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अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज इंदौर स्थित संभागायुक्त कार्यालय पहुंचकर शहर में उत्पन्न जल संकट की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की तथा अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 24×7 जल नियंत्रण कक्ष के माध्यम से प्रतिदिन सुबह एवं शाम जलापूर्ति की समीक्षा की जाए। संकटग्रस्त वार्डों में विशेष जलापूर्ति योजना लागू कर प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर राहत प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि नल से जल सप्लाई के समय में असमानता और विसंगतियों को तत्काल दूर किया जाये। साथ ही सभी क्षेत्रों में संतुलित जल वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने शासकीय महाविद्यालयों, छात्रावासों तथा अन्य आवासीय संस्थानों में जल उपलब्धता की विशेष चिंता करने के निर्देश दिए। साथ ही जल चोरी करने वालों एवं मोटरों के माध्यम से अवैध रूप से पानी खींचने वालों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई करने को कहा। जल टंकियों का पूर्ण क्षमता से उपयोग सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शहर की बड़ी जल टंकियों का पूर्ण क्षमता से उपयोग सुनिश्चित किया जाए। निजी एवं नगर निगम के टैंकरों की मिनट-टू-मिनट मॉनिटरिंग की जाए। पाइपलाइन लीकेज एवं वितरण हानि को तत्काल सुधारकर जल की बर्बादी रोकी जाए। इउन्होंने कहा कि भोपाल से वरिष्ठ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी पूर्व में भी इंदौर का दौरा कर चुके हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पुनः भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों और नागरिक समितियों के साथ नियमित संवाद तथा समन्वय बनाए रखने तथा जल संकट की स्थिति से संबंधित जानकारी एवं प्रतिवेदन मुख्यमंत्री कार्यालय को निरंतर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री गोलू शुक्ला, विधायक श्रीमती मालिनी गौर, विधायक श्री मधु वर्मा, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।  

तालाबों के जीर्णोद्धार से संवर रहे गांव, जल संरक्षण और आजीविका को मिल रहा नया आधार

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता वाले जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों के तहत बिलासपुर जिले में “मोर गांव, मोर तरिया” अभियान को तेजी से अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से न सिर्फ गांवों में जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण की एक मजबूत नींव भी तैयार हो रही है। राज्य सराकर के जल संरक्षण अभियान को एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मानसून से पहले काम पूरा करने का लक्ष्य, मस्तूरी में काम तेज             अभियान के तहत बिलासपुर जिले के जनपद पंचायत मस्तूरी की ग्राम पंचायत बोहारडीह में नवीन तरिया (तालाब) निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। प्रशासन ने आने वाले मानसून को ध्यान में रखते हुए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत वर्षाकाल शुरू होने से पहले निर्माण कार्य को गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि आगामी सीजन में वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित किया जा सके। जिले में 38 नवीन तालाबों को मिली मंजूरी             जल संकट के स्थाई समाधान के लिए जिले में व्यापक स्तर पर जल संरचनाओं का विस्तार किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत बिलासपुर जिले में कुल 38 नवीन तरिया (तालाब) निर्माण कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इन सभी स्वीकृत तालाबों का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि वर्षाकाल में पानी रोकने की मजबूत व्यवस्था विकसित हो। इन तालाबों के निर्माण से क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा, फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, मवेशियों के लिए निस्तारी की सुविधा होगी और गर्मियों में होने वाले जल संकट से मुक्ति मिलेगी। ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर मिल रहा रोजगार            “मोर गांव, मोर तरिया” अभियान दोहरे लाभ के साथ ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इन निर्माण कार्यों में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण श्रमिकों को नियोजित किया गया है। गांवों में तालाबों के रूप में स्थाई जल संपदा का निर्माण हो रहा है। श्रमिकों को अपने ही गांव में रोजगार मिलने से पलायन पर रोक लगी है और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है। गुणवत्ता पर विशेष नजर           प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सभी निर्माण स्थलों की सतत मॉनिटरिंग (निगरानी) की जा रही है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और सभी कार्य तय समय-सीमा के भीतर पूरे किए जा सकें।

