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रिटायरमेंट से पहले खुद जान सकेंगे लीव इनकैशमेंट की राशि, 4.50 लाख कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए लीव इनकैशमेंट राशि को लेकर आदेश जारी किया है। अब कर्मचारी रिटायरमेंट या ड्यूटी के दौरान मौत की स्थिति में मिलने वाली छुट्टी लीव इनकैशमेंट राशि का अनुमान खुद लगा सकेंगे। वित्त विभाग ने सभी विभागों, कार्यालयों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किया है। सरकार के फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से अवकाश नकदीकरण की गणना को लेकर अलग-अलग विभागों में भ्रम और विवाद की स्थिति बनती रही है। नए निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में एक समान प्रक्रिया लागू होगी। अर्जित अवकाश का रिकॉर्ड रखने के निर्देश वित्त विभाग के आदेश में सभी विभागों को यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अवकाश नकदीकरण की गणना निर्धारित नियमों के अनुसार ही की जाएगी। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों के अर्जित अवकाश का रिकॉर्ड सही तरीके से रखा जाए। भुगतान के समय एक समान प्रक्रिया अपनाई जाए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी को भुगतान में देरी न हो और गणना में गलतियां न हों। अधिकतम 300 दिन के अवकाश का मिलेगा भुगतान राज्य सरकार के नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश का नकदीकरण लाभ दिया जाएगा। अगर किसी कर्मचारी के खाते में 300 दिनों से अधिक अर्जित अवकाश मौजूद है, तब भी भुगतान केवल 300 दिनों तक ही सीमित रहेगा। पहले लाभ लिया है तो घटेंगे उतने दिन वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी पहले किसी अवसर पर अर्जित अवकाश नकदीकरण का लाभ ले चुका है, तो जितने दिनों का लाभ पहले लिया गया है, उसे 300 दिनों की अधिकतम सीमा में से घटा दिया जाएगा। कर्मचारी को कुल मिलाकर 300 दिनों से अधिक अर्जित अवकाश नकदीकरण का लाभ नहीं मिल सकेगा। कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?     नए आदेश के बाद सरकारी कर्मचारियों को कई तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है।     कर्मचारी पहले से अपनी संभावित लीव इनकैशमेंट राशि का अनुमान लगा सकेंगे।     विभागों में गणना को लेकर होने वाली गलतियों में कमी आएगी।     भुगतान संबंधी विवाद कम होंगे।     सभी विभागों में एक समान नियम और प्रक्रिया लागू होगी।     रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों की पारदर्शिता बढ़ेगी। ईएल इनकैशमेंट पर पारदर्शी लाना राज्य सरकार का कहना है कि इस आदेश का मुख्य उद्देश्य अर्जित अवकाश नकदीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और एकरूप बनाना है। अलग-अलग विभागों में अपनाई जा रही अलग-अलग प्रक्रियाओं के कारण कई बार कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब वित्त विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद सभी विभागों में एक जैसी व्यवस्था लागू होगी। क्या होता है लीव इनकैशमेंट सरकारी सेवा के दौरान कर्मचारियों के खाते में अर्जित अवकाश (ईएल) जमा होते रहते हैं। कई कर्मचारी अपने पूरे अर्जित अवकाश का उपयोग नहीं कर पाते, जिसके कारण उनके खाते में बड़ी संख्या में छुट्टी बचे रह जाते हैं। जब कर्मचारी रिटायर होता है या सेवा के दौरान उसकी मौत हो जाती है, तब उसके खाते में बचे हुए ईएल के बदले सरकार नकद भुगतान करती है। इसी भुगतान को अवकाश नकदीकरण या लीव इनकैशमेंट कहा जाता है। यह राशि कर्मचारियों के रिटायरमेंट लाभों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। कई मामलों में यह लाखों रुपए तक पहुंच सकती है।

बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव, 1 जुलाई से बढ़ सकता है मासिक खर्च; लेट फीस को लेकर राहत

रायपुर छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 जुलाई 2026 से बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने बिजली बिल भुगतान और टैरिफ से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब बिजली बिल देर से जमा करने पर पूरे महीने का जुर्माना नहीं लगेगा, बल्कि जितने दिन की देरी होगी, उसी हिसाब से लेट पेमेंट सरचार्ज वसूला जाएगा। अब तक उपभोक्ताओं को बिजली बिल की निर्धारित तिथि निकलने के बाद डेढ़ प्रतिशत प्रतिमाह की दर से सरचार्ज देना पड़ता था। ऐसे में एक-दो दिन की देरी होने पर भी पूरे महीने का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता था। लेकिन 1 जुलाई से लागू होने वाले नए नियम के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। प्रतिदिन के हिसाब से लगेगा जुर्माना नई व्यवस्था के अनुसार बिजली बिल देर से जमा करने पर 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से लेट पेमेंट सरचार्ज लगाया जाएगा। इससे उन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी जो ड्यू डेट के कुछ दिन बाद बिल जमा करते हैं। बिजली दरों में भी बढ़ोतरी एक तरफ जहां लेट पेमेंट नियम में राहत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ बिजली दरों में बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। नए टैरिफ के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। इसके चलते मासिक बिजली बिल में लगभग 30 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की वृद्धि हो सकती है। कमर्शियल उपभोक्ताओं पर भी असर नए टैरिफ के तहत कमर्शियल श्रेणी में भी 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। साथ ही स्थानीय निकायों और सरकारी कार्यालयों को घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया है। गैर-सब्सिडी कृषि पंपों को ऊर्जा प्रभार में 40 प्रतिशत तक की छूट दी गई है। राहत भी, बढ़ा खर्च भी नई व्यवस्था से देर से बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन बिजली दरों में बढ़ोतरी के कारण नियमित बिलों का खर्च बढ़ सकता है। विभाग का दावा है कि यह बदलाव बिलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और उपभोक्ता हितैषी बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों के लिए अहम अपडेट, 30 दिनों की डेडलाइन से पहले निपटाएं काम

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते देशभर में एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ते हुए नजर आया. इस बीच सरकार ने कई बड़े फैसले लिए जिसका सीधा असर एलपीजी उपभोक्ताओं पर पड़ा है. देश में एलपीजी सप्लाई को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. अब जिन घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है और उपभोक्ता PNG कनेक्शन ले चुके हैं, उन्हें निर्धारित समय के अंदर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा. सरकार का मानना है कि इससे गैस डिस्ट्रिबुशन प्रोसेस अधिक ट्रांसपरेंट बनेगा, डुप्लिकेट कनेक्शनों पर रोक लगेगी और जरूरतमंद परिवारों तक LPG की पहुंच बेहतर हो सकेगी।  हाल के सालों में कई शहरों में PNG नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है. इसके बावजूद कई ऐसे परिवार हैं जो PNG और LPG दोनों सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. सरकार का कहना है कि इससे रिसोर्स और सब्सिडी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए नए नियम लागू किए गए हैं।  क्या है नया 30 दिन वाला नियम? सरकार द्वारा जारी किए गए नियमों के अनुसार, अगर किसी घरेलू उपभोक्ता ने अपने घर में PNG कनेक्शन ले लिया है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा. यह नियम इंडेन, भारतगैस और एचपी गैस समेत सभी प्रमुख घरेलू LPG कनेक्शनों पर लागू होगा. जैसे- अगर किसी उपभोक्ता को 10 जून को PNG कनेक्शन मिला है, तो उसे अगले 30 दिनों के भीतर LPG कनेक्शन वापस करना होगा. फिक्स्ड अवधि के बाद ऐसे उपभोक्ताओं को LPG रिफिल या संबंधित सुविधाएं मिलने में दिक्कत आ सकती है. सरकार का फोकस है कि एक परिवार में एक ही घरेलू गैस व्यवस्था को बढ़ावा देना है।  सरकार ने क्यों उठाया यह कदम? सरकार की ‘वन हाउसहोल्ड, वन गैस कनेक्शन’ सोच के तहत यह कदम उठाया गया है. अधिकारियों का मानना है कि कई शहरी क्षेत्रों में PNG उपलब्ध होने के बावजूद लोग LPG कनेक्शन बनाए रखते हैं, जिससे गैस डिस्ट्रिबुशन पर अनावश्यक दबाव पड़ता है. नए नियम के जरिए डुप्लिकेट कनेक्शनों को कम करने, सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने और उन इलाकों में LPG की सप्लाई बढ़ाने को कोशिश की जा रही है जहां अभी PNG नेटवर्क नहीं पहुंचा है. इससे गैस डिस्ट्रिबुशन अधिक बेहतर और संतुलित बनने की उम्मीद है।  PNG अपनाने वालों के लिए क्या हैं सुविधाएं? सरकार ने उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ राहत भी दी है. यदि कोई परिवार भविष्य में ऐसे क्षेत्र में ट्रांसफर होता है जहां PNG की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसके लिए LPG कनेक्शन दोबारा हासिल करना आसान बनाया गया है. LPG कनेक्शन सरेंडर करते समय उपभोक्ता ट्रांसफर वाउचर प्राप्त कर सकते हैं. इस डॉक्यूमेंट की मदद से वे नए स्थान पर आसान प्रोसेस के जरिए LPG कनेक्शन दोबारा शुरू करा सकते हैं. इससे उपभोक्ताओं को नए कनेक्शन के लिए लंबे प्रोसेस से नहीं गुजरना पड़ेगा।  OTP और e-KYC से बढ़ी निगरानी गैस डिस्ट्रिबुशन प्रोसेस को और सुरक्षित तथा ट्रांसपरेंट बनाने के लिए सरकार पहले ही OTP आधारित डिलीवरी सिस्टम लागू कर चुकी है. अब सिलेंडर की डिलीवरी के समय उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP भेजा जाता है, जिसे वेरिफाई करने के लिए डिलीवरी एजेंट को बताना होता है. इसके अलावा, उज्ज्वला योजना समेत अलग-अलग लाभार्थियों के लिए e-KYC प्रोसेस भी जरूरी हो गई है. सरकार चाहती है कि सभी उपभोक्ताओं का डेटा अपडेट और वेरिफाइड रहे ताकि फायदा सही लोगों तक पहुंच सके और फर्जी कनेक्शनों पर रोक लगाई जा सके। 

1977 से 2026 तक भारतीय तटरक्षक बल का दम, 11,099 किमी तट की सुरक्षा से तस्करी पर कड़ा पहरा

मुंबई  भारत का समुद्री क्षेत्र देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामरिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. 11,099 किलोमीटर लंबे समुद्री तट, विशाल समुद्री क्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी और सुरक्षा आज भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है. लेकिन इस संगठन की शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ हुई थी।  आज भारतीय तटरक्षक बल के पास 154 जहाज और 82 एयरक्राफ्ट हैं, लेकिन 1977 में इसकी शुरुआत महज सात जहाजों के साथ हुई थी. यह सफर भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के लगातार विस्तार और बदलती जरूरतों को दर्शाता है।  भारतीय नौसेना ने क्यों उठाई अलग समुद्री बल की मांग? 1960 के दशक से ही भारतीय नौसेना सरकार से एक ऐसे अलग समुद्री बल के गठन की मांग कर रही थी जो समुद्री कानून लागू करने और भारतीय जलक्षेत्र में सुरक्षा संबंधी कार्यों को संभाल सके. नौसेना का मानना था कि इन कार्यों के लिए अत्याधुनिक और महंगे युद्धपोतों का उपयोग सबसे उपयुक्त विकल्प नहीं है. समय के साथ सरकार ने भी इस तर्क को स्वीकार किया।  1970 के दशक की शुरुआत तक कई ऐसे कारण सामने आए जिन्होंने अलग तटरक्षक बल की आवश्यकता को और मजबूत कर दिया।  तस्करी बनी बड़ी चुनौती उस दौर में समुद्री मार्गों से तस्करी तेजी से बढ़ रही थी और यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन चुकी थी. उस समय मौजूद समुद्री एजेंसियां, जैसे सीमा शुल्क विभाग और मत्स्य विभाग, बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी को रोकने में सक्षम नहीं थीं।  इसी पृष्ठभूमि में 1970 में नाग समिति का गठन किया गया. समिति ने अपनी रिपोर्ट में समुद्री तस्करी से निपटने के लिए एक अलग समुद्री बल की आवश्यकता बताई।  बॉम्बे हाई में तेल मिलने से बढ़ी जरूरत मुंबई हाई क्षेत्र में तेल की खोज और वहां स्थापित महत्वपूर्ण अपतटीय संरचनाओं की सुरक्षा भी एक बड़ी आवश्यकता बन गई थी. इन परिसंपत्तियों की सुरक्षा और किसी आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए मजबूत समुद्री सुरक्षा तंत्र की जरूरत महसूस की गई।  रुस्तमजी समिति की सिफारिश सितंबर 1974 में सरकार ने पूर्व बीएसएफ महानिदेशक के.एफ. रुस्तमजी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया. समिति को समुद्री तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों से निपटने के मौजूदा तंत्र की समीक्षा करने और सुधार के सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई. 1975 में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में समिति ने स्पष्ट रूप से ‘कोस्ट गार्ड’ जैसी संस्था स्थापित करने की सिफारिश की।  सिर्फ सात जहाजों के साथ हुई शुरुआत वर्ष 1977 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना को मंजूरी दी. इसके लिए भारतीय नौसेना से दो फ्रिगेट और पांच गश्ती नौकाएं स्थानांतरित की गईं. 1 फरवरी 1977 को भारतीय तटरक्षक बल अस्तित्व में आया. उस समय भारतीय जलक्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र की निगरानी के लिए उसके पास केवल सात जहाज थे।  बाद में 19 अगस्त 1978 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने भारतीय तटरक्षक बल का औपचारिक उद्घाटन किया।  ICGS Kuthar बना पहला तटरक्षक जहाज 1978 में भारतीय नौसेना के INS Kuthar को भारतीय तटरक्षक बल को सौंपा गया और उसका नाम ICGS Kuthar रखा गया. उद्घाटन समारोह के दौरान जहाज से नौसेना का ध्वज उतारा गया और तटरक्षक बल का ध्वज फहराया गया. इसी के साथ यह भारतीय तटरक्षक बल का पहला जहाज बना।  जहाजों के साथ बढ़ी हवाई क्षमता तटरक्षक बल की क्षमता बढ़ाने के लिए 1978 में निर्माणाधीन दो नौसैनिक सीवर्ड डिफेंस बोट्स को भी तटरक्षक बल को देने का निर्णय लिया गया. इन्हें क्रमशः 1980 और 1981 में सेवा में शामिल किया गया था. इसके बाद 1982 में तटरक्षक बल ने चेतक हेलीकॉप्टरों को खोज और बचाव अभियानों के लिए शामिल किया. इन्हें सुरक्षा रिकॉर्ड के आधार पर मानक सर्च एंड रेस्क्यू हेलीकॉप्टर के रूप में चुना गया।  22 मई 1982 को गोवा के डाबोलिम एयरफील्ड में भारतीय तटरक्षक बल के पहले एयर स्क्वाड्रन 800 स्क्वाड्रन (CG) को भी कमीशन किया गया।  सात जहाजों से 154 जहाज और 82 एयरक्राफ्ट तक भारतीय तटरक्षक बल की शुरुआत ऐसे समय में हुई थी जब उसके पास केवल सात जहाज थे. उसका मुख्य उद्देश्य समुद्री तस्करी पर नियंत्रण, कानून प्रवर्तन और समुद्री क्षेत्रों की निगरानी था. समय के साथ भारत के समुद्री हितों, व्यापारिक गतिविधियों और सुरक्षा आवश्यकताओं का दायरा बढ़ता गया. इसके अनुरूप तटरक्षक बल का भी विस्तार हुआ।  आज भारतीय तटरक्षक बल 11,099 किलोमीटर लंबे भारतीय समुद्री तट की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उसके पास 154 जहाज और 82 एयरक्राफ्ट हैं, जो निगरानी, गश्त, खोज एवं बचाव और समुद्री सुरक्षा संबंधी विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।  भारत की समुद्री सुरक्षा का अहम स्तंभ भारतीय तटरक्षक बल का इतिहास दिखाता है कि कैसे एक छोटे समुद्री बल ने सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत की और धीरे-धीरे देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया. सात जहाजों से शुरू हुआ यह सफर आज 154 जहाजों और 82 एयरक्राफ्ट तक पहुंच चुका है, जो भारत के समुद्री हितों की रक्षा में लगातार सक्रिय हैं।   

अब हाईवे पर नहीं फंसेंगे वाहन चालक! NHAI ला रही है 24 घंटे रेस्क्यू और सहायता व्यवस्था

