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Kalyan-Latur Expressway पर बनेगी 8 किमी की टनल, सफर का समय 6 घंटे तक घटेगा

लातूर  देश के बड़े शहरों को एक-दूसरे से जोड़ने के साथ ही सरकार अन्य छोटे शहरों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रही है. इस कड़ी में अगला नाम है कल्याण से लातूर तक जाने वाले एक्सप्रेसवे (Kalyan-Latur Expressway)का. महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट ने इस ई-वे को मंजूरी दे दी है. यह ई-वे करीब 450 किलोमीटर लंबा होगा और इसके तैयार होने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर में लगने वाला समय 11 घंटे से घटकर महज 5 घंटे का रह जाएगा।  यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बन रही बदलापुर टनल के उत्तर से ही शुरू होगा और महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा के पास लातूर में निकलेगा. इसकी कुल लंबाई 450 किलोमीटर के आसपास है, जिससे महज 4.5 से 5 घंटे के सफर में पूरा किया जा सकेगा. अभी इस दूरी को तय करने में करीब 11 घंटे का समय लग जाता है. आगे चलकर यह एक्सप्रेसवे मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से भी सीधे तौर पर जुड़ जाएगा, जो नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के पास रहेगा।  8 किलोमीटर की टनल भी बनेगी इस एक्सप्रेसवे के रास्ते में 8 किलोमीटर लंबी एक टनल भी बनाई जाएगी, जो मलशेज घाट के पास होगी. यह टनल बिलकुल वैसी ही होगी जैसी इगतपुरी के पास बन रही ट्विन टनल है. यह ट्विन टनल समृद्धि एक्सप्रेसवे पर बनाई गई है. इस ई-वे पर कुल मिलाकर 17 इंटरचेंज बनाए जाएंगे. इस ई-वे को तैयार करने पर 22 से 25 हजार करोड़ का खर्चा आएगा. इस ई-वे की सबसे खास बात इसकी लंबाई नहीं, बल्कि इसका दुर्गम रास्ता है।  क्यों जरूरी है 8 किलोमीटर की सड़क मलशेज घाट पर बनने वाली 8 किलोमीटर लंबी टनल काफी मायने रखती है. इस टनल से गुजरने के लिए फ्लैट हाईवे जैसा रास्ता नहीं होगा, बल्कि इसमें तीखे मोड़ और स्लोप हैं जिस पर ट्रैफिक को काफी धीमे-धीमे गुजरना होगा. यही वजह है कि ई-वे पर सबसे जरूरी सेक्शन यह टनल ही है. यह ई-वे दो और एक्सप्रेसवे के साथ कनेक्टिविटी मजबूत करेगा, जिसकी वजह से इसकी अहमियत काफी बढ़ जाती है. इसके अलावा प्रोजेक्ट को विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर के साथ भी जोड़ा जाएगा. इससे बाद में नवी मुंबई एयरपोर्ट और अटल सेतु तक जाना भी आसान हो जाएगा. यह रास्ता मराठवाड़ा में बन रहे सूरत-चेन्नई इकनॉमिक कॉरिडोर को भी जोड़ेगा।   

H-1B Visa Fee को लेकर भारतीयों की बढ़ी चिंता, ट्रंप प्रशासन ने शुल्क व्यवस्था में किया बदलाव

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं जिससे पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। वहीं भारत पर भी उनके फैसलों का सीधा असर पड़ रहा है। 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले कानून को मंजूरी देने के अलावा ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा पर लगने वाले शुल्क को एक साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा के लिए 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाया है। अमेरिका की कोर्ट में उनके इस फैसले के खिलाफ केस भी चल रहा है। ट्रंप प्रशासन का पहले का आदेश सितंबर 2026 तक ही लागू था। बता दें कि एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां दुनियाभर के कुशल लोगों को हायकर करती हैं। आईटी सेक्टर में भी बड़ी संख्या में लोगों को अमेरिका में नौकरियां मिलती हैं। इनमें भारतीयों की संख्या काफी ज्यादा है। वाइट हाउस का कहना है कि ये कंपनियां विदेश से लोगों को सस्ते में हायर करती हैं और अमेरिकियों के लिए रोजगार का संकट पैदा हो जाता है। ऐसे में दोनों तरफ से कंपनियां ही शोषण कर रही हैं। जानकारी के मुताबिक 21 सितंबर 2025 को यह फैसला लागू होने के बाद से 700 से ज्यादा लोगों ने फीस चुकाई है। वहीं अब डिपार्टमेंट ऑफ होम सिक्योरिटी ने एच-1बी के लिए चयन प्रक्रिया में भी परिवर्तन करने का ऐालान कर दिया है। बताया गया है कि अमेरिकी कंपनियों ने एच-1बी रजिस्ट्रेशन को 24946 से घटाकर 2055 कर दिया है। इसमें 92 फीसदी की कमी देखी गई है। भारतीयों के लिए क्यों टेंशन की बात भारत के बड़ी संख्या में प्रेफेशनल एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में काम करने जाते हैं। यूएससीआईएस के डेटा के मुताबिक 2024 ममें अमेरिका में 71 फीसदी एच-1बी वीजा वाले लोग भारतीय थे। वहीं चीन के 12 फीसदी लोग ही थे। भारतीय लोगों के लिए अमेरिका में काम करने का मौका एच-1बी वीजा के जरिए ही मिलता है। हालांकि अब 1 लाख डॉलर चुकाना आसान नहीं है। 2025 में एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है और यह मामला दो अलग-अलग संघीय अदालतों में विचाराधीन है। शुल्क बढ़ाने संबंधी 2025 के इस आदेश की अवधि इस महीने समाप्त होने वाली थी। यह आदेश उन विदेशी नागरिकों को दिए गए वीजा पर लागू नहीं है जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं और नए एच-1बी वीजा पाने वालों में जिनकी बड़ी हिस्सेदारी है। यह मौजूदा वीजा के नवीनीकरण पर भी लागू नहीं था। राष्ट्रपति ने एक अलग घोषणा भी जारी की है, जिसमें विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के जरिये एच-1बी वीजा आवेदनों की जांच और कड़ी करने का प्रावधान है। आदेश में विदेश मंत्री, श्रम मंत्री और गृह सुरक्षा मंत्री को निर्देश दिया गया है कि एच-1बी वीजा आवेदनों पर विचार करते समय वे यह भी देखें कि क्या आवेदनकर्ता नियोक्ता ने समान पदों पर कार्यरत अमेरिकी कर्मचारियों की हाल में छंटनी की है या वह ऐसा करने की योजना बना रहा है। ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में कहा कि एच-1बी गैर प्रवासी वीजा कार्यक्रम की शुरुआत अत्यधिक विशिष्ट कौशल वाले विदेशी अस्थायी कर्मचारियों की पहचान करने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को रणनीतिक रूप से पूरा करने के लिए की गई थी। ट्रंप ने कहा, ''इसके बजाय कुछ नियोक्ताओं, तीसरे पक्ष के जरिये कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाले समूहों और आउटसोर्सिंग कंपनियों ने अमेरिकी कुशल श्रमिकों को कम वेतन देने और उन्हें नौकरियों से निकालने के लिए इस कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया है।''

स्कूल मिड-डे मील में चिकन बिरयानी शामिल करने की तैयारी, बच्चों को मिलेगा नया मेन्यू

चेन्नई  तमिलनाडु सरकार ने सरकारी स्कूलों के बच्चों को हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी देने की योजना बनाई है। स्कूल शिक्षा मंत्री राज मोहन ने कहा कि यह मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की इच्छा है। हालांकि, इसे तुरंत लागू नहीं किया जाएगा। सरकार पहले इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट चलाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि बड़ी संख्या में बच्चों के लिए खाना साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा के तय मानकों के मुताबिक कैसे तैयार किया जाएगा। इसके बाद ही योजना को बड़े स्तर पर लागू करने पर फैसला होगा। मंत्री राज मोहन ने कहा कि सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूलों के सभी स्टूडेंट्स को चिकन बिरयानी का विकल्प मिले। उन्होंने साफ किया कि इसके लिए पहले जरूरी इंतजाम करने होंगे। उन्होंने कहा, 'पुझल जेल में कैदियों को भी चिकन बिरयानी मिलती है। क्या हमारे छात्रों को यह नहीं मिल सकती?' मंत्री ने कहा कि योजना को लागू करने से पहले पायलट प्रोजेक्ट के जरिए व्यवस्था की जांच की जाएगी। इसके बाद भोजन की तैयारी, साफ-सफाई और उसे स्कूलों तक पहुंचाने से जुड़ी व्यवस्थाओं को देखा जाएगा। भोजन में मांसाहारी विकल्प शामिल करने पर विचार यह प्रस्ताव पहली बार जुलाई में सामने आया था। उस समय तमिलनाडु सरकार सरकारी स्कूलों के बच्चों को लंच की योजना के तहत हफ्ते में एक बार चिकन बिरयानी देने पर विचार कर रही थी। राज मोहन ने तब बताया था कि उन्होंने खुद मुख्यमंत्री थलपति विजय के सामने यह सुझाव रखा था और अंतिम फैसला उन्हीं को करना है। यह प्रस्ताव स्कूलों में दिए जाने वाले भोजन में मांसाहारी विकल्प शामिल करने को लेकर चल रही चर्चा के बीच आया था। मंत्री ने कहा था कि बढ़ते बच्चों के लिए पर्याप्त प्रोटीन जरूरी है और चिकन बिरयानी देने के प्रस्ताव को राजनीतिक मुद्दे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर होगी शुरुआत राज मोहन ने कहा कि तमिलनाडु में शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव के साथ पोषण पर भी लगातार ध्यान दिया गया है। प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में शाकाहारी भोजन पसंद करने वाले बच्चों को पहले की तरह शाकाहारी खाना मिलता रहेगा, जबकि मांसाहारी भोजन खाने वाले छात्र चिकन बिरयानी का विकल्प चुन सकेंगे। फिलहाल सरकार का जोर योजना को सुरक्षित तरीके से लागू करने की तैयारी पर है। मालूम हो कि तमिलनाडु में लंच के साथ सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए नाश्ते की योजना भी चल रही है।

Central Employees: सरकार ने इस योजना में किए बदलाव, केंद्रीय कर्मचारियों पर होगा असर

नई दिल्ली अगर केंद्रीय कर्मचारी हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। आइए डिटेल में जानतें है कि क्या कुछ बदल गया है। क्या बदला है नियम? सरकार ने उस भौगोलिक शर्त को हटाने का फैसला किया है जो पहले केंद्र सरकार के मौजूदा कर्मचारियों के लिए उनके रहने या पोस्टिंग की जगह के आधार पर CGHS की पात्रता को सीमित करती थी। जानकार बताते हैं कि पहले की भौगोलिक पाबंदियों ने CGHS कवरेज के दायरे से बाहर रहने या पोस्टेड कर्मचारियों के लिए मुश्किलें और परेशानियां पैदा कर दी थीं। बदले हुए नियम ऐसे हालात में योग्य कर्मचारियों को CGHS चुनने की इजाजत देते हैं, बशर्ते वे दूसरी शर्तों को पूरा करें और तय योगदान का भुगतान करें। एक बार यह विकल्प चुनने के बाद इसे बदला नहीं जा सकता। CGHS चुनने वाले योग्य कर्मचारियों को यह अंडरटेकिंग भी देनी होगी कि वे या उनके योग्य परिवार के सदस्य CGHS और सेंट्रल सर्विसेज (मेडिकल अटेंडेंस) रूल्स, 1944, दोनों के तहत मेडिकल फायदों का दावा नहीं करेंगे। जो कर्मचारी पहले से CGHS के कवरेज वाले इलाके में रह रहे हैं या वहां तैनात हैं, उनके लिए CGHS कवरेज अनिवार्य रहेगा। ऐसे कर्मचारी इसके बदले CS(MA) नियमों के तहत मिलने वाली सुविधाओं का विकल्प नहीं चुन सकेंगे। गलत जानकारी पर होगी कार्रवाई सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई कर्मचारी गलत या भ्रामक जानकारी देकर मेडिकल लाभ लेता है, तो उसके खिलाफ गंभीर कार्रवाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ गलत तरीके से लिए गए लाभ की वसूली भी की जा सकती है। CGHS क्या है? CGHS की बात करें तो केंद्र सरकार के मौजूदा और रिटायर्ड कर्मचारियों और उनके योग्य परिवार के सदस्यों के लिए एक सरकारी हेल्थकेयर प्रोग्राम है। इसे 1 जुलाई 1954 को दिल्ली में शुरू किया गया था, जिसका मुख्य मकसद मेडिकल देखभाल देना और आउटपेशेंट दवाओं के लिए रीइंबर्समेंट का दावा करने में कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों को दूर करना था। पिछले कुछ दशकों में, CGHS का विस्तार दिल्ली से आगे कई शहरों तक हुआ है और अब यह वेलनेस सेंटर, पॉलीक्लिनिक, लेबोरेटरी और एम्पैनल्ड अस्पतालों के जरिए सेवाएं देता है। इसके अलावा, इसके दायरे में योग्य पेंशनभोगी और लाभार्थियों की कुछ अन्य श्रेणियां भी शामिल हो गई हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की 2024-25 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, CGHS 81 शहरों तक फैल गया था और लगभग 46.87 लाख लाभार्थियों को सेवाएं दे रहा था।

सोलर पैनल से घटा बिजली बिल, किसान नेतराम को हर माह ₹2,000 की बचत

सौर ऊर्जा से रोशन हुआ किसान नेतराम का घर, पीएम सूर्य घर योजना से हर माह 2000 रुपए की बचत  खेती-किसानी को मिला नया बल ​रायपुर        प्रदेश में 'सेवा संकल्प अभियान' के माध्यम से जन-कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से न केवल आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है। ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम गोबरसिंहा निवासी किसान नेतराम पटेल का है, जिनके जीवन में 'प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' आर्थिक संबल बनकर उभरी है। ​बिजली के भारी-भरकम बिल से मुक्ति       ​योजना का लाभ लेने से पहले नेतराम पटेल के घर का मासिक बिजली बिल करीब 2,200 से 2,300 रुपए तक आता था, जो उनके बजट पर एक बड़ा वित्तीय बोझ था। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत छत पर सौर पैनल (रूफटॉप सोलर सिस्टम) स्थापित होने के बाद अब उनका मासिक बिजली बिल घटकर मात्र 250 से 300 रुपए रह गया है। ​बचत की राशि से कृषि कार्यों में मिला संबल        ​सोलर पैनल के माध्यम से बिजली की जरूरतें घर पर ही पूरी होने से नेतराम को हर महीने लगभग 2,000  रुपए की सीधी बचत हो रही है। इस बचत राशि का उपयोग वे अपनी खेती-किसानी से जुड़े दैनिक खर्चों को पूरा करने में कर रहे हैं। इससे उन्हें खाद, बीज व अन्य कृषि आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संबल मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पहले हर महीने बिजली बिल के रूप में एक बड़ी राशि देनी पड़ती थी। अब वही पैसा बचकर खेती के काम आ रहा है। इस योजना ने मेरी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाया है। ​शासन के प्रति जताया आभार         ​योजना से जीवन में आए इस सकारात्मक परिवर्तन के लिए नेतराम पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अन्य किसान भाइयों और ग्रामीणों से भी इस योजना से जुड़कर बिजली खर्च घटाने और अपनी बचत बढ़ाने की अपील की है। ​धरातल पर असर दिखा रहा 'सेवा संकल्प अभियान'       ​नेतराम पटेल की यह सफलता की कहानी यह साबित करती है कि जब शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं सीधे जरूरतमंदों तक पहुँचती हैं, तो उनका प्रभाव केवल मुफ्त या सस्ती बिजली तक सीमित नहीं रहता; बल्कि वह बचत, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण का स्थायी माध्यम बन जाता है।

देश सेवा से उद्यम तक का सफर, PMFME योजना ने बदली सफलता की कहानी

देश सेवा से उद्यम सेवा तक – प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना ने बनाया सफल उद्यमी भोपाल  भिण्ड शहर के चतुर्वेदी नगर निवासी संतोष सिंह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना पीएमएफएमई अंतर्गत प्राप्त सहायता के माध्यम से सफल उद्यमी बने हैं। भारतीय सेना में हवलदार के पद पर 17 वर्षों तक सेवा देने वाले सिंह ने देश-सेवा के बाद जिले में उद्यम-सेवा के जज्बे के साथ खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कदम रखा। वैष्णवी ऑयल मिल के माध्यम से ओडीओपी उत्पाद – सरसो का प्रसंस्करण कर वे न केवल 10 लाख की वार्षिक आय प्राप्त कर रहे हैं बल्कि 5 अन्य स्थानीय व्यक्तियों को रोजगार भी दे रहे है। शुरुआती दिनों में वैष्णवी ऑयल मिल की सीमित संसाधनों के कारण उत्पादन क्षमता कम थी और उत्पाद को बड़ा बाजार नहीं मिल पा रहा था। पीएमएफएमई योजना अंतर्गत आवेदन करने पर योजना के तहत उन्हें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 13.50 लाख रुपए का ऋण और 5.25 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। उन्होंने इस सहायता से मिल के उन्नयन हेतु आधुनिक एक्सपेलर, फिल्टर और मोटर मशीनें लगाई जिससे उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई। आज वे ग्रामीण क्षेत्रों से किसानों से सीधे सरसों खरीद कर शुद्ध सरसों का तेल निकालते हैं और उसे खुला एवं टीन के डिब्बों में पैक कर स्थानीय बाजार में बेचते हैं। सिंह का कहना है कि पीएमएफएमई योजना अत्यंत लाभकारी है जिसके अंतर्गत सहायता प्राप्त कर युवा अपना उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। सिंह अपने खाद्य प्रसंस्करण उद्यम के सफल संचालन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत संचालित इस योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना पर अधिकतम 10 लाख रुपए की सीमा तक 35 प्रतिशत अनुदान और 3 प्रतिशत ब्याज माफी का प्रावधान है। जिले के युवा, कृषक, और छोटे व्यवसायी व्यक्तिगत स्तर पर, तथा किसान उत्पाद संगठन, स्वसहायता समूह और उत्पादक सहकारी समिति उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से संपर्क कर नए औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अथवा मौजूदा इकाइयों के उन्नयन के लिए योजना अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।  

Budhni Railway Station: बुदनी को मिलेगी नई रेल कनेक्टिविटी, ट्रेनों के स्टॉपेज से यात्रियों को राहत

 इंदौर  इंदौर से रेल रूट से बुदनी और नर्मदापुरम की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा में समय भी बचेगा। बुदनी रेलवे स्टेशन आने वो समय में जंक्शन के रूप में लेने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक इटारसी और भोपाल के बीच यह बड़ा जंक्शन होगा। बुदनी स्टेशन पर ट्रेनों के स्टॉपेज से यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही इससे यात्रा में लगने वाला लंबा समय भी कम होगा। इस स्टेशन पर पहले कुछ ट्रेनों का स्टॉपेज था, अब जंक्शन बनने के बाद इसमें कई ट्रेनों का स्टॉपेज रहेगा। इससे इस क्षेत्र के यात्रियों को सुविधा मिलेगी। बुदनी रेलवे स्टेशन पर नई बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है। जल्द ही यह बनकर तैयार हो जाएगी। जिस रेलवे स्टेशन पर तीन दिशाओं की ओर से ट्रेन आती है उसे जंक्शन कहा जाता है। ऐसे में आने वाले समय में बुदनी रेलवे स्टेशन भोपाल और इटारसी के बीच महत्वपूर्ण रहेगा। सलकनपुर मार्ग से जुड़ेगा जुड़ेगा क्षेत्र बुदनी रेलवे स्टेशन के जंक्शन बनने से तीसरी लाइन मिलेगी। इसके साथ ही सलकनपुर मार्ग भी इससे जुड़ जाएगा। इस नए रूट के बनने से अब ट्रेनों को भोपाल घूमकर नहीं जाना होगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा। पहले इस रेलवे स्टेशन कुछ गाड़ियों का हाल्ट था। लेकिन जंक्शन बनने से नई ट्रेमें रुकने के रास्ते खुल गए हैं। नई बिल्डिंग नए स्ट्रक्चर का कंस्ट्रक्शन किया जा रहा है। लेकिन यहां पर पहले से बनी रेलवे स्टेशन की बिल्डिंग अभी भी है। जंक्शन बनने के साथ ही यहां अत्याधुनिक सुविधाओं वाली नई बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तेजी से जारी है। बढ़ते भारत के लिए एक नया रेल गलियारा  भोपाल-इटारसी कॉरिडोर पहले से ही अत्यधिक व्यस्त है, और मध्य प्रदेश का पश्चिमी भाग राज्य के केंद्रीय और पूर्वी भागों से संपर्क के लिए लगभग पूरी तरह से इसी पर निर्भर है। इंदौर-बुदनी लाइन एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी, जिससे नेटवर्क की क्षमता में काफी वृद्धि होगी और मौजूदा रेल बुनियादी ढांचे पर भीड़भाड़ कम होगी। एक बार चालू हो जाने पर, यह कॉरिडोर इंदौर और जबलपुर के बीच की दूरी को लगभग 68 किलोमीटर और यात्रा के समय को लगभग दो घंटे कम कर देगा, जिससे यात्रियों और माल ढुलाई के लिए एक तेज और अधिक कुशल संपर्क उपलब्ध होगा। इससे इंदौर, देवास और सीहोर जिलों के कई कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में भी सुधार होगा, जिनमें से कई पारंपरिक रूप से रेल नेटवर्क से बाहर रहे हैं। बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग यह मध्य भारत में चल रही सबसे महत्वाकांक्षी रेलवे निर्माण परियोजनाओं में से एक है। इस कॉरिडोर को लेवल-क्रॉसिंग-मुक्त रेलवे लाइन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे परिचालन सुरक्षा और दक्षता में काफी सुधार होगा। इसका पैमाना निर्माणाधीन बुनियादी ढांचे में परिलक्षित होता है: • 80 महत्वपूर्ण पुल • 96 छोटे पुल • 139 सड़क अंडरब्रिज (आरयूबी)। • 5 सड़क ओवरब्रिज (आरओबी) • 18 स्टेशन: 3 ठहराव स्टेशन, 15 क्रॉसिंग स्टेशन • 10.6 किमी से अधिक की कुल लंबाई वाले 3 पुल • लगभग 10 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली 2 रेलवे सुरंगें दूरी कम होगी नया जंक्शन बनने से तीसरी लाइन मिल जाएगी। इससे अनकनेक्टेट सलकनपुर मार्ग के क्षेत्र जुड़ जाएंगे। साथ ही भोपाल की अपेक्षा नये रूट से जाने पर दूरी कम होगी और समय भी बचेगा। -नवल अग्रवाल, पीआरओ रेलवे

ट्रंप के रूस प्रतिबंध कानून से भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, जानें क्या है पूरा मामला

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  ऐतिहासिक 'लिंडसे ओ ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' पर हस्ताक्षर कर इसे कानूनी रूप दे दिया है। इस कानून के सामने आते ही वैश्विक शेयर और कमोडिटी बाजारों में हलचल मच गई है। मीडिया में यह सुर्खियां तैर रही हैं कि वॉशिंगटन अब रूस से कच्चा तेल और नेचुरल गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम दंडात्मक टैरिफ लगाने जा रहा है। हालांकि, अगर इस नए कानून की बारीकियों और कानूनी प्रावधानों को समझें, तो तस्वीर कुछ अलग ही नजर आती है। 'अधिकार मिलना' और 'लागू करना'- दो अलग बातें अमेरिकी संसद ने व्हाइट हाउस को रूसी ऊर्जा खरीदारों पर लगाम कसने के लिए नया कानूनी अधिकार दे दिया है। लेकिन कानून में इसका प्रावधान ऐसा रखा गया है जो राष्ट्रपति को तुरंत फैसला लेने के बजाय कूटनीतिक सौदेबाजी की पूरी छूट देता है। 0 से 100% की फ्लेक्सिबल रेट: कानून में यह अनिवार्य नहीं है कि ट्रंप तुरंत 100% ही टैरिफ थोप दें। यह दर शून्य से लेकर 100 प्रतिशत के बीच कुछ भी रखी जा सकती है। 30 दिनों की मोहलत: कानून लागू होने के बाद व्हाइट हाउस के पास 30 दिनों का समय होगा, जिसके बाद ही यह समीक्षा की जाएगी कि किन देशों ने रूसी ऊर्जा की नई खरीद की है। 'टॉप-5' खरीदारों की समीक्षा: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) हर 180 दिनों में दुनिया के उन 5 सबसे बड़े देशों की लिस्ट की समीक्षा करेगा जो रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस आयात करते हैं। राष्ट्रपति के पास 'राष्ट्रीय हित' में छूट देने का वीटो अधिकार इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें राष्ट्रपति को असीमित विवेकाधिकार दिए गए हैं। अगर ट्रंप प्रशासन को लगता है कि किसी देश पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था या उसके रणनीतिक गठबंधनों को नुकसान पहुंचेगा, तो राष्ट्रपति इस टैरिफ को टाल या पूरी तरह माफ भी कर सकते हैं। अगर कोई देश धीरे-धीरे रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है, तो उस पर टैरिफ की दरों को घटाया भी जा सकता है। अमेरिका की तरफ से भारतीय सामानों पर तुरंत भारी-भरकम टैरिफ न लगाने के पीछे तीन प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं: अमेरिका में महंगाई बढ़ने का डर: भारत से अमेरिका जाने वाले उपभोक्ता सामानों पर 100% ड्यूटी लगाने से खुद अमेरिकी जनता के लिए दैनिक चीजें बेहद महंगी हो जाएंगी, जिससे अमेरिका में महंगाई बेकाबू हो सकती है। द्विपक्षीय व्यापार समझौता: नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच इस समय एक व्यापक व्यापार समझौते पर संवेदनशील बातचीत चल रही है। यह नया कानून अमेरिकी मेज पर बातचीत का पलड़ा भारी करने का एक औजार है, न कि तुरंत चलाया जाने वाला हथौड़ा। वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप: अगर भारतीय रिफाइनरियों की क्षमता को अचानक विश्व बाजार से काट दिया जाता है, तो पूरे यूरोप और एशिया में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत हो जाएगी, जिससे क्रूड की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। क्या है भारत का रुख? विदेश मंत्रालय ने इस कानून के बनने के बाद दोहराया है कि भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंत्रालय का कहना है कि भारत बाजार की स्थितियों के हिसाब से अलग-अलग देशों से तेल खरीदता रहेगा और देश के आर्थिक और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कानूनी और कूटनीतिक कदम उठाए जाएंगे।

Team India सीरीज से पहले न्यूजीलैंड की बढ़ी चिंता, रचिन रविंद्र के कंधे में लगी चोट

नई दिल्ली अगले महीने भारतीय क्रिकेट टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर जा रही है. इस दौरे पर टीम इंडिया को 5 टी20, 3 वनडे और 2 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है, लेकिन उससे पहले मेजबान न्यूजीलैंड को एक बड़ा झटका लगा है. कीवी टीम के स्टार ऑलराउंडर रचिन रविंद्र को इस सीरीज से पहले कंधे में गंभीर चोट लगी गई है।  रचिन रविंद्र को कंधे में ये चोट एक प्रमोशनल एड शूट के दौरान लगी, जब वह डाइव लगाकर कैच लेने की कोशिश कर रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक रचिन का दाहिना कंधा खिसक गया है. ऐसे में अब अगले महीने भारत के खिलाफ रचिन का मैदान पर उतरना मुश्किल है, क्योंकि भारत और न्यूजीलैंड के बीच 22 अक्टूबर से सीरीज की शुरुआत हो रही है।  परफॉर्मेंस मैनेजर माइक सैंडल ने रचिन के लिए जताया दुख न्यूजीलैंड के परफॉर्मेंस मैनेजर माइक सैंडल ने बताया कि शूटिंग के दौरान कैच पकड़ने की कोशिश करते समय रवींद्र सेफ्टी मैट (सुरक्षा गद्दे) पर गलत तरीके से गिर गए. सैंडल ने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण चोट थी. हम रचिन को लेकर काफी दुखी हैं और हमारी मुख्य प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि वह पूरी तरह ठीक हों और जल्द से जल्द मैदान पर वापसी करें।  उन्होंने आगे कहा, “हमारे खिलाड़ियों से जुड़े सभी कमर्शियल शूट की तरह ही इस गतिविधि को भी सभी पक्षों की अग्रिम सहमति और उचित सुरक्षा उपायों के साथ तय किया गया था. यह एक एक्सिडेंट है और हम भविष्य में इस तरह के आयोजनों को लेकर अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा जारी रखेंगे।  रचिन को लेकर कोई जोखिम नहीं लेंगी टीम न्यूजीलैंड के मुख्य कोच रॉब वाल्टर ने कहा कि टीम रवींद्र को लेकर सतर्क रुख अपनाएगी, खासकर आगामी व्यस्त टेस्ट शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए उन्हें लेकर कोई जोखिम नहीं उठाएगी. वाल्टर ने कहा, “अगले छह महीनों में टेस्ट क्रिकेट के व्यस्त शेड्यूल को देखते हुए, हम रचिन को जल्दबाजी में मैदान पर उतारने का जोखिम नहीं लेना चाहते. वह अपने रिहैब के लिए बेहतरीन विशेषज्ञों की निगरानी में हैं और हमें जल्द ही उनके टीम में लौटने की उम्मीद है। 

दिशा सालियान के पिता का बड़ा कदम, आदित्य ठाकरे को भेजेंगे 500 करोड़ का नोटिस

 मुंबई दिवंगत नेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रही चुकीं दिशा सालियन की मौत केस में हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली है। दिशा के पिता सतीश सालियन ने उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को आरोपी बताते हुए 500 करोड़ के हर्जाने की मांग की है। यह नोटिस थमाने वह खुद शनिवार की शीम चार बजे के करीब मातोश्री जाने वाले हैं। आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे अपने बेटे के साथ इसी निजी आवास में रहते हैं। सतीश सालियान ने इसके लिए पुलिस से सुरक्षा भी मांगी है। सुरक्षा की यह मांग मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए की गई है। सालियान ने इस दौरान किसी भी संभावित बाधा, अप्रिय घटना या टकराव की आशंका जताई है। पत्र में कहा गया है कि सालियान और उनकी लीगल टीम को अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा का खतरा महसूस हो रहा है, इसलिए उन्होंने पुलिस प्रशासन से पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध करने का अनुरोध किया है ताकि बिना किसी रुकावट या अप्रिय घटना के नोटिस दिया जा सके। मुंबई पुलिस से मौके पर आवश्यक पुलिस कर्मियों को तैनात करने और सालियान एवं उनके कानूनी प्रतिनिधियों को मातोश्री प्रवास के दौरान सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया है। इससे पहले CBI को लिखे एक पत्र में उन्होंने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह, बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने FIR में IPC की धारा 409 जोड़ने और बलात्कार, हत्या, सबूत मिटाने और मामले को दबाने के संबंध में चश्मदीदों और अन्य अहम गवाहों के बयान दर्ज करने की भी मांग की है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे दिशा सालियन की मौत के मामले पर तब तक कुछ न बोलें जब तक उनके पास सबूत न हों। रवींद्र चव्हाण ने क्या कहा? BJP ने फिलहाल दिशा सालियन मामले को लेकर सावधानी भरा रुख अपनाया है। प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इस संबंध में अपनी पार्टी के सहयोगियों को अहम निर्देश दिए हैं। उन्होंने जोर दिया कि पार्टी के हर कार्यकर्ता और पदाधिकारी को अपनी बात का ध्यान रखना चाहिए और बिना सबूत के कभी कुछ नहीं बोलना चाहिए। रवींद्र चव्हाण ने कहा कि जब तक किसी को पूरी जानकारी न हो या ठोस सबूत न हों तब तक ऐसे मामलों पर बात नहीं करनी चाहिए। दिशा सालियन का मामला क्या है? दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रहीं दिशा सालियान की आठ जून 2020 को एक इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने से मौत हो गयी थी। इसके छह दिन बाद ही 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत का भी निधन हो गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें आदित्य ठाकरे सहित कई व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। एफआईआर में आदित्य ठाकरे के अलावा डिनो मोरिया, रोहन रॉय, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, सचिन वाजे और परमबीर सिंह समेत कई लोगों के नाम का जिक्र है।