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Apple का बड़ा झटका: iPad और MacBook हुए 42% तक महंगे, iPhone की कीमत क्यों नहीं बदली?

अमेरिकी टेक कंपनी ऐपल ने भारत समेत दुनियाभर में अपने कस्टमर को बड़ा झटका दिया है. कंपनी ने अपने प्रोडक्ट की कीमत में 42 परसेंट तक का इजाफा कर दिया है, जिसकी वजह iPad से लेकर मैकबुक आदि खरीदने वालों को ज्यादा रकम खर्च करनी होगी. कंपनी ने iPhone की कीमत में कोई  बदलाव नहीं किया है. आइए जानते हैं क्यों? Apple ने एक खास रणनीति के तहत अभी आईफोन की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया है. कंपनी अपने सबसे ज्यादा रेवेन्यू कमाने वाले प्रोडक्ट की कीमत में कोई छेड़छाड़ नहीं करना चाहती है. हालांकि आगे कीमत में बदलाव होगा या नहीं, उसके बारे में अभी कहना मुश्किल है. कीमत बढ़ाने के पीछे मुख्य वजह महंगे होते कंपोनेंट हैं. चिप, मेमोरी और अन्य कंपोनेंट के दाम में इजाफा हो रहा है, जिसकी वजह से कंपनी ने आईपैड से लेकर मैकबुक तक की कीमत में इजाफा किया है. ऐसा करके कंपनी अपने प्रोफिट को बरकरार रखना चाहती है. बीते दो क्वार्टर में कीमत में इजाफा नहीं ऐपल बीते करीब दो क्वार्टर से महंगे कंपोनेंट और अन्य प्रोडक्ट की बढ़ी हुई कीमत का सामना कर रहा था. कंपनी ने इसका बोझ कस्टमर पर नहीं पड़ने दिया. अब कंपनी ने iPad और मैकबुक की कीमत में इजाफा कर दिया है. AI डेटा सेंटर्स के लिए भी कंपोनेंट तैयार हो रहे दरअसल, चिप उत्पादन करने वाली कंपनियां अब AI डेटा सेंटर्स के लिए भी कंपोनेंट तैयार कर रही हैं, जिसकी वजह से उनपर दबाव बढ़ गया है. ऐसे में वे मोबाइल, लैपटॉप आदि के लिए पूरी तरह से सप्लाई नहीं दे पा रहे हैं और उन्होंने कीमत में भी इजाफा कर दिया है.

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, नालों की सफाई की निगरानी अब IAS और HCS अधिकारियों के जिम्मे

चंडीगढ़. हरियाणा में मानसून की तैयारियों तथा जमीनी स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आईएएस एवं एचसीएस अधिकारियों को नालों का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान प्री-मानसून डी-सिल्टिंग (गाद निकासी) कार्यों की गुणवत्ता की जांच भी की जाएगी। सभी 87 शहरी स्थानीय निकायों में चल रहे नालों के सफाई कार्यों की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने नगर निगम आयुक्तों तथा उपायुक्तों को निर्देश दिए कि अगले तीन दिन के भीतर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से अपने क्षेत्रों में जल निकासी अवसंरचना का मौके पर जाकर निरीक्षण कराया जाए। विशेष निगरानी अभियान के तहत प्रत्येक आईएएस और एचसीएस अधिकारी को अपने अधिकार क्षेत्र में कम से कम पांच किलोमीटर लंबाई के नालों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को निरीक्षण से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट, फोटोग्राफ तथा स्थलीय अवलोकन सहित शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आनलाइन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी, ताकि कार्यों की वास्तविक समय में निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। मुख्य सचिव ने कहा कि मानसून की तैयारियां केवल कार्यालय में बैठकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं मौके पर जाकर डी-सिल्टिंग कार्यों की गुणवत्ता का सत्यापन करना होगा। संवेदनशील स्थानों की पहचान करनी होगी। कमियों का पता लगाना होगा तथा आवश्यकतानुसार तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नाले का निरीक्षण सुनिश्चित कर सभी रुकावटें दूर की जाएं। लंबित कार्यों को मानसून शुरू होने से पहले पूरा किया जाए, ताकि शहरी क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके। बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा और पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के मकरंद पांडुरंग ने भी अपनी बात रखी।