 नई दिल्‍ली  भारत में नेशनल हाइवे और एक्‍सप्रेस की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। जिसके कारण अब लोग लंबी दूरी की यात्रा भी अपनी कार से कर रहे हैं। लेकिन कई बार गाड़ी खराब होने या पंचर होने जैसी स्थिति में लोग परेशान हो जाते हैं और घंटों तक मदद का इंतजार करते हैं। ऐसे लोगों के लिए NHAI की ओर से नई सेवा को शुरू करने की तैयारी की जा रही है। यह क्‍या है और किस तरह से लोगों को मदद मिल पाएगी। हम आपको इस खबर में बता रहे हैं। शुरू होगी सेवा सरकार की ओर से लगातार नए हाइवे और एक्‍सप्रेस वे को बनाया जा रहा है। जिस कारण अब लंबे सफर को कार से पूरा करना भी आसान हो गया है। सफर के दौरान कार खराब हो जाए या फिर टायर पंचर हो जाएं तो परेशानी हो जाती है। इस परेशानी के हल के लिए अब नई सेवा को शुरू करने की तैयारी हो रही है। जनसुविधाओं का नेटवर्क होगा तैयार अब देशभर के नेशनल हाइवे और एक्‍सप्रेस वे पर जन सुविधाओं का नेटवर्क तैयार करने की शुरुआत की जा रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से हाल में ही जानकारी दी गई है कि अब हाइवे और एक्‍सप्रेस वे पर पंचर रिपेयर और ऑटोमोबाइल वर्कशॉप को भी शामिल किया जा रहा है। क्‍या होगा फायदा इन दोनों सुविधाओं के कारण उन लोगों को फायदा मिल पाएगा जिनकी गाड़ी में परेशानी हो जाती है या फिर टायर पंचर होने से सफर करना रूक जाता है। PPP मॉडल पर मिलेगी सुविधा एनएचएलएमएल सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत दीर्घकालिक पट्टे पर सड़क किनारे आधुनिक सुविधाओं का एक नेटवर्क विकसित कर रहा है। रियायतकर्ताओं और पट्टेदारों के साथ किए गए मौजूदा समझौतों के तहत, ऐसे प्रत्येक सुविधा केंद्र (डब्ल्यूएसए) के लिए निर्धारित अनिवार्य सुविधाओं के अतिरिक्त कई सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। वाहन मरम्मत की दुकानें और पंचर ठीक करने की सुविधाएं संविदात्मक ढांचे के तहत अनुमोदित सुविधाओं में शामिल हैं।  

CISF में तबादलों की हलचल, नागेंद्र नाथ NCR भेजे गए; भिलाई में नए DIG को लेकर अटकलें

बोकारो  Steel Authority Of India Limited (SAIL) की महत्वपूर्ण इकाई में Bhilai Steel Plant में हुए करोड़ाे रुपये की स्क्रैप चोरी की घटना के बाद CISF HQ Bhilai के CISF DIG नगेन्द्र नाथ त्रिपाठी का तबादला NCR Delhi HQ में कर दिया गया है। एनएन त्रिपाठी 2009 बैंच के पश्चिम बंगाल कैडर के आइपीएस अधिकारी है तथा वर्तमान समय में सीआइएसएफ में प्रतिनियुक्ति के आधार पर डीआइजी के पद पर अपनी सेवा दे रहे हैं। त्रिपाठी की जगह फिलहाल किसी अधिकारी की पोस्टिंग भिलाई स्टील में नही की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है की हाल ही में झारखंड कैडर से सीआइएसएफ में प्रतिनियुक्ति पर गए बोकारो के पूर्व एसपी चंदन झा को इस इकाई की कमान बतौर डीआइजी पद पर मिल सकती है। वहीं, भिलाई स्टील प्लांट में कार्यरत उप कमांडेंट निधि सिंह को भी यहां से स्थानांतरित करते हुए केओपीए कोलकाता इकाई भेजा गया है। जबकि सेल के इस्को बर्नपुर इस्पात संयंत्र यूनिट के डीआइजी एलके हाकिप का तबादला कोलकाता एयरपोर्ट में कर दिया गया है। उनकी जगह नागपुर एयरपोर्ट में सीनियर कमांडेंट के पद पर कार्यरत दिलीप कुमार को डीआइजी बनाते हुए इस्को बर्नपुर इस्पात संयंत्र के सुरक्षा की नई जिम्मेवारी सौंपी गई है।   पद अधिकारी का नाम वर्तमान पदस्थापना नई पदस्थापना डीआईजी अपूर्ण पाण्डेय अहमदाबाद एयरपोर्ट दिल्ली मुख्यालय डीआईजी विनोद कुमार चौरसिया नॉर्थ ईस्ट जोन, गुवाहाटी मुख्यालय अहमदाबाद एयरपोर्ट डीआईजी अजय कुमार खंडेलवाल साउथ जोन, चेन्नई मुख्यालय नॉर्थ ईस्ट जोन, गुवाहाटी मुख्यालय डीआईजी अजय कुमार कोलकाता एयरपोर्ट हैदराबाद एयरपोर्ट सीनियर कमांडेंट विपिन कुमार तोमर सलाल इकाई एसएसजी, नोएडा सीनियर कमांडेंट वैभव कुमार दूबे ताज महल, आगरा रिजर्व बटालियन, भिलाई सीनियर कमांडेंट बिरेन्द्र कुमार तिवारी रिजर्व बटालियन, जयपुर रिजर्व बटालियन, किश्तवाड़ सीनियर कमांडेंट दीपक कुमार रिजर्व बटालियन, भिलाई सलाल इकाई उप कमांडेंट रोहन गोवा एयरपोर्ट रायपुर एयरपोर्ट उप कमांडेंट हकीम आसिफ कोयम्बटूर एयरपोर्ट नेशनल म्यूजियम, नई दिल्ली उप कमांडेंट दुर्गेश चंद्र शुक्ला टिहरी बड़ोदरा एयरपोर्ट उप कमांडेंट एस. गौतम NISA, हैदराबाद कोयम्बटूर एयरपोर्ट सीआईएसएफ में पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों की सूची वर्तमान पद अधिकारी का नाम पदोन्नति के बाद पद वर्तमान पदस्थापना नई पदस्थापना डीआईजी शिव कुमार आईजी हैदराबाद एयरपोर्ट नॉर्थ ईस्ट सेक्टर, कोलकाता मुख्यालय सीनियर कमांडेंट सी. अमोल डीआईजी आरटीसी, बरवा — सीनियर कमांडेंट राजेश डीआईजी मुंडली मुख्यालय — कमांडेंट गौरव तोमर सीनियर कमांडेंट — — कमांडेंट लक्ष्मीनारायण चौधरी सीनियर कमांडेंट — — कमांडेंट एस. वेंटलॉग सीनियर कमांडेंट — — उप कमांडेंट मनिंदर सिंह कमांडेंट रायपुर एयरपोर्ट नागपुर एयरपोर्ट उप कमांडेंट ऋषि कौशिक कमांडेंट नेशनल म्यूजियम, नई दिल्ली ताज महल, आगरा उप कमांडेंट कृष्ण प्रकाश कमांडेंट बड़ोदरा एयरपोर्ट भोगापुरम एयरपोर्ट, आंध्र प्रदेश

अधिक कीमत पर खाद बेचने वाले विक्रय केंद्र पर छापा, 3219 बोरी उर्वरक जब्त, केंद्र सील

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार किसानों को निर्धारित दर पर खाद-बीज उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में प्राप्त शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सरगुजा जिले में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। अंबिकापुर के नेहरूनगर (डीगमा) स्थित एक उर्वरक विक्रय केंद्र पर औचक निरीक्षण कर 3219 बोरी उर्वरक जब्त किए गए हैं तथा विक्रय केंद्र को सील कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक कृषक ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई थी कि नेहरूनगर (डीगमा) स्थित मेसर्स सरगुजा कृषि राय केंद्र द्वारा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर उर्वरकों का विक्रय किया जा रहा है। शिकायत प्राप्त होते ही कृषि विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच प्रारंभ की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता किसान के बयान एवं ऑनलाइन भुगतान से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। जांच में निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक विक्रय किए जाने की पुष्टि होने पर जिला स्तरीय टीम ने 25 जून को संबंधित प्रतिष्ठान पर औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परिसर में उपलब्ध 3219 बोरी उर्वरक जब्त किए गए तथा संपूर्ण विक्रय केंद्र को सील कर दिया गया। कृषि विभाग की इस सख्त कार्रवाई से जिले के उर्वरक विक्रेताओं में स्पष्ट संदेश गया है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। कार्रवाई के दौरान सहायक संचालक कृषिकुंवर साय पैंकरा, उर्वरक निरीक्षकजे. आलम, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारीसीताराम भगत सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा अधिक कीमत पर बिक्री करने वालों के विरुद्ध आगे भी लगातार निरीक्षण एवं कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। किसानों से भी अपील की गई है कि वे ऐसी किसी भी अनियमितता की जानकारी तत्काल मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 अथवा कृषि विभाग को दें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

ऊर्जा संकट टला? होर्मुज विवाद के बीच 30 तेल-गैस जहाज भारत पहुंचे, जानिए कितने अभी भी फंसे हैं

मुंबई  पश्चिम एशिया से भारत को अब खुशखबरी मिलने लगी हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया है. ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के बाद से लगातार भारत के तेल-गैस वाले जहाज आ रहे हैं. अब तक भारत आने वाले 30 से अधिक जहाज होर्मुज को पार कर चुके हैं. हालांकि, अब भी दर्जनों जहाज होर्मुज को पार करने का इंतजार कर रहे हैं. भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए होर्मुज वाला समुद्री रास्ता काफी अहम है. कतर से गैस हो या खाड़ी देशों से तेल… भारत इसी रास्ते से अधिकतर माल मंगाता है. दुनिया भर में होने वाली एनर्जी सप्लाई का पांचवां हिस्सा यहीं से गुज़रता है. भारत के लिए एलएनजी और एलपीजी की खरीद के मुख्य पार्टनर खाड़ी देश ही हैं।  शिपिंग मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से दावा किया कि भारत आने वाले अब तक 30 जहाज होर्मुज को पार कर चुके हैं. जी हां, भारत आने वाले 30 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़र चुके हैं. 26 जहाज इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. होर्मुज को अभी तक जितने जहाज पार किए हैं, उनमें से आधे जहाजों में एलपीजी और एलएनजी है. वहीं, आठ में बल्क कार्गो और सात क्रूड ऑयल टैंकर थे।  कब कितने जहाज निकले होर्मुज से डेटा से पता चला है कि 1 मार्च से 17 जून के बीच 19 जहाजों ने होर्मुज को पार किया है. ईरान-अमेरिका की ओर से MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद 11 जहाज सुरक्षित रूप से इस होर्मुज जलडमरूमध्य से पार कर चुके हैं. इनमें से कुछ जहाज भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच गए हैं या पहुंचने वाले हैं. इन 30 जहाजों में से 17 विदेशी झंडे वाले जहाज . इनमें सबसे अधिक पांच मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले जहाज शामिल हैं।  26 अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत से जुड़े 26 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हैं. ये जहाज अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. फारस की खाड़ी होर्मुज के पश्चिम में है. अभी इन 26 जहाजों ने होर्मुज पार नहीं किया है. इन 26 जहाजों में भारतीय झंडे वाले और भारत आने वाले विदेशी झंडे वाले दोनों तरह के जहाज शामिल हैं. इन जहाजों में तीन में ईंधन, 10 में फर्टिलाइजर यानी खाद है और बाकी 13 में अन्य सामान लदा है. गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर अटैक किया था. तब से ही होर्मुज में हाहाकार मचा था. अमेरिका-ईरान के बीच समझौता होने के बाद यह होर्मुज खुला है। 

जल संकट से बाढ़ तक: सिंधु नदी पर भारत के कदम के बाद पाकिस्तान का बदला सुर, समझिए नया खेल

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को स्थगित करने का फैसला लिया. इसके बाद पाकिस्तान में भयंकर पानी का संकट खड़ा हो गया. जिसकी गूंज उसके सरकारी दफ्तरों से लेकर सड़कों तक सुनाई देने लगी. पाकिस्तान के जल प्रबंधन से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज बताते हैं कि 2025 के खरीफ सीजन की शुरुआत में वहां के अधिकारी 21 फीसदी तक पानी की कमी का अनुमान लगा रहे थे. झेलम और चिनाब नदी में पानी के कम फ्लो को लेकर चिंता बढ़ रही थी. पंजाब और सिंध जैसे कृषि प्रधान प्रांतों में आशंका थी कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा. हालात ऐसे बन रहे थे कि पाकिस्तान को अपने जलाशयों का इस्तेमाल बेहद सावधानी से करना पड़ सकता था. लेकिन तभी प्रकृति ने ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरी तस्वीर बदल दी।  दिलचस्प बात यह है कि जिस संकट की तैयारी पाकिस्तान कर रहा था, वह आखिरकार आया ही नहीं. भारत के फैसले के बाद जल संकट का डर लगातार बढ़ रहा था. पाकिस्तान के अधिकारियों ने अपनी बैठकों में ‘चिनाब नदी में भारत की ओर से कम जल आपूर्ति के कारण पैदा हुए संकट’ का भी जिक्र किया. लेकिन कुछ महीनों बाद ऊपरी इलाकों में बर्फ तेजी से पिघली और अगस्त 2025 में आई भीषण बाढ़ ने पाकिस्तान की जल स्थिति को पूरी तरह बदल दिया. जो देश पानी की कमी से जूझने की तैयारी कर रहा था, उसके जलाशय कुछ ही महीनों में लगभग पूरी क्षमता तक भर गए. हालांकि यह राहत स्थायी नहीं मानी जा रही, क्योंकि अब एक नया और कहीं बड़ा खतरा सामने खड़ा दिखाई दे रहा है।  जल संकट की तैयारी में जुटा था पाकिस्तान पाकिस्तान की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक खरीफ सीजन शुरू होने से पहले देश के दो सबसे बड़े जलाशय टरबेला और मंगला लगभग डेड स्टोरेज स्तर के करीब पहुंच चुके थे. पिछले सीजन का बचा हुआ पानी भी बेहद कम था. ऐसे में अधिकारियों ने पूरे सिस्टम में करीब 21 फीसदी जल कमी का अनुमान लगाया था. हालात को देखते हुए पूरे सीजन के लिए जल वितरण योजना को भी टाल दिया गया था. सबसे ज्यादा असर पंजाब और सिंध पर पड़ने की आशंका जताई गई थी, क्योंकि पाकिस्तान की सिंचित कृषि का बड़ा हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों पर निर्भर करता है।      पाकिस्तानी अधिकारियों की चिंताओं की वजह भी थी. रिपोर्ट के अनुसार कई बैठकों में झेलम-चिनाब नदी प्रणाली में कम जल प्रवाह को लेकर गंभीर चर्चा हुई. एक बैठक में अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा कि ‘चिनाब नदी में भारत की ओर से कम आपूर्ति के कारण पैदा हुए संकट’ से निपटने के लिए जलाशयों का संचालन बेहद सावधानी से करना होगा ताकि सभी प्रांतों को निर्धारित हिस्से का पानी मिल सके।  फिर बदली किस्मत, बाढ़ बनी वरदान सीजन के दूसरे हिस्से में मौसम ने अप्रत्याशित करवट ली. ऊपरी सिंधु बेसिन में तापमान बढ़ने से बर्फ तेजी से पिघलने लगी. इससे नदी में पानी का प्रवाह बढ़ गया. इसके बाद अगस्त 2025 के आखिर में चिनाब और पूर्वी नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश हुई. इस बारिश ने बड़े पैमाने पर बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने खरीफ सीजन के लिए 104.03 मिलियन एकड़ फीट (MAF) जल प्रवाह का अनुमान लगाया था. लेकिन वास्तविक जल प्रवाह 122.36 MAF दर्ज किया गया, जो अनुमान से करीब 18 फीसदी अधिक था. इससे पाकिस्तान का पूरा जल संतुलन बदल गया. जहां पहले कमी की आशंका थी, वहीं बाद में जरूरत से ज्यादा पानी मिलने लगा।  99 फीसदी तक भर गए जलाशय बाढ़ और बर्फ पिघलने से मिले अतिरिक्त पानी का असर बहुत जल्दी दिखाई देने लगा. सितंबर 2025 तक पाकिस्तान के प्रमुख जलाशय लगभग 99 फीसदी क्षमता तक भर चुके थे. सीजन की शुरुआत में जो जलाशय डेड स्टोरेज के करीब थे, वे कुछ ही महीनों में पानी से लबालब हो गए. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोटरी बैराज के नीचे बहने वाले अतिरिक्त पानी की मात्रा 30.85 MAF तक पहुंच गई थी. यह अनुमानित मात्रा से तीन गुना अधिक और पिछले पांच सालों के औसत से लगभग 71 फीसदी ज्यादा थी. यानी जिस संकट से पाकिस्तान डर रहा था, उसे प्रकृति ने अस्थायी तौर पर टाल दिया।  लेकिन अब सामने है टरबेला डैम का बड़ा संकट हालांकि पाकिस्तान को बाढ़ ने तत्काल संकट से राहत दिला दी, लेकिन उसकी जल व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी अब भी बरकरार है. रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता टरबेला जलाशय की घटती क्षमता को लेकर जताई गई है. टरबेला पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक डैम नहीं, बल्कि उसकी कृषि और जल सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है. जब टरबेला डैम शुरू हुआ था तब इसकी लाइव स्टोरेज क्षमता 9.68 MAF थी. लेकिन अब यह घटकर करीब 5.73 MAF रह गई है. यानी दशकों में इसमें लगभग 48 फीसदी क्षमता की कमी आ चुकी है. इसका मुख्य कारण तलछट (Sediment) का लगातार जमा होना बताया गया है।  इस्लाम भूला पाकिस्तान, सिंधु घाटी सभ्यता को क्यों कर रहा याद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने जो सिंधु जल समझौते पर भारत को जंग की धमकी दी तो भारत ने जवाब तो दे दिया. लेकिन पिछले साल से पाकिस्तान एक और बड़ा खेल खेलने लग गया है जिसपर ध्यान देने की ज़रूरत है. आज तक पाकिस्तान कभी सिंधु घाटी सभ्यता का नाम भी नहीं लेता था. वो तो अपने स्कूलों-कॉलेजों में उसके बारे में ना ज़्यादा पढ़ाता था और ना ही ज़्यादा कोई रिसर्च वगैरह करवाता था. क्योंकि पाकिस्तान ने अपनी पहचान ही इस्लाम पर खड़ी कर के रखी है. और अपना इतिहास भी वहीं से शुरू हुआ मानता है, जब साल 712 में मोहम्मिद बिन क़ासिम ने हमला कर के सिंध पर क़ब्ज़ा कर लिया था. यानी आज तक वो अपने लोगों को भी यही पढ़ाता था कि जहां से इस्लाम इस इलाक़े में आया वहीं से एक तरह से इतिहास शुरू होता है. लेकिन अब उसको अचानक सिंधु घाटि सभ्यता याद आने लग गई है. अब वो अचानक पिछले कुछ दिनों में सिंधु घाटी सभ्यता को अपनी राष्ट्रीय पहचान का बहुत बड़ा हिस्सा बताता फिर रहा है।  ये कोई … Read more

पर्सनल से लेकर फाइनेंशियल डेटा तक, CRED यूजर्स की प्राइवेसी पर क्यों बढ़ी चिंता?

 नई दिल्ली अगर आप पुराने फेसबुक यूजर हैं तो आपको ये बात पता होगी. फेसबुक के लॉगइन पेज पर एक टैगलाइन लिखी होती थी. 'फेसबुक फ्री है और हमेशा फ्री रहेगा'. लेकिन ऐसा नहीं है फेसबुक अब दर्जनों पेड सर्विस चलाता है और डेटा बेचता है।  दिलचस्प ये है कि कई साल पहले ही वो टैगलाइन भी कंपनी ने लॉगइन पेज से हटा ली. एक वादा टूटा. फिर जब वॉट्सऐप को जकरबर्ग ने खरीदा तो एक और वादा किया गया. वादा ये था कि वॉट्सऐप को अलग रखा जाएगा और इसका डेटा नहीं बेचा जाएगा ना वॉट्सऐप से कमाई की जाएगी. ये वादा भी काफी पहले टूट चूका।  हर बार जकरबर्ग ने तोड़ा है वादा, क्या कुणाल शाह भी ऐसा करेंगे? अब एक और वादा देखने को मिला है. भारतीय ऐप क्रेड के फाउंडर कुणाल शाह वॉट्सऐप के ग्लोबल सीईओ बन गए हैं और क्रेड में मेटा ने 900 मिलियन डॉलर्स निवेश कर दिया है. लोगों को तुरंत लगा कि अब क्रेड का डेटा भी फेसबुक का हो जाएगा, लेकिन जैसे फेसबुक और वॉट्सऐप के शुरुआती समय में वादा किया गया था, यहां भी एक वादा दिखा।  कंपनी का स्टैंड है कि वो क्रेड का डेटा नहीं देगी. लेकिन क्या आप इस बात को मानेंगे कि मेटा, मार्क जकरबर्ग और क्रेड के कुणाल शाह अपने इस वादे पर कायम रहेंगे? कब तक?  वॉट्सऐप दो लोगों ने मिलकर बनाया था. ब्रायन ऐक्टन और जेन कूम. दोनों ही प्राइवेसी के बड़े एडवोकेट थे और डेटा नहीं बेचना चाहते थे. उन्होंने तय किया था कि वो कुछ भी हो जाए, लेकिन यूजर डेटा नहीं बेचेंगे।  ऐप ने खूब तरक्की की और बाद में फेसबुक ने वॉट्सऐप को खरीद लिया. मार्क जकरबर्ग का वादा था कि वो वॉट्सऐप से कभी पैसे नहीं कमाएंगे और ना ही वॉट्सऐप का यूजर डेटा बेचेंगे।  कुछ साल सबकुछ ठीक चला, लेकिन मार्क जकरबर्ग अपनी आदत के मुताबिक पूराना वादा भूल गए और वॉट्सऐप का यूजर डेटा पेरेंट कंपनी यानी फेसबुक सर्विसेज के साथ शेयर होने लगा. आलम ये है कि अब वॉट्सऐप पर ऐड्स आ रहे हैं और पेड प्लान लॉन्च हो गए हैं।  वॉट्सऐप के फाउंडर का मैने इंटरव्यू किया तो उन्होंने बाताया था कि वॉट्सऐप की असली ताकत काफी पहले खत्म हो चुकी है. शुरुआत में वॉट्सऐप के दोनों फाउंडर्स ऐप बिकने के बाद भी कंपनी में काम करते रहे, लेकिन धीरे धीरे डेटा शेयरिंग को लेकर मार्क जकरबर्ग से उनकी तकरार बढ़ी और दोनों ने ही वॉट्सऐप को छोड़ दिया।  क्रेड और कुणाल शाह के पास भारतीय यूजर्स का संवेदनशील डेटा असल में क्रेड एक डेटा प्लेटफॉर्म है, जो भारत के सबसे प्रीमियम यूजर्स का बेहद गहरा और संवेदनशील डेटा अपने पास रखता है. यह डेटा सिर्फ नाम और नंबर तक सीमित नहीं है. इसमें यूजर का खर्च करने का तरीका, उसकी फाइनेंशियल आदतें, उसकी क्रेडिट हिस्ट्री, यहां तक कि उसकी लाइफस्टाइल तक शामिल है।  अगर कोई यूजर अपने ईमेल को क्रेड से लिंक करता है, तो ऐप को उसके क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट, बिल, इंश्योरेंस, निवेश और लोन से जुड़ी जानकारी तक पहुंच मिल जाती है. यानी यूजर की पूरी फाइनेंशियल प्रोफाइल एक ही जगह तैयार हो जाती है।  यही वजह है कि भले ही क्रेड सालों से घाटे में चल रही कंपनी रही हो, लेकिन उसकी वैल्यू कम नहीं हुई. क्योंकि टेक दुनिया में आज सबसे कीमती चीज प्रॉफिट नहीं, डेटा है. और वो भी ऐसा डेटा जो क्लीन हो, भरोसेमंद हो और हाई-वैल्यू यूजर्स का हो।  अब इसे वॉट्सऐप के साथ जोड़कर देखिए. भारत में वॉट्सऐप के 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं. यह दुनिया का सबसे बड़ा वॉट्सऐप बाजार है. लेकिन इतने बड़े यूजर बेस के बावजूद वॉट्सऐप की सबसे बड़ी समस्या रही है… कमाई।  मेटा पिछले कई सालों से वॉट्सऐप को मोनेटाइज करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे वैसी सफलता नहीं मिली जैसी गूगल पे, फोन पे या पेटीएम को मिली. यहीं पर CRED और कुनाल शाह का रोल अहम हो जाता है।  मेटा के लिए क्यों जरूरी हैं कुणाल शाह? कुणाल शाह ने FreeCharge से लेकर CRED तक एक चीज बार-बार साबित की है, वह टेक्नोलॉजी से ज्यादा लोगों के बिहेवियर को समझते हैं. वह जानते हैं कि यूजर कब खर्च करता है, क्यों करता है और उसे किस तरह के ऑफर से रोका या बढ़ाया जा सकता है. सबसे बड़ी बात कुणाल शाह के ऐप के पास भारतीय यूजर्स के सेंसिटिव डेटा का भरमार है. ऐसा डेटा जो मेटा भारत में अब तक हासिल नहीं कर पाया है।  मेटा को अब ऐसे ही लीडर की जरूरत है. क्योंकि वॉट्सऐप का अगला फेज सिर्फ मैसेजिंग का नहीं, बल्कि पेमेंट, लोन, इंश्योरेंस और शॉपिंग का होने वाला है. लेकिन इस पूरी कहानी का एक दूसरा और ज्यादा गंभीर पहलू भी है।  जब फेसबुक ने वॉट्सऐप को खरीदा था, तब यह कहा गया था कि वॉट्सऐप यूजर डेटा को फेसबुक के साथ शेयर नहीं करेगा. लेकिन समय के साथ यह वादा कमजोर होता गया. आज वॉट्सऐप और मेटा के बीच डेटा शेयरिंग को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं।  अब मेटा ने क्रेड में करीब 900 मिलियन डॉलर का निवेश किया है. साथ ही क्रेड के फाउंडर को वॉट्सऐप की कमान सौंपी जा रही है. मेटा यह जरूर कहता है कि उसे क्रेड यूजर डेटा तक सीधी पहुंच नहीं मिलेगी. लेकिन टेक इंडस्ट्री के पैटर्न को देखें तो यह भरोसा पूरी तरह से सहज नहीं लगता।  इतिहास यही बताता है कि जब निवेश, लीडरशिप और प्लेटफॉर्म एक ही दिशा में जुड़ते हैं, तो डेटा का फ्लो भी धीरे-धीरे उसी डायरेक्शन में बढ़ता है. अगर फ्यूचर में क्रेड और वॉट्सऐप के बीच किसी भी तरह का डेटा इंटीग्रेशन होता है, तो इसके नतीजे बहुत बड़े हो सकते हैं. क्योंकि क्रेड के पास भारत के सबसे प्रीमियम और फाइनेंशियली एक्टिव यूजर्स का डेटा है, जबकि वॉट्सऐप के पास सबसे बड़ा यूजर बेस।  क्रेडिट कार्ड और तमाम फिनांशियल डिटेल्स इन दोनों के मेल से एक ऐसा सिस्टम बन सकता है जो यूजर के बिहेवियर को समझकर उसे टारगेटेड ऑफर दे, लोन दे, खरीदारी कराए और पूरी डिजिटल लाइफ को कंट्रोल करे. यह सुविधा के नाम पर एक सुपर ऐप होगा, लेकिन … Read more