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एआई मिशन को गति देगा यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर: मुख्यमंत्री

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेश के भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विषयों, उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी), प्रोजेक्ट गंगा तथा गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मंडी शुल्क एवं मंडी सेस में संभावित छूट जैसे महत्वपूर्ण विषयों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी) की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के एआई मिशन की बुनियादी संरचना तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि डाटा सेंटर क्लस्टर केवल एनसीआर क्षेत्र तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों को भी इससे जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इसकी शुरुआत बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से की जा सकती है, जहां बड़े पैमाने पर भूमि उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि टाटा समूह सहित बड़ी टेक कंपनियों से संवाद स्थापित कर लखनऊ को “एआई सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर  प्रदेश को भारत और ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा  एआई कंप्यूट पावर सेंटर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाना है। प्रस्तुतीकरण में कहा गया कि यह केवल एक परियोजना नहीं बल्कि अगले 50 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक संरचना का खाका है। इसके तहत वर्ष 2040 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था, 1.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और 5 गीगावॉट एआई कंप्यूट कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2040 तक दुनिया की नई अर्थव्यवस्था एआई, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे “फ्यूचर एरेना” के इर्द-गिर्द विकसित होगी, जिनका संयुक्त वैश्विक बाजार 29 से 48 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत के लिए एआई सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज, क्लाउड सर्विसेज, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर्स, एयरोस्पेस और ईवी जैसे सेक्टर भविष्य के प्रमुख आर्थिक इंजन होंगे। बैठक में उत्तर प्रदेश की पांच प्रमुख संरचनात्मक ताकतों- भौगोलिक स्थिति, विशाल भूमि उपलब्धता, बड़ी युवा आबादी, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत नेतृत्व को रेखांकित किया गया। कहा गया कि उत्तर प्रदेश का इनलैंड लोकेशन इसे समुद्री जोखिमों और चक्रवातों से सुरक्षित बनाता है, जबकि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तेजी से विकसित हो रहे हैं। आईआईटी कानपुर, एनआईटी प्रयागराज और 50 से अधिक इंजीनियरिंग संस्थानों के कारण राज्य में विशाल तकनीकी प्रतिभा उपलब्ध है। बैठक में उत्तर प्रदेश को “एशिया का मोस्ट सिक्योर, स्केलेबल एवं कनेक्टेड इनलैंड एआई टेरिटरी” बताया गया। कहा गया कि देश के लगभग सभी प्रमुख फाइबर नेटवर्क यूपी से होकर गुजरते हैं और राज्य भारत के सभी समुद्री केबल लैंडिंग पॉइंट्स से जुड़ा हुआ है। राज्य के भीतर 5 मिलीसेकंड से कम लेटेंसी तथा मुंबई और चेन्नई जैसे डिजिटल हब तक 5–12 मिलीसेकंड कनेक्टिविटी उपलब्ध है। वैश्विक टेक कंपनियों के लिए यूपी कम लागत, बेहतर स्केलेबिलिटी और अधिक नेटवर्क रिडंडेंसी वाला आदर्श एआई इंफ्रास्ट्रक्चर हब है। प्रोजेक्ट गंगा मुख्यमंत्री ने “प्रोजेक्ट गंगा” यानी गवर्नेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी के रूप में चुना जाए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण कार्य करने वाली कंपनियां भी इन युवाओं का उपयोग कर सकें, ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए। मुख्यमंत्री ने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार और कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत से ही डिजिटल उद्यमियों को उचित इंसेंटिव उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में बताया गया कि प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचाने की महत्वाकांक्षी पहल है। इसका उद्देश्य केवल इंटरनेट उपलब्ध कराना नहीं बल्कि टेलीमेडिसिन, डिजिटल शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, ई-गवर्नेंस, डिजिटल रोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना है। परियोजना के तहत 10 हजार से अधिक युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर (डीएसपी) के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है, जिससे लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और 1 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। योजना के तहत 20 लाख से अधिक घरों को फाइबर आधारित हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक डीएसपी अपने क्षेत्र में 200 से 300 घरों को कनेक्ट कर सकेगा। महिला उद्यमिता को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है और लगभग 50 प्रतिशत महिला उद्यमियों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। बैठक में बताया गया कि केवल मोबाइल इंटरनेट के जरिए सीमित सेवाएं संभव हैं, जबकि वास्तविक डिजिटल परिवर्तन के लिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड आवश्यक है। एआई आधारित कृषि, ड्रोन मॉनिटरिंग, स्मार्ट विलेज, वर्चुअल लैब, टेलीमेडिसिन और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी सेवाओं के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी बताया गया। प्रोजेक्ट गंगा के तहत डीएसपी केवल इंटरनेट सेवा प्रदाता नहीं होंगे, बल्कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का संपूर्ण नेटवर्क विकसित करेंगे। वे हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, आईपीटीवी, ओटीटी एक्सेस, सीसीटीवी समाधान, पब्लिक वाई-फाई, साइबर सिक्योरिटी और एंटरप्राइज कनेक्टिविटी जैसी सेवाएं प्रदान करेंगे। योजना के तहत प्रत्येक डीएसपी को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना फिलहाल 21 प्राथमिक जिलों में “प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट” के रूप में शुरू करने की तैयारी में है और इसके बाद इसे पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा। गेहूं का इन-हाउस प्रसंस्करण मुख्यमंत्री ने गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने मंडी टैक्स और मंडी शुल्क व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रदेश की मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि मंडियों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, पर्वों के दौरान लाइटिंग, अतिक्रमण हटाने और बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।  मुख्यमंत्री ने अल नीनो के संभावित प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आगामी वर्षों में फसलों पर इसका असर पड़ सकता है, इसलिए प्रदेश को खाद्यान्न सुरक्षा के लिए अभी से तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के खाद्यान्न भंडार पर्याप्त और मजबूत होने चाहिए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 372 लाख मीट्रिक टन गेहूं … Read more

