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EPFO से जुड़े करोड़ों कर्मचारियों को मिल सकता है फायदा, PF सैलरी लिमिट ₹25 हजार होने की संभावना

नई दिल्ली  देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर आ रही है. आज केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक होने वाली है, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है. सरकार पीएफ और पेंशन के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए अनिवार्य मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है।  यदि कैबिनेट इस प्रस्ताव पर मुहर लगाती है, तो यह करीब 12 साल बाद पीएफ नियमों में होने वाला सबसे बड़ा सुधार होगा. इससे पहले आखिरी बार 1 सितंबर 2014 को इस सीमा को ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था. इस नए फैसले से देश के संगठित क्षेत्र के करीब 1 करोड़ अतिरिक्त कर्मचारी सीधे तौर पर पीएफ और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे।  किस पर और कैसे लागू होगा यह नया नियम? वर्तमान नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर ₹15,000 तक है, उनके लिए पीएफ खाता खोलना और उसमें योगदान देना अनिवार्य है. नई सीमा लागू होने के बाद, ₹25,000 तक की मासिक आय वाले सभी नए कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन फंड में योगदान करना जरूरी हो जाएगा।  हालांकि, ₹25,000 से अधिक बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि उनके लिए इस योजना में शामिल होना पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा. वे अपनी इच्छा के अनुसार ही इसमें योगदान देने का फैसला कर सकते हैं।  इन-हैंड सैलरी और कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर? इस फैसले का सीधा असर कर्मचारियों की टेक-होम (In-Hand) सैलरी पर पड़ेगा. जो कर्मचारी ₹15,000 से ₹25,000 के वेतन ब्रैकेट में आते हैं और अब तक पीएफ का हिस्सा नहीं थे, उनके वेतन से हर महीने पीएफ का 12% हिस्सा कटेगा. इस वजह से हर महीने उनके हाथ में आने वाली नगद सैलरी थोड़ी कम हो जाएगी, लेकिन दूसरी तरफ उनकी भविष्य की बचत और रिटायरमेंट फंड में तेजी से बढ़ोतरी होगी।  वहीं, उद्योगों और कंपनियों को वित्तीय बोझ से बचाने के लिए सरकार ने एक बीच का रास्ता निकाला है. प्रस्ताव के मुताबिक, कंपनियों को अपना पीएफ योगदान कैलकुलेट करने के लिए पुरानी ₹15,000 की लिमिट का इस्तेमाल जारी रखने की छूट मिल सकती है. इससे कंपनियों पर अचानक कोई बड़ा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकती है। 

पठानकोट में बूचड़खाने पर कार्रवाई, अंदर मिले 400 मजदूरों से मचा हड़कंप

पठानकोट  पठानकोट के गांव अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खाने को लेकर लोगों में रोष व्याप्त है। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर बूचड़खाने को पूरी तरह खाली करवाया।  निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया। हिंदू संगठनों, सिख भाईचारे, रामलीला कमेटियों और विभिन्न गांवों के पंच-सरपंचों के विरोध तथा नेशनल हाईवे जाम किए जाने के बाद पुलिस व नागरिक प्रशासन हरकत में आया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव शांत है। हालांकि हिंदू संगठनों ने दो टूक चेतावनी दी है कि इस बूचड़खाने को किसी भी कीमत पर चलने नहीं दिया जाएगा। DC दफ्तर का घेराव और हाईवे जाम से हिला प्रशासन अखवाना के औद्योगिक क्षेत्र में एक बूचड़खाना खोले जाने की खबर से पिछले करीब डेढ़ महीने से इलाके के लोगों में रोष व्याप्त था। स्थानीय निवासियों को अंदेशा था कि इस बूचड़खाने में गौवंश और अन्य पशुओं को काटा जा रहा है। मंगलवार को विभिन्न हिंदू व सिख संगठनों के प्रतिनिधि, संत समाज, पूर्व सरपंच और सुजानपुर हलके के सैकड़ों नागरिक डिप्टी कमिश्नर पठानकोट को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। आरोप है कि जिला प्रशासन और डीसी ऑफिस द्वारा करीब 2 घंटे तक उन्हें इंतजार करवाया गया और संतोषजनक बातचीत नहीं हुई। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से आक्रोशित होकर जनसैलाब सड़कों पर उतर आया और नेशनल हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे संगठन हाईवे जाम की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी तुरंत हरकत में आए। बुधवार को जिला प्रशासन के निर्देश पर विभिन्न विभागों- औद्योगिक विभाग, बीडीपीओ कार्यालय सुजानपुर और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की टीम पुलिस बल और नाराज संगठनों के साथ अखवाना स्थित बूचड़खाने के अंदर दाखिल हुई। हिंदू-सिख संगठनों का कड़ा रुख…     एडवोकेट भानु प्रताप और रमन ठाकुर: उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई सनातन धर्म और हिंदू-सिख भाईचारे की एकजुटता की जीत है। उन्होंने पुलिस प्रशासन का धन्यवाद किया कि समय रहते स्थिति को संभाला गया, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि आखिर एक विशुद्ध हिंदू बहुल इलाके में बूचड़खाना खोलने की मंजूरी किन अधिकारियों और विभागों ने दी? उन्होंने सरकार से मांग की कि उन दोषी अफसरों की जांच की जाए।     विशाल चौहान और एडवोकेट अमन ठाकुर (विहिप): उन्होंने आरोप लगाया कि रोजाना यहां नई मशीनरी पहुंचाई जा रही थी, जो बिना प्रशासनिक और राजनीतिक शह के संभव नहीं है। अगर इसे दोबारा खोलने की कोशिश की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।     संत समाज व स्थानीय प्रतिनिधियों की चेतावनी: नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में यहां से एक भी व्यक्ति अंदर-बाहर होता दिखा या दोबारा काम शुरू करने की कोशिश हुई तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने स्थानीय गुर्जर समुदाय से भी अपील की कि वे चंद पैसों के लालच में गौहत्या या बूचड़खाने का समर्थन न करें, ताकि आपसी भाईचारा न बिगड़े। विभिन्न संगठनों के लोग रहे शामिल इस विरोध प्रदर्शन और निरीक्षण के दौरान राजपूत सभा से शिवा काटल, आरएसएस से अमित सिंह, अंतरराष्ट्रीय हिंदू सेवा संघ पंजाब के अध्यक्ष संजीव ठाकुर, शिवसेना हिंद पंजाब के महामंत्री बब्बू ठाकुर, विहिप जिला विधि प्रमुख एडवोकेट अमन ठाकुर, गौशाला मामून से राकेश महाजन, पूर्व सरपंच राजिंदर सिंह, पंडित राजिंदर सिंह, स्वामी नित्यानंद, अमन बढ़ोई, साबा तड़वाल सहित बड़ी संख्या में सुजानपुर और पठानकोट के हिंदू-सिख नागरिक मौजूद रहे।       अंदर से निकले 400 मजदूर, बांग्लादेशी भी शामिल: निरीक्षण के दौरान जब टीम और प्रतिनिधि अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। बूचड़खाने के भीतर 400 से अधिक बांग्लादेशी और कुछ स्थानीय मजदूर मौजूद थे, जिन्हें तुरंत 3-4 ट्रकों में भरकर बाहर निकाला गया।  स्थानीय नेताओं ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन लगातार यह कह रहा था कि यह यूनिट "नॉट रनिंग" यानी बंद है, तो इतनी भारी तादाद में बाहरी लोग अंदर क्या कर रहे थे?     18 सितंबर को होना था उद्घाटन: मौके पर मौजूद बूचड़खाने के संचालक कुरैशी नामक व्यक्ति ने दावा किया कि उनके पास स्लाटर हाउस से संबंधित सभी जरूरी अनुमतियां मौजूद हैं। उसने बताया कि अंदर नई मशीनरी फिट की जा रही है और इसका 18 सितंबर को औपचारिक उद्घाटन होना तय था।     अधिकारियों ने मौके पर जड़वाया ताला, दस्तावेज तलब: स्थिति की संवेदनशीलता और बिगड़ते माहौल को देखते हुए मौके पर तैनात एसपीडी विशालजीत सिंह, डीएसपी धारकलां राजेश कक्कड़, डीएसपी देहाती सुखजिंदर सिंह, थाना प्रभारी शाहपुरकंडी मोहित टाक, थाना प्रभारी सुजानपुर सब-इंस्पेक्टर अरुण कुमार और ट्रैफिक प्रभारी एएसआई ब्रह्म दत्त ने भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला।     मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला: डीएसपी राजेश कक्कड़ और डीएसपी सुखजिंदर सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए बूचड़खाने के अंदर मौजूद सभी कर्मचारियों और मजदूरों को तुरंत गेट से बाहर निकाला और स्लाटर हाउस के मुख्य द्वार पर सरकारी ताला लगवा दिया।     एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई: पुलिस अधिकारियों ने संचालकों से बूचड़खाने के सभी कागजात व क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जब्त कर उन्हें डिप्टी कमिश्नर के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई में मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन एडवोकेट भानु प्रताप ने भी अहम भूमिका निभाई और ताला लगवाने में सहयोग किया।

लखनऊ के 5000 होम बायर्स को बड़ी राहत, सुशांत गोल्फ सिटी के लिए ₹2912 करोड़ मंजूर

लखनऊ राजधानी की पहली हाईटेक टाउनशिप सुशांत गोल्फ सिटी में घर व दुकान खरीदारों को बड़ी राहत देने वाली खबर है। यह अहम परियोजना अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के हाथ होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में एलडीए को हाईटेक टाउनशिप टेकओवर करने पर मुहर लग गई है। इतना ही नहीं सरकार विकास कार्य व देनदारियों के लिए 2912 करोड़ रुपये की धनराशि भी देगी। मेसर्स अंसल प्रापर्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर (अंसल एपीआइ) की अधूरी आवासीय परियोजना को लेकर पिछले डेढ़ साल से उहापोह का माहौल रहा। राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले की सुनवाई हुई। अब खरीदारों को राहत देने का रास्ता प्रदेश सरकार ने निकाला है। अधूरी परियोजना को पूरा कराने का विस्तृत प्रस्ताव एलडीए ने तैयार किया। उसी प्रस्ताव पर कैबिनेट में मंथन करने के बाद निर्णय लिया गया कि हाईटेक टाउनशिप के तहत अंसल एपीआइ को लाइसेंस दिया गया था, अब स्वीकृत परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण टेकओवर करते हुए उसे पूरा कराने का प्रस्ताव एनसीएलटी के समक्ष प्रस्तुत करे। यह भी चर्चा हुई कि प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस परियोजना की अधिकतम देनदारी करीब 2912 करोड़ रुपये है, लेकिन इसकी वास्तविक देयता सीआइआरपी यानि कारपोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया से ही तय होगी। देनदारियों के भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि प्राधिकरण को सीड कैपिटल यानि शुरुआती धन दिया जाएगा। एलडीए के टेकओवर करने से होम बायर्स में विश्वास पैदा होगा। रियल एस्टेट क्षेत्र व निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार का सृजन तेजी से बढ़ेगा। यह होंगे तत्काल लाभ इस कदम से 5000 होम बायर्स यानि घर-दुकान खरीदारों की समस्या का समाधान हो सकेगा। साथ ही टाउनशिप की शेष अवस्थापना सुविधाओं व उपयोगिताओं का विकास संभव होगा। बंधक व ग्राम समाज की भूमि किसी तीसरे पक्ष को देने की जगह अब लखनऊ विकास प्राधिकरण को दी जाएगी, ताकि सरकार के भूमि की रक्षा होगी और भविष्य में शासकीय विभागों की देनदारियां पूरी की जा सकेंगी। परियोजना पूरी होने से शहर का सुनियोजित विकास होगा। अब फिर से परियोजना में विकास कार्य शुरू होंगे। यह है मामला अंसल एपीआइ ने आइएल एंड एफएस फाइनेंशियल सर्विसेज से मार्च 2016 में 50 करोड़ और नवंबर 2016 में 100 करोड़ रुपये ऋण लिया था, खाता एनपीए होने से ब्याज सहित बकाया बकाया 257 करोड़ रुपये पहुंचने पर फाइनेंस कंपनी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) में याचिका दाखिल की थी। एनसीएलटी ने 25 फरवरी 2025 को अंसल ग्रुप को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए आइआरपी (रिसीवर) नवनीत कुमार गुप्ता को नियुक्त किया था। यह आदेश को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में होम बायर्स ने चुनौती दी। एनसीएलएटी ने होम बायर्स का पक्ष स्वीकार करके एनसीएलटी में एलडीए का पक्ष सुनने का आदेश दिया। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई लेकिन, शीर्ष कोर्ट ने एनसीएलएटी के आदेश को सही माना। एनसीएलटी में अब 23 सितंबर को सुनवाई होनी है।

Second Hand Phone खरीदने से पहले जरूर करें ये स्क्रीन टेस्ट, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

पिछले कुछ सालों से सेकंड हैंड फोन का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. बहुत सारे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हैं, जहां आपको पुराने फोन आसानी से मिल जाते हैं. साथ ही ऑफलाइन मार्केट में भी सेकंड हैंड फोन आसानी से मिल जाते हैं. अगर आप भी सेकंड हैंड फोन खरीदने जा रहे हैं, तो खरीदने से पहले आपको फोन की स्क्रीन का टेस्ट जरूर करना चाहिए. इस ट्रिक की मदद से आप आसानी से पता कर सकते हैं कि फोन की स्क्रीन की कंडीशन कैसी है. स्मार्टफोन में सबसे ज्यादा जरूरी हिस्सा उसकी डिस्प्ले होती है. इसी की मदद से आप फोन का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में सेकंड हैंड फोन खरीदते समय अगर स्क्रीन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आपको खराब फोन मिल सकता है. इसलिए फोन खरीदने से पहले स्क्रीन को अच्छी तरह चेक करना जरूरी है. आइए जानते हैं स्क्रीन टेस्ट करने का आसान तरीका. जानिए स्क्रीन टेस्ट करने का आसान तरीका सेकंड हैंड स्मार्टफोन खरीदते समय आपको सिर्फ फोन की बॉडी चेक नहीं करनी चाहिए. सिर्फ बाहर से फोन देखने पर आपको पता नहीं चल सकता कि फोन के अंदर या स्क्रीन में कोई खराबी है या नहीं. इसके लिए आपको फोन की स्क्रीन को भी अच्छी तरह टेस्ट करना चाहिए. स्क्रीन टेस्ट की मदद से आप पता कर सकते हैं कि डिस्प्ले सही तरीके से काम कर रही है या नहीं और स्क्रीन पर कोई निशान या खराब पिक्सेल तो नहीं हैं. स्क्रीन बर्न क्या होता है? जब आप किसी फोन का बहुत लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी डिस्प्ले के कुछ पिक्सेल खराब होने लगते हैं. इसकी वजह से स्क्रीन पर किसी पुराने आइकन, टेक्स्ट या इमेज का निशान दिखाई देने लगता है. इसे स्क्रीन बर्न कहा जाता है. कई बार स्क्रीन बर्न इतना हल्का होता है कि सामान्य इस्तेमाल में आसानी से नजर नहीं आता. इसलिए सेकंड हैंड फोन खरीदते समय इसे अलग से चेक करना जरूरी है. ऐसे करें फोन की स्क्रीन टेस्ट अगर आप सेकंड हैंड फोन खरीदने जा रहे हैं, तो फोन की बॉडी के साथ स्क्रीन को भी जरूर चेक करें. इसके लिए आप YouTube पर जाकर White Screen या Grey Screen Test का वीडियो चला सकते हैं. वीडियो चलाने के बाद फोन की पूरी स्क्रीन एक ही रंग की हो जाएगी. अब स्क्रीन को ध्यान से देखें. अगर कहीं कोई दाग, अलग रंग का हिस्सा या पुराने आइकन का निशान दिखाई दे रहा है, तो फोन की स्क्रीन में दिक्कत हो सकती है. इस छोटे से टेस्ट की मदद से आप सेकंड हैंड फोन खरीदने से पहले उसकी स्क्रीन की कंडीशन का बेहतर अंदाजा लगा सकते हैं. इससे आपको खराब डिस्प्ले वाला फोन खरीदने से बचने में मदद मिल सकती है.

बिहार बाढ़ पर केंद्र की नजर, शिवराज सिंह चौहान ने राघोपुर में लिया हालात का जायजा

 पटना  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में एक केंद्रीय टीम बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर ब‍िहार पहुंचे। भोपाल से विशेष विमान से पटना हवाईअड्डा पहुंचने के बाद वे सीएम सम्राट चौधरी के साथ हाजीपुर पुलिस लाइन से सड़क मार्ग से राघोपुर प्रखंड के तेरसिया दियारा पहुंचे। यहां एसडीआरएफ के बोट और ट्रैक्टर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी मौजूद है। सारण जिला में दिघवारा और पटना जिला में मनेर के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। दोपहर में पटना में बैठक कर आपदा प्रबंधन और बाढ़ राहत कार्यों की जानकारी लेंगे। भागलपुर से पटना लौटने के बाद जाएंगे कोलकाता उसके बाद मुंगेर के लिए रवाना हो जाएंगे। वहां से बाढ़ का निरीक्षण करते हुए भागलपुर पहुंचेंगे। भागलपुर राजकीय अतिथिशाला में रात्रि विश्राम करेंगे। गुरुवार दोपहर तक पटना लौंटेंगे। और उसी दिन 12:40 बजे इंडिगो की फ्लाइट से कोलकाता के लिए प्रस्थान कर जाएंगे। बहरहाल 15 जिलों (पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, अरवल) के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें बाढ़ प्रभावित हैं। इनके अंतर्गत लगभग 49.72 लाख लोग और 55 हजार हेक्टेयर भूमि बाढ़ प्रभावित हुई है। राज्य सरकार की ओर से राहत-बचाव का काम चल रहा है। वैसे सरकार बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नदियों में उतार-चढ़ाव: केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, डुमरिया घाट पर गंडक, बलतारा एवं कुर्सेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, पटना के दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर एवं कहलगांव में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती एवं दरौली में घाघरा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर स्थिर रहने या फिर घटने की संभावना है। मुख्य रूप से वीरपुर बराज पर कोसी का जलस्तर स्थिर तो बाल्मीकिनगर बराज पर गंडक के जलस्तर में गिरावट पाई गई। हालांकि, इंद्रपुरी बराज पर सोन के जलस्तर में वृद्धि भी देखने को मिली है। वर्या और पूर्वानुमान : राज्य में सितंबर में अब तक 112.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से लगभग छह प्रतिशत अधिक है। हालांकि, एक जून से 14 सितंबर तक सामान्य से 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके बावजूद बाढ़ का कारण नेपाल से आने वाली नदियां और बिहार मेंं नदियों में गाद का भर जाना है। बिहार मौसम सेवा केंद्र का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर बहुत हल्की से मध्यम स्तर की वर्षा होने की संभावना जताई गई है। आपदा प्रबंधन विभाग का दावा     1089 कम्युनिटी किचन से लगभग 147.73 लाख लोगों को सुबह-शाम का भोजन कराया जा चुका है।     13 राहत शिविरों में 11,508 बाढ़ शरणार्थियों के लिए आवासन, भोजन, चिकित्सा आदि की व्यवस्था है।     1358 सरकारी नावें चलाई जा रहीं पूरे राज्य में, एसडीआरएफ की 27 व एनडीआरएफ 10 टीमें तैनात हैं।     4.11 लाख पालीथीन शीट, 78,700 ड्राई राशन पैकेट, 1400 फूड पैकेट का अब तक वितरण हुआ है।     14,251 क्विंटल पशुचारा का वितरण हो चुका है पशुपालकों के बीच। सूखा व हरा चारा की व्यवस्था है। बाढ़ सहायता राश‍ि के पांच पहलू     बाढ़ से प्रभावित : 15 जिले, 88 प्रखंड, 575 ग्राम पंचायत, 2,642 गांव तथा 21 शहरों के 136 वार्ड। 50 लाख लोग तथा 55 हजार हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित है।     सभी को सहायता : मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी प्रभावित परिवार राहत से वंचित न रहे। छूटे हुए परिवारों को एक सप्ताह के भीतर सूची में जोड़ने का निर्देश।     राहत व बचाव : एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 21 टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। स्थिति सामान्य होने तक राहत-बचाव कार्य जारी रहेगा।     पुनर्निर्माण हो बेहतर :'बिल्ड बैक बेटर दैन बिफोर'' (पहले से बेहतर बनाना) की थीम पर पुनर्निर्माण एवं पुन:-प्राप्ति कार्य किए जाएंगे। सभी पुन:-प्राप्ति कार्य एक माह के भीतर पूरे करने का निर्देश।     क्षति का आकलन : बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रस्तावित दौरे के मद्देनजर अधिकारियों को क्षति का समुचित आकलन कर रिपोर्ट तैयार रखने का निर्देश।  

Ramayana के ‘जय जय राम’ में दिखा राम-भरत का भावुक रिश्ता, जानें भरत के त्याग की पूरी कहानी

 नितेश तिवारी के डायरेक्शन में बनी फिल्म रामायण का पहला गाना 'जय जय राम' हाल ही में रिलीज हुआ है. ए.आर. रहमान के संगीत, डॉ. कुमार विश्वास के बोल और अरिजीत सिंह व श्रेया घोषाल की सुरीली आवाज से सजा यह गाना दर्शकों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है. इस गाने में श्रीराम (रणबीर कपूर) और माता सीता (साई पल्लवी) के भव्य विवाह, अयोध्या में नगरवासियों द्वारा पुष्प वर्षा से स्वागत और राजा दशरथ (अरुण गोविल) के साथ भावनात्मक दृश्यों को दिखाया गया है. लेकिन इस पूरे गाने का सबसे दिल को छू लेने वाला दृश्य वह है, जहां श्रीराम अपने छोटे भाई भरत से गले मिलते हैं. इस गाने के माध्यम से फिल्म मेकर्स ने भरत के किरदार में नजर आने वाले एक्टर आदिनाथ कोठारे की पहली झलक भी दिखाई है. तो आइए जानते हैं कि रामायण में भरत का किरदार कितना महत्वपूर्ण था और आदिनाथ कोठारे पर्दे पर जिसका किरदार निभाएंगे उनका वास्तविक सच क्या है. कौन थे भरत? रामायण व रामचरितमानस के मुताबिक, भरत केवल श्रीराम के भाई (अनुज) नहीं थे, बल्कि वे निस्वार्थ प्रेम, धर्म और त्याग के सर्वोच्च प्रतीक भी माने जाते हैं. भरत सूर्यवंशी राजा दशरथ और उनकी प्रिय रानी कैकेयी के पुत्र थे. बचपन से ही भरत का अपने बड़े भाई श्रीराम के प्रति स्नेह और आदर रखते थे. भरत का विवाह राजा जनक के भाई कुशध्वज की पुत्री मांडवी से हुआ था. मातृ-मोह पर धर्म की विजय रामायण के अनुसार, जब भरत अपने ननिहाल (कैकेय देश) से अयोध्या लौटे और उन्हें ज्ञात हुआ कि उनकी माता कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगकर श्री राम को 14 वर्ष का वनवास पर भेजा है और उनके लिए राजसिंहासन मांगा है, तो वे अत्यंत दुखी और लज्जित हुए. भरत ने बिना किसी झिझक के अपनी माता के इस अनुचित कार्य का विरोध किया. उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अयोध्या के सिंहासन पर केवल बड़े भाई श्रीराम का अधिकार है और किसी भी अनैतिक सुख को वे स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने अपनी माता कैकेयी के इस अपराध की कठोर शब्दों में निंदा भी की थी. चित्रकूट में राम-भरत मिलाप इसके बाद भरत केवल दुखी होकर शांत नहीं बैठे, बल्कि वे पूरी अयोध्या नगरी, माताओं और गुरु वशिष्ठ के साथ श्री राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट के जंगलों की ओर चल पड़े थे. चित्रकूट में जब श्रीराम और भरत का मिलाप हुआ, तो वह प्रसंग इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गई थी. भरत ने श्रीराम के चरणों में गिरकर अयोध्या वापस लौटने की विनती भी की थी. हालांकि, श्रीराम ने अपने पिता के वचनों का मान रखते हुए अयोध्या लौटने से इनकार कर दिया था. जब श्री राम ने लौटने से मना कर दिया था, तो भरत ने श्री राम की 'चरण पादुकाएं' (खड़ाऊ) मांगी थी. उन्होंने संकल्प लिया कि वे कभी भी अयोध्या के राजसिंहासन पर नहीं बैठेंगे. भरत ने श्री राम की पादुकाओं को सिंहासन पर विराजमान किया और स्वयं को केवल उनका 'प्रतिनिधि' (सेवक) मानकर राज्य का संचालन किया था. नंदीग्राम में 14 वर्षों का कठिन तपस्वी जीवन भरत केवल नाम के त्यागी नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपने आचरण से उसे सिद्ध किया था. उन्होंने राजमहल के सारे सुख-वैभव का त्याग कर दिया था. महल के वैभव और सुख-सुविधाओं को छोड़कर, भरत ने अयोध्या के बाहर नंदीग्राम में एक साधारण कुटिया बनाई थी. जहां 14 वर्षों तक उन्होंने भी अपने भाई श्रीराम की तरह सिर पर जटाएं रखीं, वल्कल वस्त्र पहने, कंद-मूल खाया और भूमि पर सोकर एक तपस्वी का जीवन बिताया था. उनका मानना था कि यदि उनके भाई श्रीराम वनों में कष्ट सह रहे हैं, तो वे महल की सुख-सुविधाओं का आनंद लेने के हकदार नहीं हैं. आज के समाज के लिए भरत का संदेश भरत का चरित्र हमें सिखाता है कि रिश्ते, मूल्य और भ्रातृ-प्रेम किसी भी भौतिक संपत्ति या पद से कहीं ऊपर होते हैं. उन्होंने सिद्ध किया था कि सच्चा अधिकार वही है जो धर्म और न्याय पर आधारित हो, न कि जबरन छीना गया हो.

राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: AI से बना फर्जी सरकारी पत्र वायरल, आरक्षण लॉटरी की तारीखें फर्जी

जयपुर राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनाव 2026 को लेकर चुनावी माहौल गर्माया हुआ है, लेकिन इस बीच एक गंभीर और सनसनीखेज साइबर जालसाजी का मामला भी सामने आया है। दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का एक ऐसा आधिकारिक दिखने वाला पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्यों, सरपंचों और वार्ड पंचों की आरक्षण लॉटरी अब 11 और 13 अक्टूबर 2026 को निकाली जाएगी। इस वायरल लेटर ने राज्य के लाखों ग्रामीण मतदाताओं, सरपंच पद के दावेदारों और प्रशासनिक हलकों में भारी भ्रम फैला दिया है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह (IAS) और पंचायती राज विभाग ने तुरंत स्थिति स्पष्ट करते हुए इस पत्र को पूरी तरह फर्जी और एआई तकनीक से तैयार किया गया साइबर फ्रॉड करार दिया है। विभाग ने साफ किया है कि अभी आरक्षण लॉटरी की कोई भी नई तारीख तय नहीं की गई है और आम जनता को ऐसे किसी भी असत्यापित पत्र पर भरोसा नहीं करना चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने की पत्र के 'फ़र्ज़ी' होने की पुष्टि जानकारी में सामने आया है कि चुनावी मौसम का फायदा उठाकर किसी असामाजिक तत्व द्वारा एआई टूल्स का गलत इस्तेमाल करके तैयार किए गए इस फर्जी पत्र में बाकायदा शासन सचिव डॉ. जोगा राम के नाम और फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया है। पत्र में सरकारी पत्रांक संख्या 24 (30) परावि/विधि/आरक्षण/2026/79 और दिनांक 15/09/2026 अंकित करके इसे सभी जिला कलेक्टरों और उपखंड अधिकारियों को संबोधित दिखाया गया है। सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप ग्रुपों, फेसबुक और एक्स (ट्विटर) पर जैसे ही यह आदेश वायरल हुआ, ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे स्थानीय नेताओं के बीच होड़ मच गई। लेकिन जब इस पत्राचार की सत्यता की जांच की गई, तो विभाग के रिकॉर्ड में ऐसा कोई आदेश जारी होने की बात पूरी तरह नकार दी गई। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने अधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, "यह पत्र पूरी तरह फर्जी है। पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की लॉटरी की नई तिथियां अभी निर्धारित नहीं की गई हैं। जल्द ही आधिकारिक बैठक के बाद सही तिथियों का ऐलान किया जाएगा।" वायरल फर्जी पत्र : गुमराह करने वाले दावे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस फर्जी सरकारी लेटर में हाई कोर्ट के पुराने आदेशों और नगरीय निकाय चुनाव की आचार संहिता का हवाला देकर लोगों को चकमा देने की कोशिश की गई थी: 11 अक्टूबर का फर्जी दावा: वायरल पत्र में लिखा गया था कि जिला स्तर पर (जिला परिषद सदस्य, प्रधान एवं पंचायत समिति सदस्य) की आरक्षण लॉटरी 11 अक्टूबर 2026 को निकाली जाएगी। 13 अक्टूबर का भ्रामक दावा: उपखंड स्तर पर (सरपंच एवं वार्ड पंच) पदों के लिए आरक्षण लॉटरी 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित करने की बात कही गई थी। 15 नवंबर की डेडलाइन का हवाला: पत्र में यह भी दर्शाया गया था कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य सरकार 15 नवंबर 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने के लिए संकल्पबद्ध है। विभागीय प्रतिलिपि की नकल: पत्र के नीचे बाकायदा मुख्य सचिव, महाधिवक्ता और जिला परिषद सीईओ को प्रतिलिपि भेजने का नाटक रचा गया था, ताकि कोई भी इसे पहली नजर में फर्जी न समझ सके। AI से तैयार हो रहे फर्जी सरकारी दस्तावेज राजस्थान में पिछले कुछ समय से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके फर्जी सरकारी लेटरहेड, डिजिटल साइन और फर्जी लेटर तैयार करने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। गंभीर कानूनी अपराध: किसी सरकारी विभाग के नाम से फर्जी आदेश बनाना और उस पर आईएएस अधिकारी के हस्ताक्षर स्कैन करके लगाना भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत गैर-जमानती अपराध है। जांच शुरू: राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने वायरल लेटर के ओरिजिनल सोर्स और इसे सबसे पहले शेयर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच शुरू कर दी है। सख्त कार्रवाई की चेतावनी: फर्जी पत्र तैयार करने और अफवाह फैलाने वाले उपद्रवियों के खिलाफ कड़ा मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है। ग्रामीण दावेदारों में बढ़ा असमंजस राजस्थान के ग्रामीण अंचल में सरपंच और पंचायत समिति सदस्य बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए आरक्षण लॉटरी बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब तक आरक्षण की स्थिति साफ नहीं होती, प्रत्याशी अपनी रणनीति नहीं बना पाते। पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक राज्य निर्वाचन आयोग और विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तब तक सोशल मीडिया पर तैर रही किसी भी तारीख पर विश्वास न करें। गांव-ढाणी के मतदाताओं और जनप्रतिनिधियों से अपील की गई है कि वे किसी भी असत्यापित पत्र को आगे व्हाट्सएप ग्रुपों में फॉरवर्ड न करें। कब घोषित होंगी पंचायती राज चुनाव की असली तारीखें? पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 17 और 18 सितंबर 2026 को आरक्षण लॉटरी निकाली जानी थी, जिसे नगरीय निकाय चुनावों की व्यस्तता के चलते फिलहाल स्थगित करने की तैयारी की जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग की उच्चस्तरीय बैठक के बाद बहुत जल्द आरक्षण लॉटरी की आधिकारिक और नई समय-सारिणी जारी की जाएगी। आयोग का लक्ष्य है कि पारदर्शी तरीके से आरक्षण लॉटरी निकालकर निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराए जाएं।  

‘रामबोला’ नाम पर छिड़ा विवाद, एक ही दिन दो फिल्मों का ऐलान; जानें किसके नाम है टाइटल

 'हनुमान अंश' फिल्म की जादुई सफलता से मेकर्स की खुशी का ठिकाना नहीं है. नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म की सक्सेस को देखते हुए 'हनुमान अंश' के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने गणेष चतुर्थी के शुभ मौके पर अपनी अगली फिल्म का ऐलान किया, जो महाकवि तुलसीदास के जीवन पर आधारित होगी. फिल्म का नाम 'रामबोला' होगा. रामबोला पर विवाद क्यों? विशाल चतुर्वेदी ने अपनी अपकमिंग फिल्म की घोषणा के साथ ही इसका नाम भी अनाउंस कर दिया. उन्होंने बताया कि उनकी फिल्म का नाम 'रामबोला' होगा. विशाल चतुर्वेदी ने प्रोडक्शन हाउस महावीर जैन के साथ मिलकर रामबोला नाम की फिल्म बनाने का ऐलान करके फैंस को बड़ा तोहफा दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्टर भी शेयर किया. लेकिन उसी दिन एक दूसरे डायरेक्टर और डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भी 'रामबोला' नाम से एक और फिल्म का ऐलान कर दिया. अनाउंसमेंट पोस्ट में बताया गया कि 'रामबोला' फिल्म डॉक्टर चंद्रप्रकाश के निर्देशन में बनेगी, जबकि इसे मधु मंटेना और मंदिरा द्विवेदी प्रोड्यूस करेंगी.   'रामबोला' नाम से एक साथ एक ही दिन दो फिल्में अनाउंस होने पर फिल्म के टाइटल को लेकर विवाद खड़ा हो गया. अब सवाल यह उठता है कि आखिर फिल्म का टाइटल किसे मिलेगा? किसे मिलेगा टाइटल? दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में महावीर जैन से जुड़े एक करीबी सूत्र के हवाले से बताया गया है कि 'रामबोला' टाइल 'हनुमान अंश' बनाने वाले विशाल चतुर्वेदी को ही मिलेगा, क्योंकि यह टाइटल उन्हीं के नाम पर रजिस्टर है. सूत्र ने आगे बताया कि विशाल ने कुछ समय पहले 'रामबोला' फिल्म को लेकर महावीर जैन से मुलाकात की थी. आपसी सहमति से फिल्म बनाने पर बात हुई. फिल्म के राइट्स भी विशाल चतुर्वेदी और महावीर जैन प्रोडक्शन के पास हैं. लेकिन कहानी में एक और ट्विस्ट है. चंद्रप्रकाश द्विवेदी का दावा है कि 'रामबोला' फिल्म के टाइटल के राइट्स उनके पास हैं. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने एक इंटरव्यू में दावा किया है कि उन्होंने 'रामबोला' पिल्म को लेकर महावीर जैन से मुलकाता की थी. उन्होंने महावीर जैन को मेल पर वीडियो भी भेजा था. हालांकि, टाइटल पर छिड़े विवाद के बीच IMPAA  'इंडियन मोशन पिक्चर आर्टिस्ट एसोसिएशन ने एक नोट जारी कर बताया है कि 'रामबोला' टाइटल विशाल चतुर्वेदी के नाम से रिजस्टर है. 23 जून को विशाल ने एसोसिएशन की मीटिंग में रामबोला टाइटल रजिस्टर करवाया था.  

20 साल से इंतजार कर रहे गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण पर सरकार ने शुरू किया परीक्षण

 चंडीगढ़ हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे करीब 12 हजार गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की मांग पर प्रदेश सरकार के स्तर पर अब प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ 31 अगस्त को हुई बैठक के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले को आगे परीक्षण के लिए भेज दिया है। इससे लंबे समय से नियमितीकरण की राह देख रहे अतिथि अध्यापकों को उम्मीद बंधी है कि सरकार इस मुद्दे का व्यावहारिक समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता ने सीएम के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव को गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण से जुड़े मामले को मार्क किया है। इसमें हाई कोर्ट के आदेश और नियमितीकरण की प्रक्रिया से संबंधित पूरी रिपोर्ट तैयार करने तथा मुख्यमंत्री को इससे अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित पत्र पर 15 सितंबर की तारीख अंकित है। ऐसे में अब अधिकारियों के स्तर पर मामले के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। दरअसल, 31 अगस्त को विधानसभा सत्र के बाद विधानसभा सचिवालय परिसर में मुख्यमंत्री के साथ गेस्ट टीचरों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई थी। इसमें शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण से जुड़े हाई कोर्ट के आदेश और उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग का मुद्दा प्रमुखता से रखा था। यह वीडियो भी देखें मुख्यमंत्री ने मामले में अंतिम स्तर की बैठक बुलाकर ठोस समाधान निकालने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की ओर से फाइल आगे बढ़ाया जाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गेस्ट टीचर इससे पहले शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और निदेशक के साथ भी अपनी मांग उठा चुके हैं। विधानसभा सत्र से पहले उन्होंने सरकार के मंत्रियों और विपक्षी विधायकों को भी ज्ञापन सौंपे थे। विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। करीब 20-21 वर्षों की सेवा का हवाला देते हुए गेस्ट टीचर नियमितीकरण को केवल नौकरी का विषय नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के सम्मान और परिवार के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। अब मुख्यमंत्री कार्यालय से मामला अधिकारियों को भेजे जाने के बाद उनकी नजर अगली बैठक और रिपोर्ट पर है। हालांकि, अभी नियमितीकरण का अंतिम निर्णय होना बाकी है, लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से मामले का दोबारा सक्रियता से परीक्षण शुरू होना गेस्ट टीचरों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।  

जल संसाधन विभाग की बड़ी सौगात- धमतरी और बालोद जिलों में 5 सिंचाई योजनाओं के लिए 21.50 करोड़ रुपये स्वीकृत

जल संसाधन विभाग की बड़ी सौगात-   धमतरी और बालोद जिलों में 5 सिंचाई योजनाओं के लिए 21.50 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा किसानों को बड़ी राहत देते हुए धमतरी और बालोद जिलों की पांच प्रमुख सिंचाई योजनाओं के सुदृढ़ीकरण एवं विकास कार्यों के लिए कुल 21 करोड़ 50 लाख 23 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन योजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्रीय किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। प्रमुख स्वीकृतियाँ              धमतरी जिला के राजाडेरा लघु जलाशय जलद्वार के नवीनीकरण एवं जीर्णाेद्धार कार्य के लिए 1 करोड़ 65 लाख 7 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे लगभग 285 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसी प्रकार खट्टी एनीकट (महानदी) महानदी पर निर्मित खट्टी एनीकट के संरक्षण और जलद्वारों के उन्नयन कार्य हेतु 4 करोड़ 89 लाख 30 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं, जिससे करीब 30 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।           बालोद जिला (कुल 3 योजनाएं) के जलाशयों में विद्युतीकरण तांदुला, गोंदली और खरखरा जलाशय में विद्युतीकरण व प्रकाश व्यवस्था के कार्यों के लिए 4 करोड़ 95 लाख 99 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे 285 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। खरखरा नदी के बांयी तट पर शीतला मंदिर के पास घाट एवं ग्राम मारीदेवरी तटबंध निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 99 लाख 98 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे 183 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र लाभांवित होगा।          तांदुला परियोजना के अंतर्गत सकरैद वितरक नहर (नाहंदा माईनर, डौकीडीह माईनर, सुखरी माईनर और भदेरा माईनर) के रिमॉडलिंग, लाइनिंग एवं पक्के कार्यों के उन्नयन के लिए 4 करोड़ 99 लाख 89 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे भी 183 हेक्टेयर क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का सीधा लाभ मिलेगा। इस प्रकार कुल 21.50 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन मजबूत होगा और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।