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छत्तीसगढ़ के बांध में नाव हादसा, 9 लोग थे सवार; 3 ग्रामीणों की तलाश में जुटी टीमें

सूरजपुर. छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां 9 ग्रामीणों से भरी नाव बतरा बांध में पलट गई। 6 लोगों ने तैरकर जान बचा ली मगर 3 ग्रामीण लापता हो गए हैं। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरु कर दिया है। दरअसल, यह पूरा मामला करंजी चौकी क्षेत्र के बतरा इलाके का है। बताया जा रहा है कि प्रतिबंध के बाद भी सोमवार की रात अंधेरे में 9 लोग मछली पकड़ने के लिए बांध में गए थे। इस दौरान उनकी नाव पलट गई। घटना के बाद 6 लोगों ने किसी तरह से तैरकर अपनी जान तो बचा ली, मगर 3 लोग लापता हो गए। रेस्क्यू अभियान जारी इसके बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की टीम के साथ मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान में जुट गई है।

भारत को लगा बड़ा झटका: चोटिल नीतीश रेड्डी आयरलैंड सीरीज से बाहर, इंग्लैंड दौरे पर भी सस्पेंस

 नई दिल्ली भारतीय टीम जब इंग्लैंड और आयरलैंड के चुनौतीपूर्ण दौरे की तैयारियों में जुटी है, तभी एक और चोट ने उसकी योजनाओं को झटका दे दिया है. युवा ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी चोटिल होकर आयरलैंड टी20 सीरीज से बाहर हो गए हैं और अब उनके इंग्लैंड दौरे के बड़े हिस्से से भी दूर रहने की आशंका है।  नीतीश को हालिया अफगानिस्तान वनडे सीरीज के दौरान बाएं पैर की क्वाड्रिसेप्स (जांघ की मांसपेशी) में चोट लगी थी. शुरुआत में इसे सामान्य समस्या माना गया था, लेकिन एमआरआई रिपोर्ट ने तस्वीर बदल दी. मेडिकल जांच में मांसपेशी में सूजन और फाइबर डैमेज सामने आया है, जिसके बाद उन्हें आगे के मूल्यांकन और रिहैबिलिटेशन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) बुलाया गया है।  सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनकी रिकवरी में कम से कम चार सप्ताह लग सकते हैं. इसके बाद ही वह 'रिटर्न टू प्ले' प्रक्रिया शुरू कर पाएंगे. ऐसे में आयरलैंड सीरीज तो लगभग हाथ से निकल चुकी है, जबकि इंग्लैंड दौरे में उनकी उपलब्धता भी संदेह के घेरे में है. आयरलैंड में 2 मुकाबले होेंगे, पहला टी20 26 जून और दूसरा 28 जून को खेला जाएगा।  हार्दिक के विकल्प के तौर पर देखे जा रहे थे नीतीश नीतीश की चोट ऐसे समय आई है जब टीम पहले से ही हार्दिक पंड्या की फिटनेस को लेकर सतर्क है. हार्दिक भी क्वाड्रिसेप्स की समस्या से जूझ रहे हैं और फिलहाल वनडे क्रिकेट में पूरे 10 ओवर फेंकने की स्थिति में नहीं हैं।  यही वजह थी कि टीम मैनेजमेंट नीतीश रेड्डी को एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में देख रहा था जो बल्लेबाजी के साथ तेज गेंदबाजी में भी योगदान दे सके. लेकिन अब दोनों प्रमुख पेस-बॉलिंग ऑलराउंडरों की फिटनेस चिंता का विषय बन गई है।  रफ्तार बढ़ी, लेकिन शरीर ने दिया जवाब? क्रिकेट जगत में चर्चा है कि तेज गेंदबाजी कोच स्टेफन जोन्स के साथ काम करने के बाद नीतीश की रफ्तार काफी बढ़ी है. पहले वह करीब 125-128 किमी प्रति घंटे की गति से गेंदबाजी करते थे, लेकिन हाल के महीनों में उनकी स्पीड 130-135 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गई।  कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि गेंदबाजी की रफ्तार बढ़ने पर शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. ऐसे बदलावों के साथ तालमेल बिठाने में समय लगता है और इस दौरान चोट का खतरा भी बढ़ सकता है. हालांकि नीतीश की चोट का कारण यही है, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।  करियर के शुरुआती दौर में बड़ा इम्तिहान महज 23 साल के नीतीश अब तक भारत के लिए 10 टेस्ट, 6 वनडे और 4 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं. अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में उन्होंने दो वनडे खेले थे, जबकि दूसरा मैच चोट के कारण नहीं खेल पाए थे।  युवा ऑलराउंडर ने पिछले एक साल में तेजी से अपनी पहचान बनाई है, लेकिन अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती मैदान पर वापसी की है. भारतीय टीम को उम्मीद होगी कि यह चोट लंबी न खिंचे, क्योंकि आने वाले महीनों में टीम को ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत होगी जो बल्ले और गेंद दोनों से मैच का रुख बदल सकें। 

बेअदबी के तीन मामलों में बड़ा फैसला: पंजाब सरकार ने बदली SIT, DIG हरजीत सिंह बने प्रमुख

चंडीगढ़  आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने वर्ष 2015 के तीन आपस में जुड़े बेअदबी मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) का पुनर्गठन कर दिया है।सरकार ने बठिंडा रेंज के डीआईजी हरजीत सिंह को नई एसआईटी का चेयरमैन नियुक्त किया है। माना जा रहा है कि सरकार इन संवेदनशील मामलों की जांच को तेज गति से आगे बढ़ाना चाहती है। पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन द्वारा 1 जून को जारी आदेशों के अनुसार, मलैरकोटला के एसएसपी गुरमीत सिंह, अमृतसर के एडीसीपी (स्पेशल ब्रांच) हरपाल सिंह और संगरूर (ग्रामीण) के डीएसपी दलबीर सिंह को भी एसआईटी में सदस्य बनाया गया है। आदेश में टीम को जांच जल्द से जल्द पूरी करने और लंबित बिंदुओं पर तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब हरजीत सिंह को हाल ही में अक्टूबर 2015 के बहबल कलां पुलिस फायरिंग मामलों की जांच कर रही अलग एसआईटी में भी सदस्य नियुक्त किया गया है। इससे साफ है कि राज्य सरकार 2015 से जुड़े चर्चित मामलों की जांच में अनुभवी अधिकारियों पर भरोसा जता रही है। 10 जून को फायरिंग मामले की जांच टीम से जुड़ने के एक दिन बाद हरजीत सिंह ने पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह का बयान दर्ज किया था। यह बयान शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल द्वारा “गुनाह कबूलने” से जुड़े घटनाक्रम के संदर्भ में लिया गया। गौरतलब है कि सुखबीर सिंह बादल 2 दिसंबर 2024 को अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए थे और पार्टी व अपनी सरकार से हुई “सभी गलतियों” के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी। अब पुनर्गठित एसआईटी की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं।

बस्तर के छात्रों ने बढ़ाया जिले का मान, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति परीक्षा में प्रदेश में तीसरे नंबर पर

बस्तर. राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति परीक्षा 2025-26 में बस्तर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है. पिछले वर्ष जहां केवल दो विद्यार्थियों का चयन हुआ था, इस बार संख्या बढ़कर 177 पहुंच गई. यह उपलब्धि जिले की शैक्षणिक रणनीति और सतत तैयारी का बड़ा परिणाम मानी जा रही है. बकावंड ब्लॉक ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए अकेले 130 विद्यार्थियों का चयन कराया. वहीं लोहंडीगुड़ा ब्लॉक से भी 37 विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की. छात्रों को परीक्षा से पहले ओएमआर आधारित मॉक टेस्ट और नियमित अभ्यास कराया गया. पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के विश्लेषण और विशेष प्रशिक्षण का भी लाभ मिला. डिजिटल माध्यमों और समूह प्रशिक्षण ने तैयारी को और मजबूत बनाया. चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा. जिले की इस सफलता ने ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाई है. अब शिक्षा विभाग इस मॉडल को आगे भी जारी रखने की तैयारी में है.

PM मोदी बोले- जहां कभी आतंक का साया था, वहां आज विकास, विश्वास और अवसरों का नया दौर

जहां कभी आतंक और भय का माहौल था, वहां आज विकास, विश्वास और अवसरों का नया दौर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘नेशन फर्स्ट’ संकल्प और सुरक्षा बलों के शौर्य से बस्तर में लौटी शांति और विकास की नई रोशनी  – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर,   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ देश की लड़ाई को विकास और जनविश्वास की विजय बताते हुए कहा है कि सरकार ने नक्सलवाद और माओवाद को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया था और आज उसके सकारात्मक परिणाम पूरे देश के सामने हैं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी भय, हिंसा और अविश्वास का वातावरण था, वहां आज विकास, सुशासन और नई संभावनाओं का युग प्रारंभ हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक समय नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य नागरिक निरंतर भय के साये में जीवन जीने को मजबूर थे। लोगों को अपनी सुरक्षा, आजीविका और सम्मान की चिंता रहती थी। विकास कार्यों को आगे बढ़ाना अत्यंत कठिन था। सड़क निर्माण से लेकर संचार सुविधाओं के विस्तार तक हर प्रयास का हिंसक विरोध किया जाता था। कई बार निर्माण सामग्री को जला दिया जाता था, ठेकेदारों को धमकाकर भगा दिया जाता था और विकास कार्यों को रोकने की कोशिश की जाती थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। बीते वर्षों में हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया, हजारों मोबाइल टावर स्थापित किए गए और दूरस्थ गांवों तक संचार सुविधाएं पहुंचाई गईं। बैंकिंग सेवाओं, डाक सेवाओं और वित्तीय समावेशन के माध्यम से लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल आधारभूत संरचनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में विश्वास और अवसरों का विस्तार है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल बम, बंदूक और गोली के सहारे नहीं लड़ी गई। सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ जनसामान्य की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने पर भी समान रूप से ध्यान दिया। शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, गरीबों को अधिकार दिलाने और लोकतंत्र के प्रति विश्वास मजबूत करने के निरंतर प्रयास किए गए। इसी का परिणाम है कि आज नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आमजन का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की प्रक्रिया में बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां कभी आतंक और हिंसा का माहौल था, वहां आज युवाओं की ऊर्जा खेल और प्रतिभा के माध्यम से सामने आ रही है। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों में लाखों युवाओं की भागीदारी इस परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है। यह दर्शाता है कि अब वहां के युवा हिंसा के रास्ते को नहीं, बल्कि अवसर, शिक्षा, खेल और विकास के मार्ग को अपना रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘नेशन फर्स्ट’ संकल्प, दूरदर्शी नेतृत्व और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस ने बस्तर सहित पूरे नक्सल प्रभावित क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां कभी नक्सलवाद का आतंक था, वहां आज विकास का आत्मविश्वास दिखाई देता है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, बैंकिंग और जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच ने लोगों के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन लाया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, सुरक्षा बलों की वीरता तथा स्थानीय जनता के सहयोग से नक्सलवाद का अध्याय अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान हिंसा नहीं, बल्कि विकास, जनभागीदारी, खेल, पर्यटन और नई संभावनाओं से बन रही है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन और अंत्योदय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़  विकास और सुशासन का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा तथा बस्तर देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में अपनी पहचान स्थापित करेगा।

राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना पर राज्य स्तरीय कार्यशाला 25 जून को, शिक्षा विभाग की बड़ी पहल

राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय कार्यशाला 25 जून को राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा भोपाल में किया जाएगा कार्यशाला का आयोजन योजना के प्रभावी संचालन, छात्रवृत्ति चयन प्रक्रिया, मॉनिटरिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से की जाएगी चर्चा, दिया जाएगा प्रशिक्षण भोपाल  प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा राज्य स्तरीय कार्याशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला 25 जून को पलाश रेसीडेन्सी भोपाल में होगी। इसमें राज्य शिक्षा केंद्र के संबंधित अधिकारी, कर्मचारी और सभी जिलों के नोडल अधिकारी तथा उनके सहायक शामिल होंगे। कार्यशाला में योजना के प्रभावी संचालन, छात्रवृत्ति चयन प्रक्रिया, मॉनिटरिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल NSP पर नवीन/ नवीनीकरण पंजीयन से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार के सीनियर कन्सलटेंट राघवेन्द्र खरे उपस्थित सहभागियों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संचालित है राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत भारत सरकार स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग नई दिल्ली द्वारा चयन परीक्षा में पात्र छात्रों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रतिवर्ष 12000 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। भारत सरकार द्वारा छात्रवृत्ति की राशि सीधे हितग्राही छात्र के खाते में भेजी जाती है। राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना राज्य के शासकीय, अनुदान प्राप्त एवं नगरीय निकायों के विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 8वीं के आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाती है। योजना का लाभ पाने के लिए छात्र को विगत वर्ष कक्षा 7वीं में न्यूनतम ‘सी’ ग्रेड से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही, अभिभावक की सकल वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। राज्य के लिए निर्धारित कोटा में मेरिट सूची के अनुसार प्रतिवर्ष मध्यप्रदेश के 6 हजार 446 विद्यार्थियों का चयन इस छात्रवृत्ति के लिए किया जाता है।  

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की नई सुविधा: 1912 पर करें कॉल, स्मार्ट मीटर की हर समस्या होगी दूर

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को विशेष सुविधा अब बिल, मीटर और इंस्टॉलेशन से जुड़ी दिक्कतों का 1912 पर घर बैठे होगा समाधान भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के जिलों में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की सुविधा और उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी द्वारा कार्यक्षेत्र में लगाए जा रहे आधुनिक स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर विशेष शिकायत दर्ज करने की सुविधा शुरू की गई है। अब उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से जुड़ी किसी भी शिकायत के लिए सीधे इस नंबर पर संपर्क कर निराकरण करा सकते हैं। इन शिकायतों का होगा निराकरण कंपनी द्वारा शुरू की गई इस सुविधा के अंतर्गत स्मार्ट मीटर उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1912 पर कॉल करके स्मार्ट मीटर का अनुचित तरीके से इंस्टॉलेशन होना, स्मार्ट मीटर का जल जाना, डिस्प्ले बंद होना या मीटर का क्षतिग्रस्त होना, मासिक बिजली बिल का जनरेट न होना, गलत बिल जनरेशन की समस्या, बिल में एक्सपोर्ट यूनिट्स का गलत दर्ज होना, मीटर की तेज रिकॉर्डिंग के कारण बिजली का अधिक बिल आने संबंधी शिकायत, 'उपाय' (Upay) ऐप में स्मार्ट मीटर का डाटा गलत दिखना या प्रदर्शित न होना, बिजली बिल में मीटर का गलत सीरियल नंबर अंकित होना, नए स्मार्ट मीटर की स्थापना के समय प्रारंभिक (शुरुआती) रीडिंग में विसंगति होना, सोलर/नेट मीटर में परिवर्तित न होना, बिल भुगतान करने के बाद भी बिजली का रीकनेक्शन न किया जाना, नए स्मार्ट मीटर की स्थापना के समय पुराने मीटर की आखिरी रीडिंग गलत दर्ज होना तथा चेक मीटर लगाने का अनुरोध करना या अनुरोध के बावजूद चेक मीटर इंस्टॉल न होने संबंधी शिकायतों का निराकरण करा सकेंगे। स्मार्ट मीटर पूरी तरह सुरक्षित और सटीक मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने बताया है कि स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं, सटीक बिलिंग और ऊर्जा दक्षता में सुधार हो रहा है। स्मार्ट मीटर लगाने का काम समय सीमा में पूर्ण करने के लिए कंपनी की टीमें लगातार कार्य में जुटी हुई हैं। यदि किसी उपभोक्ता को मीटर की कार्यप्रणाली, बिलिंग या इंस्टॉलेशन को लेकर कोई भी शंका या समस्या है, तो वे बिना किसी झिझक के टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल कर सकते हैं। कॉल सेंटर पर शिकायत दर्ज होते ही संबंधित तकनीकी टीम द्वारा प्राथमिकता के आधार पर समस्या का जल्द से जल्द निराकरण किया जाएगा  

महिला आयोग की जनसुनवाई में AI के दुरुपयोग के गंभीर मामले उजागर, बढ़ी चिंता

महिला आयोग की जनसुनवाई में सामने आए एआई के दुरुपयोग के गंभीर मामले शादी का झांसा और ब्लैकमेलिंग पर आयोग सख्त भोपाल देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते डिजिटल और पारंपरिक अपराधों के बीच, मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की संयुक्त बेंच (जनसुनवाई) में सोमवार को कुछ ऐसे गंभीर मामले सामने आए जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव एवं सदस्य श्रीमती साधना स्थापक की अगुवाई में कुल 22 प्रकरणों की त्वरित सुनवाई की गई। जनसुनवाई में जहाँ एक तरफ घरेलू हिंसा के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए, वहीं दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग और यौन शोषण के मामलों ने आयोग का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। आयोग ने सभी मामलों को बेहद संजीदगी से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल और निष्पक्ष वैधानिक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। वैवाहिक साइट से संपर्क, रिश्ता टूटने पर ए आई से बनाईं अश्लील व भ्रामक तस्वीरें तकनीक के जरिए महिलाओं को निशाना बनाने का एक बेहद संवेदनशील और आधुनिक मामला इस जनसुनवाई का मुख्य केंद्र रहा। एक पीड़ित युवती ने आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि वैवाहिक वेबसाइट (Matrimonial Website) के माध्यम से एक युवक और उसके परिवार से शादी की बातचीत आगे बढ़ी थी। हालांकि, किसी कारणवश जब युवती के परिवार ने इस रिश्ते को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया, तो युवक ने प्रतिशोध की भावना से सोशल मीडिया पर उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से युवती की फर्जी शादी, गोदभराई और अन्य भ्रामक तस्वीरें तैयार कीं और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया। युवती की सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने के इस सुनियोजित प्रयास को देखते हुए महिला आयोग ने इसे एक गंभीर साइबर अपराध माना और मामले को त्वरित जांच एवं कठोर कार्रवाई के लिए तुरंत साइबर सेल (साइबर वेलनेस सेंटर) को प्रेषित कर दिया है। महिला आयोग की संयुक्त बेंच के समक्ष सोमवार को जनसुनवाई में एक पीड़िता ने लिखित शिकायत के माध्यम से आयोग को अवगत कराया कि एक युवक द्वारा पूर्व में विवाह का झूठा आश्वासन देकर उसका शोषण किया गया तथा उसके साथ निरंतर मारपीट व प्रताड़ना की जाने लगी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि इस कृत्य में अनावेदक की माता भी संलिप्त रही, जिसने दोनों का विवाह संपन्न कराने का भरोसा देते हुए पीड़िता से छलपूर्वक एक बड़ी धनराशि प्राप्त कर ली और राशि प्राप्त करने के उपरांत विवाह से साफ इनकार करते हुए पीड़िता को प्रताड़ित किया जाने लगा अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव एवं सदस्य श्रीमती साधना स्थापक ने इस मामले को प्राथमिक रूप से अत्यंत गंभीर मानते हुए संबंधित थाना प्रभारी को अनावेदक एवं उसके परिजन के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के अंतर्गत तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। कथित पत्रकार द्वारा सोशल मीडिया पर नर्स का मानसिक उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग एक अन्य प्रकरण में समाज में रसूख का धौंस देकर महिलाओं को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया। अस्पताल में कार्यरत एक महिला नर्स ने खुद को पत्रकार बताने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार मानसिक उत्पीड़न करने की शिकायत दर्ज कराई। नर्स का आरोप था कि उक्त आरोपी उसके विरुद्ध फर्जी वीडियो और झूठी, भ्रामक खबरें प्रसारित कर समाज में उसकी छवि को पूरी तरह खराब करने का प्रयास कर रहा था। हद तो तब हो गई जब आरोपी ने महिला आयोग के वैधानिक अस्तित्व के संबंध में भी सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और धमकीपूर्ण बातें कहीं। आयोग के सख्त रवैये और कड़े निर्देश के बाद दोनों पक्षों को संयुक्त बेंच के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित कराया गया और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का रोडमैप तैयार किया गया। सुनवाई के दौरान आयोग परिसर में ही 'स्काई सोशल एनजीओ' द्वारा एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सहायता उपलब्ध कराना था। संस्था के अनुभवी और प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों तथा परामर्शदाताओं ने हिंसा, गंभीर उत्पीड़न, पारिवारिक विवाद, परित्याग और गहरे भावनात्मक तनाव से प्रभावित महिलाओं की काउंसिलिंग की। उन्हें इस कठिन दौर से उबरने के लिए भावनात्मक संबल और 'ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड' मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान की गई, जिससे महिलाएं मानसिक रूप से सशक्त होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ सकें।  

मंगलवार को आदिरंग शिल्पकार महोत्सव के समापन समारोह में पहुंचेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आदिरंग शिल्पकार महोत्सव 2026 के समापन समारोह में मंगलवार को होंगे शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान मध्यप्रदेश (एनआईडी एमपी) एवं वन्या, जनजातीय कार्य विभाग, द्वारा एनआईडी मध्यप्रदेश परिसर, अचारपुरा, भोपाल में आयोजित 23 जून मंगलवार को आदिरंग शिल्पकार महोत्सव 2026 समापन समारोह में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव महोत्सव के दौरान जनजातीय शिल्पकारों द्वारा विकसित नवाचारपूर्ण उत्पादों एवं डिजाइन हस्तक्षेपों की प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। साथ ही शिल्पकारों, डिजाइन विशेषज्ञों और प्रतिभागियों से संवाद भी करेंगे। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समारोह में जनजातीय कला, शिल्प और आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों तथा डिजाइन आधारित नवाचारों की जानकारी दी जाएगी। पांच दिवसीय महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकार भाग लेंगे। भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के शिल्पकारों द्वारा अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। महोत्सव में आयोजित डिजाइन हस्तक्षेप कार्यशालाओं में शिल्पकारों ने एनआईडी मध्यप्रदेश के संकाय सदस्यों एवं छात्र स्वयं सेवकों के सहयोग से बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप नए उत्पाद विकसित किए हैं। समापन समारोह के अवसर पर इन कार्यशालाओं के दौरान विकसित उत्पादों और डिजाइन अवधारणाओं की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी शाम 5:30 बजे से आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी, जहां आगंतुक उत्पादों को देख सकेंगे। साथ ही, भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के शिल्पकारों द्वारा प्रदर्शित मूल कलाकृतियां एवं हस्तशिल्प उत्पाद खरीद के लिए उपलब्ध रहेंगे। आदिरंग शिल्पकार महोत्सव जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को व्यापक मंच प्रदान करने के साथ शिल्पकारों के लिए नए बाजार एवं आजीविका के अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एनआईडी मध्यप्रदेश और वन्या के संयुक्त प्रयास से आयोजित यह महोत्सव डिजाइन और परंपरा के समन्वय का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।  

छत्तीसगढ़ में मिला हीरों का खजाना! महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक से विकास को मिलेगी नई रफ्तार

महासमुंद के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में हीरों की प्राप्ति से छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगा नया आयाम प्रदेश में हीरा उद्योग, निवेश और रोजगार की संभावनाएं हुईं मजबूत वैज्ञानिक अन्वेषण की सफलता से खनिज क्षेत्र में खुलेंगे नए अवसर, राज्य को मिलेगा राजस्व एवं आर्थिक विकास का नया स्रोत खनिज संपदा की नई उपलब्धि से छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगा नया आयाम : मुख्यमंत्री रायपुर,   छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान हीरों की प्राप्ति ने प्रदेश को खनिज संपदा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा 200 टन बल्क सैंपल के परीक्षण एवं प्रसंस्करण के बाद कुल 5 हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट है। यह उपलब्धि क्षेत्र में हीरा खनिजीकरण की संभावनाओं की पुष्टि करती है तथा भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश, राजस्व सृजन और रोजगार के नए अवसरों का आधार बन सकती है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा राज्य शासन को उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण, स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय अध्ययन तथा अन्वेषण ड्रिलिंग के आधार पर चिन्हित क्षेत्र से लगभग 200 टन खनिज सामग्री का बल्क सैंपल एकत्रित कर परीक्षण किया गया। प्रसंस्करण के पश्चात प्राप्त पांच हीरों में दो जेम क्वालिटी तथा तीन अन्य श्रेणी के हीरे शामिल हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत उत्साहजनक बताते हुए कहा कि प्रदेश की आर्थिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी प्रबंधन और मूल्य संवर्धन आधारित औद्योगिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट तथा चूना पत्थर के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अब हीरा संभावनाओं की पुष्टि से प्रदेश की खनिज विविधता और अधिक समृद्ध होगी तथा खनिज अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नीति केवल खनिजों के उत्खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज आधारित उद्योगों, मूल्य संवर्धन इकाइयों और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। प्रदेश में खनिज संसाधनों के माध्यम से निवेश, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित कर विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए राज्य सरकार खनिज, कृषि, उद्योग, अधोसंरचना और मानव संसाधन विकास के सभी क्षेत्रों में समान रूप से कार्य कर रही है। बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र से प्राप्त यह सफलता प्रदेश की खनिज क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी तथा निवेश, रोजगार और समावेशी विकास के नए द्वार खोलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक अन्वेषण और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदेश के अन्य संभावित क्षेत्रों में भी खनिज संपदा की खोज को गति मिलेगी, जिससे छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक चरण में प्राप्त यह सफलता भविष्य के विस्तृत अन्वेषण कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत है। इससे क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना, संसाधन क्षमता और संभावित भंडारों के संबंध में व्यापक अध्ययन का मार्ग प्रशस्त होगा। आगामी सर्वेक्षणों एवं परीक्षणों से क्षेत्र की वास्तविक क्षमता का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में किए गए बल्क सैंपल परीक्षण के परिणामस्वरूप प्राप्त हीरों को सुरक्षित अभिरक्षा में एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में रखा गया है तथा आगे की कार्यवाही नियमानुसार और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप की जाएगी।