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योगी सरकार का बड़ा अभियान, प्रदेशभर के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का हो रहा निरीक्षण

लखनऊ  योगी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार व्यापक प्रयास कर रही है। इसी क्रम में योगी सरकार द्वारा संचालित "स्टेट रिव्यू मिशन" के तहत प्रदेश भर में स्वास्थ्य संस्थानों का बड़े पैमाने पर निरीक्षण और समीक्षा अभियान चलाया जा रहा। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना, कमियों की पहचान करना और आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। 29 अक्टूबर 2025 से "स्टेट रिव्यू मिशन" की शुरुआत  अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर नागरिक को उसके घर के पास गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन लगातार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहे हैं। इसी के तहत अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष द्वारा 29 अक्टूबर 2025 से "स्टेट रिव्यू मिशन" की शुरुआत की गई। मिशन के तहत प्रदेश के सभी स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति, गुणवत्ता और प्रभावशीलता की गहन समीक्षा की जा रही है। मंडल स्तर पर संचालित अभियान में स्वास्थ्य इकाइयों का स्थल निरीक्षण, व्यवस्थाओं का मूल्यांकन तथा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। पिछले छह माह के दौरान 18 मंडलों के सभी 75 जिलों और 826 विकास खंडों में संचालित स्वास्थ्य संस्थानों का बड़े पैमाने पर निरीक्षण किया गया।  राज्य स्तर पर विशेष "फैसिलिटी ऑब्जर्वेशन चेकलिस्ट" विकसित की गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक एवं स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि अभियान के दौरान प्रदेश की कुल 33,044 चिकित्सा इकाइयों में से 16,249 चिकित्सा इकाइयों का निरीक्षण किया गया, जो कुल इकाइयों का लगभग 49 प्रतिशत है। निरीक्षण कार्य 901 मंडलीय एवं जनपदीय अधिकारियों तथा 43 राज्य स्तरीय अधिकारियों की दो सदस्यीय टीमों द्वारा किया गया। इन टीमों ने प्रदेश के 93 जिला अस्पतालों, 861 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 2,825 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 12,405 स्वास्थ्य उपकेंद्रों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, 50 विशेष चिकित्सालयों तथा 15 मेडिकल कॉलेजों का स्थलीय मूल्यांकन किया। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित 2,661 मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेलों का भी निरीक्षण किया गया। इन स्वास्थ्य मेलों के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कुछ मंडलों में निरीक्षण के दूसरे चरण का कार्य भी जारी है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके।  उन्होंने बताया कि स्टेट रिव्यू मिशन के तहत निरीक्षण के लिए राज्य स्तर पर विशेष "फैसिलिटी ऑब्जर्वेशन चेकलिस्ट" विकसित की गई। इसके माध्यम से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी ढांचे, दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता, मानव संसाधनों की स्थिति, एंबुलेंस सेवाओं, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उपलब्ध सुविधाओं तथा रिकॉर्ड प्रबंधन का मूल्यांकन किया गया। साथ ही रोगियों से फीडबैक लेकर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक गुणवत्ता का भी आकलन किया गया।   निगरानी और समीक्षा से स्वास्थ्य संस्थानों की बढ़ी कार्यक्षमता  स्टेट रिव्यू मिशन के दौरान किए गए गहन निरीक्षण, आकस्मिक जांच और लगातार समीक्षा का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विभिन्न स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार दर्ज किया गया है और चिकित्सा संस्थानों में सेवा गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही के नए मानक स्थापित हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सतत निगरानी और समीक्षा से न केवल स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ रही है, बल्कि आम नागरिकों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास भी मजबूत हुआ है। प्रदेश सरकार का यह अभियान स्वास्थ्य सेवाओं को जनकेंद्रित, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

पर्यावरण अनुकूल शहरी विकास पर विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और पर्यावरणविदों ने किया मंथन

