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गुजरात में AAP विधायक दोषी करार, पत्नी सहित 9 आरोपियों को 7 साल कैद और ₹96 हजार जुर्माना

नर्मदा  गुजरात में नर्मदा जिले की एक कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी और अन्य को 7-7 साल की जेल की सजा सुनाई है। इन पर वन विभाग के अधिकारियों से मारपीट, धमकी देने और वसूली करने का आरोप था। सजा के अलावा विधायक की पत्नी और अन्य पर 96 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। कुल 9 आरोपियों में 4 महिलाएं शामिल हैं। मामला 30 अक्टूबर 2023 का है। आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों ने जंगल की जमीन पर हुए अतिक्रमण हटा दिए थे। इसके बाद विधायक चैतर वसावा ने पांच अधिकारियों को अपने घर बुलाया था। प्राथमिकी के मुताबिक, चैतर वसावा और उनके साथियों ने अधिकारियों के साथ मारपीट की और उनसे प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा देने के नाम पर वसूली की थी। हवाई फायरिंग के भी आरोप लगे थे अभियोजन पक्ष के अनुसार, चैतर वसावा ने इस दौरान हवाई फायरिंग भी की थी। आरोप है कि जिस हथियार का इस्तेमाल किया गया, उसके लिए उनके पास वैध लाइसेंस नहीं था। इसके चलते उन पर आर्म्स एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा दंगा, वसूली, सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने और धमकी देने जैसी धाराएं भी लगाई गईं। आरोप है कि अगले दिन उनके निजी सहायक ने वन अधिकारियों से दोबारा मुआवजे की मांग की थी। अधिकारी ने ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए थे इस घटना के अगले ही दिन, चैतर वासावा के पीए और अन्य लोगों ने दो अधिकारियों से 30-30 हजार रुपए की फिरौती मांगी थी। चूंकि वन कर्मचारियों के पास कैस पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया और दो अधिकारियों ने 30-30 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए थे। कोर्ट में इसे सबूत के तौर पर पेश किया गया था मामले में कौन-कौन आरोपी था इस मामले में चैतर वसावा के अलावा उनकी पत्नी शकुंतला वसावा, पीए जितेंद्र वसावा और 6 ग्रामीणों को आरोपी बनाया गया था। शकुंतला वसावा उस समय नर्मदा जिला पंचायत की सदस्य थीं। घटना के बाद कुछ आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, चैतर वसावा कई दिनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहे। उन्होंने 14 दिसंबर 2023 को सरेंडर किया था। बाद में 2024 के लोकसभा चुनाव में भरूच सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत से चर्चा में आए थे चैतर वसावा AAP के टिकट पर साल 2022 के विधानसभा चुनाव में डेडियापाड़ा सीट से जीतकर चर्चा में आए थे। उनकी जीत ने दक्षिण गुजरात के आदिवासी इलाके में AAP को मजबूत आधार दिया था। चैतर वसावा ने खुद को आदिवासी भूमि अधिकारों के प्रमुख नेता के रूप में स्थापित किया है। हालांकि, अब अदालत के फैसले ने उनकी राजनीतिक राह मुश्किल कर दी है।

82 ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, स्वच्छता कर्मियों एवं हितधारकों को दिया गया व्यवहारिक प्रशिक्षण

