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चीनी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एक्स-मिल रेट 20% टूटे; त्योहारों तक मिल सकती है और राहत

इंदौर  चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है। आने वाले त्योहारों गणेश चतुर्दशी, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ तक चीनी के दाम और गिरने की उम्मीद बढ़ गई है। डिपॉर्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन ने एक्स पर पोस्ट करके चीनी के सस्ता होने की जानकारी दी है। X पर की गई पोस्ट के मुताबिक देश के खुदरा बाजार में चीनी के दाम करीब 5% तक कम हो गए हैं। इससे पहले चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 20% की बड़ी गिरावट आई है। अगर चीनीमंडी के आंकड़ों की बात करें तो गुरुवार शाम को अपडेट किए गए रेट के मुताबिक चीनी के दाम 61 रुपये किलो तक आ गए हैं। दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, रांची में 3 सितंबर को चीनी 61 रुपये में बिकी। गुवाहटी, कानपुर और रायपुर में 62 रुपये किलो थी और चेन्नई में 63 रुपये। कब तक एक्स-चीनी मिल रेट का दिखेगा असर सरकार का कहना है कि एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर अब धीरे-धीरे खुदरा बाजार में दिखाई देने लगा है और आने वाले दिनों में चीनी के दाम और नरम पड़ सकते हैं। सरकार के मुताबिक एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए आने वाले दिनों में इसका प्रभाव और ज्यादा दिखाई दे सकता है। यानी चीनी की कीमतों में अभी जो राहत मिली है, उसे शुरुआत माना जा सकता है। अगर मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो थोक बाजार के बाद खुदरा बाजार में भी चीनी और सस्ती होने की संभावना है। अगस्त में तेजी के बाद सरकार ने बढ़ाई निगरानी दरअसल, अगस्त में चीनी की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इसके बाद सरकार ने चीनी बाजार की निगरानी बढ़ा दी। चीनी के स्टॉक, बिक्री और बाजार भाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों को रोका जा सके। सरकार का जोर इस बात पर है कि बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और सप्लाई में किसी तरह की परेशानी न हो। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने कहा है कि सरकार घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्धता, व्यवस्थित आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक व्यापार और वितरण से जुड़ी गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहेंगी। यानी निगरानी और कार्रवाई का मकसद सामान्य कारोबार को रोकना नहीं, बल्कि बाजार में कृत्रिम कमी और अनावश्यक कीमत बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है। फिलहाल सरकार के ताजा आंकड़े उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत दे रहे हैं। अगस्त में तेजी के बाद अब चीनी की कीमतों का रुख नीचे की ओर है, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम लोगों को मिलना शुरू हो गया है।

इंदौर मेट्रो में नई शुरुआत, TBM ‘नर्मदा’ ने संभाला मोर्चा; अब जमीन के नीचे बनेगी मेट्रो लाइन

इंदौर  इंदौर मेट्रो के भूमिगत निर्माण कार्य ने अब एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर लिया है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने भूमिगत सेक्शन के लिए पहली टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘नर्मदा’ को एयरपोर्ट स्थित शाफ्ट में सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। TBM की लॉन्चिंग के साथ ही इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड कॉरिडोर के निर्माण को गति मिलने की उम्मीद है। यह काम आधुनिक तकनीक और निर्धारित सुरक्षा मानकों के तहत किया जाएगा। एमडी ने मौके पर पहुंचकर देखा पूरा काम TBM ‘नर्मदा’ की लॉन्चिंग के दौरान मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने लॉन्चिंग की पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण किया और इस चुनौतीपूर्ण तकनीकी कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने वाली इंजीनियरिंग टीम और मेट्रो अधिकारियों को बधाई दी। 410 टन की मशीन, पहले जमीन पर तैयार की गई ‘नर्मदा’ कोई सामान्य मशीन नहीं है। इसका वजन करीब 410 मीट्रिक टन है। इतनी भारी और विशाल TBM को पहले ग्राउंड लेवल पर असेंबल किया गया। इसके बाद विशेष तकनीकी व्यवस्था के जरिए इसे एयरपोर्ट स्थित शाफ्ट के भीतर उतारा गया। मशीन को शाफ्ट में सुरक्षित उतारना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी। इसके लिए Megalift System और Strand Jack Assembly जैसी विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यह सिस्टम 1,000 मीट्रिक टन से अधिक भार उठाने में सक्षम है। अब एयरपोर्ट से बड़ा गणपति तक बनेगी सुरंग TBM ‘नर्मदा’ का इस्तेमाल इंदौर मेट्रो के एयरपोर्ट-बड़ा गणपति भूमिगत सेक्शन में सुरंग निर्माण के लिए किया जाएगा। मशीन के जरिए जमीन के भीतर सुरंग बनाने का काम व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ेगा। भूमिगत निर्माण में TBM तकनीक का इस्तेमाल इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे जमीन की सतह पर यातायात और अन्य गतिविधियों को अपेक्षाकृत कम प्रभावित करते हुए बड़े स्तर पर सुरंग निर्माण किया जा सकता है। अंडरग्राउंड मेट्रो निर्माण के नए चरण की शुरुआत पहली TBM की सफल लॉन्चिंग के साथ इंदौर मेट्रो परियोजना ने भूमिगत निर्माण के लिहाज से एक अहम पड़ाव पार किया है। अब सुरंग निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ शहर में मेट्रो के भूमिगत नेटवर्क को आकार मिलने लगेगा। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक इस तरह की तकनीकी प्रोजेक्ट में मशीन की असेंबली, शाफ्ट में उतारना और फिर टनल बोरिंग शुरू करना कई चरणों वाली जटिल प्रक्रिया है। ‘नर्मदा’ की सफल लॉन्चिंग इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।  

गंदे टॉयलेट की फोटो भेजिए, FASTag में आएंगे ₹1000; NHAI ने बताया पूरा तरीका

नई दिल्ली हाईवे पर सफर करते हुए बहुत से लोगों की शिकायत टॉयलेट से जुड़ी हुई होती है. सरकार ने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर कई पब्लिक टॉयलेट बनवाए हैं. लेकिन लोगों की शिकायत वहां सफाई को लेकर होती है. उचित साफ-सफाई ना होने की वजह से लोग हाईवे और एक्सप्रेसवे पर बने इन टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।  लोगों को होने वाली इस असुविधा को लेकर एनएचएआई (NHAI) ने एक प्लान तैयार किया है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एक स्कीम का ऐलान किया है, जिसके तहत गंदे टॉयलेट की जानकारी देने पर लोगों को रिवॉर्ड मिलेगा. आइए जानते हैं क्या है नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की योजना।  कब शुरू हुई थी ये स्कीम? ये योजना सितंबर 2025 में लॉन्च हुए क्लिन टॉयलेट पिक्चर चैलेंज का हिस्सा है. एनएचएआई ने इस योजना को 30 जून 2027 तक के लिए बढ़ा दिया है. कई लोगों ने इस योजना का फायदा उठाया है. उन्होंने एनएचएआई को गंदे टॉयलेट की जानकारी देकर फास्टैग रिचार्ज कमाया है।  2026 में अब तक 429 कम्यूटर्स ने गंदे टॉयलेट की जानकारी देकर 1000 रुपये का फास्टैग रिचार्ज हासिल किया है. इस स्कीम का फायदा नेशनल हाईवे पर चलने वाले सभी कम्यूटर्स उठा सकते हैं. उन्हें इसमें हिस्सा लेने के लिए साफ तस्वीर अपलोड करनी होगी. राजमार्गयात्रा मोबाइल ऐप पर जियो-टैगिंग और टाइम-स्टैम्प के साथ फोटो को अपलोड करना होगा।  देनी होगी ये जानकारियां इसके अलावा यूजर्स को अपनी बेसिक जानकारी भी देनी होगी. इसके तहत उन्हें अपना नाम, लोकेशन, व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर और मोबाइल नंबर की जानकारी फोटो सबमिट करते हुए देनी होगी. फोटो और डेटा को एनालाइज करने के बाद सभी वैध व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर से मिली ऐसी जानकारी के लिए उन्हें इंस्टैंट 1000 रुपये का रिवॉर्ड मिलेगा।  ये रिवॉर्ड फास्टैग रिचार्ज के रूप में मिलेगा, जो लिंक व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर वाले अकाउंट में क्रेडिट होगा. पूरे स्कीम के दौरान एक गाड़ी को सिर्फ एक बार ही रिवॉर्ड मिलेगा. ये रिवॉर्ड नॉन-ट्रांसफरेबल होगा और इसे कैश में क्लेम नहीं किया जा सकेगा।   ऐसे मामले में जहां एक ही फैसिलिटी के लिए कई शिकायतें की गई हो. वहां पर जिसने सबसे पहले शिकायत की होगी, उसे इसका फायदा मिलेगा. ये स्कीम सिर्फ एनएचएआई के तहत आने वाले टॉयलेट फैसिलिटी पर लागू होती है. एनएचएआई ने  इसके बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी दी है। 

गर्भवती महिला कैदियों के लिए 15 दिन की पैरोल का प्रावधान, जानकारी के अभाव में योजना का लाभ नहीं

भोपाल  जेल में बंद गर्भवती महिलाओं के बच्चों को जन्मस्थान के तौर पर जेल की पहचान न मिले, इसके लिए उन्हें प्रसव से पहले 15 दिन की पैरोल लेने की सुविधा दी गई है। हालांकि, जानकारी के अभाव में कई महिला कैदी इस विकल्प का लाभ नहीं उठा पा रही हैं। जेल प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी गर्भवती महिला को जेल परिसर में प्रसव की स्थिति का सामना न करना पड़े। प्रदेश की जेलों में इस समय 10 गर्भवती महिला कैदी हैं। इनमें दो महिलाएं सजा प्राप्त हैं, जबकि आठ विचाराधीन कैदी हैं। जेल मुख्यालय की ओर से इन सभी की स्वास्थ्य निगरानी की जा रही है।  सरकारी अस्पताल में ही कराया जा रहा प्रसव जेल महानिदेशक वरुण कपूर के अनुसार, बड़ी जेलों में अस्पताल की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद गर्भवती महिला कैदियों का प्रसव जेल में नहीं कराया जाता। उन्हें प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल या नजदीकी जिला अस्पताल भेजा जाता है। इससे मां और नवजात दोनों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा मिल सके। अब जेल प्रशासन हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिला कैदियों की पहचान और निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रसव के दौरान अचानक आपात स्थिति पैदा होने पर भी महिला को जेल में ही प्रसव कराने की नौबत न आए। जन्म में जेल का उल्लेख नहीं महिला कैदियों से जन्मे बच्चों के भविष्य पर जेल की पहचान की छाप न पड़े, इसके लिए शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उनके जन्म प्रमाण पत्र में जेल का उल्लेख नहीं किया जाएगा। जन्मस्थान के तौर पर संबंधित क्षेत्र या जिस शासकीय अस्पताल में प्रसव हुआ है, उसका नाम दर्ज किया जाएगा। इसी उद्देश्य से महिला कैदियों को प्रसव के आसपास 15 दिन की पैरोल लेने का विकल्प भी उपलब्ध है। लेकिन पर्याप्त जानकारी न होने के कारण इसका उपयोग सीमित है। हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक की एक अदालत ने भी एक महिला को प्रसव के लिए जमानत देने के निर्देश देते हुए टिप्पणी की थी कि जेल में बच्चे को जन्म देना किसी महिला के लिए गहरे सदमे से कम नहीं है। ऐसे मामलों ने जेलों में गर्भवती महिला कैदियों के लिए संवेदनशील और मानवीय व्यवस्था की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।  

देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलों पर BJP मंत्री का बड़ा बयान, कहा- अभी महाराष्ट्र में ही जरूरत

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर पिछले कई दिनों से कयास लगाए जा रहे हैं कि वे अब केंद्र की राजनीति में आ सकते हैं। हालांकि इसको लेकर ना तो फडणवीस और ना ही भाजपा की शीर्ष लीडरशिप की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है। इस बीच महाराष्ट्र की पर्यावरण मंत्री और BJP नेता पंकजा मुंडे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में शामिल होने की अटकलों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फडणवीस इस समय महाराष्ट्र में जहां हैं, वहीं उनकी जरूरत है। पंकजा मुंडे ने कोल्हापुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि ऐसा फैसला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या पीएम मोदी की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता। ‘फडणवीस प्रभावशाली और मजबूत नेता’  रिपोर्ट के मुताबिक, पंकजा मुंडे ने फडणवीस की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक प्रभावशाली और अकादमिक रूप से मजबूत नेता हैं। उन्होंने कहा कि वह पिछले करीब ढाई दशक से फडणवीस के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ प्रार्थना कर सकती हूं कि वह वर्तमान पद से आगे बढ़ें। हालांकि, अभी उन्हें वहीं जरूरत है, जहां वह हैं।” पंकजा का यह बयान शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के उस हालिया दावे के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी फडणवीस को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहते हैं। क्या दावा कर बैठे संजय राउत? संजय राउत ने दावा किया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का पुरजोर समर्थन कर रहा है, जिसके तहत महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को राष्ट्रीय राजधानी बुलाकर उन्हें उप-प्रधानमंत्री का पद सौंपने की कोशिश की जा रही है। राउत ने मीडिया कर्मियों से बात करते हुए दावा किया कि 'भगवा परिवार' दिल्ली के बाहर के किसी प्रमुख नेता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित करने की तैयारी कर रहा है और इस अहम पद के लिए फडणवीस सबसे आगे चल रहे हैं। राउत के मुताबिक आरएसएस और पार्टी से जुड़ी अन्य अहम शख्सियतें फडणवीस को दिल्ली लाने की योजना बना रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला करते हुए संजय राउत ने दावा किया कि इतिहास गवाह है कि कोई भी पूर्व गृह मंत्री कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही अमित शाह शीर्ष पद पाने की बड़ी महत्वाकांक्षा रखते हों, लेकिन उन्हें पार्टी के भीतर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। खबरों के अनुसार सत्ताधारी पार्टी के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने कैबिनेट में संभावित फेरबदल को लेकर नेतृत्व को अल्टीमेटम दिया है। मनोज जरांगे की मांगों पर भी बोलीं पंकजा पंकजा मुंडे ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के जारी अनशन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए उनकी मांगों को पूरा करने के लिए प्रयास कर रही है। जरांगे की मांग है कि जिन मराठाओं के कुनबी रिकॉर्ड मिले हैं, उन्हें जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। इसके अलावा, वह कोल्हापुर, सतारा और मुंबई गजेटियर में मौजूद प्रावधानों को लागू कर मराठाओं को कुनबी के रूप में मान्यता देने की मांग कर रहे हैं। पंकजा मुंडे ने बताया कि सरकार ने जरांगे से बातचीत के लिए राधाकृष्ण विखे पाटील की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति गठित की है। उन्होंने कहा कि सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए उनकी मांगों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। बाद में पंकजा मुंडे ने अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इसमें पंचगंगा नदी में प्रदूषण से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई।

भोपाल में रहवासी इलाकों के कारोबार पर सख्ती, 576 कॉलोनियां कार्रवाई के दायरे में

भोपाल भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चल रहे है, उनमें बड़ी हिस्सेदारी नजूल, बीडीए व हाउसिंग बोर्ड की भी है। अरेरा कॉलोनी से एमपी नगर, अशोका गार्डन से बैरागढ़ तक नजूल पट्टों की जमीन है। जिला प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, शहर में 576 कॉलोनियां नजूल जमीनों या गैर अनुमोदित ले आउट्स पर बसी है। बीडीए हाउसिंग के 50 प्रोजेक्ट है। यहां आवासीय में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां व निर्माण है। इस स्थिति में कलेक्टर समेत बीडीए-हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मैदान में उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकारी भूमि पर बनी कॉलोनियां पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, सुल्तानिया रोड, लखेरापुरा, अशोका गार्डन, है, जबकि नया भोपाल अरेरा, टीटी नगर, एमपी नगर के बड़े हिस्से नजूल लीज-लैंड पर बसे है। ईदगाह हिल्स में 600 एकड़ जमीन मर्जर में है और रिकॉर्ड में सरकारी है। हाउसिंग बोर्ड-बीडीए की स्थिति हाउसिंग बोर्ड ने भोपाल में 25 से अधिक बड़ी आवासीय कॉलोनियां व टाउनशिप विकसित की है। इनमें अयोध्या नगर क्षेत्र सबसे बड़ा आवासीय परिसर है। बीडीए की 13 से योजनाएं निगम को हस्तांतरित हो हो चुकी है, पर 7 की जिम्मेदारी उसी की है। निगम सीमा के तहत निगम कार्रवाई कर रहा है। नजूल, हाउसिंग बोर्ड, बीडीए के प्रोजेक्ट्स व क्षेत्र को लेकर समीक्षा कर ली जाएगी। कोर्ट के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा।- कर्मवीर शर्मा, संभागायुक्त घर चार इमली में, अरेरा में बनाया व्यावसायिक भवन जब से नगर निगम द्वारा सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई है, मकान में कारोबार को लेकर पोल भी खुल रहे है। कई मामले ऐसे भी सामने आ रहे है, जिनमें भवन मालिक का असली पता किसी और इलाके का है और उसने किसी और रहवासी क्षेत्र में कारोबार के लिए भवन खड़ा किया है। ऐसा ही एक मामला अरेरा ई4/115 प्लॉट का है। इस पर हिंमाश चौरसिया और शुभम चौरसिया के नाम पर अप्रेल 2024 में मैं आवासीय निर्माण की अनुमति दी गई थी। लेकिन यहां कारोबारी भवन बना लिया गया है। अनुमति 0.75 एफएआर के आधार पर दी गई थी। यानी क्षेत्रफल से 75 फीसदी ही दो मंजिला निर्माण की मंजूरी है। लेकिन प्लॉट मालिक ने पूरा व्यावसायिक निर्माण कर लिया। ट्रैफिक पर पड़ेगा असर इमारत वंदेमातरम चौराहा से आगे 1100 क्वार्टर हनुमान मंदिर के बीच चार लेन रोड पर तैयार हो रही है। यहां अरेरा से लेकर कोलार, शाहपुरा, चुनाभट्टी और आसपास के ट्रैफिक गुजरता है। ऐसे में पीक ऑवर्स में चौराहे पर जाम की स्थिति बनेगी जिससे चौराहा भी प्रभावित होगा।

भारत-बेल्जियम की बढ़ी डिफेंस पार्टनरशिप, अंडरवाटर रोबोट से Zorawar टैंक तक मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली सोचो अगर यूरोप की यह टॉप-नॉच मिलिट्री टेक्नोलॉजी भारत में आ गई, तो सीन क्या होगा? चीन-पाकिस्तान तो सोच में ही पड़ जाएंगे! बेल्जियम अपने साथ 15 रक्षा दिग्गजों की पूरी टोली लेकर आया है जो भारत को सुपर-एडवांस टेक ऑफर कर सकते हैं. अपने स्वदेशी जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला किलर 3105 टरेट हो या प्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (जो Mach 2+ की सुपरसोनिक स्पीड से वार करते हैं), सब टेबल पर है. समंदर के नीचे माइन्स का सफाया करने वाले अंडरवाटर रोबोट्स से लेकर हर साल 10 करोड़ एम्युनिशन राउंड्स बनाने का मास्टरप्लान तक. बेल्जियम भारत को मेक इन इंडिया के तहत सब ऑफर करने को तैयार है. बॉस, यह टेक ट्रांसफर हुआ तो भारत डिफेंस वर्ल्ड में सिर्फ खरीदार नहीं, सीधा बॉस बनकर उभरेगा. चलिए हम आपको बेल्जियम के टॉप हथियारों के बारे में विस्‍तार में बताते हैं।  कौन से वेपन्स बेल्जियम भारत को देने जा रहा? 1. जोरावर टैंक का ‘हेड’ (John Cockerill 3105 Turret) सीन क्या है: जोरावर भारत का वो हल्का टैंक है जो चीन बॉर्डर पर लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में दुश्मनों की बजाएगा।  • पावर: बेल्जियम इस टैंक का मुख्य सिर (टरेट) बना रहा है. इसमें 105mm की तोप है जो 4 किमी दूर से ही टारगेट उड़ा देती है. भारी नहीं है, इसलिए पहाड़ों पर मक्खन की तरह चलेगा।  2. 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (Thales Rocket) • सीन क्या है: ये वो रॉकेट है जो अपने प्रचंड और ध्रुव हेलीकॉप्टर्स में फिट होगा. • पावर: साउंड की स्पीड से भी 2 गुना तेज (Mach 2+) भागता है. 9 किमी तक की रेंज में सटीक लेजर निशाना लगाता है. 2027 तक ये पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ बनने लगेगा।  3. पानी के अंदर माइन ढूंढने वाला रोबोट (Exail Mine Sweeper) • सीन क्या है: इंडियन नेवी के लिए स्पेशल अंडरवाटर रोबोटिक टूलबॉक्स. • पावर: समंदर में 300 मीटर नीचे जाकर दुश्मनों की बिछाई समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) को खुद ही ढूंढेगा और डिफ्यूज कर देगा।  4. 10 करोड़ राउंड एम्युनिशन फैक्ट्री (New Lachaussée): • सीन क्या है: गोलियों की कोई कमी नहीं होने वाली. • पावर: बेल्जियम कंपनी भारत में एक ऐसा प्लांट लगा रही है जो हर साल 10 करोड़ धांसू गोलियां/गोला-बारूद बनाएगा।    वेपन / टेक पार्टनर कंपनी क्या है खास बात? असली काम कहाँ आएगा? 3105 टैंक टरेट John Cockerill 105mm तोप, 4 किमी रेंज, लाइटवेट जोरावर टैंक (चीन सीमा पर तैनाती) 70mm लेजर रॉकेट Thales Belgium स्पीड: Mach 2+, 9 किमी रेंज प्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए अंडरवाटर रोबोट्स Exail Robotics 300m गहराई में माइन्स ढूंढेगा इंडियन नेवी के जहाजों हेतु एम्युनिशन फैक्ट्री New Lachaussée 10 करोड़ राउंड्स/साल आर्मी के लिए गोलियों का बैकअप बॉटम लाइन 1. नो मोर इंपोर्ट: भारत अब सिर्फ बाहर से हथियार खरीदेगा नहीं बल्कि बेल्जियम के साथ मिलकर खुद बनाएगा. 2. चीन-पाक हैरान: पहाड़ों पर जोरावर टैंक और हवा में प्रचंड हेलीकॉप्टर के नए रॉकेट दुश्मनों का गेम बजाने के लिए काफी हैं. 3. फ्यूचर एक्सपोर्ट: आने वाले टाइम में भारत इन हथियारों को दूसरे देशों को बेचकर खुद मोटा पैसा छापेगा. सवाल-जवाब 1. इस भारत-बेल्जियम बातचीत के सबसे बड़ा हाइलाइट क्या है? 10 MoUs जिससे भारत में ही रॉकेट, टैंक के टरेट, रोबोट्स और गोला-बारूद की डायरेक्ट मैन्युफैक्चरिंग होने की संभावना है. 2. जोरावर टैंक में बेल्जियम क्या अलग कर रहा है? बेल्जियम जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला हल्का और सुपर-अकाउंटेबल ‘टरेट’ (तोप वाला हिस्सा) दे रहा है जो पहाड़ों पर तबाही मचाएगा. 3. बेल्जियम वाले रॉकेट्स भारत में कब तक बन सकते हैं? अगर सबकुछ फाइनल हुआ था थैलेस बेल्जियम और कल्याणी ग्रुप मिलकर 2027 की शुरुआत तक भारत में 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट बना सकते है. 4. इंडियन नेवी को इस डील से क्या फायदे मिल सकते है? नेवी को पानी के अंदर काम करने वाले हाई-टेक अंडरवाटर रोबोट्स मिल सकते हैं, जो समंदर में छिपे माइन्स और खतरों को चुटकी में खत्म कर देंगे. 5. क्या भारत में गोलियों की नई फैक्ट्री भी लग सकती है? हाँ भाई! बेल्जियम की कंपनी भारत में सालाना 10 करोड़ राउंड गोला-बारूद बनाने वाली एक विशाल फैक्ट्री सेटअप कर रही है.      

गाड़ी चलाने वालों के लिए बड़ा बदलाव, हर ट्रैफिक उल्लंघन पर कटेंगे लाइसेंस के पॉइंट; अच्छे ड्राइवरों को मिलेगा इनाम

नई दिल्ली भारत में जल्द ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) को लेकर नियम बदल सकता है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय DL और RC के लिए एक ग्रेडेड पॉइंट्स सिस्टम लागू करने पर विचार कर रहा है. इससे बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल किया जा सकता है. केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित व्यवस्था में ड्राइवर को इनाम देने का भी प्रावधान होगा. ये इनाम उनको दिया जाएगा जो जिम्मेदारी से गाड़ी चलाते हैं और जिनका ड्राइविंग रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहता है।  क्या है प्रस्ताव? सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के 66वें सालाना सम्मेलन के दौरान नितिन गडकरी ने कहा मंत्रालय एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है जो ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को सीधे ड्राइविंग लाइसेंस के रिकॉर्ड से जोड़ेगा।  उन्होंने आगे कहा, "मेरा मंत्रालय ड्राइविंग लाइसेंस और व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में ग्रेडेड पॉइंट सिस्टम शुरू करने की योजना बना रहा है." इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, ट्रैफिक नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस से पॉइंट्स काटे जाएंगे. इसमें जैसे ही पेनाल्टी एक तय सीमा (थ्रेशोल्ड) तक पहुंचेगी, प्रशासन लाइसेंस धारक के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगा. गडकरी ने कहा, "हर नियम उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस से पॉइंट्स कटेंगे. इसके अलावा एक तय लिमिट के बाद लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल भी हो जाएगा।  जिम्मेदार ड्राइवर्स को मिलेंगे रिवॉर्ड्स प्रस्तावित व्यवस्था केवल सजा या पेनाल्टी तक ही सीमित नहीं है. गडकरी ने कहा कि अच्छे ड्राइविंग रिकॉर्ड वाले वाहन चालकों को फायदे दिए जा सकते हैं. जिसमें संभवतः इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से मिलने वाले इंसेंटिव्स भी शामिल हो सकते हैं. हालांकि, इन संभावित इंसेंटिव्स के रूपरेखा को लेकर अभी जानकारी नहीं दी गई है।  पॉइंट्स-बेस्ड सिस्टम सिर्फ एक बार चालान भरने के मुकाबले ड्राइविंग के पूरे रिकॉर्ड पर लगातार नजर रखेगा. आसान भाषा में ऐसे समझें बार-बार ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप करना या खतरनाक ड्राइविंग जैसे मामलों को अलग-अलग घटना मानने के बजाय एक साथ जोड़कर देखा जाएगा. जिससे लाइसेंस को रिव्यू किया जा सकेगा।  ड्राइवर के बिहेवियर पर भी फोकस गडकरी ने कहा कि भारत में रोड सेफ्टी को बेहतर बनाने के प्रयासों में चालकों का व्यवहार (ड्राइवर बिहेवियर) सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. उन्होंने कहा, "ड्राइवरों का बर्ताव एक बड़ी समस्या है. अब हम इसके लिए कई कदम उठा रहे हैं।  उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जो लोग बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं, उन्हें अपने गलत रवैये के नतीजों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "हम लगातार गलतियां करते हैं और फिर सीखते हैं, यह सही नहीं होगा. हमें ऐसे लोगों पर सख्ती करनी होगी जहां उनकी गलतियां ही हादसों और नतीजों के लिए जिम्मेदार होती हैं।  इस प्रस्ताव पर बड़े स्तर पर सड़क-सुरक्षा पहलों के साथ चर्चा की गई. इसमें Bharat NCAP 2.0 भी शामिल है, जिसे गडकरी ने अक्टूबर 2027 के लिए प्लान बताया है. व्हीकल-सेफ्टी असेसमेंट प्रोग्राम के अगले फेज में केवल क्रैश परफॉर्मेंस ही नहीं, बल्कि सेफ्टी से जुड़ी पूरी चेन पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।  बाइक टैक्सी सर्विस पर भी जोर केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ये भी घोषणा की कि प्राइवेट मोटरसाइकिल मालिकों को बाइक टैक्सी सर्विस चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए. उन्होंने राज्य सरकारों को इन सर्विसेज को कानूनी मान्यता देने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने बताया कि इस पहल से लगभग आठ करोड़ लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। 

क्या पानी में समा जाएगी मुंबई? बढ़ते समुद्री स्तर पर UN की चेतावनी, 1.4 करोड़ लोग खतरे में

मुंबई क्या एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब मुंबई के कुछ हिस्सों का पता तो वही रहे, लेकिन जमीन समुद्र के नीचे चली जाए? यह सवाल किसी साइंस फिक्शन फिल्म का नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक नई रिपोर्ट का है.  UN महासचिव की रिपोर्ट में  मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों का जिक्र करते हुए चेतावनी दी गई है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर आने वाले दशकों में इन शहरों के निचले इलाकों को हमेशा के लिए पानी में डूबो (Permanent Inundation) सकता है. हालात अगर इसी दिशा में बढ़ते रहे तो लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग इस खतरे की जद में हैं।  आखिर यह रिपोर्ट है क्या और किसने जारी की? यह चेतावनी UN महासचिव की रिपोर्ट"Challenges related to sea level rise and ways and approaches to address it" में दी गई है. यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महासभा के दस्तावेज़ A/81/74 के रूप में दर्ज है. रिपोर्ट में दुनिया भर में बढ़ते समुद्री जलस्तर और उससे पैदा होने वाले खतरों का आकलन किया गया है.रिपोर्ट का सबसे चर्चित हिस्सा वह है जिसमें मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि यहां सबसे बड़ा खतरा आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि लोगों के घरों और बस्तियों पर पड़ सकता है।  क्या सचमुच डूब सकते हैं मुंबई और कोलकाता? यहां एक बात समझना जरूरी है. रिपोर्ट यह नहीं कहती कि पूरा मुंबई, पूरा कोलकाता या पूरा ढाका समुद्र में समा जाएगा. लेकिन रिपोर्ट साफ तौर पर चेतावनी देती है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर इन शहरों के निचले इलाकों में Permanent Inundation यानी ऐसा जलभराव पैदा कर सकता है जो अस्थायी नहीं, बल्कि लंबे समय तक बना रहे. इसी वजह से लाखों लोगों के घर प्रभावित होने की बात कही गई है.यानी कहानी केवल बाढ़ की नहीं है. चिंता इस बात की है कि अगर समुद्र लगातार आगे बढ़ता रहा तो कुछ इलाकों में लोगों के लिए रहना मुश्किल हो सकता है।  मुंबई के लिए खतरा दूसरों से ज्यादा क्यों माना जा रहा? रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र किनारे बसे लगभग सभी बड़े शहर खतरे में हैं, लेकिन UN रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई के सामने कुछ अतिरिक्त चुनौतियां भी हैं.रिपोर्ट में जमीन धंसने (Land Subsidence), भूजल में खारे पानी के प्रवेश और समुद्री तूफानों से आने वाली ऊंची लहरों का जिक्र किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब ये सभी कारक समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ जुड़ते हैं, तब खतरा और बढ़ जाता है।  आसान भाषा में समझें तो अगर समुद्र का पानी लगातार आगे बढ़ता है, तो उसका असर सिर्फ समुद्र किनारे की जमीन तक सीमित नहीं रहेगा. खारा पानी पीने के पानी के स्रोतों तक पहुंच सकता है, कई इलाकों में जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है और समुद्री तूफानों के दौरान होने वाला नुकसान भी पहले से ज्यादा बढ़ सकता है।  UN रिपोर्ट यह भी कहती है कि मुंबई जैसे शहरों में बढ़ता समुद्री जलस्तर ट्रांसपोर्ट, हाउसिंग और सैनिटेशन जैसे बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. यही वजह है कि रिपोर्ट में मुंबई को सिर्फ एक तटीय शहर नहीं, बल्कि उन बड़े महानगरों में गिना गया है जिन्हें आने वाले दशकों में सबसे ज्यादा तैयारी करने की जरूरत पड़ सकती है.मुंबई को लेकर इससे पहले भी कई रिपोर्टें चिंता जता चुकी हैं. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की क्लाइमेट एक्शन प्लान रिपोर्ट में भी समुद्र के बढ़ते खतरे और जलवायु परिवर्तन के असर का जिक्र किया गया था।  UN को अचानक इतनी चिंता क्यों हुई? दरअसल समुद्र अब पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2023 के बीच वैश्विक समुद्री जलस्तर औसतन 4.7 मिलीमीटर प्रति वर्ष बढ़ रहा था. लेकिन 2024 में यह बढ़ोतरी 5.9 मिलीमीटर रही, जो रिकॉर्ड स्तर है.रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में 2100 तक कम से कम 0.5 मीटर समुद्री जलस्तर वृद्धि लगभग तय मानी जा रही है. वहीं कुछ रिसर्च में यह बढ़ोतरी 2 मीटर तक पहुंचने की आशंका भी जताई गई है।  सिर्फ मुंबई नहीं, दुनिया के सैकड़ों शहरों पर खतरा UN रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की करीब 77 करोड़ आबादी ऐसे तटीय इलाकों में रहती है जो ऊंचे ज्वार के स्तर से 5 मीटर से भी कम ऊंचाई पर हैं. रिपोर्ट में भारत के मुंबई और कोलकाता के साथ बांग्लादेश की राजधानी ढाका का विशेष रूप से जिक्र किया गया है.इसके अलावा रिपोर्ट बताती है कि समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी का असर सिर्फ दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहने वाला. दुनिया के कई बड़े तटीय शहरों और निचले इलाकों को भी आने वाले सालों में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है. रिपोर्ट में न्यूयॉर्क, मियामी और चीन के ग्वांगझोउ जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि वहां सबसे बड़ा खतरा अरबों डॉलर की संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान का है, जबकि दक्षिण एशिया में सबसे बड़ी चिंता लोगों के घर और आबादी का पलायन है।