भोपाल  ‘मेनस्ट्रीमिंग-एलआईएफईः पर्यावरण अनुकूल टिकाऊ शहरी आवासों का निर्माण’ विषय पर प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में आयोजित किया गया। सोसायटी ऑफ नेचर हीलर्स, कंजर्वेटर्स एंड लोकल टूरिज्म डेवलपमेंट (एसएनएचसी इंडिया) तथा मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन संयुक्त रूप से किया। एपको (एनवाइरनमेंटल प्लानिंग एंड को-ऑर्डिनेशन ऑर्गनाइजेशन) में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के प्रमुख वैज्ञानिक, पर्यावरणविद, शहरी योजनाकार, नीति विशेषज्ञ और जमीनी स्तर पर कार्यरत संगठन शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच जैव-विविधता संरक्षण, पर्यावरण-अनुकूल विकास और टिकाऊ शहरी नियोजन को बढ़ावा देना था। विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि शहरों के विकास मॉडल में प्रकृति और स्थानीय पारिस्थितिकी को केंद्र में रखना समय की आवश्यकता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के सीईएमडीई के प्रो. डॉ. फैयाज़ ए. खुसरो ने कहा कि दिल्ली सहित देश के अनेक शहरों में बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट शहरी नियोजन के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने स्थानीय पारिस्थितिकीय समाधानों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक मती अनुराधा शंकर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। तकनीकी सत्रों में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट बेंगलुरु के  जगदीश कृष्णस्वामी, डॉ. चंद्रशेखर एम. बिरादर, वन्यजीव संस्थान देहरादून के डॉ. गौतम तालुकदार तथा अन्य विशेषज्ञों ने शहरी तापमान वृद्धि, हरित क्षेत्रों की कमी, जैव विविधता संरक्षण और शहरी नियोजन में प्रकृति-आधारित समाधानों की आवश्यकता पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने शहरों में देशी वृक्षारोपण, ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और वार्ड स्तर पर जैव विविधता रजिस्टर तैयार करने की आवश्यकता जताई। दूसरे तकनीकी सत्र में नदियों, आर्द्र भूमियों और शहरी जल प्रणालियों के संरक्षण पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भूजल दोहन, रेत खनन और नदी संरक्षण की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए शहरी विकास योजनाओं में जल संसाधनों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। ‘सस्टेनेबल सिटी —गवर्नेंस, प्लानिंग एंड कम्युनिटी’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने शहरी नियोजन में जैव विविधता संरक्षण, पक्षी-अनुकूल भवन निर्माण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और समावेशी विकास मॉडल को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। सम्मेलन के दूसरे दिन, 31 मई को प्रतिभागियों ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने पारंपरिक ज्ञान, प्रकृति-आधारित जीवनशैली और टिकाऊ विकास के भारतीय दृष्टिकोण पर चर्चा की। यह भ्रमण सम्मेलन के उद्देश्यों को व्यवहारिक संदर्भ प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। सम्मेलन में यह स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों का समाधान केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार से नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित विकास मॉडल अपनाकर ही संभव है। विशेषज्ञों ने पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को जन-आंदोलन बनाने और शहरी विकास के केंद्र में जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी को स्थान देने का आह्वान किया।

भारत सरकार के उपक्रम राइट्स लिमिटेड को सौंपा गया गुणवत्ता परीक्षण का जिम्मा, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और समयबद्ध परियोजनाओं पर जोर

लखनऊ औद्योगिक क्षेत्रों में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने औद्योगिक क्षेत्रों में कराए जा रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी जांच व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने गाजियाबाद के सात प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान भारत सरकार के उपक्रम राइट्स लिमिटेड से विकास कार्यों का विस्तृत गुणवत्ता परीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्माण कार्यों के सैंपल और गुणवत्ता परीक्षण उद्यमी संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में कराए जाने का फैसला लिया गया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कविनगर, स्वदेशी औद्योगिक क्षेत्र, बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र, साउथ साइड जीटी रोड, लोहामंडी, मेरठ रोड साइट-3 और साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्रों का निरीक्षण कर विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप औद्योगिक क्षेत्रों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके लिए थर्ड पार्टी ऑडिट व्यवस्था को और प्रभावी बनाने, लंबित विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने तथा आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए। उद्यमियों से अनुचित मांग या उत्पीड़न पर होगी कार्रवाई निरीक्षण और उद्यमियों के साथ हुई बैठक के दौरान ट्रक पार्किंग, पार्कों के विकास, टेस्ट लैब, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और एक्सपो सेंटर जैसी सुविधाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति दोहराते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा उद्यमियों से अनुचित मांग या उत्पीड़न की शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उद्यमियों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश में निवेश और उद्योगों के लिए पारदर्शी, जवाबदेह और उद्योग-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना यूपीसीडा और योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। अथॉरिटी को अधिक जवाबदेह बनाने पर जोर प्रदेश में रिकॉर्ड निवेश प्रस्तावों और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक बुनियादी ढांचे के बीच योगी सरकार गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही पर भी विशेष जोर दे रही है। सरकार का मानना है कि निवेश आकर्षित करने के लिए केवल नई परियोजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके क्रियान्वयन की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित की जा रही सड़कों, नालियों, पार्किंग, कॉमन सुविधाओं और अन्य आधारभूत ढांचों की स्वतंत्र जांच की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। यही नहीं, यूपी को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत सरकार औद्योगिक अवसंरचना को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, निवेशक अनुकूल माहौल और पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए यूपीसीडा को भी अधिक जवाबदेह बनाया जा रहा है।

