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नदियों का रास्ता बदलने से बढ़ी चिंता, अवैध खनन के बीच SYL मुद्दा फिर गरमाया

जालंधर. भाखड़ा बांध को लेकर फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। हालांकि सरकार और प्रशासन को मानसून के मद्देनजर सभी जरूरी तैयारियां समय रहते पूरी कर लेनी चाहिए। भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) द्वारा राज्यों से डैम का पानी लेने की अपील के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए इसे अलार्मिंग स्थिति नहीं कहा जा सकता। यह बात पंजाब सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर अमरजीत सिंह दुलेट ने कही। अमरजीत सिंह ने कहा कि इस समय भाखड़ा बांध का जलस्तर उसकी पूर्ण क्षमता से करीब 115 फीट नीचे है। ऐसे में तत्काल बड़े खतरे की आशंका नहीं है। बाढ़ जैसी परिस्थितियों से बचने के लिए जरूरी हालांकि बाढ़ जैसी परिस्थितियों से बचने के लिए यह जरूरी है कि हर वर्ष मानसून शुरू होने से पहले नालों, नहरों, नदियों और तटबंधों की सफाई व मरम्मत का कार्य पूरी तरह संपन्न कर लिया जाए। जून के अंत तक संबंधित विभागों से इन कार्यों का अंतिम प्रमाणपत्र भी प्राप्त हो जाना चाहिए। डैम को अधिक खाली रखने संबंधी सवाल पर दुलेट ने कहा कि बीबीएमबी की भूमिका केवल बाढ़ नियंत्रण तक सीमित नहीं है। उसका प्रमुख दायित्व जलविद्युत उत्पादन भी है। ऐसे में डैम को जरूरत से ज्यादा खाली रखना व्यावहारिक नहीं है। यदि भविष्य में पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ का पिघलना अपेक्षा से कम हुआ तो जल संकट की स्थिति भी पैदा हो सकती है। इसलिए जल प्रबंधन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। बीबीएमबी को संभावित परिस्थितियों के बारे में समय रहते राज्य सरकारों को सूचित करना चाहिए, ताकि प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त तैयारियां की जा सकें। पूर्व चीफ इंजीनियर ने नदियों में बढ़ती तबाही के पीछे अवैध और अनियंत्रित खनन को भी एक बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही माइनिंग के कारण कई नदियों ने अपना प्राकृतिक मार्ग बदल लिया है। इससे बाढ़ के दौरान पानी नए क्षेत्रों में फैलता है और नुकसान बढ़ जाता है। साथ ही अत्यधिक खनन से तटबंध कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे उनके टूटने का खतरा भी बढ़ जाता है। एसवाईएल पर नए सिरे से जल उपलब्धता का आकलन हो सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद पर दुलेट ने कहा कि यह मुद्दा पिछले चार दशकों से चला आ रहा है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। एसवाईएल की मूल नीति उस समय बनाई गई थी जब नदियों में पानी का प्रवाह आज की तुलना में काफी अधिक था। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और नदियों में इनफ्लो कम हुआ है। ऐसे में जल उपलब्धता का नए सिरे से वैज्ञानिक आकलन किया जाना चाहिए। यदि वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर आकलन किया जाए तो इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्वयं स्पष्ट हो जाएगी और समाधान का रास्ता भी आसान हो सकता है।

एम्बाप्पे का जलवा बरकरार! बारिश के बीच फ्रांस ने इराक को हराकर नॉकआउट में बनाई जगह

 फिलाडेल्फिया फीफा विश्व कप 2026 में फ्रांस ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए इराक को 3-0 से हरा दिया. इस जीत के साथ ही दो बार की चैम्पियन टीम फ्रांस ने नॉकआउट स्टेज में अपनी जगह पक्की कर ली. 23 जून (मंगलवार) को फिलाडेल्फिया के फिलाडेल्फिया स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में फ्रांस की जीत के हीरो स्टार फॉरवर्ड कीलियन एम्बाप्पे रहे, जिन्होंने दो गोल दागकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई. उस्मान डेम्बेले ने टीम के लिए तीसरा गोल दागा।  यह मुकाबला सिर्फ फ्रांस की जीत के लिए ही नहीं, बल्कि खराब मौसम के कारण भी चर्चा में रहा. पहले हाफ के बाद भारी बारिश और तूफान की चेतावनी के चलते मैच को दो घंटे से अधिक समय के लिए रोकना पड़ा, मैदान पर पानी भर गया था और ग्राउंड स्टाफ को खेल दोबारा शुरू कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. हालांकि लंबे इंतजार के बाद मुकाबला फिर शुरू हुआ और फ्रांस ने अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।  अपना 100वें अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे कीलियन एम्बाप्पे ने 14वें मिनट में गोल कर फ्रांस को शुरुआती बढ़त दिलाई. इसके बाद दूसरे हाफ में उन्होंने 54वें मिनट में एक और गोल दागकर स्कोर 2-0 कर दिया. इराक के डिफेंडर जैद तहसीन की गलती का फायदा उठाते हुए एम्बाप्पे ने यह गोल किया. बाद में उस्मान डेम्बेले ने भी गोल कर फ्रांस की जीत पर मुहर लगा दी।  ब्राजीली दिग्गज रोनाल्डो को पछाड़ा इस मैच में दो गोल करने के साथ ही कीलियन एम्बाप्पे ने विश्व कप में अपने कुल गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी. इसके साथ ही उन्होंने जर्मनी के दिग्गज मिरोस्लाव क्लोज की बराबरी कर ली, वहीं ब्राजील के महान स्ट्राइकर रोनाल्डो को पीछे छोड़ दिया. अब उनसे आगे केवल अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी हैं, जिनके नाम विश्व कप में 18 गोल दर्ज हैं।  फ्रांस को टूर्नामेंट जीतने के प्रबल दावेदारों में माना जा रहा है. 2018 में विश्व कप जीतने वाली और 2022 में फाइनल तक पहुंचने वाली फ्रांसीसी टीम इस बार भी खिताब की मजबूत दावेदार नजर आ रही है. कीलियन एम्बाप्पे, उस्मान डेम्बेले और डेसिरे डोए जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम को और खतरनाक बनाती है।  उधर, इराक के लिए यह मुकाबला कई मायनों में निराशाजनक रहा. टीम के स्टार स्ट्राइकर अयमेन हुसैन 26वें मिनट में चोटिल होकर मैदान से बाहर चले गए. उनकी जगह अली अल-हमदी को मैदान में उतारा गया. इराक विश्व कप में सिर्फ दूसरी बार खेल रहा है और अब उसके लिए आगे का सफर काफी मुश्किल हो गया है।  नॉर्वे भी अगले राउंड में उधर ग्रुप-I से फ्रांस के अलावा नॉर्वे ने भी नॉकआउट राउंड में जगह बना ली है. 23 जून (मंगलवार) को न्यू जर्सी के मेट लाइफ स्टेडियम में हुए मुकाबले में नॉर्वे ने सेनेगल को 3-2 से हराया. नॉर्वे के लिए एर्लिंग हालैंड ने दो गोल स्कोर किए. मार्कस पेडरसन ने भी एक गोल दागा. वहीं सेनेगल के लिए दोनों गोल इस्माइला सार ने किए। 

राष्ट्रपति भवन में शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान, परिवार ग्रहण करेगा

रांची  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित अलंकरण समारोह में दिशाेम गुरू शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान प्रदान करेंगी। उनकी पत्नी रूपी सोरेन यह सम्मान ग्रहण करेंगी। रूपी सोरेन अस्वस्थ हैं, फिर भी वह सम्मान लेने दिल्ली गई हैं। विधायक कल्पना सोरेन सोमवार को अपनी सास को लेकर दिल्ली गईं। अलंकरण समारोह में परिवार के अन्य सदस्य भी हो सम्मिलित हो सकते हैं। राज्य गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले शिबू सोरेन को देश का यह तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना झारखंड के लिए गौरव की बात है। उन्हें यह मरणोपरांत सम्मान लोक कल्याण और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण के लिए उनके आजीवन संघर्ष और योगदान को देखते हुए प्रदान किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने इसी वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने उन्हें यह सम्मान देने की घोषणा की थी। नशा छोड़ो, खेती करो, मुर्गी-बत्तख पालन करो और शिक्षा को गले लगाओ झारखंड के नायक दिशोम गुरू शिबू सोरेन नशे को विनाश का कारण मानते थे। उनके अधिसंख्य भाषण नशा छोड़ने, खेती तथा मुर्गी-बत्तख पालन करने तथा शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहते थे। नशे के खिलाफ उनकी कट्टर सोच, शिक्षा के प्रति प्रबल समर्थन और खेती-पशुपालन से आत्मनिर्भरता की उनकी अपील ने लाखों आदिवासियों का प्रेरणा स्रोत बन गया। उनके भाषणों ने लाखों आदिवासियों के जीवन की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। तभी तो उनका पूरा जीवन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष का पर्याय रहा। गुरूजी हमेशा कहते थे कि नशा आदिवासी समाज को खोखला कर रहा है। यह हमें कमजोर बनाता है, हमारी जमीन और सम्मान छीनता है। वे अपनी सभाओं में हमेशा कहते थे कि नौकरी के पीछे मत भागो। पशुपालन करो। उनका कहना था कि आदिवासी समाज की असली ताकत उसकी जमीन, संस्कृति और मेहनत है। झारखंड के कई गांवों में उनके अनुयायी आज भी खेती और पशुपालन को अपनाकर उनके बताए रास्तों पर चल रहे हैं। शिक्षा के संबंध में उनका कहना था कि शिक्षा ही वह चाबी है, जो आदिवासियों को शोषण से मुक्ति दिला सकती है। … जब उनकी अंत्येष्ठि में उमड़ा जनसैलाब, मिट गया था आम और खास का भेद दिशोम गुरू शिबू सोरेन की लोकप्रियता का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि उनकी अंत्येष्टि के मौके पर नेमरा में पूरा जनसैलाब उमड़ पड़ा था। क्या आम और क्या खास, लाखों लोग वहां पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने नम आंखों से उन्हें “अंतिम जोहार” किया था। पूरे झारखंड समेत पड़ोसी राज्यों से लोग अपने प्रियनेता को विदाई देने पहुंचे थे। माटी पुत्र को विदाई देते समय प्रकृृति भी रो पड़ी थी। लोग अपने प्रिय नेता की एक झलक पाने को उतावला दिखे।

छत्तीसगढ़ के बांध में नाव हादसा, 9 लोग थे सवार; 3 ग्रामीणों की तलाश में जुटी टीमें

सूरजपुर. छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां 9 ग्रामीणों से भरी नाव बतरा बांध में पलट गई। 6 लोगों ने तैरकर जान बचा ली मगर 3 ग्रामीण लापता हो गए हैं। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरु कर दिया है। दरअसल, यह पूरा मामला करंजी चौकी क्षेत्र के बतरा इलाके का है। बताया जा रहा है कि प्रतिबंध के बाद भी सोमवार की रात अंधेरे में 9 लोग मछली पकड़ने के लिए बांध में गए थे। इस दौरान उनकी नाव पलट गई। घटना के बाद 6 लोगों ने किसी तरह से तैरकर अपनी जान तो बचा ली, मगर 3 लोग लापता हो गए। रेस्क्यू अभियान जारी इसके बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की टीम के साथ मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान में जुट गई है।

भारत को लगा बड़ा झटका: चोटिल नीतीश रेड्डी आयरलैंड सीरीज से बाहर, इंग्लैंड दौरे पर भी सस्पेंस

 नई दिल्ली भारतीय टीम जब इंग्लैंड और आयरलैंड के चुनौतीपूर्ण दौरे की तैयारियों में जुटी है, तभी एक और चोट ने उसकी योजनाओं को झटका दे दिया है. युवा ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी चोटिल होकर आयरलैंड टी20 सीरीज से बाहर हो गए हैं और अब उनके इंग्लैंड दौरे के बड़े हिस्से से भी दूर रहने की आशंका है।  नीतीश को हालिया अफगानिस्तान वनडे सीरीज के दौरान बाएं पैर की क्वाड्रिसेप्स (जांघ की मांसपेशी) में चोट लगी थी. शुरुआत में इसे सामान्य समस्या माना गया था, लेकिन एमआरआई रिपोर्ट ने तस्वीर बदल दी. मेडिकल जांच में मांसपेशी में सूजन और फाइबर डैमेज सामने आया है, जिसके बाद उन्हें आगे के मूल्यांकन और रिहैबिलिटेशन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) बुलाया गया है।  सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनकी रिकवरी में कम से कम चार सप्ताह लग सकते हैं. इसके बाद ही वह 'रिटर्न टू प्ले' प्रक्रिया शुरू कर पाएंगे. ऐसे में आयरलैंड सीरीज तो लगभग हाथ से निकल चुकी है, जबकि इंग्लैंड दौरे में उनकी उपलब्धता भी संदेह के घेरे में है. आयरलैंड में 2 मुकाबले होेंगे, पहला टी20 26 जून और दूसरा 28 जून को खेला जाएगा।  हार्दिक के विकल्प के तौर पर देखे जा रहे थे नीतीश नीतीश की चोट ऐसे समय आई है जब टीम पहले से ही हार्दिक पंड्या की फिटनेस को लेकर सतर्क है. हार्दिक भी क्वाड्रिसेप्स की समस्या से जूझ रहे हैं और फिलहाल वनडे क्रिकेट में पूरे 10 ओवर फेंकने की स्थिति में नहीं हैं।  यही वजह थी कि टीम मैनेजमेंट नीतीश रेड्डी को एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में देख रहा था जो बल्लेबाजी के साथ तेज गेंदबाजी में भी योगदान दे सके. लेकिन अब दोनों प्रमुख पेस-बॉलिंग ऑलराउंडरों की फिटनेस चिंता का विषय बन गई है।  रफ्तार बढ़ी, लेकिन शरीर ने दिया जवाब? क्रिकेट जगत में चर्चा है कि तेज गेंदबाजी कोच स्टेफन जोन्स के साथ काम करने के बाद नीतीश की रफ्तार काफी बढ़ी है. पहले वह करीब 125-128 किमी प्रति घंटे की गति से गेंदबाजी करते थे, लेकिन हाल के महीनों में उनकी स्पीड 130-135 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गई।  कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि गेंदबाजी की रफ्तार बढ़ने पर शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. ऐसे बदलावों के साथ तालमेल बिठाने में समय लगता है और इस दौरान चोट का खतरा भी बढ़ सकता है. हालांकि नीतीश की चोट का कारण यही है, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।  करियर के शुरुआती दौर में बड़ा इम्तिहान महज 23 साल के नीतीश अब तक भारत के लिए 10 टेस्ट, 6 वनडे और 4 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं. अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में उन्होंने दो वनडे खेले थे, जबकि दूसरा मैच चोट के कारण नहीं खेल पाए थे।  युवा ऑलराउंडर ने पिछले एक साल में तेजी से अपनी पहचान बनाई है, लेकिन अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती मैदान पर वापसी की है. भारतीय टीम को उम्मीद होगी कि यह चोट लंबी न खिंचे, क्योंकि आने वाले महीनों में टीम को ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत होगी जो बल्ले और गेंद दोनों से मैच का रुख बदल सकें। 

बेअदबी के तीन मामलों में बड़ा फैसला: पंजाब सरकार ने बदली SIT, DIG हरजीत सिंह बने प्रमुख

चंडीगढ़  आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने वर्ष 2015 के तीन आपस में जुड़े बेअदबी मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) का पुनर्गठन कर दिया है।सरकार ने बठिंडा रेंज के डीआईजी हरजीत सिंह को नई एसआईटी का चेयरमैन नियुक्त किया है। माना जा रहा है कि सरकार इन संवेदनशील मामलों की जांच को तेज गति से आगे बढ़ाना चाहती है। पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन द्वारा 1 जून को जारी आदेशों के अनुसार, मलैरकोटला के एसएसपी गुरमीत सिंह, अमृतसर के एडीसीपी (स्पेशल ब्रांच) हरपाल सिंह और संगरूर (ग्रामीण) के डीएसपी दलबीर सिंह को भी एसआईटी में सदस्य बनाया गया है। आदेश में टीम को जांच जल्द से जल्द पूरी करने और लंबित बिंदुओं पर तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब हरजीत सिंह को हाल ही में अक्टूबर 2015 के बहबल कलां पुलिस फायरिंग मामलों की जांच कर रही अलग एसआईटी में भी सदस्य नियुक्त किया गया है। इससे साफ है कि राज्य सरकार 2015 से जुड़े चर्चित मामलों की जांच में अनुभवी अधिकारियों पर भरोसा जता रही है। 10 जून को फायरिंग मामले की जांच टीम से जुड़ने के एक दिन बाद हरजीत सिंह ने पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह का बयान दर्ज किया था। यह बयान शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल द्वारा “गुनाह कबूलने” से जुड़े घटनाक्रम के संदर्भ में लिया गया। गौरतलब है कि सुखबीर सिंह बादल 2 दिसंबर 2024 को अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए थे और पार्टी व अपनी सरकार से हुई “सभी गलतियों” के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी। अब पुनर्गठित एसआईटी की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं।

बस्तर के छात्रों ने बढ़ाया जिले का मान, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति परीक्षा में प्रदेश में तीसरे नंबर पर

बस्तर. राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति परीक्षा 2025-26 में बस्तर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है. पिछले वर्ष जहां केवल दो विद्यार्थियों का चयन हुआ था, इस बार संख्या बढ़कर 177 पहुंच गई. यह उपलब्धि जिले की शैक्षणिक रणनीति और सतत तैयारी का बड़ा परिणाम मानी जा रही है. बकावंड ब्लॉक ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए अकेले 130 विद्यार्थियों का चयन कराया. वहीं लोहंडीगुड़ा ब्लॉक से भी 37 विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की. छात्रों को परीक्षा से पहले ओएमआर आधारित मॉक टेस्ट और नियमित अभ्यास कराया गया. पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के विश्लेषण और विशेष प्रशिक्षण का भी लाभ मिला. डिजिटल माध्यमों और समूह प्रशिक्षण ने तैयारी को और मजबूत बनाया. चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा. जिले की इस सफलता ने ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाई है. अब शिक्षा विभाग इस मॉडल को आगे भी जारी रखने की तैयारी में है.

PM मोदी बोले- जहां कभी आतंक का साया था, वहां आज विकास, विश्वास और अवसरों का नया दौर

जहां कभी आतंक और भय का माहौल था, वहां आज विकास, विश्वास और अवसरों का नया दौर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘नेशन फर्स्ट’ संकल्प और सुरक्षा बलों के शौर्य से बस्तर में लौटी शांति और विकास की नई रोशनी  – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर,   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ देश की लड़ाई को विकास और जनविश्वास की विजय बताते हुए कहा है कि सरकार ने नक्सलवाद और माओवाद को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया था और आज उसके सकारात्मक परिणाम पूरे देश के सामने हैं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी भय, हिंसा और अविश्वास का वातावरण था, वहां आज विकास, सुशासन और नई संभावनाओं का युग प्रारंभ हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक समय नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य नागरिक निरंतर भय के साये में जीवन जीने को मजबूर थे। लोगों को अपनी सुरक्षा, आजीविका और सम्मान की चिंता रहती थी। विकास कार्यों को आगे बढ़ाना अत्यंत कठिन था। सड़क निर्माण से लेकर संचार सुविधाओं के विस्तार तक हर प्रयास का हिंसक विरोध किया जाता था। कई बार निर्माण सामग्री को जला दिया जाता था, ठेकेदारों को धमकाकर भगा दिया जाता था और विकास कार्यों को रोकने की कोशिश की जाती थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। बीते वर्षों में हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया, हजारों मोबाइल टावर स्थापित किए गए और दूरस्थ गांवों तक संचार सुविधाएं पहुंचाई गईं। बैंकिंग सेवाओं, डाक सेवाओं और वित्तीय समावेशन के माध्यम से लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल आधारभूत संरचनाओं का विस्तार नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में विश्वास और अवसरों का विस्तार है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल बम, बंदूक और गोली के सहारे नहीं लड़ी गई। सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ जनसामान्य की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने पर भी समान रूप से ध्यान दिया। शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, गरीबों को अधिकार दिलाने और लोकतंत्र के प्रति विश्वास मजबूत करने के निरंतर प्रयास किए गए। इसी का परिणाम है कि आज नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आमजन का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की प्रक्रिया में बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां कभी आतंक और हिंसा का माहौल था, वहां आज युवाओं की ऊर्जा खेल और प्रतिभा के माध्यम से सामने आ रही है। बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों में लाखों युवाओं की भागीदारी इस परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है। यह दर्शाता है कि अब वहां के युवा हिंसा के रास्ते को नहीं, बल्कि अवसर, शिक्षा, खेल और विकास के मार्ग को अपना रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘नेशन फर्स्ट’ संकल्प, दूरदर्शी नेतृत्व और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस ने बस्तर सहित पूरे नक्सल प्रभावित क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां कभी नक्सलवाद का आतंक था, वहां आज विकास का आत्मविश्वास दिखाई देता है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, बैंकिंग और जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच ने लोगों के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन लाया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, सुरक्षा बलों की वीरता तथा स्थानीय जनता के सहयोग से नक्सलवाद का अध्याय अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान हिंसा नहीं, बल्कि विकास, जनभागीदारी, खेल, पर्यटन और नई संभावनाओं से बन रही है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन और अंत्योदय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़  विकास और सुशासन का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा तथा बस्तर देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में अपनी पहचान स्थापित करेगा।

राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना पर राज्य स्तरीय कार्यशाला 25 जून को, शिक्षा विभाग की बड़ी पहल

राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय कार्यशाला 25 जून को राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा भोपाल में किया जाएगा कार्यशाला का आयोजन योजना के प्रभावी संचालन, छात्रवृत्ति चयन प्रक्रिया, मॉनिटरिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से की जाएगी चर्चा, दिया जाएगा प्रशिक्षण भोपाल  प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा राज्य स्तरीय कार्याशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला 25 जून को पलाश रेसीडेन्सी भोपाल में होगी। इसमें राज्य शिक्षा केंद्र के संबंधित अधिकारी, कर्मचारी और सभी जिलों के नोडल अधिकारी तथा उनके सहायक शामिल होंगे। कार्यशाला में योजना के प्रभावी संचालन, छात्रवृत्ति चयन प्रक्रिया, मॉनिटरिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल NSP पर नवीन/ नवीनीकरण पंजीयन से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार के सीनियर कन्सलटेंट राघवेन्द्र खरे उपस्थित सहभागियों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संचालित है राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत भारत सरकार स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग नई दिल्ली द्वारा चयन परीक्षा में पात्र छात्रों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रतिवर्ष 12000 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। भारत सरकार द्वारा छात्रवृत्ति की राशि सीधे हितग्राही छात्र के खाते में भेजी जाती है। राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना राज्य के शासकीय, अनुदान प्राप्त एवं नगरीय निकायों के विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 8वीं के आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाती है। योजना का लाभ पाने के लिए छात्र को विगत वर्ष कक्षा 7वीं में न्यूनतम ‘सी’ ग्रेड से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही, अभिभावक की सकल वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। राज्य के लिए निर्धारित कोटा में मेरिट सूची के अनुसार प्रतिवर्ष मध्यप्रदेश के 6 हजार 446 विद्यार्थियों का चयन इस छात्रवृत्ति के लिए किया जाता है।  

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की नई सुविधा: 1912 पर करें कॉल, स्मार्ट मीटर की हर समस्या होगी दूर

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को विशेष सुविधा अब बिल, मीटर और इंस्टॉलेशन से जुड़ी दिक्कतों का 1912 पर घर बैठे होगा समाधान भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के जिलों में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की सुविधा और उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी द्वारा कार्यक्षेत्र में लगाए जा रहे आधुनिक स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर विशेष शिकायत दर्ज करने की सुविधा शुरू की गई है। अब उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से जुड़ी किसी भी शिकायत के लिए सीधे इस नंबर पर संपर्क कर निराकरण करा सकते हैं। इन शिकायतों का होगा निराकरण कंपनी द्वारा शुरू की गई इस सुविधा के अंतर्गत स्मार्ट मीटर उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1912 पर कॉल करके स्मार्ट मीटर का अनुचित तरीके से इंस्टॉलेशन होना, स्मार्ट मीटर का जल जाना, डिस्प्ले बंद होना या मीटर का क्षतिग्रस्त होना, मासिक बिजली बिल का जनरेट न होना, गलत बिल जनरेशन की समस्या, बिल में एक्सपोर्ट यूनिट्स का गलत दर्ज होना, मीटर की तेज रिकॉर्डिंग के कारण बिजली का अधिक बिल आने संबंधी शिकायत, 'उपाय' (Upay) ऐप में स्मार्ट मीटर का डाटा गलत दिखना या प्रदर्शित न होना, बिजली बिल में मीटर का गलत सीरियल नंबर अंकित होना, नए स्मार्ट मीटर की स्थापना के समय प्रारंभिक (शुरुआती) रीडिंग में विसंगति होना, सोलर/नेट मीटर में परिवर्तित न होना, बिल भुगतान करने के बाद भी बिजली का रीकनेक्शन न किया जाना, नए स्मार्ट मीटर की स्थापना के समय पुराने मीटर की आखिरी रीडिंग गलत दर्ज होना तथा चेक मीटर लगाने का अनुरोध करना या अनुरोध के बावजूद चेक मीटर इंस्टॉल न होने संबंधी शिकायतों का निराकरण करा सकेंगे। स्मार्ट मीटर पूरी तरह सुरक्षित और सटीक मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने बताया है कि स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं, सटीक बिलिंग और ऊर्जा दक्षता में सुधार हो रहा है। स्मार्ट मीटर लगाने का काम समय सीमा में पूर्ण करने के लिए कंपनी की टीमें लगातार कार्य में जुटी हुई हैं। यदि किसी उपभोक्ता को मीटर की कार्यप्रणाली, बिलिंग या इंस्टॉलेशन को लेकर कोई भी शंका या समस्या है, तो वे बिना किसी झिझक के टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल कर सकते हैं। कॉल सेंटर पर शिकायत दर्ज होते ही संबंधित तकनीकी टीम द्वारा प्राथमिकता के आधार पर समस्या का जल्द से जल्द निराकरण किया जाएगा