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अलकराज की गैरमौजूदगी से बढ़ीं जोकोविच की उम्मीदें, सानिया मिर्जा का बड़ा बयान

 नई दिल्ली साल का दूसरा ग्रैंड स्लैम फ्रेंच ओपन 24 मई से शुरू होने जा रहा है। दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों के बीच इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। इस बार कार्लोस अलकराज पुरुष सिंगल्स में नहीं खेलेंगे और भारत की पूर्व टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा का कहना है कि अलकराज के नहीं होने पर नोवाक जोकोविक के पास खिताब जीतने का अच्छा मौका है। सानिया ने जोकोविक की जीत की संभावनाओं पर सानिया ने कहा कि कार्लोस अलकराज की गैरमौजूदगी से उनकी संभावनाएं बढ़ जाती हैं। अभी वह ज्यादातर हार सिर्फ जानिक सिनर और अलकराज से ही खाते हैं। 38-39 साल की उम्र में भी उनका शीर्ष स्तर पर बने रहना अविश्वसनीय है। सिनर इस समय दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं, लेकिन नोवाक अब भी शीर्ष तीन खिलाड़ियों में हैं। उन्होंने हमेशा लोगों, उम्र और सीमाओं को गलत साबित किया है। इसलिए उन्हें कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। तीन बार की डबल्स ग्रैंडस्लैम चैंपियन सानिया मिर्जा ने फ्रेंच ओपन में भारतीय खिलाड़ियों की चुनौतियों को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। सानिया ने कहा कि मुझे लगता है कि क्ले कोर्ट पर हमारा खेल हार्ड कोर्ट या ग्रास कोर्ट जितना मजबूत नहीं है। इसलिए यह मुश्किल जरूर होता है। क्ले कोर्ट पर ज्यादा शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है। हालांकि, युकी भांबरी जैसे खिलाड़ी बहुत अच्छी रिटर्न करते हैं। इसलिए शायद क्ले कोर्ट उनके लिए मददगार साबित हो सकता है। लेकिन यह कहना मुश्किल है कि यह उनकी पसंदीदा सतह है या नहीं। कुल मिलाकर, क्ले कोर्ट पर खेलना काफी चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा सानिया ने क्वालीफायर में भारतीय खिलाड़ी करमन कौर थांडी की वापसी को सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि करमन ने अपनी प्रोटेक्टेड रैंकिंग के जरिए वापसी की है, जो इस बात का प्रमाण है कि चोट लगने से पहले वह अच्छे स्तर पर खेल रही थीं। सानिया ने कहा कि लगभग दो साल बाद कोर्ट पर लौटने वाले खिलाड़ी का तुरंत आंकलन करना सही नहीं होगा। सानिया ने कहा कि इंजरी से वापसी में मानसिक मजबूती सबसे अहम होती है, क्योंकि खिलाड़ी के मन में फिटनेस, प्रदर्शन और दोबारा चोट लगने जैसे कई सवाल चलते रहते हैं।

भाजयुमो संगठन में बड़ा फेरबदल: प्रदेशभर के जिलों और वर्गों को मिला प्रतिनिधित्व

जयपुर राजस्थान बीजेपी युवा मोर्चा की नई कार्यकारिणी घोषित कर दी गई है. भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष शंकर गोरा ने लिस्ट 63 पदाधिकारियों की लिस्ट जारी की. इसमें 7 प्रदेश उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री, 9 मंत्री, 1-1 कोषाध्यक्ष, मीडिया प्रभारी, सोशल मीडिया प्रभारी, आईटी संयोजक, प्रशिक्षण प्रभारी और 20 प्रदेश प्रवक्ता बनाए गए हैं. कार्यकारिणी में प्रदेशभर के विभिन्न जिलों और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है. लंबे वक्त से इस पर मंथन जारी थी, जिसे लेकर कार्यकर्ताओं को भी इंतजार था.   निकाय-पंचायत चुनाव की तैयारियों के लिहाज से अहम संगठन ने आगामी राजनीतिक गतिविधियों को भी ध्यान में रखा है. माना जा रहा है कि निकाय-पंचायत चुनाव के मद्देनजर भी लिस्ट पर अंतिम मुहर लगी है. जितेन्द्र सिंह राठौड़, दीनदयाल गुर्जर, राकेश कटारिया, शिवराज सिंह, राकेश पंवार, सुदर्शन गौतम, आशीष कुल्हरी उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं. वहीं, ऋषिकेश मीणा, लोकेन्द्र सिंह, आदित्य पुजारी को महामंत्री बनाया गया है. हर्ष शर्मा कार्यालय प्रभारी, 9 प्रदेश मंत्री नियुक्त प्रदेश मंत्री पद पर धीरज शर्मा, रघुनाथ बिश्नोई, राहुल लेघा, रमेश गुर्जर, कृष्णपाल सिंह चूंडावत, दिनेश राणा, दिव्यांश भारद्वाज, वीके कुशवाह और आदित्य सिंघानिया को नियुक्त किया गया है. जिज्ञासु जैन को प्रदेश कोषाध्यक्ष और राहुल देवड़ा को सह कोषाध्यक्ष बनाया है.  भरतपुर के हर्ष शर्मा को कार्यालय प्रभारी, अमित कुमावत और आशीष शर्मा को भी कार्यालय सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है. मीडिया प्रभारी हर्षित को बनाया गया है. मन की बात और ट्रेनिंग के लिए भी दिया जिम्मा खास बात यह है कि कार्यकारिणी में प्रशिक्षण, नीति एवं शोध, मन की बात जैसे कई कार्यक्रमों के प्रभारी भी बनाए गए हैं. सदस्यता अभियान, बूथ स्तर तक संगठन विस्तार, सोशल मीडिया कैंपेन और युवा संपर्क कार्यक्रमों को गति देने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है.

मेरठ की धाविका पारुल चौधरी का बड़ा लक्ष्य, ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में चमकने की तैयारी

 नई दिल्ली  भारत की लंबी दूरी की धाविका पारुल चौधरी अब केवल एशियाई स्तर की खिलाड़ी नहीं रह गई हैं। पिछले एक साल में उन्होंने डायमंड लीग जैसी विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं में नियमित भाग लेकर खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया है। पारुल का मानना है कि दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है और इससे उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है। मेरठ की 31 वर्षीय एथलीट 2022 एशियाई खेलों में 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण और 3000 मीटर स्टीपलचेज (बाधा दौड़) में रजत पदक जीत चुकी हैं। वहीं पिछले साल गुमी में हुई एशियाई चैंपियनशिप में पारुल ने दोनों स्पर्धाओं में रजत पदक जीता था। पारुल ने बताया अपना लक्ष्य पारुल का लक्ष्य अब इस साल जुलाई में होने वाले ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पदक जीतना है। पारुल ने दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में कहा कि पहले भारतीय एथलीटों को विदेशों में खेलने के ज्यादा अवसर नहीं मिलते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह 2016 से राष्ट्रीय कैंप का हिस्सा थीं, लेकिन उन्हें पहली बार 2022 में विदेश में प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिला। अब युवा खिलाड़ियों को लगातार अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर मिल रहा है, जिसका फायदा भारतीय एथलेटिक्स को मिल रहा है। भारतीय ट्रैक एंड फील्ड में अब तक स्पिरंट और फील्ड इवेंट के खिलाड़ियों को ज्यादा पहचान मिली है, लेकिन पारुल ने लंबी दूरी की दौड़ में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार खेलने से खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन को समझने और सुधारने का मौका मिलता है। पदक जीतना सबसे बड़ा लक्ष्य लंबी दूरी की दौड़ के अंतिम चरण को सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। पारुल के अनुसार अंतिम एक किलोमीटर में खुद को मजबूत बनाए रखना बेहद अहम होता है और इसके लिए कोच विशेष ट्रेनिंग और रणनीति तैयार करते हैं। पारुल ने बताया कि बेंगलुरु में ट्रेनिंग के दौरान खिलाड़ियों को स्पो‌र्ट्स साइंस, रिकवरी मॉनिटरिंग और फिटनेस से जुड़ी सभी आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे प्रदर्शन में लगातार सुधार हो रहा है। हाल ही में राष्ट्रमंडल खेलों की क्वालीफाइंग टाइमिंग की बराबरी करने वाली पारुल ने कहा कि अगर उन्हें क्वालिफाई करने का मौका मिलता है तो उनका लक्ष्य वहां भारत के लिए शानदार प्रदर्शन करना होगा। फिलहाल उनका पूरा फोकस निरंतर सुधार और बड़े मंच पर देश के लिए पदक जीतने पर है।

फर्जी शादियों पर सख्ती, कनाडा ने बदले स्पाउस वीजा के नियम

चंडीगढ़  कनाडा सरकार ने स्पाउस ओपन वर्क परमिट नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। नए नियम लागू होने पर फर्जी और कॉन्ट्रैक्ट मैरिज के जरिए कनाडा पहुंचने वालों पर बड़ा असर पड़ सकता है।   प्रस्ताव के मुताबिक भारत से स्पाउस वीजा या वर्क परमिट के लिए आवेदन करने वाले पति या पत्नी को अंग्रेजी भाषा दक्षता साबित करने के लिए आईलेट्स या अन्य मान्यता प्राप्त लैंग्वेज टेस्ट पास करना अनिवार्य हो सकता है। अब तक यदि मुख्य आवेदक कनाडा में पढ़ाई या नौकरी कर रहा होता था तो भारत में बैठे उसके जीवनसाथी को भाषा परीक्षा नहीं देनी पड़ती थी। इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में लोग काॅन्ट्रैक्ट विवाह के जरिए कनाडा पहुंच रहे थे। कई मामलों में स्पाउस पढ़ा-लिखा भी नहीं होता था। प्रस्ताव के अनुसार अब केवल उन्हीं स्टूडेंट्स के जीवनसाथियों को स्पाउस ओपन वर्क परमिट मिलेगा जो मास्टर्स, पीएचडी, मेडिकल, इंजीनियरिंग या अन्य हाई-स्किल प्रोफेशनल कोर्स कर रहे होंगे। सामान्य डिप्लोमा, सर्टिफिकेट या साधारण बैचलर डिग्री करने वाले छात्र अपने पार्टनर को नहीं बुला सकेंगे। सात तक हो सकता है सीएलबी स्कोर कनाडा में नौकरी कर रहे लोग भी तभी अपने जीवनसाथी को बुला पाएंगे जब वे हेल्थकेयर, आईटी या अन्य हाई-स्किल श्रेणी की नौकरियों में कार्यरत हों और उनके वर्क परमिट में कम से कम 16 महीने की वैधता बची हो। प्रस्तावित नियमों के तहत सामान्य नौकरियों के लिए सीएलबी 5 और स्किल्ड जॉब्स के लिए सीएलबी 7 स्कोर जरूरी हो सकता है। कनाडा के इमिग्रेशन मंत्री मार्क मिलिर का कहना है कि भाषा कौशल की कमी के कारण कई प्रवासी अच्छे रोजगार नहीं पा पाते और उनके शोषण का खतरा बढ़ जाता है। सरकार का मानना है कि नए नियम कार्यस्थल की सुरक्षा बढ़ाने और फर्जी विवाहों पर रोक लगाने में मदद करेंगे। विज्ञापन देकर ढूंढते हैं पढ़ी-लिखी लड़की पंजाब में विदेश जाने की चाहत ने कॉन्ट्रैक्ट मैरिज का बड़ा कारोबार खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया और मैरिज ग्रुपों में अक्सर 6 बैंड वाली लड़की चाहिए जैसे विज्ञापन दिखाई देते हैं। इसमें ऐसे परिवार शामिल होते हैं जिनके पास पैसा तो होता है लेकिन बेटा आईलेट्स पास नहीं कर पाता। दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन अच्छे बैंड वाली लड़कियों को कनाडा भेजने के बदले लाखों रुपये का सौदा किया जाता है। बाद में कई मामले धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग और विवाद तक पहुंच जाते हैं। वीजा विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियम लागू होने के बाद फर्जी शादियों के जरिए कनाडा पहुंचने का रास्ता काफी मुश्किल हो जाएगा।  

कंगना रनौत का वायरल वीडियो विवाद: मंगलसूत्र और चूड़ियों पर खुद दी सफाई

कंगना रनौत हरी-चूड़ी और मंगलसूत्र वाला वीडियो काफी वायरल हुआ। इस पर लोगों ने तरह-तरह के कयास लगाए। अब कंगना ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके बताया है कि उनके इस गेटअप के पीछे क्या राज था। उन्होंने लिखा है कि वह शूट कर रही हैं और किसी ने उन्हें कैमरे में कैप्चर कर लिया। कंगना ने लिखा है कि इस लुक में क्या ही बड़ी बात है। क्लिप्स वायरल होने के बाद उनको लोगों के फोन आने लगे हैं। नहीं करूंगी चुपचाप शादी कंगना रनौत ने अपने मंगलसूत्र और चूड़ी वाले लुक पर उठ रहे सवालों वाला एक न्यूज आर्टिकल शेयर किया है। इसमें लिखा है कि कंगना रनौत ने गुपचुप कर ली शादी? गले में मंगलसूत्र, हाथों में हरी चूड़ियां पहने दिखीं। इस पर कंगना ने लिखा है, ‘मैं हर दिन शूट कर रही हूं। किसी ने ये रैंडम फोटो खींच ली जिसमें मैं कैरेक्टर मेकअप में थी, अब मुझे बहुत से फोन कॉल्स आ रहे हैं। पर किसी शादीशुदा महिला के लुक में क्या बड़ी बात है। एक्टर्स हर तरह के रोल करते हैं, मैं वादा करती हूं, चुपचाप शादी नहीं करूंगी।’ चैलेंजिंग लाइफ को बताया अच्छा एक और पोस्ट में कंगना ने लिखा है, 'न्यूज एंकर्स एसी स्टूडियोज से बाहर की हीट वेब और टेम्परेचर की शिकायत कर रहे हैं, हम जैसे लोगों का क्या जो आउटडोर शूटिंग कर रहे हैं, इतनी सारी लाइट्स, बंद जगहें, हाहा शिकायतें करना बंद कीजिए दोस्तों, जिंदगी जब तक चैलेंजिंग है, तब तक ही अच्छी है, अगर आसान और प्रिडिक्टिबल तरह से आप जीवित फील करते हैं तो यह मौत के बराबर है, हैपी समर।' वायरल वीडियो में क्या था कंगना का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें उन्होंने पीच कलर का सलवार सूट पहना था। वह बिंदी लगाए थीं, मांग भरे थीं, गले में मंगलसूत्र और उनके हाथों में हरी चूड़ियां थीं। उनको इस गेटअप में देखकर लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे थे। कई लोगों ने लिखा था कि कंगना को पता था कि बाहर कैमरा है, जानबूझकर ही वह ऐसे बाहर आई हैं। वो लकी इंसान कौन है जिससे उन्होंने शादी की। कुछ लोगों को लग रहा था कि कंगना ने फैशन में मंगलसूत्र पहना है। कुछ का ध्यान उनकी हरी चूड़ियों पर था। वहीं कुछ लोग यह भी लिख रहे थे कि वह शूट के लिए ऐसे तैयार हुई हैं। कंगना के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स कंगना की अपकमिंग फिल्मों की बात करें तो उनकी फिल्म भारत भाग्य विधाता जून में रिलीज होनी है। वहीं क्वीन 2 की शूटिंग हो रही है। इसकी रिलीज डेट अभी ऑफिशियल नहीं हुई।

पंजाब चुनाव आयोग और ECI आमने-सामने, EVM प्रशिक्षण को लेकर बढ़ा विवाद

चंडीगढ़  पंजाब में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों से पांच दिन पहले ईवीएम बनाम बैलेट पेपर विवाद तेज हो गया है। भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और पंजाब राज्य चुनाव आयोग अब इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। वीरवार को सुनवाई के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग ने पंजाब सरकार के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईवीएम की ट्रेनिंग और तैयारी के लिए 15 दिन का समय चाहिए। ईसीआई ने अदालत में कहा कि इसके लिए 15 मिनट पर्याप्त हैं। सुनवाई के दौरान ईसीआई ने बताया कि चुनाव के लिए मांगी गई ईवीएम मशीनें राजस्थान से पंजाब के लिए रवाना कर दी गई हैं। मशीनों की कमी का मुद्दा अब नहीं रहा। आयोग ने कहा कि मशीनों की कमीशनिंग और अन्य तकनीकी प्रक्रिया एक दिन में पूरी की जा सकती है। राजस्थान से सीधे पंजाब भेजी जा रहीं ईवीएम ईसीआई ने अदालत को बताया कि 20 मई को पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गए पत्र के बाद सभी तकनीकी आशंकाएं दूर हो चुकी हैं। पंजाब की ओर से मशीनें खुद उठाने में अनिच्छा जताने के बाद राजस्थान से मशीनें सीधे पंजाब भेजी जा रही हैं। आयोग ने कहा कि मशीनें फिलहाल ट्रांजिट में हैं और अब केवल यह तय करना बाकी है कि उन्हें किस स्थान पर पहुंचाना है तथा रिसीव करने के लिए कौन अधिकारी अधिकृत होगा। आयोग ने यह भी कहा कि मशीनों को मोहाली तक पहुंचाने और फर्स्ट लेवल चेकिंग तथा कमीशनिंग प्रक्रिया में पूरा सहयोग दिया जाएगा। इससे पहले पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग अदालत में कह चुका है कि मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद उनकी जांच, तैयारी और तैनाती में 15 से 18 दिन लगेंगे। इसी आधार पर 27 मई को होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने का फैसला लिया गया था। याचिका में बैलेट पेपर से चुनाव कराने के फैसले को चुनौती दी गई है। पंजाब के महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी ने अदालत में कहा कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होता है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। 

ट्विशा केस में जांच तेज, आरोपी समर्थ की जमानत पर आज होगी सुनवाई

भोपाल  एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत की सीबीआई जांच होगी। मध्य प्रदेश सरकार ने इसके लिए सहमति दे दी है। 20 मई को जब ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा रिटायर्ड सैनिकों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने पहुंचे थे, तब उन्होंने इसका आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार परिवार की हर संभव मदद करेगी। अगर कोर्ट दोबारा पोस्टमॉर्टम के आदेश देता है, तो सरकार पार्थिव शरीर को दिल्ली AIIMS तक पहुंचाने की व्यवस्था भी करेगी। वहीं, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी मामले की जांच CBI से कराने की मांग उठाई थी। उधर, ट्विशा के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर आज हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में सुनवाई हो रही है। इस दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने केस डायरी पेश करने के लिए मोहलत की मांग की, तो अदालत ने सुनवाई 2.30 बजे तक स्थगित कर दी है। मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. सिंह की समर वेकेशन बेंच में हो रही है। ट्विशा के परिजन ने जमानत याचिका पर आपत्ति लगाई है। उसके पिता नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाए हैं कि समर्थ जुलाई 2023 से अगस्त 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार में लीगल एडवाइजर के तौर पर काम कर चुका है। वह फरारी के दौरान केस को प्रभावित कर रहा है। ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर कटारा हिल्स थाना प्रभारी सुनील दुबे को हटाने की मांग की है। गिरिबाला सिंह को भोपाल जिला अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण राज्य सरकार भी सक्रिय हो गई है। बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा, सेना के सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सहित कई पूर्व अधिकारियों ने मंत्रालय में मुलाकात कर न्याय की मांग की।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिजनों से मुलाकात के बाद कहा कि यदि परिवार चाहता है तो राज्य सरकार मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम कराने का निर्णय अदालत करेगी। यदि कोर्ट अनुमति देता है, तो राज्य सरकार शव को सुरक्षित दिल्ली एम्स पहुंचाने की व्यवस्था करेगी। इधर, ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल को पत्र लिखकर गिरिबाला सिंह को भोपाल जिला उपभोक्ता फोरम बेंच-2 के न्यायाधीश पद से हटाने की मांग की है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि गिरिबाला सिंह पर दहेज हत्या का गंभीर मामला दर्ज है। वर्तमान में वह जिला उपभोक्ता फोरम में न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं। उपभोक्ता फोरम में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है और नियमों के अनुसार कदाचार, गंभीर आरोप या किसी आपराधिक मामले में संलिप्तता सामने आने पर पद से हटाने का प्रावधान है। नवनिधि शर्मा ने राज्यपाल और राज्य सरकार से मांग की है कि दहेज हत्या के मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद गिरिबाला सिंह को तत्काल पद से हटाया जाए, ताकि उनकी बेटी को न्याय मिल सके। अदालत ने ट्विशा का शव सुरक्षित रखने को कहा उधर भोपाल की एक अदालत ने बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के शव को सुरक्षित रखने का आदेश दिया। ट्विशा ने पिछले हफ्ते अपने भोपाल स्थित अपने ससुराल में कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। हालांकि महिला के परिजनों ने इस मामले को संदिग्ध बताते हुए उसके ससुराल वालों पर बेटी की हत्या करने का शक जताया है। उनका आरोप था कि ट्विशा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर मारपीट के निशान मिले हैं, जो कि मामले को संदिग्ध बना रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने ट्विशा के दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनकी इस अर्जी को खारिज कर दिया। शव को सुरक्षित रखने वाली मोर्चरी का पता लगाने को कहा इस बारे में एक आदेश जारी करते हुए JMFC (न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी) अनुदिता गुप्ता ने कहा कि पुलिस को एक पत्र जारी किया जाए, जिसमें उसे निर्देश दिया जाए कि वे मध्यप्रदेश में शवों को सुरक्षित रखने की (-80 डिग्री सेल्सियस तापमान) व्यवस्था वाले मोर्चरी की तुरंत जानकारी प्राप्त करे और बिना किसी देरी के अदालत में इस संबंध में एक लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करें। भोपाल एम्स में है शव के खराब होने का खतरा दरअसल अदालत ने ऐसा निर्देश से इस वजह से जारी किया, क्योंकि इससे कुछ घंटे पहले ही भोपाल पुलिस ने ट्विशा शर्मा के परिवार से शव के खराब होने की आशंकाओं के मद्देनजर उसे कब्जे में लेने का अनुरोध किया था। पुलिस ने इसकी वजह AIIMS भोपाल में बहुत कम तापमान पर शव को सुरक्षित रखने की सुविधाओं की कमी के कारण शव के सड़ने की आशंका बताई थी। भोपाल एम्स में नहीं है -80 डिग्री के तापमान की सुविधा न पर सुरक्षित रखा गया है। जबकि शव को खराब होने से रोकने के लिए शून्य से 80 डिग्री सेल्सियस (-80 डिग्री) नीचे का तापमान चाहिए और यह सुविधा एम्स भोपाल में नहीं है। ट्विशा के परिजनों को भोपाल में न्याय मिलने की उम्मीद नहीं बता दें कि ट्विशा 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स इलाके स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। इसके बाद पुलिस ने महिला के परिजनों की शिकायत पर मृतका के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु तथा प्रताड़ना का मामला दर्ज किया था। मृतका की सास गिरिबाला सिंह सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं और ट्विशा के परिजनों ने इसी कारणवश उन्होंने भोपाल में बेटी को न्याय नहीं मिलने की आशंका जताई है। अबतक नहीं हुआ है ट्विशा का अंतिम संस्कार इससे पहले एम्स भोपाल की प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शव पर कई चोटों के निशान होने के बारे में बताया गया था, इसी आधार पर मृतका के परिजन बेटी की हत्या होने की आशंका जता रहे हैं। साथ ही मृतका के परिजनों का यह भी आरोप है कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि जिस बेल्ट से ट्विशा के फांसी लगाने की बात कही गई, उसे जांच अधिकारी समय पर एम्स नहीं ले गए, जिसके कारण डॉक्टर उस बेल्ट और गर्दन के निशानों का वैज्ञानिक परीक्षण नहीं कर सके। इसके अलावा परिजनों ने … Read more

चाणक्य नीति: इन 7 जगहों पर कदम रखा तो हो सकती है जीवन में बड़ी मुसीबत

 आचार्य चाणक्य के मुताबिक, समझदार वही है जो मुसीबत को दूर से ही भांप ले. लेकिन सवाल ये है कि जब आपकी अपनी चाहत, आपका अपना लालच ही आपका दुश्मन बन जाए, तब क्या होगा? जब किसी की मीठी-मीठी बातें आपको अंधा कर दें, जब आपकी आंखों पर माया का पर्दा पड़ जाए और आप सही-गलत में फर्क ही न कर पाएं, तब कौन आपको बचाएगा? आज हम उन 7 खतरनाक जगहों के बारे में बात करेंगे, जहां कदम रखना मतलब खुद अपनी बर्बादी को बुलाना है. 1. जलनखोर व्यक्ति का घर वो इंसान जो दिल में जलन लिए बैठा हो, उससे दूर रहना ही समझदारी है. वो आपको अपने घर बुलाता है, लेकिन उसका मकसद आपको छोटा दिखाना और आपकी कमजोरियां तलाशना होता है. चाणक्य कहते हैं कि दुश्मन की मीठी बातों पर कभी भरोसा मत करो. सांप अपनी केंचुली बदल सकता है, लेकिन जहर नहीं. 2. वो जगह जहां आपकी बेइज्जती होती हो जहां आपको बार-बार नीचा या जलील किया जाए, नजरअंदाज किया जाए, वहां एकदम जाना बंद कर दें. बेइज्जती एक धीमा जहर है, जो धीरे-धीरे आत्मसम्मान को अंदर से खत्म कर देता है. चाणक्य नीति का स्पष्ट संदेश है कि इज्जत के बिना जीने से अच्छा दूर रहना है. 3. जहां आपकी मदद की कोई कद्र न हो ऐसे रिश्ते जहां आप मदद करते रहते हैं, लेकिन बदले में आपको कुछ नहीं मिलता, वो रिश्ते नहीं, बोझ होते हैं. चाणक्य कहते हैं कि कुएं में पत्थर फेंकने से पानी मीठा नहीं होता. अपनी ऊर्जा वहीं लगाओ जहां उसकी कद्र हो. 4. दो ताकतवर लोगों की लड़ाई के बीच आना जब दो बड़े लोग या शक्तियां आपस में भिड़ जाए तो बीच में नहीं पड़ना चाहिए. जैसे हाथियों की लड़ाई में घास कुचल जाती है, वैसे ही बीच का इंसान बर्बाद होता है. तटस्थ रहना ही सबसे बड़ी समझदारी है. 5. जहां आपको झूठ का हिस्सा बनना पड़े चाहे दोस्त हो, बॉस हो या रिश्तेदार, अगर आपसे झूठ बुलवाया जा रहा है, तो तुरंत दूरी बना लें. एक झूठ सौ झूठों को जन्म देता है. चाणक्य कहते हैं कि सच मुश्किल जरूर है, लेकिन अंत में सम्मान देता है. 6. जुआ और शराब का अड्डा ये वो जगह है जो शुरुआत में मजा देती है, लेकिन अंत में सब कुछ छीन लेती है जैसे पैसा, इज्जत, परिवार और मानसिक शांति. ये सिर्फ आदत नहीं, जिंदगी को बर्बाद करने का जरिया है. जो अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण नहीं रख सकता, वो कभी सफल नहीं हो सकता है. 7. पराई स्त्री या पुरुष के साथ गलत नीयत से एकांत पराई स्त्री या पुरुष पर नजर डालना एक गलती नहीं बल्कि पूरी जिंदगी की बर्बादी बन सकता है. चरित्र गिर जाए तो सब कुछ खराब हो जाता है. यह एक दाग ऐसा होता है जो कभी नहीं मिटता है. चाणक्य के अनुसार, पराई स्त्री को माता और पराए पुरुष को भाई समान समझना चाहिए.

शादी से लौटते वक्त गायब हुआ परिवार, 26 साल बाद नहर से मिला वैन का मलबा

रूपनगर  पंजाब के रूपनगर जिले में भाखड़ा नहर के पानी ने 26 साल पुराने एक गहरे जख्म को हरा कर दिया है. अक्टूबर 2000 में एक शादी समारोह से लौटते समय लापता हुई मारुति ओमनी वैन को स्थानीय गोताखोरों की मदद से बाहर निकाल लिया गया है. 32 फुट गहरे पानी में दफन यह गाड़ी अपने साथ उस परिवार की आखिरी निशानियां भी लेकर बाहर आई है, जो दो दशक पहले अचानक गायब हो गया था।  दरअसल, बीते दिनों गोताखोर कमलप्रीत सैनी नक्कियां गांव के पास एक अन्य शव की तलाश में नहर में उतरे थे. इसी दौरान उनकी नजर पानी के नीचे दबे लोहे के एक ढांचे पर पड़ी।  लंबे समय तक पानी में रहने के कारण वैन की छत और पिछला हिस्सा पूरी तरह गल चुका था. सिर्फ आगे का कुछ हिस्सा ही सुरक्षित बचा था। वैन के अगले हिस्से की तलाशी लेने पर सैनी को कुछ इंसानी कंकाल और एक बच्चे की छोटी सी शर्ट मिली. माना जा रहा है कि यह उस 8 साल के बच्चे की है जो इस हादसे का शिकार हुआ था।  परिजनों ने हार नहीं मानी। खेत बिके, पैसे खर्च हुए, प्राइवेट गोताखोर लगाए गए, नहरें खंगाली गईं, लेकिन हर कोशिश खाली हाथ लौटती रही। धीरे-धीरे वक्त बीतता गया और लोगों ने इसे एक ऐसी गुमशुदगी मान लिया, जिसका सच शायद कभी सामने नहीं आएगा। लेकिन किसे पता था कि 26 साल बाद पानी की गहराई ऐसा राज उगल देगी, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया। यह कहानी साल 2000 की है, जब कोटला गांव निवासी मुन्नी लाल, तेज राम, सुरजीत सिंह और सुरजीत का 8 साल का बेटा कालू एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। वे तेज राम की उसी वैन में सवार थे, जिसे उन्होंने हादसे से करीब एक महीना पहले ही जमीन बेचकर खरीदा था। लेकिन उस रात चारों कभी घर नहीं पहुंचे। परिवार ने तलाश शुरू की, पुलिस से लेकर निजी स्तर तक हर कोशिश की गई, मगर गाड़ी और लोगों का कोई सुराग नहीं मिला। फिर कल एक दूसरे मामले में गोताखोर भाखड़ा नहर में उतरे। तलाशी के दौरान नहर की गहराई में उन्हें एक पुरानी वैन दिखाई दी। जैसे ही वैन को बाहर निकाला गया, सबकी सांसें थम गईं। अंदर से कंकाल, यूनिफॉर्म और कई पुराने सामान मिले। इसके बाद एक-एक कड़ी जुड़ती चली गई और सामने आया कि यह वही वैन थी, जो 26 साल पहले रहस्यमयी तरीके से गायब हुई थी। प्रारंभिक अनुमान है कि अंधेरे में लौटते समय वैन अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई होगी और अंदर बैठे चारों लोग बाहर नहीं निकल सके। पानी की तेज धारा और गहराई के कारण वाहन कभी नजर ही नहीं आया। जिस परिवार ने वर्षों तक अपने लोगों के लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ी, उन्हें अब 26 साल बाद ऐसा सच मिला जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। गांव में इस खुलासे के बाद हर कोई स्तब्ध है और लोग इसे “26 साल बाद पानी से निकला दर्दनाक सच” कह रहे हैं। अक्टूबर 2000 की वो मनहूस रात  घटना कोटला गांव के एक परिवार से जुड़ी है. साल 2000 में तीन पुरुष और एक 8 साल का बच्चा शादी से लौट रहे थे, तभी उनकी वैन बेकाबू होकर भाखड़ा नहर में जा गिरी।  सर्च ऑपरेशन फेल हुआ  उस समय पेशेवर गोताखोरों ने महीनों तक नहर की खाक छानी थी, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि न तो गाड़ी मिली और न ही शव।  परिजनों का अनुरोध अब गोताखोर सैनी ने जब कोटला गांव के पीड़ित परिवार से संपर्क किया, तो उन्होंने नम आंखों से गाड़ी बाहर निकालने का अनुरोध किया. ट्रैक्टरों और स्थानीय लोगों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद मलबे को बाहर खींचा गया।  अंतिम विदाई: प्रार्थना सभा के साथ दी गई शांति दशकों के इंतजार के बाद जब अपनों की निशानियां और अस्थियां मिलीं, तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई।  गोताखोर कमलप्रीत सैनी ने बताया, "नहर की तलहटी में बहाव बहुत तेज था, वैन को बाहर निकालना नामुमकिन-सा काम था, लेकिन परिवार की भावनाओं के लिए हमने यह जोखिम उठाया।  मंगलवार को कीरतपुर साहिब में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई. 26 साल बाद परिवार को यह संतोष मिला कि अब उनके प्रियजनों का अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन धार्मिक रीति-रिवाजों से हो सकेगा। 

सांपों से बचाव में मदद करेगा ‘Big 4 Mapper’ ऐप: खतरे वाले इलाकों की मिलेगी जानकारी

सांपों के खतरे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अब एक खास मोबाइल ऐप मददगार साबित हो सकता है. Big 4 Mapper नाम का यह ऐप लोगों को सांपों से जुड़े खतरे को समझने और उससे बचने में मदद करता है. यह ऐप खास तौर पर उन जगहों के लिए यूजफुल है जहां सांपों का खतरा ज्यादा रहता है, जैसे गांव, खेत या जंगल के पास के इलाके. इस ऐप का मकसद लोगों को यह जानकारी देना है कि उनके आसपास किस तरह के सांप पाए जाते हैं और किन जगहों पर सांप देखे गए हैं. इससे लोग पहले से सतर्क हो सकते हैं और ऐसे इलाकों से बच सकते हैं. मैप के जरिए मिलती है सांप की लोकेशन इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मैप के जरिए सांपों की लोकेशन दिखाई जाती है. यानी अगर किसी इलाके में पहले सांप देखा गया है, तो उसकी जानकारी यहां दर्ज रहती है. इससे यूजर को अंदाजा हो जाता है कि कौन-सी जगह ज्यादा जोखिम वाली है. यह फीचर खास तौर पर रात के समय या खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए काफी उपयोगी हो सकता है. सांप कितना जहरीला है ये भी बताएगा ऐप इसके अलावा यह ऐप सांपों की पहचान में भी मदद करता है. कई बार लोग यह समझ नहीं पाते कि सामने दिख रहा सांप जहरीला है या नहीं. ऐसे में यह ऐप अलग-अलग सांपों की जानकारी और तस्वीरों के जरिए यूजर को समझने में मदद करता है. इससे घबराहट कम होती है और सही फैसला लेने में आसानी होती है. ऐप में सांप के काटने की स्थिति में क्या करना चाहिए, इसकी भी जानकारी दी गई है. इसमें आसान भाषा में बताया गया है कि तुरंत कौन-से कदम उठाने चाहिए और क्या गलती नहीं करनी चाहिए. यह जानकारी कई बार जान बचाने में अहम रोल निभा सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां तुरंत अस्पताल पहुंचना मुश्किल होता है. भारत के चार जहरीले सांपों पर फोकस करता है ये ऐप इस ऐप की सबसे खास बात यह है कि यह Big 4 यानी भारत के चार सबसे खतरनाक जहरीले सांपों पर फोकस करता है. इनमें कोबरा, करैत, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं. यही वो सांप हैं जिनकी वजह से देश में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं. ऐप इन सांपों के बारे में आसान तरीके से जानकारी देता है, ताकि आम लोग भी उन्हें पहचान सकें. SERPENT ऐप में मैपिंग फीचर भी दिया गया है, जिससे यूजर यह देख सकते हैं कि उनके आसपास किन इलाकों में सांप देखे गए हैं या कहां ज्यादा खतरा है. यह फीचर खास तौर पर उन लोगों के लिए जरूरी है जो खेतों में काम करते हैं या रात में बाहर निकलते हैं. इससे लोग पहले से सावधान रह सकते हैं और जोखिम वाली जगहों से बच सकते हैं.  कई बार लोग डर के कारण गलत इलाज करने लगते हैं, जिससे स्थिति और खराब हो जाती है. यह ऐप बताता है कि ऐसे समय में शांत रहना, तुरंत अस्पताल पहुंचना और सही फर्स्ट एड क्या है. SERPENT ऐप सिर्फ एक जानकारी देने वाला प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह एक सेफ्टी टूल की तरह काम करता है. खासकर उन लोगों के लिए जो सांपों के खतरे वाले इलाकों में रहते हैं, यह ऐप जान बचाने में भी मदद कर सकता है. इस तरह के ऐप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह जागरूकता बढ़ाता है. भारत जैसे देश में हर साल कई लोग सांप के काटने की वजह से प्रभावित होते हैं. ऐसे में अगर लोगों को पहले से सही जानकारी मिल जाए और वे सतर्क रहें, तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.