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योगी सरकार का बड़ा कदम: गन्ना किसान परिवारों को बीमा और पेंशन योजनाओं से जोड़ने की मुहिम

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार किसानों को लेकर बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत कवच देने की दिशा में बड़ा अभियान चलेगा। 6 से 11 जुलाई तक प्रदेश की सभी सहकारी गन्ना विकास समितियों में विशेष सामाजिक सुरक्षा जागरूकता एवं नामांकन महाअभियान चलाया जाएगा। अभियान में गांव-गांव अधिकारी जाएंगे। इसके माध्यम से लाखों गन्ना किसान परिवारों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई) सहित भारत सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। अभियान का उद्देश्य किसानों की आर्थिक सुरक्षा, वित्तीय समावेशन और सामाजिक स्थिरता को मजबूत करना है। योगी सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का व्यापक विस्तार किसानों को दुर्घटना, आकस्मिक मृत्यु और वृद्धावस्था जैसी परिस्थितियों में आर्थिक संबल प्रदान करेगा। इससे किसान परिवारों की आय सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन मजबूत होगा। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता मिलेगी। योगी सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक पात्र गन्ना किसान परिवार इन योजनाओं से जुड़ें और प्रत्येक किसान परिवार सुरक्षित, सशक्त तथा आत्मनिर्भर बने। यही अभियान 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प को नई गति देने के साथ किसानों के समग्र कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। गन्ना समितियां निभाएंगी नई भूमिका प्रदेश की सहकारी गन्ना विकास समितियां इस अभियान की प्रमुख कड़ी होंगी। वर्षों से किसानों के साथ जुड़े विश्वास को सामाजिक सुरक्षा अभियान से जोड़ा जाएगा। समितियां योजनाओं का प्रचार-प्रसार करेंगी, किसानों को जागरूक करेंगी, पात्र लाभार्थियों का नामांकन कराएंगी और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे गन्ना समितियां किसान सेवा के साथ सामाजिक सुरक्षा की प्रभावी संस्थागत व्यवस्था के रूप में भी स्थापित होंगी। समिति परिसरों में लगेंगे सहायता एवं नामांकन केंद्र अभियान के दौरान प्रत्येक सहकारी गन्ना विकास समिति परिसर में बैंकों, इफ्को, चीनी मिलों और अन्य सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त सहयोग से विशेष सहायता एवं नामांकन काउंटर स्थापित किए जाएंगे। किसानों को एक ही स्थान पर योजनाओं की जानकारी, पात्रता का सत्यापन, दस्तावेजों की जांच, बैंकिंग सहायता और तत्काल नामांकन की सुविधा मिलेगी। नए सदस्य पंजीकरण, बैंक खाते खोलने तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। महिला और किसानों पर रहेगा फोकस अभियान में महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीण महिला किसानों को बीमा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने के साथ उन्हें वित्तीय निर्णयों में अधिक सक्षम बनाने का प्रयास किया जाएगा। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। गांव-गांव पहुंचेगा जागरूकता अभियान गन्ना पर्यवेक्षक, समिति सचिव और विभागीय अधिकारी गांवों में जनसंपर्क कर किसानों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के साथ गन्ना विकास विभाग, इफ्को तथा चीनी मिलों द्वारा संचालित किसान हितैषी योजनाओं की भी जानकारी देंगे। अधिक से अधिक पात्र परिवारों का नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। ग्राम सभाओं और किसान गोष्ठियों का भी आयोजन किया जाएगा।  

शहरी आसमान में ड्रोन क्रांति: दवाइयों से पार्सल तक तेज और सस्ती डिलीवरी

नई दिल्ली  भारत के शहरी आसमान में अब ड्रोन सिर्फ एक तकनीकी अजूबा नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स का एक विश्वसनीय हिस्सा बन चुके हैं। भारत के शहरी क्षेत्रों में ड्रोन पहले से ही दवाइयां, निदान उपकरण, पार्सल और ई-कॉमर्स शिपमेंट पहुंचा रहे हैं। सरकार के ड्रोन नियम 2021, पीएलआई (PLI) योजना और 'डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म' जैसे कदमों ने इस तकनीक को प्रयोगशाला से निकालकर सीधे कमर्शियल मार्केट में उतार दिया है। लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का क्विक-कॉमर्स (10 मिनट डिलीवरी) बाजार 10 अरब डॉलर को पार कर चुका है। ऐसे में जमीनी ट्रैफिक और डिलीवरी ड्राइवरों के बढ़ते खर्च (ईंधन, रखरखाव, कमीशन) से निपटने के लिए ड्रोन एक गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं। दरअसल, ड्रोन को खराब सड़कों या ट्रैफिक की परवाह नहीं होती, इससे डिलीवरी लागत काफी कम हो जाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा टियर-2 शहरों और ग्रामीण भारत को मिल रहा है, जहां बुनियादी ढांचे की कमी के कारण दवाइयां और जरूरी सामान समय पर नहीं पहुंच पाते थे। क्या खतरे में है डिलीवरी राइडर्स की नौकरी? विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रोन फिलहाल इंसानी कामगारों की जगह नहीं ले सकते। भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर को संभालने वाले लाखों गिग वर्कर्स केवल पैकेज नहीं पहुंचाते, वे पते का सत्यापन करते हैं, कैश-ऑन-डिलीवरी संभालते हैं और ग्राहकों की समस्याओं का तुरंत समाधान करते हैं। ड्रोन के आने से एविएशन सेक्टर में नए रोजगार भी पैदा हो रहे हैं, इससे रिमोट पायलट, मेंटेनेंस इंजीनियर और सॉफ्टवेयर डेवलपर। निष्कर्ष यह है कि ड्रोन मानव श्रम को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उसके पूरक बनेंगे। कुल मिलाकर भारत में ड्रोन डिलीवरी का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह अंतिम मील तक सामान पहुंचाने वाले राइडर की जगह ले सकता है? क्या इससे लाखों डिलीवरी कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। इसका जवाब है नहीं, क्योंकि ड्रोन के प्रचलन में आ जाने से सिर्फ आपके नियमित मेडिकल सप्लाई और गोदामों में सामान का ट्रांसफर ही इससे होगा। जबकि आपके दरवाजे तक सामान पहुंचाने का जिम्मा अभी भी डिलीवरी राइडर्स के पास ही रहेगा। उद्योग के हालिया अनुमानों के अनुसार, भारत का लॉजिस्टिक्स बाजार 2033 तक लगभग दोगुना हो सकता है, जिसमें ड्रोन डिलीवरी विशेष अंतिम-मील संचालन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की उम्मीद है। एडजिस्टिफाई के सह-संस्थापक और सीईओ उमंग शुक्ला के अनुसार, सबसे बड़ा बदलाव यह है कि ड्रोन डिलीवरी को अब प्रयोग के रूप में नहीं देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, "भारत में ड्रोन डिलीवरी अब जिज्ञासा का विषय नहीं रह गई है, बल्कि लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक विश्वसनीय हिस्सा बन गई है।" शुक्ला ने बताया कि नियामकों ने पहले ही चुनिंदा बीवीएलओएस कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है, जबकि वाणिज्यिक ऑपरेटर अलग-थलग प्रदर्शनों के बजाय सार्थक पैमाने पर स्वायत्त डिलीवरी चला रहे हैं।

रुपये की स्थिरता, सस्ता कच्चा तेल और घरेलू निवेशकों की ताकत से बढ़ेगा बाजार का भरोसा

नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन अब कई ऐसे बड़े आर्थिक संकेत सामने आ रहे हैं, जो आने वाले सालों में बाजार के लिए नई तेजी यानी अगली 'बुल रन' की नींव रख सकते हैं। मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि इस बार तेजी केवल सस्ते पैसे या विदेशी निवेश के दम पर नहीं, बल्कि भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, बढ़ती कॉर्पोरेट कमाई, घरेलू निवेशकों की ताकत और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती अहमियत के कारण देखने को मिल सकती है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। पिछले कुछ सालों में भारतीय बाजार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और रुपये में कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई थी। लेकिन, अब तस्वीर धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है। कई ऐसे मैक्रोइकोनॉमिक संकेत हैं, जो भारतीय शेयर बाजार के पक्ष में जाते दिख रहे हैं। सबसे पहला बड़ा संकेत भारतीय रुपये की मजबूती और स्थिरता है। विदेशी निवेशक किसी भी देश में निवेश करने से पहले वहां की मुद्रा की स्थिति को काफी महत्व देते हैं। अगर रुपया स्थिर रहता है, तो विदेशी निवेशकों को मुद्रा में होने वाले नुकसान का डर कम रहता है। इसके साथ ही आयातित महंगाई पर भी कंट्रोल रहता है और कंपनियों के लिए भविष्य की लागत का अनुमान लगाना आसान हो जाता है। इससे निवेश का माहौल मजबूत होता है। दूसरा बड़ा कारण भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) में कमी है। पिछले दो सालों में पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी रही। तेल की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन प्रभावित हुई। अब अगर यह तनाव कम होता है, तो वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और वे फिर से उभरते बाजारों, खासकर भारत की ओर रुख कर सकते हैं। तीसरा और बेहद अहम कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में नरमी है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल कम होता है, महंगाई घटती है, सरकार पर वित्तीय दबाव कम होता है और कंपनियों की लागत भी घटती है। इससे मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट, केमिकल और FMCG जैसे कई सेक्टरों की कमाई बढ़ सकती है। साथ ही महंगाई कंट्रोल में रहने पर RBI के पास ब्याज दरों को लेकर अधिक लचीलापन रहता है, जिससे आर्थिक विकास को और गति मिल सकती है। चौथा और सबसे मजबूत संकेत घरेलू निवेशकों की बढ़ती ताकत है। पहले भारतीय शेयर बाजार काफी हद तक विदेशी निवेशकों (FPI) पर निर्भर रहता था, जब भी विदेशी निवेशक बिकवाली करते थे, बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिलती थी। लेकिन, अब स्थिति बदल चुकी है। SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए हर महीने म्यूचुअल फंड में आने वाला पैसा लगातार बढ़ रहा है। करोड़ों भारतीय अब नियमित निवेश कर रहे हैं, जिससे घरेलू निवेश बाजार को मजबूती मिल रही है। यही वजह है कि हाल के सालों में FPI की बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार अपेक्षाकृत मजबूत बना रहा। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है या वे फिर से खरीदारी शुरू करते हैं, तो भारतीय बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है। मजबूत रुपया, सस्ता कच्चा तेल, घटता वैश्विक तनाव और घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी मिलकर बाजार को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। हालांकि, निवेशकों को यह भी याद रखना चाहिए कि शेयर बाजार कभी भी सीधी रेखा में नहीं चलता। बीच-बीच में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे और कुछ शेयरों का मूल्यांकन (Valuation) अभी भी महंगा माना जा रहा है। इसलिए केवल तेजी की उम्मीद में बिना रिसर्च के निवेश करना सही नहीं होगा। अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों में लंबे समय के नजरिए से निवेश करना और पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना हमेशा बेहतर रणनीति मानी जाती है। मौजूदा आर्थिक संकेत यह इशारा कर रहे हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है। अगर यही रुझान आगे भी जारी रहता है, तो आने वाले सालों में भारतीय शेयर बाजार की अगली बड़ी बुल रन (Bull Run) की शुरुआत इसी दौर से मानी जा सकती है। निवेशकों के लिए यह समय बाजार की दिशा को समझने और लंबी अवधि की रणनीति बनाने का हो सकता है।  

पूर्वी और पश्चिमी यूपी में झमाझम बारिश की संभावना, 7 दिन तक मौसम रहेगा सक्रिय

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हो रही है। वहीं, कई जगहों पर लोग अभी भी गर्मी का सामना कर रहे हैं। मौसम विभाग की तरफ से आने वाले दिनों में बारिश की संभावना जताई गई है। इस दौरान बिजली कड़कने के साथ तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में अगले एक सप्ताह तक भारी बारिश के संभावना जताई गई है। वहीं, कई हिस्सों में आंधी-तूफान का भी अलर्ट जारी किया है। प्रदेश में मौसम बदलने से लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। यूपी में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग आने वाले दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई जगहों पर मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश: मौसम विभाग ने प्रदेश के पूर्वी हिस्से में 5 से 7 जुलाई के दौरान हल्की बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, 8 से 11 जुलाई तक इस हिस्से में झमाझम बारिश हो सकती है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश: प्रदेश के इस हिस्से में 5 से 8 जुलाई के दौरान छिटपुट बारिश हो सकती है। वहीं, 9 से 11 जुलाई के बीच मानसून बढ़ने से पश्चिमी हिस्सों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, पूरे प्रदेश में 5 जुलाई को आंधी-तूफान के साथ बिजली कड़कने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा, 6 से 8 जुलाई को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में गरज-चमक के साथ बिजली गिर सकती है।  

खादी की नई पहचान: रीगल बिल्डिंग में खुल रहा 4 मंजिला मॉडर्न खादी भवन, कैफे का भी मिलेगा आनंद

 नई दिल्ली कनॉट प्लेस की रीगल बिल्डिंग में खादी और ग्रामोद्योग आयोग ( KVIC ) का एक नया और आधुनिक ' खादी भवन ' तैयार होने जा रहा है। इस साल के अंत तक बनकर तैयार होने वाले इस चार मंजिला खादी भवन में ग्राहकों को मैकेनाइज्ड फ्लोर सहित कई आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इसकी एक और बड़ी खासियत यह होगी मनोज गोयल कि यहां आने वाले ग्राहक पहली बार खरीदारी के साथ साथ एक बेहतरीन कैफे हाउस का भी आनंद ले सकेंगे। कस्टमाइजेशन की सुविधा KVIC के चेयरमैन मनोज गोयल ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) की पसंद और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए खादी के पहनावे मैं बड़ा बदलाव किया जा रहा है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग की ये तमाम उपलब्धियां प्रधानमंत्री के विजन का परिणाम हैं। इसी के तहत खादी भवन में पहली बार ग्राहकों को कस्टमाइजेशन की सुविधा दी जा रही है। यदि किसी ग्राहक को अपनी पसंद के अनुसार ड्रेस में कोई विशेष डिजाइन या फिटिंग करवानी है, तो वह वहीं पर मौजूद विशेष सेक्शन में इसके बारे में बता सकता है। मनपसंद ड्रेस सिलवा सकेंगे यहां महिला और पुरुष दोनों के लिए अलग-अलग फैब्रिकेटर तैनात रहेंगे। ग्राहकों की पसंद को और अधिक आधुनिक रूप देने के लिए यहां AI तकनीक की मदद भी ली जाएगी। ग्राहक अपनी पसंद का खादी कपड़ा खरीदकर AI द्वारा तैयार डिजाइनों के आधार पर अपनी मनपसंद ड्रेस सिलवा सकते हैं। बेहतरीन डिजाइनिंग के लिए नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) और सेंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर खादी (COEK) के विशेषज्ञ डिजाइनर और फैब्रिकेटर हमेशा इस खादी भवन में मौजूद रहेंगे। हथकरघा उत्पाद भी मिलेंगे नए खादी मॉल में कपड़ों के अलावा ग्रामोद्योग के अन्य सामान भी पहले से कहीं अधिक वैरायटी में उपलब्ध होंगे। इसके अलावा, खादी भवन में देश के दूर-दराज के इलाकों से लाए गए हथकरघा उत्पाद भी मिलेंगे, जिनमें लकड़ी और बांस के अनोखे सामानों के साथ-साथ विशेष रूप से कमल के फूल से बने दुर्लभ रेशमी कपड़े भी शामिल हैं।

दिल्ली से तमिलनाडु तक मौसम बिगड़ा: कई राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश का खतरा

नई दिल्ली दिल्ली से लेकर तमिलनाडु तक बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। इस बीच मौसम विभाग ने 15 राज्यों में अगले 10 घंटे के अंदर भीषण बारिश, आंधी और तूफान का अलर्ट जारी किया है। इन राज्यों में बारिश के दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिसकी रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। इसलिए लोगों से अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। इन हवाओं से किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। आइए बताते हैं कि किन 15 राज्यों के लिए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। इन 15 राज्यों में अलर्ट     दिल्ली     उत्तर प्रदेश     बिहार     राजस्थान     महाराष्ट्र     मध्य प्रदेश     पश्चिम बंगाल     तमिलनाडु     हिमाचल प्रदेश     उत्तराखंड     झारखंड     छत्तीसगढ़     ओडिशा     असम     त्रिपुरा दिल्ली-एनसीआर में कल कैसा रहेगा मौसम     दिल्ली-NCR (6 जुलाई- भारी बारिश का अलर्ट): सिविल लाइंस, दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) कैंपस क्षेत्र, कमला नगर , मुखर्जी नगर, मॉडल टाउन, आजादपुर , सदर बाजार, कश्मीरी गेट सहित पूरे उत्तरी दिल्ली और ग्रेटर कैलाश, वसंत कुंज, वसंत विहार, डिफेंस कॉलोनी, हौज खास, पंचशील पार्क, आनंद लोक सहित दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में कल यानी 6 जुलाई को बारिश और आंधी तूफान का अलर्ट है। इसके साथ ही लक्ष्मी नगर, पटपड़गंज, मयूर विहार, प्रीत विहार, आनंद विहार, कृष्णा नगर, गांधी नगर, शाहदरा, सीलमपुर, त्रिलोकपुरी, कोंडली, मंडावली, पांडव नगर, वसुंधरा एन्क्लेव और दिलशाद गार्डन सहित पूर्वी दिल्ली में भी झमाझम की चेतावनी है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली में कल अधिकतम तापमान 37 डिग्री तो वहीं न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। उत्तर प्रदेश में कल कैसा रहेगा     यूपी (6 जुलाई- तेज हवाएं, बारिश): देवरिया, मऊ, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, बरेली, पीलीभीत, बहराइच और श्रावस्ती में भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम विभाग ने बिजनौर, मेरठ, अमरोहा, हापुड़, मोरादाबाद, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, इटावा, ओरैया, कन्नौज, हरदोई, उन्नाव, कानपुर में भी भीषण बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। इसके साथ ही गौतमबुद्ध नगर, शामली, शाहजहांपुर, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, जौनपुर, कौशांबी सहित यूपी के कई जिलों में हल्की बारिश का अलर्ट है। राजधानी लखनऊ में कल अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तो वहीं न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। बिहार में कल कैसा रहेगा मौसम     बिहार (6 जुलाई- रेड अलर्ट जारी): गया, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, जहानाबाद, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया, बांका, जमुई, लखीसराय, अरवल में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, पटना, बक्सर, भोजपुर, बेगुसराय, सहरसा, मुंगेर, भागलपुर, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया, सुपौल, अररिया, किशनगंज में भी हल्की बारिश की चेतावनी है। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं। राजधानी पटना में कल अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तो वहीं न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। महाराष्ट्र में कल कैसा रहेगा मौसम     महाराष्ट्र (6 जुलाई- रेड अलर्ट जारी): एक तरफ मुंबई के अंधेरी, मरीन ड्राइव, वसई-विरार, विवा कॉलेज रोड, आचोले रोड, सेंट्रल पार्क, विजय नगर–नागिनदास पाड़ा, गाला नगर, तुलिंज ब्रिज के आसपास भारी बारिश का अलर्ट है तो वहीं महाराष्ट्र के दूसरे जिले सतारा, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर, पुणे, अहमदनगर, ठाणे, पालघर, रायगढ़, भिवंडी, नागपुर, भंडारा-गोंदिया, चंदरपुर, गढ़चिरौली में भी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मुंबई में कल अधिकतम और न्यूनतमा तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहेगा। राजस्थान में कल कैसा रहेगा मौसम     राजस्थान (6 से 11 जुलाई- आंधी-बारिश तूफान): अगले 5 से 7 दिनों तक जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, श्री गंगानगर में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट है। वही, जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनूं, चुरू, हनुमानगढ़, अलवर, भरतपुर, दौसा, धोलपुर, सवाईं माधोपुर, टोंक, भीलवाड़ा, बूंदी, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, सिरोही में भी जमकर बारिश होगी। इन जिलों में 41 से 61 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। राजधानी जयपुर में कल अधिकतम तापमान 36 डिग्री तो वहीं न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। मध्य प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम     मध्य प्रदेश (6 से 10 जुलाई- भारी बारिश की संभावना): धार, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, बुरहानपुर में भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान का अलर्ट है। वहीं, भोपाल, विदिशा, रायसेन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, गुना, नरसिंहपुर, सागर, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, जबलपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी, डिंडोरी, दमोह, पन्ना, रीवा, सतना में भी झमाझम की चेतावनी है। इन जिलों में 41 से 61 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान 30 डिग्री तो वहीं, न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। पश्चिम बंगाल में कल कैसा रहेगा मौसम     पश्चिम बंगाल (6 जुलाई- हल्की बारिश होगी): कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना, पूर्व और पश्चिम बर्दवान दक्षिण 24 परगना, पूर्वी मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, मालदा, झाड़ग्राम, बांकुरा, पुरुलिया, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार,कूच-बिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, नादिया, पूर्वी बर्धमान, पश्चिमी बर्धमान और हुगली में हल्की बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। कोलकाता में कल न्यूनतम तापमान 28 और अधिकतम तापमान 30 डिग्री रहने का अनुमान है। तमिलनाडु में कल कैसा रहेगा मौसम     तमिलनाडु (6 से 10 जुलाई- भारी बारिश के आसार): तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में अगले छह दिनों तक बारिश होने की संभावना है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा मौसम बुलेटिन में कहा है कि 10 जुलाई तक राज्य के कई हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर मध्यम बारिश हो सकती है। चेन्नई के लिए मौसम विभाग ने आंशिक रूप से बादल छाए रहने और शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई है। कल चेन्नई का अधिकतम तापमान 37 डिग्री तो वहीं न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

हिंद महासागर तक निगरानी बढ़ी: चीन का नया रडार बना भारत के लिए रणनीतिक चिंता

नई दिल्ली भारत और चीन के बीच तनाव के बीच चीन ने म्यांमार सीमा से लगे अपने यूनान प्रांत में लार्ज फेस्ड एरे रडार (LPAR) चालू कर दिया है. इस रडार की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है. दावा है कि यह भारत के मिसाइल टेस्टों  को ट्रैक करने और हिंद महासागर के बड़े हिस्से पर नजर रखने में सक्षम है. ऐसे में इसे भारत की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है. चीन पिछले कुछ वर्षों से अपनी निगरानी व्यवस्था लगातार मजबूत कर रहा है. इसी कड़ी में यूनान में लगाया गया यह नया LPAR रडार भी अहम माना जा रहा है. यह रडार दूर से ही बैलिस्टिक मिसाइल का पता लगा सकता है, उसकी उड़ान पर नजर रख सकता है और उसकी जानकारी जुटा सकता है. इसकी रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है. चीन भारत के पूर्वी हिस्से, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के बड़े इलाके पर नजर रख सकता है. यह रडार ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से होने वाले मिसाइल टेस्टों को भी ट्रैक कर सकता है. भारत यहीं से अग्नि-5, K-4 और दूसरी आधुनिक मिसाइलों का टेस्ट करता है. अगर किसी देश को इन मिसाइलों की उड़ान और दूसरी तकनीकी जानकारी मिल जाए, तो वह अपनी रक्षा तैयारियों को उसी हिसाब से मजबूत कर सकता है. भारत के लिए चिंता की बात क्यों है? रक्षा एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिसाइल टेस्ट के दौरान मिलने वाला डेटा किसी भी देश के लिए काफी अहम होता है. इससे मिसाइल की क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है और उसके खिलाफ नई रक्षा सिस्टम तैयार करने में मदद मिल सकती है. यही वजह है कि चीन के इस नए रडार को भारत के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है. हिंद महासागर पर भी रख सकेगा नजर यूनान में इस रडार की लोकेशन ऐसी है कि चीन बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के बड़े हिस्से की निगरानी भी कर सकता है. हिंद महासागर भारत के लिए बेहद अहम है. यहां भारतीय नौसेना की मजबूत मौजूदगी है. दुनिया के कई बड़े समुद्री व्यापार मार्ग भी यहीं से गुजरते हैं. ऐसे में इस इलाके में चीन की बढ़ती निगरानी भारत की चिंता बढ़ा सकती है. चीन का निगरानी नेटवर्क और मजबूत हुआ चीन के पास पहले से ही शिनजियांग और कोरला में ऐसे लंबी दूरी के रडार मौजूद हैं. अब यूनान में नया LPAR रडार चालू होने के बाद उसकी निगरानी क्षमता और बढ़ गई है. हालांकि, इस तैनाती पर भारत और चीन, दोनों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन रक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में भारत को अपनी एंटी-सर्विलांस तकनीक और रक्षा तैयारियों को और मजबूत करना पड़ सकता है.

एनडीए में एकजुटता पर जोर, सीट बंटवारे पर चर्चा नहीं; लखनऊ में हुई अहम बैठक

 लखनऊ  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रदेश में भाजपा के सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक में विधान सभा चुनाव 2027 में एनडीए की जीत सुनिश्चित करने पर मंथन किया। भाजपा अध्यक्ष ने संदेश दिया कि आपसी समन्वय इस स्तर तक मजबूत होना चाहिए कि हम वर्ष 2027 में प्रदेश में तीसरी बार और प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएं। इस बैठक में सीटों के बंटवारे पर कोई चर्चा नहीं हुई। नवीन ने अगली बैठक दिल्ली में करने की बात सभी सहयोगी दलों के नेताओं से कही। सहयोगी दलों के साथ अलग-अलग बैठकें रविवार को होटल ताज में भाजपा अध्यक्ष ने चारों सहयोगी दलों के साथ अलग-अलग बैठकें की। सबसे पहले उन्होंने रालोद के राष्ट्रीय संगठन महासचिव त्रिलोक त्यागी के साथ बैठक की।जिसमें उनसे पूछा कि वर्ष 2027 चुनाव के लिए कैसे और क्या किया जाना चाहिए। त्यागी ने जवाब दिया कि सभी सहयोगी दलों के बीच जिला स्तर तक समन्वय होना चाहिए। सम्मान मिलेगा तो सभी दल उत्साह से एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे। रालोद को मानने वाले पूरे प्रदेश में हैं, और पार्टी पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित कर रही है। नवीन ने कहा कि भाजपा भी बेहतर समन्वय पर अधिक ध्यान दे रही है। मीडिया से बातचीत में त्यागी ने कहा कि हम 403 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे सिंबल अलग-अलग होंगे। अपना दल (एस) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मंत्री आशीष पटेल के साथ बैठक में भी भाजपा अध्यक्ष ने उनसे पूछा कि वर्ष 2027 चुनाव में जीत के लिए क्या किया जाए। जिस पर आशीष ने कहा कि सभी सहयोगी दल बेहतर समन्वय के साथ पूरे प्रदेश में मिलकर काम करेंगे, फिर से हमारी जीत सुनिश्चित है। राजभर ने बताया जनजातियों का मुद्दा भाजपा अध्यक्ष के साथ हुई बैठक में सुभासपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने उन्हें बताया कि पार्टी ने 83 सीटों पर विधान सभा प्रभारी और सह प्रभारी बना दिए हैं। बूथ स्तर तक प्रशिक्षण का कार्यक्रम चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गोंड, खरवार, अर्कवंशी, बंंजारा, पाल, प्रजापति जैसी ऐसी कई जातियां हैं जो राजनीतिक रूप से सक्रिय तो हैं, लेकिन इनके पास राजनीतिक नेतृत्व नहीं है। इन जातियों को राजनीतिक नेतृत्व देने का सुझाव दिया। गोंड व खरवार जातियों का एसटी सर्टिफिकेट नहीं बनाए जाने का मुद्दा उठाया। यह भी कहा कि प्रदेश में कुछ अधिकारियों के कारण थाने, तहसील और ब्लाक स्तर पर आम लोगों के काम नहीं हो रहे हैं, जिससे सरकार की छवि खराब हो रही है। इसे देखा जाना चाहिए। राजभर ने सहयोगी दलों के बीच समन्वय बैठक कराने के साथ ही आजमगढ़, बस्ती और देवरिया में पार्टी द्वारा आयोजित किए जाने वाले बड़े कार्यक्रमों में भाजपा अध्यक्ष को आमंत्रित भी किया। निषाद पार्टी के अध्यक्ष मंत्री डॉ. संजय निषाद ने भी सहयोगियों के साथ समन्वय बढ़ाने की बात कही। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष को बताया कि प्रदेश में निषादों की बड़ी संख्या है। निषादों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए। निषाद आरक्षण परिभाषित करने का ज्ञापन भी दिया। सभी सहयोगी दलों के नेताओं से भाजपा अध्यक्ष ने बेहतर समन्वय बनाने के साथ ही विधान सभा चुनाव में प्रचंड जीत की तैयारी में जुटने का संदेश दिया। सभी से कहा कि अगली बैठक हम लोग दिल्ली में करेंगे। बैठकों में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह उपस्थित थे।

साबांग पोर्ट से हिंद महासागर में भारत की बढ़ी ताकत? 6-8 जुलाई के दौरे से पहले PM मोदी की बड़ी चाल

जकार्ता  पीएम मोदी  6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा पर रहेंगे. ये दौरा समंदर सिक्योरिटी सिस्टम के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है. उनकी इस यात्रा के पीछे सिर्फ दो देशों के पुराने रिश्ते नहीं हैं, बल्कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का वो सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक है, जिसकी स्क्रिप्ट पिछले कुछ सालों से लिखी जा रही थी. भारत और इंडोनेशिया के बीच वैसे तो कई समझौतों पर बातचीत चल रही है, लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स से लेकर चीन तक, हर किसी की नजर सिर्फ एक ही प्रोजेक्ट पर टिकी है और वो है इंडोनेशिया का ‘साबांग पोर्ट’. जिससे समंदर का पूरा खेल ही पलट जाएगा।  साबांग पोर्ट: आखिर क्या है इस बंदरगाह की पूरी कहानी? इंडोनेशिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ सालों में बहुत ज्यादा गहरी हुई है लेकिन इस पूरी पार्टनरशिप का जो सबसे कीमती ‘हीरा’ है, वो है साबांग पोर्ट प्रोजेक्ट. सबांग इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बिल्कुल उत्तरी छोर पर स्थित एक छोटा सा बंदरगाह है. दिखने में ये जगह बहुत शांत और साधारण लग सकती है, लेकिन जब आप इसे दुनिया के नक्शे पर देखेंगे तो आपको समझ आएगा कि ये कोई मामूली बंदरगाह नहीं है. ये ठीक उसी जगह पर मौजूद है जहां से दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता ‘मलक्का स्ट्रेट’ शुरू होता है।  भारत की अंडमान और निकोबार द्वीप श्रृंखला से साबांग पोर्ट की दूरी महज 150 किलोमीटर के आसपास है. यानी भारत के अपने नेवल बेस से ये जगह इतनी पास है कि भारतीय नौसेना बहुत ही कम समय में यहां अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकती है. पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान साबांग पोर्ट के कमर्शियल और मिलिट्री इस्तेमाल को लेकर जो ब्लूप्रिंट फाइनल हो रहा है, उसने चीन की रातों की नींद उड़ा दी है. भारत यहां केवल पैसे नहीं लगा रहा है, बल्कि वो इस पूरे इलाके की सुरक्षा का जिम्मा अपने हाथों में लेने की तैयारी कर रहा है।  मलक्का स्ट्रेट का वो सच, जिससे चीन को आते हैं बुरे सपने अब सवाल ये उठता है कि आखिर इस साबांग पोर्ट और मलक्का स्ट्रेट से चीन का क्या लेना-देना है और वो इससे इतना क्यों घबरा रहा है? इस बात को समझने के लिए हमें चीन की सबसे बड़ी कमजोरी को जानना होगा. चीन आज भले ही दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अपनी सेना के दम पर पूरी दुनिया को आंखें दिखाता है, लेकिन उसकी लाइफलाइन एक बहुत ही संकरे समुद्री रास्ते के भरोसे टिकी है, जिसे मलक्का जलडमरूमध्य या चीन का ‘मलक्का डिलेमा’ कहते हैं. यs इंडोनेशिया और मलेशिया के बीच स्थित एक बेहद पतली समुद्री पट्टी है।  चीन जितना भी कच्चा तेल खाड़ी देशों और अफ्रीका से खरीदता है, उसका लगभग 80% हिस्सा इसी मलक्का स्ट्रेट से होकर चीन के बंदरगाहों तक पहुंचता है. इसके अलावा चीन दुनिया भर में जो अपना माल एक्सपोर्ट करता है, उसका भी एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर मलक्का स्ट्रेट चीन के लिए एक गले की नली की तरह है, जिसके बिना न तो उसे खाना मिल सकता है और न ही वो सांस ले सकता है. अगर कभी ये रास्ता बंद हो गया, तो चीन की पूरी इंडस्ट्री और उसकी अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी।  चीन का ‘मलक्का डिलेमा’ और साबांग पोर्ट पर भारत का पहरा चीन के पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ ने सालों पहले एक शब्द का इस्तेमाल किया था- ‘मलक्का डिलेमा’ (मलक्का का धर्मसंकट). चीन को हमेशा से ये डर सताता रहा है कि अगर कभी भारत या अमेरिका के साथ उसका कोई बड़ा युद्ध या विवाद होता है तो भारतीय नौसेना अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर मलक्का स्ट्रेट के मुहाने को पूरी तरह ब्लॉक कर देगी. अगर ऐसा हुआ तो चीन का पूरा व्यापार ठप हो जाएगा और उसकी सेना बिना तेल के कमजोर पड़ जाएगी. चीन का यही सबसे बड़ा डर है जिसे ‘मलक्का डिलेमा’ कहा जाता है।  अब सोचिए इसी मलक्का स्ट्रेट के ठीक एंट्री पॉइंट पर स्थित साबांग पोर्ट को जब भारत डेवलप कर रहा है, तो इसका क्या मतलब हुआ? इसका सीधा सा मतलब यह है कि साबांग पोर्ट पर भारत की मजबूत मौजूदगी सीधे तौर पर चीन की इस सबसे बड़ी कमजोरी पर भारत का एक पक्का पहरा बिठा देती है. इस बंदरगाह के पूरी तरह एक्टिव होने के बाद भारतीय नौसेना मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले चीन के हर एक जहाज, हर एक सबमरीन और हर एक हरकत पर चौबीसों घंटे सीधी नजर रख पाएगी. ये चीन के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है क्योंकि अब तक वो हिंद महासागर में भारत को घेरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के साथ मिलकर चीन को उसी के रास्ते पर घेर लिया है।  पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा जियोपॉलिटिक्स की नई स्क्रिप्ट पीएम मोदी की इस इंडोनेशिया यात्रा के दौरान जब साबांग पोर्ट पर अंतिम मुहर लग रही है तो ये पूरी दुनिया को एक बहुत बड़ा मैसेज दे रहा है. अब तक चीन ये सोचता था कि वो अपनी आर्थिक ताकत के दम पर एशिया के छोटे देशों को डराकर रख सकता है लेकिन इंडोनेशिया जैसे बड़े और प्रभावशाली मुस्लिम बहुल देश ने भारत के साथ हाथ मिलाकर ये साफ कर दिया है कि वो इस इलाके में किसी एक देश की दादागिरी को स्वीकार नहीं करेगा. भारत और इंडोनेशिया का ये साथ ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ की असली ताकत को दिखाता है।  इस यात्रा के जरिए भारत न केवल साबांग पोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है, बल्कि दोनों देशों के बीच मैरीटाइम कोऑपरेशन को एक नए लेवल पर ले जा रहा है. आने वाले समय में अगर भारतीय नौसेना के जहाजों को साबांग पोर्ट पर लॉजिस्टिक सपोर्ट और रीफ्यूलिंग की सुविधा मिल जाती है तो चीन के लिए हिंद महासागर और मलक्का स्ट्रेट के आसपास मनमानी करना नामुमकिन हो जाएगा. पीएम मोदी की ये चाल बताती है कि भारत अब डिफेंसिव नहीं, बल्कि ऑफेंसिव कूटनीति पर चल रहा है और चीन की हर चाल का जवाब उसके अपने ही इलाके में जाकर दे … Read more

रहस्यमयी I-52 सबमरीन की कहानी, 50 साल बाद मिला मलबा लेकिन खजाना अब भी रहस्य

टोक्यो  साल 1944 की गर्मियों में एक पनडुब्बी अटलांटिक महासागर में उतरी और फिर किसी जादुई कहानी की तरह गायब हो गई। इसके बाद कई दशक तक इसके सही ठिकाने का पता नहीं चल पाया। I-52 नाम की इस जापानी पनडुब्बी I-52 में क्रू के अलावा जर्मनी भेजा जा रहा सोना, दूसरे सामान और मेडिकल सप्लाई थी। इसमें दो टन सोना लदे होने का अनुमान था। ऐसे में इसे गोल्ड सबमरीन कहा गया। आखिरकार खोजकर्ता 1995 में समुद्र के 3 मील नीचे उस जगह पहुंचे, जहां इसका मलबा था। खोजकर्ताओं ने देखा कि 50 साल से ज्यादा समय बाद पनडुब्बी का ज्यादातर हिस्सा सीधा खड़ा था। इससे दूसरे विश्व युद्ध की सबसे अनोखी समुद्री कहानियों में से एक सुरक्षित रही और अंदर मौजूद खजाने के बारे में बिना जवाब वाले सवाल पीछे छूट गए। हालांकि यह अभी एक रहस्य बना हुआ है कि क्या कीमती सोना आज भी इस मबले के भीतर है या नहीं। I-52 कैसे जापान की कीमती पनडुब्बी द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 1944 तक जापान और जर्मनी के बीच व्यापारिक जहाजों का आना-जाना बहुत मुश्किल हो गया था। दूसरे विश्व युद्ध में मित्र देशों की नौसेना के दबदबे की वजह से सतह पर चलने वाले जहाजों के यूरोप पहुंचने से पहले पकड़े जाने का खतरा था। ऐसे में दोनों देश लंबी दूरी तक जाने वाली पनडुब्बियों पर निर्भर हुए, जो हजारों मील के खतरनाक पानी में कीमती सामान ले जाती थीं। I-52 को बड़ी ट्रांसपोर्ट पनडुब्बी के तौर पर बनाया गया था। यह गायब होने से पहले जापान से निकली और अपना सामान लोड करने के लिए सिंगापुर रुकी। सामान में टिन, टंगस्टन और मोलिब्डेनम जैसी धातुएं, प्राकृतिक रबर, कुनैन और अफीम शामिल थे, जिनका इस्तेमाल सेना के लिए किया जाना था। इसके सबसे कीमती सामान में करीब दो टन सोना था, जिसे 146 बार (ईंटों) में पैक किया गया था। वे मैसेज जिनसे I-52 का पता चला I-52 सबमरीन काअटलांटिक में घुसने से पहले ही ब्रिटिश और अमेरिकी कोडब्रेकर्स जर्मन और जापानी नेवल कम्युनिकेशन को पढ़ने में कामयाब रहे थे। उनको पता चल गया कि I-52 के जर्मन सबमरीन U-530 से कहां मिलेगी और ट्रांसफर कब होगा। 23 जून 1944 की देर शाम I-52 अटलांटिक के बीच में U-530 से मिलने के लिए सतह पर आई इसी दौरान बोग के एयरक्राफ्ट ऊपर पहुंच गए। इसके बाद जापानी सबमरीन पर भीषण हमला हुआ। अगले दिन तक अमेरिकी जहाजों को समुद्र में तैरता हुआ मलबा और बड़ी मात्रा में रबर मिला, जिससे पुष्टि हुई कि सबमरीन नष्ट हो गई थी। U-530 बिना पकड़े गए बच निकला। I-52 पर सवार सभी 109 लोग मारे गए। पनडुब्बी पर बना रहा रहस्य युद्ध के समय यह तो पक्का था कि पनडुब्बी डूब गई है लेकिन किसी को ठीक-ठीक नहीं पता था कि वह कहां है। हमला रात में, खराब मौसम में और किसी भी तट से बहुत दूर हुआ था, जिससे ये पनडुब्बी दुनिया की नजरों से गायब रही। दशकों तक इसे खोजने की कोशिश हुई और आखिर में 2 मई 1995 को पाया गया कि समुद्र की सतह से 17,000 फीट से ज्यादा नीचे समुद्र तल पर सीधी खड़ी एक बड़ी पनडुब्बी का मलबा है। एक रिमोट से चलने वाले कैमरे को मलबे के ऊपर ले जाया गया, जिसने पिछले हिस्से (स्टर्न) के आस-पास की ऐसी डिटेल्स रिकॉर्ड कीं जो जापानी टाइप C3 ट्रांसपोर्ट पनडुब्बियों के खास डिजाइन से मेल खाती थीं। जहाज की हालत ने जांचकर्ताओं को हैरान कर दिया। टॉरपीडो से हुए नुकसान से ढांचा धीरे-धीरे पानी से भरा। इससे उसका बड़ा हिस्सा नीचे जाते समय सही-सलामत रहा। ऐसे में माना गया कि सोना इसके अंदर है। पनडुब्बी खींचती है ध्यान समुद्र की तलहटी से मिले मलबे के टुकड़ों ने कानूनी तौर पर सामान निकालने के अधिकारों का समर्थन किया लेकिन शुरुआती अभियान के दौरान सोना निकालने की कोई कोशिश नहीं की गई। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह कीमती धातु पनडुब्बी के अगले हिस्से में रखी गई थी, जो 1944 से अछूता रहा है। अटलांटिक में I-52 के गायब होने के अस्सी साल से ज्यादा समय बाद भी यह पनडुब्बी ना केवल इसलिए ध्यान खींचती है कि इसमें खजाना होने का अनुमान है। बल्कि इसलिए भी कि इसकी खोज ने दिखाया कि कैसे युद्ध के समय कोड तोड़ने, पुराने रिकॉर्ड की जांच और आधुनिक तकनीक से एक ऐसे रहस्य को सुलझाया जा सकता है जिसे कई पीढ़ियों के जांचकर्ता नहीं सुलझा पाए थे। सोना अभी भी वहीं हो सकता है! एक ऐसे ढांचे के अंदर, जो अस्सी साल से तीन मील पानी के नीचे है और उस दबाव से सुरक्षित है, जिसने उसे कुचल दिया होता। I-52 की कहानी यह दिखाती है कि समुद्र की तलहटी में वह सोना हो सकता है, जो पर दशकों की खोज के बावजूद अभी नहीं मिल पाया है। सोने का रहस्य अभी भी बरकरार है