‘भारत इनोवेट्स 2026’ अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों को डीप टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक सोच से जोड़ने की तैयारी

लखनऊ योगी सरकार परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ देश के उभरते इनोवेशन और तकनीकी बदलावों से जोड़कर भविष्य के लिए तैयार करने में जुट गई है। 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान के माध्यम से पहली बार गांव और कस्बों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को डीप टेक्नोलॉजी, रिसर्च, नवाचार और वैज्ञानिक सोच से जोड़ने की बड़ी पहल शुरू की गई है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चे तक भी वही आधुनिक सीखने का माहौल पहुंचे, जो अब तक चुनिंदा संस्थानों और बड़े शहरों तक सीमित माना जाता था। सरकार द्वारा अब परिषदीय और केजीबीवी विद्यालयों में संगोष्ठी, टेक्नोलॉजी आधारित विशेष कक्षाएं, नवाचार क्विज और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में वैज्ञानिक सोच और इनोवेशन कल्चर विकसित करने की तैयारी की जा रही है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रदेश के सभी परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 'भारत इनोवेट्स 2026' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके अंतर्गत मई 2026 के दौरान विद्यालयों में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की सहभागिता से विभिन्न नवाचार आधारित गतिविधियां कराई जाएंगी। प्रतियोगिता तथा निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालयों में 'विकसित भारत के नवाचार परिदृश्य' विषय पर संगोष्ठी, 'डीप टेक्नोलॉजी' विषय पर विशेष कक्षाएं, 'भारत क्विज- भारत के नवाचार को कौन जानता है?' प्रतियोगिता तथा निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उनमें जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है। भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से हो सकेंगे तैयार योगी सरकार की रणनीति है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी देश और दुनिया में हो रहे तकनीकी बदलावों और नवाचारों से परिचित हों। यही कारण है कि अब परिषदीय विद्यालयों में भी इनोवेशन और रिसर्च आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जब बच्चों को शुरुआती स्तर पर वैज्ञानिक सोच, तकनीक और नवाचार से जोड़ा जाएगा तो वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। स्वयंसेवी संस्थाओं का भी लिया जाएगा सहयोग विद्यालयों में कार्यक्रमों के आयोजन के लिए स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं और विशेषज्ञों का सहयोग भी लिया जाएगा। शासन ने निर्देश दिए हैं कि गतिविधियों को अधिक प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इसमें शामिल हो सकें। इसके साथ ही विद्यालयों में आयोजित गतिविधियों की फोटो, वीडियो और नवाचार से जुड़ी जानकारियों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा। तकनीक और नवाचार संस्कृति से जोड़ने का प्रयास योगी सरकार पहले ही निपुण भारत मिशन, स्मार्ट क्लास, डिजिटल मॉनिटरिंग और स्कूल कायाकल्प जैसे अभियानों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने पर काम कर रही है। अब 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान को उसी व्यापक विजन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी भविष्य की तकनीक और नवाचार संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

