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बीमा राशि दिलाने के बदले घूस मांगना पड़ा भारी, CBI ने बैंक मैनेजर को रंगे हाथ पकड़ा

रांची. सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने गोड्डा स्थित एसबीआई की डुमरिया शाखा के शाखा प्रबंधक रोहित कुमार सिंह को 77 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई की टीम ने उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके कार्यालय व आवासीय परिसर में भी तलाशी ली है। छानबीन अभी जारी है। उन्हें गिरफ्तार करने के बार सीबीआई ने उन्हें धनबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब रिमांड पर लेकर उनके व अन्य सहयोगियों तथा उनकी चल-अचल संपत्ति के बारे में जानकारी जुटाएगी। पूरा मामला बीमा की राशि व खाते में पड़ी राशि के स्थानांतरण के एवज में रिश्वत मांगने से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने 31 मई को सीबीआई में शिकायत की थी कि उनकी मां का प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत दो लाख रुपये का बीमा था। उनकी मां के दिवंगत होने के बाद दो लाख रुपये के बीमा की राशि के दावे को निष्पादित करने के एवज में बैंक मैनेजर रोहित कुमार सिंह ने 60 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी दिवंगत मां के बैंक खाते में पड़े 35 हजार रुपये के स्थानांतरण के बाद उसकी निकासी पर लगी रोक को हटाने के एवज में भी बैंक मैनेजर ने 17 हजार रुपये की अतिरिक्त रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने पूरे मामले का सत्यापन कराया और इसके बाद आरोपित शाखा प्रबंधक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आरोपित की गिरफ्तारी के लिए सीबीआई ने जाल बिछाया और बैंक मैनेजर को सोमवार को गिरफ्तार किया था और उसके आवासीय व कार्यालय के परिसर में तलाशी ली थी। मंगलवार को उसे कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच जारी है।

मोतियाबिंद ऑपरेशन की बड़ी उपलब्धि, छत्तीसगढ़ में 1.63 लाख से ज्यादा लोगों की लौटी रोशनी

रोशनी लौटाने की मुहिम में छत्तीसगढ़ आगे: 1.63 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन से हजारों चेहरों पर लौटी मुस्कान सरकारी, NGO और निजी संस्थानों की साझेदारी से 91% लक्ष्य हासिल, 15 जिले बने कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री रायपुर  छत्तीसगढ़ में आंखों की रोशनी बचाने और मोतियाबिंद से दृष्टिहिनता मुक्त समाज की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल लगातार प्रभावी साबित हो रही है। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 1 लाख 63 हजार 641 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन पूरे किए गए हैं। यह कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है, जिसने प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाओं की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा Vision 20-20 की अवधारणा के अनुरूप शासकीय संस्थानों, गैर-शासकीय संगठनों (NGO) और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। इसका परिणाम यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों तक भी नेत्र उपचार सेवाएं पहुँच रही हैं और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन द्वारा अनुबंधित संस्थाओं को नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित किए जाने से सेवाओं की निरंतरता और प्रभावशीलता भी बनी हुई है। राज्य में कुल उपलब्धि में शासकीय एवं NGO अस्पतालों की भागीदारी 51 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 49 प्रतिशत योगदान देकर इस स्वास्थ्य अभियान को गति दी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह साझेदारी मॉडल न केवल उपचार की पहुँच बढ़ा रहा है, बल्कि समयबद्ध और व्यवस्थित नेत्र चिकित्सा प्रबंधन का भी उदाहरण बन रहा है। कोविड काल में नेत्र ऑपरेशन प्रभावित होने के कारण मोतियाबिंद के लंबित मामलों में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाकर स्थिति को तेजी से सुधारा है। भारत सरकार की राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना के तहत घर-घर सर्वे कर चिन्हित मरीजों का उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे जिलों को कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (CBBFS) दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है। प्रदेश के 15 जिले अब तक यह स्टेटस प्राप्त कर चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान तेज गति से जारी है। रायपुर स्थित माना का 150 बिस्तरीय नेत्र चिकित्सालय राज्य स्तरीय रेफरल सेंटर के रूप में कार्य करते हुए दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध करा रहा है। वहीं, बड़े शहरों में स्थित NGO बेस अस्पतालों के माध्यम से विभिन्न जिलों के मरीजों का प्रोटोकॉल आधारित सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। समय पर जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार की यह व्यवस्था हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आई है और छत्तीसगढ़ को नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

