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गो संरक्षण विशेष: अमेरिका और यूरोपीय देशों तक पहुंच रहा सीएम योगी के गो संरक्षण का प्रभाव

लखनऊ.  देश-दुनिया के लिए यूपी रोल मॉडल बनकर उभरा है। प्रदेश की देशी गायों के पंचगव्य और आयुर्वेदिक उत्पाद अब अमेरिका, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों तक पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गो संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की नीति उत्तर प्रदेश को देश-विदेश में नई पहचान दिला रही है। यही नहीं, गो संरक्षण में यूपी देश का पथप्रदर्शक बन चुका है। इसी का परिणाम है कि गुजरात, केरल, हरियाणा समेत 15 राज्यों के लोग यूपी से गो संरक्षण सीख रहे हैं। सात समंदर पार पहुंचे यूपी के दुग्ध उत्पाद उत्तर प्रदेश में देसी गायों के जरिए तैयार किए जा रहे करीब 200 प्रकार के उत्पाद आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। पंचगव्य घृत, ब्राह्मी घृत, गोमूत्र अर्क, घनवटी, च्यवनप्राश, गो घृत, शतधौता घृत और आयुर्वेदिक काजल जैसे उत्पादों की मांग विदेश में लगातार बढ़ रही है। अमेरिका, कनाडा, यूएई, सिंगापुर, मलेशिया, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सऊदी अरब और थाईलैंड समेत कई देशों में इन उत्पादों की पहुंच बनी है। प्राकृतिक जीवनशैली, आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति के प्रति बढ़ते आकर्षण ने यूपी के गो-आधारित उत्पादों के लिए नए बाजार तैयार किए हैं। गोशाला से ग्लोबल मार्केट का सफर उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी सफलता यह है कि यहां गो संरक्षण को आर्थिक मूल्य से जोड़ा गया। अब गोबर, गोमूत्र, घी और पंचगव्य आधारित उत्पादों को व्यवस्थित उद्योग का स्वरूप दिया जा रहा है। इस बदलाव ने देसी गाय को केवल पशुधन नहीं, बल्कि ग्रामीण आय और उद्यमिता के स्रोत के रूप में स्थापित किया है। गांवों में स्वयं सहायता समूह, गोशालाएं और छोटे उद्यमी भी इस क्षेत्र से जुड़कर आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। आईटी इंजीनियर ने दिखाई नई राह गाजियाबाद के असीम रावत ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने के बाद देसी गायों के संरक्षण और उनसे जुड़े उत्पादों के निर्माण का क्षेत्र चुना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से शुरू हुई उनकी पहल आज 'हेता (HETHA)' के रूप में देश और विदेश के बाजारों तक पहुंच चुकी है। असीम रावत का मानना है कि यदि देसी गायों के उत्पादों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर बाजार से जोड़ा जाए तो यह क्षेत्र ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा सकता है। देशभर के लिए बना मॉडल उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश समेत 15 से अधिक राज्यों के लोगों को यहां असीम रावत प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके माध्यम से लोगों को गो संरक्षण की बारीकियां सिखाई जाती हैं। गो संरक्षण, नस्ल सुधार और गो आधारित उत्पादों के व्यावसायिक मॉडल को समझने के लिए लगातार अन्य राज्यों के दल प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और थारपारकर जैसी नस्लों के संरक्षण पर विशेष जोर : मुकेश मेश्राम पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार योगी सरकार उन्नत देसी नस्ल की गायों के पालन के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और  थारपारकर जैसी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं ने डेयरी और गो आधारित उद्योग को नई गति दी है, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिली है। आस्था के साथ अर्थव्यवस्था पर केंद्रित योजना जिस देसी गाय को कभी आर्थिक बोझ माना जाता था, वही आज सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में करोड़ों रुपये की गो इकोनॉमी की धुरी बन रही है। यही वजह है कि गो संरक्षण का यूपी मॉडल अब देश-दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका है। गो संरक्षण को अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखने का परिणाम है कि यूपी का मॉडल अब दूसरे राज्यों के साथ ही अन्य देशों के लिए भी मिसाल बन रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – मातृ शक्ति का आशीर्वाद बना संबल, विकास पथ पर लगातार आगे बढ़ रहा है मध्यप्रदेश

