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एमडीएमके का गठबंधन टूटने से तमिलनाडु की राजनीति में हलचल तेज

 चेन्नई तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के साथ अपना 9 साल पुराना गठबंधन आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया है। यह फैसला आज पार्टी की जनरल काउंसिल की बैठक में लिया गया। हालांकि, एमडीएमके ने अभी औपचारिक रूप से सत्ताधारी टीवीके (टीवीके) के नेतृत्व वाले मोर्चे में शामिल होने की घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके साफ संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार का स्वागत अपनी जनरल काउंसिल बैठक में पारित प्रस्तावों में एमडीएमके ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार का स्वागत किया। इसके साथ ही पार्टी ने नई सरकार से अपने प्रमुख चुनावी वादों पर अडिग रहने का आग्रह किया, जिसमें भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देना और मेकेदातू बांध परियोजना जैसे मुद्दों पर तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा करना शामिल है। हालांकि, पार्टी के प्रस्तावों में टीवीके (टीवीके) गठबंधन में शामिल होने का कोई सीधा जिक्र नहीं किया गया है, भले ही तमाम राजनीतिक संकेत इसी दिशा में इशारा कर रहे हैं। डीएमके पर लगाए गंभीर आरोप गठबंधन से बाहर निकलने के फैसले को सही ठहराते हुए एमडीएमके ने आरोप लगाया कि डीएमके के भीतर एमडीएमके को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही थीं। पार्टी ने यह दावा भी किया कि एआईएडीएमके को सरकार बनाने में मदद करने के लिए एक गुप्त योजना पर काम चल रहा था, जिसके कारण एमडीएमके के लिए इस गठबंधन में बने रहना नामुमकिन हो गया था। दूसरी तरफ, डीएमके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। डीएमके के सैयद हफीजुल्लाह ने कहा यह डीएमके ही थी जिसने एमडीएमके को विधानसभा और संसद में प्रतिनिधित्व दिलाने में मदद की। वाइको के बेटे दुरई वाइको को एमडीएमके में आगे बढ़ाना ही पार्टी के कमजोर होने की असली वजह है, क्योंकि यह वंशवादी राजनीति के खिलाफ खुद वाइको के पुराने अभियानों के बिल्कुल विपरीत है। एमडीएमके के दो विधायकों का बगावती रुख यह घटनाक्रम जहां एक तरफ डीएमके के लिए एक झटका है, वहीं खुद एमडीएमके को भी इससे नुकसान उठाना पड़ा है। साल 2026 के विधानसभा चुनाव में डीएमके के उगते सूरज चुनाव चिह्न पर चुने गए एमडीएमके के दो विधायकों ने इस जनरल काउंसिल बैठक का बहिष्कार कर दिया। इन विधायकों ने संकेत दिया है कि वे डीएमके के साथ ही बने रहेंगे। उनके इस फैसले का मतलब यह है कि अगर एमडीएमके औपचारिक रूप से टीवीके के साथ गठबंधन कर भी लेती है, तो भी सत्ताधारी दल की विधायी संख्या में तुरंत कोई बढ़ोतरी नहीं होगी और न ही कोई सीट खाली होगी जिससे उपचुनाव की नौबत आए। टीवीके सरकार के साथ बढ़ती नजदीकियां एमडीएमके के इस अलगाव के संकेत पहले ही मिल चुके थे, जब पार्टी ने टीवीके सरकार के विश्वास मत (Trust vote) के दौरान मतदान से दूरी बना ली थी। इसके बाद एमडीएमके प्रमुख वाइको, उनके बेटे और सांसद दुरई वाइको ने मुख्यमंत्री विजय और टीवीके के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई बैठकें भी की थीं। एमडीएमके के बाहर निकलने के बाद अब कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और एमडीएमके सत्ताधारी टीवीके के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इस नई सरकार में कांग्रेस दो मंत्रियों के साथ गठबंधन सहयोगी बन चुकी है, जबकि VCK और IUML के पास कैबिनेट में एक-एक मंत्री पद है। वहीं, सीपीआई और सीपीएम जैसी वामपंथी पार्टियां बाहर से अल्पसंख्यक टीवीके सरकार को अपना समर्थन दे रही हैं। डीएमके के भीतर अकेले चुनाव लड़ने की उठ रही मांग यह सियासी बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब डीएमके के भीतर भी भविष्य के चुनाव अकेले दम पर लड़ने की आवाजें तेज हो रही हैं। सबसे पहले डीएमके सांसद कनिमोझी ने यह विचार सामने रखा था, जिसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और डीएमके सांसद ए. राजा ने भी इसी सुर में अपनी बात दोहराई। राजनीतिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो वाइको को कभी पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का राजनीतिक उत्तराधिकारी (Protege) माना जाता था। हालांकि, 1993 में उनकी बढ़ती लोकप्रियता और करुणानिधि के बेटे एमके स्टालिन के लिए एक चुनौती के रूप में देखे जाने के कारण उन्हें डीएमके से निष्कासित कर दिया गया था। डीएमके के साथ उनका यह 'खट्टा-मीठा' रिश्ता सालों से उतार-चढ़ाव भरा रहा है, जहां वे कई बार गठबंधन के अंदर और बाहर आते-जाते रहे हैं। अब एक बार फिर वाइको ने एमडीएमके की कश्ती को डीएमके के किनारे से अलग कर लिया है।

India-US Trade Deal पर बड़ी अपडेट, सर्जियो गोर ने कहा- जल्द हो सकता है समझौता

वाशिंगटन   भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के करीब पहुंच गए हैं। इसमें बस कुछ ही मुद्दे सुलझाने बाकी हैं और पक्षों इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले कानूनी भाषा को अंतिम रूप देने पर ध्यान दे रहे हैं। व्हाइट हाउस में न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ एक खास इंटरव्यू में, अमेरिकी राजदूत गोर ने भरोसा जताया कि यह एग्रीमेंट आने वाले हफ्तों या महीनों में पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कई दूसरे बड़े व्यापार समझौतों के मुकाबले बातचीत पहले ही बहुत तेजी से आगे बढ़ चुकी है। द्विपक्षीय व्यापार समझौते की शेष कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए गोर ने कहा, "समझौते के मसौदे (ड्राफ्ट) की भाषाई रूपरेखा पर अभी काम होना बाकी है। करीब 48 घंटे पहले दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर के साथ मैं उन बैठकों में शामिल था, जहां हमने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। वे मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं। यह वार्ता बेहद सार्थक रही। हालांकि, कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है। अब बहुत कुछ उस अंतिम मसौदे की भाषा पर निर्भर करेगा, जिस पर दोनों पक्ष हस्ताक्षर करेंगे। हमें पूरा विश्वास है कि अगले कुछ हफ्तों या महीनों में इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।" गोर ने कहा कि बातचीत को सही नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका समझौते पर सिर्फ लगभग 18 महीने से चर्चा चल रही थी। उन्होंने कहा, "देखिए, इसे सही नजरिए से देखें तो, हम इस समझौते पर डेढ़ साल से काम कर रहे हैं।  यूरोपीय संघ समझौता, जो अभी भी पूरी नहीं हुई है, उसे 20 साल हो गए हैं। हर कोई कहता है, 'इसमें इतना समय क्यों लग रहा है?' हम इसे पूरा करने की दिशा में एक शानदार रास्ते पर हैं।"प्रस्तावित समझौते के कंटेंट को लेकर बात करने से इनकार करते हुए, अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा कि दोनों सरकारें ऐसे नतीजे की ओर काम कर रही हैं जिससे दोनों पक्षों को फायदा हो। उन्होंने कहा, "मैं ज्यादा कुछ नहीं बताना चाहता। आपको इंतजार करना होगा और देखना होगा। यह उन चीजों में से एक है जब आपको कॉमन ग्राउंड मिलता है और हम उन चीजों की पहचान कर पाते हैं जो दोनों पक्षों के लिए अच्छी हैं, तभी डील होती है।" अमेरिकी राजदूत ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी हालिया मीटिंग के बाद भी भारत आने के लिए उत्सुक हैं। गोर ने कहा, "मेरे पास अभी पक्की तारीखें नहीं हैं। मैं अभी राष्ट्रपति से मिला हूं। मैं उनके साथ ओवल ऑफिस में कई घंटे रहा। राष्ट्रपति ने जो बातें पूछी, उनमें से एक यह थी, 'तो मैं कब आ रहा हूं?' वह आने के लिए बहुत उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें बुलाया है। मुझे लगता है कि यह किसी समय होगा।"हालांकि, उन्होंने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव शेड्यूल के कारण टाइमलाइन बताने से मना कर दिया, लेकिन गोर ने कहा कि भारत अभी भी उनकी प्राथमिकता वाली जगह बना हुआ है। अमेरिकी राजदूत ने कहा, "अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, इसलिए राष्ट्रपति का शेड्यूल बहुत व्यस्त है, जिसमें वे अन्य देश में घूमने पर फोकस करेंगे। लेकिन इसके बावजूद, भारत उन जगहों की लिस्ट में सबसे ऊपर है जहां वे जल्द ही जाएंगे।" गोर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंध समय-समय पर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की अटकलों के बावजूद भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूत आधारशिला बने हुए हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम बहुत अच्छी जगह पर हैं। उस संबंधों की एक बड़ी वजह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच का रिश्ता है जो हमेशा मजबूत रहा है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बहुत अच्छे दोस्त हैं और यह बात सालों पुरानी है और यह बात आगे भी जारी रहेगी।" भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जिसका मकसद मार्केट एक्सेस बढ़ाना, टैरिफ की रुकावटें कम करना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। दोनों सरकारों ने बार-बार इस समझौते को अपनी प्राथमिकता बताया है और एक बड़े ट्रेड फ्रेमवर्क पर जाने से पहले एक शुरुआती समझौते को पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। व्यापार, भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के सबसे तेजी से बढ़ते स्तंभ में से एक बनकर उभरा है, जिसमें रक्षा, तकनीक, जरूरी और नई तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संबंध भी शामिल हैं। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत में अपने बढ़ते सहयोग के साथ-साथ आर्थिक इंटीग्रेशन को भी गहरा करने की कोशिश की है।

गोवा में कमीशन हुआ स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल ICGS अक्षय

नई दिल्ली  भारतीय तटरक्षक बल ने अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए नई पीढ़ी के फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ICGS अक्षय (यार्ड 1273) को आधिकारिक तौर पर सेवा में शामिल कर लिया। वास्को (गोवा) में आयोजित समारोह के दौरान इस स्वदेशी पोत को कमीशन किया गया। यह जहाज समुद्री सीमाओं की निगरानी, त्वरित कार्रवाई और तटीय सुरक्षा को नई मजबूती देगा। ICGS अक्षय का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके भारतीय तटरक्षक बेड़े में शामिल होने से देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। 'समुद्र सिर्फ व्यापार नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का भी आधार' पश्चिमी क्षेत्र के तटरक्षक कमांडर इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा (PTM, TM) ने कहा कि समुद्र केवल आवागमन और व्यापार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा भारत के राष्ट्रीय उद्देश्यों का अहम हिस्सा है और इसे हर हाल में मजबूत बनाए रखना आवश्यक है। इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा ने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल की तैयारी केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह तैयारी प्लेटफॉर्म, वर्दीधारी जवानों के प्रशिक्षण, मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) और सबसे बढ़कर उनकी सोच और क्षमता में दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि हर नया प्लेटफॉर्म तटरक्षक बल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि ICGS अक्षय भारतीय तटरक्षक बल की समुद्र में मौजूदगी को और मजबूत करेगा। इसके जरिए आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया की गति बेहतर होगी और तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और तैयारियों को नई मजबूती मिलेगी। यह पोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।

बाढ़-सूखे से निपटने के लिए हाईटेक सिस्टम लाएगी बिहार सरकार

पटना  बिहार सरकार जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और नदियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए नई जल नीति तैयार कर रही है. इस नीति में आधुनिक तकनीक और डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य पानी का बेहतर उपयोग करना और बाढ़-सूखे जैसी समस्याओं से समय रहते निपटना है. डिजिटल होगी जल प्रबंधन प्रणाली नई नीति के तहत जल प्रबंधन को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाया जाएगा. नदियों के जलस्तर की निगरानी और रिपोर्टिंग आधुनिक डिजिटल सिस्टम से होगी. इससे बाढ़ और सूखे की स्थिति का पहले से सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इससे जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा. नई वाटर अथॉरिटी बनाने की तैयारी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार मौजूदा जल संसाधन संस्थाओं की समीक्षा कर रही है. जरूरत पड़ने पर नई वाटर अथॉरिटी और अन्य संस्थानों का गठन भी किया जाएगा. इसके लिए जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से स्टेट वाटर रिसोर्स रिफॉर्म फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है. उच्च स्तरीय समिति करेगी निगरानी नई नीति की रूपरेखा तैयार करने के लिए मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है. इसमें जल संसाधन, कृषि, पर्यावरण, नगर विकास, पीएचईडी, ग्रामीण विकास और लघु जल संसाधन विभाग के अधिकारी शामिल हैं. यह समिति पूरे फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देगी. भूजल और नदी डेटा पर रहेगा विशेष फोकस नई नीति में गिरते भूजल स्तर को सुधारने पर विशेष जोर दिया जाएगा. साथ ही नदी से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक और उपयोगी बनाया जाएगा. जल परियोजनाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग होगी और पुराने जल कानूनों को भी समय के अनुसार अपडेट करने की तैयारी है. किसानों और शहरों को मिलेगा सीधा लाभ नई व्यवस्था लागू होने के बाद नहरों के जरिए सिंचाई के लिए पानी का बेहतर वितरण किया जाएगा. इससे किसानों को समय पर पर्याप्त पानी मिल सकेगा. औद्योगिक इकाइयों और शहरों के लिए भी संतुलित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी. डैम में सेंसर आधारित मीटर लगाए जाएंगे और नहरों में पानी की बर्बादी रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा. सरकार का मानना है कि इस नई नीति के लागू होने के बाद बिहार जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में अधिक आधुनिक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में आगे बढ़ेगा.

रोजगारपरक शिक्षा पर बड़ा कदम, 15 जुलाई तक शुरू होंगी कक्षाएं

लखनऊ उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की मुहिम तेज हो गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में "प्रोजेक्ट प्रवीण" के अन्तर्गत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण के लिए लक्ष्य आवंटित कर दिए गए हैं। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि सरकार का मुख्य ध्येय है कि प्रदेश का कोई भी युवा हुनर से वंचित न रहे। 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के जरिए हम राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों में मजबूत कर रहे हैं। बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थियों की सीमा तय इस योजना के तहत आईटी (आईटी-आईटीईएस), हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, अपैरल, ब्यूटी एंड वेलनेस और कृषि जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रत्येक बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थियों की सीमा तय की गई है। इससे बच्चों को प्रयोगात्मक और व्यावहारिक ज्ञान बेहतर ढंग से मिल सकेगा। इस वर्ष प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत प्रदेश भर में कुल 36103 प्रशिक्षणार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों आगरा, बरेली, आजमगढ़, ललितपुर, वाराणसी, रामपुर, शाहजहांपुर, जालौन और सोनभद्र सहित राज्य के राजकीय विद्यालयों में सूची बद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रमुख सेक्टर में आईटी-आईटीईएस, हेल्थकेयर, अपैरल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी एंड वेलनेस, मैनेजमेंट, ग्रीन जॉब्स और एग्रीकल्चर शामिल हैं। पाठ्यक्रम की अधिकतम अवधि 300 घंटे होगी। 15 जुलाई तक कक्षाओं का संचालन शुरू हो जाएगा उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे  के अनुसार सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को सख्त समय-सीमा का पालन करना होगा। प्रशिक्षण प्रदाताओं को केंद्र की स्थापना, पंजीकरण और बैच निर्माण की प्रक्रिया पूरी कर 15 जुलाई तक हर हाल में कक्षाओं का संचालन शुरू करना होगा। बैच शुरू होने के 07 कार्य दिवसों के भीतर सभी छात्र-छात्राओं को पाठ्य सामग्री का वितरण कर उसकी तस्वीरें मिशन पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। यदि कोई प्रशिक्षण प्रदाता समय पर कार्य आरंभ नहीं करता है या जिला स्तर से किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त विधिक कार्यवाही की जाएगी।  

सरकार का बड़ा कदम! 5 नक्सल प्रभावित नागरिकों समेत 2 आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलेगी सरकारी नौकरी

