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राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस जांच में अंधविश्वास पर जताई नाराजगी, अफसर बदला

नागौर  आज के आधुनिक दौर में भी क्या पुलिस किसी चोर को पकड़ने के लिए तांत्रिकों और अंधविश्वास का सहारा ले सकती है? आपका जवाब होगा- बिल्कुल नहीं. लेकिन राजस्थान के नागौर जिले में ऐसा ही एक हैरान करने वाला वाकया सामने आया है. यहां चोरी की वारदात को सुलझाने के लिए पुलिस खुद पीड़ित परिवार को लेकर एक तांत्रिक (भोपी) के पास पहुंच गई और उसके इशारे पर जांच भी शुरू कर दी. इस मामले पर अब राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा है कि देश का कानून अंधविश्वास से नहीं चलता और जांच केवल वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए. क्या है यह पूरा मामला? यह अजीबो-गरीब मामला नागौर जिले के श्री बालाजी थाने का है. याचिकाकर्ता खेमी देवी ने जोधपुर हाईकोर्ट में जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी. खेमी देवी ने बताया कि इसी साल 7 मार्च 2026 को उनके घर में एक बड़ी चोरी हुई थी, जिसमें चोरों ने घर में रखे सोने-चांदी के गहने और मोटी नकदी साफ कर दी थी. पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन जांच का जिम्मा जिस हेड कांस्टेबल रतिराम को सौंपा गया, उनके काम करने का तरीका बड़ा अनोखा था. जब सबूत नहीं मिले, तो 'भोपी' के दरबार में ले गई पुलिस याचिका में पुलिस पर आरोप लगाया गया है कि जब काफी दिनों तक चोरी का कोई सुराग नहीं लगा, तो जांच अधिकारी रतिराम ने खुद पीड़ित महिला और गांव के कुछ लोगों को एक तरकीब सुझाई. उन्होंने कहा कि अलवर में एक बैठती है, जो सब सच बता देती है. हद तो तब हो गई जब हेड कांस्टेबल खुद इन लोगों को लेकर अलवर पहुंच गया. वहां उस भोपी ने बिना किसी सबूत के परिवादिया की बहू के पिता मोहनराम का नाम ले दिया और कहा कि चोरी इसी ने की है. इसके बाद पुलिस ने असली चोर को ढूंढने के बजाय मोहनराम को ही आरोपी मानकर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. कोर्ट में सरकारी वकील ने भी माना सच खेमी देवी की तरफ से पैरवी कर रहे वकील मनोहर सिंह राठौड़ ने हाईकोर्ट को बताया कि भारतीय कानून में कहीं भी किसी तांत्रिक या भोपी के कहने पर जांच आगे बढ़ाने का कोई नियम नहीं है. हैरान करने वाली बात तब हुई, जब कोर्ट रूम में मौजूद सरकारी वकील ने भी इस बात को स्वीकार किया कि हां, जांच अधिकारी सचमुच अलवर में उस भोपी के ठिकाने पर गया था. हाईकोर्ट ने बदल दिया जांच अफसर इस पूरे अंधविश्वास के खेल को सुनकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने माना कि इस तरीके से कभी भी निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती. जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की कोर्ट ने नागौर के पुलिस अधीक्षक को तुरंत आदेश जारी किया है कि इस मामले की जांच वर्तमान हेड कांस्टेबल से तुरंत वापस ली जाए. इस केस की डायरी को श्री बालाजी थाने से हटाकर किसी दूसरे थाने में ट्रांसफर किया जाए. अब इस चोरी के मामले की जांच किसी सब इंस्पेक्टर लेवल के अधिकारी से करवाई जाए, जो अगले 15 दिनों में अपनी जांच शुरू करे.

डिजिटल ट्रांसफर सिस्टम लागू, 6884 पुलिसकर्मियों को मिली मनपसंद पोस्टिंग

 करनाल  हरियाणा पुलिस में पहली बार बिना किसी सिफारिश के 6884 सिपाहियों जनरल ड्यूटी (महिला व पुरुष) के आनलाइन तबादले किए गए हैंं। इनमें 5098 पुरुष जवान शामिल हैं और 1786 महिला सिपाही शामिल हैं। खास बात ये है कि सिपाहियों द्वारा पोर्टल पर आनलाइन भरे गए विकल्पों के तहत ही मैरिट के आधार पर जवानों को मनपसंद स्टेशन अलाट किए गए हैं। आनलाइन तबादला प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का मानवीय दखल नहीं दिया गया है, बल्कि पूरा काम आनलाइन ही साफ्टवेयर के माध्यम से हुआ है। पुलिस मुख्यालय की ओर से मार्च माह में इसके लिए आवेदन मांगे गए थे। 2 मार्च से 20 मार्च के बीच जवानों से आनलाइन ही जिलों के विकल्प मांगे गए थे। इनमें पुलिस प्रशिक्षण पूरा कर चुके महिला व पुरुष सिपाहियों ने भाग लिया। अब पोर्टल पर भरे गए विकल्पों के आधार पर ही साफ्टवेयर के माध्यम से जवानों को जिले अलाट किए गए हैं। संबंधित जिलों में खाली सीटों के आधार पर जिले अलाट किए गए हैं। जवानों को जल्द रिलीव कराने के आदेश डीजीपी अजय सिंहल की ओर से सभी पुलिस आयुक्त, एसपी, डीसीपी, एचएपी के कमांडेंट समेत एडीजीपी और एचएपी के निदेशक समेत अन्य अधिकारियों को लिखित में आदेश दिए हैं कि तबादला किए गए जवानों को जल्द ही रिलीव किया जाए, ताकि वे अपने नए स्टेशनों पर ज्वाइन कर सकें। इससे पहले, पुलिस में नए जवानों को मनचाहे स्टेशन के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। पुलिस का बेसिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सिपाहियों को खाली सीटों के आधार पर स्टेशन अलाट किए जाते थे। ऐसे में काफी संख्या में जवानों को अपने पैतृक जिलों से 200 से 300 किलोमीटर तक दूरी के स्टेशन मिलते थे। इसके अलावा, खासतौर पर राजनीतिक लोगों की सिफारिशों के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारियों की सिफारिशों से तबादले होते थे।लेकिन एक साथ में तबादले पहली बार हैं। अगर तबादले होते भी थे तो वे बड़े छोटे स्तर पर होते थे। लेकिन जवानों को राहत देते हुए पुलिस मुख्यालय ने पहली बार ये बड़ा फैसला लिया है। इससे जवानों को बड़ी राहत मिली है और वे अपने पैतृक जिलों के आसपास पहुंच गए हैं। आइआरबी के जवान कर रहे लंबे समय से इंतजार इधर, आइआरबी के 2500 सरकार के आदेश होने के बावजूद तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी भी हो चुकी है और बकायदा नोटिफिकेशन भी हो चुका है, लेकिन अभी तक आइआरबी के जवानों को जिला पुलिस में तबादले की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इसको लेकर आरआरबी के जवान कई बार मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक से मिलकर मांग कर चुके हैं। गौर हो कि मनोहर लाल सरकार ने 2024 में फैसला लिया था कि आइआरबी में 15 साल पूरे कर चुके जवानों को जिला पुलिस में बदला जा सकेगा।

पुलिस विभाग में बड़ा बदलाव, हरियाणा में हजारों तबादले अब ऑनलाइन प्रक्रिया से

करनाल. हरियाणा पुलिस में पहली बार बिना किसी सिफारिश के 6884 सिपाहियों जनरल ड्यूटी (महिला व पुरुष) के आनलाइन तबादले किए गए हैंं। इनमें 5098 पुरुष जवान शामिल हैं और 1786 महिला सिपाही शामिल हैं। खास बात ये है कि सिपाहियों द्वारा पोर्टल पर आनलाइन भरे गए विकल्पों के तहत ही मैरिट के आधार पर जवानों को मनपसंद स्टेशन अलाट किए गए हैं। आनलाइन तबादला प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का मानवीय दखल नहीं दिया गया है, बल्कि पूरा काम आनलाइन ही साफ्टवेयर के माध्यम से हुआ है। पुलिस मुख्यालय की ओर से मार्च माह में इसके लिए आवेदन मांगे गए थे। 2 मार्च से 20 मार्च के बीच जवानों से आनलाइन ही जिलों के विकल्प मांगे गए थे। इनमें पुलिस प्रशिक्षण पूरा कर चुके महिला व पुरुष सिपाहियों ने भाग लिया। अब पोर्टल पर भरे गए विकल्पों के आधार पर ही साफ्टवेयर के माध्यम से जवानों को जिले अलाट किए गए हैं। संबंधित जिलों में खाली सीटों के आधार पर जिले अलाट किए गए हैं। जवानों को जल्द रिलीव कराने के आदेश डीजीपी अजय सिंहल की ओर से सभी पुलिस आयुक्त, एसपी, डीसीपी, एचएपी के कमांडेंट समेत एडीजीपी और एचएपी के निदेशक समेत अन्य अधिकारियों को लिखित में आदेश दिए हैं कि तबादला किए गए जवानों को जल्द ही रिलीव किया जाए, ताकि वे अपने नए स्टेशनों पर ज्वाइन कर सकें। इससे पहले, पुलिस में नए जवानों को मनचाहे स्टेशन के लिए मशक्कत करनी पड़ती थी। पुलिस का बेसिक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सिपाहियों को खाली सीटों के आधार पर स्टेशन अलाट किए जाते थे। ऐसे में काफी संख्या में जवानों को अपने पैतृक जिलों से 200 से 300 किलोमीटर तक दूरी के स्टेशन मिलते थे। इसके अलावा, खासतौर पर राजनीतिक लोगों की सिफारिशों के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारियों की सिफारिशों से तबादले होते थे।लेकिन एक साथ में तबादले पहली बार हैं। अगर तबादले होते भी थे तो वे बड़े छोटे स्तर पर होते थे। लेकिन जवानों को राहत देते हुए पुलिस मुख्यालय ने पहली बार ये बड़ा फैसला लिया है। इससे जवानों को बड़ी राहत मिली है और वे अपने पैतृक जिलों के आसपास पहुंच गए हैं। आइआरबी के जवान कर रहे लंबे समय से इंतजार इधर, आइआरबी के 2500 सरकार के आदेश होने के बावजूद तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंत्रिमंडल की मंजूरी भी हो चुकी है और बकायदा नोटिफिकेशन भी हो चुका है, लेकिन अभी तक आइआरबी के जवानों को जिला पुलिस में तबादले की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इसको लेकर आरआरबी के जवान कई बार मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक से मिलकर मांग कर चुके हैं। गौर हो कि मनोहर लाल सरकार ने 2024 में फैसला लिया था कि आइआरबी में 15 साल पूरे कर चुके जवानों को जिला पुलिस में बदला जा सकेगा।

निकाय चुनाव से पहले पंजाब में EVM विवाद तेज, अदालत पहुंचा मामला

चंडीगढ़. नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों से ठीक पांच दिन पहले पंजाब में ईवीएम बनाम बैलेट पेपर विवाद और तेज हो गया है। गुरुवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने स्पष्ट कहा कि चुनावों के लिए मांगी गई ईवीएम मशीनें राजस्थान से पंजाब के लिए पहले ही रवाना की जा चुकी हैं और मशीनों की कमी का मुद्दा अब शेष नहीं रहा। आयोग ने यह भी दावा किया कि मशीनों की कमीशनिंग और अन्य तकनीकी प्रक्रिया महज एक दिन में पूरी की जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष ईसीआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि 20 मई को पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे गए पत्र के बाद सभी आशंकाएं दूर हो चुकी हैं। अदालत को बताया गया कि पंजाब की ओर से मशीनें स्वयं उठाने में अनिच्छा जताए जाने के बाद राजस्थान से मशीनें सीधे पंजाब भेजी जा रही हैं। सुनवाई के दौरान ईसीआई के वकील ने कहा, “मशीनें रास्ते में हैं। इस समय भी वे ट्रांजिट में हैं।” मोहाली तक पहुंचेंगी मशीनें आयोग की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि अब केवल यह तय किया जाना बाकी है कि मशीनें किस स्थान पर पहुंचाई जानी हैं और उन्हें रिसीव करने के लिए कौन अधिकारी अधिकृत होगा। ईसीआई ने कहा कि मशीनों को मोहाली तक पहुंचाने की व्यवस्था भी आयोग स्वयं कर रहा है। साथ ही फर्स्ट लेवल चेकिंग और कमीशनिंग प्रक्रिया में भी पूरा सहयोग दिया जाएगा। यह दावा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग पहले अदालत में कह चुका है कि यदि मशीनें उपलब्ध भी हो जाएं, तब भी उनकी जांच, तैयारी और तैनाती में 15 से 18 दिन का समय लगेगा। इसी आधार पर आयोग ने 27 मई को होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने का फैसला लिया था। ईसीआई ने समय समीक्षाा पेश की मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें बैलेट पेपर से चुनाव कराने के फैसले को चुनौती दी गई है। एक दिन पहले ईसीआई ने अदालत में विस्तृत समय-सीमा पेश करते हुए दावा किया था कि देरी राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से हुई, न कि केंद्रीय निर्वाचन आयोग की ओर से। इसके बाद हाई कोर्ट ने पंजाब राज्य निर्वाचन आयोग को हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान पंजाब के महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी ने याचिका की सुनवाई पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत से याचिका की ग्राह्यता पर विचार करने का आग्रह किया।

BCCI चिंतित: रोहित शर्मा को फिटनेस टेस्ट पास करना होगा

 नई दिल्ली  भारत के दिग्गज सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा की फिटनेस को लेकर बड़ी समस्या सामने आ रही है। उनकी फिटनेस की वजह से वर्ल्ड कप 2027 में खेलना भी सवालों के घेरे में है। रोहित आईपीएल 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ मैच में चोटिल हुए थे और कुछ मुकाबले में नहीं खेल सके थे। इसके बाद वे इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में खेल रहे हैं, जिससे उनकी फिटनेस को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। रोहित को अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली 3 मैचों की वनडे सीरीज में जगह मिली है। उन्हें भारतीय टीम में चुना गया है लेकिन उनका खेलना पक्का नहीं है क्योंकि उन्हें पहले फिटनेस टेस्ट पास करना होगा। उनके लगातार चोटिल होने की वजह से वर्ल्ड कप 2027 में खेलने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भी शर्मा की फिटनेस को लेकर चिंतित है। रोहित शर्मा की फिटने से BCCI चिंतित टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा, रोहित उन तीन हफ्तों के लिए बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलें में नहीं आए। उनका शरीर पहले से पतला हुआ है लेकिन इस बात को लेकर चिंता है कि क्या वे 50 ओवर तक फील्डिंग कर सकते हैं। उन्हें 50 ओवर फील्डिंग करनी होगी क्योंकि आईपीएल की तरह यहां पर इम्पैक्ट प्लेयर का नियम नहीं होता है। जब आप 40 के करीब होते हैं, तो शरीर ठीक होने में समय लगता है। यशस्वी जायसवाल हो सकते हैं बैकअप ओपनर रोहित अगर पूरी तरह से फिट नहीं होते हैं, तो यशस्वी जायसवाल को मौका मिल सकता है। अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में ईशान किशन को इस वजह से चुना गया है ताकि वे सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभा सकें। हालांकि, अगर रोहित के विश्व कप में खेलने पर संशय हुआ, तो जायसवाल उनकी जगह पारी की शुरुआत कर सकते हैं। उन्हें बैकअप ओपनर के तौर पर चयनकर्ताओं ने तैयार करना शुरू भी कर दिया है। रोहित से खुश नहीं टीम मैनेजमेंट रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहित से टीम मैनेजमेंट खुश नहीं है। रोहित ने 2023 विश्व कप में आक्रामक अंदाज में शुरुआत की थी। वे पहली ही गेंद पर अटैक करने को देखते हैं। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने, जब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में बैटिंग की, तो उनकी बल्लेबाजी में वो आक्रामक रुख नहीं दिखा। उनके आक्रामक शैली नहीं अपनाने की वजह से मैनेजमेंट नाराज है।  

ट्रांसफर के खिलाफ जनपद में विरोध तेज, जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी

कोरबा/पोंडी उपरोड़ा. कोरबा जिले के जनपद पंचायत पोंडी उपरोड़ा में प्रशासनिक फेरबदल के बाद एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कोरबा द्वारा जारी एक ताजा आदेश के तहत पोंडी उपरोड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जय प्रकाश डड़सेना को अचानक जिला पंचायत कोरबा में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है। वहीं, उनके स्थान पर भूपेन्द्र कुमार सोनवानी को आगामी आदेश तक पोंडी उपरोड़ा जनपद पंचायत का संपूर्ण प्रभार सौंपा गया है। ​इस अचानक हुए ट्रांसफर आदेश के बाद पोंडी उपरोड़ा जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और समस्त जनपद सदस्यों ने इस प्रशासनिक फैसले पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है और वर्तमान में चल रहे ‘सुशासन तिहार’ (सुशासन सप्ताह) का पूर्ण रूप से बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। ​”अच्छे अधिकारी को हटाकर विकास कार्य बाधित करने की कोशिश” ​जनपद उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों का कहना है कि वर्तमान सीईओ जय प्रकाश डड़सेना एक बेहद ईमानदार, मिलनसार और क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को अच्छी तरह समझने वाले अधिकारी हैं। उनके कार्यकाल में जनपद के विकास कार्यों को गति मिल रही थी और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लगी हुई थी। ‘सुशासन तिहार’ के बीच में ही ऐसे कर्मठ अधिकारी को कोरबा अटैच करना सीधे तौर पर पोंडी उपरोड़ा के विकास कार्यों को बाधित करने जैसा है। जनपद उपाध्यक्ष का बयान “पूरे छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार चल रहा है, जिसके तहत मौके पर ही लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। आगामी 5 जून तक यह अभियान चलना है, लेकिन इसी बीच अचानक हमारे मुख्य कार्यपालन अधिकारी को कोरबा अटैच कर दिया गया। उन्हें क्षेत्र के चप्पे-चप्पे की और विकास कार्यों की पूरी जानकारी है। हम इस तरह के अटैचमेंट का पुरजोर विरोध करते हैं।” ​तालाबंदी और उग्र आंदोलन की चेतावनी ​जनपद जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश को वापस नहीं लिया गया और पुराने सीईओ की वापसी नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।   जनपद अध्यक्ष (महिला प्रतिनिधि) का बयान “आज हमारे पोंडी उपरोड़ा में सुशासन तिहार का आयोजन होना था, लेकिन हम सभी जनपद सदस्य इस अटैचमेंट के विरोध में इसका बहिष्कार कर रहे हैं। हमारे सीईओ साहब बहुत अच्छे हैं, उनका जनता और जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर तालमेल है। अगर हमारे सीईओ साहब को वापस यहां नहीं लाया गया, तो हम जनपद पंचायत कार्यालय में तालाबंदी करेंगे और आगे कोई भी काम नहीं होने देंगे।” ​शांतिपूर्ण ढंग से रखेंगे अपनी बात ​जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे इस विषय को लेकर सबसे पहले जिले के प्रभारी मंत्री, स्थानीय मंत्रियों और कलेक्टर महोदय के समक्ष शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रखेंगे। यदि शासन-प्रशासन स्तर पर उनकी जायज मांग को स्वीकार नहीं किया जाता है, तो जनपद क्षेत्र के विकास को बचाने के लिए वे जनपद कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

सुशासन तिहार बना जनसमस्याओं के समाधान का अभियान, CM विष्णु देव साय का बड़ा संदेश

सुशासन तिहार जनता की समस्याओं के समाधान का अभियान, सरकार पहुंच रही लोगों के द्वार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रामानुजनगर-पटना समाधान शिविर में मुख्यमंत्री ने की महत्वपूर्ण घोषणाएं: रामपुर-रामानुजनगर में मिनी स्टेडियम, पटना में हायर सेकेंडरी स्कूल तथा सूरजपुर पॉलीटेक्निक की बाउंड्रीवाल निर्माण की घोषणा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत सूरजपुर जिले के रामानुजनगर-पटना में आयोजित समाधान शिविर में आमजन से संवाद करते हुए कहा कि सुशासन तिहार जनता की समस्याओं के समाधान का अभियान है, जिसके माध्यम से शासन और प्रशासन स्वयं लोगों के द्वार तक पहुँचकर उनकी शिकायतों, समस्याओं और आवश्यकताओं का निराकरण सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना और आम नागरिकों को बेहतर से बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि  सरकार का दायित्व है कि वह लोगों के बीच जाकर जमीनी वास्तविकताओं को समझे और यह सुनिश्चित करे कि योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ सही व्यक्ति तक सही समय पर पहुँच रहा है या नहीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के अंतर्गत यह उनका 11वाँ जिला प्रवास है और 10 जून तक प्रदेश के सभी 33 जिलों का दौरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में अधिकारियों के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन, राजस्व प्रकरणों के निराकरण तथा लंबित मामलों की समीक्षा की जा रही है और ग्राम पंचायत स्तर पर समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों की गुणवत्ता के मामले में किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा औचक निरीक्षण के माध्यम से व्यवस्थाओं की सतत निगरानी की जा रही है। उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले ग्रामीण भाई-बहन नंगे पैर जंगलों में तेंदूपत्ता संग्रहण करने जाते थे, जिससे उन्हें चोट लगने का खतरा रहता था, लेकिन चरण पादुका योजना के माध्यम से अब उन्हें राहत और सुरक्षा मिल रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार किसानों, महिलाओं, गरीब परिवारों और ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि किसानों को 3716 करोड़ रुपये बोनस वितरित किया गया है, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है तथा सरकार बनने के बाद 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने उपस्थित महिलाओं से महतारी वंदन योजना की राशि मिलने की जानकारी भी ली और बताया कि लगभग 70 लाख महिलाएँ इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना और अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों तक आवश्यक सुविधाएँ पहुँचाई जा रही हैं, जबकि ई-डिस्ट्रिक्ट प्रणाली के जरिए आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र सहित अनेक सेवाएँ घर बैठे उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू की जाएगी, जहाँ नागरिक टोल-फ्री नंबर के माध्यम से अपनी समस्याएँ दर्ज करा सकेंगे और उनके निराकरण की नियमित मॉनिटरिंग होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि बिजली बिल समाधान शिविर 31 जून तक आयोजित किए जाएंगे तथा लोगों से इसका लाभ लेने की अपील की। साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह भी किया। धान बुवाई के मौसम का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि खाद, बीज, नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि खेती की लागत कम हो और किसानों को समय पर संसाधन मिल सकें। मुख्यमंत्री साय ने जिले के विकास के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएँ करते हुए रामपुर-रामानुजनगर में मिनी स्टेडियम निर्माण, पटना में हायर सेकेंडरी स्कूल तथा नगर पालिका सूरजपुर पॉलीटेक्निक की बाउंड्रीवाल निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण राज्य सरकार का संकल्प है और विकास कार्यों की गति को और तेज किया जाएगा। कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री किसान रघुनंदन सिंह के निवास पहुँचे, जहाँ उन्होंने हितग्राहियों के साथ सरई पत्ते से बने दोने-पत्तल में परोसे गए छत्तीसगढ़ी पारंपरिक भोजन का आत्मीयता से स्वाद लिया। मिट्टी के चूल्हे पर बनी कोयलार भाजी, कोचई पत्ते से बना ईढ़र और आम की चटनी जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ मिट्टी के गिलास में जल ग्रहण कर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन से अपने गहरे जुड़ाव का संदेश दिया।

स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव, छात्रों को पढ़ाया जाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

स्कूली शिक्षा में कक्षा 8 से 12 में कृ‍त्रिम बुद्धिमता (एआई) के कौशल को किया जाये शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए सभी स्कूलों में बनाई जाए बाउण्ड्री वॉल्स शत-प्रतिशत रिजल्ट देने वाली शालाओं को करें सम्मानित सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएं पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन कराएं "शिक्षा घर योजना" के प्रस्ताव को मिली सैद्धांतिक सहमति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की स्कूल शिक्षा विभाग की योजनाओं एवं गतिविधियों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाये। गुरू सांदीपनि के जीवन पर भी रोचक पुस्तक तैयार की जाए। स्कूली शिक्षा में कक्षा 8 से 12 में कृ‍त्रिम बुद्धिमता (एआई) के कौशल को कैसे जोड़ा जाए, इस पर भी एक कार्य योजना तैयार की जाए। निजी विद्यालय खोलने के लिए सामाजिक संस्थाओं और संगठनों को प्रोत्साहन दिया जाए। अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए। सत्र प्रारंभ होने से पहले स्कूलों में सभी पूर्व तैयारियां कर ली जाएं। प्रदेश की सभी आंशिक जीर्ण-शीर्ण शालाओं की तत्काल मरम्मत करा ली जाए। सभी स्कूलों में बाउण्ड्री वॉल्स बनाई जाए। एक जुलाई से गुरू पूर्णिमा (29 जुलाई) तक "शिक्षक वंदना कार्यक्रम", अभिभावकों एवं जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं और अन्य गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारी सरकार सांदीपनि विद्यालय जैसी अत्याधुनिक शालाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराकर प्रदेश की नींव मजबूत कर रही है। प्रदेश के हर विद्यार्थी तक उत्कृष्ट शैक्षणिक सुविधाएं और संसाधन समय पर पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभागीय गतिविधियों में तेजी लाएं और 16 जून से प्रारंभ हो रहे शैक्षणिक सत्र से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्कूलों में पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन कराए जाएं, ताकि ऐसे विद्यार्थी जो अपने विद्यालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं, वे उस विद्यालय के विकास-विस्तार में कुछ योगदान भी कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परीक्षा परिणामों को और अधिक बेहतर बनाने के लिए शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने, नियमित मॉनीटरिंग, तकनीक और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जिन शालाओं में शत-प्रतिशत रिजल्ट आया है, उनके शिक्षकों का सार्वजनिक सम्मान किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 26 शालाएं ऐसी हैं, जहां शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम आया है। यहां के सारे विद्यार्थी उत्तीर्ण हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन शालाओं के अतिरिक्त 90 या 95 प्रतिशत से अधिक रिजल्ट देने वाली शालाओं को भी सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय की अवधारणा/योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना भी तैयार की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को ऐसे जिलों को चिन्हित करने को कहा, जहां सभी शालाओं में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध हों, साथ ही भौतिक एवं मानव संसाधन की कमी वाले जिलों की भी अलग श्रेणी तैयार की जाए। इससे सरकार को इन्हीं जिलों पर फोकस करने में आसानी होगी। कमी वाले जिलों पर इसी साल से काम प्रारंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारी स्थानीय विधायक के साथ बैठकर पूरी विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों में व्यवस्थाओं की बेहतरी के लिए प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनके द्वारा समय-समय पर की गई सभी घोषणाओं का जल्द से जल्द पालन करायें। एक वर्ष से पुरानी कोई भी घोषणा लंबित न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्तमान में स्कूल शिक्षा विभाग की संचालित 14 विभागीय योजनाओं को निरंतर रखने की सहमति दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के बेहतरी के लिए सरकार हर जरूरी प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए प्रारंभ से ही माहौल बनाया जाए। महिला बाल विकास विभाग भी इसमें योगदान दें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर अब प्रदेश के इतिहास में पहली बार स्कूल शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए एक साथ मिलकर काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन हाईस्कूलों के आस-पास हायर सेकेण्डरी स्कूल उपलब्ध नहीं हैं, ऐसे हाईस्कूलों को चिन्हित कर उन्हें हायर सेकेण्डरी स्कूलों में प्रोन्नत करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए। शालाओं में दिया जाए व्यावसायिक प्रशिक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की शालाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाए। हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी कक्षाओं में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का भी अध्ययन कराया जाए। व्यावसायिक प्रशिक्षण को दृष्टिगत रखते हुए संभव हो तो क्षेत्रीय स्व-सहायता समूहों को भी ऐसी शालाओं और विद्यार्थियों से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को सभी विभागों के विद्यालयों को एक करने की योजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में एनसीसी, एनएसएस जैसे सामाजिक सेवा कार्य को भी बढ़ावा देने वाली इकाइयों को प्रोत्साहित करें। विद्यालयों में स्वास्थ्य परीक्षण, ड्राइविंग लायसेंस कैम्प, प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के भी प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासकीय स्कूलों से पास आउट विद्यार्थी 12वीं कक्षा के बाद उच्च शिक्षा, रोजगार, कृषि कार्य, पैतृक व्यवसाय, कौशल प्रशिक्षण जैसे किस कार्य/रोजगार में लगे हैं, इसकी ट्रैकिंग भी होनी चाहिए। इससे सरकार के पास हमारे युवाओं का एक डेटाबेस तैयार होगा। शासकीय स्कूलों में बढ़ी नामांकन की दर बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों के नामांकन वृद्धि के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में शासकीय विद्यालयों में कक्षा-1 में नामांकन में करीब 32.4 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं कक्षा 9 से 12 के नामांकन में 4.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में … Read more

योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 9 वरिष्ठ IPS अफसरों की नई तैनाती

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए गुरुवार को 9 आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं. इस प्रशासनिक बदलाव में चार वरिष्ठ एडीजी रैंक के अधिकारियों को पदोन्नति देकर डीजी पद पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. सरकार के इस फैसले को पुलिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है आलोक सिंह PAC के नए DG होंगे इस फेरबदल में सबसे प्रमुख नियुक्तियों में आलोक सिंह को प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी) का नया डीजी बनाया गया है. इससे पहले वे कानपुर जोन में एडीजी पद पर कार्यरत थे. वहीं बिनोद कुमार सिंह को सीआईडी एवं साइबर क्राइम का डीजी नियुक्त किया गया है. वे इसी विभाग में एडीजी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।  इसके अलावा जय नारायण सिंह, जो अब तक पावर कारपोरेशन में डीजी के पद पर थे, उन्हें आर्थिक अपराध शाखा (EOW) का नया डीजी बनाया गया है. इसी तरह डीके ठाकुर को नागरिक सुरक्षा एवं विशेष सुरक्षा बल से स्थानांतरित कर होमगार्ड विभाग का डीजी नियुक्त किया गया है।  अनुपम कुलश्रेष्ठ को कानपुर जोन का ADG बनाया गया एडीजी स्तर पर भी कई अहम बदलाव किए गए हैं. अनुपम कुलश्रेष्ठ, जो अब तक आगरा जोन की एडीजी थीं, उन्हें कानपुर जोन का नया एडीजी बनाया गया है. वहीं यातायात एवं सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे ए. सतीश गणेश को अब एडीजी क्राइम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।  एसके भगत ADG आगरा जोन बने इसी क्रम में आरके स्वर्णकार, जो एडीजी पीएसी के पद पर कार्यरत थे, उन्हें पावर कारपोरेशन का एडीजी नियुक्त किया गया है. इसके साथ ही एसके भगत को एडीजी क्राइम से हटाकर आगरा जोन का नया एडीजी बनाया गया है. आईजी स्तर पर भी बदलाव किया गया है, जिसमें गीता सिंह को अभियोजन निदेशालय से स्थानांतरित कर प्रशिक्षण निदेशालय का नया आईजी नियुक्त किया गया है।  यह व्यापक तबादला आदेश उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी किया गया है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस फेरबदल का उद्देश्य पुलिस व्यवस्था में दक्षता बढ़ाना, कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में कार्यक्षमता को नई दिशा देना है. सरकारी आदेश के बाद पुलिस महकमे में नई जिम्मेदारियों को लेकर अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है और सभी अधिकारी जल्द ही अपने-अपने नए पदभार संभालेंगे।  IPS अधिकारियों की तबादला सूची 1. जय नरायन सिंह (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक / अपर पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० पावर कॉरपोरेशन लि०, लखनऊ नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, ई०ओ०डब्ल्यू० (EOW), उ०प्र०, लखनऊ 2. ध्रुव कान्त ठाकुर (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक, नागरिक सुरक्षा, उ०प्र० (अतिरिक्त प्रभार: विशेष सुरक्षा बल) नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक/महासमादेष्टा, होमगार्ड, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: नागरिक सुरक्षा, उ०प्र०) 3. बिनोद कुमार सिंह (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी०, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: साइबर क्राइम, उ०प्र०) नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी०, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: साइबर क्राइम और यू०पी०-112, लखनऊ)  4. आलोक सिंह (बैच: 1995) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक / अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, पीएसी (PAC) मुख्यालय, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: विशेष सुरक्षा बल, उ०प्र०) 5. अनुपम कुलश्रेष्ठ (बैच: 1995) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, आगरा नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर 6. ए० सतीश गणेश (बैच: 1996) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, निदेशालय, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, निदेशालय, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध, उ०प्र०, लखनऊ) 7. डॉ० आर० के० स्वर्णकार (बैच: 1996) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, पीएसी (PAC) मुख्यालय, उ०प्र० नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० पावर कॉरपोरेशन लि०, लखनऊ 8. एस० के० भगत (बैच: 1998) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, आगरा 9. गीता सिंह (बैच: 2007) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिरीक्षक (IG), अभियोजन, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: पुलिस महानिरीक्षक (IG), प्रशिक्षण निदेशालय, उ०प्र०, लखनऊ

अपर कलेक्टर पोस्टिंग को लेकर उलझी सरकार, वरिष्ठ अफसरों में नाराजगी के संकेत

भोपाल  मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के सीनियर अफसरों को अपर कलेक्टर पद पर पदस्थ करने के मामले में राज्य सरकार संतुलन नहीं बना पा रही है। लोकसभा चुनाव के पहले से पोस्टिंग का बिगड़ा तालमेल अब तक पटरी पर नहीं आ पाया है। इसका असर यह है कि करीब 20 जिलों में अपर कलेक्टर के पद रिक्त हैं। नियमित अधिकारी की पोस्टिंग नहीं होने से एक ओर जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है तो दूसरी ओर मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में अवर सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे युवा अफसरों में गुस्सा भी है कि सरकार उनसे फील्ड का काम नहीं ले रही है। राज्य शासन द्वारा प्रदेश के बड़े जिलों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर में दो से तीन अपर कलेक्टर की पदस्थापना की जाती है। यहां कलेक्टर कार्यालय में इतने पद स्वीकृत भी हैं लेकिन इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में यह पद रिक्त बताए जा रहे हैं। इसके अलावा छोटे जिलों में भी अपर कलेक्टर के पद पर पोस्टिंग नहीं होने से कलेक्टरों को व्यवस्था संचालन के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपनी पड़ रही है। एसडीएम कैडर के पद नहीं भरे गए यही स्थिति संयुक्त कलेक्टर के पदों के मामले में भी है जिन्हें जिले में एसडीएम की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, इस कैडर के भी सभी पद नहीं भरे गए हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों ने कहा है कि सरकार अधिकारी होने के बाद भी फील्ड में पोस्टिंग न करके इस कैडर के अफसरों की ऊर्जा शक्ति का लाभ नहीं ले पा रही है। जिलों में सीईओ जिला पंचायत का पद भी राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों के लिए होता है, वहां सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के मुकाबले युवा आईएएस अफसर अधिक संख्या में तैनात किए हैं। इन जिलों में खाली हैं अपर कलेक्टर के पद जिन जिलों में अपर कलेक्टर के पद रिक्त बताए जा रहे हैं उसमें जबलपुर, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, सीहोर, शाजापुर, बड़वानी, बुरहानपुर, ग्वालियर, छतरपुर, निवाड़ी, इंदौर के अलावा आठ अन्य जिले शामिल हैं। इन सभी जिलों में राज्य प्रशासनिक सेवा के अपर कलेक्टर की पोस्टिंग नहीं किए जाने के कारण कलेक्टरों को प्रभार के सहारे व्यवस्था संचालित करनी पड़ रही है। नए सिलेक्ट युवाओं की भी मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में पोस्टिंग अभी जो पोस्टिंग है उसमें पीएससी से चुने गए नए युवाओं को भी फील्ड में पदस्थ करने के बजाय मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में पदस्थ रखा है। बताया जाता है कि वर्तमान में अधिकांश युवा अफसर मंत्रालय में अवर सचिव, ओएसडी बनकर फाइलों के निराकरण में लगे हैं। इस कारण उनमें व्यवस्था के प्रति गुस्सा भी है। ऐसे युवा अफसरों का कहना है कि जिलों में डिप्टी कलेक्टर, एसडीएम, अपर कलेक्टर और संयुक्त कलेक्टर की जिम्मेदारी निभा रहे कई सीनियर अफसर मंत्रालय में पदस्थ किए जा सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और कम अनुभवी अफसरों को फील्ड में मौका नहीं दिया जा रहा है। पूर्व में एसआईआर के कार्य के कारण स्‍थानांतरण नहीं करने का सरकार का बहाना था और अब जबकि ऐसी कोई स्थिति नहीं है तो भी पदस्थापना नहीं की जा रही है।