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कोदो-कुटकी की खेती से बढ़ेगी आय और सेहत, किसानों के लिए बेहतर विकल्प

विशेष लेख कोदो-कुटकी की खेती अपनाएं, पोषण और समृद्धि दोनों पाएं पारंपरिक धरोहर से आधुनिक पहचान तक रायपुर  छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि परंपरा में कोदो और कुटकी का विशेष महत्व रहा है। सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के भोजन का अभिन्न हिस्सा रहे ये लघु धान्य आज एक बार फिर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। बदलती जलवायु परिस्थितियों, पोषण संबंधी चुनौतियों और बेहतर कृषि की आवश्यकता के बीच कोदो-कुटकी जैसी मिलेट फसलें भविष्य की खेती का मजबूत आधार बनकर उभर रही हैं। कोदो (पास्पलम स्क्रोबिकुलेटम) और कुटकी (पैनिकम सुमाट्रेंस) ऐसी फसलें हैं जिन्हें कम पानी, कम लागत और सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यही कारण है कि ये छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बन रही हैं। कम उपजाऊ, पथरीली और ढालू भूमि में भी इनकी खेती संभव है, जहां अन्य फसलें अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पातीं। आज जब दुनिया स्वास्थ्यवर्धक भोजन की ओर लौट रही है, तब कोदो और कुटकी का महत्व और बढ़ गया है। कोदो में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि कुटकी फाइबर, प्रोटीन, फास्फोरस तथा अन्य खनिज तत्वों से भरपूर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इनका नियमित सेवन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और एनीमिया जैसी समस्याओं के नियंत्रण में सहायक हो सकता है। यही वजह है कि आज इन्हें ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान मिल रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2026 में कोदो का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तथा कुटकी का 3,350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ इन फसलों की खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। विभागीय जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश में कोदो फसल 39.02 हेक्टेयर और कुटकी फसल 38.03 हेक्टेयर रकबे में लगाए गए थे। वैसे विगत खरीफ वर्ष में प्रति हेक्टेयर कोदो की उत्पादन 550 किलोग्राम तथा कुटकी की उत्पादन 675 किलोग्राम दर्ज की गई है। यानी कोदो की उत्पादन 21.46 टन थी, वहीं 25.67 टन कुटकी का उत्पादन हुआ था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ाने की अपील की है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्नत तकनीकों को अपनाकर कोदो-कुटकी की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। मानसून की शुरुआत के साथ जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक बुवाई, बीजोपचार, कतार पद्धति, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण जैसे उपाय किसानों को बेहतर उत्पादन दिला सकते हैं। बढ़ती बाजार मांग, मिलेट आधारित उत्पादों का विस्तार और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं इन फसलों के व्यावसायिक महत्व को लगातार बढ़ा रही हैं। एक समय केवल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक सीमित रहने वाली कोदो-कुटकी आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रही हैं। पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए कोदो और कुटकी अत्यंत महत्वपूर्ण फसलें हैं। आवश्यकता इस बात की है कि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ इन पारंपरिक फसलों का उत्पादन बढ़ाएं और उपभोक्ता इन्हें अपने दैनिक भोजन का हिस्सा बनाएं। कोदो-कुटकी केवल अनाज नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, उत्तम कृषि और समृद्ध भविष्य की आधारशिला हैं। (एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

कनिका माहेश्वरी ने शादीशुदा जिंदगी को लेकर किए चौंकाने वाले खुलासे, पति और सास पर लगाए आरोप

