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मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में एग्रो सौर पीवी परियोजना के लिए हुआ महत्वपूर्ण एमओयू

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में एग्रो सौर पीवी के लिए हुआ एमओयू नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग तथा इंडो-जर्मन एग्रीवोल्टाइक परियोजना मिलकर करेंगे काम प्रदेश में एग्री सौर पीवी के विकास में जर्मन कम्पनी जीआईजेड करेगी सहयोग भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रदेश में एग्रो सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की मंशा पर एक और उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड तथा जर्मन सरकार समर्थित इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना (आईजीसीए) के मध्य सोमवार को मंत्रालय, भोपाल में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर आदान-प्रदान किया गया। एग्री वोल्टाइक, कृषि एवं सौर ऊर्जा के संयुक्त उपयोग को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया एक संगठन है। इसका उद्देश्य कृषि भूमि पर खेती के साथ-साथ उसी खेत में ही सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, जिससे अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता कम हो, खाद्य सुरक्षा बनी रहे तथा भूमि संबंधी विवादों से भी बचा जा सके। इस काम में जर्मन कम्पनी सरकार को सहयोग देगी। यह पहल पीएम-कुसुम 2.0 सहित विभिन्न योजनाओं के अनुरूप राज्य में विशिष्ट एग्रीवोल्टाइक ढांचा विकसित करने, किसानों की आय बढ़ाने, भूमि उपयोग दक्षता सुधारने, उत्पादित ऊर्जा की सुरक्षा सुदृढ़ करने तथा जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगी। यह गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन मई 2030 तक प्रभावी रहेगा। इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग मनु श्रीवास्तव, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड अमनवीर सिंह बैंस, भारत में जर्मन दूतावास के पदाधिकारी, एग्री वोल्टाइक संगठन से एलेक्जेंडर, जर्मनी की जीआईजेड कम्पनी के पदाधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। एग्री सौर पीवी के तहत सरकार किसानों को सब्सिडी देगी। इससे किसान अपनी जमीन के मालिकाना हकदार होंगे। किसान जमीन में खेती करेंगे और उसी खेत में सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा उत्पादन कर अतिरिक्त आय भी अर्जित करेंगे। यह किसानों के लिए डबल सौगात होगी। राज्य सरकार और इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना के मध्य हुई इस परस्पर साझेदारी के अंतर्गत कम्पनी द्वारा एग्रीवोल्टाइक परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी एवं आर्थिक मूल्यांकन, डिजाइन, वित्तीय व्यवहार्यता और क्रियान्वयन में सहयोग किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, ऊर्जा विकासकर्ताओं, डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनीज (डिस्कॉम) एवं अन्य संबंधित हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कम्पनी द्वारा राज्य में कृषि उत्पादकता एवं खाद्य सुरक्षा को संरक्षित रखते हुए उपयुक्त नीतिगत एवं नियामक ढांचा विकसित करने में भी सहयोग किया जाएगा।  

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय कर रही है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री साय

शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय कर रही है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री साय स्कूली शिक्षा में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का संत समाज ने किया स्वागत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विभिन्न संत-महात्माओं ने की सौजन्य भेंट, आध्यात्मिक शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्णय पर जताया आभार रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार से उदय लाल जी  तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के देवकर साहब जी ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर संत-महात्माओं ने छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों और मंत्रों को पुनः शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया। संतों ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों में विद्यार्थियों को "गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर" जैसे मंत्रों एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से धीरे-धीरे विलुप्त होती गईं, किंतु अब राज्य सरकार द्वारा इन्हें पुनः स्थापित करने की पहल अत्यंत स्वागतयोग्य है। संत समाज ने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक एवं सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का आधार भी है। हमारी सरकार बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा। यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए एक संस्कारित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया तथा कहा कि यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

TMC बागियों का बड़ा खेल, संख्या बल में JDU-TDP को भी पीछे छोड़कर बढ़ाई ममता की मुश्किलें

नई दिल्ली लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी को कम सीटें आईं तो कहा गया क‍ि बीजेपी अब नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी की बैसाखी के सहारे चलने को मजबूर होगी. लेकिन अब वक्‍त बदलता द‍िख रहा है. टीएमसी के बागी सांसदों ने ऐसा दांव चल द‍िया है, जिससे एनडीए में नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी छोटी हो गई है. इतना ही नहीं, संसद में भी अब बागी गुटों वाली पार्टी पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी होगी।  ममता बनर्जी का साथ छोड़कर आए 20 सांसदों ने नेशनल‍िस्‍ट स‍िटीजन पार्टी में व‍िलय का ऐलान क‍िया है. इसकी च‍िट्ठी भी लोकसभा स्‍पीकर ओम बिरला को सौंप दी है. लोकसभा स्पीकर के मान्‍यता देते ही बागी सांसदों की नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NSPI ) लोकसभा में पांचवीं बड़ी पार्टी बन जाएगी. लेकिन सबसे बड़ा बदलाव एनडीए के अंदर होगा. अभी तक एनडीए में बीजेपी के बाद टीडीपी दूसरी और जेडीयू तीसरी सबसे बड़ी पार्टी थी. क्‍योंक‍ि टीडीपी 16 और जेडीयू के पास 12 सांसद हैं, जबक‍ि बागी सांसदों की पार्टी NSPI के 20 सांसद होंगे।  बीजेपी, कांग्रेस, सपा, डीएमके के बाद पांचवी बड़ी पार्टी लोकसभा में बीजेपी के पास 240, कांग्रेस के पास 98, समाजवादी पार्टी के पास 37, DMK के पास 22 लोकसभा के सांसद है. अभी TMC 28 सांसदों के साथ लोकसभा में चौथी बड़ी पार्टी है, लेकिन 20 बागी सांसदों के अलग होने से TMC नीचे पायदान पर चली जाएगी और NSPI पांचवीं बड़ी पार्टी बन जाएगी. NCPI की स्थापना 20 जनवरी, 2023 में हुई थी और इसका मुख्यालय हावड़ा में है. त्रिपुरा विधानसभा का चुनाव 2023 में इस पार्टी ने लड़ा था, लेकिन अपेक्ष‍ित कामयाबी नहीं म‍िल पाई थी।  बीजेपी क्‍यों होगी खुश 20 सांसदों का साथ म‍िलने से बीजेपी खुश होगी. क्‍योंक‍ि इनकी बदौलत अब बीजेपी 260 से ऊपर पहुंच जाएगी. यानी बहुमत के करीब. इससे नीतीश कुमार और चंद्रबाबू की पार्टी की बारगेन‍िंग पावर कम हो जाएगी. हालांक‍ि, ये दोनों नेता पीएम मोदी के साथ मजबूत समर्थन जता चुके हैं और एनडीए इनकी बदौलत 300 के काफी आगे न‍िकल चुकी है. सदन में भी यह मौजूदगी बीजेपी के बहुत काम आने वाली है। 

वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर जारी, 17 जिलों में गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी

चंडीगढ़  पंजाब में आज बरसात और तेज हवाओं का अलर्ट है। सुनाम और पठानकोट में सुबह हुई बरसात के बाद माैसम सुहाना हो गया। इससे पहले सोमवार को मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा, हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।  बारिश के कारण अधिकतम तापमान में 0.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई और पारा सामान्य के करीब पहुंच गया। राज्य में सबसे अधिक 39.4 डिग्री सेल्सियस तापमान फरीदकोट में दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए पंजाब के 17 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, फिरोजपुर, फरीदकोट, मोगा, फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा, लुधियाना, बरनाला, संगरूर, मानसा, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। विभाग के अनुसार बुधवार को भी कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं 18 जून से मौसम और अधिक सक्रिय होने के आसार हैं। विभाग ने 18 से 20 जून तक तीन दिन के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज हवाओं और बारिश के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की गिरावट आ सकती है। बुधवार को छोड़ 19 जून तक मौसम में ये बदवाल जारी रहने वाला हैं। वहीं, सोमवार राज्य के तापमान में अधिक बदलाव देखने को नहीं मिला, जिसके चलते तापमान सामान्य के करीब बना रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग, चंडीगढ़ केंद्र के अनुसार 16 जून से 19 जून तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ दिन और राहत मिलने की उम्मीद है। फरीदकोट रहा सबसे गर्म शहर सोमवार को पंजाब में औसत अधिकतम तापमान में 0.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। राज्य का सबसे अधिक तापमान फरीदकोट में 39.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा चंडीगढ़ में 38.0 डिग्री, पटियाला में 37.6 डिग्री, बठिंडा हवाई अड्डा क्षेत्र में 37.5 डिग्री, चंडीगढ़ हवाई अड्डा क्षेत्र में 37.0 डिग्री, भाखड़ा बांध क्षेत्र में 36.9 डिग्री, मोहाली और पठानकोट में 36.2 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का अधिकतम तापमान 36.0 डिग्री, लुधियाना का 35.6 डिग्री, पटियाला का 37.8 डिग्री, पठानकोट का 37.6 डिग्री और बठिंडा का 37.5 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान में 2.8 डिग्री की वृद्धि हुई। सबसे कम न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस एसबीएस नगर में रिकॉर्ड किया गया। आंधी-तूफान से पावरकाॅम को 20.73 करोड़ का नुकसान पंजाब में 11 व 12 जून को आए तेज आंधी-तूफान से बिजली वितरण सिस्टम को भारी नुकसान हुआ था। पावरकाॅम की ओर से तैयार रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब भर में 9,981 बिजली के खंबे, 1,630 ट्रांसफार्मर और 331 किलोमीटर लंबी बिजली के तार क्षतिग्रस्त हुए। इससे पावरकॉम को 20.73 करोड़ का नुकसान पहुंचा है। सबसे अधिक 9.14 करोड़ का नुकसान बाॅर्डर जोन में हुआ है। वहीं वेस्ट जोन में 3.90 करोड़, सेंट्रल जोन में 3.02 करोड़, साउथ जोन में 2.83 करोड़, नार्थ जोन में 1.42 करोड़ और ईस्ट जोन में सबसे कम 44 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। बाॅर्डर जोन के अधीन पड़ते अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट में कुल 719 ट्रांसफार्मर और 4,420 बिजली के खंबे क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि वेस्ट जोन के बठिंडा, मानसा, फरीदकोट, मोगा, फिरोजपुर, श्री मुक्तसर साहिब व फाजिल्का में 421 ट्रांसफार्मरों और 2,567 खंबे, सेंट्रल जोन के जिला लुधियाना में 150 ट्रांसफार्मर और 429 खंबे, साउथ जोन के अधीन पड़ते पटियाला, संगरूर, बरनाला, रोपड़ और मोहाली में 216 ट्रांसफार्मर और 1,550 खंबे, नाॅर्थ जोन के अधीन पड़ते जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और एसबीएस नगर में 96 ट्रांसफार्मर और 749 खंबे और ईस्ट जोन में 28 ट्रांसफार्मर और 266 खंबे क्षतिग्रस्त हुए।  बीते कुछ वर्षों के दौरान मौसम की मार से बिजली वितरण सिस्टम को हुआ यह सबसे बड़ा नुकसान बताया जा रहा है। इससे पंजाब के कई इलाकों में बिजली गुल हो गई थी। इससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इस दौरान पावरकाॅम को रिकाॅर्ड गिनती में शिकायतें मिलीं। कईं घंटों के बाद पावरकाॅम की ओर से जरूरी मरम्मत कार्य करके इन शिकायतों का निपटारा करते हुए बिजली सप्लाई बहाल की जा सकी थी। जानें कैसा रहेगा अब मौसम 16 जून : मंगलवार को अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, मोगा, बठिंडा, मानसा, बरनाला, संगरूर, लुधियाना, जालंधर, कपूरथला, पटियाला और चंडीगढ़ सहित अधिकांश मैदानी जिलों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं का येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली और फतेहगढ़ साहिब में किसी प्रकार का मौसम अलर्ट नहीं है और मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। 17 जून : पूरे पंजाब में किसी प्रकार का मौसम अलर्ट जारी नहीं किया गया है। मौसम सामान्य रहने की संभावना है। हालांकि कुछ स्थानों पर हल्के बादल छाए रह सकते हैं। 18 जून : इस दिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस फिर सक्रिय होगा। एक बार फिर राज्य के अधिकांश जिलों में गरज-चमक, बिजली और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं का येलो अलर्ट जारी किया गया है। सीमावर्ती और मालवा क्षेत्र के साथ-साथ दोआबा और माझा क्षेत्र के कई जिलों में मौसम सक्रिय रह सकता है। 19 जून : पंजाब के लगभग सभी जिलों में गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना बनी रहेगी। मौसम विभाग ने अधिकांश जिलों को येलो जोन में रखा है। इस दौरान किसानों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।    

जेवर एयरपोर्ट की पहली उड़ान से राजधानी आए किसानों ने सीएम योगी से साझा किए अपने अनुभव

‘बाबाजी’ का राज है, कोई कैसे पैसे छीन लेगा जेवर एयरपोर्ट की पहली उड़ान से राजधानी आए किसानों ने सीएम योगी से साझा किए अपने अनुभव जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसानों ने कहा- विकास की डोर सीधे 'आदित्य' के हाथ में हज से लौटे बुजुर्ग किसान ने मुख्यमंत्री को दिया आशीर्वाद, किसानों ने कहा- मोदी जी ने भारत और योगी जी ने उत्तर प्रदेश बदल दिया लखनऊ,   जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संवाद में विकास, कानून-व्यवस्था पर खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास की डोर सीधे ‘आदित्य’ के हाथ में है। यह ‘बाबाजी’ का राज है, जेवर में आज किसी की हिम्मत नहीं कि किसान या आमजन से पैसे छीन ले। हज से लौटे एक बुजुर्ग किसान ने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सबसे बड़ा एयरपोर्ट, फिल्म सिटी और बड़े प्रोजेक्ट जेवर की नई पहचान बने हैं। पहली बार हवाई जहाज में बैठकर लखनऊ पहुंचे किसानों ने मुख्यमंत्री से कहा कि जिस जमीन पर कभी वे खेती करते थे, आज उसी जमीन से उड़ान भरते विमान उत्तर प्रदेश के बदलते भविष्य की कहानी लिख रहे हैं। उन्होंने कहा, "मोदी जी ने भारत और योगी जी ने उत्तर प्रदेश बदल दिया।" मुस्लिम भी बोलते हैं,  कैसे कोई पैसा छीन लेगा किसान हंसराज ने कहा कि जैसे ही वह सुबह एयरपोर्ट पहुंचे, उनके साथ आए अधिसंख्य किसानों के लिए यह अनुभव विशेष था। उनके साथ आए 99 प्रतिशत किसान ऐसे हैं, जिन्होंने आज तक हवाई जहाज को केवल आसमान में उड़ते हुए देखा था, लेकिन मुख्यमंत्री के आशीर्वाद से उन्हें उसमें बैठकर यात्रा करने का अवसर मिला। हंसराज ने वर्ष 2017 से पहले की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक वृद्ध महिला पेंशन निकाल कर गांव लौट रही थी। मोटरसाइकिल सवार दो बदमाश आए और उसके पैसे छीनकर फरार हो गए। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2019 की एक घटना सुनाई। बताया कि भूमि मुआवजे का वितरण हो रहा था। उनके गांव में स्थित बैंक से एक मुस्लिम भाई ने 25 लाख रुपये निकाले और उन्हें तौलिया में बांधकर सिर पर रख लिया। दोपहर करीब 12 बजे वह इसी तरह पैसा लेकर जा रहे थे। हंसराज ने उनसे पूछा कि इतने पैसे इस तरह सिर पर रखकर ले जा रहे हो, कोई छीन लेगा। इस पर उन्होंने जवाब दिया, "कैसे कोई छीन लेगा, यह बाबाजी का राज है।" हंसराज ने कहा कि इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्ष 2017 से पहले क्या स्थिति थी और अब क्या स्थिति है। उन्होंने कहा कि वह भगवान से प्रार्थना करते हैं कि सीएम योगी फिर से मुख्यमंत्री बनें। हज से लौटकर योगी जी को आशीर्वाद देने आया: जफरू खां बुजुर्ग किसान जफरू खां ने कहा कि प्रदेश के मुसलमान भी कह रहे हैं कि "बाबा का शासन बहुत शानदार है।" आज मैं चप्पल पहनकर हवाई जहाज में बैठा। यह मेरे लिए एक विशेष अनुभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में क्षेत्र के लोगों को काफी तरक्की देखने को मिली है। सबसे बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना है। अनेक कंपनियां और फिल्म सिटी भी क्षेत्र में स्थापित हो रही है। बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तैयार हो रहे हैं, जिससे लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। बच्चों के भविष्य के लिए बहुत अच्छे कार्य हुए हैं। मैं हज से लौटकर मुख्यमंत्री जी को आशीर्वाद देने आया हूं। सीएम योगी ने बनाया उत्तम प्रदेश: जयवीर सिंह मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान किसान जयवीर सिंह भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि मुझे अपनी जमीन से बहुत प्रेम था। लेकिन, मेरे भैया ने कहा कि जरूरत पड़ने पर योगी जी के सहयोग के लिए जान तक अर्पित कर देंगे। मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश के विकास के लिए बहुत मेहनत की है। उन्होंने कहा था कि मैं उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बना दूंगा, जिसे आज हम सच होता देख रहे हैं।  तो अधूरा रह जाता एमबीबीएस का सपना: डॉ. हिरा राशिद एएमयू से एमबीबीएस करने वाली जेवर के किसान की बेटी डॉ. हिरा राशिद ने कहा कि अगर योगी जी का राज नहीं होता तो मेरा एमबीबीएस डॉक्टर बनने का सपना कभी पूरा नहीं हो पाता। मुझे यह कहते हुए बड़ा गर्व महसूस हो रहा है कि जिस भूमि पर मेरे पिता अन्न उगाते थे, आज उसी भूमि से उड़ान भरकर मैं मुख्यमंत्री से मिलने आई हूं। एक समय ऐसा था जब क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। पढ़ाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे और स्कूल जाने के लिए बस की सुविधा भी ठीक से नहीं थी। लेकिन सीएम योगी जी के नेतृत्व में जैसे-जैसे विकास हुआ,  क्षेत्र में तरक्की बढ़ी और शिक्षा के अवसर बेहतर हुए। वर्ष 2021 में मैंने बिना किसी कोचिंग के नीट परीक्षा उत्तीर्ण की। मुझे इसके लिए जो भी बुनियादी सुविधाएं मिलीं, वह सब योगी जी के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों की वजह से संभव हो पाया। पुराने और नए जेवर में जमीन-आसमान का अंतर: रीता संवाद के दौरान रीता ने जेवर क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने और नए जेवर में जमीन आसमान का अंतर है। वर्ष 1997 में उनकी शादी हुई थी। उस समय क्षेत्र में कुछ भी नहीं था। पढ़ाई के लिए लोगों को खुर्जा या अन्य स्थानों पर जाना पड़ता था। 2017 के बाद क्षेत्र में एकदम से कनेक्टिविटी बढ़ी। इसकी वजह से बच्चों को इतनी सुविधाएं मिली हैं कि वे वहीं रहकर उच्च शिक्षा तक प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जेवर के किसी किसान को कभी ऐसा अवसर नहीं मिला था कि वह विमान में बैठकर यहां पहुंच सके। जब वे लोग विमान की खिड़की से बाहर देख रहे थे तो एक-दूसरे से कह रहे थे, "यह तुम्हारा खेत है, यह हमारा खेत है।" इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए हम लोग मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हैं। इतना बड़ा प्रोजेक्ट बिना किसी विरोध-प्रदर्शन के साकार हुआ है, जिसमें हम सभी लोगों की भागीदारी रही है।  एयरपोर्ट से क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई दिशा: महेंद्र शर्मा किसान महेंद्र शर्मा ने कहा कि योगी जी के प्रयासों से आज उनके क्षेत्र … Read more

योगी सरकार प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए संकल्पित: केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री

जेवर से खुले विकास के नए आसमान, वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम पीएम मोदी के मार्गदर्शन और सीएम योगी के नेतृत्व में दूरदर्शी पहल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को मिला वैश्विक कनेक्टिविटी का नया द्वार आधुनिक सुविधाओं से सहज होगी यात्रा, क्षेत्रीय विकास और रोजगार को मिलेगी नई गति योगी सरकार प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए संकल्पित: केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री  भविष्य में  जेवर हवाई अड्डे सालाना क्षमता 7 करोड़ से अधिक यात्रियों तक पहुंचाने की योजना लखनऊ  नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन शुरू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश ने विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। इंडिगो ने यहां से हवाई सेवाओं का शुभारंभ किया। लखनऊ से आई उद्घाटन उड़ान के स्वागत के बाद बेंगलुरु के लिए पहली प्रस्थान उड़ान रवाना हुई। यह केवल एक नए हवाई अड्डे की शुरुआत नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिली है। जेवर स्थित यह विश्वस्तरीय हवाई अड्डा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के लाखों यात्रियों को सुविधाजनक हवाई संपर्क उपलब्ध कराएगा। इससे पर्यटन, निवेश और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, वहीं स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण को प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों की सेवा के लिए विकसित किया गया है। भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाकर सालाना 7 करोड़ (70 मिलियन) से अधिक यात्रियों तक पहुंचाने की योजना है।  यात्रा होगी अधिक सुगम और सुविधाजनक नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यहां डिजिटल यात्रा प्रणाली के माध्यम से यात्रियों को भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता कम होगी। सेल्फ चेक-इन, सेल्फ बैग ड्रॉप, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था तथा सहज मार्गदर्शक प्रणालियां यात्रा को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाएंगी। हवाई अड्डे के टर्मिनल का डिज़ाइन आधुनिक तकनीक और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती कलाकृतियां, वाराणसी के घाटों से प्रेरित स्थापत्य शैली, जालीदार डिज़ाइन तथा प्राकृतिक प्रकाश का व्यापक उपयोग यात्रियों को एक विशिष्ट अनुभव प्रदान करेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए एयरपोर्ट टैक्सी, ऐप आधारित कैब सेवाएं और दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के विभिन्न शहरों को जोड़ने वाली बस सेवाओं की व्यवस्था की गई है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन से यह हवाई अड्डा वैश्विक संपर्क का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। योगी सरकार के विजन से मजबूत हो रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की शुरुआत को योगी सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है। प्रदेश में एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर और निवेश अनुकूल वातावरण के साथ यह परियोजना उत्तर प्रदेश को नई आर्थिक ऊंचाइयों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। हवाई अड्डे पर एयर इंडिया सैट्स द्वारा विकसित आधुनिक कार्गो सुविधाएं प्रारंभिक चरण में प्रतिवर्ष दो लाख मीट्रिक टन माल ढुलाई की क्षमता रखती हैं, जिसे भविष्य में 15 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाने की योजना है। इससे ई-कॉमर्स, कृषि उत्पादों के निर्यात और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को नई मजबूती मिलेगी। योगी सरकार उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए संकल्पित: केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु ने कहा कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालन शुरू होना भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह हवाई अड्डा हवाई संपर्क को नई मजबूती प्रदान करेगा और व्यापार, पर्यटन, निवेश तथा रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए यहां अत्याधुनिक डिजिटल सेवाएं और विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की गई हैं। योगी सरकार लगातार उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

मारवाड़ को बड़ी राहत, सेई टनल की क्षमता 4 गुना बढ़ाने का काम अंतिम चरण में

 जयपुर पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने सोमवार को उदयपुर जिले के कोटड़ा का दौरा किया। उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बहुप्रतीक्षित सेई बांध की टनल (सुरंग) की चौड़ाई बढ़ाने के चल रहे निर्माण कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। श्री कुमावत ने टनल के भीतर जाकर निर्माण कार्य की प्रगति देखी और अधिकारियों से अब तक हुए कार्य, बची हुई खुदाई और कंक्रीट लाइनिंग के तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी ली। योजना के लिए ₹100 करोड़ का बजट, 95% काम पूरा कुमावत ने बताया कि सेई बांध से अतिरिक्त पानी को जवाई बांध तक पहुँचाने के लिए बनी 6.7 किलोमीटर लंबी सुरंग को चौड़ा करने के लिए सरकार ने बजट में कुल ₹100 करोड़ का प्रावधान किया है। पिछले तीन साल से चल रहे इस कार्य का करीब 95 फीसदी हिस्सा पूरा हो चुका है। अब केवल 90 मीटर टनल का कार्य बाकी है, जिसे आगामी 15 जुलाई तक हर हाल में पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिमी राजस्थान के जल संकट को दूर करने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है और निर्माण की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं होगा। साथ ही, उन्होंने टनल के अंदर काम कर रहे श्रमिकों और इंजीनियरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखने की हिदायत दी। जल निकासी क्षमता होगी 4 गुना, 22 दिन में भरेगा जवाई बांध कुमावत ने बताया कि इस टनल का विस्तार होने से पानी की निकासी क्षमता 328 क्यूसेक से बढ़कर 1376 क्यूसेक हो जाएगी। 4 गुना  क्षमता बढ़ने से मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी व्यर्थ बहकर गुजरात नहीं जाएगा। इससे पाली, सिरोही और जालोर जिलों को भरपूर पानी मिल सकेगा। उन्होंने आगे बताया कि वर्तमान में टनल की चौड़ाई कम होने के कारण सेई बांध से जवाई बांध तक पानी पहुँचने में 45 से 50 दिन का समय लगता है लेकिन यह कार्य पूरा होने के बाद मात्र 22 दिन में ही जवाई बांध को 74 एमसीएफटी पानी मिलने लगेगा, जो इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा। मारवाड़ के लिए संजीवनी है यह परियोजना सेई बांध और इसकी टनल मारवाड़ क्षेत्र विशेषकर पाली जिले के लिए जीवनदायिनी मानी जाती है। कोटड़ा के सेई बांध से पानी को इस टनल के जरिए जवाई बांध में डाइवर्ट किया जाता है। जवाई बांध पाली और जोधपुर के कई इलाकों की प्यास बुझाता है। वर्तमान में टनल की क्षमता कम होने के कारण मानसून के दौरान सेई बांध का अतिरिक्त पानी बहकर गुजरात चला जाता है। टनल की चौड़ाई बढ़ने से पानी का प्रवाह (डिस्चार्ज क्षमता) तेजी से बढ़ेगा। मानसून का अतिरिक्त पानी व्यर्थ बहने से बचेगा। जवाई बांध कम समय में और अधिक मात्रा में भरा जा सकेगा। पाली सहित पूरे मारवाड़ क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई संकट का स्थाई समाधान होगा। इको-टूरिज्म और सौंदर्यकरण योजना   कुमावत ने कहा कि अब इस बांध क्षेत्र को इको-टूरिज्म और स्थानीय पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत बांध की प्राकृतिक सुंदरता का उपयोग कर पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इस दौरान किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह गलथनी, अनोप सिंह राठौड़, पूनम सिंह परमार, निम्बेश्वर महादेव ट्रस्ट के अध्यक्ष जगत सिंह, शिवराज सिंह बिठिया, श्री रविकांत रावल भी मौजूद रहे।  

सभी समाजों और परंपराओं को जोड़ने का आह्वान, आल्हा-ऊदल स्मृति उत्सव व श्रावण महोत्सव मनाने की अपील: CM डॉ. यादव

सभी समाजों को, उनकी परम्पराओं को जोड़ें, आल्हा-ऊदल स्मृति उत्सव और श्रावण महोत्सव भी मनायें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव संस्कृति विभाग की करें पुनर्संरचना, गतिविधियों का भी करें विस्तार सम्राट विक्रमादित्य के नाम से बनायें पृथक अकादमी राज्य के ज्योतिर्लिंगों, शक्तिपीठों और प्रसिद्ध देवस्थानों को भी जोड़ें तीर्थदर्शन योजना में प्रदेश में बन रहे 17 सांस्कृतिक लोक और 20 संग्रहालय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की संस्कृति विभाग की गहन समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आगामी छह-सात माह में बड़े त्यौहार, सांस्कृतिक पर्व एवं मेले मनायें जायेंगे। ये सभी त्यौहार हमारी धार्मिक आस्थाओं और प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता के प्रतीक हैं। इन सभी अवसरों पर संस्कृति विभाग सभी समाजों को, उनकी आस्थाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं को जोड़कर वृहद आयोजन करें। आल्हा-ऊदल वीर रस गायन के प्रतीक हैं, उनकी स्मृति में आयोजन किए जाएं। श्रावण महोत्सव और भुजरिया पर्व भी मनाएं। नागपंचमी पर जैव विविधता संरक्षण (सर्प प्रजातियों के संरक्षण) का संदेश दिया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कृति विभाग लोगों को जोड़कर ऐसे आयोजन करें, जिनसे हमारी कला और संस्कृति के संवर्धन के साथ ही सरकार के संदेश का भी प्रसार हो। मुख्यमंत्री सोमवार को मंत्रालय में संस्कृति विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की कला, संस्कृति, परम्पराएं और समृद्ध पुरातात्त्विक धरोहरें प्रदेश की अमूल्य पूंजी हैं, जिन्हें संरक्षित और संवर्धित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए योजनाबद्ध और प्रभावी प्रयास किए जाएं। डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सांस्कृतिक अभ्युदय के लिए हमारी सरकार हर जरूरी प्रयास कर रही है। हम समाज को साथ लेकर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बैठक में संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किये गये 'कला पंचांग' का विमोचन भी किया। इसमें विभाग द्वारा वर्ष भर की जाने वाली कलात्मक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का पूरा कैलेंडर तैयार किया गया है। अब इन्हें सिलसिलेवार क्रियान्वित किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य में प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का दायरा और तेजी से बढ़ेगा। विभागीय आंतरिक विशेषताओं और विशेषज्ञताओं का समुचित संयोजन करते हुए संस्कृति विभाग की और बेहतर पुनर्संरचना की जाये। विभागीय गतिविधियों का आधुनिक संदर्भों में विस्तार भी किया जाये। उन्होंने कहा कि संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग सभी मिलकर काम करें, ताकि प्रदेश में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले। इससे प्रदेश में उत्कृष्ट कारीगरी से निर्मित होने वाले क्रॉफ्ट आइटम्स, हैंडलूम आइटम्स और कशीदाकारी को भी पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट वीर विक्रमादित्य के नाम से एक पृथक अकादमी का गठन किया जाये। इसमें विक्रमादित्य के जीवनवृत्त पर समग्र शोध एवं अन्य संगत गतिविधियां भी संचालित की जायें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के बाहर के प्रसिद्ध मंदिरों और देव स्थानों के अतिरिक्त अब प्रदेश में मौजूद 2 ज्योतिर्लिंगों, जागृत एवं मंशापूर्ण शक्ति पीठों एवं अन्य धार्मिक स्थलों को भी मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इनके निर्माण कार्यों में और अधिक गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उक्त दोनों परियोजनाएं धार्मिक आस्था के केंद्र होने के साथ ही प्रदेश के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनका कार्य शीघ्र पूर्ण होने से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक गतिविधियों में जनसहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए, ताकि नई पीढ़ी अपनी समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति विभाग की विभिन्न योजनाओं, संरक्षण कार्यों तथा आगामी सांस्कृतिक आयोजनों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाने पर बल दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के नजदीक जगदीशपुर स्थित पुराने किले की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि इस किले के इतिहास को जीवंत करने और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भविष्य में जल्द ही यहां स्टेट कैबिनेट मीटिंग की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जन्मे या यहां से निकलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले गायकों, कलाकारों और अन्य जनों की जानकारी एकत्रित कर इन्हें मध्यप्रदेश में प्रस्तुति देने के लिए राज़ी किया जाये। इससे मध्यप्रदेश की कला एवं सांस्कृतिक विविधताओं को देश-दुनिया में नई पहचान और एक्सपोजर मिलेगा और अपनी माटी से जुड़कर ऐसे कलाकारों को भी खुशी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पद्म पुरस्कारों के लिए प्रदेश के कलाकारों, समाजसेवियों, पर्यावरणविदों के केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर संस्कृति विभाग भी अपनी ओर से अनुशंसा करे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी पद्म पुरस्कार विजेताओं की आर्थिक मदद के लिए एक स्थायी योजना तैयार की जाये, ताकि जरुरतमंदों को शासन की योजना के तहत आर्थिक सहयोग दिया जा सके। अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिव शेख़र शुक्ला ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 17 धार्मिक/सांस्कृतिक लोक और 20 संग्रहालयों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक संस्कृति विभाग के अधीन करीब 4160 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों पर काम जारी हैं। कुछ काम पूरे भी हो चुके हैं। जल्द ही लोकार्पण भी कराया जायेगा। प्रदेश में श्रीराम वन गमन पथ निर्माण पर 160 करोड़ रुपए के काम जारी हैं। महाकाल लोक में मूर्ति स्थापना के कार्य प्रगति पर है। ओरछा में भगवान राम राजा लोक एकदम नये स्वरूप में (छह नई थीम पर) तैयार किया जा रहा है। प्रदेश के सभी लोकों के नियमित संचालन के लिए स्थायी प्रबंधन भी किये जा रहे हैं। प्रदेश के सभी संगीत महाविद्यालयों और सांची स्थित बौद्ध भारतीय ज्ञान … Read more

48 टीमों के वर्ल्ड कप में भी भारत बाहर! जानिए भारतीय फुटबॉल आखिर कहां पिछड़ गया

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), कनाडा और मेक्सिको की सह-मेजबानी में खेला जा रहा है. दुनिया के 48 देश फुटबॉल के इस महाकुंभ में शिरकत कर रहे हैं, मगर अपना भारत वर्ल्ड कप से एक बार फिर गायब है. जब भी फीफा वर्ल्ड कप का आगाज होता है, तो भारत के करोड़ों प्रशंसक उस जुनून से इस टूर्नामेंट को देखते हैं, मानो उनका देश भी इसमें भाग ले रहा हो. सोशल मीडिया पर बहस होती है, घरों में पसंदीदा टीमों के लिए जश्न मनाया जाता है और पूरा देश फुटबॉल के रंग में रंग जाता है. कोई लियोनेल मेसी की टीम को चीयर करता नजर आता है, तो कोई रोनाल्डो के देश पुर्तगाल का समर्थक होता है. लेकिन इस उत्साह के बीच एक सवाल हर बार सामने आ खड़ा होता है- आखिर सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत फीफा वर्ल्ड कप कब खेलेगा? यह सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि भारत का फुटबॉल से रिश्ता नया नहीं है. देश में लाखों बच्चे फुटबॉल खेलते हैं, करोड़ों लोग इसे देखते हैं और कई राज्यों में यह खेल क्रिकेट जितना ही लोकप्रिय है. इसके बावजूद भारतीय टीम आज तक विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच तक नहीं पहुंच सकी. फीफा के सदस्य देशों की संख्या 211 है, जिसमें भारत भी शामिल है. आपको जानकर ये दुख होगा कि भारत फिलहाल फीफा रैंकिंग में 138वें स्थान पर हैं. केप वर्डे और कुराकाओ जैसे छोटे देश भी फीफा वर्ल्ड कप में खेल रहे हैं. भारत फीफा वर्ल्ड कप तो कभी खेल नहीं पाया, एशिया में भी उसकी स्थिति अच्छी नहीं हैं. भारतीय टीम अगले साल होने वाले एएफसी एशियन कप के लिए भी क्वालिफाई नहीं कर सकी, जो किसी शर्मिंदगी से कम नहीं है. वैसे भारत फीफा वर्ल्ड कप खेलने के सबसे करीब 1950 में पहुंचा था. ब्राजील में आयोजित उस वर्ल्ड कप के लिए भारत ने बिना कोई क्वालफाइंग मैच खेले ही क्वालिफाई कर लिया था. एशियाई क्वालिफाइंग ग्रुप की टीमें- बर्मा (अब म्यांमार), इंडोनेशिया और फिलीपींस प्रतियोगिता से हट गई थीं, जिससे भारत को तब डायरेक्ट एंट्री मिल गई. स्वीडन, इटली और पराग्वे जैसी टीमों के साथ भारत को ग्रुप में रखा गया था, लेकिन टीम ब्राजील पहुंच ही नहीं सकी. लंबे समय तक यह कहानी सुनाई जाती रही कि फीफा ने भारतीय खिलाड़ियों को नंगे पैर खेलने की अनुमति नहीं दी, इसलिए टीम ने टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया. हालांकि पूरा सच यह नहीं था. असल वजह आर्थिक और प्रशासनिक थी. आजादी के बाद देश संसाधनों की कमी से जूझ रहा था. टीम को ब्राजील भेजने में काफी ज्यादा खर्च लगता और पर्याप्त तैयारी का समय भी नहीं था. साथ ही उस समय अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ओलंपिक को वर्ल्ड कप से ज्यादा महत्वपूर्ण मानता था. नतीजा यह हुआ कि भारत ने सबसे बड़ा मौका गंवा दिया. 1950 के बाद भारत ने कई बार फीफा वर्ल्ड कप क्वालिफायर में हिस्सा लिया, लेकिन कभी भी अंतिम स्टेज तक नहीं पहुंच सका. कई बार टीम ने उम्मीद जगाई, लेकिन निर्णायक मुकाबलों में अनुभव और गुणवत्ता की कमी साफ नजर आई. बाइचुंग भूटिया, सुनील छेत्री जैसे खिलाड़ियों ने 21वीं सदी में भारतीय फुटबॉल को नई पहचान दी. टीम ने एशियाई स्तर पर कुछ अच्छी जीतें भी दर्ज कीं, लेकिन जापान, साउथ कोरिया, ईरान, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों से भारत अब भी काफी पीछे है. एक समय भारतीय टीम कम से कम एशिया में तो अपना दबदबा बनाने में जरूर सफल रही थी. 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स ने भारतीय टीम ने साउथ कोरिया को 2-1 के अंतर से हराकर गोल्ड मेडल जीता था. चुन्नी गोस्वामी, पीके बनर्जी और तुलसीदास बलराम की तिकड़ी की वजह से ही भारतीय टीम ने ये ऐतिहासिक सफलता अर्जित की थी. फिर बैंकॉक में आयोजित 1970 के एशियाई खेलों में भारतीय फुटबॉल टीम ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रही. इसके बाद से जो भारतीय फुटबॉल में गिरावट आनी शुरू हुई, वो अब तक जारी है. क्या क्रिकेट जिम्मेदार है? भारत के फुटबॉल वर्ल्ड कप से दूर रहने की बड़ी वजह क्रिकेट को माना जाता है, लेकिन पूरी कहानी इससे कहीं ज्यादा जटिल है. यह सच है कि क्रिकेट भारतीय स्पोर्ट्स पर लगभग एकाधिकार रखता है. पैसा, प्रायोजक, मीडिया कवरेज और लोकप्रियता- सब कुछ क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूमता है. ऐसे में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी फुटबॉल की बजाय क्रिकेट चुन लेते हैं. लेकिन सिर्फ क्रिकेट को दोष देना भी गलत होगा. जापान, ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया जैसे देशों में दूसरे खेल भी लोकप्रिय हैं, फिर भी उन्होंने मजबूत फुटबॉल संस्कृति विकसित की है. ऑस्ट्रेलिया तो क्रिकेट में भी हमेशा से एक मजबूत शक्ति रहा है. असली फर्क योजनाओं, निवेश और दीर्घकालिक सोच का है. भारतीय फुटबॉल लंबे समय से प्रशासनिक विवादों से भी जूझता रहा है. एआईएफएफ में नेतृत्व परिवर्तन, कानूनी विवाद और नीतिगत अस्थिरता के कारण कई योजनाएं अधूरी रह गईं. यहां तक इंडियन सुपर लीग (ISL) का 12वां सीजन किसी तरह इस बार आयोजित करवाया जा सका. आखिर कहां पिछड़ गया भारत? भारतीय फुटबॉल में सबसे बड़ी समस्या प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि सिस्टम की कमी है. दुनिया की सफल फुटबॉल टीमें खिलाड़ियों को 8-10 साल की उम्र से तैयार करना शुरू कर देती हैं. उनके पास मजबूत स्कूल लीग, स्थानीय टूर्नामेंट, हजारों कोच और आधुनिक एकेडमी होती हैं. बच्चे हर साल दर्जनों प्रतिस्पर्धी मैच खेलते हैं और धीरे-धीरे प्रोफेशनल लेवल तक पहुंचते हैं. भारत में यह ढांचा अभी भी कमजोर है. कई राज्यों में बच्चों को नियमित रूप से प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका तक नहीं मिलता. कोचिंग की कमी, कमजोर स्काउटिंग सिस्टम और सीमित सुविधाएं भी बड़ी बाधाएं हैं. बिना स्थिर और पेशेवर प्रशासन के किसी भी देश के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना मुश्किल है. वैसे उम्मीद की किरण अभी भी बाकी है. 2026 से फीफा वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 कर दी गई. इससे एशियाई देशों के लिए अधिक स्लॉट उपलब्ध हुए हैं. सैद्धांतिक रूप से भारत की संभावनाएं पहले से बेहतर हुई हैं, लेकिन सिर्फ अतिरिक्त स्थान मिल जाने से बात नहीं बनेगी. भारत को स्कूल स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना होगा, हजारों नए कोच तैयार … Read more

किसानों ने कहाकि उनके गांव में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से उनको मिली बड़ी पहचान, सीएम योगी ने निभाया हर वादा

सीएम योगी का आभार जताने पहली उड़ान से लखनऊ आए जेवर के किसान, बोले- सपना कर दिया साकार किसानों ने कहाकि उनके गांव में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से उनको मिली बड़ी पहचान, सीएम योगी ने निभाया हर वादा  जेवर की महिला किसानों ने योगी सरकार को सराहा, विकास का सहभागी बनने की चेहरों पर दिखी खुशी अपने गांव से ही पहली बार हवाई सफर कर भावुक हुए किसान, सीएम योगी को कहा धन्यवाद लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसी क्रम में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सोमवार को पहली उड़ान लखनऊ के लिए रवाना हुई, जो कई किसानों के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक पल बन गई। इस उड़ान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें यात्री के रूप में वे किसान भी सवार थे, जिन्होंने एयरपोर्ट निर्माण के लिए अपनी जमीन दी थी। लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरे किसानों के चेहरे पर खुशी, गर्व और भावुकता साफ दिखाई दी। वे अपने गांव से सीधे प्रदेश की राजधानी में उतरे थे। मुख्यमंत्री योगी ने किसानों का सम्मान बढ़ाया किसानों ने एक स्वर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हवाई जहाज में सफर करने का सालों पुराना उनका सपना आज पूरा हो गया है। किसानों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। जेवर की रहने वाली पूनम ने बताया कि एयरपोर्ट परियोजना के लिए उनकी जमीन अधिग्रहीत हुई थी। उन्होंने कहा कि आज पहली बार हवाई जहाज में बैठने का अवसर मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद करते हुए कहा कि सरकार ने किसानों का सम्मान बढ़ाया है। पूनम ने बताया कि वह मुख्यमंत्री से मिलने आईं हैं और इस अवसर को जीवन का सबसे सुखद पल मानती हैं। किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद किया किसान धर्मवीर शर्मा ने कहा कि उनके गांव में विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है। उन्होंने कहा कि हवाई चप्पल पहनने वाले किसानों को हवाई जहाज में बैठाकर सरकार ने यह साबित कर दिया है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह का विशेष आभार जताते हुए कहा कि किसानों से किया गया हर वादा पूरा किया गया है। उड़ान में शामिल हिरा रशीद भी बेहद उत्साहित नजर आईं। उन्होंने कहा कि लखनऊ तक की हवाई यात्रा उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसी है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधायक धीरेंद्र सिंह को दिया।  योगी जी ने हवाई चप्पल पहनने वालों को हवाई जहाज में बैठा दिया – किसान किसान हाजी जफर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने ऐसा काम किया है कि हवाई चप्पल पहनने वालों को हवाई जहाज में बैठा दिया। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण के दौरान घर-घर जाकर किसानों की सहमति ली गई थी और किसानों ने खुशी-खुशी अपनी जमीन दी। हाजी जफर ने कहा कि उन्हें इस विकास कार्य पर गर्व है। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि प्रदेश में तेजी से विकास हो रहा है और इससे आम लोगों का जीवन बदल रहा है। उन्होंने कहा कि योगी जी मुस्लिम समाज में काफी लोकप्रिय हैं क्योंकि उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ भेदभाव के बिना सभी लोगों तक पहुंचाया है। सभी को सुरक्षा दी है। सालों पुराना सपना आज पूरा हो गया- सुमन इसी तरह किसान इकबाल कल्लू ने भी अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि एयरपोर्ट के लिए उनकी जमीन गई थी और आज उसी एयरपोर्ट से उड़ान भरकर राजधानी पहुंचना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को केवल मुआवजा ही नहीं दिया बल्कि उन्हें विकास यात्रा का सहभागी भी बनाया है। महिला किसानों में भी उत्साह देखने को मिला। किसान सुमन ने बताया कि उन्होंने जीवन में पहली बार हवाई जहाज में सफर किया है। यह उनका वर्षों पुराना सपना था, जो अब जाकर पूरा हुआ है। मीनू ने भी अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि एयरपोर्ट बनने के बाद पहली बार उन्होंने अपनी जमीन को आसमान से देखा है। उन्होंने कहा कि यह अनुभव शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रदेश में विकास की नई धारा बह रही है और इसका लाभ आम लोगों को मिल रहा है।   कई सरकारें देखी, लेकिन इतना अच्छा दौर पहले नहीं देखा- जयवीर, किसान बुजुर्ग किसान जयवीर ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कई सरकारें देखी हैं, लेकिन विकास का ऐसा दौर पहले कभी नहीं देखा। जयवीर ने कहा कि किसानों को सम्मान देने की यह पहल हमेशा याद रखी जाएगी। जयकरन सिंह ने कहा कि किसान पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट बनने से आने वाली पीढ़ियों को नए अवसर मिलेंगे।