रायपुर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायगढ़ में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायगढ़ के सहयोग से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत नगर निगम ऑडिटोरियम, रायगढ़ में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।   पंचायत प्रतिनिधि एवं अन्य हितधारकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान राज्य सलाहकार मती मोनिका सिंह एवं  पुरुषोत्तम पंडा ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रतिभागियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं सतत ग्रामों के निर्माण में वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा सभी ग्राम पंचायतों को नियमों के अनुरूप कार्य करना आवश्यक होगा। कचरा पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष जोर प्रशिक्षण सत्र में घरेलू एवं सामुदायिक स्तर पर उत्पन्न होने वाले विभिन्न प्रकार के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को 4-वे कचरा पृथक्करण प्रणाली की जानकारी दी गई, जिसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी अपशिष्ट तथा घरेलू खतरनाक अपशिष्ट को अलग-अलग संग्रहित करने एवं उनके सुरक्षित निस्तारण की प्रक्रिया समझाई गई। विशेषज्ञों ने बताया कि स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण करने से अपशिष्ट प्रबंधन अधिक प्रभावी एवं पर्यावरण अनुकूल बनता है। ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण, परिवहन एवं अंतिम निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करने पर भी बल दिया गया। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि ग्राम पंचायत क्षेत्रों में कचरे को खुले में फेंकना, जलाना अथवा भूमि में दबाना नियमों के विरुद्ध है तथा ऐसे मामलों में जुर्माना सहित वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। बल्क वेस्ट जेनरेटरों के पंजीयन और जनजागरूकता पर चर्चा  कार्यशाला में बल्क वेस्ट जेनरेटरों की पहचान एवं उनके पंजीयन की प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर बल्क वेस्ट जेनरेटरों के पंजीयन की प्रक्रिया समझाई गई तथा बताया गया कि बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के अपशिष्ट प्रबंधन की नियमित निगरानी की जाएगी।  प्रशिक्षण के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता अभियान संचालित करने, प्रत्येक परिवार को कचरा पृथक्करण के लिए प्रेरित करने तथा स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने संबंधी दिशा-निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि सामुदायिक सहभागिता और जनजागरूकता के माध्यम से ही स्वच्छ, स्वस्थ एवं पर्यावरण अनुकूल ग्रामों का निर्माण संभव है।  कार्यक्रम में मुख्य रसायनज्ञ  नवीन चंद्र मालवीय, वैज्ञानिक सु श्वेता खाखा, वैज्ञानिक  सतीश पटेल, पर्यावरण विभाग के अधिकारीगण, जिला पंचायत से एपीओ  वीरेंद्र सिंह राय, जिला सलाहकार (एसबीएम-जी)  अर्जुन मेहेर, विभिन्न जनपद पंचायतों की एसबीएम-जी टीम, सरपंच, सचिव एवं स्वच्छाग्रही बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने ग्राम पंचायत क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।

नोएडा ने रचा नया इतिहास, देश की पहली स्मार्ट कचरा व्यवस्था शुरू; सफाई व्यवस्था होगी पूरी तरह हाईटेक

नोएडा  नोएडा प्राधिकरण शहर में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कई बड़े बदलाव करने जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है, ताकि वह सड़क पर किसी भी प्रकार का कचरा न फेंकें। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीकी से लैस कचरा पेटियों (डस्टबिन) की व्यवस्था की जाएगी। जैसे ही इन डस्टबिन में कचरा भर जाएगा, कंट्रोल रूम में घंटी बजने लगेगी। इससे प्राधिकरण का जन स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो जाएगा और कचरा कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह व्यवस्था देश में पहली बार नोएडा में लागू की जा रही है। प्रथम चरण में इसे सार्व जनिक शौचालयों पर लागू किया जाएगा। प्राधिकरण ने शहर में 320 सार्वजनिक शौचालयों की स्थापना की है, जो पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत संचालित हो रहे हैं। इस माॅडल की सराहना करते हुए मिनिस्ट्री आफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स (महुआ) ने अन्य नगर निगमों को भी इसे अपनाने की सलाह दी है। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन डस्टबिन को शौचालयों के बाहर स्थापित किया जाएगा, जो जीपीएस और सेंसर से युक्त होंगे। इनकी मानिटरिंग इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) द्वारा की जाएगी, जहां डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की सभी गाड़ियों की निगरानी होती है। हालांकि नियमित डस्टबिन की सफाई और कचरा कलेक्शन का कार्य जारी रहेगा। यदि डस्टबिन में कचरा भर जाता है और कंट्रोल रूम पर घंटी बजती है, तो कचरा उठाने वाली गाड़ी मौके पर पहुंचकर डस्टबिन से कचरा हटा देगी। इससे सड़क पर कचरा फेंकने वालों को रोका जा सकेगा। शहर की जनसंख्या के अनुसार, वर्तमान में साढ़े छह लाख की आबादी के लिए डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जा रहा था। नई जनगणना के अनुसार, लगभग पांच लाख मकान और 14.5 लाख की आबादी सामने आई है। इस बदलाव के चलते कचरा कलेक्शन के लिए नए नियमों के तहत कार्ययोजना बनाई जाएगी। कम से कम दो टेंडर जारी किए जाएंगे, जिससे गली, गांव, सेक्टर, सोसायटी और बाजारों में कचरा एकत्र करने का कार्य किया जाएगा। जनगणना के बाद शहर की स्थिति     नई जनगणना के हिसाब से करीब पांच लाख मकान     नई जनगणना के हिसाब से करीब आबादी 14.5 लाख     पुरानी जनगणना के हिसाब से करीब दो लाख मकान     पुरानी जनगणना के हिसाब से शहर की आबादी 6.5 लाख शहर में शौचालयों की स्थिति     पब्लिक टाॅयलेट : 117     कम्यूनिटी टाॅयलेट : 67     पिंक टाॅयलेट : 16     यूरिनल ब्लाॅक्स : 120     "तमाम फाइव स्टार व थ्री स्टार होटल्स में अत्याधुनिक शौचालय तैयार किए गए है, नोएडा में भी सड़क किनारे लग्जरी टायलेट की सुविधा उपलब्ध कराया जा रही है। ऐसे में अत्याधुनिक तकनीकी से लैस डस्टबिन को शौचालयों के बाहर लगवाजाएगा, जिसमें कचरा डालने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। वैसे अधिकांश शौचालय उन्हीं जगहों पर बने है, जहां पर वेंडिंग जोन बाजार,आम जनमानस के आने जाने के पर्याप्त स्थान है।"     -इंदु प्रकाश सिंह, ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण।  

