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नालंदा, गया और भोजपुर की विरासत का बढ़ा सम्मान, तीन अनूठे उत्पाद GI टैग से हुए सम्मानित

पटना बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य के तीन विशिष्ट और पारंपरिक उत्पादों को भारत सरकार की ओर से भौगोलिक संकेतक यानी जीआई (GI) टैग प्रदान किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, इस गौरवशाली सूची में नालंदा की विश्वप्रसिद्ध 'बावन बूटी साड़ी-फैब्रिक', गयाजी का अनूठा 'पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट' तथा भोजपुर की ऐतिहासिक 'पीढ़िया पेंटिंग' शामिल हैं। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और बिहार सरकार के संयुक्त व अथक प्रयासों से बिहार की इस अनमोल हस्तशिल्प विरासत को यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त हुआ है। इस जीआई टैग के मिलने से अब इन पारंपरिक कलाओं से जुड़े स्थानीय बुनकरों, मूर्तिकारों और कलाकारों को वैश्विक बाजार में एक नई पहचान और आर्थिक मजबूती मिलेगी। पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के मार्गदर्शन से पूरी हुई पंजीकरण प्रक्रिया इन पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और जीआई पंजीकरण की इस बेहद जटिल कानूनी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में देश के जाने-माने विशेषज्ञों का बड़ा योगदान रहा है। नाबार्ड ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि बिहार के इन तीनों उत्पादों के जीआई पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया में वाराणसी के ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव और पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का अमूल्य मार्गदर्शन और विशेष तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। उनके कुशल दिशा-निर्देशन और वैज्ञानिक दस्तावेजों की तैयारी के कारण ही बिहार के इन तीन बेजोड़ शिल्पों को भौगोलिक संकेतक की सूची में शामिल कराना संभव हो पाया। बावन बूटी, पत्थरकट्टी और पीढ़िया पेंटिंग का बढ़ेगा दुनिया में मान इस ऐतिहासिक टैग के मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब दुनिया भर के बाजारों में बिहार के इन तीनों विशिष्ट उत्पादों की प्रामाणिकता और शुद्धता पर कोई सवाल नहीं उठा सकेगा। बौद्ध कला के प्रतीकों को समेटने वाली नालंदा की बावन बूटी साड़ी, पहाड़ों को तराशकर बनाई जाने वाली गयाजी की पत्थरकट्टी कला और भोजपुर की लोक परंपरा को दर्शाने वाली पीढ़िया पेंटिंग के नाम पर अब कोई भी नकली उत्पाद नहीं बेच पाएगा। कला समीक्षकों का मानना है कि इस उपलब्धि से न केवल बिहार के पर्यटन और हस्तशिल्प उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नई पीढ़ी के स्थानीय युवाओं को भी अपने पारंपरिक रोजगार से जुड़ने की एक नई प्रेरणा मिलेगी।

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर राहत राशि में अनियमितता के गंभीर आरोप, CID जांच भी तेज

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान के बीच भाजपा के एक नेता ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी पर अम्फान चक्रवात राहत कोष में 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. भाजपा नेता अभिजीत दास बॉबी ने डायमंड हार्बर के बिष्णुपुर थाने में 17 पन्नों की शिकायत सौंपी. इस बीच पश्चिम बंगाल सीआईडी ने जाली हस्ताक्षर करने के मामले में अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए एक और नोटिस जारी किया है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 में आए सुपर साइक्लोन अम्फान के पीड़ितों के लिए जारी राहत राशि के वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं. इसमें डुप्लीकेट और संदिग्ध एंट्री, एक ही मोबाइल नंबर और बैंक खाते के जरिए कई लाभार्थियों को भुगतान और एक ही आवासीय भवन से कई लोगों को लाभार्थी दिखाने जैसे आरोप शामिल हैं. अभिजीत दास बॉबी ने कहा, 'आज की शिकायत में मैंने विशेष रूप से डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत बिष्णुपुर के दो ब्लॉकों का उल्लेख किया है, जहां लगभग 57 हजार लाभार्थियों के बीच 57.86 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे.' डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से दो बार अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके बॉबी ने आरोप लगाया कि राहत राशि का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व द्वारा हड़प लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में यह खेल हुआ और इसमें ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) और तत्कालीन अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (विकास) सहित कई सरकारी अधिकारी भी शामिल थे. 2020 में आया था अम्फान चक्रवात बता दें कि 20 मई 2020 को आए अम्फान चक्रवात ने पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी. पूर्वी मेदिनीपुर और उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना जिलों में व्यापक नुकसान हुआ था और 96 लोगों की मौत हुई थी. भाजपा नेता ने दावा किया कि पूरे डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के आंकड़ों के आधार पर करीब 238 करोड़ रुपये के राहत घोटाले की आशंका है. उन्होंने मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठित करने की मांग की है. अभिजीत दास बॉबी ने कहा कि जल्द ही डायमंड हार्बर क्षेत्र के अन्य थानों में भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई जाएंगी. साथ ही उन्होंने पूरे खर्च का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की. अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर क्यों उठे सवाल? शिकायत में कहा गया है कि सार्वजनिक राहत पोर्टल से डाउनलोड किए गए आधिकारिक दस्तावेजों में हजारों स्वीकृत आवेदनों के 'Recommended By' कॉलम में अभिषेक बनर्जी और उनके कार्यालय का नाम बार-बार दिखाई देता है. इससे यह सवाल उठता है कि राहत वितरण प्रक्रिया में उनकी भूमिका कितनी व्यापक थी और क्या उनके कार्यालय से जारी सिफारिशों ने सामान्य प्रशासनिक और भौतिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया. ममता बनर्जी सरकार ने अम्फान प्रभावित लोगों के लिए 6,250 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी और पीड़ितों के खातों में सीधे धनराशि भेजने का वादा किया था. इसके लिए अम्फान साइक्लोन राहत कोष भी बनाया गया था. वहीं केंद्र सरकार ने नेशनल डिजास्टर​ रिलीफ फंड (NDRF) से अम्फान राहत और पुनर्वास के लिए 3,077 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. राज्य सरकार ने पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 20,000 रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 5,000 रुपये की सहायता देने की व्यवस्था की थी. हालांकि आरोप है कि घरों के पुनर्निर्माण के लिए जारी राशि का कुछ हिस्सा पंचायत प्रतिनिधियों और उनके करीबी लोगों के खातों में पहुंच गया. अम्फान राहत वितरण को लेकर वर्ष 2020 में राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे. इसके बाद ममता सरकार ने तृणमूल से जुड़े कुछ पंचायत पदाधिकारियों को निलंबित किया था और सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था. एक मोबाइल नंबर से कई लाभार्थियों को भुगतान भाजपा नेता ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि भ्रष्टाचार एक सुनियोजित और संस्थागत तंत्र के जरिए किया गया. उन्होंने ऐसे दस्तावेज भी संलग्न किए हैं, जिनमें कथित तौर पर एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल 14 लाभार्थियों के लिए किया गया और उन सभी को मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के आधार पर 20-20 हजार रुपये दिए गए. इसके अलावा चार अन्य मोबाइल नंबरों के जरिए भी 6 से 9 लाभार्थियों को राहत राशि मिलने का आरोप लगाया गया है. बॉबी ने कहा, 'एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अलग-अलग गांवों के लाभार्थियों के लिए किया गया. ये सभी विसंगतियां सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करती हैं.' वहीं तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है. पार्टी के एक सूत्र ने कहा, 'यह हमारे नेता के खिलाफ भाजपा की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है. हम इसका कानूनी तरीके से मुकाबला करेंगे.'

तूफान और बारिश के बाद सुहाना हुआ मौसम, अब बढ़ी नमी से लोग बेहाल

लखनऊ यूपी के कई इलाकों में शुक्रवार देर रात तूफान के साथ हुई बारिश से मौसम सुहाना हो गया। रात से शनिवार तड़के तक 19 एमएम वर्षा रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, लेकिन भारी बारिश की संभावना फिलहाल कम है। तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। पश्चिम यूपी में बारिश का ट्रेंड भी बदल रहा है। पिछले तीन दिनों से दोपहर या शाम के बजाय देर रात बारिश हो रही है। शुक्रवार रात करीब 1:20 बजे शुरू हुई बारिश बाद में तूफानी रूप ले गई। तड़के तक तेज हवाओं के साथ बारिश का सिलसिला जारी रहा। इसके असर से अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 8.3 डिग्री कम होकर 21.0 डिग्री सेल्सियस रहा। नम हवाओं ने दिन और रात दोनों समय लोगों को राहत पहुंचाई। मौसम विभाग के अनुसार 15, 18 और 19 जून को बादल छाए रहने के साथ हल्की बूंदाबांदी या बौछार पड़ सकती है। अन्य दिनों में आसमान साफ रहने और गर्मी बढ़ने की संभावना है। बादल छाने से बदला मौसम तेज धूप के बीच आसमान में बादलों की आवाजाही और पुरवा हवा चलने से मौसम का मिजाज बदल गया है, जिसस लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन अब उमस ने जन जीवन को बेहाल कर दिया है। मौसम विभाग ने यूपी के अलग-अलग इलाकों में तेज हवा चलने और हल्की बारिश की संभावना व्यक्त किया है। पुरवा हवा चलने से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ गई है, जिससे सड़कों पर आने-जाने वाले लोग पसीने से लथपथ नजर आने लगे हैं। हालांकि द्वितीय शनिवार को छुटटी होने के कारण दोपहर में सड़क और बाजारों पर आवाजाही आम दिनों की तुलना में बेहद कम दिखी। उमसभरी गर्मी के कारण लोगों के घरों में लगे पंखा और कूलर बेमतलब साबित हो रहे हैं। लोग चिपचिपी गर्मी से बचने के लिए ठंडे पेय का सहारा लेने लगे हैं। मौसम की तल्खी में आई कमी से सब्जी उत्पादकों को राहत मिली है। पिछले दिनों भीषण गर्मी और लू के कारण हरी सब्जियां खेतों में ही झुलस रही थीं। किसान हर दिन सिंचाई करने को लचार थे, बावजूद उत्पाद बेहद कम हो रहा था। आसमान में बादलों की आवाजाही से फसलों को राहत मिली है। भीषण गर्मी के बीच मौसम के मिजाज में आंशिक बदलाव तो आया है, लेकिन लोगों को राहत मिलने के बजाय परेशानी और बढ़ गई है। शनिवार को आसमान में बादलों की आवाजाही के चलते चिलचिलाती धूप से तो कुछ राहत मिली, लेकिन हवा थमने के कारण बढ़ी उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया। उमस भरी इस गर्मी के बीच बिजली विभाग की लापरवाही ने कोढ़ में खाज का काम किया। बार-बार हो रही अघोषित बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या ने लोगो का हाल बेहाल कर दिया।

वीकेंड थेरेपी: नींद, डिजिटल डिटॉक्स और नेचर से तनाव कम करने के आसान तरीके

 सोमवार से लेकर शुक्रवार या फिर शनिवार तक हम सभी एक भागदौड़ भरी जिंदगी जीते हैं. ऑफिस के कामों को खत्म करना और घर की जिम्मेदारियों को पूरा करने के चक्कर में हम सिर्फ फिजिकली ही नहीं बल्कि मेंटली भी पूरी तरह से थक जाते हैं. इस समय हम सिर्फ वीकेंड का इंतजार करते हैं क्योंकि इसी एक या दो दिनों के दौरान हम खुद को रिलैक्स करने के लिए कुछ कर पाते हैं. वीकेंड पर हमारे अंदर बहुत कुछ करने की इच्छा तो होती है लेकिन फिर भी हम इसे सोने या फिर सोशल मीडिया स्क्रॉल करने में ही बर्बाद कर देते हैं, जिस वजह से हमारी थकान दूर नहीं हो पाती है. अगर आप सच में इस वीकेंड खुद को रिलैक्स और रिफ्रेशिंग फील करना चाहते हैं, तो आपको वीकेंड थेरेपी जरूर अपनानी चाहिए. आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही कुछ आसान कामों के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें इस वीकेंड करके आप अपने शरीर और दिमाग को पूरी तरह से रिलैक्स्ड फील करवा सकते हैं. तो चलिए इनके बारे में जानते हैं विस्तार से. सही तरीके से पूरा करें नींद का कोटा पूरे हफ्ते सुबह जल्दी उठने के चक्कर में हमारी नींद अधूरी रह जाती है. वीकेंड पर आप अपनी इस अधूरी नींद को पूरा कर सकते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप दोपहर के 12 बजे तक सोते रहें. ऐसा करने से शरीर में सुस्ती और बढ़ जाती है और साथ ही दिमाग भी थका हुआ महसूस करने लगता है. आप रोज के समय से सिर्फ एक या दो घंटा ज्यादा सो सकते हैं. एक अच्छी और गहरी नींद आपके दिमाग के सेल्स को शांत करती है और आपको मेंटल पीस देती है. डिजिटल डिटॉक्स भी है बेहद जरूरी आज के समय में हम हर समय मोबाइल, लैपटॉप या टीवी की स्क्रीन से चिपके रहते हैं. सोशल मीडिया की रील्स और ऑफिस के ई-मेल्स हमारे दिमाग को कभी शांत नहीं होने देते. वीकेंड पर कम से कम 4 से 5 घंटे के लिए अपने फोन को खुद से दूर रखें. ऐसा करने को डिजिटल डिटॉक्स करना कहते हैं. जब आप स्क्रीन से दूरी बनाएंगे, तो आपकी आंखों को आराम मिलेगा और दिमाग का स्ट्रेस भी कम होगा. नेचर के साथ बिताएं थोड़ा समय कंक्रीट के जंगलों और बंद कमरों से बाहर निकलकर थोड़ी फ्रेश ऑक्सीजन लेना भी बहुत जरूरी है. वीकेंड की सुबह या शाम को किसी नजदीकी पार्क में जाएं. हरी घास पर नंगे पैर चलें, पौधों को देखें और लंबी सांसें लें. नेचर के बीच रहने से शरीर में हैप्पी हार्मोन्स बढ़ते हैं, जिससे डिप्रेशन और एंग्जायटी दूर होती है. यह आपके शरीर को नेचुरली रीचार्ज करने का सबसे अच्छा तरीका है. अपनी पसंद का कोई काम करना भागदौड़ भरी इस जिंदगी में हम अक्सर अपनी उन हॉबीज को भूल जाते हैं जो हमें खुशी देती थीं. इस वीकेंड अपने उस पुराने शौक को फिर से जगाने की कोशिश करें. चाहे वह शौक पेंटिंग करने का हो, कोई अच्छी किताब पढ़ने का हो, गार्डनिंग करने का हो या फिर म्यूजिक सुनने का. जब आप अपनी पसंद का काम करते हैं, तो दिमाग का सारा स्ट्रेस गायब हो जाता है और अंदर से एक नई पॉजिटिव एनर्जी का अहसास होता है. खुद को दें रिलैक्सिंग मसाज या बाथ हफ्ते भर की थकान के कारण मसल्स में खिंचाव और दर्द होने लगता है. शरीर को आराम देने के लिए आप वीकेंड पर गुनगुने पानी से नहा सकते हैं या फिर हल्के तेल से शरीर की मसाज कर सकते हैं. इसके अलावा गुनगुने पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक डालकर पैर डुबोकर बैठने से भी बहुत आराम मिलता है. इससे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और सारी फिजिकल थकावट भी पल भर में दूर हो जाती है. अपनों के साथ दिल खोलकर बातें करें अकेलेपन और काम के प्रेशर से भी आपको मेंटल स्ट्रेस हो सकती है. वीकेंड का कुछ समय अपने परिवार, बच्चों या दोस्तों के साथ बिताएं. उनके साथ बैठकर चाय पीते हुए अपनी पुरानी यादें ताजा करें या हंसी-मजाक करें. अपनों के साथ खुलकर बात करने और हंसने से मन का बोझ हल्का होता है. यह एक ऐसी थेरेपी है जो किसी भी दवाई से ज्यादा असरदार है.

MP की लाड़ली बहनों को बड़ा तोहफा, CM मोहन यादव आज ट्रांसफर करेंगे 37वीं किस्त की रकम

भोपाल. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार, 14 जून को सागर जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र के केसली से राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की 37वीं किस्त (Ladli Behna Yojana 37th Installment) जारी करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से 1500 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं। 190.85 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने दौरे के दौरान केसली क्षेत्र में 190.85 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात भी देंगे। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी और स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। महिलाओं को आर्थिक सहायता का लाभ लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और घरेलू जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकें। 37वीं किस्त के अंतर्गत एक बार फिर 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में राशि प्राप्त होगी। क्या है लाड़ली बहना योजना? लाड़ली बहना योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। योजना का लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलता है जो मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी हों। परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए और पांच एकड़ से अधिक भूमि या चारपहिया वाहन नहीं होना चाहिए। विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाएं, जिनकी आयु 21 से 60 वर्ष के बीच है, योजना के लिए पात्र हैं। ऐसे चेक करें किस्त का स्टेटस लाड़ली बहना योजना की किस्त का स्टेटस चेक करने के लिए महिलाएं आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाकर “आवेदन व भुगतान की स्थिति” विकल्प पर क्लिक कर सकती हैं। इसके बाद समग्र आईडी या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करना होगा। ओटीपी सत्यापन के बाद भुगतान की पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी।

बैरागीवाला गांव में दो समुदायों की झड़प का CCTV आया सामने, एक की मौत से बढ़ा तनाव

उत्तराखंड उत्तराखंड के विकासनगर स्थित बैरागीवाला गांव में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प में युवक की मौत के बाद बवाल बढ़ता जा रहा है. यहां आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके घरों पर ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में पत्थराव कर दिया. आरोपी के घर को आग के हवाले कर दिया गया. वहीं प्रशासन ने मामले को देखते हुए इंटरनेट बंद कर दिया है. अब इस मामले को लेकर 12 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. वहीं इस घटना के बाद बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें कई लोग लाठी-डंडों के साथ एक-दूसरे पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं. बैरागीवाला गांव से सामने आए CCTV फुटेज ने घटना के खौफनाक मंजर को कैमरे में कैद कर लिया है. वीडियो में लाठी-डंडों से लैस लोग सड़कों पर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं. कुछ लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, तो कहीं चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल नजर आ रहा है. इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया. पुलिस का कहना है कि विवाद की शुरुआत खेत में पानी लगाने को लेकर हुई थी, लेकिन कुछ ही देर में मामूली कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई. अब सामने आए CCTV फुटेज में वो हिंसा दिखाई दे रही है. वीडियो में देखा जा सकता है कि गांव की गलियों में अचानक हलचल बढ़ जाती है. कुछ लोग हाथों में लाठियां लेकर दौड़ते नजर आते हैं. इसके बाद हमला शुरू हो जाता है. लोग इधर-उधर भागने लगते हैं. महिलाएं और बच्चे भी डर के साये में सुरक्षित जगह तलाशते दिखाई देते हैं. इस हिंसक झड़प में एक हिंदू युवक की मौत हो गई, जबकि महिला समेत तीन लोग घायल हुए हैं. युवक की मौत की खबर फैलते ही गांव का माहौल और ज्यादा गर्म हो गया. देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए. घटना के बाद गुस्साए हिंदूवादी संगठन के लोगों ने गांव में पहुंचकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के एनकाउंटर समेत उनके घरों पर बुलडोजर एक्शन की मांग की और हाइवे जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समुदाय विशेष देवभूमि को कश्मीर बनाना चाहता है. यह घटना कोई मामूली घटना नहीं है कि यह एक हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग की गई. गुस्साए लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नेशनल हाइवे जाम कर दिया. कई घंटों तक सड़क पर प्रदर्शन चलता रहा. लोगों का कहना था कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को पूरे इलाके को छावनी में बदलना पड़ा. अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और हर गतिविधि पर नजर रखी जाने लगी. प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली. घटना के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा विधायक घटना के बाद भाजपा विधायक मुन्ना चौहान पहले घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे. फिर वहां से सीधे बैरागीवाला गांव पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए मौके पर मौजूद पुलिस के आला अधिकारियों को सख्त एक्शन के निर्देश दिए. विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने पीड़ित परिवार से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया. इस मामले में सहसपुर कोतवाली पुलिस के मौजूदा थाना प्रभारी को सख्त लहजे में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया. अब इस पूरे मामले में CCTV फुटेज पुलिस के लिए सबसे अहम कड़ी बन गया है. वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी. हालांकि गांव में माहौल अब भी संवेदनशील बना हुआ है. एक तरफ परिवार अपने बेटे की मौत का इंसाफ मांग रहा है, दूसरी तरफ पूरा गांव CCTV में कैद उस हिंसा को देखकर सहमा हुआ है. घटना को लेकर एसपी ग्रामीण ने क्या कहा? इस घटना को लेकर एसपी देहात पंकज गैरोला ने कहा कि खेत में पानी लगाने को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुए मामूली विवाद के बाद कुछ युवकों ने विनोद नाम के युवक को पीट-पीटकर मार डाला. वहीं तीन लोगों पर जानलेवा हमला कर उन्हें घायल कर दिया. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. प्रदर्शनकारियों से बात की जा रही है, आरोपियों की धड़पकड़ के लिए पुलिस टीम दबिश दे रही है. जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

दिल्ली सरकार का बड़ा प्लान: 11.4 एकड़ में ई-वेस्ट इको पार्क, 30 साल लीज पर निजी कंपनी

नई दिल्ली  राजधानी की दिल्ली सरकार इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के निपटारे के लिए बनने वाले ई-वेस्ट इको पार्क को अब पीपीपी मॉडल पर विकसित करेगी। सरकार को इसपर कोई पैसा खर्च नहीं करना होगा। दिल्ली सरकार की दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ( DSIIDC ) ने टेंडर जारी कर इसके लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे है। सूत्रों की मानें तो चयनित कंपनी को यह परियोजना 30 साल के लिए लीज पर दी जा सकती है। दिल्ली में हर साल 2 लाख टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है राजधानी दिल्ली में हर साल 2 लाख टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है। यह देश में निकलने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक कचरे का 9.5 पर्सेट है। इसलिए तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2022 में होलंबी कलां में 21 एकड़ क्षेत्र में ई-वेस्ट इको पार्क बनाने का फैसला किया था। उस समय कई कोशिशों के बाद भी डीडीए की ओर से पूरी जमीन उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण यह योजना लटकी रही। मौजूदा सरकार ने 11.4 एकड़ में विकसित करने का फैसला लिया अब मौजूदा सरकार ने इसे 11.4 एकड़ में विकसित करने का फैसला किया है। डीडीए ने इसके लिए जमीन भी उपलब्ध करा दी है। DSIIDC के दस्तावेजों के मुताबिक, यह परियोजना PPP मॉडल पर विकसित की जाएगी। इसके तहत चयनित कंपनी ई-वेस्ट 2 लाख टन ई-वेस्ट दिल्ली में हर साल निकलता है। ई-वेस्ट इको पार्क में कैसे होगा काम     ई-वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत, पुराने मोबाइल, टीवी, फ्रिज और कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सुरक्षित तरीके से नष्ट और अलग किया जाएगा।     जो उपकरण ठीक किए जा सकते हैं, उनकी मरम्मत करके उन्हें दोबारा उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा।     पार्क में एक डेडिकेटेड इलेक्ट्रॉनिक बाजार होगा, जहां रीसायकल और नवीनीकृत किए गए सामानों को बेचा जाएगा।     कचरे से प्लास्टिक को अलग किया जाएगा और कीमती धातुओं को निकालने व दोबारा निर्माण (Remanufacturing) करने की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

यूपी में अपराधियों पर शिकंजा: बरेली में 84 शातिरों को माफिया घोषित करेगी पुलिस

लखनऊ अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए यूपी पुलिस लगातार ऐक्शन ले रही है। इसी कड़ी में बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने जघन्य अपराधों में शामिल 84 अपराधियों का चिह्नीकरण कराया है, जिन्हें माफिया घोषित किया जाएगा। यह कार्रवाई 30 जून तक पूरी की जाएगी, एडिशनल एसपी को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि अपराध और अपराधियों पर रोकथाम के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इनकी निगरानी के लिए गैंगस्टर, गैंग पंजीकरण, हिस्ट्रीशीट खोलने और माफिया घोषित करने की कार्रवाई भी की जाती है। इसी कड़ी में लूट, चोरी, डकैती, हत्या, मादक पदार्थ तस्करी, गोकशी, जमीनों पर अवैध कब्जे जैसे अपराधों में शामिल 84 अपराधियों का चिह्नीकरण करके माफिया घोषित कराया जा रहा है। इनकी सूची तैयार कराकर सभी थानों को सौंप दी गई है और संबंधित एडिशनल एसपी को 30 जून तक यह कार्रवाई पूरी कराने के निर्देश दिए हैं। 8 अपराधियों के गैंग रजिस्टर्ड हत्या, लूट, डकैती, गोकशी जैसे जघन्य अपराधों में शामिल आठ अपराधियों के गैंग पंजीकृत किए गए हैं। 21 अन्य अपराधियों को गैंग के सदस्य के तौर पर पंजीकृत किया है। जल्दी ही इन सभी के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई भी होगी। किला में परसाखेड़ा के आसिफ का गैंग पंजीकृत कर सोहेल उर्फ सोहिल, बिलाल और रहीमुद्दीन को सदस्य बनाया गया है। अलीगंज में कुंडरिया फैजुल्लपुर के नेकसू उर्फ पूरनलाल के गैंग का पंजीकरण कर भूपराम को सदस्य बनाया है। हाफिजगंज में लमखेड़ा के बाबूराम निराला के गैंग में मुन्नालाल, मैना देवी, बिल्लू यादव उर्फ बलवीर और पुरनापुर के प्रमोद उर्फ पकौड़ी के गैंग में सनी व प्रशांत पटेल को सदस्य बनाया है। मीरगंज में दियोरिया अब्दुल्लागंज निवासी सुहेल को गैंगलीडर और तस्लीम को सदस्य बनाया है। इज्जतनगर में पुरनापुर के मनोज पटेल को गैंग लीडर और गौरव गंगवार, केशव पटेल, शिवम पंडित व अजय पटेल को सदस्य बनाया है। क्योलड़िया में भूड़ा सैदपुर के मुस्तकीम का गैंग पंजीकृत कर अनूप, मुन्ना पुत्र नियामुद्दीन, नईम, मुन्ना पुत्र मोहम्मद उमर व जीशान को सदस्य बनाया है। बारादरी में बड़ेपुरा निवासी विमल को गैंगलीडर और सोहिल खान उर्फ सोहेल व अनिल को सदस्य बनाया गया है। उत्तरी क्षेत्र के सर्वाधिक अपराधी बनेंगे माफिया शहर क्षेत्र के सर्किल प्रथम में तीन, द्वितीय में सात, तृतीय में 16 अपराधी चिह्नित किए गए हैं। उत्तरी क्षेत्र के बहेड़ी सर्किल में 32, नवाबगंज में दो व हाईवे में 13 अपराधी माफिया घोषित होंगे। दक्षिणी क्षेत्र के आंवला सर्किल में तीन, मीरगंज में चार और फरीदपुर में चार अपराधी चिह्नित किए गए हैं। दो साल में पंजीकृत हुए 102 गैंग एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि अपराध पर रोकथाम के लिए शातिर अपराधियों का चिह्नीकरण करके लगातार कार्रवाई कराई जा रही है। इसी कड़ी में आठ शातिर अपराधियों का गैंग पंजीकरण कराया गया है। इससे पूर्व दो साल में करीब 102 गैंग पंजीकृत किए गए हैं। अब जिले में पंजीकृत गैंग की संख्या 503 हो गई है। 84 अन्य अपराधी माफिया घोषित करने के लिए चिह्नित किए गए हैं( क्या बोले एसएसपी बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि अपराध पर रोकथाम के लिए शातिर अपराधियों का चिह्नीकरण करके लगातार कार्रवाई कराई जा रही है। आठ शातिर अपराधियों का गैंग पंजीकरण कराया है। 84 अन्य माफिया घोषित करने के लिए चिह्नित किए गए हैं, जिन पर 30 जून पर कार्रवाई कराई जाएगी।

बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव: 12 रेंज को फिर चार जोन में बांटने की योजना

 पटना बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. राज्य में 7 साल पहले खत्म की गई जोनल व्यवस्था को फिर से लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है. इसके लिए पुलिस मुख्यालय की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिलने की बात सामने आ रही है. 12 पुलिस रेंज को फिर बांटा जाएगा जोन में फिलहाल बिहार में 12 पुलिस रेंज काम कर रही हैं. नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन रेंजों को फिर से जोन में विभाजित किया जाएगा. इससे फील्ड पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने और प्रशासनिक निगरानी मजबूत करने में मदद मिलेगी. जल्द लागू हो सकती है नई व्यवस्था सूत्रों के मुताबिक, गृह विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद नई व्यवस्था को जल्द लागू किया जा सकता है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, पहले की तरह चार जोन बनाए जा सकते हैं. हालांकि, वर्तमान जरूरतों को देखते हुए कुछ बदलाव भी किए जा सकते हैं. 2019 में खत्म हुई थी जोनल व्यवस्था बिहार पुलिस में जुलाई 2019 में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया था. उस समय जोनल सिस्टम को समाप्त कर केवल रेंज व्यवस्था लागू की गई थी. साथ ही बेगूसराय को नया रेंज बनाकर कुल रेंज की संख्या 11 से बढ़ाकर 12 कर दी गई थी. अभी किन जिलों को संभालती हैं रेंज? वर्तमान में पटना रेंज में पटना और नालंदा शामिल हैं. मगध रेंज में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल आते हैं. भागलपुर रेंज में भागलपुर, बांका और नवगछिया पुलिस जिला शामिल है. तिरहुत रेंज में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिले आते हैं. कोसी रेंज में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा हैं. वहीं पूर्णिया रेंज में पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जिले शामिल हैं. मुंगेर रेंज में मुंगेर, जमुई, लखीसराय और शेखपुरा आते हैं. बेगूसराय रेंज में बेगूसराय और खगड़िया जिले शामिल हैं. 37 साल तक लागू रही थी जोन व्यवस्था बिहार पुलिस में जोनल सिस्टम की शुरुआत 1982 में हुई थी. उस समय राज्य को चार जोन- पटना, भागलपुर, कोसी और तिरहुत में बांटा गया था. यह व्यवस्था करीब 37 वर्षों तक लागू रही. जोन में आईजी रैंक के अधिकारी और रेंज में डीआईजी रैंक के अधिकारी तैनात किए जाते थे. पुलिसिंग को और मजबूत करने की कवायद सरकार का मानना है कि जोनल व्यवस्था लागू होने से पुलिस प्रशासन की निगरानी और जवाबदेही बढ़ेगी. साथ ही कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा. इसी उद्देश्य से पुराने सिस्टम को नए स्वरूप में फिर से लागू करने की तैयारी की जा रही है.

हरियाली बढ़ाने के लिए मनरेगा से पहाड़ियों पर हरित मॉडल विकसित करेगा प्रशासन

सोनभद्र सोनांचल की सूखी और बंजर पहाड़ियां अब हरियाली की नई कहानी लिखने जा रही हैं। इस वर्ष पौधारोपण अभियान को नवाचार से जोड़ते हुए जिले की छह प्रमुख पहाड़ियों को हरित माडल के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। मनरेगा के माध्यम से जुड़वानी पहाड़ी, गड़ही पहाड़ी, अंबेडकर नगर पहाड़ी, रासपहाड़, सरहद पहाड़ी और भवरहवा पहाड़ी पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण कराया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखते हुए स्थायी हरित आवरण तैयार करना है। पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को साथ लेकर चल रही इस पहल में आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। पहाड़ियों की ढलानों पर ट्रेंच (खाई) बनाई जाएंगी, जिनमें वर्षा का पानी संचित होगा। इससे पौधों को लंबे समय तक नमी मिलती रहेगी और भूजल स्तर को भी मजबूती मिलेगी। अभियान में स्थानीय ग्रामीणों और सामुदायिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे पौधों की देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी साझा हो सके। ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था होगी समृद्ध जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने की तैयारी है। इसके तहत प्रत्येक विकास खंड में 10-10 फलोद्यान विकसित किए जाएंगे। इन फलोद्यानों की देखभाल स्वयं सहायता समूहों को सौंपी जाएगी। इससे जहां महिलाओं को रोजगार और आय के अवसर मिलेंगे, वहीं गांवों में फल उत्पादन बढ़ने से पोषण और पर्यावरण दोनों को लाभ पहुंचेगा। यह पहल आने वाले वर्षों में जिले की पहचान को नई हरित दिशा देगी। क्या है ट्रेंच तकनीक पौधारोपण को सफल बनाने में ट्रेंच तकनीक को काफी प्रभावी माना जाता है। इसके अंतर्गत पहाड़ियों पर लंबी और संकरी खाइयां बनाई जाती हैं, जिनमें वर्षा जल एकत्र होता है। धीरे-धीरे यह पानी मिट्टी में समाहित होकर पौधों की जड़ों तक नमी पहुंचाता है। इससे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी पौधों की जीवितता बढ़ती है। साथ ही मिट्टी का कटाव रुकता है और भूजल पुनर्भरण को भी गति मिलती है। हरियाली के साथ बढ़ेगी आजीविका फलोद्यान विकास योजना पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण का भी माध्यम बनेगी। स्वयं सहायता समूहों को फलोद्यानों की देखभाल और प्रबंधन की जिम्मेदारी मिलने से उन्हें नियमित आय का अवसर मिलेगा। आंगनबाड़ी केंद्र व परिषदीय विद्यालयों में इसे भेजा जाएगा। यह माडल हरित विकास और ग्रामीण आर्थिक सुदृढ़ीकरण का संतुलित उदाहरण बन सकता है। जनपद के छह पहाड़ियों पर ट्रेंच बनाकर पौधारोपण किया जाएगा। इसको लेकर सभी तैयारी अपने अंतिम चरण में है। निश्चित रूप से पर्यावरण संरक्षण को लेकर ऐसी पहल की जरूरत है। आमजन भी अधिक से अधिक पौधा रोपण के कार्य में आगे आएं।     चर्चित गौड़, जिलाधिकारी, सोनभद्र