अंडा vs सोया चंक्स: प्रोटीन के मामले में कौन है ज्यादा फायदेमंद, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

प्रोटीन की बात जब भी आती है, तो अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि आखिर सबसे बेस्ट ऑप्शन क्या है. हाल ही में पश्चिम बंगाल के मिड-डे मील प्रोग्राम में अंडे की जगह सोया चंक्स को शामिल करने के फैसले ने एक नई बहस छेड़ दी है. यह विवाद सिर्फ डाइट तक सीमित नहीं, बल्कि पोषण की क्वालिटी और शाकाहार VS मांसाहार के बीच भी सिमट गया है. अंडे को जहां हाई क्वालिटी एनिमल प्रोटीन का बेस्ट सोर्स माना जाता है, वहीं सोया चंक्स वेजीटेरियन लोगों के लिए एक किफायती और दमदार विकल्प के रूप में देखे जाते हैं. तो आखिर क्या वाकई सोया चंक्स अंडे की कमी पूरी कर सकते हैं? दोनों ही प्रोटीन के पावरहाउस माने जाते हैं लेकिन फिर भी यह बहस काफी पहले से चली आ रही है. अंडे को जहां हाई क्वालिटी एनिमल प्रोटीन का बेस्ट सोर्स कहा जाता है वहीं सोया चंक्स वेजीटेरियन लोगों के लिए प्रोटीन का सबसे सस्ता और बेहतरीन विकल्प है. कई लोग वजन घटाने या मसल्स बनाने के लिए भी डाइट में इन्हें शामिल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी फिटनेस गोल्स के हिसाब से इनमें से क्या चुनना ज्यादा फायदेमंद है? आइए जानते हैं क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स. अंडे और सोया चंक्स प्रोटीन क्वालिटी और एब्जॉर्प्शन के मामले में अंडे को हमेशा नंबर वन माना जाता है. हेल्थलाइन का कहना है, अंडे में सभी 9 जरूरी अमीनो एसिड्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो मसल्स रिपेयर और ओवरऑल हेल्थ के लिए जरूरी हैं. 1 अंडे में करीब 6-7 ग्राम प्रोटीन होता है. इसकी बायो-अवेलेबिलिटी बहुत ज्यादा होती है जिसका मतलब है कि आपका शरीर इसे बहुत आसानी से इस्तेमाल कर लेता है. दूसरी तरफ सोया चंक्स प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का एक शानदार सोर्स हैं. इसमें भी सभी अमीनो एसिड्स होते हैं लेकिन इसकी क्वालिटी और एब्जॉर्प्शन रेट अंडे के मुकाबले थोड़ी कम हो सकती है. हालांकि, फाइबर की बात करें तो सोया चंक्स इस मामले में बाजी मार ले जाते हैं. 50 ग्राम सोया चंक में करीब 25 ग्राम प्रोटीन होता है. कौन है आपके लिए बेस्ट? यदि आप मसल बिल्डिंग पर फोकस कर रहे हैं तो अंडा एक कंप्लीट और सुपीरियर प्रोटीन सोर्स है. इसकी डाइजेस्टिबिलिटी अंडे की तुलना में ज्यादा मानी जाती है. हालांकि यदि आप शुद्ध शाकाहारी हैं या बजट फ्रेंडली ऑप्शन ढूंढ रहे हैं तो सोया चंक्स एक बेस्ट ऑल्टरनेटिव है. वेबएमडी की रिपोर्ट के अनुसार, सोया जैसे प्लांट-बेस्ड सोर्स न सिर्फ प्रोटीन देते हैं बल्कि हार्ट हेल्थ में भी सुधार कर सकते हैं. बस ध्यान रखें कि सोया चंक्स को अगर आप अनाज जैसे चावल या रोटी के साथ मिलाकर खाएं, तो यह इसकी प्रोटीन प्रोफाइल को और बेहतर बना देता है. अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले हमेशा अपनी बॉडी की जरूरतों को समझना जरूरी है.

