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‘UP’ यानी अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा प्रदेश की नई औद्योगिक ताकत: CM योगी

यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 यूपी का मतलब अल्टीमेट पोटेंशियल, टेक्सटाइल सेक्टर बनेगा नई औद्योगिक ताकत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 का उद्घाटन, यूपी टेक मित्र पोर्टल तथा हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का भी किया शुभारंभ टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू, 163 करोड़ के लेटर ऑफ कम्फर्ट, 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण सीएम बोले- कारीगर सिर्फ सप्लायर नहीं, ब्रांड ओनर और युवा जॉब सीकर नहीं, एंटरप्रेन्योर बनें  कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार देने वाला सेक्टर है वस्त्र उद्योग, यूपी में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का मतलब अप यानी ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ है। उत्तर प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन, उद्योग, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार है। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स भी हमारे पास है। अब इसी ताकत के सहारे उत्तर प्रदेश को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाना है। हमारा लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड होते हुए ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित करने का है।   मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च करने के साथ हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर में 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों के एमओयू किए गए। साथ ही 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिष्ठित उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, प्रदेश के परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत और अभिनंदन किया। फैब्रिक सेक्टर में यूपी चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्षों पुरानी है। वैदिक साहित्य से लेकर रामायण और महाभारत तक में काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी, कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम और मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल की संभावनाएं प्रदेश की विरासत और औद्योगिक क्षमता का प्रमाण हैं। प्रदेश में दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर इस सेक्टर की असली ताकत हैं। कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार का सृजन वस्त्र उद्योग करता है। उत्तर प्रदेश फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में देश में तीसरे स्थान पर है और कुल फैब्रिक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपी इस सेक्टर में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है। वर्ष 2025-26 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात के साथ गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंचा है।   यूपी के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2030 तक 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी और 100 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय संकल्प में उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता से भागीदारी करेगा। ओडीओपी के माध्यम से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं भी इस सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर हो रही हैं। दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स प्रदेश में उपलब्ध है, जो टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 2017 से पहले वसूली की पर्ची लेकर लौट जाते थे निवेशक मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की पहचान ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ की बन गई थी। हर जनपद में माफिया की समानांतर सरकार चलती थी। कानून व्यवस्था चौपट थी। माफिया जहां हाथ रख देता, वह जमीन उसकी हो जाती और तत्कालीन सरकार मौन बनी रहती थी। निवेशक व्यापार का सपना लेकर आता था और वसूली की पर्ची लेकर लौट जाता था। दंगे, कर्फ्यू, गुंडा टैक्स और माफिया के कारण उद्योग लगाना मुश्किल था। बिजली और विकास एक परिवार तक सीमित था। आज यूपी कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव से मुक्त है। अब किसी ने बेटी, व्यापारी या निवेशक की सुरक्षा में सेंध लगाने का दुस्साहस किया तो उसके लिए दो ही जगह होंगी- जेल या जहन्नुम। अब कोई यूपी में खुलेआम पिस्टल लहरा कर नहीं चल सकता। यूपी का नाम सुनकर दूरी बना लेते थे लोग सीएम ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के नागरिकों के सामने पहचान का संकट पैदा हो गया था। यूपी का नाम सुनकर प्रदेश के बाहर लोग यहां के नागरिकों को किराये पर मकान देने और होटल में कमरा देने तक से कतराते थे। किसी समाज और नागरिक के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है। यूपी का परिचय देने पर व्यक्ति को कई बार सामाजिक रूप से दूरी का सामना करना पड़ता था। यहां कोई पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से नहीं गुजरता था। उत्सव से पहले ही उपद्रव शुरू हो जाता था। पूरे प्रदेश में लोग दंगों की आग में झुलसते थे। बरेली, मथुरा के कोसीकलां, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे स्थानों पर बड़े दंगे हुए। व्यापक पैमाने पर पलायन हुआ और महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा। अराजकता का शिकार बनीं कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर की ऐतिहासिक कपड़ा मिलें भी इसी अराजक व्यवस्था की शिकार बनीं। मगहर की कताई मिल 1977 में बनी और 1997 में बंद हो गई। बुनकरों और छोटे टेक्सटाइल उद्यमियों को बैंक से ऋण मिलने में भी कठिनाई होती थी। डीबीटी की व्यवस्था के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ न तो नागरिकों तक पहुंचता था और न ही उद्यमियों तक। 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। अब यहां कानून का राज है। यूपी के पास हैं 36 सेक्टोरल पॉलिसी सीएम ने कहा कि कानून व्यवस्था में बदलाव और निवेश अनुकूल नीतियों का परिणाम है कि आज प्रदेश के पास 36 … Read more