इंजीनियरिंग छात्रों के लिए खुशखबरी: MP में घट सकती है कॉलेज फीस, निजी संस्थानों ने दिया प्रस्ताव

भोपाल  प्रदेश के निजी कॉलेजों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई और सस्ती हो जाएगी। कई इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शुल्क विनियामक समिति (एफआरसी) को अपने न्यूनतम शुल्क में कटौती का प्रस्ताव भेजा है। उनकी मांग है कि उनके यहां शिक्षण शुल्क 35 हजार रुपये सालाना कर दिया जाए। इसकी मंजूरी मिलती है तो यह निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के पूरे तंत्र को प्रभावित करेगा। छात्रों की कमी से जूझ रहे संस्थान दरअसल निजी संस्थान विद्यार्थियों की कमी से जूझ रहे हैं। पिछले एक दशक में 58 कॉलेज बंद हो चुके हैं। इस बीच केवल एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खुला है। पिछले वर्षों में इन कॉलेजों की औसतन 45 से 55 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाए। वहीं सरकारी कॉलेजों में 80 से 90 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं। इस वजह से घट रही संख्या विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योगों की जरूरतों और इंजीनियरिंग कोर्स के बीच बढ़ती दूरी, रोजगार को लेकर विद्यार्थियों की बदलती प्राथमिकताएं और नई तकनीकों के अनुरूप पाठ्यक्रम का समय पर अपडेट नहीं होना है इसका प्रमुख कारण है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में अधिकतर प्रवेश दूसरे राज्यों के विद्यार्थी लेते हैं। सीटें रिक्त रहने से बढ़ रही लागत कटौती का प्रस्ताव देने वाले कॉलेजों का तर्क है कि सीटें खाली रहने के कारण प्रति विद्यार्थी लागत बढ़ रही है। इससे संस्थान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। यदि शुल्क कम नहीं किया गया तो संचालन और मुश्किल हो जाएगा। कहा जा रहा है कि शुल्क कटौती से दूसरे प्रदेश के विद्यार्थियों के अलावा प्रदेश के कम आय वाले परिवारों के बच्चे भी आकर्षित होंगे। दूसरे राज्यों की तुलना में पहले से कम है फीस यहां पर यह भी बता दें कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों में इंजीनियरिंग का वार्षिक शुल्क औसतन एक से डेढ़ लाख रुपये तक है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने भी न्यूनमत शुल्क करीब 80 हजार रुपये तय किया है। इसके उलट मध्यप्रदेश में यह शुल्क 40 से 60 हजार रुपये तक है। पांच वर्षों के दौरान यह स्थिति वर्ष — कॉलेज — सीटें — प्रवेशित 2021-22 — 126 — 47,520 — 28,534 2022-23 — 124 — 58,535 — 31,659 2023-24 — 123 — 60,754 — 33,334 2024-25 — 142 — 73,637 — 42,924 2025-26 — 128 — 64,473 — 38,171     उप्र, महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों की तुलना में यहां इंजीनियरिंग का शुल्क कम है। इस कारण यहां पर दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी प्रवेश लेते हैं। कुछ कॉलेज विवि में कन्वर्ट हो रहे हैं, इसलिए वे काउंसलिंग में शामिल नहीं हो रहे हैं।     – डा. अजीत सिंह पटेल, उपाध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ टेक्निकल प्रोफेशनल इंस्टि्टयूशंस मप्र     पांच-छह इंजीनियरिंग कॉलेजों से शुल्क तय करने के प्रस्ताव आए हैं। समिति कालेजों का लेखा-जोखा देखकर न्यूनतम शुल्क तय करती है। इस पर विचार किया जा रहा है।     – डॉ. अनिल शिवानी, सचिव, एफआरसी  

श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना ने बनाया रिकॉर्ड, एक दिन में 11,721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का निस्तारण

श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना ने एक दिन में रिकार्ड 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का किया निस्तारण भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना दोंगलिया ने फ्लाई ऐश के उपयोग एवं पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना में गत दिवस एक ही दिन में कुल 284 बल्करों के माध्यम से लगभग 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का परिवहन कर अब तक सर्वाधिक फ्लाई ऐश परिवहन करने का रिकार्ड बनाया गया। इनमें 114 बल्कर परियोजना के विद्युत गृह क्रमांक एक से और 170 बल्कर विद्युत गृह क्रमांक दो से लोड कर निस्तारित किए गए। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना द्वारा 30 मार्च 2025 को 236 बल्करों के माध्यम से 9429 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश परिवहन का रिकॉर्ड स्थापित किया गया था। उस दौरान विद्युत गृह क्रमांक 1 से 132 बल्कर व विद्युत गृह क्रमांक 2 से 104 बल्कर लोड किए गए थे। इस नवीन उपलब्धि ने न केवल इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, बल्कि फ्लाई ऐश प्रबंधन एवं निस्तारण के क्षेत्र में परियोजना की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को भी दर्शाया है।  

मिर्जापुर में बनेगी भव्य गंगा पैड़ी! बलुआ लाल पत्थरों से संवरेगा घाट, काशी जैसा होगा नजारा

मिर्जापुर  उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में वाराणसी के काशी की तरह गंगा के किनारे 6 किलोमीटर निर्माण का निर्माण कराया जाएगा. पैड़ी के माध्यम से सभी गंगा घाट को एक किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ख्याल रखते हुए घाटों का निर्माण कराया जाएगा. पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा गया है।  प्रस्ताव मंजूर होने और धन आवंटन के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा. पैड़ी को विंध्याचल से मिर्जापुर तक जोड़ा जाएगा, इसमें लोगों के टहलने के साथी अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद रहेगी, जहां इसका लाभ आम लोग उठा सकेंगे. नए और अत्यधिक घाटों का निर्माण हो जाने के बाद न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. बल्कि, घाट के आसपास के लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।  50 फीट चौड़ी होगी पैड़ी लोक निर्माण विभाग के द्वारा विंध्याचल से फतहा गंगा घाट को जोड़ने के लिए 400 करोड रुपए की योजना तैयार की गई है. प्रस्तावित योजना के तहत 50 फीट चौड़ी पैड़ी का निर्माण काशी की तर्ज पर कराया जाएगा. यह करीब 6 किलोमीटर लंबा होगा, इससे मिर्जापुर से विंध्याचल के जितने भी गंगा घाट है, सभी एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे. वहीं, गंगा के तटीय क्षेत्र का विकास भी हो सकेगा. लोक निर्माण विभाग के द्वारा परियोजना शासन में भेज दिया गया है. परियोजना मंजूर होने के बाद काम शुरू किया जाएगा. प्रस्तावित योजना में लोगों के लिए मॉर्निंग वॉक और रोजगार व पर्यटन को बढ़ाने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।  मौजूद होगी सुविधाएं पैड़ी में घाट के किनारे रंग-बिरंगे फूलों को लगाया जाएगा. आराम करने के लिए बलुआ लाल पत्थरों से चबूतरे बनाए जाएंगे. ताकि, कोई आसानी से बैठकर आराम कर सके. पैड़ी के निर्माण को लेकर कुछ जगहों पर जमीन भी अधिग्रहित की जाएगी. सर्वे की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है. लोक निर्माण विभाग जमीन को अधिग्रहित करेगा. पैड़ी बन जाने के बाद मिर्जापुर के गंगा के तटीय इलाकों का विकास होगा. रोजगार के साथ सुबह टहलने के लिए समस्याएं खत्म होगी।  शासन को भेजा गया प्रस्ताव प्रांतीय लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि गंगा के तट पर काशी के तर्ज पर पैड़ी का निर्माण किया जाना है. 400 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार करके शासन को भेजा गया है. 6 किलोमीटर लंबा और 50 मीटर चौड़े घाटों का निर्माण कराया जाएगा. परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद घाटों के निर्माण का काम तेजी के साथ किया जाएगा। 

