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वर्ष 2012 से 2017 तक भर्ती प्रक्रिया रही ठप, योगी सरकार ने मिशन मोड में पूरी की चयन प्रक्रिया

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे भर्ती संकट को समाप्त कर व्यवस्था परिवर्तन का नया अध्याय लिखा है। पूर्व में वर्ष 2012 से 2017 तक माध्यमिक शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया लगभग ठप रही, जिसके कारण विद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद रिक्त हो गए और शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से घिर गई।  वर्ष 2017 में योगी सरकार के गठन के बाद स्थिति तेजी से बदली। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को मिशन मोड में आगे बढ़ाते हुए पारदर्शिता, सुशासन और मेरिट को केंद्र में रखा, जिसका परिणाम 33,401 पदों पर सफल चयन के रूप में सामने आया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2017 से वर्ष 2022 तक प्रधानाचार्यों के 783, प्रवक्ता के 5,321 तथा प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) के 27,297 पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई। इस प्रकार कुल 33,401 पदों पर भर्ती कर माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को नया संबल प्रदान किया गया। नीति स्पष्ट, नीयत साफ और नतीजे सामने माध्यमिक शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया की यह सफलता योगी सरकार की नीति, नीयत और नतीजों का स्पष्ट उदाहरण है। सरकार की नीति विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर कर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की रही, नीयत पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की रही, जबकि इसका नतीजा हजारों रिक्त पदों पर भर्ती के रूप में सामने आया। जहां पूर्ववर्ती सरकार के दौरान चयन प्रक्रिया ठहराव का शिकार रही, वहीं योगी सरकार ने लंबित प्रक्रियाओं को गति देकर यह साबित किया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी प्रशासनिक क्रियान्वयन से वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान संभव है। माध्यमिक शिक्षा में 33 हजार से अधिक पदों पर भर्ती केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें ठप पड़ी चयन प्रक्रिया को गति मिली, युवाओं को अवसर मिला और विद्यालयों को शिक्षक मिले।  योगी सरकार ने दूर की विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया प्रभावित रहने के कारण माध्यमिक विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती बन चुकी थी। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा था। योगी सरकार ने इस चुनौती को शिक्षा सुधार के व्यापक एजेंडे का हिस्सा बनाते हुए रिक्त पदों को भरने की दिशा में ठोस कदम उठाए। परिणामस्वरूप लंबे समय से लंबित चयन प्रक्रियाओं को गति मिली और हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। बड़ी संख्या में टीजीटी, प्रवक्ता और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति से विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ी है। इससे शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में भी सहायता मिली है। विद्यालयों में शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूत करने के लिए प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां भी महत्वपूर्ण साबित हुईं हैं, जिससे प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक वातावरण दोनों बेहतर हुए हैं। शिक्षा सुधारों को मिला मजबूत आधार प्रदेश में ऑपरेशन अलंकार, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल शिक्षा और नकलविहीन परीक्षा प्रणाली जैसी पहल के साथ-साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाई है। पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता से विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को नई गति मिली है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार और मजबूत हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों का स्वर्णिम कार्यकाल अभिनंदन योग्य

