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रेलवे का बड़ा कदम: 30 करोड़ की लागत से टाटीसिलवे, सिल्ली समेत 7 स्टेशनों पर बनेगा आधुनिक फुट ओवरब्रिज

रांची  रांची मंडल द्वारा सात रेलवे स्टेशनों पर नए फुट ओवरब्रिज के निर्माण का कार्य शुरू किया जा रहा है। जिन स्टेशनों पर नए फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे, उनमें टाटीसिलवे, तुलिन, टांगरबसली, सिल्ली, नामकुम, झालिदा और रामगढ़ कैंट स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा ओरगा और गोविंदपुर रेलवे स्टेशनों पर पहले से मौजूद फुट ओवरब्रिज का विस्तार किया जाएगा ताकि यात्रियों को प्लेटफॉर्म बदलने में अधिक सुविधा मिल सके। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन उपलब्ध कराना है। वर्तमान में कई छोटे स्टेशनों पर यात्री प्लेटफार्म बदलने के लिए सीधे रेलवे ट्रैक पार करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। नए फुट ओवरब्रिज बनने के बाद यात्रियों को पटरियां पार करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और स्टेशन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। साथ ही, प्लेटफार्मों पर भीड़ प्रबंधन में भी सुधार आएगा। ट्रेन आने और जाने के दौरान यात्रियों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होगी तथा बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष राहत मिलेगी। रेलवे का मानना है कि इन सुविधाओं से दैनिक यात्रियों और लंबी दूरी के यात्रियों दोनों को सीधा लाभ मिलेगा। 30 करोड़ की लागत से होगा निर्माण रेलवे मंडल के अनुसार इस पूरी परियोजना पर लगभग 30 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सभी निर्माण एवं विस्तार कार्यों को वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्यों में आधुनिक डिजाइन, मजबूत संरचना और बेहतर यात्री सुविधाओं का ध्यान रखा जाएगा। रांची मंडल में रेलवे ढांचे को मजबूत करने के लिए कई अन्य परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। रांची से ओरगा के बीच रेलवे लाइन दोहरीकरण का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस रेलखंड के विभिन्न स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का और विस्तार किया जाएगा। इसमें बेहतर प्रतीक्षालय, प्रकाश व्यवस्था, प्लेटफॉर्म विकास, पेयजल और यात्री सूचना प्रणाली जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी।

महाभारत के 5 बड़े छल: जिन्होंने बदल दी युद्ध की दिशा

महाभारत केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि यह धर्म और अधर्म, नीति और राजनीति, प्रेम और प्रतिशोध की जटिल गाथा है. इस महाकाव्य में कई ऐसे मोड़ आए, जहां युद्ध केवल शक्ति से नहीं बल्कि रणनीति और छल से भी लड़ा गया था. कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जिन्हें इतिहास के सबसे बड़े धोखे या रणनीतिक चाल कहा जाता है. इन घटनाओं ने न सिर्फ युद्ध की दिशा बदली, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गहरे सवाल भी छोड़ दिए. आइए जानते हैं महाभारत के ऐसे ही 5 प्रमुख धोखों के बारे में. 1. द्रोणाचार्य और 'अश्वत्थामा मारा गया' का छल गुरु द्रोणाचार्य महाभारत के सबसे अजेय योद्धाओं में से एक थे. जब वे कौरव सेना के सेनापति बने, तो पांडवों की हार लगभग तय मानी जाने लगी. गुरु द्रोणाचार्य की सबसे बड़ी कमजोरी उनका पुत्र अश्वत्थामा था. श्रीकृष्ण ने इसी कमजोरी का उपयोग करते हुए योजना बनाई थी. एक हाथी, जिसका नाम भी अश्वत्थामा था, उसे मार दिया गया था. इसके बाद युधिष्ठिर ने द्रोणाचार्य से कहा कि, 'अश्वत्थामा मारा गया…', और धीरे से जोड़ा, 'हाथी'. युधिष्ठिर के इस आधे-सच ने द्रोणाचार्य को तोड़ दिया था. उन्होंने शस्त्र त्याग दिए और ध्यान में लीन हो गए. उसी समय धृष्टद्युम्न ने उनका वध कर दिया था. यह घटना महाभारत के सबसे बड़े मनोवैज्ञानिक धोखों में गिनी जाती है. 2. चक्रव्यूह और अभिमन्यु की अन्यायपूर्ण हत्या अभिमन्यु, अर्जुन का पुत्र, वीरता और साहस का प्रतीक माना जाता है. उसे चक्रव्यूह में प्रवेश करना आता था, लेकिन उससे बाहर निकलने की विधि नहीं पता थी. जब अर्जुन युद्धभूमि में नहीं थे, तब कौरवों ने चक्रव्यूह रचा. अभिमन्यु ने अकेले ही उसमें प्रवेश किया और कई महारथियों को परास्त किया था. लेकिन युद्ध के नियमों को तोड़ते हुए कौरवों ने मिलकर एक अकेले, घायल और निहत्थे अभिमन्यु पर हमला किया. उसे रथ से गिराया गया और अंततः उसकी हत्या कर दी गई. यह घटना महाभारत का सबसे क्रूर और शर्मनाक अध्याय मानी जाती है, जहां युद्ध की मर्यादा पूरी तरह टूट गई थी.  3. जयद्रथ वध और सूर्यास्त का भ्रम अभिमन्यु की मृत्यु के बाद अर्जुन ने प्रतिज्ञा ली कि वह अगले दिन सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करेंगे, अन्यथा स्वयं अग्नि में प्रवेश कर लेंगे. कौरवों ने जयद्रथ की सुरक्षा के लिए कड़ा घेरा बना दिया. जब सूर्यास्त का समय नजदीक आया और अर्जुन असफल होते दिखे, तब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से सूर्य को ढक दिया था. अंधकार छा गया और कौरवों ने समझा कि सूर्यास्त हो गया. जयद्रथ अपने रथ से बाहर आ गया. उसी क्षण सूर्य फिर प्रकट हुआ और अर्जुन ने उसका वध कर दिया. यह घटना युद्ध की सबसे चतुर रणनीतियों में गिनी जाती है, जिसमें भ्रम का उपयोग किया गया. 4. कर्ण का कवच-कुंडल छीनना कर्ण, सूर्यपुत्र और महान दानवीर, जन्म से ही दिव्य कवच और कुंडल के साथ पैदा हुए थे, जो उन्हें अजेय बनाते थे. इंद्र को भय था कि कर्ण अर्जुन को पराजित कर सकता है. उन्होंने ब्राह्मण का रूप धारण कर कर्ण से उसका कवच और कुंडल दान में मांग लिए थे. दानवीर कर्ण ने बिना संकोच सब कुछ दे दिया, जबकि वह जानता था कि इससे उसकी शक्ति कम हो जाएगी. बदले में इंद्र ने उसे 'शक्ति अस्त्र' दिया, जिसे वह केवल एक बार उपयोग कर सकता था. यह घटना दिखाती है कि कैसे एक महान योद्धा छल और राजनीति का शिकार बना. 5. भीष्म पितामह और शिखंडी की आड़ भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था और वे युद्ध में अजेय थे. उन्होंने प्रतिज्ञा ली थी कि वे किसी स्त्री पर शस्त्र नहीं उठाएंगे. श्रीकृष्ण ने इस प्रतिज्ञा को ही उनकी कमजोरी बना दिया. शिखंडी, जो पूर्व जन्म में अंबा थीं, को भीष्म के सामने खड़ा किया गया. भीष्म ने शिखंडी पर शस्त्र नहीं उठाए. उसी दौरान अर्जुन ने शिखंडी की आड़ से बाण चलाए और भीष्म को बाणों की शैया पर लिटा दिया था. यह घटना बताती है कि कभी-कभी धर्म की मर्यादा ही युद्ध में हार का कारण बन जाती है.

टेलीग्राम को राहत नहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने बैन हटाने से किया इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीग्राम पर बैन हटाने से इनकार कर दिया है. भारत सरकार ने टेलीग्राम पर RE-NEET एग्जाम के चलते अस्थाई बैन लगाने का फैसला लिया था, जिसको टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.   दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सरकारी के पास पावर है. कोर्ट ने कहा है कि आईटी एक्ट सरकार को पूरे प्लेटफॉर्म/ऐप पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है. सरकार के पास यह आदेश जारी करने की शक्ति थी.हाई कोर्ट के इस फैसले के मायने उन सभी मैसेजिंग ऐप के लिए हैं, जो भारत में काम करते हैं. हाई कोर्ट के फैसले से समझ आता है कि भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के प्लेटफॉर्म को भारतीय कानून के बाहर नहीं रखा जा सकता है और उन्हें भारतीय संविधान के तहत काम करना होगा. 21 जून को भारत में NEET एग्जाम भारत में 21 जून को भारत में NEET 2026 का एग्जाम दोबारा होने जा रहा है, जिसके चलते भारत सरकार ने सावधानी के तौर पर टेलीग्राम पर अस्थाई प्रतिबंध लगाया था. इसके बाद टेलीग्राम ने सरकार के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और बैन हटाने से इनकार कर दिया है. टेलीग्राम पर लगते रहे हैं गंभीर आरोप टेलीग्राम पर अक्सर पेपर लीक और फेक पेपर सर्कुलेट होने के आरोप लगते रहे हैं. दिल्ली हाई कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने दलील देते हुए बताया गया है कि टेलीग्राम प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कई आतंकवादी गतिविधी में भी हुआ है. ये ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसको कई लोग गैर कानूनी सामान बेचने आदि में भी इस्तेमाल करते हैं. टेलीग्राम पर ढेरों फीचर्स ऐसे हैं, जिसकी वजह से इसपर अस्थाई बैन लगाने का फैसला लिया गया है. इसपर बिना फोन नंबर के भी अकाउंट तैयार किया जा सकता है. साथ ही एक वर्चुअल ग्रुप में मैक्सिमम 2 लाख तक लोगों को शामिल किया जा सकता है. व्हाट्सऐप भी जा चुका है कोर्ट भारत में यह कोई पहला सोशल मीडिया ऐप नहीं है, जो भारतीय न्यायपालिका गया है. इससे पहले मेटा भी वॉट्सऐप पर लगाए गए एक पैनल्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा चुका है. साल 2024 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा व्हाट्सऐप पर 213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.

योगी सरकार की सामूहिक विवाह योजना बनी OBC परिवारों का सहारा, हजारों घरों को मिली राहत