साय सरकार की बड़ी पहल, श्रमिक परिवारों के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

साय सरकार की पहल से श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिलेगा बेहतर भविष्य, सरकार उठाएगी पढ़ाई का पूरा खर्च  अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 3 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित, निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन और अध्ययन सामग्री की सुविधा रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को राज्य के चयनित निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा छठवीं से बारहवीं तक अध्ययन की सुविधा प्रदान की जाएगी। विशेष बात यह है कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक फीस, छात्रावास, भोजन, गणवेश, लेखन सामग्री तथा अन्य आवश्यक खर्चों का पूरा वहन छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा किया जाएगा। इससे श्रमिक परिवारों को बच्चों की शिक्षा के आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण में अध्ययन का अवसर प्राप्त होगा। प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए, इसी सोच के अनुरूप राज्य सरकार विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के कमजोर और श्रमिक वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना भी इसी दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है, जिससे श्रमिकों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिल रही है। योजना का लाभ लेने के लिए पात्र एवं पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को श्रम विभाग के पोर्टल www.shramevjayate.cg.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया 22 जून से प्रारंभ हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की सुविधा श्रम विभाग के पोर्टल, निकटतम श्रम कार्यालय, लोक सेवा केंद्र तथा श्रमेव जयते एप के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है, जिससे अधिक से अधिक पात्र परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। यह योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाएगी तथा शिक्षा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करेगी।

नया बिजली कनेक्शन लेना हुआ आसान, सरल संयोजन पोर्टल से करें ऑनलाइन आवेदन

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिये सरल और सुविधाजनक तरीके से त्वरित नवीन बिजली कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं को सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में घर बैठे ही नवीन कनेक्शन उपलब्ध कराये जा रहे हैं। गौरतलब है कि कंपनी द्वारा विगत जुलाई 2023 से शुरू किये गये ऑनलाइन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से अब तक भोपाल शहर एवं भोपाल ग्रामीण वृत्त में एक लाख 21 हजार 619 नए कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं, जबकि पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र में 6 लाख 11 हजार से अधिक नए कनेक्शन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से सफलतापूर्वक दिये गए हैं। इनमें 10 किलोवॉट तक के अस्थायी कनेक्शन भी शामिल हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने बताया है कि कंपनी के सरल संयोजन पोर्टल पर आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में तत्काल नया बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। नये कनेक्शन लेने के लिये उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी के पोर्टल https://saralsanyojan.mpcz.in:8888/home अथवा UPAY ऐप पर जाकर जरूरी दस्तावेज अपलोड कर समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। आवेदक द्वारा विधिवत ऑनलाइन आवेदन और भुगतान प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत बिजली कंपनी द्वारा सर्वे एवं अन्य औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर उपभोक्ता के परिसर में नया कनेक्शन उपलब्ध करा दिया जाएगा।  

1 जुलाई से बदलेंगे कई नियम! LPG, रेलवे टिकट और आधार समेत इन 7 बदलावों का पड़ेगा सीधा असर

नई दिल्ली जून का महीना कुछ ही दिनों में खत्म होने वाला है और फिर जुलाई की शुरुआत होने वाली है. हर महीने की तरह इस बार भी 1 जुलाई से कई अहम फाइनेंशियल नियमों में बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब पर पड़ सकता है।  नौकरीपेशा कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, टैक्सपेयर्स और बैंक ग्राहकों समेत करोड़ों लोगों के लिए ये बदलाव जानना बेहद जरूरी है. कुछ नियम आपके खर्च को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि कुछ बदलाव आपके निवेश, बैंकिंग और वित्तीय योजनाओं से जुड़े हो सकते हैं. ऐसे में जुलाई शुरू होने से पहले इन नए नियमों की जानकारी रखना आपके लिए जरूरी साबित हो सकता है।  आधार कार्ड से जुड़ा नियम 1 जुलाई 2026 से आधार कार्ड में ई-मेल आईडी अपडेट कराना और आसान हो जाएगा. यूआईडीएआई (UIDAI) ने जानकारी दी है की आधार मोबाइल ऐप के जरिए ई-मेल अपडेट करने पर लगने वाला 75 रुपये का चार्ज अगले छह महीने तक नहीं लिया जाएगा. यह सुविधा 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी. इस कदम का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने आधार रिकॉर्ड अपडेट रखवाना है और डिजिटल सर्विसेस तक उनकी पहुंच को बेहतर बनाना है।  रेलवे यात्रियों के लिए बदलेगा नियम 1 जुलाई 2026 से रेलवे में बिना टिकट यात्रा करने वालों पर जुर्माना और सख्त हो सकता है. केंद्र सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, बिना टिकट सफर करने पर न्यूनतम जुर्माना ₹250 से बढ़ाकर ₹500 किया जा सकता है. इसके अलावा किसी दूसरे व्यक्ति के टिकट पर यात्रा करना, ट्रेन में हंगामा करना, भीख मांगना, अवैध फेरी लगाना या महिलाओं के लिए आरक्षित कोच में सफर करने जैसी गलतियों पर भी भारी जुर्माना लग सकता है. सरकार का कहना है कि इन बदलावों से रेलवे में अनुशासन और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना है।  एफडी के नियमों में बदलाव पिछले महीने आरबीआई की एमपीसी बैठक के बाद कुछ बैंकों ने इंटरेस्ट रेट में बदलाव किए थे. जुलाई की शुरुआत के साथ एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) से जुड़े नियमों और ब्याज दरों में बदलाव देखने को मिल सकता है. बैंक समय-समय पर अपनी एफडी दरों की समीक्षा करते हैं और बाजार की स्थिति के अनुसार इनमें बदलाव करते हैं. ऐसे में निवेशकों को नई एफडी कराने या पुरानी एफडी को रिन्यू कराने से पहले बैंक की ताजा ब्याज दरों और नियमों को चेक जरूर कर लेना चाहिए।  क्रेडिट कार्ड से जुड़ा नियम 1 जुलाई 2026 से एसबीआई कार्ड अपने कुछ क्रेडिट कार्डों के रिवॉर्ड पॉइंट नियमों में बदलाव करने जा रहा है. यह बदलाव खास तौर पर PhonePe SBI Credit Card PURPLE और PhonePe SBI Credit Card SELECT BLACK कार्डधारकों पर लागू होगा. नए नियमों के तहत रिवॉर्ड पॉइंट कमाने की सीमा तय की जाएगी और कुछ अतिरिक्त प्रकार के लेनदेन पर रिवॉर्ड पॉइंट नहीं मिलेंगे. ऐसे में इन कार्डों का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को नए नियमों की जानकारी पहले से ले लेनी चाहिए, ताकि उनके रिवॉर्ड बेनिफिट्स पर पड़ने वाले असर को समझा जा सके. इसके अलावा भी कई बैंक अपने क्रेडिट कार्ड्स के नियमों से जुड़े बदलाव जुलाई के महीने में कर सकते हैं।  LPG के दाम में बदलाव जून के पहले हफ्ते में ही देशभर में घरेलू रसोई गैस (LPG) सिलेंडर महंगा हो गया था. सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की थी. पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार था जब रसोई गैस के दाम बढ़ाए गए. इससे पहले 7 मार्च को सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़त की गई थी. नई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है. अब जुलाई के महीने में भी गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव होने की उम्मीद है. अगर मिडिल ईस्ट का टेंशन पूरी तरह खत्म नहीं होता है और ऊर्जा सप्लाई में परेशानी आती है तो एलपीजी की कीमतों में बदलाव हो सकता है।  पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिसका असर भारत में पेट्रोल के दामों पर भी दिखा. मई 2026 में पेट्रोल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी की गई. 25 मई को हुई बढ़ोतरी के अनुसार पेट्रोल 2.46 रुपये से 2.95 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हुआ. इससे पहले 23 मई को 0.87 रुपये से 1.46 रुपये था और उससे पहले 0.82 रुपये से 1.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. अब जुलाई में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव हो सकता है।  ATF फ्यूल की कीमतों में बदलाव हफ्तेभर पहले ही केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में बढ़ोतरी की थी. नई दरों के अनुसार, डीजल के निर्यात पर 14 रुपये प्रति लीटर और ATF के निर्यात पर 12.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगाया था. हालांकि, पेट्रोल के निर्यात शुल्क और घरेलू खपत के लिए पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया. सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए इन दरों की समीक्षा करती रहती है. ऐसे में नए महीने की शुरुआत में भी एटीएफ की कीमतों में बदलाव हो सकता है। 

कौन हैं जज रंजना प्रकाश देसाई? जिनकी निगरानी में तैयार होगा UCC का ड्राफ्ट, कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं

भोपाल  मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है. राज्य सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने और इसकी व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है. सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में UCC का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा. इसके लिए न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को जिम्मेदारी सौंपी गई है. उनकी अध्यक्षता में बनी कमेटी भोपाल पहुंच चुकी है. 22 जून से कमेटी ने काम शुरू भी कर दिया है. अब सवाल है कि न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को यूसीसी ड्राफ्ट के लिए क्यों चुना गया है. जानते हैं कौन है न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई जिनकी निगरानी में तैयारी हो रही है? वहीं, कांग्रेस यूसीसी को लेकर बीजेपी पर लगातार हमले कर रही है।  न्यायमूर्ति रंजना की अध्यक्षता में बनी कमेटी प्रदेश की एससी, एसटी और महिला सहित सभी आयोग के पदाधिकारियों के साथ मीटिंग करेंगी. इसके अलावा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, धर्म गुरुओं के साथ चर्चा की जाएगी. छह सदस्यों वाली इस कमेटी में जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रसाद देसाई के साथ रिटायर्ड IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और समाजसेवी बुधपाल सिंह शामिल हैं. सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय कटेसरिया को कमिटी का सचिव नियुक्त किया गया है।  कौन हैं जस्टिस रंजना प्रसाद देसाई न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई देश की सबसे अनुभवी सेवानिवृत्त न्यायाधीशों में मानी जाती हैं और कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समितियों का नेतृत्व कर चुकी हैं. उनका जन्म 30 अक्टूबर 1949 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था. उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज से बीए और साल 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज मुंबई से LLB की पढ़ाई पूरी की. उनके पिता एक मशहूर आपराधिक वकील थे।  30 जुलाई 1973 से उन्होंने वकालत शुरू की. शुरुआत में उन्होंने न्यायमूर्ति प्रताप के सहायक के तौर पर काम किया. 1979 में वह सरकारी वकील बनी और 1 नवंबर 1995 को उन्हें मुंबई हाईकोर्ट में सरकारी वकील नियुक्त किया गया. वह 1996 में बॉम्बे हाई कोर्ट की जज बनीं और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की न्यायाधीश नियुक्त हुईं. 29 अक्टूबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुईं।  रिटायरमेंट के बाद मिली जिम्मेदारियां लोकपाल चयन समिति की सदस्य डिलिमिटेशन कमीशन (सीमांकन आयोग) की अध्यक्ष प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की अध्यक्ष उत्तराखंड UCC समिति की अध्यक्ष गुजरात UCC समिति की अध्यक्ष 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) की अध्यक्ष