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ट्रंप का दावा मेलोनी ने फोटो के लिए मिन्नतें कीं, इटली PM ने किया खंडन

वॉशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जियो मेलोनी हाल ही में फ्रांस में हुई G7 समिट में मिले थे। इस ग्लोबल समिट में शामिल होने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गए थे। फ्रांस में समिट के पूरा होने के बाद डोनल्ड ट्रंप और जॉर्जियो मेलोनी के बीच फोटो खिंचवाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप ने दावा किया कि इटली की प्रधानमंत्री ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए मिन्नतें कीं। 'वह फिर से दोस्त बनना चाहती हैं' ट्रंप के इस बयान के सामने के बाद जॉर्जिया मेलोनी ने शुक्रवार, 19 जून को सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करके ट्रंप के इन सभी दावों को खारिज कर दिया और कहा- न मैं और न ही इटली ने कभी किसी से भीख मांगी है। अब इस मामले को लेकर ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट शेयर किया है और कहा है कि जॉर्जिया मेलोनी उनसे फिर से दोस्ती करना चाहती हैं। 'मेलोनी ने बार-बार फोटो लेने के लिए कहा' अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'फ्रांस में G-7 मीटिंग के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बार-बार मेरे साथ तस्वीर खिंचवाने की गुजारिश की।' ट्रंप ने आगे बताया, 'इटली में उनकी लोकप्रियता का स्तर गिर रहा है, शायद इसलिए क्योंकि जब ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने या बनाने से रोकने की बात आई, तो उन्होंने अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया (हालांकि NATO ने भी ऐसा ही किया था!)।' अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे लिखा, 'उन्होंने हमें इटली के लैंडिंग स्ट्रिप्स या रनवे का इस्तेमाल भी नहीं करने दिया, जिससे बहुत बड़ी लॉजिस्टिकल दिक्कत हुई और यह तब हुआ जब अमेरिका इटली और दूसरे तथाकथित NATO सहयोगियों की सुरक्षा के लिए हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है।' ट्रंप ने आगे बताया, 'अब, जब अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है, तो वह अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए फिर से दोस्ती करना चाहती हैं। नहीं, शुक्रिया!'

नॉन-डीबीटी पेंशनधारियों के आधार व बैंक खातों का हुआ संकलन

​रायपुर  भविष्य की सुरक्षा और सामाजिक न्याय को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की दिशा में नारायणपुर जिला प्रशासन ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। जिले के सुदूर व अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत पीडियाकोट में आयोजित विशेष पेंशन भुगतान शिविर महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सुशासन और सामाजिक सुधार का एक जीवंत उदाहरण बन गया। इस अनूठे शिविर ने जहाँ एक ओर वृद्धजनों और जरूरतमंदों के चेहरों पर डिजिटल सुरक्षा की मुस्कान बिखेरी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को एक स्वस्थ और नशामुक्त समाज की नई दिशा भी दिखाई। ​पारदर्शिता की ओर बढ़ते कदम: 'नॉन-डीबीटी' से 'डीबीटी' का सफर      ​ पीडियाकोट में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाना था। वनांचल क्षेत्र होने के कारण कई हितग्राही अब भी नॉन- डीबीटी (Non-DBT) श्रेणी में थे, जिन्हें सीधे बैंक खातों में राशि प्राप्त करने में कठिनाई आ रही थी। शिविर में मुस्तैद अधिकारियों और पंचायत कर्मियों ने​ हितग्राहियों के आवश्यक दस्तावेजों का संकलन किया। ​प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के महत्व को सरल भाषा में समझाया। सुरक्षित और त्वरित पेंशन भुगतान के लिए बैंक खातों से क्रेडेंशियल्स को लिंक करने तथा ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूर्ण करने की अनिवार्यता बताई। निकटतम बैंक शाखा में जाकर जल्द से जल्द ई-केवाईसी कराए ​ग्रामीणों को प्रेरित किया गया कि वे अपनी निकटतम बैंक शाखा में जाकर जल्द से जल्द ई-केवाईसी का कार्य पूरा कराएं ताकि भविष्य में मिलने वाली पेंशन राशि बिना किसी मध्यस्थ या रुकावट के सीधे उनके खातों में हस्तांतरित हो सके। ​समस्याओं का मौके पर ही समाधान      ​पेंशनधारियों ने इस पहल का स्वागत पूरे उत्साह के साथ किया। ऊबड़-खाबड़ रास्तों और दूरियों की परवाह न करते हुए बड़ी संख्या में बुजुर्ग, दिव्यांग और कल्याणी बहनें शिविर स्थल पर पहुँचे। पंचायत स्तर पर ही प्रशासन को अपने बीच पाकर ग्रामीणों का भरोसा बढ़ा। अधिकारियों ने न केवल दस्तावेज जमा किए, बल्कि पेंशन से जुड़ी अन्य छोटी-बड़ी समस्याओं को सुनकर उनका मौके पर ही निराकरण करने का प्रयास किया। साथ ही, राज्य शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। गूंजी नशामुक्ति की शपथ       ​ पीडियाकोट का यह शिविर केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। डिजिटल साक्षरता के इस मंच को 'नशा मुक्त भारत अभियान' के साथ जोड़कर एक बेहतरीन सामाजिक संदेश दिया गया। ​उपस्थित ग्रामीणों और युवाओं को नशे के कारण टूटने वाले परिवारों, आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले घातक दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के समापन पर एक भावुक और ऊर्जावान माहौल देखने को मिला, जब शिविर में मौजूद सभी पेंशनर्स, युवाओं, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हाथ उठाकर नशामुक्ति की शपथ ली। उन्होंने संकल्प लिया कि वे स्वयं को व्यसनों से दूर रखेंगे और अपने समाज को भी इस सामाजिक बुराई से मुक्त कराने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।  शिविर आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की नींव एक मिसाल बना पीडियाकोट ​दूरस्थ अंचलों में इस तरह के शिविरों का आयोजन यह साबित करता है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो विकास और जागरूकता की किरण राज्य के अंतिम कोने तक आसानी से पहुँच सकती है। पीडियाकोट का यह सफल आयोजन न केवल पेंशनधारियों के डिजिटल सशक्तिकरण का जरिया बना, बल्कि इसने एक स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की नींव भी रख दी है।

पाकिस्तान में रिश्तेदारों के बीच शादी का बढ़ता चलन, वैज्ञानिकों ने बताए इसके गंभीर प्रभाव

कराची  Cousin Marriage in Pakistan: दुनिया भर में कजिन मैरिज (चचेरे-ममेरे, फुफेरे-मौसेरे भाई-बहनों के बीच शादी) के मामले में पाकिस्तान पहले पायदान पर आता है. अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था 'वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू' में 2023 में छपे आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में रक्त संबंधों के भीतर निकाह करने की दर करीब 61.2% है।  समय-समय पर सामने आईं तमाम साइंटिफिक रिसर्च इस बात की पुष्टि करती हैं कि एक ही जेनेटिक पूल या खून के रिश्तों में शादी करना आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का मानना है कि इन शादियों से पैदा होने वाले बच्चों में जेनेटिक डिसॉर्डर यानी गंभीर आनुवांशिक विकार और कई जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।  लेकिन एक नई रिसर्च में सामने आया है कि पाकिस्तान में लगभग 34,000 लोग 'ह्यूमन नॉकआउट' हैं, यानी ऐसे लोग जिनमें कम से कम एक जीन ने काम करना बंद कर दिया है और इससे उनकी सेहत पर कोई खास असर नहीं हुआ है। क्या है 'ह्यूमन नॉकआउट' विज्ञान की भाषा में कहें तो जब शरीर का कोई खास जीन पूरी तरह निष्क्रिय हो जाता है या गायब हो जाता है तो उसे ह्यूमन नॉकआउट (Human Knockout) कहा जाता है. आम तौर पर इंसानों में हर जीन की दो कॉपियां (एक माता से और एक पिता से) होती हैं. रक्त संबंधों में शादी होने की वजह से बच्चों को माता-पिता दोनों से एक जैसा म्यूटेशन मिलता है जिससे उनके शरीर में कोई खास जीन पूरी तरह गायब हो जाता है।  17 जून को 'नेचर' में छपी एक स्टडी के मुताबिक, ये निष्कर्ष सबसे बड़े दक्षिण एशियाई जीनोमिक अध्ययनों में से एक का हिस्सा हैं जिसमें देश के 1,73,303 जीनोम का आकलन किया गया. इस शोध का मकसद मानव आनुवंशिकी के विकास को समझना और इससे जरूरी दवाओं के निर्माण में मदद करना था।  स्टडी में मिले चौंकाने वाले नतीजे कोलंबिया यूनिवर्सिटी वैगेलोस कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन्स में मेडिकल साइंसेज के प्रोफेसर और ग्लोबल जीनोमिक्स के डायरेक्टर दानिश सालेहीन ने एक प्रेस रिलीज में कहा, 'जीनोम स्टडीज में दक्षिण एशियाई लोगों की भागीदारी बहुत कम रही है. दुनिया की आबादी का 25 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद ग्लोबल जीनोमिक डेटाबेस में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 2 प्रतिशत है. लेकिन दक्षिण एशियाई जीनोम की खास विशेषताएं जो आबादी के इतिहास और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों से बनी हैं. दुनिया भर में मेडिकल क्षेत्र में ऐसी बड़ी कामयाबियों का आधार बन सकती हैं जिनसे हर जगह के मरीजों को फायदा हो।  भारत में इसी तरह की एक रिसर्च 'जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट' में देश भर के 83 ग्रुप्स के 9,768 स्वस्थ लोगों के पूरे DNA का एनालिसिस किया गया. इसमें लगभग 4.4 करोड़ ऐसे जेनेटिक वैरिएंट्स मिले जो ग्लोबल डेटाबेस में नहीं थे जो काफी चौंकाने वाली बात है।  जेनेटिक रिसर्च में कमियां कराची में सेंटर फॉर नॉन-कम्युनिकेबल डिसीजेज में सालेहीन के 'पाकिस्तान जीनोम रिसोर्स' बनाने की शुरुआत किए हुए दो दशक हो चुके हैं. उन्हें तब जो बात समझ आई थी, उसका इशारा 1960 के दशक से ही अमेरिका की अमिश समुदाय पर हुई स्टडीज कर रही थीं और वह ये है कि जिन समुदायों में चचेरे भाई-बहनों या रिश्तेदारों के बीच शादी की दर ज्यादा होती है, वहां जेनेटिक स्टडीज के मामले में रिसर्चर्स को एक खास तरह का फायदा मिलता है।  एक ही खानदान में शादी की वजह से एक ऐसे समुदायों में जीन की बनावट एक जैसी होने के कारण दुर्लभ आनुवंशिक म्यूटेशन और उनके इंसानी शरीर पर होने वाले असर को खोजना और समझना वैज्ञानिकों के लिए बहुत आसान हो जाता है, जो सामान्य आबादी में ढूंढ पाना नामुमकिन के बराबर है।  निकट संबंधी माता-पिता के बच्चों को समान जेनेटिक म्यूटेशन (आनुवंशिक उत्परिवर्तन) विरासत में मिलते हैं, जिनमें वे बदलाव भी शामिल हैं जिनमें कुछ जीन निष्क्रिय हो जाते हैं. ऐसे 'नॉक आउट' मामले वैज्ञानिकों को यह देखने का अवसर देते हैं कि एक इंसान एक विशेष जीन के बिना कैसे काम करता है और क्या कुछ ऐसे जीन हैं जिन्हें बीमारियों के इलाज के लिए 'बंद' यानी निष्क्रिय किया जा सकता है।  रिसर्च करने वालों ने पाया कि पाकिस्तान जीनोम रिसोर्स में शामिल लगभग हर पांच में से एक व्यक्ति में कम से कम एक जीन गायब है. स्टडी के दौरान, उन्होंने ऐसे लगभग 6,500 जीनों की पहचान की जो निष्क्रिय (स्विच ऑफ) हो गए थे।  सालीहीन ने कहा, 'हमारी पाकिस्तान स्टडी की खास बात यह है कि हम रिसर्च में शामिल प्रतिभागियों के पास वापस जा सकते हैं और डिटेल मेडिकल जांच कर सकते हैं ताकि यह देखा जा सके कि जीन के गायब होने का व्यक्ति पर किस तरह का असर पड़ सकता है।  ‘नॉकआउट’ वैज्ञानिकों के लिए क्यों हैं मौका? अक्सर जीन से जुड़ी खोजें तब होती हैं जब वैज्ञानिक चूहों में कुछ खास जीन को हटाकर यह देखते हैं कि इससे उनकी सेहत पर क्या असर पड़ता है. लेकिन रिसर्च से पता चल रहा है कि इंसानों और चूहों में जीन अक्सर अलग-अलग तरह से काम करते हैं. इसी वजह से चूहों पर असर करने वाली कई दवाएं इंसानों पर काम नहीं करतीं जिससे लाखों डॉलर, समय और मेहनत बर्बाद हो जाती है।  सालेहीन ने बताया, 'हम ऐसे लोगों की पहचान करना चाहते हैं जिनमें जीन की काम करने वाली कॉपी नहीं होती और यह देखना चाहते हैं कि क्या इसका उनकी सेहत पर कोई असर पड़ता है।  हाल की स्टडी में ठीक यही किया गया. रिसर्च के दौरान सामने आया, RXFP1 जीन, जो पहले चूहों के दिल के काम करने के लिए जरूरी माना जाता था, जिन लोगों में नहीं था, उनमें कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं देखी गई. यहां तक कि PRDM9 जीन, जो चूहों की प्रजनन क्षमता के लिए जरूरी है, उसका इंसानों की प्रजनन क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा।  इस तरह की रिसर्च दवाओं की खोज और निर्माण के लिए बहुत बड़े क्लू देती हैं. स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों में CIDEB जीन नहीं होता, वो लिवर की बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं. इससे पता चलता है कि CIDEB इनहिबिटर्स फैटी लिवर की बीमारी का इलाज हो सकते हैं।  कुछ मामलों में जीन की कमी डॉक्टरों को सावधान भी … Read more

एफएसडीए की बड़ी कार्रवाई, 25 ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने 6 दिन तक चलाया प्रदेश का सबसे बड़ा प्रवर्तन अभियान

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं, फिजिशियन सैंपल्स की अवैध बिक्री, सरकारी आपूर्ति की औषधियों की कालाबाजारी और एक्सपायर्ड दवाओं के कारोबार के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में चलाए गए विशेष अभियान में आगरा में 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की नकली, एक्सपायर्ड, फिजिशियन सैंपल और सरकारी सप्लाई की दवाएं जब्त की गई हैं। अब तक 8 अवैध गोदाम सील किए जा चुके हैं तथा 6 एफआईआर दर्ज कर कई आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दो चरणों में चला बड़ा अभियान एफएसडीए मुख्यालय लखनऊ द्वारा गठित 25 औषधि निरीक्षकों की विशेष टीमों ने 22 से 24 मई तथा 12 से 14 जून 2026 के बीच आगरा में व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाया। अभियान के दौरान खत्री गली, फव्वारा, संजय प्लेस, कमला नगर, झूलेलाल मार्केट, दयालबाग सहित प्रमुख दवा व्यापार केंद्रों, गोदामों और आवासीय परिसरों की जांच की गई। इस दौरान 20 से अधिक दवा फर्मों, 12 गोदामों तथा कई संदिग्ध परिसरों की तलाशी ली गई। जांच में बड़े पैमाने पर फिजिशियन सैंपल्स, सरकारी अस्पतालों की दवाएं, डिफेंस सप्लाई, एक्सपायर्ड दवाएं तथा संदिग्ध नकली औषधियां बरामद हुईं।  जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अभियान अभियान के दूसरे चरण को स्वयं एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने लीड किया। उन्होंने बताया कि प्रदेशवासियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले दो सप्ताह में छह दिनों तक चले विशेष अभियान में 25 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने व्यापक जांच की। आगरा में अब तक 3.63 करोड़ रुपये मूल्य की नकली, एक्सपायर्ड, फिजिशियन सैंपल और सरकारी आपूर्ति की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। 6 एफआईआर दर्ज की गई हैं तथा आठ अवैध गोदाम सील किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दवा माफिया, नकली दवा नेटवर्क और जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। एफएसडीए का आगरा पर था विशेष फोकस डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि नकली दवाओं का नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं, जहां से नकली और संदिग्ध दवाएं उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा औषधि बाजार है, जहां थोक और खुदरा दवा वितरण का मजबूत नेटवर्क, बेहतर एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी, दिल्ली से निकटता और विशाल उपभोक्ता आधार इसे अवैध कारोबारियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाता है। आगरा इस पूरे नेटवर्क का एक प्रमुख ट्रांजिट और वितरण केंद्र बनकर उभरा है, जहां से दवाओं की खेप लखनऊ, कानपुर समेत प्रदेश के अन्य बड़े बाजारों तक पहुंचती है। इसी कारण एफएसडीए पिछले कुछ समय से आगरा पर विशेष फोकस करते हुए सूचनाएं एकत्र कर रहा था और सुनियोजित रणनीति के तहत यह व्यापक अभियान चलाया गया। ज्योति ड्रग हाउस से जुड़े गोदामों से 2.5 करोड़ की बरामदगी 22 और 23 मई को झूलेलाल मार्केट स्थित मेसर्स ज्योति ड्रग हाउस से जुड़े दो अवैध गोदामों पर की गई कार्रवाई में लगभग 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं बरामद हुईं। जांच में बड़ी मात्रा में “फिजीशियन सैंपल – नॉट फॉर सेल” अंकित दवाएं, सरकारी एवं डिफेंस सप्लाई की औषधियां तथा जीवनरक्षक इंजेक्शन और वैक्सीन बिना कोल्ड चेन व्यवस्था के रखी मिलीं। एफएसडीए ने मौके से कई नमूने लेकर शेष स्टॉक को सील कर दिया। मामले में फर्म संचालक नारायण दास हंसराजनी, किशोर मेहता और पुनीत कटार सहित अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई। श्री मेडिकल एजेंसीज से नकली ऑक्सॉलजिन डीपी नेटवर्क का खुलासा एफएसडीए की जांच के दौरान “ऑक्सॉलजिन डीपी टैबलेट” नामक औषधि के नकली निर्माण, भंडारण और वितरण से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ। निर्माता कंपनी जाइडस लाइफसाइंसेज की शिकायत पर शुरू हुई जांच आगरा से अलीगढ़ और फिर उत्तराखंड के रुड़की तक पहुंची। जांच में मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, पैकेजिंग सामग्री और प्रिंटिंग अवशेषों के आधार पर यह सामने आया कि नकली दवा निर्माण और आपूर्ति का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था। श्री मेडिकल एजेंसीज के सीलबंद गोदाम से लगभग 50 लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद की गईं। मामले में सुरेन्द्र गुप्ता, मयंक गुप्ता, अन्नू अरोरा और सैयम अरोरा के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज की गई। जून अभियान में फिर खुला अवैध कारोबार का जाल 12 से 14 जून के बीच चलाए गए दूसरे चरण के अभियान में एफएसडीए टीम ने 20 फर्मों और 12 गोदामों की जांच की। इस दौरान चार गोदाम ऐसे पाए गए जो जांच के बाद सील कर दिए गए। सबसे गंभीर मामला खत्री गली स्थित गौरव मेडिको से जुड़ा सामने आया, जहां एक पंजीकृत गोदाम का ड्रग लाइसेंस स्वतः निरस्त हो चुका था, लेकिन उसी परिसर का उपयोग अवैध रूप से मेसर्स सीएफ इंटरप्राइजेज के माध्यम से किया जा रहा था। जांच में लगभग 40 लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद हुईं, जिनमें फिजिशियन सैंपल, सरकारी आपूर्ति की दवाएं तथा एक्सपायर्ड स्टॉक शामिल था। बिना लाइसेंस चल रहे थे गोदाम दयालबाग स्थित मनीष पंजवानी के आवास पर छापेमारी के दौरान सरकारी आपूर्ति की दवाएं, इंसुलिन और अन्य जीवनरक्षक औषधियां बिना किसी वैध लाइसेंस के रखी मिलीं। यहां री-लेबलिंग और मूल्य परिवर्तन के भी संकेत मिले। लगभग 5.20 लाख रुपये मूल्य की दवाएं जब्त की गईं। इसी प्रकार सुमित माधवानी के दो अवैध गोदामों से लगभग 12 लाख रुपये मूल्य के फिजिशियन सैंपल तथा सुमित गुप्ता के गोदाम से लगभग 15 लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद हुईं। दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई। कोल्ड चेन उल्लंघन और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ अभियान के दौरान कई स्थानों पर इंसुलिन, रैबीज वैक्सीन और अन्य तापमान नियंत्रित दवाएं बिना कोल्ड चेन व्यवस्था के रखी मिलीं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में दवाओं की प्रभावशीलता समाप्त हो सकती है और मरीजों के जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। एफएसडीए ने ऐसे मामलों को जनस्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ मानते हुए संबंधित स्टॉक जब्त कर लिया तथा नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेज दिया। चार सीलबंद गोदामों को नोटिस … Read more

दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग बनने की ओर जेद्दा टावर, बुर्ज खलीफा का रिकॉर्ड टूटना तय?

दुबई  सऊदी अरब में एक ऐसा नया टावर बन रहा है, जो बुर्ज खलीफा को भी पीछे छोड़ने के लिए बिल्कुल तैयार है. रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के जेडा टावर (Jeddah Tower) का काम अब अपने आखिरी और सबसे ऊपरी हिस्सों की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है।  जब यह गगनचुंबी इमारत पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी, तो इसकी ऊंचाई 1,000 मीटर (यानी 3,281 फीट) से भी ज्यादा होगी. वर्तमान में दुनिया की सबसे ऊंची इमारत दुबई का 'बुर्ज खलीफा' है, जिसकी ऊंचाई 828 मीटर है. यानी जेडा टावर बुर्ज खलीफा से भी बहुत ज्यादा ऊंचा होने वाला है।  इस शानदार टावर को एड्रियन स्मिथ और गॉर्डन गिल नाम के मशहूर आर्किटेक्ट्स ने डिजाइन किया है. दिलचस्प बात यह है कि एड्रियन स्मिथ वही शख्स हैं जिन्होंने दुबई के बुर्ज खलीफा को भी डिजाइन किया था.  रिपोर्ट के अनुसार, जेडा टावर ने अभी से ही आसमान छूना शुरू कर दिया है. यह टावर अपनी 104वीं मंजिल के बेहद करीब पहुंच चुका है, यानी इसकी ऊंचाई अभी ही 400 मीटर से ज्यादा हो चुकी है।  हर हफ्ते इस टावर की ऊंचाई लगभग 4 मीटर बढ़ रही है. इस रफ्तार से देखा जाए तो अगले 25 हफ्तों में यह टावर 500 मीटर का आंकड़ा पार कर लेगा. जेडा टावर का बनना सिर्फ एक रिकॉर्ड तोड़ने का खेल नहीं है, बल्कि यह सऊदी अरब के एक बहुत बड़े प्लान का हिस्सा है. सऊदी अरब इस समय 'विज़न 2030' पर काम कर रहा है, जिसके तहत वह अपनी कमाई के लिए सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं रहना चाहता. वे अपने देश में टूरिज्म और बिजनेस को बढ़ावा देना चाहते हैं. यह टावर 53 लाख वर्ग मीटर में बन रहे एक आलीशान और आधुनिक शहर 'जेडा इकोनॉमिक सिटी' का सबसे मुख्य हिस्सा है।  क्या है इसकी खूबियां रिपोर्ट्स के मुताबिक जेडा टावर (Jeddah Tower) इंजीनियरिंग और वास्तुकला के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने जा रहा है, जिसकी सबसे बड़ी खूबी इसका अगस्त 2028 तक पूरा होने का लक्ष्य और मौजूदा समय में इसकी निर्माण की तूफानी रफ्तार है. यह गगनचुंबी इमारत कम से कम 167 मंजिला होगी, जिसमें 130 से लेकर 160 से अधिक मंजिलें रहने या इस्तेमाल करने योग्य होंगी और इसके केंद्रीय कोर पर औसतन प्रति सप्ताह एक मंजिल बनाने का काम चल रहा है।  इस टावर की इंजीनियरिंग का सबसे अनोखा और ऐतिहासिक पहलू कंक्रीट को सीधे एक किलोमीटर की अभूतपूर्व ऊंचाई तक पंप करना है, जो निर्माण इतिहास में आज तक इस पैमाने पर कभी नहीं किया गया. इसके अलावा, टावर के ऊपरी हिस्से को मजबूती देने के लिए इसके डिजाइन में एक विशेष 'स्काई राफ्ट' तकनीक को शामिल किया गया है, जो इसके सबसे ऊपरी नुकीले शिखर को सुरक्षित और मजबूत सहारा देगा। 

अलीगढ़ की ब्रास आर्ट को अंतरराष्ट्रीय पहचान, GI टैग से बढ़ेगा निर्यात और कारीगरों की आमदनी

अलीगढ़ अलीगढ़ की विश्व प्रसिद्ध धातु मूर्तियों को आधिकारिक तौर पर जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिल गया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने चार नए जीआई टैग हासिल कर कुल 83 अंकों के साथ देश में पहला स्थान बरकरार रखा है। इसे अलीगढ़ की पारंपरिक शिल्पकला और स्थानीय कारीगरों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। अलीगढ़ ब्रास स्टेचू एंड आर्टवेयर सप्लायर एसोसिएशन के अध्यक्ष हनुमंत राम गांधी ने बताया कि उनकी एसोसिएशन ने जीआई मैन ऑफ इंडिया के रूप में विख्यात पद्मश्री डॉ. रजनी कांत के साथ मिलकर इस टैग के लिए आवेदन किया था। चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री की विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं, परीक्षणों और प्रस्तुतियों के बाद अलीगढ़ की इस कला को यह विशेष मान्यता प्राप्त हुई है। यहां बनी पीतल और अन्य धातुओं की मूर्तियां अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में बड़े पैमाने पर निर्यात की जाती हैं। वैश्विक बाजारों में भारतीय संस्कृति, देवी-देवताओं और पारंपरिक कलाकृतियों की भारी मांग के कारण इस उद्योग का विदेशी मुद्रा अर्जित करने में बड़ा योगदान है। जीआई टैग मिलने से अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रामाणिकता बढ़ी है, जिससे जालसाजी से सुरक्षा मिलेगी और स्थानीय कारीगरों व निर्यातकों को अपने उत्पादों के बेहतर दाम मिल सकेंगे। संगठन के सचिव कपिल वार्ष्णेय और कोषाध्यक्ष मोहित राठी ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से जोड़ते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताया। देशभर में बना नया कीर्तिमान इस वित्तीय वर्ष में डॉ. रजनी कांत के तकनीकी सहयोग से देश के कई राज्यों में जीआई टैग की क्रांति आई है। लद्दाख में आठ, झारखंड में आठ, मध्य प्रदेश में 22, और बिहार, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, असम को मिलाकर रिकॉर्ड 84 नए जीआई पंजीकृत हुए हैं, जबकि 215 नए आवेदन विभिन्न चरणों में लंबित हैं।  

स्मॉलकैप स्टॉक में हलचल की तैयारी: इटली से भारत तक भारी माल ढुलाई का जिम्मा मिला टाइगर लॉजिस्टिक को

नई दिल्ली  स्मॉल कैप स्टॉक टाइगर लॉजिस्टिक (इंडिया) लिमिटेड के शेयर सोमवार को फोकस में रहेंगे। कंपनी को भारत हैवी इलेक्ट्रकिल्स लिमिटेड से एक बड़ा वर्क ऑर्डर मिला है। इस खबर के सामने आने के बाद अब सोमवार को कंपनी के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। क्या है वर्क ऑर्डर डीटेल्स (Tiger Logistics Work order details) टाइगर लॉजिस्टिक ने दी जानकारी में बताया है कि उन्हें 13 ओवर डाइमेंशनल कार्गो को ट्रांसपोर्ट करना है। कंपनी ने कहा है कि हर एक वजह 89 मैट्रिक टन है। इस ऑर्डर के अनुसार कंपनी को इटली से इंडिया सामान को लाना है। बता दें, वर्क ऑर्डर की कुल कीमत 4 करोड़ रुपये की है। शेयरों का प्रदर्शन पिछले एक साल मे कैसा है? टाइगर लॉजिस्टिक कंपनी के शेयर बीएसई में 0.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 35.20 रुपये के स्तर पर शुक्रवार को पहुंच गए थे। पिछले तीन महीने में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 41 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। हालांकि, इसके बाद भी 6 महीने यह स्टॉक 5 प्रतिशत लुढ़क चुका है। एक साल में कंपनी के शेयरों का भाव 38 प्रतिशत गिरा है। टाइगर लॉजिस्टिक (इंडिया) लिमिटेड का 52 वीक हाई 59.84 रुपये और 52 वीक लो लेवल 22.87 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 372 करोड़ रुपये का है। लॉन्ग टर्म में कैसा है प्रदर्शन दो साल में कंपनी के शेयरों का भाव 14 प्रतिशत और तीन साल में 4 प्रतिशत गिरा है। हालांकि, 5 साल में स्टॉक का दाम 714 प्रतिशत का रिटर्न देने में सफल रहा है। 10 साल में यह स्टॉक 89 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बोनस शेयर दे चुकी है कंपनी Tiger Logistics ने निवेशकों को एक बार बोनस शेयर दिया है। 2015 में कंपनी के शेयर एक्स-बोनस ट्रेड किए थे। तब कंपनी ने 2 पर 3 शेयर बोनस के तौर पर दिए थे। 2021 में इसके बाद कंपनी ने डिविडेंड दिया था। तब हर एक शेयर पर 1 रुपये का डिविडेंड बांटा गया था। बता दें, 2024 में कंपनी के शेयरों का बंटवारा हो चुका है। जिसके बाद टाइगर लॉजिस्टिक के शेयरों की फेस वैल्यू 10 रुपये से घटकर 1 रुपये प्रति शेयर हो गई थी। कंपनी के शेयरों को 10 हिस्सों में बांटा गया था। इस कंपनी में प्रमोटर्स की कुल हिस्सेदारी 57.30 प्रतिशत है। पब्लिक के पास 42.70 प्रतिशत हिस्सा है।

‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ को मिलेगी पहचान, विश्वविद्यालय ने लिया ऐतिहासिक निर्णय

 जबलपुर जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का रविवार को होने वाला दीक्षा समारोह इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति के साथ-साथ एक ऐतिहासिक परिवर्तन के कारण भी विशेष बन गया है। विश्वविद्यालय ने पहली बार अपनी उपाधियों, अंकसूची, स्वर्ण पदक और प्रमाण-पत्रों पर 'इंडिया' के स्थान पर आधिकारिक रूप से 'भारत' शब्द अंकित किया है। भारतीय पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता को केंद्र में रखकर किए गए इस परिवर्तन से दीक्षा समारोह को नई पहचान मिलेगी। आधिकारिक दस्तावेजों में 'भारत' शब्द की शुरुआत कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने जनवरी, 2025 से अपने पत्राचार और आधिकारिक दस्तावेजों में 'भारत' शब्द का उपयोग शुरू कर दिया था। बता दें, 21 जून को आयोजित 36वें दीक्षा समारोह की राज्यपाल व कुलाधिपति मंगुभाई पटेल अध्यक्षता करेंगे। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीयता के प्रति प्रतिबद्धता और परंपरा प्रो. वर्मा ने बताया कि भारतीय पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की इस पहल को व्यापक सराहना भी मिली। उन्हें प्रयागराज महाकुंभ में सम्मानित भी किया गया था। उपाधियों और प्रमाण पत्रों पर 'भारत' अंकित करना विश्वविद्यालय की भारतीयता के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण कदम है। प्रो. वर्मा के अनुसार इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने सबसे पहले अपने आधिकारिक दस्तावेज में 'भारत' शब्द का प्रयोग शुरू किया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।  

उत्तर भारत में गर्मी से राहत की तैयारी, IMD ने बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया

नई दिल्ली यूपी समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में गर्मी पड़ रही है। लोग बेसब्री से मॉनसून का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, मॉनसून पर खुशखबरी सामने आई है कि 23 जून को यह कई राज्यों में पहुंचने वाला है। मौसम विभाग ने बताया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में यह 23 को पहुंच जाएगा। यानी कि इन राज्यों में पड़ रही गर्मी से राहत मिलेगी। इसके अलावा, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत में 21 जून तक बहुत भारी बारिश होगी। वहीं, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र में आज और पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ में 25 जून, बिहार, तेलंगाना में 21 जून तक हीटवेव चलेगी। उसके बाद भारी गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। मध्य और पूर्वी भारत में आज कई राज्यों में आंधी तूफान चलने की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर भारत के कुछ राज्यों में बारिश का अलर्ट है। जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 20-22 जून के बीच बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में 20-26 जून के बीच बरसात होगी। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब में 20-23 जून, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 20 जून, 26 जून, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25-26 जून के बीच बारिश होगी। पश्चिमी राजस्थान में 20-24 जून, पूर्वी राजस्थान में 20-26 जून के बीच बारिश देखने को मिलेगी। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब में 20-23 जून के बीच तेज स्पीड से आंधी तूफान और बिजली कड़कने का अलर्ट है। इसके अलावा, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी राजस्थान में 20 जून को आंधी चलने वाली है।जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 20-21 जून को ओले गिरेंगे। मध्य भारत की बात करें तो छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 20-26 जून के बीच बारिश होगी। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21-24 जून, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ में 20-24 जून, छत्तीसगढ़ में 20-26 जून के बीच बारिश, आंधी, तेज हवाओं का अलर्ट है। पूर्वी भारत की बात करें तो अंडमान और निकोबार द्वीप, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 20-26 जून, गंगीय पश्चिम बंगाल में 20-25 जून, ओडिशा में 20-21 जून के बीच बरसात देखने को मिलने वाली है। गंगीय पश्चिम बंगाल में 26 जून, बिहार, झारखंड में 20-26 जून, ओडिशा में 22-26 जून के बीच बरसात होगी। वहीं, अंडमान और निकोबार द्वीप में 20-26 जून, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल में 20 जून, गंगीय पश्चिम बंगाल में 20-21 जून, झारखंड में 22-26 जून, बिहार में 20-22 जून, 25-26 जून, ओडिशा में 22-24 जून को बारिश, आंधी तूफान चलेगा। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 20-26 जून को बारिश होगी। अरुणाचल प्रदेश में 20-24 जून, असम, मेघालय में 23-26 जून, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 20-23 जून में बहुत भारी बारिश होगी।

कुरनूल में गोल्ड रिजर्व मिलने की संभावना, जोन्नागिरी बना फोकस पॉइंट

आंध्र प्रदेश किसी भी देश की आर्थिक मजबूती में सोने का बड़ा योगदान होता है। भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में सोने के अकूत भंडार का पता चला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां 50 टन सोना हो सकता है। जानकारों का कहना है कि सोने का भंडार मिलने का अनुमान अगर सही साबित होता है तो आंध्र प्रदेश देश में सोने का सबसे बड़ा उत्पादक और सप्लायर राज्य बन सकता है। वहीं भारत को विदेश से कम सोना खरीदना पड़ेगा। चार जगहों पर होगा खनन आंध्र प्रदेश में खनन विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि जोन्नागिरी के साथ चार संभावित स्थलों को चिह्नित किया जा रहा है। रामागिरी, जव्वकुला औरचिगुरुकुंटा में खनन किया जाएगा। जोन्नागिरी पर सबसे ज्यादा सोना पाए जाने की संभावना है। अकेले इसी साइट पर 50 टन सोना मौजूद हो सकता है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी शोध किया जाएगा। जोन्नागिरी गांव में सोने का भंडार अधिकारियों के मुताबिक जोन्नागिरी गांव में पहले भी खनन के लिए 1500 एकड़ की भूमि आवंटित की गई थी। हालांकि 500 एकड़ में ही सोने की तलाशकी गई। बताया गया था कि इस जगह पर 13 टन सोना हो सकता है। अब बाकी की 1000 एकड़ जमीन पर सोना खोजने का काम जल्द ही शुरू हो जाएगा। कैसे निकाला जाता है सोना कीमती धातुओं के खनन के लिए विशेष तकनीक की जरूरत होती है। इसका टेंडर प्राइवेट कंपनियों को दिया जाता है। लगभग एक टन मटीरियल की जब प्रोसेसिंग की जाती है तो लगभग एक ग्राम सोना निकलता है। सोना समेत अन्य धातुएं अयस्क के रूप में मौजूद रहती हैं। अयस्क से सोने को अलग किया जाता है। सीएम चंद्रबाबू नायडू इसी महने जोन्नागिरी में खनन का उद्घाटन कर सकते हैं। भारत में कितने सोने का प्रोडक्शन वर्तमान में कर्नाटक में हुट्टी गोल्ड माइन्स से ही देश में सोने का उत्पादन हो रहा है। इससे हर साल करीब 1.5 टन सोना मिलता है। हालांकि देश में सोने की मांग और खपत बहुत है। हर साल भारत में 800 टन तक सोने की खपत होती है। साल 2000 में कर्नाटक में कोलार गोल्ड फील्ड्स बंद हो गई थीं। इसके बाद से घरेलू प्रोडक्शन भी कम हो गया था। जोन्नागिरी में अगर 50 टन सोना पाया जाता है तो इसकी कीमत 7500 से 9 हजार करोड़ तक हो सकती है। इससे राज्य सरकार को सबसे बड़ा फायदा मिलने वाला है।