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मोदी कैबिनेट विस्तार में MP की बढ़ेगी हिस्सेदारी? महिला सांसद की दावेदारी मजबूत, कई दिग्गजों की बढ़ी बेचैनी

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कई नए चेहरों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दे सकती है। मध्य प्रदेश से भी कुछ सांसदों के नाम गंभीरता से चर्चा में हैं, जिनमें भिंड सांसद संध्या राय और हाल ही में राज्यसभा पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग प्रमुख माने जा रहे हैं। जाटव वोट बैंक पर नजर, संध्या राय का नाम सबसे आगे भिंड से दूसरी बार सांसद बनीं संध्या राय को संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में राज्यमंत्री बनाया जा सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जाटव समाज से आने वाली संध्या राय को केंद्रीय जिम्मेदारी देकर भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दलित और जाटव मतदाताओं तक मजबूत संदेश देना चाहती है। भिंड का भौगोलिक और सामाजिक समीकरण उत्तर प्रदेश से जुड़ता है, इसलिए उनका राजनीतिक उपयोग केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं माना जा रहा। तरुण चुग को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और हाल ही में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने तरुण चुग का नाम भी केंद्रीय मंत्रिमंडल के लिए मजबूत दावेदारों में शामिल है। संगठन में लंबे अनुभव और पंजाब की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए उन्हें कैबिनेट स्तर की जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव की रणनीति में भी उन्हें अहम भूमिका सौंपी जा सकती है। पुराने चेहरों की भूमिका बदलने की चर्चा सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार केवल नए मंत्रियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव संभव है। लंबे समय से केंद्र में मंत्री रहे कुछ नेताओं को संगठन में नई भूमिका दी जा सकती है, जबकि उनकी जगह नए सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व वाले चेहरों को अवसर मिल सकता है। वीडी शर्मा और गणेश सिंह भी चर्चा में खजुराहो सांसद एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम भी लगातार चर्चाओं में बना हुआ है। संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर उनकी भूमिका को लेकर मंथन जारी बताया जा रहा है। वहीं सतना से लगातार पांचवीं बार सांसद गणेश सिंह को भी कुर्मी-पटेल समाज के प्रभावशाली प्रतिनिधि के रूप में देखा जा रहा है। यदि भाजपा सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता देती है तो उन्हें भी मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है। आदिवासी प्रतिनिधित्व पर भी नजर यदि आदिवासी नेतृत्व में बदलाव होता है तो शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और खरगोन सांसद गजेन्द्र सिंह पटेल के नाम भी सामने आ सकते हैं। दोनों नेताओं की संगठन में सक्रियता और अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ को भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। चुनावी रणनीति से जुड़ा हो सकता है विस्तार राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संभावित मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक फैसला नहीं होगा, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश, पंजाब और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भी होगी। ऐसे में मध्य प्रदेश के कई सांसदों की राजनीतिक भूमिका आने वाले दिनों में बदल सकती है।हालांकि, केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित नामों को लेकर अभी तक भाजपा या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व की सहमति के बाद ही सामने आएगा। भाजपा विधायक रीति पाठक बनने वाली हैं मंत्री? वायरल खबरों के बीच खुद बता दी पूरी सच्चाई मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। इसी बीच सीधी से भाजपा विधायक और दो बार की पूर्व सांसद रीति पाठक का बयान सामने आने के बाद इन अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके मंत्री बनाए जाने की चर्चाएं तेज थीं, लेकिन उन्होंने स्वयं इन खबरों को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी की ओर से उन्हें इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई है। रीति पाठक ने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी की एक समर्पित कार्यकर्ता हैं और संगठन जिस भी जिम्मेदारी का निर्णय करेगा, उसका पूरी निष्ठा और ईमानदारी से पालन करेंगी। उन्होंने कहा कि मंत्री पद को लेकर जो खबरें सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही हैं, उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा कि पिछले कुछ दिनों से मंत्री बनाए जाने को लेकर भ्रामक और तथ्यहीन खबरें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी मनगढ़ंत अफवाहें फैलाने वालों से उनका कोई संबंध नहीं है और जनता को ऐसी खबरों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। गौरतलब है कि रीति पाठक वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में सीधी सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुई थीं। इससे पहले वह इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए दो बार लोकसभा सदस्य भी रह चुकी हैं। विधानसभा में आने के बाद से समय-समय पर उनके राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने की चर्चाएं उठती रही हैं, लेकिन अब उनके ताजा बयान ने इन सभी अटकलों को फिलहाल विराम दे दिया है। हालांकि राज्य सरकार या भाजपा संगठन की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में चर्चाएं भले जारी हों, लेकिन फिलहाल मंत्री पद को लेकर सामने आ रही खबरों की पुष्टि नहीं हुई है।

MP में 125 दिन रोजगार की गारंटी वाली ‘VB-G राम जी’ योजना होगी लागू, जिलों को नई कार्ययोजना बनाने के निर्दे

