भी किए जाएंगे।  इसके अलावा,पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण और स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा. पार्टी ने सभी राज्यों में कार्यक्रमों के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया है. केंद्रीय मंत्री, सांसद और विधायक मैदान में उतरकर जनता से सीधा संवाद करेंगे।  भाजपा इस अभियान में मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों को हाइलाइट करेगी, जिनमें मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्गों में 60 फीसदी वृद्धि, 1.46 लाख किमी तक पहुंच शामिल है. साथ ही पार्टी का दावा है कि पिछले 12 साल में मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था दोगुनी हो गई है जिसके तहत , अर्थव्यवस्था 2 ट्रिलियन डॉलर से 4 ट्रिलियन डॉलर के पार हो गई है,इसके अलावा डिजिटल इंडिया ,UPI की वैश्विक नेतृत्व, आधार का व्यापक उपयोग जैसे बातों को भी जन जन तक पहुंचाने की बात है।  इसके अलावा पार्टी कल्याणकारी योजनाओं जिनमें उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, पीएम किसान, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत आदि को भी जन जन तक पहुंचाएगी पार्टी का दावा है कि ये 12 साल देश के 'प्रगति' की ओर बढ़ने के रहे हैं. यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब हाल ही में राज्य चुनावों में पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया है।  अप्रैल में पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में भाजपा की बड़ी जीत ने पार्टी के नेताओं का भी काफी मनोबल बढ़ाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में सरकार विकास एजेंडे पर जोर दे रही है. 9 जून को तीसरे कार्यकाल की पूर्णता पर भी विशेष कार्यक्रमों की तैयारी है।  विपक्षी दल इस अभियान को चुनावी रणनीति बता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे शासन की उपलब्धियों का सच्चा आकलन करार दे रही है. भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय नेतृत्व ने सभी प्रदेश इकाइयों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं।  पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह अभियान 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगा. देशभर के करोड़ों लाभार्थी इस अभियान के माध्यम से अपनी यात्रा की कहानियां भी साझा करेंगे।