Census ड्यूटी में कोताही करने वालों पर सख्त एक्शन, कर्मचारियों की सैलरी रोकने की तैयारी

जालंधर. जनगणना कार्य में लापरवाही और गैरहाजिरी को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने 6 कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन अफसर (सैकेंडरी) जालंधर ने नगर निगम के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर एवं चार्ज अफसर को पत्र जारी कर गैरहाजिर कर्मचारियों की सूची भेजी है। साथ ही इन कर्मचारियों की सैलरी तुरंत रोकने की सिफारिश भी की गई है। पत्र में कहा गया है कि जनगणना का काम समयबद्ध और राष्ट्रीय महत्व का काम है। इसके बावजूद कई बार निर्देश देने और संपर्क करने के बाद भी संबंधित कर्मचारी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो रहे और न ही फोन कॉल का जवाब दे रहे हैं। विभाग के अनुसार कर्मचारियों का यह रवैया जनगणना अभियान में देरी का कारण बन रहा है और सरकारी काम में बाधा पैदा कर रहा है। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सिफारिश की गई है कि संबंधित कर्मचारियों की सैलरी अगले आदेश तक या ड्यूटी पूरी करने तक रोकी जाए। मामले को अति आवश्यक बताते हुए तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सुपरिंटैंडैंट इंजीनियर कम चार्ज अफसर ने इस संबंध में पत्र की प्रति खजाना अफसर जालंधर को भी भेज दी है। जनगणना ड्यूटी से नाम कटवाने सिफारिशों के ढेर लगे पूरे देश में चल रही जनगणना प्रक्रिया जालंधर में भी शुरू हो चुकी है। इस काम के लिए जालंधर नगर निगम के कमिश्नर को प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर बनाया गया है। इसके लिए सरकारी अधिकारियों और शिक्षकों को ड्यूटी दी गई थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से देखा जा रहा है कि शिक्षक और अन्य सरकारी कर्मचारी ड्यूटी से अपना नाम कटवाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं और निगम अधिकारियों पास सिफारिशों के ढेर लगे हुए हैं। सोमवार को बड़ी संख्या में शिक्षक और अन्य सरकारी कर्मचारी नगर निगम में जमा हुए और ज्वाइंट कमिश्नर डॉ. सुमनदीप कौर के दफ्तर के बाहर भीड़ देखी गई। कुछ कर्मचारियों और निगम अधिकारियों के बीच बहस भी हुई। पता चला है कि निगम अधिकारियों ने बहुत ऊंची सिफारिशों के आधार पर कुछ लोगों की ड्यूटी काट भी दी है, जबकि कईयों को आश्वासन देने के बाद भी दोबारा ड्यूटी संबंधी पत्र भेजे गए। 

कैबिनेट स्वीकृति :स्थानान्तरण नीति वर्ष-2026 का अनुमोदन: 1 जून से 15 जून तक हो सकेंगे तबादले

प्रदेश के विकास और जन-कल्याण को गति देने के लिए 30,055 करोड़ रूपये की कैबिनेट स्वीकृति स्थानान्तरण नीति वर्ष-2026 का अनुमोदन: 1 जून से 15 जून तक हो सकेंगे तबादले किसानों के हक में बड़ा फैसला: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 11,608.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के लिए 156 करोड़ रूपये की स्वीकृति लोक सेवा गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए 360 करोड़ रूपये की स्वीकृति श्रमिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं के लिए 1779.07 करोड़ रूपये की स्वीकृति अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के लिए 373 करोड़ 38 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के विकास और जन-कल्याण को गति देने के लिए कुल 30,055 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां दी गई। मंत्रि-परिषद ने राज्य के कर्मचारियों की स्थानांतरण नीति -2026 को भी मंजूरी दी है। राज्य के विभिन्न वर्गों के हित में कई बड़े निर्णय लिए गए। इसमें वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रुपये के साथ ही विभिन्न आपदाओं में किसानों को संबल देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के निरंतर क्रियान्वयन के लिए 11,608.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके साथ ही श्रमिक कल्याण की योजनाओं के लिए 1,779.07 करोड़ रुपये, सिवनी और देवास की समूह जल प्रदाय योजनाओं के लिए 593 करोड़ 24 लाख रुपये, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के संचालन के लिए 373 करोड़ 38 लाख रुपये, लोक सेवा गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए 360 करोड़ रुपये तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित शौर्य दल और चाइल्ड हेल्पलाइन योजनाओं के लिए 156 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। स्थानान्तरण नीति वर्ष 2026 का अनुमोदन मंत्रि-परिषद ने "राज्य एवं जिला स्तर पर अधिकारियों/कर्मचारियों की स्थानान्तरण नीति वर्ष 2026" का अनुमोदन किया है। स्वीकृति अनुसार इस वर्ष 01 जून 2026 से 15 जून 2026 तक की अवधि के लिये स्थानांतरण से प्रतिबंध शिथिल किया जायेगा। नीति में लिपिकीय त्रुटि सुधार, स्पष्टीकरण अथवा अन्य संशोधन करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को अधिकृत किया गया है। पद एवं संवर्ग संख्या के आधार पर अधिकतम स्थानांतरण की संख्या का निर्धारण स्थानांतरण नीति में स्पष्ट किया गया है। पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ किये जाने तथा स्वयं की गंभीर बीमारियों के प्रकरण में स्थानांतरण को विभागों के निर्धारित प्रतिशत या संख्या के अतिरिक्त रखा गया है। जिला एवं राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिले के भीतर स्थानांतरण प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से किया जायेगा। सभी विभागों के विभागाध्यक्ष तथा शासकीय उपक्रमों एवं संस्थाओं में पदस्थ प्रथम श्रेणी के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों का स्थानांतरण समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद किया जायेगा। किसानों के हक में बड़ा फैसला: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 11,608.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने किसानों को फसल हानि या क्षति होने पर वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आगामी 05 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31) तक निरंतर क्रियान्वयन के लिए 11 हजार 608.47 करोड़ रूपये की वित्तीय स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार पात्र कृषकों को प्रति कृषक प्रत्येक मौसम में न्यूनतम दावा राशि 1,000 रूपये का भुगतान करने के लिए दावा राशि और राशि 1000 के अंतर की राशि का भुगतान राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक नियम/दिशा-निर्देश जारी करने के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग को अधिकृत किया गया है। वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग अंतर्गत वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15 हजार 184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एन.एस.ए.पी.) योजना अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के 1 अप्रैल 2026 से आगामी 05 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 2,123 करोड़ 42 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई। योजना अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली 40 वर्ष से अधिक आयु की कल्याणी महिलाओं को पात्रतानुसार प्रतिमाह 600 रूपये पेंशन राशि का भुगतान किया जाता है। राज्य शासन की समग्र सामाजिक सुरक्षा योजना अन्तर्गत समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना को 1 अप्रैल 2026 से आगामी 05 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 13,061 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। योजना अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के निराश्रित वृद्ध, 18 वर्ष से अधिक आयु की कल्याणी (विधवा) महिलाएं एवं 06 वर्ष से अधिक आयु के दिव्यांग जिनकी निशक्तता 40 प्रतिशत या उससे अधिक है एवं 50 वर्ष या अधिक आयु की अविवाहिता को योजना के अंतर्गत पात्रतानुसार 600 रूपये प्रतिमाह पेंशन राशि का भुगतान किया जाता है। सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए कुल 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार सिवनी की बंडोल समूह जल प्रदाय योजना की मूल स्वीकृत लागत राशि 232 करोड़ 57 लाख रूपये के स्थान पर पुनरीक्षित योजना लागत राशि 266 करोड़ 17 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना की मूल स्वीकृत लागत राशि 237 करोड़ रूपये के स्थान पर 327 करोड़ 07 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। बंडोल समूह जल प्रदाय योजना के क्रियान्वयन में 04 ग्रामों एवं 30 बसाहटों को तथा नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के क्रियान्वयन में 21 ग्रामों और 11 छूटी हुई बसाहटों को अतिरिक्त रूप से सम्मिलित करने के साथ ही जल जीवन मिशन की गाइडलाइन अनुसार ग्रामीण परिवारों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन से जोड़ने करने के लिए जल … Read more

‘गद्दार’ टिप्पणी पर गरमाई राजनीति, राहुल गांधी के बयान से BJP नेताओं में नाराजगी

 नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी टिप्पणी की है. राहुल के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया।  राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली के धुलवारी गांव में वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण किया. इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, जब ये आरएसएस कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंभी अमित शाह की बात करेंगे तो उनसे आप उसने खुलकर कहिएगा कि आपका प्रधानमंत्री गद्दार है. आपका गृह मंत्री गद्दार है, आपका संगठन गद्दार है, आपने हिंदुस्तान को बेचने को काम किया.  आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है. आपने अंबेडकर पर हमला किया।  पीएम मोदी और अमित शाह पर राहुल का हमला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी टिप्पणी की है. इस तीखी टिप्पणी पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया।  राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, जब ये आरएसएस कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह की बात करेंगे, तब आपको उनके मुंह पर कहना होगा कि आपके प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और संगठन (भाजपा) गद्दार हैं, आपने हमारे देश को बेचने का काम किया है. आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है. आपने अंबेडकर पर हमला किया. आपने गांधी जी पर आक्रमण किया है, ये बातें आप उनसे खुलकर कह दीजिए।  राहुल गांधी के बयान पर नितिन नवीन का पलटवार राहुल के इस बयान पर बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीखा पलटवार किया है. उन्होंने राहुल गांधी के बयान को भारतीय राजनीति की शुचिता और आपसी सम्मान के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही हार की निराशा अब राहुल के स्वभाव और चरित्र में साफ दिखने लगी है।  नितिन नवीन ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी भारतीय राजनीति के 'राहू'  हैं जो देश के माहौल को गंदा कर रहे हैं.  उन्होंने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी के पूर्वजों ने हमेशा देश की जमीन को गिरवी रखने का काम किया और कभी सैनिकों का मनोबल नहीं बढ़ाया. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में पूरी सरकार भ्रष्टाचार में डूबी रहती थी, जबकि मोदी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है. आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आतंकवाद पर पूर्ण लगाम लगी है और सेना स्वाभिमान से काम कर रही है।  राहुल गांधी चुनावी हार के हताश-नितिन नवीन बीजेपी अध्यक्ष ने राहुल से सवाल करते हुए कहा कि  क्या देश की जमीन सुरक्षित रखना और नक्सलवाद खत्म करना गद्दारी है?. राहुल गांधी आपके पूर्वजों ने इस देश की जमीन को हमेशा गिरवी रखने का काम किया, कभी हमारे सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने का काम नहीं किया, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस देश की जमीन भी सुरक्षित हुई है और देश की जमीन भी मजबूत हुई है. आपके शासन काल में देश की पूरी तरह से अखंड हो गई।  बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस तरह के बयान देकर राजनीतिक विरोधियों से नहीं, बल्कि सीधे भारतीय राज्य और लोकतंत्र से लड़ रहे हैं. भंडारी के अनुसार, ऐसी भाषा केवल पाकिस्तान या उसके द्वारा समर्थित आतंकवादी ही बोल सकते हैं। राहुल गांधी के इस कृत्य से साफ होता है कि वे देश के सभी 140 करोड़ नागरिकों का अपमान कर रहे हैं। 

कौशल प्रशिक्षण से बेटियों को मिल रही नई उड़ान, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ा आत्मविश्वास

कौशल प्रशिक्षण से बढ़ रहा बेटियों का आत्मविश्वास, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे कदम भोपाल  प्रदेश की बेटियां अब आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग की योजनाएं उन्हें कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के बेहतर अवसर दे रही हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अब तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ रही हैं। कौशल प्रशिक्षण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। प्रदेश में 934 आईटीआई हैं। इनमें 290 शासकीय और 644 निजी आईटीआई शामिल हैं। इन संस्थानों में युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सत्र 2025 में शासकीय आईटीआई में 94.55 प्रतिशत प्रवेश हुआ। यह अब तक का सर्वाधिक प्रवेश प्रतिशत है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए शासकीय आईटीआई में 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। इसका अच्छा परिणाम दिखाई दे रहा है। प्रदेश की आईटीआई में वर्तमान में 71 आधुनिक ट्रेड्स में 15 हजार से अधिक महिला प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। “कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (कोपा)”, “स्टेनोग्राफर हिन्दी” और “इलेक्ट्रिशियन” जैसे ट्रेडों में बड़ी संख्या में बेटियाँ प्रशिक्षण ले रही हैं। यह बदलते माहौल और बेटियों के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। अब बेटियां नए क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने भविष्य को मजबूत बना रही हैं। महिलाओं को सुरक्षित और बेहतर वातावरण देने के लिए प्रदेश में 7 शासकीय महिला आईटीआई संचालित की जा रही हैं। वहीं 56 शासकीय आईटीआई में महिला छात्रावास सुविधा उपलब्ध है। इनमें 3400 से अधिक सीटें हैं। इससे दूर-दराज क्षेत्रों की बेटियों को भी प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का फोकस केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। विभाग महिलाओं को रोजगार से जोड़ने पर भी लगातार काम कर रहा है। विशेष महिला प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से 777 महिला प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार मिला है। इंदौर स्थित ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट द्वारा 509 महिलाओं को निःशुल्क वाहन संचालन प्रशिक्षण दिया गया। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता का भाव और मजबूत हुआ है। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और निर्धन वर्ग की 13 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को छात्रवृत्ति मिल रही है। इससे बड़ी संख्या में बेटियों को प्रशिक्षण जारी रखने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना भी बेटियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना के अंतर्गत हजारों बेटियों को उद्योगों में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग का अवसर मिला है। प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके अभ्यर्थियों में 5660 बेटियाँ शामिल हैं। सागर की सुस्नेहा रजक और रायसेन की सुलिया जैसी युवतियां प्रशिक्षण के बाद रोजगार प्राप्त कर चुकी हैं। अब वे अपने परिवार को आर्थिक संबल प्रदान कर रही हैं। महिलाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से भी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। “जीवन तरंग” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिवर्ष लगभग 3000 बेटियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं "यूएन वीमेन" के सहयोग से बेटियों को "स्टेम और सॉफ्ट स्किल्स" का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इससे बेटियाँ एडवांस तकनीक और नए कार्यक्षेत्रों से जुड़ रही हैं। परम फाउंडेशन के माध्यम से संचालित आईटीआई कौशल कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में बेटियाँ प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। धार जिले के सरदारपुर आईटीआई में संचालित कार्यक्रमों में प्रशिक्षणार्थियों का शत-प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ है। इससे बेटियों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार हुए हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत भी 64 हजार से अधिक बेटियों को कौशल प्रशिक्षण का लाभ मिला है। प्रदेश की बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। शासकीय महिला आईटीआई बैतूल की प्रशिक्षणार्थी सुत्रिशा तावड़े ने राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद परीक्षा में सेंट्रल ज़ोन में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्हें विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित कौशल दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सम्मानित किया गया। ऑल इंडिया ट्रेड टॉपर्स में मध्यप्रदेश के 10 प्रतिभागियों में 5 बेटियाँ शामिल रहीं। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 में भोपाल की शासकीय संभागीय आईटीआई की प्रशिक्षण अधिकारी श्रीमती प्रेमलता रहांगडाले को राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु द्वारा सम्मानित किया गया। वहीं इंडिया स्किल प्रतियोगिता-2024 में प्रदेश की बेटियों ने सिल्वर, ब्रॉन्ज और मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किए। यह उपलब्धियां प्रदेश की बेटियों की क्षमता और मेहनत को दर्शाती हैं। कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के प्रयासों से प्रदेश की बेटियां अब आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं। कौशल प्रशिक्षण उनके लिए रोजगार, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार बन रहा है।  

ई-रिक्शा से कैबिनेट बैठक में पहुंचे मंत्री टेटवाल और पंवार, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

ई-रिक्शा से कैबिनेट बैठक के लिए मंत्रालय पहुंचे मंत्री द्वय श्री टेटवाल और  पंवार भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों से किए गए ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के आह्वान को आत्मसात करते हुए, बुधवार को कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल और मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पंवार कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए ई-रिक्शा से मंत्रालय पहुंचे। "सुरक्षित पर्यावरण का यही आधार-ईंधन बचत हर बार" का संदेश देते राज्यमंत्री श्री टेटवाल कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संसाधनों के संयमित उपयोग का जो आह्वान किया है, उसे आत्मसात कर हम सभी को अपने आचरण से दूसरों को प्रेरित करना चाहिए। ऊर्जा बचत को जन आंदोलन बनाने की अपील मंत्री श्री टेटवाल और श्री मंत्री पंवार ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को पेट्रोल-डीजल की खपत को कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और ऊर्जा बचत को एक जनआंदोलन बनाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य में एक आत्मनिर्भर, स्वच्छ एवं सशक्त भारत के निर्माण की मजबूत नींव तैयार करेंगे।  

हरियाणा में बच्चों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता, NCRB आंकड़ों के बाद मानवाधिकार आयोग का बड़ा कदम

चंडीगढ़. हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने राज्य में बच्चों के खिलाफ लगातार बढ़ रहे अपराधों पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग ने राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की “क्राइम इन इंडिया-2024” रिपोर्ट का स्वत संज्ञान लेते हुए कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हरियाणा में बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्थिति बेहद चिंताजनक है और मौजूदा तंत्र अपेक्षित परिणाम देने में विफल साबित हो रहा है।आयोग की पूर्ण पीठ, जिसमें अध्यक्ष सेवानिवृत जस्टिस ललित बत्रा, सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया शामिल हैं, ने अपने आदेश में कहा कि एनसीआरबी रिपोर्ट के आंकड़े राज्य में बच्चों के खिलाफ अपराधों की भयावह तस्वीर पेश करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराध के 7547 मामले दर्ज किए गए, जो वर्ष 2023 की तुलना में करीब 17.9 प्रतिशत अधिक हैं। प्रति एक लाख बाल आबादी पर 82.8 अपराध दर के साथ हरियाणा देश में सबसे ऊपर है। आयोग ने क्या कहा? आयोग ने कहा कि इन मामलों में हत्या, दुष्कर्म, पोक्सो अधिनियम के तहत यौन अपराध, अपहरण, मानव तस्करी, बाल विवाह, भ्रूण हत्या और बाल उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। विशेष रूप से बालिकाओं के खिलाफ बढ़ते पोक्सो मामलों को आयोग ने बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और मानसिक विकास के लिए गंभीर खतरा बताया। आयोग ने यह भी कहा कि लापता बच्चों और अपहरण के मामलों में वृद्धि नाबालिगों की तस्करी और शोषण की आशंकाओं को और बढ़ाती है।आयोग ने अपने आदेश में कहा कि संवैधानिक और वैधानिक संरक्षण होने के बावजूद बच्चों के खिलाफ हिंसा, उपेक्षा और शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। आयोग ने माना कि स्कूलों, छात्रावासों, बाल देखभाल संस्थानों और अन्य सामाजिक संस्थाओं में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए निगरानी तंत्र, शिकायत निवारण प्रणाली और परामर्श सेवाएं प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रही हैं।आयोग ने गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, विद्यालय शिक्षा विभाग, पुलिस महानिदेशक और विशेष किशोर पुलिस इकाइयों के नोडल अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इन रिपोर्टों में पोक्सो मामलों की जांच, दोषसिद्धि दर, बाल संरक्षण उपाय, पुनर्वास सेवाएं, स्कूल सुरक्षा व्यवस्था और जिला स्तर पर अपराधों की स्थिति का ब्यौरा शामिल होगा। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।

पंजाब पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अमृतसर में पकड़ा गया दुबई कनेक्शन वाला ड्रग मॉड्यूल

अमृतसर. अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस को नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग स्मगलिंग मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 किलो ICE (मेथामफेटामाइन) और 4 किलो हेरोइन बरामद की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी दुबई और अबू धाबी में बैठे एक ड्रग तस्कर के संपर्क में थे और उसके निर्देशों पर पंजाब तथा दिल्ली में नशे की सप्लाई कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों में से एक हाल ही में दुबई से वापस लौटा था, जहां उसे कथित तौर पर नशा तस्करी की ट्रेनिंग दी गई थी। उसे हेरोइन और ICE की खेपों को पंजाब पहुंचाने और आगे सप्लाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी माजहा और दोआबा क्षेत्रों में बड़े स्तर पर नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे थे। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और इसके अंतरराष्ट्रीय लिंक की जांच में जुटी हुई है। इस संबंध में थाना छेहरटा, अमृतसर में NDPS एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी और अतिरिक्त बरामदगी होने की संभावना है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी उजागर, पैसा लेने के बाद मकान नहीं बनाने वालों पर कार्रवाई

तखतपुर/रायपुर. प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि लेकर वर्षों तक मकान निर्माण नहीं करने वाले हितग्राहियों पर अब नगर पालिका प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है. योजना की पहली किस्त हड़पकर बैठे 455 हितग्राहियों को अंतिम नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे के भीतर निर्माण कार्य शुरू करने या सरकारी राशि वापस जमा करने का अल्टीमेटम दिया गया है. आदेश का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ एफआईआर, रिकवरी और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-22 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सैकड़ों हितग्राहियों को मकान निर्माण के लिए लगभग 55 से 56 हजार रुपये की प्रथम किस्त जारी की गई थी. लेकिन चार से पांच साल बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में हितग्राहियों ने न तो मकान निर्माण शुरू किया और न ही राशि लौटाई. इस कारण योजना की करोड़ों रुपये की राशि फंस गई है. नगर पालिका प्रशासन के मुताबिक ऐसे 455 हितग्राहियों के पास करीब ढाई करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि अटकी हुई है. अब प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए सभी को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है. नोटिस मिलते ही एक हितग्राही ने पूरी राशि वापस जमा कर दी, जबकि दो अन्य ने किस्तों में राशि लौटाने की अनुमति मांगी है. मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमरेश सिंह ने स्पष्ट कहा है कि जिन हितग्राहियों ने शासन की राशि लेने के बाद भी आवास निर्माण नहीं किया है, उनके खिलाफ अब किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी. 24 घंटे के भीतर कार्य प्रारंभ नहीं करने अथवा राशि वापस नहीं करने पर एसडीएम कोर्ट में रिकवरी प्रकरण दर्ज किया जाएगा और संबंधित लोगों पर एफआईआर भी कराई जाएगी.