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बुन्देलखंड की धरती ने अपने गौरवशाली अतीत को संजोकर रखा है। बुन्देलखंड के वीरों ने अतीत से लेकर आज तक देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया है। मातृ शक्ति का आशीर्वाद सरकार के लिए संबल प्रदान कर रहा है। उनकी सहभागिता एवं नेतृत्व के माध्यम से आज मध्यप्रदेश विकास पथ पर आगे बढ़ता हुआ भारत को विकसित बनाने में अपना सहयोग दे रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर जिले के केसली में रविवार को आयोजित लाड़ली बहना सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लगभग 190.85 करोड़ रुपये की लागत के 53 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करते हुए शिलापट्टिका का अनावरण किया। इसमें लगभग 68.83 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 25 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं 122.02 करोड़ रुपये की लागत से 28 कार्यों का भूमि-पूजन कर लाड़ली बहना योजना की 37वीं किस्त भी जारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मातृ शक्ति का सशक्तिकरण और उनका नेतृत्व वर्तमान की आवश्यकता है और सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार का कार्य कर रही है। लाड़ली बहना योजना तीसरे साल में प्रवेश कर रही है, जिसके माध्यम से प्रत्येक माह बहनों के बैंक खातों में राशि प्रदान की जा रही है। लाड़ली बहना योजना हमारी माताओं बहनों के आर्थिक स्वावलंबन का आधार बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इससे सुखद बात क्या हो सकती है कि लाड़ली बहना योजना से मिली राशि से बहनें अपने परिवार के संचालन में सहयोग कर रही हैं। यह उनका समर्पण है, उनका अपना त्याग है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना सहित अन्य योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक स्तर में बड़ा सुधार आया है। उन्होंने कहा कि बहनों एवं मातृशक्ति के आशीर्वाद से राज्य सरकार निरंतर विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। आज उनके मन में शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का विश्वास बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस वर्ष मध्यप्रदेश सरकार कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। इसमें किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं। उनके खेतों के लिए पानी की व्यवस्था कर रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुँचा गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 100 लाख हेक्टेयर तक करने का है। जब किसान के खेत में पानी आता है तो उसके साथ उसके जीवन में बदलाव आता है। दुग्ध उत्पादन को बढावा देने के लिए भी सरकार कार्य कर रही है। जहाँ सरकार ने गौमाताओं के लिए प्रतिदिन खर्च को बढाया है, वहीं दुग्ध उत्पादन एवं खाद्य प्रसंस्करण के लिए सरकार योजनाएं चला रही है एवं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अनुदान दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्षों तक लगातार प्रधानमंत्री पद रहने का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की लोकल्याणकारी योजनओं के माध्यम से आज जरूरतमंदों को आवास, स्वास्थ्य सहित समस्त सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। धरती आबा योजना के माध्यम से जनजातीय समाज के कल्याण के लिए अनेक कार्य किए जा रहे है। आवासहीनों को आवास, भूमिहीनों को भूमि के पट्टे मिल रहे हैं और महिलाओं को संबल मिल रहा है। लाड़ली बहना योजना के माध्यम से महिलाओं की समाज एवं परिवार में स्थिति मजबूत हुई है। धरती आबा योजना के माध्यम से जनजातीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। उन्होंने महिलाओं से कहा कि सरकार द्वारा आपके लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं, पात्रता अनुसार उनका लाभ उठाइए। मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केसली में आयोजित लाड़ली बहना सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने केसली में सांदीपनि विद्यालय सेकण्ड फेज का कार्य प्रारंभ करने, शासकीय हाई स्कूल चिरचिटा सुखजू में हायर सेकण्डरी स्कूल तक उन्नयन करने, शासकीय हाई स्कूल देवरी, नाहरमऊ, नन्ही देवरी का उन्नयन करने, कृषि उपज मंडी केसली का नाम रानी अवंतिबाई के नाम पर रखने, देवरी में 100 बिस्तरों का अस्पताल स्टाफ सहित प्रारंभ करने की घोषणा की। वहीं मुख्यमंत्री ने केसली क्षेत्र में थावरी जलाशय (लागत लगभग 550 करोड़) की योजना को स्वीकृति दी तथा कहा कि किसानों की इस बहुप्रतीक्षित मांग से क्षेत्र में कृषि के क्षेत्र में क्रांति आएगी। मुख्यमंत्री ने देवरी में प्याज और लहसुन की खरीदी के लिए मंडी में खरीदी केन्द्र बनाने की घोषणा की। शासकीय महाविद्यालय देवरी में विज्ञान संकाय तथा कला संकाय में राजनीति विषय का आरंभ करने, केसली महाविद्यालय में कला एवं वाणिज्य संकाय में स्नातकोत्तर कक्षाएं प्ररंभ करने, देवरी नगर का नाम देवपुरी करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थानीय लोगों की मांग के अनुरूप देवखंडेराव मंदिर का पर्यटन स्थल के रूप में विकास किया जाएगा। ग्राम पंचायत गौरझामर एवं ग्राम पंचायत केसली को नगर पंचायत बनाने की भी घोषणा की। जनसामान्य में दिखा अपार उत्साह, मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहनों पर की पुष्पवर्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सागर जिले के देवरी विधानसभा अंतर्गत केसली ब्लॉक में यह पहला और महत्वपूर्ण आगमन था। मुख्यमंत्री बनने के बाद इस क्षेत्र में उनका यह पहला दौरा था, जिसे लेकर स्थानीय जनता और प्रशासन में भारी उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैंप से लाड़ली बहनों के बीच पहुंचकर पुष्पवर्षा की। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर कार्यक्रम में उपस्थित लाड़ली बहनों में उत्साह एवं उल्लास देखने को मिला। इस अवसर पर महिलाओं ने धन्यवाद लाड़ले भैया लिखे प्लेकार्ड प्रदर्शित कर मुख्यमंत्री के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। लाड़ली बहनों संग खेला सितोलिया, 'लाड़ली बहना खेल सप्ताह' का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर जिले के केसली में एक बेहद अनूठे और उत्साहपूर्ण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने यहाँ लाड़ली बहनों के साथ पारंपरिक खेल सितोलिया (पिट्टू) खेलकर 'लाड़ली बहना खेल सप्ताह' का भव्य शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने न केवल कार्यक्रम की शुरुआत की, बल्कि खुद मैदान में उतरकर खेलों में सक्रिय सहभागिता की। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर और उन्हें बच्चों व युवाओं की तरह पारंपरिक खेल खेलते देख वहाँ मौजूद महिलाओं और लाड़ली बहनों का उत्साह दोगुना हो गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को स्वस्थ, जागरूक और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। हितग्राहियों को वितरित किए … Read more

पहली बार कक्षा 6-8 के छात्र भी खेल प्रतियोगिताओं में शामिल, प्रदेशीय खेलों में बड़ा बदलाव

लखनऊ प्रदेश के विद्यालयों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शैक्षिक सत्र 2026-27 का प्रदेशीय विद्यालयी खेलकूद कैलेंडर जारी कर दिया है। 30 जून से शुरू होकर 17 नवंबर तक चलने वाली इन प्रतियोगिताओं में 31 खेल शामिल किए गए हैं पहली बार बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा 6 से 8 तक के छात्र-छात्राओं को भी सभी स्तरों पर प्रतिभाग का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिल सकेगा शिक्षा निदेशक माध्यमिक की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों, उच्च प्राथमिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) के छात्र-छात्राएं प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की छात्राओं को एक अलग यूनिट के रूप में प्रतियोगिताओं में शामिल किया जाएगा। इनके लिए जिला और मंडल स्तर पर अलग प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। अंतरमंडलीय प्रदर्शन के आधार पर प्रदेशीय टीम का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया का निर्धारण समग्र शिक्षा के बालिका प्रकोष्ठ द्वारा किया जाएगा। हर विद्यालय के लिए दो खेलों में भागीदारी अनिवार्य प्रत्येक विद्यालय के छात्र-छात्राओं को कम से कम दो अलग-अलग खेलों में प्रतिभाग करना होगा। इनमें एक टीम गेम और एक व्यक्तिगत खेल अथवा दोनों टीम गेम हो सकते हैं। खेलों का चयन विद्यालय अपनी सुविधा के अनुसार करेंगे। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) द्वारा सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड को अलग यूनिट की मान्यता दिए जाने के कारण इन बोर्डों से संबद्ध विद्यालयों के खिलाड़ी उत्तर प्रदेश की विद्यालयी खेल प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले सकेंगे। नौ नए खेल ट्रायल आधार पर जारी वुशू, मलखम्भ, गतका, कलारीपयट्टू, शतरंज, योगासन, थांगता मार्शल आर्ट और कुराश आदि को ट्रायल आधार पर इस वर्ष भी प्रतियोगिताओं में शामिल किया गया है। इसके अलावा नेटबाल, रग्बी, स्केटिंग, तलवारबाजी, साइक्लिंग, टेनिस और मॉडर्न पेंटाथलॉन में चयन ट्रायल कराकर प्रदेशीय टीमों का गठन किया जाएगा। प्रतियोगिताएं 14 वर्ष से कम (सब जूनियर), 17 वर्ष से कम (जूनियर) और 19 वर्ष से कम (सीनियर) आयु वर्ग में आयोजित की जाएंगी। प्रदर्शन के आधार पर होगा प्रदेशीय टीम चयन टीम स्पर्धाओं में खिलाड़ियों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। तैराकी और एथलेटिक्स जैसी व्यक्तिगत स्पर्धाओं में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त खिलाड़ी प्रदेशीय टीम में शामिल किए जाएंगे। एथलेटिक्स की रिले टीम का चयन अलग से किया जाएगा। 25 जून तक तय करनी होगी मेजबानी शिक्षा विभाग ने सभी मंडलीय और जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने यहां आयोजित होने वाली प्रदेशीय प्रतियोगिताओं के स्थल और तिथि का निर्धारण कर 25 जून तक इसकी सूचना सहायक शिक्षा निदेशक खेल, लखनऊ और डॉ. भीमराव आंबेडकर राज्य विद्यालयी क्रीड़ा संस्थान, अयोध्या को उपलब्ध कराएं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विषम परिस्थितियों को छोड़कर राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं की तिथियों में परिवर्तन नहीं किया जाएगा। प्रमुख प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम     30 जून से तीन जुलाई : सब जूनियर व जूनियर नेहरू हाकी (झांसी)     5 से 8 अगस्त : तैराकी, डाइविंग व वाटर पोलो, अलीगढ़     17 से 20 अगस्त : तीरंदाजी (मिर्जापुर), कराटे (लखनऊ), शूटिंग (मेरठ), जिम्नास्टिक (आगरा)     21 से 25 अगस्त : हैंडबॉल (अयोध्या)     21 से 24 अगस्त : टेबल टेनिस व बैडमिंटन (कानपुर)     30 अगस्त से तीन सितंबर : फुटबॉल (वाराणसी) और कुश्ती (गोरखपुर)     नौ से 13 सितंबर : जूडो (बरेली) और बास्केटबॉल (गोरखपुर)     15 से 19 सितंबर : मलखम्भ (झांसी), हॉकी (मुरादाबाद), भारोत्तोलन (सहारनपुर), वॉलीबॉल (प्रयागराज)     19 से 21 सितंबर : कलारीपयट्टू (लखनऊ)     23 से 26 सितंबर : बॉक्सिंग (लखनऊ) और वुशू (वाराणसी)     29 सितंबर से दो अक्टूबर : कुराश (मेरठ)     एक से तीन अक्टूबर : सेपक टाकरा (बरेली)     तीन से छह अक्टूबर : गतका (अयोध्या)     नौ से 12 अक्टूबर : थांगता मार्शल आर्ट (अयोध्या) और योगासन (आजमगढ़)     15 से 18 अक्टूबर : शतरंज (आजमगढ़) और बालिका क्रिकेट (मुरादाबाद)     20 से 23 अक्टूबर : कबड्डी (आजमगढ़) और बालक क्रिकेट (कानपुर)     24 से 27 अक्टूबर : खो-खो (अयोध्या)     29 अक्टूबर से दो नवंबर : ताइक्वांडो (गोरखपुर)     13 से 17 नवंबर : एथलेटिक्स (प्रयागराज)  

वन्यजीव संरक्षण, जल सुरक्षा और हरित भविष्य की आधारशिला हैं वन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन और वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सतत विकास के लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। वन केवल हरियाली के स्रोत नहीं हैं, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास, जल संरक्षण का आधार और भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर हैं। इसी संकल्प को साकार करते हुए दक्षिण पन्ना वनमंडल ने वन क्षेत्रों को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए वर्ष 2025 के विभिन्न पौधारोपण स्थलों से 11 हजार 260 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का संग्रहण कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया है। इस पहल से पौधारोपण स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सफलता मिली है, साथ ही 68 हजार किलोग्राम कार्बन-डाइ-ऑक्साइड के बराबर ग्रीन-हाउस गैसों के उत्सर्जन की रोकथाम भी हुई है। इतना ही नहीं, प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से स्थानीय वन समितियों को लगभग 56 हजार 300 रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। वन विभाग द्वारा वर्ष-2025 के विभिन्न पौधरोपण स्थलों पर रोपण कार्य पूरा होने के बाद शेष बचे प्लास्टिक पॉलीबैगों के संग्रहण के लिए विशेष अभियान चलाया गया। स्थानीय वन समितियों और वनकर्मियों के सहयोग से व्यापक स्तर पर प्लास्टिक कचरे का संग्रहण किया गया। इसके उपरांत संग्रहित सामग्री को साफ कर उसमें मिश्रित मिट्टी, पत्थर तथा अन्य अशुद्धियों को पृथक किया गया, जिससे उसका सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। संग्रहित प्लास्टिक कचरे को ऊर्जा पुनर्प्राप्ति (एनर्जी रिकवरी) के लिए अमानगंज स्थित जेके सीमेंट संयंत्र को विक्रय किया गया। सीमेंट संयंत्रों में उपलब्ध आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियां तथा इलेक्ट्रो स्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ईएसपी) जैसी उन्नत तकनीकों के कारण इस प्रकार के अपशिष्ट का निस्तारण सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किया जा सकता है। यह व्यवस्था खुले में प्लास्टिक जलाने अथवा अवैज्ञानिक तरीके से फेंकने की तुलना में अधिक प्रभावी और सुरक्षित मानी जाती है। वन विभाग के अनुसार पौधरोपण के बाद पॉलीबैग्स् को वन क्षेत्रों में छोड़ देना, गड्ढों में दबा देना अथवा खुले में जला देना पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। समय के साथ यह प्लास्टिक सूक्ष्म कणों में परिवर्तित होकर माइक्रोप्लास्टिक का रूप ले लेता है, जो मिट्टी की गुणवत्ता, जल स्रोतों, जैव-विविधता तथा मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। अभियान की विशेष उपलब्धि यह है कि अपशिष्ट समझी जाने वाली सामग्री को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया गया है। इस प्रक्रिया से प्राप्त आय का उपयोग वन समितियों द्वारा स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन, सामुदायिक विकास तथा जन-जागरूकता संबंधी गतिविधियों में किया जाएगा। इससे वन संरक्षण के प्रयासों में जनभागीदारी को भी और अधिक मजबूती मिलेगी। दक्षिण पन्ना वनमंडल की यह पहल जन-सहभागिता, स्वच्छता और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दर्शाती है कि सामूहिक प्रयासों एवं नवाचार आधारित कार्यप्रणाली के माध्यम से न केवल वन क्षेत्रों को स्वच्छ, सुरक्षित और प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सकता है, बल्कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ पहुंचाते हुए पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन तथा वन्यजीव संवर्धन के लक्ष्यों को भी प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।  

मध्य प्रदेश में गन्ना बनेगा तरक्की का इंजन, एथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां; किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद

नई दिल्ली. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन के उपयोग को कानूनी मंजूरी देने के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस क्रांति में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। आने वाले समय में प्रदेश की सड़कों पर गाड़ियां पेट्रोल-डीजल से नहीं, बल्कि खेतों में लहलहाने वाले गन्ने के रस से बने एथेनॉल से दौड़ती नजर आएंगी। भारत सरकार के इस फैसले से मध्य प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खुलने जा रहे हैं। गन्ने के जूस से बनता है एथेनॉल, MP के इन जिलों को होगा सीधा फायदा एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने की फसल और चीनी उत्पादन के बाद बचे उप-उत्पाद (मोलासेस) से तैयार होने वाला एक प्रकार का अल्कोहल है। मध्य प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है। महाकौशल और निमाड़ क्षेत्र: नरसिंहपुर (प्रदेश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक जिला), छिंदवाड़ा, बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन जैसे जिलों में गन्ने की बंपर पैदावार होती है। मालवा और चंबल क्षेत्र: उज्जैन, धार, और ग्वालियर-दतिया के बेल्ट में भी किसान बड़े पैमाने पर गन्ना उगाते हैं। अब तक किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए केवल चीनी मिलों या स्थानीय गुड़ और खांडसारी उद्योग पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां अक्सर भुगतान में देरी और सही दाम न मिलने की समस्या होती थी। लेकिन एथेनॉल की मांग 100% होने से अब गन्ने की सीधी खपत एथेनॉल प्लांटों में होगी। कच्चे तेल का आयात घटेगा, प्रदेश में पैदा होगा रोजगार मध्य प्रदेश में वर्तमान में कई चीनी मिलों के साथ डिस्टिलरी और एथेनॉल प्लांट जुड़े हुए हैं। गडकरी के इस फैसले के बाद राज्य में नए एथेनॉल मैन्युफैक्चरिंग प्लांटों में निवेश बढ़ेगा। सस्ता और घरेलू ईंधन: चूंकि एथेनॉल पूरी तरह से स्वदेशी और घरेलू स्तर पर तैयार होता है, इसलिए इसे खाड़ी देशों से आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता भी पड़ेगा। प्रदूषण से मुक्ति: मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण को कम करने में यह ईंधन मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि एथेनॉल से चलने वाले वाहनों से कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है। डेढ़ महीने में आ रही हैं गाड़ियां, किसानों को मिलेगा 'ग्रीन गोल्ड' का दाम केंद्रीय मंत्री ने साफ किया है कि टोयोटा, सुजुकी और हुंडई जैसी दिग्गज कंपनियां अगले डेढ़ महीने में 100% एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां (फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल) बाजार में उतार रही हैं। जैसे ही ये गाड़ियां सड़कों पर आएंगी, ईंधन की मांग बढ़ेगी। जानकारों का मानना है कि इस नीति से मध्य प्रदेश के किसानों के लिए गन्ना अब सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि 'ग्रीन गोल्ड' (हरा सोना) बन जाएगा, जिससे उनकी आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

एमटी सेलेस्टियल सी पर तैनात भारतीय अधिकारी की मौत, रेस्क्यू में देरी पर विवाद

मस्कट  ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े एक पोत पर सवार एक भारतीय नागरिक की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण मौत हो गई। भारतीय दूतावास ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर बताया कि मृतक की पहचान निशांत उर्थनाथन के रूप में की गई है। उसने बताया कि जब निशांत की मौत हुई उस समय वह मोटर टैंकर (एमटी) सेलेस्टियल सी पर सवार थे। खुलासा हुआ है कि एमटी सेलेस्टियल के क्रू ने रेडियो कम्युनिकेशन के जरिए अमेरिकी नौसेना के बार-बार मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया। अब दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना मृतक नाविक निशांत उर्थनाथन के शव को निकालने की अनुमति नहीं दे रही है अमेरिकी नौसेना से कई बार मांगी गई मदद स्पुतनिक इंडिया ने एमटी सेलेस्टियल सी शिप के रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया है कि उसने अमेरिकी नौसेना को मदद के लिए बार-बार कॉल किया। इसमें भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन को बहुत ज्यादा उल्टी होने की रिपोर्ट दी गई। लेकिन, अमेरिकी नौसेना की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। बाद में 11 जून को निशांत उर्थनाथन की सांसें रुक गई। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी नौसेना अभी भी लाश को निकालने की इजाजत नहीं दे रही है। एमटी सेलेस्टियल शिप के कैप्टेन ने घटना के बारे में बताया रिपोर्ट में एमटी सेलेस्टियल सी शिप पर हुई घटना को लेकर एक लेटर भी शेयर किया गया है। इसमें जहाज के कप्तान राजेंद्र यादव समेत कई दूसरे कर्मचारियों के हस्ताक्षर भी हैं। इसमें लिखा है, "यह सूचित किया जाता है कि निशांत उर्थनाथन, पीपी क्रमांक 58104330, रैंक द्वितीय अधिकारी, ने 08.06.2026 को दोपहर 12:00 बजे अस्वस्थता और लगातार उल्टी होने की सूचना दी। उन्होंने कंपनी कार्यालय को सूचित किया और वीएचएफ चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना को फोन करके रोगी की स्थिति के बारे में बताया लगातार उल्टी से पीड़ित था भारतीय नाविक उन्होंने आगे लिखा, "शाम तक द्वितीय अधिकारी के स्वास्थ्य के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उल्टी की तीव्रता बढ़कर हर 5-10 मिनट में होने लगी। उन्हें ओन्डेट-एमडी की गोली दी गई। शाम 4:00 बजे उन्होंने फिर से उल्टी कर दी। शाम 7:00 बजे उन्हें फिर से ओन्डेट-एमडी की गोली दी गई। रात 11:00 बजे एक बार उल्टी हुई। उस रात उल्टी नहीं हुई। 09.06.2026 को भी उल्टी नहीं हुई, केवल पेट और शरीर में दर्द था। उसे तरल दाल, चावल, ओआरएस और पानी पिलाया जा रहा था।" अमेरिकी नौसेना ने नहीं की मदद लेटर में आगे लिखा है, "10.06.2026 को हमने उन्हें तरल पदार्थ, भोजन और पानी दिया। हमने कंपनी को लगातार सूचित किया और वीएचएफ चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना को भी लगातार फोन करके बीमार मरीज की स्थिति के बारे में बताया, लेकिन फिर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। डॉक्टर की सलाह के अनुसार, हमने दवाएं दीं और वीएचएफ चैनल 16 के माध्यम से एजेंटों/अमेरिकी नौसेना के ज़रिए तटवर्ती सहायता का प्रयास किया।" शिप ने कई बार अमेरिकी नौसेना से संपर्क साधा लेटर के अनुसार, "11 जून 2026 की सुबह 6 बजे उन्होंने पानी और भोजन लेना बंद कर दिया। डीआई की सलाह के अनुसार, कंपनी को लगातार सूचना दी गई। हमने दवाइयां दीं और एजेंटों/अमेरिकी नौसेना के माध्यम से वीएचएफ चैनल 16 पर तटवर्ती सहायता का प्रयास किया। दोपहर 12 बजे लंगर उठाकर ओमान के निकटतम बंदरगाह दुकुम की ओर बढ़ना शुरू किया। दुकुम, ओमान के बंदरगाह नियंत्रण को फोन करके द्वितीय अधिकारी के चिकित्सा निकासी की आवश्यकता बताई गई।" जहाज पर फंसा है भारतीय नाविक का शव जहाज के कप्तान ने बताया, "बंदरगाह नियंत्रण ने दुकुम में स्थानीय एजेंट से संपर्क किया। दोपहर 2 बजे तक कंपनी ने हमें एजेंट का विवरण दिया। हमने यह जानकारी दुकुम बंदरगाह नियंत्रण को दे दी। दोपहर 3 बजे के बाद वह बेहोश हो गया, शाम 5 बजे पता चला कि उसकी सांसें रुक गई हैं। उसे कई बार सीपीआर दिया गया, ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और उसकी नब्ज जांची गई, जो उस समय ठीक थी। बाद में शाम 6 बजे पता चला कि उसकी नब्ज भी रुक गई है। कंपनी से लगातार संपर्क में है लेकिन हेलीकॉप्टर से बचाव नहीं हो पाया है।"  

लैपटॉप से लेकर निःशुल्क शिक्षा तक, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) बनी बच्चों का मजबूत सहारा

लखनऊ. कोविड महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए योगी सरकार अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) के तहत अनाथ और बेसहारा बच्चों को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। महिला कल्याण विभाग के द्वारा सरकार 8085 बच्चों को लैपटॉप वितरित कर उन्हें डिजिटल शिक्षा से जोड़ चुकी है। डिजिटल युग में यह पहल बच्चों के लिए ज्ञान और अवसरों के नए द्वार खोल रही है। इससे वो ऑनलाइन अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी दक्षता हासिल करने में सक्षम हो रहे हैं। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क प्रदान कर रही हैं। योजना के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए 4 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता भी दी जा रही है। यह पहल बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बन रही है। निःशुल्क शिक्षा के साथ आर्थिक संबल योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा अपनी पढ़ाई अधूरी न छोड़े। योजना के अंतर्गत 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रत्येक पात्र बच्चे को 4 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। यह सहायता बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे किताबें, स्टेशनरी और अन्य जरूरी शैक्षिक संसाधन जुटाने में मदद मिलती है। सरकार का यह प्रयास सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में सामने आया है। प्रतिस्पर्धी माहौल से जुड़ रहे बच्चे लैपटॉप वितरण और आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को प्रतिस्पर्धी माहौल से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है। शिक्षा आधारित यह मॉडल बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रहा है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनेः निदेशक योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महामारी से प्रभावित कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। निःशुल्क शिक्षा, आर्थिक सहायता और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनें और अपने सपनों को साकार कर सकें। इसलिए प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के पात्र बच्चों को समय पर लाभ प्रदान करने तथा ऐसे बच्चों का नियमित फॉलोअप लेकर उनके सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सी. इंदुमती, निदेशक, महिला कल्याण विभाग

अलवर: केंद्र-राज्य योजनाओं और विकास कार्यों की मंत्री ने दी जानकारी

 जयपुर 12 साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के विषय पर आधारित तीन दिवसीय प्रदर्शनी का जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने सूचना एवं जन सम्पर्क कार्यालय, धौलपुर में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की व्यापकता एवं प्रभावशीलता को समझने का अवसर प्रदान करती है। प्रदर्शनी के माध्यम से यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि सरकार की विभिन्न योजनाओं ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, डिजिटल इंडिया, किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तथा राज्य सरकार की जनहितकारी पहल, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों तथा विकास परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की गई। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, रोजगार संवर्धन तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से संबंधित उपलब्धियों को भी प्रमुखता से दर्शाया गया। उन्होंने प्रदर्शनी के सफल आयोजन के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आमजन एवं प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने तथा विकास यात्रा को समझने का प्रभावी माध्यम हैं। उल्लेखनीय है कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी केंद्र एवं राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों तथा सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। प्रदर्शनी के माध्यम से नागरिकों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान जिला कलक्टर निधि बी टी, जिला अध्यक्ष राजवीर सिंह राजावत, गिर्राज सिंह, डॉ. शिवचरण कुशवाह, नीरजा शर्मा, मोतीलाल मीणा सहित अन्य जनप्रतिनिधि व कर्मचारी उपस्थित रहे।

TMC संकट गहराया: सांसदों का NDA समर्थन की ओर झुकाव

पश्चिम बंगाल TMC (तृणमूल कांग्रेस) के 20 से ज्यादा सांसद पार्टी छोड़ने की कगार पर हैं. ये सांसद अब खुद को एक अलग गुट बनाना चाहते हैं और NDA (BJP) का साथ देने की बात कर रहे हैं. सोमवार को ये सब लोकसभा स्पीकर से मिलने दिल्ली जा रहे हैं. TMC यानी ममता बनर्जी की पार्टी में इस वक्त बड़ा घमासान चल रहा है. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद से पार्टी के अंदर खींचतान बढ़ती जा रही है. बागी सांसदों का दावा क्या है? TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार, जो इस बागी गुट की लीडर बन गई हैं, उन्होंने कहा कि उनके साथ अब 22 सांसद हैं. इससे पहले उन्होंने 20 का दावा किया था. दो नए सांसद और जुड़े हैं, लेकिन उनके नाम अभी नहीं बताए गए. काकोली ने कहा कि जब वो लोग औपचारिक रूप से शामिल होंगे, तभी नाम सामने आएंगे. स्पीकर से मुलाकात क्यों? सोमवार को ये सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने वाले हैं. मांग यह है कि उन्हें एक अलग संसदीय गुट के तौर पर मान्यता दी जाए, यानी वो TMC से अलग एक नया पार्लियामेंट्री ब्लॉक बनाना चाहते हैं. काकोली ने खुद कोलकाता एयरपोर्ट पर मीडिया से यह बात कही. 19 सांसदों के दस्तखत वाला दस्तावेज शुक्रवार को एक कागज सामने आया जिस पर 19 TMC सांसदों के दस्तखत थे. इन नामों में काकोली घोष दस्तीदार, सताब्दी रॉय, बापी हल्दर, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, असित माल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी यानी देव, जून मालिया, पार्थ भौमिक, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग और माला रॉय शामिल हैं. रचना बनर्जी और सायनी घोष के दस्तखत भी अलग से दिखे. ये सभी स्पीकर को चिट्ठी लिख चुके हैं कि उन्हें काकोली की अगुवाई में अलग गुट माना जाए. हालांकि यह साफ नहीं है कि स्पीकर के दफ्तर को यह चिट्ठी मिली या नहीं. दस्तखतों की असलियत की भी कोई पक्की पुष्टि नहीं हुई है. NDA का साथ देने की बात इस बागी गुट ने यह भी कहा है कि वो केंद्र में BJP की अगुवाई वाली NDA सरकार को समर्थन देंगे. यानी यह सिर्फ पार्टी से अलग होना नहीं है, बल्कि सीधे विरोधी खेमे में जाने की तैयारी है. दिल्ली में मीटिंग और शुवेंदु अधिकारी बागी सांसदों की एक मीटिंग पहले कोलकाता में होनी थी, लेकिन अब वो दिल्ली शिफ्ट हो गई है. पश्चिम बंगाल के CM शुवेंदु अधिकारी के इस मीटिंग में आने की उम्मीद थी, लेकिन एक सरकारी काम की वजह से वो शायद नहीं आ पाएंगे. कौन नहीं है इनके साथ? TMC के कई बड़े नेता इस बागी गुट में नहीं हैं. अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा, किर्ती आजाद, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रतिमा मंडल और सज्दा अहमद के दस्तखत उस कागज पर नहीं थे. सुदीप और भूपेंद्र की मुलाकात बीच में एक और दिलचस्प बात हुई. TMC के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मिले. इससे अटकलें लगने लगीं कि क्या सुदीप भी बागी गुट में शामिल हो सकते हैं. हालांकि अभी इस बारे में कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता. कुल मिलाकर ऐसा है कि TMC के 20 से ज्यादा सांसद ममता बनर्जी से बगावत कर एक अलग गुट बनाने की कोशिश में हैं. वो NDA का साथ देना चाहते हैं और स्पीकर से मान्यता मांग रहे हैं. पार्टी के भीतर बड़ी टूट देखने को मिल रही है.

रेल प्रोजेक्ट के तहत कक्षा 6 से 12 तक मासिक टेस्ट अनिवार्य, कंप्यूटर शिक्षा का भी होगा मूल्यांकन

 रांची  स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने रेल (रेगुलर असेसमेंट फार इंप्रूवमेंट इन लर्निंग) प्रोजेक्ट के तहत सरकारी स्कूलों में आयोजित होनेवाली मासिक परीक्षा को लेकर नया एसओपी लागू किया है। इसमें उन स्कूलों में कंप्यूटर और व्यावसायिक शिक्षा की भी परीक्षा आयोजित करने को कहा गया है, जहां समग्र शिक्षा अभियान के तहत क्रमश: आइसीटी तथा व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई हो रही है। एसओपी में कहा गया है कि जिन स्कूलों में आइसीटी लैब उपलब्ध हैं, उन सभी स्कूलों में प्रत्येक माह के चौथे सप्ताह के किसी भी कार्यदिवस को कक्षा छह से 12 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए आइसीटी रेल मासिक परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसमें छात्रों के कंप्यूटर से संबंधित दक्षता का मूल्यांकन किया जाएगा। उक्त परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र एवं उत्तर कुंजी का निर्माण स्कूल स्तर पर करते हुए निर्धारित अवधि में परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों के प्राप्तांकों की प्रविष्टि की जाएगी। वहीं, जिन स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा से संबंधित कक्षाएं संचालित होती हैं, वहां प्रत्येक माह के तीसरे सप्ताह के किसी भी कार्यदिवस को छात्र-छात्राओं की व्यावसायिक शिक्षा की रेल मासिक परीक्षा आयोजित होगी। एसओपी में यह भी कहा गया है कि राज्य स्तर से निर्धारित मासिक जांच परीक्षा की तिथि का पूर्व से जिलों के लिए निर्धारित अवकाश/अन्य कारणों से मेल होने पर उस जिले के स्कूलों द्वारा अवकाश के बाद मासिक जांच परीक्षा अगले कार्यदिवस में अनिवार्य रूप से ली जाएगी। आइसीटी तथा व्यावसायिक परीक्षा के अलावा सभी विषयाें में भी मासिक परीक्षा में 50 प्रतिशत प्रश्न वस्तुनिष्ठ तथा इतने ही प्रश्न विषयनुष्ठ (लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय पूछे जाएंगे)। कक्षा एक से आठ के लिए अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षाओं के पूर्व प्रोजेक्ट रेल के तहत होने वाली मासिक जांच परीक्षाओं के औसत प्राप्तांक को रचनात्मक मूल्यांकन का प्राप्तांक माना जाएगा। साथ ही यह अंक छमाही और वार्षिक मूल्यांकन के कुल योग में जुड़ेगा। बताते चलें कि वर्तमान में राज्य के 5,886 स्कूलों में आइसीटी लैब की सुविधा बहाल है। 61 पीएम श्री स्कूलों तथा 108 माध्यमिक विद्यालयों में शीघ्र ही यह सुविधा बहाल होगी। वहीं, राज्य के कई स्कूलों में 11 विषयों में व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है। रेल प्रोजेक्ट का आया है बेहतर परिणाम रेल प्रोजेक्ट के तहत स्कूलों में आयोजित हो रही मासिक परीक्षा का बेहतर परिणाम आया है। इससे जैक की 10वीं तथा 12वीं की परीक्षा के परिणाम में सुधार हुआ है। राज्य के कितने स्कूलों में आइसीटी लैब स्कूलों की श्रेणी                               कुल स्कूल     स्वीकृत स्कूल     जहां सुविधा बहाल है उच्च प्राथमिक                              11,382           3,368            3,290 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक     2,869            2,794              2,596