मुंबई  कनिका माहेश्वरी टीवी की मशहूर एक्ट्रेस हैं. उन्होंने कई शोज में काम किया, लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा सक्सेस 'दीया और बाती हम' से मिली।कनिका इन दिनों 'सहर होने को है' में अपने निगेटिव कैरेक्टर को लेकर सुर्खियों में हैं. लेकिन प्रोफेशनल लाइफ के साथ उनकी पर्सनल लाइफ भी लाइमलाइट में रहती है।  कनिका ने हाल ही में हॉटरफ्लाई संग बातचीत में अपनी जिंदगी के कई अलग पहलुओं पर बात की. उन्होंने बताया कि बचपन में उनके कपड़े पहनने पर भी कई तरह की पाबंदियां थीं। कनिका ने बताया- बचपन से ही ये बात बोली गई कि अरे अंदर ब्लैक कलर नहीं पहन सकते हो. रेड कलर नहीं पहन सकते, क्योंकि दिखेगा, लोगों का क्या लगेगा।  'कपड़ों के अंदर (अंडरगार्मेंट्स) किस कलर के पहनते हैं, वो भी लोगों के लिए एक इश्यू हो सकता है, इसलिए कलर बदलना पड़ता है। 'अगर व्हाइट ड्रेस पहनी है तो रेड कलर की ब्रा नहीं पहन सकते, क्योंकि फिर लोग आपको अलग नजर से देखते हैं। कनिका ने यह भी कहा कि समाज के प्रेशर में आकर उन्होंने बहुत जल्दी शादी कर ली थी। एक्ट्रेस बोलीं- मैंने शादी बहुत जल्दी कर ली थी ये सोचकर कि लोग क्या कहेंगे? फिर ये सोचने लगी कि शादी के इतने साल बाद भी बच्चा नहीं हुआ, तो लोग क्या कहेंगे?        पति ने कहा कि मेरे दोस्तों के बेबीज हो गए. मुझे तो बड़ा अजीब लगता है. सास ने कहा बच्चे होने से प्यार बढ़ता है. लड़ाइयां कम होती हैं। कनिका बोलीं कि लोग क्या कहेंगे का सोचकर उन्होंने बच्चा भी कर लिया था. कनिका अब एक बेटे की मां हैं. वो अपने बेटे के काफी क्लोज हैं। 

आर्द्रा स्नान पर बक्सर के घाटों पर जुटे 20 हजार श्रद्धालु, गंगा स्नान के लिए उमड़ी भीड़

बक्सर. प्रसिद्ध रामरेखा घाट पर बुधवार तड़के से ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। घाट के पुजारियों के अनुसार, आद्रा नक्षत्र के अवसर पर 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान किया। बड़ी संख्या में लोग मुंडन संस्कार कराने के लिए भी घाट पहुंचे। पंडित धनजी तिवारी ने कहा कि गुरुवार को पड़ने वाली भीमसेनी निर्जला एकादशी के कारण गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ज्योतिषाचार्य नरोत्तम द्विवेदी ने बताया कि ग्रहों के राजा सूर्य 22 जून की रात 8:27 बजे मृगशिरा नक्षत्र से निकलकर राहु के स्वामित्व वाले आद्रा नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं। सूर्य का यह गोचर छह जुलाई तक रहेगा। ज्योतिष एवं कृषि की दृष्टि से आद्रा नक्षत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसे मानसून के आगमन का संकेतक माना जाता है। उन्होंने बताया कि पंचांग के अनुसार जून के अंतिम दिनों तथा जुलाई के प्रथम सप्ताह में वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, आद्रा नक्षत्र के प्रारंभिक तीन-चार दिनों तक धरती को 'रजस्वला' अवस्था में माना जाता है, इसलिए किसान इस अवधि के बाद ही खेतों की जुताई शुरू करते हैं। कोच-बकसड़ा गांव के किसान बांके बिहारी मिश्र ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इस परंपरा का पालन किया जाता है। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. देवकरण ने बताया कि जिले में 26 और 27 जून को क्रमशः आठ और छह मिलीमीटर वर्षा होने की संभावना है। हालांकि इस दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बने रहने का अनुमान है। भीमसेनी निर्जला एकादशी व्रत:  भीमसेनी निर्जला एकादशी व्रत गुरुवार को रखा जाएगा। आचार्यों के अनुसार, इस व्रत का फल वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों के व्रत के बराबर माना गया है। एकादशी तिथि बुधवार रात्रि से प्रारंभ होकर गुरुवार रात 9:14 बजे तक रहेगी। श्रद्धालु गुरुवार को व्रत रखकर शुक्रवार को सूर्योदय के बाद सुविधा अनुसार पारण कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में बलशाली भीमसेन को अत्यधिक भूख लगती थी, जिसके कारण वे वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी का व्रत करने का परामर्श दिया था। इसी कारण यह व्रत 'भीमसेनी एकादशी' के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस अवसर पर जल से भरा घड़ा, मौसमी फल, छाता, वस्त्र तथा अन्य उपयोगी सामग्री का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है।

ऑब्जर्वेशन होम के बच्चों के लिए बड़ी पहल, पंजाब सरकार देगी स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग

फरीदकोट. किसी कारणवश गलत रास्ते पर चलकर कानून के दायरे में पहुंचे बच्चों को अब नई जिंदगी और नई पहचान देने की दिशा में पंजाब सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से राज्य के आब्जर्वेशन होम में रहने वाले बच्चों के लिए कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य बच्चों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस पहल की शुरुआत फरीदकोट स्थित आब्जर्वेशन होम से की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने किया। इस अवसर पर स्थानीय विधायक गुरदित सिंह सेखों सहित कई अधिकारी और विभागीय प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि पहले चरण में पंजाब के पांच आब्जर्वेशन होम में कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। फरीदकोट के बाद लुधियाना, होशियारपुर और अन्य स्थानों के आब्जर्वेशन होम में भी जल्द यह योजना लागू की जाएगी। इसके बाद इसे राज्य के सभी आब्जर्वेशन होम तक विस्तारित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे परिस्थितियों, गलत संगत या अन्य कारणों से ऐसे कदम उठा लेते हैं, जिससे वे अपराध की दुनिया में पहुंच जाते हैं। ऐसे बच्चों को केवल दंडित करना समाधान नहीं है, बल्कि नया अवसर देना भी जरूरी है। यही सोच इस योजना के पीछे है। 211 बच्चे प्रारंभिक चरण में जुड़े डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि प्रारंभिक चरण में 211 बच्चों को इन पाठ्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है। इनमें फरीदकोट के 31 बच्चे शामिल हैं। सबसे पहले हेयर ड्रेसिंग का प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इसके बाद मोबाइल मरम्मत जैसे अन्य रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। इससे बच्चे व्यावसायिक कौशल सीखकर भविष्य में रोजगार प्राप्त कर सकेंगे और सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य बच्चों को उनका अतीत भुलाकर नई पहचान बनाने का अवसर देना है। कौशल और आत्मविश्वास के बल पर ये बच्चे अपने जीवन को नई दिशा दे सकेंगे और समाज में सकारात्मक योगदान दे पाएंगे। सीएम की वायरल वीडियो गिरी राजनीति का परिणाम इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान की कथित वायरल वीडियो से जुड़े सवाल पर डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि वर्तमान समय में राजनीति का स्तर काफी नीचे चला गया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने और चरित्र हनन की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जब तक किसी मामले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक उस पर की जा रही टिप्पणियां और बयान विवाद का विषय बने रहते हैं। सरकार की यह नई पहल बच्चों के पुनर्वास और उनके भविष्य निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे अनेक बच्चों को जीवन में नई शुरुआत करने का अवसर मिलेगा।

बस्तर के छात्रों को बड़ी सौगात, IIT मद्रास में सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग पाएंगे 30 प्रतिभाशाली विद्यार्थी

जगदलपुर. बस्तर संभाग के युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में एक नई उम्मीद की किरण जगी है। पहली बार बस्तर के 30 मेधावी छात्रों को देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास में सेमीकंडक्टर चिप मैन्युफैक्चरिंग की विशेष ट्रेनिंग लेने का अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराएगी, बल्कि उन्हें भविष्य के हाई-टेक रोजगार बाजार के लिए भी तैयार करेगी। जानकारी के अनुसार, IIT मद्रास में 12 जुलाई से 24 जुलाई तक आयोजित होने वाले विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए बस्तर विश्वविद्यालय के छात्रों का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इंटरनल टेस्ट की मेरिट सूची के आधार पर पूरी होगी। इसमें चयनित 30 छात्र पहली बार हवाई यात्रा कर चेन्नई पहुंचेंगे और देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में से एक IIT मद्रास में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन भी उत्साहित है। चयनित छात्रों को राज्यपाल की मौजूदगी में रवाना किया जाएगा। खास बात यह है कि छात्रों की हवाई यात्रा का पूरा खर्च दंतेवाड़ा जिला प्रशासन वहन करेगा, जबकि इस पहल को सफल बनाने में बस्तर कलेक्टर का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, एडवांस डेटा ट्रांसफर सिस्टम और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह प्रशिक्षण छात्रों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल विकसित करने में मदद करेगा। प्रशिक्षण का एक बड़ा लाभ रोजगार के अवसरों के रूप में भी सामने आ सकता है। रायपुर में स्थापित हो रही गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित 5G और 6G डेटा ट्रांसफर टेक्नोलॉजी कंपनी में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बनने की उम्मीद है। ऐसे में यह कार्यक्रम बस्तर के छात्रों को सीधे उभरती हुई सेमीकंडक्टर और दूरसंचार उद्योग से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बस्तर के लिए यह पहल एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल क्षेत्र के युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों और उद्योगों तक उनकी पहुंच भी मजबूत होगी। बस्तर विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन की यह संयुक्त पहल क्षेत्र के प्रतिभाशाली युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।

जो एक बार मध्यप्रदेश आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

जो एक बार मध्यप्रदेश आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण बनाने के लिए लागू की हैं पारदर्शी और उद्योग मित्र नीतियां मध्यप्रदेश देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में है शामिल विकसित भारत @2047 में 2 ट्रिलियन डॉलर का होगा मध्यप्रदेश का योगदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर किया उनका स्मरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विकसित मध्यप्रदेश पर आयोजित कॉन्क्लेव को किया संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समय तभी बदलता है, जब संकल्प बड़ा होता है। सभी भारतीयों के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का समय बदला है। विश्व के कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से प्रधानमंत्री मोदी को विभूषित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत @2047 और अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार का यह प्रयास होगा कि इसमें से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान मध्यप्रदेश का हो। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के सेवा, सुशासन और जन कल्याण के संकल्पों को पूर्ण करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश की गिनती देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में हो रही है। हम विरासत भी और विकास भी के पथ पर लगातार अग्रसर हो रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। उन्होंने रानी दुर्गावती का स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेशवासी रानी दुर्गावती के बलिदान को सदैव याद रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "विकसित मध्यप्रदेश" विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ  किया। कॉन्क्लेव में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सूक्ष्म लघु एवं उद्योग मंत्री चैतन्य काश्यप, मुख्य सचिव अनुराग जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में शामिल उद्योगपतियों से राज्य में मौजूद निवेश संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की विशेषता है कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है, यहीं का होकर रह जाता है। कार्यक्रम में उद्योग व्यापार जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि तथा नीति निर्माता शामिल हुए।  प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार बढ़ रहा है आगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में नए उद्योग स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक है। राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने लिए पारदर्शी और उद्योग मित्र नीतियां लागू की हैं। मध्यप्रदेश की इन्हीं विशेषताओं के कारण निवेशक उद्योग लगाने के लिए राज्य में आ रहे हैं। देश के मध्य में स्थित होने के कारण उन्हें  कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष लाभ भी मिलेगा। प्रदेश सरकार ने चारों दिशाओं में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए अधोसंरचना विकास पर विशेष बल दिया है। राज्य सरकार 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को ला चुकी है धरातल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 का आयोजन किया गया, जिसमें अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ और एमओयू साइन हुए। यह प्रसन्नता का विषय है कि 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को राज्य सरकार धरातल पर ला चुकी है। मध्यप्रदेश की छवि कृषि प्रधान राज्य के साथ उद्योग मित्र राज्य की भी बनी है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को उद्योग और रोजगार को समर्पित किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय युवा प्रतिभाओं ने दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियों में शीर्ष पदों पर पहुंचकर भारत का मान बढ़ाया है। स्पेस टेक्नोलॉजी में भारतीय वैज्ञानिकों ने नए कीर्तिमान गढ़े हैं। राज्य सरकार ने भी अपनी स्पेस-टेक पॉलिसी लॉन्च की है। मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं। 