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। प्रधानमंत्री  मोदी के 12 वर्षों के स्वर्णिम कार्यकाल के लिए उनका अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के मार्ग दर्शन में मध्यप्रदेश भी निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। मध्यप्रदेश के गठन के बाद यहां सिर्फ 5 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन हमारी सरकार ने जनहित को सर्वोपरि रखा और पिछले दो साल में ही प्रदेश को 7 नए मेडिकल कॉलेजों की सौगात मिल चुकी है। मध्यप्रदेश में शाजापुर जिले की अपनी एक अलग पहचान रही है। शुजालपुर के सुंदरसी का संबंध पुराने समय में सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ता है। शुजालपुर शाजापुर जिले की सबसे सक्षम और संपन्न तहसील है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, शुजालपुर में आयोजित कॉलेज चलो अभियान और प्रदेश के महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया के शुभांरभ के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय तथा आयुष चिकित्सालय का किया भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 388 करोड़ रुपये की लागत से 43 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया। इसके साथ ही 70 करोड़ रुपये की लागत से आयुर्वेदिक महाविद्यालय, चिकित्सालय और 14 करोड़ 37 लाख की लागत से 50 बिस्तरीय आयुष चिकित्सालय का भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 4 सांदीपनि विद्यालयों का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 122 करोड़ रुपये की लागत से माँ शारदा सांदीपनि विद्यालय, महाराणा प्रताप सांदीपनि विद्यालय, मिहिर भोज सांदीपनि विद्यालय और राजा भोज सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में 14 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से 4 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का लोकार्पण संपन्न हुआ। प्रदेश में गेहूं खरीद का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शुरू से ही मध्यप्रदेश संभावनाओं का प्रदेश था, लेकिन प्रदेश में 2002-03 तक केवल साढ़े 7 लाख हेक्टेयर भूमि ही सिंचित थी। गांवों में किसानों को बिजली नहीं मिलती थी, पानी-बिजली-सड़क, हर व्यवस्था में गढ्ढे थे। हमारी सरकार ने सिंचाई का रकबा बढ़ाया है और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम भी दिलवाया है। इसी वर्ष किसानों से 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा गया। प्रदेश में गेहूं खरीद का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। हम किसान कल्याण वर्ष की घोषणाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। देश में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला जा चुका हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन के माध्यम से प्रदेश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रही है। राज्य के प्रत्येक गरीब, किसान, युवा और महिला सहित सभी वर्गों के जरूरतमंदों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। आज देशभर में 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया हैं। यह गर्व का विषय है। आज उज्जैन से लेकर अयोध्या और धार की भोजशाला तक जयकारे गूंज रहे हैं। हमारी सरकार न्यायालय के निर्णय को लागू कराने की प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में विकास की गंगा प्रवाहमान है। नए मेडिकल कॉलेज और आयुर्वेदिक कॉलेज खुल रहे हैं। आगामी ढाई साल में प्रदेश के विकास कार्यों में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए आज का दिन ऐतिहासिक उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने कहा कि शुजालपुर शिक्षा की स्थली रही है। आज यहां से शाजापुर जिले को स्कूल शिक्षा और आयुष की बड़ी सौगात मिल रही है। शाजापुर को 4 नए सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण किया गया है। इनके नाम हमारे महापुरुषों के नाम पर रखे गए हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा में प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। प्रदेश में पिछले ढाई साल में 9 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय शुरू करने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। राज्य में नई सरकार बनने के बाद 11 नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। उज्जैन में आरंभ होगा शासकीय होम्योपैथिक महाविद्यालय मंत्री  परमार ने कहा कि एक शासकीय होम्योपैथिक महाविद्यालय उज्जैन में खोला जाएगा। नागरिकों के लिए बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मध्यप्रदेश नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में पीएम एक्सीलेंस कॉलेज खोले गए हैं। युवाओं को कृषि की पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा है। बच्चों को स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है, जिसका परिणाम इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में देखने को मिला है। मंत्री  परमार ने शुजालपुर में सड़कों के चौड़ीकरण की आवश्यकता बताई तथा अन्य स्थानीय अपेक्षाओं से मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अवगत कराया। मंदसौर से भोपाल के स्वीकृत नए फोर लेन का लाभ, गुना, राजगढ़, शाजापुर को मिलेगा सांसद  महेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अधोसंरचना विकास के उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा मंदसौर से भोपाल के स्वीकृत नए फोर लेन मार्ग का लाभ, गुना, राजगढ़, शाजापुर और शुजालपुर के आसपास के क्षेत्र को भी मिलेगा। कार्यक्रम में शाजापुर जिले के प्रभारी मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा, विधायक  घनश्याम चंद्रवंशी तथा  अरुण भीमावद, जिला पंचायत अध्यक्ष  हेमराज सिसोदिया तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। शुजालपुर के लिये मुख्यमंत्री ने की घोषणाएँ              पुलिस चौकी शुजालपुर से व्हाया भीलखेड़ी, मेहरखेड़ी, कालापीपल का 2 लाइन रोड              शाजापुर बायपास – आष्टा रोड से पचोर रोड – शुजालपुर बायपास              अकोदिया में कॉलेज              गौलाना में बायपास रोड              गौलाना को नगर पंचायत बनायेंगे              शुजालपुर में सुरक्षा कर्मियो के लिए पुलिस आवास              शुजालपुर थाना मण्डी में बल के लिये विभिन्न श्रेणी के 50 बल वृद्धि करने मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुजालपुर में शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से निकलते हुए आम जनता से मिलने के लिए डेढ़ किमी लंबा रोड शो किया। इस अवसर पर अनेक सामाजिक संस्थाओं के द्वारा 50 से अधिक मंचों से मुख्यमंत्री का पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री … Read more

बिहार में विकास योजनाओं के साथ वैचारिक एजेंडे के समन्वय की नई रणनीति

पटना  बिहार में सत्ता की बागडोर संभालने के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भाजपा के आस्था और अध्यात्म के कोर एजेंडा को सर्वोपरि मान योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर निर्माणाधीन पुल का नामकरण गंगा-अंबिका पथ करने की घोषणा की है। भाजपा के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की राह पर अग्रसर हाेते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरस्वती शिशु मंदिर की तर्ज पर सरस्वती विद्या निकेतन स्कूल खोलने मन बनाए हैं सरस्‍वती विद्या निकेतन बनेगा मॉडल स्‍कूल इन विद्यालयाें में आधुनिक दौर के निजी स्कूलों से बेहतर व्यवस्था होगी। एक तरह से ये माॅडल स्कूल होंगे। दरअसल, भाजपा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लंबे समय से भारतीय सांस्कृतिक विरासत, आस्था और शिक्षा के क्षेत्र में वैचारिक हस्तक्षेप को अपने प्रमुख एजेंडे के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। ऐसे में सम्राट चौधरी की हालिया पहलें इसी व्यापक राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण का हिस्सा मानी जा रही हैं। मुख्यमंत्री द्वारा गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर निर्माणाधीन नए पुल का नाम गंगा-अंबिका पथ रखने की घोषणा को केवल नामकरण भर नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बिहार के सार्वजनिक स्थलों और अधोसंरचना परियोजनाओं को सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान से जोड़ने की कोशिश का हिस्सा है। भाजपा लंबे समय से विकास एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के समन्वय की राजनीति करती रही है और सम्राट चौधरी उसी सूत्र को बिहार में आगे बढ़ाते दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में सरकार की ओर से सरस्वती विद्या निकेतन नाम से नए विद्यालयों की स्थापना की तैयारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि इन विद्यालयों की अवधारणा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से संचालित सरस्वती शिशु मंदिरों के माॅडल से प्रभावित होगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे मॉडल स्‍कूल हालांकि इन्हें आधुनिक शिक्षा, अत्याधुनिक संसाधनों और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं से लैस करने की योजना है, ताकि ये निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्यालयों को भी चुनौती दे सकें। स्वयं मुख्यमंत्री यह घोषणा कर चुके हैं कि स्कूल ऐसे होंगे कि अधिकारी एवं प्रतिष्ठित लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सिफारिश करेंगे। सरकार की सोच है कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्ति का माध्यम न होकर भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों से भी जुड़ी हो। इसी कारण इन प्रस्तावित विद्यालयों में आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कार आधारित शिक्षा तथा स्थानीय सांस्कृतिक विरासत पर विशेष बल दिए जाने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो सम्राट चौधरी का यह कदम भाजपा के परंपरागत समर्थक वर्ग को मजबूत संदेश देने वाला माना जा रहा है। बिहार में भाजपा लंबे समय से सांस्कृतिक और वैचारिक मुद्दों को विकास के एजेंडे के साथ जोड़ने की कोशिश करती रही है। सावरकर पर पाठ्यक्रम लागू करने की घोषणा मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी इन प्रयासों को सरकारी योजनाओं और संस्थागत ढांचे के माध्यम से नई गति देना चाहते हैं। वीर विनायक दामोदर सावरकर पर शोध उपरांत पाठ्यक्रम में लागू करने, आदिवासी क्षेत्र में मैराथन कराने के साथ विजेताओं को एक लाख रुपये, 75 हजार रुपये एवं 50 हजार रुपये देने की घोषणा दूरगामी रणनीति है। विपक्ष इस तरह की घोषणाओं को वैचारिक एजेंडे के विस्तार के रूप में देख सकता है, लेकिन भाजपा इसे भारतीय परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में आवश्यक कदम बता रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं के अनुरूप संस्थानों और परियोजनाओं का नामकरण होते रहे हैं, इसलिए बिहार में भी ऐसी पहल स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री के कदम इस बात का संकेत दे रहे हैं कि वे बिहार में केवल प्रशासनिक उपलब्धियों के आधार पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक पहचान के माध्यम से भी अपनी अलग राजनीतिक छाप छोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।  

कानून-व्यवस्था पर योगी का अल्टीमेटम, नोएडा-लखनऊ समेत 8 जिलों के अधिकारियों को चेतावनी

 लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के कुछ जिलों में पिछले दिनों हुईं बड़ी आपराधिक घटनाओं पर शनिवार को कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने आठ जिलों की समीक्षा की और पुलिस प्रमुख व जिलाधिकारियों को अपनी सरकार की प्राथमिकता से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने वाराणसी, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, लखनऊ के डीएम व पुलिस कमिश्नरों के साथ ही जौनपुर, पीलीभीत, बागपत व गाजीपुर के डीएम व एसपी को जमकर फटकार लगाई। मुख्यमंत्री ने डीजीपी राजीव कृष्ण की मौजूदगी में सभी को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर जिला नहीं संभाल पा रहे हैं तो बता दें। लापरवाही पर सीधी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य में पिछले कुछ दिनों में कई जिलों में लगातार बड़ी आपराधिक घटनाएं हुई हैं। विपक्ष लगातार इन घटनाओं को लेकर कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। इसे लेकर मुख्यमंत्री ने बीते कुछ दिनों में सर्वाधिक बड़ी आपराधिक घटनाओं वाले जिलों की रिपोर्ट तलब की थी। नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को फटकार मुख्यमंत्री ने शनिवार की देर रात तक संबंधित जिलों के पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की और एक-एक घटना को लेकर अधिकारियों की प्रतिक्रिया जानी। गौतमबुद्धनगर पिछले कई दिनों से आपराधिक घटनाओं को लेकर चर्चा में है। हाल ही में किन्नर की हत्या सहित जिले में हुए अन्य अपराधों को लेकर मुख्यमंत्री ने कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को कानून-व्यवस्था कायम करने को लेकर चेतावनी दी है। लखनऊ के पुलिस कमिश्नर को भी वार्निंग वहीं लखनऊ में पिछले दिनों हुई भाजपा नेता शिवम सिंह की हत्या को लेकर भी मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र सिंह सेंगर को यहां तक कह दिया कि लखनऊ के नवविकसित क्षेत्रों में अपराधिक घटनाएं क्यों नहीं रुक रही हैं। चेतावनी भरे लहजे में जमकर फटकारा पिछले दिनों वाराणसी के सारनाथ में एक युवक की पिटाई से हुई मृत्यु व मनीष सिंह हत्याकांड, गाजियाबाद में बकरीद वाले दिन 17 वर्षीय सूर्या चौहान की चाकुओं से गोदकर हत्या करने के मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने वहां के पुलिस कमिश्नरों को भी चेतावनी भरे लहजे में जमकर फटकारा। पीलीभीत में पिछले दिनों कपड़ा व्यापारी पंकज गुप्ता की हत्या, जौनपुर में दूल्हे आजाद की हत्या, बागपत में कूलर मैकेनिक चंद्रपाल व एक अन्य व्यक्ति की हत्या के मामले में मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों के पुलिस कप्तानों को चेतावनी दी है। गाजीपुर में होटल व्यवसायी आलोक राय उर्फ डब्बू के बेटे विनित राय की गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने गाजीपुर के कप्तान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। बैठक में संबंधित क्षेत्रों के मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, एडीजी जोन, आइजी व डीआइजी रेंज भी मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने संबंधित पुलिस अधिकारियों से कहा है कि अगर कानून व्यवस्था नहीं सुधार सकते हैं तो अंजाम भुगतने के लिए भी तैयार रहें। बैठक में मुख्यमंत्री के बेहद कड़े रुख के बाद हरकत में आए पुलिस अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में कानून-व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी।  

दिल्ली: मेजरमेंट बुक संकट से ठप पड़ी कामों की एंट्री, गुणवत्ता पर खतरा

नई दिल्ली  एमसीडी में पिछले 4-6 महीने से मेजरमेंट बुक का भारी अकाल पड़ा हुआ है। मेजरमेंट बुक न होने की वजह से संबंधित डिविजनों (मेंटिनेंस) के तहत चल रहे हजारों कामों की मेजरमेंट बुक में एंट्री नहीं हो पा रही है। जब मेजरमेंट बुक में एंट्री ही नहीं हो पा रही है तो संबंधित डिविजनों में कॉन्ट्रैक्टर जितने भी काम कर रहे हैं उनकी कोई निगरानी नहीं हो रही है। इसका सीधा असर काम की क्वॉलिटी पर पड़ेगा। एमसीडी के पास खुद की प्रिटिंग प्रेस सूत्रों का कहना है कि यह स्थिति तो तब है जबकि एमसीडी को मेजरमेंट बुक किसी बाहरी प्रिंटर से नहीं छपवानी, बल्कि सिविल लाइन स्थित अपनी ही प्रिंटिंग प्रेस पर छापनी है। बावजूद इसके पिछले कई महीनों से डिविजनों में मेजरमेंट बुक उपलब्ध नहीं हो पा रही। दिल्ली सरकार की ओर से सड़कें, गलियां और कॉलोनियों की टूटी पुलिया आदि बनाने के लिए भरपूर फंड उपलब्ध कराया हुआ है। MCD के 12 जोनों में चल रहे विकास कार्य वॉर्ड वाइज काम कराने के लिए संबंधित जोन की डिविजनों द्वारा टेंडर मांगे जाते हैं। टेंडर अलॉट होने के बाद जब कॉन्ट्रैक्टर काम शुरू करता है उसी दिन से मेजरमेंट बुक में एंट्री करने का काम शुरू हो जाता है। एमसीडी के 12 जोनों के तहत आने वाली मेंटिनेंस डिविजनों में हजारों काम चल रहे हैं। किसी वॉर्ड में कॉलोनी के अंदर ही सड़कें बनाने का काम चल रहा है तो कहीं पर गलियों के साथ-साथ नालियों को बनाया जा रहा है। कॉन्ट्रैक्टर को काम शुरू करने से पहले करनी होती है एंट्री इसके अलावा जिन कॉलोनियों में पुलिया टूटी हुई थी उन्हें भी दोबारा बनाया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि कॉन्ट्रैक्टर जब काम शुरू करता है तो उसके हर दिन वह जो भी काम करता है उसकी एंट्री मेजरमेंट बुक में की जाती है। उदाहरण के रूप में अगर कोई कॉन्ट्रैक्टर कहीं पर सड़क बनाने का काम कर रहा है तो सड़क बनाने से पहले वह पुरानी सड़क को तोड़ेगा। कॉन्ट्रैक्टर ने किस दिन कितनी सड़क तोड़ी यह सब मेजरमेंट बुक में दर्ज किया जाता है। प्रिंटिंग प्रेस अपनी, फिर मेजरमेंट बुक क्यों नहीं ? प्रिंटिंग प्रेस अपनी, प्रिंटिंग प्रेस पर काम करने वाला स्टॉफ भी अपना, पेपर की भी कोई कमी नहीं, बावजूद इसके मेजरमेंट बुक का अकाल पड़ना एमसीडी के प्रिंटिंग प्रेस विभाग पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। डिविजन के लिए मेजरमेंट बुक का बड़ा महत्व है। कॉन्ट्रैक्टर को जो वर्कआर्डर मिलता है शुरुआत से लेकर आखिर तक छोटे से छोटे काम की एंट्री इसमें दर्ज होती है। मेजरमेंट बुक कितनी महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वजह से कई डिविजनों में काम शुरू नहीं हो पाए।

कचहरी रोड पर फिल्मी नजारा: बंदर ने 500-500 के नोट हवा में उड़ाए, भीड़ जुटी

बुलंदशहर  कहावत है कि ऊपर वाला जब भी किसी पर मेहरबान होता है तो उसे छप्पर फाड़ के धन दौलत देता है। बुलंदशहर में शनिवार को कचहरी रोड पर एक बंदर ने पेड़ पर चढ़ कर दो लाख रुपये के नोटों की जमकर बरसात की। वकीलों के साथ अन्य लोग भी 500-500 रुपये के नोट बटोरने में जुट गए। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। यह मामला शहर से लेकर गांव तक चर्चा का विषय बना है। इसी बीच लोगों ने वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दिया। प्रसारित वीडियो को बड़ी संख्या में लोग लाइक कर रहे हैं। रजिस्ट्री करने स्टांप पेपर खरीदने को नोटों से भरे बैग को लेकर कचहरी जा रहे अधिवक्ता से बैग को लेकर बंदर नीम के पेड़ पर चढ़ गया। उसके बाद बंदर ने नोटों की जमकर बरसात की। नोट उठाने के लिए अधिवक्ताओं के अलावा आम लोग भी टूट पड़े। इस घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बड़ी तेजी से प्रसारित हो रहा है। आदतन बंदर ने नीम की डाली पर बैठकर बैग को फाड़ दिया और खाने के सामान की तलाश में नोटों को बाहर फेंकने लगा। पेड़ के नीचे कुछ लोग जमा थे, लोगों ने 500-500 के नोटों को पेड़ से गिरते देखा तो सब चौंक गए। लोग पेड़ के नीचे नोटों को बटोरने लगे। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने जमीन पर बिखरे पड़े एक लाख 98 हजार रुपये बरामद कर रविन्द्र लोधी को सौंप दिए। दो लाख रुपये के नोटों से भरा बैग छीना कोतवाली नगर पुलिस के अनुसार अधिवक्ता रविंद्र उर्फ राजा अपने साथी आमिर खान और सोहन पाल के साथ प्लाट की रजिस्ट्री करने को शनिवार को स्टांप खरीदने के लिए बैग में दो लाख रुपए की नगदी लेकर कचहरी जा रहे थे। इसी बीच बंदर ने दो लाख रुपये के नोटों से भरा बैग छीन लिया और उसके बाद कचहरी रोड पर लोहा कारोबारी गौरी शंकर के मकान में स्थित नीम के पेड़ की सबसे ऊंची टहनी पर बैठ गया। बैग चोरी होने की आशंका के बीच जब लोगों की नजर ऊपर गई तो नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। एक बंदर वकील का बैग लेकर पेड़ पर चढ़ गया और वहां से 500-500 रुपये के नोट हवा में उछाल रहा था। सड़क पर नोटों की बारिश होने लगी और लोग उन्हें बटोरने के लिए दौड़ पड़े। नोट उठाने को उमड़ पड़ी भीड़ बंदर ने उसके बाद बैग खोलकर नोटों की बरसात करनी शुरू कर दी। नोट को उठाने के लिए पेड़ के नीचे अधिवक्ताओं के साथ आम लोगों की भीड़ भी उमड़ पड़ी। अधिवक्ताओं ने नोटों की बरसात के दौरान एक लाख 91 हजार 500 रुपए एकत्र किए। बंदर उड़ाने लगा 500-500 के नोट पेड़ पर बंदर ने बैग खोल लिया। बैग के अंदर रखे 500-500 रुपये के नोट एक-एक करके नीचे फेंकनी शुरू कर दिया। कुछ ही देर में हवा में जमीन पर गिरने लगे। पेड़ के नीचे और आसपाल मौजूद लोगों ने जब नोट गिरते देखा तो वहां भीड़ जमा हो गई। कई लोग नोट उठाने लगे तो कुछ मोबाइल फोन पर पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाने लगे। पेड़ पर चढ़ा व्यक्ति वकील साहब के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने रुपये और जरूरी दस्तावेजों से भरा बैग वापस पाना था। ऐसे में एक व्यक्ति साहस दि खाते हुए पेड़ पर चढ़ गया और बंदर से बैग छीनने की कोशिश की। इसके कुछ देर बाद बंदर बैग छोड़कर भाग गया। इसके बाद बैग को सुरक्षित नीचे उतार कर वकील को सौंप दिया गया।  

राजस्थान के श्री सांवलिया सेठ मंदिर में 16 करोड़ की अलौकिक कलाकृति बनी आकर्षण का केंद्र

चित्तौड़गढ़  राजस्थान के विख्यात कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में श्रद्धालुओं की अगाध आस्था अब सोने और चांदी की दिव्य भव्यता के रूप में साकार हो उठी है। मंदिर मंडल द्वारा भक्तों से चढ़ावे के रूप में मिले 20 किलोग्राम सोने और 120 किलोग्राम चांदी का उपयोग करके ठाकुर जी के गर्भगृह के लिए एक अत्यंत मनमोहक और अलौकिक पिछवाई तैयार करवाई गई है। भगवान श्रीकृष्ण की मूल प्रतिमा के ठीक पीछे स्थापित की गई यह नई पिछवाई अपनी बेजोड़ कलात्मकता और वैभव के कारण इन दिनों मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। सागवान की लकड़ी पर नक्काशी इस भव्य कलाकृति को तैयार करने में उस समय लगभग 16 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत आई थी। इसकी मजबूती को बनाए रखने के लिए इसे सागवान की उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी के विशेष पैनल पर मढ़ा गया है। सोने और चांदी की अत्यंत महीन व बारीक नक्काशी से सुसज्जित यह कलाकृति मंदिर के गर्भगृह के सौंदर्य को एक अद्वितीय और दिव्य स्वरूप प्रदान करती है। आपको बता दें कि इस प्रसिद्ध मंदिर को राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी धार्मिक सर्किट योजना में भी शामिल किया गया है। राजकोट के कारीगरों की मेहनत इस दिव्य पिछवाई के निर्माण के विषय में जानकारी देते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष हजारीलाल वैष्णव ने बताया कि इस अलौकिक कृति को आकार देने के लिए विशेष रूप से गुजरात के राजकोट से कुशल शिल्पकारों को आमंत्रित किया गया था। इस पूरी कलाकृति को धरातल पर उतारने में कारीगरों को पूरे 90 दिनों का समय लगा। इस ऐतिहासिक काम की कुल निर्माण लागत 16 करोड़ रुपये रही है। सीसीटीवी की निगरानी में पिघलाया गया सोना-चांदी सबसे पहले चढ़ावे में आए सोने और चांदी को उच्च तापमान पर गलाकर उनकी सिल्लियां तैयार की गईं, जिन्हें बाद में आधुनिक मशीनों की मदद से महीन और पतली शीट्स में परिवर्तित किया गया। इन तैयार स्वर्ण और रजत शीट्स पर अनुभवी कारीगरों द्वारा बेहद बारीक नक्काशी की गई और फिर इन्हें सागवान की लकड़ी से बने सुदृढ़ पैनलों पर मजबूती से फिट कर दिया गया। मूल्यवान धातुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्माण के दौरान पूरे मंदिर परिसर में 24 घंटे सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। धातु को गलाने से लेकर नक्काशी करने तक की संपूर्ण निर्माण प्रक्रिया को चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरों की सख्त निगरानी में अंजाम दिया गया। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए किसी भी बाहरी कोष या फंड से कोई मदद नहीं ली गई, बल्कि यह पूर्ण रूप से भक्तों द्वारा ठाकुर जी के चरणों में समर्पित किए गए सोने और चांदी से ही संपन्न हुआ।

अंतरिम व्यापार समझौते की ओर बढ़े भारत-अमेरिका संबंध, टैरिफ और बाजार पहुंच पर फोकस

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है, अब केवल इस डील पर ऑफिशियल मुहर लगनी बाकी है। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी 1 जून से नई दिल्ली में चार दिनों तक बैठक करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Pact) को अंतिम रूप देने और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर खास बातचीत भारत की तरफ से इस डील में नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन करेंगे। वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच करने वाले हैं। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, बैठक में कई अहम विषयों पर बातचीत होगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-     बाजार पहुंच (Market Access)     गैर-शुल्क बाधाएं (Non-Tariff Measures)     सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा     निवेश प्रोत्साहन     आर्थिक सुरक्षा सहयोग     सप्लाई चेन से जुड़ी रणनीतिक साझेदारी दोनों देश पहले चरण के अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने के साथ-साथ दीर्घकालिक व्यापक व्यापार समझौते के लिए कानूनी और नीतिगत ढांचे पर भी चर्चा करेंगे। फरवरी में बनी थी ट्रेड डील की रूपरेखा भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा तय की थी। इसके तहत दोनों देशों ने चरणबद्ध तरीके से व्यापारिक बाधाएं कम करने और टैरिफ में राहत देने पर सहमति जताई थी। समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए शुल्कों में कटौती करने का आश्वासन दिया था। अमेरिका ने पहले भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% तक शुल्क लगाया था, जिसे घटाकर 18% करने की बात कही गई थी। इसके अलावा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25% अतिरिक्त शुल्क को भी हटाने और शेष शुल्क को 18% तक सीमित करने का प्रस्ताव था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदला समीकरण अमेरिका की घरेलू राजनीति और टैरिफ नीति में बदलाव के कारण वार्ताओं की दिशा प्रभावित हुई। 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को चुनौती देने वाले मामले में फैसला सुनाया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10% समान शुल्क लागू करने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद फरवरी में प्रस्तावित भारत-अमेरिका वार्ता टल गई थी। ट्रेड डील पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अप्रैल 2026 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वॉशिंगटन की यात्रा की और बात को आगे बढ़ाया। भारत की ओर से बड़े प्रस्ताव भारत ने व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं पर शुल्क घटाने या समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है।     डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स (DDGs)     रेड सोरघम (पशु आहार)     ट्री नट्स     ताजे और प्रोसेस्ड फल     सोयाबीन तेल     वाइन और स्पिरिट्स इसके बदले भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदने की इच्छा जताई है।     ऊर्जा उत्पाद     विमान और विमान कलपुर्जे     बहुमूल्य धातुएं     प्रौद्योगिकी उत्पाद     कोकिंग कोल विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई दे सकता है। भारत-अमेरिका व्यापार का मौजूदा परिदृश्य अमेरिका वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर सामने आया। भारत का अमेरिका को निर्यात बढ़कर 87.3 अरब डॉलर पहुंच गया। अमेरिका से आयात 15.95% बढ़कर 52.9 अरब डॉलर रहा। भारत का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 40.89 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के सभी देशों पर समान 10% शुल्क लागू किए जाने के बाद वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा का नया माहौल बन गया है। ऐसे में भारत और अमेरिका दोनों अपने-अपने हितों के हिसाब से समझौते की शर्तों में बदलाव कर सकते हैं।  

पाकुड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 13 मामलों में वांछित अमन अंसारी दबोचा गया

 पाकुड़  कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन नगर थाना क्षेत्र में सक्रिय शातिर दिमाग अपराधी अमन अंसारी ने इन हाथों को बार-बार बौना साबित करने की कोशिश की है। अमन आज पाकुड़ शहर और आसपास के इलाकों में खौफ, चोरी और नशे के काले कारोबार का दूसरा नाम बन चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि अमन किसी अंतर-प्रांतीय गैंग का हिस्सा नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही इतना सक्रिय है कि सिर्फ नगर थाना क्षेत्र में उसके खिलाफ 13 संगीन मामले दर्ज हैं। एक ही थाने की डायरी में किसी एक अपराधी का नाम बार-बार आना यह साफ बयां करता है कि वह पुलिस के लिए एक बड़ा सिरदर्द और आम अवाम के सुकून के लिए नासूर बन चुका है। अपराधी अमन अंसारी का अपराध की दुनिया का इतिहास आज का नहीं, बल्कि पूरे 11 साल पुराना है। पुलिस रिकार्ड के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि उसने साल 2015 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। शुरुआती दौर वर्ष 2015 में अमन के विरुद्ध पाकुड़ नगर थाना क्षेत्र में चोरी और सेंधमारी करने का पहला मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद अमन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अमन के अपराध के रिकार्ड ने यह साबित कर दिया है कि वह मामूली चोर नहीं, बल्कि एक आदतन अपराधी बन चुका है। अमन अंसारी का यह पूरा क्रिमिनल ग्राफ दिखाता है कि वह हर बार जेल जाता है, जमानत पर बाहर आता है और फिर से उसी दुस्साहस के साथ पाकुड़ नगर थाना क्षेत्र को अपनी आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बना लेता है। सेंधमारी से लेकर नशा तस्करी का फैलाया जाल समय के अनुसार अमन अंसारी का हौंसला बुलंद होता चला गया। उसने सिर्फ घरों में ताले चटकाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि शहर के युवाओं को खोखला करने वाले नशीले पदार्थों के धंधे में भी पैर पसार लिया। वर्ष 2019 में पाकुड़ नगर थाना में उसके खिलाफ एनडीपीएस के तहत मामला दर्ज है। यह इस बात का सबूत है कि अमन अब न सिर्फ संपत्ति संबंधी अपराध कर रहा था, बल्कि नशीली दवाओं की तस्करी के सिंडिकेट से भी जुड़ चुका था। रोनी शेख भी हैं चर्चित पुलिस के हत्थे चढ़ा मौलाना चौक निवासी रोनी शेख का भी अपराधिक रिकार्ड रहा है। यह भी शातिर अपराधी है। रोनी के विरुद्ध पाकुड़ नगर थाना में दो मामले दर्ज हैं, जबकि एक मामला पाकुड़ आरपीएफ में है। नलपोखर निवासी बजीर भी इसके पूर्व जेल की हवा खा चुका है। इन अपराधियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने राहत की सांस ली है। पुलिस ने राहत की सांस लॉकडाउन के समय यानी वर्ष 2020 में भी वह काफी सक्रिय रहा। उस समय भी अमन ने सूनी सड़कों और बंद दुकानों को अपना निशाना बना रहा था। वर्ष 2021, वर्ष 2022 में अमन सक्रिय रहा। पुलिस के लिए वह सिरदर्द बन गया था। हाल ही में शहर में हुई कई चोरी की घटनाओं में शामिल है। अमन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है।  

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में सत्तू और जर्दालु आम का किया जिक्र, बिहार में खुशी

पटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम के 134वें एपिसोड में वैसे तो कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान पीएम मोदी ने बिहार के मशहूर पेय पदार्थ सत्तू का भी जिक्र किया। ‘मन की बात’ में पीएम ने बिहार के जर्दुालु आम के बारे में भी चर्चा की है। पीएम मोदी द्वारा सत्तू और जर्दालु आम का उल्लेख किए जाने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी काफी गदगद नजर आए। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि इससे बिहार की इन चीजों को देश-विदेश में पहचान मिलेगी। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बिहार का विशेष उल्लेख किए जाने पर उनके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। पीएम के 'मन की बात' को सुनने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की भिन्न-भिन्न खासियतों एवं पहलुओं पर देशवासियों से सीधे संवाद कर उन्हें प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' कार्यक्रम में बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय उत्पादों और जनजीवन से जुड़े विषयों का उल्लेख किया जाना राज्यवासियों के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। सम्राट चौधरी ने कहा कि विशेष रूप से भीषण गर्मी से बचाव के लिए बिहार के पारंपरिक और पौष्टिक पेय सत्तू का उल्लेख तथा राज्य के प्रसिद्ध जर्दालु आम की चर्चा बिहार की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह उल्लेख बिहार के किसानों, उद्यमियों और आम नागरिकों के परिश्रम तथा राज्य की समृद्ध कृषि एवं खाद्य परंपरा का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इससे बिहार के स्थानीय उत्पादों को देश-विदेश में नई पहचान मिलेगी तथा किसान भी प्रोत्साहित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार अपनी सांस्कृतिक धरोहर, कृषि उत्पादों और लोक परंपराओं के माध्यम से देश की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा इन विशेषताओं को राष्ट्रीय मंच पर स्थान दिए जाने से राज्य के लोगों का उत्साह और बढ़ा है। बता दें कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रचंड गर्मी का जिक्र करते हुए देशवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी। इस दौरान पीएम मोदी ने सत्तू का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी तो बात ही क्या है। पेट भी भरे और ताकत भी देता है। प्रधानमंत्री ने फलों के राजा आम का भी उल्लेख करते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में शायद ही कोई घर हो, जहां आम की चर्चा न होती हो। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र का अपना आम और उसकी अपनी सुगंध होती है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का हापुस या अल्फांसो, गुजरात का केसर- ये तो आमरस की जान हैं। उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा। पीएम नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में आ जाए। चौसा, मालदा…हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई दक्षिण भारत जाए तो उसे बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, पश्चिम बंगाल के हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सुवर्णरखा जैसी अन्य किस्में मिलेंगी। उन्होंने कहा कि जगह बदलती है और साथ ही आम का रूप-रंग एवं उसका स्वाद भी बदल जाता है। आम की यह यात्रा अब गांवों से वैश्विक बाजार तक भी पहुंच रही है।