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एम्स भोपाल तक सीमित नहीं रहेगी सुविधा, अब मेडिकल कॉलेजों में भी होंगे ब्रेन-डेड मरीजों से अंगदान

भोपाल  एमपी के सभी ट्रॉमा सेंटर और मेडिकल कॉलेजों में ब्रेन-डेड मरीजों के अंग दान करने की व्यवस्था होगी। साथ ही ब्रेन डेड मरीज के परिवारों से अंगदान की मंजूरी के लिए जरूरी काउंसलिंग के लिए स्थायी काउंसलर की नियुक्ति भी की जाएगी।दरअसल, अंगदान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) की गाइडलाइन आई है। प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इनमें से कई का पालन पहले से किया जा रहा है। अब सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। NOTTO से जारी निर्देश में कहा गया कि प्रदेश के सभी ट्रॉमा सेंटर्स में अंग एवं ऊतक प्राप्ति (ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन) की व्यवस्था विकसित की जाए। उन्हें THOTA अधिनियम के तहत अंग प्राप्ति केंद्र के रूप में पंजीकृत किया जाए। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों में भी चरणबद्ध तरीके से यह सुविधाएं विकसित की जाएं। हर साल 11 सौ ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन, MP की हिस्सेदारी 0.7% भारत में हर साल 11 सौ के करीब ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन होते हैं। जिसमें तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात की हिस्सेदारी 82% से अधिक है। वहीं, मध्यप्रदेश की 0.7 प्रतिशत, राजस्थान की 0.6 प्रतिशत और छत्तीसगढ की 0.3 प्रतिशत हिस्सेदारी रहती है। इसकी दो बड़ी वजह हैं, इनमें पहली सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशनकी व्यवस्था ना होना और दूसरी जागरूकता की कमी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इसको लेकर हाल में सरकार का विजन स्पष्ट किया है। जिसका एक उदाहरण यह कि इस 15 अगस्त को प्रदेश के सभी अंगदाताओं का राजकीय सम्मान किया जाएगा। ऑर्गन वेटिंग लिस्ट में महिलाओं को प्राथमिक्ता नई गाइडलाइन के अनुसार, हर राज्य में अब ऑर्गन वेटिंग लिस्ट में महिलाओं को अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान किया जाएगा। इसके अलावा, यदि किसी पूर्व दिवंगत दाता के निकट संबंधी को अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो, तो उसे प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, NOTTO ने साफ किया है कि नई गाइडलाइन का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, अंगदान में पारदर्शिता लाना और लैंगिक असमानता को दूर करना है। यही वजह है कि जन-जागरूकता को बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर ब्रांड एम्बेसडर भी नियुक्त किए जाएं। इन गाइडलाइन का प्रदेश में पहले से हो रहा पालन     मृतक दाता के परिवार के सदस्यों को राज्य और जिला स्तर पर सार्वजनिक समारोहों जैसे 15 अगस्त, 26 जनवरी, राज्य स्थापना दिवस आदि पर सम्मानित किया जाना।     आपातकालीन कर्मियों और एम्बुलेंस स्टाफ को सड़क दुर्घटना या स्ट्रोक से पीड़ित संभावित दाताओं की पहचान और अस्पताल के अंग दान समन्वयक को समय पर सूचित करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना। ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन वाला एम्स अकेला सरकारी संस्थान मध्यप्रदेश में फिलहाल ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन की व्यवस्था राजधानी के 3 समेत कुल 6 अस्पतालों में ही मौजूद है। इनमें एम्स भोपाल यह सुविधा वाला अकेला सरकारी अस्पताल है। इसके साथ, भोपाल और इंदौर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यह व्यवस्था शुरू करने का काम अब तक कागजों में ही सीमित है। किडनी ट्रांसप्लांट में भोपाल आगे भोपाल के दो प्रमुख सरकारी अस्पताल, एम्स और हमीदिया में किडनी ट्रांसप्लांट रफ्तार पकड़ रहा है। एक तरफ एम्स में 11 किडनी ट्रांसप्लांट हुए, जिसमें से 3 कैडेवरिक ऑर्गन (यानी ब्रेन डेड मरीज से मिली किडनी) ट्रांसप्लांट थे। वहीं, गांधी मेडिकल कॉलेज में 10 किडनी ट्रांसप्लांट हुए और यह सभी लाइव थे। यानी, परिजनों ने अपनों को नया जीवन देने के लिए अपनी किडनी दान की। इसके अलावा, भोपाल का बंसल अस्पताल 400 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। इन दोनों कैटेगरी (सरकारी और निजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट) में भोपाल प्रदेश में सबसे आगे हैं। लेकिन, देश में देखें तो टॉप 10 में भी नहीं है। देश के अन्य राज्यों की तुलना में प्रदेश काफी पीछे मध्य प्रदेश स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTTO) की कंवीनर डॉ. कविता कुमार ने कहा कि अंगदान के मामले में मध्यप्रदेश अभी शुरुआती दौर में है, जैसे एक छोटा बच्चा चलना सीख रहा हो। इस क्षेत्र में अभी काफी काम बाकी है। सबसे अहम है कि अंगदान पर ज्यादा चर्चा हो और सही जानकारी लोगों तक पहुंचे। जब लोग इसके बारे में बात करेंगे, तो जागरूकता बढ़ेगी। उन्हें इसके फायदे समझ में आएंगे। एक बार जब लोग जान जाएंगे कि अंगदान से कितने लोगों की जान बच सकती है, तब राज्य में अंगदान का ग्राफ तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने आगे कहा, सरकारी अस्पतालों में ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन शुरू होना जरूरी है। इसके लिए अलग से मैनपावर, पर्याप्त स्पेस और एक बड़े सेटअप की जरूरत होती है। गांधी मेडिकल कॉलेज के पास मैनपावर और जगह तो है, लेकिन ऑर्गन रिट्रीवल के लिए आवश्यक मशीनें और जांच की सुविधा अभी विकसित करनी है। अच्छी बात यह है कि सरकार इस दिशा में काफी सक्रिय है। हमें भरोसा है कि जल्द ही प्रदेश में अंगदान की स्थिति बेहतर होगी और इसका ग्राफ ऊपर जाएगा। आठ अंगों को दान कर सकते हैं लोग     18 या उससे ‎अधिक उम्र के बाद ‎जीवित डोनर या तो‎ एक किडनी या लीवर ‎का केवल एक हिस्सा‎दान कर सकता है।     ‎किसी भी उम्र का ब्रेन‎स्टेम मृत डोनर 8‎ महत्वपूर्ण अंगों को‎ दान कर सकता है। ‎इनमें हार्ट, 2 फेफड़े,‎ लीवर, 2 किडनी,‎ पैंक्रियाज और छोटी‎ आंत, कॉर्निया, हड्डी,‎ त्वचा और हार्ट वाल्व ‎शामिल हैं।‎ लिविंग ऑर्गन डोनेशन     सबसे पहले डोनर के कुछ मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं। यह जानने के लिए व्यक्ति डोनेशन के लिए उपयुक्त है।     इन टेस्ट में सबसे महत्वपूर्ण दो पहलू हैं। डोनर और रिसीवर की कंपैटिबिलिटी और डोनर की मेडिकल कंडीशन यानी उसका शारीरिक रूप से स्वस्थ होना।     सारे टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव होने और डॉक्टर के सर्टिफिकेट के बाद डोनर की बॉडी से डोनेट किया जा रहा हिस्सा सर्जिकली रिमूव किया जाता है और उसे रिसीवर की बॉडी में ट्रांसप्लांट किया जाता है।     डोनर को भी ऑर्गन डोनेशन के बाद कई हफ्तों में मेडिकल सुपरविजन में रखा जाता है। ब्रेन-डेड मरीज से ऑर्गन डोनेशन किसी भी कारण से हुई आकस्मिक मृत्यु के बाद … Read more

102 किमी रेलवे लाइन पर ‘कवच’ की तैनाती तय, बिरला नगर से उदीमोड़ के बीच बढ़ेगी सुरक्षा

 ग्वालियर केंद्र सरकार ने उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के 790 किलोमीटर के मार्ग को अत्याधुनिक कवच प्रणाली से लैस करने के लिए 309.26 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इसमें जिले के मैनपुरी और उदी मोड़ रेलवे ट्रैक को भी शामिल किया गया है।  बिरला नगर से उदीमोड़ रेलवे स्टेशन तक 102 किमी लंबाई में ट्रेनों की भिड़ंत जैसे हादसे रोकने में कारगर अत्याधुनिक कवच प्रणाली को लागू किया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने बिरला नगर-उदीमोड़ सहित कुल 14 रेल खंडों में इस प्रणाली को लागू करने के लिए 309.26 करोड़ रुपये की राशि को स्वीकृति दे दी है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीरो टालरेंस फार सेफ्टी नीति के अंतर्गत लिया गया है और जल्द ही इन मार्गों को कवच तकनीक से लैस करने के लिए काम भी शुरू कर दिया जाएगा। योजना के अंतर्गत प्रयागराज, झांसी और आगरा मंडलों के 14 प्रमुख मार्गों पर कवच प्रणाली को लागू किया जाएगा। रेलवे द्वारा इसे 2025 में ही पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिन मार्गों को योजना में शामिल किया गया है, उनमें प्रयागराज मंडल के शिकोहाबाद-फर्रुखाबाद खंड तक 103.58 किमी, आगरा मंडल के धौलपुर-सरमथुरा 70 किमी एवं भांडई-उदीमोड़ 113 किमी, झांसी मंडल के ललितपुर-खजुराहो 164 किमी, बिरला नगर-उदीमोड़ 102 किमी, खजुराहो-महोबा 64 किमी, एट-कोंच 13 किमी, अलीगढ़-हरदुआगंज 14 किमी, खुर्जा जंक्शन-खुर्जा सिटी चार किमी, बरहन-एटा 58 किमी, इटावा-मैनपुरी 54 किमी, कानपुर-अनवरगंज खंड 2.42 किमी, मोहारी-टंटपुर 18 किमी, उदीमोड़-इटावा 10 किमी शामिल हैं। क्या है कवच तकनीक यह प्रणाली भारतीय रेलवे की मेड इन इंडिया तकनीक है, जो रेल हादसों को रोकने और मानवीय भूल की संभावनाओं को न्यूनतम करने में बेहद कारगर साबित हो रही है। बिरला नगर-उदीमोड़ खंड को इस अत्याधुनिक कवच तकनीक से लैस करने से ग्वालियर एवं आसपास के यात्रियों को और अधिक सुरक्षित व भरोसेमंद रेल यात्रा का अनुभव मिलेगा। कवच एक आटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो ट्रेनों को टकराने से रोकने के लिए निर्धारित गति बनाए रखने और ड्राइवर को समय पर अलर्ट देने जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। इसकी मदद से न केवल ट्रेनों की स्पीड पर नियंत्रण होगा, बल्कि घने कोहरे या तकनीकी बाधाओं में भी ट्रेनों का संचालन पूरी सुरक्षा के साथ किया जा सकेगा।  

Grok के Spicy Mode से जुड़ा नया खतरा, साइबर अपराधियों की नई चाल

नई दिल्ली Elon Musk की AI कंपनी के एक फीचर के बाद से सोशल मीडिया पर बवाल मचा है. एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि इससे देश में एडल्ट कंटेंट बढ़ेंगे और Sextortion जैसे क्राइम को भी हवा मिलेगी. सिर्फ एक फोटो से xAI का ये फीचर किसी की भी अश्लील फोटो तैयार कर देगा.  Grok AI पर इस फीचर को Spicy Mode नाम दिया है, जिसने आते ही कई लोगों की चिंता बढ़ा दी है. हैरानी की बात ये है कि ये फीचर एवेलेबल करा दिया गया है और 700 रुपये की मंथली सब्सक्रिप्शन भी है. 700 रुपये में GrokAI का पेड सब्सक्रिप्शन मिलता है. Spicy Mode असल में Grok Imagine फीचर का हिस्सा है और यह एक AI-पावर्ड इमेज और वीडियो जनरेशन टूल है. यह फीचर SuperGrok या X Premium+ सब्सक्रिप्शन के साथ iOS ऐप पर दिया गया है.   Grok के Spicy Mode फीचर को लेकर उठने वाली चिंताएं लाज़मी हैं. असल में इस फीचर की मदद से यूजर्स ना सिर्फ प्रॉम्प्ट देकर एडल्ट कंटेंट बनाने की सुविधा मिलेगी बल्कि किसी पुरानी फोटो या किसी दूसरे शख्स की फोटो का भी गलत इस्तेमाल कर सकेंगे.  Deepfake जैसा खतरनाक Spicy Mode दरअसल, बीते साल Deepfake फोटो और वीडियो की वजह से कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था. यहां तक कि ये मामले सेलिब्रिटी तक पहुंच गए थे, जहां रश्मिका मंदाना का एक फेक वीडियो काफी सुर्खियों में रहा था.  क्या Grok Spicy Mode भारत में उपलब्ध है? हां, भारत में Grok Spicy Mode मौजूद है, लेकिन इसका इस्तेमाल शर्तों के साथ करना होगा. अब अगर कोई शख्स Spicy Mode की मदद से किसी लड़की का फोटो अपलोड करता है और उसको Spicy Mode में कंवर्ट करने को कहता है तो यह पूरी तरह से गैर कानूनी काम है.  प्राइवेसी का उल्लंघन  जानकारी के लिए बता देते हैं कि इस एडल्ट कंटेंट जनरेट करना उस व्यक्ति की प्राइवेसी का उल्लंघन है और गैर कानूनी भी है. विक्टिम चाहे तो फोटो या वीडियो बनाने वाले के खिलाफ पुलिस कंप्लेंट भी दर्ज करा सकते हैं. xAI ने क्लियर कर दिया है कि Spicy Mode का मिसयूज कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है.  xAI की पॉलिसी लेकिन बहुत सीमित  xAI ने Spicy Mode में कुछ मॉडरेशन लगाए हैं, जैसे पब्लिक फिगर्स यानी सेलिब्रिटी आदि का एक्सप्लिसिट कंटेंट जनरेट नहीं होता. हालांकि प्राइवेट इंडिविजुअल्स के फोटो अपलोड किए जा सकते हैं, जिससे इस फीचर के मिसयूज होने का खतरा है. प्राइवेसी को सेफ रखने का क्या है तरीका?  xAI में फेस रिकग्निशन और आईडेंटिटी वेरिफिकेशन टूल्स का यूज किया जा रहा है. इससे पब्लिक फिगर्स की फोटो को एडल्ट कंटेंट में कंवर्ट नहीं कर पाएंगे. यहां यूजर्स चाहें तो कंटेंट की रिपोर्ट भी कर सकते हैं. इसके लिए xAI ने एक टीम तैयार की है, जो इन शिकायतों को सुनेगी और सॉल्व करेगी.  ग्लोबल पॉलिसी होने की वजह से परेशानी  xAI दुनिया के कई देशों में काम करता है और सभी देशों के अपने अलग-अलग नियम और कानून है. ऐसे में xAI के लिए ग्लोबल लेवल पर पॉलिसी लागू करना मुश्किल हो जाता है. हालांकि अगर कोई देश या स्थानीय अथॉरिटी कंप्लेंट करती हैं तो X उस पर एक्शन लेता है. Spicy Mode बड़े खतरे में डाल सकता है भारत में किसी की मर्जी के खिलाफ जाकर उसकी फोटो को एडल्ट तस्वीर में बदलना गैरकानूनी है. भारत में इसके लिए कई नियम-कानून भी हैं. भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत धारा 354C और धारा 509 के तहत केस दर्ज किया जा सकता है. साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 की धारा 66E, धारा 67, धारा 67A के तहत केस दर्ज कराया जा सकता है. 

भारत आएंगे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, ट्रंप की चुनौती के बीच बढ़ेगी भारत-रूस की नजदीकी

नई दिल्ली अमेरिका से मची तनातनी के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आ रहे हैं. गुरुवार को मॉस्को में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के हवाले से बताया गया कि राष्ट्रपति पुतिन इस साल के अंत में भारत का दौरा करेंगे. रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे की खबर ऐसे वक्त में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल की खरीद से नाराज होकर भारत पर टैरिफ 50% तक बढ़ा दिया है. रूसी न्यूज एजेंसी इंटरफैक्स (Interfax) ने अजीत डोभाल के हवाले से पहले बताया था कि राष्ट्रपति पुतिन अगस्त के अंत में भारत का दौरा करेंगे. हालांकि, बाद में खबर में संशोधन करते हुए एजेंसी ने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन 2025 के अंत में भारत दौरे पर आएंगे. ट्रंप ने भारत पर लगाया है 50% टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर पहले 25% टैरिफ लगाया था. इसके कुछ दिनों बाद ही उन्होंने घोषणा की थी कि रूसी तेल की खरीद के संबंध में भारत पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ाई जाएगी. उन्होंने कहा था, 'भारत न केवल रूस से बड़ी मात्रा में तेल की खरीद कर रहा है बल्कि खरीदे गए तेल का एक बड़ा हिस्सा खुले बाजार में बेचकर भारी मुनाफा भी कमा रहा है. भारत को इस बात की परवाह नहीं है कि यूक्रेन में रूस की वॉर मशीन कितने लोगों को मार रही है. इसे देखते हुए मैं भारत पर टैरिफ बढ़ाने जा रहा हूं.'  ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की जिससे कुल टैरिफ बढ़कर 50% हो गया है. भारत पर यह 50% टैरिफ ट्रंप का कार्यकारी आदेश जारी होने के 21 दिन बाद से लागू होगा. ट्रंप के 50% टैरिफ पर भारत ने क्या कहा? ट्रंप के अतिरिक्त टैरिफ को भारत के विदेश मंत्रालय ने तर्कहीन बताया है. मंत्रालय ने कहा, 'यह कार्रवाई अनुचित, बेवजह और तर्कहीन है.' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा गया, 'हाल के दिनों में अमेरिका ने रूस से भारत के तेल आयात को निशाना बनाया है. हम इन मुद्दों पर पहले ही अपना रुख साफ कर चुके हैं जिसमें यह फैक्ट भी शामिल है कि हमारा आयात बाजार के हालातों पर आधारित है. और इसका मकसद भारत की 140 करोड़ आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है.' 

तमोट में विस्तार लेगा औद्योगिक क्षेत्र, निवेश की दिशा में आगे बढ़ेगा प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव औद्योगिक विकास को धरातल पर उतारने के अपने सतत प्रयासों के क्रम में आज रायसेन जिले के तामोट औद्योगिक क्षेत्र में निवेश संवाद, इकाइयों के भूमिपूजन, लोकार्पण और आशय पत्र वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा उद्योगों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता और कार्य संस्कृति का प्रतिबिंब है, जिसमें नीति के साथ क्रियान्वयन को भी बराबरी का महत्व दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तामोट में संचालित सागर मैन्युफैक्चरर प्रा. लि. की इकाई का भ्रमण करेंगे और रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित सामाजिक कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव मेसर्स आनंद टैक लास्ट प्राइवेट लिमिटेड प्लास्टिक पार्क का भ्रमण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों से संवाद करेंगे और प्रदेश में बन रहे निवेश अनुकूल वातावरण से उन्हें अवगत कराएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव औद्योगिक क्षेत्र तामोट में 566 करोड़ रुपए के निवेश एवं 1781 रोजगार देने वाली 14 इकाइयों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण के साथ आशय पत्र वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 416 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव औद्योगिक क्षेत्र तामोट में 300 करोड़ निवेश एवं 970 रोजगार देने वाली 6 इकाइयों का भूमिपूजन और 116 करोड़ रुपए से अधिक निवेश एवं 211 रोजगार देने वाली 6 इकाइयों का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्यमियों को भूमि आवंटन से संबंधित आशय-पत्र प्रदान करेंगे और औद्योगिक विकास के प्रति प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं को साझा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह प्रयास निवेशकों को आश्वस्त करने के साथ-साथ युवाओं के लिए नए रोजगार अवसरों का रास्ता भी खोलेगा। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा एमएसएमई प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र सिंह प्रदेश की औद्योगिक रणनीति और नीतिगत परिवर्तनों की जानकारी साझा करेंगे। जे.बी.एम, विनप्रो और मंडीदीप औद्योगिक एसोसिएशन जैसे प्रमुख निवेशक समूहों के प्रतिनिधि मध्यप्रदेश में निवेश अनुकूल माहौल और प्रदेश की निवेश फ्रेंडली नीतियों के संबंध में विचार साझा करेंगे। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, भोजपुर विधायक श्री सुरेंद्र पटवा और विधायक श्री नारायण सिंह पंवार भी कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। 

इंदौर को मिलेगी बड़ी स्वास्थ्य सुविधा, मोहन भागवत करेंगे 96 करोड़ के हॉस्पिटल का उद्घाटन

इंदौर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 10 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व के अगले दिन इंदौर प्रवास पर रहेंगे। वे यहां 96 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कैंसर केयर हॉस्पिटल का उद्घाटन करेंगे। साथ ही शहर में विभिन्न समाजों से जुड़े लोगों के साथ अलग-अलग सत्रों में चर्चा भी करेंगे। यह मोहन भागवत का पिछले सात महीनों में तीसरा इंदौर दौरा होगा। इससे पहले वे 3 जनवरी और 13 जनवरी 2025 को भी इंदौर आ चुके हैं। पूरे दिन रहेंगे इंदौर, समाजजनों से करेंगे संवाद संघ सूत्रों के मुताबिक, डॉ. भागवत इंदौर में दिनभर रहेंगे। वे विजय नगर स्थित एक सभागृह में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम अलग-अलग सत्रों में होगा, हालांकि इसका आधिकारिक शेड्यूल अब तक जारी नहीं किया गया है। डॉ. भागवत का आगमन श्री गुरुजी सेवा न्यास द्वारा निर्मित माधव सृष्टि आरोग्य केंद्र एवं कैंसर केयर सेंटर के उद्घाटन हेतु हो रहा है। यह प्रोजेक्ट दो चरणों में विकसित किया जा रहा है। – पहले चरण में 26 करोड़ की लागत से दो बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और तीन मंजिलें तैयार की गई हैं। – दूसरे चरण में हाईटेक मेडिकल मशीनरी और अन्य फ्लोर का निर्माण किया जाएगा। जनभागीदारी से बन रहा है अत्याधुनिक सेंटर 96 करोड़ के इस कैंसर केयर प्रोजेक्ट का निर्माण जनभागीदारी के माध्यम से किया जा रहा है। इसमें कई कंपनियों ने CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड के तहत सहयोग किया है, जबकि अन्य दानदाता भी आगे आए हैं। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत एक रियायती दर वाली ओपीडी से हुई थी, जहां कई वरिष्ठ चिकित्सक नि:शुल्क सेवा दे रहे हैं। प्रबंधन समिति में मुकेश हजेला अध्यक्ष और दिनेश अग्रवाल उपाध्यक्ष हैं। 2021 में हुई थी OPD की शुरुआत इस कैंसर सेंटर की OPD सेवाएं मार्च 2021 में शुरू हुई थीं। इसका उद्घाटन तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और RSS के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी ने किया था। 

भोपाल बनेगा देश का टैक सेंटर, सीएम डॉ. यादव ने बताया युवाओं के लिए नया विज़न

भोपाल बन रहा देश का टैक हब, युवाओं के कॅरियर को मिलेगी नई उड़ान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल उभर रहा टेक्नोलॉजी हब के रूप में, युवाओं को मिलेंगे नए अवसर : सीएम डॉ. यादव टैक्नोलॉजी के नए नक्शे पर भोपाल, सीएम बोले– युवाओं का भविष्य होगा उज्जवल भोपाल बनेगा देश का टैक सेंटर, सीएम डॉ. यादव ने बताया युवाओं के लिए नया विज़न भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब नवाचार का केंद्र बनकर भारत के डिजिटल भविष्य को आकार देने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यहां ड्रोन, एवीजीसी-एक्सआर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों के अग्रणी केंद्र और उद्योग साझेदारियां आकार ले रही हैं। भोपाल जल्द ही ड्रोन टेक्नोलॉजी का भी हब बनेगा। एनीमेशन ग्राफ़िक्स जैसे नए सेक्टर्स भी प्रदेश के युवाओं के कॅरियर को नई उड़ान देने तैयार हैं। भोपाल में सेमी-कंडक्टर और डाटा-सेंटर जैसे ग्लोबल टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स भी विकसित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की विकासमूलक रणनीतिक सोच से भोपाल का हाई-टैक इंडस्ट्रीज के लिए एक मनपसंद गंतव्य के रूप में उभरना कोई संयोग नहीं है, बल्कि, योजनाबद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर एवं ईको सिस्टम का विकास और भविष्योन्मुखी नीतियों के निर्माण का परिणाम है। देशी-विदेशी कंपनियां मध्यप्रदेश में उद्यमिता को चुन रही हैं। उन्हें प्रदेश में ईज-ऑफ-डूइंग बिजनेस और नीतिगत प्रक्रिया सहयोग भी मिल रहा है। सेमी-कंडक्टर और ड्रोन जैसे डीप-टैक उपक्रमों से लेकर एवीजीसी और डाटा सेंटर्स तक के लिये मध्यप्रदेश भारत के डिजिटल भविष्य का लॉन्चपैड बनता जा रहा है। एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: ग्लोबल स्किल्स पार्क में नया क्रिएटिव हब ग्लोबल स्किल्स पार्क, भोपाल में स्थापित हो रहा एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस युवाओं को गेमिंग, एनीमेशन और वीएफएक्स के क्षेत्र में प्रशिक्षण और स्टार्ट-अप्स के लिए मंच देगा। इसमें एलईडी वर्चुअल प्रोडक्शन स्टूडियो, एआई लैब्स, मोशन कैप्चर सिस्टम और रेंडर फार्म्स जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। यह केंद्र देश के मेट्रो शहरों पर निर्भरता को कम करते हुए एक नया डिजिटल वर्कफोर्स तैयार करेगा। आइसर का ड्रोन ट्रेनिंग और शोध केन्द्र बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईसर भोपाल में बन रहा ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एआई-एनेबल्ड ड्रोन निर्माण, स्वदेशी प्रोटोटाइपिंग और एआर/वीआर आधारित प्रशिक्षण के अनूठे मंच के रूप में विकसित हो रहा है। यहां देश की पहली एआई-यूएवी डाटा रिपॉजिटरी भी स्थापित होगी, जो कृषि, आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों के लिए नवाचारों को प्रेरित करेगी। सेमीकंडक्टर निर्माण की कायनेस सेमिकॉन की इकाई भोपाल में भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का अहम भागीदार कायनेस सेमिकॉन अब भोपाल के आईटी पार्क में अपनी इकाई स्थापित कर रहा है। इससे चिप डिज़ाइन, असेंबली और अनुसंधान को एक नई दिशा मिलेगी। यह कदम प्रदेश की डीप-टैक नीति को सशक्त करेगा। भोपाल में बनेगा मध्यप्रदेश का पहला निजी ग्रीन डाटा सेंटर एशिया का सबसे बड़ा रेटेड-4 हाइपरस्केल डाटा सेंटर ऑपरेटर, भोपाल के आईटी पार्क में ग्रीन डाटा सेंटर स्थापित कर रहा है। इमर्सिव कूलिंग जैसी तकनीकों से युक्त यह डाटा सेंटर जीरो-एमिशन लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। यह क्लाउड और एआई कम्प्यूटिंग के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। ईएमसी 2.0: 209 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर भोपाल के बांदाखेड़ी में 209 एकड़ में फैला ईएमसी2.0 क्लस्टर मोबाइल, सेमीकंडक्टर, पीसीबी, एलईडी और ई-मोबिलिटी उद्योगों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसमें रेडी-बिल्ट फैक्ट्री, टेस्टिंग लैब्स और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट जैसी सुविधाएं होंगी। इसमें 1500 करोड़ रूपये का निवेश होगा और इससे 75 हजार रोजगार सृजित होंगे। सिक्योर सर्किट: पीसीबी मैन्युफैक्चरिंग से आत्मनिर्भरता की ओर भोपाल में स्थापित हो रही प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) निर्माण इकाई राज्य के सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करेगी। यह रक्षा, ऑटोमोबाइल और औद्योगिक ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम होगा। राज्य सरकार उद्योगों को न केवल कम समय में मंजूरी और समाधान उपलब्ध करा रही है,बल्कि निवेशकों में दीर्घकालिक साझेदारी का भरोसा भी जगाने में सफल हो रही है। भोपाल की यह यात्रा केवल तकनीकी विकास की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की नई कहानी लिखने का प्रारंभ है। प्रदेश अब नवाचार, ज्ञान और डिजिटल कौशल के केंद्र के रूप में नया उदाहरण बनकर उभर रहा है।

धरती के नीचे दबा है लाखों टन सोना: जबलपुर के सिहोरा में मिला विशाल सोना भंडार

जबलपुर अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा के लिए मशहूर मध्य प्रदेश का जबलपुर काफी सुर्खियों में है। जबलपुर की सिहोरा तहसील के महंगवा केवलारी क्षेत्र में भू-वैज्ञानिकों ने एक विशाल सोने के भंडार की खोज की है। यह खोज भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की टीम द्वारा कई वर्षों की मेहनत और मिट्टी के नमूनों के रासायनिक विश्लेषण के बाद सामने आई है। लगभग 100 हेक्टेयर में फैले इस क्षेत्र में लाखों टन सोना होने का अनुमान है, जो मध्य भारत की सबसे बड़ी खनिज खोजों में से एक हो सकती है। वैज्ञानिकों की मेहनत रंग लाई भू-वैज्ञानिकों की टीम ने महंगवा केवलारी में मिट्टी और चट्टानों के सैंपल की स्टडी की। रासायनिक परीक्षणों में न केवल सोने की मौजूदगी की पुष्टि हुई, बल्कि तांबा और अन्य कीमती धातुओं के अंश भी मिले। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह क्षेत्र पहले से ही लौह अयस्क, मैंगनीज, बॉक्साइट और संगमरमर जैसे खनिजों के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन सोने की खोज ने इसकी महत्ता को और बढ़ा दिया है। वैज्ञानिकों के चेहरों पर इस खोज ने नई चमक ला दी है और वे इसे मध्य प्रदेश के आर्थिक भविष्य के लिए गेम-चेंजर मान रहे हैं। जबलपुर बना खनिज संपदा का नया केंद्र जबलपुर पहले से ही 42 खदानों के साथ खनन गतिविधियों का केंद्र रहा है, जहां से लौह अयस्क चीन सहित कई देशों में निर्यात किया जाता है। अब सोने के भंडार की खोज ने इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और आकर्षक बना दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह भंडार आर्थिक रूप से व्यवहार्य साबित होता है, तो जल्द ही व्यावसायिक खनन शुरू हो सकता है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयां मिल सकती हैं। क्या बदलेगी मध्य प्रदेश की किस्मत? यह खोज न केवल जबलपुर, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक पल हो सकता है। पहले पन्ना की हीरे की खदानों ने मध्य प्रदेश को वैश्विक मानचित्र पर जगह दिलाई थी और अब जबलपुर का सोना इसे और चमका सकता है। हालांकि, अगला कदम इस भंडार की मात्रा और खनन की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन करना होगा। अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो यह खोज मध्य प्रदेश को खनिज संपदा के मामले में देश का एक नया सितारा बना सकती है।

चीन में पीएम मोदी की एंट्री के मायने, 7 साल बाद होगा ऐतिहासिक SCO शिखर संवाद

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त को चीन के तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाएंगे। यह सात साल में उनकी पहली चीन यात्रा होगी। इस यात्रा को भारत-चीन संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है, खासकर 2020 में लद्दाख में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव खत्म होने के बाद। सूत्रों के मुताबिक, मोदी इस यात्रा के साथ जापान भी जाएंगे, जहां वे जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी ने आखिरी बार 2018 में चीन का दौरा किया था, जब वे वुहान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक बैठक और किंगदाओ में एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। 2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में हिंसक झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्ते बहुत खराब हो गए थे। हाल ही में 21 अक्टूबर 2024 को दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव खत्म करने पर सहमति बनी, जिसके बाद रूस के कजान में मोदी और शी की मुलाकात हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने रिश्तों को सामान्य करने और सीमा विवाद पर बातचीत के लिए कई तंत्रों को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई। द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना पीएम मोदी की इस यात्रा में शी जिनपिंग के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना है। इस मुलाकात में सीमा पर तनाव कम करने, डायरेक्ट उड़ानों की बहाली, बॉर्डर व्यापार शुरू करने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हाल के महीनों में दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच कई बैठकें हुई हैं। इसके अलावा, कैलाश मानसरोवर यात्रा और चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा जैसे कुछ भरोसा बढ़ाने वाले कदम भी उठाए गए हैं। चीन की कुछ गतिविधियों पर चिंता हालांकि, भारत को अभी भी चीन की कुछ गतिविधियों पर चिंता है, जैसे ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर बांध बनाने की शुरुआत और भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान को चीन का समर्थन। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जुलाई में बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात में इन मुद्दों को उठाया था। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों को रिश्तों को बेहतर करने के लिए सीमा पर तनाव कम करने और व्यापार में रुकावटों को दूर करने की जरूरत है। इससे भारत के लिए क्या बदलेगा, क्या बढ़ेगा ट्रंप पर दबाव? उनकी यह यात्रा वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान की यात्रा के साथ होगी. यदि यह यात्रा होती है तो यह 2018 के बाद और पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध के बाद पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने अक्टूबर 2024 में कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. अक्टूबर 2019 के बाद से उनकी पहली सुनियोजित बैठक भी भारत और चीन द्वारा अपनी विवादित सीमा पर गश्त करने के समझौते पर पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद हुई थी. शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन 10 देशों का यूरेशियन सुरक्षा और राजनीतिक समूह है. चीन, रूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस इसके सदस्य हैं. अक्टूबर 2024 में कजान में मिले थे मोदी- जिनपिंग अक्टूबर 2024 की बैठक के दौरान पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से कहा था कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए. बैठक में उन्होंने कहा, “यह पांच वर्षों के बाद हमारी पहली औपचारिक बैठक है. हम सीमा पर हुए समझौतों का स्वागत करते हैं. सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता हमारे संबंधों का आधार बने रहने चाहिए. मुझे विश्वास है कि हम खुले दिल से बातचीत करेंगे और हमारी चर्चाएं रचनात्मक होंगी.” इस बीच शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन के लिए अधिक संवाद और सहयोग करना मतभेदों और असहमतियों को उचित ढंग से संभालना महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वे अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी निभाएं तथा विकासशील देशों की ताकत और एकता को बढ़ावा देने के लिए एक उदाहरण स्थापित करें. जून में बनी थी वार्ता के लिए सहमति इस वर्ष जून माह के प्रारंभ में,भारत और चीन ने ट्रेड और इकनॉमिक्स के क्षेत्र में चिंता के विशिष्ट मुद्दों को हल करने के लिए वार्ता करने पर सहमति व्यक्त की थी. क्योंकि वे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के लद्दाख क्षेत्र में सैन्य गतिरोध की समाप्ति के बाद द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और पुनर्निर्माण करने के लिए काम कर रहे थे. यह निर्णय विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीनी उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद लिया गया. दोनों पक्षों ने सीधी हवाई सेवाओं को फिर से शुरू करने के प्रयासों में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की, जो 2020 से निलंबित हैं. इस वर्ष कैसे रहे भारत-चीन संबंध जून में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक की संयुक्त विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था. क्योंकि इसमें आतंकवाद से संबंधित चिंताओं का उल्लेख नहीं किया गया था. एचटी की रिपोर्ट के अनुसार राजनाथ सिंह ने चीन के किंगदाओ में बैठक में भाग लिया, लेकिन उन्होंने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए. क्योंकि इसमें 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख नहीं था. लेकिन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस अपहरण का उल्लेख था. ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत के साथ चार दिनों तक चले संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान का पुरजोर समर्थन किया था. चीन ने काफी दिनों बाद पहलगाम हमले की निंदा की हालांकि जब अमेरिका ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेने वाले लश्कर-ए-तैयबा के प्रतिनिधि संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित किया तो चीन ने 22 अप्रैल के हमले की निंदा की. चीन ने आतंकवाद से निपटने तथा स्थिरता बनाए रखने के लिए मजबूत क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “चीन सभी प्रकार के आतंकवाद का दृढ़ता से विरोध करता है और 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता है. चीन क्षेत्रीय देशों से आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ाने … Read more

₹1.80 लाख की सब्सिडी का मौका! PM Awas Yojana 2.0 में जानें कैसे उठाएं फायदा

भोपाल  प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत अब एलआईजी (Low Income Group) और एमआईजी (Middle Income Group) वर्ग के लिए खुशखबरी है। सरकार ने अब इस योजना के दूसरे चरण में मकान ऋण पर 1.80 लाख रुपये तक की छूट देने की घोषणा की है। यह छूट सीधे बैंक के माध्यम से ब्याज अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी। यदि आप घर खरीदने या बनवाने की योजना बना रहे हैं, तो यह आपके लिए सुनहरा मौका है। प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 (PMAY) प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत अब एलआईजी और एमआईजी वर्ग के पात्र हितग्राहियों को 1.80 लाख रुपये तक का ब्याज अनुदान मिलेगा। यह योजना उन लाभार्थियों पर भी लागू होगी जिनका होम लोन 1 सितंबर 2024 के बाद स्वीकृत या वितरित हुआ है। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और नगर निगम आयुक्त प्रीति यादव ने जबलपुर के नागरिकों से इस योजना का भरपूर लाभ उठाने की अपील की है। अधिक से अधिक पात्र लोगों तक योजना की जानकारी पहुँचाने के लिए शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। योजना के नोडल अधिकारी सुनील दुबे के अनुसार, EWS (Economically Weaker Section), LIG और MIG श्रेणी के पात्र लाभार्थी इस योजना के अंतर्गत नया मकान खरीदने, मकान का निर्माण कराने या फ्लैट लेने के लिए होम लोन पर सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं। ब्याज सब्सिडी सीधे बैंक खाते में दी जाएगी, जिससे मकान की EMI में बड़ी राहत मिल सकती है। यह योजना खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो पहली बार घर खरीदना चाहते हैं। योजना का लाभ कैसे उठाएं? 1. PMAY 2.0 के अंतर्गत आवेदन करने के लिए सरकारी पोर्टल या बैंक से संपर्क करें। 2. आवेदक की वार्षिक आय और योजना की पात्रता की शर्तें ध्यानपूर्वक जांचें। 3. योजना के लिए होम लोन 1 सितंबर 2024 के बाद स्वीकृत/वितरित होना चाहिए। 4. आवेदन के बाद पात्रता की जांच के उपरांत ब्याज अनुदान सीधे बैंक खाते में आएगा।