भोपाल  मनरेगा की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी जीराम जी) योजना एक जुलाई से स्थान लेने जा रही है। मध्य प्रदेश में इसकी तैयारी हो गई है। सभी जिलों को एक्शन प्लान बनाने के लिए कहा गया है। इसके पहले मनरेगा के अंतर्गत उन कार्यों को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य है, जो नई योजना में नहीं है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि इस अवधि तक काम पूरे नहीं हुए तो बचे कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का बोझ राज्य सरकार पर आएगा। इनमें गैर अनुमत कार्य जैसे तालाबों में पानी का कटाव रोकने के लिए पत्थर का बधान बनाना आदि शामिल हैं। नई योजना में कई अहम बदलाव नई योजना लागू होने के बाद कई बड़े परिवर्तन होने जा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा यह कि मनरेगा में 266 तरह के कार्य थे, जबकि नई योजना में 318 तरह के सम्मिलित किए गए हैं। वर्ष में 125 दिन रोजगार की गारंटी रहे है, जबकि मनरेगा में सौ दिन की थी। वर्ष में 60 दिन का ड्राई पीरियड रहेगा, यानी इस अवधि में काम नहीं होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ है। हालांकि, खेती की कटाई का समय इसके लिए रखा जा सकता है। कारण, इस समय मजदूर कटाई में व्यस्त रहते हैं। ग्रामीण मजदूरों को अब 100 की जगह 125 दिन का मिलेगा रोजगार उन्होंने कहा कि एकाध राज्य सरकारों ने बताया है कि "जी राम जी" कानून को नोटिफाई करने की तैयारी चल रही है, इसके बावजूद योजना 1 जुलाई से लॉन्च हो जाएगी. जी राम जी कानून के लागू होने के बाद 01 जुलाई से ग्रामीण मज़दूरों को 100 दिन की जगह 125 दिन का रोजगार मिलने लगेगा. इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए सरपंचों को ट्रेनिंग दी गयी है, ग्राम पंचायत कैसे ग्रामीण विकास की योजनाएं बनाएंगे उससे जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कर ली गयी हैं।  भारत सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी कानून को लागु करने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹95,692.31 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है. सभी राज्यों को फंड आवंटित कर दिया गया है. राज्य भी तैयार है, केंद्र भी तैयार है.राज्यों के संभावित राज्यांश सहित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।  जल संग्रहण जरूरी है शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमने लगातार यह कोशिश की है और निर्देश दिए हैं कि जो पुरानी वॉटर बॉडीज है उनको समय पर ठीक कर लिया जाए. जितनी नयी वॉटर बॉडीज बन सकती हैं बनायीं जाएं. छोटी-छोटी वाटर बॉडीज जैसी संरचनाएं तैयार की जाएं और जल के संरक्षण के जितने भी प्रकार के काम हैं. उनको इस योजना के तहत सर्वोच्च वरीयता दी जाए जिससे अगर पानी कम भी गिरे तो हम बारिश के पानी को संग्रहित कर सकें और इसका उपयोग खेती के लिए और पीने के पानी के लिए भी हम सही उपयोग कर सकें।  अल नीनो से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों की कर ली है पहचान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उन 111 ज़िलों की पहचान कर ली है जहां अल नीनो का ज्यादा असर पढ़ने की आशंका है. लेकिन असर 300 जिलों से ज्यादा पर पड़ने की आशंका है.हमने राज्यों को पूरी जानकारी दे दी है कि उनके यहां कौन-कौन से ज़िले या इलाके संवेदनशील हैं. इन सभी प्रभावित होने वाले ज़िलों में उन्हें खेती या रोजगार में जहां भी कमी आएगी "जी राम जी" कानून के तहत सभी प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा. हमारी तैयारी है कि बिना किसी परेशानी के ये ट्रांजीशन मनरेगा से "जी राम जी" कानून में हो जाएगा. हमारी कोशिश है कि कोई भी मजदूर एक दिन तो क्या 1 घंटे भी बिना रोजगार के ना रहे. कोई परेशानी उसको ना आए. E-KYC में अगर कहीं कमी रह गयी है तो सारे रास्ते हमने निकाल लिए हैं.  हमने यह सुनिश्चित कर लिया है।  बनेंगे नए जॉब कार्ड मजदूरों के नए जॉब कार्ड बनाए जाएंगे, लेकिन जब तक नहीं बनते पुराने कार्ड के आधार पर ही उन्हें रोजगार दिया जाएगा। पंचायतों को तीन श्रेणी में बांटकर विकास कार्य कराए जाएंगे। पिछड़ी, जिला मुख्यालय से दूर और अधिक एससी-एसटी आबादी वाली पंचायतों को 'सी' श्रेणी में रखा जाएगा। यानी, यहां ज्यादा काम कराए जाएंगे। इसके बाद बी श्रेणी की पंचायतों में इससे कम और ए श्रेणी वाली में सबसे कम काम होंगे। वर्गीकरण का आधार अभी तक हुए विकास कार्य होंगे।  

1 जुलाई से बदल जाएंगे LPG के कई नियम, गैस कनेक्शन, KYC और सिलेंडर बुकिंग पर पड़ेगा असर

 नई दिल्‍ली इंडेन गैस, भारत पेट्रोलियम और भारत गैस के LPG कस्‍टमर्स को बड़ा झटका लगने वाला है, क्‍योंकि 1 जुलाई से नया नियम लागू हो रहा है. आपको बुकिंग मे दिक्‍कत, गैस नेक्‍शन कटना और अन्‍य परेशानियां उठानी पड़ सकती है. लेकिन यह सभी एलपीजी यूजर्स के लिए नहीं होगी।  केंद्र सरकार ने हाल ही में एलपीजी नियम में संशोधन आदेश लागू किया है. नए नियम के तहत, जिनके पास पहले से ही PNG कनेक्शन है, उनका HP, Inden या भारत गैस LPG कनेक्शन एक महीने के भीतर काट दिया जाएगा, जो लोग स्वेच्छा से अपना LPG कनेक्शन छोड़ देते हैं, उन्हें पूरी तरह से नुकसान नहीं होगा. उन्हें एक कूपन मिलेगा जिससे वे जरूरत पड़ने पर बाद में अपना एलपीजी कनेक्शन फिर से एक्टिव कर सकेंगे।  मार्च में ही सरकार ने निर्देश दिया था कि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाने का बुनियादी ढांचा मौजूद है, वहां LPG यूजर्स को तीन महीने के भीतर PNG सिस्‍टम में बदलना होगा, नहीं तो उनका एलपीजी कनेक्शन काट दिया जाएगा. यह समय सीमा जून के अंत तक समाप्त हो रही है।  अगर पीएनजी सिस्‍टम वाले किसी भी क्षेत्र में रहने वाले जिन लोगों ने अभी तक स्विच नहीं किया है, उन्हें जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए. इसके लिए आप अपने नजदीकी पीएनजी गैस कनेक्‍शन वाली कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।  30 जून E-KYC जमा करने की लास्‍ट डेट इस नियम के अलावा, सभी एलपीजी कनेक्‍शन होल्‍डर्स के लिए ई-केवाईसी वेरिफाई करना भी जरूरी है, जिसकी लॉस्‍ट डेट 30 जून है. अगर आप इसे पूरा नहीं करते हैं, तो आपका कनेक्‍शन काटा जा सकता है. जिस कारण अगले सिलेंडर की बुकिंग करना मुश्किल हो जाएगा. जिन कस्‍टमर्स ने पहले ही अपना ई-केवाईसी पूरा कर लिया है, उन्‍हें आगे कुछ भी करने की आवश्‍यकता नहीं है।  कमर्शियल एलपीजी के पाबंदियों में छूट  सरकार ने पश्चिम एशिया में तनाव कम होने का हवाला देते हुए कमर्शियल एलपीजी सप्‍लाई पर लगे प्रतिबंधों को पहले ही हटा दिया है. इस कदम से अब घरेलू एलपीजी नियमों में भी इसी तरह की राहत मिलने की उम्मीदें बढ़ रही हैं।  दोबारा बुकिंग के नियम  फिलहाल, ग्राहकों को दोबारा बुकिंग कराने से पहले शहरों में 25 दिन और गांवों में 45 दिन का इंतजार करना पड़ता है. यह प्रतिबंध सरकार ने युद्ध के दौरान जमाखोरी रोकने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लागू किया था.  होर्मुज में परिचालन सामान्य होने के साथ ही, यह उम्मीद बढ़ रही है कि 1 जुलाई से यह अंतराल कम हो सकता है. हालांकि अभी तक इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

1 जुलाई से आपकी जेब पर असर! LPG, Credit Card और कारों से जुड़े 5 बड़े बदलाव जानिए

नई दिल्ली जून का महीना खत्म होने वाला है और 5 दिन बाद जुलाई महीने की शुरुआत हो जाएगी. हर महीने की तरह अगला महीना भी अपने साथ कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st July) को लेकर शुरू होने जा रहा है. इनमें एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव के साथ ही क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियम भी बदलने जा रहे हैं. इसके अलावा कार के शौकीनों को महंगाई का झटका लगने वाला है. आइए ऐसे ही 5 बड़े बदलावों के बारे में जानते हैं।  पहला बदलाव: LPG सिलेंडर के दाम बदलेंगे हर महीने की पहली तारीख को देश के लोगों की नजर तेल कंपनियों द्वारा एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में किए जाने वाले संशोधन पर टिकी होती है, क्योंकि ये मामला सीधे घर की रसोई के बजट से जुड़ा हुआ है. अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते गहराई मिडिल ईस्‍ट टेंशन के बीच LPG Price Hike का कई बार झटका लगा. बीते 1 जून को भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 53.50 रुपये महंगा हुआ था, जिसके बाद 19 Kg LPG Cylinder Price In Delhi 3113.50 रुपये का हो गया था. वहीं 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर पर भी महंगाई का बम फूटा था. हालांकि, 14 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई थीं।  दूसरा बदलाव: ATF की कीमतों में संशोधन जुलाई महीने की पहली तारीख से दूसरा बड़ा बदलाव हवाई सफर करने वाले यात्रियों से जुड़ा है. दरअसल, तेल कंपनियां न सिर्फ एलपीजी की कीमतों में संशोधन (LPG Price Change) करती हैं, बल्कि एयर टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के दाम में भी बदलाव करती हैं. इसकी कीमत में होने वाली बढ़ोतरी हवाई यात्रा के खर्च में बढ़ोतरी करने वाली साबित होती है, तो वहीं इसमें गिरावट खर्च में कटौती का कारण बनती है।  तीसरा बदलाव: HDFC क्रेडिट कार्ड रूल  HDFC Bank का क्रेडिट कार्ड यूज करते हैं, तो फिर आपके लिए भी 1 जुलाई 2026 की तारीख बदलाव (Credit Card Rule Change) लेकर आ रही है. दरअसल, एचडीएफसी बैंक रेगैलिया गोल्ड क्रेडिट कार्ड यूजर्स को घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की फ्री सर्विस जारी रखने के लिए तिमाही खर्च की नई लिमिट पूरी करनी होगी. ताजा संशोधन के मुताबिक, इस क्रेडिट कार्ड के यूजर्स को अगली तिमाही में इस फ्री सर्विस का लाभ लेने के लिए पिछली तिमाही में मिनिमम 60,000 रुपये खर्च करने होंगे।  चौथा बदलाव: फ्री में आधार अपडेट  जुलाई की पहली तारीख से UIDAI आधार कार्ड यूजर्स को राहत देने जा रहा है. रेग्युलेटर की ओर से जारी नोटिफिकेशन को देखें, तो Aadhaar Card पर आपकी ईमेल आईडी अपडेट नहीं है, तो 1 जुलाई से यह काम फ्री में होने वाला है. यूआईडीएआई आधार में ईमेल को अपडेट करने के लिए दिसंबर तक यानी 6 महीने के लिए फ्री सर्विस दे रहा है. इससे पहले इस काम को करने के लिए 75 रुपये का चार्ज लागू था।  पांचवां बदलाव: कार खरीदना होगा महंगा जुलाई के पहले दिन से कार खरीदारों को झटका लगने वाला है. KIA मोटर्स समेत कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी कारों के दाम बढ़ाने जा रही हैं. किआ ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, तो वहीं Tata Motors भी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और EV मॉडल्स की कीमतों में 1.5% तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी में है। 

4 जुलाई पर वैश्विक नजरें, ईरान में खामेनेई को लेकर हलचल और अमेरिका में आजादी के जश्न की तैयारियां

तेहरान  जुलाई की शुरुआत में दुनियाभर में बड़ी हलचल देखी जा सकती है. अमेरिका एक तरफ जहां बड़े जोर-शोर से चार जुलाई को अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा होगा. वहीं, ईरान अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई दे रहा होगा. इन दोनों ही घटनाओं पर दुनियाभर की नजरें होंगी।  चार जुलाई को अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ होगी. ऐसे में अमेरिका में हफ्तेभर तक कार्यक्रम किए जाएंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह चार जुलाई को नेशनल मॉल में होने वाले दुनिया के सबसे शानदार आयोजन को संबोधित करेंगे।  वहीं, ईरान तीन से पांच जुलाई तक आयुतल्लाह अली खामेनई को अंतिम विदाई दे रहा है. उनके जनाजे में करोड़ों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है. अगर ऐसा होता है तो यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा जनसैलाब होगा. इससे पहले 1989 में ईरान के पहले सर्वोच्च नेता रुहोल्लाह खुमैनी के जनाजे में तकरीबन एक करोड़ लोग जुटे थे. उनके उत्तराधिकारी अली खामेनेई पश्चिम एशिया के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले प्रमुख थे. इस साल 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमलों में उनकी हत्या कर दी गई थी।  अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर 13,000 से अधिक हवाई हमले किए, जिसके कारण आयतुल्लाह को अंतिम विदाई देना बेहद जोखिम भरा हो गया था. हालांकि आठ अप्रैल से अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू है. इसके बाद 17 जून को राष्ट्रपति ट्रंप और उनके ईरानी समकक्ष मसूद पेजेश्कियान ने युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर साइन किए. दोनों देशों के बीच स्थायी शांति के लिए बातचीत जारी है।  बता दें कि ईरान ने अंतिम संस्कार के लिए तीन, चार और पांच जुलाई की तारीखें यूं ही नहीं चुनी हैं. इतिहास बताता है कि ईरान अक्सर अमेरिका को संदेश देने के लिए प्रतीकात्मक तारीखों का इस्तेमाल करता रहा है. चार नवंबर 1979 को ईरानी छात्रों ने ईरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 66 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया था. 444 दिनों तक चला यह संकट 20 जनवरी 1981 को खत्म हुआ था. लेकिन इसके ठीक उसी दिन जब तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर व्हाइट हाउस छोड़ रहे थे. कार्टर ने बंधकों को छुड़ाने की पूरी कोशिश की. अप्रैल 1980 में उन्होंने एक सैन्य बचाव अभियान भी शुरू किया, लेकिन ईरानी रेगिस्तान में एक अमेरिकी हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस हो गया, जिसमें पांच अमेरिकी सैनिक मारे गए और ये मिशन फेल  हो गया।  इस बंधक संकट ने कार्टर की राष्ट्रपति पद की छवि को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया. उनकी दोबारा चुनाव जीतने की उम्मीद खत्म हो गई और रोनाल्ड रीगन के सत्ता में आने का रास्ता साफ हो गया. बंधकों की रिहाई के लिए वही तारीख चुनना ईरान का कार्टर को आखिरी राजनीतिक झटका देना था, ताकि जीत का श्रेय उन्हें न मिल सके।  45 साल भी अमेरिका-ईरान आमने-सामने ट्रंप के नेतृत्व में चला पांच सप्ताह का युद्ध ईरान को काफी कमजोर जरूर कर गया, लेकिन अमेरिका अपने अमेरिका अपना प्रमुख लक्ष्य हासिल नहीं कर सका. ना तो ईरान में सत्ता परिवर्तन हुआ, ना उसने उच्च संवर्धित यूरेनियम छोड़ा, ना परमाणु कार्यक्रम समाप्त किया, ना क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों का समर्थन खत्म किया और ना ही अपनी बैलिस्टिक मिसाइल परियोजना छोड़ी. इसे विपरीत, ईरान ने होर्मुज को अवरुद्ध कर दिया, जहां से दुनिया की लगभग 25 फीसदी तेल की सप्लाई होती है।  ईरान की बात करें तो यहां सत्ता पर कट्टरपंथी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स काउंसिल (IRGC) का प्रभाव और मजबूत हो गया है. उनके लिए खामेनेई की अंतिम विदाई दुनिया को कई संदेश देने का अवसर है. अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में दफनाया जाएगा या फिर तेहरान स्थित करीब दो अरब डॉलर की लागत से बने रुहोल्लाह खुमैनी मकबरे में लेकिन यह तय माना जा रहा है कि पूरा आयोजन राजनीतिक संदेश देने के उद्देश्य से किया जाएगा।  ईरान पर हमला 21वीं सदी के सबसे भीषण बमबारी ऑपरेशन में से एक रहा. लेकिन इसके बावजूद ईरानी शासन कायम है. उसने अरबों डॉलर की सैन्य और बुनियादी ढांचे की क्षति उठाई, कई युद्धपोत और विमान गंवाए लेकिन दुनिया की सबसे ताकतवर सैन्य शक्ति को निर्णायक जीत हासिल नहीं करने दी।  लाखों-करोड़ों लोगों की भीड़ किसी भी सरकार के लिए वैधता और जनसमर्थन का प्रतीक होती है. इसे ट्रंप से बेहतर शायद ही कोई समझता हो. 2017 में उन्होंने मीडिया की उस रिपोर्टिंग की आलोचना की थी, जिसमें कहा गया था कि उनके शपथ ग्रहण समारोह में बराक ओबामा के 2009 के समारोह से कम भीड़ आई थी।  ईरानी शासन ने 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सबसे बड़े जनआंदोलनों का सामना किय.। पहले 2017 में महसा अमीनी आंदोलन और फिर दिसंबर 2025 में आर्थिक संकट के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन हुए. दोनों आंदोलनों को सरकार ने कठोर बल प्रयोग के जरिए दबा दिया लेकिन जब अमेरिका और ईरान के ये दोनों बड़े आयोजन समाप्त हो जाएंगे, तब भी ईरान का सवाल ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना रहेगा।  जिस ईरान को रोनाल्ड रीगन पूरी तरह नहीं संभाल पाए, वही चुनौती आज ट्रंप के सामने है. बता दें कि ट्रंप, रोनाल्ड रीगन को अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ अमेरिकी राष्ट्रपति बताते हैं. रीगन शीत युद्ध के अंत से लेकर सोवियत संघ के विघटन जैसे ऐतिहासिक घटनाओं के साक्षी रहे लेकिन ईरान उनके लिए भी कठिन साबित हुआ. उन्होंने सार्वजनिक रूप से कार्टर सरकार द्वारा लगाए गए हथियार प्रतिबंध को जारी रखा, लेकिन उनकी सरकार ने गुप्त रूप से ईरान को हथियार भी बेचे।  यही मामला आगे चलकर ईरान-कॉन्ट्रा के नाम से मशहूर हुआ, जिसने 1981 से 1986 के बीच उनकी सरकार को गहरे संकट में डाल दिया. मार्च 1987 में रीगन ने राष्ट्र के नाम संबोधन में इस मामले की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि जो शुरुआत ईरान के साथ रणनीतिक संवाद के रूप में हुई थी, वह आखिरकार बंधकों के बदले हथियारों के सौदे में बदल गई. हालांकि, रीगन पर महाभियोग नहीं चला और उनकी लोकप्रियता फिर बढ़ गई।  अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब भी बढ़ रही है, लेकिन महंगाई चिंता का विषय बनी हुई है. दूसरी ओर ट्रंप की लोकप्रियता 37 से … Read more

Aaj Ka Rashifal 30 June 2026: मंगलवार का दिन किन राशियों के लिए रहेगा शुभ? जानें करियर, धन और प्रेम का हाल

मेष आप समृद्धि भी देख सकते हैं। आज स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। आज का दिन बदलावों भरा रहने वाला है। एक मजबूत प्रेम जीवन और उत्पादक कार्यालय जीवन बनाए रखें। आज आपको अपने क्रश के साथ टाइम स्पेंड करने का मौका मिलेगा। काम के सिलसिले में यात्रा करनी भी पड़ सकती है। वृषभ आज का दिन पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर रहने वाला है। आपको जोखिम लेना पसंद हैं क्योंकि वे आपको मजबूत बनाते हैं। आज प्रेम संबंधों में मुस्कुराहट के साथ खुश रहें। व्यावसायिक सफलता मिलेगी। मिथुन धन से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं होगा। लव के मामले में कभी साथी की बातें भी सुननी चाहिए। इसलिए लेन-देन करते समय सावधान रहें। अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। आज आपकी लव लाइफ बेहतरीन रहेगी। कर्क अपनी डाइट को हेल्दी रखें। आज का दिन हैप्पी-हैप्पी रहने वाला है। नए टास्क के प्रति अलर्ट रहें, जो आपको प्रमोशन भी दिला सकते हैं। अपना बेस्ट परिणाम देने के लिए पेशेवर चुनौतियों को सावधानी के साथ संभालें। सिंह आज के दिन क्लियर करें कि आप सभी व्यवसायिक कार्य पूरा कर लें। धन और स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहना अच्छा होता है। व्यावसायिक चुनौतियों से पार पाने के लिए कोशिश करें। आर्थिक सफलता मिलेगी और स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। कन्या आज फाइनेंस तौर पर दिन शुभ माना जा रहा है। रिश्ते के मुद्दों को जिम्मेदारी के साथ संभालें। अच्छे आधिकारिक रिश्ते का आनंद भी लें। छोटे वित्तीय मुद्दे स्मार्ट तौर पर किए गए खर्च की मांग करते हैं। ड्राइव करते वक्त सावधान रहें। तुला लवर के साथ अधिक समय बिताएं। आज का दिन मिल-जुला रहने वाला है। सफलता कमिटमेंट और मेहनत से आती है। रिश्ते में चल रही उथल-पुथल को आज ही सॉल्व करें। जंक फूड्स से दूरी बनाएं। वृश्चिक दिन रोमांटिक रहेगा, जिससे आपके प्रेम जीवन पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा। आज स्वास्थ्य भी अच्छा रहने वाला है। करियर में कुछ नई जिम्मेदारियां मिलेगी, जो आपके प्रमोशन का कारण भी बन सकती हैं। अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखें। धनु आज के दिन आप समृद्ध रहेंगे। प्रमोशन हासिल करने के लिए नए लक्ष्य की तलाश करें। रिश्ते में सरप्राइज पाने की उम्मीद करें। व्यवसायिक तौर पर आप अच्छे रहेंगे। जंक फूड्स के सेवन से बचें। मकर आज का आपका दिन शुभ रहने वाला है। पैसों की कोई समस्या नहीं होगी। आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। प्रेम संबंधी किसी भी बड़े मुद्दे को कंट्रोल से बाहर नहीं जाने देना चाहिए। खर्च बढ़ सकता है। कुंभ छोटी-मोटी रुकावटों के बावजूद व्यवसायिक रिजल्ट पॉजिटिव रहेंगे। आज का दिन प्रोडक्टिव रहने वाला है। बेहतर उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए पेशेवर मुद्दों का ध्यान रखें। स्वास्थ्य भी आपके पक्ष में है। मीन आज का दिन शानदार रहने वाला है। सेहत थोड़ी गड़बड़ हो सकती है। इसलिए बाहर के खाने से परहेज करें। आर्थिक स्थिति भी अच्छी रहने वाली है। आज आप दिन भर पॉजिटिव फील करेंगे। सिंगल जातकों के लिए दिन खास माना जा रहा है।

India-China Border: आदिवासियों का बड़ा दावा, सीमा क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को लेकर बढ़ी चिंता

नईदिल्ली  भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के स्थानीय 'नाह' आदिवासी समुदाय ने दावा किया है कि चीन इस क्षेत्र में उनकी जमीन हथिया रहा है। उन्होंने दावा किया है कि नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चीनी सेना ने भारतीय जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे लेकर आदिवासी संगठन 'नाह वेलफेयर सोसाइटी' ने जिला प्रशासन को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 6 सालों के अंदर चीनी सेना ने उनके पूर्वजों की खेती और मवेशियों को चराने वाले जमीन के एक बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय लोगों ने बताया कि, चीन पिछले 10 से 15 सालों से इस इलाके में धीरे-धीरे पैर पसार रहा था, लेकिन 2020 के बाद से उसकी रफ्तार बहुत ज्यादा बढ़ गई है। किन इलाकों पर कब्जा? आदिवासी संगठन ने अपर सुबनसिरी के 'ताक्सिंग' क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच अलग जगहों पर चीन की संदिग्ध और आक्रामक गतिविधियों की सूची प्रशासन को सौंपी है। उनके मुताबिक 2020 तक ये इलाके पूरी तरह उनके नियंत्रण में थे, लेकिन अब इस पर चीन का नियंत्रण है। ये इलाके हैं- ओयिंग- यह स्ट्रेटेजिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाका है। पोत्रंग (झील): यह स्थानीय लोगों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है। तिन्दिनतांग (टीजी): ताक्सिंग हेडक्वार्टर के बिल्कुल नजदीक स्थित इलाका। पनिआर (चुजार्टा क्षेत्र): स्थानीय आदिवासियों का पारंपरिक क्षेत्र। मरपन (मर्नाफे): यहां चीनी सैनिकों की आवाजाही देखी गई है। 'भारतीय सीमा में चीनी सड़कें और मिलिट्री कैंप' नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरु चादर ने अपने ज्ञापन में बेहद चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने एक बयान में कहा, "हमें अपनी भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है और वे सालों से हमारी जमीन की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन ये कोशिशें काफी साबित नहीं हो रही हैं। ताक्सिंग क्षेत्र में चीनी पीएलए (PLA) जिस इरादे और बिजली की रफ्तार से आगे बढ़ रही है, वह बेहद खतरनाक है।" उन्होंने आगे कहा, “हम हर दिन, इंच-दर-इंच अपनी मातृभूमि को चीन के हाथों खो रहे हैं। चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र के भीतर पक्की सड़कें और अपने मिलिट्री कैंप तक बना लिए हैं।” इस मामले पर नाचो विधानसभा क्षेत्र के विधायक नाकाप नालो ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। विधायक नालो ने एक बयान में कहा, "यह सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा है। स्थानीय लोगों ने जो आरोप लगाए हैं, जिला प्रशासन और सेना को उसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि करनी चाहिए।" वहीं इस पूरे मामले पर फिलहाल अरुणाचल प्रदेश की सरकार या केंद्र सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भारत का अभिन्न हिस्सा है अरुणाचल गौरतलब है कि चीन अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता। वह इसे 'जांगनान' (दक्षिण तिब्बत) कहता है और इस पर अपना ऐतिहासिक दावा ठोकता है। अपनी संप्रभुता दिखाने के लिए चीन अक्सर अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नए चीनी नाम जारी करता है, वहां के नागरिकों को स्टेपल वीजा देता है और सीमा के पास बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की भी कोशिश करता है। हालांकि भारत ने कई मौकों पर यह स्पष्ट कर दिया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और नाम बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती।

चीन दौरे पर उठे सवालों के बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्री का जवाब, बोले- PM भीख का कटोरा लेकर नहीं गए

ढाका  अक्सर 'भीख का कटोरा' की चर्चा पाकिस्तान के संदर्भ में होती है, पाकिस्तान अमूमन दुनिया भर से मदद मांगने के लिए जाता रहता है. लेकिन इस बार ये चर्चा बांग्लादेश को लेकर हो गई. चर्चा भी ऐसी हुई कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री बुरा मान गए. दरअसल बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के चीन दौरे पर एक अजीब विवाद पैदा हो गया है. मीडिया की ओर से बार बार चीन से मिलने वाली आर्थिक मदद पर सवाल पूछने पर बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने चिढ़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान चीन कोई भीख का कटोरा लेकर नहीं गए हैं. वे वहां दोनों देशों के बीच संबंधों की दशा-दिशा तय करने गए हैं।  बांग्लादेश के विदेश मंत्री पीएम के दौरे पर ढाका में पत्रकारों से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि किसी भी देश का नेता 'भीख का कटोरा' लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में शामिल नहीं होते हैं।  बीजिंग से मिलने वाली सीधी प्रोजेक्ट सहायता के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा, "आपने नकद राशि मिलने की बात की. भाइयों, कृपया ऐसे सवाल न पूछें; इससे हमें बहुत शर्मिंदगी होती है।  "प्रधानमंत्री दोनों देशों के बीच संबंधों की दिशा, विषय-वस्तु, कद, दायरा और गहराई तय करने के लिए वहां गए थे. सरकार का कोई भी प्रमुख दूसरे देश के नेता के साथ कागज और पेंसिल लेकर नहीं बैठता और न ही वे कोई भीख का कटोरा लेकर जाते हैं. कृपया थोड़ी आत्म-सम्मान बनाए रखें।  खलीलुर ने ये बातें  विदेश मंत्रालय में आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहीं, जो प्रधानमंत्री की हालिया मलेशिया और चीन यात्राओं के संबंध में थी।  बता दें कि बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में भारी जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी  की सरकार के मुखिया तारिक अपनी पहली विदेश यात्रा पर निकले और 21 जून को मलेशिया पहुंचे. अगले दिन वह उत्तर-पूर्वी चीन के शहर डालियान गए।  वहाां वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की सालाना बैठक में शामिल होने के बाद, वह तीन दिन की राजकीय यात्रा शुरू करने के लिए बुधवार को बीजिंग पहुंचे।  इस यात्रा के दौरान तारिक ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रीमियर ली कियांग के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत की. ढाका और बीजिंग ने अलग-अलग क्षेत्रों में 17 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।  दोनों देशों के  बीच 13 समझौते पर हस्ताक्षर हुए.  इनमें तीस्ता नदी मास्टर प्लान, तकनीकी सहायता के लिए चीन का समर्थन.  मोंगला पोर्ट और अनवारा के पास आर्थिक क्षेत्र का विकास. बुनियादी ढांचा जिनमें सड़कें, पुल, रेलवे, ऊर्जा, पर्यावरण-अनुकूल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन विकास में सहयोग शामिल है। 

लवकुश की कमाई सिर्फ ₹12 हजार, फिर भी VIP एरिया में बन रहा घर, तस्वीरों ने बढ़ाए सवाल

 अयोध्या  राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संपत्तियों को लेकर अब नए खुलासे हो रहे हैं. आजतक की टीम मामले में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा द्वारा खरीदी गई एक ऐसी ही प्रॉपर्टी तक पहुंची. यह मकान अयोध्या-लखनऊ हाईवे के किनारे स्थित बनबीरपुर गांव में बन रहा है और स्थानीय लोगों का दावा है कि यह घर लवकुश मिश्रा का ही है।  आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक, लवकुश मिश्रा ने राम मंदिर में नौकरी के दौरान अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर यह जमीन खरीदी थी. दस्तावेजों के मुताबिक, यह जमीन सोहावल तहसील के मंगसी परगना इलाके में कमल स्वरूप सिंह से 8 लाख 80 हजार रुपये में खरीदी गई थी. वर्तमान में इस प्रॉपर्टी की कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है. आजतक को इस जमीन से जुड़े दाखिल-खारिज के दस्तावेज भी मिले हैं।  दस्तावेजों के मुताबिक, जमीन का दाखिल-खारिज 6 मार्च 2026 को सुप्रिया मिश्रा, निवासी मीनापुर भगोली, तहसील रुदौली, जिला अयोध्या के नाम पर किया गया. पड़ोस में रहने वाले राजकुमार पांडे ने लवकुश मिश्रा की तस्वीर देखकर पहचान की और कहा कि यही व्यक्ति इस निर्माणाधीन मकान का मालिक है. उन्होंने बताया कि फरवरी महीने से यहां मकान का निर्माण कार्य चल रहा था और दो दिन पहले तक मजदूर काम कर रहे थे. हालांकि, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद से परिवार दिखाई नहीं दे रहा है और रविवार से यहां काम भी बंद हो गया है।  अयोध्या के वकील नहीं करेंगे आरोपियों की पैरवी इस  बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा फैसला लेते हुए आरोपियों की पैरवी नहीं करने का ऐलान किया है. बार एसोसिएशन की सोमवार को हुई सामान्य सभा की बैठक में यह निर्णय लिया गया. बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि कोई वकील आरोपियों की ओर से केस लड़ता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।  बैठक के दौरान वकीलों ने यह भी मांग की कि मामले से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तीन दिनों के भीतर अयोध्या छोड़ देना चाहिए. वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो शहर की नाकेबंदी की जाएगी. चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव थे और अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य थे. दोनों ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है।  फैजाबाद बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कहा, 'मंदिर के चढ़ावे की चोरी से हमारी भावनाएं आहत हुई हैं. फैजाबाद के सभी वकीलों ने गिरफ्तार आरोपियों का बचाव नहीं करने पर सहमति जताई है.' इस फैसले के बाद फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा का एक वीडियो भी वायरल हुआ. वीडियो में वह कहते सुनाई दे रहे हैं, 'कोई भी वकील इस मामले में आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा. अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. हम मामले की सीबीआई जांच की भी मांग करते हैं।  यह घटनाक्रम अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम की निगरानी में चल रही जांच के बीच सामने आया है. अब तक इस मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिन्हें सोमवार को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. वहीं चंपत राय का बयान भी दर्ज किया गया है. इस मामले में जिन 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, उनमें- रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे, रामा शंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव शामिल हैं।  अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोप क्या हैं? राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप इस महीने तब सामने आए जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि 7 से 7.5 करोड़ रुपये के चढ़ावे का गबन हुआ है. इसके बाद विपक्ष के कई नेताओं ने इससे भी बड़े दावे किए. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या दौरे के दौरान कहा था कि भगवान राम को चढ़ाए गए हीरे-जवाहरात तक चोरी हो गए. उन्होंने आरोप लगाया, 'भक्तों द्वारा चढ़ाए गए हीरे और कीमती पत्थर चोरी हो गए, 200 करोड़ रुपये नकद चोरी हो गए और 200 किलो चांदी भी गायब हो गई.' इसी तरह अन्य विपक्षी नेताओं ने भी 70 किलो चांदी, 1250 किलो सोना और 200 करोड़ रुपये नकद चोरी होने के आरोप लगाए और सरकार से जवाबदेही की मांग की।  हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट ने एक प्रेस रिलीज जारी करके इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ावे के रूप में दिए गए सोने चांदी के आभूषण और अन्य जेवरात पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका पूरा हिसाब मौजूद है. ट्रस्ट ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सामने आई घटनाओं से वह 'स्तब्ध, आहत और बेहद दुखी' है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इन आरोपों की जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि मामले की सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद की जाएगी। 

बिहार में RJD नेता पर सेल्स टैक्स विभाग की कार्रवाई, सिवान के 4 ठिकानों पर सर्वे

सिवान. राजद नेता सह व्यवसायी अरुण गुप्ता के चार ठिकानों पर रविवार को सेल्स टैक्स विभाग की टीम ने एक साथ सर्वे की कार्रवाई की। सुबह शुरू हुई यह कार्रवाई देर शाम तक जारी रही। विभाग की अलग-अलग टीमें विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और संबंधित परिसरों पर पहुंचीं तथा कर संबंधी दस्तावेजों, बिल, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और अन्य कारोबारी अभिलेखों की गहनतापूर्वक जांच की। इस दौरान हरदिया मोड़ स्थित वीआईपी मॉल, मैरवा थानान्तर्गत मैरवा बाजार स्थित वीआइपी प्रतिष्ठान व पचरूखी थाना अंतर्गत उम्मेद पैलेस सह रेस्टोरेंट सहित अन्य जगहों पर सर्वे की कार्रवाई की गई। सर्वे के दौरान अधिकारियों ने जीएसटी रिटर्न, स्टाक रजिस्टर, कंप्यूटर में उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया। टीम ने आवश्यक दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच भी शुरू कर दी है। हालांकि, कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की जब्ती या कर चोरी की पुष्टि को लेकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। सेल्स टैक्स विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह नियमित जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और सर्वे पूरा होने के बाद ही तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जांच पूरी होने तक विभाग ने विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया है। उधर, सर्वे की सूचना मिलते ही संबंधित परिसरों के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई। कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और कारोबारी हलकों में भी चर्चा का माहौल बना रहा। फिलहाल, विभाग सर्वे के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकार्ड का परीक्षण कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी प्रकार की कर अनियमितता मिली है या नहीं तथा आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।