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Mindy Kaling ने साझा किया तीसरी प्रेग्नेंसी का अनुभव, बोलीं- ‘इस बार सब कुछ ज्यादा सहज था’

लॉस एंजिल्स  हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और लेखिका मिंडी कैलिंग एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी तीसरी प्रेग्नेंसी और उस दौरान के अनुभव को लेकर बात की। मिंडी ने बताया कि यह समय उनके लिए आरामदायक दौर था। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक बेड रेस्ट पर रहना पड़ा, जिससे उन्हें खुद का समझने का अवसर मिला। मिंडी कैलिंग ने गिगली स्क्वाड पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान बताया, ''मेरी तीसरी प्रेग्नेंसी में डॉक्टरों ने मुझे लगभग छह हफ्तों तक पूरी तरह आराम करने की सलाह दी थी। इस दौरान मुझे ज्यादातर समय बिस्तर पर ही रहना पड़ा, जिससे मुझे खुद का ध्यान रखने का मौका मिला।'' बता दें कि मिंडी कैलिंग तीन बच्चों की मां है, कैथरीन, स्पेंसर, और एनी। एनी का जन्म फरवरी 2024 में हुआ था। अपने अनुभव को साझा करते हुए मिंडी कैलिंग ने कहा, ''बेड रेस्ट के दौरान भी मेरा काम पूरी तरह नहीं रुका। मैं घर से ही अपनी कई जरूरी मीटिंग्स और काम करती रहीं। मैं अक्सर बिस्तर पर लेटे-लेटे ही वीडियो कॉल के जरिए मीटिंग्स में शामिल होती थीं। इस दौरान मुझे महसूस हुआ कि जब कोई व्यक्ति मेडिकल कारण से आराम कर रहा हो, तो लोग इसे ज्यादा गंभीरता से लेते हैं, और यह मेरे लिए काम करने का एक सुविधाजनक तरीका बन गया।'' मिंडी ने कहा, ''इस दौरान मैं अक्सर पजामा पहनकर ही अपनी मीटिंग्स कर लेती थी। मुझे यह काफी आरामदायक लगता था और किसी भी तरह की औपचारिकता निभाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। मेरे लिए यह एक अलग तरह का अनुभव था।'' अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच संतुलन पर बात करते हुए मिंडी ने बताया, "मैं तीन बच्चों की मां हूं और इसके बावजूद अपने काम को पूरी जिम्मेदारी से संभालती हूं। मातृत्व मेरे जीवन का एक बड़ा हिस्सा है, लेकिन मैंने कभी अपने करियर को इससे पीछे नहीं जाने दिया।'' मिंडी कैलिंग ने आगे कहा, ''मुझे मशहूर वेब सीरीज 'यूफोरिया' बहुत पसंद है, लेकिन मैं खुद ऐसा शो नहीं लिख सकती, क्योंकि मेरी दुनिया मेरे अनुभव और लेखन शैली से काफी अलग है। इस शो में ड्रग्स, रिश्तों और जटिल भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया गया है। यह बेहद प्रभावशाली है, लेकिन मेरी अपनी लेखन शैली उससे अलग है।'' मिंडी ने कहा, "मैं हमेशा उन कहानियों की ओर आकर्षित होती हूं, जिनमें संघर्ष करने वाले और अंडरडॉग लोग होते हैं। ऐसे किरदार जो शुरुआत में कमजोर लगते हैं, लेकिन अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से आगे बढ़ते हैं।"

मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें तेज, 3 जून को DK शिवकुमार की ताजपोशी और कैबिनेट फेरबदल संभव

बेंगलुरु  कर्नाटक में चल रही सियासी उथल-पुथल के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि डीके शिवकुमार 3 जून यानी बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। उनके साथ 10 अन्य मंत्री भी शपथ ले सकते हैं। इसके बाद 18 जून के बाद कैबिनेट का विस्तार किया जा सकता है। राज्यसभा चुनाव होने के बाद कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार की संभावना है। कैबिनेट में भी बड़ा फेरबदल राज्य सरकार में चल रहे नेतृत्व परिवर्तन के बीच पार्टी नेतृत्व शनिवार को होने वाली कांग्रेस विधायक दल (CLP) की एक महत्वपूर्ण बैठक की तैयारी कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि डीके शिवकुमार की कैबिनेट में 50 फीसदी नए चेहरे हो कते हैं कर्नाटक विधान परिषद के चीफ विप सलीम अहमद ने शुक्रवार को कहा कि कैबिनेट के गठन, क्षेत्रीय एवं सामाजिक (जातीय) प्रतिनिधित्व और संभावित उप-मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति के संबंध में अंतिम निर्णय सीएलपी बैठक के बाद कांग्रेस आलाकमान की ओर से लिया जाएगा। शाम तक हो सकती है औपचारिक घोषणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला इस बैठक में शामिल होने वाल हैं। शाम तक मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा भी हो सकती है। इसके बाद शपथ ग्रहण की तारीख का भी ऐलान किया जा सकता है। बता दें कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया है और राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को इस्तीफा स्वीकार कर लिया। कम नहीं होगा सिद्धारमैया का दबदबा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायकों, पिछड़ा वर्ग समूहों और जमीनी कार्यकर्ताओं पर श्री सिद्दारमैया की मजबूत पकड़ सत्ता के औपचारिक हस्तांतरण के बाद भी राज्य कांग्रेस की दिशा तय करती रहेगी। कांग्रेस आलाकमान सिद्दारमैया के प्रभावशाली 'अहिंडा' सामाजिक गठबंधन (जिसमें अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित शामिल हैं) को छेड़ने से बच रहा है। यह गठबंधन कर्नाटक में पार्टी की चुनावी सफलता का मुख्य केंद्र रहा है। राज्यसभा का ऑफर क्यों नकारा? राज्यसभा की भूमिका स्वीकार करने के बजाय कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहने का सिद्दारमैया का फैसला साफ संकेत देता है कि वे राज्य के राजनीतिक मामलों में अपना सीधा प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं। कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब दो शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन बनाने का कठिन काम है – सरकार पर शिवकुमार का नियंत्रण और पार्टी के सामाजिक व संगठनात्मक आधार पर सिद्दारमैया का प्रभाव। इसके अलावा, कांग्रेस के रणनीतिकारों को डर है कि इस नेतृत्व परिवर्तन से पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों का समर्थन कमजोर हो सकता है, क्योंकि ये वर्ग वर्षों से सिद्दारमैया के साथ मजबूती से जुड़े रहे हैं। सीएम बनने के बाद शुरू होगी असली चुनौती जानकारों का मानना है कि डीके शिवकुमार की असली परीक्षा पद संभालने के बाद शुरू हो सकती है, जहां उन्हें प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा और साथ ही सिद्दारमैया के खेमे को कर्नाटक कांग्रेस के भीतर एक समानांतर राजनीतिक व्यवस्था के रूप में विकसित होने से रोकना होगा।

देश में नहीं थम रहा बाल विवाह, पश्चिम बंगाल टॉप पर; केरल और दिल्ली की सराहना

नई दिल्ली "पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब…" यह कहावत हम सब बचपन से सुनते आ रहे हैं, लेकिन आज भी हमारे देश की लाखों बेटियों के हाथों से किताबें छीनकर, उनके नाजुक कंधों पर घर-गृहस्थी का भारी बोझ लाद दिया जाता है। सपनों को पंख लगाने की उम्र में उन्हें शादी के मंडप में धकेल दिया जाता है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) की ताजा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट 2024 के विधिक और सांख्यिकीय आंकड़े बताते हैं कि तमाम कड़े कानूनों और जागरूकता अभियानों के बावजूद समाज से बाल विवाह (Child Marriage) का यह कूट डंक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हर चौथी लड़की की शादी 21 से पहले देश में महिलाओं के विवाह की मौजूदा स्थिति को लेकर जारी हुए आंकड़े समाज की सोच पर कूट सवाल खड़े करते हैं। साल 2024 में भारत में जितनी भी महिलाओं की शादियां हुईं, उनका सांख्यिकीय गणित कुछ इस प्रकार है:     18 साल से कम (नाबालिग): 2.1% लड़कियां ऐसी थीं जिनकी विधिक उम्र पूरी होने से पहले ही शादी कर दी गई।     18 से 20 साल के बीच: 24.5% लड़कियों का विवाह इस उम्र में हुआ।     21 वर्ष या उससे अधिक: राहत की बात है कि 73.5% महिलाओं की शादी 21 साल के बाद हुई।     चौंकाने वाला सच: देश में आज भी हर चार में से एक महिला (करीब 26.6%) की शादी विधिक रूप से परिपक्व होने यानी 21 साल की उम्र पूरी करने से पहले ही कर दी जा रही है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि अब भारत में महिलाओं की शादी की औसत उम्र बढ़कर 23.1 वर्ष हो गई है। बाल विवाह में पश्चिम बंगाल टॉप पर अगर राज्यों के स्तर पर इस सामाजिक बुराई का कूट विश्लेषण करें, तो पूर्वी और मध्य भारत के हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं: बाल विवाह में पश्चिम बंगाल टॉप पर अगर राज्यों के स्तर पर इस सामाजिक बुराई का कूट विश्लेषण करें, तो पूर्वी और मध्य भारत के हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं: राज्य (States) बाल विवाह का प्रतिशत (18 साल से कम)** विधिक एवं कूट स्थिति (Current Status)** पश्चिम बंगाल 6.3% पूरे देश में शीर्ष (Top) स्थान पर, स्थिति सबसे गंभीर। झारखंड 4.9% देश में दूसरे स्थान पर, ग्रामीण इलाकों में दर अधिक। असम 2.8% पूर्वोत्तर राज्यों में सामाजिक सुधारों की गति धीमी। बिहार / ओडिशा 2.6% दोनों राज्यों में स्थिति समान रूप से चिंताजनक बनी हुई है। राजस्थान 2.4% ऐतिहासिक रूप से बदनाम यह राज्य अब राष्ट्रीय औसत के करीब आ रहा है। राष्ट्रीय औसत (2.1%) के बराबर और नीचे वाले राज्य गुजरात और मध्य प्रदेश: इन दोनों राज्यों में बाल विवाह का ग्राफ ठीक राष्ट्रीय औसत यानी 2.1% पर टिका है। दक्षिण और बड़े राज्य: तेलंगाना (1.8%), आंध्र प्रदेश (1.7%) और उत्तर प्रदेश (1.6%) की स्थिति राष्ट्रीय औसत से थोड़ी बेहतर है। पहाड़ी और औद्योगिक राज्य: उत्तराखंड में यह आंकड़ा 1.5%, जम्मू और कश्मीर में 1.2% और महाराष्ट्र में 1.0% दर्ज किया गया है।  दिल्ली और केरल ने पेश की मिसाल   इस स्याह तस्वीर के बीच देश के कुछ राज्यों ने कूट बदलाव की एक बेहद खूबसूरत और उम्मीद जगाने वाली मिसाल पेश की है: केरल: साक्षरता में अव्वल रहने वाले इस राज्य में बाल विवाह लगभग ना के बराबर यानी महज 0.04% रह गया है। दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली ने इस मोर्चे पर इतिहास रच दिया है। पूरे सर्वे के दौरान दिल्ली से बाल विवाह का एक भी मामला (0%) रिपोर्ट नहीं हुआ है। बेहतर प्रदर्शन: हिमाचल प्रदेश (0.4%), हरियाणा (0.7%), कर्नाटक व तमिलनाडु (0.8%) और पंजाब (0.9%) ने भी इस कुप्रथा को 1% से नीचे समेटने में विधिक सफलता पाई है।     ग्रामीण बनाम शहरी भारत   आमतौर पर माना जाता है कि शहरों में शिक्षा और जागरूकता के कारण बाल विवाह नहीं होते। राष्ट्रीय औसत भी यही कहता है कि ग्रामीण भारत में बाल विवाह 2.4% है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह महज 1.1% है। लेकिन पश्चिम बंगाल से आए आंकड़े समाजशास्त्रियों को चौंका रहे हैं। बंगाल के ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह की दर 5.9% है, जबकि वहां के शहरी इलाकों में यह ग्राफ बढ़कर 7.6% तक पहुंच गया है, जो कि देश के शहरी औसत से सात गुना ज्यादा है। इसके विपरीत, झारखंड के ग्रामीण इलाकों में यह दर 5.8% है।  स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता पर असर स्वास्थ्य और विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बेटियों के जीवन के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है। शिक्षा पर ब्रेक: कम उम्र में शादी होने की वजह से लड़कियों को बीच में ही स्कूल-कॉलेज छोड़ना पड़ता है। स्वास्थ्य को खतरा: विधिक रूप से शारीरिक परिपक्वता आने से पहले ही वे गर्भवती हो जाती हैं, जिससे मातृ मृत्यु दर (MMR) और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संबंधी कूट खतरे बढ़ जाते हैं। आर्थिक बेड़ियां: शिक्षा अधूरी रहने के कारण ये लड़कियां कभी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बन पातीं और जीवनभर घरेलू निर्भरता के चक्रव्यूह में फंसी रह जाती हैं।  

स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग पार करना पड़ेगा भारी, अमृतसर में AI कैमरे रखेंगे नजर

अमृतसर अमृतसर में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के लिए अब सावधान रहने का समय आ गया है। अमृतसर ट्रैफिक पुलिस ने आज से ऑनलाइन चालान प्रणाली को लागू कर दिया है। इसके तहत ट्रैफिक सिग्नलों और प्रमुख चौकों पर लगे लगभग 1300 सीसीटीवी कैमरों की मदद से नियम तोड़ने वालों पर नजर रखी जाएगी। आज से उल्लंघन होने पर स्वचालित रूप से ऑनलाइन चालान जारी किया जाएगा। इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) अमनदीप कौर ने बताया कि इस व्यवस्था को पहले परीक्षण आधार पर शुरू किया गया था औ अब इसे पूरी तरह लागू कर दिया गया है। उन्होंने वाहन चालकों से अपील की कि वे ट्रैफिक सिग्नलों पर निर्धारित स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग के पीछे ही अपने वाहन रोकें। यातायात पुलिस के अनुसार यदि कोई वाहन चालक स्टॉप लाइन पार करता है या जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन खड़ा करता है तो उसका ऑनलाइन चालान स्वतः दर्ज हो जाएगा। 1300 हाईटैक कैमरे रखेंगे नजर शहर में स्थापित तकरीबन 1300 कैमरे आधुनिक कैमरे दूर से ही वाहन नंबर पढ़ने और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की पहचान करने में सक्षम हैं। इससे पूरी चालान प्रक्रिया बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के संचालित की जा सकेगी। यातायात पुलिस का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और वाहन चालकों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही चौकों पर लगने वाले जाम और अव्यवस्था को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। जानें किन 7 चौको पर शुरू हुआ ई-चालान अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में यह प्रणाली शहर के कुछ प्रमुख चौकों पर लागू की जाएगी। इनमें नोवेल्टी चौक, क्रिस्टल चौक, न्यू रियाल्टो चौक, रेलवे स्टेशन के आसपास का क्षेत्र, भंडारी पुल और क्वींस रोड क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर ट्रैफिक दबाव अधिक होने के कारण नियमों के उल्लंघन की घटनाएं भी ज्यादा सामने आती हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम लोगों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। ऐसे में वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे ट्रैफिक संकेतों का पालन करें और स्टॉप लाइन तथा जेब्रा क्रॉसिंग का सम्मान करें, ताकि अनावश्यक चालान से बचा जा सके।

MP राज्यसभा चुनाव में बड़ा सस्पेंस, कमलनाथ या किसी बाहरी चेहरे पर दांव लगाएगी कांग्रेस?

भोपाल  मध्य प्रदेश में 18 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हैं। कांग्रेस के खाते में एक सीट जा रही है। यह सीट दिग्विजय सिंह की है। दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा जाने से मना कर चुके हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि पूर्व सीएम कमलनाथ को राज्यसभा भेजा सकता है। बुधवार को नई दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की है। इसके बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राज्यसभा की तीन सीटें हो रही हैं खाली मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। इनमें दो सीटें बीजेपी की हैं। जनवरी में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने घोषणा की थी कि वह मध्य प्रदेश से जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की एकमात्र सीट खाली कर देंगे। उम्मीदवारों की है लंबी सूची प्रदेश कांग्रेस सूत्रों के अनुसार जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए एआईसीसी के पास उम्मीदवारों की एक लंबी सूची है। इस सूची में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा, पूर्व राज्यसभा सांसद बी के हरिप्रसाद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। कांग्रेस की आएंगी पांच सीटें वहीं, इस रेस में कमलनाथ का नाम शामिल होता है तो इससे चयन प्रक्रिया आसान नहीं होगी, क्योंकि राज्यसभा की कुल 26 सीटें खाली होने के बावजूद कांग्रेस के हिस्से में केवल पांच सीटें ही आएंगी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की एक सीट खाली हो रही है। ऐसे में यह काफी महत्वपूर्ण है। कांग्रेस में नहीं मिला कोई पद दरअसल, 2022-23 में कमलनाथ को कथित रूप से एआईसीसी अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव मिला था। 2024 में कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ को बीजेपी में जाने की चर्चा हुई थी। इसके बाद से कांग्रेस में उन्हें कोई पद नहीं मिला है। कमलनाथ छिंदवाड़ा से सांसद रह चुके हैं। अपनी सीट उन्होंने बेटे के लिए छोड़ दी थी लेकिन 2024 में नकुलनाथ चुनाव हार गए। माना जा रहा है प्रबल दावेदार वहीं, दिग्विजय सिंह के बाद मध्य प्रदेश के कमलनाथ ही कांग्रेस में ऐसे कद्दावर नेता हैं, जिनके नाम पर उम्मीद की जा सकती है कि क्रॉस वोटिंग न हो। इसी साल मार्च में हुए राज्यसभा चुनावों में हरियाणा और ओडिशा में कांग्रेस के लिए क्रॉस-वोटिंग एक बड़ी समस्या बनकर उभरी थी। प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों का दावा है कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार को शायद ही 61 विधायकों का समर्थन मिल पाए। दो विधायक हैं वोट से वंचित मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म हो गई है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को वोटिंग का अधिकार नहीं है। तीसरी एमलए निर्मला सप्रे के खिलाफ हाईकोर्ट में दल बदल का मामला लंबित है। ऐसे में हो सकता है कि वह भी वोट न दें। एमपी से राज्यसभा की एक सीट पर जीत के लिए 58 विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के पास इस आंकड़े से सिर्फ तीन वोट अधिक हैं। इसलिए स्थिति नाजुक है। बीजेपी के पास हैं 165 विधायक वहीं, मध्य प्रदेश में बीजेपी के पास 165 विधायक हैं। ऐसे में दो सीटों पर उनकी जीत पक्की है। इसके बाद उनके पास 49 विधायक बचते हैं। राज्य बीजेपी के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि अगर कांग्रेस के अंदर गुटबाजी होती है तो बीजेपी तीसरी सीट पर चुनाव करवाने का मौका भुनाने से पीछे नहीं हटेगी।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका! अपने बूथ पर ही पिछड़े TMC नेता, EC रिपोर्ट ने खोली पोल

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई मजबूत किलों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा जारी बूथ स्तर के आंकड़ों से पता चलता है कि टीएमसी के प्रमुख 36 नेताओं में से केवल 14 नेता ही अपनी सीट बचा पाए हैं। टीएमसी 22 दिग्गज नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा है। हैरान करने वाली बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई मौजूदा मंत्रियों को अपने ही घरेलू वॉर्डों और उन सीटों पर शिकस्त झेलनी पड़ी है, जिन्हें कभी टीएमसी का अभेद्य गढ़ माना जाता था। 16 वरिष्ठ टीएमसी नेता अपनी सीटों के महज एक-तिहाई या उससे भी कम पोलिंग बूथों पर जीत दर्ज कर सके। भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी का दबदबा भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी ने 2021 के उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी। वहां इस बार भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें करारी शिकस्त दी। यह लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव है जब शुभेंदु ने ममता बनर्जी को पराजित किया है। भवानीपुर के कुल 270 पोलिंग बूथों में से ममता बनर्जी केवल 62 बूथों पर ही बढ़त बना सकीं। ममता बनर्जी ने अपने घरेलू पोलिंग स्टेशन बूथ संख्या 207 पर 63.33% वोट शेयर के साथ जीत जरूर दर्ज की, लेकिन वह पूरी सीट बचाने के लिए नाकाफी रहा। ममता केवल 54 बूथों पर 50% से अधिक वोट हासिल कर पाईं। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के 197 बूथों पर 50% से अधिक वोट शेयर के साथ एकतरफा जीत हासिल की, जिसमें 44 बूथ ऐसे थे जहां उन्हें 80% से अधिक वोट मिले। 3 मंत्रियों को नहीं मिला 15% बूथों पर भी समर्थन टीएमसी के चार प्रमुख चेहरे और मंत्री सुजीत बोस, ब्रात्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य और प्रदीप मजूमदार अपनी सीटों के कुल पोलिंग बूथों में से 15% बूथों पर भी जीत हासिल नहीं कर सके। इन चारों ही मंत्रियों को भाजपा उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से हराया। केवल तीन टीएमसी मंत्री मोहम्मद गुलाम रब्बानी, अखरुज्जमां और सबीना यास्मिन ही ऐसे रहे जिन्होंने अपनी सीटों के 80% से अधिक पोलिंग बूथों पर शानदार जीत दर्ज की। अपने ही घर में घिरे नेता आंकड़ों के मुताबिक, इन 36 प्रमुख नेताओं में से 25 नेता उसी निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड थे, जहां से वे चुनाव लड़ रहे थे। इन 25 नेताओं में से केवल 9 नेता अपने घरेलू पोलिंग बूथ पर जीत दर्ज कर सके, जिनमें से 6 अंततः अपनी पूरी सीट हार गए और केवल 3 को ही अंतिम जीत मिली। कुल मिलाकर, अपने घरेलू बूथ पर जीतने वाले 16 वरिष्ठ टीएमसी नेताओं में से सिर्फ 6 ही अपनी विधानसभा सीट जीत पाए। भाजपा की रणनीति रही सफल आंकड़े बताते हैं कि टीएमसी के दिग्गजों को बेदखल करने के लिए भाजपा ने बेहद रणनीतिक जीत दर्ज की। जिन 22 सीटों पर टीएमसी के बड़े नेता हारे उनमें से 15 सीटें ऐसी थीं जहां भाजपा ने कुल बूथों के 30% से भी कम हिस्से पर 50% से अधिक वोट शेयर हासिल किया था, फिर भी वे सीट जीतने में कामयाब रहे। भाजपा के सौरव सिकदार ने पूर्व वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को हरा दिया, जबकि सिकदार केवल 3.78% बूथों पर ही 50% से अधिक वोट शेयर हासिल कर पाए थे। जीत का बड़ा अंतर जिन 22 सीटों पर टीएमसी के दिग्गज हारे, उनमें से 16 सीटों पर आधे से अधिक पोलिंग बूथों में भाजपा उम्मीदवार और टीएमसी उम्मीदवार के बीच 10 प्रतिशत से अधिक वोटों का फासला था। दूसरी तरफ, टीएमसी के जो 14 प्रमुख नेता चुनाव जीते हैं उनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चंद्रनाथ सिन्हा (बोलपुर) और पुलक रॉय (उलूबेरिया दक्षिण) शामिल हैं। ये दोनों नेता अपनी सीटों के आधे से अधिक बूथों पर भाजपा से 10% से अधिक वोटों से पिछड़ने के बावजूद अंतिम रूप से सीट जीतने में सफल रहे। टीएमसी के लिए सबसे एकतरफा और बड़ी जीत गोलपोखर में मोहम्मद गुलाम रब्बानी और सुजापुर में सबीना यास्मिन की सीटों पर दर्ज की गई।

गौतम गंभीर का भी होगा रिप्लेसमेंट! टीम इंडिया में जल्द दिख सकते हैं कई बड़े बदलाव

नई दिल्ली इस साल सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स में क्रिकेट भी खेला जाएगा, लेकिन इन खेलों में भारत की जो टी20 टीम जाएगी उसके कप्तान सूर्यकुमार यादव नहीं होंगे। इन खेलों के लिए बीसीसीआई ने जो संभावित क्रिकेटरों की लिस्ट दी है उसमें सूर्यकुमार का नाम शामिल नहीं है। इस लिस्ट में वैभव सूर्यवंशी का नाम जरूर है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, वैभव ने आईपीएल-2026 में शानदार खेल दिखाया है और 16 मैचों में 776 रन बनाए हैं। उनकी टीम राजस्थान रॉयल्स का सफर शुक्रवार को गुजरात टाइटंस के दूसरे क्वालिफायर में हार के बाद खत्म हो गया। हालांकि, इस प्रदर्शन के बाद उनको भारतीय टीम में जल्दी मौका देने की मांग उठ रही है। संभावित खिलाड़ियों की लिस्ट में वैभव के अलावा श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत, यशस्वी जायसवाल के नाम भी शामिल हैं। भारतीय बोर्ड 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियन गेम्स के लिए टीम इंडिया का एलान जल्द ही कर सकता है। 30 क्रिकेटरों में से चुनी जाएगी टीम बीसीसीआई ने इन खेलों के लिए कुल 30 खिलाड़ियों की लिस्ट सौंपी है जिसमें से 15 खिलाड़ी चुने जाएंगे। ये लिस्ट आयोजकों को भेजी जा चुकी है। 2023 में जब एशियन गेम्स हुए थे तब ऋतुराज गायकवाड़ ने भारतीय टीम की कप्तानी की थी और गोल्ड मेडल दिलाया था। उस टीम के नौ सदस्य भी लिस्ट में है जिनमें गायकवाड़ का नाम भी शामिल है। लक्ष्मण होंगे कोच इन खेलों के लिए सिर्फ कप्तानी में बदलाव देखने को नहीं मिलेगा बल्कि कोचिंग स्टाफ में भी बदलाव होगा। टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर एशियान गेम्स में नहीं जाएंगे। उनकी जगह बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में काम कर रहे वीवीएस. लक्ष्मण हेड कोच की जिम्मेदारी निभाएंगे। गंभीर का नाम लिस्ट में नहीं है। उनकी जगह लक्ष्मण को जगह मिली है। एशियाई खेलों में 24 सितंबर से तीन अक्टूबर के बीच क्रिकेट का आयोजन होगा। एशियन गेम्स से पहले भी टीम में आ सकते हैं वैभव वैभव ने आईपीएल में जिस तरह का प्रदर्शन किया है उसे देखते हुए वह एशियन गेम्स से पहले भी टीम में आ सकते हैं। भारत को 26 जून से आयरलैंड का दौरा करना है और टी20 सीरीज खेलनी है। बहुत संभावना है कि वैभव इस टीम का हिस्सा हों। इस सीरीज के बाद भारत को इंग्लैंड, जिम्बाब्वे के खिलाफ भी सीरीज खेलनी है। एशियन गेम्स के लिए चुने गए संभावित क्रिकेटर: ईशान किशन, वरुण चक्रवर्ती, श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत, अभिषेक शर्मा, अनुकूल रॉय, अर्शदीप सिंह, अक्षर पटेल, आयुष बडोनी, ध्रुव जुरेल, हार्दिक पंड्या, हर्ष दुबे, हर्षित राणा, जसप्रीत बुमराह, खलील अहमद, कुलदीप यादव, नीतीश रेड्डी, प्रसिद्ध कृष्णा, रवि बिश्नोई, रिंकू सिंह, ऋतुराज गायकवाड़, संजू सैमसन, शाहबाज अहमद, शिवम दुबे, तिलक वर्मा, वैभव सूर्यवंशी, विप्रज निगम, वॉशिंगटन सुंदर, यशस्वी जायसवाल, यश ठाकुर।

सावधान! नए LPG नियम लागू होते ही कैंसिल हो सकता है आपका सिलेंडर कनेक्शन

 नई दिल्‍ली एशिया संकट को देखते हुए कस्‍टमर्स को कोई दिक्‍कत नहीं आए, इसलिए कुछ खास बदलाव किए गए हैं. इसी में से एक बदलाव 1 जून से लागू होने जा रहा है, जिसके तहत आपका सिलेंडर कनेक्‍शन कैंसिल हो सकता है।  दरअसल, देश में PNG का कनेक्‍शन बढ़ रहा है और सरकार द्वारा निर्देश देने के बावजूद LPG सिलेंडर का उपयोग कम नहीं हो रहा है. पीएनजी कनेक्‍शन मार्च तक 6.5 लाख नए कनेक्शन लगे हैं, लेकिन वास्‍तवकि आपूर्ति 18 फीसदी कम थी।  इससे पता चलता है कि कई परिवारों ने वास्‍तव में स्विच किए बिना ही कनेक्‍शन ले लिया है, जबकि सरकार ने कहा है कि अगर पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्‍शन हैं, तो एलपीजी को सरेंडर करना होगा. हालांकि, इसके बावजूद ही लोग पीएनजी का कनेक्‍शन ले रहे हैं, लेकिन एलपीजी को सरेंडर नहीं कर रहे हैं।  पिछले एक दशक में एलपीजी यूजर्स की संख्या लगभग दोगुनी होकर 33.5 करोड़ हो गई है, जबकि पीएनजी यूजर्स की संख्या केवल 1.64 करोड़ ही बनी हुई है. इस स्थिति में सरकार जल्‍द से जल्‍द बदलाव चाहती है और जून शुरू होने से पहले ही कड़े नियम लागू होने जा रहे हैं।  एक फैमिली, एक कनेक्‍शन नियम संशोधित नियम के तहत जिन परिवारों के पास पहले से ही PNG कनेक्‍शन हैं, उन्‍हें अपने एलपीजी कनेक्‍शन सरेंडर करने पड़ सकते हैं. तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों (OMCs) ने घरेलू सिलेंडरों के दुरुप्रयोग, जमाखोरी और कलाबाजारी को रोकने के लिए पीएनजी और एलपीजी दोनों का एक साथ उपयोग करने वाले घरों की पहचान करना शुरू कर दिया है।  एक ही एड्रेस पर दोनों कनेक्‍शन रखना संशोधित एलपीजी नियमों के तहत प्रतिबंधित माना जा रहा है, जिन लोगों के इलाके में पीएनजी का इंफ्रा है, उन्‍हें तय समय के भीतर पीएनजी पर स्विच न करने पर एलपीजी आपूर्ति बंद या खुद रद्द होने का सामना करना पड़ सकता है।    LPG कनेक्‍शन ट्रांसफर पीएनजी कनेक्‍शन प्राप्‍त करने के 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्‍शन बंद करने के लिए कहा है, जिस कारण सरकार ने इन कस्‍टमर्स को अपना एलपीजी कनेक्‍शन बहाल करने की अनुमति दी है. इससे यूजर्स को बाद में उन सेक्‍टर्स में जाने पर भी एलपीजी कनेक्‍शन फिर एक्टिव करने की सुविधा मिलती है, जहां पीएनजी कनेक्‍शन उपलब्‍ध नहीं है।  जून से ही नहीं भरा जाएगा एलपीजी सिलेंडर इस महीने से, पीएनजी पाइपलाइनों वाले क्षेत्रों में स्थित घरों को घरेलू एलपीजी सिलेंडर बुक करने या रिफिल करने से रोका जा रहा है. सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों और ओएमसी ने अब अपने डिजिटल डेटाबेस को पूरी तरह से यूनिफाइड कर दिया है. वहीं पीएनजी कनेक्‍शन विस्‍तार के लिए 30 जून तक समय बढ़ा दिया गया है।  गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए डेडलाइन  आपूर्ति की कमी और दुरुपयोग को कंट्रोल करने के लिए शहरी यूजर्स के लिए एलपीजी रिफिल की लॉक-इन पीरियड 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण यूजर्स के लिए 45 दिनों तक कर दी गई है।  कनेक्शन, सब्सिडी नियम परिवारों को हर साल केवल 12 रियायती घरेलू सिलेंडर ही मिलते रहेंगे. अतिरिक्त सिलेंडरों का शुल्क मार्केट वैल्‍यू के अनुसार लिया जाएगा. नया एलपीजी कनेक्शन लेने पर अब संशोधित जमा राशि और सेटअप शुल्क लागू होंगे, जिनमें रेगुलेटर, पाइप और इंस्टॉलेशन शुल्क शामिल हैं। 

‘विवाहित बेटी परिवार का हिस्सा है तो तलाकशुदा क्यों नहीं?’ हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह साफ कर दिया है कि तलाकशुदा बेटी भी पिता के परिवार का हिस्सा होती है और संपत्ति में भी उसका अधिकार है। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ होम गार्ड्स के डायरेक्टर जनरल के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें एक रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट की तलाकशुदा बेटी को फैमिली पेंशन के लिए उनकी नॉमिनी मानने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट कहा है कि सरकारी कर्मचारी की तलाकशुदा बेटी को परिवार के सदस्य का दर्जा देने से इनकार करना, समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस विशाल धागत ने कहा कि जब एक शादीशुदा बेटी परिवार का सदस्य हो सकती है, तो एक तलाकशुदा बेटी क्यों नहीं हो सकती? यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के मामले पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता मृतक सरकारी कर्मचारी पर आश्रित थी तो फैमिली पेंशन के उसके आवेदन को मंजूर किया जाए। बेंच ने होमगार्ड्स डीजी से 90 दिन के अंदर इस संबंध में एक आदेश पारित करने को कहा है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, होम गार्ड्स डीजी ने याचिकाकर्ता ज्योति श्रीवास्तव को उनके पिता शंकरलाल श्रीवास्तव की फैमिली पेंशन के लिए नॉमिनी मानने से इस आधार पर इनकार कर दिया था कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के मुताबिक तलाकशुदा बेटी कर्मचारी के परिवार का हिस्सा नहीं होती है। याचिकाकर्ता के पिता शंकरलाल श्रीवास्तव का 2017 में निधन हो गया था। इसके बाद उनकी तलाकशुदा बेटी ज्योति ने फैमिली पेंशन पाने के लिए आवेदन किया था। होम गार्ड्स डीजी ने 16 दिसंबर 2021 को ज्योति के आवेदन को खारिज कर दिया था। डीजी के आदेश में कहा गया था कि पेंशन नियमों के अनुसार, एक तलाकशुदा बेटी कर्मचारी पर आश्रित नहीं होती है। इसके बाद ज्योति ने होमगार्ड्स डीजी के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बेटियों को समान व्यवहार मिलना चाहिए जस्टिस धागत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा, “पेंशन नियम 1976 के प्रावधानों को देखने पर यह पाया गया कि तलाकशुदा बेटी को परिवार की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, विवाहित बेटियों को 1976 के पेंशन नियमों के नियम 44(5) के तहत परिवार की परिभाषा में शामिल किया गया है।” बेंच ने कहा कि अविवाहित बेटी, विवाहित बेटी या तलाकशुदा बेटी के बीच कोई अंतर नहीं है। ऐसा करना अनुच्छेद 14 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। बेंच ने कहा कि यदि एक विवाहित बेटी को परिवार के सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है, तो तलाकशुदा बेटी को परिवार की परिभाषा से बाहर रखने का कोई कारण नहीं है। जज ने कहा कि एक तलाकशुदा बेटी के साथ भी 1976 के नियमों के नियम 44(5) में बताई गई बेटियों के समान ही व्यवहार किया जाना चाहिए।

ट्रंप परिवार का राजस्थान दौरा, चार्टर प्लेन से जैसलमेर पहुंचेंगी बेटी और दामाद

जैसलमेर  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छोटी बेटी टिफनी ट्रंप अपने पति माइकल बोलस के साथ आज रविवार को राजस्थान के जैसलमेर पहुंचेंगी। यह शाही जोड़ा चार्टर प्लेन से सीधे जैसलमेर पहुंचेगा। उनके इस हाई-प्रोफाइल और निजी दौरे को देखते हुए पर्यटन नगरी में सुरक्षा का अलर्ट जारी।  अपनी इस यात्रा के दौरान टिफनी ट्रंप जैसलमेर की ऐतिहासिक धरोहरों का दीदार करेंगी। वे यहां के विश्व प्रसिद्ध सोनार किला (जैसलमेर फोर्ट), पटवों की हवेली और खूबसूरत गड़ीसर लेक देखने जाएंगी। सोमवार को उनका यहां से रवाना होने का कार्यक्रम है। अक्षरधाम और ताजमहल की खूबसूरती देखी भारत घूमने आईं टिफनी ट्रंप और उनके पति माइकल बोलस ने अपनी यात्रा की शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली से की। शुक्रवार को उन्होंने दिल्ली के प्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया। टिफनी ने मंदिर की भव्यता और अद्भुत शिल्पकला की सोशल मीडिया (X) पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए जमकर तारीफ की। इसके बाद शनिवार को वह आगरा पहुंचीं, जहां उन्होंने दुनिया के सात अजूबों में शामिल 'ताजमहल' का दीदार किया। बॉर्डर का जिला होने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, रूट डायवर्जन की तैयारी अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी के दौरे को लेकर जैसलमेर जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटा जिला होने और हाई-प्रोफाइल वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों और उनके रुकने वाले संभावित स्थानों पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। खुफिया एजेंसियां भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं। पर्यटन कारोबारियों में भारी उत्साह अमेरिकी राष्ट्रपति के परिवार की इस यात्रा से जैसलमेर के पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों, होटल व्यवसायियों और गाइडों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। कारोबारियों का मानना है कि टिफनी ट्रंप के इस दौरे से वैश्विक स्तर पर जैसलमेर के पर्यटन को एक नई और बड़ी पहचान मिलेगी। इस हाई-प्रोफाइल विजिट के बाद आने वाले दिनों में यहां विदेशी पर्यटकों की संख्या में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। स्वर्ण नगरी अपने पारंपरिक अंदाज 'पधारो म्हारे देस' के साथ इस खास विदेशी मेहमान के भव्य स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के एक और दामाद आ चुके हैं जैसलमेर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर नवंबर 2018 में जैसलमेर में एक हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने आए थे। वह डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ट्रम्प के पति हैं। जारेड कुशनर (डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद और तत्कालीन वरिष्ठ व्हाइट हाउस सलाहकार) 22 से 25 नवंबर, 2018 को जैसलमेर रहे थे। वे सम रोड स्थित होटल सूर्यगढ़ में उद्योगपति संजय हिंदुजा की पत्नी अनु हिंदुजा के भाई नितिन संपाल की हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने जैसलमेर आए थे। जारेड कुशनर की सुरक्षा के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी यूएस सीक्रेट सर्विस (US Secret Service) के एजेंट्स कई दिन पहले ही जैसलमेर पहुंच गए थे। स्थानीय राजस्थान पुलिस और सीक्रेट सर्विस ने मिलकर होटल सूर्यगढ़ को एक किले में तब्दील कर दिया था।