पंजाब सरकार का बड़ा फेरबदल, 4 PCS अफसरों को मिली नई जिम्मेदारियां

गुरदासपुर. पंजाब सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल करते हुए 4 PCS अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों के आदेश जारी किए हैं। उक्त आदेश मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा के हस्ताक्षरों के तहत कार्मिक विभाग द्वारा जारी किए गए। अधिकारियों को तुरंत नए पदों पर कार्यभार संभालने के निर्देश जारी आदेशों के अनुसार, हरदीप सिंह (2014 बैच) को SDM गुरुहरसहाय नियुक्त किया गया है। वहीं अशोक कुमार (2020 बैच) को SDM गुरदासपुर लगाया गया है। इसके अलावा रमनदीप कौर (2026 बैच) को SDM बनूड़ नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के बाद अंकिता कंसल को दिए गए अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया जाएगा। वहीं, रोबिनजीत कौर (2026 बैच), जो वर्तमान में सहायक आयुक्त (जनरल) तरनतारन के पद पर तैनात थीं, उन्हें तबादला कर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) गुरदासपुर नियुक्त किया गया है। पंजाब सरकार ने सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नए पदों पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए हैं।

’मुख्यमंत्री साय के सुशासन में किसानों को समय पर मिल रही कृषि आदान सामग्री’

रायपुर. नैनो यूरिया और नैनो डीएपी (तरल उर्वरक) कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी नवाचार हैं। ये पारम्परिक उर्वरकों (दानेदार यूरिया और डीएपी) की तुलना में बहुत कम मात्रा में उपयोग किए जाते हैं और पौधे के सीधे संपर्क में आकर तेजी से पोषक तत्व प्रदान करते हैं। नैनो तकनीक के कारण इनका आकार अत्यंत छोटा (20-50 नैनोमीटर) होता है। ये पौधों की कोशिकाओं के अंदर सीधे प्रवेश करके आवश्यक पोषक तत्व (नाइट्रोजन और फास्फोरस) प्रदान करते हैं, जिससे फसल का विकास अच्छा होता है और पैदावार बढ़ती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में आगामी खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां सुनिश्चित की गई हैं। जिले की सहकारी समितियों के माध्यम से खाद एवं उन्नत बीजों का पर्याप्त भंडारण किया गया है, जिससे कृषकों को समय पर आवश्यक कृषि सामग्रियां मिल रही हैं। किसान अब बिना किसी कठिनाई के अपनी आवश्यकतानुसार खाद-बीज प्राप्त कर रहे हैं। ’आधुनिक खेती से समृद्ध हो रहे कृषक छेदीलाल’ पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की तुलना में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की बोतलें बहुत सस्ती और किफायती होती हैं पारंपरिक उर्वरकों से होने वाले गैसीय उत्सर्जन और लीचिंग (पानी के साथ बहकर जमीन में जाने) की समस्या नैनो उर्वरकों से न के बराबर होती है, इससे भूमि, जल और वायु प्रदूषण कम होता है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के ग्राम ढेलवाडीह के निवासी कृषक श्री छेदीलाल उरांव ने विकासखंड सोनपुरी स्थित सहकारी समिति से आगामी खरीफ फसल के लिए खाद और बीज प्राप्त किया है। लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले श्री उरांव का 6 से 7 सदस्यों का परिवार पूरी तरह कृषि पर ही आश्रित है और वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। श्री उरांव ने बताया कि उन्होंने इस सीजन के लिए यूरिया एवं डीएपी उर्वरक ले लिया है। इसके साथ ही वे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए अपनी 1 एकड़ भूमि में हरित खाद के रूप में ढैंचा एवं मूंग की बुआई भी करेंगे। ’नैनो उर्वरकों के चमत्कारी परिणाम’ कृषक उरांव ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग के अपने बेहतरीन अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले वर्ष इसके प्रयोग से उन्हें काफी लाभ हुआ था। नैनो डीएपी पौधों तक पोषक तत्वों की त्वरित और प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि यह मिट्टी की जैविक गुणवत्ता और उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायक है। यह पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देता है और खेती की लागत को भी नियंत्रित करता है। ’मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार’ उरांव ने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों के समावेश से अब खेती अधिक मुनाफे का सौदा साबित हो रही है। उन्होंने संकटमुक्त होकर समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर, आधुनिक और समृद्ध बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

