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एफएसडीए की बड़ी कार्रवाई, 25 ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने 6 दिन तक चलाया प्रदेश का सबसे बड़ा प्रवर्तन अभियान

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं, फिजिशियन सैंपल्स की अवैध बिक्री, सरकारी आपूर्ति की औषधियों की कालाबाजारी और एक्सपायर्ड दवाओं के कारोबार के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में चलाए गए विशेष अभियान में आगरा में 3.63 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की नकली, एक्सपायर्ड, फिजिशियन सैंपल और सरकारी सप्लाई की दवाएं जब्त की गई हैं। अब तक 8 अवैध गोदाम सील किए जा चुके हैं तथा 6 एफआईआर दर्ज कर कई आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दो चरणों में चला बड़ा अभियान एफएसडीए मुख्यालय लखनऊ द्वारा गठित 25 औषधि निरीक्षकों की विशेष टीमों ने 22 से 24 मई तथा 12 से 14 जून 2026 के बीच आगरा में व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाया। अभियान के दौरान खत्री गली, फव्वारा, संजय प्लेस, कमला नगर, झूलेलाल मार्केट, दयालबाग सहित प्रमुख दवा व्यापार केंद्रों, गोदामों और आवासीय परिसरों की जांच की गई। इस दौरान 20 से अधिक दवा फर्मों, 12 गोदामों तथा कई संदिग्ध परिसरों की तलाशी ली गई। जांच में बड़े पैमाने पर फिजिशियन सैंपल्स, सरकारी अस्पतालों की दवाएं, डिफेंस सप्लाई, एक्सपायर्ड दवाएं तथा संदिग्ध नकली औषधियां बरामद हुईं।  जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अभियान अभियान के दूसरे चरण को स्वयं एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने लीड किया। उन्होंने बताया कि प्रदेशवासियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले दो सप्ताह में छह दिनों तक चले विशेष अभियान में 25 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने व्यापक जांच की। आगरा में अब तक 3.63 करोड़ रुपये मूल्य की नकली, एक्सपायर्ड, फिजिशियन सैंपल और सरकारी आपूर्ति की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। 6 एफआईआर दर्ज की गई हैं तथा आठ अवैध गोदाम सील किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दवा माफिया, नकली दवा नेटवर्क और जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। एफएसडीए का आगरा पर था विशेष फोकस डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि नकली दवाओं का नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं, जहां से नकली और संदिग्ध दवाएं उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा औषधि बाजार है, जहां थोक और खुदरा दवा वितरण का मजबूत नेटवर्क, बेहतर एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी, दिल्ली से निकटता और विशाल उपभोक्ता आधार इसे अवैध कारोबारियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाता है। आगरा इस पूरे नेटवर्क का एक प्रमुख ट्रांजिट और वितरण केंद्र बनकर उभरा है, जहां से दवाओं की खेप लखनऊ, कानपुर समेत प्रदेश के अन्य बड़े बाजारों तक पहुंचती है। इसी कारण एफएसडीए पिछले कुछ समय से आगरा पर विशेष फोकस करते हुए सूचनाएं एकत्र कर रहा था और सुनियोजित रणनीति के तहत यह व्यापक अभियान चलाया गया। ज्योति ड्रग हाउस से जुड़े गोदामों से 2.5 करोड़ की बरामदगी 22 और 23 मई को झूलेलाल मार्केट स्थित मेसर्स ज्योति ड्रग हाउस से जुड़े दो अवैध गोदामों पर की गई कार्रवाई में लगभग 2.5 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं बरामद हुईं। जांच में बड़ी मात्रा में “फिजीशियन सैंपल – नॉट फॉर सेल” अंकित दवाएं, सरकारी एवं डिफेंस सप्लाई की औषधियां तथा जीवनरक्षक इंजेक्शन और वैक्सीन बिना कोल्ड चेन व्यवस्था के रखी मिलीं। एफएसडीए ने मौके से कई नमूने लेकर शेष स्टॉक को सील कर दिया। मामले में फर्म संचालक नारायण दास हंसराजनी, किशोर मेहता और पुनीत कटार सहित अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई। श्री मेडिकल एजेंसीज से नकली ऑक्सॉलजिन डीपी नेटवर्क का खुलासा एफएसडीए की जांच के दौरान “ऑक्सॉलजिन डीपी टैबलेट” नामक औषधि के नकली निर्माण, भंडारण और वितरण से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ। निर्माता कंपनी जाइडस लाइफसाइंसेज की शिकायत पर शुरू हुई जांच आगरा से अलीगढ़ और फिर उत्तराखंड के रुड़की तक पहुंची। जांच में मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, पैकेजिंग सामग्री और प्रिंटिंग अवशेषों के आधार पर यह सामने आया कि नकली दवा निर्माण और आपूर्ति का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था। श्री मेडिकल एजेंसीज के सीलबंद गोदाम से लगभग 50 लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद की गईं। मामले में सुरेन्द्र गुप्ता, मयंक गुप्ता, अन्नू अरोरा और सैयम अरोरा के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज की गई। जून अभियान में फिर खुला अवैध कारोबार का जाल 12 से 14 जून के बीच चलाए गए दूसरे चरण के अभियान में एफएसडीए टीम ने 20 फर्मों और 12 गोदामों की जांच की। इस दौरान चार गोदाम ऐसे पाए गए जो जांच के बाद सील कर दिए गए। सबसे गंभीर मामला खत्री गली स्थित गौरव मेडिको से जुड़ा सामने आया, जहां एक पंजीकृत गोदाम का ड्रग लाइसेंस स्वतः निरस्त हो चुका था, लेकिन उसी परिसर का उपयोग अवैध रूप से मेसर्स सीएफ इंटरप्राइजेज के माध्यम से किया जा रहा था। जांच में लगभग 40 लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद हुईं, जिनमें फिजिशियन सैंपल, सरकारी आपूर्ति की दवाएं तथा एक्सपायर्ड स्टॉक शामिल था। बिना लाइसेंस चल रहे थे गोदाम दयालबाग स्थित मनीष पंजवानी के आवास पर छापेमारी के दौरान सरकारी आपूर्ति की दवाएं, इंसुलिन और अन्य जीवनरक्षक औषधियां बिना किसी वैध लाइसेंस के रखी मिलीं। यहां री-लेबलिंग और मूल्य परिवर्तन के भी संकेत मिले। लगभग 5.20 लाख रुपये मूल्य की दवाएं जब्त की गईं। इसी प्रकार सुमित माधवानी के दो अवैध गोदामों से लगभग 12 लाख रुपये मूल्य के फिजिशियन सैंपल तथा सुमित गुप्ता के गोदाम से लगभग 15 लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद हुईं। दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई। कोल्ड चेन उल्लंघन और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ अभियान के दौरान कई स्थानों पर इंसुलिन, रैबीज वैक्सीन और अन्य तापमान नियंत्रित दवाएं बिना कोल्ड चेन व्यवस्था के रखी मिलीं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में दवाओं की प्रभावशीलता समाप्त हो सकती है और मरीजों के जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। एफएसडीए ने ऐसे मामलों को जनस्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ मानते हुए संबंधित स्टॉक जब्त कर लिया तथा नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेज दिया। चार सीलबंद गोदामों को नोटिस … Read more

दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग बनने की ओर जेद्दा टावर, बुर्ज खलीफा का रिकॉर्ड टूटना तय?

दुबई  सऊदी अरब में एक ऐसा नया टावर बन रहा है, जो बुर्ज खलीफा को भी पीछे छोड़ने के लिए बिल्कुल तैयार है. रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के जेडा टावर (Jeddah Tower) का काम अब अपने आखिरी और सबसे ऊपरी हिस्सों की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है।  जब यह गगनचुंबी इमारत पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी, तो इसकी ऊंचाई 1,000 मीटर (यानी 3,281 फीट) से भी ज्यादा होगी. वर्तमान में दुनिया की सबसे ऊंची इमारत दुबई का 'बुर्ज खलीफा' है, जिसकी ऊंचाई 828 मीटर है. यानी जेडा टावर बुर्ज खलीफा से भी बहुत ज्यादा ऊंचा होने वाला है।  इस शानदार टावर को एड्रियन स्मिथ और गॉर्डन गिल नाम के मशहूर आर्किटेक्ट्स ने डिजाइन किया है. दिलचस्प बात यह है कि एड्रियन स्मिथ वही शख्स हैं जिन्होंने दुबई के बुर्ज खलीफा को भी डिजाइन किया था.  रिपोर्ट के अनुसार, जेडा टावर ने अभी से ही आसमान छूना शुरू कर दिया है. यह टावर अपनी 104वीं मंजिल के बेहद करीब पहुंच चुका है, यानी इसकी ऊंचाई अभी ही 400 मीटर से ज्यादा हो चुकी है।  हर हफ्ते इस टावर की ऊंचाई लगभग 4 मीटर बढ़ रही है. इस रफ्तार से देखा जाए तो अगले 25 हफ्तों में यह टावर 500 मीटर का आंकड़ा पार कर लेगा. जेडा टावर का बनना सिर्फ एक रिकॉर्ड तोड़ने का खेल नहीं है, बल्कि यह सऊदी अरब के एक बहुत बड़े प्लान का हिस्सा है. सऊदी अरब इस समय 'विज़न 2030' पर काम कर रहा है, जिसके तहत वह अपनी कमाई के लिए सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं रहना चाहता. वे अपने देश में टूरिज्म और बिजनेस को बढ़ावा देना चाहते हैं. यह टावर 53 लाख वर्ग मीटर में बन रहे एक आलीशान और आधुनिक शहर 'जेडा इकोनॉमिक सिटी' का सबसे मुख्य हिस्सा है।  क्या है इसकी खूबियां रिपोर्ट्स के मुताबिक जेडा टावर (Jeddah Tower) इंजीनियरिंग और वास्तुकला के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने जा रहा है, जिसकी सबसे बड़ी खूबी इसका अगस्त 2028 तक पूरा होने का लक्ष्य और मौजूदा समय में इसकी निर्माण की तूफानी रफ्तार है. यह गगनचुंबी इमारत कम से कम 167 मंजिला होगी, जिसमें 130 से लेकर 160 से अधिक मंजिलें रहने या इस्तेमाल करने योग्य होंगी और इसके केंद्रीय कोर पर औसतन प्रति सप्ताह एक मंजिल बनाने का काम चल रहा है।  इस टावर की इंजीनियरिंग का सबसे अनोखा और ऐतिहासिक पहलू कंक्रीट को सीधे एक किलोमीटर की अभूतपूर्व ऊंचाई तक पंप करना है, जो निर्माण इतिहास में आज तक इस पैमाने पर कभी नहीं किया गया. इसके अलावा, टावर के ऊपरी हिस्से को मजबूती देने के लिए इसके डिजाइन में एक विशेष 'स्काई राफ्ट' तकनीक को शामिल किया गया है, जो इसके सबसे ऊपरी नुकीले शिखर को सुरक्षित और मजबूत सहारा देगा। 

अलीगढ़ की ब्रास आर्ट को अंतरराष्ट्रीय पहचान, GI टैग से बढ़ेगा निर्यात और कारीगरों की आमदनी

अलीगढ़ अलीगढ़ की विश्व प्रसिद्ध धातु मूर्तियों को आधिकारिक तौर पर जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिल गया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने चार नए जीआई टैग हासिल कर कुल 83 अंकों के साथ देश में पहला स्थान बरकरार रखा है। इसे अलीगढ़ की पारंपरिक शिल्पकला और स्थानीय कारीगरों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। अलीगढ़ ब्रास स्टेचू एंड आर्टवेयर सप्लायर एसोसिएशन के अध्यक्ष हनुमंत राम गांधी ने बताया कि उनकी एसोसिएशन ने जीआई मैन ऑफ इंडिया के रूप में विख्यात पद्मश्री डॉ. रजनी कांत के साथ मिलकर इस टैग के लिए आवेदन किया था। चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री की विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं, परीक्षणों और प्रस्तुतियों के बाद अलीगढ़ की इस कला को यह विशेष मान्यता प्राप्त हुई है। यहां बनी पीतल और अन्य धातुओं की मूर्तियां अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में बड़े पैमाने पर निर्यात की जाती हैं। वैश्विक बाजारों में भारतीय संस्कृति, देवी-देवताओं और पारंपरिक कलाकृतियों की भारी मांग के कारण इस उद्योग का विदेशी मुद्रा अर्जित करने में बड़ा योगदान है। जीआई टैग मिलने से अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रामाणिकता बढ़ी है, जिससे जालसाजी से सुरक्षा मिलेगी और स्थानीय कारीगरों व निर्यातकों को अपने उत्पादों के बेहतर दाम मिल सकेंगे। संगठन के सचिव कपिल वार्ष्णेय और कोषाध्यक्ष मोहित राठी ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से जोड़ते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताया। देशभर में बना नया कीर्तिमान इस वित्तीय वर्ष में डॉ. रजनी कांत के तकनीकी सहयोग से देश के कई राज्यों में जीआई टैग की क्रांति आई है। लद्दाख में आठ, झारखंड में आठ, मध्य प्रदेश में 22, और बिहार, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, असम को मिलाकर रिकॉर्ड 84 नए जीआई पंजीकृत हुए हैं, जबकि 215 नए आवेदन विभिन्न चरणों में लंबित हैं।  

स्मॉलकैप स्टॉक में हलचल की तैयारी: इटली से भारत तक भारी माल ढुलाई का जिम्मा मिला टाइगर लॉजिस्टिक को

नई दिल्ली  स्मॉल कैप स्टॉक टाइगर लॉजिस्टिक (इंडिया) लिमिटेड के शेयर सोमवार को फोकस में रहेंगे। कंपनी को भारत हैवी इलेक्ट्रकिल्स लिमिटेड से एक बड़ा वर्क ऑर्डर मिला है। इस खबर के सामने आने के बाद अब सोमवार को कंपनी के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। क्या है वर्क ऑर्डर डीटेल्स (Tiger Logistics Work order details) टाइगर लॉजिस्टिक ने दी जानकारी में बताया है कि उन्हें 13 ओवर डाइमेंशनल कार्गो को ट्रांसपोर्ट करना है। कंपनी ने कहा है कि हर एक वजह 89 मैट्रिक टन है। इस ऑर्डर के अनुसार कंपनी को इटली से इंडिया सामान को लाना है। बता दें, वर्क ऑर्डर की कुल कीमत 4 करोड़ रुपये की है। शेयरों का प्रदर्शन पिछले एक साल मे कैसा है? टाइगर लॉजिस्टिक कंपनी के शेयर बीएसई में 0.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 35.20 रुपये के स्तर पर शुक्रवार को पहुंच गए थे। पिछले तीन महीने में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 41 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। हालांकि, इसके बाद भी 6 महीने यह स्टॉक 5 प्रतिशत लुढ़क चुका है। एक साल में कंपनी के शेयरों का भाव 38 प्रतिशत गिरा है। टाइगर लॉजिस्टिक (इंडिया) लिमिटेड का 52 वीक हाई 59.84 रुपये और 52 वीक लो लेवल 22.87 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 372 करोड़ रुपये का है। लॉन्ग टर्म में कैसा है प्रदर्शन दो साल में कंपनी के शेयरों का भाव 14 प्रतिशत और तीन साल में 4 प्रतिशत गिरा है। हालांकि, 5 साल में स्टॉक का दाम 714 प्रतिशत का रिटर्न देने में सफल रहा है। 10 साल में यह स्टॉक 89 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बोनस शेयर दे चुकी है कंपनी Tiger Logistics ने निवेशकों को एक बार बोनस शेयर दिया है। 2015 में कंपनी के शेयर एक्स-बोनस ट्रेड किए थे। तब कंपनी ने 2 पर 3 शेयर बोनस के तौर पर दिए थे। 2021 में इसके बाद कंपनी ने डिविडेंड दिया था। तब हर एक शेयर पर 1 रुपये का डिविडेंड बांटा गया था। बता दें, 2024 में कंपनी के शेयरों का बंटवारा हो चुका है। जिसके बाद टाइगर लॉजिस्टिक के शेयरों की फेस वैल्यू 10 रुपये से घटकर 1 रुपये प्रति शेयर हो गई थी। कंपनी के शेयरों को 10 हिस्सों में बांटा गया था। इस कंपनी में प्रमोटर्स की कुल हिस्सेदारी 57.30 प्रतिशत है। पब्लिक के पास 42.70 प्रतिशत हिस्सा है।

‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ को मिलेगी पहचान, विश्वविद्यालय ने लिया ऐतिहासिक निर्णय

 जबलपुर जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का रविवार को होने वाला दीक्षा समारोह इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति के साथ-साथ एक ऐतिहासिक परिवर्तन के कारण भी विशेष बन गया है। विश्वविद्यालय ने पहली बार अपनी उपाधियों, अंकसूची, स्वर्ण पदक और प्रमाण-पत्रों पर 'इंडिया' के स्थान पर आधिकारिक रूप से 'भारत' शब्द अंकित किया है। भारतीय पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता को केंद्र में रखकर किए गए इस परिवर्तन से दीक्षा समारोह को नई पहचान मिलेगी। आधिकारिक दस्तावेजों में 'भारत' शब्द की शुरुआत कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने जनवरी, 2025 से अपने पत्राचार और आधिकारिक दस्तावेजों में 'भारत' शब्द का उपयोग शुरू कर दिया था। बता दें, 21 जून को आयोजित 36वें दीक्षा समारोह की राज्यपाल व कुलाधिपति मंगुभाई पटेल अध्यक्षता करेंगे। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीयता के प्रति प्रतिबद्धता और परंपरा प्रो. वर्मा ने बताया कि भारतीय पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की इस पहल को व्यापक सराहना भी मिली। उन्हें प्रयागराज महाकुंभ में सम्मानित भी किया गया था। उपाधियों और प्रमाण पत्रों पर 'भारत' अंकित करना विश्वविद्यालय की भारतीयता के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण कदम है। प्रो. वर्मा के अनुसार इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने सबसे पहले अपने आधिकारिक दस्तावेज में 'भारत' शब्द का प्रयोग शुरू किया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।  

उत्तर भारत में गर्मी से राहत की तैयारी, IMD ने बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया

नई दिल्ली यूपी समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में गर्मी पड़ रही है। लोग बेसब्री से मॉनसून का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, मॉनसून पर खुशखबरी सामने आई है कि 23 जून को यह कई राज्यों में पहुंचने वाला है। मौसम विभाग ने बताया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में यह 23 को पहुंच जाएगा। यानी कि इन राज्यों में पड़ रही गर्मी से राहत मिलेगी। इसके अलावा, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत में 21 जून तक बहुत भारी बारिश होगी। वहीं, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र में आज और पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ में 25 जून, बिहार, तेलंगाना में 21 जून तक हीटवेव चलेगी। उसके बाद भारी गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। मध्य और पूर्वी भारत में आज कई राज्यों में आंधी तूफान चलने की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर भारत के कुछ राज्यों में बारिश का अलर्ट है। जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 20-22 जून के बीच बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में 20-26 जून के बीच बरसात होगी। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब में 20-23 जून, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 20 जून, 26 जून, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25-26 जून के बीच बारिश होगी। पश्चिमी राजस्थान में 20-24 जून, पूर्वी राजस्थान में 20-26 जून के बीच बारिश देखने को मिलेगी। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब में 20-23 जून के बीच तेज स्पीड से आंधी तूफान और बिजली कड़कने का अलर्ट है। इसके अलावा, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी राजस्थान में 20 जून को आंधी चलने वाली है।जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 20-21 जून को ओले गिरेंगे। मध्य भारत की बात करें तो छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 20-26 जून के बीच बारिश होगी। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21-24 जून, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ में 20-24 जून, छत्तीसगढ़ में 20-26 जून के बीच बारिश, आंधी, तेज हवाओं का अलर्ट है। पूर्वी भारत की बात करें तो अंडमान और निकोबार द्वीप, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 20-26 जून, गंगीय पश्चिम बंगाल में 20-25 जून, ओडिशा में 20-21 जून के बीच बरसात देखने को मिलने वाली है। गंगीय पश्चिम बंगाल में 26 जून, बिहार, झारखंड में 20-26 जून, ओडिशा में 22-26 जून के बीच बरसात होगी। वहीं, अंडमान और निकोबार द्वीप में 20-26 जून, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल में 20 जून, गंगीय पश्चिम बंगाल में 20-21 जून, झारखंड में 22-26 जून, बिहार में 20-22 जून, 25-26 जून, ओडिशा में 22-24 जून को बारिश, आंधी तूफान चलेगा। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 20-26 जून को बारिश होगी। अरुणाचल प्रदेश में 20-24 जून, असम, मेघालय में 23-26 जून, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 20-23 जून में बहुत भारी बारिश होगी।

कुरनूल में गोल्ड रिजर्व मिलने की संभावना, जोन्नागिरी बना फोकस पॉइंट

आंध्र प्रदेश किसी भी देश की आर्थिक मजबूती में सोने का बड़ा योगदान होता है। भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में सोने के अकूत भंडार का पता चला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां 50 टन सोना हो सकता है। जानकारों का कहना है कि सोने का भंडार मिलने का अनुमान अगर सही साबित होता है तो आंध्र प्रदेश देश में सोने का सबसे बड़ा उत्पादक और सप्लायर राज्य बन सकता है। वहीं भारत को विदेश से कम सोना खरीदना पड़ेगा। चार जगहों पर होगा खनन आंध्र प्रदेश में खनन विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि जोन्नागिरी के साथ चार संभावित स्थलों को चिह्नित किया जा रहा है। रामागिरी, जव्वकुला औरचिगुरुकुंटा में खनन किया जाएगा। जोन्नागिरी पर सबसे ज्यादा सोना पाए जाने की संभावना है। अकेले इसी साइट पर 50 टन सोना मौजूद हो सकता है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी शोध किया जाएगा। जोन्नागिरी गांव में सोने का भंडार अधिकारियों के मुताबिक जोन्नागिरी गांव में पहले भी खनन के लिए 1500 एकड़ की भूमि आवंटित की गई थी। हालांकि 500 एकड़ में ही सोने की तलाशकी गई। बताया गया था कि इस जगह पर 13 टन सोना हो सकता है। अब बाकी की 1000 एकड़ जमीन पर सोना खोजने का काम जल्द ही शुरू हो जाएगा। कैसे निकाला जाता है सोना कीमती धातुओं के खनन के लिए विशेष तकनीक की जरूरत होती है। इसका टेंडर प्राइवेट कंपनियों को दिया जाता है। लगभग एक टन मटीरियल की जब प्रोसेसिंग की जाती है तो लगभग एक ग्राम सोना निकलता है। सोना समेत अन्य धातुएं अयस्क के रूप में मौजूद रहती हैं। अयस्क से सोने को अलग किया जाता है। सीएम चंद्रबाबू नायडू इसी महने जोन्नागिरी में खनन का उद्घाटन कर सकते हैं। भारत में कितने सोने का प्रोडक्शन वर्तमान में कर्नाटक में हुट्टी गोल्ड माइन्स से ही देश में सोने का उत्पादन हो रहा है। इससे हर साल करीब 1.5 टन सोना मिलता है। हालांकि देश में सोने की मांग और खपत बहुत है। हर साल भारत में 800 टन तक सोने की खपत होती है। साल 2000 में कर्नाटक में कोलार गोल्ड फील्ड्स बंद हो गई थीं। इसके बाद से घरेलू प्रोडक्शन भी कम हो गया था। जोन्नागिरी में अगर 50 टन सोना पाया जाता है तो इसकी कीमत 7500 से 9 हजार करोड़ तक हो सकती है। इससे राज्य सरकार को सबसे बड़ा फायदा मिलने वाला है।

सोमाली जेट और अल नीनो का असर, देश में 40% कम बारिश से हालात बिगड़े

नई दिल्ली  देश के सुदूर दक्षिणी छोर केरल में एक तो लेट से मानसून टकराया था। 1 जून को आने वाला यह मानसून इस बार 4 जून को आया। शुरुआत में इसकी रफ्तार मध्य भारत तक ठीक-ठाक रही, मगर जब तक यह ठीक से भिगोता हुआ आगे बढ़ता कि इसकी रफ्तार पर ब्रेक ही लग गया। इसके बाद तो इसके करीब-करीब गायब होने की बातें भी आईं। बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर करने के बाद यह मानसून अचानक लापता हो गया। अब पूरा उत्तर भारत मानसून का बेसब्री से बाट जोह रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात तक में लोग मानसून के स्वागत में खड़े हैं। 12 दिनों से तेलंगाना-महाराष्ट्र में अटका था मानसून ऐसी रिपोर्ट हैं कि महाराष्ट्र और तेलंगाना में यह मानसून बीते 12 दिनों से अटका हुआ था। मगर, अब इसके आगे बढ़ने की संभावना है। मानसून के लापता होने में सोमाली जेट भी एक बड़ा कारण है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सोमाली जेट के कमजोर विकास ने मानसून की रफ्तार को थाम दिया है। सोमाली जेट क्या होता है, जिसने बिगाड़ा मानसून का मूड     सोमाली जेट एक भूमध्यरेखीय वायु प्रणाली है, जो हिंद महासागर में अफ्रीका के पूर्वी तट के पास बनती है। भारतीय मानसून के लिए अहम सोमाली जेट को फाइंडलेटर जेट भी कहते हैं।     सोमाली जेट पूर्वी अफ्रीका में अपेक्षाकृत कम वर्षा का कारण बनता है। दरअसल सोमाली जेट एक निम्न-स्तरीय वायु प्रवाह है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून को भारत की ओर लाने में मदद करता है।     सोमाली जेट के कमजोर पड़ने से भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है।     बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव प्रणालियों का भी अभाव रहा है, जो आमतौर पर मानसून को अंदरूनी इलाकों तक खींचने में मददगार होती हैं।     इस बार अल नीनो की वजह से भी मानसून के कमजोर पड़ने की आशंका भी मौसम वैज्ञानिक बार-बार जता रहे हैं। 1 से 18 जून तक 40 फीसदी कम बारिश     मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से 18 जून के बीच देश में बारिश औसत से 40% कम रिकॉर्ड की गई है।     आमतौर पर 01 जून से 17 जून के बीच देश में औसतन 80.6 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल अब तक सिर्फ 48.5 मिलीमीटर बारिश हुई है।     मध्य भारत क्षेत्र में दर्ज की गई है, जहां 01 जून से 18 जून के बीच औसत से 63% कम बारिश दर्ज की गई है। 23 जून तक छत्तीसगढ़ पहुंचेगा भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 23 जून तक इसके छत्तीसगढ़ पहुंचने की संभावना है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून के लिए जरूरी सिस्टम सक्रिय हो गया है। मध्य भारत में बन रहा चक्रवातीय घेरा     इससे मध्य भारत में चक्रवातीय घेरा बना हुआ है, जिससे मानसून के बादल उत्तर भारत की तरफ आ सकते हैं। मानसून 15 दिन में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है, लेकिन 8 जून से तेलंगाना में अटका हुआ है।     इससे पहले बिहार में शुक्रवार को बिजली गिरने से 6 लोगों की और झारखंड में 8 लोगों की जान गई। राजस्थान के 12 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूरे महाराष्ट्र में हाहाकार मचा, खुले में रात बिता रहे लोग मानसून की इस बेरुखी की वजह से महाराष्ट्र में पानी को लेकर हाहाकार मचा है। पुणे में पानी की सप्लाई के लिए ऑड-इवन फॉर्मूला लागू किया गया है मुंबई में मारे गर्मी के लोग समुद्री तट के किनारे खुले में रात बिता रहे हैं। यहां 11 जून को ही मानसून मुंबई पहुंचने वाला था, मगर अभी तक इसका अता-पता नहीं है। इन राज्यों तक पहुंच चुका है मानसून मौसम विभाग के अनुसार, मानसून केरल, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, त्रिपुरा, असम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा तक पहुंच चुका है। 20 जून से 5 जुलाई के बीच इन राज्यों में मानसूनी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, मानसून अब छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में 20 जून से 5 जुलाई तक पहुंचेगा। मध्य और दक्षिण भारत में आंधी-तूफान, बंगाल में भारी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21 से 23 जून के बीच आंधी-तूफान और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, महाराष्ट्र के विदर्भ में 19 से 23 जून तक ऐसा ही मौसम रहने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ में भी 19 से 23 जून के बीच आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की आशंका है। मौसम का यह बदलाव सिर्फ मध्य भारत तक सीमित नहीं। तमिलनाडु और पुडुचेरी में 19 से 21 जून के बीच कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि केरल में भी 19 से 23 जून के बीच भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, बंगाल के कोलकाता, सिलिगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में शनिवार को भी भारी बारिश हुई। दार्जिलिंग में बालासन नदी उफान पर आ गई। इससे नदी पर ह्यूम पाइप से बना पुल टूट कर बह गया। मानसून की कमी के बीच पारा 40 डिग्री के पार     मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई शहरों में बुधवार को पारा 40°C से ज्यादा रहा। देश में सबसे ज्यादा पारा उत्तर प्रदेश के बांदा में 44.2°C दर्ज किया गया।     वहीं यूपी के प्रयागराज में 43.6°C, एमपी के खजुराहो 42.4°C, महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी में 42.1°C, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 42°C, बिहार के छपरा में 41.8°C और झारखंड के डाल्टनगंज में 40°C रहा। 21 और 22 जून को क्या होगी बारिश     21 जून को बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश की संभावना है। बिहार में कुछ जगहों पर 50-70kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।     असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।     राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। कई इलाकों में 40-60kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। … Read more

जेफरीज रिपोर्ट: ग्लोबल मार्केट पर बदले हालात, ईरान की बढ़ी ताकत

नई दिल्‍ली  हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान सीजफायर फ्रेमवर्क से ईरान को सबसे ज्‍यादा फायदा हुआ है। जेफरीज की हालिया 'ग्रीड एंड फियर' रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इसके अनुसार, प्रस्तावित समझौता जियोपॉलिटिकल हालात में एक बड़ा बदलाव है। इसके ग्लोबल मार्केट पर दूरगामी असर हो सकते हैं। ईरान मार ले गया मैदान रिपोर्ट के मुताबिक, इस ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी करने की बात कही गई है। साथ ही लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंधों को हटाए जाने की भी संभावना है। बातचीत औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ही आधी रकम मिलने की उम्‍मीद है। जेफरीज ने इस घटनाक्रम को इस बात का संकेत बताया है कि बातचीत में तेहरान का पलड़ा भारी रहा है। ट्रंप को ऐसे हुआ नुकसान ब्रोकरेज के अनुसार, यह युद्धविराम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़ते राजनीतिक दबाव को भी दिखाता है। उनकी अप्रूवल रेटिंग काफी कम हो गई है। रिपोर्ट में बताए गए रॉयटर्स/इप्सोस सर्वे में 62% लोगों ने उन्हें नापसंद किया। वहीं, 63% लोगों ने अर्थव्यवस्था को संभालने के उनके तरीके को नापसंद किया। मार्केट के नजरिए से जेफरीज का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला सीजफायर और तेल की कम कीमतें अमेरिका के बाहर के मार्केट, खासकर साइक्लिकल सेक्टर में बेहतर परफॉर्मेंस में मदद कर सकती हैं। इन चार बड़ी कंपनियों की बल्‍ले-बल्‍ले रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश की भारी तेजी पर भी जोर दिया गया है। अमेरिका की चार बड़ी हाइपरस्केलर कंपनियों का कैपिटल एक्सपेंडिचर 2026 में 680 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह AI की होड़ की तीव्रता को दिखाता है। इन कंपनियों में अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और मेटा शामिल हैं। जापान में बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरें बढ़ाकर 1% कर दी हैं। ये तीन दशकों से ज्‍यादा समय में सबसे ज्‍यादा स्तर है। यील्ड बढ़ने के बावजूद जेफरीज का मानना है कि बेहतर होती नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ और महंगाई की स्थिति के कारण जापानी इक्विटी सरकारी बॉन्ड की तुलना में काफी ज्‍यादा आकर्षक बनी हुई है। अमेरिका में महंगाई की बढ़ती चिंता ब्रोकरेज के अनुसार, अमेरिका में महंगाई के जोखिमों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। मनी मार्केट अब 2026 के अंत तक ब्याज दरों में लगभग 0.36 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। यह इस चिंता को दिखाती है कि महंगाई पहले की उम्मीद से ज्‍यादा समय तक बनी रह सकती है। जेफरीज का तर्क है कि बॉन्ड यील्ड का बढ़ना निवेशकों के लिए मुख्य जोखिमों में से एक बना हुआ है। साथ ही, कॉर्पोरेट कमाई की उम्मीदें भी मजबूत बनी हुई हैं। आम सहमति वाले अनुमानों के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में एसएंडपी 500 की कमाई में साल-दर-साल 22.8 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसमें टेक्नोलॉजी कंपनियां इस बढ़त में सबसे आगे रहेंगी। इमर्जिंग मार्केट्स कंपनियों में कुछ को प्रॉफिट हालांकि, जेफरीज को इक्विटी मार्केट में सट्टेबाजी के बढ़ते संकेत दिख रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले साल MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में शामिल सिर्फ 24.6% शेयरों ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। यह एक रिकॉर्ड निचला स्तर है जो बताता है कि मार्केट का नेतृत्व कुछ ही शेयरों तक सीमित होता जा रहा है। रिपोर्ट में स्‍पेसएक्‍स को लेकर दिख रहे जबरदस्त उत्साह का भी जिक्र किया गया है। हाल ही में लॉन्च किए गए 11 लेवरेज्ड स्‍पेसक्‍स एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने सिर्फ तीन दिनों में 8.2 अरब डॉलर का ट्रेडिंग वॉल्यूम हासिल किया। वहीं, उनके पास मौजूद एसेट्स की कीमत सिर्फ 63.8 करोड़ डॉलर थी। जेफरीज इस घटनाक्रम को आम निवेशकों की तरफ से सट्टेबाजी के बढ़ते जोश का एक और संकेत मानता है। इजरायल रह गया खाली हाथ इजरायल का रिपोर्ट में जिक्र नहीं है। लेकिन, वह खाली हाथ ही रहा है। युद्धविराम से इजरायल नाराज है। ऐसा होने का मुख्य कारण यह है कि इस पूरी बातचीत में इजरायल को पूरी तरह साइडलाइन कर दिया गया। इससे उसके प्रमुख सुरक्षा हित दांव पर लग गए हैं। इजरायल का मानना है कि इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करने और लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह व गाजा में हमास जैसे ईरान-समर्थित सशस्त्र समूहों के खतरों को खत्म करने का कोई ठोस रोडमैप नहीं है। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन की ओर से तय की गई शर्तों के तहत दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी की मांग ने इजरायल के भीतर राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर भारी असंतोष पैदा कर दिया है। उसे डर है कि युद्ध रुकने से उसके दुश्मनों को फिर से मजबूत होने का मौका मिल जाएगा। चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था इस बीच, चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था संघर्ष कर रही है। रिटेल बिक्री कमजोर हुई है। क्रेडिट ग्रोथ धीमी है। प्रॉपर्टी में निवेश पर दबाव बना हुआ है। फिर भी निर्यात खासकर सेमीकंडक्टर शिपमेंट में तेजी से बढ़ोतरी जारी है। इससे आर्थिक तस्वीर काफी असमान होती जा रही है। कुल मिलाकर, जेफरीज का मानना है कि निवेशक एक ऐसी दुनिया में काम कर रहे हैं जो भू-राजनीतिक अनिश्चितता, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और AI-आधारित बाजार तेजी से आकार ले रही है। यह तेजी कुछ ही क्षेत्रों या शेयरों तक सीमित होती जा रही है।

घोड़ों की उत्पत्ति पर बदली वैज्ञानिक समझ, चीन से मिला बड़ा सबूत

बीजिंग  घोड़ों के विकास के इतिहास को एक नई फॉसिल DNA स्टडी ने बदल दिया है। इस स्टडी से पता चला है कि उत्तर-पूर्वी चीन का विलुप्त हो चुका 'डालियन घोड़ा' (Dalian horse) उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया के बीच जेनेटिक कड़ी का काम करता था। सबसे पहले कहां पाए गए घोड़े? सालों से एक बात मानी जा रही है कि घोड़े यूरोप से अमेरिका लाए गए थे। उन्हें स्पेनिश विजेताओं ने अमेरिका पहुंचाया और वहां के मूल निवासियों को एक ऐसे जीव से चौंका दिया था जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। लेकिन हाल की जीनोमिक रिसर्च ने इस कहानी को पूरी तरह से बदल दिया है। घोड़ों की उत्पत्ति लाखों साल पहले उत्तरी अमेरिका में हुई थी और वे चीन में मौजूद एक आश्चर्यजनक जेनेटिक कड़ी की वजह से ही यूरोप तक पहुंच पाए। डालियन घोड़ा (Dalian Horse) 'स्टेट की लेबोरेटरी ऑफ जियोमाइक्रोबायोलॉजी एंड एनवायर्नमेंटल चेंजेज' के शोधकर्ताओं के मुताबिक, डालियन घोड़ा – जिसे कभी उत्तर-पूर्वी चीन तक सीमित एक स्थानीय अनोखा जीव माना जाता था, उसमें अमेरिका से जुड़ी खास जेनेटिक खूबियां पाई गई थीं। उसने ये खूबियां साइबेरिया में घोड़ों की प्राचीन आबादी तक पहुंचाईं। इस जीन प्रवाह (gene flow) का मतलब है कि जिन वंश-परंपराओं से बाद में आधुनिक यूरोपीय घोड़े बने, उन्हें अपनी अमेरिकी जड़ें इसी चीनी घोड़े से मिलीं। घोड़ों ने तय किया 50,000 साल का सफर इक्वीड्स (घोड़े के परिवार के जीव) की उत्पत्ति शुरुआती इओसीन काल में उत्तरी अमेरिका में हुई थी। 'इक्वस' (Equus) जीनस, जो सबसे पहले करीब 4 से 5 मिलियन साल पहले सामने आया था, एकमात्र जीवित वंश है जिसमें सभी आधुनिक घोड़े, गधे और जेबरा शामिल हैं। फॉसिल रिकॉर्ड्स के मुताबिक, 'इक्वस' करीब 2.6 मिलियन साल पहले बेरिंग लैंड ब्रिज के जरिए उत्तरी अमेरिका से यूरेशिया में फैला और फिर उसमें बड़े पैमाने पर विकासवादी विविधता आई। विलुप्त हो गया डालियन घोड़ा स्टेबल आइसोटोप एनालिसिस से पता चला कि डालियान घोड़ा खास तरह की घास खाने वाला जानवर था। जब लगभग 40,000 साल पहले माहौल बदला और नमी बढ़ गई, जिससे सूखे घास के मैदानों की जगह पीट-लैंड और वेट-लैंड (दलदली और गीली जमीन) ने ले ली, तो सीमित खान-पान की वजह से यह खुद को ढाल नहीं पाया। डालियान घोड़े के बड़े शरीर और सीमित इकोलॉजिकल प्लास्टिसिटी (पर्यावरण के हिसाब से खुद को बदलने की सीमित क्षमता) की वजह से वग अच्छी क्वालिटी का चारा खत्म होने पर जिंदा नहीं रह सका। विलुप्त होने का यह पैटर्न उस दौर के दूसरे बड़े शाकाहारी जानवरों, जैसे उत्तरी अमेरिकी घोड़े और विशाल ऊंट, जैसा ही है।