मोहला. मोहला–मानपुर –अंबागढ़ चौकी जिले में शासन की पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत नक्सल पीड़ितों को पुनर्वास नीति का लाभ देने एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। 24 जून को कार्यालय कलेक्टर सभागार में जिला स्तरीय नक्सल पीड़ित एवं आत्मसमर्पित नक्सलवादी पुनर्वास समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के अध्यक्ष कलेक्टर तुलिका प्रजापति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाय पी सिंह, जिला वनमंडलाधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में पात्र 5 नक्सल पीड़ितों एवं 2 आत्मसमर्पित नक्सलियों कुल 7 लोगों को पुनर्वास नीति के अंतर्गत शासकीय सेवा में नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा 1 एक नक्सल पीड़ित परिवार को उसके जीवन यापन करने हेतु 15 लाख रुपए प्रदाय किए जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त होगा समिति के अध्यक्ष के द्वारा नक्सल पीड़ित परिवारों को भी मीटिंग में सम्मिलित किया गया था जिसमें अध्यक्ष के द्वारा सभी पीड़ितों से बात कर उनकी अन्य योजनाओं के संबंध में जानकारी ली एवं उनके आवेदन अनुसार शीघ्र लाभ प्रदाय सनिश्चित करने हेत संबंधित विभाग को आदेश किया जा गया है। जिला पुलिस एवं प्रशासन के समन्वित प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास एवं विश्वास का वातावरण निरंतर मजबूत हो रहा है। शासन की पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों तथा नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। शासकीय नौकरी मिलने से लाभार्थियों को स्थायी रोजगार के साथ समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ है। जिला पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास की राह अपनाने वाले आत्म समर्पित माओवादियों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करना है। जिला मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी 31 मार्च 2026 को पूर्ण रूप से नक्सली मुक्त हो चुका है।

फिटमेंट फैक्टर 2 से 4 तक की मांग: 8वें पे कमीशन से बढ़ सकती है बेसिक सैलरी में भारी उछाल

 नई दिल्ली 8वां पे कमीशन इस समय लगातार कर्मचारी और उनके संगठनों से बातचीत कर रहा है। सबसे अधिक किसी एक बात पर निगाह है तो वह फिटमेंट फैक्टर्स है। अधिक फिटमेंट फैक्टर होने की स्थिति में बेसिक पे उतना ही बढ़ जाएगा। जिसकी वजह से कर्मचारी संगठन लगातार अधिक फिटमेंट फैक्टर की डिमांड कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई भी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। आइए जानते हैं कि फिटमेंट फैक्टर कैसे सैलरी को प्रभावित करेगा। फिटमेंट फैक्टर कैसे प्रभावित करेगा सैलरी मौजूदा समय में लेवल एक के अधिकारियों का बेसिक पे 18000 रुपये है। अगर फिटमेंट फैक्टर 2 रहता है तब की स्थिति में मिनिमम बेसिक पे 36000 रुपये हो सकता है। वहीं, 2.5 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति में 45000 रुपये बेसिक पे पहुंच जाएगा। वहीं, फिटमेंट फैक्टर तीन रहने की स्थिति में बेसिक पे 54000 रुपये हो सकता है। वहीं, लेवल 13 के कर्मचारी जिनका बेसिक पे इस समय 123100 रुपये है। 2 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति बेसिक पे 246200 रुपये हो सकता है। फिटमेंट 2.5 रहने की स्थिति में मिनिमम बेसिक पे 307750 रुपये हो सकता है। 8वां वित्त आयोग लगातार कर रहा है मीटिंग पे कमीशन की तरफ से देश के अलग-अलग शहरों में मीटिंग हो रही है। दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और फिर उसके बाद उत्तर प्रदेश में 8वे वित्त आयोग की मीटिंग हो चुकी है। आगे बंगाल और उड़ीसा में 8वें पे कमीशन की मीटिंग प्रस्तावित है। बता दें, 8वें वित्त आयोग का गठन नवंबर 2025 किया गया था। इस आयोग के पास 18 महीने का समय पर है। इस दौरान कंपनी को रिपोर्ट जमा कर देना है। फिटमेंट फैक्टर को लेकर उम्मीद जताई जा रही है 8वें पे कमीशन को कर्मचारी सगंठनों की तरफ से जमा किए गए मेमोरेंडम में 4 के करीब फिटमेंट फैक्टर भी रखने की मांग हुई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा मार्केट के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों और बेहतर सैलरी मिलनी चाहिए। अब देखना है कि आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर तय करता है। फिटमेंट फैक्टर के अलावा कर्मचारी संगठनों की तरफ से मौजूदा डीए कैलकुलेशन का फॉर्मूले भी बदलाव की डिमांड की जा रही है। बता दें, पे कमीशन का गठन हर 10 साल में किया जाता है।

भायखला में सनसनी: जिंक फॉस्फाइड वाले कैप्सूल बांटने के आरोप में फैयाज प्रेमजी पकड़ा गया

मुंबई मुंबई पुलिस ने मुहर्रम जुलूस के दौरान जहरीले कैप्सूल बांटने की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया. पुलिस ने इस मामले में फैयाज प्रेमजी नाम के एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक आरोपी बिना अनुमति के 'दर्द से राहत' के नाम पर लोगों को कैप्सूल बांट और बेच रहा था. मुंबई पुलिस के मुताबिक जेजे और भायखला इलाके से मोहर्रम का जुलूस गुजर रहा था, जहां आरोपी कथित तौर पर लोगों को कैप्सूल बांट रहा था. पुलिस पेट्रोलिंग टीम ने फैयाज को कैप्सूल वितरित करते हुए देखा. शक होने पर पुलिस ने उससे पूछताछ की और उसके पास मौजूद कैप्सूल जब्त कर लिए. डीसीपी सेंट्रल रीजन जोन-1 जयंत मीणा ने बताया, 'बीती रात भायखला पुलिस स्टेशन की सीमा में मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था. जुलूस के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति लोगों को कैप्सूल बांटता और बेचता हुआ दिखाई दिया. संदेह होने पर मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने उससे पूछताछ की और उसके पास से कैप्सूल का स्टॉक बरामद किया.' पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने खासतौर पर मुहर्रम जुलूस को निशाना बनाया और इसमें शामिल होने वाले लोगों को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखता था. फैयाज ने 50 KG जिंक फॉस्फाइड मंगाया था डीसीपी जयंत मीणा ने कहा, 'पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने कुल 30 हजार खाली कैप्सूल और 50 किलो जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने वाला जहरीला केमिकल) मंगवाया था, जो बेहद जहरीला पदार्थ है.' पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान पुणे निवासी फैयाज प्रेमजी के रूप में हुई है, जो पेंट का कारोबार करता है और बीबीए ग्रेजुएट है. पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने कई दिनों तक अपने ठिकाने पर कैप्सूलों में जहर भरने का काम किया. पुलिस का कहना है कि कैप्सूल का सेवन करने वाले सलमान सैयद नाम के व्यक्ति की तबीयत बिगड़ गई थी. उसे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज भायखला पुलिस ने आरोपी के पास से 14,900 जहरीले कैप्सूल बरामद किए हैं. प्रत्येक कैप्सूल में करीब एक ग्राम जिंक फॉस्फाइड मिलाया गया था. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी साल 2025 में ईरान और इराक गया था. पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है. इस मामले में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109, 110 और 123 के तहत जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि फैयाज प्रेमजी शिया खोजा मुस्लिम समुदाय से संबंध रखता है. आरोपी एक साल में 19 बार ईरान-इराक गया फैयाज की बहन ईरान में फिजियोथेरेपिस्ट के तौर पर काम करती है, जबकि उसकी मां भी ईरान में रहती हैं. उसकी पत्नी से उसका तलाक हो चुका है. जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच फैयाज कई बार ईरान और इराक की यात्रा कर चुका है. पुलिस के मुताबिक पिछले एक साल में ही वह 19 बार ईरान और इराक गया था. फैयाज प्रेमजी पुणे के विमान नगर इलाके में रहता है, जहां उसका पेंट का कारोबार है. मुंबई आने के दौरान वह डोंगरी इलाके के एक गेस्ट हाउस और डॉरमेट्री में ठहरा था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी उन यात्राओं का उद्देश्य क्या था और क्या आरोपी किसी के प्रभाव में था या किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था. हालांकि, फिलहाल किसी आतंकी संगठन से उसके संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है. फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की गहन जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति या संगठन शामिल था या नहीं.

हरियाणा सीएम की मध्यस्थता से हल हुआ निहंग-प्रशासन विवाद, बनी सहमति

चंडीगढ़ उत्तराखंड के पांवटा साहिब क्षेत्र में पिछले कई दिनों से आंदोलनरत निहंगों और उत्तराखंड सरकार के बीच चल रहा विवाद आखिरकार हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पहल पर सुलझ गया। शुक्रवार देर रात निहंगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर अपनी मांगों और विवाद से अवगत कराया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल अपने राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी को मामले के समाधान की जिम्मेदारी सौंपी। निहंगों ने की आंदोलन खत्म करने की घोषणा मुख्यमंत्री के निर्देश पर तरुण भंडारी ने उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार बातचीत की और दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित कराया। लंबी बातचीत के बाद सहमति बनी, जिसके साथ ही कई दिनों से चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया और निहंगों ने अपना आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी। दरअसल, पांवटा साहिब क्षेत्र में निहंगों का विवाद धार्मिक गतिविधियों और संबंधित भूमि के उपयोग को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा हुआ था। निहंग संगठन प्रशासन के कुछ फैसलों का विरोध कर रहे थे और अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। मामला लगातार तूल पकड़ रहा था, जिससे कानून-व्यवस्था और धार्मिक सौहार्द को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही थीं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित हस्तक्षेप किया। उनके निर्देश पर राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी ने उत्तराखंड सरकार से संपर्क साधा और ऐसा समाधान निकालने का प्रयास किया, जिससे निहंगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान भी बना रहे और प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित न हो। सहमति बनने के बाद निहंग प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजनीतिक सचिव तरुण भंडारी का आभार व्यक्त किया। राजनीतिक दृष्टि से भी इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि एक दूसरे राज्य में उत्पन्न संवेदनशील धार्मिक विवाद के समाधान में हरियाणा सरकार की सक्रिय भूमिका देखने को मिली। इससे दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद की भी मिसाल सामने आई।  

1 जुलाई से बड़ा बदलाव: मनरेगा की जगह लागू होगी ‘G-RAM-JI’ स्कीम, बढ़ेगा रोजगार का दायरा

अररिया ग्रामीण रोजगार की सबसे बड़ी योजना मनरेगा (MGNREGA) अब पूरी तरह से नए स्वरूप में नजर आने वाली है। वर्ष 2005 में 'नरेगा' के रूप में शुरू हुई और 2010 में 'मनरेगा' बनी इस योजना का नाम अब केंद्र सरकार ने बदल दिया है। वर्ष 2026 से इसे 'जी राम जी' (G-RAM-JI) यानी 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण' के नाम से जाना जाएगा। तकनीकी दिक्कतों के कारण टली थी योजना, अब 1 जुलाई से होगी लागू विभागीय जानकारी के अनुसार, इस नई योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत से ही लागू किया जाना था। हालांकि, पोर्टल और तकनीकी तैयारियां पूरी न होने के कारण इसे कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था। अब विभाग ने इसे आगामी 1 जुलाई से पूरी तरह लागू करने का सख्त निर्देश जारी किया है। पुराना मनरेगा कानून होगा समाप्त, नए जॉब कार्ड बनने तक पुराने रहेंगे मान्य इस संबंध में जानकारी देते हुए मनरेगा पीओ अफरोज अहमद ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होते ही पुराना मनरेगा कानून समाप्त हो जाएगा। पुरानी सभी योजनाएं इसमें समाहित कर ली जाएंगी। राहत की बात यह है कि जब तक मजदूरों के नए जॉब कार्ड नहीं बन जाते, तब तक उनके पुराने जॉब कार्ड ही मान्य रहेंगे। सिर्फ मजदूरी नहीं, अब गांवों का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करेगी सरकार अधिकारियों के मुताबिक, 'जी राम जी' योजना सिर्फ मजदूरी आधारित नहीं होगी, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला एक व्यापक मिशन बनेगी। इसमें मिट्टी भराई जैसे पारंपरिक कार्यों के बजाय जल संरक्षण, खेत, सड़क, पुलिया, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई जैसे ढांचागत (Infrastructure) कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। 100 के बदले मिलेंगे 125 दिन काम, 3 दिन के भीतर खाते में आएगा पैसा इस नई योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब ग्रामीणों को साल में 100 दिन के बदले 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। यही नहीं, मजदूरी का भुगतान महज तीन दिनों के भीतर डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में कर दिया जाएगा। भुगतान में देरी होने पर मजदूरों को मुआवजा देने का भी नियम बनाया गया है विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत हर हफ्ते वेतन का प्रविधान वर्तमान में चल रही मनरेगा योजना में मजदूरों को ₹252 की दिहाड़ी मिलती है। केंद्र सरकार की इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को 'विकसित भारत वर्ष 2047' के लक्ष्य के अनुरूप तैयार करना है। इसके तहत मजदूरों का वेतन भुगतान हर सप्ताह करने का भी प्रविधान है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।