वॉशिंगटन सुंदर के दमदार पचासे से गुजरात टाइटंस 156 रन तक पहुंची, RCB को मिला चुनौतीपूर्ण लक्ष्य

अहमदाबाद  फाइनल मुकाबले में गुजरात टाइटंस ने डिफेंडिंग चैंपियन आरसीबी के सामने 156 रनों का लक्ष्य रखा है। खिताबी मुकाबले में गुजरात टाइटंस की ओर से वाशिंगटन सुंदर ने संघर्षभरी पारी खेली और 37 गेंदों में 50 रन बनाए। इसके अलावा कोई भी बैटर नहीं चला। GT- 155/8 (20 ओवर) फाइनल मुकाबले में RCB और GT की प्लेइंग XI रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (प्लेइंग इलेवन): विराट कोहली, देवदत्त पडिक्कल, रजत पाटीदार (कप्तान), जितेश शर्मा (विकेटकीपर), टिम डेविड, क्रुणाल पंड्या, रोमारियो शेफर्ड, भुवनेश्वर कुमार, जैकब डफी, जोश हेजलवुड, रसिख सलाम डार। गुजरात टाइटंस (प्लेइंग इलेवन): साई सुदर्शन, शुबमन गिल (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), वाशिंगटन सुंदर, राहुल तेवतिया, निशांत सिंधु, जेसन होल्डर, राशिद खान, कैगिसो रबाडा, अरशद खान, मोहम्मद सिराज

झारखंड में ITI नामांकन प्रक्रिया शुरू, 10 से 30 ट्रेड और संस्थानों का विकल्प मिलेगा

 रांची  राज्य के सरकारी, गैर सरकारी तथा पीपीपी मोड पर संचालित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में नामांकन के लिए अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन में न्यूनतम 10 और अधिकतम 30 ट्रेड और संस्थानों का विकल्प दे सकेंगे। संस्थानों की शत-प्रतिशत सीटें भरने के लिए यह निर्णय लिया गया है ताकि अभ्यर्थियों के पास पर्याप्त विकल्प हो। श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-28 में नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया सोमवार को शुरू होगी। 25 जून तक ऑनलाइन आवेदन होगा, जबकि नामांकन के लिए 29 जून को पहली मेधा सूची प्रकाशित होगी। इसी आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी एवं गैर सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के अलावा झारखंड गवर्नमेंट टूल रूम-आइटीआइ, गोला, रामगढ़ में भी नामांकन होगा। अधिकतम आयु 40 वर्ष कुछ ट्रेड में नामांकन के लिए आवश्यक योग्यता 10वीं तथा कुछ ट्रेड के लिए आठवीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। नामांकन के लिए एक अगस्त 2026 को न्यूनतम आयु 14 वर्ष तथा अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है। बता दें कि राज्य के आइटीआई में नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाती है। नामांकन के लिए मेधा सूची अर्हता कक्षा के प्राप्तांकों के आधार पर तैयार की जाती है। सभी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जाती है। नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया www.iti.jharkhand.gov.in पोर्टल के माध्यम से की जा सकती है। बताते चलें कि राज्य के कई औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में कई सीटें रिक्त रह जाती है। संस्थानों की अधिक से अधिक सीटें भर सकें, इसके लिए कई चरणों की काउंसिलिंग आयोजित की जाती है। इसके बाद भी सीटें रिक्त रह जाती हैं। इससे निपटने के लिए ही अधिक विकल्प भरने की व्यवस्था की गई है।

मद्यनिषेध विभाग के माध्यम से गांव-गांव और स्कूलों तक पहुंचा जागरूकता संदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे प्रयासों को लगातार गति मिल रही है। योगी सरकार ने नशे के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए जागरूकता को सबसे प्रभावी हथियार बनाते हुए व्यापक अभियान संचालित किया है। मद्यनिषेध विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश भर में युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों के बीच नशा विरोधी कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन किया गया, जिससे लाखों लोगों तक सकारात्मक संदेश पहुंचा। योगी सरकार की प्राथमिकता केवल नशे की रोकथाम तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराकर उन्हें स्वस्थ और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में भी लगातार कार्य किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में निबंध, भाषण, पोस्टर, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। 1352 प्रतियोगिताओं में शामिल हुए हजारों छात्र-छात्राएं मद्यनिषेध विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में कुल 1352 प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया गया। इनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 5404 छात्र-छात्राओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। क्योंकि युवाओं को सही दिशा में प्रेरित कर नशे के खिलाफ मजबूत सामाजिक वातावरण तैयार किया जा सकता है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष अभियान चलाए गए, जहां खेलकूद प्रतियोगिताओं और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया। इन कार्यक्रमों को स्थानीय स्तर पर भी सराहना मिली। प्रदेशभर में 1767 संगोष्ठियां, 356 प्रदर्शनियों का आयोजन योगी सरकार के निर्देश पर मद्यनिषेध विभाग ने राज्य स्तर से लेकर जनपद स्तर तक व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। वर्ष भर में 40 राज्य स्तरीय और 1727 जनपद स्तरीय संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। इनमें शिक्षकों, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धर्माचार्यों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लेकर नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया। इसके साथ ही प्रदेशभर में 356 प्रदर्शनियों की स्थापना कर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों और उसके सामाजिक नुकसान के बारे में जानकारी दी गई। मेलों, त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और राष्ट्रीय पर्वों पर विशेष अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों तक संदेश पहुंचाया गया। योगी सरकार में नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जागरूकता को मिली नई ताकत यूपी के जनसामान्य तक सरल और प्रभावी तरीके से संदेश पहुंचाने के लिए विभाग ने 829 सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराए। नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो, जादू, गीत, कव्वाली और अन्य सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया।

नए सिलेबस के बीच किताबों का संकट, यूपी के हजारों स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित

लखनऊ  नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत अप्रैल से हो चुकी है और प्रदेश के हजारों सीबीएसई स्कूलों में कक्षा 9वीं के छात्रों को अब तक सभी जरूरी किताबें नहीं मिल सकी हैं। सीबीएसई की ओर से इस बार सिलेबस में बदलाव किया गया, लेकिन एनसीईआरटी समय से नई पुस्तकें उपलब्ध नहीं करा पाया। इसका असर सीधे छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। प्रदेश में करीब 4500 सीबीएसई स्कूल हैं। अनुमान के अनुसार कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या चार से छह लाख के बीच है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की है, जिन्हें अभी तक पूरी किताबें नहीं मिल पाई हैं। कई स्कूलों में सिर्फ कुछ विषयों की किताबें पहुंची हैं, जबकि गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसी मुख्य विषयों की पुस्तकें अब भी कम हैं। स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में छात्रों को अवकाश के दौरान पढ़ाई और होमवर्क पूरा करने में परेशानी हो रही है। अभिभावक खोज रहे किताबें कई अभिभावक बाजार और आनलाइन माध्यमों से किताबें खोज रहे हैं, लेकिन वहां भी पर्याप्त स्टाक नहीं मिल रहा। कुछ स्कूल फिलहाल पीडीएफ नोट्स और फोटोकापी के सहारे पढ़ाई करा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि सिलेबस बदलने के कारण पुरानी किताबों से पढ़ाना भी आसान नहीं है। इससे पढ़ाई की गति प्रभावित हो रही है और बच्चों की बुनियादी तैयारी कमजोर पड़ सकती है। खासकर बोर्ड पैटर्न की तैयारी शुरू करने वाले छात्रों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। अभिभावकों ने मांग की है कि एनसीईआरटी और संबंधित एजेंसियां जल्द पुस्तकें उपलब्ध कराएं, ताकि नए सत्र की पढ़ाई व्यवस्थित तरीके से शुरू हो सके।

प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ राज्यपाल ने सुनी किसानों के साथ

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि वैज्ञानिक आधुनिक कृषि तकनीक का व्यवहारिक अनुभव किसानों को दें। केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान द्वारा आस-पास के क्षेत्रों के किसानों को केंद्र में आमंत्रित किया जाना चाहिए। यहाँ किसानों को उनके सामर्थ्य और आवश्यकता के अनुरूप उपयोगी आधुनिक तकनीकों के बारे में बताया जाए। उन्हें कृषि यंत्रों का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाए, ताकि किसान इनका स्वयं उपयोग करने में सक्षम हो सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ 'मन की बात' केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, हमारे पूरे राष्ट्र की सामूहिक चेतना, शक्ति और संकल्प का प्रतीक है। राज्यपाल  पटेल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के पूर्व किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल के साथ किसानों, कृषि वैज्ञानिकों के साथ ‘मन की बात’ के सामूहिक श्रवण कार्यक्रम का आयोजन रविवार को केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के सभागार में किया गया था। इस अवसर पर संचालक कृषि कल्याण  उमाशंकर भार्गव भी मौजूद थे। मन की बात राष्ट्र की सामूहिक चेतना राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से देश के सुदूर कोनों के गुमनाम नायकों की उपलब्धियों को बताते हैं, जिनके एकल प्रयासों ने समाज में बड़े बदलाव किए हैं। यह कार्यक्रम हमें सिखाता है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता, क्योंकि जब पूरा देश एक दिशा में सोचता है और सामूहिक चेतना के साथ काम करता है, तो बड़े से बड़ा बदलाव आसानी से हो जाता है। केंद्र और राज्य सरकार के लिये हैं किसान कल्याण सर्वोपरि राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कृषि वैज्ञानिकों को बदलते परिवेश में खेती पर होने वाले मौसम के प्रकोप को सहने और फसलों की सुरक्षा करने की क्षमता बढ़ाने में किसानों की सहायता करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित महिला किसानों की उपस्थिति पर हर्ष व्यक्त किया। बताया कि वर्तमान में केंद्र और राज्य, दोनों ही सरकारों के केंद्र में किसान कल्याण सर्वोपरि है। सरकार किसानों के चहुंमुखी विकास और उनकी आय बढ़ाने के लिए हर संभव कदम उठाने को तत्पर रहती है। मोदी जी के नेतृत्व में खेती को लाभकारी बनाने के लिए अनेक कार्य किए गए हैं, नई योजनाएं बनी हैं। उन्नत कृषि के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने देश में 3 करोड़ 'ड्रोन दीदी' बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि में महिलाओं की भागीदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा कृषि कल्याण वर्ष के माध्यम से आधुनिक खेती के विकास के द्वारा किसानों की आमदनी को बढ़ाने प्रयासों की सराहना की। गुजरात के कृषि मेलों की पहल का किया स्मरण राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने अपने गृह राज्य गुजरात का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वे गुजरात के नवसारी के रहने वाले हैं, जहाँ एक प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालय स्थित है। उन्होंने याद दिलाया कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2007 में ऐतिहासिक 'कृषि मेलों' की शुरुआत कराई थी। इस अभिनव पहल के तहत उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को 'लैब से फील्ड' भेजने की शुरुआत की, ताकि वैज्ञानिक सीधे किसानों से जुड़ सकें। राज्यपाल ने बताया कि इन कृषि मेलों के माध्यम से ही गुजरात में रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में वर्मी कंपोस्ट केंचुआ खाद के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिला, जिससे जैविक खेती की नींव मजबूत हुई। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत के महान कृषि वैज्ञानिक, स्वर्गीय डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन जी ने स्वयं गुजरात में एक माह तक प्रवास कर इन कृषि मेलों के सकारात्मक प्रभावों और उनके दूरगामी परिणामों का अध्ययन किया था। अनुसंधान केन्द्र का किया अवलोकन राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम के पूर्व केंद्र में विकसित किए गए आधुनिक उपकरण आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीक का अवलोकन किया। कृषि वैज्ञानिकों का उत्साह वर्धन किया और कहा कि कृषक उपयोगी यंत्रों और तकनीक के विकास को देखकर उन्हें प्रसन्नता हुई है। केंद्र के निदेशक  सी.आर. मेहता ने स्वागत उद्बोधन में संस्थान की उपलब्धियां और नवाचार की जानकारी दी। आभार प्रदर्शन केंद्र के परियोजना समन्वयक  के.एन. अग्रवाल ने किया। मन की बात के सामूहिक श्रवण कार्यक्रम के प्रारंभ में दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर आई.सी.ए.आर. गान का प्रस्तुत किया गया। अनुसूचित जाति उप योजना के तहत किसानों को उन्नत कृषि किट प्रदान किए गए।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा धावक अनिमेष कुजूर की ऐतिहासिक उपलब्धि और मल्हार की सांस्कृतिक धरोहर का किया उल्लेख