8th Pay Commission: महंगाई के असर से बदल सकते हैं वेतन के नियम, कर्मचारियों की नई मांग

नई दिल्ली ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज़ फेडरेशन (AIDEF) ने आठवें वेतन आयोग से महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्मूले में बदलाव की मांग की है. उनका कहना है कि मौजूदा फॉर्मूला कर्मचारियों और पेंशनर्स पर महंगाई के बोझ का सही कैलकुलेशन नहीं करता है।  महंगाई के अनुसार ज्‍यादा खर्च  अभी महंगाई भत्ता (DA) और पेंशन भत्ता (DR) में संशोधन अखिल भारतीय औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के एवरेज पर बेस्‍ड है. यह इंडेक्‍स कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती कीमतों के लिए नुकसान की भरपाई करने और महंगाई के खिलाफ उनकी खरीदने की क्षमता की रक्षा के लिए है।  मौजूदा फॉर्मूले में बड़ी खामियां             हालांकि, आठवें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने दूसरे डिमांड में AIDEF ने कहा कि मौजूदा फॉर्मूले में महत्वपूर्ण कमियां हैं और यह कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों के बदलते खर्च करने के तरीकों को पर्याप्त रूप से नहीं दिखा सकता है।    देखें ये आंकड़े        फेडरेशन के अनुसार, 2022-23 में पेश किए गए संशोधित कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स में फूड आइटम्‍स और मौसमी एग्री प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी को पर्याप्‍त तौर पर नहीं बताता है. एआईडीईएफ ने बताया कि खाद्य और पेय पदार्थों का भार अब सूचकांक में 36.75% है, जबकि आवास, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, संचार और डिजिटल सेवाओं जैसी कैटेगरी को ज्‍यादा वेटेज दिया गया है।    पेंशनर्स के लिए चुनौती AIDEF ने पेंशनभोगियों के चुनौतियों का भी जिक्र किया, जिनमें से कई अपनी मंथली इनकम का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, दवाओं, चिकित्सा उपचार और देखभाल सेवाओं पर खर्च करते हैं. अगर इन आवश्यक वस्तुओं की कीमतें महंगाई से ज्‍यादा बढ़ती हैं, तो महंगाई राहत में बदलाव उतना नहीं होता है।  मौजूदा फॉर्मूले की जांच की मांग इन चिंताओं को देखते हुए, AIDEF ने मौजूदा महंगाई फॉर्मूले की जांच करने और सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के खर्च को मैनेज करने के लिए बदलने के लिए कहा है।  हर राज्‍य में आयोग की हो रही बैठक गौरतलब है कि आठवें वेतन आयोग की बैठक कई राज्‍यों में पूरी हो चुकी है, जिसमें सैलरी बढ़ोतरी, महंगाई भत्ते में इजाफा और फिटमेंट फैक्‍टर समेत कई मांग रखी गई है. 

वोटर लिस्ट अपडेट के लिए पंजाब में बड़ा अभियान, 86% मैपिंग पूरी; कल से शुरू होगा SIR

अमृतसर  पंजाब में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए 25 जून से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत राज्यभर में 24,453 बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। यह अभियान 24 जुलाई तक चलेगा। पंजाब की मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बुधवार को पंजाब भवन में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जाएगी। 2.14 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचेगा चुनावी अमला मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार, राज्य के 24,453 BLO अगले एक महीने तक घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करेंगे, उनका सत्यापन करेंगे और उन्हें वापस एकत्र करेंगे। इस दौरान पंजाब के 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 43 मतदाताओं का डेटा अपडेट किया जाएगा। साथ ही मतदान केंद्रों के युक्तिकरण का कार्य भी 24 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। 3 अगस्त को जारी होगी प्रारूप मतदाता सूची अभियान पूरा होने के बाद 3 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद मतदाता नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित दावे और आपत्तियां 2 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे। इनका निपटारा 28 सितंबर तक किया जाएगा और 1 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी। 86 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी बैठक के दौरान बताया गया कि पंजाब में अब तक 86.02 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो सकी है, उनकी सूची सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध करा दी गई है। चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से अभियान को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि रहे मौजूद बैठक में अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी अमनदीप गर्ग, संयुक्त मुख्य चुनाव अधिकारी नवनीत कौर बल्ल समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आम आदमी पार्टी की ओर से फैरी सॉफ्ट, कांग्रेस की ओर से हरदीप सिंह किंगरा और हैप्पी खेड़ा, भाजपा की ओर से परमपाल कौर, शिरोमणि अकाली दल की ओर से एडवोकेट अर्शदीप सिंह क्लेर और नछत्तर सिंह गिल तथा बसपा की ओर से जसवंत राय और हरभजन सिंह उपस्थित रहे। इस अभियान के जरिए चुनाव आयोग राज्य की मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने का प्रयास करेगा, ताकि आगामी चुनावों में पात्र मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।  

पद्मश्री संत निरंजन दास के पंजाब आगमन पर जोरदार स्वागत, एयरपोर्ट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

चंडीगढ़. डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास जी को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया है। संत निरंजन दास जी को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पद्मश्री अवॉर्ड सम्मान दिया। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई गणमान्य शामिल रहे। पद्मश्री सम्मान से सम्मानित संत निरंजन दास जी आज नई दिल्ली से वापस आदमपुर एयरपोर्ट पर पहुंचे। इस दौरान एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागता हुआ। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया का अधिकारियों व उनकी संगतों द्वारा गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया गया। इस दौरान एयरपोर्ट पहुंचे समर्थकों और संगतों में भी काफी उत्साह देखने को मिला। उन्होंने संत निरंजर दास जी के दर्शन करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।  आदमपुर हवाई अड्डे को मिला नया नाम आपको बता दें कि, संत निरंजन दास जी को समाज सेवा, मानवता और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान के लिए इस सम्मान से नवाजा गया है। इस सम्मान के बाद डेरा सचखंड बल्लां से जुड़े लाखों श्रद्धालुओं और पंजाबवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। संत निरंजन दास जी लंबे समय से समाज सेवा, मानव कल्याण और धार्मिक-सामाजिक जागरूकता के कार्यों से जुड़े रहे हैं। डेरा सचखंड बल्लां के माध्यम से उन्होंने समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान, शिक्षा, सेवा और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यही वजह है कि उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है।

प्राइवेट मेडिकल कॉलेज फीस मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, EWS याचिका खारिज

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने EWS आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेज फीस को लेकर याचिका खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों जैसी फीस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता क्योंकि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है. जस्टिस बी वी नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों में अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकते तो स्कॉलरशिप समेत अन्य विकल्प जैसे सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं. जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है, जबकि निजी संस्थान अपनी फीस से चलते हैं और अगर निजी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त फीस लेने से रोका गया तो चिकित्सा शिक्षा में उनका योगदान प्रभावित होगा।  जो वहन नहीं कर सकते हैं फीस  इस मु्द्दे पर फैसला देते हुए जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकता है, तो स्कॉलरशिप, सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं।  देश को डॉक्टरों की जरूरत उन्होंने आगे कहा कि देश को अधिक डॉक्टरों की जरूरत है और निजी मेडिकल कॉलेज इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में निजी कॉलेजों की फीस अधिक है केवल इसलिए उन्हें सरकारी कॉलेजों के बराबर फीस लेने का आदेश नहीं दिया जा सकता. हालांकि,  सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़ा कोई व्यापक कानूनी प्रश्न भविष्य में उठाया जा सकता है।  राजस्थान का भी उठा मामला वहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने भी निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना को वैध माना था और कहा था कि राज्य की फीस नियामक समिति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार ही फीस तय की गई है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 8 लाख रुपये के वार्षिक आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेजों की ऊंची फीस के बीच कथित विरोधाभास को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई अपील पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया।