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अटल पेंशन योजना को बड़ा झटका? RTI रिपोर्ट में सामने आया 1.49 करोड़ एग्जिट का आंकड़ा

नई दिल्ली सरकारी पेंशन स्कीम 'अटल पेंशन योजना' की खूब चर्चा होती है. अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. दरअसल, देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से इस स्कीम की शुरुआत की गई है. RTI के जरिये APY को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है।   सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में पता चला है कि साल 2015 में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 1.49 करोड़ लोग इस स्कीम से बाहर हो चुके हैं. पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के आंकड़ों के मुताबिक योजना में हर साल रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं. लेकिन साथ ही समय से पहले खाता बंद करने या मृत्यु के कारण स्कीम से बाहर होने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।  RTI से मिले आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक अटल पेंशन योजना के तहत कुल रजिस्ट्रेशन 8.96 करोड़ तक पहुंच चुका था. लेकिन इनमें से केवल 7.45 करोड़ सब्सक्राइबर ही फिलहाल एक्टिव हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि एक बहुत बड़ा हिस्सा अब इस योजना का सक्रिय रूप से लाभ नहीं उठा रहा है।  साल-दर-साल बढ़ता एग्जिट का ग्राफ योजना के शुरुआती साल 2015-16 के दौरान केवल 2 लोगों ने स्कीम छोड़ी थी. लेकिन हालिया वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा सालाना 30.24 लाख से अधिक को पार कर गया. एक तरफ जहां एग्जिट करने वालों की संख्या बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ नए रजिस्ट्रेशन के मामले में योजना ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.35 करोड़ से अधिक नए सब्सक्राइबर्स इस योजना से जुड़े, जो इसके लॉन्च के बाद से किसी भी एक साल में सबसे बड़ी संख्या है।  जब RTI के जरिए यह पूछा गया कि कितने सब्सक्राइबर्स ने रजिस्ट्रेशन के 1 साल, 3 साल या 5 साल के भीतर योगदान देना बंद कर दिया, तो PFRDA ने साफ कर दिया कि अटल पेंशन योजना के तहत 'डिसकंटिन्यूएशन' जैसी कोई अवधारणा नहीं है. इसलिए अगर किसी कारणवश कोई सब्सक्राइबर योगदान देना बंद कर देता है, तो वह बाद में बकाया ब्याज और देरी से किए गए योगदान का भुगतान करके अपने खाते को फिर से चालू कर सकता है।  क्या है अटल पेंशन योजना? अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2015 में विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों जैसे रेहड़ी-पटरी वाले, मजदूर, कारपेंटर, घरेलू सहायक   के लिए की गई थी. इसके तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक निवेश कर सकते हैं. 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद सब्सक्राइबर्स को उनके योगदान के आधार पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये प्रति माह तक पेंशन मिलती है। 

पति की जिम्मेदारी बरकरार: पत्नी ज्यादा कमाती हो तब भी कानूनी और यात्रा खर्च देना होगा

 बिलासपुर  हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे के खर्च को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पत्नी सरकारी नौकरी में हो और उसकी आय पति से अधिक हो, तब भी उसे अदालती कार्यवाही में शामिल होने के लिए आवश्यक यात्रा, भोजन और मुकदमे का खर्च पाने का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की खंडपीठ ने सूरजपुर कुटुंब न्यायालय के आदेश को सही ठहराते हुए पति आशीष राय की अपील खारिज कर दी। क्या है पूरा मामला? मामले के अनुसार अंबिकापुर निवासी आशीष राय और विश्रामपुर निवासी अंजलि राय के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा है। पति ने सूरजपुर कुटुंब न्यायालय में तलाक की याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे के खर्च की मांग की।  

यात्री के साथ लापरवाही पड़ी भारी, सीट न देने पर रेलवे पर लगा हजारों का जुर्माना

पटना  भारतीय रेलवे में लाखों यात्री हर दिन रिजर्वेशन कर सफर करते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि कंफर्म टिकट मिलने के बाद उनकी सीट सुरक्षित होगी। बिहार में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां पर कंफर्म टिकट होने के बावजूद भी चार यात्रियों को रिजर्व्ड सीट नहीं मिली। उन्हें पूरा सफर खड़े होकर करना पड़ा। इस मामले के सामने आने के बाद यात्रियों के अधिकारों को लेकर बहस शुरू हो गई थी और अब उपभोक्ता आयोग ने इस पर बड़ा फैसला दे दिया है। उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में रेलवे की गलती मानी है और चारों यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कहा है।  यह मामला उस समय सामने आया जब चार यात्री उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से बिहार के आरा के लिए LTT-पटना एक्सप्रेस में सफर कर रहे थे। यात्रियों के पास पहले से कंफर्म रिजर्व टिकट था लेकिन ट्रेन में चढ़ने के बाद उन्हें पता चला कि उनकी निर्धारित बर्थ पर दूसरे लोग बैठे हुए हैं। शिकायत में दावा किया गया कि सीटों पर रेलवे स्टाफ मौजूद था और कई बार अनुरोध के बावजूद सीट खाली नहीं कराई गई।  रेलवे अधिकारियों ने नहीं की मदद यात्रियों ने मौके पर अपनी समस्या हल कराने की कोशिश की। उन्होंने रेलवे हेल्पलाइन, रेलवे सेवा पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद उन्हें शिकायत संख्या भी जारी हुई, लेकिन यात्रा के दौरान उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। बाद में यात्रियों ने टीटीई से भी संपर्क किया, लेकिन उन्हें भीड़ का हवाला देकर किसी तरह यात्रा पूरी करने को कहा गया। नतीजा यह हुआ कि चारों यात्रियों को पूरा सफर खड़े होकर तय करना पड़ा।  कोर्ट ने क्या कहा? मामला भोजपुर कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन पहुंचा। सुनवाई के दौरान आयोग ने यात्रियों की ओर से पेश किए गए टिकट, शिकायत रिकॉर्ड और अन्य सबूतों पर विचार किया। आयोग ने माना कि यात्रियों ने वैध आरक्षण कराया था लेकिन उन्हें नियमों के अनुसार रिजर्व्ड सीट नहीं दी गई। इसे रेलवे की सेवा में गंभीर कमी माना गया।  आयोग ने कहा कि यात्रियों को सिर्फ असुविधा नहीं हुई बल्कि उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ी। आयोग ने यह भी माना कि किसी यात्री को कंफर्म सीट के बावजूद खड़े होकर यात्रा करने के लिए मजबूर करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। इसके बाद रेलवे को चारों यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कहा गया।  रेलवे को कितना भुगतान करना होगा? फैसले में रेलवे को निर्देश दिया गया कि यात्रियों की टिकट राशि 1,876.80 रुपये ब्याज सहित वापस की जाए। इसके अलावा यात्रियों को 20 हजार रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी दिया जाए। आयोग ने आदेश दिया कि यह भुगतान 60 दिनों के भीतर किया जाए। तय समय में भुगतान नहीं होने पर अतिरिक्त ब्याज भी देना पड़ सकता है।  सभी को पता होना चाहिए नियम भारत में रोजाना लाखों लोग रेल से सफर करते हैं। ज्यादातर लोगों को अपने अधिकारों के बारे में नहीं पता होता और उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। अगर आपका टिकट कंफर्म है और सीट रिजर्व है तो ट्रेन में आपको आरक्षित सीट मिलनी चाहिए। अगर आपकी सीट पर कोई और बैठा हो तो आप रेलवे कर्मचारियों से कहकर सीट खाली करवा सकते हैं। अगर रेलवे मदद नहीं करता है तो कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन या कंज्यूमर कोर्ट में अपील कर सकते हैं।   

भोपाल दौड़ेगा रातभर: रवीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी की पहली ‘वेलोसिटी नाइट रन 2026’ 6 जून को

 रबिन्द्र नाथ टैगोर यूनिवर्सिटी द्वारा भोपाल में 6 जून को पहली बार होगा वेलोसिटी नाइट रन 2026 का आयोजन  टीटी नगर स्टेडियम में दौड़ेगी फिटनेस, जुनून और ऊर्जा की नई रफ्तार भोपाल  रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी द्वारा भोपाल में पहली बार “वेलोसिटी नाइट रन 2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह अनोखा नाइट रन 6 जून 2026 को टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में आयोजित होगा, जिसमें शहर सहित प्रदेशभर के रनर्स, फिटनेस प्रेमी एवं युवा प्रतिभागी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में फिटनेस, अनुशासन, स्वास्थ्य जागरूकता एवं खेल भावना को प्रोत्साहित करना है। रात्रिकालीन वातावरण में आयोजित होने वाला यह रन प्रतिभागियों को स्टेडियम की रोशनी के बीच ऊर्जा, उत्साह और रोमांच से भरपूर अनुभव प्रदान करेगा। प्रतियोगिता में 1 घंटे, 2 घंटे एवं 3 घंटे की विभिन्न श्रेणियां रखी गई हैं, जिनमें प्रतिभागी अपनी क्षमता के अनुसार हिस्सा ले सकेंगे। सभी प्रतिभागी रन शुरू होने के समय से 30 मिनट पूर्व रिपोर्टिंग करें। लेट एंट्री मान्य नहीं होगी। रन के दौरान प्रतिभागियों के लिए विभिन्न रंगों की ट्रैक लेन निर्धारित की गई हैं, ताकि प्रतियोगिता का संचालन व्यवस्थित एवं सुरक्षित रूप से किया जा सके। स्टेडियम परिसर में विशेष फिटनेस एवं रनिंग जोन भी तैयार किए जाएंगे। इस अवसर पर रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी की प्रो चांसलर डॉ अदिति चतुर्वेदी वत्स ने कहा कि वेलोसिटी नाइट रन केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं में स्वास्थ्य, फिटनेस और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने की एक प्रेरणादायी पहल है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर आत्मविश्वास एवं अनुशासन विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं। वहीं रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी की कुलसचिव डॉ संगीता जौहरी ने कहा कि विश्वविद्यालय सदैव विद्यार्थियों एवं युवाओं के समग्र विकास के लिए खेल, स्वास्थ्य एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़े आयोजनों को प्रोत्साहित करता रहा है। वेलोसिटी नाइट रन 2026 युवाओं को फिटनेस के साथ सकारात्मक ऊर्जा एवं टीम स्पिरिट का अनुभव प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अधिक से अधिक युवाओं, खिलाड़ियों एवं फिटनेस प्रेमियों से इस विशेष नाइट रन में सहभागिता करने की अपील की है।

WhatsApp यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी, गुप्त मैसेजिंग को मिलेगा नया सुरक्षा कवच

नई दिल्ली  इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp एक नया फीचर लेकर आ रहा है, जिसकी मदद से यूजर्स को सीक्रेट मैसेज भेजने में मदद मिलेगी. दरअसल, अब टेक्स्ट मैसेज के साथ View Once फीचर का सपोर्ट शामिल किया जा रहा है. इसकी जानकारी WhatsApp के अपकमिंग फीचर को ट्रैक करने वाली वेबसाइट Wabetainfo ने दी है।  रिपोर्ट्स में बताया है कि अभी View Once फीचर डेवलपमेंट स्टेज में है. अभी इसको बीटा वर्जन के लिए भी पेश नहीं किया गया है. पहले यह फीचर फोटो और वीडियो आदि को सपोर्ट करता था. अब कंपनी इसको टेक्स्ट मैसेज के अंदर शामिल करने जा रही है।  एक बार मैसेज में View Once सपोर्ट आने के बाद यूजर्स किसी भी शख्स को सीक्रेट मैसेज भेजते हैं, उसके बाद जैसे ही रिसीवर उस मैसेज को पढ़ता है, फिर वह मैसेज ऑटोमेटिक डिलीट हो जाएगा. हालांकि इसके लिए  मैसेज भेजते समय View Once को इनेबल करना होगा।  मैसेज का स्क्रीनशॉट्स भी नहीं ले पाएंगे  WhatsApp पर View Once फीचर के तहत रिसीव होने वाले मैसेज का ना तो स्क्रीनशॉट्स लिया जा सकता है ना ही उसको एक से ज्यादा बार देखा जा सकता है. यह अपने आप में बेहद ही खास है. इस फीचर का इंतजार WhatsApp के टेक्स्ट मैसेज के लिए लंबे समय से किया जा रहा है और अब लेटेस्ट रिपोर्ट् में बताया गया है कि यह अभी डेवलपमेंट फेज में है।  WhatsApp का View Once फीचर कैसे काम करेंगे Wabetainfo की तरफ से एक स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किया है, जिसमें दिखाया है कि View Once नाम का ये फीचर कैसे काम करेगा. एक बार सेंडर की तरफ से View Once मैसेज भेजा जाएगा, जिसके बाद जैसे ही मैसेज रिसीवर द्वारा पढ़ लिया जाता है, उसके बाद मैसेज खुद ब खुद डिलीट हो जाता है।  WhatsApp लगातार अपने प्लेटफॉर्म में नए-नए फीचर्स को शामिल करता है. मेटा ने सिंपल से यूजर इंटरफेस में ढेरों फीचर्स को शामिल किया है.  हालांकि रिपोर्ट में WhatsApp के टेक्स्ट मैसेज के साथ मिलने वाले View Once की लॉन्चिंग टाइम लाइन का जिक्र नहीं किया है।  

मिलेट से बढ़ी आय, किसानों के जीवन में आई खुशहाली श्री अन्न की खेती बन रही लाभ का नया माध्यम

रायपुर  छत्तीसगढ़ और पूरे भारत में मिलेट्स (मोटा अनाज) की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। कम लागत, कम पानी और बंजर भूमि में भी बेहतरीन पैदावार देने के कारण मिलेट्स किसानों की आय बढ़ा रहे हैं और उनके जीवन में खुशहाली ला रहे हैं । कभी पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसे मोटे अनाज आज पूरी दुनिया में ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान बना चुके हैं। पौष्टिक गुणों से भरपूर ये अनाज अब घरों के साथ-साथ होटलों और रेस्टोरेंटों में भी पसंद किए जा रहे हैं। बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य ने किसानों के लिए मिलेट (श्री अन्न) की खेती को लाभकारी बना दिया है। शासन की पहल से बढ़ा श्री अन्न का महत्व         केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। समर्थन मूल्य में वृद्धि और बाजार उपलब्धता के कारण अब अधिक किसान श्री अन्न की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कृषि उन्नति योजना से मिली नई दिशा          जिले के ग्राम पोटाली और नहाड़ी के दो युवा किसानों ने कृषक उन्नति योजना का लाभ लेकर मिलेट उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी मेहनत और योजना से मिली सहायता ने उनकी आय में बड़ा बदलाव लाया है। दिलीप मरकाम ने कोदो-कुटकी से कमाए डेढ़ लाख रुपये          ग्राम पोटाली के धुरवा पारा निवासी किसान दिलीप मरकाम ने इस वर्ष अपने खेत में कोदो-कुटकी की खेती कर लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया। वे अपने 17 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में कोदो-कुटकी के साथ धान और सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। दिलीप ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष 88 क्विंटल धान बेचकर लगभग 2 लाख 72 हजार रुपये की आय प्राप्त की। खेती को आधुनिक बनाने के लिए उनके पास पावर टिलर जैसे कृषि यंत्र भी उपलब्ध हैं। वे अपनी आय का एक हिस्सा खेती के विकास और नई तकनीकों को अपनाने में निवेश करना चाहते हैं। हलदर हेमला की मेहनत भी लाई रंग          ग्राम नहाड़ी के किसान हलदर हेमला ने भी कोदो-कुटकी की खेती से उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। उन्होंने इस फसल से लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये का लाभ कमाया। उनका कहना है कि मिलेट की खेती कम लागत में बेहतर आय देने वाली फसल साबित हो रही है। किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही योजना         दिलीप मरकाम और हलदर हेमला का मानना है कि कृषक उन्नति योजना मोटे अनाज उत्पादक किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। योजना के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहन मिलने से श्री अन्न की खेती का रकबा बढ़ रहा है और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। स्वास्थ्य और समृद्धि का संगम है श्री अन्न कोदो, कुटकी और रागी जैसे मोटे अनाज कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये ग्लूटेन मुक्त होने के कारण आसानी से पच जाते हैं तथा स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। यही कारण है कि इनकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। सफलता की सीख      पारंपरिक फसलों को आधुनिक बाजार से जोड़कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। दिलीप मरकाम और हलदर हेमला की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं और मेहनत के साथ श्री अन्न की खेती ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है।

मरकंटक “चचाई” थर्मल पॉवर स्टेशन ने 609 दिनों तक बिजली उत्पादन का बनाया रिकार्ड

भोपाल  राज्य क्षेत्र के थर्मल पॉवर स्टेशनों में एक नया इतिहास रचते हुए, मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई (ATPS) की 210 मेगावॉट (MW) क्षमता वाली यूनिट नंबर 5 ने लगातार 609 दिनों तक निर्बाध रूप से क्रियाशील रहकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह शानदार सफर 1 अक्टूबर 2024 से शुरू होकर 2 जून 2026 तक करीब पौने दो साल तक बिना रुके जारी रहा, जो राज्य क्षेत्र (State Sector) की किसी भी थर्मल यूनिट के लिए अब तक का सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। दो जून को अचानक आई एक तकनीकी विद्युत खराबी (Electric Fault) के कारण इस यूनिट को रोकना पड़ा, जिससे यह अद्भुत सफर थम गया। इस ऐतिहासिक परिचालन अवधि के दौरान प्लांट के कार्यकुशलता सूचकांक (Performance Indices) भी बेहद उत्कृष्ट रहे, जो यूनिट की बेहतरीन तकनीकी देखरेख और परिचालन क्षमता को दर्शाते हैं। मजबूत परफॉर्मेंस: आंकड़ों में देखें यूनिट का दमदार प्रदर्शन इस मैराथन रन के दौरान प्लांट के कार्यकुशलता सूचकांक (Performance Indices) बेहद बेमिसाल रहे। PAF (प्लांट उपलब्धता) 98.82%, PLF (प्लांट लोड फैक्टर) 95.61% और APC (सहायक बिजली खपत) 9.29% रही। "यह टीम वर्क की ऐतिहासिक जीत" : ऊर्जा मंत्री  तोमर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने पॉवर स्टेशन के सभी अभियंताओं, तकनीकी स्टाफ और कर्मचारियों को इस ऐतिहासिक सफलता की बधाई दी है। प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि लगातार 609 दिनों तक बिना किसी ट्रिपिंग के यूनिट का चलना हमारे उत्कृष्ट रखरखाव, कुशल प्रबंधन और ग्राउंड स्टाफ की दिन-रात की मेहनत का परिणाम है। चचाई थर्मल पॉवर स्टेशन ने राज्य क्षेत्र में जो बेंचमार्क सेट किया है, उस पर पूरे प्रदेश को गर्व है।  

टीम इंडिया में एंट्री के साथ इतिहास रच सकते हैं वैभव सूर्यवंशी, सचिन का रिकॉर्ड खतरे में!

नईदिल्ली  भारत के आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए टी20 स्क्वॉड का ऐलान कल यानी शनिवार, 6 जून को हो सकता है। नए कप्तान के साथ-साथ स्क्वॉड में कई आईपीएल स्टार्स को भी मौका मिल सकता है। ईएसपीएनक्रिकइन्फो की रिपोर्ट के अनुसार आईपीएल 2026 में सबसे ज्यादा 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप जीतने वाले वैभव सूर्यवंशी की भी किस्मत चमक सकती है और उन्हें सीनियर टीम से पहली बार बुलावा आ सकता है। अगर वैभव सूर्यवंशी का चयन आयरलैंड दौरे पर होता है और उन्हें टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने का मौका मिलता है तो वह भारत के लिए डेब्यू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन ‘क्रिकेट के भगवान’ कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। सचिन तेंदुलकर का इंटरनेशनल डेब्यू पाकिस्तान के खिलाफ 1989 में हुआ था, तब उनकी उम्र 16 साल 205 दिन थी। वहीं वैभव सूर्यवंशी आज यानी शुक्रवार, 5 जून को उनकी उम्र 15 साल 70 दिन की है। 26 जून को भारत को आयरलैंड के खिलाफ पहला टी20 खेलना है, अगर वैभव सूर्यवंशी का चयन सीनियर टीम में होता है और उन्हें डेब्यू करने का मौका मिलता है तो वह सचिन तेंदुलकर का यह रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। श्रेयस अय्यर के रूप में भारत को मिल सकता है नया टी20 कप्तान रिपोर्ट्स की मानें तो बीसीसीआई सूर्यकुमार यादव से कप्तानी छीनकर टी20 टीम की कमान श्रेयस अय्यर को सौंपने का मन बना चुके हैं। टीम के ऐलान के साथ नए कप्तान का भी ऐलान हो सकता है। वैसे तो अय्यर ने 2023 से भारत के लिए कोई टी20 मैच नहीं खेला है, मगर इस साल की शुरुआत में उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ बतौर इंजरी रिप्लेसमेंट भारतीय स्क्वॉड में जगह मिली थी, मगर उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला था। अय्यर की कप्तानी आईपीएल और डोमेस्टिक क्रिकेट में लाजवाब रही है। 2024 में उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स को चैंपियन बनाया था, वहीं 2025 में वह पंजाब किंग्स की कप्तानी करते हुए फाइनल तक पहुंचे थे, जहां उन्हें रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। अय्यर की कप्तानी के साथ-साथ उनकी बल्लेबाजी भी टी20 में लाजवाब रही है, जो उन्हें कप्तानी का दांवेदार बनाती है। श्रेयस अय्यर के पिछले दो सालों में 1000 से अधिक रन है, वहीं इस सीजन में उन्होंने अपना पहला आईपीएल शतक भी ठोका था।  

पंत के बल्ले से इतिहास की आहट, 6 छक्के और लगते ही बनेगा बड़ा रिकॉर्ड

चंडीगढ़  भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज ऋषभ पंत के पास अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबले के दौरान एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने का मौका है। विकेटकीपर ने भारत के लिए टेस्ट में सबसे ज्यादा छक्के लगाए हैं और उनके पास 100 छक्के तक पहुंचने वाला पहला भारतीय बल्लेबाज बनने का सुनहरा मौका है। आईपीएल में निराशाजनक प्रदर्शन को भुलाकर पंत आगामी टेस्ट में नई शुरुआत करने उतरेंगे। उनका फॉर्म खेल के सबसे बड़े प्रारूप में सवालों के घेरे में था, जिसके बाद उन्हें उपकप्तानी के पद से भी हटा दिया गया। भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र टेस्ट मैच शनिवार से होने जा रहा है। भारत के टेस्ट में सर्वाधिक छक्के भारत के लिए टेस्ट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड ऋषभ पंत के नाम है। उन्होंने भारत के लिए 49 टेस्ट मैच में 94 छक्के लगाए हैं। विकेटकीपर बल्लेबाज ने टीम के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग को इस लिस्ट में पीछे छोड़ा था, जिन्होंने 104 मैचों में 90 छक्के मारे थे। पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने 67 मैचों में 88 छक्के जड़े हैं। वह इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं। स्टार ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा ने 89 मैचों में 80 छक्के जड़े हैं। इसके अलावा दिग्गज एमएस धोनी भी इस लिस्ट में मौजूद हैं। धोनी ने 90 मैच खेलते हुए 78 छक्के ठोके थे। सचिन तेंदुलकर ने 200 मैचों में भारत के लिए 69 छक्के लगाए हैं। ऋषभ पंत ने भारत के लिए अब तक 49 टेस्ट मैच खेले हैं और वह शनिवार को 50 टेस्ट मैच खेलने उतरेंगे। पंत ने 49 टेस्ट मैच में 3476 रन बनाए हैं। उनका औसत 42.91 का है। विकेटकीपर बल्लेबाज ने टेस्ट फॉर्मेट में आठ शतक और 18 अर्धशतक लगाए हैं। हालांकि अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में ऋषभ पंत नए रूप में दिख सकते हैं और थोड़ा संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए दिखेंगे। क्योंकि टीम मैनेजमेंट ने उनसे मैच के हिसाब से खेलने के लिए कहा है। आईपीएल 2026 में पंत का प्रदर्शन ऋषभ पंत के आईपीएल का 19वां सीजन बेहद खराब रहा। पिछले सीजन की तरह इस बार भी टीम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी और 10 टीमों के टूर्नामेंट में अंतिम पायदान पर रही। ऋषभ पंत बतौर बल्लेबाज भी कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके। सीजन खत्म होने के बाद उन्होंने लखनऊ सुपर जायंट्स की कप्तानी के पद से इस्तीफा दे दिया था। भारत के लिए टेस्ट में सबसे ज्यादा छक्के ऋषभ पंत – 94 वीरेंद्र सहवाग-90 रोहित शर्मा-88 रविंद्र जडेजा-80 एम एस धोनी-78 सचिन तेंदुलकर-69

सुकमा के किसान पुत्र ने रचा इतिहास JEE एडवांस में 634वीं रैंक हासिल कर बारसे रोशन ने बढ़ाया जिले का गौरव

रायपुर  सुदूर वनांचल और नक्सल प्रभावित क्षेत्र सुकमा के एक किसान परिवार के बेटे ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ी सफलता हासिल कर पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। झापरा क्षेत्र के निवासी बारसे रोशन ने देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE एडवांस 2026 में कैटेगरी रैंक 634 प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने      बारसे रोशन एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके माता-पिता खेती-किसानी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रोशन ने पढ़ाई को अपना लक्ष्य बनाया और कठिन परिश्रम के बल पर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। जिला प्रशासन बना मजबूत सहारा      रोशन की उपलब्धि पर जिला प्रशासन ने उनका सम्मान किया। तुंगल डेम में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर  अमित कुमार ने शाल एवं फल भेंटकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर कलेक्टर ने घोषणा की कि रोशन की उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक संसाधनों की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। जिला प्रशासन उनकी आगे की पढ़ाई की पूरी फीस का वहन करेगा, जिससे वे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में बिना किसी आर्थिक चिंता के अध्ययन कर सकें। ‘क्षितिज कोचिंग इंस्टीट्यूट’ से मिला सफलता का मार्ग          सुकमा जिले में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा ‘क्षितिज कोचिंग इंस्टीट्यूट’ का संचालन किया जा रहा है। कलेक्टर  अमित कुमार और मुख्य कार्यपालन अधिकारी  मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में संचालित यह पहल ग्रामीण और आदिवासी विद्यार्थियों के लिए नई उम्मीद बन रही है। जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन तथा नोडल अधिकारी के सतत पर्यवेक्षण में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। शिक्षकों और टीम के समर्पण का परिणाम          बारसे रोशन की सफलता के पीछे संस्थान के शिक्षकों और प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्थान के प्रबंधक  सूरज सिंह ने विद्यार्थियों के लिए अनुशासित और प्रतिस्पर्धात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार किया। वहीं, शिक्षकों ने विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान के साथ परीक्षा रणनीति और निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया। उनके प्रयासों ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास जगाया और सफलता की राह आसान बनाई। शासन की शिक्षा उन्मुख पहल का सकारात्मक परिणाम           यह सफलता दर्शाती है कि शासन और जिला प्रशासन की शिक्षा केंद्रित योजनाएं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग जैसी सुविधाएं ग्रामीण प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद कर रही हैं। सुकमा के युवाओं के लिए प्रेरणा बने बारसे रोशन  बारसे रोशन की उपलब्धि आज सुकमा के हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। वन एवं प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप ने भी रोशन को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। जिला प्रशासन ने विश्वास जताया है कि आने वाले वर्षों में सुकमा से ऐसे अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थी निकलेंगे, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।