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और आमजनों के साथ प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 134वीं कड़ी का श्रवण किया। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का ‘मन की बात’ छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व, प्रेरणा और आत्मविश्वास का क्षण बन गया, क्योंकि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय मंच से प्रदेश की प्रतिभा और सांस्कृतिक धरोहर दोनों का उल्लेख कर पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान बढ़ाया है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जब देश का सर्वोच्च नेतृत्व किसी राज्य की उपलब्धियों और प्रतिभाओं का उल्लेख करता है, तो वह केवल व्यक्तियों का सम्मान नहीं होता, बल्कि करोड़ों प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं, परिश्रम और पहचान को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा मिलती है। मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ आज देश के सकारात्मक प्रयासों, नवाचारों, प्रतिभाओं और प्रेरक जीवन यात्राओं को राष्ट्रीय पहचान देने वाला एक सशक्त मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने आज जशपुर जिले के छोटे से गांव घुइटांगर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले युवा धावक अनिमेष कुजूर की उपलब्धि का उल्लेख कर प्रदेश के युवाओं को यह संदेश दिया है कि सीमित संसाधन किसी प्रतिभा की उड़ान को रोक नहीं सकते, यदि उसके भीतर लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत का जुनून हो। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में अनिमेष कुजूर और गुरिंदरवीर सिंह की उपलब्धि को जिस आत्मीयता और प्रेरक शैली में प्रस्तुत किया, वह देश के युवाओं में नई ऊर्जा भरने वाला है। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान दोनों खिलाड़ियों से फोन पर संवाद करते हुए उल्लेख किया कि पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में महज दो दिनों के भीतर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा और इसे उन्होंने खेलों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का अद्भुत उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह केवल रिकॉर्ड टूटने की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं के आत्मविश्वास, अनुशासन और विश्वस्तरीय सोच की कहानी है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा धावक अनिमेष कुजूर ने 100 मीटर दौड़ मात्र 10.15 सेकंड में पूरी कर नया रिकॉर्ड स्थापित किया है और राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए क्वालीफाई कर प्रदेश तथा देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि अनिमेष की यात्रा विशेष रूप से प्रेरणादायक है, क्योंकि जशपुर के ग्रामीण परिवेश से निकलकर सैनिक स्कूल अंबिकापुर से शिक्षा प्राप्त करने वाले इस युवा ने सीमित परिस्थितियों में अपनी मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग के दम पर विश्वस्तरीय मंच तक पहुंचने का सफर तय किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष की उपलब्धि यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ की धरती प्रतिभाओं से परिपूर्ण है और उचित अवसर मिलने पर यहां के युवा विश्व पटल पर अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री और अनिमेष कुजूर के बीच हुए संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी की सोच विशेष रूप से प्रेरक है। प्रधानमंत्री से बातचीत में अनिमेष ने बताया कि किस प्रकार कोविड काल के दौरान खेल के प्रति रुचि बढ़ी, साथियों के प्रोत्साहन से एथलेटिक्स में प्रवेश हुआ और कठिन चुनौतियों तथा संदेहों के बावजूद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिमेष ने यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय खिलाड़ी विश्वस्तरीय स्प्रिंटिंग में नई पहचान बना सकते हैं और भारतीय युवा किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। यह आत्मविश्वास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में खेल भावना का अत्यंत प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए यह संदेश दिया कि प्रतिस्पर्धा केवल एक-दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए नहीं, बल्कि देश का मान बढ़ाने के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा कही गई यह बात कि "एक-दूसरे को चुनौती भी देना है, आगे निकलने का प्रयास भी करना है और साथ ही एक-दूसरे की मदद के लिए भी खड़े रहना है” वास्तव में भारत की नई खेल संस्कृति की पहचान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार भी इसी सोच के साथ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, बेहतर खेल अधोसंरचना और अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक मल्हार में ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत प्राप्त दुर्लभ ताम्र-पट्टिकाओं का उल्लेख किया जाना भी छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक चेतना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 1400 से 1500 वर्ष पुरानी मानी जा रही ये ताम्र-पट्टिकाएं पांडुवंशी शासनकाल, विशेष रूप से महर्षि बालार्जुन काल से जुड़ी मानी जा रही हैं, जो उस समय की शासन व्यवस्था, संस्कृति, धर्म और सामाजिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई यह धरोहर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा का सशक्त प्रमाण है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार भारत और छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मल्हार की यह खोज केवल पुरातात्विक उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक स्मृति, ऐतिहासिक चेतना और आने वाली पीढ़ियों के ज्ञान-विस्तार से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्याय है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रधानमंत्री राष्ट्रीय मंच से ऐसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं, तो इससे विरासत संरक्षण के प्रति समाज में नई जागरूकता और सम्मान की भावना भी विकसित होती है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का ‘मन की बात’ एपिसोड इस बात का सशक्त उदाहरण है कि नया भारत अपनी प्रतिभा, परिश्रम, खेल भावना, संस्कृति और विरासत – सभी को समान सम्मान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर जशपुर का युवा खिलाड़ी देश को नई गति देने का सपना देख रहा है और दूसरी ओर मल्हार की धरोहर भारत के गौरवशाली अतीत की कहानी कह रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह दोहरी उपलब्धि पूरे प्रदेश में आत्मगौरव, प्रेरणा और नई ऊर्जा का संचार करने वाली है। इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा, सीजीएमएससी के चेयरमैन  … Read more

जहरीली हवा और संकरी सुरंगों में फंसे खनिकों की तलाश, दुनिया भर के गोताखोर जुटे

नई दिल्ली  घुप अंधेरा, जहरीली हवा, कीचड़ से भरी सुरंगें और ऐसा पानी जिसमें हाथ तक दिखाई न दे। लाओस के शायसोम्बौन प्रांत की एक खतरनाक गुफा में फंसे खनिकों को बचाने के लिए पिछले 11 दिनों से दुनिया के कई देशों के एक्सपर्ट गोताखोर मौत से मुकाबला कर रहे हैं। यह ऑपरेशन अब 2018 के मशहूर थाईलैंड ‘थाम लुआंग’ गुफा बचाव अभियान से भी ज्यादा जोखिम भरा माना जा रहा है। 21 मई को सोना और अन्य कीमती खनिज तलाशने गए सात ग्रामीण खनिक अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण गुफा में फंस गए। लगातार बारिश से गुफा का प्रवेश द्वार बंद हो गया और बाहर निकलने के रास्ते पूरी तरह खत्म हो गए। सबसे अहम बात यह रही कि एक खनिक किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहा और उसने प्रशासन को सूचना दी। यही घटना बाकी लोगों की जिंदगी बचाने की उम्मीद बनी। 'कॉफी' जैसा गंदा पानी और दम घोंटने वाली हवा राहत अभियान में शामिल गोताखोरों के मुताबिक गुफा के भीतर का पानी इतना गंदा था कि दृश्यता लगभग शून्य थी। बचावकर्मियों ने इसे 'कॉफी-कलर्ड वॉटर' यानी कॉफी जैसा गाढ़ा और भूरा पानी बताया। गुफा की कई सुरंगें केवल 60 सेंटीमीटर चौड़ी थीं। तुलना करें तो एक बड़ी पिज्जा का व्यास करीब 50 सेंटीमीटर होता है। ऐसे में गोताखोरों को ऑक्सीजन सिलेंडर उतारकर शरीर सिकोड़ते हुए अंदर बढ़ना पड़ा। इसके अलावा गुफा के भीतर चमगादड़ों की बीट से पैदा हुई हाइड्रोजन सल्फाइड गैस मौजूद थी, जिससे बेहोशी या दम घुटने का खतरा बना हुआ था। दुनिया भर के एक्सपर्ट जुटे शुरुआत में लाओस और थाईलैंड की टीमें मौके पर पहुंचीं। बाद में जापान, मलेशिया, इंडोनेशिया, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञ भी अभियान में शामिल हुए। टीम में फिनलैंड के मशहूर गुफा गोताखोर मिक्को पासी भी शामिल थे, जिन्होंने 2018 के थाई गुफा बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि पासी ने साफ कहा कि यह मिशन थाईलैंड ऑपरेशन से कहीं ज्यादा खतरनाक है। उनके मुताबिक, यह प्राकृतिक गुफा नहीं बल्कि सालों से हाथों से खोदी गई अस्थिर खदान है। कई हिस्सों में मिट्टी कभी भी ढह सकती थी। संकरी सुरंगों में एक समय पर केवल एक गोताखोर ही निकल सकता था। पांचवें दिन तक सिर्फ सवाल ही सवाल शुरुआती दिनों में सबसे बड़ा सवाल था कि खनिक जीवित भी हैं या नहीं। अगर वे जिंदा हैं तो क्या उन्हें बाहर निकाला जा सकेगा? बचावकर्मियों को यह भी डर था कि जिन लोगों ने कभी डाइविंग उपकरण नहीं देखे, उन्हें ऑक्सीजन रेगुलेटर और सिलेंडर के सहारे बाढ़ भरी सुरंगों से कैसे निकाला जाएगा? गुफा के बाहर परिवारों का जमावड़ा लगा रहा। महिलाएं और बच्चे लगातार प्रार्थना करते रहे। छठे दिन मिली पहली बड़ी सफलता 27 मई को