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वजन घटाना है तो डिनर में शामिल करें मिलेट्स से बनी ये हेल्दी डिशेज रोज।

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब लाइफस्टाइल के कारण वजन बढ़ना एक आम समस्या है, जिससे आज बड़ी आबादी परेशान है. लोग वजन घटाने के लिए जिम या डाइटिंग का सहारा लेते हैं, लेकिन इसका सबसे सही और आसान रास्ता आपके किचन से ही होकर गुजरता है. दरअसल, हमारा रात का खाना (डिनर) वजन कंट्रोल करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है. अगर आप रात में लाइट और न्यूट्रिशियस खाना खाते हैं, तो वजन तेजी से कम हो सकता है. अगर आप भी वेट लॉस जर्नी पर हैं, तो मिलेट्स यानी कि मोटे अनाज से बनी डिशेज आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हैं. मिलेट्स में भरपूर फाइबर, प्रोटीन और विटामिंस होते हैं, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं और बार-बार भूख लगने की आदत को रोकते हैं. तो चलिए जानते हैं मिलेट्स से बनने वाले ऐसे 3 टेस्टी और आसान डिनर आइटम्स के बारे में, जो वजन कम करने में आपकी मदद करेंगे. डिनर में ट्राई करें ज्वार की वेज खिचड़ी खिचड़ी को हमेशा से ही पचाने में सबसे आसान और हल्का भोजन माना गया है. ऐसे में रात के खाने के लिए ज्वार की खिचड़ी भी आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले साबुत ज्वार को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगोकर रख दें. इसके बाद प्रेशर कुकर में थोड़े से घी, जीरे, हरी मिर्च और अपनी पसंदीदा सब्जियों जैसे गाजर, बीन्स, मटर और टमाटर के साथ इसे अच्छी तरह से पका लें. बता दें ज्वार में मौजूद फाइबर डाइजेशन को बेहतर रखता है और साथ ही आपके शरीर में एक्स्ट्रा फैट को भी जमा नहीं होने देता. यह सिंपल सी डिश स्वाद और सेहत का एक यूनिक कॉम्बिनेशन है. रागी का डोसा भी है एक हेल्दी ऑप्शन अगर आपको रात के समय अक्सर कुछ क्रिस्पी और टेस्टी खाने का होता है, तो आप रागी का डोसा आपके लिए एक परफेक्ट चॉइस साबित हो सकता है. रागी में आपको भरपूर मात्रा में कैल्शियम और आयरन मिल जाता है. रागी का डोसा बनाने के लिए रागी के आटे में थोड़ा सा दही, पानी, बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च मिलाकर एक स्मूथ बैटर तैयार कर लें. इसके बाद एक नॉन-स्टिक तवे पर हल्का सा तेल लगाकर इसके पतले और करारे डोसे सेकें. अब इसे पुदीने या टमाटर की हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें. यह एक बेहद कम कैलोरी वाला लाइट डिनर ऑप्शन है. तेजी से वजन घटाने के लिए बाजरे का उत्तपम बात चाहे सर्दियों के मौसम की हो या फिर नॉर्मल दिनों की, बाजरे को हमारे सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद माना गया है. अगर आप अपना बढ़ा हुआ वजन घटाना चाहते हैं तो रात के खाने में आपको बाजरे का उत्तपम जरूर ट्राय करना चाहिए. इसके लिए बाजरे के आटे में थोड़ा सा पानी और छाछ मिलाकर थोड़ा सा गाढ़ा घोल तैयार कर लें. अब इस घोल को तवे पर फैलाएं और ऊपर से बारीक कटी शिमला मिर्च, टमाटर और धनिया पत्ती डालें. इसे दोनों ही तरफ से हल्का सा सेक लें. बता दें बाजरा धीरे-धीरे डाइजेस्ट होता है, जिस वजह से रात के समय आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है और आपको असमय भूख भी नहीं लगती है.

Xi Jinping का बड़ा संदेश, ताइवान को लेकर चीन का रुख फिर सख्त; भाषण में दी कड़ी चेतावनी

बीजिंग  चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बार फिर ताइवान को लेकर अपना सख्त रुख दोहराया है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के 105वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान का मुद्दा सुलझाना यानी ताइवान को चीन में शामिल करने का पार्टी का ऐतिहासिक मिशन है. उन्होंने कहा कि यह कम्युनिस्ट पार्टी की अटल प्रतिबद्धता है और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।  अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने ताइवान की आजादी की वकालत करने वाले अलगाववादी समूहों को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि चीन ऐसे सभी तत्वों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगा और किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि नई परिस्थितियों में ताइवान मुद्दे को हल करने की पार्टी की रणनीति को पूरी तरह लागू किया जाएगा।  शी जिनपिंग ने कहा कि चीन राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की हर कीमत पर रक्षा करेगा. उन्होंने दोहराया कि नेशनल यूनिफिकेशन का टारगेट हर हाल में आगे बढ़ाया जाएगा और चीन इस दिशा में लगातार कदम उठाता रहेगा।  मजबूत देश के लिए मजबूत सेना जरूरी- जिनपिंग अपने भाषण में राष्ट्रपति जिनपिंग ने सेना को भी मजबूत बनाने पर भी जोर दिया. चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत देश के लिए मजबूत सेना जरूरी है और सिर्फ शक्तिशाली सैन्य बल ही देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ताइवान स्ट्रेट में चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।  चीन के आर्थिक ग्रोथ पर क्या बोले शी जिनपिंग? शी जिनपिंग ने यह भी स्वीकार किया कि चीन इस समय ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां अवसरों के साथ-साथ जोखिम और चुनौतियां भी मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि चाहे दुश्मन कितना भी ताकतवर क्यों न हो, रास्ता कितना भी मुश्किल क्यों न हो या चुनौतियां कितनी भी गंभीर क्यों न हों, चीन पीछे हटने वाला नहीं है।  राष्ट्रपति जिनपिंग ने पार्टी नेताओं से अपील की कि वे संकट की भावना को मजबूत करें, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाएं और उच्च गुणवत्ता वाले विकास को आगे बढ़ाएं. साथ ही उन्होंने पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता पर भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी की शुद्धता और मजबूती को नुकसान पहुंचाने वाले हर तत्व को खत्म किया जाएगा। 

बोरवेल में बच्चे की मौत के बाद कार्रवाई, अंबाला में खेत मालिक सहित तीन पर FIR

अंबाला. गांव धन्यौड़ा के खेत में मंगलवार सुबह सात बजे खुले पड़े 300 फीट गहरे बोरवेल में साढ़े तीन वर्षीय मासूम निरवैर सिंह उर्फ निर्भय की मौत के बाद प्रशासन ने एक्शन लिया है। लापरवाही बरतने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। SP अजीत सिंह शेखावत ने कहा कि इस दुखद घटना में परिवार की शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एसपी ने कहा कि बोरवेल को मालिक और ठेकेदार ने खुला छोड़ दिया था और सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए गए, जिससे यह हादसा हुआ। वहां न कोई चेतावनी बोर्ड लगा हुआ था और न कोई बैरियर। शिकायत मिलने पर सदर पुलिस स्टेशन ने 3 लोगों के खिलाफ (खेत का मालिक और दो अन्य, जिन्होंने खेत ठेके पर लिया हुआ था) मामला दर्ज किया है। मामले के सभी तथ्यों की जांच के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 20 घंटे तक मौत से लड़ा निर्भय बता दें कि मंगलवार को बच्चे को निकालने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ), सेना की टीम, प्रशासन और पंजाब के संगरूर से आई विशेषज्ञ टीम रेस्क्यू में देर रात तक लगी थीं। करीब 20 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब साढ़े चार बजे बच्चे को 160 फीट ऊपर तक लाया गया। लेकिन बच्चे को बचाया नहीं जा सका। रेस्क्यू के दौरान रात करीब 10 बजे बोरवेल में 220 फीट तक रस्सी जा रही थी और निर्भय 40 फीट और नीचे चला गया था। बोरवेल में डाले गए कैमरे से मिली तस्वीरों में बच्चे पर वर्षा का पानी गिरता दिखाई दे रहा था। रेस्क्यू टीम ने जिस कैमरे से बच्चे की स्थिति जांची, उसमें हलचल नहीं दिखी।  पिता को खाने दे जा रहा था निर्भय बता दें कि धन्यौड़ा का किसान मंजीत मंगलवार सुबह 6:30 बजे पिता को खाना देने खेत जा रहा था तो बेटे निर्भय ने भी जाने की जिद की तो मंजीत साथ ले गया। पिता को खाना दे वह काम करने लगा। तभी निर्भय खेत में खेलने लगा। वहां रास्ते के साथ नौ इंची चौड़े बोरवेल बोरी से ढकी थी। निर्भय उस बोरी पर कूद गया और बोरवेल में चला गया।

पंजाब में ई-ऑफिस सिस्टम लागू, सिविल सर्जन कार्यालयों में अब ऑनलाइन होगी फाइलों की प्रक्रिया

चंडीगढ़. पंजाब के सेहत और परिवार कल्याण विभाग ने दफ्तरी काम में पारदर्शिता लाने और झंझट खत्म करने के लिए एक अहम फैसला लिया है। डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज द्वारा जारी आदेशों के अनुसार एक जुलाई से सभी सिविल सर्जन दफ्तरों का सारा ऑफिशियल काम अब ई-ऑफिस पोर्टल के जरिए किया जाएगा। इस नए ऑनलाइन सिस्टम के तहत पहले पड़ाव में छुट्टियों, शिकायतों और कोर्ट केस से जुड़ी फाइलें सिविल सर्जन ऑफिस से सीधे डायरेक्टर ऑफिस में ई-ऑफिस के जरिए भेजी जाएंगी। इसके बाद अगले पड़ाव में प्रमोशन, NOC, M.A.C.P., फाइनेंशियल मामले और दूसरी जरूरी एडमिनिस्ट्रेटिव फाइलों का भी निपटारा इसी प्रणाली के जरिए होगा। जिला स्तर पर इस सिस्टम को सही तरीके से लागू करने के लिए सभी सिविल सर्जन को अपने-अपने ऑफिस से कंप्यूटर की तकनीकी जानकारी रखने वाले एक अधिकारी या कर्मचारी को मास्टर ट्रेनर के तौर पर नामजद करने की हिदायतें दी गई है जो बाकी स्टाफ को ट्रेनिंग देगा। पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (P.CM.S.A.) ने विभाग के इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि यह बड़ा प्रशासनिक सुधार है जिससे डॉक्टरों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। इससे ऑफिस में होने वाली फालतू की देरी खत्म होगी और मेडिकल ऑफिसर्स को अपना काम करने में होने वाली परेशानी से छुटकारा मिलेगा, जिससे पूरे सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी पक्की होगी। 

योगी सरकार ने एआई डायग्नोस्टिक सुविधाओं के लिए केंद्र संग एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और तकनीक आधारित बनाने क दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक एवं निःशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार के बीच प्रधानमंत्री निधि के तहत एआई-सक्षम पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन, 1.5 टेस्ला एमआरआई एवं डिजिटल मैमोग्राफी टोमोसिंथेसिस (डीबीटी) मशीनों की आपूर्ति, स्थापना एवं संचालन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता जून-26 से मार्च-36 तक प्रभावी रहेगा। इससे प्रदेश के नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके निकट ही आधुनिक रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग सेवाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होगी, उपचार में होने वाली देरी कम होगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। एआई आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक से कैंसर और हृदय रोग की सटीक हो सकेगी पहचान अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि यह पहल उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक के उपयोग से कैंसर, क्षय रोग (टीबी), हृदय रोग सहित अन्य गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का प्रारंभिक चरण में सटीक निदान संभव हो सकेगा। समय पर बीमारी की पहचान होने से मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी होगा और मृत्यु दर में कमी लाने में भी सहायता मिलेगी। एमओयू का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं पहुंचाना है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां अब तक उन्नत जांच सुविधाएं सीमित रही हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में क्षेत्रीय असमानता भी कम होगी और लोगों को बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एमओयू के अनुसार भारत सरकार मशीनों की केंद्रीकृत खरीद, आपूर्ति, स्थापना, कमीशनिंग तथा प्रारंभिक अनुरक्षण की जिम्मेदारी निभाएगी। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करेगी, साइट की तैयारी सुनिश्चित करेगी, सभी आवश्यक नियामकीय अनुमतियां प्राप्त करेगी तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता के साथ उपकरणों के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। इस समन्वित व्यवस्था से परियोजना का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए विकसित किया जाएगा रीयल टाइम आईटी पोर्टल एमओयू के अनुसार, सभी मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक रीयल टाइम आईटी पोर्टल विकसित किया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्येक मशीन की कार्यशीलता, उपयोग की स्थिति, उपलब्ध कराई गई सेवाओं, जांच कराने वाले लाभार्थियों की संख्या तथा उपकरणों के प्रदर्शन की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, उपकरणों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और आवश्यकतानुसार त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। उपकरणों के दीर्घकालिक संचालन को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री निधि के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली सभी मशीनों पर एक वर्ष की वारंटी के बाद अगले नौ वर्षों तक व्यापक वार्षिक अनुरक्षण की व्यवस्था भी की गई है। इससे मशीनों के रखरखाव में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी तथा मरीजों को लगातार गुणवत्तापूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी।

बारिश में बालों का झड़ना रोकेंगे ये 7 आसान घरेलू उपाय, रखें बाल मजबूत हमेशा।

बारिश का मौसम हमें भीषण गर्मी से तो राहत दिलाता है, लेकिन अपने साथ हवा में बहुत ही ज्यादा ह्यूमिडिटी भी लेकर आता है. बारिश के इस मौसम में हमें कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है, जिनमें से एक है तेजी से बालों का झड़ना. हवा में मॉइस्चर होने की वजह से स्कैल्प चिपचिपा हो जाता है, जिस वजह से बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन का खतरा और भी ज्यादा बढ़ने लगता है. इसका नतीजा होता है कि हमारे बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और देखते ही देखते टूटने भी लग जाती हैं. अगर बारिश के दिनों में आपको भी हेयर फॉल की समस्या होती है, तो आज की यह आर्टिकल आपके काम की होने वाली है. आज हम आपको 7 ऐसे आसान और कमाल के घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप बारिश के इस मौसम में भी अपने बालों को मजबूत, शाइनी, हेल्दी और खूबसूरत बनाकर रख सकेंगे. तो चलिए, इन उपायों के बारे में जानते हैं विस्तार से. बारिश के पानी से बालों को बचाएं बारिश के पानी में भीगने में भले ही आपको बहुत मजा आता हो, लेकिन आज के समय में बारिश के पानी में पॉल्यूशन के साथ हानिकारक केमिकल भी मिले हुए होते हैं. जब इस तरह का केमिकल वाला और पॉल्यूटेड पानी हमारे सिर पर पड़ता है, तो बालों की जड़ों को कमजोर कर देता है. इसलिए बारिश के दिनों में जब भी आप अपने घर से बाहर निकलें, एक छाता या फिर स्कार्फ अपने साथ जरूर रखें. अगर आप किसी कारण से भीग जाते हैं, तो घर आने के बाद सबसे पहले अपने बालों को अच्छी तरह से गुनगुने पानी से धोकर साफ करें. एंटी-फंगल और माइल्ड शैंपू का इस्तेमाल करें बारिश के दिनों में स्कैल्प पर पसीना और ऑयल जमा होने की वजह से डैंड्रफ की समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है. आप सभी यह बात तो जानते ही होंगे कि डैंड्रफ भी आपके बालों के झड़ने का एक मुख्य कारण बन सकता है. डैंड्रफ की प्रॉब्लम से बचने के लिए हफ्ते में दो से तीन बार एक माइल्ड या एंटी-फंगल शैंपू का इस्तेमाल करके अपने बालों को जरूर ही धोएं. इस बात का ख्याल रखें कि ऐसा शैंपू चुनें जिसमें सल्फेट और पैराबेंस जैसे हार्श केमिकल न हों, ताकि आपके बालों का नेचुरल मॉइस्चर बरकरार रहे. कभी न भूलें कंडीशनर लगाना हवा में ह्यूमिडिटी और मॉइस्चर होने की वजह से बारिश के मौसम में हमारे बाल ड्राई, बेजान और फ्रिजी हो जाते हैं. जब आपके बाल ज्यादा उलझते हैं, तो कंघी करते समय वे टूटते भी ज्यादा हैं. इसलिए यह काफी जरूरी हो जाता है कि शैंपू करने के बाद आप अपने बालों की लंबाई पर एक अच्छे कंडीशनर का इस्तेमाल जरूर करें. कंडीशनर आपके बालों को न्यूट्रिशन देता है, जिसकी वजह से वे आपस में उलझते नहीं हैं और एक प्रोटेक्टिव लेयर भी बनती है. आपको सिर्फ इस बात का ख्याल रखना है कि कंडीशनर को केवल बालों पर लगाएं, स्कैल्प पर गलती से भी नहीं. गीले बालों में कंघी करने से बचें यह एक ऐसी गलती है जिसे अनजाने में हम आए दिन दोहराते ही रहते हैं. अगर आप अपने बालों को डैमेज होने से बचाना चाहते हैं, तो आपको यह समझना होगा कि जब आपके बाल गीले होते हैं, तब उनकी जड़ें सबसे ज्यादा नाजुक और कमजोर होती हैं. ऐसे में अगर आप तुरंत गीले बालों पर कंघी करते हैं, तो वे बहुत ही तेजी से टूटने लगते हैं. बालों को अगर आप हेल्दी रखना चाहते हैं, तो उन्हें धोने के बाद नैचुरली सूखने का मौका दें. जब आपके बाल पूरी तरह सूख जाएं, तभी चौड़े दांतों वाली लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करके, वह भी बिल्कुल हल्के हाथों से, उन्हें सुलझाएं. स्कैल्प को हमेशा रखें ड्राई और क्लीन मानसून में अक्सर पसीने और मॉइस्चर की वजह से स्कैल्प हमेशा गीला या फिर चिपचिपा महसूस होता रहता है. यह माहौल फंगल इन्फेक्शन और बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है. इसलिए, यह बहुत ही जरूरी हो जाता है कि आप अपने स्कैल्प को हमेशा साफ और सूखा रखें. अगर वर्कआउट करने या फिर बाहर से आने के बाद आपका स्कैल्प पसीने से गीला हो गया है, तो उसे तौलिए से उन्हें अच्छी तरह सुखा जरूर लें. हैवी ऑयलिंग करने से बचें वैसे तो बालों में तेल लगाना बहुत ही अच्छा और फायदेमंद माना जाता है, लेकिन बारिश के दिनों में बहुत ज्यादा या हैवी ऑयलिंग करने से आपको बचना चाहिए. जैसा कि हमें आपको पहले भी बताया कि इस मौसम में हमारा स्कैल्प पहले से ही चिपचिपा होता है, और ऐसे में अगर बहुत ज्यादा तेल लगाया जाए, तो वह धूल और गंदगी को अपनी तरफ खींचने लगेगा, जिससे बालों के पोर्स बंद भी हो सकते हैं. ऐसा न हो इसलिए आपको हफ्ते में सिर्फ एक बार हल्के गुनगुने नारियल या आल्मंड ऑयल से सिर्फ 15 से 20 मिनट के लिए हल्की मसाज करनी चाहिए और करीबन एक घंटे बाद अपने बालों को अच्छी तरह से धो जरूर लें. हेयर ड्रायर और स्टाइलिंग टूल्स से दूरी बनाएं बारिश के दिनों में हमारे बाल नॉर्मल दिनों की तुलना में ज्यादा देर से सूखते हैं. ऐसे में कई लोग अपने बालों को जल्दी सुखाने के लिए बार-बार हेयर ड्रायर का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा, स्ट्रेटनर या कर्लर जैसे हीटिंग टूल्स का इस्तेमाल भी आपके बालों को और भी ज्यादा कमजोर और ड्राई बना देता है. बारिश के मौसम में बालों को नैचुरली हवा में ही सूखने देना सबसे बेस्ट माना जाता है. अगर आपके लिए बहुत ही जरूरी है, तो ड्रायर को कूल मोड पर रखकर इस्तेमाल करना आपके लिए बेस्ट है.

घर बनवाने से पहले वास्तु के ये जरूरी नियम जानें, मिलेगा सुख और समृद्धि हमेशा।

घर बनाना हर किसी का सपना होता है. यह सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य और खुशियों से जुड़ा होता है. इसलिए घर बनवाते समय जल्दबाजी करने के बजाय हर काम को सोच-समझकर करना चाहिए. वास्तु शास्त्र में भी कुछ ऐसे नियम बताए गए हैं, जिन्हें ध्यान में रखने से घर बनाने का काम आसानी से पूरा हो सकता है. सही जमीन का चुनाव है जरूरी घर बनाने से पहले जमीन का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होता है. वास्तु के अनुसार जमीन का आकार और उसकी दिशा सही होनी चाहिए. माना जाता है कि जिस जमीन का ढलान उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा की ओर होता है, वह शुभ मानी जाती है. शुभ समय में शुरू करें निर्माण कार्य घर बनवाने का काम शुरू करने से पहले शुभ समय का ध्यान रखना भी अच्छा माना जाता है. मान्यता है कि सही समय पर शुरू किया गया काम कम रुकावटों के साथ पूरा हो सकता है. इसलिए कई लोग निर्माण शुरू करने से पहले मुहूर्त निकलवाते हैं. निर्माण सामग्री सही जगह पर रखें ईंट, सीमेंट, सरिया और दूसरी निर्माण सामग्री रखने की जगह भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. वास्तु के अनुसार भारी सामान को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना बेहतर माना जाता है. इससे सामान सुरक्षित रहता है और काम भी व्यवस्थित तरीके से चलता है. पहले चारदीवारी बनवाना हो सकता है फायदेमंद घर का निर्माण शुरू करने से पहले यदि पूरे प्लॉट की चारदीवारी बनवा ली जाए तो यह अच्छा माना जाता है. इससे सुरक्षा बनी रहती है और निर्माण कार्य के दौरान भी सुविधा होती है. सामान रखने के लिए अलग जगह बनाएं यदि संभव हो तो निर्माण शुरू करने से पहले एक छोटा कमरा या स्टोर बनवा सकते हैं, जहां निर्माण का सामान रखा जा सके. इससे सामान इधर-उधर नहीं बिखरता और जरूरत पड़ने पर आसानी से मिल जाता है. वास्तु के साथ जरूरी बातों का भी रखें ध्यान वास्तु नियमों के साथ-साथ घर बनाते समय मजबूत निर्माण, सुरक्षा, बजट और परिवार की जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है. अच्छी योजना और धैर्य के साथ बनाया गया घर लंबे समय तक परिवार को सुख और आराम देता है.

सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार पर सरकार कायम, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र ने आदेश पर दी बड़ी सफाई

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार के आदेश को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है. आदिवासी संगठन, ईसाई संस्थाओं के साथ कांग्रेस ने राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है. इस घटनाक्रम के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंन्द्र यादव का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार देने के उद्देश्य से मंत्रोच्चार कराने का फैसला लिया गया, लेकिन दुर्भाग्य है कि कांग्रेस ने इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई है. शिक्षा गजेन्द्र यादव का कहना है कि फिलहाल सरकारी स्कूलों में निर्बाध रूप से मंत्रोच्चार चलेगा. मामले में कोर्ट जो फैसला सुनाएगी, उसके अनुसार आगे होगा. सरकार अपने आदेश पर कायम है और अदालत का जो भी फैसला आएगा, उसके अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी. रिटायर्ड शिक्षकों को बड़ी राहत छत्तीसगढ़ में शिक्षा सत्र 2026-27 के दौरान रिटायर होने वाले शिक्षकों को बड़ी राहत दी गई है. वह पूरे शैक्षणिक सत्र तक पढ़ा सकेंगे. इस फैसले को लेकर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बताया कि शैक्षणिक सत्र के बीच अगर कोई शिक्षक रिटायर होता है तो वह सत्र के आखिर तक स्कूलों में पढ़ा सकेगा. हालांकि अगर कोई ऐसा नहीं करना चाहता है, तो यह अलग विषय है, लेकिन ज्यादातर लोगों की इस पर सहमती रहती है.

GST Collection June: सरकार के खजाने में आए ₹1.94 लाख करोड़, टैक्स संग्रह में शानदार बढ़ोतरी

नई दिल्ली  सरकारी खजाने में जून के महीने में जबरदस्त उछाल आया है. जीएसटी को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े के मुताबिक, जून 2026 में भारत का जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) कलेक्शन सालाना आधार पर 13.9% बढ़कर 1.95 लाख करोड़ (1,94,812 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल जून में यह कलेक्शन 1.71 लाख करोड़ था. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून महीने के जीएसटी कलेक्शन में यह बढ़ोतरी पिछले 13 महीनों में सबसे तेज है।  कहां से सरकार को हुई कितनी कमाई?  कमाई में सबसे ज्यादा उछाल आयातित वस्तुओं पर लगाए गए टैक्स से आया है, जो 34.6% बढ़कर 60,038 करोड़ हो गया, जो पिछले साल जून में 44,608 करोड़ रुपये था. जून में घरेलू व्यापार से होने वाली वसूली सालाना आधार पर 6.5% बढ़कर 1,34,774 करोड़ रुपये हो गया, जो पहले 1,26,505 करोड़ रुपये था. जून में नेट GST रेवेन्यू 11.2% बढ़कर 1,62,377 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 1,45,984 करोड़ रुपये था. वहीं, जून में टोटल रिफंड 29.1% बढ़कर 32,436 करोड़ हो गए।  GST रिफंड में भी हुई बढ़ोतरी आंकड़ों के मुताबिक जून में GST रिफंड में भी 29.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस बार का GST रिफंड ₹32,436 करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले साल की इस अवधि में ₹25,121 करोड़ था। रिफंड को हटाकर जून में शुद्ध जीएसटी कलेक्शन ₹1,62,377 करोड़ रहा है, जो कि जून 2025 में 1,45,984 करोड़ रुपए था। इसमें सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। पहली तिमाही में 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल जीएसटी का कलेक्शन ₹6,31,699 करोड़ रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में ₹5,82,542 करोड़ रुपए था, पहली तिमाही में सालाना आधार पर 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में सरकार ने ₹91,482 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया है, जिससे शुद्ध जीएसटी संग्रह ₹5,40,218 करोड़ रह गया है। सबसे अधिक GST कलेक्शन वाले राज्य जून में जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (₹9,924 करोड़), गुजरात (₹4,333 करोड़), कर्नाटक (₹4,118 करोड़), तमिलनाडु (₹3,639 करोड़) और उत्तर प्रदेश (₹3,249 करोड़) का नाम शामिल था। बता दें कि 9 साल पहले 1 जुलाई, 2017 को GST को पूरे देश में लागू किया गया था। इसके चलते वैल्यू एडेड टैक्स (VAT), सेल्स टैक्स जैसे कई कर समाप्त हुए और देश में एक कर व्यवस्था लागू हो सकी है, जिससे देश में कारोबार करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया। घरेलू खपत और विदेशी व्यापार की ताकत टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज LLP के पार्टनर विवेक जालान ने कहा है कि जून 2026 में भारत का GST रेवेन्यू घरेलू खपत की मजबूती और विदेशी व्यापार की ताकत, दोनों को दिखाता है। नेट GST कलेक्शन में 11.2% की बढ़ोतरी हुई। GST 2.0 में दरों में कटौती और स्टॉक पर जमा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के लगातार असर (जिसके 9-12 महीने तक रहने की उम्मीद है) के बावजूद घरेलू रेवेन्यू में 2.6% की वृद्धि हुई। यह दिखाता है कि स्ट्रक्चरल बदलावों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत इनपुट सर्विसेज पर ITC जमा होने जैसी चुनौतियों के बावजूद खपत मजबूत बनी हुई है। खास बात यह है कि जून में इंपोर्ट रेवेन्यू में 34.6% और साल-दर-साल आधार पर 26.2% की भारी बढ़ोतरी हुई। यह कैपिटल गुड्स और रॉ मटीरियल की मजबूत मांग को दिखाता है, जो औद्योगिक विकास को बढ़ावा देते हैं। इस तेजी को GSTAT अपीलों के लिए किए गए प्री-डिपॉजिट और अगस्त 2026 की समय-सीमा (टाइम बार) से पहले FY 2020-21 के लिए सेक्शन 74 के तहत SCN जारी करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयों से भी सहारा मिला। राज्यवार किसका कैसा रहा प्रदर्शन?     महाराष्ट्र 30,714 करोड़ के जीएसटी कलेक्शन के साथ टॉप पर है.     कर्नाटक और गुजरात ने भी क्रमशः ₹12,937 करोड़ और 11,743 करोड़ रुपये का कलेक्शन दर्ज किया है।      बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा. यहां का GST कलेक्शन पिछले साल के मुकाबले 19% बढ़कर 9,165 करोड़ तक पहुंच गया।      तमिलनाडु, राजस्थान और मध्य प्रदेश में क्रमशः 2%, 5% और 5% की गिरावट दर्ज की गई।  कुल मिलाकर इस साल जीएसटी में ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन विदेशी सामानों का आयात रहा. इसके अलावा, देश में वस्तुओं व सामानों की मजबूत मांग के कारण भी जीएसटी कलेक्शन में उछाल आया है. ऊपर से डिजिटल इकोसिस्टम और टैक्स प्रशासन में बेहतरी के लिए भी जीएसटी कलेक्शन मजबूत हुआ है। 

मध्य प्रदेश में 9 साल बाद प्रमोशन की राह खुली, कानूनी राय के बाद मोहन सरकार एक्शन में

भोपाल  मध्य प्रदेश के करीब दो लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। लगभग नौ वर्षों से लंबित प्रमोशन को लेकर सरकार को महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) की कानूनी राय मिलने के बाद प्रशासन ने सभी विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। यदि प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो कर्मचारियों को पदोन्नति न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन मिलेगी। सरकार ने मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन से कानूनी राय ली थी। राय में स्पष्ट किया गया कि इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित जरूर हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने नियमों के क्रियान्वयन पर कोई अंतरिम रोक (स्टे) नहीं लगाई है। इसलिए नियम पूरी तरह प्रभावी हैं और इनके तहत पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।  सभी विभागों और कलेक्टरों को भेजे गए निर्देश कानूनी राय मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के प्रभारी सचिवों, विभागाध्यक्षों और सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भेजकर राय का परीक्षण करने और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार जल्द ही विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) की बैठकें बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।  सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया गया हवाला कानूनी राय में सुप्रीम कोर्ट के 'स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश बनाम विनय कुमार बबेले' मामले सहित हाईकोर्ट के कई आदेशों का उल्लेख किया गया है। इनमें कहा गया है कि केवल नियमों को अदालत में चुनौती दिए जाने भर से सरकार पदोन्नति प्रक्रिया नहीं रोक सकती। हालांकि, सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।  मौखिक आश्वासन को नहीं माना गया बाध्यकारी राय में यह भी कहा गया कि जब पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुरुआती सुनवाई हुई थी, तब सरकार की ओर से केवल मौखिक रूप से यह कहा गया था कि सुनवाई पूरी होने तक पदोन्नति नहीं की जाएगी। लेकिन यह आश्वासन किसी न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं बना था, इसलिए इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं माना जा सकता। नई बेंच करेगी सुनवाई 17 फरवरी 2026 को याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन इस बीच एक न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने और दूसरे के स्थानांतरण के कारण फैसला नहीं आ सका। अब यह मामला नई खंडपीठ के समक्ष फिर से सुना जाएगा। ऐसे में अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है, जिससे सरकार को पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का कानूनी आधार मिल गया है। कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत यदि सरकार कानूनी राय के अनुरूप कार्रवाई करती है तो करीब दो लाख कर्मचारियों की वर्षों से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। हालांकि, सभी पदोन्नतियां हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।