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PM सूर्य घर योजना: 3KW सोलर प्लांट पर ₹78,000 की सब्सिडी, ऊर्जा मंत्री तोमर ने दी जानकारी

पीएम सूर्य घर योजना में तीन किलोवॉट के सौर संयंत्र लगाने पर मिल रही 78 हजार रूपये की सब्सिडी : ऊर्जा मंत्री तोमर अब तक 1 लाख 43 हजार 150 उपभोक्‍ताओं के खातों में पहुंची 100 करोड़ रूपये से अधिक की सब्सिडी भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक कुल एक लाख 43 हजार 150 उपभोक्‍ता लाभान्वित हुए हैं। इनके बैंक खातों में 1010 करोड़ 25 लाख रूपये की सब्सिडी जमा कराई जा चुकी है। योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयंत्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। कहां करें आवेदन पीएम सूर्यघर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए संबंधित विद्य़ुत वितरण कंपनी की वेबसाइट अथवा उपाय एप, वॉट्सऐप चेटबॉट एवं टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है। उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं। कंपनीवार स्थिति मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 51 हजार 343 सोलर संयंत्रों पर 361 करोड़ 99 लाख, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 58 हजार 715 संयंत्रों पर 4162 करोड़ 30 लाख 39 हजार और पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 33 हजार 092 सोलर संयंत्रों पर 231 करोड़ 95 लाख 50 हजार रूपये की सब्सिडी दी गई है।  

भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान, पर्यटकों की बढ़ी पसंद

रायपुर : भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान पर्यटन, प्रकृति और रोजगार का नया आयाम एक माह में ही पहुंचे 480 से ज्यादा पर्यटक, युवाओं, महिला समूह, वन प्रबंधन समिति को पौने 3 लाख रुपए से अधिक की हुई आय पर्यटन के साथ स्थानीय समुदाय को मिल रहा प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ जंगल सफारी, प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों की रोमांचक साइटिंग से पर्यटकों का बढ़ा आकर्षण रायपुर   छत्तीसगढ़ में पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है भोरमदेव जंगल सफारी में । 'ईको-टूरिज्म' के तहत स्थानीय जैव विविधता को नुकसान पहुंचाए बिना लोगों को प्रकृति से जोड़ने की नई पहल शुरू की गई है, जिसमें पर्यटकों को आकर्षित करने वाले शानदार मॉडल शामिल हैं।               छत्तीसगढ़ सरकार की इको-टूरिज्म पहल के तहत विकसित भोरमदेव जंगल सफारी संचालन के पहले ही महीने में छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान बनकर उभरी है। जंगल सफारी प्रकृति प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है, सिर्फ एक माह में ही 489 से अधिक पर्यटक यहां पहुंचे हैं, वहीं स्थानीय युवाओं, वन प्रबंधन समिति और स्व-सहायता समूहों को रोजगार एवं आमदनी के नए अवसर मिले हैं। भोरमदेव जंगल सफारी प्रकृति, रोमांच और स्थानीय विकास का सफल संगम बनी यह पहल भोरमदेव को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थापित करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है। एक माह में पहुंचे सैंकड़ों पर्यटक          मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा तथा वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह जंगल सफारी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गई है। वन मंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल ने बताया कि भोरमदेव जंगल सफारी का उद्घाटन 3 मई को कर पर्यटकों के लिए इसका संचालन शुरू किया गया था। मानसून को देखते हुए 4 जून से सफारी को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। मात्र एक माह के संचालन के दौरान 480 से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया, जिससे पौने 3 लाख रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई है। बारिश के बाद नवंबर माह से इसका संचालन फिर से शुरू होगा।  पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों को मिला रोजगार        भोरमदेव जंगल सफारी की शुरुआत से स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिले हैं। केवल एक महीने के संचालन में वाहन चालक, गाइड और गेट कीपर के रूप में कार्यरत 17 स्थानीय युवाओं ने 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की। वहीं वन प्रबंधन समिति को 92 हजार और वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। सफारी परिसर में स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैंटीन भी पर्यटकों की पसंद बनी रही। एक माह में कैंटीन से 20 हजार रुपये से अधिक का मुनाफा हुआ, जिससे समूह की महिलाओं की आय बढ़ी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती मिली। सिर्फ सफारी ही नहीं, उद्यान भी बना आकर्षण का केंद्र        जंगल सफारी के साथ-साथ भोरमदेव का प्राकृतिक उद्यान भी पर्यटकों की पसंद बन रहा है। सफारी का आनंद लेने वाले पर्यटकों के अलावा 1500 से अधिक लोगों ने उद्यान का भी भ्रमण किया। इससे साफ है कि भोरमदेव क्षेत्र धीरे-धीरे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। वन्यजीवों की रोमांचक साइटिंग ने बढ़ाया आकर्षण        करीब 36 किलोमीटर लंबी जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को कई वन्यजीवों और पक्षियों को करीब से देखने का अवसर मिला। सफारी में भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, कोटरी (बार्किंग डियर), बाघ के पदचिह्न (टाइगर पगमार्क), जंगली मुर्गा, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और रंग-बिरंगी तितलियां पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहीं। घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर वातावरण ने सफारी को रोमांचक और यादगार अनुभव बना दिया। इको-टूरिज्म की नई पहचान         वन मंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल ने बताया कि लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभयारण्य में 36 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी मार्ग तैयार किया गया है। सफारी का मुख्य प्रवेश द्वार भोरमदेव मंदिर के पास करियाआमा क्षेत्र में स्थित है, जहां से पर्यटक अपनी जंगल यात्रा शुरू करते हैं। इस सफारी के माध्यम से पर्यटकों को छत्तीसगढ़ के समृद्ध वन, वन्यजीव, जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर भी मिल रहे हैं।

बोधि वृक्ष से 3डी गैलरी तक, बुद्ध दर्शन का मिलेगा अनूठा अनुभव, लाइट एंड साउंड शो होगा खास

लखनऊ/कुशीनगर  योगी सरकार में वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर उत्तर प्रदेश की पहचान को और मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना अब पूरी तरह तैयार हो चुकी है। कुशीनगर में उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा गौतम बुद्ध संग्रहालय के नजदीक लगभग 11.32 करोड़ रुपये की लागत से विकसित बुद्ध थीम पार्क का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। यह पार्क जल्द ही आम जनता के लिए खोला जाएगा।  आधुनिक तकनीक, आध्यात्मिक अनुभव और बौद्ध विरासत के अद्भुत संगम के रूप में विकसित यह थीम पार्क देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को भगवान बुद्ध के जीवन, दर्शन और करुणा के संदेश से जोड़ने का नया माध्यम बनेगा। इंटरएक्टिव गैलरियों से मिलेगा आध्यात्मिक अनुभव बुद्ध थीम पार्क को केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि बौद्ध ज्ञान और आध्यात्मिकता के जीवंत अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां संवादात्मक शैली में कहानी कहने, हेरिटेज इंटरप्रिटेशन और आधुनिक प्रस्तुतीकरण तकनीकों के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं और उनकी शिक्षाओं को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पार्क का उद्देश्य यहां आने वालों को केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मचिंतन और आंतरिक जागृति का अनुभव कराना भी है। बोधि वृक्ष और आठ तथागत स्तूप होंगे प्रमुख आकर्षण पार्क का सबसे प्रमुख आकर्षण बोधि वृक्ष होगा, जहां संवादात्मक शैली में भगवान बुद्ध के ज्ञान, करुणा और जीवन मूल्यों को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा तिब्बती शैली के स्तूप, प्रार्थना चक्र (प्रेयर व्हील्स), मूर्तिकला स्थापनाएं और विभिन्न अनुभवात्मक प्रदर्शनियां आगंतुकों (पर्यटकों व अन्य) को बौद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित कराएंगी। यहां स्थापित आठ तथागत स्तूप भगवान बुद्ध के आठ महान कार्यों का प्रतीक होंगे और बौद्ध दर्शन की गहराई को समझने का अवसर प्रदान करेंगे। 3डी झांकियां और डिजिटल तकनीक से जीवंत होगा बुद्ध जीवन पार्क में तैयार की गई 3D झांकियां और डिजिटल प्रदर्शनियां भगवान बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगी। विशेष रूप से विकसित ट्रेवलॉग इंस्टॉलेशन बुद्ध की पवित्र यात्रा को क्रमबद्ध रूप से दर्शाएगा। इसके साथ ही भूमिस्पर्श, ध्यान, अभय और धर्मचक्र सहित भगवान बुद्ध की आठ विशाल मुद्राएं स्थापित की गई हैं, जो उनके जीवन, उपदेशों और बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांतों का प्रतिनिधित्व करती हैं। 40 फीट बुद्ध वॉल पर होगा लाइट एंड साउंड शो पर्यटकों को एक यादगार अनुभव देने के लिए पार्क में अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीक का उपयोग किया गया है। यहां 40 फीट ऊंची फैसाड बुद्ध वॉल पर भव्य लाइट एंड साउंड शो का आयोजन होगा, जिसमें कला, तकनीक और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन और उनके संदेशों को जीवंत किया जाएगा। भव्य प्रवेश द्वार और सांस्कृतिक आकर्षण भी होंगे विशेष पार्क का भव्य प्रवेश द्वार प्राचीन बौद्ध तोरणों से प्रेरित है। इस पर उत्कृष्ट नक्काशी और प्रतीकात्मक कलाकृतियों के माध्यम से शांति, ज्ञान और करुणा का संदेश प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा पार्क में बुद्ध जीवन दीर्घाएं, भगवान बुद्ध के जीवन प्रसंगों पर आधारित कलात्मक भित्ति चित्र, सांस्कृतिक थीम पर आधारित बच्चों का खेल क्षेत्र और स्मारिका केंद्र भी विकसित किया गया है, जहां बौद्ध हस्तशिल्प और स्थानीय कारीगरों के उत्पाद उपलब्ध होंगे। कुशीनगर की वैश्विक पहचान होगी और मजबूत यूपी के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बुद्ध थीम पार्क का निर्माण पूरा होना कुशीनगर में बौद्ध पर्यटन को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना आध्यात्मिकता, कला, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम है, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भगवान बुद्ध के जीवन और विचारों से गहराई से जोड़ने का अवसर देगी।  उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट में लगभग 82 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें 4.4 लाख से अधिक विदेशी यात्री शामिल थे। ऐसे में यह नया थीम पार्क कुशीनगर की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा और उत्तर प्रदेश को विश्वस्तरीय बौद्ध पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Crypto Regulation: RBI और संसदीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक, क्रिप्टो के भविष्य पर हो सकता है बड़ा निर्णय

नई दिल्ली क्रिप्टोकरेंसी (Crypto Regulations) के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए भारत सरकार लगातार काम कर रही है। इस संबंध में संसदीय वित्त समिति, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के अधिकारियों से मुलाकात करने वाली है। दिल्ली में 2 जुलाई को होने वाली इस बैठक में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) को रेगुलेट करने के मुद्दे पर बातचीत की जाएगी। नोटिस के अनुसार, कमेटी "वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) पर एक अध्ययन और आगे की राह" विषय पर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेगी। RBI का सतर्क रवैया रेगुलेटर्स के साथ क्रिप्टोकरेंसी पर चल रही बातचीत के लिए यह एक अहम मोड़ है, क्योंकि RBI का डिजिटल एसेट्स को लेकर हमेशा से ही सतर्क रवैया रहा है। समय-समय पर RBI गवर्नर्स ने VDA इकोसिस्टम की कमियों और बैंकिंग सिस्टम पर इसके असर को लेकर चेतावनी दी है। नवंबर 2025 में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था, "स्टेबलकॉइन्स और क्रिप्टोकरेंसी में बहुत ज़्यादा जोखिम है, इसलिए हम इनके मामले में बहुत सावधानी बरत रहे हैं।" हालांकि, सेंट्रल बैंक UPI, डिजिटल पेमेंट और डिजिटल लेंडिंग का समर्थन करना जारी रखे हुए है। यह इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ आठवीं बैठक होगी। पिछली दो बैठकों में, स्टैंडिंग कमेटी ने भारत में काम कर रहे कई घरेलू और ग्लोबल क्रिप्टो एक्सचेंजों से मुलाकात की थी ताकि उनकी चिंताओं और सुझावों को समझा जा सके। 20 मई को, पैनल ने दिल्ली में क्रिप्टो एक्सचेंज Binance, WazirX और Zebpay के साथ रेगुलेशन के दायरे, VDA इंडस्ट्री के लिए आगे की राह और टैक्स से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बैठक की।  इससे पहले, दिसंबर 2025 में CoinDCX, CoinSwitch और Coinbase के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक हुई थी। रेगुलेटर्स ने पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी चिंताओं, इंटरनेशनल ट्रांज़ैक्शन और रेमिटेंस से जुड़ी समस्याओं, विदेशी और भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों को एक ही पॉलिसी और कानूनी ढांचे के तहत लाने, और ग्लोबल एक्सचेंजों के लिए मौजूदा GST सिस्टम से जुड़ी दिक्कतों के बारे में सवाल पूछे थे।  

खीरे की वैज्ञानिक खेती बनी वरदान

रायपुर  खीरे की व्यावसायिक खेती एक बेहद लाभदायक व्यवसाय है, जो 45 से 50 दिनों में पैदावार देना शुरू कर देता है। व्यावसायिक खेती में खीरे को जमीन पर फैलाने के बजाय मचान और तारों का सहारा देकर ऊपर चढ़ाना चाहिए। इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, गलते नहीं हैं और उनका आकार, रंग और चमक शानदार रहती है, जिससे बाजार में बेहतरीन भाव मिलता है। बुवाई के 45-50 दिनों बाद फल तोड़ने योग्य हो जाते हैं। मचान विधि से एक एकड़ में लगभग 30 से 45 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो जाती है।                   सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के दौर में यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो खेती कैसे फायदे का सौदा बन सकती है, इसे धमतरी जिले के एक प्रगतिशील किसान ने सच कर दिखाया है। जिला धमतरी के विकासखंड नगरी के अंतर्गत ग्राम सेलबहरा के विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार समुदाय) के कृषक  खीमांशु गजेसिंग आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। 4 एकड़ में खीरे की व्यावसायिक खेती       गजेसिंग के पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से उन्होंने इस वर्ष 4 एकड़ क्षेत्र में खीरे की व्यावसायिक खेती की। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के नियमित संपर्क और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने उन्नत खेती की तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीजों का चयन, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई और पौध संरक्षण जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया। पारंपरिक से वैज्ञानिक खेती का सफर         पहले पारंपरिक ढर्रे पर खेती करने के कारण  गजेसिंग के लिए कृषि की लागत निकालना भी एक बड़ी चुनौती थी और आय बेहद सीमित थी। लेकिन आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के बाद पासा पलट गया। वैज्ञानिक तरीके से की गई इस खेती के कारण खीरे की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में जबरदस्त सुधार हुआ है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी उनके खीरे की भारी मांग है। उपज का सही और उचित मूल्य मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। भविष्य की योजनाएं और संदेश           अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए  खीमांशु गजेसिंग ने बताया कि विभागीय अधिकारियों के तकनीकी सुझावों और शासकीय योजनाओं के सहयोग से मुझे खेती को एक नए नजरिए से देखने का मौका मिला। इस सफलता से प्रेरित होकर अब मैं भविष्य में अन्य उद्यानिकी फसलों का विस्तार करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए उत्पादन को और बढ़ाने की योजना बना रहा हूँ।    उद्यानिकी विभाग भी लगातार किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।  गजेसिंग की यह उपलब्धि साबित करती है कि वैज्ञानिक नवाचार और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर कृषि को टिकाऊ और अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

कैबिनेट विस्तार पर नजरें, यूपी-पंजाब के नेताओं की बढ़ सकती है हिस्सेदारी; बागियों की किस्मत पर भी सस्पेंस

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई वाली केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में कई बदलावों की तैयारी चल रही है. माना जा रहा है कि अगले कुछ ही दिनों में मोदी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. कैबिनेट विस्तार में कई नए मंत्रियों का नाम जुड़ सकते हैं तो कुछ पुराने मंत्रियों की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है।  मोदी कैबिनेट के विस्तार का रोडमैप तैयार किया जा रहा है. मंत्रिमंडल विस्तार का फोकस उन राज्यों पर रहेगा, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसके चलते माना जा रहा है कि मोदी मंत्रिमंडल में उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब, उत्तराखंड जैसे राज्यों से प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है।  केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की तारीख से लेकर मंत्रिमंडल के चेहरों तक पर कयास लगाए किए जा रहे हैं. 11 जुलाई तक पीएम मोदी का कई कार्यक्रम और दौरे लगे हुए हैं. संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरु हो सकता है. ऐसे में मॉनसून सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है?  मोदी कैबिनेट विस्तार से समीकरण साधने का दांव देश की सियासत में सबसे ज्यादा चर्चा मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर हो रही है. बीजेपी और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाए. साथ ही क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं।  मोदी कैबिनेट में शामिल मंत्रियों में पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश और हर्ष मल्होत्रा दिल्ली के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बन गए हैं. ऐसे में प्रबल संभावना है कि  बीजेपी 'एक व्यक्ति, एक पद' के अपने नियम का पालन करते हुए दोनों ही मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है. इसके अलावा जॉर्ज कुरियन केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं तो केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो गया है।  रवनीत बिट्टू भी देर-सबेर मंत्री पद छोड़ सकते हैं. इन चार जगह पर नए मंत्री बनाए जा सकते हैं तो 9 मंत्री पद पहले से ही खाली हैं. मोदी के अगुवाई सरकार में फिलहाल 72 मंत्री हैं, जिसमें 31 कैबिनेट, 5 स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्यमंत्री. केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री बन सकते हैं. इस लिहाज से 13 मंत्री पद की साफ जगह बन रही है. इसके अलावा कुछ मंत्रियों को कैबिनेट से हटाया भी जा सकता है तो कुछ नए मंत्रियों को एंट्री मिल सकती है।  मंत्रिमंडल विस्तार में चुनावी राज्यों पर होगा फोकस मोदी कैबिनेट विस्तार में बीजेपी का मुख्य फोकस उन राज्यों पर रह सकता है, जहां पर विधानसभा चुनाव होने हैं. उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड और पंजाब सहित सात राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में साल के शुरू में ही चुनाव हैं तो हिमाचल प्रदेश और गुजरात में साल के आखिर में चुनाव होने हैं।  विधानसभा चुनाव को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट में चुनावी राज्यों सेप्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है ताकि सियासी समीकरणों को चुनाव के लिहाज से साधा जा सके. इसलिए इन राज्यों के कुछ नेताओं को मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है. उत्तराखंड की बात करें तो अजय टम्टा मोदी कैबिनेट में परिवहन राज्य मंत्री हैं. टम्टा मोदी कैबिनेट में दूसरी बार राज्यमंत्री हैं और वे बीजेपी के दलित चेहरे हैं. ऐसे में नई टीम में उनका कद बढ़ाया जा सकता है या फिर एक और चेहरे को शामिल किया जा सकता है।  उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब तक का दिखेगा दबदबा यूपी से फिलहाल केंद्र सरकार में 10 मंत्री हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं. अब यूपी चुनाव 2027 का रण साधने और राजनीतिक समीकरणों को जमीन पर उतारने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के जरिए बदलाव किया सकता है. 2024 में भले ही भाजपा का प्रदर्शन सूबे में खराब रहा हो, लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में यूपी की भूमिका कम नहीं हुई. विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्य की भूमिका को बढ़ाया जा सकता है।  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए पश्चिमी यूपी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़ा स्थान मिल सकता है. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ तक पश्चिमी यूपी पर फोकस करते दिखे हैं. इसके अलावा सूबे के जातीय समीकरण को साधने के लिए ओबीसी व दलित समुदाय से कुछ नए मंत्री बनाए जा सकते हैं।  पंजाब में विधानसभा चुनाव है, जिसे देखते हुए मोदी मंत्रिमंडल में पंजाब का प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है. मोदी कैबिनेट में रवनीत सिंह बिट्टू एकलौते मंत्री हैं, जो पंजाब से हैं. रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते हैं. लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले वे कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे,लुधियाना सीट से लोकसभा का चुनाव हार गए थे, लेकिन फिर भी पीएम मोदी ने उन्हें अपने कैबिनेट में जगह दी थी।  सिख समाज से आने वाले केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी यूपी कोटे से मंत्री हैं, लेकिन उन्हें पंजाब में सिख वोटों को साधे रखने के लिए कैबिनेट में जगह दे रखी है. माना जा रहा है कि पंजाब से दो से तीन मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसमें आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आने वाले राज्यसभा सदस्यों में से किसी चेहरे को मौका मिल सकता है. बीजेपी का पूराव फोकस पंजाब में सरकार बनाने की है, जिसके लिए अभी से भी पार्टी जुट गई है।  क्या बागी सांसदों को भी कैबिनेट में मिलेगी जगह? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की मिली भारी जीत के बाद राज्य से भी पार्टी के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है. तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी से अलग होकर एनसीपीआई में विलय किया है और मोदी सरकार को समर्थन करने का ऐलान किया है. ऐसे में सभी की निगाहें लगी हुई हैं कि टीएमसी के किसी बागी सांसद को मोदी सरकार में क्या मंत्री बनाए जा सकता है?  महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) को 9 में से 6 लोकसभा सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ आ गए हैं. इस तरह शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में सांसदों की संख्या महाराष्ट्र के एनडीए में सबसे ज्यादा हो … Read more

भारत ने जून में खरीदा रिकॉर्ड रूसी कच्चा तेल! ‘इतने टैंकर पहले कभी नहीं देखे’

नई दिल्‍ली जून में रूसी तेल का आयात रिकॉर्ड हाई पर पहुंच सकता है. एनर्जी एक्‍सपर्ट अनस अलहाजी ने इसका दावा किया है. उन्‍होंने कहा कि रूसी कच्‍चे तेल से लदे टैंकरों की बड़ी संख्या भारतीय बंदरगाहों पर देखी गई है. इतनी बड़ी संख्‍या मैंने पहले कभी नहीं देखी है।  एनजीपी एनर्जी कैपिटल मैनेजमेंट के मुख्य अर्थशास्त्री अलहाजी ने कहा कि जैसा कि मैंने जून की शुरुआत में कहा था, अगर इस महीने (जून) रूस से भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा. मैंने भारतीय बंदरगाहों पर रूसी कच्चे तेल से भरे इतने टैंकर पहले कभी नहीं देखे।  अलहाजी ने केप्लर का एक नक्शा भी शेयर किया जिसमें कई टैंकर रूसी कच्चे तेल को भारत भर के बंदरगाहों तक ले जाते हुए दिखाए गए थे.  उनका यह बयान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक रिपोर्ट के कुछ हफ्तों बाद आई है, जिसमें दिखाया गया है कि भारत मई में रूसी जीवाश्म ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, जिसने अनुमानित $6.7 बिलियन मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया।  कितना हुआ जून में रूसी तेल का आयात CREA के अनुसार, इस महीने के दौरान रूस से भारत के आयात में कच्‍चे तेल का हिस्‍सा करीब 83 फीसदी था, जिसकी वैल्‍यू 48 अरब यूरो था. तेल उत्‍पादों और कोयले के आयात की कीमत 550 मिलियन यूरो और 429 मिलियन यूरो था. यह भी पता चला है कि रूस से कच्‍चे तेल की खरीद में 21 फीसदी की बढ़ोतरी के कारण मई में भारत के कुल कच्‍चे तेल के आयात की मात्रा में महीने दर महीने 8 फीसदी की तेजी आई है।  भारत के रिफाइनर्स में बढ़ी रूसी तेल की मात्रा  भारत के कुछ सबसे बड़े रिफाइनिंग सेंटर्स ने रूसी तेल की आवक में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है. गुजरात के वडीनार रिफाइनरी में उतारे गए तेल की मात्रा अप्रैल के स्तर से 36% बढ़ी, जबकि जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में आपूर्ति 14% बढ़ी. सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने भी इस साल की शुरुआत में आयात फिर से शुरू करने के बाद खरीद बढ़ा दी. मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति पिछले महीने की तुलना में 13% बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में आयात में 42% की वृद्धि हुई।  रूसी तेल से मिली मदद  ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी ने दो सालों में रूसी तेल की मात्रा में डबल बढ़ोतरी दर्ज की है. यूक्रेन पर मॉस्को के आक्रमण के बाद वेस्‍ट कॉन्‍ट्रैक्‍ट्स और व्यापार प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को नया रूप दिया है, जिसके चलते रूस भारत का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद में लगातार वृद्धि की है, जिससे ऊर्जा लागत को कंट्रोल करने और रिफाइनिंग मार्जिन को बढ़ाने में मदद मिली है। बता दें सीआरईए के अनुसार, मई में रूस के कच्चे तेल के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50% थी, उसके बाद भारत की हिस्सेदारी 36%, तुर्की की 6% और यूरोपीय संघ की 5% थी। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में शिक्षा सुधारों को मिला नया आयाम, टीएलपीएस रिपोर्ट-2025 बनी भविष्य की कार्ययोजना का आधार

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा सुधारों को नई ऊंचाई देते हुए अब कक्षा-कक्ष में होने वाले वास्तविक अधिगम को शिक्षा नीति का केंद्र बना दिया है। प्रदेश में पहली बार शिक्षकों के अनुभव, बच्चों के सीखने के साक्ष्य, परख के निष्कर्ष, टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज (टीएलपीएस) अध्ययन और निपुण भारत मिशन के जमीनी अनुभवों को एक मंच पर लाकर भविष्य की शैक्षणिक रणनीति पर व्यापक मंथन किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के प्लूटो ऑडिटोरियम में आयोजित 'पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग' एवं टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 के विमोचन कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञों तथा शिक्षा क्षेत्र के अग्रणी संस्थानों ने विद्यालयी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, साक्ष्य-आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की भावी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार तथा बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी सहित बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय एवं राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञ तथा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  प्रारंभिक सत्र में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन की प्रगति, अब तक हुए शिक्षा सुधारों, कक्षा-कक्ष में आए बदलाव तथा अधिगम गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाई गई रणनीतियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस दौरान परख के निष्कर्ष, शिक्षा सुधारों के प्रमुख आयाम, प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण की 10 प्रमुख शिक्षण पद्धतियों, 15 कैच-अप रणनीतियों, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, अकादमिक कैलेंडर तथा निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तुतीकरण क्वालिटी यूनिट के प्रभारी आनंद कुमार पाण्डेय ने किया। टीएलपीएस रिपोर्ट ने दिखाई कक्षा-कक्ष में बदलाव की वास्तविक तस्वीर कार्यक्रम में टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस)-2025 उत्तर प्रदेश रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। यह रिपोर्ट प्रदेश में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) को मजबूत बनाने के लिए कक्षा-कक्ष में हो रहे वास्तविक बदलावों का साक्ष्य-आधारित दस्तावेज है। रिपोर्ट में कक्षा 1 एवं 2 में भाषा और गणित शिक्षण की वर्तमान स्थिति, कक्षा का वातावरण, पाठ योजना, शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, शिक्षण समय का उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक सहयोग तथा निपुण भारत मिशन के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा सुधारों की वास्तविक सफलता का आधार कक्षा-कक्ष में दिखाई देने वाला परिवर्तन और बच्चों के सीखने के स्तर में होने वाला सुधार है। नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर एवं बरेली के 200 विद्यालयों में किए गए इस अध्ययन के आधार पर प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, बच्चों की सहभागिता, शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक मेंटरिंग तथा विद्यालय स्तर पर आवश्यक सुधारों की पहचान की गई है। रिपोर्ट भविष्य की शैक्षणिक रणनीतियों को अधिक साक्ष्य आधारित, परिणामोन्मुख और बच्चों की सीखने की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करती है। प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण पर बनी साझा रणनीति 'स्ट्रेंथनिंग क्लासरूम प्रैक्टिसिज़ फॉर फाउंडेशनल लर्निंग' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक डेमो-आधारित और व्यावहारिक बनाने, अधिगम में पीछे रह गए बच्चों के लिए प्रभावी कैच-अप रणनीतियों को अपनाने, शिक्षकों की सतत मेंटरिंग को मजबूत करने तथा कक्षा-कक्ष में बच्चों के भीतर प्रश्न पूछने के संकोच और भय को दूर कर जिज्ञासापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही एसआरजी, एआरपी एवं शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए ब्लॉक स्तर पर विद्यालयों की नियमित शैक्षणिक समीक्षा, प्रभावी अकादमिक सहयोग और सतत मार्गदर्शन को शिक्षा सुधारों की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। पैनल चर्चा में डायट वाराणसी के प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला, गाजीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी राजीव यादव, गौतम बुद्ध नगर की एसआरजी सदस्य रश्मि त्रिपाठी तथा पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय मूरघाट, बस्ती के प्रधानाध्यापक सर्वेष्ठ कुमार ने अपने अनुभव साझा किए। अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों और अकादमिक नेतृत्व से किया सीधा संवाद कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सत्र अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा का राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी और बीईओ के साथ सीधा संवाद रहा। उन्होंने प्रभावी अकादमिक कैलेंडर, पठन अभियान, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, कैच-अप लर्निंग, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, शिक्षक-नेतृत्व वाले नवाचार, बहुस्तरीय कक्षाओं के शिक्षण तथा कक्षा 3 से 5 तक निपुण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा करते हुए विद्यालयी शिक्षा को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के सुझाव भी दिए। भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा समापन सत्र में यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों की अगली यात्रा साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, मजबूत शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक सहयोग, प्रभावी मेंटरिंग और कक्षा-कक्ष केंद्रित नवाचारों पर आधारित होगी। विशेषज्ञों ने कहा कि नीति का वास्तविक प्रभाव तभी माना जाएगा, जब उसका परिणाम प्रत्येक बच्चे के अधिगम स्तर में दिखाई दे।

जिले को देंगे ₹620 करोड़ से अधिक की 11 विकास परियोजनाओं की सौगात

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार 1 जुलाई को सहारनपुर से राज्यव्यापी 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण का शुभारंभ करेंगे। नए शैक्षिक सत्र में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू हो रहे इस अभियान के साथ मुख्यमंत्री सहारनपुर जनपद की दो विधानसभाओं को ₹620 करोड़ से अधिक लागत की 11 विकास परियोजनाओं की सौगात भी देंगे। शिक्षा और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में एक ओर विद्यालय से बाहर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का संदेश दिया जाएगा, वहीं दूसरी ओर जनपद की आधारभूत संरचना को मजबूत करने वाली परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया जाएगा। सहारनपुर के इस्माइलपुर ग्राम में सीएम मॉडल  कंपोजिट विद्यालय में 'स्कूल चलो अभियान' के दूसरे चरण के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बच्चों को नवीन शैक्षणिक सत्र की पाठ्य पुस्तकें, स्कूल बैग व स्टेशनरी का वितरण भी करेंगे। इस अवसर पर जनपद के सर्वश्रेठ प्रधानाध्यापकों का सम्मान भी किया जाएगा। इसके पश्चात मुख्यमंत्री महाराज सिंह डिग्री कॉलेज ग्राउंड जाएंगे, जहां वह सहारनपुर नगर विधानसभा क्षेत्र की ₹612 करोड़ से अधिक लागत की 8 विकास परियोजनाओं और सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र की ₹7 करोड़ से अधिक लागत की 3 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के अन्तर्गत विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान, उनका नामांकन, ड्रॉपआउट बच्चों की पुनर्वापसी, अभिभावकों को जागरूक करने और जनप्रतिनिधियों, विद्यालय प्रबंधन समितियों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर रहेगा। अभियान का उद्देश्य प्रत्येक पात्र बच्चे को विद्यालय से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

रेलवे का सख्त नियम, महिला कोच में यात्रा करने वाले पुरुषों पर ₹2500 का जुर्माना

नई दिल्ली  ट्रेन से सफर के दौरान कुछ जरूरी नियमों का पालन भी करना होता है. रेलवे ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए खास नियम बनाएं हुए हैं और खासकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग से आरक्षित कोच, सीट और बर्थ की व्यवस्था भी की हुई है. लेकिन अभी भी कुछ पुरुष यात्री महिलाओं के कोच में बैठ जाते हैं, लेकिन ऐसा करना अब भारी पड़ सकता है।  ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है. अब अगर कोई पुरुष यात्री महिला आरक्षित कोच, सीट या बर्थ पर बैठता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।   जुर्माना न भरने पर कोर्ट में ₹5000 जुर्माना भी लगेगा। कितना लगेगा जुर्माना?     अगर कोई पुरुष यात्री जानकर महिला कोच में सफर करता है तो ऐसे मामलों में 2500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।      साथ ही यात्री को तुरंत महिला कोच से बाहर निकाल दिया जाएगा।      वहीं अगर कोई यात्री जुर्माना देने से इनकार करता है तो मामला सीधे कोर्ट तक जा सकता है।      इसके अलावा उस व्यक्ति पर 5 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।      रेलवे ने सख्त आदेश दिए है कि सफर के दौरान कोई भी पुरुष यात्री महिला कोच में प्रवेश न करें।  गलती से महिला कोच में आ गए तो क्या होगा? अगर गलती से आप महिला कोच में आ जाते हैं तो ऐसे मामलों में आपको घबराने की जरूरत नहीं है. आप सबसे पहले अगले स्टेशन या फिर मौका देखते ही अपने कोच में चले जाएं. साथ ही आप इसकी जानकारी टीटीई को दे सकते हैं और उसे अपनी स्थिति के बारे में बता सकते हैं।  रेलवे ने सख्त किए नियम रेलवे मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नए नियम 20 जून से लागू हो गए हैं. अब अगर कोई यात्री बिना टिकट सफर करता है या पहले इस्तेमाल हुई टिकट के साथ कोई यात्री दोबारा सफर करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और महिलाओं के कोच में सफर करना नियमों का उल्लंघन करना है. रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि रेलवे के नियमों का अच्छे से पालन करें, ताकि किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।  यह एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है सच कहें तो, यह कोई अलग-थलग बदलाव नहीं है। यह 1 जुलाई, 2026 से यात्रियों के लिए लागू किए गए अन्य सख्त रेलवे नियमों के साथ जुड़ा हुआ है, जैसे कि बिना टिकट यात्रा करने पर जुर्माना दोगुना कर दिया गया है, और ट्रेनों में धूम्रपान और सामान बेचने पर अब 2,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इन सभी रेलवे जुर्माना नियमों का उद्देश्य पूरे नेटवर्क में अनुशासन को बढ़ावा देना है, जो वास्तव में प्रतिदिन 25 लाख से अधिक लोगों को यात्रा कराता है। जमीनी स्तर वैध टिकट, पहचान पत्र साथ रखें और बुनियादी नियमों का पालन करें। भारतीय रेलवे के नए जुर्माने के नियम अब सख्त हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये सिर्फ सामान्य ज्ञान पर आधारित हैं। रेलवे टिकट के लिए न्यूनतम जुर्माना कितना है? 1 जुलाई, 2026 से, वैध टिकट के बिना यात्रा करने पर न्यूनतम जुर्माना 250 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो गया है, और इसके अलावा आपको वास्तविक किराया भी देना होगा। क्या रात 10 बजे के बाद ट्रेन में चढ़ने वाले यात्री टिकट चेक कर सकते हैं? सामान्यतः नहीं, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच स्लीपर या एसी डिब्बों में ट्रेन में चढ़ने वाले यात्रियों को छोड़कर, बाकी सभी यात्रियों को रात 10 बजे के बाद टिकट चेक करने की अनुमति नहीं होती है।