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बिहार की 48 वर्षीय महिला की अम्बेडकर अस्पताल में सफल बाईपास सर्जरी

 रायपुर पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में बिहार के मधुबनी जिले की 48 वर्षीय महिला की सफल कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (CABG) की गई। मरीज के हृदय की तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ट्रिपल वेसल डिजीज (Triple Vessel Disease/TVD) कहा जाता है। साथ ही मरीज के हृदय की पंपिंग क्षमता लगभग 40 प्रतिशत थी। विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. कृष्णकांत साहू एवं उनकी टीम ने मरीज की बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (Beating Heart CABG) सफलतापूर्वक की। इस सर्जरी में बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी (Mammary Artery) का उपयोग किया गया। सामान्यतः आर्टेरियल ग्राफ्ट को लंबे समय तक प्रभावी रहने वाला ग्राफ्ट माना जाता है। सीने की हड्डी को खोलकर गोल्ड स्टैंडर्ड तकनीक से सर्जरी मरीज की सर्जरी मिडलाइन स्टर्नोटोमी (Midline Sternotomy) तकनीक से की गई। इसमें सीने की मध्य हड्डी यानी स्टर्नम को सावधानीपूर्वक खोलकर हृदय तक पहुंच बनाई जाती है। कोरोनरी बाईपास सर्जरी में यह एक स्थापित एवं विश्वसनीय ऑपरेटिव तकनीक है, जिसे गोल्ड स्टैंडर्ड तकनीक के रूप में जाना जाता है। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी भी अच्छी रही। ऑपरेशन के दिन ही होश में आने के बाद मरीज ने शाम को हल्का नाश्ता किया और ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही चलना-फिरना शुरू कर दिया। अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा है। मधुबनी से दरभंगा और फिर रायपुर पहुंची मरीज मरीज ने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले उन्हें पहली बार सीने में दर्द हुआ था। उन्होंने मधुबनी के एक अस्पताल में चिकित्सकीय परामर्श लिया, लेकिन वहां हृदय संबंधी विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें गैस एवं एसिडिटी की दवाएं देकर घर भेज दिया गया। कुछ दिनों बाद दोबारा सीने में दर्द होने पर परिजन उन्हें दरभंगा के एक बड़े अस्पताल में ले गए। वहां एंजियोग्राफी कराने पर पता चला कि हृदय की तीनों प्रमुख नसों में ब्लॉकेज है और डॉक्टरों ने उन्हें बाईपास सर्जरी कराने की सलाह दी। परिजन पहले पटना में सर्जरी कराने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान रायपुर में रहने वाले उनके एक रिश्तेदार ने उन्हें अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट सर्जरी विभाग के बारे में जानकारी दी। इसके बाद परिजन एंजियोग्राफी की सीडी लेकर अम्बेडकर अस्पताल पहुंचे और डॉ. कृष्णकांत साहू से परामर्श लिया। डॉ. साहू ने बताया कि मरीज की बाईपास सर्जरी यहां संभव है, लेकिन चूंकि मरीज बिहार की निवासी हैं, इसलिए बिहार के आयुष्मान कार्ड के आधार पर छत्तीसगढ़ में सर्जरी का लाभ मिल सकेगा या नहीं, इसकी जानकारी लेना आवश्यक था। आयुष्मान योजना कार्यालय से जानकारी लेने पर पुष्टि हुई कि बिहार के आयुष्मान कार्ड के आधार पर भी मरीज की सर्जरी अम्बेडकर अस्पताल में की जा सकती है। इसके बाद मरीज को भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। ब्लड शुगर था 500 mg/dL से अधिक, पहले किया गया नियंत्रित मरीज के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती उनका अत्यधिक अनियंत्रित ब्लड शुगर था। अस्पताल में भर्ती किए जाने के समय उनका ब्लड शुगर 500 mg/dL से भी अधिक था। ऐसी स्थिति में तत्काल बाईपास सर्जरी करना जोखिमपूर्ण हो सकता था। चिकित्सकीय टीम ने पहले मरीज के ब्लड शुगर को नियंत्रित किया और उनकी स्थिति को सर्जरी के लिए उपयुक्त बनाने के बाद ही बाईपास सर्जरी की। अब कम उम्र में महिलाओं में भी बढ़ रहा है हृदय रोग का खतरा डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि सामान्यतः पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) का जोखिम कम माना जाता है और महिलाओं में यह बीमारी प्रायः अधिक उम्र में सामने आती है। हालांकि, अनियंत्रित मधुमेह, मोटापा, तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन, पारिवारिक इतिहास, बढ़ता वजन, निष्क्रिय जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसी स्थितियां महिलाओं में कम उम्र में भी हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को भी सीने में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक थकान या अन्य हृदय संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। छत्तीसगढ़ के साथ पड़ोसी राज्यों के मरीजों का भी बढ़ा भरोसा अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में ओपन हार्ट सर्जरी, कोरोनरी बाईपास सर्जरी, चेस्ट सर्जरी एवं विभिन्न वैस्कुलर सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। विभाग में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जटिल हृदय रोगों की सर्जरी की जा रही है। पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं अम्बेडकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर के अनुसार, यह हमारे शासकीय चिकित्सा संस्थान के लिए गौरव की बात है कि अब छत्तीसगढ़ के साथ-साथ बिहार सहित आसपास के राज्यों से भी मरीज जटिल हृदय एवं ओपन हार्ट सर्जरी के लिए अम्बेडकर अस्पताल का रुख कर रहे हैं। यह मरीजों और उनके परिजनों के बीच अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं के प्रति समय के साथ बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

हेग कोर्ट के फैसले पर भारत का करारा जवाब! कहा- कोर्ट का कोई अधिकार नहीं, आदेश मानने से इनकार

नई दिल्ली  भारत के निजी मामले में दखलअंदाजी करने की कोशिश कर रही अंतरराष्ट्रीय संस्था को भारत ने उसकी हैसियत याद दिला दी। इस संस्था ने सिंधु समझौते पर पाकिस्तान के पक्ष में फैसला दिया था। संस्था को लगा कि इससे भारत के ऊपर दबाव बनेगा, लेकिन भारत ने उस अंतरराष्ट्रीय संस्था को सीधे ठेंगा दिखा दिया और उसके किसी भी आदेश को मानने से साफ मना कर दिया। इस संस्था का नाम ' कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ' (CoA) है और इसका ऑफिस नीदरलैंड के सुंदर और बेहद अहम शहर द हेग में है। संस्था को ही बता दिया गैर कानूनी भारत ने सोमवार को 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' के फैसले को मानने से मना कर दिया। संस्था का फैसला सिंधु जल संधि से जुड़ा था। इतना ही नहीं भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन 'गैर-कानूनी तरीके से गठित तक बता दिया और कहा कि संस्था के फैसले का भारत के संप्रभु फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ता। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बयान में कहा कि 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' का गठन वर्ल्ड बैंक ने किया था। ये पाकिस्तान के साथ भारत की 1960 की संधि की शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन था। कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का निर्देश खारिज इन घटनाक्रमों से साफ है कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद फिर बढ़ गया। दरअसल, हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने कहा था कि भारत सिंधु जल संधि को एकतरफा तौर पर न तो रोक सकता है और न ही खत्म कर सकता है। भारत ने इस फैसले को सीधे तौर पर खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इस कोर्ट को कभी मान्यता नहीं दी है। इसलिए भारत न तो इसकी कार्यवाही में शामिल हुआ और न ही इसके पहले दिए गए किसी फैसले को स्वीकार किया है। सिंधु जल संधि अस्थायी तौर पर स्थगित भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक कोर्ट का मौजूदा या भविष्य में आने वाला कोई भी फैसला भारत की ओर से चलाए जा रहे प्रोजेक्ट या उसके फैसलों पर असर नहीं डालेगा। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि भारत का सिंधु जल संधि को अबेयंस में रखने का फैसला लागू है। यानी भारत ने संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियों को फिलहाल रोक रखा है। मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने इस फैसले पर कायम है। दरअसल, अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। भारत का कहना रहा है कि पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंधों के लिए आतंकवाद और पानी के मुद्दे को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। अदालत ने रतले प्रोजेक्ट पर भी टिप्पणी की मध्यस्थता अदालत ने जम्मू-कश्मीर में बन रहे रतले जलविद्युत संयंत्र से जुड़े कुछ निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक लगाने का निर्देश भी दिया है। अदालत का कहना है कि सिंधु जल संधि के तहत किसी एक देश को अपने स्तर पर संधि को रोकने, निलंबित करने या खत्म करने का अधिकार नहीं है। वहीं भारत इस पूरे निष्कर्ष को मानने से इनकार कर रहा है। भारत का तर्क है कि जिस संस्था के अधिकार क्षेत्र को ही वह स्वीकार नहीं करता, उसके फैसले उसके लिए बाध्यकारी नहीं हो सकते। सिंधु जल संधि: आखिर विवाद है किस बात पर? भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। इसके तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के अधिकार और जिम्मेदारियां तय की गई थीं। हाल के वर्षों में इस संधि को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। भारत ने संधि को स्थगित रखने का फैसला लिया है जबकि पाकिस्तान लगातार संधि को लागू रखने की मांग करता रहा है। इसी विवाद के बीच पाकिस्तान की पहल पर मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू हुई। भारत ने इस प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार किया और अपनी अलग आपत्तियां दर्ज कराईं। भारत का रुख साफ: संधि पर हमारा फैसला कायम विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में दोहराया कि भारत इस तथाकथित मध्यस्थता संस्था के किसी भी फैसले को मान्यता नहीं देता। भारत के मुताबिक, इस संस्था का गठन ही संधि के प्रावधानों के खिलाफ है। इसलिए उसके द्वारा सुनाया गया कोई भी फैसला भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है। इस तरह सिंधु जल संधि को लेकर अब दो बिल्कुल अलग दावे सामने हैं। हेग की मध्यस्थता अदालत संधि को लागू मान रही है जबकि भारत अदालत के अधिकार क्षेत्र और उसके फैसले- दोनों को ही खारिज कर रहा है। इस विवाद का असर भारत-पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में चल रही जलविद्युत परियोजनाओं पर भी देखने को मिल सकता है। सिंधु जल संधि: भारत को पाकिस्तान से दोबारा बातचीत की जरूरत क्यों पड़ी?  समझिए विवाद की पूरी कहानी भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को ‘स्थगित’ (In Abeyance) रखने का फैसला अभी तक बरकरार रखा है। पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान की ओर से कई तीखी और राजनीतिक बयानबाज़ियां सामने आई हैं। पाकिस्तान ने पिछले महीने इस संधि पर एक तथाकथित ‘अंतरराष्ट्रीय’ कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की। इसमें वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों और प्रमुख नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर सिंधु नदी बेसिन की नदियों के जल प्रवाह में किसी तरह की रुकावट डाली गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और युद्ध जैसी हालात भी पैदा हो सकते हैं। आर्बिट्रेशन कोर्ट ने बयान में क्या कहा था? कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सोमवार को जारी अपने बयान में कहा था कि भारत ने जिस आधार पर संधि को स्थगित किया है, वह संधि को रोकने या खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सिंधु जल संधि अभी भी पूरी तरह लागू है और भारत को संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। भारत ने इस दावे को भी स्वीकार नहीं किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कोर्ट जिस तरह से बनाया गया है, वह खुद सिंधु जल संधि की शर्तों का उल्लंघन है। इसलिए भारत के लिए इसके फैसले की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। पाकिस्तान संधि लागू करने की लगा रहा गुहार भारत का कहना है कि कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के पास इन मामलों … Read more

एक फ्रेम में मोदी, जिनपिंग और पुतिन! वहीं साइलेंट होकर अपनी जगह पहुंचे शहबाज शरीफ

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हैं. वह शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ के शिखर सम्मेलन में शामिल हुए. सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत संगठन के कई नेता पहुंचे. इसी दौरान एक ऐसा पल सामने आया, जिसमें पीएम मोदी ने जिनपिंग और पुतिन से एक साथ गर्मजोशी से मुलाकात की, जबकि शहबाज शरीफ उनके बगल से चुपचाप गुजरते नजर आए।  दरअसल, एससीओ के सभी नेता एक साथ जुट रहे थे. इसी दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ सामने से आते दिखाई दिए. सामने पहुंचते ही शी जिनपिंग ने पीएम मोदी की तरफ हाथ बढ़ाया और दोनों नेताओं ने हैंडशेक किया. इसी दौरान पीएम मोदी ने पुतिन के हाथ पर भी गर्मजोशी से हाथ रखा. कुछ सेकेंड के इस पल में पीएम मोदी, जिनपिंग और पुतिन तीनों एक साथ नजर आए।  इसके बाद शी जिनपिंग आगे बढ़कर मंच की तरफ चले गए. लेकिन पीएम मोदी और पुतिन की बातचीत कुछ देर और जारी रही. दोनों नेता एक-दूसरे से गप-शप करते दिखाई दिए. इसके बाद पुतिन एक करीबी दोस्त की तरह पीएम मोदी को मंच तक ले जाते नजर आए. इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी की पीठ पर हाथ भी रखा. मंच तक पहुंचने के बाद पुतिन अपने स्थान की तरफ बढ़ गए।  इसी दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी अपने स्थान की तरफ जाते दिखाई दिए. वीडियो में वह पीएम मोदी, जिनपिंग और पुतिन के पास से शांत तरीके से आगे बढ़ते नजर आते हैं. जब तीनों नेताओं के आसपास लोगों की भीड़ जुटी थी, उस वक्त शहबाज शरीफ उनके पीछे से आगे बढ़ते दिखाई दिए।  जिनपिंग के साथ मिलाया हाथ  इस घटना से जुड़ी अंदर की भी तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिसमें वो जिनपिंग के साथ एक दोस्ताना अंदाज में नजर आ रहे हैं और दोनों नेता हाथ मिलाते हुए साफ-साफ दिख रहे हैं।  पुतिन-मोदी की मुलाकात रही सुर्खियों में  इससे पहले सोमवार को पीएम मोदी ने यहीं पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात थी. यहां पर दोनों देशों के नेताओं ने एक दूसरे को शुभकामना दी और आने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में पुतिन ने पहुंचने की बात भी कही. इसके अलावा भारत-रूस के सालाना समिट में भी एक बार फिर पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात होने वाली है. इन सबके साथ ही प्रधानमंत्री ने रूसी राष्ट्रपति से यूक्रेन युद्ध को लेकर भी चर्चा की और कहा कि मानवता के हित में युद्ध का अंत होना चाहिए।  एससीओ सम्मेलन से पीएम मोदी ने नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर कीं. इन तस्वीरों में शहबाज शरीफ रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बगल में खड़े दिखाई दिए. वहीं पीएम मोदी दूसरी तस्वीर में पुतिन के दोस्त और बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच खड़े नजर आए।  बिश्केक में सामने आया यह पूरा दिलचस्प वाकया इसलिए भी दिलचस्प रहा क्योंकि एक ही मंच पर पीएम मोदी, जिनपिंग और पुतिन की मौजूदगी पर ग्लोबल मीडिया की नजर रही. वहीं, इसी दौरान शहबाज शरीफ का चुपचाप आगे बढ़ते हुए दिखना वीडियो का अलग ही हिस्सा बन गया। 

झारखंड में बारिश का कहर, सोन और कोयल नदी उफान पर, गांवों में बढ़ा खतरा

रांची  झारखंड में मानसून की सक्रियता के बीच सोमवार सुबह से राजधानी रांची में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कहीं घरों में पानी घुस गया है तो कहीं पुल-पुलियों के ऊपर से पानी का तेज बहाव देखने को मिल रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश से जलजमाव मेदिनीनगर समेत पूरे पलामू में सोमवार से रिमझिम बारिश जारी है। कई सड़कों पर जलजमाव से आम लोगों की परेशानी बढ़ी है। ग्रामीण सड़कों पर बढ़ा दबाव कई प्रखंडों में ग्रामीण सड़क और पुलिया पर पानी का दबाव बढ़ गया है। आवागमन प्रभावित होने की आशंका है। सोन नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा अपस्ट्रीम के बराज और जलाशयों से करीब 2 लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी सोन नदी में पहुंचने के बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। हुसैनाबाद में प्रशासन का अलर्ट नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों को प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है। कई गांवों में कटाव जारी सोनपुरवा, देवरी खुर्द, देवरी कला, बुधुआ, बड़ेपुर और दंगवार समेत कई गांवों में सोन नदी के किनारे कटाव जारी है। तटबंध निर्माण की मांग कटाव से परेशान ग्रामीण लंबे समय से तटबंध निर्माण की मांग कर रहे हैं। ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। नदी के बीच खेती करने वालों को सलाह सोन नदी के बालू के टीलों पर किसान परवल, खीरा समेत मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं। कुछ लोग मवेशी भी रखते हैं। सुरक्षित स्थानों पर लौटने की अपील जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नदी के बीच और किनारे रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर लौटने की सलाह दी है। मलय डैम पर भी बढ़ा पानी सतबरवा में मलय डैम का स्पीलवे मंगलवार सुबह ओवरफ्लो के करीब पहुंच गया। कोयल नदी में बाढ़ की स्थिति लगातार बारिश के कारण कोयल नदी में भी बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

एनएचएआई की निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं की ने की विस्तृत समीक्षा

भोपाल  लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने मंगलवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा प्रदेश में किए जा रहे निर्माण कार्यों तथा भविष्य के लिए प्रस्तावित वृहद सड़क परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में एनएचएआई के अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से वर्तमान में प्रगतिरत परियोजनाओं की स्थिति तथा प्रस्तावित नई परियोजनाओं की कार्ययोजना की जानकारी दी। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव, सड़क सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता तथा वर्षाकाल के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री  सिंह ने भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तथा उज्जैन-झालावाड़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण इन वृहद सड़क परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। संबंधित स्तरों पर सभी आवश्यक कार्रवाई तेजी से पूरी की जाए। जबलपुर रिंग रोड के चार पैकेज दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश मंत्री  सिंह ने बैठक में जबलपुर रिंग रोड के निर्माण कार्य की प्रगति की भी समीक्षा की गई। रिंग रोड का निर्माण कुल पाँच पैकेजों में किया जा रहा है। इनमें चार पैकेजों में कार्य की प्रगति संतोषजनक पाई गई, जबकि पाँचवें पैकेज में अपेक्षित गति से कार्य नहीं होने पर कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। मंत्री  सिंह ने चार पैकेजों का कार्य दिसंबर 2026 तक तथा पाँचवें पैकेज का कार्य जून 2027 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिससे संपूर्ण जबलपुर रिंग रोड का निर्माण निर्धारित समय-सीमा में पूरा हो सके। शहपुरा (भिटौनी) टोल पर अस्थायी रूप से बंद होगा टोल संग्रह भोपाल-जबलपुर मार्ग पर शाहपुर रेलवे ब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के कारण यातायात को डायवर्ट किया जा रहा है। इसके चलते शहपुरा स्थित टोल पर लिए जा रहे टोल को लेकर स्थानीय समुदाय में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। मंत्री  सिंह ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए शहपुरा (भिटौनी) टोल नाके पर अस्थायी रूप से टोल संग्रह बंद करने के निर्देश दिए। राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव और गुणवत्ता पर विशेष जोर एनएचएआई के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि प्राधिकरण के सभी राष्ट्रीय राजमार्ग किसी न किसी अनुबंध के अंतर्गत संधारित किए जा रहे हैं। जिन सड़कों की परफॉर्मेंस गारंटी अवधि समाप्त हो चुकी है अथवा जिनके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया चल रही है, उनके रखरखाव के लिए शॉर्ट टर्म मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट तथा लॉन्ग टर्म मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से मरम्मत एवं संधारण कार्य कराया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि वर्षाकाल के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। मंत्री  सिंह ने निर्देश दिए कि प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता और रखरखाव के स्तर को बेहतर बनाया जाए तथा क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत में किसी भी प्रकार की देरी नहीं हो। उन्होंने नई प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं से संबंधित प्रक्रियाओं को भी गति देने के निर्देश दिए। जबलपुर-दमोह मार्ग की शीघ्र मरम्मत के निर्देश मंत्री  सिंह ने जबलपुर-दमोह मार्ग पर आवश्यक मरम्मत कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने उज्जैन-गरोठ मार्ग के निर्माण में सामने आई गुणवत्ता संबंधी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने तथा निर्माण गुणवत्ता की जाँच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री  सिंह ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास केवल नई सड़क परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। निर्माण की गुणवत्ता, समयबद्धता, नियमित रखरखाव और सड़क सुरक्षा पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को इन सभी विषयों पर सतत निगरानी रखते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। 

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से भटगांव विधानसभा को बड़ी सौगात, बुंदिया और बड़सरा में खुलेंगे नए धान उपार्जन केंद्र

 रायपुर महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों से भटगांव विधानसभा क्षेत्र के किसानों को बड़ी सौगात मिली है। सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड के ग्राम बुंदिया एवं बड़सरा में नवीन धान उपार्जन केंद्र खोलने की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस संबंध में विधिवत आदेश जारी कर दिया गया है।  क्षेत्र के किसानों द्वारा लंबे समय से नए धान उपार्जन केंद्र खोले जाने की मांग की जा रही थी। भटगांव विधानसभा क्षेत्र के भ्रमण के दौरान ग्रामीणों एवं किसानों ने मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े को अपनी समस्या से अवगत कराया था। किसानों ने बताया था कि वर्तमान में दूर स्थित उपार्जन केंद्रों तक धान ले जाने में उन्हें अतिरिक्त समय और परिवहन व्यय वहन करना पड़ता है।  किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयाल दास बघेल को पत्र लिखकर बुंदिया एवं बड़सरा में नवीन धान उपार्जन केंद्रों की स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया था। मंत्री के प्रयासों के फलस्वरूप शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 एवं आगामी वर्षों के लिए दोनों केंद्रों की स्थापना को मंजूरी दी गई है। ग्राम बुंदिया में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित बतरा के अंतर्गत तथा ग्राम बड़सरा में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित शिवप्रसादनगर के अंतर्गत नवीन धान उपार्जन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। किसानों को मिलेगी बड़ी राहत  नए धान उपार्जन केंद्रों के शुरू होने से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर-दराज के केंद्रों तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे परिवहन, ट्रैक्टर भाड़े और अन्य खर्चों में कमी आएगी तथा किसानों के समय और श्रम की बचत होगी। स्थानीय स्तर पर धान की तुलाई एवं उपार्जन की सुविधा मिलने से खरीदी प्रक्रिया भी अधिक सुगम और सुविधाजनक होगी।  नवीन धान उपार्जन केंद्रों की स्वीकृति से क्षेत्र के किसानों एवं ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है। किसानों ने मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नजदीक ही धान खरीदी केंद्र उपलब्ध होने से उन्हें अपनी उपज बेचने में बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने इस निर्णय को क्षेत्र के अन्नदाताओं के हित में महत्वपूर्ण पहल बताया।

पुलिस मुख्‍यालय में हुआ राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन

भोपाल  पुलिस मुख्यालय में सितंबर माह के प्रथम कार्य दिवस 01 सितंबर, मंगलवार को राष्ट्रगान जन गण मन एवं राष्ट्रगीत वंदे मातरम का सामूहिक गायन हुआ। इस अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्‍तव,  अनिल कुमार गुप्‍ता, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक  योगेश चौधरी,  डी. निवास वर्मा,  सोलोमन यश कुमार मिंज सहित पुलिस मुख्यालय के अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारियों ने तकनीकी वस्त्र मिशन के संबंध में दिया प्रस्तुतिकरण

रायपुर  मुख्य सचिव  विकासशील ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत राज्य शासन के ग्रामोद्योग विभाग एवं अन्य विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे राज्य में टेक्सटाईल उद्योग की संभावनाओं के लिए व्यापक कार्ययोजना बनायें। उन्होंने कहा कि तकनीकी वस्त्र उद्योग के लिए प्रदेश में शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास के लिए शैक्षणिक एवं तकनीकी शिक्षण संस्थाओं से आवश्यक सहयोग लेकर कार्य करें। बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारियों ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत शिक्षा, प्रशिक्षण, कौशल विकास, बाजार विकास, अनुसंधान, नवाचार और विकास के संबंध में विस्तार से प्रस्तुतिकरण प्रस्तुत किया। बैठक में एग्रो टेक्सटाईल, मेडिकल टेक्सटाईल, कंन्स्ट्रक्शन टेक्सटाईल, स्मार्ट टेक्सटाईल, स्पोर्टस होम एवं क्लाथ के संबंध में व्यापक चर्चा हुई।  बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव  राजेश सिंह राणा सहित उद्योग एवं वाणिज्य, तकनीकी शिक्षा, एनआईटी एवं कौशल विकास, उच्च शिक्षा एवं विश्वविद्यालय के तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।

भाषाएं जोड़ने का माध्यम हैं, तोड़ने का नहीं

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति और संपदा हैं। उनकी जिज्ञासा, ज्ञान, परिश्रम, अनुसंधान एवं नवाचार की क्षमता ही भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। वर्ष 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी पूर्ण करेगा, तब भारत कैसा होगा, यह आज की युवा पीढ़ी के ज्ञान, परिश्रम और संकल्प से तय होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। मंत्री  परमार मंगलवार को भोपाल स्थित रविन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागृह में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) भोपाल में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित अभिमुखीकरण समारोह-2026 ‘दीक्षारंभ’ के उद्घाटन सत्र में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आईआईआईटी भोपाल में चयनित सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। जिज्ञासा को अनुसंधान और समाधान से जोड़ें मंत्री  परमार ने विद्यार्थियों से कहा कि उनके मन में निरंतर जिज्ञासा बनी रहनी चाहिए। जिज्ञासा ही ज्ञान की पहली सीढ़ी है और ज्ञान को अनुसंधान एवं नवाचार से जोड़कर ही देश की समस्याओं के प्रभावी समाधान खोजे जा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी प्रतिभा और तकनीकी दक्षता का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के विकास के लिए करें। मंत्री  परमार ने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार, उद्योग और समाज के अनेक क्षेत्रों को प्रभावित करेगी। विद्यार्थियों को इन परिवर्तनों को समझते हुए तकनीकी ज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में स्वयं को निरंतर तैयार करना होगा। आईआईआईटी भोपाल विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार का उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। 2047 का भारत आज की युवा पीढ़ी तय करेगी मंत्री  परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने पर वर्ष 2047 में भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने खड़ा हो – इसके लिए आज से ही मजबूत आधार तैयार करना होगा। आज की युवा पीढ़ी ही 2047 के भारत का निर्माण करेगी। राष्ट्र निर्माण के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि परिश्रम, अनुशासन, जिम्मेदारी, संस्कार और कर्तव्यबोध भी आवश्यक हैं। मंत्री  परमार ने विद्यार्थियों से कहा कि वे ऐसे नागरिक बनें, जिनके ज्ञान और आचरण से देश का सम्मान बढ़े। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विश्व पटल पर भारत का सम्मान और प्रतिष्ठा और अधिक बढ़े, इसकी जिम्मेदारी युवा पीढ़ी के कंधों पर है। विद्यार्थियों का प्रत्येक सकारात्मक प्रयास राष्ट्र की प्रगति में योगदान देगा। भाषाएं जोड़ने का माध्यम हैं, तोड़ने का नहीं मंत्री  परमार ने भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा लोगों को जोड़ने का माध्यम है, तोड़ने का नहीं। भारत की भाषाई विविधता हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न भारतीय भाषाएं सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में आने वाले समय में विभिन्न भाषाओं के अध्ययन और शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे विद्यार्थी देश की विविध भाषाई एवं सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित हो सकें। इस अनुक्रम में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में विविध भारतीय भाषाओं को क्रेडिट से जोड़कर सिखाने की कार्ययोजना पर कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा को ज्ञान, कौशल, अनुसंधान, नवाचार और भारतीय भाषाओं से जोड़ते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। समारोह में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल के निदेशक प्रो. आशुतोष कुमार सिंह, मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल के निदेशक प्रो. के.के. शुक्ला एवं भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल की अनुसंधान एवं विकास प्रभारी डॉ. नेहा सिंह सहित संस्थान के अधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित थे।  

बॉस बनकर साइबर ठगी कर रहे अपराधी, राजस्थान पुलिस ने जारी की खास एडवाइजरी

जयपुर  राजस्थान में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक खतरनाक और नया तरीका ढूंढ निकाला है, जिसे साइबर सुरक्षा की भाषा में 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) कहा जा रहा है। राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा के कड़े निर्देशों के बाद राज्य की साइबर क्राइम शाखा ने प्रदेश भर के प्राइवेट कंपनियों, कॉर्पोरेट दफ्तरों में काम करने वाले मैनेजर्स, अकाउंटेंट्स और अन्य कर्मचारियों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर कंपनी के वास्तविक मालिक, एमडी या सीनियर अफसर का रूप धारण कर व्हाट्सएप, ईमेल या एसएमएस के जरिए कर्मचारियों से संपर्क साधते हैं और अर्जेंट वित्तीय लेन-देन या गोपनीय डेटा साझा करने का दबाव बनाकर लाखों रुपये की चपत लगा रहे हैं। राजस्थान के कॉर्पोरेट और बिजनेस सेक्टर में तेजी से पैर पसार रहे इस नए साइबर फ्रॉड को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है। फर्जी आईडी- असली नाम, ऐसे बनाते हैं शिकार अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (ADG) साइबर क्राइम वी.के. सिंह ने बताया कि यह गिरोह बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से काम करता है। ठग सबसे पहले किसी लक्षित कंपनी, उसके वरिष्ठ अधिकारियों के सोशल मीडिया प्रोफाइल, उनके आधिकारिक ईमेल पैटर्न और जारी प्रोजेक्ट्स के बारे में पूरी रिसर्च करते हैं। इसके बाद कर्मचारी के मोबाइल या ईमेल पर कंपनी के बॉस का नाम और फोटो लगाकर मैसेज भेजा जाता है। मैसेज में लिखा होता है कि बॉस एक बेहद जरूरी गुप्त मीटिंग में व्यस्त हैं, इसलिए तुरंत किसी नए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर की जाए या अर्जेंट गिफ्ट कार्ड खरीदे जाएं। कर्मचारी अपने बॉस का नाम, पद और असली प्रोजेक्ट का जिक्र देखकर झांसे में आ जाता है और बिना वेरिफिकेशन किए पैसे भेज देता है। वेब हाईजैक और ट्रोजन हॉर्स मालवेयर का इस्तेमाल एडीजी वी.के. सिंह ने साइबर ठगों की हाईटेक कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए बताया कि अपराधी दफ्तरों के कंप्यूटर और लैपटॉप में ट्रोजन हॉर्स मालवेयर भेजकर सिस्टम का एक्सेस हासिल करने की कोशिश करते हैं। यदि सिस्टम में व्हाट्सएप वेब लॉग-इन है, तो अपराधी क्यूआर कोड हाईजैक करके सीधे कर्मचारी के व्हाट्सएप तक पहुंच बना लेते हैं। इसके बाद नकली बॉस की डीपी लगाकर अर्जेंट पेमेंट का मैसेज भेजा जाता है। इस ठगी की रकम को फर्जी म्यूल अकाउंट्स, क्रिप्टोकरेंसी या तुरंत कैश निकालकर एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है। 'बॉस स्कैम' को पहचानने के 7 मुख्य संकेत राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा ने आमजन और कर्मचारियों को सतर्क रहने के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण लक्षण साझा किए हैं: ईमेल एड्रेस के स्पेलिंग या डोमेन नेम में अचानक या मामूली बदलाव होना। दफ्तर का समय समाप्त होने के बाद देर रात या असामान्य समय पर अचानक संदेश आना। बिना किसी पूर्व सूचना के अत्यधिक अर्जेंट या गोपनीय वित्तीय ट्रांसफर करने का दबाव। किसी अनजान या नए बैंक खाते में तुरंत धनराशि भेजने का निर्देश मिलना। सामने वाले व्यक्ति द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर बात करने से बार-बार बचना। मैसेज या ईमेल की भाषा और व्याकरण में अजीब गलतियां होना। व्हाट्सएप, एसएमएस या पर्सनल ईमेल पर असामान्य वित्तीय निर्देश मिलना। क्या करें और क्या न करें? पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल व्हाट्सएप मैसेज या ईमेल देखकर किसी भी अनजान खाते में भुगतान न करें। जब भी कंपनी के बॉस या वरिष्ठ अधिकारी के नाम से ऐसा कोई मैसेज आए, तो तुरंत उनके व्यक्तिगत या आधिकारिक फोन नंबर पर सीधे कॉल करके पुष्टि करें। कंपनियों को अपने सिस्टम में सुरक्षा के कड़े नियम लागू करने चाहिए: बड़े भुगतान या असामान्य वित्तीय लेन-देन के लिए मल्टीलेवल अप्रूवल (Multilevel Approval) सिस्टम लागू करें। व्हाट्सएप वेब और लिंक्ड डिवाइसेज (Linked Devices) को काम खत्म होते ही तुरंत लॉगआउट करें। व्हाट्सएप में टू-फैक्टर वेरिफिकेशन (Two-Factor Verification) हमेशा एक्टिव रखें। सिस्टम में एंटीवायरस और सुरक्षा सॉफ्टवेयर नियमित रूप से अपडेट रखें। साइबर फ्रॉड होते ही तुरंत 1930 पर करें शिकायत राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति या कर्मचारी इस प्रकार की ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना समय गंवाए तुरंत कार्रवाई करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। राजस्थान पुलिस साइबर हेल्पडेस्क के नंबरों 9256001930 और 9257510100 पर तुरंत सूचित करें। आधिकारिक शिकायत के लिए National Cyber Crime Reporting Portal पर विजिट करें। राजस्थान पुलिस के आधिकारिक अपडेट्स के लिए Rajasthan Police Portal का अवलोकन करें।