पानी की कमी से निपटने के लिए दिल्ली सरकार का नया ऐलान, सीवर वॉटर होगा इस्तेमाल

नई दिल्ली दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने राजधानी में जल संकट को दूर करने के लिए कई नए उपायों की घोषणा की है। भीषण गर्मी के बीच हो रही किल्लत को स्वीकार करते हुए दिल्ली सरकार ने पिछली सरकारों को इसके लिए कसूरवार ठहराया तो यह भी बताया कि अब स्थिति में बदलाव के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री प्रवेश वर्मा ने मंगलवार को बताया कि उनकी सरकार सीवर के पानी को साफ करके भी पानी की कमी को पूरा करने पर विचार कर रही है। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे सीवर के पानी को ट्रीट करके टॉयलेट या गाड़ी धोने जैसे काम में लाया जा सकता है। प्रवेश वर्मा ने बताया कि दिल्ली में रोजाना 1000 एमजीडी पानी घरों में सप्लाई हो रहा है। इसमें से 800 एमजीडी पानी प्रतिदिन सीवर में लौटता है, जबकि केवल 200 एमजीडी पानी का इस्तेमाल लोग पीने या अन्य उपभोग में लाते हैं। प्रवेश वर्मा ने कहा कि सीवर के पानी को एसटीपी प्लांट में इतना ट्रीट किया जाएगा कि वह पीने लायक बन जाएगा। लेकिन फिलहाल उन्हें टायलेट आदि में यूज किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'इस पानी को सबसे पहले सरकारी इमारतों में पहुंचाया जाएगा। इसके बाद कॉलोनियों में डबल पाइपलाइन से पानी पहुंचाया जाएगा। जो लोग डबल पाइपलाइन लगवाएंगे उन्हें बिल में छूट दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि एसटीपी में साफ किए गए पानी का इस्तेमाल लोग शौचालय, पौधे में डालने, गाड़ी धोने आदि कामों के लिए कर सकेंगे। इससे मीठे पानी की बचत होगी। प्रवेश वर्मा ने कहा कि कि इससे रोजाना करोड़ों लीटर पानी बचाया जा सकता है। कम हो रहा उत्पादन प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली में पानी की कमी को लेकर जानकारी मिल रही है। जनसंख्या के आधार पर अगर सभी को पानी मिले तो कुल मांग 1250 एमजीडी की है। लेकिन इतना उत्पादन नहीं होता है। आज के दिन में हरियाणा सरकार से लगभगएक हजार क्यूसेक पानी मिल रहा है। वजीराबाद में पानी सूख गई है जिसके चलते वहां प्लांट में पानी नहीं आ रहा है। वहां 200 क्यूसेक पानी से ज्यादा खींचा जाता था जो अभी केवल 75 क्यूसेक ही मिल रहा है। पिछली सरकारों पर फोड़ा ठीकरा प्रवेश वर्मा ने कहा कि टैंकर के माध्यम से लोगों को पानी पहुंचाया जा रहा है। जहां पिछली सरकारों ने पानी की पाइपलाइन नहीं डाली तो वहां टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है। पिछले साल के मुकाबले दोगुने टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है। पिछली सरकार 200 नए बोरवेल लगाती थी जबकि हमारी सरकार ने 560 बोरवेल लगाए हैं। पानी की समस्या पिछले एक साल की नहीं है। पिछली सरकार ने अगर बंदोबस्त किया होता तो इतनी परेशानी नहीं आती। आप सरकार ने अपने अंतिम वर्ष में लगभग 1200 करोड़ इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया था जबकि इस वर्ष जल बोर्ड ने लगभग 2900 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पुरानी पाइपलाइन को बदला जाएगा मंत्री ने कहा कि दिल्ली में दशकों पुरानी पाइप लाइन से पानी लीक होता है। इन सभी पाइपलाइंस को बदलने के लिए योजना बन चुकी है। दिल्ली को हमने आठ जोन में बांटा है। चंद्रावल का टेंडर हो चुका है जबकि आगामी वजीरगंज जोन नवंबर तक टेंडर कर कंपनी को सौंप दिया जाएगा। दिल्ली सरकार पानी लीकेज को कम करने के लिए प्रयास कर रही है। यह कंपनिया सभी पाइपलाइन को बदलेगी और पानी का रिसाव खत्म करेगी। पिछले सवा साल में हमारी सरकार की पांच उपलब्धियों में से एक इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क को कम करना है। दिल्ली की 52 फीसदी पुरानी पाइपलाइन को बदला जाएगा कनाल का पानी पाइपलाइन से आएगा हरियाणा से कैनाल के माध्यम से आने वाले पानी को पाइपलाइन के माध्यम से लाया जाएगा। रास्ते में किसान भाई निकाल लेते हैं। अन्य लोग भी पानी निकाल लेते हैं। इसलिए पाइपलाइन डालने की तैयारी की जा रही है। दिल्ली का पानी का कोटा तय है। हमने बांध के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार को पैसा दिया है जिससे 2032 से पानी मिलने लगेगा।

