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प्रधानमंत्री मोदी ने किया था देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में शामिल जेवर एयरपोर्ट का शुभारंभ

लखनऊ/नोएडा.  उत्तर प्रदेश के विकास इतिहास में 15 जून 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं की शुरुआत होने जा रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े एविएशन, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी हब के रूप में अपनी नई पहचान की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाएगा। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो 15 जून से एयरपोर्ट पर अपनी सेवाएं शुरू करेगी और इस एयरपोर्ट की पहली लॉन्च कैरियर बनेगी। उद्घाटन दिवस पर पहली उड़ान सुबह 7:05 बजे लखनऊ से रवाना होकर 8:05 बजे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेगी। इसके बाद नोएडा से बेंगलुरु के लिए पहली नियमित वाणिज्यिक उड़ान संचालित की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने किया था उद्घाटन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित विकास मॉडल का भी प्रतीक माना जा रहा है। एयरपोर्ट के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत की कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक विकास के लिए ऐतिहासिक परियोजना बताया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि जेवर एयरपोर्ट विकसित भारत के संकल्प को गति देने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना आज प्रदेश के तेजी से बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य की पहचान बन चुकी है। योगी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल जेवर एयरपोर्ट गौतमबुद्ध नगर जिले में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल किया जाता है। एयरपोर्ट के लिए लगभग 1334 हेक्टेयर (करीब 3300 एकड़) भूमि का अधिग्रहण किया गया। परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर निर्धारित समय में निर्माण कार्य पूरा कराया। पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता एयरपोर्ट का पहला चरण पूरी तरह तैयार हो चुका है। पहले चरण में यह एयरपोर्ट प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा। डीजीसीए द्वारा 6 मार्च 2026 को एयरपोर्ट को एयरोड्रोम लाइसेंस भी जारी किया जा चुका है। वर्तमान चरण में एक रनवे, अत्याधुनिक टर्मिनल भवन और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर सहित सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं।  भविष्य में बनेगा दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में से एक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। वर्ष 2031 तक इसकी क्षमता बढ़ाकर तीन करोड़ वार्षिक यात्रियों की जाएगी। वर्ष 2036 तक यह क्षमता पांच करोड़ और वर्ष 2040 तक सात करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी। अंतिम विस्तार के बाद एयरपोर्ट पर पांच रनवे होंगे और इसकी कुल क्षमता 22.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करेगी। पश्चिमी यूपी और एनसीआर का नया एविएशन गेटवे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के तीसरे एयरपोर्ट के रूप में विकसित यह प्रोजेक्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के लाखों यात्रियों के लिए नया विकल्प बनेगा। इंडिगो चरणबद्ध तरीके से एयरपोर्ट को लखनऊ, बेंगलुरु, हैदराबाद, अमृतसर, चंडीगढ़, धर्मशाला, जयपुर, नवी मुंबई, पंतनगर और श्रीनगर सहित 16 से अधिक शहरों से जोड़ेगी। एक लाख रोजगार और निवेश का नया केंद्र राज्य सरकार के अनुसार एयरपोर्ट परियोजना से लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, हॉस्पिटैलिटी और सेवा क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। आने वाले वर्षों में जेवर क्षेत्र उत्तर भारत के सबसे बड़े औद्योगिक और सेवा क्षेत्र केंद्र के रूप में विकसित होगा।

लोहरसी आयुर्वेदिक औषधालय में दर्द प्रबंधन हेतु कपिंग थेरेपी एवं विशेष आयुर्वेदिक उपचार सेवाओं का आरंभ

सियान जतन कार्यक्रम के अंतर्गत शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय, लोहरसी में "Pain Management through Ayurveda" विषय पर दर्द प्रबंधन हेतु विशेष आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं का आरंभ किया गया है। इस पहल का उद्देश्य घुटने के दर्द (Knee Joint Pain), कमर दर्द, गर्दन दर्द, स्पॉन्डिलाइटिस, फ्रोजन शोल्डर तथा अन्य वातजन्य रोगों से पीड़ित मरीजों को प्रभावी एवं सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के अंतर्गत मरीजों के लिए कपिंग थेरेपी (Cupping Therapy) आरंभ की गई है, जो मांसपेशियों के तनाव, दर्द, सूजन एवं रक्त संचार में सुधार हेतु उपयोगी मानी जाती है। इसके अतिरिक्त औषधालय में ड्राय कपिंग, अग्निकर्म एवं विद्धकर्म जैसी विशेष आयुर्वेदिक उपचार प्रक्रियाओं का भी आरंभ किया जा रहा है। इन चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग विभिन्न प्रकार के अस्थि-संधि एवं मांसपेशीय विकारों, स्पॉन्डिलाइटिस, फ्रोजन शोल्डर, साइटिका तथा पुराने दर्द संबंधी समस्याओं के प्रबंधन में किया जाएगा। सियान जतन कार्यक्रम के तहत विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को इन सेवाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे बढ़ती आयु के साथ होने वाली दर्द एवं गतिशीलता संबंधी समस्याओं से राहत प्राप्त कर सकें। आयुर्वेद की पारंपरिक ज्ञान-परंपरा एवं आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से यह पहल क्षेत्रवासियों को सुलभ, सुरक्षित तथा प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. वर्षा ने बताया कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खान-पान एवं शारीरिक श्रम की कमी के कारण जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, सर्वाइकल एवं अन्य वातजन्य रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि रोगों की रोकथाम एवं समग्र स्वास्थ्य संवर्धन की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद शरीर, मन एवं जीवनशैली के संतुलन पर आधारित चिकित्सा पद्धति है, जो रोग के मूल कारण को समझकर उपचार करने का प्रयास करती है। कपिंग थेरेपी, अग्निकर्म एवं विद्धकर्म जैसी प्रक्रियाएं दर्द प्रबंधन में प्रभावी सिद्ध हो रही हैं तथा कई मरीजों को दीर्घकालिक राहत प्रदान कर रही हैं। उन्होंने नागरिकों से नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, योग एवं आयुर्वेदिक परामर्श को अपनाकर स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने का आग्रह किया। शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय, लोहरसी द्वारा क्षेत्र के नागरिकों से अपील की गई है कि वे आयुर्वेद की इन विशेष उपचार सेवाओं का अधिकाधिक लाभ उठाएं तथा स्वस्थ, सक्रिय एवं रोगमुक्त जीवन की ओर अग्रसर हों।

मूक-बधिर नाबालिग से दुष्कर्म करने वाला आरोपी गिरफ्तार

पीथमपुर/धार. पीथमपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक संवेदनशील व मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। एक युवक ने अपने पड़ोस में रहने वाली मूक-बधिर नाबालिग के साथ कई बार दुष्कर्म किया। नाबालिग के गर्भवती होने पर बढ़ता पेट देख स्वजनों को शंका हुई और उससे इशारे में पूछा और फोटो दिखाने पर आरोपित के बारे में बताया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म, पक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार नाबालिग मूक-बधिर किशोरी का युवक के घर आना-जाना था। युवक ने इसका फायदा उठाते हुए किशोरी से कई बार दुष्कर्म किया। इससे किशोरी गर्भवती हो गई। इस बात का खुलासा 3 जून को हुआ जब पिता ने बेटी का पेट असामान्य रूप से बढ़ा हुआ देखा। इशारों में उसने माता-पिता को पूरी बात बताई अनहोनी की आशंका होने पर जब माता-पिता ने इशारों में पूछताछ की, तो बेटी रोने लगी। इसके बाद इशारों में उसने माता-पिता को पूरी बात बताई। पिता ने किशोरी को आरोपित का फोटो दिखाया तो उसने पहचान की। पहले पीड़िता का परिवार सामाजिक बदनामी और डर के कारण शांत रहा, पर बाद में हिम्मत जुटा कर 11 जून को थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित को हिरासत में लिया पीड़िता के नाबालिग और दिव्यांग होने के कारण पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित को हिरासत में लिया और उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। वर्तमान में पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। पीड़िता के मूक-बधिर होने के कारण उसका सटीक कानूनी बयान दर्ज कराने के लिए साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद भी ली जा रही है। जिससे आरोपित को सख्त सजा दिलाई जा सके।

ईरान को 25 अरब डॉलर फ्रीज्ड फंड मिलने का दावा, होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर भी सहमति की बात

नई दिल्ली अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील को लेकर महीनों से चल रही खींचतान अब खत्म होती नजर आ रही है. दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते (पीस डील) का एक ड्राफ्ट सामने आया है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम से लेकर तेल कारोबार, होर्मुज स्ट्रेट और अरबों डॉलर फ्रीज किए हुए तक कई बड़े मुद्दों पर सहमति बनने का दावा किया गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान ने यह वादा किया है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही किसी अन्य तरीके से उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा. यह अमेरिका की सबसे बड़ी मांगों में से एक रही है. ड्राफ्ट के मुताबिक, ईरान के पास मौजूद उच्च स्तर पर संवर्धित (हाईली एनरिच्ड) यूरेनियम का संवर्धन स्तर भी कम किया जाएगा. हालांकि यह प्रक्रिया कैसे होगी, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. दोनों पक्ष अगले 60 दिनों के भीतर इसकी तकनीकी रूपरेखा तय करेंगे. 25 अरब डॉलर फ्रीज्ड फंड ईरान कर पाएगा हासिल इस समझौते का सबसे बड़ा आकर्षण ईरान के फ्रीज्ड फंड को लेकर है. ईरानी अधिकारी का दावा है कि अमेरिका करीब 25 अरब डॉलर फ्रीज किए गए फंड को जारी करने पर सहमत हो गया है. इसमें डायरेक्ट कैश ट्रांसफर, क्षेत्रीय देशों के सहयोग और वित्तीय क्रेडिट लाइन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं. इसके अलावा अमेरिका कुछ समय के लिए ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों में भी छूट देगा. इससे ईरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा तेल बेच सकेगा और उससे होने वाली कमाई अपने पास रख सकेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत दे सकता है, जो वर्षों से पश्चिमी प्रतिबंधों की मार झेल रही है. डील पर साइन होने के बाद खुल जाएगा होर्मुज स्ट्रेट डील में होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा भी शामिल है. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोल देगा. इसके बदले अमेरिका ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करेगा. अगर यह समझौता लागू होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी राहत मिल सकती है. पिछले कई महीनों से होर्मुज में तनाव के कारण तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है. निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों की नजरें इस समझौते पर टिकी हुई हैं. समझौते की टाइमिंग अब भी तय नहीं! समझौते को लेकर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं. वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर की तैयारियां चल रही हैं और इसके बाद तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी. लेकिन दूसरी तरफ ईरान के भीतर इस समझौते को लेकर विरोध भी देखने को मिल रहा है. कट्टरपंथी समूहों और कुछ राजनीतिक धड़ों ने डील के समय और शर्तों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता. फिलहाल यह ड्राफ्ट समझौता अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है, लेकिन अगर दोनों पक्ष इस पर सहमत हो जाते हैं तो यह हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जाएगी. इससे न सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है.

दवा कीमतों में बढ़ोतरी से झारखंड में मरीजों की परेशानी बढ़ी

मेदिनीनगर (पलामू)  पलामू समेत राज्य में जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों पर ईरान-अमेरिका युद्ध और पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ने का दोहरा असर देखने को मिल रहा है। इसके चलते जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और थायरायड जैसी बीमारियों की नियमित दवाएं महंगी होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। पहले जहां मरीज एक महीने की दवाएं एक साथ खरीद लेते थे, अब वे केवल दो सप्ताह की दवाएं ही खरीद पा रहे हैं। कीमतों में बढ़ोतरी का असर दवा कारोबारियों के मुनाफे पर भी पड़ा है। जीएसटी में कटौती का लाभ महंगाई में बेअसर केंद्र सरकार द्वारा दवाओं पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने के बावजूद दवाओं के एमआरपी में वृद्धि के कारण इसका लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। 23 दिसंबर 2025 से लागू इस कटौती के बाद भी बढ़ी हुई एमआरपी के चलते मरीजों को राहत नहीं मिल रही है। वहीं पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढ़ने से परिवहन लागत बढ़ी है, जिससे दवा कारोबारियों के मार्जिन पर भी असर पड़ा है। प्लेटिनम महंगा होने से कैंसर की दवाओं पर असर कैंसर के उपचार में उपयोग होने वाले प्लेटिनम की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लाटिन और ऑक्सालिप्लाटिन जैसी दवाओं की उपलब्धता और कीमत दोनों प्रभावित हुई हैं। सितंबर 2025 में प्लेटिनम की कीमत 3869 रुपये प्रति ग्राम थी, जो अब बढ़कर लगभग 8000 रुपये प्रति ग्राम हो गई है। इसके चलते दवा कंपनियां बढ़ी हुई लागत पर दवाएं उपलब्ध कराने में असमर्थता जता रही हैं। इन दवाओं की कीमत 100 रुपये से लेकर 5000 रुपये प्रति डोज तक है। साथ ही बुखार और सामान्य बीमारियों में उपयोग होने वाली पैरासिटामोल जैसी दवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दवा निर्माण के कच्चे माल के साथ-साथ पैकिंग मैटेरियल जैसे प्लास्टिक दाना, बोतल व अन्य सामग्री के दाम बढ़ने से भी दवाओं की कीमतों पर असर पड़ा है। -रमेश कुमार शुक्ला, प्रदेश महासचिव, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट आर्गनाइजेशन उत्पादन और लॉजिस्टिक लागत में लगातार बढ़ोतरी फार्मा उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे में दवाओं की कीमत नियंत्रण और उनकी नियमित उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। -मृत्युंजय शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट आर्गनाइजेशन

संवैधानिक संशोधन बिल पर नजर, एनडीए बढ़ा रहा है संख्याबल

नई दिल्ली  तृणमूल कांग्रेस में बगावत से संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। बीजेपी सरकार अहम संवैधानिक संशोधन बिल पास कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है। हालांकि राज्यसभा चुनाव का मौजूदा दौर एनडीए को दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने में मदद करेगा, लेकिन लोकसभा में टीएमसी के पाला बदलने के बावजूद वह अभी भी 363 के जादुई आंकड़े से काफी दूर है। क्या कहता है गणित? सूत्रों का कहना है कि झारखंड और मिजोरम में हो रहे राज्यसभा चुनावों में निर्दलीय सीटों पर जीत हासिल करके एनडीए अपनी मौजूदा 148 सांसदों की संख्या में तीन सीटें और जोड़ लेगा। टीएमसी के तीन सांसदों के इस्तीफे और उपचुनावों के बाद एनडीए पश्चिम बंगाल से तीनों सीटें हासिल कर लेगा, जिससे उसकी संख्या 154 हो जाएगी, जो उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत से नौ कम है। चूंकि उच्च सदन में टीएमसी के और सांसदों के इस्तीफे की संभावना है, इसलिए एनडीए 163 का आंकड़ा छू सकता है, जिससे उसे सभी संवैधानिक संशोधन बिल पास कराने के लिए जरूरी संख्या बल मिल जाएगा। नवंबर में फिर घट जाएगी संख्या नवंबर तक सत्ताधारी गठबंधन की ताकत कम हो सकती है क्योंकि उत्तर प्रदेश से 10 सांसद रिटायर होंगे और राज्य विधानसभा में अपनी बेहतर संख्या के कारण समाजवादी पार्टी राज्यसभा में कुछ सीटें हासिल कर सकती है। विपक्षी गठबंधन के 64 सांसद विपक्षी इंडी गठबंधन के पास अभी 64 सांसद हैं, क्योंकि डीएमके (आठ सांसदों के साथ) इससे बाहर हो गई है और आप (तीन सांसदों के साथ) ने खुद को इस समूह से अलग कर लिया है। वाईएसआरसीपी और बीजेडी जैसी निर्दलीय पार्टियां (जिनके पास क्रमशः सात और छह सीटें हैं) और एमडीएमके राज्यसभा में किसी भी तरफ जा सकती हैं। हालांकि, लोकसभा में एनडीए की संख्या 213 तक पहुंच सकती है, क्योंकि टीएमसी के लगभग 20 और सांसद एक अलग समूह बनाकर इसे समर्थन दे सकते हैं। पार्टी छोड़ने वाले ये सांसद सोमवार को स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे और टीएमसी से अलग होने की घोषणा करने वाला पत्र उन्हें सौंपेंगे। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए 363 सांसदों की जरूरत होती है।

वित्त मंत्री बोलीं—भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विपक्ष संकट का माहौल बनाता है

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। वित्त मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश में भारत और उसके लोगों की उपलब्धियों को कमतर आंकते हैं। सीतारमण ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कोविड-19 वैश्विक महामारी और पश्चिम एशिया में संघर्ष जैसे बड़े संकटों के दौरान भी भारत की उपलब्धियों को नजरअंदाज करते हैं। देश के सामने ऐसा कोई संकट नहीं है, जैसा राहुल गांधी पेश कर रहे हैं। 'लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जब भी बोलते हैं, तो…' प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में बीजेपी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बेंगलुरू में ‘विकसित भारत संकल्प समावेश’ का आयोजन किया गया है। इसमें पार्टी पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जब भी बोलते हैं, तो हर चीज की केवल आलोचना करते हैं और भारत के लोगों की उपलब्धियों को कमतर आंकते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करके वह प्रधानमंत्री मोदी या केंद्र सरकार को कमतर दिखा रहे हैं। बार-बार कहते हैं बड़ा संकट आने वाला है लेकिन कोई संकट नहीं आया: सीतारमण सीतारमण ने कहा कि राहुल गांधी लगातार कहते रहते हैं कि अगले कुछ सप्ताह में सब कुछ ढह जाएगा। नेता प्रतिपक्ष बार-बार कहते हैं कि कोई बड़ा संकट आने वाला है, लेकिन भारत के सामने ऐसा कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, तिमाही दर तिमाही और साल दर साल भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है। जब भी कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) लोकसभा में बोलते हैं, तो उनका लहजा हर चीज की बुराई करने और भारत के लोगों की उपलब्धियों को कमतर आंकने वाला होता है। भारत पर कोई आपदा नहीं आने वाली है। IMF अप्रैल-मई में अपने आकलन के दौरान और फिर अक्टूबर में डेटा जारी करके बताता है कि भारत अभी भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था क्यों बना हुआ है। भले ही मिडिल ईस्ट में संकट चल रहा हो और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावटें आ रही हों। बात सिर्फ कच्चे तेल या LPG की कीमत की नहीं है, इन सभी चुनौतियों के बावजूद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सप्लाई में कोई रुकावट न आए। अर्थव्यवस्था और आम घरों की जरूरतों पर इसी तरह का ध्यान दिया जा रहा है। पश्चिम एशिया संकट, फ्यूल का जिक्र कर क्या बोलीं वित्त मंत्री केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत के सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने की बात सरकार नहीं कह रही, बल्कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) भी यही कहते हैं। सीतारमण ने पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि ईंधन की आपूर्ति में कोई बाधा न आए। वित्त मंत्री ने अपनी बात स्पष्ट करने के लिए पश्चिम एशिया से ईंधन की ढुलाई में आने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया।

दिल्ली में यमुना को स्वच्छ बनाने का अभियान तेज, सीएम ने लोगों से की अपील

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को गीता कॉलोनी स्थित दशमेश घाट पर आयोजित ‘मां यमुना रिवरबैंक क्लीनलिनेस ड्राइव’ में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने यमुना को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए जनभागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यमुना में पूजा सामग्री और अन्य कचरा डालकर हम अपनी आस्था को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से ही यमुना को उसका पुराना स्वरूप लौटाया जा सकता है। सुबह 6 बजे से चला सफाई अभियान मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न सामाजिक संगठनों के स्वयंसेवकों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने सुबह 6 बजे से ही सफाई अभियान में हिस्सा लिया। इस दौरान यमुना तट और नदी से सैकड़ों टन कचरा हटाया गया। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना भी है। लगातार जारी रहेगा अभियान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई एक दिवसीय कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक सतत अभियान है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और नागरिकों को इससे जोड़ा जाएगा, ताकि यमुना को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाया जा सके। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि पीएम के स्वच्छ भारत विजन से प्रेरित यह अभियान यमुना संरक्षण को जनभागीदारी का आंदोलन बनाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 'मेरी यमुना, मेरा कर्तव्य' अभियान के तहत 12 टन से अधिक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया गया था। इस बार अभियान को और व्यापक स्वरूप दिया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यमुना को स्वच्छ और जीवनदायिनी बनाया जा सके। यमुना सफाई अभियान के तहत चिल्ला गांव घाट, निजामुद्दीन घाट, गांधी नगर घाट, पुराना लोहे पुल घाट, सिग्नेचर ब्रिज-वजीराबाद घाट, सोनिया विहार के विभिन्न घाट, निगम बोध घाट, यमुना बैंक, कालिंदी कुंज समेत 28 प्रमुख स्थलों पर एक साथ सफाई अभियान चलाया जाएगा। करीब 500 सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संगठनों भी इस अभियान में भागीदार होंगे। इस दौरान दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट समेत दिल्ली सरकार के मंत्री अलग-अलग घाटों पर मौजूद रहकर अभियान का नेतृत्व करेंगे। नागरिकों को यह संकल्प भी दिलाया जाएगा कि वे पूजा सामग्री, प्लास्टिक, कचरा और अन्य अपशिष्ट यमुना में नहीं डालेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। आस्था और पर्यावरण दोनों की रक्षा जरूरी रेखा गुप्ता ने कहा कि लोग धार्मिक अनुष्ठानों के बाद पूजा सामग्री यमुना में प्रवाहित कर देते हैं, लेकिन इससे नदी प्रदूषित होती है। उन्होंने सवाल किया कि यदि यमुना ही प्रदूषित रहेगी तो हम किस देवी-देवता को प्रसन्न कर पाएंगे। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी मानने की अपील की। नदी में कचरा फेंकने से बचने की अपील मुख्यमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे किसी भी प्रकार का कचरा यमुना में न डालें। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभा रही है, लेकिन स्थायी बदलाव तभी संभव है जब आम लोग भी इस अभियान का हिस्सा बनें।  

छत्तीसगढ़ में डीलिस्टिंग मुद्दे पर सियासत तेज, मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस के आरोपों को किया खारिज

रायपुर. डीलिस्टिंग को लेकर पूर्व मंत्री अमरजीत सिंह भगत के बयान पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पलटवार करते हुए कहा कि यह कांग्रेस का भ्रम है. कांग्रेस को सही जानकारी हासिल करनी चाहिए. कांग्रेसी आधी-अधूरी बातें करते हैं. दरअसल, धर्मांतरित लोगों के आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सियासी बयानबाजी बढ़ गई है. पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने बयान के जरिए एक बार फिर से इस मुद्दे को उठाया है. इससे पहले यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बने मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस पर आधी-अधूरी जानकारी होने का आरोप मढ़ते हुए समाप्त करने की कोशिश की है. मुख्यमंत्री साय ने इसके साथ बिलासपुर-जशपुर दौरे को लेकर कहा कि जशपुर जिले को रेल सुविधा को लेकर कहा कि जशपुर गृह जिला है. रेल सेवा से अछूता है. प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात में रेल सुविधा की बात अवगत कराए थे. इसमें अब त्वरित कार्रवाई हो रही है. उन्होंने कहा कि जल्द इसकी स्वीकृति मिलेगी. रेल मार्ग के जुड़ने से जशपुर जिले को फायदा होगा. व्यापार, लोगों के आवागमन में फायदा मिलेगा. वहीं कांग्रेस केप्रशिक्षण शिविर में राहुल गांधी के आने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ये उनका मामला है. आए-जाए जो भी करें. 

Beas River Alert: नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा, किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह

चंडीगढ़. भीषण गर्मी के कारण पहाड़ों में जमी बर्फ पिघलने से नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले कुछ दिनों के दौरान ब्यास नदी के पानी में भी भारी वृद्धि होने की खबर मिली है। सूत्रों के अनुसार पिछले 4 दिनों के भीतर ही करीब 10 हजार क्यूसेक पानी बढ़ने की पुष्टि हुई है। हालांकि, अभी इन नदियों में बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन फिर भी ब्यास नदी के किनारे बसे किसानों और गुर्जर बिरादरी के लोगों के लिए यह चिंता का विषय जरूर बन गया है। यह भी पता चला है कि पोंग डैम में भी पानी का स्तर 20 फीट से अधिक की ऊंचाई पर जा चुका है। डैम की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन नदियों में किसी भी समय और पानी छोड़ा जा सकता है। इस नाजुक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सब-डिवीजनल मेजिस्ट्रेट बाबा बकाला साहिब के कार्यालय में एक फ्लड कंट्रोल रूम (बाढ़ नियंत्रण कक्ष) भी स्थापित किया जा चुका है। यह कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे नदी के जलस्तर और आसपास के हालातों पर पैनी नजर रखेगा ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति का तुरंत सामना किया जा सके।