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पं. गोविंद बल्लभ पंत के योगदान को CM योगी ने किया याद, बोले- राष्ट्र निर्माण में भूमिका अविस्मरणीय

राष्ट्र निर्माण में पं. गोविंद बल्लभ पंत का योगदान अविस्मरणीय : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अर्पित की श्रद्धांजलि   काकोरी ट्रेन एक्शन के क्रांतिकारियों की पैरवी करने वालों में प्रमुख थे पं. पंत   स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री और देश के गृह मंत्री तक निभाई महत्वपूर्ण भूमिका   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। लोकभवन प्रांगण में आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पं. पंत की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, प्रख्यात अधिवक्ता और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत का देश की स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों के लिए समर्पित किया।   मुख्यमंत्री योगी ने स्वतंत्रता आंदोलन में पं. पंत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वर्ष 1925 के काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारियों के विरुद्ध अभियोग दर्ज किया तो उनकी पैरवी करने वाले प्रमुख अधिवक्ताओं में पंडित गोविंद बल्लभ पंत भी शामिल थे। उन्होंने अधिवक्ता के रूप में भी राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 1937 में पं. पंत को संयुक्त प्रांत का प्रीमियर चुना गया। देश की स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1947 में वह उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने। उस समय वर्तमान उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास और समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।   उन्होंने कहा कि बाद में पं. गोविंद बल्लभ पंत ने राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1954 में वह देश के गृह मंत्री बने और राष्ट्र की एकता तथा अखंडता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश के भीतर विभाजन की नींव डालने के प्रयासों का समाधान निकालने और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत का व्यक्तित्व और कृतित्व वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता रहेगा। उनकी जयंती पर प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

UP Tex-2026 में ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान, बोले- नई तकनीक और निवेश से तेजी पकड़ रहा उत्तर प्रदेश का वस्त्र उद्योग

बहुत तेजी से तरक्की कर रहा उत्तर प्रदेश का वस्त्र उद्योग: ब्रजेश पाठक  डिप्टी सीएम ने यूपी टेक्स-2026 के समापन समारोह को किया संबोधित  लखनऊ आज का उत्तर प्रदेश बहुत तेजी से तरक्की कर रहा है। वस्त्र उद्योग भी पीछे नहीं है। एक व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताओं में रोटी, कपड़ा और मकान होता है। आज वस्त्र उद्योग ने भी बहुत तरक्की की है। नई तकनीक के आधार पर वस्त्रो का उत्पादन हो रहा है।  यह कहना है प्रदेश की डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का। वे बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय “यूपी टेक्स-2026” के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। हमारी सरकार ने दिया वस्त्र उद्योग को मार्केट डिप्टी सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य में वस्त्र पहले से स्थापित है लेकिन उसे मार्केट नहीं मिल पाता था। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने वस्त्र को मार्केट दिया और आज उत्तर प्रदेश का वस्त्र देश और दुनिया में जा रहा है। उत्तर प्रदेश में वस्त्र उद्योग को लेकर काफी निवेश भी आ रहा है।  उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश के हथकरघा और वस्त्र क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है। समृद्ध हथकरघा एवं वस्त्र परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत  उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध हथकरघा एवं वस्त्र परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ लाखों कारीगरों, बुनकरों एवं उद्यमियों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। यह आयोजन प्रदेश की पारंपरिक कला, आधुनिक तकनीक, नवाचार और उद्यमिता को एक मंच पर लाने का सराहनीय कार्य है।हमारी सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों को सशक्त बनाते हुए उनके हुनर को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाए, ताकि ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को और मजबूती मिले। इस अवसर पर मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार राकेश सचान, प्रमुख सचिव, हथकरघा अनिल कुमार सागर, आयुक्त एवं निदेशक, हथकरघा के. विजेंद्र पांडियन, विशेष सचिव, हथकरघा शेषमणि पांडेय, महासचिव, सी०आई०टी०आई चंद्रिमा चटर्जी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

जिम्मेदारों पर कठोरतापूर्वक कार्रवाई की जाए सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आमजन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, सागर के अवैध शराब मामले की होगी न्यायिक जांच : मुख्यमंत्री डॉ. यादव लापरवाही और अनियमितता पर ज़ीरो टालरेंस, सबकी जवाबदेही तय की जाएगी सागर के अवैध शराब मामले में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा और कड़ा एक्शन इरशाद वली बनाए गए सागर संभाग के नए आईजी सागर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को विदेश दौरे से लौटते ही सागर में अवैध शराब से मृत्यु के मामले में बड़ा और कड़ा एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर के अवैध शराब मामले की न्यायिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि आमजन की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस मामले में सभी दोषियों पर कठोरतम  कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लापरवाही और अनियमितता पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। सभी की जवाबदेही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर दिलीप कुमार ने सागर संभाग के आयुक्त पद की कमान संभाल ली है। इस गंभीर मामले में मुख्यमंत्री ने सख्त और निर्णायक प्रशासनिक निर्णय लेते हुए इरशाद वली को सागर पुलिस रेंज के नए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) की जिम्मेदारी सौंपी है। जिम्मेदारों पर कठोरतापूर्वक कार्रवाई की जाए सुनिश्चित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में अवैध शराब से लोगों की हुई मृत्यु के प्रकरण में कठोरतापूवर्क कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाए। जिले में नशा मुक्ति अभियान भी चलाया जाए जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने मृतकों के प्रति अपनी शोक संवेदना भी व्यक्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र में अवैध शराब सामग्री को जब्त करने की कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज सागर के बुन्देलखंड मेडिकल चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में जनप्रतिनिधियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य शासन अपराध और असामाजिक गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिले के साथ-साथ आस-पास और सीमावर्ती क्षेत्रों में गहन जांच अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा जहाँ कहीं भी शंका या संदिग्ध गतिविधि की गुंजाइश हो, वहाँ तत्परता से पड़ताल की जाए और सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को कहा कि पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने कहा अपराधियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि किसी निर्दोष के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो। अफवाह फैलाने वालों पर करे सख्त कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शांति एवं सौहार्द बिगाड़ने की मंशा से सोशल मीडिया या अन्य विभिन्न माध्यमों पर अनावश्यक अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर पैनी नजर रखने और उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। समाज को साथ लेकर चलेगा नशा विरोधी अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में नशा विरोधी अभियान को गति देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे के अवैध कारोबार को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। साथ ही, नशा मुक्ति के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर जनजागरूकता और नशा मुक्ति के प्रभावी कार्यक्रम संचालित किए जाएं। प्रदेश में कठोर कानून का है प्रावधान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार के रहते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय कठोर कानून बनाया गया कि इसमें धारा 49 और बाकी 304 जोड़ते हुए हत्या से लेकर आजीवन कारावास और फांसी तक की सजा देने का प्रावधान है। इस प्रकार की घटना में लिप्त है, उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। हमने प्रशासन को फ्री हैंड दिया है कि वह उस पर कठोर से कठोर कार्रवाई करें, जिनके अवैध अतिक्रमण हैं या अलग से किसी ने इस प्रकार से अपना साम्राज्य चलाया है, उस पर भी काम करें। नशा मुक्ति के लिए सबको मिलकर प्रयास करने की जरूरत हमने पूरे राज्य में निर्देश जारी किए हैं कि नशा मुक्ति अभियान चलाने के लिए धार्मिक संस्थाओं के साथ, सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ अलग-अलग स्तर पर शासन की ओर से भी नशा मुक्ति के अभियान चलाने की आवश्यकता है। हम सबको इससे निपटने के लिए सामाजिक स्तर पर भी प्रतिबद्धता की जरूरत पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने अस्पताल के वार्डों में जाकर जाना बंडा के प्रभावितों का हाल, परिजन को बंधाया ढांढस बंडा के अवैध शराब मामले के प्रभावितों को त्वरित राहत देने और उनका ढांढस बंधाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने अस्पताल के वार्डों में जाकर भर्ती मरीजों का कुशलक्षेम जाना और पीड़ित परिवारों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने परिजन से कहा कि सरकार हर स्थिति में आपके साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रत्येक मरीज के पास जाकर उनके स्वास्थ्य की स्थिति देखी। पीड़ितों के परिजनों से पूछा—"परिवार में कौन-कौन है? चिंता मत करिए, सरकार हर स्थिति में आपके साथ खड़ी है।" निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने बीएमसी के प्रभारी डीन, अधीक्षक और वरिष्ठ चिकित्सकों से पीड़ितों को सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है। साथ ही आवश्यक दवाओं, टेस्ट और विशेषज्ञों की तैनाती 24 घंटे सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। इस दौरान दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी, रहली विधायक गोपाल भार्गव, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह, सागर विधायक शैलेन्द्र जैन, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, बंडा विधायक वीरेन्द्र सिंह लोधी, बीना विधायक श्रीमती निर्मला सप्रे, देवरी विधायक ब्रज बिहारी पटेरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, श्याम तिवारी, महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, नगर निगम अध्यक्ष वृन्दावन अहिरवार अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, डाक्टर्स, मौजूद थे।  

UP Education: AI से नहीं बदलेगी शिक्षकों की भूमिका, ब्रजेश पाठक ने बताया शिक्षा में तकनीक का नया रास्ता

एआई शिक्षकों का विकल्प नहीं, शिक्षा को नई दिशा देने का माध्यम : ब्रजेश पाठक इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स के शिक्षण संवाद कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ने रखे विचार  कहा- शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा उत्तर प्रदेश लखनऊ इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स की ओर से लखनऊ में आयोजित ‘शिक्षक संवाद’ कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर रोजगार समाप्त होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन तकनीक के विकास के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। एआई को चुनौती के बजाय अवसर के रूप में स्वीकार करने की जरूरत है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय हमारी गौरवशाली शैक्षिक विरासत के प्रतीक हैं। आज बदलते तकनीकी दौर में शिक्षा व्यवस्था को भी समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना जरूरी है। एआई और आधुनिक तकनीक का बेहतर उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।  शिक्षक भावी पीढ़ी के निर्माण और संस्कारों के संवाहक उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के निर्माण और संस्कारों के संवाहक हैं। बदलते शिक्षा परिवेश में शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। शिक्षा से जुड़े अभियानों के माध्यम से प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चे विद्यालयों से जुड़ रहे हैं। 83 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता से कर रहे काम डिप्टी सीएम ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में 83 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में करीब 40 मेडिकल कॉलेज थे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कौशल विकास के क्षेत्र में भी लगातार कार्य किया जा रहा है, जिससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें। ओडीओपी से पूरी दुनिया में मिली पहचान उन्होंने ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पहचान मिल रही है। स्थानीय हुनर और उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। शिक्षकों के सवालों का दिया जवाब कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों के साथ शिक्षा की गुणवत्ता, तकनीकी बदलाव, एआई, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े विषयों पर विस्तार से संवाद किया। शिक्षकों ने विभिन्न मुद्दों पर सवाल और सुझाव रखे, जिनका उपमुख्यमंत्री ने जवाब दिया। कार्यक्रम में इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स की प्रेरणा त्रिपाठी सहित लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों के सम्मानित एवं प्रतिष्ठित शिक्षण समुदाय के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।

अब AI खुद करेगा आपके रोजमर्रा के काम! Meta ने लॉन्च किया Muse, ईमेल, ट्रैवल बुकिंग और शॉपिंग तक होगा ऑटोमेटिक

 नई दिल्ली हर दिन के काम को आसान बनाने के लिए मेटा ने नया ऑटोनोमस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट लॉन्च किया है. यह AI आपके कई काम खुद कर सकता है. जैसे ईमेल भेजना, गाड़ी बेचने के लिए लिस्ट करना और कहीं घूमने जाने के लिए टिकट बुक करना।  मेटा इस नए ऐप के साथ नॉर्मल एआई से हटकर कुछ करना चाहता है. कंपनी ऐसी AI तैयार कर रही है, जो सिर्फ जवाब देने के बजाय आपके लिए काम भी कर सके. इसकी मदद से रोज के कई काम आसानी से किए जा सकते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे मे।  जानिए Meta Muse AI क्या है? मेटा का नया एआई एक पर्सनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट है. इसे हर दिन के काम को ऑटोमेट करने के लिए बनाया गया है. इसकी मदद से कई ऐसे काम किए जा सकते हैं, जिन्हें करने में ज्यादा समय लगता है।  यह नॉर्मल चैटबॉट की तरह नहीं है. दूसरे एआई ऐप्स आमतौर पर आपके सवालों के जवाब दे सकते हैं, लेकिन खुद से कोई ऐप खोलकर मैसेज करना या कई स्टेप वाला काम पूरा करना उनके लिए आसान नहीं होता. वहीं, मेटा का Muse खास तौर पर ऐसे कामों को ऑटोमेट करने के लिए बनाया गया है. यूजर को सिर्फ टास्क देना होता है और एआई उसे पूरा करने की कोशिश करता है।  जानिए कैसे आ सकता है काम Muse AI आपके सवालों के जवाब देने के साथ-साथ कई दूसरे काम भी कर सकता है. जैसे कोई फॉर्म पूरा करना, वेबसाइट पर ब्राउजिंग करना, कोई चीज खरीदना, इमेज बनाना और डॉक्यूमेंट तैयार करना.इसकी मदद से यूजर को कई छोटे-छोटे काम खुद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. एआई इन कामों को अपने तरीके से पूरा करने में मदद कर सकता है।  जानिए कैसे कर पाता है टास्क आसानी से जो एआई खुद से किसी काम को पूरा कर सकता है, उसे एजेंटिक AI कहा जाता है. मेटा का Muse भी एक एजेंटिक AI है, जिसे यूजर के काम को आसान बनाने के लिए तैयार किया गया है।  जब आप इसे कोई टास्क देते हैं, तो यह काम पूरा करने के लिए जरूरी बिल्ट-इन स्किल्स को चेक करता है. इसके बाद उन्हीं स्किल्स की मदद से टास्क पूरा करने की कोशिश करता है. इसके साथ दूसरे ऐप्स की कनेक्टिविटी भी मिलती है, जिसकी मदद से यह कई स्टेप वाले काम कर सकता है।  फ्री में कर सकते हैं इस्तेमाल Meta Muse AI का इस्तेमाल फ्री में किया जा सकता है. इसे Apple App Store या Google Play Store से डाउनलोड किया जा सकता है. हालांकि, फ्री इस्तेमाल के साथ कुछ यूसेज लिमिट भी देखने को मिल सकती है। 

अगले 10 साल में AI मिटा सकता है इंसानी सभ्यता? Anthropic रिसर्चर के बयान से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली AI को लेकर एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने पूरी टेक इंडस्ट्री में बहस छेड़ दी है. Anthropic के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेफ्टी एक्सपर्ट Evan Hubinger का कहना है कि उन्हें 10% से ज्यादा चांस लगता है कि अगले 10 साल में AI की वजह से इंसानों का सफाया हो सकता है।  इवान हुबिंगर एंथ्रोपिक में एलाइनमेंट साइंस लीड हैं. उन्होंने एक पोस्ट में AI के फ्यूचर को लेकर अपनी चिंता बताई. उनके मुताबिक सबसे बड़ा खतरा उस समय हो सकता है, जब AI इंसानी इंटेलिजेंस से काफी आगे निकल जाए और खुद को लगातार इम्प्रूव करने लगे. आइए जानते हैं डिटेल में।  इसे रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट कहा जाता है. अगर कोई AI खुद को बेहतर बनाने में इंसानों की मदद का मोहताज न रहे और अपने अगले वर्जन को खुद ही ज्यादा पावरफुल बना सके, तो उसकी कैपेबिलिटी बहुत तेजी से बढ़ सकती है। जानिए कैसे सुपरइंटेलिजेंस बन सकता है काल हुबिंगर का कहना है कि एंथ्रोपिक AI को सेफ रखने पर काम कर रही है, लेकिन फ्यूचर सुपरइंटेलिजेंस को पूरी तरह कंट्रोल में रखने का कोई पक्का सॉल्यूशन अभी मौजूद नहीं है।  उनका यह बयान एंथ्रोपिक के रिसर्चर Jacob Coxon के इस्तीफे के बाद सामने आया है. कॉक्सन ने भी AI कंपनियों की तेजी से बढ़ती रेस को लेकर चिंता जताई थी. उनका कहना था कि कंपनियां ज्यादा पावरफुल AI और सेल्फ-इम्प्रूविंग सिस्टम्स की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन सेफ्टी के सवाल अभी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं।  हुबिंगर यह नहीं कह रहे कि आज मौजूद ChatGPT या दूसरे AI मॉडल्स अगले 10 साल में इंसानों को खत्म कर देंगे. उनकी चिंता फ्यूचर की सुपरइंटेलिजेंट AI को लेकर है. यानी मामला आज के AI से ज्यादा आने वाले AI का है।  AI कंपनियां लगातार ज्यादा पावरफुल मॉडल्स बनाने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में असली सवाल यही है कि AI को ज्यादा स्मार्ट बनाने की रेस में क्या उसकी सेफ्टी उतनी ही तेजी से आगे बढ़ रही है? इवान हुबिंगर का 10% वाला एस्टीमेट इसी चिंता को सामने लाता है. और यही वजह है कि AI सेफ्टी को लेकर बहस अब सिर्फ बाहर नहीं, बल्कि AI कंपनियों के अंदर भी तेज हो रही है।   

ब्रह्मोस से चीन की बढ़ी टेंशन, समुद्र में दुश्मन के जहाजों पर कहर बरपा सकती है भारत की सुपरसोनिक मिसाइल

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस की धमक लगातार बढ़ रही है। इसके लिए करीब तीन आसियान देशों ने भारत के साथ समझौते किए हैं। चौथा देश थाईलैंड भी इस मिसाइल पर विचार कर रहा है। भारत इसी मिसाइल की मदद से चीन को घेरने की तैयारी कर रहा है। भारत दक्षिण चीन सागर में अपनी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की पहुंच बढ़ा रहा है। ताइवान टॉक्स को दिए एक इंटरव्यू में लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर (रिटायर्ड) ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस वाली इस रणनीति का मकसद सिर्फ चीन को निशाना बनाना नहीं बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत सुरक्षा घेरा बनाना है। आपको बता दें कि अपनी श्रेणी की सबसे तेज क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने शानदार प्रदर्शन के बाद दुनिया का ध्यान खींचा है। इस दौरान जब भारत ने पाकिस्तानी एयर बेस पर हमला किया तो इसकी सटीकता और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता का पता चला। ब्रह्मोस के कारण ही पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए मजबूर होना पड़ा। इन देशों ने किए भारत के साथ समझौते पिछले एक साल में वियतनाम और इंडोनेशिया ने भारत के साथ ब्रह्मोस के लिए समझौते किए हैं। मलेशिया और थाईलैंड भी इसमें शामिल हो सकते हैं। 2022 में फिलीपींस ने अपनी तटीय सुरक्षा के लिए 37.5 करोड़ डॉलर में ब्रह्मोस खरीदने वाला पहला देश बना। ये सभी देश विवादित दक्षिण चीन सागर के आसपास स्थित हैं। उन्हें चीन के आक्रामक और तेजी से बढ़ते दबदबे का सामना करना पड़ता है। अब चीन समझेगा कि मजबूत भारत से सामना हो रहा लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर इंटरव्यू के दौरान कहा कि ब्रह्मोस बेल्ट रणनीति से भारत-चीन संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि इससे चीन को निश्चित रूप से यह एहसास होगा कि उसका सामना एक मजबूत भारत से हो रहा है। पीआर शंकर ने कहा, "चीन ने देखा है कि ब्रह्मोस कैसे काम करती है। दक्षिण चीन सागर में चीन अपनी अधिकतम रेंज पर काम कर रहा है।" क्या है ब्रह्मोस बेल्ट? इसका मतलब किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन से नहीं है। विशेषज्ञ इस शब्द का इस्तेमाल भारत के उन देशों के साथ बढ़ते ब्रह्मोस पार्टनरशिप नेटवर्क के लिए कर रहे हैं, जिनका चीन के साथ समुद्री विवाद है। इस विवाद के केंद्र में दक्षिण चीन सागर है, जो एक प्रमुख शिपिंग रूट है। वैश्विक व्यापार का 21% हिस्सा इसी रूट से होता है। चीन अपनी दक्षिण चीन सागर के लगभग 90% हिस्से पर अपना दावा करता है, जिससे वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान के साथ विवाद पैदा हो गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने द्वीप बनाकर और नौसैनिक गश्त करके अपने दावे को मजबूत करने की कोशिश की है। इसके कारण फिलीपींस और वियतनाम के साथ टकराव की स्थिति पैदा हुई है। अब दक्षिण-पूर्व एशिया के और देश ब्रह्मोस एंटी शिप मिसाइलें हासिल कर रहे हैं। तो स्थिति बदलने लगी है। वियतनाम के साथ डील लगभग 5900 करोड़ रुपये की है, जबकि इंडोनेशिया ने 1900 करोड़ रुपये की कीमत वाली दो ब्रह्मोस खरीदने का फैसला किया है। अगर थाईलैंड जैसे और देश भी यह मिसाइल हासिल करते हैं तो नतीजा यह होगा कि एशिया के कुछ सबसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ब्रह्मोस की एक चेन बन जाएगी। विशेषज्ञ इसे भारत की एक चालाक चाल के तौर पर देख रहे हैं। इससे दक्षिण चीन सागर में कोई सैनिक या जहाज भेजे बिना ही चीन की चिंताएं बढ़ गई हैं। ब्रह्मोस क्यों है इतना खास? 290 किमी तक की उड़ान रेंज वाली यह फायर-एंड-फॉरगेट मिसाइल जमीन, जहाज या लड़ाकू विमान से लॉन्च की जा सकती है। ब्रह्मोस बहुत तेज और सटीक है। इसे रोकना लगभग असंभव है। इसी मिसाइल ने नूर खान, सरगोधा और मुरीद जैसे पाकिस्तानी एयर बेस पर सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था। ब्रह्मोस भारत के लिए गेम चेंजर साबित हुई। चीन का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम ब्रह्मोस को रोक नहीं सकता। ब्रह्मोस की रफ्तार और सटीक निशाना लगाने की क्षमता चीनी जहाजों के लिए बड़ा खतरा है। इससे चीन को विवादित इलाकों से दूर रहने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

भारत का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बना गेमचेंजर, डबल-स्टैक ट्रेन से तेज होगा सामान का सफर; आम लोगों को क्या फायदा?

नई दिल्ली  सौ बात की एक बात ये कि खबरों की भीड़ में जो रेल की लेटेस्ट खबर आई है उसपर ध्यान पब्लिक का शायद उतना नहीं जा रहा क्योंकि बात मालगाड़ी की है, लेकिन उसको समझने की जरूरत है कि बात सिर्फ मालगाड़ी की नहीं है. ये सब के मतलब की खबर है. वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, इसके आखिरी तीन हिस्सों का भी उद्घाटन कर दिया गया. डेडिकेटेड मतलब सिर्फ फ्रेट के लिये, माल के लिए. मतलब सिर्फ मालगाड़ियों के लिए अलग रेल की पटरी. जिसपर सिर्फ मालगाड़ियां चलेंगी. इसके आखिरी तीन हिस्से यानी कुल 326 km के हिस्से का भी अब उद्घाटन हो गया. यानी पूरा 2,843 किलोमीटर का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क अब पूरी तरह चालू हो गया है. तो ये सिर्फ मालगाड़ियों की बात इसलिए नहीं है क्योंकि इसका फायदा तो सबको मिलेगा. मालगाड़ी के चक्कर में किसकी ट्रेन लेट नहीं हुई जीवन में? ये वाली प्रॉब्लम तो सब झेल चुके हैं. पहले एक ही पटरी पर यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां दोनों चलती थीं. मालगाड़ियां भारी और धीमी होती हैं, इसलिए यात्री ट्रेनों को बार-बार रुकना पड़ता था या लेट होना पड़ता था. पटरियां जैम रहती थीं. अब मालगाड़ियों का बड़ा हिस्सा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर चला गया है. पुरानी लाइनों पर जगह खाली हुई है. रेलवे अब उन लाइनों पर ज्यादा यात्री ट्रेनें चला सकता है और वो टाइम पर चलेंगी ये भी उम्मीद बढ़ जाती है। 20 साल पहले बना प्लैन क्योंकि ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर सिर्फ मालगाड़ियों के लिए बनी हुई एकदम अलग रेल लाइन है. इसलिए मालगाड़ियां बिना रुके तेज दौड़ सकती हैं. और ये काम चल रहा था 2005 से. 20 साल पहले से. 2005 में प्लैन बना. 2006 में इसके लिए DFCCIL नाम से अलग कंपनी बनाई गई इसे बनाने और चलाने का काम संभालने के लिए. जापान की मदद से वेस्टर्न कॉरिडोर और विश्व बैंक की मदद से ईस्टर्न कॉरिडोर का काम शुरू हुआ. जमीन लेने में दिक्कतें आईं, ठेके देने में कई अड़चनें आईं, निर्माण में कई बाधाएं आईं. तो काम जरूर लंबा खिंचा. ईस्टर्न कॉरिडोर 2023-24 में पूरा हुआ और वेस्टर्न का आखिरी हिस्सा अब जाकर 2026 में पूरा हुआ है। ये कॉरिडोर दो बड़े हिस्सों में बंटा है. एक है ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जो पंजाब के लुधियाना से बिहार के सोननगर तक 1,337 किलोमीटर लंबा है. ये मुख्य रूप से कोयला, स्टील, अनाज जैसे भारी माल के लिए है. दूसरा है वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जो उत्तर प्रदेश के दादरी से मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक 1,506 किलोमीटर लंबा है. ये कंटेनर माल और इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के लिए है खासतौर पर. दादरी पर दोनों कॉरिडॉर मिलते हैं और पूरे उत्तर, पश्चिम और पूर्व को जोड़ देते हैं. लेकिन खबर में जो खासतौर पर समझने की बात है वो ये कि ये दुनिया में अनोखा है. क्यों? क्या दुनिया में मालगाड़ियां नहीं चलतीं? बिल्कुल चलती हैं. लेकिन इसमें डबल स्टैक मालगाड़ी चल सकती है। डबल स्टैक का मतलब डबल स्टैक मतलब एक डिब्बे के ऊपर दूसरा डिब्बा, एक कंटेनर के ऊपर दूसरा कंटेनर. वैसे तो अमेरिका जैसे देशों में डबल स्टैक कंटेनर ट्रेनें चलती हैं यानी एक डिब्बे पर दो कंटेनर एक के ऊपर एक रखे जाते हैं, लेकिन वहां ऐसी मालगाड़ी चलती है डीजल इंजन से. अब आप कहोगे तो ये कौनसा बड़ा फर्क हो गया? तो वो समझने वाली बात है कि भारत ने जो बनायी है पटरी उसपर ये इलेक्ट्रिक गाड़ी चलेगी. और इलेट्रिक इंजन की पटरी पर एक के ऊपर एक कंटेनर रख कर चलाओ तो बिजली की तारें भी तो फंस जाएंगी. इसलिए ये भारत में पटरी बनी है वो दुनिया में अनोखी बनाई गई है. इसकी तारें उतनी ऊचीं लगाई गई हैं कि गाड़ी डबल कंटेनर ले कर चल सके. पैसेंजर गाड़ियों वाली पटरी पर डबल कंटेनर लेकर नहीं जा सकते क्योंकि बिजली की तारें आ जती हैं बीच में. भारत ने पूरे कॉरिडोर पर बिजली की तारें ऊंची लगाई हैं, लगभग 7.5 मीटर ऊंची. इससे बिजली के इंजन से डबल स्टैक ट्रेनें चल सकती हैं. ऐसा पूरा फ्रेट कॉरिडोर, ऐसी पूरी रेल लाइन ही ऊंची तारों की हो, ये दुनिया के किसी और देश में नहीं है. और क्योंकि पूरी लाइन है ही मालगाड़ियों के लिए, तो ट्रेन की लंबाई भी डबल रख सकते हैं। डबल लंबाई और डबल ऊंचाई लॉन्ग हॉल यानी लंबी दूरी तक माल ढोने के लिए ट्रेन में डिब्बे भी ज्यादा लगाते हैं. तो डबल लंबाई और डबल ऊंचाई, तो एक ट्रेन अब चार सामान्य ट्रेनों जितना माल ले जा सकती है. स्पीड भी 100 km/h तक हो सकती है क्योंकि पूरी लाइन ही मालगाड़ी की है. पैसेंजर ट्रेनों के लिए रुकना ही नहीं है. पुरानी लाइनों पर मालगाड़ियां औसतन 25 km/h ही चल पाती थीं. ट्रक से जिस माल को पहुंचने में 30 घंटे लगते हैं, वही माल अब इससे 10-12 घंटे में पहुंच जाता है. तो फायदा हर लेवल पर है. आप ये देखो कि पहले लॉजिस्टिक्स यानी माल ढोने का खर्च देश की जीडीपी का लगभग 14% था, जो बाकी देशों से बहुत ज्यादा था। यानी हमारे यहां ज्यादातर सामान की कीमत का बड़ा हिस्सा तो उसकी ढुलाई के खर्चे का होता था. अब ये घटकर 8-9 % के आसपास आ रहा है. माल सस्ता भी पहुंचता है और जल्दी भी पहुंचता है. किसानों का अनाज हो, फैक्टरियों का माल हो, कच्चा माल हो, तैयार सामान हो, सब में फायदा है. और लोगों को रेल का सीधा फायदा तो ये कि पुरानी रेल लाइनों से मालगाड़ियां हटने से बाक़ी यात्री ट्रेनें ज्यादा चलाई जा सकती हैं और टाइम पर चल सकती हैं. क्योंकि ये भी प्रॉब्लम खड़ी हो गई थी कि दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रूट पर यात्री बढ़े जा रहे हैं और वो वंदे भारत जैसी ट्रेनों के लिए पैसा देने को भी तैयार दिख रहे हैं लेकिन पटरियां ही इतनी नहीं थीं कि और ट्रेनें चला सकें. तो पटरियां तो और बिछाने की जरूरत थी है. यानी जितनी ट्रेनें चल सकती थीं उससे कहीं ज्यादा ट्रेनें दौड़ रही थीं पहले ही पटरियों पर इन रूट पर. इस वजह से नई यात्री ट्रेनें शुरू करना मुश्किल हो जाता था. … Read more

1705KM की धांसू रेंज और लग्जरी इंटीरियर! Xiaomi ने लॉन्च की 7-सीटर SkyNomad SUV, फीचर्स कर देंगे हैरान

नई दिल्ली शाओमी (Xiaomi) का जब भी नाम आता है, तो हममें से ज्यादातर लोगों के जेहन में किसी फोन की तस्वीर आती है. मगर ये कंपनी सिर्फ फोन नहीं बल्कि कई दूसरे प्रोडक्ट्स भी बेचती है. ऐसा ही एक सेगमेंट शाओमी कार्स का है. शाओमी चीनी बाजार में कई कारें बेचती हैं. हाल में ही कंपनी ने अपने स्काईनोमाड प्रोडक्ट को इंट्रोड्यूस किया है।  कंपनी ने आधिकारिक रूप से अपनी स्काईनोमाड (Xiaomi SkyNomad) सीरीज को लॉन्च किया है. इस रेंज में चार मॉडल्स एक्सटेंडेड रेंज इलेक्ट्रिक व्हीकल कैटेगरी के है. इसमें स्काईनोमाड एन70 (N70) और एन90 (N90) नेमप्लेट के तहत चार कॉन्फिग्रेशन आते हैं।  कंपनी ने एन70 प्रो, एन70 मैक्स, एन90 मैक्स और एन90 मैक्स स्टूडियो को लॉन्च किया है. बता दें कि शाओमी स्काईनोमाड की एन70 एक 5-सीटर कार है, जबकि एन90 एक 7 सीटर एसयूवी है. आइए जानते हैं इनकी खास बातें।  बैटरी, इंजन और रेंज  इन दोनों एसयूवी की खासियत इनका रेंज एक्सटेंडर अवतार है. सबसे पहले बात करते हैं एन70 प्रो की, जो एक फ्रंट व्हील ड्राइव कॉन्फिग्रेशन मॉडल है. इस कार में 52kWh की बैटरी मिलती है, जिसकी क्लेम्ड इलेक्ट्रिक रेंज 351 किलोमीटर है. वहीं इंजन और इलेक्ट्रिक अवतार की कंबाइन्ड रेंज 1351 किलोमीटर है।  इसका एन70 मैक्स अवतार डुअल मोटर के साथ आता है. ऑल व्हील ड्राइव वाली इस कार में 76kWh की बैटरी मिलती है, जिसकी इलेक्ट्रिक अवतार में क्लेम्ड रेंज 505 किलोमीटर है. वहीं इसकी कंबाइन्ड रेंज (इलेक्ट्रिक + पेट्रोल) 1461 किलोमीटर है।  N90 में क्या कुछ मिलेगा Xiaomi SkyNomad N90 Max की बात करें, तो इसमें डुअल मोटर के साथ ऑल-व्हील ड्राइव फीचर मिलता है. ये कार 76kWh की बैटरी के साथ आता है, जो क्लेम्ड इलेक्ट्रिक रेंज 464KM है. वहीं पेट्रोल और इलेक्ट्रिक की कंबाइन्ड क्लेम्ड रेंज 1705 किलोमीटर है. एसयूवी की टॉप स्पीड 190 किलोमीटर प्रति घंटे की है।   कार के मैक्स स्टूडियो वेरिएंट में इलेक्ट्रिक पॉप-अप रूफ मॉड्यूल मिलता है, जो कार की ऊंचाई को बढ़ाकर 2294 एमएम तक पहुंचा देता है. कार की दूसरी रो में मिलने वाली सीट्स को 30 सेकंड में बेड में बदला जा सकता है. ये पूरा मैकेनिज्म इलेक्ट्रिकली काम करता है. इसमें फैक्टरी फिटेड अंडरफ्लोर हीटिंग, वुड ग्रेन ऐलुमिनियम फ्लोरिंग और 30 इंच की प्रोजेक्शन स्क्रीन मिलती है।  स्काईनोमाड एन90 मैक्स की लंबाई 5.285 मीटर, चौड़ाई 1.998 मीटर और व्हीलबेस 3.080 मीटर है. ये कार 2 + 2+ 3 सीटिंग कॉन्फिग्रेशन में आती है. वहीं SkyNomad N70 की बात करें, तो इसकी लंबाई 4.96 मीटर, चौड़ाई 1.998 मीटर और व्हीलबेस 2.950 मीटर है। 

गैस सिलेंडर के दाम ₹400 तक आने की चर्चा, क्या बढ़ेगी LPG सब्सिडी? जानें पूरा मामला

नई दिल्ली ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद यानी CEW की एक रिपोर्ट आई है। इसमें कहा गया है कि LPG की कीमत एक ऐसा बड़ा मुद्दा है, जो सभी वर्गों के लिए चुनौती बना हुआ है। मौजूदा दरें आम आदमी की पहुंच से काफी ऊपर हैं। इसी वजह से लोग जलाऊ लकड़ी या महंगे अनौपचारिक सिलेंडरों का सहारा ले रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 400 रुपये हो जाए तो 80 प्रतिशत से अधिक लोग पूरी तरह से गैस पर आ जाएंगे। अभी सिलेंडर रिफिल करवाने की औसत भुगतान क्षमता 500 रुपये प्रति सिलेंडर है, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाला सिलेंडर 642 रुपये का है। प्रवासी मजदूरों को भारी दिक्कतें स्टडी के अनुसार, प्रवासी मजदूरों में से 79 प्रतिशत के पास औपचारिक गैस कनेक्शन नहीं है और 4 प्रतिशत से भी कम लोग प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ पा रहे हैं। यह स्थिति इसलिए और हैरान करने वाली है, क्योंकि 2021 की नीति में प्रवासी मजदूरों के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन के माध्यम से कनेक्शन लेने की सुविधा पहले ही दे दी गई थी। इसके बावजूद जागरूकता की कमी और कागजी प्रक्रियाओं में उलझन के कारण प्रवासी मजदूर इस योजना से दूर हैं। सीईडब्ल्यू की फेलो प्रार्थना बराह का कहना है कि सरकार का यह सोचना कि केवल एलपीजी कनेक्शन दे देने भर से काम हो जाएगा, सही नहीं है। असली चुनौती यह है कि लोग नियमित रूप से गैस रिफिल करवा पाएं, प्रवासी मजदूरों को उज्ज्वला योजना की पूरी जानकारी हो और ग्रामीण घरों तक सिलेंडर भरोसेमंद ढंग से पहुंचते रहें। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत की स्वच्छ हवा की नीति को केवल 'कनेक्शन देने' से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि साफ ईंधन सस्ता, भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ हो। शहरी झुग्गियों और प्रवासियों की स्थिति शहरी अनौपचारिक बस्तियों में 70 प्रतिशत लोग पूरी तरह से गैस का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बिना औपचारिक कनेक्शन वाले 31 प्रतिशत लोगों को एड्रेस प्रूफ न होने के कारण कनेक्शन देने से मना कर दिया जाता है। इस वजह से 11 प्रतिशत लोग वास्तविक रिटेल प्राइस के बजाय 1,040 रुपये तक अनौपचारिक रूप से सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं। वहीं, प्रवासी मजदूरों में से 70 प्रतिशत, जो खुले स्थानों में रहते हैं, पूरी तरह से ठोस ईंधनों जैसे लकड़ी और कोयले पर निर्भर हैं। जो प्रवासी अनौपचारिक रूप से गैस खरीदते हैं, उन्हें 71 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान करना पड़ता है, जो आधिकारिक दर से 20 प्रतिशत से अधिक महंगा है। 200 रुपये और बढ़े सब्सिडी सीईडब्ल्यू की पहली सिफारिश यह है कि पेट्रोलियम मंत्रालय को उज्ज्वला सब्सिडी को प्रति सिलेंडर लगभग 200 रुपये बढ़ाना चाहिए। दूसरा सुझाव प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष पंजीकरण अभियान चलाने का है, ताकि वे आसानी से उज्ज्वला योजना से जुड़ सकें। तीसरा, स्मार्ट मीटर कियोस्क की पायलट परियोजनाएं शुरू करने की सिफारिश की गई है, ताकि लोग छोटी-छोटी किस्तों में गैस के पैसे जमा कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर डिलीवरी बढ़ाने के लिए विक्रेताओं को अलग-अलग कमीशन देने का सुझाव दिया गया है, ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी सिलेंडर पहुंच सकें।