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सायबर धोखाधड़ी होने पर अविलंब 1930 पर करें शिकायत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सायबर खतरा एक ऐसा अदृश्य दुश्मन है , जो बिना दस्तक दिए हमारे घरों तक पहुंच रहा है। सायबर खतरों को समझना ही उनसे बचने का सबसे बड़ा रास्ता है। सावधानी ही सुरक्षा है और जानकारी ही बचाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, डीप-फेक, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी, ऑनलाइन शॉपिंग ठगी, रैनसमवेयर हमले और फर्जी निवेश लिंक जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की जनता को सायबर सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण सूत्र 'जागरूकता, सावधानी और सहभागिता' के बारे में बताकर कहा कि जो लोग सायबर सुरक्षा की जानकारी रखते हैं, वे दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘राज्य व्यापी सायबर जागरूकता अभियान’ के तहत "सेफ क्लिक 2.0'' के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह अभियान 24 जून से शुरू होकर 8 जुलाई तक प्रदेश के 10 संभाग, 55 जिलों और 50 हजार से अधिक गांव में एक साथ चलेगा। इस अभियान के तहत सायबर ठगी और अन्य अपराधों से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सायबर जागरूकता अभियान के पोस्टर, स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई सायबर जागरूकता बुकलेट्स तथा अभियान के ऑफिशियल वीडियो का विमोचन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर जागरूकता रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। समापन पर प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के संचालन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय मध्यप्रदेश पुलिस हमेशा संकटमोचक हनुमान की भूमिका में रहती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश में विभिन्न सायबर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 33 लाख से अधिक नागरिकों को जागरूक किया गया। अब अभियान का विस्तार पंचायतों, स्कूलों, बैंकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के 56 विभागों की लगभग 1700 सेवाएं एकीकृत पोर्टल पर उपलब्ध हैं और इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में सायबर खतरे अदृश्य रूप में हमारे जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और कंप्यूटर के माध्यम से होने वाले सायबर अपराधों से बचाव के लिए सावधानी और जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अपराधों के प्रति प्रदेशवासियों को जागरुक करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस का "सेफ क्लिक 2.0'' सायबर जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अभियान से प्रदेश के सभी नागरिक जागरूक होंगे। उन्होंने कहा कि सायबर अपराधी एक प्रकार से डिजिटल दौर के राक्षस हैं, जो दबे पाँव लैपटॉप, कम्प्यूटर और मोबाइल के जरिए हमारे साथ सेंधमारी और डकैती करते हैं। आजकल डिजिटल अरेस्ट, डीप फेक, डेटा ब्रीजिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, रेनसमवेयर अटैक जैसे अनेक प्रकार के सायबर अपराध संचालित हैं। लेकिन सायबर अपराधों के मामले में सावधानी ही बचाव है। मध्यप्रदेश पुलिस ने देश में पहली बार सायबर डकैती का लाइव पर्दाफाश किया था। इसके लिए मध्यप्रदेश पुलिस बधाई की पात्र है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष अपने सायबर जागरुकता अभियान के माध्यम से लगभग 33 लाख से अधिक नागरिकों को सतर्क किया था। इस वर्ष 15 दिन तक चलने वाले "सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में हर दिन अलग थीम रखी गई है। इस दौरान लोगों को बैंकिंग, महिला सुरक्षा, ग्रामीण इलाकों में जागरुकता के बारे में बताया। यह अभियान बैंकों, बाजारों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर संचालित किया जाएगा। इसके लिए लोकरंजन के रुचिकर कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। सायबर सुरक्षा को जागरूकता, सावधानी और सहभागिता के माध्यम से प्रभावी बनाया जाएगा। सायबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के बारे में लोगों को बताया जा रहा है। यह नंबर सायबर अपराध के मामले में सबसे पहले पीड़ितों की ढ़ाल बनता है। लालच और जल्दबाजी कर सकती है आर्थिक नुकसान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि अगर आपको कोई अनजान लिंक मिले या डराने धमकाने की कॉल आए तो "रुको, सोचो और फिर एक्शन लो''। लालच और जल्दबाजी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। पुलिस के अभियान को जन जागरुकता अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में हम सभी सहभागी बनें। राज्य सरकार ने सायबर अपराध के विरुद्ध मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया है। नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा एक्ट को भारत सरकार ने लागू किया है। प्रदेश में कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है। राज्य शासन के 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाओं को एक पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। यह एक प्रशंसनीय पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि "सेफ क्लिक 2.0'' अभियान में बैकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों सबको जोड़ा गया है। अभियान को शुरू करने का यही सही समय है, क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालयों में प्रवेश ले रही है। जागरुकता ही सायबर क्राइम से बचने का है सुरक्षा कवच : डीजीपी मकवाना पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून से 8 जुलाई तक सेफ क्लिक 2.0 सायबर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज सायबर अपराध केवल एक आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह समाजिक विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा के भी जुड़ा गंभीर विषय है। पिछले कुछ वर्षों में सायबर अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और करीब 80 प्रतिशत शिकायतें वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित होती हैं। डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल, फर्जी सिमकार्ड, म्यूल बैंक अकाउंट, महिला एवं बच्चों के जुड़े अपराधों की संख्या भी बढ़ी है। मध्यप्रदेश पुलिस सायबर अपराध पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है- रोकथाम, अनुसंधान और जागरुकता। इसी दिशा में 25 दिसंबर 2025 से प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर की शुरुआत की गई है। वर्तमान में 1 लाख रुपए तक की सायबर धोखाधड़ी की … Read more

ममता सरकार पर बढ़ा दबाव, ₹2.29 लाख करोड़ के कथित नुकसान पर CAG रिपोर्ट से सियासी हलचल

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद लगातार राज्य में हलचल मची हुई है. पहले ममता बनर्जी चुनाव हार गईं फिर उनकी पार्टी टूट गई. अब ताजा मामला यह है कि उनके सरकार के दौरान 2.29 लाख करोड़ रुपए गायब होने का आरोप लग रहा है.  जिसके बाद माना जा रहा है कि राजनीति में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा बवंडर उठने वाला है. मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, बीजेपी सरकार अब विधानसभा में पिछले चार सालों की लंबित सीएजी (CAG) ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रही है. यह मामला सीधे तौर पर साल 2011 से 2020 के बीच खर्च हुए 2.29 लाख करोड़ रुपये के उपयोग प्रमाण पत्र (UCs) से जुड़ा है, जो अभी तक जमा नहीं किए गए हैं. समझते हैं पूरी बात।  पैसों का हिसाब ही नहीं दिया गया! सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी विभाग को मिले सरकारी अनुदान के बाद उसका उपयोग प्रमाण पत्र यानी ‘यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट’ जमा करना अनिवार्य होता है. यह सर्टिफिकेट बताता है कि पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ. लेकिन हैरानी की बात यह है कि बंगाल सरकार ने इतने लंबे समय तक इन प्रमाण पत्रों को जमा ही नहीं किया. इस लापरवाही ने अब राज्य के सरकारी खजाने की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले विपक्ष में रही बीजेपी इन दिनों राज्य में सरकार चला रही है. अब बीजेपी का आरोप है कि इतने बड़े फंड का बिना हिसाब-किताब के खर्च होना सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन है।  पंचायत और शिक्षा विभाग सबसे ज्यादा संदेह में मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएजी की साल 2020-21 की आखिरी रिपोर्ट में सबसे बड़ी गड़बड़ियां पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में पाई गई थीं. इस विभाग के करीब 81,839 करोड़ रुपये के यूसी पेंडिंग थे. इसके बाद स्कूली शिक्षा विभाग का नंबर आता है, जिसके 36,850 करोड़ रुपये का हिसाब अभी तक स्पष्ट नहीं है. शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के विभाग के भी 30,693 करोड़ रुपये का कोई ठोस ब्यौरा नहीं मिला है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि जनता के पैसे का इस्तेमाल किस तरह सवालों के घेरे में रहा है।  आपदा राहत फंड में भी बड़ी धांधली सिर्फ सामान्य विभागों की बात नहीं है, बल्कि आपदा राहत फंड के साथ भी खेल हुआ है. मार्च 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक, सीएजी ने बताया था कि 3,400 करोड़ रुपये के 11,321 ‘डिटेल्ड कंटिजेंट’ (DC) बिल जमा ही नहीं किए गए. ये बिल तब जरूरी होते हैं जब सरकार ‘एब्स्ट्रैक्ट कंटिजेंट’ (AC) बिलों के जरिए पैसा निकालती है. तय समय सीमा खत्म होने के बावजूद इन बिलों का न आना बड़ी वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।  बजट सत्र में मचेगा सियासी घमासान अब बीजेपी सरकार 2021-22 से लेकर 2024-25 तक की उन रिपोर्टों को भी सदन के पटल पर रखने जा रही है, जिन्हें पिछली सरकार ने छिपाए रखा था. आने वाले बजट सत्र में इन रिपोर्टों के पेश होते ही ममता बनर्जी की सरकार की आखिरी चार सालों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार होना तय माना जा रहा है. प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या ये रिपोर्टें केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेंगी या फिर इनके आधार पर कोई कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जाएगी. टीएमसी के लिए यह सदन में अपनी सफाई देना सबसे बड़ी चुनौती होने वाली है। 

ऋषभ पंत ने छोड़ा LSG का साथ, दिल्ली कैपिटल्स में वापसी से पहले लिखा भावुक संदेश

 नई दिल्ली दिल्ली कैपिटल्स में वापसी तय होने के बाद विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के लिए एक छोटा लेकिन भावुक विदाई संदेश साझा किया है। पंत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर LSG की फेयरवेल पोस्ट को रीशेयर करते हुए सिर्फ तीन शब्द लिखे – Thank You Team. इसी के साथ लखनऊ फ्रेंचाइजी के साथ उनका दो साल का सफर औपचारिक रूप से समाप्त हो गया।  पंत की यह प्रतिक्रिया उस हाई-प्रोफाइल ट्रेड के बाद आई है, जिसके तहत वह दिल्ली कैपिटल्स में लौट रहे हैं. इस डील में भारतीय टीम के स्टार स्पिनर कुलदीप यादव दिल्ली से लखनऊ सुपर जायंट्स का हिस्सा बने हैं।  IPL 2025 मेगा ऑक्शन से पहले लखनऊ सुपर जायंट्स ने ऋषभ पंत को 27 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर अपने साथ जोड़ा था. उस समय वह IPL इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बने थे. फ्रेंचाइजी को उम्मीद थी कि पंत की कप्तानी में टीम खिताब की मजबूत दावेदार बनेगी, लेकिन मैदान पर तस्वीर अलग नजर आई।  पंत की अगुआई में LSG का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका. IPL 2025 में टीम ने 14 मैचों में छह जीत और आठ हार के साथ सातवें स्थान पर अभियान खत्म किया. इसके बाद IPL 2026 सीजन और भी निराशाजनक रहा, जहां लखनऊ 10 टीमों की पॉइंट टेबल में सबसे नीचे रही. टीम ने 14 मुकाबलों में सिर्फ चार जीत दर्ज कीं।  बल्लेबाजी में भी पंत अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दोहरा सके. IPL 2025 में उन्होंने 14 मैचों में 269 रन बनाए. वहीं IPL 2026 में उनके बल्ले से 312 रन निकले, जिसमें सिर्फ एक अर्धशतक शामिल रहा।  अब पंत एक बार फिर उस टीम में लौट रहे हैं, जहां से उन्होंने IPL में अपनी पहचान बनाई थी. इस ट्रेड के तहत उनकी सैलरी में भी बड़ी कटौती हुई है. लखनऊ में 27 करोड़ रुपये पाने वाले पंत अब 15 करोड़ रुपये में दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा बनेंगे।  दिल्ली कैपिटल्स के साथ पंत का रिश्ता काफी पुराना रहा है. उन्होंने 2016 से 2024 के बीच फ्रेंचाइजी के लिए 111 मैच खेले थे. इसके अलावा 2021 से 2024 तक टीम की कप्तानी भी संभाली और 43 मुकाबलों में दिल्ली की अगुआई की।  दूसरी ओर, इस बड़े ट्रेड के तहत बाएं हाथ के रिस्ट स्पिनर कुलदीप यादव दिल्ली कैपिटल्स छोड़कर लखनऊ सुपर जायंट्स से जुड़ गए हैं. कुलदीप अपनी मौजूदा 13.50 करोड़ रुपये की सैलरी पर ही नई फ्रेंचाइजी का हिस्सा बने हैं।  ऋषभ पंत की घर वापसी और कुलदीप यादव के लखनऊ जाने से IPL 2027 से पहले दोनों फ्रेंचाइजियों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि क्या दिल्ली में लौटकर पंत एक बार फिर अपने पुराने रंग में नजर आते हैं। 

आवास योजना में कट मनी विवाद, आरोपों के बाद TMC नेताओं ने लौटाई रकम

 कूचबिहार पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में सीतलकुची ब्लॉक की भैरथाना ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 194 के तहत आने वाले छोटे बांगदाकी गांव में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. यह विवाद 'आवास योजना' के तहत घर बनाने की सुविधा दिलाने के बदले ग्रामीणों से 'कट मनी' यानी गैर-कानूनी कमीशन या रिश्वत वसूलने के गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुआ।  स्थानीय लोगों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के तीन स्थानीय नेताओं- मनोज अधिकारी, उत्तम बर्मन और क्षितीश देब शर्मा ने सरकारी आवास योजना का फायदा दिलाने का वादा करके ग्रामीणों से पैसे लिए थे।  खबरों के मुताबिक, जनता के भारी दबाव और बढ़ते गुस्से की वजह से इन तीनों नेताओं ने हाल ही में कई स्थानीय निवासियों को करीब 90,000 रुपए वापस किए।  आरोपों पर क्या बोले TMC नेता? पैसे वापस करने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में इस पर बहस छिड़ गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि नेताओं के द्वारा हर लाभार्थी से रिश्वत के तौर पर 8,000 से 10,000 रुपए तक वसूले जाते थे।  आरोपों के बारे में पूछे जाने पर टीएमसी नेता मनोज अधिकारी ने कहा, "पार्टी के निर्देशों के मुताबिक कुछ फंड इकट्ठा किए गए थे. हालांकि, निवासी अब अपने पैसे वापस मांग रहे हैं, इसलिए हम उन्हें पैसे लौटा रहे हैं।  TMC के ही एक अन्य नेता उत्तम बर्मन ने भी इसी बात को दोहराया. वहीं, TMC नेता क्षितीश देब शर्मा के बेटे अक्षय देब शर्मा ने बताया कि उस खास दिन कई निवासियों को कुल 13,000 रुपए वापस किए गए थे। 

JSCA स्टेडियम में अव्यवस्था बनी हादसे की वजह, 4 में से सिर्फ एक गेट खुलने से भगदड़

रांची. जेएससीए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में जेपीएल-20 फाइनल मुकाबला देखने पहुंचे क्रिकेट प्रेमियों को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। फाइनल मैच को लेकर उमड़ी अप्रत्याशित भीड़ और जेएससीए और पुलिस-प्रशासन की कमजोर तैयारी के कारण नॉर्थ गेट पर अफरातफरी मच गई। पहले लोगों को नॉर्थ गेट से प्रवेश कराया जा रहा था। भीड़ अधिक हो जाने से लोगों को साउथ गेट से प्रवेश करने के लिए बोल दिया गया। इसी को लेकर भगदड़ हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि गेट पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। नाराज दर्शकों ने बाद में वेस्ट गेट को तोड़ दिया।  बच्चे, महिलाएं और युवा हुए चोटिल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्टेडियम में प्रवेश के दौरान हजारों दर्शक एक साथ नॉर्थ गेट की ओर पहुंच गए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल और बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं थी। इसी दौरान धक्का-मुक्की शुरू हुई और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। भगदड़ में बच्चे, महिलाएं और युवा भी चोटिल हो गए। इस बीच स्टेडियम के बाहर लगे लोहे की बैरिकेडिंग टूट गई। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन के तमाम आला पदाधिकारी घटना स्थल पहुंचे और पूरे मामले को जानने का प्रयास में लगे रहें। दजनों लोग हुए घायल आठ गंभीर रूप से हुए जख्मी घटना में कम से कम आठ क्रिकेट प्रेमियों के घायल होने की पुष्टि हुई है। इनमें से पांच घायलों को राज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि दो घायलों को सदर अस्पताल और एक को पारस अस्पताल पहुंचाया गया। दर्जनों घायलों को निजी अस्पतालों में प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। राज अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि सभी घायल खतरे से बाहर हैं और उनका उपचार किया गया है। हालांकि एक लड़की के पेट में गंभीर चोट लगी है, जिसके कारण उसे निगरानी में रखा गया है। सिर्फ एक गेट खोला गया घटना के बाद पुलिस और स्टेडियम प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फाइनल मुकाबले को लेकर बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की संभावना पहले से थी, बावजूद इसके भीड़ प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था नहीं दिखी। कई दर्शकों ने आरोप लगाया कि गेट पर न तो पर्याप्त सुरक्षा कर्मी मौजूद थे और न ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था थी। स्टेडियम में प्रवेश के लिए चार गेट है लेकिन एक ही गेट खोला गया जिससे भगदड़ मच गई। इसमें भी जब भीड़ अधिक होने लगी तो गेट बंद कर दिया गया और लोग बेकाबू हो गए। जबकि अंदर स्टेडियम में काफी जगह थी। चारों ओर बिखरे पड़े हैं चप्पल-जूता स्टेडियम के बाहर और अंदर लोगों के अफरा-तफरी के दौरान चप्पल-जूता बिखरा पड़ा है। हालांकि घंटों प्रयास के बाद स्थिति पर काबू पाया गया लेकिन इस बीच महिला, बच्चे व युवाओं को काफी चोट लगी। दर्जनों लोग हल्के चोट लगने के बाद किसी तरह वापस अपने घर को चले गए लेकिन अधिक घायलों को अस्पताल ले जाया गया। दर्जनों एंबुलेंस भेजी गईं रांची के सिविल सर्जन डा. प्रभात कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही स्टेडियम परिसर में देर रात तक लगातार 108 एंबुलेंस भेजी जाती रही। रात 11.30 बजे तक सदर अस्पताल में दो, पारस अस्पताल में एक और राज अस्पताल में पांच घायलों को इलाज के लिए लाया गया। उन्होंने बताया कि सभी घायलों का इलाज कराया जा रहा है और प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बना हुआ है। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को सदर अस्पताल में भी शिफ्ट किया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि देर रात तक कुछ और घायल इलाज के लिए पहुंच सकते हैं। बड़े आयोजन में सुरक्षा प्रबंधन पर फिर सवाल जेपीएल फाइनल जैसे बड़े आयोजन में हुई इस घटना ने एक बार फिर राजधानी में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। खेल प्रेमियों का कहना है कि मैच का रोमांच देखने पहुंचे लोगों को स्टेडियम प्रबंधन की ओर से अव्यवस्था और लापरवाही की कीमत चोट खाकर चुकानी पड़ी। अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई और घटना की जांच पर टिकी है। लोगों ने स्टेडियम प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों के अंदर काफी गुस्सा भरा हुआ था।

पंजाब में निकाय चुनाव की सरगर्मी तेज, 30 उम्मीदवारों ने भरा नामांकन, 5 जुलाई को वोटिंग

चंडीगढ़. पंजाब में निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य चुनाव आयोग द्वारा चार निकायों में होने वाले चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहले दिन उम्मीदवारों की ओर से कुल 30 नामांकन पत्र दाखिल किए गए, जिससे चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म होता दिखाई दे रहा है। इन चुनावों के तहत होशियारपुर नगर निगम, गुरु हरसहाय नगर परिषद, जलालाबाद नगर परिषद और ममदोट नगर पंचायत में मतदान कराया जाएगा। कुल 95 वार्डों में होने वाले इन चुनावों के लिए उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश करनी शुरू कर दी है। चुनाव आयोग के अनुसार नामांकन प्रक्रिया 25 जून तक जारी रहेगी। दोपहर 3 बजे तक होते हैं नामांकन दाखिल नामांकन पत्र प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्वीकार किए जा रहे हैं। इसके बाद 25 जून को ही नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। 26 जून को सभी नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 27 जून को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उम्मीदवारों को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लेने का अवसर मिलेगा। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान प्रक्रिया पांच जुलाई को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित की जाएगी। मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के माध्यम से कराया जाएगा, जिससे प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मतदान समाप्त होने के बाद उसी दिन सभी मतदान केंद्रों पर मतगणना भी संपन्न कराई जाएगी। संबंधित क्षे9ों में आचार संहिता लागू चुनाव आयोग ने कहा है कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं ताकि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकें। सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। चुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके चलते राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनावी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। प्रशासन की ओर से सभी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

रायगढ़ स्टील प्लांट में बड़ा हादसा, फर्नेस विस्फोट में 4 श्रमिक झुलसे

रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से बड़ी खबर सामने आई है। पूंजी पथरा स्थित रायगढ़ इस्पात संयंत्र में फर्नेस ब्लास्ट हुआ है, जिसकी चपेट में आने से करीब 4 मजदूर घायल हो गए हैं। सभी घायलों को तत्काल अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के अनुसार, फर्निश में अधिक नमी (मॉइश्चर) जमा हो जाने के कारण ब्लास्ट होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक सभी घायलों की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। घायलों में अमरेश कुमार, फिरोज आलम खान और रामनाथ सूर्यवंशी (जांजगीर-चांपा) शामिल हैं, जबकि एक अन्य घायल की पहचान अभी नहीं हो सकी है। सभी घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है, हालांकि इनमें से दो घायलों को बेहतर उपचार के लिए रेफर करने की तैयारी है। ब्लास्ट होने की बात से इस्पात के जीएम ने किया इनकार रायगढ़ इस्पात के जीएम सुनील पांडा ने कहा कि बरसात के समय में फर्नेस में रॉ मैटेरियल के कारण नमी (मॉइश्चर) आ जाता है। नमी आने की वजह से जब फर्नेस हिट होता है तो कभी-कभी उसमें गैस का फॉर्मेशन हो जाता है। गैस ऊपर निकलने के कारण धुआं काफी फैल गया और आसपास मौजूद मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान ऊपर कार्य कर रहे कुछ मजदूरों ने घबराहट में इधर-उधर छलांग लगा दी, जिसकी वजह से उन्हें चोटें आई हैं। उन्होंने ब्लास्ट होने की बात से इनकार किया है और कहा कि यह घटना अफरा-तफरी के कारण हुई है। इस घटना में करीब चार लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद उद्योग प्रबंधन के अधिकारी अपेक्स अस्पताल में मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं मौके पर औद्योगिक स्वास्थ्य विभाग की टीम और पुलिस भी पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।

गुणवत्ता की निगरानी के लिए मानक मापदंड तय किए जाएं: राज्यपाल पटेल

गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल  राज्यपाल ने सिकल सेल उन्मूलन अभियान की प्रगति पर हर्ष व्यक्त किया लोक भवन में जनजातीय कार्य विभाग समीक्षा बैठक हुई भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं की मंशा और क्रियान्वयन की व्यवहारिकता में संवेदनशीलता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः तकनीकी विषय है, इसलिए हितग्राहियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निर्माण सामग्री एवं कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड निर्धारित किए जाए। अधिकारियों द्वारा निगरानी मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता परीक्षण करना चाहिए।       राज्यपाल पटेल लोक भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल को बैठक में पीएम-जनमन योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक, 7 हितग्राही मूलक योजनाओं और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 17 विभागों की 25 योजनाओं  की प्रगति की जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की पहल पीएम-जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजनाएं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के लिए निर्धारित समय सीमा तक कार्य की रीति-नीति उचित नहीं है। रणनीति, समय सीमा से पहले कार्य पूरा करने की होनी चाहिए। नए कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्व अनुभवों और चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के प्रयासों को आवश्यकता और बहुलता की प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन की औपचारिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। राज्यपाल पटेल ने प्रदेश में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के तीव्र गति से क्रियान्वयन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 से पूर्व वर्ष 2026 तक लक्ष्य का पूरा होना अनुमानित है। उन्होंने सभी संबंधितों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की आयु तक के सिकल सेल रोगी वाहक के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भावी जीवन सुरक्षित हो जाएगा। जरूरी है कि सिकल सेल की दवाओं की उपलब्धता सदैव सुनिश्चित रहे। एलोपैथिक उपचार पद्धति के साथ ही आयुर्वेद औषधियों के उपयोग के संबंध में जन जागरण के प्रयासों की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ने और थकान में कमी के उत्साह जनक प्रारंभिक परिणाम प्राप्त हुए है। राज्यपाल ने बैठक में जनजातीय बहुल क्षेत्रों की तहसीलवार बुनियादी सुविधाओं का मानचित्र तैयार कर प्रभावी निगरानी, जन औषधि केन्द्रों के संचालन में जनजातीय युवाओं की भागीदारी तथा विद्यालयों में छात्राओं, छात्र के पृथक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया। समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।  

IAEA का ईरान को सख्त संदेश, परमाणु स्थलों के निरीक्षण पर नहीं होगा समझौता

 टोक्यो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बुधवार को संकेत दिया कि ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट साइट्स का निरीक्षण उनकी टीम द्वारा किया जाएगा. यह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. IAEA प्रमुख का यह इस मामले में अब तक का सबसे स्पष्ट बयान है. संयुक्त राष्ट्र की यह परमाणु निगरानी एजेंसी ईरान के परमाणु भंडार की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।  इजरायल ने ईरान के साथ 2025 में 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान उनके परमाणु स्थलों को निशाना बनाया था. अमेरिका ने भी B-2 बमवर्षक विमानों से ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फहान न्यूक्लियर फैसेलिटी पर हमले किए थे. इन हमलों के बाद से ईरान ने IAEA को उन परमाणु सुविधाओं तक पहुंचने से रोक रखा है. इन परमाणु सुविधाओं में ईरान के पास इतना उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम होने का अनुमान है कि यदि वह चाहे तो लगभग 10 परमाणु बम बना सकता है।  ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है. हालांकि, वह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास बिना किसी घोषित वेपन प्रोग्राम के 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है. इन परमाणु स्थलों का IAEA की टीम द्वारा निरीक्षण करने के मामले में अमेरिका और ईरान ने 23 जून को विरोधाभासी बयान दिए थे. अमेरिका ने दावा किया था कि ईरान ने अपने परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने की अनुमति दे दी है. वहीं, ईरान ने इस तरह की कोई अनुमति देने से इनकार किया था।  ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण होकर रहेगा: IAEA जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने पत्रकारों से कहा, 'मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, वे वास्तविकता का हिस्सा हैं. लेकिन मैं आपको यह याद दिलाना चाहता हूं कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. उस समझौते में स्पष्ट रूप से लिखा है कि परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी IAEA द्वारा की जाएगी. जाहिर है, ऐसा करने के लिए हमें निरीक्षण करना होगा. यह निरीक्षण परसों हो, एक हफ्ते बाद हो या 10 दिन बाद, यह महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि यह होगा।  ये निरीक्षण इसलिए बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि समझौते के तहत ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम संवर्धित स्तर तक लाने यानी 'डाउनब्लेंड' करने की बात कही गई है. ईरान की ओर से ग्रॉसी के इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मंगलवार को तेहरान में पत्रकारों से कहा था कि पिछले साल अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों के आने की कोई योजना नहीं है।  उन्होंने यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणी को खारिज करते हुए दिया था. पिछले साल के 12 दिन तक चले युद्ध के बाद से IAEA को ईरान के कुछ अन्य परमाणु स्थलों, जैसे बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, का दौरा करने की अनुमति दी गई है. लेकिन संवर्धन स्थलों तक पहुंच न होने के कारण एजेंसी यह सत्यापित नहीं कर पा रही है कि ईरान के यूरेनियम भंडार की वास्तविक स्थिति क्या है और यूरेनियम संवर्धन में इस्तेमाल होने वाली सेंट्रीफ्यूज मशीनों की स्थिति कैसी है. ईरान और IAEA दोनों का कहना है कि तेहरान फिलहाल यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है. हालांकि, परमाणु विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित कर सकता है। 

सांसदों के जाने के बाद उद्धव की बढ़ीं मुश्किलें, अब दफ्तर को लेकर नया विवाद

मुंबई  लोकसभा सांसदों की बगावत के झटके से उबर रही शिवसेना (यूबीटी) की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं. पार्टी को अब संसद में एक और बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. पार्टी के 6 सांसदों के शिवसेना (शिंदे) में विलय के बाद न सिर्फ उसकी संसदीय ताकत घटेगी, बल्कि संसद भवन परिसर में मिले उसके दफ्तर पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।  सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल में सिर्फ चार सांसद ही बाकी रह जाएंगे।   संसद के नियम के तहत आमतौर पर पांच या उससे ज्यादा सांसदों वाले दलों को ही संसद भवन परिसर में अलग दफ्तर आवंटित किया जाता है. ऐसे में पार्टी को अपने वर्तमान कार्यालय से हाथ धोना पड़ सकता है।  संसदीय गतिविधियों में पार्टी की भागीदारी पर पड़ सकता है असर सांसदों की संख्या घटने का असर राजनीतिक और संसदीय गतिविधियों में पार्टी की भागीदारी पर भी पड़ सकता है. अहम राष्ट्रीय और संसदीय मुद्दों पर केंद्र सरकार की ओर से बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठकों में आमतौर पर पांच से कम सांसदों वाले दलों को आमंत्रित नहीं किया जाता है. ऐसे में भविष्य में शिवसेना (यूबीटी) की इन बैठकों में मौजूदगी पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।  फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल का दफ्तर संविधान सदन (पुराना संसद भवन) के कमरा नंबर 128A में स्थित है. ये दफ्तर अविभाजित शिवसेना को आवंटित कमरे नंबर 128 के ठीक बगल में है. सांसदों की संख्या में संभावित कमी के बाद इस कार्यालय के आवंटन की स्थिति पर भी नजरें टिकी हुई हैं।  महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा पिछले कई दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' खूब चर्चा में हैं. इस दलबदल को एकनाथ शिंदे का 'ऑपरेशन टाइगर' कहा जा रहा है. शिवसेना पर आए इस संकट को राज्यसभा सांसद संजय राउत सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. संजय राउत दिल्ली में हैं. वहीं पार्टी के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई भी दिल्ली में ही ठहरे हुए हैं.  बताया जा रहा है कि संजय राउत दलबदल को रोकने के लिए किताबों और संसदीय प्रक्रिया का अध्यन करने में लगे हैं।  संजय राउत और अनिल देसाई ने दिल्ली के प्रमुख वकीलों के साथ इस बात पर बातचीत की कि अगर छह सांसद बेहतर अवसरों की तलाश में अगर पार्टी बदल लेते हैं तो उसमें क्या कानूनी उपाय किए जाने चाहिए. इसको लेकर अनिल परब ने बताया कि अगर सुप्रीम कोर्ट यूबीटी और शिंदे गुट के धनुष-बाण चिन्ह वाले फैसले पर सुनवाई की होती तो हमारा पक्ष मजबूत होता।  शिवसेना संकट पर क्या बोले एक्सपर्ट्स? इस बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि ठाकरे के लिए इस संकट से निपटना चुनौती भरा हो सकता है, जिसे देश की राजनीति के तेजी से बदलते स्वरूप के रूप में देखा जाना चाहिए. लेखक और शिवसेना के इतिहासकार प्रकाश अकोलकर यह सब पैसे का खेल है. कोई भी पार्टी बीजेपी के पैस और संसाधनों का सामना नहीं कर सकती. सांसद से लेकर विधायक तक बिकने को तैयार हैं. बीजेपी जो ऐसा कर रही है यह बेहद शर्मनाक है।  उन्होंने कहा कि 20 से 25 साल के युवाओं की सिर्फ यही राय है कि उद्धव ठाकरे को बीजेपी का डटकर सामना करना चाहिए. एक कार्यकर्ता ने कहा कि अब समय आ गया है कोई बीजेपी के सामने खड़ा हो और देश में विपक्षी पार्टियों को खत्म करने की नापाक साजिश को पर्दाफाश करे।  वहीं दूसरी तरफ कई शिवसैनिक 'ऑपरेशन टाइगर के विरोध के लिए सड़कों पर उतरने के लिए भी तैयार हैं.' बता दें कि पार्टी बदलने वाले 6 सांसदों में संजय दीना पाटिल ने पहले कहा था कि उनकी गठबंधन में जाने की मर्जी नहीं है।