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सोलर पैनल से घटा बिजली बिल, किसान नेतराम को हर माह ₹2,000 की बचत

सौर ऊर्जा से रोशन हुआ किसान नेतराम का घर, पीएम सूर्य घर योजना से हर माह 2000 रुपए की बचत  खेती-किसानी को मिला नया बल ​रायपुर        प्रदेश में 'सेवा संकल्प अभियान' के माध्यम से जन-कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से न केवल आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है। ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम गोबरसिंहा निवासी किसान नेतराम पटेल का है, जिनके जीवन में 'प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' आर्थिक संबल बनकर उभरी है। ​बिजली के भारी-भरकम बिल से मुक्ति       ​योजना का लाभ लेने से पहले नेतराम पटेल के घर का मासिक बिजली बिल करीब 2,200 से 2,300 रुपए तक आता था, जो उनके बजट पर एक बड़ा वित्तीय बोझ था। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत छत पर सौर पैनल (रूफटॉप सोलर सिस्टम) स्थापित होने के बाद अब उनका मासिक बिजली बिल घटकर मात्र 250 से 300 रुपए रह गया है। ​बचत की राशि से कृषि कार्यों में मिला संबल        ​सोलर पैनल के माध्यम से बिजली की जरूरतें घर पर ही पूरी होने से नेतराम को हर महीने लगभग 2,000  रुपए की सीधी बचत हो रही है। इस बचत राशि का उपयोग वे अपनी खेती-किसानी से जुड़े दैनिक खर्चों को पूरा करने में कर रहे हैं। इससे उन्हें खाद, बीज व अन्य कृषि आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संबल मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पहले हर महीने बिजली बिल के रूप में एक बड़ी राशि देनी पड़ती थी। अब वही पैसा बचकर खेती के काम आ रहा है। इस योजना ने मेरी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाया है। ​शासन के प्रति जताया आभार         ​योजना से जीवन में आए इस सकारात्मक परिवर्तन के लिए नेतराम पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अन्य किसान भाइयों और ग्रामीणों से भी इस योजना से जुड़कर बिजली खर्च घटाने और अपनी बचत बढ़ाने की अपील की है। ​धरातल पर असर दिखा रहा 'सेवा संकल्प अभियान'       ​नेतराम पटेल की यह सफलता की कहानी यह साबित करती है कि जब शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं सीधे जरूरतमंदों तक पहुँचती हैं, तो उनका प्रभाव केवल मुफ्त या सस्ती बिजली तक सीमित नहीं रहता; बल्कि वह बचत, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण का स्थायी माध्यम बन जाता है।

देश सेवा से उद्यम तक का सफर, PMFME योजना ने बदली सफलता की कहानी

देश सेवा से उद्यम सेवा तक – प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना ने बनाया सफल उद्यमी भोपाल  भिण्ड शहर के चतुर्वेदी नगर निवासी संतोष सिंह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना पीएमएफएमई अंतर्गत प्राप्त सहायता के माध्यम से सफल उद्यमी बने हैं। भारतीय सेना में हवलदार के पद पर 17 वर्षों तक सेवा देने वाले सिंह ने देश-सेवा के बाद जिले में उद्यम-सेवा के जज्बे के साथ खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कदम रखा। वैष्णवी ऑयल मिल के माध्यम से ओडीओपी उत्पाद – सरसो का प्रसंस्करण कर वे न केवल 10 लाख की वार्षिक आय प्राप्त कर रहे हैं बल्कि 5 अन्य स्थानीय व्यक्तियों को रोजगार भी दे रहे है। शुरुआती दिनों में वैष्णवी ऑयल मिल की सीमित संसाधनों के कारण उत्पादन क्षमता कम थी और उत्पाद को बड़ा बाजार नहीं मिल पा रहा था। पीएमएफएमई योजना अंतर्गत आवेदन करने पर योजना के तहत उन्हें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 13.50 लाख रुपए का ऋण और 5.25 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। उन्होंने इस सहायता से मिल के उन्नयन हेतु आधुनिक एक्सपेलर, फिल्टर और मोटर मशीनें लगाई जिससे उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई। आज वे ग्रामीण क्षेत्रों से किसानों से सीधे सरसों खरीद कर शुद्ध सरसों का तेल निकालते हैं और उसे खुला एवं टीन के डिब्बों में पैक कर स्थानीय बाजार में बेचते हैं। सिंह का कहना है कि पीएमएफएमई योजना अत्यंत लाभकारी है जिसके अंतर्गत सहायता प्राप्त कर युवा अपना उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। सिंह अपने खाद्य प्रसंस्करण उद्यम के सफल संचालन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत संचालित इस योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना पर अधिकतम 10 लाख रुपए की सीमा तक 35 प्रतिशत अनुदान और 3 प्रतिशत ब्याज माफी का प्रावधान है। जिले के युवा, कृषक, और छोटे व्यवसायी व्यक्तिगत स्तर पर, तथा किसान उत्पाद संगठन, स्वसहायता समूह और उत्पादक सहकारी समिति उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से संपर्क कर नए औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अथवा मौजूदा इकाइयों के उन्नयन के लिए योजना अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।  

Budhni Railway Station: बुदनी को मिलेगी नई रेल कनेक्टिविटी, ट्रेनों के स्टॉपेज से यात्रियों को राहत

 इंदौर  इंदौर से रेल रूट से बुदनी और नर्मदापुरम की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा में समय भी बचेगा। बुदनी रेलवे स्टेशन आने वो समय में जंक्शन के रूप में लेने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक इटारसी और भोपाल के बीच यह बड़ा जंक्शन होगा। बुदनी स्टेशन पर ट्रेनों के स्टॉपेज से यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही इससे यात्रा में लगने वाला लंबा समय भी कम होगा। इस स्टेशन पर पहले कुछ ट्रेनों का स्टॉपेज था, अब जंक्शन बनने के बाद इसमें कई ट्रेनों का स्टॉपेज रहेगा। इससे इस क्षेत्र के यात्रियों को सुविधा मिलेगी। बुदनी रेलवे स्टेशन पर नई बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है। जल्द ही यह बनकर तैयार हो जाएगी। जिस रेलवे स्टेशन पर तीन दिशाओं की ओर से ट्रेन आती है उसे जंक्शन कहा जाता है। ऐसे में आने वाले समय में बुदनी रेलवे स्टेशन भोपाल और इटारसी के बीच महत्वपूर्ण रहेगा। सलकनपुर मार्ग से जुड़ेगा जुड़ेगा क्षेत्र बुदनी रेलवे स्टेशन के जंक्शन बनने से तीसरी लाइन मिलेगी। इसके साथ ही सलकनपुर मार्ग भी इससे जुड़ जाएगा। इस नए रूट के बनने से अब ट्रेनों को भोपाल घूमकर नहीं जाना होगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा। पहले इस रेलवे स्टेशन कुछ गाड़ियों का हाल्ट था। लेकिन जंक्शन बनने से नई ट्रेमें रुकने के रास्ते खुल गए हैं। नई बिल्डिंग नए स्ट्रक्चर का कंस्ट्रक्शन किया जा रहा है। लेकिन यहां पर पहले से बनी रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग अभी भी है। जंक्शन बनने के साथ ही यहां अत्याधुनिक सुविधाओं वाली नई बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तेजी से जारी है। बढ़ते भारत के लिए एक नया रेल गलियारा  भोपाल-इटारसी कॉरिडोर पहले से ही अत्यधिक व्यस्त है, और मध्य प्रदेश का पश्चिमी भाग राज्य के केंद्रीय और पूर्वी भागों से संपर्क के लिए लगभग पूरी तरह से इसी पर निर्भर है। इंदौर-बुदनी लाइन एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी, जिससे नेटवर्क की क्षमता में काफी वृद्धि होगी और मौजूदा रेल बुनियादी ढांचे पर भीड़भाड़ कम होगी। एक बार चालू हो जाने पर, यह कॉरिडोर इंदौर और जबलपुर के बीच की दूरी को लगभग 68 किलोमीटर और यात्रा के समय को लगभग दो घंटे कम कर देगा, जिससे यात्रियों और माल ढुलाई के लिए एक तेज और अधिक कुशल संपर्क उपलब्ध होगा। इससे इंदौर, देवास और सीहोर जिलों के कई कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में भी सुधार होगा, जिनमें से कई पारंपरिक रूप से रेल नेटवर्क से बाहर रहे हैं। बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग यह मध्य भारत में चल रही सबसे महत्वाकांक्षी रेलवे निर्माण परियोजनाओं में से एक है। इस कॉरिडोर को लेवल-क्रॉसिंग-मुक्त रेलवे लाइन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे परिचालन सुरक्षा और दक्षता में काफी सुधार होगा। इसका पैमाना निर्माणाधीन बुनियादी ढांचे में परिलक्षित होता है: • 80 महत्वपूर्ण पुल • 96 छोटे पुल • 139 सड़क अंडरब्रिज (आरयूबी)। • 5 सड़क ओवरब्रिज (आरओबी) • 18 स्टेशन: 3 ठहराव स्टेशन, 15 क्रॉसिंग स्टेशन • 10.6 किमी से अधिक की कुल लंबाई वाले 3 पुल • लगभग 10 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली 2 रेलवे सुरंगें दूरी कम होगी नया जंक्शन बनने से तीसरी लाइन मिल जाएगी। इससे अनकनेक्टेट सलकनपुर मार्ग के क्षेत्र जुड़ जाएंगे। साथ ही भोपाल की अपेक्षा नये रूट से जाने पर दूरी कम होगी और समय भी बचेगा। -नवल अग्रवाल, पीआरओ रेलवे

ट्रंप के रूस प्रतिबंध कानून से भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, जानें क्या है पूरा मामला

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  ऐतिहासिक 'लिंडसे ओ ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' पर हस्ताक्षर कर इसे कानूनी रूप दे दिया है। इस कानून के सामने आते ही वैश्विक शेयर और कमोडिटी बाजारों में हलचल मच गई है। मीडिया में यह सुर्खियां तैर रही हैं कि वॉशिंगटन अब रूस से कच्चा तेल और नेचुरल गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम दंडात्मक टैरिफ लगाने जा रहा है। हालांकि, अगर इस नए कानून की बारीकियों और कानूनी प्रावधानों को समझें, तो तस्वीर कुछ अलग ही नजर आती है। 'अधिकार मिलना' और 'लागू करना'- दो अलग बातें अमेरिकी संसद ने व्हाइट हाउस को रूसी ऊर्जा खरीदारों पर लगाम कसने के लिए नया कानूनी अधिकार दे दिया है। लेकिन कानून में इसका प्रावधान ऐसा रखा गया है जो राष्ट्रपति को तुरंत फैसला लेने के बजाय कूटनीतिक सौदेबाजी की पूरी छूट देता है। 0 से 100% की फ्लेक्सिबल रेट: कानून में यह अनिवार्य नहीं है कि ट्रंप तुरंत 100% ही टैरिफ थोप दें। यह दर शून्य से लेकर 100 प्रतिशत के बीच कुछ भी रखी जा सकती है। 30 दिनों की मोहलत: कानून लागू होने के बाद व्हाइट हाउस के पास 30 दिनों का समय होगा, जिसके बाद ही यह समीक्षा की जाएगी कि किन देशों ने रूसी ऊर्जा की नई खरीद की है। 'टॉप-5' खरीदारों की समीक्षा: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) हर 180 दिनों में दुनिया के उन 5 सबसे बड़े देशों की लिस्ट की समीक्षा करेगा जो रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस आयात करते हैं। राष्ट्रपति के पास 'राष्ट्रीय हित' में छूट देने का वीटो अधिकार इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें राष्ट्रपति को असीमित विवेकाधिकार दिए गए हैं। अगर ट्रंप प्रशासन को लगता है कि किसी देश पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था या उसके रणनीतिक गठबंधनों को नुकसान पहुंचेगा, तो राष्ट्रपति इस टैरिफ को टाल या पूरी तरह माफ भी कर सकते हैं। अगर कोई देश धीरे-धीरे रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है, तो उस पर टैरिफ की दरों को घटाया भी जा सकता है। अमेरिका की तरफ से भारतीय सामानों पर तुरंत भारी-भरकम टैरिफ न लगाने के पीछे तीन प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं: अमेरिका में महंगाई बढ़ने का डर: भारत से अमेरिका जाने वाले उपभोक्ता सामानों पर 100% ड्यूटी लगाने से खुद अमेरिकी जनता के लिए दैनिक चीजें बेहद महंगी हो जाएंगी, जिससे अमेरिका में महंगाई बेकाबू हो सकती है। द्विपक्षीय व्यापार समझौता: नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच इस समय एक व्यापक व्यापार समझौते पर संवेदनशील बातचीत चल रही है। यह नया कानून अमेरिकी मेज पर बातचीत का पलड़ा भारी करने का एक औजार है, न कि तुरंत चलाया जाने वाला हथौड़ा। वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप: अगर भारतीय रिफाइनरियों की क्षमता को अचानक विश्व बाजार से काट दिया जाता है, तो पूरे यूरोप और एशिया में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत हो जाएगी, जिससे क्रूड की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। क्या है भारत का रुख? विदेश मंत्रालय ने इस कानून के बनने के बाद दोहराया है कि भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंत्रालय का कहना है कि भारत बाजार की स्थितियों के हिसाब से अलग-अलग देशों से तेल खरीदता रहेगा और देश के आर्थिक और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कानूनी और कूटनीतिक कदम उठाए जाएंगे।

Team India सीरीज से पहले न्यूजीलैंड की बढ़ी चिंता, रचिन रविंद्र के कंधे में लगी चोट

नई दिल्ली अगले महीने भारतीय क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर जा रही है. इस दौरे पर टीम इंडिया को 5 टी20, 3 वनडे और 2 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है, लेकिन उससे पहले मेजबान न्यूजीलैंड को एक बड़ा झटका लगा है. कीवी टीम के स्टार ऑलराउंडर रचिन रविंद्र को इस सीरीज से पहले कंधे में गंभीर चोट लगी गई है।  रचिन रविंद्र को कंधे में ये चोट एक प्रमोशनल एड शूट के दौरान लगी, जब वह डाइव लगाकर कैच लेने की कोशिश कर रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक रचिन का दाहिना कंधा खिसक गया है. ऐसे में अब अगले महीने भारत के खिलाफ रचिन का मैदान पर उतरना मुश्किल है, क्योंकि भारत और न्यूजीलैंड के बीच 22 अक्टूबर से सीरीज की शुरुआत हो रही है।  परफॉर्मेंस मैनेजर माइक सैंडल ने रचिन के लिए जताया दुख न्यूजीलैंड के परफॉर्मेंस मैनेजर माइक सैंडल ने बताया कि शूटिंग के दौरान कैच पकड़ने की कोशिश करते समय रवींद्र सेफ्टी मैट (सुरक्षा गद्दे) पर गलत तरीके से गिर गए. सैंडल ने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण चोट थी. हम रचिन को लेकर काफी दुखी हैं और हमारी मुख्य प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि वह पूरी तरह ठीक हों और जल्द से जल्द मैदान पर वापसी करें।  उन्होंने आगे कहा, “हमारे खिलाड़ियों से जुड़े सभी कमर्शियल शूट की तरह ही इस गतिविधि को भी सभी पक्षों की अग्रिम सहमति और उचित सुरक्षा उपायों के साथ तय किया गया था. यह एक एक्सिडेंट है और हम भविष्य में इस तरह के आयोजनों को लेकर अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा जारी रखेंगे।  रचिन को लेकर कोई जोखिम नहीं लेंगी टीम न्यूजीलैंड के मुख्य कोच रॉब वाल्टर ने कहा कि टीम रवींद्र को लेकर सतर्क रुख अपनाएगी, खासकर आगामी व्यस्त टेस्ट शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए उन्हें लेकर कोई जोखिम नहीं उठाएगी. वाल्टर ने कहा, “अगले छह महीनों में टेस्ट क्रिकेट के व्यस्त शेड्यूल को देखते हुए, हम रचिन को जल्दबाजी में मैदान पर उतारने का जोखिम नहीं लेना चाहते. वह अपने रिहैब के लिए बेहतरीन विशेषज्ञों की निगरानी में हैं और हमें जल्द ही उनके टीम में लौटने की उम्मीद है। 

दिशा सालियान के पिता का बड़ा कदम, आदित्य ठाकरे को भेजेंगे 500 करोड़ का नोटिस

 मुंबई दिवंगत नेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रही चुकीं दिशा सालियन की मौत केस में हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली है। दिशा के पिता सतीश सालियन ने उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को आरोपी बताते हुए 500 करोड़ के हर्जाने की मांग की है। यह नोटिस थमाने वह खुद शनिवार की शीम चार बजे के करीब मातोश्री जाने वाले हैं। आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे अपने बेटे के साथ इसी निजी आवास में रहते हैं। सतीश सालियान ने इसके लिए पुलिस से सुरक्षा भी मांगी है। सुरक्षा की यह मांग मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए की गई है। सालियान ने इस दौरान किसी भी संभावित बाधा, अप्रिय घटना या टकराव की आशंका जताई है। पत्र में कहा गया है कि सालियान और उनकी लीगल टीम को अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा का खतरा महसूस हो रहा है, इसलिए उन्होंने पुलिस प्रशासन से पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध करने का अनुरोध किया है ताकि बिना किसी रुकावट या अप्रिय घटना के नोटिस दिया जा सके। मुंबई पुलिस से मौके पर आवश्यक पुलिस कर्मियों को तैनात करने और सालियान एवं उनके कानूनी प्रतिनिधियों को मातोश्री प्रवास के दौरान सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया है। इससे पहले CBI को लिखे एक पत्र में उन्होंने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह, बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने FIR में IPC की धारा 409 जोड़ने और बलात्कार, हत्या, सबूत मिटाने और मामले को दबाने के संबंध में चश्मदीदों और अन्य अहम गवाहों के बयान दर्ज करने की भी मांग की है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे दिशा सालियन की मौत के मामले पर तब तक कुछ न बोलें जब तक उनके पास सबूत न हों। रवींद्र चव्हाण ने क्या कहा? BJP ने फिलहाल दिशा सालियन मामले को लेकर सावधानी भरा रुख अपनाया है। प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इस संबंध में अपनी पार्टी के सहयोगियों को अहम निर्देश दिए हैं। उन्होंने जोर दिया कि पार्टी के हर कार्यकर्ता और पदाधिकारी को अपनी बात का ध्यान रखना चाहिए और बिना सबूत के कभी कुछ नहीं बोलना चाहिए। रवींद्र चव्हाण ने कहा कि जब तक किसी को पूरी जानकारी न हो या ठोस सबूत न हों तब तक ऐसे मामलों पर बात नहीं करनी चाहिए। दिशा सालियन का मामला क्या है? दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रहीं दिशा सालियान की आठ जून 2020 को एक इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने से मौत हो गयी थी। इसके छह दिन बाद ही 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत का भी निधन हो गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें आदित्य ठाकरे सहित कई व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। एफआईआर में आदित्य ठाकरे के अलावा डिनो मोरिया, रोहन रॉय, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे और परमबीर सिंह समेत कई लोगों के नाम का जिक्र है।

ईरान में बिना हिजाब महिलाओं ने लगाई दौड़, वीडियो वायरल होने के बाद चर्चा तेज

तेहरान  ईरान में कानून के तहत हिजाब पहनना अनिवार्य है। लेकिन हाल ही में ईरान की राजधानी तेहरान से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें महिलाएं बिना हिजाब या स्कार्फ पहने ही 10 किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लेती नजर आईं। ईरान से सामने आए इस वीडियो ने लोगों का ध्यान खींचा है। शुक्रवार को वेलायत पार्क में हुई 'तेहरान 10K' दौड़ में कई महिलाओं को बिना सिर ढके दौड़ते देखा गया। बिना हिजाब के दौड़ लगाती नजर आईं ईरानी महिलाएं तेहरान में आयोजकों ने पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग दौड़ का आयोजन किया था, जिसमें महिलाओं की दौड़ में 10 किलोमीटर के कोर्स के दो चक्कर शामिल थे। हालांकि, बिना हिजाब के दौड़ने वाली महिलाओं के कुछ वीडियो सरकार के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी शेयर किए गए। इसने लोगों का ध्यान खींचा क्योंकि ईरानी कानून के तहत सार्वजनिक जगहों पर बिना हिजाब के दिखना मना है। ईरानी महिलाओं की इस दौड़ ने लोगों का ध्यान इसलिए भी खींचा, क्योंकि इससे पहले किश द्वीप पर महिलाओं की सड़क दौड़ का आयोजन किया गया था, तब अधिकारियों ने उन प्रतिभागियों पर कार्रवाई की थी, जिन्होंने बिना सिर पर स्कार्फ पहने दौड़ में हिस्सा लिया था। ईरान में हिजाब को लेकर कानून 2022 में 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' (Woman, Life, Freedom) विरोध प्रदर्शनों के बाद से कई बार ऐसा देखा गया है कि ईरानी महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर बिना सिर पर स्कार्फ पहने दिखती हैं। ये विरोध प्रदर्शन मोरालिटी पुलिस की हिरासत में महसा 'जीना' अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए थे। हालांकि ईरान की सड़कों और कुछ सार्वजनिक जगहों पर बिना सिर ढके दिखना आम हो गया है, फिर भी अनिवार्य हिजाब ईरानी कानून का हिस्सा बना हुआ है। इसे अलग-अलग तरीकों से लागू किया जाता है। ईरान में सरकारी दफ्तरों और कई आधिकारिक जगहों पर महिलाओं के लिए अंदर जाने के लिए सिर पर स्कार्फ पहनना अभी भी जरूरी है।

जाति प्रमाणपत्र मामले में बड़ी कार्रवाई, निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित संबंधित लोगों पर प्रकरण दर्ज

जाति प्रमाणपत्र से संबंधित शिकायत पर सतर्कता शाखा की कार्रवाई निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध, विवेचना प्रारंभ भोपाल  मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत होकर आरक्षित वर्ग का लाभ प्राप्त करने तथा जाति प्रमाणपत्र से संबंधित शिकायत पर पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा द्वारा कार्रवाई की गई है। शिकायत की जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में संबंधित निवृतमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई है। यह प्रकरण आवेदक श्री हरवीर सिंह रघुवंशी, निवासी राघौगढ़, जिला गुना द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर पंजीबद्ध किया गया है। उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा जाति प्रमाणपत्र की जांच प्रकरण से संबंधित जाति प्रमाणपत्र की जांच मध्यप्रदेश शासन की “अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति”, भोपाल द्वारा की गई थी। समिति द्वारा उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों की जांच के उपरांत क्षेत्र संयोजक, आदिम जाति कल्याण, विदिशा द्वारा वर्ष 1984 में जारी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। समिति की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित अधिकारी के पक्ष में वर्ष 1984 में विदिशा जिले से अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया था। उपलब्ध अभिलेखों में संबंधित अधिकारी के मूल निवासी होने से जुड़े तथ्यों को लेकर भी जांच में प्रश्न सामने आए हैं। विवेचना के दौरान उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर यह भी सामने आया है कि पुलिस सेवा में नियुक्ति से पूर्व संबंधित अधिकारी द्वारा मध्यप्रदेश में शासकीय शिक्षक के रूप में सेवा के दौरान स्वयं को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत किया गया था।इसके बाद मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्ति तथा शासकीय सेवा में पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभ प्राप्त किया। उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया से संबंधित तत्कालीन अभिलेखों एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका के संबंध में भी तथ्य सामने आए हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में नियमों एवं उपलब्ध अभिलेखों के अनुरूप कार्यवाही हुई थी अथवा नहीं, इस संबंध में भी पुलिस द्वारा विवेचना की जा रही है। उपलब्ध तथ्यों एवं जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय, भोपाल में 18 सितंबर 2026 को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120-बी, 167 एवं 420 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) के अंतर्गत संबंधित व्यक्तियों एवं अन्य के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। प्रकरण में दस्तावेजों, संबंधित व्यक्तियों के बयानों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विवेचना की जा रही है। विवेचना में प्राप्त तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।  

जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे से बदलेगी कनेक्टिविटी, MP-UP के कई शहरों को मिलेगा हाई-स्पीड रूट

जबलपुर  मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे महाकौशल से विंध्य और उत्तर प्रदेश तक तेज कनेक्टिविटी देने वाला अहम प्रोजेक्ट होगा। इसके बनने के बाद जबलपुर से वाराणसी का सफर करीब 5 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। यह कॉरिडोर कटनी, मैहर, सतना, रीवा और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों को भी बेहतर तरीके से जोड़ेगा। 5 घंटे में पूरा होगा जबलपुर-वाराणसी का सफर फिलहाल जबलपुर से वाराणसी की दूरी करीब 460 से 480 किलोमीटर है। मौजूदा 2 लेन मार्ग से सफर करने में लगभग 10 से 12 घंटे लग जाते हैं। नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद 4 लेन हाई-स्पीड रास्ता उपलब्ध होगा। वाहनों की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने की उम्मीद है। इससे यात्रा के समय में करीब 5 से 6 घंटे की कमी आ सकती है। यानी जबलपुर से वाराणसी का सफर करीब 5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इससे धार्मिक यात्रा करने वाले यात्रियों को भी काफी सुविधा मिलेगी। ये शहर होंगे सीधे कनेक्ट जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे के जरिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहर बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। इनमें जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा, प्रयागराज और वाराणसी शामिल हैं। यह रूट मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र से शुरू होकर विंध्य क्षेत्र के रास्ते उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल तक पहुंचेगा। कॉरिडोर रीवा-सतना बेल्ट के साथ उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और प्रयागराज के बाहरी हिस्सों को टच करते हुए वाराणसी रिंग रोड से जुड़ेगा। MP-UP की नई लाइफलाइन बनेगा कॉरिडोर जबलपुर-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर को रणनीतिक रूप से तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए महाकौशल, विंध्य और पूर्वांचल के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। व्यापार के साथ धार्मिक पर्यटन को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। जबलपुर सीधे प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ जाएगा। करीब 30 हजार करोड़ की लागत जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे वाराणसी-विशाखापट्टनम कॉरिडोर का हिस्सा है। यह आधुनिक, ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल हाईवे नेटवर्क का हिस्सा होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 30,000 करोड़ रुपये बताई गई है। DPR और सर्वे का काम अंतिम दौर में इस अहम प्रोजेक्ट को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक मंजूरियों और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और तकनीकी दल ने एलाइनमेंट को लेकर शुरुआती सर्वेक्षण भी शुरू कर दिया है। प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अहम चुनौती है, क्योंकि एक्सप्रेसवे दोनों राज्यों के कई जिलों से होकर गुजरेगा। माना जा रहा है कि अगले साल तक इसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सकती है।

नंदीग्राम पर टिकी नजरें, शुभेंदु अधिकारी के लिए क्यों अहम है यह सीट?

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम सीट का उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली परीक्षा भी है। इस सीट पर उपचुनाव से पहले नाटकीय घटनाक्रम देखा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाकर उतारा था। वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद संचिता प्रधान ने बिना कोई वजह बताए ही अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान के समर्थन का ऐलान कर दिया। इसके कुछ देर बाद ही एक पुराने मामले में प्रधान की गिरफ्तारी हो गई। राहुल गांधी ने अपने उम्मीदवार की गिरफ्तारी को लेकर शुभेंदु सरकार पर निशाना साधा और इसे लोकतंत्र पर प्रहार बताया है। अधिकारी ने खेला इमोशनल दांव शुभेंदु अधिकारी ने भी नंदीग्राम सीट पर इमोशनल दांव खेलते हुए अपने पीए रहे चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है। 6 मई को रथ की मध्यमग्राम में हत्या कर दी गई थी। सीबीआई इस हत्याकांड की जांच कर रही है। शुभेंदु अधिकारी के लिए क्यों अहम है नंदीग्राम नंदीग्राम की सीट शुभेंदु अधिकारी की प्रतिष्ठा से इसलिए जुड़ी है क्योंकि उन्होंने अपनी असल राजनीति की शुरूआत यहीं से की थी। उन्होंने नंदीग्राम में ही ममता बनर्जी के साथ किसानों के भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसी वजह से बंगाल से लेफ्ट की सरकार चली गई और ममता बनर्जी की अगुआई में टीएमसी की सरकार बन गई। ममता बनर्जी बंगाल में 15 साल मुख्यमंत्री रहीं लेकिन शुभेंदु अधिकारी के रास्ते ममता बनर्जी से अलग हो गए। शुभेंदु अधिकारी 2016 में नंदीग्राम से विधायक चुने गए। वहीं 2021 में उन्होंने अपनी राजनीतिक गुरु ममता बनर्जी को ही नंदीग्राम से हरा दिया। यहीं से नंदीग्राम के समीकरण बदलने लगे। 2026 में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दो जगहों से चुनाव लड़ा और नंदीग्राम सीट पर फिर से जीत हासिल की। हालांकि उन्होंने भवानीपुर सीट को चुना और इसलिए नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। हालांकि शुभेंदु अधिकारी इस सीट को किसी कीमत पर हाथ से निकलने नहीं देना चाहते हैं। 6 अक्टूबर पर नंदीग्राम के साथ ही रेजीनगर सीट पर भी उपचुनाव होने हैं। ये उपचुनाव बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की छवि पर बड़ा असर डालने वाले हैं। अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनते ही कई बड़े फैसले लिए हैं और बड़े परिवर्तन का प्रयास किया है। अब इन दोनों सीटों की जनता इस बात पर भी मुहर लगाएगी कि उसे उनके फैसले पंसद आए हैं या नहीं। वहीं अधिकारी पर यह भी दवाब है कि बिहार की बांकीपुर सीट जैसा हाल यहां ना हो