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भाजपा महानगर इकाई की तरफ से आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान के उद्घाटन सत्र में बोले सीएम योगी

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने मूल्यों और आदर्शों की राजनीति अपनाकर शून्य से शिखर तक की यात्रा की है। 1985 में मात्र दो लोकसभा सीट हासिल करने वाली इस पार्टी की आज केंद्र सहित देश के 21 राज्यों में सरकार है। दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में भाजपा की यात्रा सत्ता प्राप्त की यात्रा नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, सुशासन, समृद्धि और समन्वय की बेहतरीन यात्रा है। सीएम योगी शनिवार को गोरखपुर के गुलरिहा स्थित एक रिजॉर्ट में भाजपा महानगर के प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान 2026 के अंतर्गत पार्टी की महानगर इकाई की तरफ से आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में शामिल प्रतिभागियों को ‘दल से पहले देश’ और ‘व्यक्ति से पहले समाज’ के भाव से अनवरत आगे बढ़ते रहने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा आज दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास का प्रतीक बनी है तो इसके पीछे भारतीय जनसंघ के समय से पार्टी के संस्थापकों के आदर्शों और संस्कारों से मिली प्रेरणा है। सीएम योगी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उद्धरण, ‘बिना मूल्यों और आदर्शों वाली राजनीति मौत का फंदा है’ का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए संस्थापकों के मूल्य और आदर्श सदैव सर्वोपरि हैं।  वाह्य और आंतरिक सुरक्षा का मॉडल दिया भाजपा सरकार ने मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने देश में वाह्य और आंतरिक सुरक्षा का मॉडल दिया है। 2014 के पहले दुश्मन देश सैनिकों से क्रूरता करते थे। सरकारें तब बोलती नहीं थी, उन्हें देश की कीमत पर संबंध की चिंता रहती थी। 2014 के बाद सरकार ने दुश्मन की आंख में आंख मिलाने का सामर्थ्य दिया है। एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक के जरिये दुनिया के सामने अपने सामर्थ्य और ताकत का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के पहले कश्मीर जल रहा था, पूर्वोत्तर के राज्यों में उग्रवाद चरम पर था, देश के 120 जिलों में नक्सलवाद हावी था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कश्मीर में आतंकवाद को कुचल दिया है। पूर्वोत्तर के राज्यों में उग्रवाद समाप्त हो चुका है। नक्सलवाद एक-दो जिलों तक सीमित है और बहुत शीघ्र वहां भी खत्म हो जाएगा।  सुरक्षा के बेहतर माहौल में ही विकास संभव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सुरक्षा के बेहतर माहौल में ही विकास संभव होता है। सुरक्षा का वातावरण बनने के कारण ही आज इंफ्रास्ट्रक्चर, रोड कनेक्टिविटी, हाईवे एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, इनलैंड वाटरवे, मेट्रो, रोपवे और लॉजिस्टिक के कार्य बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, विकास की प्राथमिक आवश्यकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर जितना मजबूत होगा, विकास भी उतनी ही तेजी से होगा।  अंत्योदय का सपना साकार कर रही मोदी सरकार सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में शामिल पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के सपने को साकार कर रही है। पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया ने बीते 12 वर्षों में बदलते भारत को देखा है। कल्याणकारी योजनाओं का केंद्र समाज के अंतिम पायदान का व्यक्ति है। उन्होंने कहा कि आज देश में 12 करोड़ लोगों के घर शौचालय बनाए गए हैं, 4 करोड़ गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्की छत मिली है। करोड़ों लोगों को नल से जल की सुविधा मिल रही है। 50 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना से स्वास्थ्य सुरक्षा प्राप्त हो रही है। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन की सुविधा मिली। लोगों को पीएम जीवन ज्योति, पीएम स्टार्टअप, स्टैंडअप, डिजिटल इंडिया, पीएम विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, ओडीओपी, स्ट्रीट वेंडर्स के लिए पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर मिल रहा है। गांव में गरीबों को घरौनी की सुविधा मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के कारण देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से उबरकर देश के विकास में सहभागी बन रहे हैं।  भाजपा सरकार ने बदली लोगों की धारणा  मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जो बातें सिर्फ कल्पना में थीं, भाजपा सरकार ने उन्हें हकीकत में बदला है। सरकार ने लोगों की धारणा बदली है। उन्होंने कहा कि कोई कल्पना भी नहीं करता था कि श्रीराम जन्मभूमि का विवाद समाप्त होगा। आज विवाद समाप्त होने के साथ ही श्रीराम मंदिर का निर्माण भी हो चुका है। काशी में विश्वनाथ धाम और विंध्याचल में विंध्य धाम का निर्माण हो चुका है। कुंभ की परंपरा हजारों वर्षों की है लेकिन दिव्य, भव्य, स्वच्छ और स्मार्ट कुंभ का आयोजन पहली बार भाजपा सरकार में ही हो रहा है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने कुंभ को भगदड़, अराजकता और गंदगी का पर्याय बना दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृत वर्ष में डबल इंजन सरकार ने देश की विरासतों को सम्मान से जोड़ा। पीएम मोदी ने दल से ऊपर देश की भावना से हर घर पर कमल का फूल वाला झंडा फहराने की बजाय देश की आन, बान, शान का प्रतीक तिरंगा झंडा फहराने का आह्वान किया। सीएम योगी ने कहा कि अन्य दलों को भी दल से ऊपर देश के मंत्र से प्रेरणा लेनी चाहिए। कहा कि यह राष्ट्र को आतंकवाद से मुक्त कर विकास की बुलंदियों पर ले जाने का मंत्र है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी स्वार्थ की संकीर्णताओं में डूबने पर देश की सुरक्षा में सेंध लग जाती है।  भावी पीढ़ी के लिए जज्बा पैदा कर गया डॉ. मुखर्जी का बलिदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय जनसंघ की स्थापना से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक की वर्तमान यात्रा के विकास पर विस्तार से अपनी बात रखी और संस्थापकों के व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि 1951 में कांग्रेस की तुष्टिकरण पोषक नीतियों से देश को बचाने की आवश्यकता को देखते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई। डॉ. मुखर्जी आजादी के बाद बनी देश की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। सत्ता को तिलांजलि देकर उन्होंने कांग्रेस सरकार की कश्मीर के खिलाफ नीतियों पर आंदोलन शुरू किया। तब उन्होंने कश्मीर को लेकर उद्घोष किया था, एक देश में दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेगा। इसी आंदोलन के चलते … Read more