MP के 24 जिलों में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को मिल रही रफ्तार, RDSS के तहत उपकेंद्रों और ट्रांसफॉर्मर का होगा विस्तार

आरडीएसएस से मजबूत हो रहा विद्युत नेटवर्क, 33/11 केवी उपकेंद्रों और ट्रांसफॉर्मर क्षमता वृद्धि के कार्यों में तेजी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 24 जिलों में अधोसंरचना विकास को मिल रही गति भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने और भविष्य की विद्युत मांग को ध्यान में रखते हुए आरडीएसएस योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विद्युत अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। योजना के तहत नए 33/11 केवी उपकेंद्रों के निर्माण, पावर ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता वृद्धि तथा 33 केवी लाइनों के विस्तार के कार्य प्रगति पर हैं। कंपनी के विभिन्न सर्किलों में 31 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों का कार्य प्रस्तावित है, जिनमें से 10 उपकेंद्रों का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष उपकेंद्रों पर भी निर्माण एवं संबंधित कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। 332.6 किलोमीटर 33 केवी लाइन का कार्य पूर्ण आरडीएसएस के तहत कंपनी द्वारा विद्युत नेटवर्क के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए कुल 722.6 किलोमीटर 33 केवी लाइन का प्रावधान किया गया है। इसमें से अब तक 332.6 किलोमीटर लाइन का कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष कार्यों को भी प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। नई 33 केवी लाइनों से आगामी समय में विभिन्न क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। ट्रांसफॉर्मर क्षमता बढ़ाकर भविष्य की मांग के लिए तैयारी योजना के तहत विभिन्न 33/11 केवी उपकेंद्रों में पावर ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाने के कार्य भी किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 3.15 एमवीए क्षमता वृद्धि के 78 कार्यों में 60, 5 एमवीए के 17 में से 16, जबकि 3.15 से 5 एमवीए क्षमता वृद्धि के 80 में से 63 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसी प्रकार 5 से 8 एमवीए के सभी 4, 8 से 10 एमवीए के सभी 5 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। 5 से 10 एमवीए क्षमता वृद्धि के 92 कार्यों में से 73 कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं। उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ आरडीएसएस के अंतर्गत किए जा रहे ये कार्य विद्युत प्रणाली की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ओवरलोडिंग कम करने, वोल्टेज सुधारने, नए क्षेत्रों की बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करने तथा आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कंपनी द्वारा उपकेंद्र, ट्रांसफॉर्मर और 33 केवी लाइन के कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। आगामी चरण में शेष कार्यों को गति देकर मजबूत, आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विद्युत वितरण नेटवर्क तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्य उपलब्धियां एक नजर में       31 नए 33/11 केवी उपकेंद्र प्रस्तावित, 10 पूर्ण        722.6 किमी 33 केवी लाइन में 332.6 किमी कार्य पूर्ण        3.15 एमवीए क्षमता वृद्धि के 60 कार्य पूर्ण        5 एमवीए के 16 कार्य पूर्ण        3.15 से 5 एमवीए के 63 कार्य पूर्ण        5 से 8 एमवीए के सभी 4 कार्य पूर्ण        8 से 10 एमवीए के सभी 5 कार्य पूर्ण        5 से 10 एमवीए के 73 कार्य पूर्ण

पुराने रेलवे क्वार्टर होंगे ध्वस्त, अब G-4 या उससे अधिक मंजिल के बहुमंजिला आवास बनाने की तैयारी

अंबाला रेलवे की पुरानी और जर्जर कालोनियों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। रेलवे बोर्ड ने 50 साल से अधिक पुराने और असुरक्षित घोषित किए जा चुके रेलवे क्वार्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह आधुनिक बहुमंजिला आवास बनाने की योजना तैयार की है। अब एकल मंजिल या कम ऊंचाई वाली कालोनियों के बजाय जमीन का बेहतर उपयोग करते हुए जी-4 या उससे अधिक मंजिल के भवन बनाए जा सकेंगे। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों और केंद्रीय संगठनों को असुरक्षित रेलवे कालोनियों की प्राथमिकता सूची तैयार कर कार्ययोजना भेजने के निर्देश दिए हैं। नई आवास नीति के तहत रेलवे का जोर कम जमीन में अधिक कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने पर है। स्थानीय भवन नियमों के अनुसार बहुमंजिला भवनों का निर्माण किया जाएगा। इससे दशकों पुराने छोटे और जर्जर क्वार्टरों की जगह कर्मचारियों को सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा। अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़े जा सकेंगे प्रोजेक्ट रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार इन आवासीय पुनर्निर्माण परियोजनाओं के लिए राशि वर्क्स प्रोग्राम के प्लान हेड-51 यानी कर्मचारी सुविधाओं के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। जहां संभव होगा, इन परियोजनाओं को स्टेशन पुनर्विकास और अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़ा जा सकेगा। नए रेलवे क्वार्टर कर्मचारियों को सौंपने से पहले उन्हें एचआरएमएस के एस्टेट माड्यूल पर दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। इससे आवासों के आवंटन और रेलवे की संपत्तियों के प्रबंधन को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा सकेगा। नाम न छापने की शर्त पर मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि बोर्ड द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार कंडम आवासों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। अंबाला मंडल की पुरानी कालोनियों को भी मिल सकता है लाभ रेलवे बोर्ड के फैसले से अंबाला मंडल की पुरानी रेलवे कालोनियों के पुनर्निर्माण की उम्मीद भी बढ़ी है। मंडल स्तर पर पुराने और असुरक्षित आवासीय भवनों की स्थिति का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, अंबाला मंडल की कौन-कौन सी कालोनियां पहले चरण में शामिल होंगी, यह संबंधित जोनल रेलवे की प्राथमिकता सूची और स्वीकृत कार्ययोजना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे को आगामी पिंक बुक और वर्क्स प्रोग्राम में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल करने के निर्देश दिए हैं। ये होंगे फायदे – नई व्यवस्था में टाइप-2 और टाइप-3 रेलवे क्वार्टरों का कवर्ड एरिया बढ़ाया जाएगा। – इन्हें आधुनिक दो और तीन कमरों वाले आवास के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। – कर्मचारियों को पुराने छोटे कमरों की बजाय पहले से अधिक जगह वाले और सुविधाजनक आवास मिल सकेगी। – तीन से अधिक मंजिल वाले भवनों में लिफ्ट की व्यवस्था अनिवार्य होगी। – छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र, आधुनिक रसोई की फिटिंग और वाहनों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था प्रमुख चुनौतियां – पुराने क्वार्टरों को तोड़ने से पहले वहां रह रहे कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करनी होगी। – बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए पर्याप्त बजट, निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित समय में काम पूरा करना चुनौती होगी। – कालोनियों को चरणबद्ध तरीके से खाली कराने के दौरान कर्मचारियों को अस्थायी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।  

