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6 सितंबर राशिफल: मां लक्ष्मी की कृपा से चमकेगी इन राशियों की किस्मत, बढ़ेगी आर्थिक समृद्धि

मेष अपने विचार जाहिर करने में संकोच न करें। आत्मविश्वास की कमी को अपने ऊपर हावी न होने दें क्योंकि यह केवल आपकी समस्या को मुश्किल बनाएगा और आपकी ग्रोथ को धीमा कर सकता है। जो लोग लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे उन्हें आज कहीं से धन की प्राप्ति हो सकती है। आप अपने शरीर को फिर से जीवंत करने और फिट बनने के लिए अंतहीन योजना बनाएंगे। वृषभ जिन व्यापारियों और कारोबारियों का संबंध विदेशों से है, उन्हें आज धन हानि होने की संभावना है, इसलिए कोई भी कदम आगे बढ़ाने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार कर लें। आपकी उदासी आपके जीवनसाथी को तनाव दे सकती है। कार्यस्थल पर कोई आपकी योजनाओं में खलल डालने की कोशिश कर सकता है। व्यावसायिक उद्देश्य से की गई यात्रा फायदेमंद साबित होगी। मिथुन कार्यस्थल पर सीनियर्स का दबाव और घर में कलह कुछ तनाव ला सकती है। आप घूमने-फिरने और पैसे खर्च करने के मूड में होंगे- लेकिन अगर आपने ऐसा किया तो आपको पछताना पड़ेगा। आप अपना समय अपने दिल के करीब लोगों के साथ बिताना चाहेंगे। आर्थिक रूप से स्थिति सामान्य रहेगी। जीवनसाथी के साथ पर नजर रखें। कर्क आज शेड्यूल बिजी होने के बाद भी सेहत अच्छी रहेगी। आज किसी भी तरह का निवेश वर्जित रहेगा। काम का तनाव आपके दिमाग पर हावी हो जाएगा और परिवार और दोस्तों के लिए समय नहीं बचेगा। आप समय की नजाकत को समझते हुए आप अपना समय सबसे दूर एकांत में बिताना पसंद करेंगे। जीवनसाथी के साथ अनबन हो सकती है। सिंह अपने डाइट पर कंट्रोल रखें और फिट रहने के लिए एक्सरसाइज करें। अगर आप अपने दोस्तों के साथ घूमने-फिरने का प्लान बना रहे हैं तो सोच-समझकर पैसा खर्च करें, क्योंकि आपको धन हानि होने की संभावना है। दिन को बेहतरीन बनाने के लिए आप अपने छिपे हुए गुणों का इस्तेमाल करेंगे। आज जीवनसाथी की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। कन्या मन प्रसन्न रहेगा। आज आपको कार्यस्थल पर उच्चाधिकारियों का सहयोग मिलेगा। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। कारोबार में भागदौड़ अधिक रहेगी। परिवार से दूर किसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। लाइफस्टाइल में बदलाव होने के संकेत हैं। आर्थिक रूप से आप अच्छे रहेंगे। किसी यात्रा पर जाने का प्लाम बन सकता है। तुला तनाव को नजरअंदाज करने की जरूरत नहीं है। व्यापार में मुनाफा आज कई बिजनेसमैन के चेहरे पर हंसी ला सकता है। अगर आप कार्यस्थल पर बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं तो अपने काम में नई टेक्निक को शामिल करने की कोशिश करें। आपको अपने जीवन के प्यार से कोई अच्छा सरप्राइज मिल सकता है। वृश्चिक आज आपके जीवन में कोई बड़ा बदलाव होने वाला है। आप अपने स्वभाव व व्यक्तित्व से लोगों को प्रभावित करने में सफल रहेंगे। आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन प्रसन्न रहेगा। परंतु फिर भी अपनी भावनाओं को वश में रखें। माता का साथ मिलेगा। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। धनु आज फिट रहने के लिए दिन की शुरुआत एक्सरसाइज से करें। बड़ी प्लानिंग और विचारों वाला कोई व्यक्ति आपका ध्यान आकर्षित करेगा। अपनी गोपनीय जानकारी अपने जीवनसाथी के साथ शेयर करने से पहले सोचें। अगर संभव हो, तो बचने की कोशिश करें क्योंकि वह इसे किसी और को बता सकती है। आज प्यार की कमी महसूस हो सकती है। मकर आज आपको वाद-विवाद से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। चोट से बचने के लिए बैठते समय विशेष ध्यान रखें। पैसे बचाने के आपके प्रयास आज फेल हो सकते हैं। लेकिन आपको इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि स्थिति जल्द ही सुधर जाएगी। महत्वपूर्ण लोगों के साथ बातचीत करते समय अपने कान और आंखें खुली रखें – क्योंकि आपको कोई कीमती सलाह मिल सकती है। कुंभ आज आप कोई महत्वपूर्ण फैसला ले सकते हैं। संतान की सेहत का ध्यान रखेंगे। भागदौड़ अधिक रहेगी। रहन-सहन अव्यवस्थित रहेगा। नौकरी में तरक्की के मार्ग प्रशस्त होंगे। नई शुरुआत करने का सही समय अभी नहीं है इसलिए अभी शुरुआत ना करें। एक्शन को अपना मार्गदर्शक बनने दें। मीन आज का दिन आपको यह फैसला लेने के लिए मजबूर कर सकता है कि आप अपनी बात स्थापित करना चाहते हैं या अपनी शांति बनाए रखना चाहते हैं। किसी की सलाह से कीमती परिणाम व सलाह मिल सकती है। आर्थिक रूप से आज का दिन अच्छा रहने वाला है। परिवार के साथ समय बिताएंगे। व्यापारियों को लाभ होगा।

सैफई महोत्सव व बग्घी पर खर्च पैसे से संवर सकता था लाखों बच्चों का भविष्य: सीएम योगी

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कि शिक्षा में राजनीति का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। राजनीति के चश्मे से देखने वालों को 2017 के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आया आमूलचूल परिवर्तन दिखाई नहीं देगा। उन्होंने प्रदेशभर के शिक्षकों का आह्वान किया कि वे शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्टता और नवाचार को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ाएं। यही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा प्रदेश और देश का भविष्य बनाएगी।  सीएम योगी शनिवार को शिक्षक दिवस पर बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। गोरखपुर में योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित इस समारोह में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों (कुल 81) को पुरस्कृत किया गया। सभी शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से पुरस्कृत किया। शिक्षकों को पुरस्कार देते समय सीएम योगी ने उनसे आत्मीय संवाद कर बधाई दी और उन्हें प्रोत्साहित भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विगत साढ़े नौ साल में शिक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक परिवर्तन की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में सुदृढ़ता लाने का काम वर्ष 2017 से पहले भी हो सकता था। पर, तत्कालीन सरकारों ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने तंज कसा, ‘जितना पैसा आप सैफई महोत्सव में खर्च करते थे, उसी में थोड़ा सा पैसा शिक्षा की तरफ डाइवर्ट करते तो लाखों बच्चों का भविष्य बन चुका होता। जितने पैसे में बकिंघम की बग्गी मंगा कर अपना जन्मदिन मनाते थे, उतना पैसा शिक्षा पर खर्च करते, तो बच्चों का भविष्य बनता, पहचान का संकट नहीं आता।’ टिप्पणी करना आसान है, कर के दिखाना मुश्किल मुख्यमंत्री ने शिक्षा पर राजनीति करने वालों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि चुनावी घोषणा अलग बात है, लेकिन स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी बनाना कठिन होता है, यह आज प्रदेश में दिखाई दे रहा है। बयान देना आसान है, लेकिन 1.60 करोड़ बच्चों के अकाउंट में डीबीटी से पैसा पहुंचाना कठिन है और यह हुआ है। संस्कृत की छठी क्लास से लेकर आचार्य तक, बच्चों को स्कॉलरशिप के साथ जोड़ना कठिन था, लेकिन सरकार ने वह भी किया। प्रोजेक्ट अलंकार, ऑपरेशन कायाकल्प से बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में परिवर्तन कठिन था, पर इसे भी किया गया। टिप्पणी करना बहुत आसान है, लेकिन करके दिखाना मुश्किल। यूपी को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार सीएम योगी ने यूपी को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार की तरफ भी ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य के जर्जर विद्यालय भवन का वीडियो झांसी का बताकर चलाया गया। यूपी के शिक्षा जगत को अपमानित करने का प्रयास करने वालों को स्मार्ट क्लास, ऑपरेशन कायाकल्प जैसे व्यापक परिवर्तन दिखाई नहीं देते। लेकिन, हमारी प्रतिस्पर्धा चुनावी घोषणाबाजों से नहीं, समय से है। जिस बच्चे को आप पढ़ा रहे हैं, अगर उसमें चूक हो गई तो उसका बचपन दोबारा नहीं आने वाला। इसलिए सही समय पर सही दिशा में सही निर्णय लेने की आदत होनी चाहिए। शिक्षा के प्रति विश्वास को बनाए रखना सरकार और शिक्षकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। बदलती टेक्नोलॉजी पर हम मौन नहीं रह सकते। हमें एआई, रोबोटिक्स व ड्रोन टेक्नोलॉजी के अनुरूप खुद को तैयार करने की जरूरत है। 2017 से पहले दंगा-कर्फ्यू व अराजकता का दौर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को प्रदेश में चार बार शासन करने का अवसर मिला और जिस कांग्रेस को लगभग छह दशक तक यूपी में शासन करने का अवसर प्राप्त हुआ था, वे दोनों प्रदेश की बदलती व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। पुराने जर्जर भवन दरअसल उन्हीं के स्मारक थे, जिन्हें हम रिप्लेस कर चुके हैं, वे शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। डबल इंजन की सरकार शिक्षा व्यवस्था को एक्सक्लूसिव, अधिक संसाधनपूर्ण तथा पारदर्शी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कोई ऐसा शिक्षक नहीं होगा, जिसने नौ वर्ष पहले और आज के उत्तर प्रदेश का परिवर्तन नहीं देखा हो। 2017 से पहले उपद्रव, कर्फ्यू, दंगे व अराजकता के माहौल में स्कूल-कॉलेजों के चलने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। अब कहीं कोई संकट नहीं। कोई उत्सव से पहले उपद्रव नहीं कर सकता। कल जन्माष्टमी थी। सभी 1586 थानों में, देव मंदिरों में, 75 जनपदों की पुलिस लाइन में, सभी जेलों में, हर मोहल्ले-गांव में इसके आयोजन हुए, लेकिन कहीं कर्फ्यू या दंगे का नाम भी नहीं सुना होगा। यूपी के शिक्षकों पर अब कोई प्रश्न नहीं सीएम योगी ने कहा कि आज के उत्तर प्रदेश में कोई शिक्षकों पर प्रश्न नहीं खड़ा करता। जबकि 2017 के पहले ठेके पर नकल होती थी। स्कूल-कॉलेज नकल के अड्डे बन गए थे। युवाओं के सामने पहचान का संकट था और भारत की सबसे बड़ी आबादी का राज्य कठघरे में खड़ा दिखाई देता था। लोग उत्तर प्रदेश में आना नहीं चाहते थे। हमारे युवाओं व शिक्षकों को बाहरी राज्यों में शक की निगाहों से देखा जाता था। लेकिन, अब सभी जगह हमारे युवाओं व शिक्षकों का सम्मान किया जाता है। यूपी के प्रति धारणा बदली है। इस परिवर्तन के महत्वपूर्ण वाहक शिक्षक हैं और शिष्य का योग्य व संस्कारी बनना ही सबसे बड़ी गुरु दक्षिणा है। टीचर, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेशन को जोड़ा गया मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए टीचर, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेशन जोड़ा गया। इस ट्रिपल-टी में शिक्षक का सम्मान, विद्यार्थी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संसाधनों की उपलब्धता पर जोर है। सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18 हजार और अनुदेशकों का 17 हजार रुपये कर दिया है। 5 लाख रुपये कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा की भी गारंटी दी गई। बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा से जुड़े हुए सभी शिक्षकों, शिक्षणोत्तर कर्मचारियों व उनके परिवार को 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का काम किया गया। पहली बार सोशल सिक्योरिटी की गारंटी दी गई। हमारा मानना है कि बच्चों का भविष्य गढ़ने वालों का सम्मान पहले होना चाहिए। राज्य अध्यापक पुरस्कार की राशि को 10000 से बढ़ाकर 25000 रुपये किया गया। सेवा मामलों में पारदर्शिता के लिए ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट पोर्टल विकसित किया गया। इसी तरह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अनेक कार्य किए गए। निपुण भारत अभियान के अच्छे परिणाम मिल … Read more

किसान आंदोलन का पंजाब की सियासत पर असर, BJP-AAP को नुकसान तो कांग्रेस-अकाली-वारिस पंजाब दे को फायदा?

 पटियाला विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में एक बार फिर किसान आंदोलन गर्मा गया है। एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता रद्द करने और ग्रामीण मजदूरों के लिए पेंशन समेत कई मांगों को लेकर किसान मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर धरना दे रहे हैं। आंदोलन का सीधा असर भाजपा पर पड़ सकता है लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी भी इससे अछूती नहीं है। कांग्रेस और अकाली दल के लिए यह किसानों के बीच खोई जमीन वापस पाने का मौका बन सकता है। भाजपा के लिए ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता की परीक्षा 2020-21 के किसान आंदोलन की राजनीतिक छाया पंजाब में भाजपा पर लंबे समय तक रही। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में किसान संगठनों ने भाजपा के विरोध में अभियान चलाया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा ने भी भाजपा के खिलाफ वोट की अपील की थी। अब भाजपा पंजाब में अपना आधार बढ़ाने में जुटी है। पार्टी 2027 में सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रही है। ऐसे में ग्रामीण पंजाब में स्वीकार्यता बढ़ाना उसके लिए बड़ी चुनौती है। अगर आंदोलन के कारण केंद्र और भाजपा के खिलाफ माहौल फिर मजबूत हुआ तो मालवा और दोआबा की ग्रामीण सीटों पर असर पड़ सकता है। किसान संगठनों की सक्रियता वाले इलाकों में भाजपा उम्मीदवारों को विरोध और सवालों का सामना करना पड़ सकता है। चुनौती सिर्फ किसान वोट की नहीं बल्कि पूरे ग्रामीण माहौल की है।  आप को नाराजगी दूर करने और कांग्रेस-अकाली दल को जमीन मजबूत करने का मौका 2020-21 में आप ने किसान आंदोलन का समर्थन किया था। 2022 में पार्टी ने 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई। अब किसान शंभू और खनौरी मोर्चों पर मार्च 2025 में हुई पुलिस कार्रवाई और मांगें पूरी न होने को लेकर मान सरकार से नाराज हैं। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर का आरोप है कि मोर्चों से गायब ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य सामान का मुआवजा पंजाब सरकार ने नहीं दिया। एमएसपी कर्ज मुआवजा फसल विविधीकरण और कृषि लागत से जुड़ी मांगों का संबंध राज्य की नीतियों से भी है। ऐसे में आप विधायकों को गांवों में सवालों का सामना करना पड़ सकता है। कांग्रेस के लिए आंदोलन केंद्र की भाजपा सरकार और पंजाब की आप सरकार दोनों को घेरने का अवसर है। हालांकि केवल समर्थन का बयान पर्याप्त नहीं होगा। किसानों के बीच प्रभाव बढ़ाने के लिए उसे मांगों को मजबूती से उठाना होगा। कृषि कानूनों के मुद्दे पर भाजपा से गठबंधन तोड़ने वाला अकाली दल भी किसानों के बीच अपनी पुरानी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकता है। आंदोलन लंबा खिंचा तो उसे ग्रामीण पंजाब में वापसी का अवसर मिल सकता है। राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा के अनुसार किसान आंदोलन का असर भाजपा और आप पर पड़ सकता है क्योंकि किसानों की मांगें केंद्र और राज्य दोनों सरकारों से जुड़ी हैं। मांगें पूरी न होने से दोनों के खिलाफ नाराजगी है। कांग्रेस और अकाली दल सक्रियता से किसानों के समर्थन में आते हैं और उनकी मांगों को उठाते हैं तो दोनों पार्टियां किसानों के बीच अपनी पैठ दोबारा मजबूत कर सकती हैं।  किसान आंदोलन कैसे बिगाड़ सकते हैं भाजपा-AAP का गणित, एक्सपर्ट से जानिए… 1. केंद्र और राज्य के खिलाफ एक साथ मोर्चा: पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप सिंह का कहना है कि किसान संगठनों ने केंद्र और पंजाब सरकार दोनों के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोला है। शंभू और खनौरी बॉर्डरों पर पिछले समय में हुए घटनाक्रमों, पुलिस कार्रवाई और किसान मोर्चों से गायब हुई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व अन्य सामान के मुआवजे का मुद्दा अब तूल पकड़ चुका है। किसान नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार ने न केवल आंदोलनकारियों की सुरक्षा व सहायता में ढिलाई बरती, बल्कि वादे के मुताबिक नुकसान की भरपाई भी नहीं की। उन्होंने कहा कि गांवों में अब आम आदमी पार्टी के विधायकों और नेताओं के खिलाफ पोस्टर-होर्डिंग्स लगाकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कृषि लागत, फसल विविधीकरण और राज्य-स्तरीय मुआवजे से जुड़े मुद्दों के कारण सत्तारूढ़ दल को ग्रामीण क्षेत्रों में भारी जन-असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार से एमएसपी की कानूनी गारंटी और ट्रेड डील रद्द करने की मांग को लेकर किसान अड़े हुए हैं। 2. आप के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती: पवनदीप शर्मा का कहना है कि 2020-21 के आंदोलन में आम आदमी पार्टी ने किसानों का खुलकर समर्थन किया था, जिसका सीधा फायदा उसे 2022 के चुनाव में 92 सीटें जीतकर मिला था। लेकिन सरकार बनने के बाद अब समीकरण बदल चुके हैं। शंभू और खनौरी मोर्चों पर हुई पुलिस कार्रवाई, किसान आंदोलनों के प्रति ढुलमुल रवैये का आरोप और स्थानीय कृषि समस्याओं के हल न होने से ग्रामीण क्षेत्रों में भगवंत मान सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के अनुसार, मोर्चों के दौरान हुए नुकसान और गायब हुई गाड़ियों के मुआवजे पर राज्य सरकार का वादा अधूरा रहा। ग्रामीण पंजाब, जो आप का सबसे मजबूत चुनावी स्तंभ माना जाता था, वहां से वोट बैंक छिटकने का सीधा खतरा पैदा हो गया है। यदि मान सरकार जल्द ही किसान संगठनों को संतुष्ट करने में विफल रहती है, तो आगामी चुनावों में उसके विधायकों को गांवों में प्रवेश करते समय भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। 3. ग्रामीण वोट होगा बैंक प्रभावित: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि 2020-21 के कृषि कानून विरोधी आंदोलन का असर भाजपा अब तक झेल रही है। किसान आंदोलन के कारण 2022 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा की अपीलों के चलते भाजपा को ग्रामीण इलाकों में भारी राजनीतिक विरोध सहना पड़ा। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी को अपने चुनावी बूथ तक लगाने की अनुमति नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। ऐसे में मालवा और दोआबा जैसे विशाल ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 4. किसानों के प्रति भाजपा ने बदली रणनीति: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि किसानों के लगातार विरोध के बीच … Read more

तबाही के बाद राहत शिविरों में बदहाल जिंदगी, नेपाल की पीड़ित महिलाओं ने बताई दर्दनाक मुश्किलें

काठमांडू  नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है. घर उजड़ गए, सामान बह गया और बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. लेकिन बाढ़ से बच निकलने के बाद भी महिलाओं की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं।  AFP की ग्राउंड रिपोर्ट में नेपाल के राहत शिविरों में रह रही महिलाओं की ऐसी परेशानियां सामने आई हैं, जिन पर आमतौर पर आपदा के दौरान कम बात होती है. महिलाओं के लिए पीरियड्स, साफ पानी, टॉयलेट, कपड़े और प्राइवेसी जैसी रोजमर्रा की जरूरतें भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।  ‘पैड तो मिल रहे हैं, लेकिन अंडरवियर नहीं’ AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, राहत शिविर में रह रही कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें सैनिटरी पैड मिल रहे हैं, लेकिन पहनने के लिए अंडरगारमेंट्स जैसी जरूरी चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।  बाढ़ में घर और सामान खो चुकी महिलाओं के लिए यह समस्या और बड़ी हो गई है. पीरियड्स के दौरान सिर्फ पैड मिलना ही काफी नहीं होता. साफ पानी, टॉयलेट, कपड़े बदलने की जगह और निजी स्वच्छता के लिए जरूरी सुविधाएं भी चाहिए होती हैं।  400 से ज्यादा लोगों के लिए सिर्फ तीन टॉयलेट AFP की रिपोर्ट में राहत शिविरों में सैनिटेशन की स्थिति भी सामने आई है. एक शिविर में 400 से ज्यादा लोगों के लिए सिर्फ तीन टॉयलेट होने की बात बताई गई है।  महिलाओं के लिए परेशानी इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि उन्हें टॉयलेट के साथ-साथ नहाने और कपड़े बदलने के लिए भी पर्याप्त प्राइवेसी चाहिए. लेकिन आपदा के बाद बनाए गए अस्थायी शिविरों में ये सुविधाएं अक्सर सीमित होती हैं।  बाढ़ ने छीन ली सिर्फ छत नहीं, निजी जिंदगी भी घर उजड़ने के बाद राहत शिविर में पहुंचना किसी परिवार के लिए राहत की शुरुआत हो सकती है, लेकिन महिलाओं की जिंदगी में कई निजी मुश्किलें वहीं से शुरू होती हैं।  घर में जिन चीजों को लेकर कभी सोचना नहीं पड़ता था, वही चीजें अब जरूरत बन जाती हैं- साफ कपड़े, अंडरगारमेंट्स, सैनिटरी पैड, साफ पानी और ऐसी जगह जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी निजी जरूरतें पूरी कर सकें।  AFP की रिपोर्ट इस बात को सामने लाती है कि आपदा राहत सिर्फ खाना, पानी और टेंट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हो सकती. महिलाओं की गरिमा और स्वच्छता से जुड़ी जरूरतों को भी राहत व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाना जरूरी है।  जिंदगी बच गई, लेकिन सामान्य जिंदगी कब लौटेगी? बाढ़ से बच जाना निश्चित तौर पर सबसे बड़ी राहत है. लेकिन जिन लोगों ने अपना घर और सामान खो दिया है, उनके लिए सामान्य जिंदगी में लौटना लंबा सफर है।  राहत शिविरों में रह रही महिलाओं की बातें इसी संघर्ष को सामने लाती हैं. उनके लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आज खाना मिलेगा या नहीं. सवाल यह भी है कि वे कब फिर से अपने घर जैसी सुरक्षा, प्राइवेसी और सम्मान के साथ जिंदगी जी पाएंगी।  AFP की रिपोर्ट के जरिए सामने आई ये तस्वीर बताती है कि किसी आपदा का असर पानी उतरने के बाद भी लंबे समय तक लोगों की जिंदगी में बना रहता है। 

हरियाणा सरकार 12 मांगें मानने को तैयार, पक्की नौकरी की मांग पर अड़े कर्मचारी

चंडीगढ़ हरियाणा में सफाई, सीवर, पालिका, परिषद, नगर निगम और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल फिलहाल नियमितीकरण की मांग पर अटकी हुई है। हरियाणा सरकार कर्मचारियों की 13 में से 12 मांगें मानने को तैयार है, लेकिन दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कच्चे कर्मचारियों को नीति बनाकर नियमित करने की मुख्य मांग पर सहमति नहीं बन रही। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब तक नियमितीकरण की नीति नहीं बनती, आंदोलन जारी रहेगा। नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान नरेश कुमार शास्त्री और हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंद ने कहा कि सरकार द्वारा टर्मिनेशन, निलंबन और मुकदमे दर्ज करने जैसी कार्रवाई के बावजूद कर्मचारी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने दावा किया कि शुक्रवार को प्रदेश के 84 शहरों में 500 से अधिक कर्मचारियों ने सामूहिक मुंडन करवाकर विरोध दर्ज कराया। वेतन में 15 प्रतिशत वृद्धि करने को तैयार कर्मचारी नेताओं ने कहा कि दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। उनका आरोप है कि वर्षों से ठेका व्यवस्था में काम कर रहे सफाई और सीवर कर्मचारियों को रोजगार की स्थायी सुरक्षा नहीं मिल रही। वहीं, सरकार का तर्क है कि पूरे देश में दो वर्ष की सेवा के आधार पर कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने जैसी कोई नीति नहीं है। सरकार नियमितीकरण की बजाय कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा के दायरे में लाने और उनके वेतन में 15 प्रतिशत वृद्धि करने को तैयार है। आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए संघ ने पांच और छह सितंबर को प्रदेश सरकार के मंत्रियों के आवासों और कैंप कार्यालयों पर झाड़ू प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार ने वर्ष 2014 में सफाई कर्मचारियों को पक्का करने का वादा किया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया। उनका कहना है कि नियमितीकरण और अन्य मांगों पर ठोस लिखित आदेश जारी होने तथा दमनात्मक कार्रवाई वापस लिए जाने तक हड़ताल जारी रहेगी।

बिहार समेत कई राज्यों के यात्रियों को राहत, मुंबई-कटिहार और कानपुर-गुवाहाटी स्पेशल ट्रेनें हुईं विस्तारित

पटना  त्योहारों के इस मौसम में घर जाने की सोच रहे यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय रेलवे के पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) जोन ने यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट की समस्या से निपटने के लिए दो जोड़ी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की सेवाओं का विस्तार कर दिया है। रेलवे के इस महत्वपूर्ण फैसले से बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और मुंबई के बीच सफर करने वाले हजारों यात्रियों को आवागमन के लिए बेहतर और सुविधाजनक विकल्प मिल सकेंगे, साथ ही प्रमुख व्यस्त रूटों पर अत्यधिक भीड़भाड़ का दबाव भी कम होगा। ​ मुंबई-कटिहार और कानपुर-गुवाहाटी रूट पर राहत ​एनएफआर द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जिन दो प्रमुख गाड़ियों के फेरे बढ़ाए गए हैं, उनमें ट्रेन संख्या 09189/09190 मुंबई सेंट्रल कटिहार मुंबई सेंट्रल फेस्टिवल स्पेशल और ट्रेन संख्या 04127/04128 कानपुर सेंट्रल गुवाहाटी कानपुर सेंट्रल फेस्टिवल स्पेशल शामिल हैं। ये सभी स्पेशल ट्रेनें अपने पुराने निर्धारित समय, ठहराव (स्टॉपेज), कोच कंपोजिशन और तयशुदा शेड्यूल के अनुसार ही पटरियों पर दौड़ेंगी, जिससे यात्रियों को किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। ​ट्रेन संख्या 09189/09190 (मुंबई सेंट्रल कटिहार) की नई तिथियां ​मुंबई सेंट्रल से कटिहार के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 09189 फेस्टिवल स्पेशल इस त्योहारी सीजन में कुल सात अतिरिक्त फेरे लगाएगी। यह गाड़ी 5 और 12 सितंबर, 17, 24 और 31 अक्टूबर, तथा 7 और 14 नवंबर 2026 को अपनी यात्रा शुरू करेगी। ​वहीं, वापसी की दिशा में कटिहार से मुंबई सेंट्रल जाने वाली ट्रेन संख्या 09190 फेस्टिवल स्पेशल भी सात अतिरिक्त फेरों के साथ संचालित होगी। यह वापसी सेवा 8 और 15 सितंबर, 20 और 27 अक्टूबर, और साथ ही 3, 10 और 17 नवंबर 2026 को यात्रियों के लिए उपलब्ध रहेगी। ​ ट्रेन संख्या 04127/04128 (कानपुर सेंट्रल गुवाहाटी) का विस्तारित शेड्यूल ​कानपुर सेंट्रल और गुवाहाटी के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को इस बार लंबी अवधि की राहत दी गई है। कानपुर सेंट्रल से गुवाहाटी के लिए चलने वाली ट्रेन संख्या 04127 स्पेशल को 10 सितंबर से 10 दिसंबर 2026 तक कुल 14 अतिरिक्त फेरों के लिए बढ़ाया गया है। ​इसके विपरीत दिशा में, गुवाहाटी से कानपुर सेंट्रल लौटने वाली ट्रेन संख्या 04128 स्पेशल 11 सितंबर से 11 दिसंबर 2026 तक 14 अतिरिक्त फेरों के साथ अपनी सेवाएं प्रदान करेगी, जिससे उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर के बीच संपर्क और मजबूत होगा। ​ यात्रियों की सुविधा और भीड़ नियंत्रण पर जोर ​पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल किशोर शर्मा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि त्योहारी सीजन के दौरान ट्रेनों में अचानक बढ़ने वाली भारी भीड़ को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इन अतिरिक्त फेरों के संचालन से यात्रियों को यात्रा करने के लिए अधिक विकल्प प्राप्त होंगे और व्यस्त मार्गों पर यात्रियों का दबाव घटेगा। रेलवे का मुख्य उद्देश्य हर यात्री को इस व्यस्त समय में एक आसान, सुरक्षित, सुविधाजनक और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करना है।  

झारखंड में सौर ऊर्जा को बढ़ावा, 3500 भवनों पर 82 मेगावाट के रूफटॉप प्लांट

रांची  झारखंड में सरकारी भवनों की छतों का इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा रहा है. राज्य के 3500 से अधिक सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर पावर प्लांट लगाए जा चुके हैं. इनकी कुल उत्पादन क्षमता करीब 82 मेगावाट है. 617 सोलर मिनी ग्रिड से 30 हजार घरों में पहुंची बिजली वहीं, सुदूर और दुर्गम ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने के लिए 617 से अधिक सोलर मिनी ग्रिड स्थापित किए गए हैं. इनकी कुल क्षमता करीब 10.60 मेगावाट है. इन मिनी ग्रिड के जरिए 30 हजार से अधिक घरों तक सौर ऊर्जा पहुंचने का दावा किया गया है. अब इन सभी सौर ऊर्जा परियोजनाओं की निगरानी और उनके प्रदर्शन का आकलन डिजिटल तकनीक के जरिए करने की तैयारी है. IoT से होगी सोलर प्लांट की निगरानी झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (JREDA) इसके लिए एक एजेंसी का चयन करने जा रही है. यह एजेंसी IoT यानी इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित सिस्टम तैयार करेगी. इसके तहत सोलर प्लांट की स्थिति, उत्पादन, प्रदर्शन और तकनीकी समस्याओं की जानकारी डिजिटल तरीके से मिल सकेगी. इसके अलावा एसेट और इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम तथा IT आधारित परफॉर्मेंस मॉनीटरिंग और इवैल्यूएशन फ्रेमवर्क भी तैयार किया जाएगा. तीन साल का व्यापक वार्षिक रखरखाव अनुबंध चयनित एजेंसी सिस्टम के डिजाइन, डेवलपमेंट, इंप्लीमेंटेशन, होस्टिंग और संचालन का काम करेगी. राज्यभर की सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए तीन साल का व्यापक वार्षिक रखरखाव अनुबंध भी किया जाएगा. इससे सोलर प्लांट का समय-समय पर मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जा सकेगा. 66 से 70 करोड़ रुपये की बचत का दावा JREDA के अनुसार सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने से बिजली के खर्च में कमी आई है. इससे राज्य को हर साल करीब 66 से 70 करोड़ रुपये की बिजली बचत होने का दावा किया गया है. डिजिटल निगरानी भी जरूरी JREDA के एमडी केके वर्मा के अनुसार, एजेंसी का फोकस केवल सरकारी भवनों की छत पर सोलर प्लांट लगाने तक सीमित नहीं है. प्लांट से कितना बिजली उत्पादन हो रहा है, उसकी स्थिति कैसी है, परिसंपत्तियों का रिकॉर्ड क्या है और रखरखाव ठीक से हो रहा है या नहीं, इसकी डिजिटल निगरानी भी जरूरी है. हर प्लांट की स्थिति पर रहेगी नजर नई डिजिटल व्यवस्था से सौर परियोजनाओं की परिसंपत्तियों और इन्वेंट्री का रिकॉर्ड ऑनलाइन तैयार किया जा सकेगा. IoT आधारित सिस्टम के माध्यम से हर प्लांट के प्रदर्शन की लगातार निगरानी और उसका मूल्यांकन किया जाएगा. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कौन सा सोलर प्लांट अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार बिजली पैदा कर रहा है और कहां तकनीकी खराबी या उत्पादन में कमी आ रही है. सोलर परियोजनाओं के रखरखाव और प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी भी एक ही डिजिटल सिस्टम में उपलब्ध रहेगी. इससे खराबी की पहचान और उसके समाधान में तेजी आने की उम्मीद है. साथ ही राज्य में चल रही सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रबंधन को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा.  

पीएम श्री केवी क्रमांक 5 में गुरुओं को नमन, हर्षोल्लास से मना शिक्षक दिवस

ग्वालियर। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 5, शास्त्री नगर में शिक्षक दिवस समारोह उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री मनीष तिलक, प्राचार्य के स्वागत एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान, स्नेह एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट किए। वरिष्ठ विद्यार्थियों ने शिक्षक की भूमिका निभाते हुए कक्षाओं का संचालन किया और अध्यापन के दायित्व का अनुभव प्राप्त किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य, भाषण एवं अन्य रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। अपने प्रेरणादायी संबोधन में प्राचार्य ने शिक्षकों को समाज एवं राष्ट्र निर्माण का आधार स्तंभ बताते हुए कहा कि “शिक्षक वह दीपक है, जो अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।” उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षकों का सम्मान करने तथा उनके मार्गदर्शन पर चलकर जीवन में सफलता प्राप्त करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। शिक्षक दिवस समारोह विद्यालय परिवार के लिए प्रेरणादायी, भावपूर्ण एवं अविस्मरणीय अवसर बन गया।

5 महीने में टूटी बादशाह-ईशा की शादी, तलाक पर पहली बार बोलीं एक्ट्रेस- कहने को बहुत कुछ है

मुंबई  ईशा रिखी…पिछले कुछ महीनों से यह नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है और अब एक बार फिर चर्चा में है। ईशा रिखी पांच महीने पहले तब सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने रैपर-सिंगर बादशाह के साथ गुपचुप शादी की थी। पर उनकीं ने तस्वीरें शेयर कर पोल खोल दी थी। अब ईशा रिखी 'बिग बॉस 20' को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें वह बतौर कंटेस्टेंट नजर आएंगी। पर इसी बीच उन्होंने और बादशाह ने तलाक का ऐलान कर दिया है। दोनों की शादी 5 महीनों में ही टूट गई है और वो आपसी सहमति से अलग हो रहे हैं। ईशा रिखी कौन हैं, बादशाह से कैसे मिलीं और कैसे उनकी गुपचुप शादी के वीडियो ने तहलका मचा दिया था, यहां जानिए। साथ ही जानिए कि ईशा रिखी ने बादशाह पर क्या आरोप लगाए और क्यों उनकी शादी में दरार आई। ईशा ने कहा, “मैं सार्वजनिक तौर पर अपनी निजी जिंदगी का तमाशा नहीं बनाना चाहती। मैं लोगों के सामने अपने निजी रिश्ते की गंदगी नहीं फैलाऊंगी, क्योंकि मैं ऐसी नहीं हूं।” जब उनसे बादशाह के साथ मौजूदा रिश्ते के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “यह बहुत जटिल है। मैं उस दिन का इंतजार कर रही हूं, जब मैं इस बारे में पूरी तरह बात कर सकूं। जब मुझमें सभी सवालों का सामना करने और उनके जवाब देने की ताकत होगी। लेकिन अभी मैं ऐसी लड़ाई लड़ रही हूं।” ईशा ने कहा, “मैं सिर्फ इसलिए कड़वी इंसान नहीं बनना चाहती, क्योंकि मेरे साथ कुछ खराब चीजें हुईं। लेकिन मुझे पता है कि मुझे ठीक होने में काफी समय लग सकता है।” सोशल मीडिया के जरिए की तलाक की घोषणा रैपर बादशाह और पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी ने सोशल मीडिया के जरिए सीक्रेट शादी के 5 महीने बाद ही एक-दूसरे से अलग होने का ऐलान कर दिया है। बादशाह ने लिखा, "हमारा यह फैसला आपसी सहमति से लिया गया है। हम सभी से गुजारिश करते हैं कि इस समय हमारी प्राइवेसी का ध्यान रखें। इस मुद्दे पर हमारा यह पहला और आखिरी बयान है, इसलिए हमारी रिलेशनशिप को लेकर आगे कोई अंदाजा न लगाया जाए।" ईशा रिखी ने भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर यही बयान शेयर किया है। कौन हैं ईशा रिखी? ईशा रिखी एक पंजाबी एक्ट्रेस और मॉडल हैं। उन्होंने साल 2013 में पंजाबी फिल्म 'जट बॉयज पुत्त जट दे' से एक्टिंग डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने कई और पंजाबी फिल्मों में काम किया। साल 2018 में ईशा रिखी ने फिल्म 'नवाबजादे' से बॉलीवुड में कदम रखे। हालांकि, साल 2019 से ईशा रिखी फिल्मों और एक्टिंग से दूर हैं। उन्होंने कोई नया एक्टिंग प्रोजेक्ट साइन नहीं किया। ईशा जब 12वीं क्लास में थीं, तभी से मॉडलिंग शुरू कर दी थी और फिर एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में भी काम किया था। ईशा रिखी-बादशाह की लव स्टोरी और गुपचुप शादी रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईशा रिखी और बादशाह शादी से पहले चार साल तक रिश्ते में रहे। उनकी पहली मुलाकात 2021 में कॉमन दोस्तों के जरिए हुई थी। बताया जाता है कि उनके बीच नजदीकियां बढ़ीं और वो एक-दूसरे को डेट करने लगे। हालांकि, बादशाह और ईशा रिखी ने अपना रिश्ता छुपाकर रखा। इसके बाद उन्होंने मार्च 2026 में शादी कर ली। शादी की पोल तब खुली, जब बादशाह की सास यानी ईशा रिखी की मम्मी ने सोशल मीडिया पर शादी की तस्वीरें और वीडियो शेयर किया। वहीं, जून 2026 में ईशा रिखी ने सोशल मीडिया पर 'आस्क मी एनीथिंग'सेशन के दौरान बादशाह से शादी की बात कन्फर्म की। साथ ही इंस्टाग्राम स्टोरी पर बादशाह संग अपनी शादी की कुछ तस्वीरें भी शेयर की थीं। लेकिन अब बादशाह से तलाक के कारण ईशा रिखी सुर्खियों में हैं। जुलाई 2026 से ही दोनों के बीच अनबन की खबरें आ रही थीं। उसी महीने में ईशा ने बादशाह के साथ कुछ तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर कर एक पोस्ट लिखा था, जिसमें उन्होंने डर और चुप्पी की बात कही थी। साथ में टूटे दिल का इमोजी बनाया था। ईशा ने लिखा था, 'कुछ लड़ाइयां ऐसी होती हैं, जिनके निशान बाहर से दिखाई नहीं देते। मैं लंबे समय तक चुप रही क्योंकि मुझे डर था। मुझे पति के प्रभाव, ताकत और बाकी चीजों से घबराहट होती थी। मैंने खुद को यह यकीन दिला लिया था कि चुप रहना ही सबसे सेफ है। चुप रहने का मतलब कभी भी मंजूरी देना नहीं था। यह तो बस जिंदा रहने का एक तरीका था। आज, मैं डर के बजाय हिम्मत को चुन रही हूं।'  

बिहार के 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश के आसार

 पटना बिहार में कल यानी 6 सितंबर 2026 को मौसम कई इलाकों में बदला हुआ रह सकता है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधि देखने को मिल सकती है. कुछ जिलों में तेज हवा के साथ मौसम खराब होने की संभावना है. उत्तर और उत्तर-पूर्व के कई जिलों को ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है. दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार के कई जिलों में कोई चेतावनी नहीं दी गई है. इन सात जिलों में ऑरेंज अलर्ट कल उत्तर-पूर्वी बिहार के 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इनमें सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार शामिल हैं. इन जिलों में मौसम खराब होने के साथ गरज-चमक और तेज बारिश हो सकती हैं. बारिश और आंधी-तूफान के दौरान लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है. खेतों और खुले इलाकों में काम करने वाले लोगों को भी विशेष रूप से मौसम पर नजर रखने की जरूरत है. येलो अलर्ट भी कई जिलों में जारी येलो अलर्ट वाले जिलों की संख्या अधिक है. इनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, खगड़िया, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, बांका और जमुई शामिल हैं. इन जिलों में भी मौसम को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. बक्सर, भोजपुर, पटना, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, गया, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर में कोई चेतावनी नहीं दी गई है. पिछले 24 घंटे के दौरान कैसा रहा मौसम मौसम विभाग के 5 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार बिहार में पिछले 24 घंटे के दौरान बारिश सामान्य रही. राज्य में अब तक 524.1 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि सामान्य बारिश 812.2 मिमी होनी चाहिए थी. इस तरह बारिश में 35 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. 4 सितंबर को कैमूर के भभुआ में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. 5 सितंबर को पश्चिम चंपारण के वाल्मीकि नगर में सबसे कम न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहा. पिछले 24 घंटे में सीवान के नौतन में 80.8 मिमी बारिश सबसे अधिक दर्ज की गई. इसके बाद सीवान के गोरियाकोठी में 80.2 मिमी और सीवान के भगवानपुर हाट में 78.6 मिमी बारिश दर्ज हुई.