यूपी में बच्चों के स्वास्थ्य पर फोकस, ‘पौष्टिक थाली’ से बदल रही नौनिहालों की जिंदगी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश को कुपोषण के कलंक से मुक्त करने और नई पीढ़ी को शारीरिक व मानसिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक मूक क्रांति चल रही है। राज्य सरकार ने 'पीएम पोषण योजना' के अंतर्गत परिषदीय, राजकीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में मिलने वाले मिडडे मील को पूरी तरह 'पोषण सुरक्षा कवच' में बदल दिया है। प्रदेश के कक्षा 1 से 8 तक के लाखों छात्र-छात्राओं को अब केवल पेट भरने के लिए भोजन नहीं, बल्कि कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और आयरन से भरपूर संतुलित और गुणवत्तापूर्ण 'पौष्टिक थाली' दी जा रही है। इस योजना का सीधा असर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, स्कूलों में उनकी दैनिक उपस्थिति और सीखने की मानसिक क्षमता पर दिखने लगा है। प्राइमरी और अपर प्राइमरी के लिए तय हुए कड़े पोषण मानक बच्चों के शारीरिक और बौद्धिक विकास को वैज्ञानिक आधार देने के लिए योगी सरकार ने भोजन में कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा का एक कड़ा मानक तय किया है, जिसे हर स्कूल में अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है।      प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5): प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन न्यूनतम 450 कैलोरी ऊर्जा और 12 ग्राम प्रोटीन युक्त भोजन दिया जा रहा है।     उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8): किशोर वय के बच्चों की शारीरिक आवश्यकताओं को देखते हुए प्रतिदिन न्यूनतम 700 कैलोरी ऊर्जा और 20 ग्राम प्रोटीन सुनिश्चित किया जा रहा है। थाली में शामिल हुए दूध, सोयाबीन और मौसमी फल भोजन को उबाऊ होने से बचाने और बच्चों में चाव पैदा करने के लिए साप्ताहिक मेन्यू में विविधता लाई गई है। अब बच्चों को नियमित रूप से कार्बोहाइड्रेट और सूक्ष्म पोषक तत्व देने के लिए भोजन में निम्नलिखित चीजें शामिल की जा रही हैं।     प्रोटीन की प्रचुरता के लिए विशेष रूप से सोयाबीन और विभिन्न प्रकार की दालें।     विटामिंस और मिनरल्स की कमी को दूर करने के लिए ताजा हरी सब्जियां और मौसमी फल।     बच्चों में कैल्शियम और आयरन की पूर्ति के लिए सप्ताह में निर्धारित दिन दूध का वितरण। मध्याह्न भोजन से आगे बढ़कर बनी 'समग्र स्वास्थ्य नीति' योगी सरकार के इस विजन का सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि यह योजना अब सिर्फ एक प्रशासनिक मध्याह्न भोजन कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के भविष्य को सुरक्षित करने की एक दूरगामी नीति बन चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, संतुलित भोजन मिलने से गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों में कुपोषण की दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। स्वस्थ शरीर मिलने से बच्चे अब कक्षाओं में अधिक एकाग्र हो पा रहे हैं, जिससे उनका शैक्षणिक प्रदर्शन भी पहले से काफी बेहतर हुआ है। स्वस्थ और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव शासन का मानना है कि एक विकसित और आत्मनिर्भर राज्य की इमारत केवल तभी खड़ी हो सकती है जब उसके बच्चे स्वस्थ और सक्षम हों। शिक्षा और पोषण के इस अनूठे समन्वय के जरिए योगी सरकार न केवल कुपोषण के खिलाफ अपनी जंग को मजबूत कर रही है, बल्कि एक आत्मविश्वासी, ऊर्जावान और मेधावी नई पीढ़ी को भी तैयार कर रही है जो आगे चलकर देश और प्रदेश की प्रगति का मुख्य आधार बनेगी।  

पिलखा डैम पर महिलाओं की सफलता की कहानी, मुस्कान की नाव बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल

मुस्कान की नाव बनी आत्मनिर्भरता की पतवार, पिलखा डैम की लहरों पर महिलाओं ने लिखी सफलता की नई इबारत रायपुर  कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल बन रही हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई है। सूरजपुर जिले के पहाड़गांव स्थित पिलखा डैम की शांत जलराशि पर दौड़ती नावें अब केवल पर्यटकों को सैर नहीं करातीं, बल्कि महिलाओं के संघर्ष, साहस और सफलता की कहानी भी सुनाती हैं। यह कहानी है मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की, जिसने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने हौसलों को पतवार बनाकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की। समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सिंह और सचिव श्रीमती यशोदा दास के नेतृत्व में 10 महिलाओं ने पर्यटन क्षेत्र में कदम रखा और बोटिंग गतिविधि शुरू कर अपनी पहचान बना ली। शुरुआत आसान नहीं थी। संसाधनों की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और संचालन से जुड़ी अनेक चुनौतियां सामने थीं। लेकिन इन महिलाओं ने हार मानने के बजाय चुनौतियों को अवसर में बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने बोटिंग संचालन, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यटकों की सुविधाओं की जिम्मेदारी स्वयं संभाली और धीरे-धीरे अपने प्रयासों को सफलता में बदल दिया। आज पिलखा डैम आने वाले पर्यटक उत्साह के साथ बोटिंग का आनंद लेते हैं। इस पहल से समूह ने अब तक 74 हजार रुपये की आय अर्जित की है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। समूह की सदस्य बताती हैं कि पहले उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे पर्यटन गतिविधियों का संचालन करेंगी और स्वयं रोजगार सृजित करेंगी। आज वे अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह की यह सफलता दर्शाती है कि अवसर और विश्वास मिलने पर ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। पिलखा डैम की लहरों पर चल रही यह नाव अब केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान बन चुकी है।

जीत के बाद आध्यात्मिक यात्रा पर विराट-अनुष्का, वृंदावन में प्रेमानंद महाराज से की मुलाकात

 वृंदावन आरसीबी बेंगलुरु के IPL 2026 का खिताब जीतने के बाद स्टार क्रिकेट खिलाड़ी विराट कोहली अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ वृंदावन पहुंचे. यहां दोनों प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए उनके आश्रम राधा केलि कुंज पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया. दरअसल, आईपीएल 2026 का खिताब जीतकर मैदान पर अपनी बादशाहत कायम रखने वाले भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली इस सफलता के बाद आध्यात्मिक ऊर्जा की तलाश में वृंदावन पहुंचे. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को लगातार दूसरी बार चैंपियन बनाने के बाद विराट अपनी पत्नी और अभिनेत्री अनुष्‍का शर्मा (Anushka Sharma) के साथ मंगलवार को वृंदावन में प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Maharaj) के आश्रम पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया।  दोनों ने वृंदावन के राधा केली कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में विराट और अनुष्का आश्रम से बाहर निकलते नजर आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि दोनों ने कुछ समय आश्रम में बिताया और आध्यात्मिक चर्चा के साथ गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।  यह यात्रा ऐसे समय हुई है, जब RCB ने आईपीएल 2026 के फाइनल में गुजरात टाइटंस (Gujarat Titans) को हराकर लगातार दूसरा खिताब अपने नाम किया है. जीत के जश्न के बीच विराट का वृंदावन पहुंचना क्रिकेट और अध्यात्म के अनूठे संगम के रूप में देखा जा रहा है. इससे पहले एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें विराट और अनुष्का आगरा एयरपोर्ट से बाहर निकलते दिखाई दिए. वहां से दोनों सीधे वृंदावन के लिए रवाना हुए।  विराट और अनुष्का पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से वृंदावन आते रहे हैं. दोनों कई बार प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद ले चुके हैं और सार्वजनिक मंचों पर आध्यात्मिकता के महत्व का जिक्र भी कर चुके हैं. क्रिकेट की चमक-दमक और फिल्मी दुनिया की व्यस्तताओं के बीच यह जोड़ी आध्यात्मिक साधना और धार्मिक आस्था को अपने जीवन का अहम हिस्सा मानती है। 

मंगोलिया पहुंचे भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष, श्रद्धा के साथ हुआ भव्य स्वागत

मंगोलिया पहुंचे भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष : श्रद्धा और सम्मान के साथ हुआ भव्य स्वागत गंदन मॉनेस्ट्री में 9 जून तक होंगे सार्वजनिक दर्शन : प्रदेश के बौद्ध स्थलों को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान भोपाल असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों, अरहंत सारिपुत्र एवं अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से मंगोलिया लेकर पहुंचे। मंगोलिया पहुंचने पर हवाई अड्डे पर मंगोलिया के शिक्षा मंत्री एल.एंख-अमगलान तथा गंडनतेगचेनलिंग मठ के मुख्य महंत खाम्बा नोमुन खान गेशे ल्हारम्पा डी. जावज़ानदोरज ने उनका श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। पवित्र अवशेषों के यात्रा मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने श्रद्धा एवं भक्ति भाव से नमन कर अपनी आस्था व्यक्त की। इस अवसर पर राज्यपाल आचार्य के साथ अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC), भारत एवं श्रीलंका के वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं सहित एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी उपस्थित रहा। समारोह में मंगोलिया के विभिन्न प्रमुख मठों के महंत, अनेक बौद्ध भिक्षु तथा मंगोलिया के पूर्व (तीसरे) राष्ट्रपति नामबारिन एंखबयार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। गंदन मॉनेस्ट्री में इन पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन 9 जून 2026 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष पहल पर सांची स्तूप में संरक्षित भगवान बुद्ध के परम शिष्यों अरहंत सारिपुत्र एवं अरहंत मौद्गल्यायन के पवित्र अवशेषों को सार्वजनिक दर्शन के लिए मंगोलिया भेजा गया है। गंदन मॉनेस्ट्री में इन पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन 9 जून 2026 तक किया जाएगा, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर प्राप्त होगा।यह पहल केवल आध्यात्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और मंगोलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ पर्यटन एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई दिशा प्रदान करेगी। राज्य के बौद्ध पर्यटन स्थलों को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान इस ऐतिहासिक पहल से भारत के बौद्ध तीर्थ सर्किट, विशेषकर सांची जैसे विश्वप्रसिद्ध स्थलों के प्रति अंतर्राष्ट्रीय आकर्षण बढ़ेगा। मध्यप्रदेश के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिससे राज्य के बौद्ध पर्यटन स्थलों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिलेगी तथा विदेशी पर्यटकों की संख्या, प्रवास अवधि और सांस्कृतिक सहभागिता में वृद्धि होगी। साथ ही यह पहल दोनों देशों के मठों, सांस्कृतिक संस्थानों और संग्रहालयों के बीच दीर्घकालिक सहयोग के नए द्वार खोलेगी। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची स्तूप विश्व के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण बौद्ध स्थलों में से एक है। यहां संरक्षित पवित्र अवशेषों को भगवान बुद्ध के प्रतीक स्वरूप अत्यंत श्रद्धा और पूजनीय भाव से देखा जाता है। भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्य सारिपुत्र और मौद्गल्यायन बौद्ध संघ के ‘अग्र युग्म’ माने जाते हैं। सारिपुत्र प्रज्ञा और ज्ञान के लिए तथा मौद्गल्यायन अपनी आध्यात्मिक एवं अलौकिक सिद्धियों के लिए विख्यात थे। दोनों ने बौध धम्म के प्रचार-प्रसार में अमूल्य योगदान दिया और उनकी शिक्षाएँ आज भी बौद्ध दर्शन एवं साधना परंपरा का महत्वपूर्ण आधार हैं  

अब मोबाइल ऐप से खरीद सकेंगे गाय-भैंस, हर पशु की बनेगी डिजिटल प्रोफाइल

यमुना नगर. अब पशुपालकों को अच्छी नस्ल की गाय, भैंस या बकरी खरीदने के लिए पशु मेलों और डेयरियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पशुपालन विभाग मुंह-खुर और गलघोटू रोग के टीकाकरण अभियान के साथ प्रदेश के करीब 70 लाख पशुओं का डिजिटल प्रोफाइल तैयार कर रहा है। भारत पशुधन एप पर पशुओं की नस्ल, उम्र, स्वास्थ्य, टीकाकरण और दूध उत्पादन क्षमता जैसी जानकारी उपलब्ध होगी। इससे पशुपालक घर बैठे अपनी जरूरत के अनुसार पशु तलाश सकेंगे और खरीद-बिक्री की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सकेगी। पशु पालन विभाग ने इस बार टीकाकरण अभियान को डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ा है। प्रदेशभर में 550 से अधिक पशु चिकित्सक और 2500 पशुधन विकास सहायक (वीएलडीए) अभियान में लगे हुए हैं। टीमें गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर पशुओं को टीके लगाने के साथ उनका ऑनलाइन रिकॉर्ड भी तैयार कर रही हैं। विभाग का उद्देश्य पशुधन का प्रमाणिक और अद्यतन डेटाबेस तैयार करना है। खरीदार को अब पहले ही मिलेगी पूरी जानकारी डेटाबेस तैयार होने के बाद पशुपालक अपनी जरूरत के अनुसार पशुओं की जानकारी आनलाइन देख सकेंगे। यदि कोई अधिक दूध देने वाली मुर्राह भैंस या किसी विशेष नस्ल की गाय की तलाश कर रहा है तो उसे संबंधित जानकारी आसानी से मिल जाएगी। इससे पशु खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और क्षमता का आकलन किया जा सकेगा। डेयरी व्यवसायी भूपेंद्र कुमार और कुलदीप सिंह का कहना है कि यह पहल पशुपालकों के लिए काफी लाभकारी साबित होगी। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। ओटीपी सत्यापन के बाद होगा पंजीकरण प्रत्येक पशु का आनलाइन पंजीकरण किया जा रहा है। इसके लिए पशुपालक के मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है। सत्यापन पूरा होने के बाद ही पशु का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड होता है। विभाग का कहना है कि इससे डेटा की शुद्धता बनी रहेगी और भविष्य में योजनाओं का लाभ पात्र पशुपालकों तक पहुंचाना आसान होगा। सुरक्षित प्रक्रिया है ओटीपी सत्यापन पशुपालन विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. सतबीर सिंह ने बताया कि टीकाकरण के साथ पशुओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। ओटीपी सत्यापन पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है। पशुपालक चाहें तो टीम के पहचान पत्र की जांच कर सकते हैं। ऐसे पता चलेगा दूध उत्पादन के बारे में भारत पशुधन एप पर पशुपालक का नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज किया जाएगा। साथ ही पशु का फोटो, नस्ल, रंग, उम्र, स्वास्थ्य स्थिति व दूध उत्पादन क्षमता जैसी जानकारियां भी अपलोड होंगी। टीकाकरण का रिकॉर्ड भी इसी प्लेटफार्म पर उपलब्ध रहेगा। पशु की जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी।