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मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार विजेताओं को दी बधाई, कहा- प्रदेश के लिए गौरव की बात

मुख्यमंत्री ने पद्म पुरस्कार पाने वाली विभूतियों को दी शुभकामनाएं राष्ट्रपति ने मंगलवार शाम प्रदान किया पद्म पुरस्कार इस विशिष्ट उपलब्धि ने देश और दुनिया में बढ़ाया उत्तर प्रदेश का मान: मुख्यमंत्री चिरंजी लाल यादव व अनिल रस्तोगी को कला, रघुपत सिंह (मरणोपरांत) को कृषि, संगीतविद् एवं शिक्षाविद् प्रो. मंगला कपूर को मिला पद्मश्री लखनऊ  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह-II में वर्ष 2026 के लिए पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किए। इसमें उत्तर प्रदेश की कई विभूतियों को भी सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पर पोस्ट कर पद्म पुरस्कार से अलंकृत विभूतियों को शुभकामनाएं दीं।  'कांसा नक्काशी' की कला को सहेजने, संवारने में चिरंजी लाल का अमूल्य योगदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा चिरंजी लाल यादव को कला के क्षेत्र में 'पद्म श्री' सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हार्दिक बधाई दी। सीएम ने पोस्ट किया कि पिछले पांच दशकों से 'कांसा नक्काशी' की समृद्ध कला को सहेजने, संवारने और उसे राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में आपका योगदान अमूल्य और सराहनीय है। आपकी इस विशिष्ट उपलब्धि ने देश और दुनिया में उत्तर प्रदेश का मान बढ़ाया है। रघुपत जी की तपस्या ने भारतीय कृषि को नई दिशा प्रदान की: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने लिखा कि राष्ट्रपति द्वारा स्व. रघुपत सिंह जी को कृषि के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान हेतु 'पद्म श्री' (मरणोपरांत) से सम्मानित किया जाना अत्यंत गौरवपूर्ण एवं प्रेरणादायी है। पांच दशकों से अधिक समय तक कृषि सेवा के प्रति उनकी तपस्या ने भारतीय कृषि को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने अपना जीवन पारंपरिक बीजों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु समर्पित कर किसानों के जीवन को समृद्ध बनाने में असाधारण योगदान दिया। आत्मनिर्भर कृषि व जैव विविधता संरक्षण को सशक्त बनाने में उनकी भूमिका सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। 'रस्तोगी जी ने कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया गौरवभूषित' मुख्यमंत्री ने अनिल रस्तोगी को भी पद्मश्री मिलने पर बधाई दी। उन्होंने लिखा कि प्रख्यात रंगकर्मी एवं विद्वान अनिल कुमार रस्तोगी को कला क्षेत्र में 'पद्म श्री' सम्मान से अलंकृत किया जाना उत्तर प्रदेश वासियों के लिए हर्ष व गर्व का विषय है। 1,000 से अधिक नाट्य प्रस्तुतियों व वैश्विक नाट्य महोत्सवों के माध्यम से आपने भारतीय कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवभूषित किया है। आपके शोध पत्र, आपकी उत्कृष्ट शिक्षा, संस्कार एवं विद्वता के जीवंत प्रमाण हैं। रंगमंच के लिए आपका योगदान रंगकर्मियों के लिए अत्यंत प्रेरणास्पद है। मंगला कपूर जी की परिश्रम और समर्पित साधना का राष्ट्रीय अभिनंदन है पद्मश्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए उत्तर प्रदेश की सुप्रसिद्ध संगीतविद् एवं शिक्षाविद् प्रो. मंगला कपूर जी को 'पद्म श्री' से अलंकृत किया जाना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने संगीत और शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया। दुर्लभ रागों का दस्तावेजीकरण और 40 से अधिक मौलिक रचनाओं का संकलन उनकी प्रतिभा और तपस्या का प्रमाण है। यह सम्मान उनके अथक परिश्रम और समर्पित साधना का राष्ट्रीय अभिनंदन है।

केंद्रीय मंत्री बिट्टू की आज SC कमीशन में पेशी, सार्वजनिक माफी पर हो सकता है फैसला

चंडीगढ़  केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता रवनीत सिंह बिट्टू आज एससी आयोग के समक्ष पेश होंगे। आयोग ने उन्हें तलब किया है। इससे पहले वह दो बार सुनवाई में पेश नहीं हुए थे, जिसके चलते आयोग के चेयरमैन जसबीर सिंह गढ़ी ने सख्त रुख अपनाया है। पिछली सुनवाई के दौरान बिट्टू की ओर से पेश हुए वकीलों ने उनकी बात चेयरमैन से फोन पर करवाई थी। इस दौरान चेयरमैन ने कहा था कि पिछली बार सुनवाई की तारीख उनकी सुविधा के अनुसार तय की गई थी और उन्हें मामले की पूरी जानकारी भी थी। ऐसे शुरू हुआ था यह विवाद 26 मई 2026 को पंजाब निकाय चुनाव के मतदान के दिन धूरी (संगरूर) में भाजपा नेता ओंकार सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। उन्हें छुड़ाने और धूरी में प्रवेश करने की कोशिश के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद उनकी संगरूर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस हुई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद बिट्टू पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप लगे। आम आदमी पार्टी ने इस घटना को ‘गुंडागर्दी’ करार दिया था। 26 मई 2026 को पंजाब निकाय चुनाव के मतदान वाले दिन धूरी (संगरूर) में भाजपा नेता ओंकार सिंह को पुलिस ने हिरासत में लियाथा। उन्हें छुड़ाने और धूरी में प्रवेश करने की कोशिश के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद उनकी संगरूर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस हुई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और बिट्टू पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक व जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप लगे। आम आदमी पार्टी ने इस घटना को 'गुंडागर्दी' करार दिया था। बिट्टू ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली इस संबंधी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद पंजाब एससी कमीशन ने स्वतः संज्ञान लेते हुए बिट्टू को तलब कर लिया और संगरूर पुलिस से रिपोर्ट भी मांगी थी। हालांकि, बिट्टू ने अपने शब्दों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी। वहीं, संगरूर पुलिस की तरफ से भी रिपोर्ट पेश कर दी गई। दो बार ऐसे चली सुनवाई बिट्टू को 4 जून 2026 को पेश होने का आदेश दिया गया था। हालांकि, निजी कारणों और दिल्ली में जरूरी व्यस्तताओं के चलते वह खुद पेश नहीं हुए। इसके बजाय उनके वकील पेश हुए। उन्होंने आयोग के चेयरमैन जसबीर सिंह गढ़ी से बिट्टू की बात करवाई और उनकी व्यस्तताओं की जानकारी दी। साथ ही अगली तारीख देने का अनुरोध किया। इसके बाद उन्हें 15 जून 2026 को दोबारा तलब किया गया।  

योगी सरकार का ‘संभव 6.0’ अभियान शुरू, गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक कुपोषण पर होगा बड़ा वार

योगी सरकार का 'संभव 6.0' अभियान शुरू, गर्भावस्था से लेकर बाल्यावस्था तक कुपोषण से मिलेगी मुक्ति  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग चला रहा राज्यव्यापी अभियान आईसीडीएस, स्वास्थ्य, पंचायती राज, यूनिसेफ समेत कई संस्थाओं के सहयोग से तैयार हुई व्यापक कार्ययोजना पोषण सुरक्षा का नया संकल्पः साप्ताहिक रिपोर्ट कार्ड से होगी प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग हर 15 दिन पर जिला कार्यक्रम अधिकारियों के साथ होगी राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने मातृ एवं बाल कुपोषण को कम करने तथा पोषण सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 'संभव 6.0' अभियान की शुरुआत की है। अभियान का राज्य स्तरीय शुभारम्भ बीती 18 जून को लखनऊ से किया गया। इस वर्ष अभियान की थीम गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा निर्धारित की गई है, जिसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, नवजात शिशुओं और बच्चों को बेहतर पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 'संभव 6.0' अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आईसीडीएस, स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग, यूनिसेफ तथा अन्य विकास सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। अभियान के दौरान सभी विभाग संयुक्त रूप से निगरानी करेंगे। प्रगति का नियमित मूल्यांकन करने के लिए साप्ताहिक रिपोर्ट कार्ड तैयार किए जाएंगे, जबकि जुलाई से सितम्बर 2026 तक प्रत्येक 15 दिन पर राज्य स्तर से जिला कार्यक्रम अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित होगी। व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जाएंगे संचालित सभी मंडलों और जनपदों के लिए माइक्रो प्लान साझा किया गया है। इसके तहत व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे ताकि जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों को अभियान की रणनीति और लक्ष्यों से भलीभांति अवगत कराया जा सके। इसके साथ ही आईसीडीएस, स्वास्थ्य विभाग और पंचायती राज विभाग के संयुक्त सहयोग से प्रदेशभर में विशेष पोषण पाठशाला का आयोजन किया जाएगा, जहां परिवारों को संतुलित आहार, शिशु देखभाल और मातृ स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। कुपोषण में कमी और स्वस्थ भविष्य है अभियान का लक्ष्य 'संभव 6.0' जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण पर आधारित अभियान है, जिसका उद्देश्य गर्भधारण से लेकर बाल्यावस्था तक पोषण संबंधी सेवाओं को सुदृढ़ करना है। जुलाई 2026 में जिला पोषण समिति (डीएनसी) की बैठकों के दौरान सभी जनपदों में अभियान का औपचारिक शुभारम्भ किया जाएगा। अभियान के परिणामों का प्रारम्भिक आकलन अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह में किया जाना प्रस्तावित है। अभियान के प्रभाव और उपलब्धियों का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए नियोजन विभाग के माध्यम से तृतीय पक्ष मूल्यांकन कराया जाएगा। इससे वास्तविक प्रगति का आकलन संभव हो सकेगा और भविष्य की रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। हर्षिता माथुर, निदेशक, बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन

अब हर वर्ष 25 जून से खुलेंगे परिषदीय विद्यालय, 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने की तैयारी

'शिक्षक सर्वोपरि' के मंत्र के साथ शिक्षा सुधारों को नई गति दे रही योगी सरकार, एसीएस ने रखा व्यापक रोडमैप – अब हर वर्ष 25 जून से खुलेंगे परिषदीय विद्यालय, 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने की तैयारी – यूट्यूब लाइव संवाद में लाखों शिक्षकों से जुड़े अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा, कक्षा कक्ष को बताया शिक्षा सुधारों का केंद्र – निपुण भारत मिशन का विस्तार कक्षा 5 तक, स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में आउट ऑफ स्कूल बच्चों पर फोकस – 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा, 21 हजार नई भर्तियों की प्रक्रिया से शिक्षकों में उत्साह लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों का दायरा लगातार व्यापक होता जा रहा है। बुनियादी शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए सरकार शिक्षक सशक्तीकरण, छात्र नामांकन, अधिगम सुधार, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण पर एक साथ कार्य कर रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को यूट्यूब लाइव सत्र के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स से संवाद करते हुए शिक्षा विभाग की आगामी कार्ययोजना और प्राथमिकताओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण बार-बार अवकाश बढ़ाने की स्थिति से बचने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप न्यूनतम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अब परिषदीय विद्यालय प्रत्येक वर्ष 25 जून से संचालित होंगे। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि विद्यालय खुलने पर बच्चों का आत्मीय स्वागत किया जाए तथा गर्मी को देखते हुए उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाए। संवाद के दौरान पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक परिवर्तन का केंद्र कक्षा कक्ष है और शिक्षक उसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर बनाई गई योजनाओं की सफलता अंततः शिक्षक की प्रतिबद्धता और कक्षा में उसके कार्य से तय होती है। इसलिए शिक्षा सुधारों में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से शुरू होने वाले स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान और नामांकन पर विशेष फोकस रहेगा। आशा कार्यकर्ताओं के जन्म रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर की सूचनाओं की सहायता से ऐसे बच्चों तक पहुंच बनाई जाएगी। साथ ही कक्षा 5 से कक्षा 6 में विद्यार्थियों के निर्बाध प्रवेश को सुनिश्चित कर ड्रॉपआउट दर कम करने पर भी विशेष बल दिया जाएगा। नियमित उपस्थिति और सीखने में पीछे रह गए बच्चों के लिए कैच-अप शिक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि निपुण भारत मिशन का दायरा अब कक्षा 5 तक विस्तारित किया जा रहा है। भाषा, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के लिए स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। इसके लिए राज्य स्तर पर एसआरजी और डायट मेंटर्स का प्रशिक्षण प्रारंभ हो चुका है, जो आगे जिला और ब्लॉक स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। आगामी 6 जुलाई को आयोजित होने वाली निपुण संकल्प कार्यशाला में अकादमिक और प्रशासनिक तंत्र मिलकर निपुण जनपद बनाने का संकल्प लेगा। उन्होंने विद्यालयों में पुस्तकालयों, प्रिंट समृद्ध सामग्री और अभिभावक सहभागिता को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। होलिस्टिक प्रोग्रेस रिपोर्ट को और अधिक प्रभावी बनाते हुए उसे वर्ष में दो बार अभिभावकों के साथ साझा करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही विद्यालयों में ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड (DEAR)’ अभियान जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की भी बात कही गई। शिक्षकों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने सभी पात्र लाभार्थियों से समयबद्ध पंजीकरण कराने की अपील की। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में लगभग 11 हजार शिक्षकों और 10 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की जानकारी भी दी। संवाद के अंत में उन्होंने शिक्षकों से अध्ययन और पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने का आह्वान किया। मुंशी प्रेमचंद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निरंतर अध्ययन ही बेहतर शिक्षण और व्यक्तित्व विकास का आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों की निष्ठा, प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता और समाज की सहभागिता के बल पर उत्तर प्रदेश बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में देश के लिए एक नया मॉडल स्थापित करेगा तथा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त करेगा।

योगी सरकार का बड़ा कदम: BSB स्कूलों के छात्रों को मिलेगा मुख्यधारा से जुड़ने का मौका

छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता, बीएसबी से संबद्ध विद्यालयों को मुख्यधारा से जोड़ रही योगी सरकार – यू-डायस प्लस कोड आवंटन और विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया को मिली गति – छात्रों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की पहल – जिलों को आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की कार्रवाई समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तकनीक सक्षम और छात्र केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। शिक्षा सुधारों को संस्थागत मजबूती प्रदान करने और प्रत्येक विद्यार्थी को सुव्यवस्थित शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने के क्रम में अब भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी), हरिद्वार से संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस कोड आवंटन तथा विद्यालय श्रेणी उन्नयन (स्कूल केटेगरी अपग्रेडेशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अंतर्गत संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक अभिलेखों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल प्रशासन, तकनीक आधारित अनुश्रवण और डेटा प्रबंधन को लगातार मजबूती दी जा रही है। यू-डायस प्लस जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार से शिक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है। भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों को इस व्यवस्था से जोड़ने की पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने, अभिलेखों के बेहतर प्रबंधन तथा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों के लिए नवीन यू-डाइस प्लस कोड आवंटन तथा आवश्यकतानुसार विद्यालय श्रेणी उन्नयन की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन, सत्यापन और संस्तुति की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं, उन्हें नवीन कोड आवंटित होंगे निर्देशों में कहा गया है कि जिन विद्यालयों के पास यू-डायस प्लस कोड उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें नवीन कोड आवंटित किए जाने की कार्रवाई की जाएगी, जबकि पूर्व से यू-डायस कोड प्राप्त विद्यालयों के लिए मान्यता के अनुरूप विद्यालय श्रेणी उन्नयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक अभिलेखों, आख्या और संस्तुति सहित प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके। बीएसबी ने किया है नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध उल्लेखनीय है कि भारतीय शिक्षा बोर्ड, हरिद्वार द्वारा संचालित एवं संबद्ध विद्यालयों के लिए यू-डायस प्लस पोर्टल पर नवीन कोड आवंटन तथा कक्षा उन्नयन संबंधी अनुरोध प्राप्त हुए हैं। इसके दृष्टिगत शासन स्तर पर आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। विद्यालयों के यू-डायस प्लस प्रणाली से जुड़ने के बाद उनका शैक्षणिक डाटा राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली में व्यवस्थित रूप से समाहित हो सकेगा, जिससे नामांकन, शैक्षणिक प्रगति, परीक्षा संबंधी अभिलेखों तथा अन्य शैक्षिक प्रक्रियाओं का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट! इस हफ्ते भारत आएंगे अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, जल्द हो सकता है समझौता

नई दिल्‍ली भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट सामने आया है. फरवरी 2025 में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू होने के बाद अब इस हफ्ते अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत आ रहे हैं. इस दौरान वह क्रेंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अन्‍य सीनियर सिटीजन अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।  दोनों देश अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत अंतरिम व्यापार समझौते और संयुक्त बयान पर बातचीत करेंगे. साथ ही भारत और अमेरिका के बीच डील को आगे बढ़ाएंगे. 21 जून को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कार्यालय की ओर से इसकी जानकारी दी गई. साथ ही भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी सोशल मीडिया पोस्‍ट के जरिए इसकी जानकारी दी है।  भारत और अमेरिका के बीच इस डील पर अपडेट तब आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जी-7 समिट के दौरान मुलाकात हुई थी. अमेरिका की ओर से कहा गया है कि जेमिसन ग्रीयर का भारत दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 13 फरवरी 2025 को हुई बैठक के बाद, डील को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए हो रहा है. इस बैठक के तहत डील पर विस्‍तार से आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।  सर्जियो गोर ने एक्स पोस्ट पर क्या कहा? सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'नई दिल्ली में राजदूत ग्रीर का स्वागत करने के लिए उत्साहित हूं। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई बैठकें निर्धारित हैं।' ग्रीर की पीयूष गोयल के साथ बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देश प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को अगले महीने की महत्वपूर्ण टैरिफ समयसीमा से पहले अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। अंतरिम समझौता भविष्य के लिए अहम मंत्रिस्तरीय स्तर की यह बैठक भारत और अमेरिका के बीच चल रही अंतरिम व्यापार समझौते की बातचीत का हिस्सा है। माना जा रहा है कि यह अंतरिम समझौता भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रास्ता तैयार करेगा। बीते रविवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि उनके अमेरिकी समकक्ष व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए नई दिल्ली आने वाले हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत के लिए मेरे समकक्ष कल दिल्ली आ रहे हैं।' बीटीए का पहला चरण अगले महीने तक होगा पूरा इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा था कि दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत का मुख्य उद्देश्य ढांचा समझौते को अंतिम रूप देना और व्यापक व्यापार समझौते पर वार्ता को आगे बढ़ाना होगा। पीयूष गोयल ने भी कहा था कि भारत और अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़े सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया था कि बीटीए का पहला चरण अगले महीने के मध्य तक पूरा किया जा सकता है। यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अमेरिका की ओर से सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाला है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में घोषित यह अस्थायी टैरिफ 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (एमएफएन) शुल्क दरों के अतिरिक्त लगाया गया था। 150 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिका नई टैरिफ व्यवस्था लागू कर सकता है।   यह नई मंत्रिस्तरीय बातचीत 2 जून से 4 जून के बीच नई दिल्ली में हुई मुख्य वार्ताकार स्तर की बैठकों के बाद हो रही है। उन बैठकों में भी प्रस्तावित व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई थी।भारत और अमेरिका दोनों आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से चरणबद्ध व्यापार व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। साथ ही दोनों देश एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। और कहां फंसा है पेच? अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय ने मार्च में भारत समेत कई देशों के खिलाफ धारा 301 के तहत एकतरफा जांच दो मामलों में शुरू की थी। ये जांच ग्लोबल सप्लाई चेनों में कथित बंधुआ मजदूरी और ‘अत्यधिक उत्पादन क्षमता’ से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। यूएसटीआर ने 2 जून को भारत समेत 54 देशों पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था। यह टैरिफ बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहने के आरोप में लगाने की बात कही गई थी। यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है। इस पर हितधारक 22 जून तक सुनवाई में भाग लेने के अनुरोध और बयान जमा कर सकते हैं। यूएसटीआर 7 जुलाई को सुनवाई करेगा। दूसरी जांच की रिपोर्ट अभी पेंडिंग है। क्‍यों महत्‍वपूर्ण है ये बैठक?  भारत और अमेरिका एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं. कुछ सालों में दोनों देशों के बीच व्यापार का आंकड़ा 190 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है. दोनों सरकारों ने आन वाले सालों में व्‍यापार को और बढ़ाने की इच्‍छा जताई है. इस कारण जेमिसन ग्रीर की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्‍योंक इससे व्‍यापार वार्ता की दिशा का संकेत मिल सकता है।  अभी तक डील पर क्‍या हुआ है?  भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्‍यापार समझौते का ऐलान किया गया है, लेकिन अभी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार समझौते को लेकर बातचीत पूरी नहीं हुई है. इस डील पर दोनों पक्ष लगातार बातचीत कर रहे हैं, जल्‍द ही इस डील पर फाइनल मोहर लग सकती है. वहीं भारत अमेरिका से टैरिफ को और कम करने की मांग रख सकता है, जबकि अमेरिका भारत से एग्री के कुछ प्रोडक्‍ट्स को परमिशन देने की मांग कर रहा है। 

गुजरात में AAP विधायक दोषी करार, पत्नी सहित 9 आरोपियों को 7 साल कैद और ₹96 हजार जुर्माना

नर्मदा  गुजरात में नर्मदा जिले की एक कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी और अन्य को 7-7 साल की जेल की सजा सुनाई है। इन पर वन विभाग के अधिकारियों से मारपीट, धमकी देने और वसूली करने का आरोप था। सजा के अलावा विधायक की पत्नी और अन्य पर 96 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। कुल 9 आरोपियों में 4 महिलाएं शामिल हैं। मामला 30 अक्टूबर 2023 का है। आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों ने जंगल की जमीन पर हुए अतिक्रमण हटा दिए थे। इसके बाद विधायक चैतर वसावा ने पांच अधिकारियों को अपने घर बुलाया था। प्राथमिकी के मुताबिक, चैतर वसावा और उनके साथियों ने अधिकारियों के साथ मारपीट की और उनसे प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा देने के नाम पर वसूली की थी। हवाई फायरिंग के भी आरोप लगे थे अभियोजन पक्ष के अनुसार, चैतर वसावा ने इस दौरान हवाई फायरिंग भी की थी। आरोप है कि जिस हथियार का इस्तेमाल किया गया, उसके लिए उनके पास वैध लाइसेंस नहीं था। इसके चलते उन पर आर्म्स एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा दंगा, वसूली, सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने और धमकी देने जैसी धाराएं भी लगाई गईं। आरोप है कि अगले दिन उनके निजी सहायक ने वन अधिकारियों से दोबारा मुआवजे की मांग की थी। अधिकारी ने ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए थे इस घटना के अगले ही दिन, चैतर वासावा के पीए और अन्य लोगों ने दो अधिकारियों से 30-30 हजार रुपए की फिरौती मांगी थी। चूंकि वन कर्मचारियों के पास कैस पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया और दो अधिकारियों ने 30-30 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए थे। कोर्ट में इसे सबूत के तौर पर पेश किया गया था मामले में कौन-कौन आरोपी था इस मामले में चैतर वसावा के अलावा उनकी पत्नी शकुंतला वसावा, पीए जितेंद्र वसावा और 6 ग्रामीणों को आरोपी बनाया गया था। शकुंतला वसावा उस समय नर्मदा जिला पंचायत की सदस्य थीं। घटना के बाद कुछ आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, चैतर वसावा कई दिनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहे। उन्होंने 14 दिसंबर 2023 को सरेंडर किया था। बाद में 2024 के लोकसभा चुनाव में भरूच सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत से चर्चा में आए थे चैतर वसावा AAP के टिकट पर साल 2022 के विधानसभा चुनाव में डेडियापाड़ा सीट से जीतकर चर्चा में आए थे। उनकी जीत ने दक्षिण गुजरात के आदिवासी इलाके में AAP को मजबूत आधार दिया था। चैतर वसावा ने खुद को आदिवासी भूमि अधिकारों के प्रमुख नेता के रूप में स्थापित किया है। हालांकि, अब अदालत के फैसले ने उनकी राजनीतिक राह मुश्किल कर दी है।

82 ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, स्वच्छता कर्मियों एवं हितधारकों को दिया गया व्यवहारिक प्रशिक्षण

रायपुर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायगढ़ में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायगढ़ के सहयोग से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत नगर निगम ऑडिटोरियम, रायगढ़ में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।   पंचायत प्रतिनिधि एवं अन्य हितधारकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान राज्य सलाहकार मती मोनिका सिंह एवं  पुरुषोत्तम पंडा ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रतिभागियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं सतत ग्रामों के निर्माण में वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा सभी ग्राम पंचायतों को नियमों के अनुरूप कार्य करना आवश्यक होगा। कचरा पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष जोर प्रशिक्षण सत्र में घरेलू एवं सामुदायिक स्तर पर उत्पन्न होने वाले विभिन्न प्रकार के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को 4-वे कचरा पृथक्करण प्रणाली की जानकारी दी गई, जिसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी अपशिष्ट तथा घरेलू खतरनाक अपशिष्ट को अलग-अलग संग्रहित करने एवं उनके सुरक्षित निस्तारण की प्रक्रिया समझाई गई। विशेषज्ञों ने बताया कि स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण करने से अपशिष्ट प्रबंधन अधिक प्रभावी एवं पर्यावरण अनुकूल बनता है। ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण, परिवहन एवं अंतिम निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करने पर भी बल दिया गया। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि ग्राम पंचायत क्षेत्रों में कचरे को खुले में फेंकना, जलाना अथवा भूमि में दबाना नियमों के विरुद्ध है तथा ऐसे मामलों में जुर्माना सहित वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। बल्क वेस्ट जेनरेटरों के पंजीयन और जनजागरूकता पर चर्चा  कार्यशाला में बल्क वेस्ट जेनरेटरों की पहचान एवं उनके पंजीयन की प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर बल्क वेस्ट जेनरेटरों के पंजीयन की प्रक्रिया समझाई गई तथा बताया गया कि बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के अपशिष्ट प्रबंधन की नियमित निगरानी की जाएगी।  प्रशिक्षण के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता अभियान संचालित करने, प्रत्येक परिवार को कचरा पृथक्करण के लिए प्रेरित करने तथा स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने संबंधी दिशा-निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि सामुदायिक सहभागिता और जनजागरूकता के माध्यम से ही स्वच्छ, स्वस्थ एवं पर्यावरण अनुकूल ग्रामों का निर्माण संभव है।  कार्यक्रम में मुख्य रसायनज्ञ  नवीन चंद्र मालवीय, वैज्ञानिक सु श्वेता खाखा, वैज्ञानिक  सतीश पटेल, पर्यावरण विभाग के अधिकारीगण, जिला पंचायत से एपीओ  वीरेंद्र सिंह राय, जिला सलाहकार (एसबीएम-जी)  अर्जुन मेहेर, विभिन्न जनपद पंचायतों की एसबीएम-जी टीम, सरपंच, सचिव एवं स्वच्छाग्रही बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने ग्राम पंचायत क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।

नोएडा ने रचा नया इतिहास, देश की पहली स्मार्ट कचरा व्यवस्था शुरू; सफाई व्यवस्था होगी पूरी तरह हाईटेक

नोएडा  नोएडा प्राधिकरण शहर में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कई बड़े बदलाव करने जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है, ताकि वह सड़क पर किसी भी प्रकार का कचरा न फेंकें। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीकी से लैस कचरा पेटियों (डस्टबिन) की व्यवस्था की जाएगी। जैसे ही इन डस्टबिन में कचरा भर जाएगा, कंट्रोल रूम में घंटी बजने लगेगी। इससे प्राधिकरण का जन स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो जाएगा और कचरा कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह व्यवस्था देश में पहली बार नोएडा में लागू की जा रही है। प्रथम चरण में इसे सार्व जनिक शौचालयों पर लागू किया जाएगा। प्राधिकरण ने शहर में 320 सार्वजनिक शौचालयों की स्थापना की है, जो पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत संचालित हो रहे हैं। इस माॅडल की सराहना करते हुए मिनिस्ट्री आफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स (महुआ) ने अन्य नगर निगमों को भी इसे अपनाने की सलाह दी है। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन डस्टबिन को शौचालयों के बाहर स्थापित किया जाएगा, जो जीपीएस और सेंसर से युक्त होंगे। इनकी मानिटरिंग इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) द्वारा की जाएगी, जहां डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की सभी गाड़ियों की निगरानी होती है। हालांकि नियमित डस्टबिन की सफाई और कचरा कलेक्शन का कार्य जारी रहेगा। यदि डस्टबिन में कचरा भर जाता है और कंट्रोल रूम पर घंटी बजती है, तो कचरा उठाने वाली गाड़ी मौके पर पहुंचकर डस्टबिन से कचरा हटा देगी। इससे सड़क पर कचरा फेंकने वालों को रोका जा सकेगा। शहर की जनसंख्या के अनुसार, वर्तमान में साढ़े छह लाख की आबादी के लिए डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जा रहा था। नई जनगणना के अनुसार, लगभग पांच लाख मकान और 14.5 लाख की आबादी सामने आई है। इस बदलाव के चलते कचरा कलेक्शन के लिए नए नियमों के तहत कार्ययोजना बनाई जाएगी। कम से कम दो टेंडर जारी किए जाएंगे, जिससे गली, गांव, सेक्टर, सोसायटी और बाजारों में कचरा एकत्र करने का कार्य किया जाएगा। जनगणना के बाद शहर की स्थिति     नई जनगणना के हिसाब से करीब पांच लाख मकान     नई जनगणना के हिसाब से करीब आबादी 14.5 लाख     पुरानी जनगणना के हिसाब से करीब दो लाख मकान     पुरानी जनगणना के हिसाब से शहर की आबादी 6.5 लाख शहर में शौचालयों की स्थिति     पब्लिक टाॅयलेट : 117     कम्यूनिटी टाॅयलेट : 67     पिंक टाॅयलेट : 16     यूरिनल ब्लाॅक्स : 120     "तमाम फाइव स्टार व थ्री स्टार होटल्स में अत्याधुनिक शौचालय तैयार किए गए है, नोएडा में भी सड़क किनारे लग्जरी टायलेट की सुविधा उपलब्ध कराया जा रही है। ऐसे में अत्याधुनिक तकनीकी से लैस डस्टबिन को शौचालयों के बाहर लगवाजाएगा, जिसमें कचरा डालने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। वैसे अधिकांश शौचालय उन्हीं जगहों पर बने है, जहां पर वेंडिंग जोन बाजार,आम जनमानस के आने जाने के पर्याप्त स्थान है।"     -इंदु प्रकाश सिंह, ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण।  

इंजीनियरिंग छात्रों के लिए खुशखबरी: MP में घट सकती है कॉलेज फीस, निजी संस्थानों ने दिया प्रस्ताव

भोपाल  प्रदेश के निजी कॉलेजों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई और सस्ती हो जाएगी। कई इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शुल्क विनियामक समिति (एफआरसी) को अपने न्यूनतम शुल्क में कटौती का प्रस्ताव भेजा है। उनकी मांग है कि उनके यहां शिक्षण शुल्क 35 हजार रुपये सालाना कर दिया जाए। इसकी मंजूरी मिलती है तो यह निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के पूरे तंत्र को प्रभावित करेगा। छात्रों की कमी से जूझ रहे संस्थान दरअसल निजी संस्थान विद्यार्थियों की कमी से जूझ रहे हैं। पिछले एक दशक में 58 कॉलेज बंद हो चुके हैं। इस बीच केवल एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खुला है। पिछले वर्षों में इन कॉलेजों की औसतन 45 से 55 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाए। वहीं सरकारी कॉलेजों में 80 से 90 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं। इस वजह से घट रही संख्या विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योगों की जरूरतों और इंजीनियरिंग कोर्स के बीच बढ़ती दूरी, रोजगार को लेकर विद्यार्थियों की बदलती प्राथमिकताएं और नई तकनीकों के अनुरूप पाठ्यक्रम का समय पर अपडेट नहीं होना है इसका प्रमुख कारण है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में अधिकतर प्रवेश दूसरे राज्यों के विद्यार्थी लेते हैं। सीटें रिक्त रहने से बढ़ रही लागत कटौती का प्रस्ताव देने वाले कॉलेजों का तर्क है कि सीटें खाली रहने के कारण प्रति विद्यार्थी लागत बढ़ रही है। इससे संस्थान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। यदि शुल्क कम नहीं किया गया तो संचालन और मुश्किल हो जाएगा। कहा जा रहा है कि शुल्क कटौती से दूसरे प्रदेश के विद्यार्थियों के अलावा प्रदेश के कम आय वाले परिवारों के बच्चे भी आकर्षित होंगे। दूसरे राज्यों की तुलना में पहले से कम है फीस यहां पर यह भी बता दें कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों में इंजीनियरिंग का वार्षिक शुल्क औसतन एक से डेढ़ लाख रुपये तक है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने भी न्यूनमत शुल्क करीब 80 हजार रुपये तय किया है। इसके उलट मध्यप्रदेश में यह शुल्क 40 से 60 हजार रुपये तक है। पांच वर्षों के दौरान यह स्थिति वर्ष — कॉलेज — सीटें — प्रवेशित 2021-22 — 126 — 47,520 — 28,534 2022-23 — 124 — 58,535 — 31,659 2023-24 — 123 — 60,754 — 33,334 2024-25 — 142 — 73,637 — 42,924 2025-26 — 128 — 64,473 — 38,171     उप्र, महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों की तुलना में यहां इंजीनियरिंग का शुल्क कम है। इस कारण यहां पर दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी प्रवेश लेते हैं। कुछ कॉलेज विवि में कन्वर्ट हो रहे हैं, इसलिए वे काउंसलिंग में शामिल नहीं हो रहे हैं।     – डा. अजीत सिंह पटेल, उपाध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ टेक्निकल प्रोफेशनल इंस्टि्टयूशंस मप्र     पांच-छह इंजीनियरिंग कॉलेजों से शुल्क तय करने के प्रस्ताव आए हैं। समिति कालेजों का लेखा-जोखा देखकर न्यूनतम शुल्क तय करती है। इस पर विचार किया जा रहा है।     – डॉ. अनिल शिवानी, सचिव, एफआरसी