Esha Deol ने तलाक के बाद रिश्तों पर तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘गलती होती है’, रोमांस को लेकर दिया बड़ा बयान

मुंबई  ईशा देओल ने 2012 में बिजनेसमैन भरत तख्तानी से शादी रचाई थी. 2024 में आपसी सहमति से दोनों ने 12 साल पुरानी शादी को खत्म करने का ऐलान किया. तलाक के बाद ईशा ने जिंदगी में खालीपन और प्यार की कमी पर बात की है. उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें रोमांस पसंद है।  तलाक के बाद प्यार की कमी  Curly Tales संग बातचीत में ईशा ने कहा कि मेरा मानना है कि प्यार और रोमांस किसी भी व्यक्ति की जिंदगी में सबसे अहम चीजें हैं, और फिलहाल ये चीजें मेरी जिंदगी में मिसिंग हैं. मुझे रोमांटिक होना बहुत पसंद है, मैं पूरी तरह एक रोम-कॉम वाली इंसान हूं. मुझे प्यार के गाने और प्यार की कहानियां बहुत पसंद हैं।  ईशा से पूछा गया कि क्या पति से अलग होने के बाद प्यार के लिए उनका नजरिया बदला. इस पर उन्होंने कहा कि नहीं, ये चीजें बदलती नहीं हैं. ब्रेकअप होते रहते हैं. मेरे भी पहले बॉयफ्रेंड रहे हैं जिनसे मैं अलग हुई. ऐसी चीजें होती हैं, पर इससे प्यार के प्रति मेरा नजरिया नहीं बदला है. ना ही इसमें कोई कमी आई है.  हम सबने हेमाजी और धर्मेंद्रजी के बीच के निःस्वार्थ प्यार को देखा है।  तलाक के बारे में उन्होंने कहा कि ये कुछ बहुत निजी है. ये दो लोगों के बीच की बात है. हमारे पेशे के कारण यह सब सार्वजनिक हो जाता है. मैं ऐसी इंसान नहीं हूं  और न ही भरत या उनका परिवार, जो हर चीज को इतना खुलकर बताए. पर उस वक्त हमें सार्वजनिक किया गया और इसमें बच्चों का भी सवाल आता है. ये जिंदगी के बहुत संवेदनशील हिस्से हैं. इनमें बहुत संभलकर चलना होता है. ईशा ने ये भी कहा कि उनके इस फैसले में परिवार ने साथ दिया।  एक्ट्रेस ने कहा कि वो अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेती हैं. ना कि किसी की सलाह पर निर्भर रहती हैं. ईशा का कहना है कि उनका फैसला सही हो या गलत उसकी जिम्मेदारी वो खुद लेती हैं।  बता दें कि ईशा और भरत की दो बेटियां राध्या और मिराया हैं. बड़ी बेटी का जन्म 2017 में हुआ और छोटी का जन्म 2019 में हुआ. तलाक के बाद ईशा और भरत मिलकर बेटियों की को-पेरेंटिंग कर रहे हैं।  

तरनतारन में ASI ने सर्विस रिवॉल्वर से की आत्महत्या, पुलिस विभाग में मचा हड़कंप

तरनतारन. विधानसभा हलका पट्टी के गांव कैरो पुलिस चौकी के प्रभारी एएसआई अमरजीत सिंह ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। अमृतसर निवासी अमरजीत सिंह का शव कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि अभी तक आत्महत्या की वजह का पता नहीं चल पाया। एएसआई अमरजीत सिंह करीब 4 माह से पुलिस चौकी में पत्थर प्रभारी तैनात थे। उनके साथ चौकी में तीन अन्य कर्मचारी भी तैनात थे। गुरुवार की शाम को नाकाबंदी के बाद खाना खाकर 9:30 बजे रात अपने क्वार्टर में गए वहां विश्राम के दौरान कमरे से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। क्योंकि मैं तैनात आने कर्मी ने मौके पर जाकर देख के ऐसी अमरजीत सिंह लहू लुहान पड़े थे और हाथ में उनके सर्विस पिस्टल थी। अमरजीत ने खुद की कनपटी पर पिस्टल लगाकर गोली चलाई जो उनकी मौत का कारण बनी। सूचना मिलते ही डीएसपी रविशेर सिंह मौके पर पहुंचे आशी का कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल के शव ग्रह में रखवा दिया गया है। कम नफरी के बीच ड्यूटी का था बोझ एएसआई अमरजीत सिंह ने खुद को गोली क्यों मारी इस बाबत अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई। हालांकि सूत्रों का कहना है कि पुलिस चौकी में नौकरी की कमी के चलते एएसआई अमरजीत सिंह कई बार अपना तबादला करवाने लिए अधिकारियों को कह चुके थे। एक ही सब डिवीजन में दूसरी घटना अभी 15 जून को पट्टी की अदालती परिसर में सुरक्षा में तैनात एएसआई गुरमीत सिंह ने खुद को गोली मारी थी जिनकी 7 दिन बाद अमृतसर के निजी अस्पताल में मौत हुई है।डीएसपी रविशेर सिंह ने बताया कि सब कब्जे में लेकर विभिन्न पहलुओं पर पड़ताल की जा रही है।

Apple प्रोडक्ट्स हुए 42% तक महंगे: MacBook Pro और iPad Air की कीमतों में भारी बढ़ोतरी

ऐपल ने भारत समेत दुनियाभर में अपने प्रोडक्ट के दाम बढ़ा दिए हैं, जिसमें मैकबुक से लेकर iPad तक का नाम शामिल है. कंपनी ने प्रोडक्ट की शुरुआती कीमत में 20 से 42 परसेंट तक का इजाफा किया है. यहां तक कि MacBook Pro के शुरुआती वेरिएंट की कीमत में 1 लाख रुपये का इजाफा हुआ है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं. कंपनी का कहना है कि कीमत बढ़ने के पीछे की मुख्य वजह मेमोरी चिप्स और अन्य कंपोनेंट की बढ़ती लागत है. Apple India पोर्टल पर नई प्राइस लिस्ट आ चुकी है. पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि M5 सीरीज चिप वाले MacBook Pro की कीमत में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा चुकी है. MacBook Pro M5 Pro की नई कीमत 14-इंच MacBook Pro M5 Pro चिप वाले की कीमत अब 2,99,900 रुपये हो चुकी है. वहीं, लॉन्चिंग के दौरान इसकी शुरुआती कीमत 2,49,900 रुपये थी.   MacBook Pro 14-inch (M5 Max variant) की कीमत में करीब 1 लाख रुपये तक का इजाफा हुआ है. ये जानकारी इंडियाटुडे की रिपोर्ट से मिली है. iPad Air की कीमत में भारी इजाफा हुआ है. 13-इंच iPad Air के बेस मॉडल की कीमत 84,900 रुपये से बढ़ाकर 1,19,900 रुपये कर दी जा चुकी है, जो करीब 42 परसेंट तक का इजाफा है. कीमत बढ़ाने की वजह काउंटर रिसर्च के को-फाउंडर और रिसर्च वीपी नील शाह ने बताया है कि मैकबुक नियो, मैकबुक एयर, मैकबुक प्रो, आईपैड एयर और आईपैड प्रो वाईफाई की कीमत लागत में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है. मेमोरी से सेमीकंडक्टर चिप्स की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है. चिप मेकर AI डेटा सेंटर के लिए भी कर रही हैं काम मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियां अब अपने मैन्युफैक्चरर का बड़ा हिस्सा AI डेटा सेंटरों को दे रही हैं. ऐसे में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए मेमोरी चिप्स की कमी हो चुकी है और उनकी लागत बढ़ रही है. नील शाह ने बताया है कि ऐपल ने करीब दो तिमाहियों तक कीमतें नहीं बढ़ाईं और महंगाई का असर ग्राहकों तक नहीं पहुंचने दिया. अब कंपनी के लिए बढ़ी हुई लागत का बोझ उठाना मुश्किल हो गया है, जिसकी वजह ये कीमत में इजाफा हुआ है. Apple इस साल अपने नए ऑन-डिवाइस Apple Intelligence जैसा फीचर लॉन्च कर सकती है. इसके लिए डिवाइस को और ज्यादा मेमोरी और रैम की जरूरत पड़ सकती है.

वास्तु शास्त्र के अनुसार मनी प्लांट लगाने के 7 नियम, सही दिशा से आती है समृद्धि

 वास्तु शास्त्र में पेड़-पौधों का विशेष महत्व बताया गया है.  इनमें से मनी प्लांट को न केवल एक सजावटी पौधा माना जाता है, बल्कि इसे समृद्धि का सूचक भी माना गया है. घर में मनी प्लांट का सही चुनाव और उसे रखने का सही तरीका आर्थिक उन्नति में मददगार हो सकता है. यदि इसे गलत दिशा या गलत तरीके से लगाया जाए, तो यह घर में नकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक तंगी का कारण भी बन सकता है. आइए जानते हैं मनी प्लांट से जुड़े उन 7 जरूरी वास्तु नियमों के बारे में, जो आपके घर में खुशहाली ला सकते हैं. मनी प्लांट के लिए 7 अनिवार्य नियम सही दिशा का चुनाव: वास्तु शास्त्र के अनुसार, मनी प्लांट को हमेशा घर के दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) दिशा में लगाना चाहिए.  इस दिशा के स्वामी भगवान गणेश हैं और इसे शुक्र की दिशा भी माना जाता है.  उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में इसे कभी न रखें, क्योंकि यह स्थान गुरु का होता है और यहां मनी प्लांट लगाने से आर्थिक नुकसान हो सकता है. बेल को बढ़ने दें ऊपर की ओर: मनी प्लांट की बेल का विकास ही आपकी आर्थिक प्रगति का प्रतीक है. ध्यान रखें कि इसकी बेल जमीन पर नहीं फैलनी चाहिए. इसे किसी स्टिक या धागे के सहारे ऊपर की दिशा में चढ़ाएं, जिससे आपकी तरक्की और उन्नति के रास्ते खुलते हैं. सूखे पत्तों से बचाव: पौधे की देखभाल करना बहुत जरूरी है.  यदि मनी प्लांट के पत्ते पीले पड़ जाएं या सूख जाएं, तो उन्हें तुरंत हटा दें. सूखे पत्ते घर में नकारात्मकता और दुर्भाग्य का संकेत माने जाते हैं. पानी का सही उपयोग: यदि आप इसे पानी में लगा रहे हैं, तो बोतल का पानी हर हफ्ते बदलते रहें. पानी स्थिर रहने से उसमें मच्छर या गंदगी पैदा हो सकती है, जो वास्तु के अनुसार नकारात्मक ऊर्जा का कारक है.  इसके लिए नीले रंग की कांच की बोतल का प्रयोग करना भी शुभ माना जाता है. उपहार देने से बचें: ऐसी मान्यता है कि घर का मनी प्लांट किसी अन्य व्यक्ति को उपहार में नहीं देना चाहिए.  माना जाता है कि ऐसा करने से घर की समृद्धि और लक्ष्मी बाहर चली जाती है. कांटेदार पौधों से दूरी: मनी प्लांट के पास कभी भी कैक्टस या कोई अन्य कांटेदार पौधा न रखें. कांटेदार पौधों से निकलने वाली ऊर्जा मनी प्लांट की सकारात्मकता को कम कर सकती है. साफ-सफाई का रखें ध्यान: मनी प्लांट के आसपास का स्थान हमेशा साफ-सुथरा रखें. मनी प्लांट के पास गंदगी होने से घर की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है.

बस्तर में धान खरीद व्यवस्था पर सवाल, उठाव में देरी से करोड़ों की फसल हुई खराब

सुकमा. सुकमा में धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया करीब 2 करोड़ 68 लाख रुपये मूल्य का धान या तो रिकॉर्ड से गायब मिला या फिर खुले में पड़े-पड़े अमानक हो गया. जिला स्तरीय सत्यापन में 1115.86 मीट्रिक टन धान रिकॉर्ड से कम पाया गया, जबकि 1295.90 मीट्रिक टन धान डेढ़ साल तक उठाव नहीं होने से खराब हो गया. यह वही धान था, जिसे मिलिंग के बाद गरीब परिवारों तक चावल के रूप में पहुंचना था. विभाग ट्रांसपोर्टिंग लक्ष्य पूरा होने का तर्क दे रहा है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि लक्ष्य पूरा होने के बाद धान की सुरक्षा और समय पर उठाव की जिम्मेदारी किसकी थी? कई स्तरों की निगरानी व्यवस्था के बावजूद करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति का नुकसान प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नुकसान की जिम्मेदारी तय होगी या नहीं. बस्तर संभाग में चार लाख क्विंटल धान असुरक्षित पड़ा धान खरीदी खत्म हुए चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन प्रदेश के खरीदी केंद्रों में अब भी 10.76 लाख क्विंटल से ज्यादा धान पड़ा हुआ है। मानसून करीब है और समय पर बारिश शुरू होने की स्थिति में यह धान खराब हो सकता है। समर्थन मूल्य के आधार पर इसकी कीमत 333.74 करोड़ रुपए से अधिक है। खरीदी केंद्रों में अभी 7,48,310 क्विंटल मोटा, 1,21,020 क्विंटल पतला और 2,07,250 क्विंटल सरना धान का परिवहन बाकी है। परिवहन में लगातार हो रही देरी के कारण एक बार फिर करोड़ों रुपए के धान के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। साल 2025-26 में प्रदेश में कुल 14.10 करोड़ क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। इसमें से 12.34 करोड़ क्विंटल धान राइस मिलर्स को और 1.65 करोड़ क्विंटल धान संग्रहण केंद्रों में भेजा गया। नियम के अनुसार 31 मार्च तक खरीदी केंद्रों से धान का पूरा उठाव हो जाना चाहिए था, लेकिन समय-सीमा बढ़ाकर 31 मई कर दी गई। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में धान अब भी केंद्रों में जमा है। अब बारिश में खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।

स्वस्थ बच्चे बनेंगे समृद्ध समाज का आधार : सीएम योगी आदित्यनाथ

स्वस्थ रहने के लिए स्वास्थ्यप्रद व स्वच्छ आहार-विहार आवश्यक : मुख्यमंत्री  स्वस्थ बच्चे बनेंगे समृद्ध समाज का आधार : सीएम योगी आदित्यनाथ सीएम योगी ने राज्य सरकार के सहयोग से बने अक्षयपात्र फाउंडेशन के केंद्रीयकृत रसोईघर का किया उद्घाटन नए सत्र में गोरखपुर के एक लाख स्कूली बच्चों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण गर्मागर्म भोजन : सीएम योगी गोरखपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए स्वास्थ्यप्रद एवं स्वच्छ आहार-विहार का होना आवश्यक है। कुपोषण से मुक्ति के लिए जरूरी है कि स्वच्छता का ध्यान रखते हुए बच्चों को पौष्टिक आहार मिले। समाजहित में यह कार्य अक्षयपात्र फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। स्वच्छ और पौष्टिक आहार मिलने से स्वस्थ बच्चे समृद्ध समाज का आधार बनेंगे।   सीएम योगी गुरुवार शाम गोरखपुर में राज्य सरकार के सहयोग से बने, एक लाख बच्चों के लिए भोजन क्षमता वाले अक्षयपात्र फाउंडेशन के केंद्रीयकृत रसोईघर के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों के मिड डे मील के लिए अक्षयपात्र फाउंडेशन की तरफ से भोजन निर्माण में स्वच्छता, पोषण और गुणवत्ता का जो ध्यान रखा जाता है, वह सबके लिए सीखने लायक है।  सीएम योगी ने कहा कि मथुरा, लखनऊ, वाराणसी, आगरा, कानपुर में अक्षयपात्र फाउंडेशन के रसोईघर पहले से संचालित हैं। अब सरकार के सहयोग से गोरखपुर में केंद्रीयकृत रसोईघर का निर्माण कर इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। नए शैक्षिक सत्र में 50 हजार से अधिक स्कूली बच्चों को फिर कुछ समय में ही 1 लाख बच्चों को यहां से गर्मागर्म भोजन मेन्यू के हिसाब से प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि खाद्यान्न और कन्वर्जन कास्ट सरकार उपलब्ध कराती है। बेहतर ढंग से भोजन बनाने और वितरण का कार्य अक्षयपात्र की तरफ से किया जा रहा है।  भोजन की क्वालिटी देखनी हो तो शुरुआत स्वच्छता से करें मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबको सोचना चाहिए। हम स्वस्थ तभी रहेंगे जब हमारा आहार स्वच्छ होगा। आहार स्वच्छ होगा तो वह स्वास्थ्यप्रद भी होगा। पौष्टक आहार से शरीर स्वस्थ होगा और शरीर स्वस्थ रहने पर ही मस्तिष्क भी स्वस्थ होगा। उन्होंने कहा कि घर हो या बाजार, भोजन की क्वालिटी देखनी हो तो शुरुआत स्वच्छता से करें। स्वच्छता में असावधानी होने पर ही फ़ूड पॉयजनिंग जैसी घटनाएं होती हैं। उन्होंने भोजन तैयार और वितरण करने में स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के लिए अक्षयपात्र फाउंडेशन की सराहना की।  विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में योगदान करेंगे स्वस्थ बच्चे मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्षयपात्र फाउंडेशन के सहयोग से गोरखपुर में 1 लाख बच्चे पौष्टिक भोजन प्राप्त कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुपोषण मिशन के लक्ष्य को प्राप्त कर विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बच्चे भी भविष्य में समृद्ध समाज और सशक्त राष्ट्र का आधार बनेंगे।  सशक्त समाज की मजबूत कड़ी है शिक्षा सीएम योगी ने कहा कि शिक्षा, समृद्ध समाज की आधारशिला और सशक्त राष्ट्र की मजबूत कड़ी है। शिक्षा से ही समाज का वर्तमान और भविष्य तय होता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के बेसिक स्कूलों में मिशन कायाकल्प से और माध्यमिक स्कूलों में प्रोजेक्ट अलंकार से ढांचागत सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने आज से शुरू हुए बेसिक शिक्षा के सत्र को लेकर शिक्षकों का आह्वान किया कि वे प्रयास करें कि एक भी बच्चा स्कूल आने से वंचित न रहे। विद्यालय में प्रवेश दिलाने के साथ उसे यूनिफॉर्म, बैग, जूता, मोजा आदि सभी उपलब्ध कराया जाए।  यूपी की शिक्षा के कायाकल्प को नीति आयोग से मिली सराहना मुख्यमंत्री ने कहा 9 साल में यूपी की शिक्षा के कायाकल्प को नीति आयोग ने सक्सेस स्टोरी माना है। उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को सुरक्षित वातावरण में अध्ययन के लिए पर्याप्त धनराशि दी गई। सीएम ने कहा कि पहले जहां बोर्ड परीक्षाओं और परिणाम में महीनों लग जाते थे, वहीं अब 15 दिन में नकलविहीन परीक्षा और 15 दिन में परिणाम आ जाते हैं। इससे 11 माह पढ़ाई के लिए उपलब्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अटल टिकरिंग लैब, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी बन रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सभी जिलों में अभ्युदय कोचिंग की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बढ़ी सुविधाओं से प्रदेश में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा नया कीर्तिमान स्थापित करेगी।  अक्षयपात्र फाउंडेशन ने भूमि और आर्थिक सहायता के लिए सीएम योगी का जताया आभार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी सहित सभी आगतों का स्वागत करते हुए अक्षयपात्र फाउंडेशन के सह संस्थापक एवं उपाध्यक्ष चंचलापति दास ने रसोईघर के निर्माण के लिए करीब 2.5 एकड़ भूमि और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अक्षयपात्र फाउंडेशन का मिशन है कि कोई भी बच्चा भूख की वजह से शिक्षा से वंचित न रहने पाए। उन्होंने बताया कि अक्षयपात्र की यह रसोई पीएम पोषण योजना के तहत गोरखपुर एवं आसपास के क्षेत्रों के बच्चों के लिए प्रतिदिन 1 लाख गर्म, पौष्टिक एवं संतुलित भोजन तैयार और वितरित करने की क्षमता रखती है। विशेषीकृत रसोई उपकरणों में दो रोटी मेकिंग मशीनें हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता प्रति घंटे 40 हजार रोटियां तैयार करने की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के हाथों उद्घाटित केंद्रीयकृत रसोईघर की नई सुविधा अब 546 विद्यालयों के 55,000 बच्चों तक सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होगी तथा चरणबद्ध तरीके से 1,570 विद्यालयों के 1 लाख बच्चों तक अपनी पहुंच का विस्तार करेगी। वर्तमान में यह सुविधा भोजन वितरण के लिए 23 इलेक्ट्रिक वाहनों के बेड़े का संचालन कर रही है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और क्षेत्रीय स्कूल भोजन प्रणाली को सुदृढ़ करने में सहायता मिलती है।  कार्यक्रम की अध्यक्षता अक्षयपात्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं ट्रस्टी भरतर्षभ दास ने की। इस अवसर पर प्रमुख रूप से राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष … Read more

1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाने और रिन्यू कराने के लिए देना होगा ज्यादा पैसा, सरकार ने बढ़ाई फीस, जानिए कितना बढ़ा शुल्क

 नई दिल्ली केंद्र सरकार ने पासपोर्ट और उससे जुड़ी सर्विस की फीस में बड़ा बदलाव किया है. ये बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब देश भर में पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण माने जाने को लेकर बहस चल रही है. विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 जारी करते हुए इसे अगले महीने से ही लागू करने के निर्देश दिए हैं।  साल 2012 में आखिरी बार हुआ था फीस में बदलाव नए नियमों के तहत 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट के नए शुल्क लागू होंगे. इस बदलाव के तहत अब पासपोर्ट बनवाना दो हजार रुपये तक महंगा पड़ सकता है. इससे पहले साल 2012 में आखिरी बार पासपोर्ट बनवाने की फीस बढ़ाई गई थी. इस तरह ये बदलाव 14 साल बाद हुआ है।  सरकार ने इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद नया पासपोर्ट बनवाने, पासपोर्ट रिन्यू कराने और अन्य संबंधित सेवाओं के लिए संशोधित शुल्क देना होगा. इसके साथ ही पासपोर्ट नियम, 1980 की पुरानी शुल्क सूची (शेड्यूल-IV) को हटाकर नई शुल्क सूची लागू कर दी जाएगी. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 1 जुलाई 2026 से सभी पासपोर्ट सेवाओं पर नए शुल्क लागू होंगे।  फीस में कितना हुआ बदलाव 1 जुलाई से पासपोर्ट शुल्क में बदलाव, जानिए अब कितना देना होगा   36 पेज का पासपोर्ट (नया/री-इश्यू): पहले: ₹1,500 → अब: ₹2,500 (नॉर्मल) पहले: ₹3,500 → अब: ₹5,000 (तत्काल) 60 पेज का पासपोर्ट (नया/री-इश्यू): पहले: ₹2,000 → अब: ₹3,500 (नॉर्मल) पहले: ₹4,000 → अब: ₹6,000 (तत्काल) 36 पेज का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट: पहले: ₹1,500 → अब: ₹5,000 (नॉर्मल) पहले: ₹3,500 → अब: ₹7,500 (तत्काल) 60 पेज का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट: पहले: ₹2,000 → अब: ₹6,000 (नॉर्मल) पहले: ₹4,000 → अब: ₹8,500 (तत्काल) 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का 36 पेज का पासपोर्ट: पहले: ₹1,000 → अब: ₹1,750 (नॉर्मल) पहले: ₹3,000 → अब: ₹4,250 (तत्काल) नाबालिगों का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट: पहले: ₹1,000 → अब: ₹4,250 (नॉर्मल) पहले: ₹3,000 → अब: ₹6,750 (तत्काल)