अभियान में बड़ी सफलता मिली। पांच खनिक गुफा के भीतर प्रवेश द्वार से करीब 300 मीटर दूर एक चट्टान पर बैठे मिले। वे भूखे, कमजोर और डिहाइड्रेटेड थे लेकिन होश में थे। एक खनिक ने कहा कि मां-पिता चिंता मत करो। मैं अभी मजबूत हूं। मैं घर वापस आऊंगा। थाई गोताखोर नोरासेद पलासिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अब मदद पहुंच चुकी है। इसके बाद उन्हें इलेक्ट्रोलाइट्स, खाना, पानी और थर्मल कंबल दिए गए। हर सेकंड मौत का खतरा खनिकों को बाहर निकालना सबसे मुश्किल हिस्सा था। गोताखोरों को पूरी तरह अंधे पानी में केवल स्पर्श के सहारे रास्ता तय करना पड़ा। कई जगह ऑक्सीजन टैंक निकालकर शरीर को धक्का देकर सुरंग पार करनी पड़ी। घबराहट और ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ा। इस बीच मौसम विभाग ने भारी बारिश और तूफान की चेतावनी भी जारी कर दी थी। डर था कि दोबारा बारिश हुई तो गुफा पूरी तरह डूब सकती है। आखिरकार बाहर निकले चार खनिक पानी लगातार पंप करके बाहर निकाला गया। जलस्तर घटने के बाद चार खनिक खुद बाहर निकलने में सफल रहे। वे कीचड़ से लथपथ थे और बाहर आते ही जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद उन्हें ऑक्सीजन दी गई और थर्मल फॉइल कंबलों से ढका गया। ऑस्ट्रेलियाई गोताखोर जोश रिचर्ड्स ने कहा कि मैं अंदर जाने के लिए वेटसूट पहन ही रहा था कि तभी वे खुद बाहर निकल आए। अभी भी दो खनिक लापता अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। बचाव दल के मुताबिक दो खनिक अब भी लापता हैं। जीवित बचे लोगों ने बताया कि वे शायद गुफा में 500 मीटर और अंदर चले गए थे। थाई रेस्क्यू ग्रुप ‘मेट्टा थाम रेस्क्यू कलासिन’ के प्रमुख केंगकाज बोंगकावोंग ने कहा कि टीम अब और गहराई वाले हिस्से में खोज करेगी, लेकिन वह इलाका बेहद ज्यादा पानी से भरा और बेहद खतरनाक है। थाईलैंड और लाओस मिशन में बड़ा अंतर     लाओस मिशन                          थाईलैंड मिशन (2018)     7 खनिक फंसे                         13 बच्चे और कोच फंसे     5 मिले, 2 अब भी लापता             सभी सुरक्षित निकाले गए     अस्थिर सोने की खदान                प्राकृतिक गुफा     60 सेंटीमीटर तक संकरी सुरंगें       अपेक्षाकृत चौड़े रास्ते     जहरीली गैस का खतरा                गैस का बड़ा खतरा नहीं     आंशिक रूप से खुद बाहर निकले    पूरी तरह गोताखोरों पर निर्भर बचाव     प्रवेश द्वार से 300 मीटर दूर मिले    कई किलोमीटर अंदर फंसे थे दुनिया की नजर इस मिशन पर यह अभियान अब दुनिया के सबसे कठिन और खतरनाक गुफा बचाव अभियानों में गिना जा रहा है। हर गुजरते दिन के साथ उम्मीद और खतरा दोनों बढ़ रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजर उन दो लापता खनिकों पर टिकी है, जिन तक पहुंचना शायद अब तक का सबसे मुश्किल चरण साबित हो सकता है।