अरहर की इस खास किस्म से होगी तगड़ी कमाई, शहडोल की रॉयल वेरायटी की बढ़ी मांग

शहडोल   खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश के कई जिलों में धान की खेती जमकर की जाती है पर इन दिनों किसानों का झुकाव अरहर की फसल की ओर भी बढ़ा है. इसका सबसे बड़ा कारण है अरहर दाल की डिमांड. अरहर दाल खाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है, यही वजह है कि इस दाल को नगद वाली फसल या खटाखट पैसे दिलाने वाली फसल भी कहा जाता है. इस आर्टिकल में जानें कि कैसे इस दाल को उगाकर आप भी जमकर कमाई कर सकते हैं।  कैसे करें अरहर दाल की खेती? शहडोल के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बीके प्रजापति बताते हैं, '' अगर आप अरहर की खेती करना चाहते हैं, तो यह प्रमुख तौर पर खरीफ के सीजन में इसे बोया जाता है. अरहर की फसल ऐसे क्षेत्र में बोई जाती है, जहां उचहन वाली जमीन हो, जल निकासी की खेत में अच्छी व्यवस्था हो और जल जमाव बिल्कुल भी न हो रहा हो, क्योंकि ज्यादा जल जमाव से फसल खराब हो जाती है. सबसे खास बात यह है कि इस फसल के लिए मिट्टी का पीएच लेवल 6.5 से 7.5 तक होना चाहिए।  वे आगे कहते हैं, '' अरहर की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है, हालांकि, जहां जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, उपजाऊ जमीन हो वहां इसकी खेती की जा सकती है. अरहर की खेती के लिए 15 जून से 15 जुलाई के बीच में उपयुक्त समय माना जाता है।  अरहर की खेती के लिए सबसे पहले ये करें कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, '' सबसे पहले कल्टीवेटर से अच्छी तरह से खेतों की जुताई कर लें, और फिर उसके बाद रोटावेटर चला दें, जिससे खेत में जो खरपतवार हैं पूरी तरह से कट जाएगा, नष्ट हो जाएगा, और मिट्टी एकदम समतल हो जाएगी. इसके बाद 10 से 15 किलोग्राम के लगभग प्रति हेक्टेयर बीज बुवाई के लिए जरूरत पड़ती है. बुवाई से पहले बीज को कवकनाशी से अच्छी तरह से उपचारित कर लें, और कतार से 60 से 75 सेंटीमीटर की दूरी और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें, जिससे फायदा होगा।  खाद, खरपतवार और कीट प्रबंधन वे आगे बताते हैं कि अरहर दाल एक ऐसी किस्म की फसल है, जिसमें ज्यादा देख रेख की जरूरत नहीं पड़ती, ना ही ज्यादा रासायनिक खाद की जरूरत पड़ती है, क्योंकि दलहनी फसल होने के कारण नाइट्रोजन की कम ही जरूरत पड़ती है. इसके लिए सड़ा हुआ गोबर खाद हो तो अच्छी मात्रा में खेतों में डाल दें. इसके अलावा इसको ज्यादा सिंचाई की भी जरूरत नहीं पड़ती है।  खरीफ के सीजन में बोई जाती है अरहर दाल की फसल  ये कम पानी में पकने वाली फसल है, लेकिन एक बात का जरूर ध्यान रखें कि फूल आने और फली बनने के समय नमी जरूर बनाए रखें. इस फसल में खरपतवार पर भी बहुत ज्यादा नियंत्रण नहीं करना पड़ता. जहां तक कीट और रोग प्रबंधन की बात करें तो अरहर में उकठा रोग की समस्या आती है, और फली भेदक कीट की समस्या आती है, जिससे कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञों से संपर्क करके जो भी रोग लगे उसके हिसाब से समाधान कर लें।  इतनी होती है अरहर की पैदावार कृषि वैज्ञानिक आगे कहते हैं, '' जहां तक उपज की बात करते हैं तो फसल की कटाई के बाद 10 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक इसमें पैदावार मिल सकती है. अब आप पर डिपेंड करता है कि आप किस तरह से खेती कर रहे हैं और कितना ध्यान दे रहे हैं.और उस समय मौसम का बर्ताव कैसा रहा। 

Malwa Weather: बारिश नहीं होने से सोयाबीन की बोवनी प्रभावित, महंगे बीजों ने बढ़ाई किसानों की चिंता

नागदा   अब तक दो इंच बरसात हुई है। हालांकि कृषि विज्ञानियों का कहना है कि सोयाबीन फसल की बोवनी के लिए अभी और वर्षा की दरकार है। 6 से 7 इंच वर्षा के बाद बोवनी अच्छी रहेगी। इस बीच दावा किया जा रहा है कि इस बार किसानों को खाद के लिए दुकानदारों के यहां लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। किसान द्वारा घर बैठे खाद बुक करने पर तीन दिन में खाद मिल जाएगी। दुकानदार गड़बड़ करता है तो उसके लायसेंस निरस्त करने व पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। नागदा क्षेत्र में दो बार हुई झमाझम बरसात में अभी तक 56.2 एमएम लगभग 2 इंच से कुछ ज्यादा बरसात हुई है। पिछले वर्ष अभी तक लगभग 5 इंच बरसात हो गई थी। क्षेत्र के किसानों द्वारा बोवनी की पूरी तैयारी की जा चुकी है। जानकारों का कहना है कि जिस क्षेत्र में पर्याप्त बरसात हो गई है, वहां बोवनी हो सकती है। नागदा-खाचरौद क्षेत्र में अभी बरसात का इंतजार है। सोयाबीन बीज के भाव 10 से 12 हजार रुपये तक सोयाबीन बीज के भाव इस बार 10 से 12 हजार रुपये तक हैं। ऐसे में दुकानदार तो ठीक, कई किसान भी पिछले वर्ष की रखी सोयाबीन को ग्रेडिंग कराकर बीज के नाम पर बेचने रहे हैं। कृषि अधिकारी द्वारा दुकानों से सोयाबीन के 52 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। उनकी रिपोर्ट आना बाकी है। अधिकारियों के अनुसार किसान घर से बेचता है तो इस पर कार्रवाई करना आसान नहीं है। अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि सोयाबीन की बीज कंपनी का टैग देखकर ही खरीदें। बिना टैग के सोयाबीन बीज के लिए नहीं खरीदें। दुकानदार बिना टैग के बीज बेचता है तो उसकी शिकायत विभाग के अधिकारी से करें। किसानों को खाद के लिए नहीं होगी परेशानी प्रतिवर्ष किसानों को खाद के लिए काफी परेशान होना पड़ता था। किसानों को दो-तीन गुना भाव में खाद की बोरी लेना पड़ती थी। इस बार शासन ने ऑनलाइन सुविधाएं किसानों को उपलब्ध कराई है, घर बैठकर ही ऑनलाइन खाद बुक करवा सकते हैं और जिस दुकान से खाद लेना है, वहां से तीन दिन में खाद मिल जाएगा। दुकानदार देने में आना-कानी करता है तो इसकी शिकायत कृषि विभाग अधिकारी से करने पर दुकानदार के खिलाफ लायसेंस निलंबित व निरस्त करने के अलावा पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ा छत्तीसगढ़, गोवा-उत्तराखंड मॉडल के आधार पर बनेगी रूपरेखा

 रायपुर  राज्य सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य सरकार की ओर से पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह सदस्य हैं। यह समिति गोवा में लंबे समय से प्रभावी पुर्तगाली नागरिक संहिता और उत्तराखंड के नए यूसीसी कानून के प्रभावों का गहन अध्ययन करेगी। इसके साथ ही समिति गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में गठित समितियों से भी संपर्क कर समन्वय स्थापित करेगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड, गुजरात और असम इसे विधानसभा में पारित कर चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश में भी प्रक्रिया जारी है। आदिवासियों को संवैधानिक संरक्षण जनगणना 2011 के अुनसार छत्तीसगढ़ की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति (आदिवासियों) का प्रतिशत लगभग 30.62% है। भारतीय संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची आदिवासियों की संस्कृति, रीति-रिवाजों और स्वायत्तता को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करती है। अधिकांश कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी को इन संवैधानिक गारंटियों के साथ सामंजस्य बिठाना होगा। उत्तराखंड में एसटी यूसीसी से बाहर उत्तराखंड की यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को दायरे से बाहर रखा गया है। राज्य सरकार ने यह निर्णय उनकी अनूठी परंपराओं, विवाह प्रथाओं और स्थानीय रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया है। आदिवासी समुदायों में विवाह और संपत्ति के अधिकार अक्सर उनकी पारंपरिक ''रूढ़िवादी प्रथाओं'' द्वारा शासित होते हैं, जो मुख्यधारा के कानूनों से काफी भिन्न होते हैं। इन समुदायों की पहचान उनकी इन्हीं विशिष्ट प्रथाओं से जुड़ी है। सूत्राें के अनुसार आदिवासियों की प्रथागत कानून प्रणाली की रक्षा के लिए विशेष ''अपवाद'' या ''छूट'' का प्रविधान किए जाने की प्रबल संभावना है। उन्हें किस हद तक छूट दी जाए, समिति इस पर भी काम करेगी। गोवा के यूसीसी में लिंग समानता गोवा की यूसीसी 1867 के पुर्तगाली कानून पर आधारित है और राज्य के सभी निवासियों पर धर्म से परे लागू होती है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता 'सामुदायिक संपत्ति'' है, जिसके तहत विवाह के बाद पति-पत्नी संपत्ति के समान भागीदार बन जाते हैं। तलाक या मृत्यु पर संपत्ति का आधा-आधा बंटवारा अनिवार्य है। उत्तराधिकार में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार प्राप्त हैं और माता-पिता अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा बच्चों के लिए सुरक्षित रखने को बाध्य हैं। विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है और यह कानून व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक धर्मनिरपेक्ष कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जो लिंग समानता सुनिश्चित करता है। उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप पर भी प्रविधान उत्तराखंड के यूसीसी में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में सभी धर्मों के लिए एकसमान नियम निर्धारित करता है, जिससे पुत्र-पुत्री को संपत्ति में समान अधिकार मिलते हैं। राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है। यह कानून लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। यदि इस संबंध में बच्चा पैदा होता है, तो उसे कानूनी मान्यता और उत्तराधिकार के अधिकार प्राप्त होते हैं, जो महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करता है। यह बहुविवाह और एकतरफा तलाक जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित करता है। सक्रिय है राज्य सरकार     संविधान निर्माण के दौरान यूसीसी के लिए प्रयास करने का प्रविधान रखा था। गोवा के बाद अब उत्तराखंड ने इसे लागू किया है, और असम व गुजरात में भी इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है और अन्य राज्यों की आदर्श संहिता का अध्ययन किया जाएगा। समान नागरिक संहिता का लागू होना हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए एक बेहतर और सकारात्मक कदम है।     – अरुण साव, उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़  

वैवाहिक प्रताड़ना का सनसनीखेज मामला, महिला बोली- पति पोर्न दिखाने के बाद करता था जबरदस्ती

अहमदाबाद गुजरात के अहमदाबाद में एक महिला को ससुराल में ऐसी यातनाएं मिलीं, जो रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं. महिला ने पति पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, उसका कहना है कि पति उसे पोर्न दिखाता था. मारपीट करता था और अप्राकृतिक कृत्य करता था. पीड़िता ने महिला पुलिस स्टेशन में पति, सास और देवर के खिलाफ शिकायत की है।  ये पूरी कहानी शहर के शाहीबाग इलाके की है. पीड़ित महिला ने शिकायत में कहा है कि उसका पति उसे जबरन पोर्न फिल्में दिखाता था. विकृत तरीके से जबरन संबंध बनाता था. साथ ही, प्रेग्नेंसी के दौरान लात मारकर अबॉर्शन कराने का दबाव भी डालता था।  ससुराल वालों द्वारा लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ना किया गया. जान से मारने की धमकी दी गई. इससे तंग आकर महिला अहमदाबाद महिला पुलिस स्टेशन में पहुंची और आपबीती सुनाई. महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  शिकायत के अनुसार, महिला की शादी साल 2011 में हुई थी, लेकिन शादी के 15 दिन बाद ही उसकी ससुराल में उसके साथ गलत व्यवहार शुरू हो गया. शादी के समय ससुराल वालों ने महिला से यह बात छिपाई थी कि पति की पहले भी शादी हो चुकी थी और उसका एक बच्चा भी है।  शादी के तुरंत बाद सास और देवर ने दहेज को लेकर ताने मारने शुरू कर दिए थे. महिला के प्रेग्नेंट होने के बावजूद उसे पर्याप्त आराम नहीं करने दिया गया. घर के भारी-भरकम काम कराए जाते थे. बेटी के जन्म के बाद भी पति का दुर्व्यवहार कम नहीं हुआ. पति अक्सर देर रात घर आता, पार्टियों में जाता और पत्नी की इच्छा के बिना उससे जबरन संबंध बनाता था।  अगर पत्नी बीमार होती, तो भी उसे उत्तेजना बढ़ाने वाली दवाएं देकर संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता और मना करने पर बुरी तरह पीटा जाता था. कुछ समय बाद जब पत्नी दोबारा प्रेग्नेंट हुई, तो पति ने अबॉर्शन कराने का दबाव डाला और धमकी दी कि अगर उसने बात नहीं मानी तो वह तलाक दे देगा।  इन सब बातों से तंग आकर पत्नी मायके चली गई, लेकिन पति वहां पहुंच गया और उसे जबरदस्ती ससुराल ले आया. सास और देवर भी लगातार ताने मारते थे कि तुम हमारे बेटे को पसंद नहीं हो, तुम्हें तो बस समाज की वजह से रखना पड़ रहा है. तुमने हमारा घर बर्बाद कर दिया. तुम तलाक लेकर अलग हो जाओ।  'रात में दूसरे देशों की युवतियों को कर रहा था वीडियो कॉल' पत्नी ने आधी रात को अपने पति को दूसरे देशों की युवतियों के साथ वीडियो कॉल पर बात करते हुए पकड़ा था. पति उसे उन युवतियों के साथ के आपत्तिजनक वीडियो दिखाकर उसी तरह संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था. तीसरी बेटी को जन्म देने के बाद भी ससुराल वालों का रवैया नहीं बदला. जब पत्नी ने पति के अफेयर की बात सास को बताई, तो सास भड़क गईं और झगड़ा करके पत्नी को घर से निकाल दिया।  पांच महीने मायके में रहने के बाद जब वह वापस आई, तब भी पति ने अश्लील वीडियो दिखाकर अप्राकृतिक संबंध बनाने का दबाव डाला. फिर महिला और उसकी तीनों बेटियों को दूसरे घर पर भेज दिया और पति अलग रहने लगा. पति ने पत्नी को गंभीर धमकियां दीं. उसने कहा कि अगर तुमने हमारे खिलाफ कोई अर्जी या शिकायत की तो जान से मार देंगे. फिलहाल पीड़िता ने महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत की है. पुलिस ने पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद ससुराल वालों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। 

रिश्ते में खटास की अफवाहों से परेशान हुईं मौनी रॉय, पोस्ट शेयर कर कही दिल की बात

मुंबई   अभिनेत्री मौनी रॉय इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में छाई हैं। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर कयास लगाए जा रहे हैं कि उनके और पति सूरज नांबियार के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बुधवार को अभिनेत्री ने अफवाहों के बीच पोस्ट किया है। अभिनेत्री ने बुधवार को गंभीर रुख अपनाते हुए इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक नोट जारी किया, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया यूजर्स से आग्रह किया कि वे उनकी निजी जिंदगी के बारे में गलत खबरें न फैलाएं। अभिनेत्री ने लिखा, "सभी मीडिया हाउस से विनम्र निवेदन है कि कृपया गलत खबरें और अफवाहें फैलाने से बचें। हमें थोड़ा समय और प्राइवेसी दें। हर कहानी के पीछे असली भावनाएं और लोग होते हैं।  कृपया संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ पेश आएं।" बता दें कि मौनी रॉय और उनके पति सूरज नांबियार के बीच अनबन की खबरें तब तेज हुईं, जब अभिनेत्री ने पति को इंस्टाग्राम से अनफॉलो करने के साथ-साथ उनके साथ पोस्ट की गई तस्वीरें डिलीट कर दी थीं, जब सोशल मीडिया पर दोनों के अलग होने की खबरें तेज हुईं, तो सूरज ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया था। वहीं, मौनी की सबसे करीबी दोस्त दिशा पाटनी ने भी सूरज के सोशल मीडिया अकाउंट डिएक्टिवेट होने से पहले ही उसे अनफॉलो कर दिया था। दिशा, सूरज और मौनी कई जगहों पर साथ में घूमने, पार्टियों और सोशल प्रोग्राम में साथ जाया करते थे और कृति की बहन नूपुर सेनन की शादी में तीनों को साथ में देखा गया था। मौनी रॉय ने तीन साल तक डेट करने के बाद 22 जनवरी 2022 को बिजनेसमैन सूरज नांबियार से गोवा में शादी की थी। इस जोड़े ने मलयाली और बंगाली दोनों रीति-रिवाजों का पालन करते हुए शादी की, जिसमें उनके करीबी दोस्त और परिवार के सदस्य शामिल हुए। यह शादी गोवा के हिल्टन गोवा रिसॉर्ट में हुई थी। सुबह मलयाली रीति-रिवाजों से और शाम को बंगाली रीति-रिवाजों से शादी संपन्न हुई थी।

योगी सरकार का स्वच्छ ऊर्जा मिशन रफ्तार पर, घर-घर पीएनजी पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन विस्तार अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता हर घर तक आधुनिक गैस सुविधा पहुंचाने की है, जिसके तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।  24 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 43 गैस वितरण क्षेत्रों में 1,60,121 घरेलू पीएनजी कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 16,23,163 कनेक्शनों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 9.86 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है। सरकार का लक्ष्य वर्ष के दौरान लाखों नए परिवारों को पाइप्ड नेचुरल गैस से जोड़ना है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा का दायरा और अधिक बढ़ सके। राज्य सरकार का मानना है कि पीएनजी केवल एक गैस कनेक्शन नहीं बल्कि लोगों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पाइप्ड गैस सुविधा मिलने से उपभोक्ताओं को बार-बार गैस सिलेंडर भरवाने की आवश्यकता नहीं होती, गैस की निरंतर आपूर्ति बनी रहती है तथा रिसाव की स्थिति में आधुनिक सुरक्षा प्रणाली भी उपलब्ध रहती है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में गैस वितरण कंपनियों ने लक्ष्य के अनुरूप तेजी से कार्य किया है। प्रयागराज, मेरठ, लखनऊ, मुरादाबाद, मथुरा, गोरखपुर, फिरोजाबाद, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, अलीगढ़, बुलंदशहर, औरैया, गौतम बुद्ध नगर तथा शाहजहांपुर सहित अनेक जिलों में कनेक्शन जारी करने का अभियान लगातार जारी है। विभिन्न कंपनियां जैसे आईओसी- अडानी गैस, टोरेंट गैस, ग्रीन गैस लिमिटेड, गेल गैस, गेल इंडिया, आईजीएल और एचपीसीएल अपने-अपने क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार और नए उपभोक्ताओं को जोड़ने का कार्य कर रही हैं। योगी सरकार द्वारा प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देने के पीछे पर्यावरण संरक्षण भी एक प्रमुख उद्देश्य है। पाइप्ड नेचुरल गैस को पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अधिक स्वच्छ माना जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ती है। इसके साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को सुरक्षित, किफायती और निर्बाध ईंधन उपलब्ध कराने में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश सरकार आने वाले महीनों में गैस पाइपलाइन नेटवर्क का और विस्तार करने, नए शहरों और कॉलोनियों को जोड़ने तथा अधिक से अधिक परिवारों तक पीएनजी सुविधा पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सभी गैस वितरण कंपनियों के साथ नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग की जा रही है। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में यह अभियान उत्तर प्रदेश को आधुनिक ऊर्जा अवसंरचना वाले राज्यों की श्रेणी में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योगी सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक नागरिकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा उपलब्ध कराई जाए, जिससे प्रदेश में सतत विकास को नई गति मिल सके।

कोर्ट का अहम फैसला, पत्नी की टिप्पणी को बताया उकसावे वाला; पति की सजा की अवधि घटाई

छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या मामले में पति की सजा कम कर दी है। कोर्ट ने अपने पति पर पत्नी की इस टिप्पणी, कि तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं को उकसावा माना है। इस केस में पति ने तैश में आकर अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी। ट्रायल कोर्ट ने मामले में पति को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाई कोर्ट ने इस सजा को बदलकर सात साल के सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अननिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने इस तरह की टिप्पणी, दिखाती है कि पति की कोई वैल्यू नहीं है। यह न सिर्फ पति बल्कि उसके इंसानी अस्तित्व के लिए भी खतरा है। ऐसी टिप्पणी सुनकर पति ने आपा खो दिया और घटना को अंजाम दिया। क्या है मामला यह मामला, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला स्थित चौरई का है। यहां पर 18-19 जुलाई की रात शिवा और उसकी पत्नी किरण के बीच झगड़ा हुआ। यह झगड़ा कुलबहेरी नदी के खर्रा घाट के पास हुआ। आरोप के मुताबिक झगड़े के दौरान किरण ने अपने पति पर कटाक्ष करते हुए कहाकि तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं। इसके बाद शिवा ने गुस्से में पत्थर उठाकर अपनी पत्नी के ऊपर दे मारा और उसकी मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक बाद में शिवा ने फोन करके पुलिस और पत्नी के परिजनों को घटना के बारे में पूरी जानकारी दी। शिवा की तरफ से पेश वकील ने पक्ष रखते हुए कहाकि शिवा के खिलाफ भरोसे लायक सबूत नहीं हैं। इसके अलावा, साक्ष्यों में विरोधाभास भी है। इस आधार पर उसने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करने की मांग उठाई थी। हाई कोर्ट ने क्या कहा हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने माना कि शिवा ने अपनी पत्नी को चोट पहुंचाई और इससे उसकी मौत हुई। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहाकि यह घटना अचानक झगड़े के चलते हुई। कहीं से भी यह सिद्ध नहीं होता कि आरोपी हत्या की योजना बनाकर वहां पहुंचा था। इसके अलावा कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि घटना के तुरंत बाद आरोपी ने पुलिस और अपनी पत्नी के रिश्तेदारों को फोन करके इसकी जानकारी दी थी। इसके अलावा कोर्ट ने पत्नी की टिप्पणी को गंभीर और अचानक उकसावे वाला मामला बताया। सुप्रीम कोर्ट का हवाला जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अननिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने मामले में यह भी कहाकि अगर आरोपी अपनी पत्नी की हत्या के इरादे से वहां गया होता तो वह घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो जाता। वह इसके बारे में पुलिस या पत्नी के रिश्तेदारों को जानकारी नहीं देता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसके मुताबिक अगर कोई शख्स अचानक उकसावे के चलते खुद पर से नियंत्रण खो देता है तो अपराध का आंकलन उसी आधार पर होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहाकि यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने बार-बार पत्नी के ऊपर पत्थर से हमला किया। कुछ चोटें घटनास्थल पर मौजूद पत्थरों पर गिरने के चलते भी लग सकती हैं।

मध्यप्रदेश में सिंचाई क्रांति की तैयारी, 14 जिलों के लिए केन-मंदाकिनी लिंक प्रोजेक्ट का प्रस्ताव केंद्र को भेजा

भोपाल  मध्य प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा बैठक में बताया कि प्रदेश के 14 जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है और अगले छह माह में इनके लोकार्पण के साथ लगभग 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी। वहीं, केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है और स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन भी जल्द किया जाएगा।इससे 93 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा का विकास होगा। वहीं, नर्मदा को सोन नदी से जोड़ने वाली स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन भी शीघ्र किया जाएगा। 14 जिलों की सिंचाई परियोजनाएं पूर्ण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इसकी तैयारी के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खंडवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मंडला जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है। अब इनका लोकार्पण होना है। अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना पर फोकस केन-मंदाकिनी लिंक अंतरराज्यीय सिंचाई परियोजना से 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के साथ 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा सकेगा। 20 किलोमीटर लंबी टनल भी बनाई जाएगी। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र के दस जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई के साथ 130 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन होगा। परियोजना में भू-अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज के तहत अवार्ड पारित कर 90 प्रतिशत भुगतान किया चुका है। बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्य परियोजना में चकरपुर एवं मड़िया बांध का काम पूरा हो गया है। संशोधित पार्वती काली सिंध चंबल अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना में 13 जिलों के 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए कारम बांध के पुनर्निर्माण के काम पूरा हो गया है। सिंहस्थ को लेकर तैयारी सिंहस्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82 प्रतिशत काम हो चुका है। कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में 66 प्रतिशत काम प्रगति पर है। शिप्रा तट पर 29 किलोमीटर लंबाई में बनाए जा रहे घाटों का निर्माण कार्य भी 60 प्रतिशत पूरा हो गया है। जल्द होगा स्लीमनाबाद टनल का उद्घाटन बरगी नहर से ढाई लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी बैठक में मुख्यमंत्री ने नर्मदा को सोन नदी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन की तैयारी के निर्देश दिए। बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली यह ट्रांस-वैली केनाल प्रदेश की सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक डिस्चार्ज करयिंग कैपेसिटी वाली नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना के लगभग डेढ़ हजार गांव की करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करेगी। टनल का काम डेढ़ दशक से चल रहा था, जो लगभग पूर्ण हो चुका है।  

विगत एक सप्ताह में लगभग 2 करोड़ 69 लाख रुपये की मादक सामग्री एवं संपत्ति जब्त

भोपाल  प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी एवं अवैध कारोबार के विरुद्ध मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। विगत एक सप्ताह में विभिन्न जिलों में पुलिस द्वारा प्रभावी कार्रवाही करते हुए लगभग 2 करोड़ 69 लाख रुपये से अधिक की मादक पदार्थ एवं संपत्ति जब्त की है। रतलाम : पुलिस ने तीन अलग-अलग महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में बड़ी सफलता प्राप्त की। थाना रिंगनोद पुलिस ने एक अंतरराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 01 किलोग्राम एम.डी. ड्रग्स जब्त की, जिसकी अनुमानित कीमत 1 करोड़ रुपये है। वहीं थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में 46 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा एवं दो ट्रक जब्त कर पंजाब के तीन तस्करों को गिरफ्तार किया। उक्त कार्रवाई में लगभग 32 लाख 30 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। इस प्रकार रतलाम जिले में कुल लगभग 1 करोड़ 32 लाख 30 हजार रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की गई है। गुना : जिले के म्याना थाना पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान से मध्यप्रदेश लाई जा रही 106 किलो 460 ग्राम डोडाचूरा सहित लगभग 70 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति जप्‍त की। कार्रवाई के दौरान एक अंतर्राज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया गया। नीमच : थाना नीमच सिटी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 108 किलोग्राम अवैध अफीम का बिना चीरा वाला सीपीएस डोडाचूरा बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जब्त सामग्री का मूल्य लगभग 25 लाख 20 हजार रुपये है। छतरपुर : थाना सिविल लाइन पुलिस ने ग्राम कदारी के पास से 20 किलोग्राम से अधिक अवैध गांजा एवं कार सहित लगभग 22 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है। वहीं थाना कोतवाली पुलिस ने राजनगर रोड फोरलेन ब्रिज के पास से 3.5 किलोग्राम से अधिक गांजा सहित एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया। इस प्रकार जिले में लगभग 22 लाख 60 हजार रुपये मूल्य की मादक सामग्री एवं वाहन जब्त किए गए। दमोह : थाना कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उड़ीसा निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 35 किलोग्राम अवैध गांजा सहित लगभग 8 लाख 77 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है। जबलपुर : पुलिस ने नशे के कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए एक विधि-विवादित बालक को अभिरक्षा में लेकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 14 किलोग्राम 572 ग्राम गांजा तथा घटना में प्रयुक्त दो स्कूटी सहित लगभग 7 लाख 28 हजार 600 रुपये की संपत्ति जब्त की है। इसके अतिरिक्त मऊगंज पुलिस ने 5 किलोग्राम से अधिक गांजा तथा 29 शीशी कोरेक्स सिरप जब्त करते हुए लगभग 1 लाख 86 हजार 250 रुपये मूल्य की संपत्ति तथा नरसिंहपुर पुलिस ने 12.5 ग्राम स्मैक सहित लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये मूल्य की संपत्ति जप्‍त की है। प्रदेशभर में की जा रही इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस मादक पदार्थों की तस्करी एवं अवैध कारोबार के विरुद्ध पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। पुलिस द्वारा ऐसे अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों एवं गिरोहों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।