जून के पहले सप्ताह में लखनऊ में होगा सम्मान समारोह

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार वर्ष 2026 की मदरसा बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित करेगी। मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) परीक्षा के टॉप-10 छात्र-छात्राओं को लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया जाएगा। इनमें से दोनों वर्गों के टॉप- 3 छात्र-छात्राओं को टैबलेट दिया जाएगा। इसके लिए जून के पहले सप्ताह में राजधानी लखनऊ में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।  प्रदेश सरकार का उद्देश्य मदरसा शिक्षा को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी बनाना है, ताकि अल्पसंख्यक समाज के छात्र-छात्राएं मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें। 80 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं थे पंजीकृत वर्ष 2026 की उप्र. मदरसा बोर्ड परीक्षा में कुल 80,933 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से 63,211 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया था, इसमें से 55,788 छात्रों ने परीक्षा पास की थी। मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) और आलिम (सीनियर सेकेंडरी) की मेरिट सूची में टॉप-10 में पांच छात्र और पांच छात्राएं शामिल हैं। सभी टॉप-10 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा। सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी के टॉपर्स मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) वर्ग में चंदौली के मोहम्मद वसीम ने पहला, मीरजापुर के मोहम्मद कासिम अली ने दूसरा और गोरखपुर की शाइमा परवीन ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं आलिम (सीनियर सेकेंडरी) वर्ग में शीर्ष तीनों स्थानों पर छात्राओं ने कब्जा जमाया। वाराणसी की जुमी फरीन और शाइस्ता परवीन के साथ अमरोहा की उम्मुल खैर ने टॉप-3 में स्थान बनाया है। इन छात्र-छात्राओं को टैबलेट से सम्मानित किया जाएगा।  आधुनिक शिक्षा से मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर प्रदेश सरकार लगातार इस दिशा में कार्य कर रही है कि अल्पसंख्यक समाज के छात्र आधुनिक शिक्षा से जुड़ें और समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए 'एक हाथ में कुरान और एक हाथ में कंप्यूटर' के विजन को राज्य सरकार जमीनी स्तर पर लागू करने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में मदरसों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सरकार की प्राथमिकता अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि योगी सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मदरसा शिक्षा केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में गरीब मुस्लिम परिवारों के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना उनका अधिकार है। जून के पहले सप्ताह में होगा सम्मान समारोह राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने बताया कि जून के पहले सप्ताह में सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी वर्ग के टॉप-10 छात्र-छात्राओं को लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया जाएगा। दोनों वर्गों के टॉप-3 को टैबलेट फोन दिए जाएंगे, जिससे वह अपनी आगे की पढ़ाई और बेहतर ढंग से कर सकें। सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में हुई थीं परीक्षाएं मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं बीती 9 फरवरी से 14 फरवरी के बीच दो पालियों में आयोजित की गईं थी। पहली पाली में मुंशी और मौलवी, जबकि दूसरी पाली में आलिम, अरबी एवं परशियन (फारसी) विषयों की परीक्षाएं संपन्न हुई थी। प्रदेशभर में कुल 277 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और नकलविहीन बनाने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनकी निगरानी सीधे मदरसा बोर्ड मुख्यालय से की गई थी। परिणामस्वरूप परीक्षाएं शांतिपूर्ण और निष्पक्ष वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुईं थी।

लोकमाता अहिल्याबाई ने राष्ट्रवासियों को आत्मसम्मान से जीना और लड़ना सिखाया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर के गांधी हाल में पुण्य श्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जन्म जयंती उत्सव कार्यक्रम में सहभागिता की। भव्य जयंती समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी अहिल्याबाई को सुशासन, लोकसेवा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अद्वितीय प्रतिमूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि लोकमाता का शासन-प्रशासन हम सबको राम राज्य की याद दिलाता है। उस समय की बड़ी-बड़ी राजसत्ताओं के सामने देवी अहिल्याबाई ने अपने राज कौशल से सुशासन के नए प्रतिमान गढ़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारा भारत जिस नए सांस्कृतिक और धार्मिक जनजागरण का साक्षी बन रहा है, उसकी नींव लोकमाता ने लगभग तीन शताब्दी पहले ही रख दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवी अहिल्याबाई होल्कर ने न केवल एक कुशल शासक के रूप में, वरन् धर्म, समाज और संस्कृति की ममतामयी संरक्षक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने देशभर में अनेक मंदिरों और तीर्थस्थलों का जीर्णोद्धार कर भारतीय आस्था और सनातन संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवी अहिल्याबाई ने आस्था और अर्चना के प्रतीक हमारे मंदिरों की पुनर्स्थापना कर धर्म की रक्षा की तथा लोककल्याण को शासन का मूल आधार बनाया। उन्होंने भारतीयों को आत्मसम्मान के साथ जीना और इसके लिए लड़ना भी सिखाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इंदौर की दो विभूतियों म.प्र. उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति  आनंद सिंह बहरावत और न्यायमूर्ति  हिमांशु जोशी को 'अहिल्या गौरव सम्मान' से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने यहां फोटो प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कार वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता धर्म का मर्म समझती थीं। वे उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली दूरदर्शी शासक थीं। राजनीति, कूटनीति, वित्तीय प्रबंधन और अर्थव्यवस्था पर उनकी गहरी समझ थी। उनकी दूरदृष्टि का ही परिणाम है कि महेश्वरी साड़ियां आज विश्वभर में भारत की समृद्ध एवं बेजोड़ परिधान कला और उद्यमिता का गौरव बढ़ा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी लोकमाता द्वारा बताये गये लोकसेवा और जनकल्याण के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के समग्र सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रदेश में देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन संचालित किया जा रहा है। इस मिशन के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने इंदौर की पुलिस बटालियन नंबर-1 का नाम अहिल्याबाई बटालियन रखा है। लोकमाता अहिल्या बाई की 300वीं जयंती पर इंदौर के राजबाड़ा में ही कैबिनेट बैठक की और भोपाल में वृहद महिला सम्मेलन भी आयोजित किया था। मुख्यमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में लोकमाता के योगदान का उल्लेख कर उन्हें कुशल प्रशासिका, सुशासन की अग्रदूत और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणास्रोत बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता की जन्म स्मृति में इस भव्य एवं सफल आयोजन के लिए नगर निगम इंदौर एवं सहयोगी संस्था अवोम भारत के पदाधिकारियों को बधाई दी। इंदौर के महापौर  पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर लोकमाता की कर्मस्थली रहा है। उन्हीं के पुण्य प्रताप से इंदौर स्वच्छता के मामले में सुपर लीग में आ चुका है। क्लीन एयर इनीशियेटिव में भी इंदौर आगे है। इंदौर अब डिजिटल सिटी बनने जा रहा है। यहां हर दिशा में विकास कार्य हो रहे हैं। वर्ष 2029 तक इंदौर की जल क्षमता दुगुनी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि देवी अहिल्या उत्सव 2026 लोकमाता को सच्ची श्रद्धांजलि है। हम उन्हीं के बताए सद्मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। अहिल्या उत्सव 2026 कार्यक्रम के आरंभ में करीब 150 सदस्यों के एक आर्केस्ट्रा समूह द्वारा बांसुरी एवं अन्य वाद्य यंत्रों के सुमधुर वादन से राष्ट्रगीत वंदे मातरम की आकर्षक संगीतमय प्रस्तुति दी गई। इसके बाद  ब्रजेश ब्रज ने अपने समूह के साथ गणेश वंदना प्रस्तुति दी। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, इंदौर के सांसद  शंकर लालवानी, पूर्व मंत्री एवं विधायिका सु उषा ठाकुर, पूर्व मंत्री एवं विधायक  महेन्द्र हार्डिया, विधायिका  मालिनी गौड़, विधायक  मधु वर्मा, विधायक  राकेश गोलु शुक्ला,  प्रताप करोसिया,  सावन सोनकर,  गौरव रणदिवे, डॉ. निशांत खरे,  श्रवण चावड़ा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं नागरिकगण उपस्थित थे।  

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की बड़ी कार्रवाई, भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 8 संदिग्ध गिरफ्तार

नई दिल्ली  शहजाद भट्टी हाल के महीनों में ये नाम भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच में बार-बार सामने आया है। इसका कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध है। कभी पाकिस्तान के एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर पहचाने जाने वाले भट्टी को अब एजेंसियां एक ऐसे डिजिटल नेटवर्क के पीछे का मुख्य चेहरा बता रही हैं, जिसका कथित तौर पर गैंगस्टर मॉड्यूल, युवाओं के कट्टरपंथीकरण, हथियारों की तस्करी और भारत में अशांति फैलाने की साजिश से जुड़ाव है। आरोपियों के पास से हथियार और चोरी की बाइक बरामद शनिवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भट्टी के मॉड्यूल से जुड़े आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर पूरे देश में बड़े हमलों की योजना बना रहे थे। स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (स्पेशल सेल) अनिल शुक्ला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपियों के पास से पाकिस्तान में बने चार हैंड ग्रेनेड, दो ग्लॉक पिस्तौल, 24 जिंदा कारतूस, एक चोरी की मोटरसाइकिल और एक चोरी का स्कूटर बरामद किया गया है। आरोपियों में उत्तर प्रदेश से विजय उर्फ शूटर (23), झारखंड से नीतीश पासवान (23), महाराष्ट्र से तौकीर रिजवान अहमद शेख (27) और साजिद मेहबूब शेख उर्फ अरबाज खान (27), पंजाब से हरविंदर सिंह (28), गगनदीप सिंह (28) और मंजीत सिंह (23) और नेपाली नागरिक अनग कामी लामा (66) शामिल हैं। यूपी एटीएस और एसटीएफ ने भी चार गुर्गों को किया गिरफ्तार इस महीने की शुरुआत में उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भी एक संयुक्त अभियान चलाया और भट्टी-आबिद जट्ट मॉड्यूल से जुड़े चार गुर्गों को गिरफ्तार किया। भट्टी इस समय दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), उत्तर प्रदेश एटीएस, उत्तराखंड एसटीएफ और अन्य केंद्रीय एजेंसियों सहित कई एजेंसियों के लिए टॉप टारगेटों में से एक है। इन्फ्लुएंसर से कैसे बना क्रिमिनल नेटवर्क का सरगना? शाहजाद भट्टी मूल रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला है। जहां एक ओर वह सोशल मीडिया पर खुद को एक व्यवसायी, समाज-सेवक और धार्मिक मुद्दों पर टिप्पणीकार के तौर पर पेश करता है, वहीं दूसरी ओर एजेंसियों का कहना है कि उसका आपराधिक रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी बयां करता है। पाकिस्तानी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2013 में उसके खिलाफ चोरी और डकैती सहित कई मामले दर्ज किए गए थे, जिसके बाद बलात्कार जैसे गंभीर आरोप भी लगे। लगभग 2015 में वह पाकिस्तान से भागकर दुबई चला गया, जहां उसने डेयरी के कारोबार शुरू किए। उस दौरान बताया जाता है कि वह बलूचिस्तान के फारूक खोखर गिरोह के संपर्क में आया और उसका एक प्रमुख सदस्य बन गया। भट्टी ने "333" नाम से अपनी ऑनलाइन पहचान बनाना भी शुरू कर दिया था, जिसके तहत वह भारत-पाकिस्तान संबंधों, धार्मिक मुद्दों और इन्फ्लुएंसर्स के बीच के विवादों पर वीडियो बनाता था। उसे बड़ी संख्या में फॉलोअर्स मिले, लेकिन एजेंसियों का मानना है कि यह लोकप्रियता असल में एक बड़े नेटवर्क को खड़ा करने के लिए एक आड़ का काम कर रही थी। आईएसआई से लिंक का आरोप भारतीय एजेंसियों का दावा है कि भट्टी अकेले काम नहीं कर रहा है, बल्कि उसका संबंध पाकिस्तान की आईएसआई से है और उसे आबिद जट्ट, अजमल गुर्जर और यावर खान जैसे हैंडलर्स का समर्थन मिला हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए काम करता है। आरोप है कि यह भारत में कमजोर युवाओं की पहचान करता है, प्राइवेट मैसेजिंग के जरिए उनसे बातचीत शुरू करता है और फिर वीडियो कॉल के जरिए उन्हें भट्टी से जोड़ता है। खबरों के अनुसार, इन लोगों को पैसों और सोशल मीडिया पर शोहरत दिलाने के वादों के जरिए, साथ ही हथियारों वाले वीडियो और विदेश में बसने के मौकों का लालच देकर फंसाया जाता है। शुरुआत में उन्हें छोटे-मोटे काम सौंपे जाते हैं जैसे कि किसी जगह की तस्वीरें या वीडियो शेयर करना और धीरे-धीरे उन्हें इस नेटवर्क के जाल में और भी गहराई तक खींच लिया जाता है। पूरे भारत में बड़ी कार्रवाई जारी नेटवर्क के सामने आने के बाद एजेंसियों ने मई के पहले हफ्ते में देशव्यापी स्तर पर एक बड़ा अभियान शुरू किया। 48 घंटे तक चले इस अभियान में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों को शामिल किया गया। सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि एजेंसियां 500 से ज्यादा मोबाइल नंबरों और सोशल मीडिया अकाउंट्स को ट्रैक कर रही हैं। पंजाब के सीमावर्ती जिलों से 40 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। हरियाणा एसटीएफ ने करीब 90 युवकों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की। दिल्ली में 20 से ज्यादा लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, जहां उनमें से कुछ को समझाया-बुझाया गया और अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स डिलीट करने को कहा गया। कुल मिलाकर, इस अभियान के तहत 481 संदिग्धों और अपराधियों को हिरासत में लिया गया। तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान के लिंक्स जांच में भट्टी के 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (TTH) नामक एक समूह से कथित संबंधों का भी खुलासा हुआ है। गिरफ्तार किए गए लोगों ने दिल्ली पुलिस को बताया कि उन्हें दिल्ली और फरीदाबाद की दीवारों पर 'TTH' लिखने का निर्देश दिया गया था। उन्हें इसके नीचे "S" अक्षर लिखने का भी निर्देश दिया गया था, कथित तौर पर भट्टी की संलिप्तता का संकेत देने के लिए। एजेंसियों का कहना है कि इस गतिविधि को पाकिस्तान से मिली फंडिंग का समर्थन प्राप्त था। पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने की साजिश    

सुशासन तिहार के समाधान शिविर में मुख्यमंत्री ने कहा – जनता के बीच पहुंचकर सरकार दे रही अपने काम का रिपोर्ट कार्ड

रायपुर  सुशासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार का दायित्व है कि वह जनता के बीच जाकर अपने कार्यों का हिसाब दे, उनकी समस्याएं सुने और समाधान सुनिश्चित करे। इसी सोच के साथ राज्य सरकार सुशासन तिहार के माध्यम से आमजन के बीच पहुंचकर अपना रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने आज दुर्ग जिले के स्वर्गीय झाड़ूराम देवांगन शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मैदान में आयोजित सुशासन तिहार 2026 अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविर को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर दुर्ग जिले को 739 करोड़ 38 लाख रुपए की लागत के विकास कार्यों की सौगात देते हुए 251 लोककल्याणकारी कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 362 करोड़ 46 लाख रुपए की लागत के 98 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 376 करोड़ 92 लाख रुपए की लागत के 153 नए विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास शामिल है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह परियोजनाएं दुर्ग जिले के विकास को नई दिशा देने के साथ नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएंगी। मुख्यमंत्री  साय ने दुर्ग में सर्वसुविधायुक्त संयुक्त जिला कार्यालय भवन के निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि बेहतर प्रशासनिक अधोसंरचना से नागरिक सेवाओं में और अधिक पारदर्शिता, दक्षता और सुविधा सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि एक मई से प्रदेश में सुशासन तिहार का आयोजन निरंतर जारी है और 10 जून तक राज्य के सभी 33 जिलों में यह अभियान संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आयोजित समाधान शिविरों के माध्यम से न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है, बल्कि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ भी सीधे उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने समाधान शिविर परिसर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया और कहा कि शासन अब कार्यालयों तक सीमित नहीं, बल्कि जनता तक पहुंचकर सेवा देने की दिशा में कार्य कर रहा है। शिविर में युवाओं के ड्राइविंग लाइसेंस, मत्स्यपालकों को जाल वितरण, आयुष्मान कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, महिला समूहों को प्रोत्साहन, छात्रवृत्ति, आवास स्वीकृति और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया गया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारी सुशासन सरकार ने राज्य में 18 लाख गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करने का निर्णय लिया था और खुशी की बात है कि सभी स्वीकृतियां जारी कर दी गई हैं। अब शीघ्र ही सभी आवासों का निर्माण पूरा कर हितग्राहियों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मातृशक्ति के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना लागू की है, जिसके तहत माताओं और बहनों के खातों में प्रतिमाह एक-एक हजार रुपए की राशि अंतरित की जा रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का आर्थिक आत्मविश्वास परिवार और समाज दोनों को मजबूत करता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण छत्तीसगढ़ लंबे समय से झेल रहे नक्सलवाद के दंश से निर्णायक रूप से बाहर निकल रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास, विश्वास और नए अवसरों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने नेतानार में स्थापित सेवा डेरा का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां ग्रामीणों और आदिवासियों को इमली प्रसंस्करण, ढेकी चावल, सिलाई और अन्य आजीविका आधारित गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की सराहना करते हुए कहा कि बेमेतरा विधायक  दीपेश साहू द्वारा सामूहिक विवाह कार्यक्रम के माध्यम से परिणय सूत्र में बंधना समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश है। उन…

राजस्व प्रशासन के तीन अहम पदों पर महिला आईएएस अधिकारियों की तैनाती

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में महिला सशक्तीकरण का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया है। प्रदेश के राजस्व प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में अब महिला अधिकारियों की मजबूत उपस्थिति देखने को मिल रही है। सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अर्चना अग्रवाल को राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि प्रमुख सचिव राजस्व की जिम्मेदारी पहले से आईएएस अपर्णा यू संभाल रही हैं। राजस्व परिषद में सचिव एवं आयुक्त स्तर की जिम्मेदारी आईएएस कंचन वर्मा के पास है। 1990 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अर्चना अग्रवाल वर्तमान में अपर मुख्य सचिव परिवहन विभाग तथा उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) की अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। अब उन्हें राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश की अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक क्षेत्र में लंबे अनुभव और विभिन्न विभागों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के कारण उन्हें प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक राजस्व परिषद की कमान दी गई है। राजस्व विभाग की प्रशासनिक और नीतिगत जिम्मेदारी पहले से 2001 बैच की आईएएस अधिकारी अपर्णा यू के पास है। उन्हें इसी वर्ष प्रमुख सचिव राजस्व बनाया गया था। राजस्व विभाग प्रदेश में भूमि, राजस्व प्रशासन, भू-अभिलेख, अधिग्रहण और संबंधित नीतिगत मामलों का प्रमुख विभाग है। इसके अलावा 2005 बैच की आईएएस अधिकारी कंचन वर्मा राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश में आयुक्त एवं सचिव के पद पर कार्यरत हैं। राजस्व परिषद के प्रशासनिक संचालन और विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों के निस्तारण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह महत्वपूर्ण निर्णय योगी सरकार द्वारा महिलाओं को महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपने की नीति का प्रमाण है। प्रदेश सरकार पहले भी विभिन्न विभागों, आयोगों, निगमों और विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों में महिला अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां देती रही है। अब राजस्व प्रशासन की शीर्ष संरचना में महिला अधिकारियों की मजबूत उपस्थिति से सुशासन, प्रशासनिक दक्षता और महिला सशक्तीकरण को नई ताकत मिलेगी। राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश राज्य की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में शामिल है, जहां भूमि, राजस्व विवाद, प्रशासनिक अपीलों और विभिन्न राजस्व मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे में परिषद के अध्यक्ष, राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव और परिषद के सचिव स्तर पर महिला अधिकारियों की तैनाती प्रशासनिक दृष्टि से भी उल्लेखनीय उपलब्धि है।

वितरण में गड़बड़ी पर प्रशासन सख्त, 8 केंद्रों पर बैन

रायपुर  भारत सरकार और राज्य शासन के निर्देशानुसार छत्तीसगढ के कोरबा जिले में खरीफ वर्ष 2026 के लिए कृषकों को गुणवत्तायुक्त एवं पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। कृषि विभाग के उप संचालक श्री डी.पी.एस. कंवर ने स्पष्ट किया है कि जिले में खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण है और किसानों को किसी भी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।               कलेक्टर कोरबा कुणाल दुदावत ने उर्वरकों के भंडारण और वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने दोषी विक्रेताओं के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।   *जैव उर्वरक के रूप में नील हरित काई का उपयोग *              नील हरित काई एवं हरी खाद वायुमंडलीय नत्रजन का स्थिरीकरण कर पौधों को नाइट्रोजन पोषक तत्व उपलब्ध कराती हैं तथा मिट्टी की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणवत्ता को बनाए रखते हुए उसकी उर्वरता शक्ति में वृद्धि करती हैं। कृषकों को हरी खाद के रूप में ढैंचा बीज 8 किलोग्राम प्रति एकड़ तथा मूंग बीज 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से वितरित किया जा रहा है। साथ ही जैव उर्वरक के रूप में नील हरित काई का उत्पादन कृषि विज्ञान केंद्र लखनपुर, कृषि महाविद्यालय कटघोरा, शासकीय उद्यान रोपणी पत्ताड़ी (कोरबा) एवं चिन्हांकित किसानों के खेतों में कराया जा रहा है। नैनो उर्वरक लेना अनिवार्य नहीं, रहेगा पूर्णतः वैकल्पिक               वैज्ञानिकों की अनुशंसा के आधार पर इस बार एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। रासायनिक खादों के साथ-साथ जैविक और हरी खाद के संतुलित उपयोग पर जोर है। सहकारी समितियों में पिछले वर्ष की मांग के आधार पर 80 प्रतिशत यूरिया और 60 प्रतिशत डीएपी का भंडारण कराया जा रहा है। यूरिया की शेष 20 प्रतिशत मात्रा नैनो यूरिया/वैकल्पिक उर्वरकों और डीएपी की शेष 40 प्रतिशत मात्रा नैनो डीएपी/एनपीके के माध्यम से दी जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी किसान को नैनो उर्वरक लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, यह पूरी तरह स्वैच्छिक होगा। आंकड़ों में खाद और बीज का भंडारण           कोरबा जिले की सहकारी समितियों में खाद की उपलब्धता की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है।   सहकारी क्षेत्र के लिए 12 हजार 700 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित है। लक्ष्य के विरुद्ध 7 हजार 132.58 मीट्रिक टन (56.16 प्रतिशत) उर्वरक भंडारित किया जा चुका है। किसान अब तक 1 हजार 129.94 मीट्रिक टन खाद का उठाव कर चुके हैं, जबकि 6,002.64 मीट्रिक टन खाद अभी भी समितियों में शेष है। नैनो तरल उर्वरक का कोरबा जिले में कुल 11 हजार 886 लीटर (6 हजार 842 लीटर नैनो यूरिया और 5 हजार 44 लीटर नैनो डीएपी) का भंडारण किया गया था, जिसमें से 483.50 लीटर का वितरण हो चुका है और 11 हजार 402.50 लीटर स्टॉक में उपलब्ध है। इसके अलावा इच्छुक किसानों को हरी खाद के लिए ढैंचा बीज (8 किग्रा/एकड़) और मूंग बीज (4 किग्रा/एकड़) का वितरण भी किया जा रहा है।  28 को नोटिस, 58 बोरी यूरिया जब्त किसानों को सही दाम और गुणवत्तापूर्ण खाद दिलाने के लिए उर्वरक निरीक्षकों की टीमें लगातार विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण कर रही हैं। 1 अप्रैल 2026 से अब तक 115 केंद्रों की जांच की जा चुकी है, जिसमें गड़बड़ियां सामने आई हैं। अनियमितता मिलने पर 28 विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस  जारी किया गया है। 8 विक्रय केंद्रों के लाइसेंस/बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। एक केंद्र पर अवैध कार्रवाई करते हुए 58 बोरी यूरिया जब्त किया गया है। कृषि विभाग के अनुसार कलेक्टर के निर्देश पर यह निरीक्षण अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा ताकि कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके। उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण में किसी भी प्रकार कीअनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेशए 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियमए 1955 के प्रावधानों के तहत कठोर प्रशासनिक, कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।

कालाबन के तीखे मोड़ पर मौत का तांडव, डलहौजी घूमने आए दो परिवारों की यात्रा खत्म

हिमाचल चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र चुराह में साच पास मार्ग पर एक दर्दनाक सड़क हादसे में चालक और अन्य सात पर्यटकों की जान चली गई. हादसा साच पास से बैरागढ़ की ओर आते समय कालाबन के तीखा मोड़ के पास हुआ. जानकारी अनुसार बेंगलुरु से आए एक परिवार ने पर्यटन नगरी डलहौजी में एक टैक्सी वाहन बुक करवाई. दो परिवार साथ गए उन्होंने डलहौजी में दूसरे पर्यटक परिवार से टैक्सी शेयर कर पहाड़ों और बर्फ की सैर कर आनंद लेने की बात कही. जिस पर दूसरे परिवार ने भी हामी भरते हुए टैक्सी में सवार होकर शुक्रवार को बैरागढ़-किलाड़ मार्ग वाया साच जोत पर रवाना हो गए. इन पर्यटकों द्वारा बुक करवाई गई टैक्सी के वापस डलहौजी न लौटने पर टैक्सी मालिक को चिंता होने लगी. तीखा मोड़, खाई में गिरी गाड़ी उन्होंने जीपीएस के माध्यम से देखा कि कालावन के पास उनकी गाड़ी एक स्थान पर है और उसमें कोई हलचल नहीं हो रही थी. गाड़ी नंबर HP01C-2133 शुक्रवार, 29 मई को साच पास से बैरागढ़ की ओर आ रही थी. इसी दौरान कालाबन के तीखा मोड़ के समीप वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर गहरी खाई में जा गिरा. हादसे की सूचना शनिवार को ओसीपी बैरागढ़ द्वारा दूरभाष के माध्यम से पुलिस थाना तीसा को दी गई. सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तथा राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया. लेकिन हादसा इतना भीषण था कि वाहन में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई. मृतकों में कौन लोग शामिल? मृतकों की पहचान चालक विश्वास सल्होता पुत्र थोमस, निवासी मोहल्ला ज्वाला, मावा बनीखेत तथा कर्नाटक और छत्तीसगढ़ के पर्यटकों अरविंद चंद्राकर, प्राची, दर्श, अकशद, पी.जी. कार्तिघायन, मनीमाला और नंदन के रूप में हुई है. सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज चंबा भेजा गया. पुलिस ने इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है. साच पास मार्ग पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की मांग की है.

कार्यवाहक डीजीपी के रूप में पहले से संभाल रहे थे जिम्मेदारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को प्रदेश का पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया है। वह फिलहाल कार्यवाहक डीजीपी के रूप में प्रदेश पुलिस की कमान संभाल रहे थे। इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। राजीव कृष्ण ने तत्कालीन डीजीपी प्रशांत कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद कार्यवाहक डीजीपी का पदभार संभाला था। इससे पहले वह डीजी विजिलेंस और उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पुलिस विभाग में उनकी पहचान एक अनुभवी, अनुशासित और परिणामोन्मुख अधिकारी के रूप में रही है। गौतमबुद्ध नगर निवासी राजीव कृष्ण ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। अपने तीन दशक से अधिक पुलिस सेवाकाल में उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण इकाइयों में कार्य किया है। आगरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से चर्चित रहा, जहां उन्होंने संगठित अपराध और अपहरण गिरोहों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर अलग पहचान बनाई थी। पुलिस मुख्यालय, विजिलेंस और भर्ती बोर्ड में काम करने का व्यापक अनुभव रखने वाले राजीव कृष्ण प्रशासनिक दक्षता और संस्थागत सुधारों के लिए भी जाने जाते हैं।