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प्राचीन पांडुलिपियों और विरासत के संरक्षण में जुटी योगी सरकार, “ज्ञान भारतम् मिशन” को मिली नई गति

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश में ज्ञान भारतम् मिशन के तहत प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, संरक्षण और डिजिटलीकरण का व्यापक अभियान तेज कर दिया गया है। राज्य सरकार का उद्देश्य देश की प्राचीन बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।       भारत सरकार के ज्ञान भारत मिशन के अंतर्गत दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान को गति प्रदान करते हुए सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों तथा व्यक्तियों के पास उपलब्ध पाण्डुलिपियों को स्कैन कर पोर्टल पर अपलोड कराया जाए, ताकि देश की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक धरोहर का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।       प्रदेशभर में चलाए जा रहे सर्वे अभियान के दौरान अब तक हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, साहित्य, संगीत, इतिहास और भारतीय संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण पांडुलिपियां शामिल हैं। विशेष रूप से वाराणसी, आयोध्या और रामपुर में सबसे अधिक पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं, जिनमें कई सदियों पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित सामग्री भी शामिल है।     राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों, मठ-मंदिरों, निजी संग्रहकर्ताओं और शोध संस्थानों के सहयोग से विशेष सर्वे टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें गांव-गांव और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचकर प्राचीन दस्तावेजों और हस्तलिखित ग्रंथों का पता लगा रही हैं। मिशन के तहत पांडुलिपियों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, डिजिटलीकरण और सूचीकरण भी किया जाएगा ताकि शोधार्थियों और विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।     दरअसल, उत्तर प्रदेश सदियों से भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। काशी, अयोध्या, मथुरा और रामपुर जैसे शहरों में संस्कृत, फारसी, अरबी और हिंदी की अनेक दुर्लभ पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। अब “ज्ञान भारतम् मिशन” के माध्यम से इन्हें व्यवस्थित रूप से संरक्षित किया जा रहा है। यह अभियान केवल दस्तावेजों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। ज्ञान भारतम् मिशन उसी विजन को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण अभियान माना जा रहा है।

लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत, योगी सरकार ने बढ़ाया DA

लखनऊ उत्तर प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आज का दिन बड़ी खुशखबरी लेकर आया है। बढ़ती महंगाई के बीच योगी सरकार ने राज्य कर्मियों को एक शानदार तोहफा दिया है। प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस बड़े फैसले के बाद अब राज्य कर्मियों का डीए 58 फीसदी से बढ़कर सीधे 60 फीसदी हो गया है। अपर मुख्य सचिव (ACS) वित्त, दीपक कुमार ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार के इस कदम से न केवल कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में बंपर इजाफा होगा, बल्कि उनके घर का मासिक बजट भी काफी मजबूत हो जाएगा। 16 लाख से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा सीधा फायदा वित्त विभाग द्वारा जारी इस आदेश का लाभ उत्तर प्रदेश के करीब 16 लाख सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और लाखों पेंशनर्स को मिलेगा। इस फैसले से राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ जरूर बढ़ेगा, लेकिन कर्मचारियों को महंगाई के इस दौर में बहुत बड़ी राहत मिलेगी। सैलरी में कितनी होगी बढ़ोतरी? समझिए इसका पूरा कैलकुलेशन महंगाई भत्ते की गणना हमेशा कर्मचारी की बेसिक सैलरी के आधार पर की जाती है। आइए एक उदाहरण से समझते हैं कि इस 2% की बढ़ोतरी से आपकी जेब में कितने रुपये बढ़ेंगे: मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹35,000 है। 58% डीए के हिसाब से उस पहले ₹20,300 मिलते थे। अब 60% डीए के हिसाब से ₹21,000 मिलेंगे। इस हिसाब से हर महीने इसकी सैलरी में ₹700 का सीधा फायदा होगा। (इसके साथ ही जनवरी से लेकर अप्रैल तक का मोटा एरियर भी खाते में एक साथ आएगा)। इसी तरह, जिन वरिष्ठ अधिकारियों की बेसिक सैलरी ₹1 लाख या उससे अधिक है, उनकी मासिक तनख्वाह में ₹2,000 से लेकर ₹5,000 तक की बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।  

‘अनुपमा’ की मोटी बा अलका कौशल जेल जा चुकी हैं, चेक बाउंस केस से जुड़ा मामला

अनुपमा टेलीविजन के लोकप्रिय शोज में से एक है. पिछले कुछ महीनों में अनुपमा में कई नए किरदारों की एंट्री हुई है. पिछले साल सीरियल में एक्ट्रेस अलका कौशल मोटी बा बनकर आई हैं. अनुपमा में अलका एक विलेन का रोल प्ले कर रही हैं, जिन्हें उनके किरदार के लिए दर्शकों की नफरत भी झेलनी पड़ रही है. पर क्या आप जानते हैं कि अनुपमा को मुश्किल में डालने वाली मोटी बा रियल लाइफ में जेल जा चुकी हैं. चलिए जानते हैं कि पूरा विवाद है क्या. जेल जा चुकी हैं अलका ये विवाद 2015 से 2017 के बीच का है. अलका ने अपनी मां सुशीला बडोला के साथ मिलकर एक सीरियल बनाने का प्लान तैयार किया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीरियल बनाने के लिए एक्ट्रेस ने पंजाब के संगरूर जिले के अवतार सिंह नाम के किसान से 50 लाख रुपये उधार लिए थे. जब अवतार सिंह ने अपने पैसे वापस मांगे, तो अलका और उनकी मां ने 25 लाख के दो चेक दे दिए. किसान ने जब उन चेक को बैंक में जमा किया, तो वो बाउंस हो गए. चेक बाउंस होने के बाद अवतार सिंह ने 2015 में अलका सिंह और उनकी मां के खिलाफ मलेरकोटला की स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने एक्ट्रेस और उनकी मां के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज कराया. सुनवाई के दौरान अदालत ने मां-बेटी को दोषी पाया. मामले में दोनों को दो साल कैद की सजा सुनाई गई. इसके बाद अलका और उनकी मां ने संगरूर कोर्ट में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की. 2017 में संगरूर कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया. फिर अलका को तुरंत हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया. हालांकि, कुछ महीने जेल में बिताने के बाद अलका और उनकी मां 2018 में जमानत पर रिहा हो गई थीं. जेल से बाहर निकलने के बाद अलका ने फिर से अपने अभिनय पर फोकस किया और आज वो मनोरंजनजगत में खूब नाम चुकी हैं. अनुपमा से पहले अलका टेलीविजन पर कुबूल है, कुमकुम, स्वरागिनी, संतोषी मां, ये रिश्ता क्या कहलाता है और नजर जैसे तमाम शोज में काम कर चुकी हैं. टीवी सीरियल के अलावा उन्होंने क्वीन और बजरंगी भाईजान जैसी मूवीज में भी काम किया है.

‘जनजाति गरिमा उत्सव’ का शंखनाद

​रायपुर छत्तीसगढ़ के अंदरूनी और दूरस्थ अंचलों में बसे जनजातीय परिवारों के सशक्तिकरण और समग्र विकास के लिए नारायणपुर जिले में “सबसे दूर, सबसे पहले” की अनूठी थीम पर 'जनजाति गरिमा उत्सव' जन भागीदारी अभियान की शुरुआत हो गई है। जिले के 262 जनजातीय बाहुल्य गाँवों को पूरी तरह संतृप्त (Saturated) करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कलेक्टर ने अधिकारियों को मिशन मोड में काम करने के कड़े निर्देश दिए।         ​कलेक्टर ने कहा कि इस अभियान का मुख्य ध्येय शासन की हर एक कल्याणकारी योजना का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। इसके लिए ज़िला प्रशासन और नोडल अधिकारियों की टीम सीधे जमीनी स्तर पर मोर्चा संभालेगी। ​ तीन बड़े अभियानों का त्रिवेणी संगम: गाँव-गाँव शिविर        ​इस अभियान के तहत जिले के दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति तैयार की गई है। जिले के सभी 262 जनजातीय बाहुल्य गाँवों में विशेष जन भागीदारी शिविर लगाए जाएंगे। इसके अंतर्गत 255 गाँवों को कवर किया जाएगा, जहाँ 'आदि सेवा केंद्रों' के माध्यम से जनसुनवाई होगी और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया जाएगा। विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए 204 गाँवों में पात्र हितग्राहियों को चिह्नित कर सीधे शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा। ​ एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी सुविधाएँ      ​18 मई से 25 मई 2026 तक चलने वाले इस विशेष अभियान के दौरान गाँवों में ही एकीकृत शिविरों का आयोजन हो रहा है। इन शिविरों के माध्यम से दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए विशेष मेडिकल कैंप,पात्रता के अनुसार ​ऑन-द-स्पॉट जनकल्याणकारी योजनाओं के फॉर्म भरना और मौके पर ही लाभान्वित करना तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी एक ही स्थान पर मौजूद रहकर ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करेंगे। ​     सामूहिक सहयोग और जनभागीदारी से ही जनजातीय क्षेत्रों का समग्र विकास संभव है। यह अभियान केवल सरकारी योजनाओं का वितरण नहीं, बल्कि शासन और ग्रामीणों के बीच के विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। यह आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण, सम्मान और विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।" जनप्रतिनिधियों और समाज से सहयोग की अपील     ​ कलेक्टर ने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, त्रिस्तरीय पंचायत पदाधिकारियों, सामाजिक संगठनों तथा जागरूक ग्रामीणों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। प्रशासन का मुख्य फोकस ग्रामीणों को उनके अधिकारों और सुविधाओं के प्रति जागरूक कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति हक से वंचित न रहे।

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने किया न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी का उद्घाटन, युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने गुरुवार को आईटीओटी अलीगंज (आईटीआई परिसर), लखनऊ में न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी बिल्डिंग का उद्घाटन किया। नई बिल्डिंग में 10 नए व्यवसायों की शुरुआत के साथ संस्थान की प्रशिक्षण क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है। सरकार इसे “आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” के संकल्प को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में देख रही है। मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं बल्कि युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार और स्वरोजगार के योग्य तैयार करना है। उन्होंने कहा कि आईटीओटी जैसे संस्थान युवाओं के सपनों को साकार करने के केंद्र बन रहे हैं। प्रशिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों में आत्मविश्वास जगाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि आत्मविश्वास ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विशेष रूप से ड्रॉपआउट रोकने पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र की निरंतर उपस्थिति और प्रगति सुनिश्चित करना संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि समाज के कमजोर और मध्यम वर्ग से आने वाले विद्यार्थियों के लिए कौशल प्रशिक्षण जीवन बदलने वाला अवसर साबित हो सकता है। उन्होंने प्रशिक्षकों से छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों से भी संवाद बढ़ाने की अपील की, ताकि प्रशिक्षण और शिक्षा के प्रति भरोसा और मजबूत हो सके। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरिओम ने कहा कि योगी सरकार के नेतृत्व में विभाग लगातार आधुनिक और उद्योग आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने बताया कि बदलते समय की जरूरतों के अनुसार पारंपरिक कोर्सेज के साथ नई तकनीकों और इंडस्ट्री आधारित ट्रेड्स को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि संस्थानों का मूल्यांकन केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि वहां से प्रशिक्षित होकर कितने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार प्राप्त हुआ। निदेशक प्राविधिक डी. के. सिंह ने बताया कि नई बिल्डिंग के निर्माण से पहले संस्थान में 10 व्यवसाय संचालित हो रहे थे, जो अब बढ़कर 20 हो गए हैं। इसके साथ ही संस्थान में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की संख्या भी लगभग 1300 तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि संस्थान में आईटीआई प्रशिक्षकों के लिए सीआईपीएस प्रशिक्षण भी संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 1338 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। वहीं हाल ही में चयनित 1781 नए अनुदेशकों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता और मजबूत होगी। न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी में शुरू किए गए नए व्यवसायों में ड्रेस मेकिंग, ड्राफ्ट्समैन मैकेनिक, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक, मैकेनिक डीजल, मैकेनिक ट्रैक्टर, ऑफिस मैनेजमेंट, पेंटिंग टेक्नोलॉजी, सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस (हिंदी), इलेक्ट्रीशियन पावर डिस्ट्रीब्यूशन और टर्नर जैसे आधुनिक एवं रोजगारपरक ट्रेड शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन कोर्सेज से युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण मिलेगा और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कार्यक्रम के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने। साथ ही उन्होंने परिसर में नीम का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर निदेशक प्रशिक्षण अभिषेक सिंह, अपर निदेशक मानपाल सिंह सहित विभागीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

चिड़ियाघर प्रशासन लगाएगा सेल्फ सर्विस कियोस्क, टिकटिंग होगी आसान

नई दिल्ली चिड़ियाघर घूमने परिवार या दोस्तों के साथ पहुंचने वाले विजिटर्स के लिए अब टिकट खरीदना आसान होने जा रहा है। अगर किसी ने पहले से ऑनलाइन टिकट बुक नहीं कराई है और मौके पर मोबाइल इंटरनेट स्लो चल रहा है, तब भी अब परेशानी नहीं होगी। चिड़ियाघर प्रशासन विजिटर्स की सुविधा के लिए सेल्फ सर्विस टिकेटिंग कियोस्क (SSTK) सिस्टम शुरू करने जा रहा है। इसके जरिए लोग बाजार में सामान खरीदने की तरह आसानी से UPI पेमेंट कर टिकट ले सकेंगे। शुरुआत में टिकट काउंटर परिसर में 4 कियोस्क लगाए जाएंगे। ऐसे काम करेगा सिस्टम विजिटर्स सीधे कियोस्क पर जाकर स्क्रीन में अपना नाम, मोबाइल नंबर और टिकटों की संख्या भरेंगे। इसके बाद UPI से पेमेंट करते ही कुछ ही सेकंड में टिकट मोबाइल पर आ जाएगी। साथ ही पेपर टिकट भी मिलेगी। चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने बताया कि इस सिस्टम के लिए अलग इंटरनेट डोमेन की व्यवस्था की गई है। इससे इंटरनेट स्लो होने या वेबसाइट हैंग होने की समस्या से काफी राहत मिलेगी। ऑनलाइन टिकटिंग में स्लो इंटरनेट और रिजेक्शन से बढ़ रही परेशानी     अभी हालात यह है कि बिना ऑनलाइन टिकट बुकिंग के चिड़ियाघर पहुंचने वालों की एंट्री गेट के बाहर हर दिन लंबी लाइन लग जाती है।     लोगों को ऑनलाइन टिकट फॉर्म भरना पड़ता है।     इंटरनेट स्लो होने या प्रोसेस आगे नहीं बढ़ने पर दोबारा लॉगइन करना पड़ता है।     इसके लिए मोबाइल नंबर और कैप्चा कोड भरना होता है।     अगर कैप्चा गलत हो जाए तो पूरी प्रक्रिया फिर से करनी पड़ती है।     इसके बाद पेमेंट के दौरान भी इंटरनेट स्लो होने या वेबसाइट पर ज्यादा लोड की वजह से वेबसाइट हैंग होने की शिकायत रहती है।     कई बार पेमेंट होने के बाद भी टिकट रिजेक्ट होने का खतरा बना रहता है।     हर दिन 20 प्रतिशत से ज्यादा टिकट रिजेक्शन के मामले सामने आ रहे थे।

दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: लाखों परिवारों को मिलेगा राशन कार्ड, नई आय सीमा तय

 नई दिल्ली  दिल्ली में अब राशन कार्ड के लिए आय की सीमा सरकार ने बढ़ा दी है। इसकी घोषणा बृहस्पतिवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेसवार्ता में की। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि कुछ समय पहले राशन कार्ड के लिए परिवार की आय की शर्त वार्षिक एक लाख से बढ़ाकर 1.20 लाख की गई थी। अब इसे बढ़ाकर ढाई लाख करने की तैयारी है। उन्होंने राशन कार्ड के लिए आय की सीमा ढाई लाख रुपये करने के लिए मंत्रिमंडल में चर्चा हो चुकी है। मंत्रिमंडल की बैठक में इसे स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि 13 वर्षों से दिल्ली की लाखों गरीब नागरिक राशन कार्ड बनाने के लिए अधिकारियों और नेताओं के चक्कर काटते रहे। लेकिन राशन कार्ड नहीं बनाए गए। 7.72 अपात्र लोगों के नाम योजना से काटे दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री की अंत्योदय योजना के अंतर्गत सभी पात्र लोगों को राशन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। पिछले एक वर्ष में राशन कार्ड धारकों का आडिट किया गया। इसमें 1.44 लाख धारक आय की शर्त में नहीं आते थे। 35 हजार ने कभी राशन नहीं लिया। 19 हजार मृत मिले। ऑडिट में सात लाख 72 हजार से अधिक अपात्र राशन कार्ड धारक मिले। इनका नाम हटाया गया है। अब इनकी जगह नए पात्र लोगों के राशन कार्ड बनेंगे। पोर्टल पर नए राशन कार्ड के लिए आवेदन शुरू 15 मई से पोर्टल पर आवेदन शुरू हो गया है। आवेदन से लेकर राशन देने की पूरी प्रक्रिया डिजिटल है। इससे लाभार्थी को पूरा राशन मिलेगा। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न सुरक्षा नियम 2026 लागू किया गया है। कोई भी व्यक्ति अपने घर के नजदीक आवेदन कर सकता है। पिछले 13 वर्षों में 3.72 लाख आवेदन किए गए लेकिन राशन कार्ड नहीं बने। अब इन्हें भी नए ट्रैक से आवेदन करना होगा। आय प्रमाण पत्र पहले स्वयं घोषित कर देता था जिससे अनियमितता का खतरा।

राहत-बचाव कार्यों में लापरवाही न बरतने, अस्पताल व बिजली व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जाए

लखनऊ  प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान को देखते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जनसामान्य को हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण और गर्मी से होने वाली अन्य समस्याओं से बचाने के लिए सभी विभाग समन्वय बनाकर कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और राहत एजेंसियां अलर्ट मोड में रहें तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। अस्पतालों में आवश्यक दवाएं, बेड, आईवी फ्लूइड और डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को अस्पतालों, पेयजल व्यवस्था और बिजली आपूर्ति की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस दौर में आमजन को सबसे अधिक परेशानी बिजली कटौती और पानी की कमी से होती है, इसलिए इन दोनों व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जनपदों में नियमित समीक्षा करें और जहां भी समस्या हो, उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पतालों में आवश्यक दवाएं, बेड, आईवी फ्लूइड और डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। साथ ही एंबुलेंस सेवाओं को भी सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। दोपहर में बच्चों को अनावश्यक बाहर न निकलने दें सीएम योगी ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखा जाए, क्योंकि ये वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि दोपहर के समय बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने दें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाते रहें। उन्होंने बुजुर्गों को भी तेज धूप से बचाने और उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने लोगों से ढीले सूती कपड़े पहनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हल्के रंग के सूती वस्त्र शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं और गर्मी से राहत देते हैं। इसके साथ ही अधिक से अधिक पानी पीने, ओआरएस और नींबू पानी जैसे पेय पदार्थों का सेवन करने तथा धूप में निकलते समय सिर को ढकने जैसे उपाय अवश्य अपनाए जाएं। कार्यस्थलों पर पेयजल व छाया सुनिश्चित की जाए सीएम योगी ने आग लगने की घटनाओं को लेकर भी लोगों और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। खेतों, बाजारों, गोदामों और रिहायशी इलाकों में अग्नि सुरक्षा उपायों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाए। ऐसी कोई भी लापरवाही न की जाए, जिससे आग लगने का अंदेशा हो। उन्होंने फायर विभाग को भी पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने श्रमिकों और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों और खुले स्थानों पर काम करने वाले श्रमिकों को लू, थकावट और निर्जलीकरण से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। कार्यस्थलों पर पेयजल, छाया व प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अत्यधिक गर्मी के समय श्रमिकों से लगातार काम न कराया जाए और उन्हें समय-समय पर आराम दिया जाए। सीएम योगी ने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखें। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से भी आमजन के बीच जागरूकता फैलाने को कहा है, ताकि लोग गर्मी व लू से बचाव के उपायों को अपनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनता की सुरक्षा व सुविधा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी स्थिति में लोगों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने राजनांदगांव से वाहनों को किया रवाना

रायपु आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजनांदगांव में आयोजित एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ सेवा के अंतर्गत अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए आपातकालीन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। आधुनिक तकनीक से और मजबूत होगी पुलिस व्यवस्था            वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि आपातकालीन सेवाओं का आधुनिकीकरण नागरिकों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। “एक नंबर, अनेक माध्यम, त्वरित सहायता” की सोच पर आधारित डायल-112 सेवा प्रदेशवासियों को किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत रेस्क्यू और मदद उपलब्ध कराने का सबसे सशक्त माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित छत्तीसगढ़ का निर्माण हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इन आधुनिक तकनीक-आधारित वाहनों से पुलिस की रिस्पॉन्स टाइमिंग बेहतर होगी और कानून व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। वाहनों का वर्गीकरण और उनकी खासियतें            ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112’ सेवा के विस्तार के तहत कुल 22 आधुनिक वाहनों को बेड़े में शामिल किया गया है, जिनका वर्गीकरण इस प्रकार है। डायल-112 वाहन  18 (त्वरित आपातकालीन रिस्पॉन्स के लिए), हाईवे पेट्रोलिंग वाहन के लिए  03 (राजमार्गों पर दुर्घटनाओं और सुरक्षा की निगरानी के लिए), फॉरेंसिक वाहन 01 (घटनास्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए) ये सभी वाहन नवीनतम जीपीएस (ळच्ै), उन्नत संचार प्रणालियों और अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं। इससे कंट्रोल रूम को रियल-टाइम लोकेशन मिलेगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना की सूचना पर पुलिस बल बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच सकेगा। जनता को मिलेगा त्वरित लाभ             इन नए हाई-टेक वाहनों के सड़कों पर उतरने से न केवल आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि आम नागरिकों को भी तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद आपातकालीन चिकित्सा व सुरक्षा सहायता मिल सकेगी। स्थानीय स्तर पर छत्तीसगढ़ी स्लोगन एक्के नम्बर, सब्बो बर के साथ इस सेवा को लेकर नागरिकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इन वाहनों के संचालन से कानून व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी तथा आम नागरिकों को तेज, सुरक्षित एवं बेहतर आपातकालीन सहायता उपलब्ध हो सकेगी।

राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय का गठन होगा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में नागरिकों को संस्थागत लोक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना शीघ्र प्रारंभ की जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक ले रहे थे। बताया गया कि प्रदेश में सड़क सुरक्षा सचिवालय का गठन किया जा रहा है। बैठक में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि आमजन के लिए सुरक्षित, सुगम और सुलभ परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना हमारा दायित्व है। बेहतर लोक परिवहन आसान यात्रा का साधन ही नहीं, प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास की जीवन रेखा भी है। प्रदेश की सीमा में अन्य राज्यों से आने वाले मालवाहक वाहनों की जांच के लिए परिवहन चौकियों और टोल नाकों को और अधिक आधुनिक एवं सुविधा सम्पन्न बनाया जाए। इसके लिए परिवहन चौकियों को शीघ्र ही एकीकृत (इंटीग्रेटेड) करने के प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग में मानव संसाधन की कमी की पूर्ति अभियान चलाकर की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सर्वाधिक दुर्घटना क्षेत्रों की मैपिंग करा ली जाए, जिससे जरूरतमंदों को जल्द से जल्द मेडिकल सर्विसेस मुहैया कराई जा सकें। विभिन्न विभागों द्वारा दी जा रही एम्बुलेंस सेवाओं को एक प्लेटफार्म पर लाया जाए, जिससे दुर्घटना क्षेत्रों में जरूरतमंद तक 30 मिनट से भी कम समय में एम्बुलेंस ऑटो मोड (जो स्पॉट से निकटतम हो) में पहुंच जाए। 'म.प्र. राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय' का होगा गठन बैठक में सचिव परिवहन  मनीष सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा क्रियान्वित पीएम-राहत योजना एवं राहवीर योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश, पूरे देश में पहले स्थान पर है। पीएम-राहत योजना में राज्य के सभी 55 जिलों में जिला नोडल अधिकारियों को ऑनबोर्ड किया जा चुका है। योजना में कुल 2,298 प्रकरणों में से 1692 प्रकरण अनुमोदित कर दिए गए हैं। राहवीर योजना में कुल 109 आवेदन मिले, इनमें से 49 प्रकरण मंजूर कर लिए गए हैं। बालाघाट जिले में राहवीर योजना पर बहुत अच्छा काम हुआ है। बैठक में बताया गया कि हाल ही में मध्यप्रदेश में हुई सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी (SCCoRS) की बैठक में कमेटी के अध्यक्ष एवं सदस्यों द्वारा इन दोनों योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की पहल की बेहद सराहना की गई है। इसी कमेटी की अनुशंसा पर सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में पृथक से 'म.प्र. राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय' का गठन भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में विभाग को दिए गए 4,400 करोड़ रूपए के लक्ष्य के विरूद्ध कुल 4911.78 करोड़ रूपए राजस्व आय अर्जित की गई। दिए गए लक्ष्य से विभाग द्वारा 111.6 प्रतिशत अधिक राजस्व अर्जन किया गया है। वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए करीब 5,721 करोड़ रूपए राजस्व आय का लक्ष्य रखा गया है। परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश में 51 प्रकार की फेसलेस सर्विसेस दी जा रही हैं। इससे नागरिकों को बिचौलियों से तो मुक्ति मिली ही है, साथ ही पारदर्शितापूर्ण सेवा प्रदाय भी सुनिश्चित हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सभी उपलब्धियों के लिए विभागीय मंत्री, अधिकारियों एवं मैदानी अमले को भी बधाई दी। 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना' मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण नेटवर्क विस्तार, महिला सुरक्षा और प्रदेश के नागरिकों को संस्थागत लोक परिवहन की सुविधा मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार की 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना' की अद्यतन प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि योजना का जल्द से जल्द फील्ड में शुभारंभ किया जाए। सचिव, परिवहन  मनीष सिंह ने बताया कि योजना को धरातल पर लाने के लिए तेजी से प्रक्रियागत काम जारी है। यह योजना दो चरणों में चलाई जाएगी। इसके लिए प्रदेश में 7 क्षेत्र क्रमश: इंदौर, उज्जैन, भोपाल (नर्मदापुरम सहित), जबलपुर, सागर, ग्वालियर (चंबल सहित) एवं रीवा (शहडोल सहित) स्थापित किए गए हैं। पहले चरण में चलाई जाने वाली बसों के लिए क्षेत्रीय मुख्यालयों से उपनगरीय क्षेत्रों तक विस्तारित मार्ग मंजूरी की विभागीय अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। अन्य क्षेत्रों के विस्तारित मार्गों की अधिसूचना शीघ्र ही जारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि योजना के पहले चरण में प्रदेश के कुल 1,164 मार्गों पर लगभग 5,206 बसों का संचालन अगले दो सालों में किया जाएगा। इन सभी बसों की सुचारू मॉनिटरिंग के लिए एक दक्ष एवं इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैंनेजमेंट सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि योजना के पहले चरण में इंदौर क्षेत्र के कुल 121 मार्गों में कुल 608 बसें, उज्जैन क्षेत्र के 120 मार्गों में 371 बसें, भोपाल क्षेत्र के 104 मार्गों में 398 बसें, जबलपुर क्षेत्र के 83 मार्गों पर 309 बसें, सागर क्षेत्र के 92 मार्गों में 344 बसें, ग्वालियर क्षेत्र के 65 मार्गों में 298 बसें तथा रीवा क्षेत्र के 35 मार्गों में 184 बसें चलाई जाएंगी। योजना के तहत चलाई जाने वाली सभी बसों का रंग एक जैसा होगा, ताकि एकरूपता बनी रहे। सचिव परिवहन ने बताया कि ड्रायविंग लायसेंस एवं पंजीयन प्रमाण पत्र को सहज बनाने के लिए विभाग द्वारा 1 अक्टूबर 2024 से डिजिटल फार्म में प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में ई-डिटेक्शन प्रणाली प्रारंभ करने की व्यवस्था की जा रही है। इस पर काम प्रगति पर है। इस प्रणाली से चिन्हित स्थानों पर लगे कैमरों द्वारा वाहनों की नंबर प्लेट अपने आप स्कैन हो जाएगी। स्कैन किए गए वाहन क्रमांक से दस्तावेज वाहन पोर्टल से स्वत: जांच होकर सीधे ऑनलाइन भेज दिया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त  मनीष रस्तोगी, परिवहन आयुक्त  उमेश जोगा सहित अन्य विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।