अहमदाबाद में भारत का तीरंदाजी जलवा, टोमन-श्याम और हरविंदर-विजय ने जीता गोल्ड

अहमदाबाद अहमदाबाद में जारी वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज़ (स्टेज III) में मंगलवार को भारत ने दो गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. पुरुषों की कंपाउंड और रिकर्व टीमों ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि स्वाति चौधरी ने दो मेडल जीते. मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन टोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी ने इराक को 152-139 से हराकर पुरुषों की कंपाउंड टीम का गोल्ड मेडल जीता. जबकि हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने स्लोवाकिया को 6-2 से हराकर पुरुषों की रिकर्व टीम का खिताब अपने नाम किया. भावना और पूजा की महिला रिकर्व टीम ने चीन से 0-6 से हारने के बाद सिल्वर मेडल जीता, जबकि स्वाति और आदिल मोहम्मद नज़ीर अंसारी मिक्स्ड टीम W1 (रिकर्व/कंपाउंड) इवेंट में रनर-अप रहे और उन्हें सिल्वर से संतोष करना पड़ा. इसके बाद स्वाति दोपहर के सेशन में लौटीं और इंडिविजुअल W1 कैटेगरी में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. उन्होंने इंडिविजुअल न्यूट्रल एथलीट (AIN) झंडे के तहत खेलते हुए रूस की एलेना क्रुटोवा को 6-2 से हराया. शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी महिला कंपाउंड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने से भी क्योंकि उन्हें तीसरे स्थान के लिए हुए प्लेऑफ़ में चीन से हार का सामना करना पड़ा.   स्वामी – टोमन के गोल्ड से हुई दिन की शुरुआत मंगलवार को दिन की शुरुआत में स्वामी और टोमन ने इराक के अब्बास काधिम और अनवर अलदावोड पर शानदार जीत के साथ पुरुषों की कंपाउंड टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता. भारतीयों ने धीमी शुरुआत की और पहले राउंड में 8 स्कोर किया, लेकिन जल्द ही अपनी लय पा ली. उन्होंने अगले 12 तीरों में केवल पांच अंक गंवाए और मजबूत बढ़त बना ली. इसके बाद स्वामी और टोमन ने लगातार अच्छा स्कोर किया और उनके सटीक तीरों ने इराक के लिए वापसी की बहुत कम गुंजाइश छोड़ी. हरविंदर – सुंडी ने भी जीता गोल्ड हरविंदर और सुंडी ने शुरुआती सेट में पिछड़ने के बाद वापसी की और स्लोवाकिया के डेविड इवान और डेनिस इवान को 6-2 से हराया. उन्होंने मैच 34-37, 36-31, 38-34, 35-31 से जीता.  भारत को शुरुआत में संघर्ष करना पड़ा था. पहले सेट में 7 स्कोर किया और कोई एरो 10 पर नहीं लगा, जिससे स्लोवाकिया को शुरुआती बढ़त मिल गई. लेकिन भारतीय टीम जल्द ही अपनी शूटिंग की लय में आ गई और दो बार के पैरालंपिक मेडलिस्ट हरविंदर ने इसकी अगुवाई की. मुकाबले में अहम मोड़ तब आया जब तीसरे सेट में भारत ने तीन बार 10 का स्कोर करके 4-2 की बढ़त बना ली. चौथे सेट में उन्होंने अपना संयम बनाए रखा और वापसी करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. भावना- पूजा को करना पड़ा सिल्वर से संतोष एकतरफा फाइनल में चीन से 0-6 (23-34, 33-35, 30-31) से हारने के बाद भावना और पूजा को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. भारतीय टीम को पहले सेट से ही स्कोरिंग लय पाने में संघर्ष करना पड़ा, जिसमें उन्होंने 4, 5 और 6 का स्कोर किया. दूसरे सेट में उन्होंने तीन बार 8 और एक बार 9 का स्कोर करके सुधार किया, लेकिन अंकों के अंतर को पाट नहीं पाए. तीसरे सेट में भी भारत को संघर्ष करना पड़ा, जिसमें उन्होंने 5 और 7 का स्कोर किया. पूरे फाइनल के दौरान वे एक बार भी 10 का स्कोर नहीं कर पाए और चीन ने आसानी से गोल्ड मेडल जीत लिया. स्वाति ने एक दिन में जीते दो मेडल स्वाति और आदिल मोहम्मद नज़ीर अंसारी ने मिक्स्ड टीम W1 (रिकर्व/कंपाउंड) इवेंट में सिल्वर मेडल जीता. वे चेक गणराज्य की सारका पुल्तार मुसिलोवा और डेविड ड्राहोनिनस्की से 1-5 (31-38, 33-37, 33-33) से हार गए. चेक टीम ने शुरुआती दो राउंड जीतकर 4-0 की बढ़त बना ली. भारत ने वापसी करते हुए तीसरा राउंड ड्रॉ कराया, लेकिन वे मुकाबले को निर्णायक दौर तक नहीं ले जा पाए और चेक गणराज्य ने गोल्ड मेडल जीत लिया. बता दें, W1 (रिकर्व/कंपाउंड) कैटेगरी गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले एथलीटों के लिए पैरा-आर्चरी की एक खास क्लास है.  W1 आर्चर व्हीलचेयर से मुकाबला करते हैं और एक ही इवेंट में रिकर्व या कंपाउंड बो (धनुष) का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके बाद स्वाति दोपहर के सेशन में लौटीं और W1 ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में एलेना को 6-2 से हराकर दिन का अपना दूसरा मेडल जीता. स्वाति ने पहला राउंड 28-25 से जीता, जबकि अगले दो राउंड 27-27 और 26-26 से टाई रहे. फिर उन्होंने निर्णायक आखिरी राउंड में 26-24 से जीत हासिल की और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. इस तरह स्वाति ने एक ही दिन में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीते. इस बीच, महिलाओं के कंपाउंड टीम इवेंट में चीन की वांग हुइटिंग और गाओ फांगक्सिया से ब्रॉन्ज़ मेडल का प्लेऑफ़ हारने के बाद शीतल और पायल मेडल जीतने से बाल-बाल चूक गईं. भारतीय जोड़ी अपने 16 तीरों में लगातार अच्छा स्कोर बनाए रखने के लिए संघर्ष करती रही और मुकाबले में बने रहने के लिए ज़रूरी हाई-स्कोरिंग एंड नहीं खेल पाई. उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन दूसरे एंड में रहा, जब वे 73-74 के स्कोर के साथ सिर्फ़ एक पॉइंट पीछे थीं. हालांकि, तीसरे एंड में खराब प्रदर्शन के कारण चीन ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीत लिया.  

75 दिन तक चलेगा बस्तर दशहरा, UNESCO धरोहर सूची में शामिल कराने की तैयारी; बलराम मांझी बने समिति के उपाध्यक्ष

आस्था, परंपरा और भव्यता के रंग में सजेगा ऐतिहासिक बस्तर दशहरा 75 दिवसीय पर्व को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प, बलराम मांझी बने दशहरा समिति के नए उपाध्यक्ष रायपुर,  ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा पर्व 2026 इस वर्ष भी पूरी भव्यता, आस्था और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। पर्व की तैयारियों, पूजा विधान, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न आयोजनों को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने की। बैठक में बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित समस्त मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं टेम्पल स्टेट समिति के सदस्य उपस्थित रहे। बलराम मांझी निर्विरोध नहीं, बहुमत से चुने गए नए उपाध्यक्ष बैठक की शुरुआत औपचारिक प्रक्रियाओं के साथ हुई। इसके बाद बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन कराया गया। बचेली परगना के बीरो मांझी ने अर्जुन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा, जबकि सोनाबाल परगना के समुन्द मांझी ने बलराम मांझी के नाम का प्रस्ताव किया। सदस्यों द्वारा हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें स्पष्ट बहुमत के आधार पर बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने देवसराय सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के संबंध में सुझाव दिए। केवल पर्व नहीं, विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत बैठक को संबोधित करते हुए सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने पर्व की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग करने की बात कही। उन्होंने बताया कि बस्तर दशहरा के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से सकारात्मक चर्चा हुई है। सांसद ने कहा कि 75 दिनों तक चलने वाले इस विशिष्ट पर्व की मौलिकता और परंपरागत स्वरूप को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पर्व अवधि के दौरान समानांतर आयोजनों की अनुमति नहीं देने, देवस्थलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा प्रमुख पूजा विधान स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग और पक्की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का साझा संकल्प बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1423 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा मैसूर और कुल्लू दशहरा से भी प्राचीन है। उन्होंने बस्तर दशहरा को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए सामूहिक प्रयास और साझा संकल्प को दोहराया। उन्होंने मावली परघाव के लिए संबंधित स्थलों एवं मार्गों की विशेष साफ-सफाई, देवी-देवताओं और आंगा देव के सम्मानपूर्वक आगमन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही मांझी-चालकी से पर्व के दौरान पारंपरिक वेशभूषा एवं पगड़ी धारण करने का आग्रह किया। भंजदेव ने मेंबर-मेंबरीन के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए मेंबरीन के मासिक मानदेय में वृद्धि करने का प्रस्ताव भी दशहरा समिति के समक्ष रखा। 1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित बैठक में दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने बस्तर दशहरा पर्व के लिए एक करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया। उन्होंने पर्व के दौरान संपन्न होने वाले विभिन्न पूजा विधानों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी समिति के सदस्यों को दी। बैठक में पूजा स्थलों, मार्गों, देवस्थलों, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। पर्व की विशिष्ट परंपराओं को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के साथ आयोजन को सफल बनाने पर विशेष जोर दिया गया। शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए प्रशासन तैयार कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने बस्तर दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने पर्व से जुड़े सभी प्रमुख स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने तथा सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया। बैठक में मौजूद मांझी-चालकी, पुजारी, मेंबर-मेंबरीन और समिति के सदस्यों ने भी विभिन्न पूजा विधान एवं आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं के संबंध में सुझाव दिए। इस प्रकार बैठक में बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा, जनभागीदारी, धार्मिक आस्था और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के समन्वय के साथ वर्ष 2026 के पर्व को भव्य एवं गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित करने की रूपरेखा पर व्यापक चर्चा हुई।

गैस सिलेंडर बुकिंग का बदला नियम, ग्रामीणों के लिए 45 दिन की सीमा खत्म

जयपुर  केंद्र सरकार ने राजस्थान समेत देश भर के रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा फैसला लिया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू एलपीजी उपभोक्ता भी शहरवासियों की तरह 25 दिनों के अंतराल पर अपना गैस सिलेंडर बुक करा सकेंगे। पहले ग्रामीण इलाकों के लिए यह सीमा 45 दिनों की तय की गई थी। राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने दी जानकारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया, सरकार ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी प्रमुख तेल विपणन कंपनियों को इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी जंग और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई थी। इससे देश में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ गया था। ऐसे में सरकार ने घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी व कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए रिफिल बुकिंग के बीच अंतर बढ़ा दिया था। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन बाद अगली LPG बुकिंग की अनुमति थी। सरकार ने कई सख्त कदम उठाए एलपीजी गैस की कमी से निपटने और आपूर्ति नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने मार्च में 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत कई सख्त कदम उठाए थे। इसी अस्थायी मांग प्रबंधन रणनीति के तहत शहरी क्षेत्रों में एलपीजी रिफिल का अंतराल 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तय कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया था कि प्रोपेन (C3) और ब्यूटेन (C4) जैसी गैसों का उपयोग प्राथमिकता से घरेलू LPG के उत्पादन में किया जाए, ताकि आम जनता को रसोई गैस की किल्लत का सामना न करना पड़े। मंत्रालय ने की समीक्षा सोमवार यानी 7 सितंबर को पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा ओएमसी के अध्यक्षों और प्रबंध निदेशकों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया कि अब स्थिति में काफी सुधार हुआ है। सुरेश गोपी ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से मंत्रालय द्वारा जारी पत्र की प्रति साझा करते हुए लिखा, वर्तमान में एलपीजी आपूर्ति की बेहतर होती स्थिति और रिफिल बैकलॉग (बकाया ऑर्डर) में आई भारी कमी को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने मौजूदा रिफिल बुकिंग अंतराल की समीक्षा की है। अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सभी घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए 25 दिनों का एक समान रिफिल बुकिंग अंतराल लागू करने का निर्णय लिया गया है। व्यावसायिक एलपीजी पर पहले ही हट चुकी हैं पाबंदियां घरेलू LPG की बुकिंग के नियमों में ढील देने से पहले जून में सरकार ने कमर्शियल LPG की सप्लाई पर लगी पाबंदियां भी हटा दी थीं। तेल कंपनियों को युद्ध से पहले जितनी मात्रा में गैर-घरेलू LPG की सप्लाई होती थी, उसे फिर से सामान्य स्तर पर शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही, उद्योगों का काम प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें संकट से पहले होने वाली खपत की 50% तक LPG सप्लाई की अनुमति दे दी गई थी। वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते भारत में एलपीजी की कीमतों में भी वृद्धि देखी गई थी। मार्च में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद जून में 29 रुपए की और वृद्धि हुई। आपूर्ति की स्थिति सुधरने और बुकिंग अंतराल घटने से देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब अगला सिलेंडर बुक करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

रेलवे की बड़ी कार्रवाई की तैयारी, हरियाणा में 50 साल पुराने मकानों पर चलेगा बुलडोजर

अंबाला. रेलवे की पुरानी और जर्जर कालोनियों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। रेलवे बोर्ड ने 50 साल से अधिक पुराने और असुरक्षित घोषित किए जा चुके रेलवे क्वार्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह आधुनिक बहुमंजिला आवास बनाने की योजना तैयार की है। अब एकल मंजिल या कम ऊंचाई वाली कालोनियों के बजाय जमीन का बेहतर उपयोग करते हुए जी-4 या उससे अधिक मंजिल के भवन बनाए जा सकेंगे। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों और केंद्रीय संगठनों को असुरक्षित रेलवे कालोनियों की प्राथमिकता सूची तैयार कर कार्ययोजना भेजने के निर्देश दिए हैं। नई आवास नीति के तहत रेलवे का जोर कम जमीन में अधिक कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने पर है। स्थानीय भवन नियमों के अनुसार बहुमंजिला भवनों का निर्माण किया जाएगा। इससे दशकों पुराने छोटे और जर्जर क्वार्टरों की जगह कर्मचारियों को सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा। अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़े जा सकेंगे प्रोजेक्ट रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार इन आवासीय पुनर्निर्माण परियोजनाओं के लिए राशि वर्क्स प्रोग्राम के प्लान हेड-51 यानी कर्मचारी सुविधाओं के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। जहां संभव होगा, इन परियोजनाओं को स्टेशन पुनर्विकास और अमृत भारत स्टेशन योजना से भी जोड़ा जा सकेगा। नए रेलवे क्वार्टर कर्मचारियों को सौंपने से पहले उन्हें एचआरएमएस के एस्टेट माड्यूल पर दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। इससे आवासों के आवंटन और रेलवे की संपत्तियों के प्रबंधन को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा सकेगा। नाम न छापने की शर्त पर मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि बोर्ड द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार कंडम आवासों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। अंबाला मंडल की पुरानी कालोनियों को भी मिल सकता है लाभ रेलवे बोर्ड के फैसले से अंबाला मंडल की पुरानी रेलवे कालोनियों के पुनर्निर्माण की उम्मीद भी बढ़ी है। मंडल स्तर पर पुराने और असुरक्षित आवासीय भवनों की स्थिति का आकलन कर प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, अंबाला मंडल की कौन-कौन सी कालोनियां पहले चरण में शामिल होंगी, यह संबंधित जोनल रेलवे की प्राथमिकता सूची और स्वीकृत कार्ययोजना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलवे को आगामी पिंक बुक और वर्क्स प्रोग्राम में ऐसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल करने के निर्देश दिए हैं। ये होंगे फायदे – – नई व्यवस्था में टाइप-2 और टाइप-3 रेलवे क्वार्टरों का कवर्ड एरिया बढ़ाया जाएगा। – इन्हें आधुनिक दो और तीन कमरों वाले आवास के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। – कर्मचारियों को पुराने छोटे कमरों की बजाय पहले से अधिक जगह वाले और सुविधाजनक आवास मिल सकेगी। – तीन से अधिक मंजिल वाले भवनों में लिफ्ट की व्यवस्था अनिवार्य होगी। – छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र, आधुनिक रसोई की फिटिंग और वाहनों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था प्रमुख चुनौतियां – – पुराने क्वार्टरों को तोड़ने से पहले वहां रह रहे कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करनी होगी। – बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए पर्याप्त बजट, निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित समय में काम पूरा करना चुनौती होगी। – कालोनियों को चरणबद्ध तरीके से खाली कराने के दौरान कर्मचारियों को अस्थायी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

पाकिस्तानी टीम का फ्लॉप शो, बाजिद खान ने पिचों पर उठाए सवाल; भारत का भी लिया नाम

नई दिल्ली इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पाकिस्तान टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है. शुरुआती दोनों टेस्ट मैच हारकर सीरीज गंवा चुकी पाकिस्तानी टीम के इस खराब खेल के बीच पूर्व क्रिकेटर बाजिद खान ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. अपनी टीम की नाकामियों पर बात करने के बजाय बाजिद खान ने पिचों को लेकर एक नई ही थ्योरी सामने रख दी है, जिसमें उन्होंने भारत का नाम भी घसीट लिया है. आउटसाइड एज शो के दौरान बाजिद खान ने इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड पर गंभीर आरोप लगा दिया. बाजिद खान ने आरोप लगाया कि जब भारतीय टीम इंग्लैंड के दौरे पर जाती है तो वहां जानबूझकर ऐसी पिचें तैयार की जाती हैं जिन पर मैच पूरे पांच दिन तक चले. वाजिद के मुताबिक इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ऐसा इसलिए करता है ताकि मैचों से ज्यादा से ज्यादा कमाई हो सके और उन्हें कोई आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े l   वहीं जब पाकिस्तान या कोई अन्य टीम इंग्लैंड जाती है तो मैच तीन या चार दिन में ही सिमट जाते हैं. जब बाजिद खान से पूछा गया कि क्या इस मामले की शिकायत आईसीसी से की जानी चाहिए तो उन्होंने साफ कहा कि यह दो देशों के बीच की सीरीज होती है, इसलिए इसमें आईसीसी कुछ नहीं कर सकता. भारत का दमदार रहा है प्रदर्शन बाजिद खान का यह बयान अपनी टीम के फ्लॉप शो से ध्यान भटकाने की कोशिश ज्यादा लगता है. आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय टीम जब भी इंग्लैंड दौरे पर जाती है तो वहां मैच का रोमांच देखने लायक होता है. साल 2025 में जब भारत ने इंग्लैंड का दौरा किया था तब 5 मैचों की सीरीज 2-2 से बराबर रही थी और क्रिकेट फैन्स को पूरे 25 दिन का जबरदस्त खेल देखने को मिला था. पाकिस्तान का रहा है बुरा हाल दूसरी तरफ मौजूदा सीरीज में पाकिस्तान का हाल बेहद बुरा रहा है. हेडिंग्ले में खेला गया पहला टेस्ट मैच पाकिस्तान महज तीन दिन के भीतर एक पारी और 103 रन से हार गया था. वहीं लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में भी इंग्लिश गेंदबाजों के आगे पाकिस्तानी बल्लेबाज टिक नहीं पाए और पूरी टीम पहली पारी में महज 110 रन पर ढेर हो गई, जिसके बाद चौथे दिन पाकिस्तान को 194 रन से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी.

समावेशी शिक्षा की ओर बड़ा कदम, प्रशस्त 2.0 के तहत 2.04 लाख शिक्षकों ने पूरा किया सेन्सिटाइजेशन

प्रशस्त 2.0 से समावेशी शिक्षा को नई ताकत, 2.04 लाख शिक्षक सेन्सिटाइजेशन वीडियो देखकर हुए ऑनबोर्ड – 2,03,823 शिक्षक प्रशस्त 2.0 से जुड़े, रामपुर में 44.38%, झांसी में 39.27% और पीलीभीत में 31.95% शिक्षक हुए ऑनबोर्ड – लगभग 40 मिनट के 10 वीडियो से स्क्रीनिंग से पहले होगा शिक्षकों का सेन्सिटाइजेशन – सभी बोर्डों के सरकारी, परिषदीय, प्राइवेट एडेड और प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों के शिक्षक होंगे शामिल लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार समावेशी शिक्षा को मजबूत करने के लिए शिक्षकों को बच्चों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने पर विशेष जोर दे रही है। इसी दिशा में प्रशस्त (PRASHAST) 2.0 के माध्यम से बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों को सेन्सिटाइजेशन वीडियो से जोड़ने का अभियान गति पकड़ रहा है।  आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,03,823 शिक्षक प्रशस्त 2.0 पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं तथा वीडियो देख रहे हैं, इनमें रामपुर में 44.38 प्रतिशत, झांसी में 39.27 प्रतिशत, पीलीभीत में 31.95 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 28.42 प्रतिशत और बलिया में 24.74 प्रतिशत शिक्षकों की सहभागिता दर्ज हुई है। इसके अलावा फतेहपुर, मथुरा, गोंडा, सीतापुर, बरेली और बस्ती की भी अच्छी सहभागिता रही। यह डिजिटल पहल शिक्षक को संवेदनशील, सजग और सक्षम बनाकर विद्यालयों में अधिक सहयोगी वातावरण तैयार करने तथा दिव्यांग बच्चों की समावेशी शिक्षा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।   40 मिनट में 10 वीडियो से संवेदनशीलता प्रशस्त एप एवं पोर्टल पर लगभग 40 मिनट के कुल 10 सेन्सिटाइजेशन वीडियो उपलब्ध हैं। राज्य के सभी बोर्डों के सरकारी/परिषदीय, प्राइवेट एडेड और प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों के शिक्षकों को ये वीडियो देखना अनिवार्य किया गया है। बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों में आवश्यक संवेदनशीलता और समझ विकसित करना इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य है। सभी शिक्षकों को जोड़ने के निर्देश राज्य स्तर से सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को संबंधित शिक्षकों को सेन्सिटाइजेशन वीडियो देखने के लिए निर्देशित करते हुए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से सरकारी और परिषदीय विद्यालयों के साथ प्राइवेट एडेड एवं प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों को भी एक समान प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। इससे बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षक स्तर पर संवेदनशीलता और समझ को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षक की समझ से बेहतर होगा बच्चों का सहयोग योगी सरकार की शिक्षा नीति में प्रत्येक बच्चे की आवश्यकता को समझकर उसके अनुरूप शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर है। प्रशस्त 2.0 इसी दृष्टिकोण को शिक्षक की क्षमता और संवेदनशीलता से जोड़ता है। सेन्सिटाइजेशन वीडियो के माध्यम से शिक्षक बच्चों को बेहतर समझने और स्क्रीनिंग प्रक्रिया को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए तैयार होंगे। कोट: प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को बच्चों की विविध आवश्यकताओं को समझने और उनके प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर मिल रहा है। सेन्सिटाइजेशन वीडियो के माध्यम से शिक्षक बच्चों की विशिष्ट आवश्यकताओं की स्क्रीनिंग प्रक्रिया को अधिक समझदारी और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ा सकेंगे। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक विद्यालय में समावेशी और सहयोगी वातावरण मजबूत हो। श्रीमती मोनिका रानी, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

पंजाब दौरे से पहले एक्टिव कांग्रेस, सचिन पायलट ने राहुल-प्रियंका से की मुलाकात; चुनावी रणनीति पर चर्चा

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। पंजाब का प्रभारी बनाने के बाद राहुल और प्रियंका के साथ पायलट की पहली मुलाकात है। इसे पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक में पंजाब कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, चुनावी रणनीति और पार्टी नेताओं के बीच चल रही गुटबाजी पर भी चर्चा हुई। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के इसी महीने पंजाब दौरे पर आने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के दौरे से पहले सचिन पायलट अगले सप्ताह पंजाब और चंडीगढ़ पहुंचेंगे। अपने पहले दौरे के दौरान वह प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। पायलट की इस बैठक के बाद ही राहुल गांधी के पंजाब दौरे का कार्यक्रम अंतिम रूप लेने की संभावना है। राहुल गांधी के सितंबर के अंत में पंजाब आने की संभावना जताई जा रही है। पायलट के पंजाब दौरे का कार्यक्रम अगले दो-तीन दिनों में अंतिम हो सकता है। पंजाब कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी सोमवार को नई दिल्ली में पायलट से मुलाकात कर चुके हैं। वड़िंग ने भी कहा था कि पायलट का पंजाब दौरा करीब एक सप्ताह के भीतर प्रस्तावित है। गुटबाजी खत्म करना पायलट के सामने बड़ी चुनौती पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से गुटबाजी पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई है। प्रदेश कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार चर्चा में रहे हैं। करीब दो महीने पहले कांग्रेस हाईकमान की ओर से विधानसभा चुनाव से जुड़ी समितियों के गठन के बाद चन्नी और उनके समर्थक विधायकों-सांसदों ने वड़िंग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। वड़िंग को प्रदेश प्रधान पद से हटाने की मांग भी उठी थी। इसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी सौंपते हुए सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया। अब पायलट के सामने विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के साथ ही प्रदेश कांग्रेस के विभिन्न धड़ों के बीच समन्वय कायम करने की चुनौती है। ऐसे में राहुल गांधी के पंजाब दौरे से पहले पायलट का प्रदेश में पहुंचकर नेताओं के साथ बैठक करना संगठनात्मक रूप से अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि राहुल गांधी के दौरे से पहले पंजाब कांग्रेस में आपसी तालमेल और चुनावी तैयारियों को लेकर स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए।