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राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के नेतृत्व में योग दिवस के उपलक्ष्य में अधिकारी हुए शामिल

 जयपुर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के उपलक्ष्य में राजस्थान विधानसभा परिसर स्थित कर्तव्य द्वार पर शुक्रवार प्रातः 6 बजे सामूहिक योग कार्यक्रम योगोत्‍सव का आयोजन किया गया। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में विधायकगण, विधानसभा सचिवालय के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।  इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। योग स्वस्थ शरीर, संतुलित मन एवं सकारात्मक जीवन दृष्टि प्रदान करता है। शारीरिक समन्वय, मानसिक एकाग्रता और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। देवनानी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग तनावमुक्त जीवन, रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि तथा स्वस्थ समाज के निर्माण का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी नागरिकों से योग को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।   सामूहिक योगाभ्यास की शुरुआत देवनानी ने दीप प्रज्‍ज्‍वलन के साथ किया। कार्यक्रम में विधायक गोपाल शर्मा, गोपीचन्‍द मीणा, हरि सिंह रावत, शंकर सिंह रावत, ताराचन्‍द जैन, श्रीमती गीता बरवड और श्रीमती शोभा रानी कुशवाहा मौजूद थे। वैदिक मंगलाचरण एवं प्रार्थना के साथ सूक्ष्म व्यायाम जैसी शिथिलीकरण क्रियाएं कराई गई। योगाचार्य सत्‍यपाल सिंह और योगाचार्य मेघसिंह ने सामान्‍य योग प्रोटोकाल के अनुरूप योगासन, प्राणायम, ध्‍यान और शांतिपाठ कराया। ताड़ासन, वृक्षासन, अर्धचक्रासन, पादहस्तासन एवं त्रिकोणासन का अभ्यास खडे होकर कराया गया। भद्रासन, वज्रासन, उष्‍ट्रासन, शशकासन, उन्‍तानमंडूकासन, वक्रासन और अर्ध-उष्ट्रासन का अभ्यास बैठकर कराया गया। उदर के बल लेट कर मकरासन, भुजंगासन, शलभासन, वहीं पीठ के बल लेट कर किए जाने वाले आसनों में सेतुबंधासन, उत्तानपादासन, अर्ध-हलासन, पवनमुक्तासन एवं शवासन का अभ्यास कराया गया। योगाभ्यास के दौरान प्रतिभागियों ने प्राणायाम एवं ध्यान की विभिन्न विधियों का भी अभ्यास किया, जिससे शारीरिक स्फूर्ति, मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन का अनुभव प्राप्त हुआ।  कार्यक्रम का समापन देवनानी ने सामूहिक संकल्प के साथ किया। देवनानी ने विश्व कल्याण, मानव एकता और स्वस्थ जीवन की कामना के साथ योग ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को सशक्त बनाते हुए सम्पूर्ण मानवता को स्वस्थ, सद्भाव और संतुलित जीवन को दिशा प्रदान करने का संकल्‍प कराया। योग कार्यक्रम में प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा, विशिष्‍ट सहायक के.के. शर्मा सहित विधानसभा सचिवालय के अधिकारीगण, कर्मचारीगण एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।  

राज्यपाल डेका से सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ की स्टैंडिंग काउंसिल सुजैन ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल डेका से सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ की स्टैंडिंग काउंसिल सुजैन ने की सौजन्य भेंट रायपुर  राज्यपाल रमेन डेका से आज लोकभवन में सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ शासन की स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में कार्यरत युवा अधिवक्ता सुसुगंधा जैन ने सौजन्य भेंट की।             सुसुगंधा जैन एनसीईआरटी अंतर्गत राष्ट्रीय शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान में बाहरी पॉश प्रशिक्षक के रूप में भी कार्यरत है तथा वे वर्ष 2025 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में भारत की ओर से जज की भूमिका निभाने वाली पहली भारतीय बनी थी। राज्यपाल ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी। भेंट के दौरान उनकी माता श्रीमती इंदिरा जैन भी उपस्थित थी।

बिरसा मुंडा एयरपोर्ट होगा और सुरक्षित, आपात स्थितियों के लिए तैयार होगा अलग ऑपरेशन जोन

रांची  बिरसा मुंडा एयरपोर्ट को देश के अत्याधुनिक और सुरक्षित हवाई अड्डों की श्रेणी में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। एयरपोर्ट परिसर में विशेष आईसोलेशन वे के निर्माण की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। रनवे-तीन क्षेत्र में इसके लिए जमीन भी चिह्नित कर ली गई है। 20 एकड़ क्षेत्र इस परियोजना के लिए विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित आईसोलेशन वे की लंबाई करीब 350 मीटर और चौड़ाई 30 मीटर होगी। विमानों की आवाजाही के लिए 20 मीटर चौड़ा मार्ग बनाया जाएगा, जबकि दोनों ओर 3.5-3.5 मीटर चौड़ा शोल्डर होगा, जहां लाइटिंग और अन्य सुरक्षा उपकरण लगाए जाएंगे। रांची एयरपोर्ट में यह सुविधा शुरू होने के बाद झारखंड को भी देश के उन चुनिंदा एयरपोर्ट्स में स्थान मिलेगा, जहां किसी भी सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए अलग ऑपरेशन जोन उपलब्ध होगा। आपात स्थिति में होगा उपयोग हाल के दिनों में विमान में बम रखने, एयरपोर्ट को उड़ाने और हाईजैक जैसी धमकियों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए रांची एयरपोर्ट को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में करीब 15 से 20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह आइसोलेशन वे सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। आईसोलेशन वे ऐसी विशेष सुविधा है, जहां किसी संदिग्ध या आपात स्थिति वाले विमान को सामान्य परिचालन क्षेत्र से अलग ले जाकर खड़ा किया जाता है। विमान में बम की सूचना, हाईजैक की आशंका, संक्रमण फैलने का खतरा अथवा किसी संवेदनशील उड़ान की सुरक्षा जैसे मामलों में इसका उपयोग किया जाता है। इससे यात्रियों, अन्य विमानों और एयरपोर्ट संचालन पर खतरे का असर नहीं पड़ता। परियोजना का डिजाइन स्वीकृत हो चुका है और प्लानिंग अंतिम चरण में है। जमीन उपलब्ध होते ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। आपात स्थिति में विमान को सीधे आईसोलेशन वे में भेजकर सुरक्षा एजेंसियां विशेष अभियान चला सकेंगी, जिससे एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। विनोद कुमार, निदेशक एयरपोर्ट  

310 किलो से 112 किलो तक: इस शख्स की हैरान करने वाली वेट लॉस जर्नी

ब्राजील के रहने वाले एक शख्स का वजन बढ़कर 310 किलो हो गया था. भारी शरीर के कारण वह डिप्रेशन में आ गया और सोशल फोबिया की वजह से उसने खुद को घर में कैद कर लिया था. लाठी के सहारे चलने वाले इस शख्स के साथ एक दिन ऐसी घटना घटी कि उसका स्वाभिमान जाग गया. इसके बाद उसने बिना कोई भारी वर्कआउट किए सिर्फ एक देसी फॉर्मूले से अपना 112 किलो वजन कम कर लिया है. आज सोशल मीडिया पर उसकी वेट लॉस जर्नी जमकर वायरल हो रही है. तो आइए जानते हैं, इतने भारी-भरकम शरीर के साथ उसने कैसे वजन कम किया. कार का दरवाजा नहीं खुला तो रो पड़ा 112 किलो वजन कम करने वाले शख्स का नाम जूलियो मामुटे (JULIO MAMUTE) है. उसने पॉडकास्ट में बताया, वजन बढ़ने के बाद उसने घर से निकलना बंद कर दिया था. इस बीच उसकी बहन के बेटे का जन्म हुआ. वह अपने भतीजे के लिए ऑनलाइन एक खिलौना खरीदकर उसे देने पहुंचा. लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि भारी शरीर के कारण वह कार का दरवाजा तक नहीं खोल पाया. उसने रोते हुए अपनी बहन को फोन किया और कहा, 'मुझसे नहीं हो पा रहा, तुम नीचे आकर गिफ्ट ले जाओ.' बस इस लाचारी और अपमान ने उसे अंदर तक हिला दिया. उसने सोचा कि अगर आज वह भतीजे से नहीं मिल पा रहा तो कभी अपने खुद के बच्चे नहीं संभाल पाएगा. घुटने जवाब दे चुके थे फिर किया ये काम वजन 310 किलो होने की वजह से जिम जाना या रनिंग करना घुटनों के लिए नामुमकिन था. ऐसे में उसने दिमाग लगाया और वॉटर एरोबिक्स क्लास जॉइन की. हालांकि, वहां बुजुर्ग महिलाओं की गॉसिप और केक-कॉफी के चक्कर में वर्कआउट नहीं हो पाता था. इसके बाद उसने सीधा स्विमिंग पूल का रास्ता चुना. उसने दिन में 2 बार स्विमिंग करना शुरू किया. 112 में से 80 किलो वजन स्विमिंग से घटाया इस शख्स का कहना है कि उसने जो 112 किलो वजन घटाया है, उसमें से 80 किलो वजन सिर्फ और सिर्फ स्विमिंग की वजह से कम हुआ है. पानी ने उसके घुटनों पर दबाव भी नहीं आने दिया और उसकी पूरी बॉडी टोन हो गई. जनवरी 2025 में उसने अपना सोशल मीडिया पेज बनाया और आज उसका एक वीडियो 10.5 करोड़ से ज्यादा व्यूज बटोर चुका है. स्विमिंग से वेट लॉस कैसे होता है? स्विमिंग वजन घटाने का एक बेहतरीन और असरदार तरीका है क्योंकि यह एक फुल-बॉडी वर्कआउट है, जिसमें सिर से लेकर पैर तक की सभी मसल्स एक साथ काम करते हैं. जब आप पानी में तैरते हैं तो पानी का रेजिस्टेंस (प्रतिरोध) हवा के मुकाबले लगभग 12 गुना ज्यादा होता है, जिससे शरीर को आगे बढ़ने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है और बहुत तेजी से कैलोरी बर्न होती है. अच्छी बात यह है कि पानी के भीतर आपके शरीर का वजन महसूस नहीं होता जिससे भारी वजन होने पर भी घुटनों, रीढ़ की हड्डी और जोड़ों पर कोई दबाव या झटका नहीं पड़ता. यह आपके मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करती है कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों का काम एक साथ करती है, जिससे बिना किसी इंजरी के रिस्क के शरीर का एक्स्ट्रा फैट बहुत तेजी से पिघलने लगता है.

छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से की शिष्टाचार भेंट

मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने की सौजन्य मुलाकात मुख्यमंत्री ने दी बधाई, योग के प्रचार-प्रसार एवं जनजागरूकता के कार्यों के लिए शुभकामनाएं रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने संजय अग्रवाल को छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारत की प्राचीन एवं गौरवशाली परंपरा का अभिन्न अंग है, जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने प्रदेश में योग को जन-जन तक पहुंचाने तथा युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को योग से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। मुलाकात के दौरान योग के संवर्धन तथा प्रदेश में योग संबंधी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने से संबंधित विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष अग्रवाल के नेतृत्व में प्रदेश में योग के प्रचार-प्रसार, जनजागरूकता तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।

रेलवे का बड़ा कदम: 30 करोड़ की लागत से टाटीसिलवे, सिल्ली समेत 7 स्टेशनों पर बनेगा आधुनिक फुट ओवरब्रिज

रांची  रांची मंडल द्वारा सात रेलवे स्टेशनों पर नए फुट ओवरब्रिज के निर्माण का कार्य शुरू किया जा रहा है। जिन स्टेशनों पर नए फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे, उनमें टाटीसिलवे, तुलिन, टांगरबसली, सिल्ली, नामकुम, झालिदा और रामगढ़ कैंट स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा ओरगा और गोविंदपुर रेलवे स्टेशनों पर पहले से मौजूद फुट ओवरब्रिज का विस्तार किया जाएगा ताकि यात्रियों को प्लेटफॉर्म बदलने में अधिक सुविधा मिल सके। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन उपलब्ध कराना है। वर्तमान में कई छोटे स्टेशनों पर यात्री प्लेटफार्म बदलने के लिए सीधे रेलवे ट्रैक पार करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। नए फुट ओवरब्रिज बनने के बाद यात्रियों को पटरियां पार करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और स्टेशन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। साथ ही, प्लेटफार्मों पर भीड़ प्रबंधन में भी सुधार आएगा। ट्रेन आने और जाने के दौरान यात्रियों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी तथा बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष राहत मिलेगी। रेलवे का मानना है कि इन सुविधाओं से दैनिक यात्रियों और लंबी दूरी के यात्रियों दोनों को सीधा लाभ मिलेगा। 30 करोड़ की लागत से होगा निर्माण रेलवे मंडल के अनुसार इस पूरी परियोजना पर लगभग 30 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सभी निर्माण एवं विस्तार कार्यों को वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्यों में आधुनिक डिजाइन, मजबूत संरचना और बेहतर यात्री सुविधाओं का ध्यान रखा जाएगा। रांची मंडल में रेलवे ढांचे को मजबूत करने के लिए कई अन्य परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। रांची से ओरगा के बीच रेलवे लाइन दोहरीकरण का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस रेलखंड के विभिन्न स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का और विस्तार किया जाएगा। इसमें बेहतर प्रतीक्षालय, प्रकाश व्यवस्था, प्लेटफॉर्म विकास, पेयजल और यात्री सूचना प्रणाली जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी।

महाभारत के 5 बड़े छल: जिन्होंने बदल दी युद्ध की दिशा

महाभारत केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि यह धर्म और अधर्म, नीति और राजनीति, प्रेम और प्रतिशोध की जटिल गाथा है. इस महाकाव्य में कई ऐसे मोड़ आए, जहां युद्ध केवल शक्ति से नहीं बल्कि रणनीति और छल से भी लड़ा गया था. कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जिन्हें इतिहास के सबसे बड़े धोखे या रणनीतिक चाल कहा जाता है. इन घटनाओं ने न सिर्फ युद्ध की दिशा बदली, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गहरे सवाल भी छोड़ दिए. आइए जानते हैं महाभारत के ऐसे ही 5 प्रमुख धोखों के बारे में. 1. द्रोणाचार्य और 'अश्वत्थामा मारा गया' का छल गुरु द्रोणाचार्य महाभारत के सबसे अजेय योद्धाओं में से एक थे. जब वे कौरव सेना के सेनापति बने, तो पांडवों की हार लगभग तय मानी जाने लगी. गुरु द्रोणाचार्य की सबसे बड़ी कमजोरी उनका पुत्र अश्वत्थामा था. श्रीकृष्ण ने इसी कमजोरी का उपयोग करते हुए योजना बनाई थी. एक हाथी, जिसका नाम भी अश्वत्थामा था, उसे मार दिया गया था. इसके बाद युधिष्ठिर ने द्रोणाचार्य से कहा कि, 'अश्वत्थामा मारा गया…', और धीरे से जोड़ा, 'हाथी'. युधिष्ठिर के इस आधे-सच ने द्रोणाचार्य को तोड़ दिया था. उन्होंने शस्त्र त्याग दिए और ध्यान में लीन हो गए. उसी समय धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया था. यह घटना महाभारत के सबसे बड़े मनोवैज्ञानिक धोखों में गिनी जाती है. 2. चक्रव्यूह और अभिमन्यु की अन्यायपूर्ण हत्या अभिमन्यु, अर्जुन का पुत्र, वीरता और साहस का प्रतीक माना जाता है. उसे चक्रव्यूह में प्रवेश करना आता था, लेकिन उससे बाहर निकलने की विधि नहीं पता थी. जब अर्जुन युद्धभूमि में नहीं थे, तब कौरवों ने चक्रव्यूह रचा. अभिमन्यु ने अकेले ही उसमें प्रवेश किया और कई महारथियों को परास्त किया था. लेकिन युद्ध के नियमों को तोड़ते हुए कौरवों ने मिलकर एक अकेले, घायल और निहत्थे अभिमन्यु पर हमला किया. उसे रथ से गिराया गया और अंततः उसकी हत्या कर दी गई. यह घटना महाभारत का सबसे क्रूर और शर्मनाक अध्याय मानी जाती है, जहां युद्ध की मर्यादा पूरी तरह टूट गई थी.  3. जयद्रथ वध और सूर्यास्त का भ्रम अभिमन्यु की मृत्यु के बाद अर्जुन ने प्रतिज्ञा ली कि वह अगले दिन सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करेंगे, अन्यथा स्वयं अग्नि में प्रवेश कर लेंगे. कौरवों ने जयद्रथ की सुरक्षा के लिए कड़ा घेरा बना दिया. जब सूर्यास्त का समय नजदीक आया और अर्जुन असफल होते दिखे, तब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से सूर्य को ढक दिया था. अंधकार छा गया और कौरवों ने समझा कि सूर्यास्त हो गया. जयद्रथ अपने रथ से बाहर आ गया. उसी क्षण सूर्य फिर प्रकट हुआ और अर्जुन ने उसका वध कर दिया. यह घटना युद्ध की सबसे चतुर रणनीतियों में गिनी जाती है, जिसमें भ्रम का उपयोग किया गया. 4. कर्ण का कवच-कुंडल छीनना कर्ण, सूर्यपुत्र और महान दानवीर, जन्म से ही दिव्य कवच और कुंडल के साथ पैदा हुए थे, जो उन्हें अजेय बनाते थे. इंद्र को भय था कि कर्ण अर्जुन को पराजित कर सकता है. उन्होंने ब्राह्मण का रूप धारण कर कर्ण से उसका कवच और कुंडल दान में मांग लिए थे. दानवीर कर्ण ने बिना संकोच सब कुछ दे दिया, जबकि वह जानता था कि इससे उसकी शक्ति कम हो जाएगी. बदले में इंद्र ने उसे 'शक्ति अस्त्र' दिया, जिसे वह केवल एक बार उपयोग कर सकता था. यह घटना दिखाती है कि कैसे एक महान योद्धा छल और राजनीति का शिकार बना. 5. भीष्म पितामह और शिखंडी की आड़ भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था और वे युद्ध में अजेय थे. उन्होंने प्रतिज्ञा ली थी कि वे किसी स्त्री पर शस्त्र नहीं उठाएंगे. श्रीकृष्ण ने इस प्रतिज्ञा को ही उनकी कमजोरी बना दिया. शिखंडी, जो पूर्व जन्म में अंबा थीं, को भीष्म के सामने खड़ा किया गया. भीष्म ने शिखंडी पर शस्त्र नहीं उठाए. उसी दौरान अर्जुन ने शिखंडी की आड़ से बाण चलाए और भीष्म को बाणों की शैया पर लिटा दिया था. यह घटना बताती है कि कभी-कभी धर्म की मर्यादा ही युद्ध में हार का कारण बन जाती है.

टेलीग्राम को राहत नहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने बैन हटाने से किया इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीग्राम पर बैन हटाने से इनकार कर दिया है. भारत सरकार ने टेलीग्राम पर RE-NEET एग्जाम के चलते अस्थाई बैन लगाने का फैसला लिया था, जिसको टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.   दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सरकारी के पास पावर है. कोर्ट ने कहा है कि आईटी एक्ट सरकार को पूरे प्लेटफॉर्म/ऐप पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है. सरकार के पास यह आदेश जारी करने की शक्ति थी.हाई कोर्ट के इस फैसले के मायने उन सभी मैसेजिंग ऐप के लिए हैं, जो भारत में काम करते हैं. हाई कोर्ट के फैसले से समझ आता है कि भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के प्लेटफॉर्म को भारतीय कानून के बाहर नहीं रखा जा सकता है और उन्हें भारतीय संविधान के तहत काम करना होगा. 21 जून को भारत में NEET एग्जाम भारत में 21 जून को भारत में NEET 2026 का एग्जाम दोबारा होने जा रहा है, जिसके चलते भारत सरकार ने सावधानी के तौर पर टेलीग्राम पर अस्थाई प्रतिबंध लगाया था. इसके बाद टेलीग्राम ने सरकार के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और बैन हटाने से इनकार कर दिया है. टेलीग्राम पर लगते रहे हैं गंभीर आरोप टेलीग्राम पर अक्सर पेपर लीक और फेक पेपर सर्कुलेट होने के आरोप लगते रहे हैं. दिल्ली हाई कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने दलील देते हुए बताया गया है कि टेलीग्राम प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई आतंकवादी गतिविधी में भी हुआ है. ये ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसको कई लोग गैर कानूनी सामान बेचने आदि में भी इस्तेमाल करते हैं. टेलीग्राम पर ढेरों फीचर्स ऐसे हैं, जिसकी वजह से इसपर अस्थाई बैन लगाने का फैसला लिया गया है. इसपर बिना फोन नंबर के भी अकाउंट तैयार किया जा सकता है. साथ ही एक वर्चुअल ग्रुप में मैक्सिमम 2 लाख तक लोगों को शामिल किया जा सकता है. व्हाट्सऐप भी जा चुका है कोर्ट भारत में यह कोई पहला सोशल मीडिया ऐप नहीं है, जो भारतीय न्यायपालिका गया है. इससे पहले मेटा भी वॉट्सऐप पर लगाए गए एक पैनल्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा चुका है. साल 2024 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा व्हाट्सऐप पर 213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.

योगी सरकार की सामूहिक विवाह योजना बनी OBC परिवारों का सहारा, हजारों घरों को मिली राहत

योगी सरकार में ओबीसी परिवारों के लिए संबल बनी सामूहिक विवाह योजना अन्य पिछड़ा वर्ग के 1.80 लाख से अधिक जोड़ों को मिला मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का सहारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,286 ओबीसी जोड़े हुए लाभान्वित, समाज कल्याण विभाग निभा रहा अहम भूमिका लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ किसी भेदभाव के बिना समाज के सभी वर्गों तक पहुंच रहा है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि पात्रता के आधार पर प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। इसी सोच का परिणाम है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब परिवारों के लिए सहारा बनी है। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के परिवारों की बात करें तो योगी सरकार के नौ वर्षों में 1,80,017 जोड़ों का विवाह इस योजना के माध्यम से संपन्न कराया गया है। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,286 ओबीसी जोड़े योजना से लाभान्वित हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की योजनाएं समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच रही हैं और पात्र लोगों को उनका अधिकार मिल रहा है।  पात्रता के आधार पर मिल रहा योजनाओं का लाभ योगी सरकार ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां किसी वर्ग विशेष के बजाय सभी पात्र परिवारों को लाभ दिया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के सम्मानजनक विवाह के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना लाखों परिवारों के जीवन में खुशियां लेकर आई है। समाज कल्याण विभाग निभा रहा सक्रिय भूमिका समाज कल्याण विभाग योजना के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभाग की ओर से लाभार्थियों का सत्यापन कर सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए जाते हैं। विवाह की संपूर्ण व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर सुनिश्चित की जाती है। समारोह में खान-पान, पंडाल, सजावट सहित अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि लाभार्थी परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। आर्थिक सहायता से मिल रहा सामाजिक संबल मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत प्रत्येक जोड़े को एक लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। इसमें 60 हजार रुपये वधू के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित किए जाते हैं, 25 हजार रुपये के उपहार एवं गृहस्थी के सामान दिए जाते हैं, जबकि 15 हजार रुपये विवाह आयोजन पर खर्च किए जाते हैं। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होता है और बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक संपन्न हो पाता है। योगी सरकार में पात्र परिवारों को मिल रहा योजनाओं का लाभ समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में समाज के प्रत्येक पात्र परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बीते 9 वर्षों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 4,957 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ, जो 2018-19 में बढ़कर 13,866 और 2019-20 में 15,417 तक पहुंच गया। वर्ष 2020-21 में 6,901, 2021-22 में 15,256, 2022-23 में 31,903, 2023-24 में 33,913 तथा 2024-25 में 31,518 जोड़ों का विवाह कराया गया। वहीं, वर्ष 2025-26 में 26,286 जोड़े इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आर्थिक संबल के साथ सामाजिक समरसता और सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा को मजबूत करते हुए कुल 5,54,202 जोड़ों की शादियां हुई हैं।

घर पर बनाएं मुल्तानी मिट्टी का नेचुरल साबुन, स्किन रहे साफ और ग्लोइंग

नहाते वक्त बॉडी वॉश और साबुन का इस्तेमाल तो हम सभी करते हैं. कोई साबुन अपनी खुशबू के लिए पसंद किया जाता है तो कोई चेहरे को अच्छी तरह साफ करने के लिए. लेकिन बाजार में मिलने वाले ज्यादातर साबुन और बॉडी वॉश में कई तरह के केमिकल्स होते हैं जो हर किसी के स्किन को सूट नहीं करते. ऐसे में अगर आप नेचुरल चीजों से बने स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं तो घर पर मुल्तानी मिट्टी का साबुन बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. मुल्तानी मिट्टी, नीम, चंदन जैसे नेचुरल चीजों से तैयार यह साबुन आपकी स्किन को साफ रखने के साथ-साथ उसे ताजगी और नमी देने में भी मदद कर सकता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है. तो आइए जानते हैं मुल्तानी मिट्टी से हर्बल साबुन बनाने का आसान तरीका. इंग्रेडिएंट्स (Ingredients) 2 चम्मच मुल्तानी मिट्टी 2 बड़े चम्मच चंदन पाउडर 1 बड़ा चम्मच एलोवेरा जेल थोड़ी-सी नीम की पत्तियां 1 छोटी चम्मच हल्दी जरूरत के अनुसार पानी घर पर मुल्तानी मिट्टी से साबुन कैसे बनाएं?  घर पर मुल्तानी मिट्टी का साबुन बनाने के लिए सबसे पहले मिक्सर में मुल्तानी मिट्टी, नीम की पत्तियां और एलोवेरा जेल डालें.     इसके बाद इसमें चंदन पाउडर, हल्दी और थोड़ा-सा पानी मिलाएं. अब सभी चीजों को अच्छी तरह पीसकर एक स्मूद पेस्ट तैयार कर लें.     ध्यान रखें कि पेस्ट न ज्यादा गाढ़ा हो और न ही ज्यादा पतला.     तैयार मिश्रण को हाथों की मदद से साबुन का आकार दें या किसी सांचे में भर दें.     इसके बाद इसे तेज धूप में कुछ दिनों तक अच्छी तरह सुखाएं.     जब मिश्रण पूरी तरह सख्त हो जाए तो आपका घर का बना नेचुरल मुल्तानी मिट्टी का साबुन इस्तेमाल के लिए तैयार है. मुल्तानी मिट्टी से बना यह साबुन क्यों है इतना खास? नेचुरल चीजों से तैयार किया गया यह साबुन स्किन से जुड़ी समस्याओं, जैसे पिंपल्स और दाग-धब्बों को कम करने में मदद कर सकता है. साथ ही यह स्किन पर नेचुरल ग्लो लाने में भी मदद करेगा.