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PM2.5 प्रदूषण से सिर्फ सांस नहीं, बाल भी खतरे में, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

अक्सर माना जाता है कि हवा प्रदूषण के कारण खांसने, दम घुटने और सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स ने अब एक ऐसी चेतावनी दी है जो आपकी चिंताएं बढ़ा सकती है. हालिया रिसर्च में पाया गया है कि हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बारीक कण न सिर्फ हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि इनका सीधा असर हमारे बालों और स्कैल्प पर भी पड़ रहा है. ये महीन कण इतने छोटे होते हैं कि ये आसानी से स्कैल्प की त्वचा के रोमछिद्रों में घुस जाते हैं जिससे बालों का गिरना और उनकी क्वालिटी खराब होना एक बड़ी समस्या बन गया है. इस बारे में डॉक्टर ने कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है जो सभी को मानना चाहिए. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और बालों की कमजोरी बेंगलुरु के अपोलो हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी और रेस्पिरेटरी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. समीर बंसल का कहना है, 'PM2.5 सामान्य धूल नहीं है. इसका आकार इतना छोटा होता है कि यह नाक और ऊपरी एयरवे के सुरक्षा कवच को पार करके फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंच जाता है. उन्होंने बताया कि प्रदूषण को केवल खांसी या सांस की तकलीफ तक सीमित नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इसका 'इन्फ्लेमेटरी बोझ' शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है जिससे शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इन्फ्लेमेटरी रिस्पॉन्स पैदा होते हैं.' बेंगलुरु के फोर्टिस हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डायरेक्टर डॉ. विवेक आनंद पडेगल का कहना है, 'लोग PM2.5 को फेफड़ों के लिए हानिकारक मानते हैं लेकिन अब यह स्पष्ट हो रहा है कि इसका प्रभाव हेयर फॉलिकल्स यानी बालों की जड़ों पर भी पड़ रहा है. लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से स्कैल्प में इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा होता है जो बालों के झड़ने, उनके पतले होने और स्कैल्प के अस्वस्थ होने का कारण बन सकता है.' स्कैल्प का इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण के सूक्ष्म कण शरीर में फ्री रेडिकल्स को बढ़ाते हैं, जो बालों की जड़ों की प्रोटीन संरचना को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे बाल न केवल कमजोर और रूखे हो जाते हैं, बल्कि उनके टूटने की रफ्तार भी बढ़ जाती है. द मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषण की मार सिर्फ बालों की लंबाई तक सीमित नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक, वायु प्रदूषण में मौजूद हानिकारक तत्व स्कैल्प में सूजन या इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं. जब स्कैल्प पर गंदगी और टॉक्सिन्स की परत जमती है तो यह बालों के रोमछिद्रों को प्रभावित करती है जिससे बालों को जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते. इसका नतीजा ये होता है कि बाल समय से पहले पतले होने लगते हैं और स्कैल्प में खुजली व डैंड्रफ की समस्या आम हो जाती है. सिस्टमिक हेल्थ रिस्क डॉ. बंसल और डॉ. पडेगल इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि वायु प्रदूषण अब केवल एक अंग की समस्या न होकर एक 'सिस्टमिक हेल्थ रिस्क' बन गया है जो बालों सहित पूरे शरीर को प्रभावित कर रहा है. प्रदूषण की वजह से स्कैल्प पर जो गंदगी की परत जमती है वह स्कैल्प को सेंसिटिव बनाती है. यदि इसे समय रहते साफ न किया जाए तो यह बालों के पतले होने और बालों की जड़ों की मजबूती कम होने का कारण बनती है. बचाव के लिए क्या करें? इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर निकलते समय बालों को स्कार्फ या कैप से जरूर ढकें. प्रदूषण वाली जगहों पर जाने के बाद बालों को माइल्ड सल्फेट-फ्री शैम्पू से धोना चाहिए ताकि गंदगी जमा न हो. इसके अलावा, एंटीऑक्सीडेंट युक्त हेयर केयर प्रोडक्ट्स और संतुलित डाइट का सेवन बालों की जड़ों को प्रदूषण के असर से बचाने में मददगार साबित हो सकता है.

पंजाब के बठिंडा में पुलिसकर्मी किडनैप, 2 लाख की फिरौती मांगने का आरोप, जांच शुरू

बठिंडा. थाना कैंट क्षेत्र में एक पुलिसकर्मी के कथित अपहरण, मारपीट और दो लाख रुपये की फिरौती मांगने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर दो नामजद और तीन अज्ञात आरोपितों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को दिए बयान में सिपाही कुलविंदर सिंह ने बताया कि आरोपित हरजिंदर सिंह, पोपा और उनके तीन अज्ञात साथियों ने पहले उसकी वीडियो बनाई। इसके बाद उसके साथ मारपीट की और जबरन अपनी गाड़ी में बैठाकर गांव सेमा कलां ले गए। शिकायत के अनुसार आरोपितों ने वहां उसे धमकाते हुए दो लाख रुपये की फिरौती मांगी। आरोप है कि इस दौरान उसका एटीएम कार्ड भी अपने कब्जे में ले लिया और उसकी स्विफ्ट कार नंबर पीब-03एजी-5030 भी साथ ले गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपितों ने सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई और पुलिसकर्मी को अवैध रूप से बंधक बनाकर धमकियां दीं। मामले की जांच के बाद थाना कैंट पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ अपहरण, मारपीट, फिरौती मांगने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

वास्तु मान्यताओं के अनुसार दवाइयां गलत जगह रखने से स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, जानें सही स्थान।

 आज के दौर में लगभग हर घर की यही कहानी है—कमाई चाहे जितनी भी हो, उसका एक बड़ा हिस्सा डॉक्टर की फीस और दवाइयों के बिल में चला जाता है.  कई बार लाख कोशिशों और अच्छे इलाज के बाद भी घर से बीमारियां जाने का नाम नहीं लेतीं. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो मुमकिन है कि इसका कारण आपके घर में गलत जगह पर रखा दवाइयों का डिब्बा हो. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में रखी हर वस्तु की अपनी एक ऊर्जा होती है. अगर हम दवाओं को गलत दिशा या जगह पर रख देते हैं, तो वे बीमारी को ठीक करने के बजाय उसे और बढ़ाने लगती हैं. आइए जानते हैं कि घर की वो कौन सी जगह है जहां भूलकर भी दवाइयां नहीं रखनी चाहिए. भूलकर भी रसोई (किचन) में ना रखें दवाइयां हम में से ज्यादातर लोग अपनी सहूलियत के लिए दवाइयों का डिब्बा रसोई घर में रख देते हैं. कई घरों में तो लोग इसे सीधे गैस चूल्हे के पास वाले शेल्फ में रख देते हैं ताकि सुबह-शाम खाना खाते ही दवा खाना याद रहे. वास्तु के अनुसार, यह सबसे घातक भूल है. अग्नि का प्रभाव: रसोई घर को मां अन्नपूर्णा और अग्नि देव का स्थान माना जाता है, जहां से पूरे परिवार को सेहत और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. अग्नि का स्वभाव हर चीज को तीव्र करना यानी बढ़ाना होता है. जब दवाइयां रसोई में या चूल्हे के आसपास रखी जाती हैं, तो बीमारी घटने के बजाय और ज्यादा बढ़ने लगती है. अन्नपूर्णा का दोष: रसोई में बीमारी की दवाएं रखने का सीधा मतलब है कि आप अनजाने में बीमारी को अपने भोजन का हिस्सा बना रहे हैं. इससे घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अक्सर खराब रहने लगता है, और एक बीमारी ठीक होने से पहले ही दूसरी शुरू हो जाती है. इन 2 जगहों पर भी दवा रखना है नुकसानदेह रसोई के अलावा दो और ऐसी जगहें हैं जहाँ लोग अक्सर दवाएं रखते हैं, जो वास्तु के लिहाज से बिल्कुल गलत हैं: डाइनिंग टेबल पर: डाइनिंग टेबल के बीचों-बीच दवाइयां सजाकर रखने से भोजन करते समय पूरे परिवार का ध्यान बीमारी पर केंद्रित रहता है. इससे भोजन से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है. बेड के सिरहाने या तकिए के नीचे: सोते समय सिर के पास दवाइयां रखने से राहु दोष बढ़ता है. इससे व्यक्ति को मानसिक तनाव, घबराहट और अनिद्रा (नींद न आने) की समस्या होने लगती है. कहाँ रखें दवाइयां ताकि जल्दी मिले बीमारी से छुटकारा? अगर आप चाहते हैं कि दवाएं शरीर पर जल्दी असर करें. आपका मेडिकल का खर्च कम हो, तो इन बातों का ध्यान रखें: उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा (North-East): घर के कमरे की उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा को आरोग्य और देवताओं के वैद्य भगवान धन्वंतरि की दिशा माना जाता है. इस कोने में साफ-सफाई के साथ दवाएं रखने से मरीज जल्दी ठीक होता है. नजरों से छुपाकर रखें: दवाओं को कभी भी खुले में टेबल या शेल्फ पर बिखेर कर ना रखें. इन्हें हमेशा किसी दराज या अलमारी के अंदर बंद करके रखें, ताकि घर में आने-जाने वाले लोगों की नजर इन पर बार-बार न पड़े.

बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जंगल के 10 KM के भीतर आरा मिलों पर प्रतिबंध कायम

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला देते हुए राज्य सरकार के उस निर्णय को सही माना है, जिसमें अधिसूचित जंगलों या संरक्षित क्षेत्रों से हवाई दूरी के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी क्षेत्रों को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया था. कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब इस क्षेत्र में सभी आरा मिलें बंद रहेंगी. कोर्ट ने इस संबंध में दायर कुल 19 याचिकाओं को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि हमें दिल्ली जैसा प्रदूषण नहीं चाहिए. कोर्ट ने 10 किलोमीटर के दायरे में बफर जोन के शासन के निर्णय को उचित ठहराया है. बता दें, कि राज्य सरकार ने 25 सितंबर 2025 को एक अधिसूचना जारी कर छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान अधिनियम,1984 की धारा 5(1) का उपयोग करते हुए जंगली क्षेत्र के आसपास 10 किमी के दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया था. इस अधिसूचना के प्रभावी होने के बाद वन विभाग ने इस दायरे में आने वाली सभी आरा मिलों को बंद करने और उनके लाइसेंस नवीनीकरण पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे, इस आदेश के खिलाफ कई आरा मिल संचालकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

चंडीगढ़ में PM मोदी के दौरे पर करोड़ों की तैयारी, ₹2 करोड़ के टेंट समेत एक दिन में निकले 8 टेंडर

 चंडीगढ़  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 जुलाई को प्रस्तावित चंडीगढ़ दौरे को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कार्यक्रम पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित किया जाना है। इसके लिए प्रशासन के विभिन्न इंजीनियरिंग विभागों ने एक ही दिन में 8 अलग-अलग टेंडर जारी हुए। चंडीगढ़ दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत तैयार किए गए कालका, मोहाली, अंब अंदौरा और आनंदपुर साहिब समेत चार आधुनिक रेलवे स्टेशनों को भी समर्पित किया जाएगा। प्रधानमंत्री चंडीगढ़ से इन स्टेशनों का वर्चुअल लोकार्पण करेंगे। 3 पॉइंट्स में जानें PM मोदी के दौरे को लेकर खास इंतजाम:-     एयर कंडीशनिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा: सबसे बड़े टेंट टेंडर के तहत कार्यक्रम स्थल पर करीब 6000 वर्ग मीटर का वाटरप्रूफ जर्मन हैंगर लगाया जाएगा। बारिश की संभावना को देखते हुए इसे तैयार किया जा रहा है, ताकि खराब मौसम में भी कार्यक्रम सुचारू रूप से आयोजित किया जा सके। पूरे पंडाल को ठंडा रखने के लिए 600 टन क्षमता का एयर कंडीशनिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा।     वाटर कूलर और 24 पोर्टेबल टॉयलेट लगाने की व्यवस्था: कार्यक्रम में आने वाले वीआईपी और प्रधानमंत्री के लिए एसी युक्त लाउंज, बैठक व्यवस्था, कारपेट, फर्नीचर और बैरिकेडिंग सहित अन्य इंतजाम किए जाएंगे। इसके अलावा 2200 सोफे, 300 कुर्सियां, 70 हजार वर्ग फीट कारपेट, 65 हजार वर्ग फीट बैरिकेडिंग, 20 वाटर कूलर और 24 पोर्टेबल टॉयलेट लगाने की व्यवस्था की जाएगी।     11 जनरेटर लगेंगे, 8 हाई-रेजोल्यूशन CCTV से सुरक्षा: कार्यक्रम के लिए बिजली की व्यवस्था भी पूरी तरह सुनिश्चित की जाएगी। इसके तहत 11 जनरेटर (125 केवीए), 28 जनरेटर (250 केवीए) और एक 500 केवीए डीजी सेट लगाया जाएगा।  सुरक्षा और सजावट के लिए 8 हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, एलईडी लाइट्स, 4000 रंगीन गमले, बैरिकेडिंग और फायर सेफ्टी के इंतजाम किए जाएंगे। सभी टेंडर शॉर्ट नोटिस पर जारी किए गए हैं। कुछ टेंडर दो-तीन दिन में पूरे हो जाएंगे, जबकि अन्य एक सप्ताह के भीतर फाइनल कर दिए जाएंगे। इसके बाद चुनी गई एजेंसियां तुरंत काम शुरू करेंगी। आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद रेलवे प्रवक्ता के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चंडीगढ़ दौरे की आधिकारिक सूचना अभी पीएमओ से आनी बाकी है। हालांकि, रेलवे ने अपने स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। इन चारों स्टेशनों के आधुनिकीकरण से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों ने  इन स्टेशनों पर चल रही तैयारियों का जायजा लिया। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर में 1300 से अधिक रेलवे स्टेशनों का चरणबद्ध तरीके से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। लोकल कल्चर-आर्किटेक्चर को बढ़ावा योजना की एक प्रमुख विशेषता स्थानीय संस्कृति और वास्तुकला को बढ़ावा देना भी है। इसी उद्देश्य से स्टेशनों के निर्माण में स्थानीय कला, विरासत और क्षेत्रीय पहचान को शामिल किया गया है, ताकि प्रत्येक स्टेशन अपने शहर और क्षेत्र की सांस्कृतिक छवि को दर्शा सके। ये स्टेशन केवल यात्रा के केंद्र नहीं होंगे, बल्कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए भी विकसित किए जा रहे हैं। अब तक 172 से अधिक स्टेशनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से अन्य स्टेशनों का भी लोकार्पण किया जाएगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चंडीगढ़ का पिछला दौरा 3 दिसंबर 2024 को हुआ था। उस दौरान उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में देश के तीन नए आपराधिक कानूनों के सफल क्रियान्वयन को राष्ट्र को समर्पित किया था। यदि प्रस्तावित कार्यक्रम को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो यह दौरा स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को जनता को समर्पित करने के लिहाज से चंडीगढ़ के लिए अहम माना जा रहा है। 

IND vs ENG: तीसरे T20 में भारत करेगा बड़े बदलाव? बिश्नोई OUT, प्रिंस यादव IN, वैभव सूर्यवंशी को मिल सकता है मौका

नॉटिंघम आयरलैंड दौर पर शर्मनाक हार झेलनी वाली भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में भी 0-1 से पीछे है. मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में आयोजित दूसरे टी20I में 190 रन बनाने के बावजूद मिली हार ने भारतीय टीम की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और प्लेइंग-11 के कॉम्बिनेशन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।  अब मंगलवार (7 जुलाई) को नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर होने वाले सीरीज के तीसरे टी20I मुकाबले में टीम मैनेजमेंट के सामने सही प्लेइंग-11 चुनने की बड़ी चुनौती होगी. पिछले मुकाबले में 60 रन लुटाने वाले लेग स्पिनर रवि बिश्नोई पर गाज गिर सकती है और उनकी जगह एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को मौका मिल सकता है. वहीं 15 साल के वैभव सूर्यवंशी से भी डेब्यू की नाकामी को पीछे छोड़कर बड़ी पारी की उम्मीद होगी. मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 10 बजे शुरू होगा।  दूसरे टी20I मुकाबले में रवि बिश्नोई का प्रदर्शन टीम इंडिया की हार की बड़ी वजहों में से एक रहा था. उन्होंने अपने चार ओवरों में बिना कोई विकेट लिए 60 रन लुटाए. इंग्लैंड की पारी का 17वां ओवर मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसमें बिश्नोई ने 29 रन लुटाकर मुकाबले का रुख पूरी तरह पलट दिया. अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती के रहते इंग्लिश परिस्थितियों में तीसरे स्पेशलिस्ट स्पिनर को खिलाने का फैसला टीम पर भारी पड़ा।  …तो प्रिंस यादव की होगी एंट्री अब ट्रेंट ब्रिज में रवि बिश्नोई का प्लेइंग-11 से बाहर होना लगभग तय माना जा रहा है. उनकी जगह एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को मौका दिया जा सकता है. अगर बिश्नोई को प्लेइंग-11 से बाहर किया जाता है तो प्रिंस यादव को मौका मिलने की संभावना है. गेंद को मूव कराने की उनकी क्षमता इंग्लिश परिस्थितियों में टीम इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकती है. प्रसिद्ध कृष्णा भी एक विकल्प हैं, लेकिन टी20 क्रिकेट में उनकी बैक ऑफ लेंथ गेंदों पर बड़े शॉट खेलना अपेक्षाकृत आसान रहा है. ऐसे में प्रिंस यादव को प्लेइंग-11 में शामिल किए जाने की संभावना ज्यादा लग रही है।  मैनचेस्टर में अर्शदीप सिंह ने तीन विकेट लेकर भारतीय टीम को मुकाबले में बनाए रखा था. उन्होंने अपने शुरुआती ओवर में ही फिल साल्ट और जोस बटलर को पवेलियन भेजकर इंग्लैंड को दो बड़े झटके दिए. हालांकि इसके बाद इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने उनके एक ओवर में 27 रन बटोरकर पलटवार किया. इंग्लैंड ने शुरुआती झटकों से उबरते हुए 191 रनों का लक्ष्य एक ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया. ऐसे में तीसरे मुकाबले में भारतीय गेंदबाजों के सामने सिर्फ विकेट लेने की नहीं, बल्कि डेथ ओवर्स में रन रोकने की भी बड़ी चुनौती होगी।  वैभव सूर्यवंशी उड़ाएंगे गर्दा! तीसरे टी20I में एक बार फिर सबसे ज्यादा नजरें 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर होंगी. वैभव अपने डेब्यू मुकाबले में 10 गेंदों पर 14 रन ही बना सके थे. हालांकि छोटी सी पारी में उन्होंने अपनी प्रतिभा और बेखौफ अंदाज की झलक जरूर दिखाई. वैभव ने जोफ्रा आर्चर और जोश टंग के खिलाफ छक्के जड़कर बता दिया कि उनके खेलने का अंदाज बदलने वाला नहीं है. अब इंटरनेशनल डेब्यू का दबाव खत्म हो चुका है. ऐसे में ट्रेंट ब्रिज की बैटिंग फ्रेंडली पिच पर वैभव के पास अपनी पहली बड़ी इंटरनेशनल पारी खेलने का शानदार मौका होगा।  इंग्लैंड दौरे पर भारतीय बल्लेबाजी में अगर किसी खिलाड़ी ने अपने स्वाभाविक अंदाज को बरकरार रखा है तो वह अभिषेक शर्मा हैं. उन्होंने पिछली दो पारियों में 59 और 43 रन बनाए हैं और दिलचस्प बात यह है कि दोनों इनिंग्स में उन्होंने 24-24 गेंदों का सामना किया. इंग्लैंड के गेंदबाज जहां अतिरिक्त उछाल, पिच से मिल रही मूवमेंट और गति में बदलाव से बाकी भारतीय बल्लेबाजों को परेशान कर रहे हैं, वहीं अभिषेक ने शुरू से ही आक्रामक क्रिकेट खेला है. वैभव और अभिषेक की विस्फोटक ओपनिंग जोड़ी अगर ट्रेंट ब्रिज में लंबी साझेदारी करती है तो इंग्लैंड के गेंदबाजों पर शुरुआती ओवरों में ही दबाव बनाया जा सकता है।  कप्तान श्रेयस अय्यर और ईशान किशन ने इस दौरे पर कुछ रन जरूर बनाए हैं, लेकिन दोनों बल्लेबाज अब तक इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण पर पूरी तरह हावी नहीं हो पाए हैं. भारतीय बल्लेबाज पिछले छह महीने में ज्यादातर सपाट पिचों पर खेले हैं. अब इंग्लैंड में उन्हें अतिरिक्त उछाल, सीम मूवमेंट और सैम करन जैसे गेंदबाजों की वैरिएशन के खिलाफ संघर्ष करना पड़ रहा है. तिलक वर्मा ने मैनचेस्टर में 11 गेंदों पर नाबाद 24 रनों की तेज पारी जरूर खेली थी, लेकिन बीच के ओवरों में इंग्लैंड के स्पिनर्स और धीमी गेंदों के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों को बेहतर रणनीति के साथ उतरना होगा।  श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम इंडिया अब तक चार टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुकी है, जिसमें उसे तीन में हार मिली. जबकि एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हुआ. आयरलैंड के खिलाफ भारत को 0-2 से सीरीज गंवानी पड़ी. इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ पहला टी20I बारिश के कारण धुल गया और दूसरे मुकाबले में भारत को चार विकेट से हार का सामना करना पड़ा. ऐसे में तीसरा टी20I सिर्फ सीरीज में वापसी के लिहाज से ही नहीं, बल्कि कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी बेहद अहम होने वाला है।  मुकाबले में भारत की संभावित प्लेइंग-11: अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, हर्षित राणा, अक्षर पटेल, प्रिंस यादव, अर्शदीप सिंह और वरुण चक्रवर्ती।  इंग्लैंड की प्लेइंग-11: फिल साल्ट, जोस बटलर (विकेटकीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, लियाम डॉसन, जोफ्रा आर्चर, आदिल राशिद और जोश टंग। 

हरियाणा में 10 जुलाई तक बारिश के आसार, सात जिलों में येलो अलर्ट जारी हुआ

 हिसार  प्रदेश में मौसम तेजी से बदल रहा है। रविवार शाम के बाद 11 जिलों में वर्षा हुई। कुछ जिलों में तेज वर्षा हुई तो कुछ में गर्मी से लोग परेशान रहे। हिसार में गर्मी के चलते विनोद नगर के 24 वर्षीय विक्की की मौत हो गई। पोस्टमार्टम में गर्मी से मौत की पुष्टि हुई है। वहीं मंगलवार को सात जिलों में तेज वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार जींद, यमुनानगर, भिवानी, अंबाला व झज्जर आदि जिलों में वर्षा हुई। इसके साथ ही आने वाले दिनों में भी तेज वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि आने वाले दिनों में वर्षा से तापमान में गिरावट हो सकती है। गर्मी के कारण विनोद नगर निवासी विक्की की रविवार रात को तबीयत बिगड़ गई थी। परिवार के लोग इसे अस्पताल ले गए। वहां पर इलाज के दौरान मौत हो गई। विक्की मजदूरी करता था। मानसून के आगे बढ़ने की संभावना चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा. मदन खीचड़ ने बताया कि मानसून टर्फ की उत्तरी सीमा जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार व भठिंडा तक बनी हुई है। अरब सागर में एक डिप्रेशन बनने से अनुकूल परिस्थितियों के कारण मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है। जिससे मानसूनी हवाओं और राजस्थान पर एक साईक्लोनिक सर्कुलेशन बनने से हरियाणा राज्य में 10 जुलाई तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने तथा ज्यादातर क्षेत्रों में बीच-बीच में हवाओं व गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। परंतु इस दौरान कुछ एक स्थानों पर तेज वर्षा हो सकती है। इससे दिन के तापमान में गिरावट तथा वातावरण में नमी की अधिकता बने रहने की संभावना है। यलो अलर्ट: पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, मेवात और पलवल। वर्षा (मिलीमीटर में)     करनाल : 16     गुरुग्राम : 38     भिवानी : 2.4     चरखी दादरी : 9     हिसार : 31     जींद : 26.5     कैथल : 8.5     सोनीपत : 1 तापमान (डिग्री सेल्सियस में) जिला न्यूनतम अधिकतम अंबाला 29 36.8 भिवानी 26.5 37 गुरुग्राम 27.4 36 हिसार 28.2 38.2 नारनौल 26.5 34.5 रोहतक 28.2 33.6 सिरसा 29 38.2  

योगी सरकार का बड़ा फैसला, ईवी खरीद पर रोड टैक्स शून्य और भारी आर्थिक राहत

लखनऊ यूपी में नए ई-वाहन (ईवी) खरीदने पर योगी सरकार ने बड़ी राहत दे दी है। अब ईवी खरीदने पर रोड टैक्स का नहीं देना होगा। ईवी पर 2.56 लाख रुपये तक का लाभ प्रदान किया जाएगा। कैबिनेट बैठक में सोमवार को वायु प्रदूषण से निपटने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एनसीआर क्षेत्र में परिवर्तन योजना लागू किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। योजना के तहत एनसीआर में बीएस-वन से बीएस-फोर तक के पुराने ट्रकों और बसों को स्क्रैप कर नई बीएस-सिक्स अथवा इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर वाहन स्वामियों को मोटरयान कर और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 10 वर्ष तक भारी छूट प्रदान की जाएगी। नए बीएस-सिक्स या इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर 100 फीसद रोड टैक्स माफ होगा। पुराने वाहनों पर 50 प्रतिशत की छूट वहीं पुराने/प्रयुक्त बीएस-सिक्स/ईवी वाहनों पर रोड टैक्स में 50 फीसद छूट दी जाएगी। यह छूट 10 वर्षों तक वैध रहेगी। नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रजिस्ट्रेशन शुल्क शत-प्रतिशत माफ होगा। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को विशेष प्रोत्साहन दिया है। डीजल-सीएनजी गाड़ियों पर पांच प्रतिशत ब्याज छूट और ईंधन वाउचर मिलेगा जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों पर गाड़ी की श्रेणी के अनुसार 64 हजार रुपये से 2.56 हजार रुपये तक का एकमुश्त लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा नई गाड़ी खरीदने पर ओईएम यानी वाहन कंपनियों की ओर से 8% की शुरुआती छूट भी मिलेगी। भारत सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए परिवर्तन योजना शुरू की है। यूपी सरकार ने अब इसे राज्य के एनसीआर जिलों में प्रभावी रूप से लागू करने का फैसला किया है। योजना का मकसद प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को चरणबद्ध ढंग से हटाना है। बस-ट्रक पर माफ होगा बकाया टैक्स यूपी एनसीआर में पंजीकृत बीएस-वन, टू, थ्री व फोर श्रेणी की बसों-ट्रकों पर यदि एक वर्ष से अधिक का टैक्स बकाया है तो उसे भी खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए पुराने वाहन को अधिकृत रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (आरवीएसएफ) के जरिए स्क्रैप कराना होगा और उसके बाद ही नए वाहन का पंजीकरण कराना होगा। वाहन स्वामियों को अपने पुराने वाहन आरवीएसएफ केंद्र पर जमा कर स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट लेना होगा। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर नई गाड़ी खरीदते समय रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में छूट मिलेगी। बकाया टैक्स माफी का लाभ भी इसी प्रक्रिया से मिलेगा। डाटा सेंटर नीति में बुंदेलखंड और पूर्वांचल को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दी गई। यह नीति 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो गई थी, इसलिए सरकार नई उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2026 लेकर आई है। डाटा सेंटर नीति में बुंदेलखंड और पूर्वांचल को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्रीन, एआई-रेडी और वैश्विक प्रतिस्पर्धी डाटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। नीति के तहत दो गीगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने और दो लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि नई नीति में जीपीयू आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रस्तावित किए गए हैं। टियर/रेटिंग-3 व 4 वाले डाटा सेंटर्स को प्रोत्साहन, एआई कंप्यूट बूस्टर प्रोत्साहन तथा ग्रीन एवं सस्टेनेबल परिचालन प्रोत्साहन जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। 50 हजार को रोजगार मिलने की संभावना डाटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में विश्वस्तरीय डाटा सेंटर इकोसिस्टम विकसित होगा। डाटा सेंटर इकाइयों के आसपास सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी आधारित अन्य इकाइयों की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रस्तावित नीति से 7500 लोगों को दीर्घकालीन प्रत्यक्ष रोजगार और निर्माण अवधि में लगभग 50 हजार लोगों को अल्पकालीन प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। सुनियोजित नीति से मिले ठोस परिणाम मंत्री ने बताया कि योगी सरकार ने जनवरी 2021 में उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2021 लागू की थी, जिसे बाद में 7 नवंबर 2022 को संशोधित किया गया। उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2021 (प्रथम संशोधन-2022) के तहत लगभग 21,343 करोड़ रुपये के निवेश से 6 डाटा सेंटर पार्क तथा 40 मेगावाट से कम क्षमता वाली दो डाटा सेंटर इकाइयों में से 7 परियोजनाएं परिचालन में आ चुकी हैं। 210 करोड़ की सब्सिडी दी गई वहीं, प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है। योगी सरकार ने 210 करोड़ रुपये से अधिक सब्सिडी के रूप में ईवी वाहन मालिकों को वितरित किए हैं। कहा कि खाड़ी देशों में गंभीर हालात और तेल संकट के बीच ईवी वाहनों की तरफ रुख करना ही बेहतर है। ईवी खरीद सब्सिडी योजना शानदार सहयोग दे रही है। इससे पेट्रोल-डीजल पर लोगों की निर्भरता कम होगी और बेहतर पर्यावरण से लोगों का स्वास्थ्य अच्छा होगा।

रसोई में रोटियां गिनकर क्यों नहीं बनानी चाहिए? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

 हमारे भारतीय समाज में रसोई घर को सिर्फ खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि घर की खुशहाली और बरकत का केंद्र माना जाता है. अक्सर आपने घर के बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि रसोई में रोटियां गिनकर नहीं बनानी चाहिए. कुछ लोग इसे केवल एक पुरानी सोच या अंधविश्वास मानकर टाल देते हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे आज भी पूरी शिद्दत से निभाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोटियां गिनकर बनाने की मनाही के पीछे सिर्फ पौराणिक मान्यताएं या वास्तु शास्त्र ही नहीं, बल्कि एक गहरा व्यावहारिक और स्वास्थ्य से जुड़ा तर्क भी है? आइए जानते हैं कि रोटियां गिनकर बनाना आपकी सेहत, रिश्तों और घर की समृद्धि को किस तरह प्रभावित करता है. वास्तु शास्त्र का दृष्टिकोण बरकत की कमी वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम रोटियां गिनकर बनाते हैं, तो हम अनजाने में अपने घर की बरकत को सीमित कर देते हैं. भोजन को मां अन्नपूर्णा का रूप माना जाता है, और उसे तौलना या गिनना उनका अनादर माना जाता है. ग्रहों का प्रभाव: राहु का दोष रसोई को मंगल का स्थान माना जाता है. मान्यता है कि गिन-गिनकर रोटियां बनाने से कुंडली में राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है, जिससे घर में मानसिक तनाव और बिना वजह के खर्चे बढ़ते हैं. मेहमान का सत्कार सनातन परंपरा में अतिथि देवो भव की भावना है. अगर रोटियां बिल्कुल नाप-तोलकर बनाई जाएं और अचानक कोई मेहमान आ जाए, तो उसे सम्मानपूर्वक भोजन नहीं कराया जा सकता, जिससे बुध और गुरु ग्रह कमजोर होते हैं. वैज्ञानिक कारण (Scientific Reasons) भूख और संतुष्टि का नियम इंसान की भूख हर दिन एक जैसी नहीं होती. कभी काम के तनाव में भूख कम लगती है, तो कभी स्वाद या ज्यादा शारीरिक श्रम के कारण व्यक्ति एक-दो रोटी ज्यादा खा लेता है. अगर घर में सख्त गिनती से रोटियां बनेंगी, तो परिवार के किसी सदस्य को अपनी भूख मारनी पड़ सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. सकारात्मक ऊर्जा की कमी जो महिला या खाना बनाने वाला व्यक्ति लगातार गिन-गिनकर रोटियां बनाता है, उसकी मानसिकता सीमित या कंजूसी वाली होने लगती है. इसका सीधा असर भोजन के स्वाद और रसोई के माहौल (Vibe) पर पड़ता है. वास्तु के अनुसार कितनी रोटियां ज्यादा बनाएं? पहली रोटी (गाय के लिए): पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालनी चाहिए, इससे घर के सभी वास्तु दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है. आखिरी रोटी (कुत्ते के लिए): रसोई में बनने वाली अंतिम रोटी कुत्ते के लिए होनी चाहिए, जिससे राहु, केतु और शनि शांत रहते हैं. अतिरिक्त रोटियां: 2-3 रोटियां हमेशा अतिरिक्त होनी चाहिए ताकि कोई भूखा जीव, पक्षी या अचानक आया मेहमान खाली हाथ न लौटे.

अस्मिता लीग साउथ ज़ोन कैनोइंग-कयाकिंग चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश बना ओवरऑल चैंपियन

अस्मिता लीग साउथ ज़ोन कैनोइंग एवं कयाकिंग चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश रहा ओवरऑल चैंपियन मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के खिलाड़ियों ने जीते 38 पदक 16 स्वर्ण, 17 रजत एवं 5 कांस्य पदकों के साथ प्रदेश ने किया शानदार प्रदर्शन भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के खिलाड़ियों ने 4 से 5 जुलाई 2026 तक आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित गंबरमगेड्डा रिजर्वायर में आयोजित अस्मिता लीग साउथ ज़ोन कैनोइंग एवं कयाकिंग चैंपियनशिप-2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश को ओवरऑल चैंपियन बनने का गौरव दिलाया। प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में कुल 38 पदक अर्जित किए, जिनमें 16 स्वर्ण, 17 रजत एवं 5 कांस्य पदक शामिल हैं। पदकों की शानदार बरसात, प्रदेश ने किया शीर्ष स्थान हासिल चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश ने सर्वाधिक 38 पदकों के साथ पदक तालिका में प्रथम स्थान प्राप्त किया। खिलाड़ियों के उत्कृष्ट तकनीकी कौशल, अनुशासित प्रदर्शन और निरंतर अभ्यास का परिणाम रहा कि प्रदेश ने अन्य राज्यों को पीछे छोड़ते हुए ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी में उपलब्ध उच्च स्तरीय प्रशिक्षण व्यवस्था तथा खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की बढ़ती सशक्त पहचान अस्मिता लीग जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ओवरऑल चैंपियन बनने की यह उपलब्धि मध्यप्रदेश में खेल प्रतिभाओं के सुनियोजित विकास और खेल अधोसंरचना की गुणवत्ता को दर्शाती है। प्रदेश के खिलाड़ी निरंतर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश को नई पहचान दिला रहे हैं। खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इस शानदार उपलब्धि पर मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं सहयोगी स्टाफ को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है, जिसका परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर लगातार मिल रही सफलताओं के रूप में सामने आ रहा है। युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। यह सफलता सिद्ध करती है कि समर्पण, अनुशासन, उत्कृष्ट प्रशिक्षण और निरंतर प्रयास के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की जा सकती हैं।