योगी सरकार में ओबीसी परिवारों के लिए संबल बनी सामूहिक विवाह योजना अन्य पिछड़ा वर्ग के 1.80 लाख से अधिक जोड़ों को मिला मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का सहारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,286 ओबीसी जोड़े हुए लाभान्वित, समाज कल्याण विभाग निभा रहा अहम भूमिका लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ किसी भेदभाव के बिना समाज के सभी वर्गों तक पहुंच रहा है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि पात्रता के आधार पर प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। इसी सोच का परिणाम है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब परिवारों के लिए सहारा बनी है। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के परिवारों की बात करें तो योगी सरकार के नौ वर्षों में 1,80,017 जोड़ों का विवाह इस योजना के माध्यम से संपन्न कराया गया है। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26,286 ओबीसी जोड़े योजना से लाभान्वित हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की योजनाएं समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच रही हैं और पात्र लोगों को उनका अधिकार मिल रहा है।  पात्रता के आधार पर मिल रहा योजनाओं का लाभ योगी सरकार ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां किसी वर्ग विशेष के बजाय सभी पात्र परिवारों को लाभ दिया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के सम्मानजनक विवाह के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना लाखों परिवारों के जीवन में खुशियां लेकर आई है। समाज कल्याण विभाग निभा रहा सक्रिय भूमिका समाज कल्याण विभाग योजना के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभाग की ओर से लाभार्थियों का सत्यापन कर सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए जाते हैं। विवाह की संपूर्ण व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर सुनिश्चित की जाती है। समारोह में खान-पान, पंडाल, सजावट सहित अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि लाभार्थी परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। आर्थिक सहायता से मिल रहा सामाजिक संबल मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत प्रत्येक जोड़े को एक लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। इसमें 60 हजार रुपये वधू के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित किए जाते हैं, 25 हजार रुपये के उपहार एवं गृहस्थी के सामान दिए जाते हैं, जबकि 15 हजार रुपये विवाह आयोजन पर खर्च किए जाते हैं। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होता है और बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक संपन्न हो पाता है। योगी सरकार में पात्र परिवारों को मिल रहा योजनाओं का लाभ समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में समाज के प्रत्येक पात्र परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बीते 9 वर्षों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 4,957 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ, जो 2018-19 में बढ़कर 13,866 और 2019-20 में 15,417 तक पहुंच गया। वर्ष 2020-21 में 6,901, 2021-22 में 15,256, 2022-23 में 31,903, 2023-24 में 33,913 तथा 2024-25 में 31,518 जोड़ों का विवाह कराया गया। वहीं, वर्ष 2025-26 में 26,286 जोड़े इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आर्थिक संबल के साथ सामाजिक समरसता और सबका साथ, सबका विकास की अवधारणा को मजबूत करते हुए कुल 5,54,202 जोड़ों की शादियां हुई हैं।

घर पर बनाएं मुल्तानी मिट्टी का नेचुरल साबुन, स्किन रहे साफ और ग्लोइंग

नहाते वक्त बॉडी वॉश और साबुन का इस्तेमाल तो हम सभी करते हैं. कोई साबुन अपनी खुशबू के लिए पसंद किया जाता है तो कोई चेहरे को अच्छी तरह साफ करने के लिए. लेकिन बाजार में मिलने वाले ज्यादातर साबुन और बॉडी वॉश में कई तरह के केमिकल्स होते हैं जो हर किसी के स्किन को सूट नहीं करते. ऐसे में अगर आप नेचुरल चीजों से बने स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं तो घर पर मुल्तानी मिट्टी का साबुन बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. मुल्तानी मिट्टी, नीम, चंदन जैसे नेचुरल चीजों से तैयार यह साबुन आपकी स्किन को साफ रखने के साथ-साथ उसे ताजगी और नमी देने में भी मदद कर सकता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है. तो आइए जानते हैं मुल्तानी मिट्टी से हर्बल साबुन बनाने का आसान तरीका. इंग्रेडिएंट्स (Ingredients) 2 चम्मच मुल्तानी मिट्टी 2 बड़े चम्मच चंदन पाउडर 1 बड़ा चम्मच एलोवेरा जेल थोड़ी-सी नीम की पत्तियां 1 छोटी चम्मच हल्दी जरूरत के अनुसार पानी घर पर मुल्तानी मिट्टी से साबुन कैसे बनाएं?  घर पर मुल्तानी मिट्टी का साबुन बनाने के लिए सबसे पहले मिक्सर में मुल्तानी मिट्टी, नीम की पत्तियां और एलोवेरा जेल डालें.     इसके बाद इसमें चंदन पाउडर, हल्दी और थोड़ा-सा पानी मिलाएं. अब सभी चीजों को अच्छी तरह पीसकर एक स्मूद पेस्ट तैयार कर लें.     ध्यान रखें कि पेस्ट न ज्यादा गाढ़ा हो और न ही ज्यादा पतला.     तैयार मिश्रण को हाथों की मदद से साबुन का आकार दें या किसी सांचे में भर दें.     इसके बाद इसे तेज धूप में कुछ दिनों तक अच्छी तरह सुखाएं.     जब मिश्रण पूरी तरह सख्त हो जाए तो आपका घर का बना नेचुरल मुल्तानी मिट्टी का साबुन इस्तेमाल के लिए तैयार है. मुल्तानी मिट्टी से बना यह साबुन क्यों है इतना खास? नेचुरल चीजों से तैयार किया गया यह साबुन स्किन से जुड़ी समस्याओं, जैसे पिंपल्स और दाग-धब्बों को कम करने में मदद कर सकता है. साथ ही यह स्किन पर नेचुरल ग्लो लाने में भी मदद करेगा.

डाइनिंग टेबल पर इन चीजों को रखने से बचें, वरना घर की बरकत और सुख-समृद्धि पर असर

 घर का डाइनिंग रूम सिर्फ भोजन करने की जगह नहीं है, बल्कि यह वह स्थान है जहां परिवार के सदस्य एक साथ जुड़ते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, डाइनिंग टेबल का हमारे जीवन, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर बहुत गहरा असर पड़ता है.  क्या आप जानते हैं कि आपकी डाइनिंग टेबल पर रखी कुछ छोटी-छोटी चीजें आपके घर की बरकत छीन सकती हैं? यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहे और धन का आगमन हो, तो आज ही अपनी डाइनिंग टेबल से इन चीजों को हटा दें: 1. दवाइयां (Medicines) कभी भी डाइनिंग टेबल पर दवाइयां न रखें. भोजन करने वाली जगह पर दवाओं का होना स्वास्थ्य में सुधार के बजाय नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है. यह घर के सदस्यों के बीमार पड़ने का संकेत हो सकता है. 2. टूटी-फूटी क्रॉकरी अगर आपकी डाइनिंग टेबल पर रखे प्लेट, कप या चम्मच कहीं से चटके या टूटे हुए हैं, तो उन्हें तुरंत हटा दें. टूटे हुए बर्तन दरिद्रता को आमंत्रित करते हैं. हमेशा साफ और साबूत बर्तनों का ही इस्तेमाल करें. 3. फालतू कागजात और बिल अक्सर लोग डाइनिंग टेबल को ही अपना ऑफिस डेस्क बना लेते हैं. वहां बिखरे पुराने बिल, रसीदें या अखबार न रखें.  यह राहु का प्रभाव बढ़ाता है जिससे आर्थिक तनाव भी बढता है. 4. सूखे फूल या कांटेदार पौधे डाइनिंग टेबल पर हमेशा ताजे फूल रखें. सूखे हुए फूल या कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस) सकारात्मक ऊर्जा को सोख कर घर में कलह का कारण बनते हैं. 5. खाली नमकदानी (Salt Shaker) वास्तु में नमक को सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है.  डाइनिंग टेबल पर रखी नमकदानी को कभी खाली न होने दें. इसे हमेशा भरा रखना घर में धन और खुशहाली का संकेत माना जाता है. पैसा और बरकत बढ़ाने के लिए अपनाएं ये उपाय: आईने का सही इस्तेमाल: डाइनिंग टेबल के सामने दीवार पर एक बड़ा आईना (Mirror) लगाएं. यह खाने की मेज के प्रतिबिंब को दोगुना दिखाता है, जिसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. फल की टोकरी: मेज के बीच में ताजे फलों की टोकरी रखें. यह घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होने देता. साफ-सफाई: भोजन करने के तुरंत बाद टेबल साफ करें. बची हुई जूठन या गंदगी को रात भर टेबल पर छोड़ना आर्थिक नुकसान का सबसे बड़ा कारण है.

वट सावित्री व्रत 2026: जानें बदलती तिथियां और शुभ मुहूर्त

 हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है.  यह व्रत अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ रखा जाता है. इस वर्ष कैलेंडर गणना और अधिकमास के प्रभाव के कारण वट सावित्री व्रत की तिथियों को लेकर कुछ बदलाव देखने को मिले हैं. आइए जानते हैं कि इस साल वट सप्तमी (बड़ साते) और वट पूर्णिमा कब मनाई जाएगी. क्यों बदला वट सावित्री व्रत का समय? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ मास में रखा जाता है. इस वर्ष ज्येष्ठ मास में अधिकमास (मलमास) आने के कारण तिथियों के क्रम में अंतर आया है.  अमावस्या के बाद अधिकमास की अवधि रही, जिसके समाप्त होने के बाद पुन: ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू हुआ. इसी कारण से इस वर्ष परंपरा के अनुसार, वट सप्तमी और वट पूर्णिमा की तिथियां सामान्य समय से आगे बढ़ गई हैं. वट सप्तमी (बड़ साते) 2026: कब है? ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को वट सप्तमी या बड़ साते के रूप में जाना जाता है.  कई क्षेत्रों में महिलाएं इस दिन भी अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा करती हैं. इस साल बड़ साते का व्रत 21 जून 2026 को रखा जाएगा. वट पूर्णिमा 2026: शुभ तिथि और मुहूर्त देश के कई हिस्सों में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को ही वट सावित्री का व्रत किया जाता है, जिसे वट पूर्णिमा कहते हैं. इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 29 जून 2026 (सोमवार) को पड़ रही है. पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 29 जून 2026 को सुबह 03:06 बजे से. पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 30 जून 2026 को सुबह 05:26 बजे तक. पूजा का महत्व: 29 जून को ही वट पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा.  इस दिन सुहागिनें बरगद के पेड़ की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि की प्रार्थना करेंगी. वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावित्री ने इसी वट वृक्ष के नीचे यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांगे थे. यही कारण है कि इस दिन बरगद के पेड़ को अमरता और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है. महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं, वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं, कच्चा सूत अर्पित करती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं. कई परंपराओं में इस दिन सास को बायना देने की भी प्रथा है.

यात्रियों के लिए बड़ी सौगात: छपरा-दिल्ली और मऊ-दिल्ली एक्सप्रेस सेवा का शुभारंभ, मेमू ट्रेन का भी विस्तार

 छपरा  पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा यात्रियों को बेहतर रेल सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में 19 जून का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव एवं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी छपरा जंक्शन पर आयोजित विशेष समारोह में नई रेल सेवाओं का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर छपरा-दिल्ली आनंद विहार टर्मिनस साप्ताहिक एक्सप्रेस, मऊ-दिल्ली आनंद विहार टर्मिनस एक्सप्रेस तथा दोहरीघाट-औंड़िहार मेमू ट्रेन सेवा के वाराणसी सिटी तक विस्तारित मार्ग का उद्घाटन किया जाएगा। समारोह में सारण के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी, महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, एमएलसी वीरेन्द्र नारायण यादव, आफाक अहमद, सच्चिदानंद राय तथा विधायक छोटी कुमारी उपस्थित रहेंगी। वहीं मऊ जंक्शन पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास, शहरी समग्र विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन, ऊर्जा मंत्री अरविन्द कुमार शर्मा तथा घोसी के सांसद राजीव राय शामिल होंगे। मऊ-दिल्ली एक्सप्रेस और मेमू सेवा विस्तार की भी सौगात रेलवे अधिकारियों के अनुसार 12527 छपरा-आनंद विहार टर्मिनस साप्ताहिक एक्सप्रेस प्रत्येक रविवार को रात 8:50 बजे छपरा से रवाना होकर अगले दिन दोपहर 2 बजे आनंद विहार पहुंचेगी। वापसी में 12528 आनंद विहार-छपरा एक्सप्रेस प्रत्येक सोमवार को शाम 4:25 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 9:40 बजे छपरा पहुंचेगी। यह ट्रेन बलिया, मऊ, आजमगढ़, शाहगंज, जौनपुर, सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद स्टेशनों पर ठहरेगी। इसी प्रकार 14055 मऊ-आनंद विहार टर्मिनस एक्सप्रेस प्रत्येक गुरुवार को मऊ से चलेगी, जबकि 14056 आनंद विहार-मऊ एक्सप्रेस प्रत्येक बुधवार को संचालित होगी। साथ ही दोहरीघाट-औंड़िहार मेमू सेवा का विस्तार वाराणसी सिटी तक कर दिया गया है। मढ़ौरा लोको प्लांट से गिनी के लिए रवाना होगा 51वां रेल इंजन  कार्यक्रम के दौरान रेल मंत्री और मुख्यमंत्री मढ़ौरा लोकोमोटिव प्लांट में आयोजित समारोह में गिनी गणराज्य को निर्यात किए जाने वाले 51वें डब्ल्यूडीजी4जी रेल इंजन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। छपरा में आयोजित कार्यक्रम में पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक उदय बोरवणकर, मंडल रेल प्रबंधक वाराणसी सहित कई वरिष्ठ रेल अधिकारी मौजूद रहेंगे, जबकि मऊ में अपर महाप्रबंधक विनोद कुमार शुक्ल कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे। रेलवे का मानना है कि नई रेल सेवाओं के संचालन से छात्रों, किसानों, व्यापारियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिलेगी तथा क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति प्राप्त होगी।

पटना समेत 14 जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी, 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

पटना बिहार के लोगों को भीषण गर्मी से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विज्ञान केंद्र ने शुक्रवार को राजधानी पटना सहित सूबे के 14 जिलों में तेज आंधी और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान कुछ जिलों में ऑरेंज तो कुछ में येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। हालांकि, राहत की इस बौछार के बावजूद राज्य के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई खास गिरावट दर्ज नहीं होने के आसार हैं। पिछले कुछ दिनों से राज्य का एक बड़ा हिस्सा भीषण गर्मी की चपेट में है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त है। पटना में अधिकतम तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। कुछ जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट मौसम विभाग ने राज्य के विभिन्न हिस्सों के लिए चेतावनी जारी की है। मुंगेर, लखीसराय, बेगूसराय और समस्तीपुर जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश और तेज आंधी को लेकर ऑरेंज व येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा भागलपुर, गया जी, जहानाबाद, जमुई, खगड़िया, नालंदा, नवादा, पटना और शेखपुरा जिलों में भी वज्रपात और तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट रहेगा। चलेंगी 60 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं अलर्ट वाले सभी 14 जिलों में मौसम का मिजाज बेहद आक्रामक हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इन क्षेत्रों में बारिश के दौरान 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। राज्य में दो तरफा मौसम (कहीं उमस भरी धूप तो कहीं अचानक आंधी-पानी) होने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मानसून के प्रवेश की वर्तमान स्थिति 12 जून को आगमन: दक्षिण-पश्चिम मानसून सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, बेगूसराय, लखीसराय, बांका, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर सहित पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और जमुई के कुछ भागों में प्रवेश कर चुका था। छह दिनों से ठहराव: शुरुआती तेजी के बाद पिछले छह दिनों से मानसून की उत्तरी सीमा जमुई और मुजफ्फरपुर के समीप ही रुकी हुई है, जिससे आगे के जिलों में बारिश का इंतजार बढ़ गया है।

शुक्र ग्रह का अश्लेषा नक्षत्र में गोचर, मेष, मिथुन, सिंह और कन्या राशि वालों को रहना होगा सतर्क

3 जून को सुख, सौंदर्य और वैभव के दाता शुक्र ग्रह अश्लेषा नक्षत्र में गोचर (प्रवेश) करेंगे. ज्योतिष शास्त्र में अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध देव हैं, और शुक्र व बुध के बीच मित्रता का भाव होने के बावजूद, कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र का प्रभाव कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. शुक्र का यह नक्षत्र परिवर्तन सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा, लेकिन 4 राशियां ऐसी हैं जिन्हें इस दौरान विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है. आइए जानते हैं किन राशियों को इस गोचर से नुकसान या परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. 1. मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह गोचर मिलाजुला रहेगा, लेकिन अश्लेषा नक्षत्र में जाने से आपको कुछ मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है. पारिवारिक कलह: माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ सकती है. घर में सुख-सुविधाओं की कमी महसूस होगी या घरेलू उपकरणों पर अचानक बड़ा खर्च हो सकता है. कार्यक्षेत्र: ऑफिस में राजनीति का शिकार हो सकते हैं. सहकर्मियों के साथ तालमेल बिगाड़ने से बचें. सावधानी: इस अवधि में वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें. 2. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के धन भाव में यह गोचर होने जा रहा है, जिससे आपकी वाणी और संचित धन प्रभावित होगा. आर्थिक नुकसान: इस दौरान आपको अपनी सुख-सुविधाओं और फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखना होगा, अन्यथा बजट बिगड़ सकता है. निवेश करने के लिए यह समय सही नहीं है, धन फंसने के योग हैं. रिश्तों में खटास: अश्लेषा नक्षत्र के प्रभाव से आपकी वाणी में थोड़ा कड़वापन आ सकता है, जिससे परिवार के सदस्यों या जीवनसाथी के साथ विवाद होने की संभावना है. सावधानी: किसी को भी उधार देने से बचें, वापस मिलने की संभावना कम है. 3. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह गोचर 12वें (व्यय) भाव में होगा, जो खर्चों में बेतहाशा बढ़ोतरी का संकेत दे रहा है. बजट का असंतुलन: भौतिक सुख-साधनों और यात्राओं पर अत्यधिक धन खर्च होगा. न चाहते हुए भी कुछ ऐसे खर्च सामने आएंगे जिससे मानसिक तनाव बढ़ेगा. स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: अनिद्रा, आंखों में दिक्कत या पैरों में दर्द की शिकायत हो सकती है. जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर भी धन खर्च होने के योग हैं. सावधानी: कोर्ट-कचहरी के मामलों से दूर रहें और गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें. 4. कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि के जातकों के लिए अश्लेषा नक्षत्र का यह गोचर आय और लाभ के स्थान पर होगा, लेकिन नक्षत्र स्वामी बुध होने के कारण उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिलेंगे. व्यापार में मंदी: व्यापारियों को इस दौरान बड़ा मुनाफा कमाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. कोई बड़ी डील हाथ से निकल सकती है. मित्रों से अनबन: दोस्तों या बड़े भाई-बहनों के साथ किसी बात को लेकर गलतफहमी पैदा हो सकती है, जिससे आपके बने-बनाए काम बिगड़ सकते हैं. सावधानी: शेयर बाजार या सट्टेबाजी में पैसा लगाने से पूरी तरह बचें, भारी नुकसान हो सकता है. अशुभ प्रभावों से बचने के उपाय शुक्र मंत्र का जाप: प्रतिदिन ओम शुं शुक्राय नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. दान कार्य: शुक्रवार के दिन सफेद वस्तुओं जैसे- चावल, चीनी, दूध या सफेद वस्त्रों का दान करें. मां लक्ष्मी की पूजा: शुक्रवार को देवी लक्ष्मी को मिश्री और खीर का भोग लगाएं. इससे आर्थिक तंगी दूर होती है. इन राशियों को मिलेगा शुभ फल 23 जून को शुक्र का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश जहां कुछ राशियों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है, वहीं 4 राशियां ऐसी भी हैं जिनके लिए यह गोचर बेहद शुभ और भाग्यशाली साबित होने वाला है. बुध के नक्षत्र (अश्लेषा) में शुक्र का आना इन राशियों के लिए धन, करियर और सुख-सुविधाओं के द्वार खोलेगा. आइए जानते हैं किन राशियों के लिए यह समय वरदान साबित होगा, जिसमें वृषभ राशि, कर्क, तुला और मकर राशि शामिल है.